Class 10 Hindi Chapter 14: साना-साना हाथ जोड़ि

साना-साना हाथ जोड़ि is Chapter 14 of NCERT / CBSE Class 10 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
  • 2 topics
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गंतोक से आगे: सौंदर्य का सम्मोहन और श्रम का सच

मधु कांकरिया के यात्रा-वृत्तांत में गंतोक की तारों भरी रात, बौद्ध पताकाएँ, तिस्ता नदी और सेवन सिस्टर्स झरना मन मोह लेते हैं। पर रास्ते में पत्थर तोड़ती पहाड़िनें लेखिका को याद दिलाती हैं कि इस सुंदरता के पीछे कठोर श्रम है।

What you will be able to do

  • मधु कांकरिया के जीवन, रचनाओं और यात्रा-वृत्तांत विधा का परिचय दे सकेंगे।
  • गंतोक की रात और नेपाली प्रार्थना के प्रसंग से लेखिका के सम्मोहन को समझा सकेंगे।
  • जितेन नार्गे से मिली सिक्किम की धार्मिक और भौगोलिक जानकारियाँ बता सकेंगे।
  • हिमालय, तिस्ता और सेवन सिस्टर्स झरने के वर्णन में लेखिका की अनुभूति स्पष्ट कर सकेंगे।
  • पत्थर तोड़ती पहाड़िनों के प्रसंग से आम लोगों के श्रम का महत्त्व समझा सकेंगे।

Key points

  • मधु कांकरिया का जन्म सन् 1957 में कोलकाता में हुआ; यह पाठ सिक्किम की यात्रा पर लिखा उनका यात्रा-वृत्तांत है।

  • रात में जगमगाता गंतोक लेखिका को ऐसा लगा, जैसे आसमान उलटकर नीचे बिछ गया हो और तारे धरती पर चमक रहे हों।

  • साना-साना हाथ जोड़ि एक नेपाली प्रार्थना है, जिसमें छोटे हाथ जोड़कर जीवन को भलाई में लगाने की कामना है।

  • बादलों के कारण लेखिका को बालकनी से कंचनजंघा नहीं दिखी, पर सामने खिले रंग-बिरंगे फूलों ने मन भर दिया।

  • ड्राइवर और गाइड जितेन नार्गे ने बताया कि बौद्ध की मृत्यु पर एक सौ आठ सफ़ेद पताकाएँ और नए काम पर रंगीन पताकाएँ लगती हैं।

  • कवी-लोंग स्टॉक में घूमते धर्म-चक्र को देखकर लेखिका को लगा कि पहाड़ हो या मैदान, देश की आस्थाएँ एक जैसी हैं।

  • ऊँचाई बढ़ने के साथ हिमालय विराट होता गया, रास्ते सँकरे और घुमावदार हुए, और तिस्ता नदी का सौंदर्य चरम पर दिखा।

  • सेवन सिस्टर्स झरने के पास लेखिका को लगा कि उसके भीतर की सारी बुराइयाँ निर्मल धारा में बह गईं।

  • पत्थर तोड़ती पहाड़िनों को देखकर लेखिका ने महसूस किया कि वे बहुत कम पाकर भी समाज को बहुत ज़्यादा लौटाती हैं।

Full explanation

मधु कांकरिया और यात्रा-वृत्तांत की विधा

मधु कांकरिया आज की चर्चित कथाकार हैं। उनका जन्म सन् 1957 में कोलकाता में हुआ। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम.ए. किया और कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा भी लिया। उनके उपन्यासों में खुले गगन के लाल सितारे, सलाम आख़िरी, पत्ताखोर और सेज पर संस्कृत प्रमुख हैं। बीतते हुए और और अंत में ईसु उनके कहानी-संग्रह हैं। उनकी रचनाओं में समाज की सच्चाइयाँ, जैसे नशे की लत, लालबत्ती इलाक़ों का जीवन और आम लोगों का संघर्ष, बड़ी संवेदना से उभरती हैं। उन्होंने यात्रा-वृत्तांत भी लिखे हैं।

साना-साना हाथ जोड़ि सिक्किम की यात्रा पर आधारित एक यात्रा-वृत्तांत है। यात्रा-वृत्तांत में लेखक केवल जगहों के नाम नहीं गिनाता। वह बताता है कि वहाँ के पहाड़, नदियाँ, लोग, रीति-रिवाज़ और मुश्किलें कैसी हैं, और इन सबका उसके मन पर क्या असर पड़ा। इस पाठ की ख़ूबी यही है कि इसमें प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य भी है और उस सौंदर्य के बीच जी रहे लोगों की कठिन ज़िंदगी भी।

लेखिका गंतोक से यूमथांग, लायुंग और कटाओ तक जाती हैं। रास्ते भर उनके साथ ड्राइवर और गाइड जितेन नार्गे और उनकी सहेली मणि हैं। पूरी यात्रा में बाहर का सफ़र और मन के भीतर का सफ़र साथ-साथ चलते हैं। पाठ की भाषा काव्यात्मक है, जिसमें उपमाएँ, बिंब और बीच-बीच में नेपाली तथा अंग्रेज़ी के शब्द कथा को जीवंत बनाते हैं।

गंतोक की रात और एक नेपाली प्रार्थना

यात्रा की शुरुआत एक जादुई रात से होती है। लेखिका ने रात में नीचे की ओर देखा, तो हैरान रह गईं। ढलान पर बसे शहर की रोशनियाँ ऐसी लग रही थीं, जैसे आकाश उलट गया हो और सारे तारे नीचे बिखरकर टिमटिमा रहे हों। यह रात में जगमगाता गंतोक था।

लेखिका गंतोक को मेहनतकश बादशाहों का शहर कहती हैं। यह शहर इतिहास और वर्तमान के मिलन-बिंदु पर खड़ा है। यहाँ के लोग कठिन पहाड़ी जीवन में भी कड़ी मेहनत करते हैं, और अपने श्रम से इस शहर को सुंदर बनाए रखते हैं। इसीलिए वे सचमुच बादशाह हैं, पर मेहनत के बादशाह। लेखिका के अनुसार इस शहर की सुबह, शाम और रात, सब कुछ सुंदर है।

उस रात का दृश्य लेखिका पर ऐसा सम्मोहन डालता है कि उन्हें अपना होना ही भूल जाता है। भीतर-बाहर एक ख़ालीपन है, और उसमें बस रोशनी की वह झालर चमक रही है। धीरे-धीरे उस ख़ालीपन से एक उजाला फूटता है, और होंठों पर एक प्रार्थना आ जाती है: साना-साना हाथ जोड़ि। यह नेपाली प्रार्थना उन्होंने उसी सुबह एक नेपाली युवती से सीखी थी। इसका भाव है कि मैं अपने छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ कि मेरा पूरा जीवन अच्छाइयों को अर्पित हो। पाठ का शीर्षक इसी प्रार्थना से लिया गया है।

कंचनजंघा, जितेन नार्गे और सफ़ेद पताकाएँ

अगली सुबह यूमथांग के लिए निकलना था, पर लेखिका सबसे पहले बालकनी की ओर भागीं। लोगों ने बताया था कि मौसम साफ़ हो, तो वहीं से कंचनजंघा दिखती है। पर आसमान बादलों से ढका था, और चोटी नहीं दिखी। लेखिका कहती हैं कि बादलों के किवाड़ मंदिर के बंद कपाटों जैसे बंद ही रहे। फिर भी सामने इतने तरह-तरह के फूल खिले थे कि लगा, जैसे फूलों के बाग़ में आ गई हों।

गंतोक से यूमथांग लगभग 149 किलोमीटर दूर था। जीप चलाने वाला जितेन नार्गे गाइड का काम भी कर रहा था। उसने बताया कि यूमथांग का अर्थ है घाटियाँ, और रास्ते भर फूलों से भरी गहरी घाटियाँ मिलेंगी। पाइन और धूपी के नुकीले पेड़ों के बीच से गुज़रते हुए एक जगह सफ़ेद बौद्ध पताकाओं की कतार दिखी। इन पर मंत्र लिखे थे, और ये शांति और अहिंसा की प्रतीक थीं।

नार्गे ने बताया कि यहाँ बुद्ध को बहुत माना जाता है। किसी बौद्ध की मृत्यु होने पर उसकी आत्मा की शांति के लिए किसी पवित्र जगह पर एक सौ आठ सफ़ेद पताकाएँ लगाई जाती हैं। इन्हें उतारा नहीं जाता, ये धीरे-धीरे अपने-आप नष्ट हो जाती हैं। किसी नए काम की शुरुआत पर भी पताकाएँ लगती हैं, पर वे रंगीन होती हैं। लेखिका ने नार्गे की जीप में और कई दुकानों पर दलाई लामा की तस्वीरें भी देखीं, जो इस इलाक़े में बौद्ध आस्था की गहराई दिखाती हैं।

कवी-लोंग स्टॉक और घूमता धर्म-चक्र

आगे एक जगह आई, जिसका नाम कवी-लोंग स्टॉक था। जितेन ने बताया कि यहाँ गाइड फ़िल्म की शूटिंग हुई थी। यहीं तिब्बत के एक प्रमुख और लेपचा समुदाय के एक प्रमुख ने संधि-पत्र पर हस्ताक्षर किए थे, और इसकी याद में एक पत्थर भी लगा है। सिक्किम की दो स्थानीय जातियों, लेपचा और भुटिया, के बीच लंबे झगड़ों के बाद शांति की बातचीत यहीं से शुरू हुई थी।

इन्हीं रास्तों पर लेखिका ने एक कुटिया में घूमता हुआ एक चक्र देखा। नार्गे ने बताया कि यह धर्म-चक्र, यानी प्रेयर व्हील है, और इसे घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। यह सुनकर लेखिका सोच में पड़ गईं। उन्हें लगा कि मैदान हो या पहाड़, विज्ञान ने कितनी भी तरक़्क़ी कर ली हो, इस देश की आत्मा एक जैसी है। लोगों के विश्वास, अंधविश्वास, पाप और पुण्य की धारणाएँ सब जगह मिलती-जुलती हैं।

यह टिप्पणी बहुत अर्थपूर्ण है। जैसे मैदानों में लोग गंगा में डुबकी लगाकर पाप धोने की बात करते हैं, वैसे ही पहाड़ों में चक्र घुमाकर। रूप अलग है, भाव एक। इसीलिए लेखिका को लगता है कि पूरे देश का मन एक है।

विराट हिमालय, तिस्ता और सेवन सिस्टर्स

जीप धीरे-धीरे ऊँचाई की ओर बढ़ने लगी। बाज़ार और बस्तियाँ पीछे छूट गईं। राह में ऊन बुनती नेपाली लड़कियाँ और बोझ उठाए लोग भी दिखने बंद हो गए। नीचे घाटियों में पेड़ों के बीच घर ताश के घरों जैसे छोटे दिखने लगे। अब हिमालय छोटी पहाड़ियों के रूप में नहीं, अपने पूरे विराट रूप में सामने आने लगा। रास्ते सुनसान, सँकरे और जलेबी की तरह घुमावदार हो गए।

बाक़ी सैलानी इस सुंदरता पर झूमकर फ़िल्मी गीत गाने लगे, पर लेखिका चुप थीं, किसी ऋषि की तरह शांत। वे इस सारे दृश्य को अपने भीतर भर लेना चाहती थीं। जीप की खिड़की से सिर निकालकर वे कभी आसमान छूती चोटियाँ देखतीं, कभी दूध की धार जैसे गिरते झरने, और कभी नीचे चिकने पत्थरों के बीच चाँदी-सी चमकती तिस्ता नदी। तिस्ता सिलीगुड़ी से साथ थी, पर यहाँ उसका सौंदर्य शिखर पर था।

फिर जीप सेवन सिस्टर्स नाम के झरने के पास रुकी, जो बहुत ऊँचाई से पूरे वेग के साथ गिर रहा था। सैलानी तस्वीरें खींचने में लग गए, पर लेखिका पत्थरों पर बैठकर झरने का संगीत सुनने लगीं। उन्होंने बहती धारा में पाँव डुबोए, तो लगा भीतर तक भीग गई हैं। उन्हें लगा, जैसे वे ख़ुद भी देश और काल की सीमाओं से परे एक धारा बनकर बह रही हैं। भीतर की सारी बुराइयाँ और बुरी इच्छाएँ उस निर्मल पानी में बह गईं। वहाँ से उठने का मन ही नहीं था, पर जितेन ने आगे और सुंदर दृश्यों का वादा करके उन्हें उठा दिया।

माया-छाया का खेल और पत्थर तोड़ती पहाड़िनें

आगे के दृश्य पल-पल बदलते रहे। कहीं हरियाली का मोटा क़ालीन, कहीं हल्का पीलापन, कहीं उखड़े पलस्तर वाली दीवार जैसी पथरीली ज़मीन। फिर अचानक बादलों की मोटी चादर ने सब ढक लिया। धुंध छँटी, तो दो दिशाओं से आते छाया-पहाड़ दिखे। लेखिका को लगा, जैसे प्रकृति उन्हें समझदार बनाने के लिए जीवन के रहस्य खोल रही है। एक जगह थिंक ग्रीन लिखा था। झरने, नदी, धुंध, बादल और फूल, सब अपनी लय में बह रहे थे। लेखिका को महसूस हुआ कि जीवन का आनंद इसी चलते रहने वाले सौंदर्य में है, और वे सचमुच ईश्वर के निकट हैं।

तभी यह अलौकिक संसार टूटकर बिखर गया। लेखिका ने देखा कि इस अनुपम सौंदर्य से बेख़बर कुछ पहाड़ी औरतें बैठी पत्थर तोड़ रही थीं। कोमल शरीर, और हाथों में कुदाल और हथौड़े। कई की पीठ पर बँधी बड़ी टोकरी में उनके बच्चे भी थे। स्वर्ग जैसी सुंदरता के बीच भूख, ग़रीबी और जीने की यह लड़ाई! मातृत्व और मेहनत, दोनों साथ-साथ।

सीमा सड़क संगठन के एक कर्मचारी ने बताया कि ये औरतें उन्हीं सड़कों को चौड़ा कर रही हैं, जिन पर सैलानी घूमने जाते हैं। यह काम बहुत ख़तरनाक है, और पिछले महीने एक की जान भी गई थी। लेखिका को पलामू और गुमला के जंगलों की आदिवासी औरतें याद आईं, जो पीठ पर बच्चा बाँधकर पत्ते बटोरती थीं। उन्हें लगा कि आम लोगों की कहानी हर जगह एक-सी है: सुख एक तरफ़, और अभाव, दुख और वंचना दूसरी तरफ़।

जितेन ने कहा कि ऐसे लोग तो कहीं भी दिख जाते हैं, आप पहाड़ों की सुंदरता देखिए। पर लेखिका ने मन में सोचा कि ये लोग बहुत कम लेकर समाज को बहुत ज़्यादा लौटाते हैं। तभी वे मेहनतकश औरतें किसी बात पर खिलखिलाकर हँस पड़ीं। उस हँसी से पूरा उजड़ा दृश्य जैसे ताजमहल-सा सुंदर हो उठा।

Concepts and terms

यात्रा-वृत्तांत

किसी यात्रा के स्थानों, लोगों और मन पर पड़े प्रभावों का रोचक, आत्मीय वर्णन।

सम्मोहन

ऐसा आकर्षण, जिसमें व्यक्ति बाक़ी सब भूलकर किसी दृश्य में खो जाए।

धर्म-चक्र

मंत्र लिखा घूमने वाला बेलन, जिसे घुमाने से पाप धुलने की मान्यता है।

श्रम-सौंदर्य

मेहनत करते लोगों में दिखने वाली सुंदरता, जो बाहरी चमक से नहीं, जीवट से आती है।

अतींद्रियता

इंद्रियों से परे का अनुभव, जिसमें मन किसी अलौकिक आनंद में डूब जाए।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

यात्रा-डायरी का एक पन्ना

Safety:

किसी की तस्वीर उसकी अनुमति के बिना मत खींचिए।

What You Notice:

आप पाएँगे कि हर सुंदर सफ़र के पीछे बहुत-से अनदेखे हाथों की मेहनत है।

Did you know

कंचनजंघा हिमालय की सबसे ऊँची चोटियों में गिनी जाती है और सिक्किम तथा नेपाल की सीमा पर स्थित है।

तिस्ता नदी सिक्किम से निकलकर पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र से मिल जाती है।

प्रेयर व्हील, यानी धर्म-चक्र, पर बौद्ध मंत्र लिखे होते हैं, और श्रद्धालु इसे घड़ी की सुई की दिशा में घुमाते हैं।

Memory tricks

पताकाओं का रंग: श्वे-मृ, रं-न — श्वेत यानी सफ़ेद पताकाएँ मृत्यु पर; रंगीन पताकाएँ नए काम की शुरुआत पर।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 साना-साना हाथ जोड़ि पाठ की विधा क्या है? beginner
  • A संस्मरण
  • B रेखाचित्र
  • C रिपोर्ताज
  • D यात्रा-वृत्तांत
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Answer: यात्रा-वृत्तांत
Why:

सिक्किम।

Q2 मधु कांकरिया की रचनाओं में किस तरह के विषय प्रमुख हैं? intermediate
  • A समाज की कड़वी सच्चाइयाँ
  • B केवल राजा-रानियों की पुरानी कहानियाँ
  • C केवल हास्य
  • D केवल विज्ञान
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Answer: समाज की कड़वी सच्चाइयाँ
Why:

आम लोगों का संघर्ष।

Q3 रात के गंतोक को देखकर लेखिका को कैसा लगा? intermediate
  • A जैसे पूरा शहर अचानक अँधेरे में डूब गया हो
  • B जैसे आसमान उलटकर नीचे बिछ गया हो
  • C जैसे आग लगी हो
  • D जैसे बारिश हो रही हो
Show answer
Answer: जैसे आसमान उलटकर नीचे बिछ गया हो
Why:

तारे नीचे।

Q4 गंतोक के लोगों को मेहनतकश बादशाह कहने का आधार क्या है? advanced
  • A उनके पास बहुत बड़े-बड़े महल और ख़ज़ाने होना
  • B उनका राजघराने से होना
  • C कठिन जीवन में भी मेहनत से शहर सँवारना
  • D उनका आलसी होना
Show answer
Answer: कठिन जीवन में भी मेहनत से शहर सँवारना
Why:

श्रम के बादशाह।

Q5 साना-साना हाथ जोड़ि प्रार्थना में क्या कामना है? beginner
  • A जीवन अच्छाइयों को अर्पित हो
  • B ढेर सारा धन और ऊँचा पद मिले
  • C यात्रा जल्दी ख़त्म हो
  • D बर्फ़ गिरे
Show answer
Answer: जीवन अच्छाइयों को अर्पित हो
Why:

छोटे हाथ।

Q6 बालकनी से कंचनजंघा क्यों नहीं दिखी? beginner
  • A बालकनी की दिशा पूरी तरह उलटी थी
  • B आसमान बादलों से ढका था
  • C रात हो गई थी
  • D लेखिका सो गई थीं
Show answer
Answer: आसमान बादलों से ढका था
Why:

कपाट बंद।

Q7 बादलों के कपाट ठाकुर जी के कपाट जैसे बंद रहे, इस कथन में कौन-सा अलंकार है? intermediate
  • A यमक
  • B श्लेष
  • C उपमा
  • D अनुप्रास
Show answer
Answer: उपमा
Why:

जैसे, की तरह।

Q8 यूमथांग शब्द का अर्थ क्या बताया गया? intermediate
  • A बर्फ़
  • B झरना
  • C नदी
  • D घाटियाँ
Show answer
Answer: घाटियाँ
Why:

जितेन।

Q9 सफ़ेद और रंगीन पताकाओं में क्या अंतर है? intermediate
  • A सफ़ेद त्योहार पर और रंगीन युद्ध के समय
  • B सफ़ेद मृत्यु पर, रंगीन नए काम की शुरुआत पर
  • C दोनों एक ही अवसर पर
  • D कोई अंतर नहीं
Show answer
Answer: सफ़ेद मृत्यु पर, रंगीन नए काम की शुरुआत पर
Why:

शांति और शुभारंभ।

Q10 किसी बौद्ध की मृत्यु पर कितनी पताकाएँ लगाई जाती हैं? intermediate
  • A एक सौ एक
  • B इक्यावन
  • C एक सौ आठ
  • D इक्कीस
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Answer: एक सौ आठ
Why:

सफ़ेद।

Q11 जीप और दुकानों पर दलाई लामा की तस्वीरें किस बात का संकेत हैं? intermediate
  • A तस्वीरें बेचने के बहुत बड़े व्यापार का
  • B फ़िल्मों का शौक़
  • C राजनीति
  • D इलाक़े में बौद्ध आस्था की गहराई
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Answer: इलाक़े में बौद्ध आस्था की गहराई
Why:

बुद्ध की मान्यता।

Q12 कवी-लोंग स्टॉक ऐतिहासिक रूप से क्यों महत्त्वपूर्ण है? advanced
  • A शांति-वार्ता की शुरुआत यहीं हुई
  • B यहाँ भारत की पहली रेलगाड़ी चली थी
  • C यहाँ बर्फ़ सबसे ज़्यादा गिरती है
  • D यहाँ हवाई अड्डा है
Show answer
Answer: शांति-वार्ता की शुरुआत यहीं हुई
Why:

संधि-पत्र।

Q13 घूमते धर्म-चक्र ने लेखिका को देश की साझी आस्था का एहसास क्यों कराया? advanced
  • A पूरे देश में एक ही तरह के धर्म-चक्र बनाए जाते हैं
  • B सब एक भाषा बोलते हैं
  • C पाप-पुण्य की धारणाएँ सब जगह एक-सी हैं
  • D सब पहाड़ों में रहते हैं
Show answer
Answer: पाप-पुण्य की धारणाएँ सब जगह एक-सी हैं
Why:

पहाड़ हो या मैदान।

Q14 ऊँचाई बढ़ने पर नीचे घाटियों के घर कैसे दिखने लगे? beginner
  • A ताश के घरों जैसे
  • B बड़े महलों जैसे
  • C पहाड़ों जैसे
  • D जहाज़ों जैसे
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Answer: ताश के घरों जैसे
Why:

छोटे-छोटे।

Q15 सैलानियों के गाने के समय लेखिका का चुप रहना क्या दिखाता है? intermediate
  • A सफ़र से ऊब और गहरी उदासी
  • B सैलानियों से नाराज़गी
  • C गला ख़राब होना
  • D दृश्य को भीतर उतारने की चाह
Show answer
Answer: दृश्य को भीतर उतारने की चाह
Why:

ऋषि की तरह।

Q16 चाँदी की तरह चमकती तिस्ता, इसमें नदी की किस बात पर ज़ोर है? beginner
  • A उसका गंदा और मटमैला पानी
  • B उसकी चमक और सुंदरता
  • C उसकी गहराई
  • D उसकी ठंडक
Show answer
Answer: उसकी चमक और सुंदरता
Why:

कौंध।

Q17 सेवन सिस्टर्स झरने के पास लेखिका को कैसी अनुभूति हुई? intermediate
  • A डर और बहुत ज़्यादा थकान की
  • B भूख की
  • C ऊब की
  • D भीतर की बुराइयाँ बह जाने की
Show answer
Answer: भीतर की बुराइयाँ बह जाने की
Why:

निर्मल धारा।

Q18 चलायमान सौंदर्य को जीवन का आनंद कहने के पीछे क्या विचार है? advanced
  • A जीवन में ठहराव ही सबसे बड़ा आनंद है
  • B यात्रा थकाऊ है
  • C सब कुछ बहता है, और यही गति सुंदर है
  • D प्रकृति स्थिर है
Show answer
Answer: सब कुछ बहता है, और यही गति सुंदर है
Why:

चरैवेति।

Q19 लेखिका का अलौकिक आनंद किस दृश्य से टूट गया? beginner
  • A पत्थर तोड़ती पहाड़ी औरतों से
  • B बर्फ़ से ढकी ऊँची चोटियों से
  • C झरने से
  • D याक से
Show answer
Answer: पत्थर तोड़ती पहाड़ी औरतों से
Why:

कुदाल, हथौड़े।

Q20 पीठ पर बच्चे बाँधकर पत्थर तोड़ती औरतें किस सच को सामने लाती हैं? intermediate
  • A पहाड़ों पर जीवन बहुत आसान और आरामदायक है
  • B मातृत्व और कठोर श्रम साथ-साथ
  • C बच्चे खेल रहे हैं
  • D औरतें घूमने आई हैं
Show answer
Answer: मातृत्व और कठोर श्रम साथ-साथ
Why:

जीने की जंग।

Q21 पत्थर तोड़ती औरतों को देखकर लेखिका को किन जंगलों की आदिवासी औरतें याद आईं? advanced
  • A सुंदरबन और गिर
  • B कान्हा और बांधवगढ़
  • C जिम कॉर्बेट और राजाजी
  • D पलामू और गुमला
Show answer
Answer: पलामू और गुमला
Why:

पत्तों की तलाश।

Q22 कम लेकर समाज को ज़्यादा लौटाने वाली बात किनके लिए कही गई है? intermediate
  • A मेहनतकश आम लोगों के लिए
  • B बड़े उद्योगपतियों और बहुत अमीर व्यापारियों के लिए
  • C सैलानियों के लिए
  • D फ़ौजियों के लिए
Show answer
Answer: मेहनतकश आम लोगों के लिए
Why:

श्रम-सुंदरियाँ।

Q23 मेहनतकश औरतों की हँसी से खंडहर ताजमहल बन गया, इसका भाव क्या है? advanced
  • A वहाँ सचमुच ताजमहल जैसी इमारत बन गई
  • B औरतें मज़ाक उड़ा रही थीं
  • C मेहनत के बीच की हँसी जीवन सँवारती है
  • D लेखिका डर गईं
Show answer
Answer: मेहनत के बीच की हँसी जीवन सँवारती है
Why:

जीवन लहराया।

Q24 अभिकथन: लेखिका को घूमते धर्म-चक्र में पूरे भारत की आत्मा दिखी। कारण: पहाड़ों और मैदानों में लोगों की आस्थाएँ और धारणाएँ मिलती-जुलती हैं। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

एक आत्मा।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. मृत्यु पर एक सौ आठ सफ़ेद पताकाएँ लगती हैं। II. लेखिका ने गंतोक की बालकनी से कंचनजंघा देखी। III. तिस्ता नदी सिलीगुड़ी से साथ चल रही थी। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C I, II और III तीनों
  • D केवल I और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

बादलों ने ढक लिया।

Important short questions (7)

रात के जगमगाते गंतोक ने लेखिका पर कैसा जादू किया?

ढलान पर बसे शहर की रोशनियाँ ऐसी लग रही थीं, जैसे आसमान उलटकर नीचे बिछ गया हो। लेखिका उस दृश्य में ऐसी खोईं कि अपना होना ही भूल गईं, और होंठों पर प्रार्थना आ गई।

पाठ के शीर्षक का अर्थ और स्रोत बताइए।

यह एक नेपाली प्रार्थना की पंक्ति है, जो लेखिका ने एक नेपाली युवती से सीखी। इसका भाव है कि छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि जीवन अच्छाइयों को अर्पित हो।

सफ़ेद और रंगीन बौद्ध पताकाएँ किन अवसरों पर लगाई जाती हैं?

किसी बौद्ध की मृत्यु पर उसकी आत्मा की शांति के लिए एक सौ आठ सफ़ेद पताकाएँ लगती हैं। किसी नए काम की शुरुआत पर रंगीन पताकाएँ लगाई जाती हैं।

कवी-लोंग स्टॉक के बारे में जितेन ने क्या बताया?

उसने बताया कि यहाँ गाइड फ़िल्म की शूटिंग हुई थी। यहीं लेपचा और भुटिया के लंबे झगड़ों के बाद शांति का संधि-पत्र लिखा गया, जिसकी याद में एक पत्थर लगा है।

ऊपर चढ़ते हुए हिमालय का रूप कैसे बदला?

पहले छोटी पहाड़ियाँ थीं, फिर हिमालय विराट और विशाल होता गया। रास्ते सँकरे और घुमावदार हुए, घाटियाँ गहरी हुईं, और बीच-बीच में रंगीन फूल खिले दिखे।

सेवन सिस्टर्स झरने के पास लेखिका ने क्या अनुभव किया?

झरने के संगीत में उन्हें आत्मा का संगीत सुनाई दिया। धारा में पाँव डुबोकर लगा कि वे ख़ुद एक धारा बन गई हैं, और भीतर की बुराइयाँ बह गईं।

पत्थर तोड़ती पहाड़िनों के बारे में लेखिका की क्या धारणा बनी?

उन्हें लगा कि ये औरतें बहुत कम मज़दूरी पाकर भी समाज को बहुत कुछ लौटाती हैं। सैलानी जिन सड़कों पर घूमते हैं, वे इन्हीं के ख़तरनाक श्रम से बनती हैं।

Long answer questions (3)

गाइड जितेन से लेखिका को सिक्किम के भूगोल, प्रकृति और लोगों के बारे में क्या-क्या पता चला?

जितेन नार्गे ड्राइवर के साथ एक अच्छा गाइड भी था। उसने बताया कि गंतोक से यूमथांग लगभग 149 किलोमीटर है, और यूमथांग का अर्थ घाटियाँ है। उसने बौद्ध पताकाओं का अर्थ समझाया: मृत्यु पर सफ़ेद, नए काम पर रंगीन। कवी-लोंग स्टॉक में गाइड फ़िल्म की शूटिंग और लेपचा-भुटिया संधि की बात बताई। धर्म-चक्र का महत्त्व भी समझाया। उसने पहाड़ी बच्चों की कठिन ज़िंदगी, सड़कों के ख़तरे और यहाँ के लोगों की प्रकृति-पूजा के बारे में भी बताया। उसी ने समझाया कि शहर का सही नाम गंतोक है। इन जानकारियों ने यात्रा को केवल घूमना नहीं, सीखना भी बना दिया।

प्रकृति के आनंद में खोई लेखिका का मन किन दृश्यों ने बेचैन कर दिया?

सेवन सिस्टर्स झरने और छाया-पहाड़ों के बीच लेखिका ईश्वर के निकट होने जैसा अनुभव कर रही थीं। तभी कुछ दृश्यों ने उन्हें झकझोर दिया। पहला, पत्थर तोड़ती पहाड़ी औरतें, जिनके हाथों में कुदाल-हथौड़े और पीठ पर बच्चे बँधे थे। इसी से उन्हें पलामू और गुमला की आदिवासी औरतें याद आईं, जो बच्चे पीठ पर बाँधकर पत्ते बटोरती थीं। आगे स्कूल के लिए रोज़ लंबी चढ़ाई चढ़ते बच्चे, और कड़कड़ाती ठंड में सीमा पर तैनात फ़ौजी भी उन्हें उदास कर गए। इन दृश्यों ने उन्हें सिखाया कि सुंदरता के पीछे बहुत-से लोगों का कठोर श्रम और त्याग छिपा है।

पहाड़िनें थोड़ा पाकर समाज को बहुत देती हैं। इस विचार के आधार पर देश की आर्थिक प्रगति में आम जनता की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

लेखिका ने यह बात पत्थर तोड़ती पहाड़िनों के लिए सोची। ये औरतें बहुत कम मज़दूरी पाती हैं, फिर भी जान जोखिम में डालकर सड़कें बनाती हैं, जिन पर व्यापार और पर्यटन चलता है। देश की आर्थिक प्रगति में आम जनता की यही भूमिका है। किसान अनाज उगाता है, मज़दूर इमारतें, बाँध और कारख़ाने खड़े करता है। चाय बागानों में पत्तियाँ तोड़ने वाले, खदानों में काम करने वाले और घरों में काम करने वाले लोग भी अर्थव्यवस्था की नींव हैं। इनकी कमाई कम है, पर इनका योगदान सबसे बड़ा है। इसलिए उन्हें उचित मज़दूरी, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए।

Flashcards (17)

मधु कांकरिया का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सन् 1957, कोलकाता।
मधु कांकरिया का एक उपन्यास?
पत्ताखोर।
पाठ की विधा?
यात्रा-वृत्तांत।
शीर्षक किस भाषा की प्रार्थना से लिया गया?
नेपाली।
प्रार्थना किससे सीखी?
एक नेपाली युवती से।
बालकनी से कौन-सी चोटी देखनी थी?
कंचनजंघा।
गंतोक से यूमथांग की दूरी?
लगभग 149 किलोमीटर।
यूमथांग का अर्थ?
घाटियाँ।
ड्राइवर-गाइड का नाम?
जितेन नार्गे।
मृत्यु पर कितनी पताकाएँ?
एक सौ आठ सफ़ेद।
नए काम पर कैसी पताकाएँ?
रंगीन।
कवी-लोंग स्टॉक में किस फ़िल्म की शूटिंग हुई?
गाइड।
सिक्किम की दो स्थानीय जातियाँ?
लेपचा और भुटिया।
धर्म-चक्र घुमाने से क्या माना जाता है?
पाप धुल जाते हैं।
तिस्ता कहाँ से साथ थी?
सिलीगुड़ी से।
लेखिका की सहेली का नाम?
मणि।
पत्थर तोड़ती औरतें क्या बना रही थीं?
सड़कें चौड़ी कर रही थीं।

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  • शब्द और अर्थ
  • प्रकृति का सौंदर्य या मनुष्य का श्रम?
  • सही या भ्रम
  • यात्रा का क्रम (पहला भाग)
  • झटपट उत्तर

लायुंग, कटाओ और यूमथांग: बर्फ़, फ़ौजी और खोज का सौंदर्य

लायुंग की शांत रात में लेखिका को हिमालय दर्शन लगने लगता है। कटाओ की ताज़ा बर्फ़, मणि की जल-संचय वाली बात और सीमा के फ़ौजी उन्हें गहराई से छूते हैं। यूमथांग पहुँचकर वे समझती हैं कि मंज़िल से ज़्यादा रोमांचक उसका रास्ता है।

What you will be able to do

  • पहाड़ी बच्चों, चाय बागान की युवतियों और रास्ते की चेतावनियों के माध्यम से पहाड़ी जीवन समझा सकेंगे।
  • लायुंग की रात में लेखिका के मन में आए प्रकृति-दर्शन को स्पष्ट कर सकेंगे।
  • कटाओ के सौंदर्य, प्रदूषण से घटती बर्फ़ और दुकान न होने के महत्त्व पर विचार लिख सकेंगे।
  • हिमशिखरों द्वारा जल-संचय और सीमा पर फ़ौजियों के त्याग को समझा सकेंगे।
  • यूमथांग, गंतोक और सिक्किम के भारत से जुड़ाव से जुड़ी जानकारियाँ बता सकेंगे।

Key points

  • पहाड़ी बच्चे रोज़ तीन-साढ़े तीन किलोमीटर चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाते हैं और शाम को मवेशी चराने, पानी भरने और लकड़ी ढोने में मदद करते हैं।

  • सँकरे, ख़तरनाक रास्तों पर लगी चेतावनियाँ सावधानी से गाड़ी चलाने की सीख देती थीं; रास्ते में घने बालों वाले काले याक भी दिखे।

  • तिस्ता किनारे बसी शांत बस्ती लायुंग में लेखिका को लगा कि सच्चा सुख वहीं है, जहाँ पेड़, पशु और मनुष्य अपनी लय में हों।

  • लेखिका के अनुसार हमारी पीढ़ी ने प्रकृति की लय से छेड़छाड़ करके भारी अपराध किया है; हिमालय उनके लिए दर्शन बन गया।

  • एक सिक्किमी युवक ने बताया कि प्रदूषण के कारण बर्फ़बारी घट रही है, पर कटाओ में अब भी बर्फ़ मिलती है।

  • कटाओ पर्यटन-स्थल न बनने से अपने प्राकृतिक रूप में था; वहाँ एक भी दुकान नहीं थी।

  • मणि ने हिमशिखरों को एशिया के जल-स्तंभ कहा: सर्दी में बर्फ़ जमा होती है और गर्मी में पिघलकर नदियाँ भरती है।

  • माइनस पंद्रह डिग्री में तैनात फ़ौजियों को देखकर लेखिका को उनके त्याग का गहरा एहसास हुआ।

  • चिप्स बेचती युवती का ख़ुद को इंडियन कहना बताता है कि सिक्किम के लोग भारत से जुड़कर ख़ुश हैं।

Full explanation

स्कूल जाते पहाड़ी बच्चे और चेतावनियों वाले रास्ते

जीप लगातार ऊपर चढ़ रही थी। जितेन ने बताया कि अब हर मोड़ पर बालों की पिन जैसा तीखा मोड़ आएगा। ऐसे ही एक मोड़ से पहले लेखिका ने सात-आठ साल के बहुत-से पहाड़ी बच्चे देखे। वे स्कूल से लौट रहे थे और जीप वालों से लिफ़्ट माँग रहे थे।

जितेन ने बताया कि ये बच्चे रोज़ तीन-साढ़े तीन किलोमीटर की पहाड़ी चढ़ाई करके स्कूल जाते हैं। मणि ने पूछा कि क्या स्कूल बस नहीं है, तो जितेन हँस पड़ा। उसने कहा कि यह मैदान नहीं, पहाड़ है, और यहाँ ज़िंदगी कठोर है। नीचे तराई में बस एक ही स्कूल है, जहाँ दूर-दूर से बच्चे आते हैं। ये बच्चे सिर्फ़ पढ़ते ही नहीं, शाम को माँओं के साथ मवेशी चराते हैं, पानी भरते हैं और जंगल से लकड़ियों के भारी गट्ठर ढोते हैं। जितेन ने बताया कि बचपन में उसने भी यह सब किया था।

रास्ते अब और ख़तरनाक हो गए। लगता था, जैसे उन्हें नापकर एक जीप जितना ही चौड़ा बनाया गया हो। ज़रा-सा संतुलन बिगड़े, तो सीधे गहरी घाटी! जगह-जगह लगे बोर्ड यात्रियों को सावधान कर रहे थे। एक पर लिखा था कि धीरे चलाइए, घर में बच्चे इंतज़ार कर रहे हैं। एक बोर्ड पर आदमख़ोर जानवर की चेतावनी थी, पर लेखिका को आदमख़ोर नहीं, दूध देने वाले काले याक दिखे। उनके घने बाल उन्हें बर्फ़ से बचाते हैं।

शाम ढलते हुए रास्ते में गायें चराकर लौटती और सिर पर लकड़ियों के भारी गट्ठर लिए औरतें दिखीं। फिर जीप चाय के बागानों से गुज़री। वहाँ बोकु नाम का सिक्किमी पहनावा पहने युवतियाँ चाय की पत्तियाँ तोड़ रही थीं। एक युवती ने चटक लाल बोकु पहना था। हरियाली के बीच वह लाल रंग डूबते सूरज की सुनहरी रोशनी में ऐसा इंद्रधनुष रच रहा था कि लेखिका ख़ुशी से चीख पड़ीं। इतना सौंदर्य उनके लिए सहना कठिन हो गया।

लायुंग की शांत रात: हिमालय एक दर्शन

यूमथांग जाने के लिए रात लायुंग में बितानी थी। लायुंग ऊँचे पहाड़ों के तल में बसी एक छोटी, शांत बस्ती है, जहाँ भाग-दौड़ से दूर ज़िंदगी चैन से सोती है। सब तिस्ता के किनारे लकड़ी के एक छोटे घर में ठहरे। लेखिका तुरंत नदी किनारे पत्थरों पर जा बैठीं। सामने ऊपर से झरना गिरकर तिस्ता में मिल रहा था, हल्की हवा बह रही थी, और बादलों ने चाँद ढक रखा था।

वहाँ की शांति मंदिर की घंटियों और घुँघरुओं जैसी थी। लेखिका की आँखें भर आईं। उनके भीतर ज्ञान का एक छोटा-सा अंकुर फूटने लगा। उन्हें लगा कि सच्चा सुख और सुकून वहीं है, जहाँ सब कुछ पूरा और अखंड है, जहाँ पेड़, पौधे, पशु और मनुष्य अपनी-अपनी लय और गति में हों। उन्हें यह भी लगा कि हमारी पीढ़ी ने प्रकृति की इस लय से खिलवाड़ करके ऐसा अपराध किया है, जिसकी माफ़ी नहीं। अब हिमालय उनके लिए केवल कविता नहीं, जीवन-दर्शन बन गया था।

अँधेरा होने से पहले वे डगमगाते पत्थरों से होकर नदी की धार तक पहुँचीं और अंजलि में पानी भरा। उन्हें याद आया कि हमारे यहाँ जल हाथ में लेकर संकल्प लिया जाता है। पर वे संकल्प की स्थिति में नहीं थीं। उनके भीतर बस एक प्रार्थना थी कि मन का सारा ज़हर और सारी बुराई इस बहती धारा में बह जाए।

रात गहराई, तो हिमालय ने जैसे काला कंबल ओढ़ लिया। गेस्ट हाउस में जितेन ने तेज़ गाने पर नाचना शुरू किया, और देखते-देखते सारे सैलानी घेरा बनाकर नाचने लगे। लेखिका की पचास साल की सहेली मणि ने ऐसा जानदार नृत्य किया कि सब हैरान रह गए। लेखिका सोचती रहीं कि मणि के भीतर इतना आनंद कहाँ से आता है।

लायुंग की सुबह और कटाओ की ओर

लायुंग की सुबह बहुत शांत और सुंदर थी। यहाँ ज़्यादातर लोग पहाड़ी आलू और धान की खेती तथा शराब के व्यापार से गुज़ारा करते थे। लेखिका को उम्मीद थी कि यहाँ बर्फ़ मिलेगी, पर अप्रैल की शुरुआत में बर्फ़ का एक टुकड़ा भी नहीं था, जबकि वे लगभग चौदह हज़ार फ़ुट की ऊँचाई पर थीं। मैदानों से आए लोगों के लिए बर्फ़ से ढके पहाड़ स्वर्ग जैसे होते हैं, इसलिए वे बेचैन थीं।

एक सिक्किमी युवक ने बताया कि प्रदूषण के कारण बर्फ़बारी लगातार घट रही है। पर अगर वे कटाओ जाएँ, तो वहाँ बर्फ़ ज़रूर मिलेगी। कटाओ को भारत का स्विट्ज़रलैंड कहा जाता है। वह अभी पर्यटन-स्थल नहीं बना था, इसलिए चर्चा में भी नहीं था और अपने प्राकृतिक रूप में था। बातचीत के बीच युवक की पत्नी के थैले में रखा महुआ एक गाय खा गई, और उसने प्यार भरी झिड़की देकर गाय को भगा दिया। ऐसे छोटे दृश्य पाठ को जीवंत बनाते हैं।

कटाओ का रास्ता और भी ख़तरनाक था, और ऊपर से धुंध और बारिश। जितेन लगभग अंदाज़े से गाड़ी चला रहा था। ख़तरे के एहसास ने सबको चुप कर दिया था, और साँसों के सिवा कोई आवाज़ नहीं थी। रास्ते में फिर चेतावनियाँ दिखीं। एक का भाव था कि अगर आप विवाहित हैं, तो तेज़ रफ़्तार से नाता तोड़ लीजिए। दूसरी कहती थी कि दुर्घटना से देर भली।

कटाओ की बर्फ़: मन वृंदावन

आधे रास्ते के बाद धुंध छँटी। नार्गे ने उत्साह से कहा कि कटाओ हिंदुस्तान का स्विट्ज़रलैंड है। स्विट्ज़रलैंड घूम आई मणि ने तुरंत कहा कि स्विट्ज़रलैंड न इतनी ऊँचाई पर है, न इतना सुंदर। दूर से बर्फ़ ढके पहाड़ दिखने लगे। पास के पहाड़ आधे हरे-काले थे, जैसे किसी ने उन पर पाउडर छिड़का हो और कहीं-कहीं वह धूप में बह गया हो।

आगे पूरी तरह बर्फ़ से ढके पहाड़ थे, और चारों ओर साबुन के झाग जैसी बर्फ़। जितेन ने पूछा कि कैसा लग रहा है, तो लेखिका ने नेपाली में कहा, राम रोछो, यानी अच्छा है। अपनी भाषा सुनकर जितेन की आँखें गर्व से चमक उठीं। तभी चमत्कार की तरह महीन मोतियों-सी हल्की बर्फ़ गिरने लगी, और जितेन एक नेपाली प्रेम-गीत गाने लगा।

सैलानी जीप से उतरकर घुटनों तक नरम बर्फ़ पर कूदने लगे। लेखिका के पाँव ठंड से झनझना रहे थे, पर मन वृंदावन हो रहा था। वे भी बर्फ़ पर लेटना चाहती थीं, पर उनके पास बर्फ़ वाले लंबे जूते नहीं थे। कटाओ पर्यटन-स्थल नहीं था, इसलिए वहाँ किराए पर जूते देने वाली एक भी दुकान नहीं थी। लेखिका ने तस्वीरें खिंचवाने के बजाय सारा दृश्य आँखों के ज़रिए भीतर उतार लिया, ताकि महानगर लौटकर भी उसे बार-बार देख सकें।

इन हिमशिखरों ने उन्हें अपने आध्यात्मिक अतीत से जोड़ दिया। उन्हें लगा कि ऐसे ही दिव्य वातावरण में हमारे ऋषि-मुनियों ने वेद रचे होंगे और सबके सुखी होने की कामना वाला महामंत्र पाया होगा। यह सौंदर्य ऐसा था कि कोई बड़ा अपराधी भी इसे देखकर कुछ पल के लिए बुद्ध जैसा करुणामय बन जाए। उन्हें मिल्टन की वह कविता भी याद आई, जिसमें ईव का सौंदर्य देखकर शैतान भी दूसरों का बुरा करना भूल जाता है।

हिमशिखर: एशिया के जल-स्तंभ

मणि उस समय किसी और ही विचार में डूबी थी। वह दार्शनिक की तरह बोली कि ये हिमशिखर पूरे एशिया के जल-स्तंभ हैं। प्रकृति कितने अनोखे ढंग से इंतज़ाम करती है। सर्दियों में वह पानी को बर्फ़ के रूप में जमा कर लेती है। गर्मियों में जब पानी की कमी से हाहाकार मचता है, तो यही बर्फ़ पिघलकर नदियों में बहती है और प्यासे लोगों तक पहुँचती है।

मणि ने श्रद्धा से सिर झुकाकर कहा कि इन नदियों और हिमशिखरों का हम पर कितना बड़ा ऋण है। यह बात आज और भी ज़रूरी है। प्रदूषण और बढ़ते तापमान से अगर हिमशिखर पिघलकर घटते रहे, तो करोड़ों लोगों के पीने और खेती के पानी पर संकट आ जाएगा।

यह सोचते हुए लेखिका को संसार बहुत सुंदर लगा। पर तभी उदासी की एक हल्की परत उन पर छा गई। उड़ते बादलों की तरह उन्हें फिर पत्थर तोड़ती पहाड़िनें याद आ गईं। सौंदर्य और संघर्ष, दोनों उनके मन में साथ-साथ चल रहे थे।

सीमा के फ़ौजी: हमारी नींद के पहरेदार

आगे कुछ फ़ौजी छावनियाँ दिखीं। लेखिका को याद आया कि यह सीमा का इलाक़ा है और पास ही चीन की सीमा है। उस समय तापमान माइनस पंद्रह डिग्री था। लेखिका ने एक फ़ौजी से कहा कि इतनी ठंड में आपको बहुत तकलीफ़ होती होगी। फ़ौजी एक उदास हँसी हँसा और बोला कि हम यहाँ इसलिए पहरा देते हैं, ताकि आप चैन से सो सकें। जितेन ने नेपाली में फेरी भेटुला, यानी फिर मिलेंगे, कहकर जीप आगे बढ़ा दी।

थोड़ी दूर एक और छावनी पर लिखा था कि हम अपना आज आपके कल के लिए दे रहे हैं। लेखिका का मन भर आया। उन्होंने सोचा कि महानगर में रहते हुए उन्हें कभी इसका ध्यान ही नहीं आया। वैसाख में भी जिन बर्फ़ीले इलाक़ों में पाँच मिनट में ठिठुरन होने लगती है, वहाँ ये जवान पौष-माघ में भी तैनात रहते हैं। उस समय पेट्रोल छोड़कर बाक़ी सब कुछ जम जाता है। और जिन रास्तों पर चलने भर से जान काँपती है, उन्हें बनाने में न जाने कितनों ने समय से पहले जान गँवा दी।

लेखिका कहती हैं कि यह यात्रा उनके लिए सचमुच एक खोज-यात्रा थी, जिसने उनकी चेतना और अंतरात्मा को हिला दिया। यह प्रसंग हमें भी सिखाता है कि हमें सैनिकों का सम्मान करना चाहिए, उनके परिवारों की मदद करनी चाहिए, और उनके त्याग को कभी भूलना नहीं चाहिए।

यूमथांग, गंतोक का नाम और खोज का सौंदर्य

लायुंग लौटकर सब यूमथांग की ओर चले। जितेन ने बताया कि पंद्रह दिन में यह घाटी प्रियुता और रूडोडेंड्रो के फूलों से भर जाएगी, जैसे फूलों की सेज बिछी हो। यहाँ रास्ते चौड़े थे, बंदर दिखे, और पहाड़ी कबूतर उड़ते रहे। पर कटाओ की बर्फ़ देखने के बाद यूमथांग थोड़ा फीका लगा। लेखिका को एहसास हुआ कि मंज़िल से ज़्यादा रोमांचक उस तक पहुँचने का रास्ता होता है।

वहाँ चिप्स बेचती एक युवती से लेखिका ने पूछा कि क्या वह सिक्किमी है। उसने कहा, नहीं, मैं इंडियन हूँ। यह सुनकर लेखिका को बहुत अच्छा लगा। सिक्किम पहले एक स्वतंत्र रियासत था, पर अब वहाँ के लोग भारत में ऐसे घुल-मिल गए हैं, जैसे सिक्किम हमेशा से भारत का हिस्सा रहा हो।

लौटते समय जितेन ने कई बातें बताईं। एक पत्थर पर गुरु नानक के पैरों के निशान बताए जाते हैं, और कहते हैं कि जहाँ उनकी थाली से चावल गिरे, वहाँ चावल की खेती होती है। खेदुम नाम की जगह देवी-देवताओं का निवास मानी जाती है, जहाँ गंदगी फैलाने वाला मर जाता है। जितेन ने कहा कि हम पहाड़, नदी और झरनों की पूजा करते हैं, इसलिए उन्हें गंदा नहीं करते। उसने यह भी कहा कि शहर को गैंगटॉक नहीं, गंतोक कहिए, जिसका अर्थ पहाड़ है। उसने बताया कि भारतीय सेना के कप्तान शेखर दत्ता के सुझाव पर यूमथांग को पर्यटन-स्थल बनाया गया, और रास्ते आज भी बन रहे हैं।

अंत में लेखिका मन-ही-मन कहती हैं कि रास्ते अब भी बन रहे हैं और नई जगहों की खोज जारी है। शायद मनुष्य की इसी कभी न ख़त्म होने वाली खोज का नाम सौंदर्य है।

Concepts and terms

जल-संचय

पानी को सँभालकर रखना। प्रकृति यह काम हिमशिखरों पर बर्फ़ के रूप में करती है।

प्रकृति की लय

पेड़, पशु, नदी और मनुष्य का अपने-अपने स्वाभाविक ढंग से साथ चलना।

पर्यटन का दबाव

ज़्यादा सैलानियों और दुकानों से किसी जगह के प्राकृतिक रूप का बिगड़ना।

असमाप्त खोज

नई जगहों और नए अनुभवों की कभी न ख़त्म होने वाली तलाश, जिसे लेखिका सौंदर्य कहती हैं।

चेतावनी-पट

सड़क किनारे लगे वे बोर्ड, जो यात्रियों को ख़तरों के प्रति सजग करते हैं।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

एक पहाड़ी गाँव के पास एक सुंदर झील थी, जहाँ कुछ ही सैलानी आते थे। गाँव वाले झील को पवित्र मानते थे और उसमें कभी कचरा नहीं डालते थे।

फिर झील की तस्वीरें इंटरनेट पर फैल गईं। दो साल में वहाँ बीस दुकानें, तीन होटल और रोज़ सैकड़ों गाड़ियाँ आने लगीं। झील के किनारे प्लास्टिक की बोतलें और चिप्स के पैकेट बिखरे रहने लगे।

गाँव के एक बुज़ुर्ग ने पंचायत में कहा कि हमने कमाई तो बढ़ा ली, पर झील खो दी। पंचायत ने तय किया कि अब झील तक गाड़ियाँ नहीं जाएँगी और प्लास्टिक पर पाबंदी रहेगी।

Activity:

अपने आसपास के किसी पार्क, तालाब या पर्यटन-स्थल पर जाकर देखिए कि वहाँ कितना कचरा है। सफ़ाई के लिए पाँच सुझाव लिखकर स्थानीय अधिकारी को पत्र लिखिए।

Analysis:

पर्यटन से कमाई ज़रूरी है, पर प्रकृति की क़ीमत पर नहीं। कटाओ और इस झील की कहानी बताती है कि सुंदर जगहें तभी बचेंगी, जब सैलानी और स्थानीय लोग, दोनों उनकी ज़िम्मेदारी लें।

Did you know

बोकु सिक्किम की महिलाओं का एक पारंपरिक परिधान है, जो लंबे चोगे जैसा होता है।

याक के घने, लंबे बाल उसे बर्फ़ीली ठंड से बचाते हैं, इसीलिए वह बहुत ऊँचाई वाले इलाक़ों में आराम से रह लेता है।

सिक्किम सन् 1975 में भारत का बाईसवाँ राज्य बना। इससे पहले वह एक अलग रियासत था।

Memory tricks

यात्रा के चार पड़ाव: गं-ला-क-यू — गंतोक, लायुंग, कटाओ, यूमथांग।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 पहाड़ी बच्चों के जीवन के बारे में जितेन की बात से क्या पता चलता है? intermediate
  • A पहाड़ों पर बचपन भी मेहनत से भरा है
  • B पहाड़ के बच्चे केवल खेलते हैं और पढ़ते नहीं
  • C वहाँ स्कूल बस चलती है
  • D वहाँ कई स्कूल हैं
Show answer
Answer: पहाड़ों पर बचपन भी मेहनत से भरा है
Why:

जीवन कठोर।

Q2 पहाड़ी बच्चे शाम को कौन-सा काम नहीं करते, जो पाठ में बताया गया हो? beginner
  • A मवेशी चराना
  • B पानी भरना
  • C जंगल से लकड़ी ढोना
  • D हिसाब लिखना
Show answer
Answer: हिसाब लिखना
Why:

माँओं के साथ।

Q3 रास्तों को इंच टेप से नापकर बनाने की बात किस ओर संकेत करती है? intermediate
  • A रास्ते बहुत चौड़े और बिल्कुल सीधे थे
  • B रास्ते बहुत सँकरे और ख़तरनाक थे
  • C रास्ते नए थे
  • D रास्ते पक्के थे
Show answer
Answer: रास्ते बहुत सँकरे और ख़तरनाक थे
Why:

एक जीप जितने।

Q4 चेतावनी में आदमख़ोर लिखा था, पर दिखा क्या? beginner
  • A जंगली भालू
  • B हिम तेंदुआ
  • C काले याक
  • D भेड़िए
Show answer
Answer: काले याक
Why:

घने बाल।

Q5 चाय बागान का दृश्य देखकर लेखिका क्यों चीख पड़ीं? intermediate
  • A उन्होंने रास्ते में अचानक साँप देख लिया था
  • B जीप फिसल गई
  • C ठंड बहुत थी
  • D सौंदर्य इतना था कि सहना कठिन हो गया
Show answer
Answer: सौंदर्य इतना था कि सहना कठिन हो गया
Why:

लाल बोकु।

Q6 लायुंग की रात लेखिका के अनुसार सच्चा सुख कहाँ है? advanced
  • A जहाँ ख़ूब धन, ऐशो-आराम और भीड़ हो
  • B जहाँ बर्फ़ हो
  • C जहाँ सब कुछ अपनी लय में अखंड हो
  • D जहाँ दुकानें हों
Show answer
Answer: जहाँ सब कुछ अपनी लय में अखंड हो
Why:

पेड़, पशु, मनुष्य।

Q7 लेखिका के अनुसार हमारी पीढ़ी ने कौन-सा अपराध किया है? intermediate
  • A प्रकृति की लय से खिलवाड़
  • B पहाड़ों पर बहुत ज़्यादा पेड़ लगाना
  • C यात्रा करना
  • D नाचना-गाना
Show answer
Answer: प्रकृति की लय से खिलवाड़
Why:

अक्षम्य।

Q8 लेखिका के लिए हिमालय का कविता से आगे बढ़कर दर्शन बन जाना किस बात की ओर संकेत है? advanced
  • A हिमालय पर लेखिका ने एक लंबी कविता लिख डाली
  • B हिमालय सुंदरता के साथ जीवन की सीख भी देने लगा
  • C हिमालय डरावना लगा
  • D हिमालय दिखना बंद हुआ
Show answer
Answer: हिमालय सुंदरता के साथ जीवन की सीख भी देने लगा
Why:

चिंतन।

Q9 पचास साल की मणि के जानदार नृत्य से क्या संदेश मिलता है? intermediate
  • A नृत्य केवल बच्चों और युवाओं के लिए है
  • B मणि थकी नहीं थी
  • C आनंद उम्र पर नहीं, मन पर निर्भर है
  • D मणि को संगीत आता था
Show answer
Answer: आनंद उम्र पर नहीं, मन पर निर्भर है
Why:

भीतर का आनंद।

Q10 सिक्किमी युवक के अनुसार बर्फ़बारी कम होने का कारण क्या है? beginner
  • A भूकंप
  • B बाढ़
  • C पेड़ लगाना
  • D प्रदूषण
Show answer
Answer: प्रदूषण
Why:

स्नो-फ़ॉल।

Q11 कटाओ अपने प्राकृतिक रूप में क्यों बचा था? intermediate
  • A वह अभी पर्यटन-स्थल नहीं बना था
  • B वहाँ जाने पर सरकार की ओर से पूरी पाबंदी थी
  • C वहाँ कोई रास्ता नहीं था
  • D वहाँ लोग नहीं रहते थे
Show answer
Answer: वह अभी पर्यटन-स्थल नहीं बना था
Why:

सुर्ख़ियों से दूर।

Q12 कटाओ पर किसी दुकान का न होना वरदान क्यों है? advanced
  • A इससे सैलानियों को बहुत ज़्यादा सुविधा मिलती है
  • B भीड़, कचरा और प्रदूषण से जगह बची रहती है
  • C दुकानें महँगी होती हैं
  • D वहाँ पैसा नहीं चलता
Show answer
Answer: भीड़, कचरा और प्रदूषण से जगह बची रहती है
Why:

प्राकृतिक रूप।

Q13 राम रोछो सुनकर जितेन की आँखें क्यों चमक उठीं? beginner
  • A उसे लेखिका से ज़्यादा पैसे मिलने की उम्मीद थी
  • B बर्फ़ गिरने लगी थी
  • C अपनी भाषा सुनकर उसे गर्व हुआ
  • D वह डर गया था
Show answer
Answer: अपनी भाषा सुनकर उसे गर्व हुआ
Why:

नेपाली।

Q14 तस्वीरें खिंचवाने के बजाय दृश्य को भीतर उतारना लेखिका की किस सोच को दिखाता है? intermediate
  • A कैमरे और तस्वीरों से गहरी नफ़रत
  • B अनुभव को मन में सँजोना
  • C आलस
  • D जल्दबाज़ी
Show answer
Answer: अनुभव को मन में सँजोना
Why:

डार्क रूम।

Q15 हिमशिखरों को देखकर लेखिका को किसकी याद आई? intermediate
  • A बड़े शहरों के ऊँचे-ऊँचे भवनों की
  • B स्कूल के दिनों की
  • C फ़िल्मों की
  • D वेद रचने वाले ऋषि-मुनियों की
Show answer
Answer: वेद रचने वाले ऋषि-मुनियों की
Why:

सर्वे भवंतु सुखिनः।

Q16 मणि ने हिमशिखरों को एशिया के जल-स्तंभ क्यों कहा? intermediate
  • A वे बर्फ़ बनाकर पानी सहेजते हैं
  • B उनकी चोटियों पर बहुत बड़े पानी के टैंक बने हैं
  • C वहाँ बारिश नहीं होती
  • D वे खंभों जैसे सीधे हैं
Show answer
Answer: वे बर्फ़ बनाकर पानी सहेजते हैं
Why:

जल-संचय।

Q17 फ़ौजी की उदास हँसी में कौन-सा भाव छिपा है? advanced
  • A सैलानियों पर ग़ुस्सा और गहरी चिढ़
  • B मज़ाक
  • C कठिनाई के बीच कर्तव्य का संतोष
  • D डर
Show answer
Answer: कठिनाई के बीच कर्तव्य का संतोष
Why:

चैन की नींद।

Q18 फ़ौजी छावनी का संदेश हम अपना आज आपके कल के लिए देते हैं, किस भावना को दिखाता है? beginner
  • A देश के लिए त्याग
  • B सरकार से ज़्यादा वेतन की माँग
  • C छुट्टी की इच्छा
  • D प्रचार
Show answer
Answer: देश के लिए त्याग
Why:

बलिदान।

Q19 सीमा के पास किस देश की सीमा बताई गई है? intermediate
  • A नेपाल
  • B भूटान
  • C बांग्लादेश
  • D चीन
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Answer: चीन
Why:

छावनियाँ।

Q20 यूमथांग पहुँचकर लेखिका थोड़ी निराश क्यों हुईं? intermediate
  • A वहाँ का होटल बहुत महँगा और गंदा था
  • B कटाओ की बर्फ़ के बाद वह फीका लगा
  • C वहाँ बारिश थी
  • D जीप ख़राब हो गई
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Answer: कटाओ की बर्फ़ के बाद वह फीका लगा
Why:

मंज़िल बनाम सफ़र।

Q21 युवती का मैं इंडियन हूँ कहना किस बात का प्रमाण है? intermediate
  • A युवती का किसी दूसरे राज्य से आया होना
  • B उसे अंग्रेज़ी आती थी
  • C वह मज़ाक कर रही थी
  • D भारत से भावनात्मक जुड़ाव
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Answer: भारत से भावनात्मक जुड़ाव
Why:

घुल-मिल गए।

Q22 खेदुम के बारे में जितेन की बात से पहाड़ी लोगों का कौन-सा गुण झलकता है? intermediate
  • A पहाड़ों को बेचकर पैसे कमाने की चाह
  • B डर
  • C प्रकृति के प्रति श्रद्धा और स्वच्छता
  • D लापरवाही
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Answer: प्रकृति के प्रति श्रद्धा और स्वच्छता
Why:

पूजा करते हैं।

Q23 पाठ के अंत में लेखिका नई जगहों की अधूरी खोज को ही सौंदर्य मानती हैं। इसका आशय क्या है? advanced
  • A नया खोजते रहने की ललक ही सुंदर है
  • B कोई भी खोज कभी पूरी नहीं होती, इसलिए व्यर्थ है
  • C रास्ते अधूरे हैं
  • D यात्रा थका देती है
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Answer: नया खोजते रहने की ललक ही सुंदर है
Why:

रास्ते बन रहे हैं।

Q24 अभिकथन: कटाओ पर दुकानों का न होना उसके लिए वरदान है। कारण: दुकानें न होने से वहाँ भीड़ और कचरा कम है और प्रकृति अपने मूल रूप में है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
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Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

प्राकृतिक रूप।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. मणि ने हिमशिखरों को जल-स्तंभ कहा। II. पहाड़ी बच्चे स्कूल बस से स्कूल जाते थे। III. यूमथांग पहुँचकर लेखिका थोड़ी निराश हुईं। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
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Answer: केवल I और III
Why:

पैदल चढ़ाई।

Important short questions (7)

पहाड़ी बच्चों का जीवन मैदानी बच्चों से कैसे अलग है?

पहाड़ी बच्चे रोज़ कई किलोमीटर चढ़ाई करके एक ही स्कूल जाते हैं। लौटकर वे मवेशी चराते, पानी भरते और लकड़ी ढोते हैं, जबकि मैदानी बच्चों को बस और सुविधाएँ मिलती हैं।

रास्तों पर लगी चेतावनियों का क्या महत्त्व था?

रास्ते बहुत सँकरे और ख़तरनाक थे, जहाँ ज़रा-सी चूक जान ले सकती थी। चेतावनियाँ यात्रियों को धीमी और सावधान ड्राइविंग के लिए सजग करती थीं।

लायुंग की रात लेखिका के मन में क्या विचार आए?

उन्हें लगा कि सच्चा सुख वहीं है, जहाँ पेड़, पशु और मनुष्य अपनी लय में हों। उन्हें यह भी लगा कि हमारी पीढ़ी ने प्रकृति से खिलवाड़ करके अपराध किया है।

कटाओ को भारत का स्विट्ज़रलैंड क्यों कहा गया, और मणि ने क्या कहा?

बर्फ़ से ढके सुंदर पहाड़ों के कारण कटाओ को भारत का स्विट्ज़रलैंड कहा गया। मणि ने कहा कि स्विट्ज़रलैंड न इतनी ऊँचाई पर है, न इतना सुंदर।

हिमशिखरों के ज़रिए प्रकृति पानी कैसे बचाकर रखती है?

सर्दियों में प्रकृति पानी को बर्फ़ के रूप में हिमशिखरों पर जमा कर लेती है। गर्मियों में यही बर्फ़ पिघलकर नदियों में बहती है और लोगों की प्यास बुझाती है।

फ़ौजी से बातचीत के बाद लेखिका का मन उदास क्यों हुआ?

उन्हें एहसास हुआ कि जिस ठंड में वे पाँच मिनट में ठिठुर गईं, वहाँ जवान महीनों तैनात रहते हैं। शहर में रहते हुए उन्होंने इस त्याग के बारे में कभी सोचा ही नहीं था।

जितेन ने गंतोक के नाम के बारे में क्या बताया?

उसने कहा कि शहर को गैंगटॉक नहीं, गंतोक कहना चाहिए। गंतोक उसका असली नाम है, जिसका अर्थ पहाड़ है।

Long answer questions (3)

कटाओ में दुकानों का अभाव उसकी सुंदरता के लिए अच्छा क्यों है? अपने तर्क दीजिए।

मेरी राय में कटाओ पर दुकानों का न होना सचमुच वरदान है। दुकानें आते ही वहाँ भीड़ बढ़ेगी, गाड़ियाँ बढ़ेंगी और धुआँ-शोर फैलेगा। प्लास्टिक की थैलियाँ, बोतलें और कचरा बर्फ़ पर बिखरने लगेगा। होटल और दुकानें बनाने के लिए पेड़ काटे जाएँगे। पाठ में ही बताया गया है कि प्रदूषण के कारण लायुंग में बर्फ़बारी घट गई है। कटाओ में बर्फ़ इसीलिए बची है, क्योंकि वह भीड़ से दूर है। इसलिए कटाओ जैसी जगहों को पर्यटन के दबाव से बचाना चाहिए। वहाँ जाने वाले सैलानियों को भी कचरा न फैलाने का संकल्प लेना चाहिए।

सरहद पर तैनात सैनिकों के सामने कौन-सी मुश्किलें होती हैं? हम नागरिक उनके लिए क्या कर सकते हैं?

सीमा पर फ़ौजी बेहद कठिन हालात में रहते हैं। पाठ में तापमान माइनस पंद्रह डिग्री था, और पौष-माघ में तो पेट्रोल छोड़कर सब कुछ जम जाता है। वे परिवार से महीनों दूर रहते हैं, सँकरे और ख़तरनाक रास्तों पर चलते हैं, और हर पल दुश्मन से ख़तरा रहता है। हमारा उत्तरदायित्व है कि हम उनके त्याग का सम्मान करें। उनके परिवारों की मदद करें, शहीदों को याद रखें, और देश के भीतर क़ानून और एकता बनाए रखें। सबसे बढ़कर, हम अपने काम ईमानदारी से करें, ताकि उनका बलिदान व्यर्थ न जाए।

हमारी पीढ़ी प्रकृति को किन तरीक़ों से नुक़सान पहुँचा रही है? इसे रोकने में आप क्या कर सकते हैं?

आज की पीढ़ी पेड़ काटकर, नदियों में कचरा डालकर और गाड़ियों का धुआँ बढ़ाकर प्रकृति से खिलवाड़ कर रही है। पहाड़ों पर बेतहाशा होटल बन रहे हैं, और प्लास्टिक हर जगह फैल रहा है। इसका नतीजा पाठ में भी दिखता है: प्रदूषण से बर्फ़बारी घट रही है। हिमशिखर घटे, तो करोड़ों लोगों के पानी पर संकट आएगा। इसे रोकने में मेरी भूमिका छोटी पर ज़रूरी है। मैं प्लास्टिक कम इस्तेमाल करूँ, पेड़ लगाऊँ, पानी और बिजली बचाऊँ, और यात्रा पर कचरा न फैलाऊँ। साथ ही दूसरों को भी जागरूक करूँ, जैसे पाठ के पहाड़ी लोग प्रकृति को पूजकर उसे साफ़ रखते हैं।

Flashcards (17)

पहाड़ी बच्चे रोज़ कितनी चढ़ाई करते?
तीन-साढ़े तीन किलोमीटर।
तराई में कितने स्कूल थे?
केवल एक।
चेतावनी के बावजूद कौन-से जानवर दिखे?
काले याक।
सिक्किमी परिधान का नाम?
बोकु।
यूमथांग जाने से पहले रात कहाँ बिताई?
लायुंग में।
लायुंग की ऊँचाई लगभग कितनी थी?
चौदह हज़ार फ़ुट।
लायुंग के लोगों की जीविका?
आलू, धान और शराब का व्यापार।
बर्फ़बारी कम होने का कारण?
प्रदूषण।
कटाओ को क्या कहा जाता है?
भारत का स्विट्ज़रलैंड।
राम रोछो का अर्थ?
अच्छा है।
फेरी भेटुला का अर्थ?
फिर मिलेंगे।
हिमशिखरों को मणि ने क्या कहा?
एशिया के जल-स्तंभ।
सीमा पर कितना तापमान था?
माइनस 15 डिग्री।
पास में किस देश की सीमा थी?
चीन।
चिप्स बेचती युवती ने ख़ुद को क्या कहा?
इंडियन।
यूमथांग को पर्यटन-स्थल किसने बनवाया?
कप्तान शेखर दत्ता के सुझाव पर।
गंतोक का अर्थ?
पहाड़।

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  • शब्द और अर्थ
  • कटाओ या यूमथांग?
  • सही या भ्रम
  • यात्रा का क्रम (दूसरा भाग)
  • झटपट उत्तर

Class 10 Hindi Chapter 14 — frequently asked questions

रात के जगमगाते गंतोक ने लेखिका पर कैसा जादू किया?

ढलान पर बसे शहर की रोशनियाँ ऐसी लग रही थीं, जैसे आसमान उलटकर नीचे बिछ गया हो। लेखिका उस दृश्य में ऐसी खोईं कि अपना होना ही भूल गईं, और होंठों पर प्रार्थना आ गई।

पाठ के शीर्षक का अर्थ और स्रोत बताइए।

यह एक नेपाली प्रार्थना की पंक्ति है, जो लेखिका ने एक नेपाली युवती से सीखी। इसका भाव है कि छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि जीवन अच्छाइयों को अर्पित हो।

सफ़ेद और रंगीन बौद्ध पताकाएँ किन अवसरों पर लगाई जाती हैं?

किसी बौद्ध की मृत्यु पर उसकी आत्मा की शांति के लिए एक सौ आठ सफ़ेद पताकाएँ लगती हैं। किसी नए काम की शुरुआत पर रंगीन पताकाएँ लगाई जाती हैं।

पहाड़ी बच्चों का जीवन मैदानी बच्चों से कैसे अलग है?

पहाड़ी बच्चे रोज़ कई किलोमीटर चढ़ाई करके एक ही स्कूल जाते हैं। लौटकर वे मवेशी चराते, पानी भरते और लकड़ी ढोते हैं, जबकि मैदानी बच्चों को बस और सुविधाएँ मिलती हैं।

रास्तों पर लगी चेतावनियों का क्या महत्त्व था?

रास्ते बहुत सँकरे और ख़तरनाक थे, जहाँ ज़रा-सी चूक जान ले सकती थी। चेतावनियाँ यात्रियों को धीमी और सावधान ड्राइविंग के लिए सजग करती थीं।

लायुंग की रात लेखिका के मन में क्या विचार आए?

उन्हें लगा कि सच्चा सुख वहीं है, जहाँ पेड़, पशु और मनुष्य अपनी लय में हों। उन्हें यह भी लगा कि हमारी पीढ़ी ने प्रकृति से खिलवाड़ करके अपराध किया है।

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