Class 10 Hindi Chapter 15: मैं क्यों लिखता हूँ?

मैं क्यों लिखता हूँ? is Chapter 15 of NCERT / CBSE Class 10 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
  • 2 topics
  • 50 MCQs
  • 14 short answers
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  • Hindi

लिखने की प्रेरणा: भीतरी विवशता और बाहरी दबाव

अज्ञेय कहते हैं कि वे यह जानने के लिए लिखते हैं कि वे क्यों लिखते हैं। लिखकर ही लेखक अपनी भीतरी विवशता पहचानता है और उससे मुक्त होता है। संपादक, प्रकाशक या पैसे का दबाव भी होता है, पर सच्चा कृतिकार उसे केवल सहायक की तरह बरतता है।

What you will be able to do

  • अज्ञेय के जीवन, रचनाओं और हिंदी साहित्य में उनके योगदान का परिचय दे सकेंगे।
  • लेखक के अनुसार मैं क्यों लिखता हूँ प्रश्न के सरल और कठिन, दोनों होने का कारण बता सकेंगे।
  • भीतरी विवशता से मुक्ति को लेखन का मूल कारण मानने वाले विचार को समझा सकेंगे।
  • कृतिकार और साधारण लेखक, तथा भीतरी प्रेरणा और बाहरी दबाव का अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।
  • अलार्म घड़ी के उदाहरण से आत्मानुशासन का महत्त्व समझा सकेंगे।

Key points

  • सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय (1911–1987) का जन्म उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हुआ; वे कवि, कथाकार, संपादक और यायावर थे।

  • उन्होंने तार सप्तक का संपादन किया; कितनी नावों में कितनी बार के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।

  • लेखक के अनुसार यह प्रश्न सरल लगता है, पर कठिन है, क्योंकि इसका उत्तर लेखक के भीतरी जीवन की परतों से जुड़ा है।

  • अज्ञेय का पहला उत्तर है: मैं यह जानने के लिए लिखता हूँ कि मैं क्यों लिखता हूँ।

  • लिखकर ही लेखक उस भीतरी विवशता को पहचानता है, जिससे उसने लिखा, और लिखकर ही उससे मुक्त होता है।

  • हर लेखक कृतिकार नहीं होता, और हर लेखन कृति नहीं होता; सच्चे कृतिकार भीतरी विवशता से लिखते हैं।

  • प्रसिद्धि के बाद संपादकों के आग्रह, प्रकाशकों के तक़ाज़े और आर्थिक ज़रूरत जैसे बाहरी दबाव भी लिखवाते हैं।

  • कृतिकार ईमानदारी से जानता है कि कौन-सी रचना भीतर से आई और कौन-सी बाहरी दबाव से; कई बार बाहरी दबाव भीतरी प्रेरणा जगाने का निमित्त बन जाता है।

  • कुछ आलसी लेखक बाहरी दबाव के बिना नहीं लिखते, जैसे कोई नींद खुलने पर भी अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़ा रहे।

Full explanation

अज्ञेय: कवि, कथाकार, संपादक और यायावर

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन, जिन्हें हम अज्ञेय के नाम से जानते हैं, बीसवीं सदी के हिंदी साहित्य के बहुत बड़े रचनाकार थे। उनका जन्म सन् 1911 में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में हुआ, और देहांत सन् 1987 में। उनका बचपन लखनऊ, कश्मीर, बिहार और मद्रास जैसी अलग-अलग जगहों पर बीता, क्योंकि उनके पिता पुरातत्व विभाग में थे। उन्होंने विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की, और फिर अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण वे जेल भी गए।

अज्ञेय ने लगभग हर विधा में लिखा। शेखर: एक जीवनी, नदी के द्वीप और अपने-अपने अजनबी उनके चर्चित उपन्यास हैं। हरी घास पर क्षण भर, बावरा अहेरी, आँगन के पार द्वार और कितनी नावों में कितनी बार उनके प्रसिद्ध काव्य-संग्रह हैं। अरे यायावर रहेगा याद और एक बूँद सहसा उछली उनके यात्रा-वृत्तांत हैं। आँगन के पार द्वार पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और कितनी नावों में कितनी बार पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।

सन् 1943 में उन्होंने तार सप्तक का संपादन किया, जिसमें सात नए कवियों की कविताएँ थीं। इसी से हिंदी कविता में प्रयोगवाद की धारा शुरू मानी जाती है। उन्होंने दिनमान और नया प्रतीक जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया। उनकी भाषा सधी हुई, विचारपूर्ण और कई बार दार्शनिक होती है। मैं क्यों लिखता हूँ उनका एक आत्मकथ्य है, जिसमें वे अपनी रचना-प्रक्रिया का रहस्य खोलते हैं।

एक सरल-सा कठिन प्रश्न

पाठ एक सवाल से शुरू होता है: मैं क्यों लिखता हूँ? लेखक मानता है कि यह सवाल सुनने में बहुत आसान है, पर इसका जवाब देना बहुत मुश्किल है। कारण यह कि इसका सच्चा उत्तर लेखक के भीतरी जीवन की कई परतों से जुड़ा होता है। इन सब परतों को कुछ वाक्यों में समेट देना आसान नहीं, और शायद संभव भी नहीं।

इसलिए लेखक कहता है कि वह केवल कुछ परतों को छूने की कोशिश करेगा, ख़ासकर उन्हें, जिन्हें जानना दूसरों के लिए भी काम का हो सकता है। यह विनम्रता अज्ञेय की ख़ासियत है। वे कोई अंतिम सत्य घोषित नहीं करते, बल्कि अपने अनुभव ईमानदारी से सामने रखते हैं, ताकि पाठक और नए लेखक उनसे कुछ सीख सकें।

इस सवाल पर हम भी सोच सकते हैं। हम डायरी क्यों लिखते हैं? कोई कविता या पत्र क्यों लिखते हैं? अक्सर इसका उत्तर साफ़ नहीं होता। मन में कुछ उमड़ता है, और लिखे बिना चैन नहीं आता। लेखक इसी अनकही बेचैनी को समझने की कोशिश करता है।

लिखकर ही जानना कि क्यों लिखा

लेखक का पहला और सबसे सच्चा उत्तर बड़ा अनोखा है। वह कहता है कि वह इसलिए लिखता है, क्योंकि ख़ुद जानना चाहता है कि वह क्यों लिखता है। यानी लिखे बिना इस सवाल का जवाब मिल ही नहीं सकता।

इसका अर्थ यह है कि लेखक के मन में एक भीतरी विवशता या बेचैनी होती है। जब तक वह लिखता नहीं, उसे यह बेचैनी ठीक से समझ भी नहीं आती। लिखते-लिखते ही वह पहचान पाता है कि उसके भीतर क्या चल रहा था। और लिख लेने के बाद ही वह उस बेचैनी से मुक्त होता है।

अज्ञेय कहते हैं कि वे भी इसी भीतरी विवशता से छुटकारा पाने के लिए लिखते हैं। लिखने से वे उस विवशता को थोड़ी दूरी से, निष्पक्ष होकर, देख और पहचान पाते हैं। इसे एक सरल उदाहरण से समझिए। जब हम बहुत दुखी या उलझन में होते हैं और किसी को चिट्ठी लिखते हैं, तो लिखते-लिखते मन हल्का हो जाता है। हमें अपनी भावना भी साफ़ समझ आने लगती है। लेखन का यही जादू है: वह अभिव्यक्ति भी है और आत्म-खोज भी।

कृतिकार और लेखक: एक बारीक भेद

अज्ञेय एक बारीक बात कहते हैं। सभी लेखक कृतिकार नहीं होते, और किसी लेखक का सारा लेखन कृति नहीं होता। कृति का अर्थ है वह रचना, जो सच्ची भीतरी प्रेरणा से जन्मी हो और जिसमें रचनाकार का पूरा मन लगा हो।

लेखक का विश्वास है कि सभी सच्चे कृतिकार इसी भीतरी विवशता के कारण लिखते हैं। कोई अख़बार में रोज़ का समाचार या दफ़्तर की रिपोर्ट लिखता है, तो वह भी लेखन है, पर उसे कृति नहीं कहेंगे। कृति वह है, जिसे लिखे बिना रचनाकार रह ही न सके।

यह भेद आज के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी है। परीक्षा के लिए रटा हुआ निबंध लिखना एक बात है, और किसी अनुभव से भरकर अपनी कहानी या कविता लिखना दूसरी बात। पहला काम है, दूसरा सृजन। अज्ञेय दूसरे प्रकार के लेखन की बात कर रहे हैं।

बाहरी दबाव: संपादक, प्रकाशक और पैसा

लेखक यह भी मानता है कि कुछ प्रसिद्धि मिल जाने के बाद रचनाकार को बाहरी कारणों से भी लिखना पड़ता है। संपादक आग्रह करते हैं कि उनकी पत्रिका के लिए कुछ लिखिए। प्रकाशक तक़ाज़ा करते हैं कि नई किताब कब देंगे। और कभी-कभी पैसों की ज़रूरत भी लिखवाती है।

पर अज्ञेय दो ज़रूरी बातें जोड़ते हैं। पहली, सच्चा कृतिकार अपने आप से ईमानदार रहता है। वह जानता है कि कौन-सी रचना भीतर की प्रेरणा से निकली है, और कौन-सी बाहरी दबाव से। वह इस फ़र्क़ को कभी धुँधला नहीं होने देता। दूसरी, कई बार बाहरी दबाव असल में दबाव रहता ही नहीं। वह भीतर सोई प्रेरणा को जगाने का बहाना, यानी निमित्त, बन जाता है।

इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए किसी पत्रिका ने एक कवि से वर्षा पर कविता माँगी। कवि ने पहले बस संपादक के कहने से कलम उठाई। पर लिखते-लिखते उसे अपने गाँव की पहली बारिश याद आ गई, और एक सच्ची, भावपूर्ण कविता बन गई। यहाँ बाहरी आग्रह ने भीतर की प्रेरणा को जगा दिया।

अलार्म घड़ी और आत्मानुशासन

यहाँ लेखक रचनाकार के स्वभाव और आत्मानुशासन की बात करता है। कुछ रचनाकार इतने आलसी होते हैं कि बाहरी दबाव के बिना लिख ही नहीं पाते। उस दबाव से ही उनकी भीतरी विवशता उभरकर सामने आती है।

अज्ञेय इसके लिए एक मज़ेदार उपमा देते हैं। यह वैसा ही है, जैसे सुबह नींद खुल जाने पर भी कोई बिस्तर पर तब तक पड़ा रहे, जब तक अलार्म न बज जाए। ऐसे रचनाकार बाहरी दबाव के आगे समर्पण नहीं करते। वे उसे बस एक सहायक यंत्र की तरह इस्तेमाल करते हैं, ताकि बाहरी दुनिया की सच्चाई से उनका रिश्ता बना रहे।

अपने बारे में अज्ञेय कहते हैं कि उन्हें ऐसे सहारे की ज़रूरत नहीं पड़ती, पर उससे कोई परेशानी भी नहीं होती। उसी उपमा को आगे बढ़ाते हुए वे कहते हैं कि मैं सुबह अपने-आप जाग जाता हूँ, पर अलार्म भी बज जाए, तो कोई नुक़सान नहीं मानता। यानी वे आत्मानुशासित हैं, पर बाहरी प्रेरणा का स्वागत भी करते हैं। यह संतुलन हर विद्यार्थी के लिए सीख है: पढ़ाई अपने मन से हो, पर शिक्षक या परीक्षा का दबाव भी मदद करे, तो उसे बुरा न मानें।

अंत में लेखक कहता है कि यह भीतरी विवशता क्या है, यह समझाना बहुत कठिन है। यह बताना शायद आसान है कि वह क्या नहीं है। सबसे अच्छा तरीक़ा है उसका एक उदाहरण देना। और यह उदाहरण है उनकी हिरोशिमा पर लिखी कविता, जिसकी कहानी पाठ के अगले हिस्से में आती है।

Concepts and terms

आत्मकथ्य

लेखक का अपने बारे में, अपनी रचना-प्रक्रिया या अनुभवों के बारे में लिखा गद्य।

भीतरी विवशता

मन की ऐसी बेचैनी, जो लेखक को लिखने के लिए मजबूर कर दे।

कृतिकार

ऐसा रचनाकार, जिसकी रचनाएँ भीतरी प्रेरणा से जन्मी सच्ची कृतियाँ हों।

बाहरी दबाव

संपादक, प्रकाशक, पैसा या प्रसिद्धि जैसे बाहर से आने वाले कारण, जो लिखने के लिए प्रेरित करें।

आत्मानुशासन

बिना किसी बाहरी दबाव के, अपने आप नियम से काम करने की आदत।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

मेरी लेखन-डायरी

Safety:

डायरी आपकी निजी चीज़ है; किसी और की डायरी उसकी अनुमति के बिना मत पढ़िए।

What You Notice:

आप पाएँगे कि जिन दिनों मन में कुछ उमड़ रहा था, उन दिनों का लेखन सबसे सच्चा और जीवंत था।

Did you know

अज्ञेय उपनाम उन्होंने ख़ुद नहीं रखा था। माना जाता है कि जेल से भेजी उनकी कहानियाँ छपवाते समय जैनेंद्र कुमार ने यह नाम दिया, ताकि लेखक की पहचान छिपी रहे।

तार सप्तक (1943) में सात कवियों की कविताएँ थीं। इसी से हिंदी कविता में प्रयोगवाद की शुरुआत मानी जाती है।

अज्ञेय ने दिनमान साप्ताहिक और नया प्रतीक जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया।

Memory tricks

बाहरी दबाव के तीन रूप: सं-प्र-अ — संपादक का आग्रह, प्रकाशक का तक़ाज़ा, अर्थ यानी पैसों की ज़रूरत।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 मैं क्यों लिखता हूँ के लेखक कौन हैं? beginner
  • A शिवपूजन सहाय
  • B मधु कांकरिया
  • C यशपाल
  • D अज्ञेय
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Answer: अज्ञेय
Why:

तार सप्तक।

Q2 अज्ञेय का पूरा नाम क्या है? intermediate
  • A सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
  • B गजानन माधव मुक्तिबोध
  • C सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
  • D रामधारी सिंह दिनकर
Show answer
Answer: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
Why:

वात्स्यायन।

Q3 तार सप्तक का हिंदी साहित्य में क्या महत्त्व है? advanced
  • A यह हिंदी का पहला प्रकाशित उपन्यास माना जाता है
  • B इससे प्रयोगवाद की शुरुआत मानी जाती है
  • C यह एक नाटक है
  • D यह एक शब्दकोश है
Show answer
Answer: इससे प्रयोगवाद की शुरुआत मानी जाती है
Why:

सात कवि।

Q4 इस पाठ की विधा क्या है? beginner
  • A आत्मकथ्य
  • B कहानी
  • C यात्रा-वृत्तांत
  • D एकांकी
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Answer: आत्मकथ्य
Why:

रचना-प्रक्रिया।

Q5 लेखक को यह प्रश्न कठिन क्यों लगता है? intermediate
  • A उसे इस बारे में कभी किसी ने कुछ नहीं बताया
  • B इसका उत्तर भीतरी जीवन की परतों से जुड़ा है
  • C वह लिखना नहीं जानता
  • D प्रश्न अंग्रेज़ी में है
Show answer
Answer: इसका उत्तर भीतरी जीवन की परतों से जुड़ा है
Why:

स्तर।

Q6 लेखक केवल कुछ परतों को छूने की बात क्यों कहता है? intermediate
  • A उसके पास लिखने के लिए बिल्कुल भी समय नहीं था
  • B वह थक गया था
  • C सब कुछ कुछ वाक्यों में बाँधना संभव नहीं
  • D पाठ छोटा रखना था
Show answer
Answer: सब कुछ कुछ वाक्यों में बाँधना संभव नहीं
Why:

विनम्रता।

Q7 लेखक के अनुसार लिखने का सबसे सच्चा उत्तर क्या है? beginner
  • A यह जानने के लिए कि वह क्यों लिखता है
  • B केवल पैसा और प्रसिद्धि कमाने के लिए
  • C समय बिताने के लिए
  • D परीक्षा पास करने के लिए
Show answer
Answer: यह जानने के लिए कि वह क्यों लिखता है
Why:

आत्म-खोज।

Q8 लेखक के अनुसार लिखकर रचनाकार किससे मुक्त होता है? intermediate
  • A संपादक के दबाव से
  • B पैसे की कमी से
  • C आलस से
  • D भीतरी विवशता से
Show answer
Answer: भीतरी विवशता से
Why:

बेचैनी।

Q9 भीतरी विवशता को तटस्थ होकर देखने का क्या अर्थ है? advanced
  • A उस पर पूरी तरह से ग़ुस्सा करना
  • B थोड़ी दूरी से निष्पक्ष होकर समझना
  • C उसे भूल जाना
  • D उसे छिपाना
Show answer
Answer: थोड़ी दूरी से निष्पक्ष होकर समझना
Why:

पहचान।

Q10 हर लेखन कृति नहीं होता, इस कथन का अर्थ क्या है? intermediate
  • A केवल भीतरी प्रेरणा से जन्मी रचना ही कृति है
  • B जो कुछ भी काग़ज़ पर लिखा जाए, वह कृति है
  • C कृति केवल कविता होती है
  • D कृति केवल लंबी होती है
Show answer
Answer: केवल भीतरी प्रेरणा से जन्मी रचना ही कृति है
Why:

सृजन।

Q11 इनमें से कौन-सा लेखन कृति कहलाने के सबसे क़रीब है? intermediate
  • A किताब से रटकर लिखा हुआ परीक्षा-निबंध
  • B दफ़्तर की रिपोर्ट
  • C दुकान का बिल
  • D किसी गहरे अनुभव से उपजी अपनी कविता
Show answer
Answer: किसी गहरे अनुभव से उपजी अपनी कविता
Why:

भीतर से।

Q12 प्रसिद्ध लेखक पर बाहरी दबाव कहाँ से आता है? beginner
  • A केवल अपने पड़ोसियों, रिश्तेदारों और दोस्तों से
  • B मौसम से
  • C संपादक, प्रकाशक और पैसों की ज़रूरत से
  • D खेल से
Show answer
Answer: संपादक, प्रकाशक और पैसों की ज़रूरत से
Why:

ख्याति के बाद।

Q13 सच्चा कृतिकार अपने सामने कौन-सा भेद ईमानदारी से बनाए रखता है? advanced
  • A अच्छी और महँगी क़लम तथा सस्ती स्याही के अंतर का
  • B भीतरी प्रेरणा और बाहरी दबाव से बनी रचना का
  • C छोटी और बड़ी किताब का
  • D कविता और कहानी का
Show answer
Answer: भीतरी प्रेरणा और बाहरी दबाव से बनी रचना का
Why:

ईमानदारी।

Q14 बाहरी दबाव भीतरी उन्मेष का निमित्त बन जाता है, इसका अर्थ क्या है? advanced
  • A बाहरी दबाव से लेखक हमेशा लिखना छोड़ देता है
  • B दबाव से रचना बिगड़ती है
  • C बाहरी आग्रह से भीतर सोई प्रेरणा जाग जाती है
  • D दबाव से पैसा मिलता है
Show answer
Answer: बाहरी आग्रह से भीतर सोई प्रेरणा जाग जाती है
Why:

बहाना।

Q15 उन्मेष शब्द का अर्थ है ______। intermediate
  • A घना अँधेरा छाना
  • B थकान
  • C क्रोध
  • D प्रकाश या खिलना
Show answer
Answer: प्रकाश या खिलना
Why:

दीप्ति।

Q16 आलसी लेखक की तुलना किससे की गई है? beginner
  • A अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़े व्यक्ति से
  • B सुबह-सुबह दौड़ लगाने वाले खिलाड़ी से
  • C रात भर जागने वाले से
  • D दिन में सोने वाले से
Show answer
Answer: अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़े व्यक्ति से
Why:

घड़ी।

Q17 ऐसे लेखक बाहरी दबाव को किस रूप में इस्तेमाल करते हैं? intermediate
  • A अपने मालिक के रूप में
  • B सहायक यंत्र के रूप में
  • C शत्रु के रूप में
  • D खिलौने के रूप में
Show answer
Answer: सहायक यंत्र के रूप में
Why:

समर्पण नहीं।

Q18 बाहरी दबाव का एक लाभ लेखक क्या मानता है? advanced
  • A भौतिक यथार्थ से संबंध बना रहता है
  • B लेखक बहुत जल्दी अमीर और मशहूर हो जाता है
  • C लेखन बंद होता है
  • D आलस बढ़ता है
Show answer
Answer: भौतिक यथार्थ से संबंध बना रहता है
Why:

बाहरी दुनिया।

Q19 मैं अपने आप उठ जाता हूँ, पर अलार्म बजे तो हानि नहीं, यह कथन लेखक के किस स्वभाव को दिखाता है? advanced
  • A पूरी तरह आलसी और लापरवाह स्वभाव
  • B घमंड
  • C डर
  • D आत्मानुशासन के साथ लचीलापन
Show answer
Answer: आत्मानुशासन के साथ लचीलापन
Why:

संतुलन।

Q20 लेखक भीतरी विवशता को समझाने के लिए कौन-सा तरीक़ा सबसे उपयोगी मानता है? intermediate
  • A उसकी एक लंबी परिभाषा देना
  • B उसे गणित से समझाना
  • C उसका एक उदाहरण देना
  • D चुप रहना
Show answer
Answer: उसका एक उदाहरण देना
Why:

हिरोशिमा।

Q21 दुखी होकर चिट्ठी लिखने से मन हल्का होना पाठ के किस विचार से मेल खाता है? intermediate
  • A लिखने से भीतरी विवशता से मुक्ति
  • B लिखने से हमेशा दुख और भी बढ़ जाता है
  • C लिखना समय की बर्बादी है
  • D चिट्ठी पुरानी चीज़ है
Show answer
Answer: लिखने से भीतरी विवशता से मुक्ति
Why:

मुक्ति।

Q22 तकाज़ा शब्द का अर्थ है ______। beginner
  • A चुप रहना
  • B बार-बार माँग करना
  • C बार-बार माफ़ी माँगना
  • D धन्यवाद देना
Show answer
Answer: बार-बार माँग करना
Why:

प्रकाशक।

Q23 अज्ञेय की भाषा की प्रमुख विशेषता क्या है? intermediate
  • A ठेठ ग्रामीण बोली और कहावतों से भरी
  • B केवल हास्यपूर्ण
  • C केवल अंग्रेज़ी
  • D सधी हुई और विचारपूर्ण
Show answer
Answer: सधी हुई और विचारपूर्ण
Why:

दार्शनिक।

Q24 अभिकथन: सच्चे कृतिकार भीतरी विवशता से लिखते हैं। कारण: लिखकर ही वे उस विवशता को पहचानते और उससे मुक्त होते हैं। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

मुक्ति।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. लेखक के अनुसार हर लेखक कृतिकार नहीं होता। II. अज्ञेय को लिखने के लिए हमेशा अलार्म जैसे बाहरी सहारे की ज़रूरत पड़ती है। III. संपादक का आग्रह एक बाहरी दबाव है। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल I और III
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

सहारा ज़रूरी नहीं।

Important short questions (7)

अज्ञेय की दो काव्य-कृतियों और एक उपन्यास का नाम लिखिए।

हरी घास पर क्षण भर और कितनी नावों में कितनी बार उनके काव्य-संग्रह हैं। शेखर: एक जीवनी उनका प्रसिद्ध उपन्यास है।

लेखक को मैं क्यों लिखता हूँ प्रश्न सरल और कठिन, दोनों क्यों लगता है?

सुनने में यह सीधा सवाल है, इसलिए सरल लगता है। पर इसका सच्चा उत्तर लेखक के भीतरी जीवन की कई परतों से जुड़ा है, जिन्हें कुछ वाक्यों में समेटना कठिन है।

लेखक लिखकर किस चीज़ से मुक्त होना चाहता है?

वह उस भीतरी विवशता या बेचैनी से मुक्त होना चाहता है, जो उसे लिखने को मजबूर करती है। लिखकर वह उसे पहचानता है और उससे छुटकारा पाता है।

कृतिकार और साधारण लेखक में क्या अंतर है?

साधारण लेखक कई कारणों से कुछ भी लिख सकता है। कृतिकार भीतरी प्रेरणा से रचना करता है, और उसकी रचना सच्चे अर्थ में कृति होती है।

रचनाकारों पर पड़ने वाले बाहरी दबाव कौन-कौन से हो सकते हैं?

संपादक का रचना के लिए आग्रह, प्रकाशक का नई किताब के लिए तक़ाज़ा, और पैसों की ज़रूरत। आज के समय में पाठकों और मंचों की माँग भी एक दबाव है।

बाहरी दबाव कब दबाव नहीं रह जाता?

जब वह रचनाकार के भीतर सोई प्रेरणा को जगा देता है। तब वह केवल एक बहाना या निमित्त बन जाता है, और रचना भीतर से निकलती है।

अलार्म घड़ी वाली उपमा से लेखक क्या समझाना चाहता है?

कुछ आलसी लेखक भीतर प्रेरणा होने पर भी बाहरी दबाव के बिना नहीं लिखते, जैसे कोई नींद खुलने पर भी अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़ा रहे।

Long answer questions (3)

लेखक के अनुसार रचनाकार किन कारणों से लिखता है? पाठ के आधार पर विस्तार से लिखिए।

लेखक के अनुसार लिखने का पहला और मुख्य कारण भीतरी विवशता है। रचनाकार के मन में एक बेचैनी होती है, जिसे वह लिखकर ही पहचान पाता है। लिखने के बाद वह उस बेचैनी से मुक्त होता है। इसीलिए अज्ञेय कहते हैं कि वे यह जानने के लिए लिखते हैं कि वे क्यों लिखते हैं। दूसरा कारण बाहरी दबाव है। प्रसिद्धि के बाद संपादक, प्रकाशक और पैसों की ज़रूरत भी लिखवाते हैं। पर सच्चा कृतिकार इस दबाव को केवल सहायक की तरह बरतता है। कई बार यही दबाव भीतर सोई प्रेरणा को जगा देता है। इस तरह असली कारण भीतर का है, और बाहरी कारण उसका सहायक।

क्या बाहरी दबाव केवल लेखकों को प्रभावित करते हैं या दूसरे क्षेत्रों के कलाकारों को भी? उदाहरण सहित लिखिए।

बाहरी दबाव केवल लेखकों तक सीमित नहीं हैं। हर क्षेत्र के कलाकार इनसे प्रभावित होते हैं। फ़िल्म के गायक और संगीतकार को निर्माता की माँग और समय-सीमा के अनुसार गीत तैयार करने पड़ते हैं। चित्रकार को प्रदर्शनी या ग्राहक के लिए तय समय में चित्र बनाने पड़ते हैं। अभिनेता को दर्शकों की पसंद और बॉक्स ऑफ़िस का दबाव झेलना पड़ता है। खिलाड़ियों पर भी देश की उम्मीदों का भारी दबाव रहता है। पर अज्ञेय की बात यहाँ भी लागू होती है। जो कलाकार बाहरी दबाव को सहायक बनाकर भीतर की प्रेरणा से काम करता है, उसका काम सबसे सच्चा और सुंदर होता है।

मैं क्यों लिखता हूँ पाठ से विद्यार्थियों को लेखन और अध्ययन के बारे में क्या सीख मिलती है?

यह पाठ विद्यार्थियों को कई सीखें देता है। पहली सीख यह कि लिखना केवल अंक पाने का साधन नहीं, ख़ुद को समझने का तरीक़ा भी है। डायरी या कविता लिखने से मन की उलझनें साफ़ होती हैं। दूसरी सीख ईमानदारी की है। रटकर लिखने और अपने अनुभव से लिखने में फ़र्क़ है, और सच्चा लेखन वही है, जो भीतर से आए। तीसरी सीख आत्मानुशासन की है। जैसे अज्ञेय अलार्म के बिना उठ जाते हैं, वैसे ही विद्यार्थी को भी बिना डाँट के पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। पर शिक्षक या परीक्षा का दबाव मदद करे, तो उसे सहायक मानकर अपनाना चाहिए।

Flashcards (17)

अज्ञेय का पूरा नाम?
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन।
अज्ञेय का जन्म कब और कहाँ?
सन् 1911, कुशीनगर।
अज्ञेय का देहांत कब हुआ?
सन् 1987 में।
अज्ञेय के एक उपन्यास का नाम?
शेखर: एक जीवनी।
अज्ञेय का एक यात्रा-वृत्तांत?
अरे यायावर रहेगा याद।
तार सप्तक कब छपा?
सन् 1943 में।
ज्ञानपीठ किस रचना पर मिला?
कितनी नावों में कितनी बार।
पाठ की विधा?
आत्मकथ्य।
लिखने का पहला कारण?
यह जानना कि क्यों लिखता हूँ।
लिखकर लेखक किससे मुक्त होता है?
भीतरी विवशता से।
क्या हर लेखक कृतिकार है?
नहीं।
बाहरी दबाव के तीन रूप?
संपादक, प्रकाशक, पैसा।
बाहरी दबाव कभी क्या बन जाता है?
भीतरी प्रेरणा का निमित्त।
आलसी लेखक की उपमा?
अलार्म के बिना न उठना।
लेखक बाहरी दबाव को कैसे बरतता है?
सहायक यंत्र की तरह।
अज्ञेय को अलार्म की ज़रूरत?
नहीं, पर बजे तो हानि भी नहीं।
भीतरी विवशता समझाने का अच्छा तरीक़ा?
उदाहरण देना।

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  • शब्द और अर्थ
  • भीतरी प्रेरणा या बाहरी दबाव?
  • सही या भ्रम
  • पाठ का क्रम (पहला भाग)
  • झटपट उत्तर

हिरोशिमा: अनुभव से अनुभूति तक और कविता का जन्म

विज्ञान के विद्यार्थी अज्ञेय अणु-बम के बारे में जानते थे और हिरोशिमा जाकर अस्पताल भी देख आए, पर कविता नहीं लिख पाए। एक जले पत्थर पर मनुष्य की उजली छाया देखकर वे स्वयं विस्फोट के भोक्ता बन गए, और भारत लौटकर रेल में कविता लिखी।

What you will be able to do

  • विज्ञान के विद्यार्थी के रूप में अज्ञेय के अणु-बम संबंधी ज्ञान और बौद्धिक विद्रोह को समझा सकेंगे।
  • अनुभव और अनुभूति का अंतर पाठ के उदाहरणों से स्पष्ट कर सकेंगे।
  • जले पत्थर पर उजली छाया वाले प्रसंग से लेखक के भोक्ता बनने की प्रक्रिया बता सकेंगे।
  • हिरोशिमा कविता के भाव को अपने शब्दों में समझा सकेंगे।
  • विज्ञान के दुरुपयोग और उसे रोकने में नागरिक की भूमिका पर विचार लिख सकेंगे।

Key points

  • अज्ञेय विज्ञान के विद्यार्थी थे, इसलिए अणु, रेडियम-धर्मी तत्वों और अणु-भेदन का किताबी ज्ञान उन्हें था।

  • हिरोशिमा पर अणु-बम गिरने के समाचार और उसके बाद के प्रभाव पढ़कर उनकी बुद्धि ने विज्ञान के इस दुरुपयोग का विरोध किया।

  • उन्होंने लेख तो लिखे, पर कविता नहीं, क्योंकि बौद्धिक समझ से आगे की संवेदना वाली विवशता अभी नहीं जागी थी।

  • युद्ध के समय उन्होंने देखा था कि सैनिक ब्रह्मपुत्र में बम फेंककर ज़रूरत से कहीं ज़्यादा मछलियाँ मार देते थे।

  • जापान जाकर उन्होंने हिरोशिमा और रेडियम-धर्मी असर से पीड़ित लोगों का अस्पताल भी देखा; यह प्रत्यक्ष अनुभव था।

  • लेखक के अनुसार अनुभव वही है जो सचमुच हुआ; अनुभूति मन की संवेदना और कल्पना से उस सच को भी अपना लेती है, जो अपने साथ नहीं घटा।

  • एक जले पत्थर पर मनुष्य की उजली छाया देखकर लेखक को थप्पड़-सा लगा, और विस्फोट उनकी अनुभूति में आ गया।

  • उस क्षण वे ख़ुद हिरोशिमा के विस्फोट के भोक्ता बन गए; बाद में भारत लौटकर रेलगाड़ी में उन्होंने कविता लिखी।

  • लेखक को इससे मतलब नहीं कि कविता अच्छी है या बुरी; वह उनके लिए सच है, क्योंकि अनुभूति से जन्मी है।

Full explanation

विज्ञान का विद्यार्थी और अणु-बम का ज्ञान

भीतरी विवशता को समझाने के लिए अज्ञेय अपनी एक कविता की कहानी सुनाते हैं। वे बताते हैं कि वे विज्ञान के विद्यार्थी रहे हैं, और उनकी नियमित पढ़ाई उसी विषय में हुई। इसलिए अणु क्या होता है, रेडियम-धर्मी तत्वों का अध्ययन करते-करते विज्ञान अणु को तोड़ने तक कैसे पहुँचा, और रेडियम-धर्मिता के क्या असर होते हैं, यह सब वे किताबों से जानते थे।

फिर सन् 1945 में जापान के हिरोशिमा पर अणु-बम गिराया गया। अज्ञेय ने इसके समाचार पढ़े, और उसके बाद के भयानक प्रभावों के बारे में भी लगातार पढ़ते रहे। यानी अब उनके पास अणु-बम के असर का किताबी ज्ञान ही नहीं, ऐतिहासिक प्रमाण भी था।

विज्ञान का ऐसा दुरुपयोग देखकर उनकी बुद्धि में विद्रोह होना स्वाभाविक था। जिस विज्ञान को मनुष्य की भलाई के लिए होना चाहिए, वही लाखों लोगों की मौत का कारण बन गया। अज्ञेय ने इस पर कुछ लेख आदि भी लिखे। पर कविता नहीं लिखी। क्यों? क्योंकि उनका यह विरोध अभी बुद्धि के स्तर पर था। कविता के लिए जो भीतरी विवशता चाहिए, वह बौद्धिक पकड़ से आगे की चीज़ है, और उसका अपना अलग तर्क होता है।

ब्रह्मपुत्र की मछलियाँ और व्यर्थ जीव-नाश

अज्ञेय एक और अनुभव बताते हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के समय वे भारत की पूर्वी सीमा पर थे। वहाँ उन्होंने देखा कि सैनिक ब्रह्मपुत्र नदी में बम फेंककर हज़ारों मछलियाँ मार डालते थे, जबकि उन्हें खाने के लिए बहुत थोड़ी मछलियाँ चाहिए होती थीं।

जीवन की इस बर्बादी को देखकर उनके भीतर गहरी पीड़ा उमड़ी थी। इस अनुभव ने उन्हें एक हद तक यह समझने में मदद की कि अणु-बम से होने वाला व्यर्थ जीव-नाश कैसा होता होगा। छोटे पैमाने का यह अनुभव बड़े विनाश को समझने की एक खिड़की बन गया।

यह प्रसंग बताता है कि संवेदनशील व्यक्ति के लिए हर जीव का जीवन क़ीमती है। मछलियाँ हों या मनुष्य, बिना ज़रूरत के किसी का भी नाश मन को चोट पहुँचाता है। अज्ञेय की करुणा यहीं से झलकने लगती है।

हिरोशिमा की यात्रा: अनुभव तो हुआ, कविता नहीं

बाद में अज्ञेय को जापान जाने का अवसर मिला। वे हिरोशिमा भी गए। वहाँ उन्होंने वह अस्पताल देखा, जहाँ रेडियम-धर्मी पदार्थ से घायल लोग बरसों से कष्ट भोग रहे थे। अब उन्हें अणु-बम के असर का प्रत्यक्ष अनुभव भी हो गया।

फिर भी उन्होंने तुरंत कुछ नहीं लिखा। अज्ञेय इसका कारण बताते हैं। उनके अनुसार अनुभव से अनुभूति कहीं गहरी चीज़ है, कम से कम एक रचनाकार के लिए। अनुभव उसका होता है, जो घटित हुआ या जिसे हमने देखा। अनुभूति मन की संवेदना और कल्पना की मदद से ऐसे सच को भी अपने भीतर उतार लेती है, जो रचनाकार के साथ असल में नहीं घटा।

जो चीज़ आँखों के सामने नहीं आई, जो अपने अनुभव में नहीं घटी, वह भी जब आत्मा के सामने जलते हुए प्रकाश की तरह साफ़ हो जाए, तब वह अनुभूति-प्रत्यक्ष बनती है। हिरोशिमा में सब कुछ देखने के बाद भी अज्ञेय के भीतर यही अनुभूति-प्रत्यक्ष होना बाक़ी था। इसलिए कविता नहीं बनी।

अनुभव और अनुभूति: एक उदाहरण से समझें

यह भेद थोड़ा कठिन लगता है, इसलिए इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने अख़बार में पढ़ा कि किसी गाँव में बाढ़ आई और सैकड़ों घर बह गए। यह जानकारी है। फिर आप उस गाँव गए और टूटे घर, कीचड़ और राहत-शिविर देखे। यह अनुभव है।

अब मान लीजिए वहाँ आपको कीचड़ में आधी दबी एक बच्चे की स्कूल-कॉपी मिली, जिस पर उसका नाम लिखा था। उस कॉपी को देखते ही आपको लगा कि आप उस बच्चे का डर, उसका बहता घर और उसका टूटा सपना ख़ुद महसूस कर रहे हैं। यह अनुभूति है। अब आपके भीतर से जो लिखा जाएगा, वह केवल रिपोर्ट नहीं, सच्ची रचना होगी।

अज्ञेय यही कहते हैं। अनुभव बाहर की घटना से जुड़ता है, अनुभूति भीतर की संवेदना से। रचनाकार के लिए दूसरा ज़्यादा ज़रूरी है, क्योंकि वही उसे घटना का सहभागी बनाता है। इसीलिए लेखक मानता है कि उसके लेखन में प्रत्यक्ष अनुभव से ज़्यादा मदद अनुभूति करती है।

जले पत्थर पर उजली छाया: भोक्ता बनने का क्षण

फिर एक दिन हिरोशिमा की सड़क पर घूमते हुए अज्ञेय ने कुछ ऐसा देखा, जिसने सब बदल दिया। एक झुलसे हुए पत्थर पर एक लंबी, उजली छाया थी। विस्फोट के समय कोई व्यक्ति वहाँ खड़ा रहा होगा। विस्फोट से फैली रेडियम-धर्मी किरणें आसपास से आगे बढ़ीं, तो पत्थर झुलस गया। पर जो किरणें उस व्यक्ति पर रुक गईं, उन्होंने उसे भाप बनाकर उड़ा दिया होगा। उसके शरीर ने जहाँ किरणें रोकीं, वहाँ पत्थर नहीं झुलसा, और उसकी उजली छाया रह गई। यानी पूरी त्रासदी जैसे पत्थर पर लिख दी गई थी।

उस छाया को देखकर लेखक को जैसे एक थप्पड़-सा लगा। उन्हें लगा कि मौन खड़ा इतिहास उनके भीतर अचानक एक जलते सूरज की तरह उगा और डूब गया। उस क्षण अणु-विस्फोट उनकी अनुभूति में प्रत्यक्ष हो गया। एक तरह से वे ख़ुद हिरोशिमा के विस्फोट के भोक्ता बन गए, यानी उन्हें लगा कि उन्होंने ख़ुद उस विस्फोट को सहा है।

इसी क्षण से वह भीतरी विवशता जागी, जिसकी बात पूरे पाठ में हो रही है। उनकी बेचैनी अब बुद्धि के क्षेत्र से आगे बढ़कर संवेदना के क्षेत्र में आ गई थी। अब यह केवल सोचने की नहीं, महसूस करने की बात थी।

रेलगाड़ी में लिखी कविता: अनुभूति से जन्मा सच

अनुभूति के इस गहरे क्षण के बाद भी अज्ञेय ने तुरंत नहीं लिखा। धीरे-धीरे वे उस भावना से अपने को थोड़ा अलग कर पाए, ताकि उसे तटस्थ होकर देख सकें। फिर अचानक एक दिन उन्होंने हिरोशिमा पर कविता लिखी। यह कविता जापान में नहीं, भारत लौटकर एक रेलगाड़ी में बैठे-बैठे लिखी गई।

अज्ञेय कहते हैं कि उन्हें इससे मतलब नहीं कि कविता अच्छी है या बुरी। उनके लिए वह सच है, क्योंकि वह अनुभूति से जन्मी है। यही उनके लिए सबसे महत्त्वपूर्ण बात है। यहाँ पाठ का पहला विचार फिर लौट आता है: लिखकर ही लेखक अपनी भीतरी विवशता से मुक्त होता है।

यह कविता सन् 1959 के संग्रह अरी ओ करुणा प्रभामय में है। इसका भाव कुछ इस तरह है। एक दिन शहर में अचानक एक सूरज निकला, पर पूरब के क्षितिज से नहीं, शहर के बीचों-बीच फटी धरती से। उस मनुष्य के बनाए सूरज ने मनुष्यों को ही भाप बनाकर सोख लिया। लोग मिट गए, पर उनकी छायाएँ झुलसे पत्थरों और उजड़ी सड़कों पर रह गईं। कवि कहता है कि पत्थर पर बची वह जली हुई छाया मनुष्य के किए की गवाह है। कविता में सूरज का बिंब विनाश का प्रतीक बन जाता है, और छाया इतिहास का दस्तावेज़।

यह पाठ यह भी सिखाता है कि विज्ञान दोधारी तलवार है। वही परमाणु ऊर्जा बिजली बना सकती है और शहर भी मिटा सकती है। एक संवेदनशील नागरिक के रूप में हमें विज्ञान के ऐसे दुरुपयोग के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए और शांति का साथ देना चाहिए।

Concepts and terms

अनुभव

जो अपने साथ घटा हो या आँखों से देखा गया हो, उसकी जानकारी।

अनुभूति

संवेदना और कल्पना से किसी सत्य को भीतर तक महसूस करना, चाहे वह अपने साथ न घटा हो।

अनुभूति-प्रत्यक्ष

जो आँखों से नहीं, आत्मा के सामने ज्वलंत होकर प्रत्यक्ष हो जाए।

भोक्ता

जो किसी घटना को स्वयं भोगे या सहे; लेखक हिरोशिमा का भोक्ता बन गया।

विज्ञान का दुरुपयोग

विज्ञान की शक्ति को विनाश, हिंसा या स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

आरव विज्ञान का होशियार विद्यार्थी था। उसने किताबों में पढ़ा था कि प्लास्टिक सैकड़ों साल तक नष्ट नहीं होता और समुद्री जीवों के लिए घातक है। उसने इस पर स्कूल में एक अच्छा प्रोजेक्ट भी बनाया था।

छुट्टियों में वह समुद्र किनारे घूमने गया। वहाँ उसने कचरे के ढेर देखे, पर उसे कुछ ख़ास महसूस नहीं हुआ। फिर एक दिन रेत पर उसे एक मरा हुआ कछुआ दिखा, जिसके गले में प्लास्टिक की थैली फँसी थी।

उस रात आरव सो नहीं पाया। घर लौटकर ट्रेन में ही उसने एक कविता लिखी और अपने मोहल्ले में प्लास्टिक के ख़िलाफ़ अभियान शुरू किया।

Activity:

किसी ऐसी समस्या पर, जिसके बारे में आपने केवल पढ़ा है, अपने आसपास से एक सच्चा उदाहरण खोजिए। उस पर छह-आठ पंक्तियों की कविता या अनुच्छेद लिखिए।

Analysis:

ज्ञान और अनुभव ज़रूरी हैं, पर बदलाव तब आता है, जब कोई सच्चाई हमारे भीतर उतरकर हमें बेचैन कर दे। अज्ञेय की तरह आरव भी अनुभूति से ही सच्चे लेखन और कर्म तक पहुँचा।

Did you know

हिरोशिमा पर 6 अगस्त 1945 को और नागासाकी पर 9 अगस्त 1945 को अणु-बम गिराए गए। ये युद्ध में इस्तेमाल हुए अब तक के इकलौते परमाणु बम हैं।

हिरोशिमा में आज भी शांति स्मारक उद्यान है, जहाँ हर साल 6 अगस्त को दुनिया भर के लोग शांति की प्रार्थना करते हैं।

अज्ञेय की हिरोशिमा कविता सन् 1959 के काव्य-संग्रह अरी ओ करुणा प्रभामय में संकलित है।

Memory tricks

कविता तक की सीढ़ी: ज्ञा-अ-अ-क — ज्ञान (किताबें), अनुभव (अस्पताल), अनुभूति (छाया), कविता (रेल में)।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 लेखक भीतरी विवशता समझाने के लिए किसका उदाहरण देता है? beginner
  • A अपनी हिरोशिमा कविता का
  • B अपने बचपन के किसी खेल का
  • C किसी फ़िल्म का
  • D किसी यात्रा-वृत्तांत का
Show answer
Answer: अपनी हिरोशिमा कविता का
Why:

अणु-बम।

Q2 विज्ञान का विद्यार्थी होने से लेखक को किस बात का ज्ञान था? intermediate
  • A खेती-बाड़ी और फ़सलों की पैदावार का
  • B संगीत का
  • C अणु और रेडियम-धर्मिता का
  • D चित्रकला का
Show answer
Answer: अणु और रेडियम-धर्मिता का
Why:

किताबी ज्ञान।

Q3 अणु-बम के समाचार पढ़कर लेखक ने कविता क्यों नहीं लिखी? intermediate
  • A उन्हें उस समय कविता लिखना आता ही नहीं था
  • B वे बीमार थे
  • C संपादक ने मना किया
  • D विरोध अभी बुद्धि के स्तर पर था, संवेदना में नहीं
Show answer
Answer: विरोध अभी बुद्धि के स्तर पर था, संवेदना में नहीं
Why:

बौद्धिक पकड़।

Q4 अणु-बम जैसे दुरुपयोग पर लेखक की बुद्धि का विरोध करना सहज क्यों था? intermediate
  • A विज्ञान के कारण लेखक की अपनी पढ़ाई बहुत ही कठिन हो गई थी
  • B भलाई के लिए बना विज्ञान लाखों की मौत का कारण बना
  • C बम महँगा था
  • D जापान दूर था
Show answer
Answer: भलाई के लिए बना विज्ञान लाखों की मौत का कारण बना
Why:

दुरुपयोग।

Q5 ब्रह्मपुत्र वाली घटना में लेखक को किस बात से व्यथा हुई? intermediate
  • A मछलियों के बाज़ार में बहुत महँगा बिकने से
  • B नदी में बाढ़ से
  • C ज़रूरत से कहीं ज़्यादा जीवों के व्यर्थ नाश से
  • D सैनिकों की भूख से
Show answer
Answer: ज़रूरत से कहीं ज़्यादा जीवों के व्यर्थ नाश से
Why:

अपव्यय।

Q6 मछलियों वाले अनुभव ने लेखक को क्या समझने में मदद की? advanced
  • A मछली पकड़ने की सबसे अच्छी और नई तकनीक को
  • B नदी के बहाव को
  • C सेना के नियमों को
  • D अणु-बम से हुए व्यर्थ जीव-नाश को
Show answer
Answer: अणु-बम से हुए व्यर्थ जीव-नाश को
Why:

छोटे से बड़ा।

Q7 हिरोशिमा के अस्पताल में लेखक ने किन्हें देखा? beginner
  • A रेडियम-धर्मी असर से पीड़ित लोगों को
  • B सीमा पर युद्ध में घायल हुए सैनिकों को
  • C बाढ़-पीड़ितों को
  • D बच्चों को खेलते
Show answer
Answer: रेडियम-धर्मी असर से पीड़ित लोगों को
Why:

बरसों से कष्ट।

Q8 लेखक के अनुसार रचनाकार के लिए कौन ज़्यादा गहरी चीज़ है? beginner
  • A अनुभव
  • B अनुभूति
  • C जानकारी
  • D प्रसिद्धि
Show answer
Answer: अनुभूति
Why:

संवेदना।

Q9 अनुभव और अनुभूति में मुख्य अंतर क्या है? intermediate
  • A अनुभव हमेशा दुखद होता है और अनुभूति हमेशा सुखद होती है
  • B दोनों एक ही हैं
  • C अनुभव घटना से जुड़ा है, अनुभूति संवेदना से सच को अपनाती है
  • D अनुभव केवल बच्चों को होता है
Show answer
Answer: अनुभव घटना से जुड़ा है, अनुभूति संवेदना से सच को अपनाती है
Why:

कल्पना।

Q10 अनुभूति-प्रत्यक्ष का क्या अर्थ है? advanced
  • A जो केवल आँखों के सामने साफ़ दिखाई दे
  • B जो सपने में दिखे
  • C जो किताब में लिखा हो
  • D जो आत्मा के सामने ज्वलंत होकर साफ़ दिखे
Show answer
Answer: जो आत्मा के सामने ज्वलंत होकर साफ़ दिखे
Why:

आँखों से नहीं।

Q11 जले पत्थर पर उजली छाया कैसे बनी होगी? advanced
  • A व्यक्ति के शरीर ने किरणें रोकीं, तो उतना पत्थर नहीं झुलसा
  • B किसी कलाकार ने बाद में पत्थर पर सफ़ेद रंग से उसे बनाया
  • C बारिश से बनी
  • D धूप से बनी
Show answer
Answer: व्यक्ति के शरीर ने किरणें रोकीं, तो उतना पत्थर नहीं झुलसा
Why:

रुद्ध किरणें।

Q12 समूची त्रासदी जैसे पत्थर पर लिखी गई, इस कथन का भाव क्या है? intermediate
  • A पत्थर पर किसी ने घटना का पूरा विवरण लिखा था
  • B छाया पूरी घटना की मूक गवाह बन गई
  • C पत्थर टूट गया
  • D पत्थर बहुत पुराना था
Show answer
Answer: छाया पूरी घटना की मूक गवाह बन गई
Why:

साखी।

Q13 छाया देखकर थप्पड़-सा लगने का क्या अर्थ है? beginner
  • A किसी व्यक्ति ने सचमुच उन्हें मारा
  • B तेज़ हवा चली
  • C वे गिर पड़े
  • D अचानक गहरा भावनात्मक झटका
Show answer
Answer: अचानक गहरा भावनात्मक झटका
Why:

आघात।

Q14 लेखक ख़ुद को हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता कब मानने लगा? intermediate
  • A जले पत्थर पर उजली छाया देखकर
  • B अणु-बम के बारे में किताबें पढ़कर
  • C जापान का टिकट लेकर
  • D लेख लिखकर
Show answer
Answer: जले पत्थर पर उजली छाया देखकर
Why:

अनुभूति-प्रत्यक्ष।

Q15 भोक्ता बनने के बाद लेखक की आकुलता किस क्षेत्र में पहुँची? intermediate
  • A बुद्धि के क्षेत्र में
  • B व्यापार के क्षेत्र में
  • C संवेदना के क्षेत्र में
  • D राजनीति के क्षेत्र में
Show answer
Answer: संवेदना के क्षेत्र में
Why:

बुद्धि से आगे।

Q16 लेखक ने हिरोशिमा कविता कहाँ लिखी? beginner
  • A हिरोशिमा के अस्पताल में
  • B भारत लौटकर रेलगाड़ी में
  • C जापान के होटल में
  • D ब्रह्मपुत्र के किनारे
Show answer
Answer: भारत लौटकर रेलगाड़ी में
Why:

अचानक एक दिन।

Q17 छाया देखने के बाद भी लेखक ने तुरंत कविता क्यों नहीं लिखी? advanced
  • A उनके पास उस समय लिखने के लिए काग़ज़ और क़लम नहीं थे
  • B उन्हें डर था
  • C भावना से थोड़ा अलग होकर ही उसे देख पाना संभव था
  • D वे भूल गए
Show answer
Answer: भावना से थोड़ा अलग होकर ही उसे देख पाना संभव था
Why:

तटस्थता।

Q18 लेखक को कविता के अच्छे या बुरे होने से मतलब क्यों नहीं? intermediate
  • A उन्हें कविता लिखना और पढ़ना पसंद ही नहीं था
  • B कविता छपी नहीं
  • C कविता बहुत छोटी थी
  • D वह अनुभूति से जन्मी है, इसलिए उनके लिए सच है
Show answer
Answer: वह अनुभूति से जन्मी है, इसलिए उनके लिए सच है
Why:

अनुभूति-प्रसूत।

Q19 हिरोशिमा कविता में मानव का रचा हुआ सूरज किसका प्रतीक है? beginner
  • A असली सूरज
  • B अणु-बम
  • C दीया
  • D बिजली का बल्ब
Show answer
Answer: अणु-बम
Why:

नगर के बीच।

Q20 कविता में सूरज के पूरब से न उगकर शहर के बीच फटने का क्या भाव है? advanced
  • A यह प्रकृति का नहीं, मनुष्य का बनाया विनाश था
  • B उस दिन सूरज सचमुच अपना रास्ता भटक गया था
  • C शहर में बहुत बिजली थी
  • D यह सपना था
Show answer
Answer: यह प्रकृति का नहीं, मनुष्य का बनाया विनाश था
Why:

काल-सूर्य।

Q21 विज्ञान को दोधारी तलवार कहने का कारण क्या है? intermediate
  • A विज्ञान केवल और केवल हथियार बनाने के ही काम में आता है
  • B उसका उपयोग निर्माण और विनाश, दोनों के लिए हो सकता है
  • C विज्ञान बहुत कठिन है
  • D विज्ञान महँगा है
Show answer
Answer: उसका उपयोग निर्माण और विनाश, दोनों के लिए हो सकता है
Why:

परमाणु ऊर्जा।

Q22 भोक्ता शब्द का अर्थ है ______। beginner
  • A दूर से देखने वाला
  • B लिखने वाला
  • C बचाने वाला
  • D भोगने या सहने वाला
Show answer
Answer: भोगने या सहने वाला
Why:

हिरोशिमा।

Q23 रुद्ध होने का अर्थ है ______। intermediate
  • A बहुत तेज़ी से आगे बहना
  • B खिल जाना
  • C रुक जाना या फँस जाना
  • D टूट जाना
Show answer
Answer: रुक जाना या फँस जाना
Why:

किरणें।

Q24 अभिकथन: हिरोशिमा जाकर अस्पताल देखने के बाद भी लेखक ने तुरंत कविता नहीं लिखी। कारण: तब तक अनुभव तो था, पर अनुभूति-प्रत्यक्ष नहीं हुआ था। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

कसर।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. लेखक ने अणु-बम के प्रभावों के समाचार पढ़े थे। II. लेखक ने हिरोशिमा कविता जापान में ही लिखी। III. जले पत्थर पर उजली छाया देखकर लेखक को झटका लगा। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल I और III
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

भारत लौटकर।

Important short questions (7)

लेखक को अणु-बम के बारे में कौन-सा ज्ञान पहले से था?

विज्ञान का विद्यार्थी होने के कारण वे अणु, रेडियम-धर्मी तत्वों और अणु-भेदन के बारे में जानते थे। रेडियम-धर्मिता के प्रभावों का किताबी ज्ञान भी उन्हें था।

ब्रह्मपुत्र वाली घटना का लेखक पर क्या असर पड़ा?

सैनिकों द्वारा बम से हज़ारों मछलियाँ मारने पर उनके भीतर गहरी पीड़ा उठी। इसी से वे अणु-बम से होने वाले व्यर्थ जीव-नाश को कुछ हद तक महसूस कर सके।

हिरोशिमा का अस्पताल देखकर भी लेखक ने कविता क्यों नहीं लिखी?

अस्पताल देखना प्रत्यक्ष अनुभव था, पर अनुभूति-प्रत्यक्ष अभी नहीं हुआ था। संवेदना के स्तर की विवशता जागे बिना कविता नहीं बन सकती थी।

अनुभव और अनुभूति में क्या अंतर है?

अनुभव उसका होता है, जो घटित हुआ या देखा गया। अनुभूति संवेदना और कल्पना से उस सत्य को भी भीतर उतार लेती है, जो अपने साथ नहीं घटा।

पत्थर पर उजली छाया बनने का कारण लेखक ने क्या बताया?

विस्फोट के समय वहाँ खड़े व्यक्ति पर किरणें रुक गईं और उसे भाप बना दिया। उसके शरीर ने किरणें रोकीं, इसलिए उतना पत्थर नहीं झुलसा और उजली छाया रह गई।

लेखक ने हिरोशिमा कविता कब और कहाँ लिखी?

छाया देखने के कुछ समय बाद, जब वे उस भावना से थोड़ा अलग हो पाए, तब लिखी। कविता जापान में नहीं, भारत लौटकर रेलगाड़ी में लिखी गई।

हिरोशिमा कविता में छाया को मनुष्य की साखी क्यों कहा गया है?

मनुष्य भाप बनकर मिट गए, पर पत्थरों पर उनकी छायाएँ रह गईं। ये छायाएँ गवाही देती हैं कि मनुष्य ने ही मनुष्य का कैसा विनाश किया।

Long answer questions (3)

हिरोशिमा की त्रासदी लेखक को अपनी निजी पीड़ा जैसी कब लगी, और ऐसा किस घटना से हुआ?

लेखक को अणु-बम का किताबी ज्ञान था, उन्होंने समाचार भी पढ़े थे, और हिरोशिमा जाकर अस्पताल भी देखा था। फिर भी वे विस्फोट को भीतर से महसूस नहीं कर पाए थे। एक दिन हिरोशिमा की सड़क पर उन्होंने एक जले पत्थर पर एक लंबी उजली छाया देखी। विस्फोट के समय वहाँ खड़ा व्यक्ति भाप बनकर उड़ गया था, पर उसकी छाया पत्थर पर रह गई थी। इसे देखकर लेखक को थप्पड़-सा लगा। उन्हें लगा, जैसे इतिहास उनके भीतर सूरज की तरह उगा और डूब गया। उस क्षण विस्फोट उनकी अनुभूति में प्रत्यक्ष हो गया, और वे ख़ुद उसके भोक्ता बन गए।

आँखों देखी घटना से ज़्यादा मन की गहरी अनुभूति अज्ञेय की रचना को क्यों गढ़ती है? समझाइए।

लेखक के अनुसार अनुभव केवल उसका होता है, जो घटित हुआ या जिसे आँखों से देखा गया। यह जानकारी तो देता है, पर ज़रूरी नहीं कि रचना की प्रेरणा भी दे। अनुभूति संवेदना और कल्पना से उस सत्य को भी आत्मसात कर लेती है, जो अपने साथ नहीं घटा। इससे रचनाकार घटना का सहभागी बन जाता है। हिरोशिमा का अस्पताल देखना अनुभव था, पर उससे कविता नहीं बनी। जले पत्थर पर छाया देखकर जब अनुभूति हुई, तभी भीतर विवशता जागी और कविता बनी। इसलिए लेखक मानते हैं कि सच्ची रचना अनुभूति से ही जन्म लेती है।

हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानक दुरुपयोग है। आपकी दृष्टि में आज विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ-कहाँ हो रहा है?

हिरोशिमा में विज्ञान ने लाखों लोगों की जान ली। आज भी विज्ञान का दुरुपयोग कई रूपों में हो रहा है। देश परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियार बना रहे हैं, जो पूरी मानवता के लिए ख़तरा हैं। इंटरनेट और मोबाइल का इस्तेमाल झूठी ख़बरें, साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए हो रहा है। खेती में ज़रूरत से ज़्यादा रसायन मिट्टी और पानी को ज़हरीला बना रहे हैं। कारख़ानों का धुआँ और प्लास्टिक पर्यावरण को नष्ट कर रहे हैं। विज्ञान अपने-आप में बुरा नहीं है। उसका दुरुपयोग करने वाली मनुष्य की सोच बुरी है।

Flashcards (17)

लेखक किस विषय के विद्यार्थी थे?
विज्ञान।
अणु-बम किस शहर पर गिरा, जिसका पाठ में ज़िक्र है?
हिरोशिमा।
बम के समाचार पढ़कर लेखक की बुद्धि ने क्या किया?
विद्रोह।
लेखक ने पहले क्या लिखा?
लेख आदि।
सैनिक किस नदी में बम फेंकते थे?
ब्रह्मपुत्र।
बम से क्या मारा जाता था?
हज़ारों मछलियाँ।
हिरोशिमा में लेखक ने क्या देखा?
रेडियम-पीड़ितों का अस्पताल।
अनुभव किसका होता है?
घटित का।
अनुभूति किसके सहारे होती है?
संवेदना और कल्पना।
जले पत्थर पर क्या था?
लंबी उजली छाया।
छाया देखकर लेखक को क्या लगा?
थप्पड़-सा।
लेखक किसका भोक्ता बन गया?
हिरोशिमा विस्फोट का।
कविता कहाँ लिखी गई?
भारत में, रेलगाड़ी में।
कविता लेखक के लिए क्यों सच है?
अनुभूति से जन्मी है।
कविता किस संग्रह में है?
अरी ओ करुणा प्रभामय।
कविता में सूरज किसका प्रतीक है?
अणु-बम के विनाश का।
कविता में पत्थर की छाया क्या है?
मानव के किए की गवाह।

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  • शब्द और अर्थ
  • अनुभव या अनुभूति?
  • सही या भ्रम
  • कविता तक का सफ़र
  • झटपट उत्तर

Class 10 Hindi Chapter 15 — frequently asked questions

अज्ञेय की दो काव्य-कृतियों और एक उपन्यास का नाम लिखिए।

हरी घास पर क्षण भर और कितनी नावों में कितनी बार उनके काव्य-संग्रह हैं। शेखर: एक जीवनी उनका प्रसिद्ध उपन्यास है।

लेखक को मैं क्यों लिखता हूँ प्रश्न सरल और कठिन, दोनों क्यों लगता है?

सुनने में यह सीधा सवाल है, इसलिए सरल लगता है। पर इसका सच्चा उत्तर लेखक के भीतरी जीवन की कई परतों से जुड़ा है, जिन्हें कुछ वाक्यों में समेटना कठिन है।

लेखक लिखकर किस चीज़ से मुक्त होना चाहता है?

वह उस भीतरी विवशता या बेचैनी से मुक्त होना चाहता है, जो उसे लिखने को मजबूर करती है। लिखकर वह उसे पहचानता है और उससे छुटकारा पाता है।

लेखक को अणु-बम के बारे में कौन-सा ज्ञान पहले से था?

विज्ञान का विद्यार्थी होने के कारण वे अणु, रेडियम-धर्मी तत्वों और अणु-भेदन के बारे में जानते थे। रेडियम-धर्मिता के प्रभावों का किताबी ज्ञान भी उन्हें था।

ब्रह्मपुत्र वाली घटना का लेखक पर क्या असर पड़ा?

सैनिकों द्वारा बम से हज़ारों मछलियाँ मारने पर उनके भीतर गहरी पीड़ा उठी। इसी से वे अणु-बम से होने वाले व्यर्थ जीव-नाश को कुछ हद तक महसूस कर सके।

हिरोशिमा का अस्पताल देखकर भी लेखक ने कविता क्यों नहीं लिखी?

अस्पताल देखना प्रत्यक्ष अनुभव था, पर अनुभूति-प्रत्यक्ष अभी नहीं हुआ था। संवेदना के स्तर की विवशता जागे बिना कविता नहीं बन सकती थी।

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