Class 10 Hindi Chapter 6: संगतकार

संगतकार is Chapter 6 of NCERT / CBSE Class 10 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
  • 2 topics
  • 50 MCQs
  • 14 short answers
  • 6 long answers
  • 34 flashcards
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  • Hindi

मंगलेश डबराल और मंच का अनदेखा साथी

संगतकार वह कलाकार है, जो मुख्य गायक के साथ गाता या बजाता है, पर कभी आगे नहीं आता। कविता बताती है कि जब गायक तानों में भटक जाता है, तब यही साथी मूल धुन को थामे रखता है और गायक को उसकी जड़ों से जोड़ता है।

What you will be able to do

  • मंगलेश डबराल के जीवन, पत्रकारिता, कविता-संग्रहों और काव्य-विशेषताओं के बारे में बता सकेंगे।
  • संगतकार शब्द का अर्थ समझकर बता सकेंगे कि वह मुख्य गायक का साथ कैसे देता है।
  • चट्टान जैसे भारी स्वर और काँपती कमज़ोर आवाज़ के अंतर का भाव समझा सकेंगे।
  • स्थायी, अंतरा, तान और सरगम जैसे संगीत-शब्दों का अर्थ कविता के संदर्भ में स्पष्ट कर सकेंगे।
  • पीछे छूटा सामान समेटने और बचपन याद दिलाने वाले बिंबों का अर्थ बता सकेंगे।

Key points

  • मंगलेश डबराल का जन्म सन् 1948 में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के काफलपानी गाँव में हुआ; पढ़ाई देहरादून में हुई।

  • वे लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे; सन् 1983 से उन्होंने जनसत्ता में साहित्य संपादक का काम सँभाला।

  • आवाज़ भी एक जगह है, हम जो देखते हैं, घर का रास्ता और पहाड़ पर लालटेन उनके कविता-संग्रह हैं; सन् 2020 में उनका निधन हुआ।

  • उनकी कविता शोर मचाए बिना अन्याय का विरोध करती है; उसकी भाषा पारदर्शी और सौंदर्य-बोध बहुत सूक्ष्म है।

  • संगतकार वह सहयोगी कलाकार है, जो मुख्य गायक के साथ गाता या कोई वाद्य बजाता है।

  • मुख्य गायक का स्वर चट्टान जैसा भारी है, जबकि संगतकार की आवाज़ सुंदर, पर कमज़ोर और काँपती हुई है।

  • संगतकार गायक का छोटा भाई, शिष्य या दूर से पैदल सीखने आने वाला कोई रिश्तेदार हो सकता है।

  • जब गायक अंतरे की कठिन तानों में खो जाता है, तब संगतकार स्थायी, यानी गीत की मूल पंक्ति, को सँभाले रखता है।

  • कवि कहता है कि संगतकार मानो गायक का पीछे छूटा सामान समेटता है और उसे उसके नौसिखिया दिनों की याद दिलाता है।

Full explanation

मंगलेश डबराल: पहाड़ से आया शांत कवि

मंगलेश डबराल का जन्म सन् 1948 में काफलपानी नाम के एक पहाड़ी गाँव में हुआ। यह गाँव उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में है। उनकी पढ़ाई-लिखाई देहरादून में हुई। पहाड़ों का शांत, गहरा और सादा जीवन उनकी कविता में भी झलकता है। सन् 2020 में उनका निधन हुआ।

डबराल जी ने जीवन का बड़ा हिस्सा पत्रकारिता और संपादन में बिताया। दिल्ली में उन्होंने हिंदी पेट्रियट, प्रतिपक्ष और आसपास जैसे पत्रों में काम किया। फिर वे भोपाल गए और भारत भवन की पत्रिका पूर्वग्रह में सहायक संपादक बने। कुछ समय उन्होंने इलाहाबाद और लखनऊ के अमृत प्रभात में भी नौकरी की।

सन् 1983 में उन्होंने जनसत्ता अख़बार में साहित्य संपादक का पद सँभाला। बाद में वे सहारा समय में संपादन से जुड़े और फिर नेशनल बुक ट्रस्ट के साथ काम किया। यानी वे जीवन भर शब्दों और विचारों की दुनिया में सक्रिय रहे। उन्होंने साहित्य के साथ सिनेमा, संचार माध्यमों और संस्कृति के सवालों पर भी लगातार लिखा।

कविता-संग्रह, सम्मान और काव्य-स्वर

आवाज़ भी एक जगह है, हम जो देखते हैं, घर का रास्ता और पहाड़ पर लालटेन उनके चार कविता-संग्रह हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार और पहल सम्मान मिले। वे एक अच्छे अनुवादक के रूप में भी जाने जाते हैं। उनकी कविताएँ भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेज़ी, रूसी, जर्मन, स्पेनी, पोलिश और बल्गारियाई में भी अनूदित हुई हैं।

मंगलेश डबराल की कविता अन्याय और छल का विरोध करती है। एक ओर वह पुराने सामंती, यानी ऊँच-नीच वाले सोच का विरोध करती है। दूसरी ओर वह पैसे की ताक़त से होने वाली धोखेबाज़ी को भी पहचानती है। पर ख़ास बात यह है कि उनका विरोध नारेबाज़ी या शोर से नहीं होता।

वे विरोध में एक सुंदर सपना रचते हैं, यानी एक बेहतर दुनिया की तस्वीर सामने रख देते हैं। उनकी भाषा पारदर्शी है, जैसे साफ़ पानी, जिसके आर-पार सब दिखता है। उनका सौंदर्य-बोध बहुत सूक्ष्म है, यानी वे छोटी-छोटी, अनदेखी चीज़ों में गहरी सुंदरता खोज लेते हैं। संगतकार कविता इसी सूक्ष्म दृष्टि का सुंदर उदाहरण है।

संगतकार कौन है?

संगीत के किसी कार्यक्रम में हमारा ध्यान आमतौर पर मुख्य गायक पर जाता है। उसी का नाम पोस्टर पर होता है, उसी के लिए तालियाँ बजती हैं। पर उसके पीछे या बगल में कुछ और कलाकार भी बैठे होते हैं। कोई उसके साथ धीमे स्वर में गाता है, कोई तानपुरा या हारमोनियम बजाता है, कोई तबले पर ताल देता है। इन्हें ही संगतकार कहते हैं।

यह कविता इसी अनदेखे कलाकार के बारे में है। कवि हमें बताता है कि मंच पर दिखने वाली सफलता के पीछे कितने लोगों का चुपचाप योगदान होता है। कविता संगीत से शुरू होती है, पर उसका संदेश संगीत से बहुत बड़ा है। नाटक, फ़िल्म, नृत्य, खेल, राजनीति और इतिहास, हर जगह किसी नायक के पीछे ऐसे ही कई सहयोगी होते हैं।

कविता में संगीत की बारीक समझ भी है और दृश्य रचने की ताक़त भी। पढ़ते हुए ऐसा लगता है, जैसे हम किसी सभा में बैठे हों और सामने गायक और संगतकार को गाते देख रहे हों। यही दृश्यात्मकता इस कविता को इतना जीवंत बनाती है।

चट्टान जैसा स्वर और काँपती आवाज़

कविता की शुरुआत दो आवाज़ों की तुलना से होती है। मुख्य गायक का स्वर चट्टान जैसा भारी और गंभीर है। चट्टान मज़बूत, स्थिर और बड़ी होती है। यानी मुख्य गायक की आवाज़ में ताक़त, गहराई और प्रभाव है, जो पूरी सभा पर छा जाता है।

इसके साथ जो दूसरी आवाज़ है, वह सुंदर तो है, पर कमज़ोर और काँपती हुई है। यह संगतकार की आवाज़ है। कवि उसे कमज़ोर कहता है, पर साथ में सुंदर भी कहता है। यानी उसकी कमज़ोरी में भी एक कोमल सुंदरता है। यह आवाज़ मुख्य स्वर को दबाती नहीं, बल्कि उसे सहारा देकर और भरा-पूरा बना देती है।

यहाँ एक विरोध दिखता है: एक ओर भारी, शक्तिशाली स्वर, दूसरी ओर हल्का, काँपता स्वर। पर दोनों मिलकर ही पूरा संगीत रचते हैं। जैसे किसी इमारत में बड़े खंभे दिखते हैं, पर उन्हें जोड़ने वाला गारा भी उतना ही ज़रूरी होता है।

छोटा भाई, शिष्य या दूर का रिश्तेदार

कवि अनुमान लगाता है कि यह संगतकार कौन हो सकता है। शायद संगतकार गायक का छोटा भाई है। या फिर कोई शिष्य है। या फिर कोई दूर का रिश्तेदार, जो पैदल चलकर उससे संगीत सीखने आता है। इन सब अनुमानों में एक बात साझी है: संगतकार गायक से उम्र, अनुभव या हैसियत में छोटा है, और उसके प्रति आदर और अपनापन रखता है।

पैदल चलकर सीखने आने वाली बात बहुत मार्मिक है। इससे पता चलता है कि संगतकार साधारण, शायद ग़रीब परिवार से है, पर संगीत के लिए उसमें गहरी लगन है। वह कठिनाई सहकर भी सीखने आता है। यह भारत की गुरु-शिष्य परंपरा की याद दिलाता है, जिसमें शिष्य वर्षों तक गुरु के साथ रहकर, सेवा करते हुए सीखता है।

कवि यह भी कहता है कि संगतकार बहुत पुराने समय से मुख्य गायक की गरज में अपनी गूँज मिलाता आया है। यानी संगतकार कोई नई चीज़ नहीं है। संगीत का इतिहास जितना पुराना है, संगतकार की परंपरा भी उतनी ही पुरानी है। गूँज शब्द भी ध्यान देने लायक़ है। गूँज मूल आवाज़ के पीछे आती है और उसे फैलाती है, पर अपना अलग दावा नहीं करती।

तानों का जंगल और भटकता गायक

कविता में संगीत का एक बहुत सुंदर चित्र है। गीत में पहले स्थायी आता है, फिर अंतरा। अंतरे में गायक अपनी कला दिखाता है और कठिन, लंबी, घुमावदार तानें लेता है। कवि इन तानों को जंगल कहता है। जैसे घने जंगल में रास्ता खो जाता है, वैसे ही गायक इन जटिल तानों में इतना डूब जाता है कि मूल धुन से दूर निकल जाता है।

कभी-कभी गायक अपने ही सरगम की सीमा लाँघकर एक अनहद में भटकने लगता है। अनहद का अर्थ है असीम, जिसकी कोई हद न हो। यानी गायक कल्पना और कला की ऐसी ऊँचाई पर पहुँच जाता है, जहाँ से लौटना मुश्किल हो। यह कला का ऊँचा क्षण भी है और ख़तरे का भी, क्योंकि गीत की लय टूट सकती है।

ठीक ऐसे समय संगतकार अपनी भूमिका निभाता है। वह स्थायी को, यानी गीत की मूल पंक्ति को, लगातार सँभाले रहता है। जब गायक लौटना चाहता है, तो उसे पता होता है कि मूल धुन कहाँ है, क्योंकि संगतकार ने उसे थामे रखा है। इस तरह संगतकार गीत की नींव को बचाए रखता है, ताकि मुख्य गायक बेफ़िक्र होकर अपनी कला की ऊँचाइयाँ छू सके।

छूटा सामान और भूला बचपन

कवि संगतकार के इस काम को दो सुंदर उपमाओं से समझाता है। पहली उपमा है कि संगतकार मानो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान समेट रहा हो। जैसे कोई यात्री जल्दी में आगे बढ़ जाए और उसका कुछ सामान पीछे रह जाए, तो कोई साथी उसे उठाकर सँभाल लेता है। गायक तानों में आगे निकल गया, और उसकी छूटी हुई धुन को संगतकार ने समेट लिया।

दूसरी उपमा और भी गहरी है। संगतकार मानो गायक को उसका बचपन याद दिलाता है, जब वह नौसिखिया था। नौसिखिया यानी वह, जिसने अभी-अभी सीखना शुरू किया हो। शुरुआत में हर गायक स्थायी को बार-बार दोहराकर ही सीखता है। संगतकार का स्थायी गाना गायक को उसकी जड़ों की याद दिलाता है, जहाँ से उसकी यात्रा शुरू हुई थी।

इन उपमाओं से संगतकार की भूमिका केवल तकनीकी नहीं, भावनात्मक भी बन जाती है। वह गायक का सहारा है, उसकी याद है, उसका साथी है। बड़ा बनने के बाद व्यक्ति अक्सर अपनी शुरुआत भूल जाता है। संगतकार उसे विनम्रता से याद दिलाता है कि हर ऊँचाई की नींव साधारण अभ्यास में होती है।

Concepts and terms

संगतकार

मुख्य कलाकार के साथ गाने या वाद्य बजाने वाला सहयोगी। वह पीछे रहकर प्रस्तुति को पूरा और सुरीला बनाता है।

स्थायी

गीत की मूल, पहली पंक्ति या टेक, जिस पर गायक बार-बार लौटता है। संगतकार इसी को थामे रखता है।

अंतरा

स्थायी के बाद आने वाला गीत का चरण, जिसमें गायक तानों और सुरों का विस्तार करता है।

तान

संगीत में स्वरों का तेज़, लंबा और घुमावदार विस्तार। जटिल तानों में गायक कभी-कभी मूल धुन से दूर चला जाता है।

अनहद

ऐसी असीम अवस्था, जिसकी कोई सीमा न हो। कविता में गायक अपने ही सुरों से आगे भटककर अनहद में खो जाता है।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

मंच के पीछे की सूची

Safety:

वीडियो देखते समय आवाज़ धीमी रखिए; किसी कलाकार के बारे में अपमानजनक टिप्पणी न लिखिए।

What You Notice:

आप पाएँगे कि एक मुख्य कलाकार के पीछे कई लोग होते हैं, और कविता का संगतकार असल में इन सबका प्रतिनिधि है।

Did you know

भारतीय शास्त्रीय संगीत में गीत के दो मुख्य हिस्से होते हैं। स्थायी वह पहली पंक्ति है, जिस पर गायक बार-बार लौटता है, और अंतरा उसके बाद आने वाला विस्तार वाला हिस्सा है।

संगीत के सात स्वर सा, रे, ग, म, प, ध और नि हैं। ये षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद के पहले अक्षरों से बने हैं।

मंगलेश डबराल अच्छे अनुवादक भी थे। उनकी अपनी कविताओं के अनुवाद अंग्रेज़ी, रूसी, जर्मन और कई दूसरी भाषाओं में भी छपे हैं।

Memory tricks

संगतकार के तीन काम: थाम-समेट-याद — स्थायी थामे, छूटा सामान समेटे, बचपन याद दिलाए।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 मंगलेश डबराल का जन्म किस राज्य में हुआ? beginner
  • A हिमाचल प्रदेश
  • B उत्तराखंड
  • C जम्मू-कश्मीर
  • D सिक्किम
Show answer
Answer: उत्तराखंड
Why:

टिहरी गढ़वाल।

Q2 सन् 1983 में मंगलेश डबराल किस अख़बार में साहित्य संपादक बने? intermediate
  • A नवभारत टाइम्स
  • B दैनिक जागरण
  • C जनसत्ता
  • D अमर उजाला
Show answer
Answer: जनसत्ता
Why:

साहित्य पन्ना।

Q3 पहाड़ पर लालटेन किस विधा की रचना है? intermediate
  • A उपन्यास
  • B आत्मकथा
  • C यात्रा-वृत्तांत
  • D कविता-संग्रह
Show answer
Answer: कविता-संग्रह
Why:

चार संग्रहों में पहला।

Q4 मंगलेश डबराल अन्याय का विरोध किस ढंग से करते हैं? intermediate
  • A सुंदर सपना रचकर
  • B ज़ोरदार नारों और शोर-शराबे से
  • C हिंसा से
  • D चुप रहकर
Show answer
Answer: सुंदर सपना रचकर
Why:

शांत प्रतिकार।

Q5 मंगलेश डबराल की भाषा को पारदर्शी कहने का क्या अर्थ है? intermediate
  • A बहुत कठिन और उलझे शब्दों वाली
  • B साफ़ और सीधी समझ में आने वाली
  • C केवल संस्कृत शब्दों वाली
  • D अंग्रेज़ी मिली
Show answer
Answer: साफ़ और सीधी समझ में आने वाली
Why:

साफ़ पानी।

Q6 संगतकार कविता का केंद्रीय पात्र कौन है? beginner
  • A मंच पर अकेला गाने वाला गायक
  • B श्रोता
  • C आयोजक
  • D सहयोगी कलाकार
Show answer
Answer: सहयोगी कलाकार
Why:

साथ देने वाला।

Q7 मुख्य गायक के स्वर को चट्टान जैसा कहने से क्या भाव उभरता है? intermediate
  • A कमज़ोरी, थकान और गहरी उदासी
  • B हल्कापन
  • C ताक़त और गहराई
  • D कठोर क्रोध
Show answer
Answer: ताक़त और गहराई
Why:

भारी स्वर।

Q8 संगतकार की आवाज़ को कमज़ोर कहते हुए भी कवि उसे सुंदर क्यों कहता है? advanced
  • A उसकी कोमलता में भी सौंदर्य है
  • B कवि संगतकार का मज़ाक उड़ाना चाहता है
  • C आवाज़ बहुत ऊँची है
  • D वह गाता नहीं
Show answer
Answer: उसकी कोमलता में भी सौंदर्य है
Why:

कोमल सहारा।

Q9 संगतकार का पैदल चलकर सीखने आना उसके किस गुण को दिखाता है? intermediate
  • A बहुत धनवान होने का गहरा घमंड
  • B आलस्य
  • C संगीत के प्रति लगन
  • D जल्दबाज़ी
Show answer
Answer: संगीत के प्रति लगन
Why:

कठिनाई सहकर।

Q10 संगतकार के छोटे भाई, शिष्य या रिश्तेदार होने के अनुमान में कौन-सी बात साझी है? advanced
  • A वह गायक से छोटा और आदर रखने वाला है
  • B वह गायक से बहुत बड़ा और ज़्यादा प्रसिद्ध है
  • C वह गायक का शत्रु है
  • D वह विदेशी है
Show answer
Answer: वह गायक से छोटा और आदर रखने वाला है
Why:

छोटा, आदरभाव।

Q11 संगतकार के गरज में गूँज मिलाने को प्राचीन काल से जोड़ने का क्या अर्थ है? intermediate
  • A संगतकार की उम्र बहुत ज़्यादा है
  • B संगीत अब नहीं होता
  • C गायक बूढ़ा है
  • D यह परंपरा बहुत पुरानी है
Show answer
Answer: यह परंपरा बहुत पुरानी है
Why:

इतिहास।

Q12 गूँज शब्द संगतकार की किस विशेषता से मेल खाता है? advanced
  • A सबसे आगे आकर पूरा श्रेय ले लेना
  • B पीछे रहकर स्वर फैलाना
  • C चुप रहना
  • D गाना रोकना
Show answer
Answer: पीछे रहकर स्वर फैलाना
Why:

मूल के पीछे।

Q13 कवि अंतरे की जटिल तानों को जंगल क्यों कहता है? intermediate
  • A उनमें गायक राह भटक सकता है
  • B वे जंगल में बैठकर गाई जाती हैं
  • C उनमें पशुओं की आवाज़ है
  • D वे हरी हैं
Show answer
Answer: उनमें गायक राह भटक सकता है
Why:

घना और उलझा।

Q14 गायक के अनहद में भटकने का क्या अर्थ है? advanced
  • A रास्ता भूलकर किसी दूसरे शहर पहुँच जाना
  • B सीमा से आगे कल्पना में खो जाना
  • C गाना छोड़ देना
  • D सो जाना
Show answer
Answer: सीमा से आगे कल्पना में खो जाना
Why:

असीम।

Q15 जब गायक तानों में खो जाता है, तब संगतकार क्या करता है? beginner
  • A मंच छोड़कर चुपचाप बाहर चला जाता है
  • B ताली बजाता है
  • C ज़ोर से हँसता है
  • D स्थायी सँभाले रहता है
Show answer
Answer: स्थायी सँभाले रहता है
Why:

मूल पंक्ति।

Q16 संगतकार के स्थायी थामे रहने से गायक को क्या लाभ होता है? advanced
  • A उसे गाना बीच में ही बंद करना पड़ता है
  • B उसका नाम छिप जाता है
  • C वह निडर होकर ऊँचाई छू सकता है
  • D वह थक जाता है
Show answer
Answer: वह निडर होकर ऊँचाई छू सकता है
Why:

नींव सुरक्षित।

Q17 पीछे छूटा हुआ सामान समेटने वाली उपमा किस भाव को दिखाती है? intermediate
  • A चोरी करने और छिपाने की आदत
  • B लापरवाही
  • C जल्दबाज़ी
  • D साथी की देखभाल
Show answer
Answer: साथी की देखभाल
Why:

यात्री का साथी।

Q18 बचपन याद दिलाने से संगतकार गायक को किस बात से जोड़ता है? intermediate
  • A उसकी पुरानी बीमारियों और दुखों
  • B उसकी शुरुआत
  • C उसके शत्रुओं
  • D उसकी कमाई
Show answer
Answer: उसकी शुरुआत
Why:

नौसिखिया दिन।

Q19 नौसिखिया का अर्थ है ______। beginner
  • A बहुत अनुभवी उस्ताद
  • B बूढ़ा गायक
  • C नया सीखने वाला
  • D श्रोता
Show answer
Answer: नया सीखने वाला
Why:

शुरुआत।

Q20 स्थायी के बाद आने वाले गीत के चरण को ______ कहते हैं। beginner
  • A अंतरा
  • B सप्तक
  • C तानपुरा
  • D आलाप-राग
Show answer
Answer: अंतरा
Why:

विस्तार।

Q21 चट्टान जैसे भारी स्वर में कौन-सा अलंकार है? intermediate
  • A यमक
  • B श्लेष
  • C दृष्टांत अलंकार
  • D उपमा
Show answer
Answer: उपमा
Why:

जैसे।

Q22 यह कविता किस बात के प्रति हमें संवेदनशील बनाती है? intermediate
  • A केवल प्रसिद्ध लोगों की चमक-दमक
  • B अनदेखे सहयोगियों का महत्त्व
  • C संगीत की कठिनाई
  • D मंच की सजावट
Show answer
Answer: अनदेखे सहयोगियों का महत्त्व
Why:

हर सहयोगी।

Q23 मंगलेश डबराल की कविताएँ किन भाषाओं में अनूदित हुईं? इनमें से कौन-सी भाषा सही है? advanced
  • A जापानी
  • B अरबी
  • C रूसी
  • D पुर्तगाली
Show answer
Answer: रूसी
Why:

कई विदेशी भाषाएँ।

Q24 अभिकथन: संगतकार गीत की नींव बचाए रखता है। कारण: जब मुख्य गायक तानों में खो जाता है, तब वह स्थायी को थामे रहता है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

मूल धुन।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. मंगलेश डबराल का जन्म काफलपानी गाँव में हुआ। II. संगतकार की आवाज़ चट्टान जैसी भारी है। III. संगतकार गायक को उसके नौसिखिया दिनों की याद दिलाता है। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल I और III
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

भारी स्वर गायक का है।

Important short questions (7)

मंगलेश डबराल के पत्रकारिता-जीवन के बारे में संक्षेप में लिखिए।

डबराल जी ने दिल्ली में हिंदी पेट्रियट, प्रतिपक्ष और आसपास में काम किया। भोपाल में वे पूर्वग्रह के सहायक संपादक रहे। सन् 1983 से वे जनसत्ता में साहित्य संपादक रहे, और बाद में नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े।

संगतकार किसे कहते हैं? कविता के आधार पर बताइए।

संगतकार वह कलाकार है, जो मुख्य गायक के साथ धीमे स्वर में गाता या कोई वाद्य बजाता है। वह मंच पर पीछे रहता है, पर गीत को पूरा और सुरीला बनाने में उसकी बड़ी भूमिका होती है।

मुख्य गायक और संगतकार की आवाज़ में क्या अंतर बताया गया है?

मुख्य गायक की आवाज़ चट्टान जैसी भारी, गंभीर और शक्तिशाली है। संगतकार की आवाज़ सुंदर, पर कमज़ोर और काँपती हुई है। फिर भी दोनों मिलकर ही पूरा संगीत रचते हैं।

पैदल चलकर सीखने आने वाले रिश्तेदार का उल्लेख क्या बताता है?

इससे पता चलता है कि संगतकार साधारण परिवार से है, पर उसमें संगीत सीखने की गहरी लगन है। वह कठिनाई सहकर भी गुरु तक पहुँचता है। यह गुरु-शिष्य परंपरा की याद दिलाता है।

गायक के तानों के जंगल में खो जाने का क्या आशय है?

अंतरे में गायक कठिन, लंबी और घुमावदार तानें लेता है। इनमें वह इतना डूब जाता है कि मूल धुन से दूर निकल जाता है, जैसे कोई घने जंगल में रास्ता भटक जाए।

संगतकार गायक का पीछे छूटा सामान कैसे समेटता है?

जब गायक तानों में आगे निकल जाता है, तो उसकी मूल धुन पीछे छूट जाती है। संगतकार उस धुन, यानी स्थायी, को लगातार गाकर सँभाले रहता है। यही छूटे सामान को समेटना है।

संगतकार गायक को उसका बचपन क्यों याद दिलाता है?

शुरुआत में हर गायक स्थायी को बार-बार दोहराकर सीखता है। संगतकार जब स्थायी गाता है, तो गायक को अपने नौसिखिया दिन याद आते हैं। इससे उसे अपनी जड़ों और विनम्रता की याद आती है।

Long answer questions (3)

संगतकार कविता के आधार पर बताइए कि संगतकार मुख्य गायक को भटकने से कैसे बचाता है।

गीत में पहले स्थायी आता है, फिर अंतरा। अंतरे में गायक अपनी कला दिखाते हुए कठिन और लंबी तानें लेता है। कवि इन तानों को जंगल कहता है, क्योंकि इनमें गायक मूल धुन से दूर निकल जाता है। कभी वह अपने सुरों की सीमा पार करके एक असीम अवस्था में भटकने लगता है। ऐसे समय संगतकार स्थायी को, यानी गीत की मूल पंक्ति को, लगातार गाता रहता है। इससे गायक जब लौटना चाहे, तो उसे मूल धुन तैयार मिलती है। कवि कहता है कि संगतकार मानो गायक का पीछे छूटा सामान समेट रहा हो। साथ ही वह गायक को उसका बचपन भी याद दिलाता है, जब वह नौसिखिया था और स्थायी दोहराकर सीखता था। इस तरह संगतकार गीत की नींव बचाता है, गायक को निडर होकर ऊँचाई छूने देता है और उसे उसकी जड़ों से भी जोड़े रखता है।

मंगलेश डबराल के जीवन और काव्य की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

मंगलेश डबराल का जन्म सन् 1948 में उत्तराखंड के काफलपानी गाँव में हुआ, और पढ़ाई देहरादून में हुई। उन्होंने हिंदी पेट्रियट, प्रतिपक्ष, पूर्वग्रह और अमृत प्रभात जैसे पत्रों में काम किया। सन् 1983 से वे जनसत्ता के साहित्य संपादक रहे, और बाद में नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े। सन् 2020 में उनका निधन हुआ। आवाज़ भी एक जगह है, हम जो देखते हैं, घर का रास्ता और पहाड़ पर लालटेन उनके कविता-संग्रह हैं। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार और पहल सम्मान मिले, और वे अच्छे अनुवादक भी थे। उनकी कविता सामंती सोच और पैसे की धोखेबाज़ी, दोनों का विरोध करती है, पर बिना शोर किए। वे विरोध में एक सुंदर सपना रचते हैं। उनकी भाषा पारदर्शी है और सौंदर्य-बोध सूक्ष्म। संगतकार जैसी कविता में यही सूक्ष्म दृष्टि अनदेखे लोगों को सामने लाती है।

आपके विद्यालय के किसी संगीत कार्यक्रम में मुख्य गायक के साथ बैठे सहयोगी कलाकारों का वर्णन कीजिए।

पिछले महीने हमारे विद्यालय के वार्षिक उत्सव में एक लोकगायिका आई थीं। मंच पर सबकी नज़र उन्हीं पर थी। पर उनके पीछे चार और कलाकार बैठे थे। एक ढोलक बजा रहे थे, एक हारमोनियम, और दो लड़कियाँ उनके साथ धीमे स्वर में गा रही थीं। एक गीत में गायिका ने बहुत ऊँची और लंबी तान ली। उस समय दोनों सहगायिकाएँ गीत की पहली पंक्ति धीरे-धीरे गाती रहीं। जब गायिका लौटीं, तो धुन वहीं तैयार मिली, और तालियाँ गूँज उठीं। कार्यक्रम के अंत में सबने गायिका के साथ फ़ोटो खिंचवाई, पर सहयोगी कलाकार चुपचाप अपने वाद्य समेट रहे थे। तब मुझे संगतकार कविता याद आई। मैंने जाकर उन सबको धन्यवाद दिया। उनके चेहरे पर जो मुसकान आई, वह मुझे आज भी याद है।

Flashcards (17)

मंगलेश डबराल का जन्म कब हुआ?
सन् 1948 में।
मंगलेश डबराल का जन्म-गाँव?
काफलपानी, टिहरी गढ़वाल।
डबराल जी की पढ़ाई कहाँ हुई?
देहरादून में।
जनसत्ता में डबराल जी किस पद पर रहे?
साहित्य संपादक।
पूर्वग्रह पत्रिका कहाँ से निकलती थी?
भोपाल के भारत भवन से।
डबराल जी के दो कविता-संग्रह?
पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता।
डबराल जी को कौन-से दो सम्मान मिले?
साहित्य अकादेमी पुरस्कार, पहल सम्मान।
डबराल जी का निधन कब हुआ?
सन् 2020 में।
उनकी भाषा की विशेषता?
पारदर्शी, यानी साफ़ और सरल।
संगतकार का अर्थ?
मुख्य कलाकार का सहयोगी।
मुख्य गायक का स्वर कैसा है?
चट्टान जैसा भारी।
संगतकार की आवाज़ कैसी है?
सुंदर, कमज़ोर, काँपती।
गरज का अर्थ?
ऊँची, गंभीर आवाज़।
अंतरा का अर्थ?
स्थायी के बाद गीत का चरण।
तान का अर्थ?
स्वरों का विस्तार।
नौसिखिया का अर्थ?
जिसने अभी सीखना शुरू किया हो।
संगतकार किसे सँभाले रहता है?
स्थायी को।

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  • शब्द और अर्थ
  • किसकी विशेषता?
  • सही या भ्रम
  • कविता का क्रम
  • झटपट उत्तर

ढाँढ़स बँधाता स्वर और हिचक की मनुष्यता

जब ऊँचे सुरों पर मुख्य गायक का गला थकने लगता है, तब संगतकार का स्वर उसे हिम्मत देता है कि वह अकेला नहीं है। संगतकार जान-बूझकर अपना स्वर ऊँचा नहीं उठाता। कवि कहता है कि इस संकोच को उसकी कमज़ोरी नहीं, उसकी मनुष्यता समझना चाहिए।

What you will be able to do

  • तारसप्तक में गला बैठने और स्वर से राख गिरने वाले बिंबों का अर्थ समझा सकेंगे।
  • संगतकार के ढाँढ़स बँधाने और अकेला न छोड़ने वाले काम का महत्त्व बता सकेंगे।
  • संगतकार की हिचक और स्वर ऊँचा न उठाने की कोशिश को मनुष्यता के रूप में समझ सकेंगे।
  • संगीत के अलावा खेल, फ़िल्म, विज्ञान और समाज में संगतकार जैसे लोगों को पहचान सकेंगे।
  • कविता की भाषा, बिंब, उपमा और मुक्त छंद की विशेषताओं का विश्लेषण कर सकेंगे।

Key points

  • तारसप्तक यानी ऊँचे सुरों का समूह; इतनी ऊँचाई पर पहुँचकर कई बार मुख्य गायक का गला थकने और बैठने लगता है।

  • कवि उस पल को ऐसे दिखाता है, जैसे प्रेरणा साथ छोड़ रही हो, उत्साह डूब रहा हो और आवाज़ से राख-सी झड़ रही हो।

  • राख जैसा कुछ गिरना बुझते हुए स्वर का बिंब है; जैसे आग बुझने पर राख बचती है, वैसे ही स्वर की चमक मंद पड़ती है।

  • ऐसे समय संगतकार का स्वर कहीं से आकर गायक को ढाँढ़स बँधाता है, यानी तसल्ली और हिम्मत देता है।

  • कभी-कभी संगतकार बिना किसी ख़ास ज़रूरत के भी साथ गाता है, ताकि गायक जाने कि वह अकेला नहीं है।

  • संगतकार का स्वर यह भरोसा भी देता है कि जो राग गाया जा चुका है, उसे फिर से गाया जा सकता है।

  • संगतकार की आवाज़ में एक हिचक है और अपना स्वर मुख्य गायक से ऊँचा न उठाने की सचेत कोशिश है।

  • कवि कहता है कि इस हिचक को विफलता नहीं, बल्कि संगतकार की मनुष्यता, यानी त्याग और विनम्रता, समझना चाहिए।

  • संगतकार जैसे लोग हर क्षेत्र में होते हैं; किसी भी नायक की सफलता में ऐसे कई अनदेखे सहयोगियों का हाथ होता है।

Full explanation

तारसप्तक और बैठता गला

कविता का दूसरा हिस्सा मुख्य गायक के एक कठिन पल को दिखाता है। संगीत में सुरों के तीन समूह माने जाते हैं। सामान्य ऊँचाई के सुर मध्य सप्तक में आते हैं, उससे ऊँचे तार सप्तक में और नीचे के मंद्र सप्तक में। तारसप्तक में गाना बहुत मेहनत का काम है, क्योंकि गले पर ज़ोर पड़ता है।

कवि कहता है कि तारसप्तक में पहुँचकर कभी-कभी मुख्य गायक का गला बैठने लगता है। गला बैठना यानी आवाज़ का थककर भारी या धीमा पड़ जाना। ऐसे पल में गायक को लगता है कि उसकी प्रेरणा साथ छोड़ रही है और उत्साह डूबते सूरज की तरह अस्त हो रहा है। यह किसी भी कलाकार के लिए डर और निराशा का पल होता है।

कवि इसके लिए एक बहुत मार्मिक बिंब देता है। वह कहता है कि आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता है। जब आग बुझने लगती है, तो उसकी चमक कम होती जाती है और पीछे राख बचती है। उसी तरह थकते गले से निकलती आवाज़ की चमक मंद पड़ने लगती है। शब्द-संपदा में भी इसका अर्थ बुझता हुआ स्वर बताया गया है।

ढाँढ़स बँधाता संगतकार का स्वर

ठीक इसी पल संगतकार की भूमिका फिर से सामने आती है। कवि कहता है कि कहीं से संगतकार का स्वर चला आता है और मुख्य गायक को ढाँढ़स बँधाता है। ढाँढ़स बँधाना यानी तसल्ली देना, हिम्मत देना। संगतकार की आवाज़ गायक के थकते स्वर के साथ जुड़ जाती है और उसे बिखरने नहीं देती।

कहीं से चला आता है, यह बात भी ध्यान देने लायक़ है। संगतकार का स्वर अचानक, बिना किसी शोर के, ठीक उस समय पहुँचता है, जब उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। जैसे कोई सच्चा दोस्त मुश्किल समय में बिना बुलाए पहुँच जाए। इससे पता चलता है कि संगतकार पूरे समय गायक पर ध्यान रखता है और उसकी हर कठिनाई को समझता है।

संगीत की भाषा में यह बहुत व्यावहारिक बात है। जब मुख्य गायक का स्वर कमज़ोर पड़ता है, तो संगतकार का साथ श्रोताओं को वह कमी महसूस नहीं होने देता। गीत की लय और सुर बने रहते हैं। गायक को साँस लेने और फिर से सँभलने का समय मिल जाता है। इस तरह संगतकार मंच पर गायक की इज़्ज़त भी बचाता है।

तुम अकेले नहीं हो: साथ होने का भरोसा

कवि आगे एक और सुंदर बात कहता है। कभी-कभी संगतकार बिना किसी ख़ास वजह के भी मुख्य गायक का साथ दे देता है। उस समय गायक का गला ठीक होता है, उसे मदद की ज़रूरत नहीं होती। फिर भी संगतकार साथ गाता है। क्यों? यह बताने के लिए कि गायक अकेला नहीं है।

मंच पर मुख्य गायक बहुत अकेला होता है। सारी सभा की नज़रें उसी पर होती हैं, और हर ग़लती की ज़िम्मेदारी उसी की मानी जाती है। ऐसे में यह जानना बहुत बड़ा सहारा है कि कोई पीछे खड़ा है, जो गिरने नहीं देगा। संगतकार का स्वर यही भरोसा देता है।

संगतकार यह भी बताता है कि जो राग एक बार गाया जा चुका है, उसे फिर से गाया जा सकता है। यानी अगर कुछ बिगड़ भी गया, तो सब ख़त्म नहीं हुआ। फिर से शुरुआत की जा सकती है। यह बात केवल संगीत की नहीं, जीवन की भी है। जब हम किसी काम में हार मानने लगते हैं, तब कोई साथी कहे कि फिर से कोशिश करो, तो हिम्मत लौट आती है।

हिचक: स्वर ऊँचा न उठाने की कोशिश

कविता का अंतिम हिस्सा सबसे गहरा है। कवि कहता है कि संगतकार की आवाज़ में एक हिचक साफ़ सुनाई देती है। वह अपने स्वर को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं उठाता, बल्कि जान-बूझकर उसे थोड़ा नीचे रखता है। यह कोई कमज़ोरी या कमी नहीं, बल्कि एक सचेत कोशिश है।

संगतकार ऐसा क्यों करता है? क्योंकि वह जानता है कि मंच पर मुख्य गायक की आवाज़ ही आगे रहनी चाहिए। अगर संगतकार का स्वर ऊँचा हो जाए, तो दोनों आवाज़ें टकराएँगी और संगीत बिगड़ जाएगा। मुख्य गायक की चमक भी कम होगी। इसलिए संगतकार अपनी प्रतिभा को रोककर रखता है, ताकि पूरी प्रस्तुति सुंदर बने।

यह भी हो सकता है कि संगतकार ख़ुद भी बहुत प्रतिभाशाली हो। शायद वह भी ऊँचा और सुंदर गा सकता हो। पर वह अपनी भूमिका को समझता है और उसका सम्मान करता है। वह अपना नाम चमकाने के बजाय सामूहिक सफलता को चुनता है। यह बहुत बड़ा त्याग है, जिसे अक्सर कोई देखता भी नहीं।

विफलता नहीं, मनुष्यता

कवि अंत में साफ़ कहता है कि संगतकार की इस हिचक को उसकी विफलता नहीं समझना चाहिए। उसे उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए। आम तौर पर समाज उसे सफल मानता है, जो सबसे आगे हो, जिसका नाम सबसे बड़ा हो। उस नज़र से देखें, तो संगतकार पीछे रह गया, असफल रहा। पर कवि इस सोच को पलट देता है।

मनुष्यता का अर्थ है दूसरों के लिए सोचना, त्याग करना और विनम्र रहना। संगतकार अपनी इच्छा और प्रतिभा को दूसरों की सफलता के लिए पीछे रखता है। यह एक बड़ा मानवीय गुण है। कवि चाहता है कि हम सफलता को केवल नाम और प्रसिद्धि से न नापें, बल्कि इस बात से भी नापें कि किसने दूसरों को आगे बढ़ाने में कितना साथ दिया।

यही इस कविता का केंद्रीय संदेश है। संगतकार का पीछे रहना उसकी कमज़ोरी नहीं, बल्कि उसका बड़प्पन है। कविता हममें यह संवेदनशीलता जगाती है कि हर सहयोगी का अपना महत्त्व है, चाहे उसका नाम पोस्टर पर हो या न हो।

हर क्षेत्र के संगतकार

संगतकार केवल संगीत में नहीं होते। फ़िल्म में अभिनेता के पीछे निर्देशक, कैमरा चलाने वाले, रोशनी सँभालने वाले, मेकअप करने वाले और स्टंट करने वाले लोग होते हैं। खेल में बड़े खिलाड़ी के पीछे कोच, अभ्यास कराने वाले साथी, फ़िज़ियो और परिवार होता है। विज्ञान की बड़ी खोजों के पीछे प्रयोगशाला के अनगिनत सहायक होते हैं।

राजनीति और इतिहास में भी यही सच है। स्वतंत्रता आंदोलन के बड़े नेताओं के पीछे लाखों आम लोग थे, जिनके नाम हम नहीं जानते। उन्होंने जेल काटी, लाठियाँ खाईं, संदेश पहुँचाए। अगर वे न होते, तो कोई आंदोलन सफल न होता। विद्यालय के कार्यक्रम में भी मंच पर बोलने वाले के पीछे सजावट, ध्वनि-व्यवस्था और तैयारी करने वाले कई साथी होते हैं।

अक्सर ऐसे लोग प्रतिभाशाली होते हुए भी शीर्ष पर नहीं पहुँचते। इसके कई कारण हो सकते हैं: अवसर की कमी, साधनों की कमी, या उनका अपना विनम्र स्वभाव। कई बार वे ख़ुद ही पीछे रहना चुनते हैं। पर हमें उन्हें पहचानना और सम्मान देना चाहिए। जब हम किसी सफल व्यक्ति की तारीफ़ करें, तो उसके संगतकारों को भी याद रखें।

कविता का शिल्प

संगतकार मुक्त छंद में लिखी कविता है। इसमें तुक या तय मात्राओं का बंधन नहीं है, पर बातचीत जैसी एक सहज लय है। भाषा सरल और पारदर्शी खड़ी बोली है, जिसमें संगीत के पारिभाषिक शब्द, जैसे स्थायी, अंतरा, तान, सरगम और तारसप्तक, बड़ी सहजता से घुले हैं।

कविता में उपमाएँ और बिंब भरपूर हैं। चट्टान जैसा भारी स्वर, तानों का जंगल, पीछे छूटा सामान और राख जैसा कुछ गिरना, ये सब दृश्य और भाव, दोनों रचते हैं। जैसे शब्द से आने वाली कई पंक्तियों में उपमा है। प्रेरणा का साथ छोड़ना और उत्साह का अस्त होना मानवीकरण के उदाहरण हैं।

कविता की सबसे बड़ी ताक़त उसकी सूक्ष्म दृष्टि है। कवि एक ऐसे पात्र को केंद्र में लाता है, जिस पर कोई ध्यान नहीं देता। वह बिना भाषण दिए, केवल एक दृश्य दिखाकर, हमें बड़ा सबक़ दे देता है। अंतिम पंक्तियों में आया विफलता और मनुष्यता का विरोध पूरी कविता का सार बन जाता है।

Concepts and terms

तारसप्तक

संगीत में सामान्य से ऊँचे सुरों का समूह। इस ऊँचाई पर गाना कठिन होता है, और गला थक सकता है।

ढाँढ़स बँधाना

मुश्किल समय में किसी को तसल्ली और हिम्मत देना। संगतकार अपने स्वर से गायक को यही देता है।

हिचक

किसी काम में थोड़ा संकोच या रुकावट। संगतकार अपना स्वर ऊँचा करने में हिचकता है, ताकि मुख्य गायक आगे रहे।

मनुष्यता

दूसरों के लिए त्याग, विनम्रता और करुणा का भाव। कवि संगतकार की हिचक को यही मनुष्यता मानता है।

अनदेखा सहयोग

वह मदद, जो सफलता में बहुत ज़रूरी हो, पर जिसकी पहचान कम हो। संगतकार इसका प्रतीक है।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

ज़िला-स्तरीय रिले दौड़ में हमारे विद्यालय की टीम ने स्वर्ण पदक जीता। अख़बार में आख़िरी चक्कर दौड़ने वाली तनवी की बड़ी तस्वीर छपी, क्योंकि उसी ने फ़िनिश लाइन पार की थी।

पर टीम के दूसरे धावक कबीर ने अपने चक्कर में गिरते-गिरते भी बैटन नहीं छोड़ा और समय बचाया। पहली धाविका रुचि ने सबसे तेज़ शुरुआत दी। कोच सर ने छह महीने रोज़ सुबह अभ्यास कराया, और चौकीदार काका रोज़ मैदान खोलते थे।

जब पत्रकार ने तनवी से बात की, तो उसने कहा कि यह पदक अकेले उसका नहीं है। उसने सबके नाम लिए, पर अख़बार में केवल उसका नाम छपा।

Activity:

अपने परिवार या विद्यालय की किसी सफलता को चुनिए। उसके पीछे के पाँच संगतकारों के नाम और उनका योगदान लिखकर उन्हें एक धन्यवाद-पत्र दीजिए।

Analysis:

जब हम सफलता के पीछे के लोगों को पहचानते और धन्यवाद देते हैं, तो टीम में भरोसा और अपनापन बढ़ता है। यही संगतकार कविता की सीख है।

Did you know

संगीत में तीन सप्तक माने जाते हैं। सामान्य ऊँचाई वाला मध्य सप्तक, उससे ऊपर वाला तार सप्तक और उससे नीचे वाला मंद्र सप्तक कहलाता है।

खेलों में भी संगतकार होते हैं। बैडमिंटन या टेनिस के बड़े खिलाड़ियों के पीछे कोच, फ़िज़ियो, अभ्यास-साथी और पोषण-विशेषज्ञ जैसी पूरी टीम काम करती है।

चंद्रयान जैसे अंतरिक्ष अभियानों में हज़ारों वैज्ञानिक, इंजीनियर और तकनीशियन काम करते हैं, पर टीवी पर कुछ ही चेहरे दिखते हैं।

Memory tricks

गला बैठे तो संगतकार: ढा-अ-फि — ढाँढ़स बँधाए, अकेला न छोड़े, फिर गाने का भरोसा दे।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 तारसप्तक में सुर कैसे होते हैं? beginner
  • A सामान्य से बहुत नीचे
  • B बिल्कुल सामान्य
  • C बिना सुर के
  • D सामान्य से ऊँचे
Show answer
Answer: सामान्य से ऊँचे
Why:

तार।

Q2 तारसप्तक में मुख्य गायक का गला बैठने का कारण क्या हो सकता है? intermediate
  • A ऊँचे सुरों से गले पर ज़ोर
  • B ठंडा पानी पी लेना और सर्दी लगना
  • C श्रोताओं का शोर
  • D तबले की आवाज़
Show answer
Answer: ऊँचे सुरों से गले पर ज़ोर
Why:

मेहनत।

Q3 प्रेरणा का साथ छोड़ना और उत्साह का अस्त होना गायक की किस दशा को दिखाता है? intermediate
  • A बहुत ख़ुशी और ऊँचा जोश
  • B निराशा और थकान
  • C ग़ुस्सा
  • D नींद
Show answer
Answer: निराशा और थकान
Why:

कठिन पल।

Q4 आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरना किस बात का बिंब है? intermediate
  • A चूल्हे की आग का बुझ जाना
  • B कपड़ों पर धूल
  • C बुझता स्वर
  • D जलती अगरबत्ती
Show answer
Answer: बुझता स्वर
Why:

चमक मंद।

Q5 संगतकार का स्वर कहीं से चला आना किस गुण का संकेत है? intermediate
  • A बिना सोचे-समझे जल्दबाज़ी करना
  • B सही समय पर साथ देना
  • C देर से आना
  • D शोर मचाना
Show answer
Answer: सही समय पर साथ देना
Why:

सच्चा दोस्त।

Q6 ढाँढ़स बँधाने का अर्थ है ______। beginner
  • A ज़ोर से डाँटना
  • B रस्सी बाँधना
  • C रास्ता रोकना
  • D तसल्ली देना
Show answer
Answer: तसल्ली देना
Why:

सांत्वना।

Q7 संगतकार बिना ज़रूरत भी गायक का साथ क्यों देता है? intermediate
  • A उसे अकेलेपन से बचाने
  • B अपनी आवाज़ सबको अलग से सुनाने
  • C गायक को चिढ़ाने
  • D पैसे के लिए
Show answer
Answer: उसे अकेलेपन से बचाने
Why:

भरोसा।

Q8 गाया जा चुका राग फिर से गाया जा सकता है, इस भरोसे का जीवन में क्या अर्थ है? advanced
  • A एक ही काम बार-बार करना बेकार है
  • B राग कभी नहीं बदलता
  • C हार के बाद भी नई शुरुआत संभव है
  • D संगीत कठिन है
Show answer
Answer: हार के बाद भी नई शुरुआत संभव है
Why:

फिर से कोशिश।

Q9 संगतकार अपना स्वर ऊँचा क्यों नहीं उठाता? intermediate
  • A उसकी आवाज़ बिल्कुल निकलती ही नहीं
  • B उसे गाना नहीं आता
  • C वह डरता है
  • D ताकि मुख्य गायक आगे रहे
Show answer
Answer: ताकि मुख्य गायक आगे रहे
Why:

सचेत कोशिश।

Q10 अगर संगतकार का स्वर मुख्य गायक से ऊँचा हो जाए, तो क्या होगा? advanced
  • A संगीत पहले से कहीं ज़्यादा सुंदर हो जाएगा
  • B सभा ख़ुश होगी
  • C आवाज़ें टकराएँगी
  • D गायक सो जाएगा
Show answer
Answer: आवाज़ें टकराएँगी
Why:

संतुलन बिगड़ेगा।

Q11 कवि संगतकार की हिचक को किस रूप में देखने को कहता है? beginner
  • A विफलता
  • B मनुष्यता
  • C कायरता
  • D आलस्य
Show answer
Answer: मनुष्यता
Why:

अंतिम पंक्ति।

Q12 समाज की सामान्य नज़र में संगतकार असफल क्यों लग सकता है? intermediate
  • A वह आगे नहीं आता
  • B वह बहुत ज़्यादा प्रसिद्ध और धनी है
  • C वह गाता नहीं
  • D वह शोर करता है
Show answer
Answer: वह आगे नहीं आता
Why:

प्रसिद्धि का पैमाना।

Q13 कविता सफलता को नापने के किस नए पैमाने की ओर इशारा करती है? advanced
  • A केवल नाम, प्रसिद्धि और धन-दौलत
  • B केवल पुरस्कार
  • C केवल उम्र
  • D दूसरों को आगे बढ़ाने में साथ
Show answer
Answer: दूसरों को आगे बढ़ाने में साथ
Why:

मनुष्यता।

Q14 संगतकार के व्यवहार में कौन-सा मूल्य सबसे प्रमुख है? beginner
  • A घमंड
  • B त्याग
  • C ईर्ष्या
  • D लालच
Show answer
Answer: त्याग
Why:

स्वर नीचा।

Q15 फ़िल्म की सफलता में संगतकार जैसी भूमिका किसकी है? intermediate
  • A टिकट ख़रीदकर फ़िल्म देखने वाले दर्शक की
  • B पोस्टर देखने वाले की
  • C कैमरा सँभालने वाले की
  • D आलोचक की
Show answer
Answer: कैमरा सँभालने वाले की
Why:

पर्दे के पीछे।

Q16 स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में संगतकार किन्हें कहा जा सकता है? intermediate
  • A अनाम आम सेनानियों को
  • B केवल अंग्रेज़ अफ़सरों और उनके सिपाहियों को
  • C विदेशी पर्यटकों को
  • D राजाओं को
Show answer
Answer: अनाम आम सेनानियों को
Why:

लाखों लोग।

Q17 प्रतिभाशाली होते हुए भी संगतकार शीर्ष पर न पहुँचने का एक कारण क्या हो सकता है? advanced
  • A प्रतिभा का पूरी तरह अभाव होना
  • B अधिक धन
  • C बहुत प्रसिद्धि
  • D अवसर की कमी
Show answer
Answer: अवसर की कमी
Why:

साधन और विनम्रता।

Q18 संगतकार कविता किस छंद में लिखी गई है? beginner
  • A दोहा
  • B मुक्त छंद
  • C चौपाई
  • D सवैया
Show answer
Answer: मुक्त छंद
Why:

तुक नहीं।

Q19 उत्साह अस्त होता हुआ में कौन-सा अलंकार है? intermediate
  • A अतिशयोक्ति
  • B उत्प्रेक्षा
  • C मानवीकरण
  • D अनुप्रास
Show answer
Answer: मानवीकरण
Why:

सूरज जैसा।

Q20 विफलता और मनुष्यता को आमने-सामने रखने से कविता के अंत में क्या प्रभाव बनता है? advanced
  • A सोच पलटने वाला ज़ोर
  • B हास्य का हल्का रंग
  • C कहानी का नया मोड़
  • D डर
Show answer
Answer: सोच पलटने वाला ज़ोर
Why:

सार।

Q21 संगतकार की हिचक का मूल कारण क्या है? intermediate
  • A मंच पर बैठने का गहरा डर
  • B गला ख़राब होना
  • C मुख्य गायक का सम्मान
  • D आलस्य
Show answer
Answer: मुख्य गायक का सम्मान
Why:

भूमिका की समझ।

Q22 मध्य सप्तक से नीचे के सुरों वाला सप्तक ______ कहलाता है। intermediate
  • A तार सप्तक
  • B मंद्र सप्तक
  • C मध्य सप्तक
  • D अति-तार
Show answer
Answer: मंद्र सप्तक
Why:

नीचे के सुर।

Q23 बैडमिंटन के किसी बड़े खिलाड़ी का संगतकार कौन होगा? beginner
  • A कोच
  • B उसका विरोधी खिलाड़ी
  • C दर्शक
  • D टीवी एंकर
Show answer
Answer: कोच
Why:

टीम।

Q24 अभिकथन: संगतकार की हिचक उसकी कमज़ोरी नहीं है। कारण: वह मुख्य गायक को आगे रखने के लिए जान-बूझकर अपना स्वर नीचा रखता है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
  • D दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

सचेत त्याग।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. तारसप्तक में गाते हुए गला बैठ सकता है। II. संगतकार हमेशा मुख्य गायक से ऊँचा गाता है। III. संगतकार गायक को अकेलेपन से बचाता है। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल I और III
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

स्वर नीचा रखता है।

Important short questions (7)

तारसप्तक में मुख्य गायक की कैसी दशा होती है?

तारसप्तक के ऊँचे सुरों पर गाते हुए गायक का गला थककर बैठने लगता है। उसे लगता है कि प्रेरणा साथ छोड़ रही है और उत्साह डूब रहा है। उसकी आवाज़ बुझती-सी लगती है।

आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरने का क्या अर्थ है?

जैसे आग बुझने पर उसकी चमक कम होती जाती है और राख बचती है, वैसे ही थकते गले से निकलती आवाज़ की चमक मंद पड़ने लगती है। यह बुझते स्वर का बिंब है।

संगतकार गायक को ढाँढ़स कैसे बँधाता है?

जब गायक का गला थकने लगता है, तब संगतकार का स्वर उसके साथ जुड़ जाता है। इससे गायक का स्वर बिखरता नहीं और श्रोताओं को कमी महसूस नहीं होती। गायक को सँभलने का समय और हिम्मत मिलती है।

संगतकार गायक को किन दो बातों का भरोसा देता है?

पहला भरोसा यह कि गायक मंच पर अकेला नहीं है, कोई उसके साथ है। दूसरा भरोसा यह कि जो राग गाया जा चुका है, उसे फिर से गाया जा सकता है, यानी नई शुरुआत संभव है।

संगतकार की हिचक को मनुष्यता क्यों कहा गया है?

संगतकार जान-बूझकर अपना स्वर ऊँचा नहीं करता, ताकि मुख्य गायक आगे रहे। वह अपनी प्रतिभा को दूसरों की सफलता के लिए पीछे रखता है। यह त्याग और विनम्रता है, जो मनुष्यता का गुण है।

विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रम में संगतकार जैसी भूमिका कौन निभाते हैं?

मंच सजाने वाले, ध्वनि और रोशनी सँभालने वाले, पर्दा खींचने वाले, कलाकारों को तैयार करने वाले और अध्यापक, सब संगतकार जैसे हैं। उनके बिना कोई प्रस्तुति सफल नहीं हो सकती।

संगतकार कविता की भाषा की दो विशेषताएँ बताइए।

कविता की भाषा सरल और पारदर्शी खड़ी बोली है, जो आसानी से समझ आती है। इसमें स्थायी, अंतरा, तान और तारसप्तक जैसे संगीत के शब्द बहुत सहजता से घुले हैं।

Long answer questions (3)

संगतकार की हिचक और स्वर ऊँचा न उठाने की कोशिश को विफलता नहीं, मनुष्यता क्यों माना जाना चाहिए? विस्तार से लिखिए।

संगतकार की आवाज़ में एक हिचक साफ़ सुनाई देती है। वह अपने स्वर को मुख्य गायक से ऊँचा नहीं उठाता। समाज की सामान्य नज़र में यह कमज़ोरी लग सकती है, क्योंकि हम सफलता को नाम और आगे रहने से नापते हैं। पर कवि बताता है कि यह संगतकार की सचेत कोशिश है। वह जानता है कि मंच पर मुख्य गायक का स्वर आगे रहना चाहिए। अगर दोनों आवाज़ें बराबर ऊँची हों, तो वे टकराएँगी और संगीत बिगड़ेगा। इसलिए संगतकार अपनी प्रतिभा को रोककर रखता है। यह बहुत बड़ा त्याग है। संगतकार अपना नाम चमकाने के बजाय सामूहिक सफलता को चुनता है। दूसरों के लिए सोचना, विनम्र रहना और त्याग करना ही मनुष्यता है। इसलिए कवि कहता है कि उसकी हिचक को उसकी विफलता नहीं, उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए। यह सोच हमें हर अनदेखे सहयोगी का सम्मान करना सिखाती है।

किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की सफलता में दूसरों के योगदान का एक उदाहरण देकर संगतकार कविता का संदेश स्पष्ट कीजिए।

क्रिकेट में जब कोई बल्लेबाज़ शतक बनाता है, तो सारी तालियाँ उसी के लिए बजती हैं। पर उस शतक के पीछे कई लोग होते हैं। दूसरे छोर पर खड़ा साथी बल्लेबाज़ एक-एक रन लेकर उसे स्ट्राइक देता है और ख़ुद धीरे खेलता है। बचपन के कोच ने वर्षों तक उसकी तकनीक सुधारी। फ़िज़ियो ने चोटों से बचाया, गेंदबाज़ी कराने वाले साथियों ने नेट में अभ्यास कराया, और परिवार ने हर मुश्किल में साथ दिया। मैदान सँभालने वाले कर्मचारी भी अच्छी पिच बनाते हैं। ये सब उस बल्लेबाज़ के संगतकार हैं। संगतकार कविता यही सिखाती है कि हर बड़ी सफलता के पीछे कई अनदेखे लोग होते हैं। उनका सामने न आना उनकी कमज़ोरी नहीं, उनका बड़प्पन है। इसलिए हमें नायक के साथ उसके सहयोगियों को भी याद रखना और सम्मान देना चाहिए।

मान लीजिए किसी नृत्य कार्यक्रम से ठीक पहले आपके सहयोगी कलाकार नहीं पहुँच पाते। उस स्थिति और उससे निपटने के अपने तरीक़े का वर्णन कीजिए।

वार्षिक उत्सव में हमारी टोली का लोकनृत्य सबसे आख़िर में था। कार्यक्रम से आधा घंटा पहले पता चला कि ढोलक बजाने वाले भैया और गाने वाली दीदी की बस ख़राब हो गई है। मेरे हाथ-पैर ठंडे पड़ गए, क्योंकि उनके बिना नृत्य की ताल ही नहीं बनती। मैंने गहरी साँस ली और टोली को इकट्ठा किया। हमारे संगीत-अध्यापक से बात की, और उन्होंने तुरंत हारमोनियम सँभालने की हामी भर दी। एक साथी को ढोलक आती थी, उसे कुछ मिनट अभ्यास कराया। हमने अपने फ़ोन में रिकॉर्ड किया हुआ गीत भी तैयार रखा, ताकि ज़रूरत पड़े तो चला सकें। नृत्य अच्छा हुआ, पर उस दिन मुझे सच में समझ आया कि सहयोगी कलाकार कितने ज़रूरी हैं। हम मंच पर दिखते हैं, पर हमारी ताल, लय और हिम्मत उन्हीं से आती है। संगतकार कविता की बात उस दिन मेरे लिए एक सच्चा अनुभव बन गई।

Flashcards (17)

तारसप्तक क्या है?
ऊँचे सुरों का समूह।
मध्य सप्तक से नीचे वाले सप्तक का नाम?
मंद्र सप्तक।
गला बैठने पर गायक को कैसा लगता है?
प्रेरणा छूट रही है, उत्साह डूब रहा है।
राख जैसा कुछ गिरता हुआ का अर्थ?
बुझता हुआ स्वर।
ढाँढ़स बँधाना का अर्थ?
तसल्ली देना, सांत्वना देना।
संगतकार का स्वर कब आता है?
जब गायक का गला बैठने लगता है।
संगतकार बिना ज़रूरत क्यों साथ देता है?
यह बताने को कि गायक अकेला नहीं।
संगतकार और कौन-सा भरोसा देता है?
गाया राग फिर से गाया जा सकता है।
संगतकार की आवाज़ में क्या सुनाई देता है?
एक हिचक।
संगतकार किस बात की कोशिश करता है?
स्वर ऊँचा न उठाने की।
हिचक को क्या न समझें?
विफलता।
हिचक को क्या समझें?
मनुष्यता।
फ़िल्म के दो संगतकार?
कैमरामैन और मेकअप कलाकार।
खेल के दो संगतकार?
कोच और फ़िज़ियो।
कविता किस छंद में है?
मुक्त छंद।
उत्साह अस्त होना, कौन-सा अलंकार?
मानवीकरण।
कविता का केंद्रीय संदेश?
हर सहयोगी का महत्त्व है।

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  • शब्द और अर्थ
  • यह किस क्षेत्र का संगतकार है?
  • सही या भ्रम
  • कविता का क्रम
  • झटपट उत्तर

Class 10 Hindi Chapter 6 — frequently asked questions

मंगलेश डबराल के पत्रकारिता-जीवन के बारे में संक्षेप में लिखिए।

डबराल जी ने दिल्ली में हिंदी पेट्रियट, प्रतिपक्ष और आसपास में काम किया। भोपाल में वे पूर्वग्रह के सहायक संपादक रहे। सन् 1983 से वे जनसत्ता में साहित्य संपादक रहे, और बाद में नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े।

संगतकार किसे कहते हैं? कविता के आधार पर बताइए।

संगतकार वह कलाकार है, जो मुख्य गायक के साथ धीमे स्वर में गाता या कोई वाद्य बजाता है। वह मंच पर पीछे रहता है, पर गीत को पूरा और सुरीला बनाने में उसकी बड़ी भूमिका होती है।

मुख्य गायक और संगतकार की आवाज़ में क्या अंतर बताया गया है?

मुख्य गायक की आवाज़ चट्टान जैसी भारी, गंभीर और शक्तिशाली है। संगतकार की आवाज़ सुंदर, पर कमज़ोर और काँपती हुई है। फिर भी दोनों मिलकर ही पूरा संगीत रचते हैं।

तारसप्तक में मुख्य गायक की कैसी दशा होती है?

तारसप्तक के ऊँचे सुरों पर गाते हुए गायक का गला थककर बैठने लगता है। उसे लगता है कि प्रेरणा साथ छोड़ रही है और उत्साह डूब रहा है। उसकी आवाज़ बुझती-सी लगती है।

आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरने का क्या अर्थ है?

जैसे आग बुझने पर उसकी चमक कम होती जाती है और राख बचती है, वैसे ही थकते गले से निकलती आवाज़ की चमक मंद पड़ने लगती है। यह बुझते स्वर का बिंब है।

संगतकार गायक को ढाँढ़स कैसे बँधाता है?

जब गायक का गला थकने लगता है, तब संगतकार का स्वर उसके साथ जुड़ जाता है। इससे गायक का स्वर बिखरता नहीं और श्रोताओं को कमी महसूस नहीं होती। गायक को सँभलने का समय और हिम्मत मिलती है।

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