Class 10 Hindi Chapter 13: माता का अँचल

माता का अँचल is Chapter 13 of NCERT / CBSE Class 10 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
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भोलानाथ का बचपन: बाबू जी का साथ, मइयाँ का दुलार

शिवपूजन सहाय के उपन्यास-अंश में तारकेश्वरनाथ उर्फ़ भोलानाथ दिन भर पिता के साथ रहता है: पूजा, गंगा-यात्रा, कुश्ती और भोजन। माँ उसे बड़े कौर खिलाती, तेल-काजल लगाकर सजाती है। यह तीस के दशक के गाँव का प्यारा चित्र है।

What you will be able to do

  • शिवपूजन सहाय के जीवन और उनके उपन्यास देहाती दुनिया का परिचय दे सकेंगे।
  • आंचलिक रचना की विशेषताएँ पहचानकर इस पाठ में उनके उदाहरण बता सकेंगे।
  • भोलानाथ और बाबू जी के आपसी दुलार के प्रसंगों का वर्णन कर सकेंगे।
  • मइयाँ के भोजन कराने और सजाने के ढंग से माँ की ममता को समझा सकेंगे।
  • पाठ में आए लोक-शब्दों और देसी बोली के प्रयोग का अर्थ बता सकेंगे।

Key points

  • शिवपूजन सहाय (1893–1963) बिहार के रचनाकार थे; माता का अँचल उनके उपन्यास देहाती दुनिया का एक अंश है।

  • इस अंश में तीस के दशक के ग्रामीण जीवन, बच्चों के खेल और माता-पिता के वात्सल्य का चित्रण है।

  • कथावाचक का असली नाम तारकेश्वरनाथ है, पर पिता उसे प्यार से भोलानाथ कहते हैं।

  • बचपन में बच्चा पिता के साथ बैठक में सोता, उन्हीं के साथ उठता, नहाता और पूजा पर बैठता था।

  • पिता उसके माथे पर भभूत का त्रिपुंड लगाते, जिससे लंबी जटाओं वाला बच्चा छोटा बम-भोला लगता था।

  • पिता राम-नाम लिखी आटे की गोलियाँ गंगा में मछलियों को खिलाते, और बच्चा उनके कंधे पर बैठा हँसता रहता।

  • रास्ते में झूला, घर पर कुश्ती और गालों पर मीठे-खट्टे चुंबन पिता-पुत्र के खुले स्नेह को दिखाते हैं।

  • माँ का मानना था कि बच्चे को बड़े कौर खिलाने चाहिए; वह पक्षियों के नाम लेकर दही-भात खिलाती थी।

  • माँ ज़बरदस्ती सिर में सरसों का तेल डालकर, काजल की बिंदी और चोटी करके बच्चे को कन्हैया बना देती थी।

Full explanation

शिवपूजन सहाय और देहाती दुनिया

शिवपूजन सहाय हिंदी के ऐसे लेखक थे, जिन्होंने गाँव की ज़िंदगी को उसी की बोली और उसी के रंग में लिखा। उनका जन्म सन् 1893 में बिहार में हुआ और देहांत सन् 1963 में। वे उपन्यासकार और कहानीकार होने के साथ एक बड़े संपादक भी थे। मतवाला जैसी चर्चित पत्रिका से उनका नाम जुड़ा रहा, और हिंदी पत्रकारिता को उन्होंने बहुत कुछ दिया। हिंदी की सेवा के लिए उन्हें पद्मभूषण सम्मान भी मिला।

माता का अँचल उनके उपन्यास देहाती दुनिया का एक अंश है। यह उपन्यास सन् 1926 में आया, और इसे हिंदी के शुरुआती आंचलिक उपन्यासों में गिना जाता है। आंचलिक रचना का अर्थ है ऐसी रचना, जिसमें किसी ख़ास इलाक़े की बोली, रीति-रिवाज़, खान-पान, खेल और लोक-गीत जीवित हो उठें। आगे चलकर फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन ने इसी परंपरा को और आगे बढ़ाया।

इस अंश में तीस के दशक के एक गाँव का जीवन है। कथा एक छोटे बच्चे की आँखों से कही गई है, जो बड़ा होकर अपने बचपन को याद कर रहा है। इसीलिए भाषा में बच्चों जैसी शरारत भी है और बड़ों जैसी समझ भी। पढ़ते हुए लगता है, जैसे हम उसी चबूतरे पर, उन्हीं बच्चों के बीच बैठे हों।

तारकेश्वरनाथ उर्फ़ भोलानाथ: पिता का साया

कथावाचक बचपन से ही पिता के बहुत क़रीब था। माँ से उसका रिश्ता लगभग दूध पीने तक सीमित था, बाक़ी सारा समय वह पिता के साथ बिताता। रात को वह बाहर की बैठक में पिता के पास ही सोता। सुबह-सुबह पिता जब उठकर नहाते और पूजा पर बैठते, तो बच्चे को भी साथ उठाते, नहलाते और पूजा पर बिठा लेते।

पूजा के समय बच्चा ज़िद करता कि उसके माथे पर भी भभूत का तिलक लगे। पिता कभी हँसकर, कभी थोड़ा झुँझलाकर और कभी हल्की डाँट के साथ उसके चौड़े माथे पर त्रिपुंड बना देते। बच्चे के सिर पर लंबी जटाएँ थीं। भभूत लगते ही वह पूरा छोटा-सा शिव-भक्त, यानी बम-भोला, दिखने लगता।

इसीलिए पिता उसे प्यार से भोलानाथ कहकर बुलाते थे। उसका असली नाम तारकेश्वरनाथ था, पर घर में भोलानाथ ही चलता था। बच्चा पिता को बाबू जी कहता और माँ को मइयाँ। बाबू जी जब रामायण पढ़ते, तो भोलानाथ उनकी बग़ल में बैठकर आईने में अपना चेहरा देखता रहता। जैसे ही बाबू जी उसकी तरफ़ देखते, वह शरमाकर मुस्कुराता और आईना नीचे रख देता। बाबू जी भी मुस्कुरा उठते। ऐसे छोटे-छोटे पल इस रिश्ते की मिठास दिखाते हैं।

राम-नाम, गंगा और मछलियाँ

पूजा पूरी होने के बाद बाबू जी राम-नाम लिखने बैठते। उनके पास एक बही थी, जिसमें वे रोज़ एक हज़ार बार राम का नाम लिखते, और फिर उसे पाठ वाली पोथी के साथ बाँधकर रख देते। इसके बाद वे काग़ज़ की छोटी-छोटी पर्चियों पर पाँच सौ बार राम-नाम लिखते। इन पर्चियों को आटे की गोलियों में लपेटा जाता।

फिर बाबू जी ये गोलियाँ लेकर गंगा की ओर निकलते। भोलानाथ इस यात्रा में भी उनके कंधे पर सवार रहता। गंगा के किनारे बाबू जी एक-एक गोली पानी में डालते, और मछलियाँ उन्हें खाने आतीं। बच्चा कंधे पर बैठा-बैठा यह सब देखता और ख़ूब हँसता।

लौटते समय रास्ते में झुके हुए पेड़ों की डालियाँ मिलतीं। बाबू जी बच्चे को उन पर बिठाकर झूला झुलाते। इस पूरे प्रसंग में दो बातें साफ़ दिखती हैं। पहली, बाबू जी की गहरी धार्मिकता और जीवों के प्रति दया। दूसरी, उनका बच्चे को हर काम में साथ रखना। पूजा भी, गंगा-यात्रा भी और झूला भी, बच्चे का पूरा संसार पिता के इर्द-गिर्द घूमता है।

कुश्ती, मूँछें और खट्टे-मीठे चुंबन

बाबू जी कभी-कभी भोलानाथ से कुश्ती भी लड़ते। वे जान-बूझकर ढीले पड़ जाते, ताकि बच्चे का हौसला बढ़े। बच्चा उन्हें पटक देता, और वे पीठ के बल चित हो जाते। फिर भोलानाथ उनकी छाती पर चढ़ बैठता और उनकी लंबी मूँछें खींचने लगता।

बाबू जी हँसते-हँसते उसके हाथ मूँछों से छुड़ाते और उन्हीं हाथों को चूम लेते। फिर वे उससे खट्टा और मीठा चुंबन माँगते। बच्चा बारी-बारी से अपना बायाँ और दायाँ गाल आगे कर देता। बाएँ गाल का खट्टा चुंबन लेने के बाद जब बाबू जी दाएँ गाल का मीठा चुंबन लेते, तो अपनी खुरदुरी दाढ़ी-मूँछ उसके कोमल गाल पर गड़ा देते।

बच्चा चिढ़कर फिर उनकी मूँछें नोचने लगता। इस पर बाबू जी झूठ-मूठ रोने का नाटक करते, और भोलानाथ दूर खड़ा होकर खिलखिलाकर हँसता। यह दृश्य बताता है कि उस समय के एक पिता भी बच्चे के साथ बच्चा बन जाते थे। उनके प्यार में कोई औपचारिकता नहीं, बस खुला खेल और हँसी है। कई घरों में पिता को सख़्त माना जाता है, पर यहाँ पिता सबसे प्यारे साथी हैं।

दो ढंग से खाना: बाबू जी का कटोरा, मइयाँ के बड़े कौर

हँसी-ठिठोली के बाद दोनों घर लौटते, और रसोई में साथ खाने बैठते। बाबू जी अपने हाथ से फूल के कटोरे में दूध और भात मिलाकर भोलानाथ को खिलाते। जब बच्चे का पेट भर जाता, तब मइयाँ आतीं और ज़िद करतीं कि वह थोड़ा और खाए।

मइयाँ बाबू जी से शिकायत करतीं कि वे बच्चे के मुँह में चार-चार दानों के छोटे कौर देते हैं। इससे बच्चा थोड़ा खाकर ही समझ लेता है कि बहुत खा लिया। उनका मानना था कि बच्चे को भरपूर कौर खिलाने चाहिए। वे एक कहावत भी सुनातीं, जिसका भाव था कि बड़ा कौर खाने वाला ही दुनिया में अपनी जगह बनाता है। वे यह भी कहतीं कि मर्द क्या जानें बच्चों को कैसे खिलाया जाता है, और माँ के हाथ से खाकर ही बच्चे का पेट भरता है।

इसके बाद मइयाँ थाली में दही-भात मिलातीं, और हर कौर को तोता, मैना, कबूतर, हंस या मोर का नाम देतीं। वे कहतीं कि जल्दी खा लो, वरना ये चिड़ियाँ उड़ जाएँगी। भोलानाथ इतनी तेज़ी से कौर निगलता कि चिड़ियों को उड़ने का मौक़ा ही न मिलता। माँ की यह तरकीब आज भी बहुत-से घरों में आज़माई जाती है।

तेल, काजल और छोटा कन्हैया

खाना ख़त्म होते ही बाबू जी कहते कि अब तुम राजा हो, जाओ खेलो। भोलानाथ उछलता-कूदता, रस्सी से बँधा लकड़ी का घोड़ा उठाता और नंगे बदन गली में भाग जाता। पर कभी-कभी मइयाँ उसे बीच में ही पकड़ लेतीं।

फिर बच्चा कितना भी छटपटाए, मइयाँ उसके सिर पर एक चुल्लू सरसों का तेल डाल ही देतीं। भोलानाथ रोने लगता, और बाबू जी मइयाँ पर नाराज़ होते। पर मइयाँ तेल से सिर तर करके और उबटन लगाकर ही छोड़तीं। इसके बाद वे उसकी नाभि और माथे पर काजल की बिंदी लगातीं, चोटी गूँथकर उसमें फूलदार डोरी बाँधतीं, और रंगीन कुर्ता-टोपी पहना देतीं।

अब भोलानाथ पूरा कन्हैया लगने लगता। वह सिसकते हुए बाबू जी की गोद में बाहर आता। यह प्रसंग माँ की चिंता और ममता को दिखाता है। तेल, उबटन और काजल उस समय बच्चे की सेहत और नज़र से बचाव के लिए ज़रूरी माने जाते थे। बच्चा रोए तो भी माँ अपना फ़र्ज़ नहीं छोड़ती, क्योंकि उसका प्यार केवल लाड़ नहीं, देखभाल भी है।

Concepts and terms

उपन्यास-अंश

किसी लंबे उपन्यास से लिया गया एक हिस्सा, जो अपने-आप में पूरी तस्वीर देता है।

आंचलिकता

किसी अंचल या क्षेत्र की बोली, रहन-सहन और लोक-संस्कृति का सजीव चित्रण।

वात्सल्य

माता-पिता का अपनी संतान के प्रति कोमल स्नेह।

त्रिपुंड

माथे पर भस्म या चंदन से बनी तीन आड़ी रेखाओं वाला तिलक।

लोक-शब्द

बोलचाल और गाँव की बोली से आए शब्द, जैसे मइयाँ, लिलार, महतारी, सानना।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

मेरे घर के लाड़-प्यार की डायरी

Safety:

किसी की निजी बात उसकी अनुमति के बिना कक्षा में मत पढ़िए।

What You Notice:

आप पाएँगे कि समय बदलने पर भी माता-पिता के प्यार के तरीक़े बहुत कुछ वैसे ही हैं।

Did you know

देहाती दुनिया सन् 1926 में छपा था, और इसे हिंदी के शुरुआती आंचलिक उपन्यासों में गिना जाता है।

त्रिपुंड माथे पर लगाई जाने वाली तीन आड़ी रेखाएँ हैं, जो प्रायः शिव-भक्त भस्म या चंदन से बनाते हैं।

आंचलिक रचना किसी ख़ास क्षेत्र की बोली, रीति-रिवाज़, खान-पान और लोक-जीवन को केंद्र में रखती है।

Memory tricks

पिता के पाँच साथ: पू-गं-झू-कु-भो — पूजा, गंगा, झूला, कुश्ती, भोजन। भोलानाथ का दिन इन्हीं में बीतता था।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 माता का अँचल पाठ किस उपन्यास से लिया गया है? beginner
  • A रेणु का मैला आँचल
  • B देहाती दुनिया
  • C गोदान
  • D बलचनमा
Show answer
Answer: देहाती दुनिया
Why:

शिवपूजन सहाय।

Q2 इस पाठ को आंचलिक रचना कहने का मुख्य आधार क्या है? intermediate
  • A शहर के बड़े दफ़्तरों और मशीनों का वर्णन
  • B विदेश यात्रा
  • C गाँव की बोली, खेल और रीति-रिवाज़
  • D युद्ध की कहानी
Show answer
Answer: गाँव की बोली, खेल और रीति-रिवाज़
Why:

अंचल।

Q3 पाठ की कथा किसकी आँखों से कही गई है? beginner
  • A बचपन याद करते कथावाचक की
  • B गाँव के बूढ़े पुरोहित और गुरु जी की
  • C माँ की
  • D मूसन तिवारी की
Show answer
Answer: बचपन याद करते कथावाचक की
Why:

मैं-शैली।

Q4 कथावाचक का असली नाम क्या था? beginner
  • A भोलानाथ
  • B बैजू
  • C मूसन
  • D तारकेश्वरनाथ
Show answer
Answer: तारकेश्वरनाथ
Why:

घर का नाम अलग।

Q5 पिता बच्चे को भोलानाथ क्यों कहते थे? intermediate
  • A वह गाँव का सबसे सीधा और भोला बच्चा माना जाता था
  • B वह मंदिर में रहता था
  • C भभूत और जटाओं से वह बम-भोला लगता था
  • D उसका जन्म शिवरात्रि पर हुआ
Show answer
Answer: भभूत और जटाओं से वह बम-भोला लगता था
Why:

त्रिपुंड।

Q6 माँ से बच्चे का नाता शुरू में किस बात तक सीमित बताया गया है? intermediate
  • A केवल रात में सोने तक
  • B दूध पीने तक
  • C केवल नहाने तक
  • D केवल खेल तक
Show answer
Answer: दूध पीने तक
Why:

पिता के अंग।

Q7 रामायण-पाठ के समय भोलानाथ का आईना देखना और शरमाना किस भाव को दिखाता है? beginner
  • A पूजा-पाठ से गहरी चिढ़ और उदासी
  • B डर
  • C घमंड
  • D बाल-सुलभ भोलापन
Show answer
Answer: बाल-सुलभ भोलापन
Why:

मुस्कान।

Q8 बाबू जी का आटे की गोलियाँ मछलियों को खिलाना उनके किस गुण को दिखाता है? intermediate
  • A धार्मिकता और जीव-दया
  • B पैसे बचाने की आदत और कंजूसी
  • C मछली पकड़ने का शौक़
  • D आलस
Show answer
Answer: धार्मिकता और जीव-दया
Why:

राम-नाम।

Q9 गंगा-यात्रा में भोलानाथ कहाँ बैठा रहता था? beginner
  • A नाव में
  • B पिता के कंधे पर
  • C घोड़े पर
  • D किनारे की सीढ़ी पर
Show answer
Answer: पिता के कंधे पर
Why:

हँसता।

Q10 कुश्ती में बाबू जी का जान-बूझकर ढीला पड़ना किस बात का संकेत है? intermediate
  • A उनका सचमुच बहुत कमज़ोर और बीमार होना
  • B खेल से ऊब
  • C बच्चे का उत्साह बढ़ाना
  • D बच्चे से डर
Show answer
Answer: बच्चे का उत्साह बढ़ाना
Why:

हौसला।

Q11 खट्टे-मीठे चुंबन वाले प्रसंग में पिता का कौन-सा रूप उभरता है? intermediate
  • A बच्चे के साथ बच्चा बन जाने वाला
  • B कठोर अनुशासन रखने वाला और ग़ुस्सैल
  • C उदासीन
  • D चिंतित
Show answer
Answer: बच्चे के साथ बच्चा बन जाने वाला
Why:

नकली रोना।

Q12 मइयाँ बाबू जी के खिलाने के ढंग से असहमत क्यों थीं? intermediate
  • A बाबू जी बच्चे को बहुत ज़्यादा मिर्च वाला खाना देते थे
  • B बाबू जी जल्दी में थे
  • C बाबू जी खाना गिरा देते थे
  • D छोटे कौर से बच्चा कम खाकर भी भरा मान लेता था
Show answer
Answer: छोटे कौर से बच्चा कम खाकर भी भरा मान लेता था
Why:

चार-चार दाने।

Q13 बड़े कौर वाली कहावत में मइयाँ का कौन-सा विश्वास छिपा है? advanced
  • A बच्चे को कम खाना चाहिए, वरना वह आलसी बनेगा
  • B भरपूर खाने वाला बच्चा जीवन में आगे बढ़ेगा
  • C खाना बर्बाद होता है
  • D चिड़ियाँ भूखी हैं
Show answer
Answer: भरपूर खाने वाला बच्चा जीवन में आगे बढ़ेगा
Why:

ठौर।

Q14 मइयाँ कौर को किन नामों से पुकारती थीं? beginner
  • A चिड़ियों के नामों से
  • B देवताओं के नामों से
  • C फलों के नामों से
  • D गाँव वालों के नामों से
Show answer
Answer: चिड़ियों के नामों से
Why:

तोता, मैना।

Q15 चिड़ियाँ उड़ जाएँगी कहने के पीछे मइयाँ की क्या समझ थी? intermediate
  • A चिड़ियाँ सचमुच थाली से उड़कर भाग जाती थीं
  • B बच्चा चिड़ियों से डरता था
  • C खेल-खेल में बच्चा जल्दी और ज़्यादा खा लेगा
  • D मइयाँ चिड़ियाँ पालती थीं
Show answer
Answer: खेल-खेल में बच्चा जल्दी और ज़्यादा खा लेगा
Why:

तरकीब।

Q16 महतारी शब्द का अर्थ है ______। beginner
  • A पिता
  • B दादी
  • C बहन
  • D माता
Show answer
Answer: माता
Why:

लोक-शब्द।

Q17 खाने के बाद बाबू जी भोलानाथ को क्या कहकर खेलने भेजते? intermediate
  • A अब पढ़ने बैठो
  • B अब सो जाओ
  • C अब तुम राजा हो
  • D अब पूजा करो
Show answer
Answer: अब तुम राजा हो
Why:

काठ का घोड़ा।

Q18 बच्चे के रोने पर भी मइयाँ का तेल डालना किस भाव को दिखाता है? intermediate
  • A बच्चे को सताने का शौक़ और कठोरता
  • B देखभाल भरी ममता
  • C जल्दबाज़ी
  • D लापरवाही
Show answer
Answer: देखभाल भरी ममता
Why:

सेहत की चिंता।

Q19 काजल की बिंदी लगाने के पीछे पुराने समय की कौन-सी मान्यता रही होगी? intermediate
  • A बच्चे को स्कूल में ज़्यादा अंक दिलवाना
  • B बच्चे को डराना
  • C खेल में जिताना
  • D बच्चे को बुरी नज़र से बचाना
Show answer
Answer: बच्चे को बुरी नज़र से बचाना
Why:

लोक-विश्वास।

Q20 तेल-काजल के बाद बच्चा किसके जैसा दिखने लगता? beginner
  • A कन्हैया
  • B बम-भोला
  • C राजा
  • D सिपाही
Show answer
Answer: कन्हैया
Why:

चोटी और फूलदार डोरी।

Q21 पाठ में मइयाँ, लिलार, अफर जाना जैसे शब्दों का क्या प्रभाव है? advanced
  • A कथा को पढ़ना बहुत कठिन और उबाऊ बनता है
  • B कथा में गाँव की असलियत आती है
  • C कथा शहरी लगती है
  • D कोई प्रभाव नहीं
Show answer
Answer: कथा में गाँव की असलियत आती है
Why:

आंचलिक भाषा।

Q22 लिलार शब्द का अर्थ है ______। beginner
  • A गाल
  • B ठोड़ी
  • C माथा
  • D कंधा
Show answer
Answer: माथा
Why:

त्रिपुंड।

Q23 पिता के साथ भोलानाथ के दिन का सही क्रम कौन-सा है? advanced
  • A भोजन, गंगा-यात्रा, पूजा, राम-नाम लेखन
  • B गंगा-यात्रा, भोजन, पूजा, कुश्ती
  • C कुश्ती, पूजा, भोजन, गंगा-यात्रा
  • D पूजा, राम-नाम लेखन, गंगा-यात्रा, भोजन
Show answer
Answer: पूजा, राम-नाम लेखन, गंगा-यात्रा, भोजन
Why:

सुबह से।

Q24 अभिकथन: भोलानाथ का अधिकतर समय पिता के साथ बीतता था। कारण: वह पिता के साथ सोता, नहाता, पूजा करता और गंगा जाता था। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

पिता के अंग।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. भोलानाथ का असली नाम तारकेश्वरनाथ था। II. बाबू जी बच्चे को बहुत बड़े-बड़े कौर खिलाते थे। III. मइयाँ बच्चे के सिर में सरसों का तेल डालती थीं। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C I, II और III तीनों
  • D केवल I और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

बड़े कौर मइयाँ के।

Important short questions (7)

माता का अँचल किस रचना का अंश है, और उसकी क्या विशेषता है?

यह शिवपूजन सहाय के उपन्यास देहाती दुनिया का अंश है। इसे हिंदी के शुरुआती आंचलिक उपन्यासों में गिना जाता है, जिसमें गाँव की बोली और जीवन सजीव है।

बच्चे का नाम भोलानाथ कैसे पड़ा?

पूजा के समय पिता उसके माथे पर भभूत का त्रिपुंड लगाते थे। लंबी जटाओं के साथ वह छोटा बम-भोला लगता, इसलिए पिता उसे भोलानाथ कहने लगे।

बाबू जी की धार्मिक दिनचर्या का वर्णन कीजिए।

वे तड़के नहाकर पूजा करते, रामायण पढ़ते और बही में राम-नाम लिखते। फिर राम-नाम की पर्चियाँ आटे की गोलियों में लपेटकर गंगा की मछलियों को खिलाते।

कुश्ती वाले प्रसंग से पिता के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है?

पिता जान-बूझकर हारकर बच्चे का हौसला बढ़ाते हैं। मूँछें खिंचवाकर भी वे हँसते रहते हैं, यानी वे स्नेही, धैर्यवान और विनोदी हैं।

मइयाँ और बाबू जी के खिलाने के ढंग में क्या अंतर था?

बाबू जी कटोरे से छोटे-छोटे कौर खिलाते थे। मइयाँ भरपूर कौर बनाकर चिड़ियों के नाम लेते हुए जल्दी-जल्दी खिलाती थीं, ताकि बच्चा पेट भर खाए।

मइयाँ बच्चे को कन्हैया कैसे बनाती थीं?

वे सिर में सरसों का तेल डालकर उबटन लगातीं, नाभि और माथे पर काजल की बिंदी लगातीं। फिर चोटी गूँथकर फूलदार डोरी बाँधतीं और रंगीन कुर्ता-टोपी पहनातीं।

पाठ में आए दो आंचलिक शब्द और उनके अर्थ लिखिए।

मइयाँ का अर्थ है माँ, और लिलार का अर्थ है माथा। ऐसे शब्द कहानी को गाँव की असली बोली से जोड़ते हैं।

Long answer questions (3)

पाठ के आधार पर भोलानाथ और उसके पिता के आपसी रिश्ते का वर्णन कीजिए।

भोलानाथ का अपने पिता से बहुत गहरा रिश्ता था। वह रात को उनके साथ बैठक में सोता, और सुबह उन्हीं के साथ उठकर नहाता। पूजा के समय पिता उसके माथे पर त्रिपुंड लगाते और उसे भोलानाथ कहते। गंगा जाते समय वह उनके कंधे पर बैठा रहता, और लौटते समय वे उसे पेड़ की डाल पर झुलाते। घर पर पिता उससे कुश्ती लड़ते और जान-बूझकर हार जाते। वे खट्टे-मीठे चुंबन माँगते और नकली रोना रोकर उसे हँसाते। अपने हाथ से उसे खाना भी खिलाते। इस तरह पिता उसके पिता भी थे और सबसे प्यारे साथी भी।

माँ की ममता पिता के प्यार से किस तरह अलग दिखाई गई है? पाठ के आधार पर लिखिए।

पाठ में पिता का प्यार खेल और साथ से भरा है। वे बच्चे के साथ पूजा करते, घूमते, कुश्ती लड़ते और हँसाते हैं। माँ का प्यार देखभाल और चिंता से भरा है। वे मानती हैं कि बच्चे को भरपूर खाना चाहिए, इसलिए बड़े कौर बनाकर चिड़ियों के नाम से खिलाती हैं। बच्चा रोए तो भी वे सिर में तेल डालती हैं, काजल लगाती हैं और उसे सजाती हैं। पिता बच्चे की ख़ुशी देखते हैं, जबकि माँ उसकी सेहत और भलाई। दोनों का प्यार सच्चा है, बस उसके रंग अलग हैं।

माता का अँचल एक आंचलिक रचना है। पाठ के पहले भाग के आधार पर इस कथन को सिद्ध कीजिए।

आंचलिक रचना में किसी इलाक़े की बोली, रीति-रिवाज़ और लोक-जीवन जीवित हो उठते हैं। इस पाठ में यह सब साफ़ दिखता है। भाषा में मइयाँ, बाबू जी, लिलार, महतारी और अफर जाना जैसे पूर्वी बोली के शब्द हैं। रीति-रिवाज़ भी गाँव के हैं, जैसे भभूत का त्रिपुंड, राम-नाम की बही, और मछलियों को आटे की गोलियाँ खिलाना। खान-पान में गोरस-भात और दही-भात है। माँ का सरसों का तेल डालना और काजल की बिंदी लगाना भी गाँव की पुरानी मान्यताओं से जुड़ा है। इन सबसे तीस के दशक का एक पूरा गाँव आँखों के सामने आ जाता है।

Flashcards (17)

शिवपूजन सहाय का जीवन-काल?
सन् 1893 से 1963 तक।
यह पाठ किस उपन्यास का अंश है?
देहाती दुनिया।
शिवपूजन सहाय किस पत्रिका से जुड़े रहे?
मतवाला।
पाठ में किस समय का गाँव है?
तीस के दशक का।
कथावाचक का असली नाम?
तारकेश्वरनाथ।
भोलानाथ पिता को क्या कहता था?
बाबू जी।
भोलानाथ रात में कहाँ सोता था?
बैठक में पिता के साथ।
पिता माथे पर क्या लगाते थे?
भभूत का त्रिपुंड।
बाबू जी रोज़ बही में कितनी बार राम-नाम लिखते?
एक हज़ार बार।
आटे की गोलियों में क्या लपेटा जाता?
राम-नाम लिखी पर्चियाँ।
गोलियाँ किसे खिलाई जातीं?
गंगा की मछलियों को।
कुश्ती में पिता क्यों हारते?
बच्चे का हौसला बढ़ाने को।
बाबू जी किस बर्तन में खिलाते?
फूल के कटोरे में।
मइयाँ कौर को क्या नाम देती?
चिड़ियों के नाम।
माँ सिर पर क्या डालती?
सरसों का तेल।
सजने के बाद बच्चा क्या लगता?
कन्हैया।
खाने के बाद बाबू जी क्या कहते?
अब तुम राजा हो, खेलो।

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  • शब्द और अर्थ
  • बाबू जी या मइयाँ?
  • सही या भ्रम
  • भोलानाथ की सुबह
  • झटपट उत्तर

खेल, शरारतें और माँ के आँचल की छाँव

भोलानाथ और उसके साथी मिट्टी, ठीकरों और टूटी चीज़ों से दुकान, भोज, बरात और खेती के खेल रचते हैं। शरारतों के बाद एक दिन साँप से डरकर भागा भोलानाथ पिता को छोड़ माँ के आँचल में छिपता है।

What you will be able to do

  • भोलानाथ और उसके साथियों के खेलों तथा खेल-सामग्री का वर्णन कर सकेंगे।
  • बच्चों की तुकबंदियों और लोक-गीतों की भूमिका पहचान सकेंगे।
  • मूसन तिवारी, गुरु जी और चूहे-साँप वाले प्रसंगों से बच्चों के स्वभाव को समझा सकेंगे।
  • संकट के समय बच्चे के माँ की शरण में जाने का कारण स्पष्ट कर सकेंगे।
  • शीर्षक की सार्थकता और तब तथा आज की ग्रामीण संस्कृति के अंतर पर विचार लिख सकेंगे।

Key points

  • बच्चे चबूतरे के कोने को नाटक-घर और बाबू जी की नहाने वाली चौकी को रंगमंच बना लेते थे।

  • मिठाई की दुकान में ढेले, पत्ते, गीली मिट्टी और घड़े के टुकड़े ही लड्डू, पूरी, जलेबी और बताशे बन जाते थे।

  • घरौंदे और भोज के खेल में पानी घी, धूल आटा और बालू चीनी बनती; बाबू जी पंगत में बैठते तो बच्चे भाग जाते।

  • बरात के खेल में कनस्तर बाजा, टूटी चूहेदानी पालकी और आम की गुठली शहनाई बनती थी।

  • खेती के खेल में चबूतरा खेत, कंकड़ बीज और गली कुआँ बन जाती; फ़सल कटते ही बच्चे गीत गाते।

  • साथियों को देखते ही भोलानाथ रोना भूल जाता, क्योंकि बच्चों का मन खेल और मंडली में तुरंत रम जाता है।

  • बूढ़े दूल्हे और मूसन तिवारी को चिढ़ाने जैसी शरारतों पर बच्चों को डाँट और गुरु जी की सज़ा भी मिली।

  • चूहे के बिल में पानी डालते समय साँप निकल आया, और बच्चे गिरते-पड़ते, लहूलुहान होकर भागे।

  • डरा हुआ भोलानाथ बाबू जी की पुकार अनसुनी कर सीधे मइयाँ के आँचल में छिपा; माँ ही उसकी सबसे बड़ी शरण बनी।

Full explanation

साथियों का झुंड: रोना भूलकर खेल

सज-धजकर, सिसकता हुआ भोलानाथ जब बाबू जी की गोद में बाहर आता, तो गली में उसके साथियों का झुंड उसका इंतज़ार कर रहा होता। उन्हें देखते ही वह रोना भूल जाता और गोद से उतरकर उनकी टोली में घुस जाता।

बच्चों का स्वभाव ही ऐसा होता है। उनका दुख ज़्यादा देर नहीं टिकता, और साथियों का साथ मिलते ही उनका मन खेल में रम जाता है। हमउम्र दोस्तों के साथ बच्चे को जो आज़ादी और बराबरी मिलती है, वह बड़ों के साथ नहीं मिलती। इसीलिए भोलानाथ कुछ ही पलों में सब कुछ भूलकर तमाशे में डूब जाता है।

और ये तमाशे भी साधारण नहीं थे। बच्चे तरह-तरह के नाटक रचते थे। चबूतरे का एक कोना उनका नाटक-घर बन जाता, और बाबू जी जिस छोटी चौकी पर बैठकर नहाते थे, वही उनका रंगमंच बन जाती। इन बच्चों के पास न महँगे खिलौने थे, न बाज़ार की कोई चीज़। फिर भी उनकी कल्पना ने हर मामूली चीज़ को खेल का हिस्सा बना दिया।

मिठाई की दुकान और घरौंदे का भोज

एक खेल था मिठाई की दुकान। सरकंडे के खंभों पर काग़ज़ का छोटा-सा शामियाना तानकर दुकान सजती। ढेले लड्डू बनते, पत्ते पूरी-कचौरी, गीली मिट्टी जलेबी, और फूटे घड़े के टुकड़े बताशे। ठीकरे तौलने के बाट बनते, और जस्ते के छोटे टुकड़े पैसे। बच्चे ख़ुद ही दुकानदार थे और ख़ुद ही ग्राहक। बाबू जी भी कभी-कभी मज़े के लिए दो-चार चीज़ें ख़रीद लेते।

थोड़ी देर बाद दुकान समेटकर घरौंदा बनता। धूल की मेड़ से दीवार उठती और तिनकों से छप्पर। दातून के खंभे लगते, और माचिस की डिबियों से किवाड़ बनते। घड़े का मुँह चूल्हा बनता, और दीया कड़ाही। कलछी का काम पूजा में इस्तेमाल होने वाली बाबू जी की आचमनी से लिया जाता।

फिर भोज की तैयारी होती। पानी घी बनता, धूल आटा, और बालू चीनी। बच्चे ख़ुद ही भोज पकाते और ख़ुद ही पंगत में खाने बैठते। जब पंगत जम जाती, तो बाबू जी चुपचाप आकर कतार के आख़िर में बैठ जाते। उन्हें देखते ही बच्चे हँसते हुए घरौंदा तोड़कर भाग जाते। बाबू जी भी हँसी से लोट-पोट होकर पूछते कि अगला भोज कब होगा। इस प्रसंग में बड़ों का बच्चों के खेल में चुपचाप शामिल होना बहुत प्यारा लगता है।

बरात और खेती: बड़ों की दुनिया की नक़ल

कभी-कभी बच्चे बरात भी निकालते। कनस्तर तंबूरे की तरह बजता, आम की गुठली घिसकर शहनाई बनती, और टूटी चूहेदानी पालकी। कोई बच्चा समधी बनकर बकरे पर सवार हो जाता। बरात चबूतरे के एक कोने से चलकर दूसरे कोने तक जाती। वहाँ गोबर से लिपा, आम और केले की टहनियों से सजा एक छोटा आँगन होता, जिसमें मिट्टी का कलश रखा रहता।

लौटते समय एक छोटी खाट पर लाल कपड़े का पर्दा डालकर दुल्हन को बिठाया जाता। जैसे ही बाबू जी पर्दा उठाकर दुल्हन का मुँह देखने की कोशिश करते, सारे बच्चे हँसकर भाग खड़े होते।

फिर खेती का खेल शुरू होता। चबूतरे के किनारे घिरनी गाड़ दी जाती, और नीचे की गली कुआँ बन जाती। मूँज की रस्सी में मिट्टी का छोटा बर्तन बाँधकर लटकाया जाता, और दो बच्चे बैल बनकर पानी खींचते। चबूतरा खेत बनता, कंकड़ बीज, और लकड़ी का डंडा हल। बड़ी लगन से खेत जोता, बोया और सींचा जाता। फ़सल तुरंत तैयार हो जाती और बच्चे गीत गाते हुए उसे काट लेते। फिर पैरों से रौंदकर, मिट्टी के कसोरे से सूप का काम लेकर अनाज ओसाया और दीए के तराज़ू पर तौला जाता। तभी बाबू जी पूछ बैठते कि इस बार फ़सल कैसी रही, और बच्चे खेत-खलिहान छोड़कर भाग जाते।

इन खेलों में बच्चे बड़ों की दुनिया की नक़ल करते हैं: दुकान, भोज, शादी और खेती। खेल-खेल में वे गाँव के पूरे जीवन को सीख लेते हैं।

तुकबंदियाँ और शरारतें

इन बच्चों के खेल गीतों और तुकबंदियों से भरे थे। ददरी के मेले जाते लोगों को देखकर वे कूद-कूदकर एक तुकबंदी गाते। ओहार वाली पालकी देखते, तो दुल्हन के बारे में चिढ़ाने वाली तुकबंदी चिल्लाते। एक बार इसी पर एक बूढ़े दूल्हे ने उन्हें दूर तक दौड़ाकर ढेले मारे। लेखक बड़े मज़ाकिया ढंग से उस दूल्हे की घोड़े जैसी सूरत याद करता है।

आम के मौसम में आँधी आती, तो बच्चे बाग़ की ओर दौड़ते और टपके हुए रसीले आम चूसते। एक दिन तेज़ आँधी के साथ घनघोर बादल घिरे, बिजली चमकी और मूसलाधार बारिश हुई। बच्चे बारिश रोकने के लिए एक तुकबंदी गाने लगे, पर बारिश और तेज़ हो गई। वे पेड़ की जड़ से ऐसे चिपक गए, जैसे कुत्ते के कान में छोटे कीड़े चिपके रहते हैं। बारिश थमी तो बाग़ में बिच्छू दिखे, और सब डरकर भागे।

रास्ते में बूढ़े मूसन तिवारी मिले, जिन्हें कम दिखता था। टोली का सबसे ढीठ लड़का बैजू उन्हें चिढ़ाने लगा, और बाक़ी बच्चे भी सुर मिलाने लगे। तिवारी जी ने उन्हें दौड़ाया, और न पकड़ पाने पर सीधे पाठशाला जा पहुँचे। गुरु जी ने चार लड़कों को उन्हें पकड़ लाने भेजा। बैजू तो भाग निकला, पर भोलानाथ पकड़ा गया और गुरु जी ने उसकी अच्छी ख़बर ली। बाबू जी दौड़े आए, गुरु जी से विनती करके उसे घर ले चले। रास्ते में फिर वही दोस्त गाते मिले, और भोलानाथ रोना भूलकर उनमें जा मिला।

चूहे का बिल, साँप और भगदड़

दोस्तों के साथ भोलानाथ मक्के के खेत की ओर भागा, जहाँ चिड़ियाँ दाना चुग रही थीं। बच्चे उन्हें पकड़ने दौड़े, पर एक भी हाथ न आई। भोलानाथ दूर खड़ा होकर चिड़ियों को भरपेट खाने को कहने वाला एक गीत गाता रहा। गाँव के बड़े यह देखकर हँसते और कहते कि बच्चों के लिए चिड़िया की जान भी खेल है। लोक-कहावत भी है कि बच्चे और बंदर दूसरे का दर्द नहीं समझते।

फिर बच्चे एक टीले पर पहुँचे और चूहों के बिल में पानी डालने लगे। बहुत देर तक नीचे से ऊपर पानी उलीचते-उलीचते सब थक गए। तभी बिल से एक साँप निकल आया। लेखक मज़ेदार ढंग से कहता है कि गणेश जी के चूहे को बचाने शिव जी का साँप आ पहुँचा।

अब तो भगदड़ मच गई। बच्चे चीखते-चिल्लाते भागे। कोई मुँह के बल गिरा, कोई पीठ के बल। कुछ के सिर फूटे, कुछ के दाँत टूट गए। भोलानाथ का पूरा शरीर लहूलुहान हो गया, और काँटे चुभ-चुभकर उसके तलवे छलनी कर गए। यह प्रसंग बताता है कि बचपन की शरारतें कभी-कभी कितनी भारी पड़ सकती हैं।

माता का अँचल: संकट में सबसे बड़ी शरण

भोलानाथ बेतहाशा दौड़ता हुआ घर पहुँचा। बाबू जी बरामदे में बैठे हुक्का पी रहे थे। उन्होंने उसे बार-बार पुकारा, पर वह उनकी आवाज़ अनसुनी करके सीधे भीतर मइयाँ के पास दौड़ गया। मइयाँ चावल साफ़ कर रही थीं। भोलानाथ उनकी गोद में जाकर उनके आँचल में छिप गया।

बेटे को डर से काँपते देखकर मइयाँ ज़ोर से रो पड़ीं और सारा काम छोड़ दिया। वे घबराकर डर का कारण पूछने लगीं। कभी उसे सीने से कसकर लगातीं, कभी अपने आँचल से उसका शरीर पोंछकर उसे चूमतीं। झटपट हल्दी पीसकर घावों पर लगाई गई, और घर में हलचल मच गई। भोलानाथ बस धीमे से साँप-साँप बुदबुदाता रहा। उसका शरीर काँप रहा था, रोंगटे खड़े थे, और आँखें खुलने को तैयार न थीं।

तभी बाबू जी दौड़ते हुए आए और बेटे को अपनी बाँहों में उठाना चाहा। पर भोलानाथ ने माँ का आँचल नहीं छोड़ा। लेखक उस आँचल को प्रेम और शांति का शामियाना कहता है। यहीं पाठ का सबसे गहरा सच सामने आता है। बच्चा भले ही दिन भर पिता के साथ खेले, पर संकट के क्षण में उसे जो सुरक्षा और सुकून चाहिए, वह माँ की गोद में ही मिलता है। इसीलिए शीर्षक माता का अँचल पूरी कहानी का सार है।

Concepts and terms

खेल-सामग्री

आसपास की बेकार या सस्ती चीज़ें, जिन्हें बच्चे कल्पना से खिलौना बना लेते हैं।

तुकबंदी

तुक मिलाकर बनाई गई छोटी, लयदार पंक्तियाँ, जिन्हें बच्चे खेलते समय गाते हैं।

ग्राम्य संस्कृति

गाँव का रहन-सहन, खेल, मेल-जोल, रीति-रिवाज़ और लोक-गीत।

शरण

संकट के समय सुरक्षा और सांत्वना देने वाली जगह। भोलानाथ के लिए यह माँ का आँचल है।

शीर्षक की सार्थकता

शीर्षक का कहानी के केंद्रीय भाव या चरम बिंदु से गहरा जुड़ाव।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

आठ साल का अयान रोज़ शाम पिता के साथ पार्क में क्रिकेट खेलता था। पिता उसे बल्लेबाज़ी सिखाते, उसकी हर अच्छी शॉट पर ताली बजाते, और कभी-कभी जान-बूझकर आउट होकर उसे जिताते थे।

एक दिन पार्क में खेलते हुए एक आवारा कुत्ता भौंकता हुआ उसकी ओर दौड़ा। अयान डरकर भागा, गिरा और उसके घुटने छिल गए। पिता पास ही खड़े थे और उसे पुकार रहे थे।

पर अयान रोता हुआ सीधा घर भागा और माँ से लिपट गया। माँ ने घाव धोकर दवा लगाई और देर तक उसे गोद में बिठाए रखा। पिता घर आए, तो मुस्कुराकर बोले, खेल में मैं, पर डर में माँ!

Activity:

अपने घर के बड़ों से पूछिए कि बचपन में डर लगने पर वे किसके पास जाते थे, और क्यों। उत्तरों को तालिका में लिखकर कक्षा में चर्चा कीजिए।

Analysis:

माता और पिता, दोनों का प्यार बच्चे के लिए ज़रूरी है, पर उनके रंग अलग होते हैं। यही बात शिवपूजन सहाय ने लगभग सौ साल पहले माता का अँचल में कही थी, और आज भी उतनी ही सच है।

Did you know

ज्योनार का अर्थ है भोज या दावत, और जीमना का अर्थ है भोजन करना। दोनों शब्द आज भी कई इलाक़ों की बोली में चलते हैं।

ओहार पालकी या डोली पर पर्दे के लिए डाला जाने वाला कपड़ा है। पुराने समय में दुल्हन ओहार वाली डोली में ससुराल जाती थी।

ददरी का मेला बलिया (उत्तर प्रदेश) में गंगा किनारे लगने वाला एक बहुत पुराना पशु-मेला है।

Memory tricks

चार खेल: दु-घ-ब-खे — दुकान, घरौंदा-भोज, बरात, खेती।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 साथियों को देखते ही भोलानाथ सिसकना क्यों भूल जाता था? beginner
  • A साथी उसे डराकर ज़बरदस्ती चुप करा देते थे
  • B उसे भूख लगती थी
  • C बाबू जी डाँटते थे
  • D साथियों में उसका मन तुरंत रम जाता था
Show answer
Answer: साथियों में उसका मन तुरंत रम जाता था
Why:

बाल-स्वभाव।

Q2 बच्चों का रंगमंच कौन-सी चीज़ बनती थी? intermediate
  • A गाँव की चौपाल पर बना बड़ा मंच
  • B मंदिर का आँगन
  • C बाबू जी की नहाने वाली चौकी
  • D खाट
Show answer
Answer: बाबू जी की नहाने वाली चौकी
Why:

चबूतरा।

Q3 मिठाई की दुकान वाले खेल से बच्चों की किस क्षमता का पता चलता है? intermediate
  • A हिसाब-किताब की गहरी और पक्की समझ
  • B कल्पनाशीलता
  • C लालच
  • D आलस
Show answer
Answer: कल्पनाशीलता
Why:

मिट्टी की जलेबी।

Q4 घरौंदे के भोज में घी किससे बनता था? beginner
  • A पानी से
  • B बालू से
  • C धूल से
  • D मिट्टी से
Show answer
Answer: पानी से
Why:

ज्योनार।

Q5 बाबू जी का पंगत के अंत में चुपचाप बैठ जाना क्या दिखाता है? intermediate
  • A बच्चों के खेल को बिगाड़ने की इच्छा
  • B भूख
  • C नाराज़गी
  • D बच्चों के खेल में स्नेह भरी भागीदारी
Show answer
Answer: बच्चों के खेल में स्नेह भरी भागीदारी
Why:

फिर कब भोज होगा।

Q6 बरात के खेल में शहनाई किससे बनती थी? intermediate
  • A घिसी हुई आम की गुठली से
  • B बाँस की खोखली नली से
  • C काग़ज़ से
  • D पत्ते से
Show answer
Answer: घिसी हुई आम की गुठली से
Why:

अमोला।

Q7 दुकान, भोज, बरात और खेती जैसे खेलों में बच्चे वास्तव में क्या कर रहे थे? advanced
  • A केवल समय बर्बाद कर रहे थे और कुछ नहीं
  • B पैसे कमा रहे थे
  • C बड़ों की दुनिया की नक़ल करके सीख रहे थे
  • D बड़ों को चिढ़ा रहे थे
Show answer
Answer: बड़ों की दुनिया की नक़ल करके सीख रहे थे
Why:

खेल-खेल में।

Q8 खेती के खेल में कुआँ क्या बनता था? intermediate
  • A गाँव का पुराना बड़ा पोखर
  • B चबूतरे के नीचे की गली
  • C घड़ा
  • D गड्ढा
Show answer
Answer: चबूतरे के नीचे की गली
Why:

घिरनी।

Q9 बाबू जी के फ़सल के बारे में पूछते ही बच्चों का भागना क्या दिखाता है? advanced
  • A बच्चों का बाबू जी से बहुत ज़्यादा डरना
  • B फ़सल ख़राब होना
  • C बड़ों के आते ही खेल का जादू टूटना
  • D भूख
Show answer
Answer: बड़ों के आते ही खेल का जादू टूटना
Why:

हँसते हुए भागना।

Q10 पाठ में बच्चे बार-बार तुकबंदियाँ क्यों गाते हैं? intermediate
  • A उन्हें स्कूल में यह गृहकार्य मिला था
  • B बड़े मजबूर करते थे
  • C पैसा मिलता था
  • D लय से खेल में उत्साह और मज़ा आता है
Show answer
Answer: लय से खेल में उत्साह और मज़ा आता है
Why:

लोक-गीत।

Q11 बूढ़े दूल्हे ने बच्चों को ढेले क्यों मारे? intermediate
  • A बच्चों ने उसे चिढ़ाने वाली तुकबंदी गाई
  • B बच्चों ने उसकी पालकी तोड़ दी थी
  • C बच्चे आम चुरा रहे थे
  • D बच्चे रास्ता रोक रहे थे
Show answer
Answer: बच्चों ने उसे चिढ़ाने वाली तुकबंदी गाई
Why:

ओहार।

Q12 बारिश में बच्चे पेड़ की जड़ से कैसे चिपके थे? advanced
  • A जैसे दीवार पर छिपकली
  • B जैसे कुत्ते के कान में किलनी
  • C जैसे फूल पर भौंरा
  • D जैसे पेड़ पर बेल
Show answer
Answer: जैसे कुत्ते के कान में किलनी
Why:

अँठई।

Q13 मूसन तिवारी को चिढ़ाने वाले बच्चों के व्यवहार को आप कैसे देखते हैं? intermediate
  • A बहुत अच्छा, साहसी और प्रशंसा के योग्य काम
  • B बहादुरी
  • C शरारत, जो बड़ों के प्रति अनादर बन गई
  • D सेवा
Show answer
Answer: शरारत, जो बड़ों के प्रति अनादर बन गई
Why:

कम दिखता था।

Q14 टोली का सबसे ढीठ लड़का कौन था? beginner
  • A बैजू
  • B भोलानाथ
  • C मूसन
  • D तारकेश्वर
Show answer
Answer: बैजू
Why:

नौ-दो ग्यारह।

Q15 गुरु जी से मार खाने के बाद भोलानाथ के साथ बाबू जी का व्यवहार कैसा था? intermediate
  • A ग़ुस्से में आकर और ज़्यादा डाँटना-फटकारना और पीटना
  • B पुचकारना और गुरु जी से विनती करके घर लाना
  • C अनदेखा करना
  • D हँसना
Show answer
Answer: पुचकारना और गुरु जी से विनती करके घर लाना
Why:

चिरौरी।

Q16 चिड़ियों को पकड़ने की कोशिश पर गाँव के बड़ों की टिप्पणी किस ओर संकेत करती है? advanced
  • A बच्चे चिड़ियों से बहुत प्यार करते हैं
  • B चिड़ियाँ ख़तरनाक हैं
  • C खेत ख़राब हुआ
  • D बच्चे दूसरों का दर्द नहीं समझते
Show answer
Answer: बच्चे दूसरों का दर्द नहीं समझते
Why:

पराई पीर।

Q17 गणेश जी के चूहे को बचाने शिव जी का साँप आया, इस कथन में लेखक का कौन-सा भाव है? intermediate
  • A गहरी और कठोर धार्मिक आस्था
  • B हल्का हास्य
  • C क्रोध
  • D शोक
Show answer
Answer: हल्का हास्य
Why:

वाहन।

Q18 साँप से भागते बच्चों का गिरना-पड़ना और घायल होना किस बात की ओर इशारा करता है? intermediate
  • A शरारत कभी-कभी भारी पड़ती है
  • B बच्चे खेल में हमेशा जीतते और ख़ुश रहते हैं
  • C साँप बहुत ज़हरीला था
  • D गाँव की सड़कें ख़राब थीं
Show answer
Answer: शरारत कभी-कभी भारी पड़ती है
Why:

भगदड़।

Q19 डरा हुआ भोलानाथ बाबू जी की पुकार अनसुनी करके कहाँ गया? beginner
  • A गुरु जी के पास
  • B बैजू के घर
  • C बाग़ में
  • D मइयाँ की गोद में
Show answer
Answer: मइयाँ की गोद में
Why:

आँचल।

Q20 पिता से इतना जुड़ा भोलानाथ संकट में माँ के पास क्यों गया? advanced
  • A पिता ने उसे घर से निकाल दिया था
  • B माँ ने मिठाई दी थी
  • C माँ की गोद में सहज सुरक्षा थी
  • D पिता सो रहे थे
Show answer
Answer: माँ की गोद में सहज सुरक्षा थी
Why:

ममता।

Q21 काँपते बेटे को देखकर मइयाँ का रो पड़ना और काम छोड़ देना किस भाव को दिखाता है? intermediate
  • A अधीर ममता
  • B झुँझलाहट
  • C डर से उपजा ग़ुस्सा
  • D उदासीनता
Show answer
Answer: अधीर ममता
Why:

अधीर।

Q22 ज्योनार का अर्थ है ______। beginner
  • A खेत
  • B भोज
  • C बाज़ार
  • D मेला
Show answer
Answer: भोज
Why:

दावत।

Q23 ओहार का अर्थ है ______। intermediate
  • A दूल्हे की पगड़ी
  • B शादी का बाजा
  • C घोड़े की लगाम
  • D पालकी का पर्दा
Show answer
Answer: पालकी का पर्दा
Why:

डोली।

Q24 अभिकथन: पाठ का शीर्षक माता का अँचल सार्थक है। कारण: कहानी के चरम क्षण में बच्चा माँ के आँचल में ही शरण पाता है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

शरण।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. बच्चों के खेल की ज़्यादातर सामग्री घर-आँगन की बेकार चीज़ें थीं। II. मूसन तिवारी की शिकायत पर बैजू पकड़ा गया। III. साँप निकलने पर बच्चे बुरी तरह घायल हुए। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल I और III
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

बैजू भागा।

Important short questions (7)

बच्चों के मिठाई की दुकान वाले खेल की सामग्री का वर्णन कीजिए।

ढेले लड्डू, पत्ते पूरी-कचौरी, गीली मिट्टी जलेबी और घड़े के टुकड़े बताशे बनते। ठीकरे बाट और जस्ते के टुकड़े पैसे बनते थे।

भोलानाथ के खेलों की सामग्री आपकी खेल-सामग्री से कैसे भिन्न है?

भोलानाथ मिट्टी, ठीकरे, तिनके और टूटी चीज़ों से खेलता था, जो मुफ़्त थीं। हम बाज़ार के खिलौने, वीडियो-गेम और मोबाइल से खेलते हैं, जिन पर पैसा लगता है।

बाबू जी का बच्चों के खेल में शामिल होना आपको कैसा लगा?

यह बहुत प्यारा लगा। वे पंगत में बैठकर या फ़सल का हाल पूछकर बच्चों को हँसाते थे, जिससे पता चलता है कि वे बच्चों का मन समझते थे।

मूसन तिवारी वाले प्रसंग का अंत कैसे हुआ?

तिवारी जी पाठशाला पहुँचे, और गुरु जी के भेजे लड़कों ने भोलानाथ को पकड़ लिया। गुरु जी ने उसे सज़ा दी, फिर बाबू जी विनती करके उसे घर ले गए।

चूहे के बिल वाला खेल बच्चों पर कैसे भारी पड़ा?

बिल में पानी डालते समय उसमें से साँप निकल आया। भागते समय बच्चे गिरे, किसी का सिर फूटा, और भोलानाथ का शरीर लहूलुहान हो गया।

डरे हुए बेटे को देखकर मइयाँ ने क्या-क्या किया?

वे रो पड़ीं और काम छोड़कर डर का कारण पूछने लगीं। उसे सीने से लगाया, आँचल से पोंछकर चूमा, और घावों पर हल्दी लगवाई।

माता का अँचल के स्थान पर कोई दूसरा शीर्षक सुझाइए और कारण बताइए।

एक शीर्षक हो सकता है माँ की गोद। कारण यह कि पूरी कहानी इसी क्षण पर पहुँचती है, जब डरा हुआ बच्चा पिता को छोड़कर माँ की गोद में शरण लेता है।

Long answer questions (3)

भोलानाथ पिता से अधिक जुड़ा था, फिर भी संकट में वह माँ की शरण में गया। आपकी समझ से इसका क्या कारण हो सकता है?

भोलानाथ दिन भर पिता के साथ रहता था। वे उसके साथ पूजा करते, घूमते, खेलते और खाना खिलाते थे। फिर भी साँप से डरकर वह पिता की पुकार अनसुनी करके माँ के पास गया। इसका पहला कारण है माँ की सहज कोमलता। बच्चा जानता है कि माँ की गोद सबसे सुरक्षित जगह है। दूसरा कारण है माँ की ममता। मइयाँ उसे देखकर रो पड़ीं, सीने से लगाया और घावों पर हल्दी लगाई। तीसरा कारण यह कि पिता खेल के साथी थे, पर दर्द और डर में बच्चे को सांत्वना चाहिए थी। वह सांत्वना माँ ही दे सकती थीं।

पाठ में लगभग सौ साल पुराने, यानी तीस के दशक वाले गाँव का चित्र है। आज के गाँवों में आपको क्या बदलाव दिखते हैं?

पाठ के गाँव में बच्चे मिट्टी, ठीकरे और टूटी चीज़ों से सामूहिक खेल खेलते थे। गली, चबूतरा और बाग़ ही उनका खेल का मैदान था। आज गाँवों में भी मोबाइल और टीवी पहुँच गए हैं, इसलिए बच्चे बाहर कम और घर में ज़्यादा खेलते हैं। पहले लोग पैदल या बैलगाड़ी से मेले जाते थे, आज पक्की सड़कें, बसें और मोटरसाइकिलें हैं। कुएँ की जगह नल और हैंडपंप आ गए हैं, और खेती में ट्रैक्टर चलते हैं। पर कुछ चीज़ें घटी भी हैं, जैसे सामूहिक खेल, लोक-गीत और पड़ोसियों से मेल-जोल। सुविधाएँ बढ़ी हैं, पर सादगी कुछ कम हुई है।

पाठ में माता-पिता का जो वात्सल्य दिखाया गया है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।

पाठ में माता-पिता, दोनों का वात्सल्य बहुत सुंदर ढंग से दिखाया गया है। बाबू जी का प्यार साथ और खेल का है। वे बच्चे को पूजा पर बिठाते, कंधे पर गंगा ले जाते, कुश्ती में जान-बूझकर हारते और उसके खेलों में भी शामिल होते हैं। मार पड़ने पर वे दौड़कर पाठशाला पहुँचते हैं। मइयाँ का प्यार देखभाल का है। वे बच्चे को भरपूर खिलाती हैं, तेल-काजल लगाकर सजाती हैं, और डर के समय उसे आँचल में छिपाकर रो पड़ती हैं। दोनों का प्यार अलग रंग का है, पर दोनों में बच्चे की भलाई की चिंता है। यही सच्चा वात्सल्य है।

Flashcards (17)

बच्चों का नाटक-घर कहाँ बनता?
चबूतरे के कोने में।
मिठाई की दुकान का शामियाना किससे बनता?
सरकंडे और काग़ज़ से।
मिट्टी की कौन-सी मिठाई बनती?
जलेबी।
बच्चों के पैसे किससे बनते?
जस्ते के टुकड़ों से।
घरौंदे के किवाड़ किससे बनते?
माचिस की डिबियों से।
भोज में चीनी किससे बनती?
बालू से।
पंगत में आकर कौन बैठ जाता?
बाबू जी।
बरात की पालकी किससे बनती?
टूटी चूहेदानी से।
खेती के खेल में बीज क्या बनते?
कंकड़।
बूढ़े दूल्हे ने बच्चों के साथ क्या किया?
दौड़ाकर ढेले मारे।
आँधी के बाद बच्चे कहाँ जाते?
आम के बाग़ में।
मूसन तिवारी को किसने चिढ़ाया?
बैजू ने।
गुरु जी ने किसे पकड़ा?
भोलानाथ को।
चूहे के बिल से क्या निकला?
साँप।
डरकर भोलानाथ किसके पास गया?
मइयाँ के पास।
घावों पर क्या लगाया गया?
पिसी हल्दी।
आँचल को लेखक ने क्या कहा?
प्रेम और शांति का शामियाना।

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  • शब्द और अर्थ
  • खेल की चीज़: असली रूप क्या?
  • सही या भ्रम
  • कहानी का क्रम (दूसरा भाग)
  • झटपट उत्तर

Class 10 Hindi Chapter 13 — frequently asked questions

माता का अँचल किस रचना का अंश है, और उसकी क्या विशेषता है?

यह शिवपूजन सहाय के उपन्यास देहाती दुनिया का अंश है। इसे हिंदी के शुरुआती आंचलिक उपन्यासों में गिना जाता है, जिसमें गाँव की बोली और जीवन सजीव है।

बच्चे का नाम भोलानाथ कैसे पड़ा?

पूजा के समय पिता उसके माथे पर भभूत का त्रिपुंड लगाते थे। लंबी जटाओं के साथ वह छोटा बम-भोला लगता, इसलिए पिता उसे भोलानाथ कहने लगे।

बाबू जी की धार्मिक दिनचर्या का वर्णन कीजिए।

वे तड़के नहाकर पूजा करते, रामायण पढ़ते और बही में राम-नाम लिखते। फिर राम-नाम की पर्चियाँ आटे की गोलियों में लपेटकर गंगा की मछलियों को खिलाते।

बच्चों के मिठाई की दुकान वाले खेल की सामग्री का वर्णन कीजिए।

ढेले लड्डू, पत्ते पूरी-कचौरी, गीली मिट्टी जलेबी और घड़े के टुकड़े बताशे बनते। ठीकरे बाट और जस्ते के टुकड़े पैसे बनते थे।

भोलानाथ के खेलों की सामग्री आपकी खेल-सामग्री से कैसे भिन्न है?

भोलानाथ मिट्टी, ठीकरे, तिनके और टूटी चीज़ों से खेलता था, जो मुफ़्त थीं। हम बाज़ार के खिलौने, वीडियो-गेम और मोबाइल से खेलते हैं, जिन पर पैसा लगता है।

बाबू जी का बच्चों के खेल में शामिल होना आपको कैसा लगा?

यह बहुत प्यारा लगा। वे पंगत में बैठकर या फ़सल का हाल पूछकर बच्चों को हँसाते थे, जिससे पता चलता है कि वे बच्चों का मन समझते थे।

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