Class 10 Hindi Chapter 8: बालगोबिन भगत

बालगोबिन भगत is Chapter 8 of NCERT / CBSE Class 10 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
  • 2 topics
  • 50 MCQs
  • 14 short answers
  • 6 long answers
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  • Hindi

बेनीपुरी और गृहस्थ साधु बालगोबिन भगत

बालगोबिन भगत खेती करने वाले गृहस्थ हैं, पर उनका आचरण उन्हें सच्चा साधु बनाता है। वे कबीर को अपना साहब मानते हैं, कभी झूठ नहीं बोलते और खेत की उपज पहले मठ में चढ़ाते हैं। हर ऋतु में उनका मधुर गायन पूरे गाँव को झूमने पर मजबूर कर देता है।

What you will be able to do

  • रामवृक्ष बेनीपुरी के जीवन, पत्रकारिता, रचनाओं और कलम का जादूगर कहे जाने के कारण बता सकेंगे।
  • रेखाचित्र विधा की पहचान करते हुए बता सकेंगे कि यह पाठ एक व्यक्ति का शब्द-चित्र कैसे है।
  • बालगोबिन भगत की वेशभूषा, स्वभाव और कबीर के प्रति श्रद्धा का वर्णन कर सकेंगे।
  • समझा सकेंगे कि गृहस्थ होते हुए भी भगत को साधु क्यों माना गया है।
  • आषाढ़, भादो, कार्तिक-माघ और गर्मियों में भगत के गायन के प्रभाव का शब्द-चित्र बना सकेंगे।

Key points

  • रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म सन् 1899 में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के बेनीपुर गाँव में हुआ; बचपन में ही माता-पिता का साथ छूट गया।

  • दसवीं के बाद सन् 1920 में वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े और कई बार जेल गए; सन् 1968 में उनका देहांत हुआ।

  • वे प्रतिभाशाली पत्रकार थे; जनता, बालक, तरुण भारत और किसान मित्र जैसे कई पत्र उनके संपादन में निकले।

  • माटी की मूरतें उनके रेखाचित्र हैं, अंबपाली नाटक है; अनोखी शैली के कारण उन्हें कलम का जादूगर कहा जाता है।

  • बालगोबिन भगत साठ पार के, मध्यम क़द के, गोरे और सफ़ेद बालों वाले व्यक्ति थे; वे बहुत कम कपड़े पहनते थे।

  • उनके माथे पर रामानंदी तिलक, गले में तुलसी की जड़ की माला और सिर पर कबीरपंथी टोपी रहती थी।

  • वे बेटे-बहू, खेत और घर वाले गृहस्थ थे, पर कबीर को साहब मानकर उन्हीं के बताए रास्ते पर चलते थे।

  • वे सच बोलते, खरा व्यवहार रखते, बिना पूछे किसी की चीज़ नहीं छूते और खेत की सारी उपज पहले कबीरपंथी मठ में भेंट करते।

  • आषाढ़ की रोपनी, भादो की आधी रात, कार्तिक से फागुन की प्रभातियाँ और गर्मियों की शाम, हर समय उनका गायन सबको मोह लेता।

Full explanation

रामवृक्ष बेनीपुरी: कलम का जादूगर

रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म सन् 1899 में हुआ। उनका गाँव बेनीपुर बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले में है। बहुत छोटी उम्र में ही उनके माता-पिता चल बसे, इसलिए उनका बचपन ग़रीबी, कठिनाई और संघर्ष में बीता। दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद सन् 1920 में वे देश की आज़ादी के आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ गए। इसके लिए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। सन् 1968 में उनका देहांत हुआ।

पंद्रह साल की उम्र से ही उनकी रचनाएँ पत्रिकाओं में छपने लगी थीं। वे एक बेहद प्रतिभाशाली पत्रकार थे। उन्होंने दैनिक, साप्ताहिक और मासिक, कई तरह के पत्रों का संपादन किया। इनमें नयी धारा, जनवाणी, बालक, तरुण भारत, योगी, किसान मित्र, युवक और जनता के नाम आते हैं। उनका सारा साहित्य आठ खंडों वाली बेनीपुरी रचनावली में छपा है।

बेनीपुरी जी ने गद्य की लगभग हर विधा में लिखा। पतितों के देश में उनका उपन्यास है, चिता के फूल कहानी-संग्रह, अंबपाली नाटक, माटी की मूरतें रेखाचित्र, पैरों में पंख बाँधकर यात्रा-वृत्तांत और ज़ंजीरें और दीवारें संस्मरण। उनकी रचनाओं में आज़ादी की चेतना, मनुष्य की चिंता और इतिहास को नए ढंग से देखने की दृष्टि है। उनकी शैली इतनी अनोखी और असरदार है कि उन्हें कलम का जादूगर कहा जाता है।

रेखाचित्र: शब्दों से बनी तस्वीर

बालगोबिन भगत एक रेखाचित्र है। रेखाचित्र में लेखक किसी व्यक्ति को इस तरह शब्दों में उतारता है कि पढ़ने वाले को वह व्यक्ति सामने खड़ा दिखाई देने लगे। उसकी शक्ल, कपड़े, बोलचाल, आदतें और मन, सब कुछ उभर आता है। जैसे चित्रकार रेखाओं से चित्र बनाता है, वैसे ही लेखक शब्दों से।

इस पाठ में बेनीपुरी जी एक ऐसे अनोखे व्यक्ति का परिचय कराते हैं, जिसमें इंसानियत, गाँव की लोक संस्कृति और साझी चेतना, तीनों एक साथ दिखती हैं। लेखक का मानना है कि कोई व्यक्ति केवल गेरुए कपड़े पहनने या पूजा-पाठ के दिखावे से संन्यासी नहीं बनता। संन्यास का असली आधार है मनुष्य के प्रति करुणा, सच्चाई और त्याग। इसी आधार पर बालगोबिन भगत उन्हें सच्चे संन्यासी लगते हैं।

यह रेखाचित्र समाज की कुछ पुरानी रूढ़ियों पर भी चोट करता है, जिनकी चर्चा आगे होगी। साथ ही इसमें गाँव के जीवन की बहुत सजीव झाँकी है। खेतों में काम करते लोग, बदलते मौसम, भोर का कोहरा और आँगन में जमी भजन-मंडली, सब कुछ पढ़ते हुए आँखों के सामने आ जाता है।

भगत का रूप और वेशभूषा

बालगोबिन भगत न बहुत लंबे थे, न बहुत नाटे; उनका क़द मँझोला था, और रंग खूब गोरा। उम्र साठ से ऊपर रही होगी, और सारे बाल सफ़ेद हो चुके थे। वे लंबी दाढ़ी या जटाएँ नहीं रखते थे, पर सफ़ेद बालों से उनका चेहरा हमेशा चमकता रहता था।

वे बहुत कम कपड़े पहनते थे। कमर पर बस एक छोटी लंगोटी होती, और सिर पर कबीर के अनुयायियों जैसी कान ढकने वाली टोपी। सर्दियों में वे ऊपर से एक काला कंबल, यानी कमली, ओढ़ लेते थे। माथे पर रामानंदी चंदन का तिलक हमेशा चमकता, जो नाक के एक सिरे से शुरू होता था। गले में तुलसी की जड़ों से बनी एक अनगढ़-सी माला होती थी।

यह वर्णन पढ़कर कोई भी सोच सकता है कि भगत कोई साधु-संन्यासी होंगे। पर लेखक तुरंत सावधान करता है कि ऐसा मत समझिए। वे पूरी तरह गृहस्थ थे। उनका एक बेटा और पतोहू थी, थोड़ी खेती थी और एक साफ़-सुथरा घर भी। लेखक को उनकी पत्नी की याद नहीं है। इस तरह लेखक पहले साधु जैसी छवि बनाता है, फिर उसे तोड़कर बताता है कि असली साधुता कहाँ है।

गृहस्थ होकर भी साधु

भगत खेती करते थे और परिवार भी रखते थे, फिर भी वे सच्चे अर्थों में साधु थे। साधु की जितनी भी परिभाषाएँ हैं, वे सब पर खरे उतरते थे। वे कबीर को अपना साहब, यानी स्वामी, मानते थे। उन्हीं के पद गाते और उन्हीं की सीख पर चलते थे।

उनका आचरण बहुत ऊँचा था। वे कभी झूठ नहीं बोलते थे और सबसे खरा, सच्चा व्यवहार करते थे। किसी से भी साफ़-साफ़ बात कहने में उन्हें संकोच नहीं होता था, पर वे बिना वजह किसी से झगड़ा भी नहीं करते थे। वे किसी की चीज़ नहीं छूते थे, और बिना पूछे किसी चीज़ का इस्तेमाल भी नहीं करते थे।

यह नियम वे इतनी बारीकी से निभाते थे कि लोगों को अचरज होता था। मसलन, किसी और की ज़मीन को वे निजी ज़रूरत के लिए भी इस्तेमाल नहीं करते थे। यह छोटी-सी बात दिखाती है कि दूसरों की चीज़ और अधिकार का सम्मान उनके लिए कितना ज़रूरी था। ईमानदारी उनके लिए कोई बड़ा सिद्धांत भर नहीं, बल्कि रोज़ के जीवन की हर छोटी बात में निभाई जाने वाली आदत थी।

सब कुछ साहब का

भगत गृहस्थ थे, पर वे मानते थे कि उनकी हर चीज़ साहब की है। खेत में जो भी अनाज पैदा होता, उसे सिर पर लादकर पहले कबीरपंथी मठ में ले जाते। यह मठ उनके घर से चार कोस, यानी लगभग बारह किलोमीटर दूर था। वहाँ वे उपज भेंट के रूप में चढ़ा देते।

मठ से उन्हें जो कुछ प्रसाद के रूप में लौटाया जाता, बस उसी से वे अपना घर चलाते थे। यानी अपनी मेहनत की कमाई को भी वे अपना नहीं मानते थे। उन्हें जितना मिलता, उसी में संतोष कर लेते। यह त्याग, संतोष और निर्लोभ का बहुत बड़ा उदाहरण है।

यही बात उन्हें सच्चा साधु बनाती है। साधु होने के लिए घर-परिवार छोड़कर जंगल जाना ज़रूरी नहीं। अगर मन लोभ, झूठ और अहंकार से मुक्त है, तो गृहस्थ भी साधु है। भगत की साधुता उनके कपड़ों में नहीं, उनके आचरण में थी।

आषाढ़ की रिमझिम में रोपनी का गीत

लेखक भगत के मधुर गायन पर मुग्ध था। कबीर के सीधे-सादे पद भगत के कंठ से निकलकर जैसे जीवित हो उठते थे। लेखक ने अलग-अलग ऋतुओं में उनके गायन का सुंदर चित्र खींचा है।

आषाढ़ में रिमझिम बारिश होती है, और पूरा गाँव खेतों में उतर आता है। कहीं हल चल रहे हैं, तो कहीं धान की रोपनी हो रही है। पानी भरे खेतों में बच्चे उछल-कूद कर रहे हैं, और औरतें सुबह का नाश्ता लेकर मेड़ों पर बैठी हैं। आकाश बादलों से ढका है, धूप कहीं नहीं, और पूरब से ठंडी हवा चल रही है।

ऐसे में अचानक एक मधुर स्वर कानों में गूँजता है। यह भगत हैं, जो कीचड़ में सने अपने खेत में धान रोप रहे हैं। उनकी उँगलियाँ एक-एक पौधे को कतार में बिठाती जाती हैं, और कंठ एक-एक शब्द को संगीत की सीढ़ियों पर चढ़ाता जाता है। उनके गीत का असर हर किसी पर है। बच्चे झूम उठते हैं और मेड़ पर बैठी औरतें गुनगुनाने लगती हैं। हल चलाने वालों के पैर ताल पकड़ लेते हैं, और रोपनी करने वालों की उँगलियाँ लय में चलने लगती हैं। लेखक पूछता है कि यह संगीत है या जादू!

भादो की आधी रात और भोर की प्रभाती

भादो की अँधेरी आधी रात है। अभी-अभी मूसलधार बारिश थमी है। अब झींगुरों की झनकार और मेंढकों की टर्र-टर्र गूँज रही है। पर इस शोर में भी भगत का संगीत दबता नहीं। उनकी खँजड़ी बज रही है, और वे कबीर का एक पद गा रहे हैं। जब सारा संसार सन्नाटे में सोया है, तब उनका संगीत जाग रहा है और दूसरों को जगा रहा है। उनका गीत मुसाफ़िर से कहता है कि जागो, तुम्हारी गठरी में चोर लगा है। यानी मनुष्य को अपने जीवन के प्रति सजग होना चाहिए।

कार्तिक आते ही भगत की प्रभातियाँ शुरू हो जातीं, जो फागुन तक चलतीं। वे भोर से पहले उठकर गाँव से दो मील दूर नदी नहाने जाते। लौटकर गाँव के बाहर पोखर के ऊँचे किनारे पर खँजड़ी लेकर बैठ जाते और गाने लगते। लेखक देर तक सोने वाला था, पर एक दिन माघ की कड़कड़ाती ठंडी भोर में भगत का संगीत उसे भी पोखर तक खींच ले गया।

उस समय आकाश में तारे अभी टिमटिमा रहे थे, पूरब में हल्की लाली थी और चारों ओर कोहरा छाया था। कुश की चटाई पर पूरब की ओर मुँह करके, काली कमली ओढ़े भगत गा रहे थे। वे गाते-गाते इतने मस्त हो जाते कि लगता, अभी खड़े हो जाएँगे। कमली बार-बार सिर से सरक जाती। लेखक ठंड से काँप रहा था, पर भगत के माथे पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। यह उनकी तल्लीनता का अद्भुत चित्र है।

गर्मियों की संझा: नाचता आँगन

गर्मियों की उमस भरी शाम को भगत की संझा, यानी शाम का भजन, ठंडक भर देती थी। वे अपने घर के आँगन में आसन जमाकर बैठ जाते, और गाँव के उनके कुछ प्रेमी भी आ जुटते। खँजड़ियों और करतालों की भरमार हो जाती।

भगत एक पद गाते, और उनकी मंडली उसे दोहराती, तिहराती। धीरे-धीरे स्वर ऊँचा होता जाता, एक तय ताल और गति के साथ। स्वर जैसे-जैसे चढ़ता, सुनने वालों का मन भी उसके साथ उड़ान भरता। धीरे-धीरे मन शरीर पर हावी हो जाता। फिर एक पल ऐसा आता, जब बीच में खँजड़ी लिए भगत नाच रहे होते, और उनके साथ सबके तन-मन नाचने लगते। पूरा आँगन संगीत और नृत्य से भर उठता।

इन सब चित्रों से पता चलता है कि भगत का संगीत केवल मनोरंजन नहीं था। वह खेती की मेहनत को आसान बनाता, अँधेरी रातों में जागरूकता भरता, भोर में भक्ति जगाता और शाम को पूरे गाँव को एक साथ जोड़ देता। उनका संगीत गाँव की सामूहिक चेतना और लोक संस्कृति का हिस्सा बन गया था।

Concepts and terms

रेखाचित्र

किसी व्यक्ति का ऐसा सजीव शब्द-चित्र, जिसमें उसकी वेशभूषा, स्वभाव और आदतें आँखों के सामने आ जाएँ।

गृहस्थ साधु

जो परिवार, खेती और घर सँभाले, पर मन से सच्चा, निर्लोभी और ईश्वर-भक्त हो। भगत ऐसे ही थे।

कबीरपंथ

संत कबीर के विचारों पर चलने वाला समुदाय। इसके लोग कबीर को साहब कहते हैं और उनके पद गाते हैं।

खरा व्यवहार

बिना छल-कपट का, सीधा और सच्चा व्यवहार। भगत किसी के सामने भी सीधी-साफ़ बात कह देते थे।

लोक संस्कृति

गाँव के आम लोगों के गीत, त्योहार, खेती और रीति-रिवाज़। भगत का संगीत इसी संस्कृति का हिस्सा है।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

मौसमों का एलबम

Safety:

कैंची सावधानी से चलाइए; किसी की किताब से बिना अनुमति चित्र मत काटिए।

What You Notice:

आप पाएँगे कि गाँव का जीवन मौसम के साथ बदलता है, और भगत का संगीत हर बदलाव के साथ अपना नया रंग ले लेता था।

Did you know

रेखाचित्र गद्य की वह विधा है, जिसमें किसी व्यक्ति, स्थान या घटना का ऐसा जीवंत शब्द-चित्र खींचा जाता है, मानो पाठक उसे अपनी आँखों से देख रहा हो।

खँजड़ी ढफली जैसा, पर उससे छोटा एक वाद्य है। इसके एक ओर चमड़ा मढ़ा होता है, और किनारे पर छोटी झाँझें लगी होती हैं।

प्रभाती सुबह-सुबह गाए जाने वाले जागरण-गीत हैं। इनमें सूर्योदय से पहले और बाद के समय का वर्णन होता है, और कई बार वीरता व उत्साह की बातें भी।

Memory tricks

भगत के गायन की चार ऋतुएँ: आ-भा-का-ग — आषाढ़ की रोपनी, भादो की आधी रात, कातिक की प्रभाती, गर्मी की संझा।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म किस ज़िले में हुआ? beginner
  • A दरभंगा
  • B पटना
  • C मुज़फ़्फ़रपुर
  • D भागलपुर
Show answer
Answer: मुज़फ़्फ़रपुर
Why:

बेनीपुर गाँव।

Q2 बेनीपुरी को कलम का जादूगर कहे जाने का कारण क्या है? intermediate
  • A बहुत सुंदर हस्तलिपि और लिखावट
  • B अनोखी, असरदार शैली
  • C जादू के खेल
  • D तेज़ टाइपिंग
Show answer
Answer: अनोखी, असरदार शैली
Why:

शैलीकार।

Q3 बेनीपुरी का बचपन कठिनाइयों में क्यों बीता? beginner
  • A बहुत ज़्यादा धन और ऐशो-आराम
  • B शहर में रहना
  • C बीमारी
  • D माता-पिता का जल्दी निधन
Show answer
Answer: माता-पिता का जल्दी निधन
Why:

अभाव।

Q4 पैरों में पंख बाँधकर किस विधा की रचना है? advanced
  • A यात्रा-वृत्तांत
  • B कहानी
  • C नाटक
  • D लंबी कविता-पुस्तक
Show answer
Answer: यात्रा-वृत्तांत
Why:

बेनीपुरी।

Q5 बालगोबिन भगत पाठ किस गद्य-विधा में है? beginner
  • A आत्मकथा
  • B एकांकी-नाटक
  • C यात्रा-वृत्तांत
  • D रेखाचित्र
Show answer
Answer: रेखाचित्र
Why:

शब्द-चित्र।

Q6 लेखक के अनुसार संन्यास का असली आधार क्या है? intermediate
  • A गेरुए कपड़े और लंबी दाढ़ी-जटाएँ
  • B मानवीय सरोकार
  • C मंदिर में रहना
  • D भीख माँगना
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Answer: मानवीय सरोकार
Why:

वेश नहीं।

Q7 भगत की वेशभूषा का वर्णन करके लेखक तुरंत क्या स्पष्ट करता है? intermediate
  • A वे जंगल में रहने वाले संन्यासी थे
  • B वे राजा थे
  • C वे गृहस्थ थे
  • D वे व्यापारी थे
Show answer
Answer: वे गृहस्थ थे
Why:

छवि का मोड़।

Q8 भगत किसी के सामने भी साफ़ और सीधी बात कह देते थे। इससे उनका कौन-सा गुण पता चलता है? intermediate
  • A स्पष्टवादिता
  • B चापलूसी और मीठी बातें बनाना
  • C डरपोकपन
  • D चालाकी
Show answer
Answer: स्पष्टवादिता
Why:

खरा व्यवहार।

Q9 पराई ज़मीन को निजी ज़रूरत तक के लिए काम में न लेना भगत के किस नियम की बारीकी है? advanced
  • A खेती के नए वैज्ञानिक तरीक़े
  • B दूसरे की चीज़ का सम्मान
  • C सफ़ाई का डर
  • D आलस्य
Show answer
Answer: दूसरे की चीज़ का सम्मान
Why:

बिना पूछे नहीं।

Q10 भगत खेत की उपज पहले कहाँ ले जाते थे? beginner
  • A गाँव का बाज़ार
  • B ज़मींदार का घर
  • C शहर की मंडी
  • D कबीरपंथी मठ
Show answer
Answer: कबीरपंथी मठ
Why:

साहब का दरबार।

Q11 मठ से लौटे प्रसाद से ही घर चलाना भगत के किस गुण को दिखाता है? intermediate
  • A कंजूसी और धन जमा करना
  • B आलस्य
  • C संतोष और निर्लोभ
  • D घमंड
Show answer
Answer: संतोष और निर्लोभ
Why:

सब साहब का।

Q12 लेखक भगत के किस गुण पर सबसे ज़्यादा मुग्ध था? beginner
  • A मधुर गायन
  • B खेती करने की कला
  • C उनके कपड़े
  • D उनका घर
Show answer
Answer: मधुर गायन
Why:

कबीर के पद।

Q13 आषाढ़ में गाँव का माहौल उल्लास से क्यों भर जाता है? intermediate
  • A इसी महीने में सारी फ़सल पककर कट जाती है
  • B मेले लगते हैं
  • C स्कूल बंद होते हैं
  • D बारिश के साथ रोपनी शुरू होती है
Show answer
Answer: बारिश के साथ रोपनी शुरू होती है
Why:

खेत में उतरा गाँव।

Q14 रोपनी के समय भगत के गीत का हलवाहों पर क्या असर होता है? intermediate
  • A वे थककर काम पूरी तरह रोक देते हैं
  • B वे घर लौट जाते हैं
  • C उनके पैर ताल पर उठने लगते हैं
  • D वे सो जाते हैं
Show answer
Answer: उनके पैर ताल पर उठने लगते हैं
Why:

संगीत या जादू।

Q15 भगत की आवाज़ हर शब्द को सुरों की सीढ़ी पर ऊपर ले जाती थी, इस कल्पना का अर्थ क्या है? advanced
  • A भगत सीढ़ी पर चढ़कर ऊँची आवाज़ में गाते हैं
  • B शब्द सुरीले होकर ऊपर उठते हैं
  • C शब्द बिगड़ जाते हैं
  • D गीत रुक जाता है
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Answer: शब्द सुरीले होकर ऊपर उठते हैं
Why:

स्वर की सीढ़ी।

Q16 भादो की आधी रात में भगत का संगीत सोए संसार में क्या करता है? intermediate
  • A जागता और जगाता है
  • B सबको और भी गहरी नींद सुला देता है
  • C डराता है
  • D चुप रहता है
Show answer
Answer: जागता और जगाता है
Why:

मुसाफ़िर जाग।

Q17 गठरी में चोर लगने वाला पद मनुष्य को किस बात के लिए सचेत करता है? advanced
  • A अपने सामान को ताले में बंद रखना
  • B जीवन के प्रति सजगता
  • C पुलिस बुलाना
  • D यात्रा न करना
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Answer: जीवन के प्रति सजगता
Why:

कबीर का संदेश।

Q18 माघ की ठंडी भोर में भी भगत के माथे पर पसीना क्यों चमकता था? advanced
  • A धूप बहुत तेज़ और गरम थी
  • B वे बीमार थे
  • C वे दौड़कर आए थे
  • D गायन में गहरी तल्लीनता से
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Answer: गायन में गहरी तल्लीनता से
Why:

मस्ती।

Q19 कुहासा का अर्थ है ______। beginner
  • A कोहरा
  • B धूप
  • C बारिश
  • D आँधी
Show answer
Answer: कोहरा
Why:

भोर।

Q20 कलेवा का अर्थ है ______। beginner
  • A रात का भारी भोजन
  • B पानी
  • C सुबह का नाश्ता
  • D मिठाई
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Answer: सुबह का नाश्ता
Why:

मेड़ पर।

Q21 गर्मियों की शाम भगत की संझा का क्या असर होता था? intermediate
  • A उमस भरी शाम शीतल लगती
  • B गर्मी और बेचैनी पहले से बढ़ जाती
  • C लोग सो जाते
  • D झगड़े होते
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Answer: उमस भरी शाम शीतल लगती
Why:

आँगन में भजन।

Q22 संझा में मन तन पर हावी होने का क्या अर्थ है? advanced
  • A शरीर का बहुत थक जाना और बीमार पड़ना
  • B भक्ति में शरीर की सुध न रहना
  • C नींद आना
  • D भूख लगना
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Answer: भक्ति में शरीर की सुध न रहना
Why:

नृत्यशील।

Q23 भगत का संगीत गाँव के लिए क्या था? intermediate
  • A केवल उनका निजी, अकेला शौक़
  • B शोर
  • C व्यापार
  • D सामूहिक चेतना का हिस्सा
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Answer: सामूहिक चेतना का हिस्सा
Why:

लोक संस्कृति।

Q24 अभिकथन: बालगोबिन भगत गृहस्थ होकर भी साधु कहलाते थे। कारण: उनका आचरण सच, संतोष, निर्लोभ और कबीर के प्रति श्रद्धा से भरा था। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

आचरण।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. बेनीपुरी ने कई पत्रों का संपादन किया। II. बालगोबिन भगत लंबी दाढ़ी और जटाएँ रखते थे। III. भगत कबीर को साहब मानते थे। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

दाढ़ी-जटा नहीं।

Important short questions (7)

बेनीपुरी के जीवन में आज़ादी के आंदोलन की क्या भूमिका रही?

दसवीं तक पढ़ने के बाद सन् 1920 में बेनीपुरी जी आज़ादी के आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ गए। इसके लिए उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उनकी रचनाओं में भी स्वाधीनता की चेतना साफ़ दिखती है।

रेखाचित्र विधा की दो विशेषताएँ लिखिए।

रेखाचित्र में किसी व्यक्ति का ऐसा सजीव वर्णन होता है कि वह पाठक की आँखों के सामने उभर आए। इसमें उसकी वेशभूषा, स्वभाव और आदतों के साथ उसके मन की झलक भी मिलती है।

बालगोबिन भगत की वेशभूषा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

भगत कमर पर छोटी लंगोटी और सिर पर कबीरपंथी टोपी पहनते थे। सर्दियों में काली कमली ओढ़ते थे। माथे पर रामानंदी चंदन का तिलक और गले में तुलसी की जड़ों की माला रहती थी।

भगत की कबीर पर श्रद्धा किन रूपों में दिखती है?

वे कबीर को अपना साहब मानते थे, उन्हीं के पद गाते और उन्हीं की सीख पर चलते थे। खेत की उपज पहले कबीरपंथी मठ में चढ़ाते और लौटे प्रसाद से घर चलाते थे। उनकी वेशभूषा भी कबीरपंथी थी।

भगत की ईमानदारी के नियम पर लोगों को कुतूहल क्यों होता था?

भगत बिना पूछे किसी की चीज़ नहीं छूते थे। यह नियम वे इतनी बारीकी से निभाते थे कि पराई ज़मीन को निजी ज़रूरत तक के लिए काम में नहीं लेते थे। इतनी बारीक ईमानदारी देखकर लोगों को अचरज होता था।

आषाढ़ में धान की रोपाई के समय गाँव के माहौल का वर्णन कीजिए।

आषाढ़ की रिमझिम में पूरा गाँव खेतों में उतर आता है। कहीं हल चलते हैं, कहीं रोपनी होती है। बच्चे पानी भरे खेतों में उछलते हैं, औरतें नाश्ता लेकर मेड़ पर बैठती हैं, और ठंडी पुरवाई चलती है।

माघ की भोर में लेखक भगत के पास क्यों पहुँचा?

लेखक देर तक सोने वाला था, पर भगत का मधुर संगीत उसे माघ की कड़कड़ाती ठंडी भोर में भी पोखर तक खींच ले गया। यह भगत के संगीत के जादू का प्रमाण है।

Long answer questions (3)

खेतीबारी करने वाले गृहस्थ बालगोबिन भगत को किन गुणों के कारण साधु माना गया? विस्तार से लिखिए।

बालगोबिन भगत के पास बेटा, पतोहू, खेत और घर था, यानी वे पूरी तरह गृहस्थ थे। फिर भी उनका आचरण उन्हें साधु की हर कसौटी पर खरा साबित करता था। पहला गुण था सच्चाई। वे कभी झूठ नहीं बोलते थे और सबसे खरा व्यवहार करते थे। किसी से भी साफ़ बात कहने में नहीं हिचकते, पर बेवजह झगड़ा भी नहीं करते थे। दूसरा गुण था ईमानदारी। वे बिना पूछे किसी की चीज़ नहीं छूते थे, यहाँ तक कि पराए खेत को निजी ज़रूरत के लिए भी काम में नहीं लेते थे। तीसरा गुण था त्याग और संतोष। वे खेत की सारी उपज पहले कबीरपंथी मठ में चढ़ाते और लौटे प्रसाद से ही गुज़ारा करते। चौथा गुण था भक्ति। वे कबीर को साहब मानकर उन्हीं के पद गाते और उन्हीं की सीख पर चलते। इन गुणों से साफ़ है कि साधुता वेश से नहीं, आचरण से आती है।

बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ अलग-अलग ऋतुओं के उदाहरण से समझाइए।

भगत का गायन इतना मधुर था कि कबीर के सीधे पद उनके कंठ से जीवित हो उठते थे। आषाढ़ की रोपनी में जब वे कीचड़ में धान रोपते हुए गाते, तो बच्चे झूम उठते और औरतें गुनगुनाने लगतीं। हलवाहों के पैर ताल पकड़ लेते और रोपनी करने वालों की उँगलियाँ लय में चलतीं। भादो की अँधेरी आधी रात में भी झींगुरों और मेंढकों का शोर उनके संगीत को दबा नहीं पाता। कार्तिक से फागुन तक वे भोर में नदी नहाकर पोखर के किनारे प्रभातियाँ गाते। माघ की कड़ाके की ठंड में भी गाते-गाते उनके माथे पर पसीना आ जाता। गर्मियों की उमस भरी शाम को आँगन में उनकी संझा मंडली के साथ जमती। धीरे-धीरे स्वर ऊँचा होता, और अंत में भगत के साथ सबके तन-मन नाचने लगते। इस तरह उनका गायन तल्लीन, असरदार और पूरे गाँव को जोड़ने वाला था।

क्या साधु की पहचान उसके पहनावे से करनी चाहिए? किन आधारों पर किसी व्यक्ति को साधु माना जाना चाहिए?

मेरे विचार से साधु की पहचान पहनावे से नहीं करनी चाहिए। गेरुए कपड़े, लंबी दाढ़ी या माथे पर तिलक कोई भी लगा सकता है। बालगोबिन भगत का उदाहरण बताता है कि साधुता आचरण में होती है। उनका पहनावा साधु जैसा था, पर लेखक ने साफ़ कहा कि उन्हें इसी से साधु न माना जाए। वे साधु इसलिए थे, क्योंकि वे सच बोलते, ईमानदार थे, संतोषी थे और ईश्वर-भक्ति में लीन रहते थे। मेरी नज़र में साधु वह है, जो सच बोले और दूसरों का हक़ न मारे। वह लालच और अहंकार से दूर रहे और कमज़ोरों पर करुणा रखे। ऐसा व्यक्ति चाहे गृहस्थ हो या संन्यासी, वही सच्चा साधु है।

Flashcards (17)

बेनीपुरी का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सन् 1899 में, बेनीपुर गाँव, मुज़फ़्फ़रपुर।
बेनीपुरी कब आज़ादी के आंदोलन से जुड़े?
सन् 1920 में।
बेनीपुरी का देहांत कब हुआ?
सन् 1968 में।
बेनीपुरी को कलम का जादूगर क्यों कहा जाता है?
उनकी अनोखी, असरदार शैली के कारण।
माटी की मूरतें किस विधा में है?
रेखाचित्र।
अंबपाली किस विधा की रचना है?
नाटक।
बेनीपुरी रचनावली कितने खंडों में है?
आठ खंडों में।
भगत की उम्र कितनी रही होगी?
साठ से ऊपर।
भगत सर्दियों में क्या ओढ़ते थे?
काली कमली।
भगत के गले में कैसी माला थी?
तुलसी की जड़ों की।
भगत किसे साहब मानते थे?
कबीर को।
कबीरपंथी मठ भगत के घर से कितनी दूर था?
चार कोस।
भगत घर कैसे चलाते थे?
मठ से मिले प्रसाद से।
रोपनी का अर्थ?
धान की रोपाई।
पुरवाई का अर्थ?
पूरब से बहने वाली हवा।
भगत प्रभातियाँ कब से कब तक गाते थे?
कार्तिक से फागुन तक।
खँजड़ी क्या है?
ढफली जैसा छोटा वाद्य।

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  • शब्द और अर्थ
  • गृहस्थ या साधु वाला पक्ष?
  • सही या भ्रम
  • पाठ का क्रम
  • झटपट उत्तर

मृत्यु पर विश्वास और रूढ़ियों से आगे भगत

इकलौते बेटे की मृत्यु पर भगत रोते नहीं, बल्कि गाते हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि आत्मा परमात्मा से मिल गई। वे पतोहू से ही बेटे को अग्नि दिलवाते हैं और उसका दूसरा विवाह करने को कहते हैं। अपने अंतिम दिनों तक वे नियम निभाते हुए शांति से विदा होते हैं।

What you will be able to do

  • बेटे की मृत्यु पर भगत के व्यवहार और उसके पीछे छिपे विश्वास को समझा सकेंगे।
  • पतोहू से अग्नि दिलवाने और उसके पुनर्विवाह जैसे फ़ैसलों में सामाजिक रूढ़ियों के विरोध को पहचान सकेंगे।
  • मोह और प्रेम के अंतर को भगत के जीवन की घटनाओं के आधार पर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • गंगा-स्नान की यात्रा और भगत की मृत्यु के प्रसंग से उनके नियमों और स्वाभिमान को समझा सकेंगे।
  • पाठ में आए क्रियाविशेषण पहचानकर उनके भेद बता सकेंगे।

Key points

  • भगत का इकलौता बेटा कुछ सुस्त और कमज़ोर बुद्धि का था, इसलिए भगत उसे और भी ज़्यादा प्यार करते थे।

  • भगत मानते थे कि ऐसे लोगों को ज़्यादा देखभाल और प्रेम मिलना चाहिए, क्योंकि उन्हें इसकी ज़्यादा ज़रूरत होती है।

  • बेटे की मृत्यु पर भगत ने उसे आँगन में सफ़ेद कपड़े से ढककर फूल और तुलसी-दल बिखेरे और सिरहाने दीया जलाया।

  • वे शव के पास बैठकर गाते रहे और रोती पतोहू से उत्सव मनाने को कहा, क्योंकि आत्मा परमात्मा से मिल गई थी।

  • भगत ने बेटे को पतोहू से अग्नि दिलवाई, जो उस समय की सामाजिक परंपरा के विरुद्ध था।

  • श्राद्ध के बाद उन्होंने पतोहू के भाई को बुलाकर कहा कि इसका दूसरा विवाह कर देना; उस समय विधवा-विवाह आम बात नहीं थी।

  • पतोहू ने भगत की सेवा के लिए रुकना चाहा, पर भगत अटल रहे और बोले कि तू न गई, तो मैं ही घर छोड़ दूँगा।

  • भगत हर साल पैदल लगभग तीस कोस दूर गंगा-स्नान को जाते, घर से खाकर निकलते और लौटकर ही खाते; रास्ते में किसी से कुछ नहीं माँगते।

  • अंतिम दिनों में बीमार होकर भी वे नियम नहीं छोड़ते थे; एक भोर लोगों ने उनका गीत नहीं सुना, और पाया कि भगत नहीं रहे।

Full explanation

इकलौता बेटा और भगत का प्रेम

लेखक कहता है कि भगत की संगीत-साधना का सबसे ऊँचा रूप उस दिन दिखा, जिस दिन उनका बेटा मरा। वह उनका इकलौता बेटा था। वह थोड़ा सुस्त और कम समझ वाला था। आम तौर पर लोग ऐसे बच्चों को कम महत्त्व देते हैं, पर भगत उसे और भी ज़्यादा प्यार करते थे।

भगत की सोच बहुत मानवीय थी। उनका मानना था कि जो लोग कमज़ोर हैं, उन्हीं पर ज़्यादा ध्यान और प्यार देना चाहिए, क्योंकि उन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। यह सोच आज के समय में भी बहुत ज़रूरी है। हम अक्सर तेज़, सफल और सुंदर लोगों की तारीफ़ करते हैं, पर जिन्हें सहारे की ज़रूरत है, उन्हें भूल जाते हैं।

भगत ने बड़े चाव से बेटे की शादी करवाई थी। पतोहू बहुत सुंदर, सुशील और समझदार निकली। उसने घर की सारी ज़िम्मेदारी अपने हाथ में ले ली, जिससे भगत को दुनियादारी की बहुत-सी चिंताओं से छुट्टी मिल गई। यानी पतोहू घर की सच्ची प्रबंधिका बन गई थी।

बेटे की मृत्यु: शोक नहीं, गीत

बेटा बीमार रहता था, पर गाँव वालों के पास उसकी ख़बर लेने की फ़ुर्सत कहाँ थी। लेखक व्यंग्य से कहता है कि मृत्यु तो सबका ध्यान अपनी ओर खींच ही लेती है। जब ख़बर फैली कि भगत का बेटा नहीं रहा, तो लेखक भी जिज्ञासा से उनके घर पहुँचा। वहाँ जो दृश्य उसने देखा, उससे वह हैरान रह गया।

भगत ने बेटे के शरीर को आँगन में एक चटाई पर लिटाकर सफ़ेद कपड़े से ढक दिया था। जो फूल वे हमेशा लगाते रहते थे, उनमें से कुछ तोड़कर और तुलसी के पत्ते उस पर बिखेर दिए थे। सिरहाने एक दीया जल रहा था। और भगत उसके सामने ज़मीन पर आसन जमाकर गा रहे थे, उसी पुरानी लगन और उसी पुराने स्वर में।

घर के भीतर पतोहू रो रही थी, और गाँव की औरतें उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थीं। पर भगत गाते रहे। बीच-बीच में वे पतोहू के पास जाकर उससे कहते कि रोओ मत, उत्सव मनाओ। उनके अनुसार आत्मा परमात्मा के पास चली गई है, बिछड़ी हुई विरहिणी अपने प्रियतम से जा मिली है। इससे बढ़कर आनंद की बात क्या हो सकती है?

पागलपन या चरम विश्वास?

लेखक को एक पल के लिए लगा कि कहीं भगत पागल तो नहीं हो गए। इकलौते बेटे की मृत्यु पर कोई कैसे गा सकता है? पर फिर उसने समझा कि यह पागलपन नहीं, बल्कि उनका गहरा विश्वास बोल रहा है। वह विश्वास, जो हमेशा से मृत्यु पर विजय पाता आया है।

भगत कबीर के अनुयायी थे। कबीर मानते थे कि शरीर नश्वर है, पर आत्मा अमर है। आत्मा परमात्मा का अंश है और मृत्यु के बाद उसी में मिल जाती है। इसलिए मृत्यु दुख का नहीं, मिलन का क्षण है। भगत ने इस विश्वास को केवल गाया नहीं, बल्कि अपने सबसे बड़े दुख के समय उसे जीकर दिखाया।

इसका यह अर्थ नहीं कि भगत को दुख नहीं था। वे बेटे को बहुत प्यार करते थे। पर उनका विश्वास उनके दुख से बड़ा था। उन्होंने अपने दुख को रोने में नहीं, भक्ति के गीत में बदल दिया। लेखक इसी को उनकी संगीत-साधना का चरम उत्कर्ष कहता है।

पतोहू से अग्नि: पहली रूढ़ि टूटी

भगत ने बेटे के अंतिम संस्कार में कोई ज़्यादा तामझाम नहीं किया। पर उन्होंने एक बड़ा फ़ैसला लिया। उन्होंने बेटे को अग्नि पतोहू से ही दिलवाई। उस समय समाज में यह माना जाता था कि अंतिम संस्कार में अग्नि केवल परिवार का कोई पुरुष ही दे सकता है। स्त्री का श्मशान जाना भी ठीक नहीं माना जाता था।

भगत ने इस रूढ़ि को तोड़ दिया। उनके लिए स्त्री और पुरुष में कोई भेद नहीं था। पतोहू बेटे की जीवन-साथी थी, इसलिए उसे ही यह अधिकार सबसे पहले था। इससे पता चलता है कि भगत अपने समय से बहुत आगे की सोच रखते थे। वे धर्म को रूढ़ियों में नहीं, मानवीय मूल्यों में देखते थे।

पतोहू का दूसरा विवाह: दूसरी रूढ़ि टूटी

श्राद्ध की अवधि पूरी होते ही भगत ने पतोहू के भाई को बुलाया। उन्होंने उसे आदेश दिया कि पतोहू को अपने साथ ले जाए और उसका दूसरा विवाह कर दे। उस समय विधवा स्त्री का दोबारा विवाह समाज में बहुत बुरा माना जाता था। विधवाओं को जीवन भर ससुराल में दुख और उपेक्षा में रहना पड़ता था।

पतोहू यह सुनकर रो पड़ी। उसने कहा कि अगर वह चली गई, तो बुढ़ापे में भगत के लिए खाना कौन बनाएगा? बीमार पड़ने पर उन्हें पानी कौन देगा? उसने भगत के पैर पकड़कर विनती की कि उसे अपने से अलग न करें। यह पतोहू के सेवा-भाव और ससुर के प्रति उसके प्रेम को दिखाता है।

पर भगत का फ़ैसला अटल था। उन्होंने कहा कि अगर वह नहीं जाएगी, तो वे ख़ुद घर छोड़कर चले जाएँगे। इस बात के आगे पतोहू कुछ नहीं कह सकी। भगत जानते थे कि पतोहू अभी जवान है, उसका पूरा जीवन आगे पड़ा है। उसे अपने बुढ़ापे की सेवा के लिए रोक लेना स्वार्थ होता। इसलिए उन्होंने अपने सुख से ऊपर पतोहू के भविष्य को रखा।

मोह और प्रेम का अंतर

भगत की यह घटना मोह और प्रेम का अंतर बहुत साफ़ दिखाती है। मोह में हम किसी को अपने पास बाँधकर रखना चाहते हैं, अपने सुख और ज़रूरत के लिए। अगर भगत में मोह होता, तो वे पतोहू को अपनी सेवा के लिए रोक लेते। आख़िर वही उनका एकमात्र सहारा थी।

पर भगत में मोह नहीं, सच्चा प्रेम था। प्रेम में दूसरे का भला सबसे ऊपर होता है। भगत ने पतोहू की ख़ुशी और भविष्य के लिए उसे ख़ुद से दूर भेज दिया, यह जानते हुए भी कि उनका बुढ़ापा अकेले कटेगा। यही प्रेम की सबसे ऊँची पहचान है: वह बाँधता नहीं, मुक्त करता है।

बेटे की मृत्यु पर भी यही बात लागू होती है। मोह होता, तो वे बेटे के जाने पर टूट जाते। पर उनका प्रेम इतना बड़ा था कि वे मानते थे कि बेटा अपने असली घर, परमात्मा के पास चला गया है। इस तरह भगत का पूरा जीवन मोह से ऊपर उठे हुए प्रेम का उदाहरण है।

गंगा-स्नान की यात्रा और भगत का अंत

भगत हर साल गंगा-स्नान करने जाते थे। पर उनकी आस्था स्नान से ज़्यादा संतों से मिलने और लोगों को देखने-समझने में थी। गंगा उनके घर से लगभग तीस कोस दूर थी, और वे पैदल ही जाते थे। उनका सिद्धांत था कि साधु को रास्ते का सहारा, यानी संबल, नहीं लेना चाहिए, और गृहस्थ को किसी से भीख नहीं माँगनी चाहिए।

इसलिए वे घर से खाकर निकलते और फिर घर लौटकर ही खाते। रास्ते भर खँजड़ी बजाते, गाते और जहाँ प्यास लगती, पानी पी लेते। आने-जाने में चार-पाँच दिन लगते, पर इस लंबे उपवास में भी उनकी मस्ती वैसी ही रहती। बुढ़ापा आ गया था, पर उनकी टेक, यानी ज़िद और लगन, जवानी जैसी ही थी।

एक बार लौटे, तो तबीयत ढीली थी। हल्का बुख़ार रहने लगा। पर उन्होंने अपने नियम नहीं छोड़े: दोनों समय गाना, नहाना-ध्यान और खेती देखना, सब चलता रहा। लोगों ने आराम करने को कहा, पर वे हँसकर टाल देते। धीरे-धीरे शरीर कमज़ोर होता गया। एक शाम उन्होंने गाया, पर ऐसा लगा जैसे माला का धागा टूट गया हो और दाने बिखर गए हों। अगली भोर लोगों को उनका गीत सुनाई नहीं दिया। जाकर देखा, तो भगत नहीं रहे थे। उनकी मृत्यु भी उनके जीवन की तरह ही, नियम और भक्ति में डूबी हुई थी।

Concepts and terms

रूढ़ि

समाज में लंबे समय से चली आ रही ऐसी परंपरा, जिसे बिना सोचे मान लिया जाता है। भगत ने कई रूढ़ियाँ तोड़ीं।

मोह

किसी से ऐसा लगाव, जिसमें हम उसे अपने पास बाँधे रखना चाहें, चाहे उसका भला हो या नहीं।

प्रेम

ऐसा लगाव, जिसमें दूसरे का भला सबसे ऊपर हो, चाहे उसके लिए उसे ख़ुद से दूर ही क्यों न करना पड़े।

आत्मा-परमात्मा

संत-परंपरा का विश्वास कि हर जीव की आत्मा परमात्मा का अंश है और मृत्यु पर उसी से मिल जाती है।

संबल

सहारा या यात्रा का ख़र्च। भगत मानते थे कि साधु को संबल नहीं लेना चाहिए और गृहस्थ को भीख नहीं माँगनी चाहिए।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

मीनाक्षी के पति की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वह केवल पच्चीस साल की थी और ससुराल में बूढ़ी सास के साथ रहती थी। रिश्तेदार कहते थे कि अब उसे जीवन भर सास की सेवा में ही रहना चाहिए।

पर उसकी सास कमला देवी ने सबको चौंका दिया। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी पढ़ी-लिखी है, वह आगे पढ़ाई करे, नौकरी करे और चाहे, तो दोबारा विवाह भी करे। उन्होंने मीनाक्षी का बी.एड. में दाख़िला करवाया।

मीनाक्षी रोकर बोली कि आपको अकेला छोड़कर कैसे जाऊँ? कमला देवी मुसकराईं और बोलीं कि तुम्हारा सुख ही मेरी सबसे बड़ी सेवा है।

Activity:

अपने परिवार या पड़ोस के किसी बुज़ुर्ग से बात कीजिए कि उनके समय में विधवा स्त्रियों का जीवन कैसा था, और आज क्या बदला है। पाँच बिंदुओं में अपनी बातचीत लिखिए।

Analysis:

समाज की रूढ़ियाँ तभी बदलती हैं, जब परिवार के लोग साहस से सही फ़ैसले लेते हैं। भगत और कमला देवी जैसे लोग दिखाते हैं कि प्रेम का असली रूप दूसरे को आज़ादी देना है।

Did you know

पुराने समय में अंतिम संस्कार में अग्नि देने का काम परिवार के पुरुष ही करते थे। भगत ने पतोहू से अग्नि दिलवाकर इस परंपरा को तोड़ा।

भारत में विधवा पुनर्विवाह को क़ानूनी मान्यता सन् 1856 में मिली, पर समाज में इसे बहुत बाद तक अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता था।

क्रियाविशेषण वे शब्द हैं, जो क्रिया की विशेषता बताते हैं, जैसे धीरे-धीरे, हमेशा, ऊपर, बहुत। इनके चार मुख्य भेद हैं: रीतिवाचक, कालवाचक, स्थानवाचक और परिमाणवाचक।

Memory tricks

भगत के तीन क्रांतिकारी फ़ैसले: गा-अ-वि — गाकर शोक, पतोहू से अग्नि, पतोहू का विवाह।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 भगत अपने सुस्त बेटे को और भी ज़्यादा प्यार क्यों करते थे? intermediate
  • A वह गाँव का सबसे होशियार लड़का था
  • B उसे ज़्यादा देखभाल चाहिए थी
  • C वह बहुत धनी था
  • D वह गाता था
Show answer
Answer: उसे ज़्यादा देखभाल चाहिए थी
Why:

कमज़ोर को प्रेम।

Q2 पतोहू के आने से भगत को क्या राहत मिली? beginner
  • A घर की चिंताओं से छुट्टी
  • B खेती से होने वाली कमाई दोगुनी हो गई
  • C गाना छूट गया
  • D बेटा ठीक हो गया
Show answer
Answer: घर की चिंताओं से छुट्टी
Why:

प्रबंधिका।

Q3 बेटे की बीमारी पर गाँव वालों का ध्यान न देना लेखक के किस भाव को दिखाता है? advanced
  • A गाँव वालों के प्रति गहरी प्रशंसा
  • B डर
  • C ख़ुशी
  • D समाज की उदासीनता पर व्यंग्य
Show answer
Answer: समाज की उदासीनता पर व्यंग्य
Why:

मौत ध्यान खींचती है।

Q4 बेटे के शव के सिरहाने क्या रखा था? beginner
  • A खँजड़ी
  • B पानी का घड़ा
  • C जलता दीया
  • D किताब
Show answer
Answer: जलता दीया
Why:

चिराग।

Q5 बेटे की मृत्यु पर भगत ने अपनी भावनाएँ किस रूप में व्यक्त कीं? beginner
  • A ज़ोर-ज़ोर से रोकर और छाती पीटकर
  • B चुप रहकर
  • C घर छोड़कर
  • D भक्ति के गीत गाकर
Show answer
Answer: भक्ति के गीत गाकर
Why:

वही पुराना स्वर।

Q6 भगत पतोहू से उत्सव मनाने को क्यों कहते थे? intermediate
  • A बेटे से घर का बोझ हट गया था
  • B शादी का दिन था
  • C आत्मा परमात्मा से मिल गई थी
  • D त्योहार था
Show answer
Answer: आत्मा परमात्मा से मिल गई थी
Why:

मिलन।

Q7 विरहिनी अपने प्रेमी से जा मिली, यहाँ विरहिनी किसका प्रतीक है? advanced
  • A पतोहू
  • B आत्मा
  • C गंगा
  • D खँजड़ी
Show answer
Answer: आत्मा
Why:

कबीर की परंपरा।

Q8 लेखक को पहले भगत पागल क्यों लगे? intermediate
  • A वे बेटे की मृत्यु पर गा रहे थे
  • B वे खेत में नंगे पैर काम करते थे
  • C वे नदी नहाते थे
  • D वे कबीर को मानते थे
Show answer
Answer: वे बेटे की मृत्यु पर गा रहे थे
Why:

असामान्य व्यवहार।

Q9 भगत के व्यवहार को लेखक ने अंत में क्या माना? intermediate
  • A पागलपन
  • B चरम विश्वास
  • C नाटक
  • D मन की गहरी कठोरता
Show answer
Answer: चरम विश्वास
Why:

मृत्यु पर विजय।

Q10 पतोहू से अग्नि दिलवाकर भगत ने किस मान्यता को तोड़ा? intermediate
  • A बेटे का श्राद्ध बिल्कुल नहीं करना चाहिए
  • B गंगा-स्नान ज़रूरी है
  • C अग्नि केवल पुरुष देंगे
  • D गाना मना है
Show answer
Answer: अग्नि केवल पुरुष देंगे
Why:

स्त्री-पुरुष भेद।

Q11 पतोहू के दूसरे विवाह का आदेश भगत की कैसी सोच दिखाता है? beginner
  • A पुरानी, रूढ़िवादी
  • B स्वार्थी
  • C डरपोक
  • D प्रगतिशील
Show answer
Answer: प्रगतिशील
Why:

विधवा-विवाह।

Q12 पतोहू रुकना क्यों चाहती थी? beginner
  • A ससुर की सेवा के लिए
  • B उसे अपने मायके से बहुत डर लगता था
  • C उसे खेत चाहिए थे
  • D उसे गाना सीखना था
Show answer
Answer: ससुर की सेवा के लिए
Why:

भोजन, पानी कौन देगा।

Q13 तू जा, नहीं तो मैं ही घर छोड़ दूँगा, इस दलील से भगत का कौन-सा गुण सामने आता है? intermediate
  • A ग़ुस्सा और कठोर अहंकार
  • B डर
  • C लालच
  • D दृढ़ निश्चय
Show answer
Answer: दृढ़ निश्चय
Why:

अटल।

Q14 पतोहू को अपनी सेवा के लिए रोक लेना भगत के लिए क्या होता? intermediate
  • A त्याग
  • B प्रेम
  • C स्वार्थ
  • D धर्म
Show answer
Answer: स्वार्थ
Why:

मोह।

Q15 मोह और प्रेम का अंतर भगत के जीवन की किस घटना से सबसे साफ़ होता है? advanced
  • A हर साल पैदल गंगा-स्नान के लिए जाना
  • B पतोहू को विवाह के लिए भेजना
  • C प्रभाती गाना
  • D खेत में रोपनी
Show answer
Answer: पतोहू को विवाह के लिए भेजना
Why:

मुक्त करना।

Q16 भगत गंगा-स्नान से ज़्यादा किस पर आस्था रखते थे? intermediate
  • A संतों से मिलने पर
  • B गंगाजल को घर लाकर बेचने पर
  • C मेले की ख़रीदारी पर
  • D नाव की सैर पर
Show answer
Answer: संतों से मिलने पर
Why:

संत-समागम।

Q17 साधु को संबल नहीं लेना चाहिए, इस सोच में भगत का कौन-सा मूल्य दिखता है? intermediate
  • A दूसरों से माँगकर काम चलाना
  • B आत्मनिर्भरता
  • C आलस्य
  • D दिखावा
Show answer
Answer: आत्मनिर्भरता
Why:

भीख नहीं।

Q18 बुढ़ापे में भी टेक वही जवानी वाली, इसका अर्थ क्या है? intermediate
  • A जवानी की तरह शरीर पूरी तरह मज़बूत था
  • B बाल काले थे
  • C वे दौड़ते थे
  • D लगन पहले जैसी बनी रही
Show answer
Answer: लगन पहले जैसी बनी रही
Why:

नियम।

Q19 बीमारी में भी भगत नियम क्यों नहीं छोड़ते थे? intermediate
  • A नियम उनकी साधना थे
  • B डॉक्टर ने उन्हें ऐसा करने को कहा था
  • C लोग मजबूर करते थे
  • D वे डरते थे
Show answer
Answer: नियम उनकी साधना थे
Why:

नेम-व्रत।

Q20 जैसे तागा टूट गया हो, माला का दाना बिखरा हुआ, यह उपमा भगत के किस गीत के लिए है? advanced
  • A आषाढ़ की रोपनी का जोशीला गीत
  • B भोर की प्रभाती
  • C आख़िरी शाम का कमज़ोर गीत
  • D बेटे की मृत्यु वाला गीत
Show answer
Answer: आख़िरी शाम का कमज़ोर गीत
Why:

बिखरता स्वर।

Q21 संबल का अर्थ है ______। beginner
  • A भोजन
  • B जूता
  • C झोला
  • D सहारा
Show answer
Answer: सहारा
Why:

साधु को नहीं।

Q22 धीरे-धीरे स्वर ऊँचा होने लगा, इस वाक्य में धीरे-धीरे ______ क्रियाविशेषण है। advanced
  • A रीतिवाचक
  • B कालवाचक
  • C स्थानवाचक
  • D परिमाण-संख्यावाचक
Show answer
Answer: रीतिवाचक
Why:

कैसे?

Q23 बेटे को अग्नि पतोहू से दिलवाने का निर्णय भगत की किस समझ को दिखाता है? intermediate
  • A पुरुषों का हर हाल में ऊँचा दर्जा
  • B डर
  • C स्त्री-पुरुष समानता
  • D दिखावा
Show answer
Answer: स्त्री-पुरुष समानता
Why:

भेद नहीं।

Q24 अभिकथन: भगत ने पतोहू को उसके भाई के साथ भेज दिया। कारण: वे चाहते थे कि उसका जीवन बुढ़े ससुर की सेवा में न बीते और उसका दूसरा विवाह हो। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

सच्चा प्रेम।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. भगत का बेटा इकलौता था। II. भगत रास्ते में लोगों से भोजन माँगकर गंगा जाते थे। III. बेटे की मृत्यु पर भगत गाते रहे। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

घर से खाकर जाते।

Important short questions (7)

भगत के अनुसार कमज़ोर लोगों के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए?

भगत मानते थे कि सुस्त या कमज़ोर लोगों पर ज़्यादा ध्यान रखना और ज़्यादा प्यार करना चाहिए, क्योंकि वे देखभाल और स्नेह के ज़्यादा हक़दार होते हैं। इसीलिए वे अपने सुस्त बेटे को और भी चाहते थे।

बेटे की मृत्यु के बाद भगत के आँगन का दृश्य कैसा था?

बेटे का शरीर आँगन में चटाई पर सफ़ेद कपड़े से ढका था। उस पर फूल और तुलसी-दल बिखरे थे और सिरहाने दीया जल रहा था। भगत सामने बैठकर गा रहे थे, और भीतर पतोहू रो रही थी।

भगत के गाने को लेखक ने पागलपन क्यों नहीं माना?

लेखक ने समझा कि भगत जो कह रहे थे, उसमें उनका गहरा विश्वास बोल रहा था। वे सच में मानते थे कि आत्मा परमात्मा से मिल गई है। यह वह विश्वास था, जो हमेशा मृत्यु पर विजयी होता आया है।

पतोहू भगत को अकेला क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?

पतोहू को चिंता थी कि बुढ़ापे में भगत के लिए खाना कौन बनाएगा और बीमार होने पर उन्हें पानी कौन देगा। वह उनका सहारा बनकर उनकी सेवा करना चाहती थी।

पाठ के किन प्रसंगों से पता चलता है कि भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताएँ नहीं मानते थे?

बेटे की मृत्यु पर रोने के बजाय गाना, पतोहू से अग्नि दिलवाना और विधवा पतोहू का दूसरा विवाह करवाने का आदेश देना, ये प्रसंग दिखाते हैं कि भगत रूढ़ियों से ऊपर थे।

भगत गंगा-स्नान की यात्रा में किन नियमों का पालन करते थे?

वे पैदल जाते, घर से खाकर निकलते और लौटकर घर पर ही खाते थे। रास्ते में किसी से कुछ नहीं माँगते, बस प्यास लगने पर पानी पी लेते। पूरे रास्ते खँजड़ी बजाकर गाते रहते।

भगत की मृत्यु को लेखक ने उनके अनुरूप क्यों कहा?

भगत ने जीवन भर नियम और भक्ति निभाई, और बीमार होकर भी उन्हें नहीं छोड़ा। आख़िरी शाम तक वे गाते रहे और भोर में चुपचाप चले गए। उनकी मृत्यु भी उनके जीवन की तरह शांत और भक्तिमय थी।

Long answer questions (3)

बेटे की मृत्यु पर भगत के व्यवहार का वर्णन करते हुए बताइए कि इससे उनके व्यक्तित्व के कौन-से पक्ष सामने आते हैं।

भगत का इकलौता बेटा सुस्त था, फिर भी वे उसे बहुत प्यार करते थे। जब वह मरा, तो भगत ने उसके शरीर को आँगन में सफ़ेद कपड़े से ढककर फूल और तुलसी-दल बिखेरे और सिरहाने दीया जलाया। फिर वे उसके सामने बैठकर उसी पुरानी लगन से गाने लगे। भीतर पतोहू रो रही थी, पर भगत उसके पास जाकर कहते कि रोओ मत, उत्सव मनाओ, क्योंकि आत्मा परमात्मा से मिल गई है। लेखक को पहले लगा कि वे पागल हो गए, पर फिर उसने समझा कि यह उनका चरम विश्वास बोल रहा है। इस व्यवहार से भगत के कई पक्ष सामने आते हैं। पहला, उनकी गहरी आस्था, जो दुख से भी बड़ी थी। दूसरा, कबीर के दर्शन को जीवन में उतारने की उनकी क्षमता। तीसरा, उनका धैर्य और आत्म-नियंत्रण। चौथा, रूढ़ियों से ऊपर उठी सोच, क्योंकि उन्होंने शोक को भी भक्ति का उत्सव बना दिया।

किसी को अपने पास बाँधकर रखना और उसका भला चाहना, ये दो अलग भाव हैं। भगत और पतोहू के प्रसंग से इसे स्पष्ट कीजिए।

मोह में व्यक्ति किसी को अपने पास बाँधे रखना चाहता है, अपने सुख और ज़रूरत के लिए। प्रेम में व्यक्ति दूसरे का भला सबसे ऊपर रखता है, चाहे उसके लिए उसे ख़ुद से दूर करना पड़े। भगत के जीवन में यह अंतर बहुत साफ़ दिखता है। बेटे की मृत्यु के बाद पतोहू ही उनका एकमात्र सहारा थी। वह उनकी सेवा के लिए रुकना भी चाहती थी, और उसने पैर पकड़कर विनती की। अगर भगत में मोह होता, तो वे उसे रोक लेते, क्योंकि उनका बुढ़ापा आराम से कट जाता। पर भगत ने पतोहू के भाई को बुलाकर उसका दूसरा विवाह करवाने का आदेश दिया, और न मानने पर ख़ुद घर छोड़ने की बात कही। उन्होंने अपने अकेलेपन को स्वीकार किया, पर पतोहू के भविष्य को अपने स्वार्थ की भेंट नहीं चढ़ाया। यही सच्चा प्रेम है।

विधवा पुनर्विवाह और स्त्रियों के अधिकारों के बारे में भगत की सोच आज के समाज के लिए क्या संदेश देती है?

भगत ऐसे समय में जी रहे थे, जब विधवा स्त्री का दोबारा विवाह बहुत बुरा माना जाता था, और स्त्रियों को अंतिम संस्कार जैसे कामों से दूर रखा जाता था। ऐसे समय में उन्होंने पतोहू से बेटे को अग्नि दिलवाई और उसका दूसरा विवाह करवाने का आदेश दिया। उनका संदेश साफ़ है कि स्त्री और पुरुष में कोई भेद नहीं होना चाहिए। हर स्त्री को अपने जीवन के बारे में फ़ैसले लेने और सम्मान से जीने का अधिकार है। पति की मृत्यु के बाद उसका जीवन ख़त्म नहीं हो जाता। आज क़ानून विधवा पुनर्विवाह को मान्यता देता है, पर कई जगह अब भी सामाजिक दबाव है। भगत की कहानी हमें सिखाती है कि धर्म का असली अर्थ रूढ़ियों को निभाना नहीं, बल्कि हर इंसान के भले और सम्मान की चिंता करना है।

Flashcards (17)

भगत का बेटा कैसा था?
कुछ सुस्त और कम बुद्धि वाला।
भगत ऐसे बेटे को और ज़्यादा प्यार क्यों करते थे?
ऐसे लोग देखभाल के ज़्यादा हक़दार हैं।
पतोहू कैसी थी?
सुंदर, सुशील और समझदार।
बेटे को भगत ने किससे ढका?
सफ़ेद कपड़े से।
बेटे के शव पर भगत ने क्या बिखेरा?
फूल और तुलसी-दल।
भगत ने पतोहू से क्या करने को कहा?
रोने के बजाय उत्सव मनाने को।
भगत के अनुसार मृत्यु क्या है?
आत्मा का परमात्मा से मिलन।
बेटे को अग्नि किसने दी?
पतोहू ने।
श्राद्ध के बाद भगत ने किसे बुलाया?
पतोहू के भाई को।
पतोहू क्यों नहीं जाना चाहती थी?
भगत की बुढ़ापे में सेवा के लिए।
भगत की आख़िरी दलील?
तू न गई, तो मैं घर छोड़ दूँगा।
गंगा भगत के घर से कितनी दूर थी?
लगभग तीस कोस।
भगत गंगा-स्नान में किस पर ज़्यादा आस्था रखते थे?
संत-समागम और लोक-दर्शन पर।
संबल का अर्थ?
सहारा।
भगत की मृत्यु का पता कैसे चला?
भोर में उनका गीत नहीं सुनाई दिया।
क्रियाविशेषण किसे कहते हैं?
क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द।
क्रियाविशेषण के चार भेद?
रीतिवाचक, कालवाचक, स्थानवाचक, परिमाणवाचक।

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  • सही या भ्रम
  • पाठ का क्रम
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Class 10 Hindi Chapter 8 — frequently asked questions

बेनीपुरी के जीवन में आज़ादी के आंदोलन की क्या भूमिका रही?

दसवीं तक पढ़ने के बाद सन् 1920 में बेनीपुरी जी आज़ादी के आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ गए। इसके लिए उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उनकी रचनाओं में भी स्वाधीनता की चेतना साफ़ दिखती है।

रेखाचित्र विधा की दो विशेषताएँ लिखिए।

रेखाचित्र में किसी व्यक्ति का ऐसा सजीव वर्णन होता है कि वह पाठक की आँखों के सामने उभर आए। इसमें उसकी वेशभूषा, स्वभाव और आदतों के साथ उसके मन की झलक भी मिलती है।

बालगोबिन भगत की वेशभूषा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

भगत कमर पर छोटी लंगोटी और सिर पर कबीरपंथी टोपी पहनते थे। सर्दियों में काली कमली ओढ़ते थे। माथे पर रामानंदी चंदन का तिलक और गले में तुलसी की जड़ों की माला रहती थी।

भगत के अनुसार कमज़ोर लोगों के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए?

भगत मानते थे कि सुस्त या कमज़ोर लोगों पर ज़्यादा ध्यान रखना और ज़्यादा प्यार करना चाहिए, क्योंकि वे देखभाल और स्नेह के ज़्यादा हक़दार होते हैं। इसीलिए वे अपने सुस्त बेटे को और भी चाहते थे।

बेटे की मृत्यु के बाद भगत के आँगन का दृश्य कैसा था?

बेटे का शरीर आँगन में चटाई पर सफ़ेद कपड़े से ढका था। उस पर फूल और तुलसी-दल बिखरे थे और सिरहाने दीया जल रहा था। भगत सामने बैठकर गा रहे थे, और भीतर पतोहू रो रही थी।

भगत के गाने को लेखक ने पागलपन क्यों नहीं माना?

लेखक ने समझा कि भगत जो कह रहे थे, उसमें उनका गहरा विश्वास बोल रहा था। वे सच में मानते थे कि आत्मा परमात्मा से मिल गई है। यह वह विश्वास था, जो हमेशा मृत्यु पर विजयी होता आया है।

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