Class 10 Hindi Chapter 1: सूरदास के पद

सूरदास के पद is Chapter 1 of NCERT / CBSE Class 10 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
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सूरदास, भ्रमरगीत और गोपियों का उलाहना

सूरदास कृष्ण-भक्ति के अष्टछाप कवि हैं। भ्रमरगीत में उद्धव गोपियों को योग का संदेश देने आते हैं। पहले पद में गोपियाँ उन्हें व्यंग्य से बड़भागी कहती हैं, और दूसरे पद में बताती हैं कि योग का संदेश उनकी विरह-आग को और भड़का गया।

What you will be able to do

  • सूरदास के जीवन, रचनाओं और कृष्ण-भक्ति काव्य में उनके स्थान के बारे में बता सकेंगे।
  • भ्रमरगीत की कथा-पृष्ठभूमि, यानी कृष्ण, उद्धव और गोपियों का प्रसंग, समझा सकेंगे।
  • पहले पद में बड़भागी शब्द के व्यंग्य और कमल-पत्ते, तेल की गगरी जैसे उदाहरणों का अर्थ बता सकेंगे।
  • दूसरे पद में गोपियों की अधूरी अभिलाषा, प्रतीक्षा और योग-संदेश से बढ़ी पीड़ा को समझा सकेंगे।
  • ब्रजभाषा के कुछ शब्दों के अर्थ और उनका आज की हिंदी में रूप पहचान सकेंगे।

Key points

  • सूरदास का जन्म सन् 1478 के आसपास माना जाता है; वे वल्लभाचार्य के शिष्य और अष्टछाप के सबसे प्रसिद्ध कवि थे; सन् 1583 में पारसौली में उनका देहांत हुआ।

  • उनकी रचनाएँ सूरसागर, साहित्य लहरी और सूर सारावली हैं; इनमें सूरसागर सबसे लोकप्रिय है; वे वात्सल्य और शृंगार के श्रेष्ठ कवि माने जाते हैं।

  • मथुरा जाने के बाद कृष्ण ख़ुद नहीं लौटे; उन्होंने उद्धव को गोपियों के पास भेजा, जिन्होंने निर्गुण ब्रह्म और योग का उपदेश दिया।

  • गोपियाँ ज्ञान के बजाय प्रेम का मार्ग चाहती थीं; वहाँ आए एक भौंरे के बहाने उन्होंने उद्धव पर व्यंग्य किए, इसीलिए यह प्रसंग भ्रमरगीत कहलाता है।

  • पहले पद में गोपियाँ उद्धव को बड़भागी कहती हैं; असल में यह व्यंग्य है कि वे प्रेम के बंधन से अछूते रहकर प्रेम का सुख कभी नहीं जान पाए।

  • उद्धव की तुलना जल में रहकर भी न भीगने वाले कमल के पत्ते और पानी में पड़ी तेल की गगरी से की गई है।

  • गोपियाँ ख़ुद को भोली अबला कहती हैं, जो कृष्ण के प्रेम में ऐसे चिपकी हैं, जैसे चींटी गुड़ से चिपक जाती है।

  • दूसरे पद में गोपियाँ कहती हैं कि मन की बात मन में ही रह गई; कृष्ण के लौटने की आशा के सहारे वे सब सह रही थीं।

  • योग का संदेश सुनकर विरह की आग और भड़क गई; जिससे रक्षा की आशा थी, उधर से ही धार बह निकली, और अब मर्यादा भी नहीं बची।

Full explanation

सूरदास: कृष्ण-भक्ति के सूर्य

सूरदास का जन्म सन् 1478 के आसपास माना जाता है। एक मान्यता है कि वे मथुरा के पास रुनकता गाँव में जन्मे; दूसरी मान्यता उनका जन्म-स्थान दिल्ली के पास सीही गाँव बताती है। वे महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य थे और मथुरा-वृंदावन के बीच गऊघाट पर रहते थे। वहीं श्रीनाथ जी के मंदिर में वे भजन-कीर्तन करते थे।

सूरदास अष्टछाप के आठ कवियों में सबसे प्रसिद्ध हैं। उनकी तीन रचनाएँ मानी जाती हैं: सूरसागर, साहित्य लहरी और सूर सारावली। इनमें सूरसागर सबसे लोकप्रिय हुआ, जिसमें कृष्ण के जीवन से जुड़े हज़ारों पद हैं। सन् 1583 में पारसौली में उनका देहांत हुआ।

सूर को वात्सल्य और शृंगार का सबसे बड़ा कवि माना जाता है। बालक कृष्ण की शरारतें, माँ यशोदा का प्यार और गोपियों के साथ कृष्ण का प्रेम, ये सब उनके पदों में जीवंत हो उठते हैं। उनकी कविता में गाँव का खेती और पशुपालन वाला जीवन भी है, गाय, ग्वाले, दही और माखन के साथ।

सूर की भाषा ब्रजभाषा है, जो मथुरा-वृंदावन के इलाक़े की बोली थी। उन्होंने इस बोली को इतना मधुर और समृद्ध बना दिया कि आगे चलकर यह पूरे उत्तर भारत की काव्य-भाषा बन गई। उनके पद लोकगीतों की परंपरा से जुड़े हैं और राग-रागिनियों में गाए जाते हैं। सूर ने साधारण लोगों के प्रेम को इतना गौरव दिया कि आम आदमी को अपना जीवन भी सुंदर लगने लगा।

भ्रमरगीत की कहानी: उद्धव, गोपियाँ और एक भौंरा

भ्रमरगीत को समझने के लिए पहले उसकी कथा जाननी ज़रूरी है। कृष्ण बचपन में गोकुल और वृंदावन में रहे, जहाँ गोपियाँ उनसे बहुत प्रेम करती थीं। फिर कृष्ण कंस का वध करने मथुरा चले गए और वहीं के राजा बन गए। उन्होंने गोकुल लौटने का वादा किया था, पर वे लौटे नहीं।

कुछ समय बाद कृष्ण ने अपने मित्र उद्धव को गोपियों के पास भेजा। उद्धव बड़े ज्ञानी थे और निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे। उन्होंने गोपियों को समझाया कि कृष्ण से प्रेम करना मोह है; वे योग-साधना करें और निराकार ब्रह्म का ध्यान लगाएँ। इससे उनका विरह का दुख मिट जाएगा।

पर गोपियों को यह शुष्क ज्ञान बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। उनके लिए कृष्ण कोई सिद्धांत नहीं, जीते-जागते प्रिय थे। उसी समय वहाँ एक भौंरा उड़ता हुआ आ गया। गोपियों ने उस भौंरे को संबोधित करके बात शुरू की, पर असल में हर बात का निशाना उद्धव थे। भौंरा यानी भ्रमर, और इसी से इस प्रसंग का नाम पड़ा भ्रमरगीत।

भौंरे को चुनना भी बहुत अर्थपूर्ण है। भौंरा काला है, जैसे कृष्ण और उद्धव, दोनों साँवले हैं। भौंरा एक फूल का रस लेकर दूसरे पर उड़ जाता है, जैसे कृष्ण गोकुल का प्रेम छोड़कर मथुरा चले गए। इस तरह गोपियाँ एक ही तीर से उद्धव और कृष्ण, दोनों पर निशाना साधती हैं।

पहला पद: तुम सचमुच बड़भागी हो, उद्धव!

पहला पद ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी से शुरू होता है। ऊपर से लगता है कि गोपियाँ उद्धव की तारीफ़ कर रही हैं कि वे बहुत भाग्यशाली हैं। पर यह तारीफ़ नहीं, व्यंग्य है। गोपियाँ कहना चाहती हैं कि उद्धव कृष्ण के इतने पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते हैं। जिसने प्रेम का स्वाद ही नहीं चखा, उसे विरह का दुख भी नहीं होगा; यही उनका भाग्य है।

अपरस का अर्थ है अछूता या अलिप्त, और तगा का अर्थ है धागा। उद्धव स्नेह के धागे से कभी बँधे ही नहीं, उनका मन किसी के प्रेम में रँगा नहीं। गोपियों की नज़र में यह भाग्य नहीं, सबसे बड़ा दुर्भाग्य है, क्योंकि प्रेम के बिना जीवन रस-हीन है। व्यंग्य की यही दोहरी धार इस पद की जान है।

इसके बाद गोपियाँ दो सुंदर उदाहरण देती हैं। पहला है पुरइनि पात, यानी कमल का पत्ता। वह पानी के भीतर ही रहता है, फिर भी उस पर पानी का एक दाग़ नहीं लगता। दूसरा है तेल की गगरी। तेल से चुपड़ा मटका पानी में डुबो दो, तो भी उस पर एक बूँद नहीं टिकती। उद्धव भी ऐसे ही हैं: कृष्ण-रूपी प्रेम के सागर में रहकर भी उस पर प्रेम का रंग नहीं चढ़ा।

प्रीति की नदी और गुड़ से चिपकी चींटी

गोपियाँ आगे कहती हैं कि उद्धव ने कभी प्रीति की नदी में पैर तक नहीं डुबोया। यहाँ प्रेम को नदी कहा गया है, जो रूपक अलंकार है। उनकी दृष्टि भी कभी किसी के रूप पर मुग्ध नहीं हुई। परागी का अर्थ है मुग्ध होना। यानी उद्धव ने न प्रेम में उतरकर देखा, न किसी की सुंदरता पर रीझे।

फिर गोपियाँ अपनी तुलना उद्धव से करती हैं। वे कहती हैं कि हम तो भोली-भाली अबलाएँ हैं। हम कृष्ण के प्रेम में ऐसे पग गई हैं, जैसे चींटी गुड़ से चिपक जाती है। गुर चाँटी ज्यौं पागी का यही अर्थ है। चींटी गुड़ के लोभ में जाती है और फिर वहीं चिपककर रह जाती है; चाहकर भी नहीं छूट पाती।

यह तुलना बहुत गहरी है। एक ओर उद्धव हैं, जो प्रेम से बिल्कुल अछूते हैं; दूसरी ओर गोपियाँ हैं, जो प्रेम में पूरी तरह डूबी हैं। उद्धव कमल के पत्ते हैं, गोपियाँ गुड़ में चिपकी चींटी। गोपियाँ ख़ुद को अबला और भोली कहती हैं, पर उनके तर्कों के आगे ज्ञानी उद्धव निरुत्तर हो जाते हैं। यही उनकी विनम्रता के भीतर छिपी ताक़त है।

दूसरा पद: मन की बात मन में ही रह गई

दूसरा पद गोपियों के दुख की सबसे सच्ची तस्वीर है। वे कहती हैं कि मन की मन ही माँझ रही, यानी हमारे मन की बात मन के भीतर ही रह गई। वे कृष्ण से अपने प्रेम की बात कहना चाहती थीं, पर अब किससे कहें? उद्धव से यह बात कही नहीं जा सकती, क्योंकि वे प्रेम को समझते ही नहीं।

फिर गोपियाँ बताती हैं कि वे अब तक कैसे जी रही थीं। अवधि का अर्थ है निश्चित समय। कृष्ण ने लौटने का जो समय बताया था, उसी की आस के सहारे वे तन और मन की सारी पीड़ा सह रही थीं। उन्हें लगता था कि एक दिन कृष्ण ज़रूर लौटेंगे। यही आशा उनके जीने का आधार थी।

पर उद्धव ने आकर उस आशा को भी तोड़ दिया। कृष्ण ख़ुद नहीं आए, बल्कि योग का संदेश भेज दिया। गोपियाँ कहती हैं कि इन जोग-संदेशों को सुन-सुनकर विरहिणियाँ विरह की आग में और जल उठीं। जैसे जलती आग में घी डाल दो, तो वह और भड़क उठती है, वैसे ही योग का संदेश उनकी पीड़ा को और बढ़ा गया।

जिधर से रक्षा की आशा थी, उधर से ही धार बही

गोपियाँ एक बहुत मार्मिक बात कहती हैं। वे जिससे अपनी रक्षा की गुहार लगाना चाहती थीं, उधर से ही दुख की धारा बह निकली। यानी कृष्ण ही उनका सहारा थे, और कृष्ण की ओर से ही यह कठोर संदेश आया। जब रक्षक ही दुख देने लगे, तो फिर कोई कहाँ जाए?

पद के अंत में गोपियाँ कहती हैं कि अब हम धीरज कैसे धरें, जब मर्यादा ही नहीं रही। यहाँ मर्यादा के दो अर्थ समझे जाते हैं। एक, प्रेम की मर्यादा, जिसमें प्रिय अपने प्रेमी को कभी नहीं छोड़ता; कृष्ण ने यह मर्यादा नहीं निभाई। दो, गोपियों की अपनी मर्यादा, जिसके कारण वे अब तक चुप रहीं; अब दुख इतना बढ़ गया है कि वह संयम भी टूट रहा है।

इस पद में सूरदास ने विरह की पीड़ा को बहुत सहजता से दिखाया है। कोई बड़ा अलंकार नहीं, कोई कठिन शब्द नहीं, बस एक टूटे मन की सीधी बात है। मन की मन ही माँझ रही जैसे अंश आज भी लोग अपने अनकहे दुख के लिए कहावत की तरह इस्तेमाल करते हैं। यही सूर की कविता की ताक़त है।

ब्रजभाषा के शब्द: आज की हिंदी में

पदों की भाषा ब्रजभाषा है, इसलिए कुछ शब्द आज की हिंदी से अलग दिखते हैं। ऊधौ का अर्थ है उद्धव, हौ का अर्थ है हो, और तैं का अर्थ है से। माहँ यानी में, और पाउँ यानी पैर। बोर्‌यौ यानी डुबोया, और ताकौं यानी उसको।

दूसरे पद में माँझ का अर्थ है भीतर या बीच में। पै यानी पर या से, बिथा यानी व्यथा, दही यानी जल उठी, और गुहारि यानी रक्षा की पुकार। जितहिं तैं का अर्थ है जिधर से और उत तैं का अर्थ है उधर से। मरजादा यानी मर्यादा, और लही यानी रही या पाई।

इन शब्दों को ध्यान से देखें, तो पता चलता है कि ब्रजभाषा और खड़ी बोली हिंदी बहुत पास-पास हैं। ज़्यादातर शब्द थोड़े बदले रूप में आज भी हमारी बोलचाल में हैं। इसीलिए सूर के पद पढ़ते समय थोड़े अभ्यास के बाद उनका अर्थ ख़ुद-ब-ख़ुद खुलने लगता है।

Concepts and terms

भ्रमरगीत

वह काव्य-प्रसंग, जिसमें गोपियाँ एक भौंरे के बहाने उद्धव पर व्यंग्य करती हैं। इसमें ज्ञान और योग पर प्रेम की जीत दिखाई जाती है।

निर्गुण ब्रह्म

ऐसा ईश्वर, जिसका कोई रूप, रंग या गुण न हो। उद्धव गोपियों को इसी की उपासना और योग का उपदेश देते हैं।

सगुण भक्ति

ईश्वर के साकार रूप, जैसे कृष्ण या राम, से प्रेम और उपासना। गोपियाँ सगुण कृष्ण को ही चाहती हैं।

व्यंग्य

ऐसी बात, जो ऊपर से प्रशंसा लगे, पर भीतर से चोट करे। बड़भागी कहकर गोपियाँ उद्धव पर व्यंग्य करती हैं।

विरह

प्रिय से बिछड़ने का दुख। कृष्ण के मथुरा जाने के बाद गोपियाँ विरह में जी रही हैं।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

पदों का गायन और शब्द-कोश

Safety:

गाते समय आवाज़ पर ज़ोर मत डालिए; धीमी लय से शुरू कीजिए।

What You Notice:

गाकर पढ़ने पर समझ आता है कि सूर के पद गेय हैं, और लय के साथ उनका अर्थ भी आसानी से याद हो जाता है।

Did you know

अष्टछाप वल्लभ संप्रदाय के आठ कवियों का समूह था, जिसकी स्थापना वल्लभाचार्य के पुत्र विट्ठलनाथ ने की। सूरदास के अलावा इसमें कुंभनदास, परमानंददास, कृष्णदास, नंददास, छीतस्वामी, गोविंदस्वामी और चतुर्भुजदास थे।

सूरदास के पद गाए जाने के लिए लिखे गए थे। हर पद के ऊपर किसी राग का नाम मिलता है, और आज भी शास्त्रीय संगीत के गायक इन्हें रागों में गाते हैं।

भ्रमरगीत की परंपरा भागवत पुराण से शुरू होती है। सूरदास के बाद नंददास, रत्नाकर और कई दूसरे कवियों ने भी भ्रमरगीत लिखे।

Memory tricks

उद्धव के तीन चित्र: क-ते-न — कमल का पत्ता, तेल की गगरी, नदी में पाँव न डुबोना। कमल ते न भीगे।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 सूरदास किस भक्ति-धारा के कवि हैं? beginner
  • A सगुण कृष्ण-भक्ति
  • B निर्गुण ज्ञानमार्गी
  • C सगुण राम-भक्ति
  • D सूफ़ी प्रेममार्गी
Show answer
Answer: सगुण कृष्ण-भक्ति
Why:

कृष्ण के उपासक।

Q2 सूरदास की कौन-सी रचना सबसे लोकप्रिय मानी जाती है? beginner
  • A साहित्य लहरी
  • B सूर सारावली
  • C सूरसागर
  • D बीजक
Show answer
Answer: सूरसागर
Why:

हज़ारों पद।

Q3 सूरदास को किन दो रसों का श्रेष्ठ कवि माना जाता है? intermediate
  • A वीर और रौद्र
  • B वात्सल्य और शृंगार
  • C हास्य और अद्भुत
  • D करुण और बीभत्स रस
Show answer
Answer: वात्सल्य और शृंगार
Why:

बाल कृष्ण और गोपियाँ।

Q4 उद्धव गोपियों के पास किस उद्देश्य से आए थे? beginner
  • A कृष्ण को तुरंत मथुरा से वापस लाने का वादा करने
  • B गोपियों को मथुरा ले जाने
  • C गोकुल का कर वसूलने
  • D योग का उपदेश देकर उनका विरह शांत करने
Show answer
Answer: योग का उपदेश देकर उनका विरह शांत करने
Why:

निर्गुण का संदेश।

Q5 गोपियों को उद्धव का संदेश अच्छा क्यों नहीं लगा? intermediate
  • A वे योग-साधना पहले से ही रोज़ करती थीं और थक चुकी थीं
  • B उद्धव बहुत धीरे बोलते थे
  • C वे ज्ञान के बजाय प्रेम का मार्ग चाहती थीं
  • D संदेश बहुत छोटा था
Show answer
Answer: वे ज्ञान के बजाय प्रेम का मार्ग चाहती थीं
Why:

प्रेम बनाम ज्ञान।

Q6 भ्रमरगीत में भौंरे को चुनना अर्थपूर्ण क्यों है? advanced
  • A वह बहुत मीठा गाता है और कभी नहीं थकता
  • B वह गोपियों का पालतू था
  • C वह मथुरा से संदेश लाया था
  • D वह साँवला है और फूल बदलता रहता है
Show answer
Answer: वह साँवला है और फूल बदलता रहता है
Why:

कृष्ण से मेल।

Q7 ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी, इस अंश में बड़भागी कहने का असली भाव क्या है? intermediate
  • A प्रेम से अछूते रहने पर चोट करना
  • B उद्धव के ज्ञान की सच्चे मन से प्रशंसा करना
  • C उद्धव को धन्यवाद देना
  • D उद्धव से डरना
Show answer
Answer: प्रेम से अछूते रहने पर चोट करना
Why:

व्यंग्य।

Q8 गोपियों की नज़र में उद्धव का प्रेम से अछूता रहना कैसा है? advanced
  • A सच्चा सौभाग्य, जिसकी हर कोई कामना करे
  • B भाग्य के रूप में दिखता दुर्भाग्य
  • C एक बड़ी वीरता
  • D एक तरह की चालाकी
Show answer
Answer: भाग्य के रूप में दिखता दुर्भाग्य
Why:

रसहीन जीवन।

Q9 पुरइनि पात रहत जल भीतर, इस उदाहरण से उद्धव के बारे में क्या कहा गया है? intermediate
  • A वे पानी में तैरना बहुत अच्छी तरह जानते हैं
  • B वे कमल के फूल बहुत पसंद करते हैं
  • C वे कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते हैं
  • D वे हमेशा भीगे रहते हैं
Show answer
Answer: वे कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते हैं
Why:

कमल का पत्ता।

Q10 तेल की गगरी वाले उदाहरण में कौन-सी बात समान है? intermediate
  • A गगरी में तेल भरकर उसे बाज़ार में बेचना
  • B गगरी का टूट जाना
  • C गगरी का बहुत भारी होना
  • D पानी में रहकर भी उस पर बूँद न टिकना
Show answer
Answer: पानी में रहकर भी उस पर बूँद न टिकना
Why:

अलिप्तता।

Q11 प्रीति-नदी मैं पाउँ न बोर्‌यौ, इस अंश में कौन-सा अलंकार है? intermediate
  • A उत्प्रेक्षा
  • B रूपक
  • C यमक
  • D श्लेष
Show answer
Answer: रूपक
Why:

प्रेम ही नदी।

Q12 दृष्टि न रूप परागी का अर्थ क्या है? intermediate
  • A आँखें किसी के रूप पर मुग्ध नहीं हुईं
  • B आँखों से कुछ भी दिखाई नहीं देता था और वे दुखती थीं
  • C आँखें फूलों के पराग से भर गईं
  • D आँखें बहुत सुंदर थीं
Show answer
Answer: आँखें किसी के रूप पर मुग्ध नहीं हुईं
Why:

परागी यानी मुग्ध।

Q13 गुर चाँटी ज्यौं पागी वाली उपमा गोपियों के लगाव के बारे में क्या बताती है? intermediate
  • A वे बहुत लालची और चालाक हैं, इसलिए गुड़ खाती हैं
  • B वे चींटियों से डरती हैं
  • C वे प्रेम में ऐसी पगी हैं कि छूट नहीं सकतीं
  • D वे गुड़ बेचती हैं
Show answer
Answer: वे प्रेम में ऐसी पगी हैं कि छूट नहीं सकतीं
Why:

अटूट लगाव।

Q14 गोपियाँ ख़ुद को भोली अबला कहती हैं, पर उद्धव निरुत्तर हो जाते हैं। इससे क्या पता चलता है? advanced
  • A विनम्रता के भीतर तर्क की ताक़त है
  • B गोपियाँ सचमुच बहुत कमज़ोर और डरी हुई हैं
  • C उद्धव को बोलना नहीं आता था
  • D गोपियाँ उद्धव का सम्मान नहीं करतीं
Show answer
Answer: विनम्रता के भीतर तर्क की ताक़त है
Why:

वाक्चातुर्य।

Q15 मन की मन ही माँझ रही, इस अंश का भाव क्या है? beginner
  • A मन बहुत ख़ुश है और नाचना चाहता है
  • B मन की बात कहने की जगह नहीं बची
  • C मन ने सब कुछ कह दिया
  • D मन को कुछ याद नहीं
Show answer
Answer: मन की बात कहने की जगह नहीं बची
Why:

अनकहा दुख।

Q16 गोपियाँ अब तक तन-मन की पीड़ा किसके सहारे सह रही थीं? beginner
  • A उद्धव के मीठे और लंबे उपदेशों के
  • B गोकुल के राजा की मदद के
  • C योग-साधना के
  • D कृष्ण के लौटने की आशा के
Show answer
Answer: कृष्ण के लौटने की आशा के
Why:

अवधि अधार।

Q17 योग के संदेश ने गोपियों की विरह-आग पर क्या असर डाला? intermediate
  • A आग में घी जैसा, उसे और भड़काया
  • B पानी जैसा, उसे पूरी तरह और हमेशा के लिए बुझा दिया
  • C कोई असर नहीं पड़ा
  • D उन्हें नींद आ गई
Show answer
Answer: आग में घी जैसा, उसे और भड़काया
Why:

पीड़ा बढ़ी।

Q18 गुहार वाली जिस दिशा से धार बह निकली, उस अंश का अर्थ क्या है? advanced
  • A जिधर से पानी आता था, वह नदी अब पूरी तरह सूख गई है
  • B गोपियाँ नदी पार करना चाहती थीं
  • C जिनसे रक्षा की आशा थी, उधर से ही दुख आया
  • D धार में नाव बह गई
Show answer
Answer: जिनसे रक्षा की आशा थी, उधर से ही दुख आया
Why:

रक्षक ही दुख दे।

Q19 मरजादा न लही से किस मर्यादा के न रहने की ओर संकेत है? advanced
  • A गोकुल के लोगों ने राजा को कर देना बंद कर दिया
  • B गोपियाँ गोकुल छोड़कर चली गईं
  • C उद्धव ने झूठ बोला
  • D कृष्ण ने प्रेम का वचन नहीं निभाया
Show answer
Answer: कृष्ण ने प्रेम का वचन नहीं निभाया
Why:

प्रेम की रीति।

Q20 ब्रजभाषा के शब्द माहँ का खड़ी बोली में रूप क्या है? intermediate
  • A माँ
  • B में
  • C मन
  • D मोह
Show answer
Answer: में
Why:

जल माहँ।

Q21 बिथा शब्द किस शब्द का ब्रज रूप है? intermediate
  • A व्यथा
  • B विधि
  • C बात
  • D बीता
Show answer
Answer: व्यथा
Why:

तन मन बिथा।

Q22 भ्रमरगीत प्रसंग की मूल प्रेरणा किस ग्रंथ से मानी जाती है? intermediate
  • A महाभारत का शांति पर्व
  • B रामायण
  • C पंचतंत्र
  • D भागवत पुराण
Show answer
Answer: भागवत पुराण
Why:

कृष्ण-कथा का स्रोत।

Q23 उद्धव और गोपियों के बीच मूल टकराव किन दो मार्गों का है? intermediate
  • A धन और ग़रीबी
  • B ज्ञान-योग और प्रेम-भक्ति
  • C युद्ध और शांति के बीच का लंबा संघर्ष
  • D शहर और गाँव
Show answer
Answer: ज्ञान-योग और प्रेम-भक्ति
Why:

निर्गुण बनाम सगुण।

Q24 अभिकथन: गोपियाँ उद्धव को बड़भागी कहकर व्यंग्य करती हैं। कारण: उनकी नज़र में प्रेम के बिना जीवन रसहीन है, इसलिए प्रेम से अछूता रहना दुर्भाग्य है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

व्यंग्य का आधार।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. सूरदास वल्लभाचार्य के शिष्य थे। II. उद्धव गोपियों को सगुण कृष्ण से प्रेम करने को कहते हैं। III. पहले पद में उद्धव की तुलना कमल के पत्ते से की गई है। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

उद्धव निर्गुण के उपासक।

Important short questions (7)

सूरदास के जीवन और रचनाओं का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

सूरदास का जन्म सन् 1478 के आसपास माना जाता है। वे वल्लभाचार्य के शिष्य और अष्टछाप के प्रमुख कवि थे। उनकी रचनाएँ सूरसागर, साहित्य लहरी और सूर सारावली हैं। सन् 1583 में पारसौली में उनका देहांत हुआ।

भ्रमरगीत प्रसंग की पृष्ठभूमि लिखिए।

कृष्ण मथुरा जाकर लौटे नहीं। उन्होंने उद्धव को गोपियों के पास योग का संदेश लेकर भेजा। गोपियों को यह संदेश अच्छा नहीं लगा। वहाँ आए एक भौंरे के बहाने उन्होंने उद्धव पर व्यंग्य किए।

गोपियों ने उद्धव को बड़भागी क्यों कहा है?

ऊपर से यह तारीफ़ लगती है, पर असल में व्यंग्य है। उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी प्रेम से अछूते हैं। उन्होंने प्रेम का सुख नहीं जाना, इसलिए विरह का दुख भी नहीं जानते।

पहले पद में उद्धव के व्यवहार की तुलना किन चीज़ों से की गई है?

उनकी तुलना कमल के पत्ते से की गई है, जो पानी में रहकर भी नहीं भीगता। दूसरी तुलना तेल की गगरी से है, जिस पर पानी की एक बूँद नहीं टिकती।

गोपियों ने अपने प्रेम की तुलना किससे की है? इसका भाव लिखिए।

गोपियों ने अपनी तुलना गुड़ से चिपकी चींटी से की है। चींटी गुड़ से चिपककर छूट नहीं पाती। वैसे ही गोपियाँ कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह पग गई हैं।

दूसरे पद के आधार पर बताइए कि गोपियाँ अब तक कैसे जी रही थीं।

कृष्ण ने लौटने का समय बताया था। उसी आशा के सहारे गोपियाँ तन और मन की सारी पीड़ा सह रही थीं। उन्हें विश्वास था कि कृष्ण एक दिन ज़रूर लौटेंगे।

मरजादा न लही के माध्यम से कौन-सी बात कही गई है?

कृष्ण ने प्रेम की मर्यादा नहीं निभाई; वे लौटे नहीं और योग का संदेश भेज दिया। इस दुख से गोपियों का अपना संयम भी टूट रहा है। अब वे धीरज नहीं रख पा रहीं।

Long answer questions (3)

पहले पद के आधार पर गोपियों के व्यंग्य को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

पहले पद में गोपियाँ उद्धव को बहुत भाग्यशाली कहती हैं, पर यह तारीफ़ नहीं, व्यंग्य है। उद्धव कृष्ण जैसे प्रिय के पास रहकर भी स्नेह के धागे से नहीं बँधे; उनका मन किसी के प्रेम में नहीं रँगा। गोपियाँ उन्हें कमल के पत्ते जैसा बताती हैं, जो पानी में रहकर भी नहीं भीगता, और तेल की गगरी जैसा, जिस पर बूँद नहीं टिकती। उन्होंने प्रेम की नदी में कभी पैर तक नहीं डुबोया और न किसी के रूप पर मुग्ध हुए। इसके उलट गोपियाँ ख़ुद को गुड़ से चिपकी चींटी जैसी कहती हैं। इस तुलना से साफ़ है कि उनकी नज़र में प्रेम से अछूता रहना भाग्य नहीं, बल्कि सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।

उद्धव के योग-संदेश ने गोपियों की विरह-वेदना को कैसे बढ़ा दिया? दूसरे पद के आधार पर लिखिए।

गोपियाँ कृष्ण के लौटने की आशा के सहारे अब तक तन-मन की पीड़ा सह रही थीं। उन्हें इंतज़ार था कि कृष्ण आएँगे और वे अपने मन की बात उनसे कहेंगी। पर कृष्ण ख़ुद नहीं आए, उन्होंने उद्धव के हाथ योग का संदेश भेज दिया। इस संदेश ने उनकी आशा तोड़ दी। जैसे आग में घी डालने से वह और भड़कती है, वैसे ही योग की बातें सुनकर उनकी विरह-आग और तेज़ हो गई। जिनसे वे रक्षा की गुहार लगाना चाहती थीं, उधर से ही दुख की धारा बह निकली। अब उनके मन की बात मन में ही रह गई और धीरज भी टूटने लगा, क्योंकि कृष्ण ने प्रेम की मर्यादा नहीं निभाई।

क्या आपको लगता है कि उद्धव का ज्ञान गोपियों के प्रेम से हार गया? अपने विचार कारण सहित लिखिए।

हाँ, मुझे लगता है कि इस प्रसंग में उद्धव का ज्ञान गोपियों के प्रेम से हार गया। उद्धव बड़े ज्ञानी थे और योग की गहरी बातें जानते थे, पर उनका ज्ञान किताबी और सूखा था। वे यह नहीं समझ पाए कि दुखी मन को उपदेश नहीं, अपनापन चाहिए। गोपियों के पास कोई शास्त्र नहीं था, पर उनके पास सच्चा अनुभव था। उन्होंने कमल के पत्ते, तेल की गगरी और गुड़ की चींटी जैसे घरेलू उदाहरणों से ऐसे तर्क दिए कि उद्धव निरुत्तर हो गए। मेरी राय में ज्ञान ज़रूरी है, पर जब वह भावनाओं को समझे बिना दिया जाए, तो असर नहीं करता। इसीलिए भ्रमरगीत में प्रेम की जीत होती है।

Flashcards (17)

सूरदास किसके शिष्य थे?
महाप्रभु वल्लभाचार्य के।
सूरदास किस कवि-समूह में सबसे प्रसिद्ध हैं?
अष्टछाप में।
सूरदास के तीन ग्रंथ?
सूरसागर, साहित्य लहरी, सूर सारावली।
सूरदास की भाषा?
ब्रजभाषा।
सूरदास का देहांत कब और कहाँ हुआ?
सन् 1583 में, पारसौली में।
कृष्ण ने गोपियों के पास किसे भेजा?
उद्धव को।
उद्धव ने कौन-सा उपदेश दिया?
निर्गुण ब्रह्म और योग का।
इस प्रसंग का नाम भ्रमरगीत क्यों पड़ा?
गोपियाँ एक भौंरे के बहाने उद्धव से बात करती हैं।
अपरस का अर्थ?
अछूता, अलिप्त।
तगा का अर्थ?
धागा, बंधन।
पुरइनि पात का अर्थ?
कमल का पत्ता।
प्रीति-नदी में कौन-सा अलंकार है?
रूपक।
परागी का अर्थ?
मुग्ध होना।
गोपियाँ अपनी तुलना किससे करती हैं?
गुड़ से चिपकी चींटी से।
अवधि का अर्थ?
निश्चित समय या वादे की घड़ी।
गुहारि का अर्थ?
रक्षा के लिए पुकार।
योग-संदेश ने गोपियों पर क्या असर किया?
विरह की आग और भड़का दी।

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  • ब्रज शब्द और अर्थ
  • उद्धव या गोपियाँ
  • सही या भ्रम
  • भ्रमरगीत की कथा का क्रम
  • झटपट उत्तर

हारिल की लकड़ी, राजधर्म और गोपियों का वाक्चातुर्य

तीसरे पद में गोपियाँ कृष्ण को हारिल की लकड़ी जैसा अटूट सहारा बताती हैं और योग को कड़वी ककड़ी। चौथे पद में वे ताना देती हैं कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं, और राजा को प्रजा न सताने का धर्म याद दिलाती हैं।

What you will be able to do

  • हारिल की लकड़ी के उदाहरण से गोपियों के एकनिष्ठ प्रेम को समझा सकेंगे।
  • योग को कड़वी ककड़ी और रोग कहने के पीछे गोपियों का दृष्टिकोण बता सकेंगे।
  • चौथे पद में राजनीति पढ़ने के ताने और राजधर्म की सीख को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • गोपियों के वाक्चातुर्य, यानी बात कहने की चतुराई, की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिख सकेंगे।
  • सूर के पदों में भाषा, अलंकार, गेयता और व्यंग्य जैसी काव्य-विशेषताएँ पहचान सकेंगे।

Key points

  • हारिल एक पक्षी है, जो अपने पंजों में हमेशा कोई लकड़ी या तिनका पकड़े रहता है; गोपियों के लिए कृष्ण वैसी ही लकड़ी हैं, जिसे उन्होंने कसकर पकड़ा है।

  • मन, कर्म और वचन से उन्होंने नंद के बेटे को हृदय में धारण किया है; जागते, सोते, सपने में, दिन-रात उनकी रट कान्ह-कान्ह ही है।

  • योग की बात उन्हें कड़वी ककड़ी जैसी लगती है; वे उसे एक रोग, यानी ब्याधि, कहती हैं, जिसे न उन्होंने कभी देखा, न सुना, न अपनाया।

  • गोपियाँ कहती हैं कि यह योग उन्हें दो, जिनका मन चकरी की तरह चंचल है; उनका मन तो कृष्ण में स्थिर है।

  • चौथे पद में गोपियाँ ताना देती हैं कि हरि राजनीति पढ़ आए हैं; भौंरे, यानी उद्धव, की बातों से उन्हें सारा हाल पता चल गया है।

  • वे कहती हैं कि कृष्ण पहले ही चतुर थे, अब गुरु के ग्रंथ पढ़कर और चतुर हो गए; उनकी बढ़ी बुद्धि का पता इसी से चलता है कि उन्होंने योग का संदेश भेजा।

  • पुराने समय के भले लोग दूसरों की भलाई के लिए दौड़ते थे; गोपियाँ कहती हैं कि अब वे अपना वह मन वापस ले लेंगी, जिसे कृष्ण जाते समय चुरा ले गए थे।

  • जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाते थे, वे ख़ुद अन्याय क्यों करें? राजा का धर्म यही है कि प्रजा को सताया न जाए।

  • गोपियों की वाग्विदग्धता, यानी बात कहने की चतुराई, इन पदों की सबसे बड़ी विशेषता है; व्यंग्य, तर्क, उलाहना और घरेलू उदाहरण उसके हथियार हैं।

Full explanation

तीसरा पद: हमारे हरि हारिल की लकड़ी हैं

तीसरा पद गोपियों के अटल प्रेम की घोषणा है। वे कहती हैं कि हमारे लिए हरि हारिल की लकड़ी हैं। हारिल एक पक्षी है, जिसके बारे में लोक-मान्यता है कि वह हमेशा अपने पंजों में कोई लकड़ी या तिनका दबाए रहता है। उड़ते समय भी, बैठते समय भी, वह उसे नहीं छोड़ता, जैसे वही उसका सहारा हो।

गोपियाँ कहती हैं कि उन्होंने भी मन, कर्म और वचन से नंद के बेटे कृष्ण को अपने हृदय में ऐसे ही कसकर पकड़ा है। मन से यानी सोच में, कर्म से यानी काम में, और वचन से यानी बोली में; हर तरह से कृष्ण ही उनके हैं। यह दृढ़ करि पकरी, यानी पूरी दृढ़ता से उन्होंने इस सहारे को थामा है।

इस प्रेम की गहराई अगली बात में दिखती है। जागते हुए, सोते हुए, सपने में, दिन में और रात में, हर समय उनकी ज़ुबान पर कान्ह-कान्ह की रट लगी है। जक री का अर्थ है रट लगी है या धुन लगी है। यानी उनका पूरा जीवन, चौबीसों घंटे, कृष्ण के नाम में डूबा है। ऐसे मन पर योग की बात असर कैसे करेगी?

योग: कड़वी ककड़ी और अनजाना रोग

गोपियाँ कहती हैं कि योग की बात सुनते ही उन्हें ऐसा लगता है, जैसे किसी ने कड़वी ककड़ी खिला दी हो। करुई का अर्थ है कड़वी। ककड़ी आम तौर पर मीठी और ठंडी होती है, पर कभी-कभी कोई ककड़ी इतनी कड़वी निकलती है कि मुँह का स्वाद ख़राब कर देती है। गोपियों के लिए योग का संदेश भी ऐसा ही है।

फिर गोपियाँ योग को सीधे ब्याधि, यानी रोग, कहती हैं। वे उद्धव से कहती हैं कि तुम हमारे लिए यह रोग ले आए हो, जिसे हमने न कभी देखा, न सुना, न कभी अपनाया। यानी योग उनके जीवन का हिस्सा ही नहीं है। उनके लिए प्रेम स्वाभाविक है, और योग एक बाहरी, थोपी हुई चीज़।

पद के अंत में गोपियाँ बहुत चतुर बात कहती हैं। वे उद्धव को सलाह देती हैं कि यह योग उन्हें जाकर सौंपो, जिनके मन चकरी जैसे हैं। चकरी फिरकी को कहते हैं, जो हवा में गोल-गोल घूमती रहती है। यानी योग की ज़रूरत उन्हें है, जिनका मन चंचल है, जो कभी इधर, कभी उधर भटकता है। गोपियों का मन तो हारिल की लकड़ी की तरह कृष्ण में स्थिर है, उन्हें योग की क्या ज़रूरत?

यह तर्क बहुत तीखा है। योग का उद्देश्य मन को स्थिर करना होता है, और गोपियाँ कहती हैं कि हमारा मन तो पहले ही स्थिर है, कृष्ण में। इस तरह वे उद्धव के ही सिद्धांत से उन्हें हरा देती हैं।

चौथा पद: हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं

चौथे पद में गोपियों का निशाना सीधे कृष्ण पर है। वे कहती हैं कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं। मथुरा जाकर राजा बनने के बाद कृष्ण में राजनेताओं वाली चालाकी आ गई है। अब वे सीधे प्रेम की बात नहीं करते, बल्कि दूसरों के ज़रिए कूटनीति से संदेश भेजते हैं।

गोपियाँ कहती हैं कि मधुकर की कही बातें सुनकर हमें सारा हाल समझ आ गया। मधुकर यानी भौंरा, और यहाँ इशारा उद्धव की ओर है। उद्धव की बातों से ही गोपियों को पता चल गया कि कृष्ण कितने बदल गए हैं।

फिर गोपियाँ व्यंग्य करती हैं कि कृष्ण तो पहले से ही बहुत चतुर थे, अब गुरु ने उन्हें ग्रंथ भी पढ़ा दिए। यानी चतुराई पर अब किताबी चालाकी भी चढ़ गई है। उनकी बढ़ी हुई बुद्धि का पता तो इसी से चलता है कि उन्होंने प्रेम करने वाली गोपियों के पास योग का संदेश भेजा! यह बुद्धि की तारीफ़ नहीं, उसकी हँसी उड़ाना है।

मन वापस लेंगी और राजधर्म की याद

गोपियाँ आगे कहती हैं कि पुराने ज़माने के भले लोग दूसरों के हित के लिए दौड़े-दौड़े फिरते थे। यानी सच्चे लोग दूसरों का दुख दूर करते थे, दुख बढ़ाते नहीं थे। यह कृष्ण और उद्धव, दोनों के लिए सीख है कि भलाई करो, पीड़ा नहीं।

फिर वे एक बहुत सुंदर बात कहती हैं। कृष्ण जाते समय उनका मन चुराकर ले गए थे। अब गोपियाँ वह मन वापस पा लेंगी। यानी जब कृष्ण इतने बदल गए हैं, तो गोपियाँ भी अपना मन उनसे वापस ले लेंगी। यह धमकी सच्ची नहीं, प्रेम भरी नाराज़गी है, जिसे उपालंभ कहते हैं।

पद का अंत सबसे गंभीर है। गोपियाँ पूछती हैं कि जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाते रहे, वे ख़ुद अन्याय क्यों करें? कृष्ण ने कंस जैसे अत्याचारी से लोगों को बचाया था; अब वे ख़ुद गोपियों को दुख दे रहे हैं। और अंत में वे राजा का धर्म याद दिलाती हैं: राजधर्म यही है कि प्रजा को सताया न जाए। गोपियाँ भी कृष्ण की प्रजा हैं, इसलिए उन्हें दुख देना राजधर्म के ख़िलाफ़ है।

यह अंत बताता है कि सूरदास की गोपियाँ केवल प्रेम में रोने वाली नहीं हैं। वे राजा को उसका कर्तव्य याद दिलाने का साहस रखती हैं। इसे सूर की लोकधर्मिता कहा जाता है, यानी आम लोगों के हित को सबसे ऊपर रखना। आज के लोकतंत्र में भी यह बात उतनी ही सच है कि शासन का पहला धर्म जनता का भला है।

गोपियों का वाक्चातुर्य

इन चारों पदों की सबसे बड़ी विशेषता गोपियों का वाक्चातुर्य है, जिसे वाग्विदग्धता भी कहते हैं। उद्धव बड़े ज्ञानी थे, पर गोपियों ने बातों से उन्हें निरुत्तर कर दिया। इस चतुराई की कई परतें हैं। पहली परत व्यंग्य है: बड़भागी कहना, राजनीति पढ़ने का ताना और बढ़ी बुद्धि की हँसी।

दूसरी परत तर्क है। योग मन को स्थिर करने के लिए है, और गोपियों का मन तो पहले ही स्थिर है, इसलिए योग चंचल मन वालों को दो। जो दूसरों को अन्याय से छुड़ाते थे, वे ख़ुद अन्याय क्यों करें? ऐसे तर्कों का उद्धव के पास कोई उत्तर नहीं।

तीसरी परत घरेलू उदाहरण हैं: कमल का पत्ता, तेल की गगरी, गुड़ की चींटी, हारिल की लकड़ी, कड़वी ककड़ी और चकरी। ये सब रोज़ के जीवन से लिए गए हैं, इसलिए तुरंत समझ आते हैं और गहरी चोट करते हैं। चौथी परत उलाहना है, जिसमें शिकायत भी है और प्रेम भी। इन सबके पीछे सच्चे प्रेम की ताक़त है, और यही ताक़त किताबी ज्ञान से बड़ी साबित होती है।

पदों का काव्य-सौंदर्य

सूर के ये पद ब्रजभाषा में हैं, जो बहुत मधुर और कोमल भाषा है। सूर ने उसमें लोकजीवन के शब्द, जैसे ककरी, चाँटी, गागरि और लकरी, बड़ी सहजता से रखे हैं। पदों में गेयता है; हर पद किसी राग में गाया जाता है, और हर पद की अंतिम पंक्ति में सूरदास की छाप, यानी कवि का नाम, आता है।

अलंकारों की बात करें, तो कई सुंदर प्रयोग हैं। प्रीति-नदी में रूपक है। ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि और गुर चाँटी ज्यौं पागी में उपमा या दृष्टांत है। कान्ह-कान्ह में पुनरुक्ति प्रकाश है, यानी शब्द का दोहराव भाव को गहरा करता है। हरि हैं राजनीति, करुई ककरी जैसे अंशों में अनुप्रास की मिठास है।

इन पदों का रस वियोग शृंगार है, यानी प्रिय से बिछड़ने का प्रेम-भाव। पर इसमें व्यंग्य और हास्य का पुट भी है, जिससे पद केवल रोने-धोने वाले नहीं, बल्कि जीवंत और चुटीले बन गए हैं। भ्रमरगीत की यही विशेषता इसे हिंदी साहित्य का अनमोल हिस्सा बनाती है: इसमें सगुण भक्ति की निर्गुण पर जीत है। साथ ही प्रेम ज्ञान से और आम आदमी की समझ किताबी विद्वत्ता से ऊपर दिखती है।

Concepts and terms

एकनिष्ठ प्रेम

ऐसा प्रेम, जो केवल एक के प्रति हो और कभी न डगमगाए। गोपियों का कृष्ण-प्रेम एकनिष्ठ है।

वाग्विदग्धता

बात कहने की चतुराई और हाज़िरजवाबी। गोपियाँ तर्क, व्यंग्य और उदाहरणों से उद्धव को निरुत्तर कर देती हैं।

उपालंभ

प्रेम भरा उलाहना या शिकायत। भ्रमरगीत के पद उपालंभ-काव्य के सुंदर उदाहरण हैं।

राजधर्म

राजा का कर्तव्य। गोपियों के अनुसार सच्चा राजधर्म यही है कि प्रजा को सताया न जाए।

दृष्टांत

किसी बात को समझाने के लिए दिया गया जाना-पहचाना उदाहरण। हारिल की लकड़ी और करुई ककड़ी ऐसे ही दृष्टांत हैं।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

कक्षा दस में भ्रमरगीत पढ़ने के बाद एक वाद-विवाद हुआ। विषय था: सच्चा ज्ञान वही है, जो दूसरों के मन को समझे।

पक्ष में बोलते हुए फ़ातिमा ने कहा कि उद्धव का ज्ञान बड़ा था, पर वे गोपियों का दुख नहीं समझ पाए, इसलिए हार गए। विपक्ष में रोहन ने कहा कि ज्ञान अपने आप में मूल्यवान है; गोपियों ने बस भावनाओं के कारण उसकी बात नहीं सुनी।

अंत में शिक्षिका ने एक नया पहलू जोड़ा। उन्होंने पूछा कि गोपियों ने कृष्ण को राजधर्म क्यों याद दिलाया, और क्या आज भी नागरिकों को अपने नेताओं से ऐसे सवाल पूछने चाहिए।

Activity:

अपने इलाक़े की किसी एक सार्वजनिक समस्या, जैसे सड़क, पानी या सफ़ाई, पर अपने प्रतिनिधि को एक विनम्र पत्र का मसौदा लिखिए।

Analysis:

वाद-विवाद से बच्चों ने समझा कि भ्रमरगीत केवल प्रेम-कविता नहीं, उसमें ज्ञान, संवेदना और नागरिक साहस के सवाल भी छिपे हैं।

Did you know

हारिल, जिसे हरियल भी कहते हैं, हरे रंग का एक कबूतर जैसा पक्षी है। लोक-मान्यता है कि वह कभी ज़मीन पर पैर नहीं रखता और हमेशा पंजों में कोई तिनका दबाए रहता है। यह महाराष्ट्र का राज्य-पक्षी भी है।

गोपियों के वाक्चातुर्य जैसी हाज़िरजवाबी के लिए लोक-कथाओं के कई पात्र प्रसिद्ध हैं, जैसे बीरबल, तेनालीराम, गोपाल भाँड़ और मुल्ला नसरुद्दीन।

राजधर्म की यह सीख कि राजा प्रजा को न सताए, भारतीय परंपरा में बहुत पुरानी है। महाभारत के शांति पर्व और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी प्रजा के हित को राजा का पहला कर्तव्य बताया गया है।

Memory tricks

तीसरे पद की तीन चीज़ें: हा-क-च — हारिल की लकड़ी, करुई ककड़ी, चकरी। हाथ में ककड़ी लेकर चकरी घुमाओ।

चौथे पद के तीन ताने: रा-म-रा — राजनीति पढ़ आए, मन फेर पाएँगे, राजधर्म याद करो। राम-राम कहो, राजा।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 गोपियाँ कृष्ण को हारिल की लकड़ी क्यों कहती हैं? intermediate
  • A कृष्ण लकड़ी की बाँसुरी बजाते थे और उसे कभी नहीं छोड़ते थे
  • B वे कृष्ण को कभी न छूटने वाला सहारा मानती हैं
  • C कृष्ण बहुत दुबले-पतले थे
  • D कृष्ण हारिल पक्षी पालते थे
Show answer
Answer: वे कृष्ण को कभी न छूटने वाला सहारा मानती हैं
Why:

एकनिष्ठता।

Q2 मन क्रम बचन नंद-नंदन उर, इस अंश से क्या पता चलता है? intermediate
  • A गोपियाँ केवल बातों में कृष्ण का नाम लेती हैं
  • B गोपियाँ नंद बाबा से डरती हैं
  • C गोपियों ने हर तरह से कृष्ण को अपनाया है
  • D गोपियाँ कृष्ण को भूल चुकी हैं
Show answer
Answer: गोपियों ने हर तरह से कृष्ण को अपनाया है
Why:

पूरी निष्ठा।

Q3 जागत सोवत स्वप्न दिवस-निसि, इस अंश में कौन-सा भाव है? beginner
  • A गोपियों को नींद नहीं आती, इसलिए वे बहुत बीमार और कमज़ोर हैं
  • B गोपियाँ दिन-रात काम करती हैं
  • C गोपियाँ सपने नहीं देखतीं
  • D हर पल कृष्ण की ही धुन
Show answer
Answer: हर पल कृष्ण की ही धुन
Why:

रट।

Q4 कान्ह-कान्ह में शब्द के दोहराव से कौन-सा अलंकार बनता है? intermediate
  • A पुनरुक्ति प्रकाश
  • B रूपक
  • C उत्प्रेक्षा
  • D अतिशयोक्ति
Show answer
Answer: पुनरुक्ति प्रकाश
Why:

शब्द का दोहराव।

Q5 गोपियों को योग की बात कैसी लगती है? beginner
  • A मीठे गुड़ जैसी
  • B ठंडे पानी जैसी
  • C सुगंधित फूल जैसी
  • D कड़वी ककड़ी जैसी
Show answer
Answer: कड़वी ककड़ी जैसी
Why:

करुई ककरी।

Q6 गोपियाँ योग को ब्याधि क्यों कहती हैं? intermediate
  • A योग करने से वे सचमुच बीमार पड़ गई थीं
  • B उद्धव डॉक्टर थे और दवा लाए थे
  • C वह अनजानी और थोपी हुई चीज़ है
  • D योग से कृष्ण बीमार हुए
Show answer
Answer: वह अनजानी और थोपी हुई चीज़ है
Why:

देखी सुनी न करी।

Q7 यह तौ सूर तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी, इस तर्क की ख़ूबी क्या है? advanced
  • A गोपियाँ उद्धव को फिरकी के खेल में हराना चाहती हैं
  • B योग चंचल मन वालों के लिए है, गोपियों का मन स्थिर है
  • C गोपियाँ योग सीखने को बहुत उत्सुक हैं
  • D गोपियाँ उद्धव को मूर्ख मानती हैं
Show answer
Answer: योग चंचल मन वालों के लिए है, गोपियों का मन स्थिर है
Why:

उद्धव के ही तर्क से जीत।

Q8 हरि हैं राजनीति पढ़ि आए, इस ताने का अर्थ क्या है? intermediate
  • A कृष्ण राजा बनकर चालाक और कूटनीतिक हो गए
  • B कृष्ण मथुरा में किसी विद्यालय में राजनीति पढ़ाने लगे हैं
  • C कृष्ण ने राजनीति छोड़ दी है
  • D कृष्ण बहुत भोले हो गए हैं
Show answer
Answer: कृष्ण राजा बनकर चालाक और कूटनीतिक हो गए
Why:

बदला व्यवहार।

Q9 गोपियाँ उद्धव को मधुकर कहकर किस बात की ओर इशारा करती हैं? advanced
  • A उनके शहद बेचने के व्यापार की ओर
  • B मीठी बातों में छिपे कड़वे संदेश की ओर
  • C उनके बहुत काले रंग की ओर
  • D उनके तेज़ उड़ने की ओर
Show answer
Answer: मीठी बातों में छिपे कड़वे संदेश की ओर
Why:

मीठी बात, कड़वा संदेश।

Q10 पहले से चतुर कृष्ण के गुरु-ग्रंथ पढ़ने वाली बात में कौन-सा भाव है? intermediate
  • A कृष्ण की बढ़ी चालाकी पर व्यंग्य
  • B गुरु की सच्चे मन से भरपूर प्रशंसा
  • C ग्रंथ पढ़ने की सलाह
  • D कृष्ण की पढ़ाई पर गर्व
Show answer
Answer: कृष्ण की बढ़ी चालाकी पर व्यंग्य
Why:

ताना।

Q11 कृष्ण की बढ़ी बुद्धि का पता गोपियों को किस बात से चलता है? intermediate
  • A उनके मथुरा में बड़ा महल बनाने से
  • B उनके कंस को हराने से
  • C प्रेमियों को योग का संदेश भेजने से
  • D उनके बाँसुरी बजाना छोड़ने से
Show answer
Answer: प्रेमियों को योग का संदेश भेजने से
Why:

जोग-सँदेस पठाए।

Q12 पुराने भले लोगों के परहित में दौड़ने की याद दिलाने का आशय क्या है? advanced
  • A पुराने लोग बहुत तेज़ दौड़ते थे और खेलों में जीतते थे
  • B भले लोग केवल अपना हित देखते थे
  • C उद्धव बहुत बूढ़े हैं
  • D भले लोग दुख घटाते थे, बढ़ाते नहीं
Show answer
Answer: भले लोग दुख घटाते थे, बढ़ाते नहीं
Why:

परहित।

Q13 गोपियों के मन फेर पाने की धमकी के पीछे क्या भाव है? intermediate
  • A कृष्ण बदले, तो मन भी लौट आएगा
  • B उन्हें अपना मन बाज़ार में बेचना है
  • C उनका मन बहुत ख़ुश है और नाचना चाहता है
  • D वे उद्धव को मन देना चाहती हैं
Show answer
Answer: कृष्ण बदले, तो मन भी लौट आएगा
Why:

प्रेम भरी नाराज़गी।

Q14 अनीति छुड़ाने वाले के ही अनीति करने की बात में कौन-सा विरोधाभास है? advanced
  • A कृष्ण ने कभी किसी को अन्याय से नहीं बचाया था
  • B उद्धव अन्याय के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं
  • C गोपियाँ ख़ुद अन्याय करती हैं
  • D अन्याय से बचाने वाले ख़ुद अन्याय कर रहे हैं
Show answer
Answer: अन्याय से बचाने वाले ख़ुद अन्याय कर रहे हैं
Why:

कंस से मुक्ति दिलाने वाले।

Q15 गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या है? beginner
  • A हर हाल में युद्ध जीतना और राज्य बढ़ाना
  • B केवल महल में रहना
  • C प्रजा को कभी न सताना
  • D ग्रंथ पढ़ना
Show answer
Answer: प्रजा को कभी न सताना
Why:

राज धरम।

Q16 चौथे पद का अंत सूरदास की किस विशेषता को दिखाता है? advanced
  • A केवल प्रकृति-प्रेम
  • B लोकधर्मिता, यानी जनहित की चिंता
  • C युद्ध और वीरता का गुणगान
  • D राजा की हर बात को सही मानना
Show answer
Answer: लोकधर्मिता, यानी जनहित की चिंता
Why:

प्रजा का हित।

Q17 गोपियों के वाक्चातुर्य का कौन-सा हथियार इन पदों में नहीं है? intermediate
  • A तीखा व्यंग्य
  • B घरेलू उदाहरण
  • C गाली-गलौज
  • D सधे हुए तर्क
Show answer
Answer: गाली-गलौज
Why:

उलाहना, अपमान नहीं।

Q18 भ्रमरगीत के पदों में प्रमुख रस कौन-सा है? intermediate
  • A वियोग शृंगार
  • B वीर रस
  • C शांत रस
  • D भयानक रस
Show answer
Answer: वियोग शृंगार
Why:

प्रिय से बिछड़ना।

Q19 हर पद की अंतिम पंक्ति में सूरदास का नाम आना क्या कहलाता है? intermediate
  • A पद का शीर्षक
  • B पद की टेक
  • C पद का राग
  • D कवि की छाप
Show answer
Answer: कवि की छाप
Why:

सूरदास की मुहर।

Q20 ये पद केवल रोने-धोने वाले न होकर चुटीले क्यों लगते हैं? intermediate
  • A इनमें केवल युद्ध के लंबे वर्णन हैं जो रोमांच देते हैं
  • B इनमें विरह के साथ व्यंग्य और हास्य का पुट है
  • C इनमें कोई भावना नहीं है
  • D ये बहुत छोटे हैं
Show answer
Answer: इनमें विरह के साथ व्यंग्य और हास्य का पुट है
Why:

उलाहना।

Q21 भ्रमरगीत में आख़िरकार किसकी जीत दिखाई गई है? beginner
  • A प्रेम की, ज्ञान पर
  • B योग की, प्रेम पर
  • C उद्धव की, गोपियों पर
  • D राजनीति की, धर्म पर
Show answer
Answer: प्रेम की, ज्ञान पर
Why:

सगुण की जीत।

Q22 गोपियों के घरेलू उदाहरण, जैसे ककड़ी और चकरी, उनके तर्क को असरदार क्यों बनाते हैं? intermediate
  • A ये बहुत कठिन और विदेशी शब्दों वाले उदाहरण हैं
  • B इन्हें कोई नहीं जानता
  • C ये केवल शहरों में मिलते हैं
  • D ये रोज़ के जीवन से हैं, तुरंत समझ आते हैं
Show answer
Answer: ये रोज़ के जीवन से हैं, तुरंत समझ आते हैं
Why:

सहज और तीखे।

Q23 आज के लोकतंत्र के लिए गोपियों की राजधर्म वाली बात क्यों प्रासंगिक है? advanced
  • A आज के समय में राजा ही सारे फ़ैसले अकेले करते हैं
  • B आज प्रजा को सताना ज़रूरी है
  • C शासन का पहला धर्म आज भी जनता का भला है
  • D आज राजधर्म की कोई ज़रूरत नहीं
Show answer
Answer: शासन का पहला धर्म आज भी जनता का भला है
Why:

जन-हित।

Q24 अभिकथन: गोपियाँ कहती हैं कि योग चंचल मन वालों को दो। कारण: उनका अपना मन हारिल की लकड़ी की तरह कृष्ण में स्थिर है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

स्थिर मन।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. गोपियाँ योग को कड़वी ककड़ी जैसा बताती हैं। II. चौथे पद में गोपियाँ कृष्ण की राजनीति की प्रशंसा करती हैं। III. पदों में गोपियाँ राजा को प्रजा न सताने का धर्म याद दिलाती हैं। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

राजनीति पर ताना है।

Important short questions (7)

हारिल की लकड़ी के उदाहरण से गोपियाँ क्या कहना चाहती हैं?

हारिल पक्षी हमेशा पंजों में लकड़ी दबाए रहता है और उसे नहीं छोड़ता। गोपियाँ कहती हैं कि कृष्ण उनके लिए वैसी ही लकड़ी हैं। उन्होंने मन, कर्म और वचन से कृष्ण को कसकर थाम रखा है।

गोपियों को योग की बात कैसी लगती है और क्यों?

गोपियों को योग की बात कड़वी ककड़ी जैसी लगती है। वे उसे एक रोग मानती हैं, जिसे उन्होंने कभी देखा, सुना या अपनाया नहीं। उनका मन तो पहले से कृष्ण-प्रेम में डूबा है।

चकरी जैसे मन वालों का ज़िक्र गोपियाँ किस संदर्भ में करती हैं?

गोपियाँ कहती हैं कि योग उन्हें दो, जिनका मन चकरी जैसा चंचल है। योग मन को स्थिर करता है। गोपियों का मन तो पहले ही कृष्ण में स्थिर है।

गोपियों ने हरि के राजनीति पढ़ आने की बात क्यों कही?

मथुरा जाकर राजा बनने के बाद कृष्ण ख़ुद नहीं आए। उन्होंने उद्धव के हाथ योग का संदेश भेज दिया। गोपियों को लगा कि कृष्ण अब प्रेम के बजाय चालाकी और कूटनीति से काम ले रहे हैं।

गोपियाँ अपना मन वापस पाने की बात क्यों कहती हैं?

कृष्ण जाते समय गोपियों का मन चुरा ले गए थे। अब वे बदल गए हैं और योग का संदेश भेज रहे हैं। इसलिए गोपियाँ प्रेम भरी नाराज़गी में कहती हैं कि वे अपना मन वापस ले लेंगी।

राज धरम की जो परिभाषा गोपियाँ देती हैं, उसे समझाइए।

गोपियों के अनुसार राजा का धर्म यह है कि प्रजा को सताया न जाए। जो दूसरों को अन्याय से बचाता है, उसे ख़ुद अन्याय नहीं करना चाहिए।

गोपियों के वाक्चातुर्य की दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

पहली विशेषता तीखा व्यंग्य है, जैसे उद्धव को बड़भागी कहना। दूसरी विशेषता सधे तर्क हैं, जैसे यह कहना कि योग चंचल मन वालों को दो। इन बातों से ज्ञानी उद्धव निरुत्तर हो जाते हैं।

Long answer questions (3)

तीसरे पद के आधार पर गोपियों के कृष्ण-प्रेम और योग के प्रति उनके दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।

तीसरे पद में गोपियाँ कहती हैं कि कृष्ण उनके लिए हारिल की लकड़ी हैं। जैसे हारिल पक्षी पंजों में लकड़ी कसकर दबाए रहता है, वैसे ही गोपियों ने मन, कर्म और वचन से कृष्ण को थाम रखा है। जागते, सोते, सपने में, दिन-रात उनकी रट कान्ह-कान्ह की है। इसके उलट योग उन्हें कड़वी ककड़ी जैसा लगता है। वे उसे एक रोग कहती हैं, जिसे उन्होंने न कभी देखा, न सुना, न अपनाया। अंत में वे तीखा तर्क देती हैं कि योग उन्हें दो, जिनका मन चकरी जैसा चंचल है। योग मन को स्थिर करता है, और गोपियों का मन तो पहले ही कृष्ण में स्थिर है। इस तरह उनका एकनिष्ठ प्रेम योग को बेकार साबित कर देता है।

गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य से ज्ञानी उद्धव को कैसे परास्त किया? पदों के आधार पर लिखिए।

गोपियों का वाक्चातुर्य कई तरह से दिखता है। सबसे पहले व्यंग्य: वे उद्धव को बड़भागी कहती हैं, जबकि उनका मतलब है कि प्रेम से अछूते रहना दुर्भाग्य है। वे कहती हैं कि हरि राजनीति पढ़ आए हैं और उनकी बढ़ी बुद्धि का प्रमाण योग का संदेश है। दूसरा, तर्क: योग चंचल मन वालों को दो, हमारा मन तो स्थिर है; और जो अन्याय छुड़ाते थे, वे ख़ुद अन्याय क्यों करें? तीसरा, घरेलू उदाहरण: कमल का पत्ता, तेल की गगरी, गुड़ की चींटी, हारिल की लकड़ी और कड़वी ककड़ी। चौथा, उलाहना और साहस: वे कृष्ण से अपना मन वापस लेने की बात करती हैं और राजधर्म याद दिलाती हैं। इन सबके पीछे सच्चे प्रेम की ताक़त है, जिसके सामने उद्धव का किताबी ज्ञान निरुत्तर हो जाता है।

राजनीति वाले ताने को आज के सार्वजनिक जीवन से जोड़कर देखिए। क्या यह आज भी सटीक लगता है? अपने विचार लिखिए।

गोपियों का यह ताना कृष्ण के उस बदलाव पर है, जिसमें वे सीधे प्रेम निभाने के बजाय दूसरों के ज़रिए चतुराई से संदेश भेजते हैं। आज की राजनीति में भी कई बार ऐसा दिखता है। चुनाव से पहले नेता जनता के बीच आते हैं, वादे करते हैं, पर जीतने के बाद कई लोग दूर हो जाते हैं। तब जनता की बात सीधे सुनने के बजाय संदेश, घोषणाएँ और भाषण भेजे जाते हैं, जैसे कृष्ण ने उद्धव को भेजा। जनता को लगता है कि उसका दुख समझा नहीं जा रहा। पर गोपियाँ हमें यह भी सिखाती हैं कि जनता को चुप नहीं रहना चाहिए। उन्होंने साफ़ कहा कि राजधर्म प्रजा को न सताना है। लोकतंत्र में भी नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों से सवाल पूछने और उन्हें उनका कर्तव्य याद दिलाने का अधिकार है।

Flashcards (17)

हारिल क्या है?
एक पक्षी, जो पंजों में लकड़ी दबाए रहता है।
गोपियों के लिए हारिल की लकड़ी कौन हैं?
कृष्ण।
मन क्रम बचन का अर्थ?
मन, कर्म और वचन से।
नंद-नंदन किसे कहा गया है?
कृष्ण को।
जक री का अर्थ?
रट लगी है, धुन लगी है।
करुई ककरी का अर्थ?
कड़वी ककड़ी।
ब्याधि का अर्थ?
रोग, बीमारी।
गोपियाँ योग किन्हें देने को कहती हैं?
जिनका मन चकरी की तरह चंचल है।
चकरी का अर्थ?
फिरकी, जो गोल घूमती है।
हरि अब क्या पढ़ आए हैं?
राजनीति।
मधुकर किसे कहा गया है?
भौंरे को, इशारा उद्धव की ओर।
पठाए का अर्थ?
भेजे।
पुराने भले लोग क्या करते थे?
दूसरों की भलाई के लिए दौड़ते थे।
गोपियाँ क्या वापस पाना चाहती हैं?
अपना मन, जिसे कृष्ण चुरा ले गए।
अनीति का अर्थ?
अन्याय।
गोपियों के अनुसार राजधर्म क्या है?
प्रजा को न सताना।
वाग्विदग्धता का अर्थ?
बात कहने की चतुराई।

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  • शब्द और अर्थ
  • तीसरा पद या चौथा पद
  • सही या भ्रम
  • चौथे पद के भाव का क्रम
  • झटपट उत्तर

Class 10 Hindi Chapter 1 — frequently asked questions

सूरदास के जीवन और रचनाओं का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

सूरदास का जन्म सन् 1478 के आसपास माना जाता है। वे वल्लभाचार्य के शिष्य और अष्टछाप के प्रमुख कवि थे। उनकी रचनाएँ सूरसागर, साहित्य लहरी और सूर सारावली हैं। सन् 1583 में पारसौली में उनका देहांत हुआ।

भ्रमरगीत प्रसंग की पृष्ठभूमि लिखिए।

कृष्ण मथुरा जाकर लौटे नहीं। उन्होंने उद्धव को गोपियों के पास योग का संदेश लेकर भेजा। गोपियों को यह संदेश अच्छा नहीं लगा। वहाँ आए एक भौंरे के बहाने उन्होंने उद्धव पर व्यंग्य किए।

गोपियों ने उद्धव को बड़भागी क्यों कहा है?

ऊपर से यह तारीफ़ लगती है, पर असल में व्यंग्य है। उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी प्रेम से अछूते हैं। उन्होंने प्रेम का सुख नहीं जाना, इसलिए विरह का दुख भी नहीं जानते।

हारिल की लकड़ी के उदाहरण से गोपियाँ क्या कहना चाहती हैं?

हारिल पक्षी हमेशा पंजों में लकड़ी दबाए रहता है और उसे नहीं छोड़ता। गोपियाँ कहती हैं कि कृष्ण उनके लिए वैसी ही लकड़ी हैं। उन्होंने मन, कर्म और वचन से कृष्ण को कसकर थाम रखा है।

गोपियों को योग की बात कैसी लगती है और क्यों?

गोपियों को योग की बात कड़वी ककड़ी जैसी लगती है। वे उसे एक रोग मानती हैं, जिसे उन्होंने कभी देखा, सुना या अपनाया नहीं। उनका मन तो पहले से कृष्ण-प्रेम में डूबा है।

चकरी जैसे मन वालों का ज़िक्र गोपियाँ किस संदर्भ में करती हैं?

गोपियाँ कहती हैं कि योग उन्हें दो, जिनका मन चकरी जैसा चंचल है। योग मन को स्थिर करता है। गोपियों का मन तो पहले ही कृष्ण में स्थिर है।

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