Class 10 Hindi Chapter 5: यह दंतुरित मुसकान और फसल

यह दंतुरित मुसकान और फसल is Chapter 5 of NCERT / CBSE Class 10 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
  • 2 topics
  • 50 MCQs
  • 14 short answers
  • 6 long answers
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  • Hindi

नागार्जुन और यह दंतुरित मुसकान

इस कविता में कवि एक नन्हे बच्चे की नए दाँतों वाली मुसकान देखकर मुग्ध हो जाता है। उसे लगता है कि यह मुसकान पत्थर जैसे कठोर मन को भी पिघला सकती है। लंबे प्रवास से लौटा कवि माँ के माध्यम से ही बच्चे से परिचय पाता है।

What you will be able to do

  • नागार्जुन के जीवन, यात्राओं, रचनाओं और जनकवि वाले स्वभाव के बारे में बता सकेंगे।
  • दंतुरित मुसकान का अर्थ समझकर बता सकेंगे कि यह मुसकान कवि के मन को कैसे बदल देती है।
  • कविता में आए जलजात, पाषाण और शेफालिका जैसे बिंबों का भाव स्पष्ट कर सकेंगे।
  • कवि, बच्चे और माँ के आपसी संबंध को समझकर माँ की माध्यम वाली भूमिका समझा सकेंगे।
  • कविता की भाषा, बिंब-योजना, अलंकार और बोलचाल वाली लय की पहचान कर सकेंगे।

Key points

  • नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था; उनका जन्म सन् 1911 में बिहार के दरभंगा ज़िले के एक गाँव सतलखा में हुआ।

  • संस्कृत पाठशाला के बाद वे पढ़ने बनारस और कलकत्ता गए; श्रीलंका जाकर उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली।

  • घुमक्कड़ और अक्खड़ स्वभाव वाले नागार्जुन ने पूरे भारत की कई यात्राएँ कीं; सन् 1998 में उनका देहांत हुआ।

  • वे हिंदी और मैथिली, दोनों में लिखते थे; मैथिली में उनका नाम यात्री है, और व्यंग्य के कारण उन्हें आधुनिक कबीर कहा गया।

  • दंतुरित मुसकान यानी ऐसी मुसकान, जिसमें बच्चे के नए-नए निकले दाँत झलकते हों।

  • कवि को लगता है कि यह मुसकान मरे हुए में भी जान डाल दे और कठोर पत्थर को पिघलाकर पानी बना दे।

  • धूल से सना बच्चा कवि की झोंपड़ी में कमल जैसा खिला लगता है; उसके छूने से बाँस या बबूल से भी फूल झरने लगते हैं।

  • बच्चा कवि को पहचानता नहीं, इसलिए एकटक देखता है; कवि सोचता है कि कहीं वह थक न गया हो।

  • लंबे समय तक बाहर रहा कवि ख़ुद को पराया मानता है; माँ ही उसके और बच्चे के बीच माध्यम बनती है।

Full explanation

नागार्जुन: घुमक्कड़ जनकवि

नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। उनका जन्म सन् 1911 में सतलखा नाम के गाँव में हुआ, जो बिहार के दरभंगा ज़िले में है। शुरुआती पढ़ाई एक संस्कृत पाठशाला में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे बनारस और कलकत्ता गए। सन् 1936 में वे श्रीलंका पहुँचे और वहीं बौद्ध धर्म में दीक्षा ली। लगभग दो साल वहाँ रहकर सन् 1938 में वे भारत लौटे।

नागार्जुन का स्वभाव घुमक्कड़ और अक्खड़ था। उन्हें एक जगह टिककर रहना पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने कई बार पूरे देश की यात्राएँ कीं। वे राजनीति में भी सक्रिय रहे और इसी कारण कई बार जेल गए। सन् 1998 में उनका देहांत हुआ। उनका जीवन ख़ुद एक लंबी यात्रा जैसा था, और यही यात्री वाला भाव इस कविता में भी झलकता है।

वे हिंदी और मैथिली, दोनों भाषाओं में बराबर लिखते रहे। उन्होंने बांग्ला और संस्कृत में भी कविताएँ लिखीं। अपनी मातृभाषा मैथिली में वे यात्री नाम से प्रसिद्ध हैं। मैथिली कविता के लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला। इसके अलावा दिल्ली की हिंदी अकादमी ने उन्हें शिखर सम्मान दिया। उत्तर प्रदेश ने भारत भारती से और बिहार ने राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार से उनका सम्मान किया।

नागार्जुन की रचनाएँ और उनका स्वर

युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, हज़ार-हज़ार बाँहों वाली और तुमने कहा था उनके चर्चित कविता-संग्रह हैं। पुरानी जूतियों का कोरस और मैं मिलटरी का बूढ़ा घोड़ा भी उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उन्होंने उपन्यास और गद्य की दूसरी विधाओं में भी ख़ूब लिखा। उनका पूरा साहित्य सात खंडों वाली नागार्जुन रचनावली में छपा है।

नागार्जुन का मन हमेशा आम लोगों के जीवन से जुड़ा रहा। भ्रष्टाचार, स्वार्थ भरी राजनीति और समाज की गिरती हालत पर वे खुलकर लिखते थे। व्यंग्य में वे इतने माहिर थे कि लोग उन्हें आधुनिक कबीर कहने लगे। जैसे कबीर ने अपने समय के पाखंड पर चोट की, वैसे ही नागार्जुन ने अपने समय की बुराइयों पर तीखे व्यंग्य किए।

उनकी कविता गाँव की चौपाल में भी उतनी ही पसंद की गई, जितनी विद्वानों की सभा में। छायावाद के बाद के दौर में ऐसा कोई दूसरा कवि नहीं दिखता, जो दोनों जगह इतना लोकप्रिय हो। इसीलिए उन्हें सच्चे अर्थों में जनकवि कहा जाता है। उन्होंने छंद वाली कविताएँ भी लिखीं और मुक्त छंद वाली भी। पर यह दंतुरित मुसकान में उनका व्यंग्य वाला रूप नहीं, बल्कि एक कोमल, भावुक और स्नेह से भरा रूप दिखता है।

दंतुरित मुसकान: नन्हे दाँतों का जादू

दंतुरित शब्द दाँत से बना है। जब छोटे बच्चे के पहले-पहले दाँत निकलते हैं और वह हँसता है, तो उसके नन्हे दाँत झलकते हैं। ऐसी मुसकान को ही दंतुरित मुसकान कहा गया है। यह मुसकान भोलेपन, ताज़गी और नए जीवन से भरी होती है।

कवि जब इस मुसकान को देखता है, तो उसका मन जैसे खिल उठता है। वह कहता है कि यह मुसकान इतनी जीवंत है कि मरे हुए व्यक्ति में भी प्राण फूँक सकती है। यह बात अतिशयोक्ति है, यानी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है। पर इसके पीछे एक सच्चा भाव है: बच्चे की हँसी में इतनी ताक़त होती है कि वह उदास और थके हुए मन में भी जीवन भर देती है।

कवि आगे बच्चे के शरीर का चित्र भी खींचता है। बच्चा धूल में खेलकर आया है, इसलिए उसके अंग धूल-मिट्टी से सने हैं। धूलि-धूसर गात का यही अर्थ है। पर यह धूल उसकी सुंदरता कम नहीं करती, बल्कि उसे और स्वाभाविक बना देती है। गाँव का बच्चा, मिट्टी में खेलता हुआ, अपनी सहज सुंदरता में और प्यारा लगता है।

झोंपड़ी में खिलता कमल और पिघलता पत्थर

कवि को लगता है कि जैसे कमल के फूल तालाब छोड़कर उसकी झोंपड़ी में खिल रहे हों। जलजात का अर्थ है कमल, यानी जल में जन्मा फूल। कमल तालाब में खिलता है, झोंपड़ी में नहीं। पर बच्चे की सुंदरता ऐसी है कि कवि को अपनी साधारण झोंपड़ी में भी कमल खिले हुए दिखाई देते हैं। यानी बच्चे की मौजूदगी से ग़रीब घर भी सुंदर और पवित्र हो उठता है।

इसके बाद कवि एक और कल्पना करता है। वह कहता है कि बच्चे का स्पर्श पाकर कठोर पत्थर भी पिघलकर पानी बन गया होगा। पाषाण का अर्थ है पत्थर। यहाँ पत्थर किसी कठोर हृदय का प्रतीक है। शायद कवि अपने ही मन की बात कर रहा है। लंबी यात्राओं, संघर्षों और जीवन की कठिनाइयों ने उसका मन कठोर बना दिया होगा। पर बच्चे के प्यार भरे स्पर्श से वह कठोरता घुल जाती है।

यह बिंब बहुत गहरा है। पत्थर का पिघलना असंभव है, पर प्रेम और कोमलता असंभव को भी संभव कर देते हैं। बड़े लोग अक्सर अपनी भावनाएँ छिपा लेते हैं और भीतर से सख़्त हो जाते हैं। एक बच्चे की निश्छल हँसी उस सख़्ती को तोड़ देती है और भीतर छिपी कोमलता बाहर ले आती है।

बाँस और बबूल से झरते शेफालिका के फूल

कवि की अगली कल्पना और भी सुंदर है। वह कहता है कि बच्चे का स्पर्श पाकर शेफालिका के फूल झरने लगे। शेफालिका को हरसिंगार भी कहते हैं, जिसके सफ़ेद, सुगंधित फूल अपने आप झरते हैं। फिर कवि चौंककर पूछता है कि जिसे बच्चे ने छुआ, वह बाँस था या बबूल?

बाँस सूखा और कड़ा होता है, और बबूल में काँटे ही काँटे होते हैं। इनमें कोमल, सुगंधित फूल नहीं खिलते। यहाँ बाँस और बबूल फिर से कवि के शुष्क और कँटीले मन के प्रतीक हैं। बच्चे के स्पर्श से उस नीरस मन में भी फूल झरने लगे। यानी कवि के मन में प्रेम, ममता और आनंद उमड़ पड़ा।

ध्यान दीजिए कि कवि बार-बार एक ही बात को नए-नए चित्रों से कहता है। मृतक में जान, झोंपड़ी में कमल, पिघलता पत्थर और बबूल से झरते फूल, ये सब एक ही भाव के अलग-अलग रूप हैं। यह भाव है: बच्चे की मुसकान कठोर, सूखे और निर्जीव को भी कोमल, हरा और जीवंत बना देती है। कविता की ताक़त इन्हीं बिंबों में छिपी है, जो पढ़ने वाले की आँखों के सामने दृश्य खड़ा कर देते हैं।

अनजान अतिथि और एकटक देखता बच्चा

कविता का दूसरा हिस्सा कवि और बच्चे की पहली मुलाक़ात का है। बच्चा कवि को पहचानता नहीं, क्योंकि कवि लंबे समय से घर से बाहर था। इसलिए बच्चा उसे बिना पलक झपकाए लगातार देखता रहता है। अनिमेष का यही अर्थ है। बच्चा जैसे समझने की कोशिश कर रहा है कि यह नया व्यक्ति कौन है।

कवि बच्चे से प्यार भरे सवाल पूछता है। वह पूछता है कि क्या तुम मुझे पहचान नहीं पाए? क्या तुम देखते-देखते थक गए हो? फिर वह कहता है कि अगर तुम थक गए हो, तो मैं अपनी नज़र हटा लूँ। यह कवि की संवेदनशीलता है। वह बच्चे पर अपना प्यार थोपना नहीं चाहता। वह बच्चे की सुविधा का ध्यान रखता है, ताकि बच्चा असहज न हो।

कवि को इस बात का दुख भी नहीं है कि बच्चा उसे पहचान नहीं पाया। वह ख़ुद को समझाता है कि पहली बार में जान-पहचान न हो सकी, तो क्या हुआ। यानी कवि धैर्य रखता है और मानता है कि परिचय धीरे-धीरे होगा। यह बात बहुत स्वाभाविक है। छोटे बच्चे अजनबियों से तुरंत घुलते-मिलते नहीं, पहले उन्हें ध्यान से परखते हैं।

माँ: कवि और बच्चे के बीच की कड़ी

कवि मानता है कि अगर बच्चे की माँ बीच में माध्यम न बनी होती, तो वह यह मुसकान न देख पाता और न जान पाता। माँ ने ही बच्चे को कवि से मिलवाया और दोनों के बीच प्यार का पुल बनाया। इसलिए कवि बच्चे को धन्य कहता है, और उसकी माँ को भी धन्य कहता है।

इसके बाद कवि अपने बारे में एक सच्ची और थोड़ी दुखी बात कहता है। वह कहता है कि मैं तो हमेशा बाहर रहने वाला प्रवासी हूँ, पराया हूँ, कोई दूसरा हूँ। इतर और अन्य, दोनों का अर्थ है दूसरा या पराया। इस अतिथि से बच्चे का क्या संपर्क रहा होगा? यानी कवि मानता है कि वह इस घर में एक मेहमान जैसा है, जिससे बच्चे का कोई रिश्ता अभी बना ही नहीं।

दूसरी ओर माँ ने बच्चे को हर दिन अपनी उँगलियों से मधुपर्क चटाया है। मधुपर्क पूजा और सत्कार में दिया जाने वाला मीठा मिश्रण है। यहाँ इसका अर्थ है माँ का वह मीठा, पोषण देने वाला प्यार, जो बच्चे को हर रोज़ मिलता है। इसलिए बच्चे का गहरा रिश्ता माँ से है, कवि से नहीं। कवि इसे बिना शिकायत, सहज भाव से स्वीकार करता है।

कनखी, आँखें चार और छविमान मुसकान

कविता के अंत में एक प्यारा दृश्य है। बच्चा कवि को सीधे नहीं, बल्कि तिरछी नज़र से, यानी कनखियों से देखता है। फिर जब दोनों की नज़रें मिलती हैं, यानी आँखें चार होती हैं, तब बच्चा मुसकरा देता है। कवि को वह मुसकान उस पल बहुत ही सुंदर लगती है। छविमान का अर्थ है सुंदर, शोभा से भरा।

इस दृश्य में बच्चे का संकोच और जिज्ञासा, दोनों हैं। वह अजनबी को देखना भी चाहता है और थोड़ा शरमाता भी है। इसलिए कनखी मारकर देखता है। और जब नज़रें मिलती हैं, तो उसका संकोच टूटता है और मुसकान खिल उठती है। यहीं से कवि और बच्चे के बीच एक नया रिश्ता शुरू होता है।

कविता की भाषा बोलचाल के बहुत क़रीब है, फिर भी उसमें जलजात, पाषाण, अनिमेष और मधुपर्क जैसे तत्सम शब्द हैं। मृतक में जान डालना और पत्थर का पिघलना अतिशयोक्ति के उदाहरण हैं। धूलि-धूसर में अनुप्रास है। कविता में दृश्य-बिंब भरपूर हैं, जैसे झोंपड़ी में खिला कमल और झरते फूल। कवि बच्चे से सीधे बात करता है, इसलिए कविता में संवाद जैसी आत्मीयता भी है।

Concepts and terms

दंतुरित मुसकान

नन्हे बच्चे की वह मुसकान, जिसमें उसके नए निकले दाँत दिखते हों। यह भोलेपन और नए जीवन का प्रतीक है।

बिंब

शब्दों से बना ऐसा चित्र, जो आँखों के सामने कोई दृश्य खड़ा कर दे। झोंपड़ी में खिलता कमल एक सुंदर दृश्य-बिंब है।

जनकवि

ऐसा कवि, जो आम लोगों के जीवन, दुख और संघर्ष को उनकी अपनी भाषा में लिखे। नागार्जुन को जनकवि कहा जाता है।

प्रवासी

जो लंबे समय तक अपने घर से दूर रहे। कविता में कवि ख़ुद को चिर प्रवासी कहता है, यानी हमेशा बाहर रहने वाला।

माध्यम

दो लोगों को जोड़ने वाली कड़ी। कविता में माँ ही वह कड़ी है, जिसके कारण कवि बच्चे की मुसकान देख पाता है।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

पहली मुलाक़ात की डायरी

Safety:

बच्चे को ज़बरदस्ती गोद में मत लीजिए; उसके माता-पिता की अनुमति और उपस्थिति ज़रूरी है।

What You Notice:

आप देखेंगे कि बच्चे अजनबी को पहले परखते हैं, फिर धीरे-धीरे खुलते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कविता में होता है।

Did you know

नागार्जुन ने बौद्ध धर्म की दीक्षा श्रीलंका में ली थी। नागार्जुन नाम भी एक प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक के नाम से जुड़ा है, जिसे उन्होंने अपना लिया।

मधुपर्क दही, घी, शहद, जल और दूध को मिलाकर बनता है, जिसे पूजा और अतिथि-सत्कार में दिया जाता है। आम बोलचाल में इसे पंचामृत भी कहते हैं।

शेफालिका को हरसिंगार या पारिजात भी कहते हैं। इसके सफ़ेद फूल, नारंगी डंडी वाले, रात में खिलते हैं और सुबह ज़मीन पर बिछ जाते हैं।

Memory tricks

मुसकान के तीन चमत्कार: जा-पि-फू — जान डाल दे, पत्थर पिघला दे, फूल झरा दे। जापिफू, मुसकान का जादू।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 नागार्जुन का जन्म किस राज्य में हुआ? beginner
  • A उत्तर प्रदेश
  • B बंगाल
  • C बिहार
  • D मध्य प्रदेश
Show answer
Answer: बिहार
Why:

दरभंगा ज़िला।

Q2 मैथिली भाषा में नागार्जुन किस उपनाम से जाने जाते हैं? intermediate
  • A निराला
  • B बच्चन
  • C दिनकर
  • D यात्री
Show answer
Answer: यात्री
Why:

घुमक्कड़ी।

Q3 नागार्जुन को आधुनिक कबीर कहे जाने का मुख्य आधार क्या है? intermediate
  • A तीखा व्यंग्य
  • B भक्ति के पद और भजन
  • C दोहे लिखना
  • D जुलाहे का काम
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Answer: तीखा व्यंग्य
Why:

समाज पर चोट।

Q4 नागार्जुन को जनकवि कहना क्यों उचित है? intermediate
  • A वे केवल राजाओं और दरबारों के लिए लिखते थे
  • B उनकी कविता आम लोगों में लोकप्रिय रही
  • C वे केवल अंग्रेज़ी में लिखते थे
  • D उन्होंने कविता छापी नहीं
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Answer: उनकी कविता आम लोगों में लोकप्रिय रही
Why:

चौपाल से सभा तक।

Q5 दंतुरित मुसकान से कवि का आशय किस तरह की हँसी से है? beginner
  • A बूढ़े व्यक्ति की ठहाके वाली हँसी
  • B व्यंग्य भरी हँसी
  • C नन्हे दाँतों वाली हँसी
  • D नक़ली हँसी
Show answer
Answer: नन्हे दाँतों वाली हँसी
Why:

नए दाँत।

Q6 मृतक में भी जान डालने वाली बात में कौन-सा अलंकार प्रमुख है? intermediate
  • A यमक
  • B श्लेष
  • C दृष्टांत अलंकार
  • D अतिशयोक्ति
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Answer: अतिशयोक्ति
Why:

बढ़ा-चढ़ाकर कहना।

Q7 धूल से सने बच्चे का चित्र कवि क्यों खींचता है? intermediate
  • A बच्चे की गंदगी पर नाराज़गी जताने को
  • B उसकी सहज, स्वाभाविक सुंदरता दिखाने को
  • C माँ की लापरवाही बताने को
  • D गाँव की ग़रीबी पर व्यंग्य करने को
Show answer
Answer: उसकी सहज, स्वाभाविक सुंदरता दिखाने को
Why:

मिट्टी में खेलता बच्चा।

Q8 तालाब छोड़कर झोंपड़ी में कमल खिलने की कल्पना से कवि क्या कहना चाहता है? intermediate
  • A बच्चे से साधारण घर भी सुंदर हो गया
  • B झोंपड़ी के पास नया तालाब बना है
  • C कवि ने घर में फूल उगाए हैं
  • D बारिश से झोंपड़ी भर गई
Show answer
Answer: बच्चे से साधारण घर भी सुंदर हो गया
Why:

जलजात।

Q9 कठिन पाषाण का पिघलकर जल बनना किस बदलाव का संकेत है? advanced
  • A गर्मी से चट्टानों का टूटकर बिखरना
  • B नदी का रास्ता बदलना
  • C बर्फ़ का गलना
  • D कठोर मन का कोमल होना
Show answer
Answer: कठोर मन का कोमल होना
Why:

प्रतीक।

Q10 बाँस और बबूल से फूल झरने में बाँस-बबूल किसके प्रतीक हैं? advanced
  • A घने और हरे-भरे जंगल के
  • B खेत की फ़सल के
  • C शुष्क, नीरस मन के
  • D नदी किनारे के
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Answer: शुष्क, नीरस मन के
Why:

सूखा और कँटीला।

Q11 शेफालिका का दूसरा नाम क्या है? intermediate
  • A गुलमोहर
  • B हरसिंगार
  • C अमलतास
  • D रातरानी
Show answer
Answer: हरसिंगार
Why:

पारिजात।

Q12 बच्चा कवि को अनिमेष क्यों देख रहा है? beginner
  • A वह कवि को पहचान नहीं पा रहा
  • B कवि ने बच्चे को बहुत ज़ोर से डाँटा था
  • C बच्चे को नींद आ रही थी
  • D बच्चा खिलौना माँग रहा था
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Answer: वह कवि को पहचान नहीं पा रहा
Why:

नया चेहरा।

Q13 आँख फेर लेने की बात पूछने में कवि का कौन-सा गुण दिखता है? intermediate
  • A बच्चे पर गहरा ग़ुस्सा और नाराज़गी
  • B जल्दबाज़ी
  • C बच्चे की सुविधा का ध्यान
  • D घमंड
Show answer
Answer: बच्चे की सुविधा का ध्यान
Why:

संवेदनशीलता।

Q14 पहली बार परिचय न हो पाने पर कवि की प्रतिक्रिया कैसी है? intermediate
  • A बहुत दुखी और नाराज़ होने वाली
  • B ग़ुस्से भरी
  • C उदासीन
  • D धैर्य भरी
Show answer
Answer: धैर्य भरी
Why:

तो क्या हुआ।

Q15 कवि के अनुसार उसे बच्चे की मुसकान देखने का अवसर किसके कारण मिला? beginner
  • A पड़ोसी के
  • B माँ के
  • C पिता के
  • D मित्र के
Show answer
Answer: माँ के
Why:

माध्यम।

Q16 कवि बच्चे और उसकी माँ, दोनों को धन्य क्यों कहता है? intermediate
  • A दोनों ने उसे यह सुख दिया
  • B दोनों ने उसके लिए बहुत अच्छा भोजन बनाया
  • C दोनों बहुत अमीर थे
  • D दोनों गा रहे थे
Show answer
Answer: दोनों ने उसे यह सुख दिया
Why:

मुसकान का सुख।

Q17 चिर प्रवासी कहकर कवि अपने बारे में क्या स्वीकार करता है? intermediate
  • A वह इसी गाँव में जन्मा और कभी कहीं नहीं गया
  • B वह विदेशी नागरिक है
  • C वह लंबे समय से घर से दूर रहा
  • D वह बीमार है
Show answer
Answer: वह लंबे समय से घर से दूर रहा
Why:

इतर, अन्य।

Q18 मधुपर्क कराती उँगलियाँ कविता में किसका संकेत हैं? advanced
  • A मंदिर में होने वाली पूजा का
  • B दवा पिलाने का
  • C रसोई के काम का
  • D माँ के मीठे, पोषक प्यार का
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Answer: माँ के मीठे, पोषक प्यार का
Why:

पंचामृत।

Q19 बच्चे का कनखी मारकर देखना उसके किस भाव को दिखाता है? intermediate
  • A गहरा ग़ुस्सा और खीज
  • B संकोच और जिज्ञासा
  • C डर और रोना
  • D थकान
Show answer
Answer: संकोच और जिज्ञासा
Why:

तिरछी नज़र।

Q20 कविता में आँखें चार होने का अर्थ है ______। beginner
  • A नज़रें मिलना
  • B चश्मा लगाना
  • C आँखें बंद करना
  • D रो पड़ना
Show answer
Answer: नज़रें मिलना
Why:

मुहावरा।

Q21 अनिमेष का अर्थ है ______। beginner
  • A आँखें कसकर मूँदकर
  • B मुँह दूसरी ओर फेरकर
  • C रोते हुए
  • D बिना पलक झपकाए
Show answer
Answer: बिना पलक झपकाए
Why:

एकटक।

Q22 धूलि-धूसर में कौन-सा अलंकार है? intermediate
  • A अनुप्रास
  • B उत्प्रेक्षा
  • C दृष्टांत अलंकार
  • D श्लेष
Show answer
Answer: अनुप्रास
Why:

ध की आवृत्ति।

Q23 यह दंतुरित मुसकान में नागार्जुन का कौन-सा रूप प्रमुख है? intermediate
  • A तीखा और कटु व्यंग्यकार वाला
  • B कोमल, स्नेही
  • C राजनीतिक भाषण
  • D हास्य
Show answer
Answer: कोमल, स्नेही
Why:

वात्सल्य।

Q24 अभिकथन: कवि ख़ुद को बच्चे के लिए अतिथि मानता है। कारण: वह लंबे समय से घर से बाहर रहा, इसलिए बच्चे से उसका संपर्क नहीं बना। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

चिर प्रवासी।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। II. बच्चा कवि को देखते ही पहचान लेता है। III. माँ कवि और बच्चे के बीच माध्यम बनती है। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

बच्चा पहचान नहीं पाता।

Important short questions (7)

नागार्जुन के जीवन की यात्राओं के बारे में संक्षेप में बताइए।

संस्कृत पाठशाला के बाद नागार्जुन पढ़ने के लिए बनारस और कलकत्ता गए। सन् 1936 में वे श्रीलंका पहुँचे और बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए। लौटकर उन्होंने घुमक्कड़ स्वभाव के कारण कई बार पूरे भारत की यात्रा की।

बच्चे की मुसकान देखकर कवि के मन में कौन-सा बदलाव आता है?

कवि का मन, जो लंबे संघर्षों से कठोर और रूखा हो चुका था, कोमल हो उठता है। उसे लगता है जैसे पत्थर पिघल गया हो और बबूल से फूल झरने लगे हों। उसके मन में प्यार और आनंद उमड़ आता है।

झोंपड़ी में खिलते जलजात की कल्पना का क्या भाव है?

कमल तालाब में खिलता है, झोंपड़ी में नहीं। पर बच्चे की सुंदरता से कवि को अपनी साधारण झोंपड़ी भी कमलों से भरी लगती है। यानी बच्चे से ग़रीब घर भी सुंदर हो उठता है।

कवि बच्चे से आँख फेर लेने की बात क्यों पूछता है?

बच्चा अनजान कवि को एकटक देखते-देखते शायद थक गया है। कवि उसकी सुविधा का ध्यान रखता है और उस पर अपना प्यार थोपना नहीं चाहता। इसलिए वह पूछता है कि क्या मैं नज़र हटा लूँ।

कवि ने अपने लिए इतर और अन्य जैसे शब्द क्यों चुने हैं?

कवि लंबे समय से घर से बाहर रहा है, इसलिए बच्चे के लिए वह अजनबी है। इतर और अन्य का अर्थ है दूसरा या पराया। इन शब्दों से कवि स्वीकार करता है कि वह इस घर में मेहमान जैसा है।

कविता में माँ की भूमिका क्या है?

माँ कवि और बच्चे के बीच प्यार का पुल बनती है। उसके कारण ही कवि बच्चे की मुसकान देख और जान पाता है। माँ ही बच्चे को रोज़ अपनी उँगलियों से मीठा प्यार देती है।

कनखी मारने और आँखें चार होने वाले दृश्य को अपने शब्दों में लिखिए।

बच्चा संकोच के कारण कवि को सीधे नहीं, तिरछी नज़र से देखता है। फिर जब दोनों की नज़रें मिलती हैं, तो वह मुसकरा देता है। उस पल वह मुसकान कवि को बहुत सुंदर लगती है।

Long answer questions (3)

यह दंतुरित मुसकान में कवि ने बच्चे की मुसकान के प्रभाव को कई चित्रों से दिखाया है। इन चित्रों का भाव समझाइए।

कवि बच्चे की मुसकान का असर एक के बाद एक कई चित्रों में दिखाता है। पहले वह कहता है कि यह मुसकान मरे हुए में भी जान डाल दे। यानी यह थके और उदास मन में भी जीवन भर देती है। फिर वह कहता है कि उसकी झोंपड़ी में तालाब छोड़कर कमल खिल रहे हैं। बच्चे की सुंदरता से साधारण घर भी सुंदर हो गया है। इसके बाद वह कल्पना करता है कि बच्चे के स्पर्श से कठोर पत्थर पिघलकर पानी बन गया। यह कठोर मन के कोमल होने का संकेत है। अंत में वह कहता है कि बाँस या बबूल से भी शेफालिका के फूल झरने लगे। सूखे और कँटीले मन में भी प्यार के फूल खिल उठे। ये सब चित्र एक ही भाव को दिखाते हैं: बच्चे की निश्छल मुसकान कठोर, नीरस और निर्जीव को भी जीवंत बना देती है।

नागार्जुन के जीवन और साहित्य की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। उनका जन्म सन् 1911 में सतलखा नाम के गाँव में हुआ, जो दरभंगा ज़िले में है। बनारस और कलकत्ता में पढ़ने के बाद वे श्रीलंका गए और बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। घुमक्कड़ और अक्खड़ स्वभाव के कारण उन्होंने बार-बार पूरे देश की यात्रा की और राजनीतिक सक्रियता के कारण जेल भी गए। सन् 1998 में उनका देहांत हुआ। वे हिंदी और मैथिली में बराबर लिखते थे और मैथिली में यात्री नाम से प्रसिद्ध हैं। युगधारा, सतरंगे पंखों वाली और तुमने कहा था उनकी चर्चित कृतियाँ हैं। उनका साहित्य सात खंडों की रचनावली में है। उनकी कविता आम लोगों के जीवन से गहराई से जुड़ी है। भ्रष्टाचार और स्वार्थी राजनीति पर तीखे व्यंग्य के कारण उन्हें आधुनिक कबीर कहा गया। गाँव की चौपाल और विद्वानों की सभा, दोनों में लोकप्रिय होने के कारण वे सच्चे जनकवि हैं।

किसी छोटे बच्चे की हँसी ने कभी आपका उदास मन बदल दिया हो, ऐसे किसी अनुभव को कविता के भाव से जोड़कर लिखिए।

पिछले साल परीक्षा के परिणाम आए, तो मेरे अंक उम्मीद से कम थे। घर लौटकर मेरा किसी से बात करने का मन नहीं था, बस अपने कमरे में चुप बैठे रहने का मन था। तभी मेरी मौसी अपने आठ-नौ महीने के बेटे को लेकर आईं। वह मुझे पहली बार देख रहा था, इसलिए कुछ देर एकटक देखता रहा। फिर अचानक उसने अपने दो नन्हे दाँत दिखाते हुए हँस दिया। उस पल मेरा सारा दुख जैसे पिघल गया। मेरे चेहरे पर भी हँसी आ गई, और अगला पूरा घंटा उसके साथ खेलते हुए बीता। तब मुझे यह दंतुरित मुसकान कविता का भाव सच में समझ आया। कवि का कठोर मन जैसे बच्चे की हँसी से कोमल हुआ, वैसे ही मेरा उदास मन भी हल्का हो गया। बच्चे की हँसी में सच में जीवन का संदेश छिपा होता है।

Flashcards (17)

नागार्जुन का मूल नाम?
वैद्यनाथ मिश्र।
नागार्जुन का जन्म कब हुआ?
सन् 1911 में।
नागार्जुन ने बौद्ध धर्म की दीक्षा कहाँ ली?
श्रीलंका में।
नागार्जुन का देहांत कब हुआ?
सन् 1998 में।
मैथिली में नागार्जुन किस नाम से लिखते थे?
यात्री।
नागार्जुन को आधुनिक कबीर क्यों कहा गया?
व्यंग्य में माहिर होने के कारण।
नागार्जुन रचनावली कितने खंडों में है?
सात खंडों में।
नागार्जुन की दो काव्य-कृतियाँ?
युगधारा, सतरंगे पंखों वाली।
दंतुरित का अर्थ?
नए-नए दाँतों वाला।
धूलि-धूसर गात का अर्थ?
धूल से सने अंग।
जलजात का अर्थ?
कमल।
पाषाण का अर्थ?
पत्थर।
अनिमेष का अर्थ?
बिना पलक झपकाए।
इतर का अर्थ?
दूसरा, पराया।
मधुपर्क किनसे बनता है?
दही, घी, शहद, जल और दूध से।
कनखी मारना यानी?
तिरछी नज़र से देखना।
छविमान का अर्थ?
सुंदर, शोभा से भरा।

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  • शब्द और अर्थ
  • किसके बारे में?
  • सही या भ्रम
  • कविता का क्रम
  • झटपट उत्तर

फसल: प्रकृति और मनुष्य का साझा सृजन

फसल कविता बताती है कि खेत में उगी फसल किसी एक की देन नहीं है। उसमें अनगिनत नदियों का पानी, लाखों किसानों की मेहनत, तरह-तरह की मिट्टी, सूरज की किरणें और हवा, सबका योगदान है।

What you will be able to do

  • कवि के अनुसार फसल का अर्थ और उसके पीछे छिपे सभी तत्वों को पहचान सकेंगे।
  • एक के नहीं, दो के नहीं वाली शैली के ज़रिए व्यापकता और सामूहिकता का भाव समझा सकेंगे।
  • हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा के माध्यम से किसान के श्रम का महत्त्व बता सकेंगे।
  • सूरज की किरणों के रूपांतर और हवा की थिरकन वाले बिंबों का भाव स्पष्ट कर सकेंगे।
  • मिट्टी के गुण-धर्म, कृषि-संस्कृति और आज की उपभोक्ता जीवन-शैली के संबंध पर विचार कर सकेंगे।

Key points

  • कवि बताता है कि फसल में किसी एक या दो नहीं, बल्कि ढेर सारी नदियों के पानी का जादू समाया है।

  • लाखों-करोड़ों किसानों के हाथों की मेहनत और उनके स्पर्श की गरिमा भी फसल में शामिल है।

  • हज़ारों खेतों की भूरी, काली और संदली मिट्टी का गुण-धर्म फसल को पोषण देता है।

  • सूरज की किरणें पौधों में बदलकर अन्न बनती हैं; इसलिए फसल को किरणों का रूपांतर कहा गया है।

  • हवा की थिरकन भी फसल में सिमटकर बैठी है; यानी हवा ने भी फसल को बढ़ने में मदद दी है।

  • कविता का मूल संदेश है कि प्रकृति और मनुष्य, दोनों के सहयोग से ही कोई सृजन संभव होता है।

  • एक के नहीं, दो के नहीं की दोहराई गई शैली कविता में लय भी लाती है और व्यापकता भी बताती है।

  • कविता बोलचाल की भाषा में है; उसकी सहज गति और लय उसे प्रभावशाली बनाती है।

  • उपभोक्ता-संस्कृति के इस दौर में यह कविता हमें फिर से खेती, किसान और मिट्टी के क़रीब ले जाती है।

Full explanation

फसल कविता की पृष्ठभूमि

फसल शब्द सुनते ही हमारी आँखों के सामने हरे-भरे, लहलहाते खेत आ जाते हैं। पर हम कम ही सोचते हैं कि यह फसल बनी कैसे। हमारी थाली में आई रोटी या चावल के पीछे किन-किन की मेहनत छिपी है? नागार्जुन अपनी कविता फसल में इसी सवाल का जवाब खोजते हैं।

कवि का कहना है कि फसल किसी एक व्यक्ति या एक चीज़ से पैदा नहीं होती। उसमें प्रकृति के बहुत-से तत्व और करोड़ों मनुष्यों का श्रम शामिल है। इस तरह कविता एक बड़ा सच सामने रखती है: कोई भी सृजन, कोई भी निर्माण, प्रकृति और मनुष्य के सहयोग से ही संभव है। अकेले न प्रकृति फसल उगा सकती है, न अकेला मनुष्य।

यह कविता नागार्जुन के जनकवि वाले रूप से गहरे जुड़ी है। वे गाँव, खेत और किसान के जीवन को बहुत क़रीब से जानते थे। उनकी कविता में किसान कोई दूर का पात्र नहीं, बल्कि समाज की नींव है। फसल कविता उसी किसान और उसकी धरती को सम्मान देती है।

एक के नहीं, दो के नहीं: व्यापकता की शैली

कविता की शुरुआत एक ख़ास ढंग से होती है। कवि बार-बार कहता है कि यह एक का नहीं, दो का नहीं है। फिर वह बताता है कि असल में यह बहुत सारे लोगों और चीज़ों का है। यह शैली पढ़ने वाले को धीरे-धीरे एक बड़ी तस्वीर की ओर ले जाती है।

पहले कवि पानी की बात करता है। वह कहता है कि फसल में किसी एक-दो नदियों का नहीं, बल्कि ढेर सारी नदियों के पानी का जादू है। भारत की गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा जैसी अनगिनत नदियाँ खेतों को सींचती हैं। पानी के बिना बीज अंकुरित ही नहीं हो सकता। इसलिए कवि पानी को जादू कहता है, जो सूखे बीज में जान डाल देता है।

फिर कवि मनुष्य के श्रम की बात करता है। वह कहता है कि फसल में लाखों-करोड़ों हाथों के स्पर्श की गरिमा है। जुताई, बुवाई, सिंचाई, निराई, कटाई, हर काम में किसानों के हाथ लगते हैं। लाख-लाख और कोटि-कोटि जैसे शब्द बताते हैं कि यह मेहनत कितनी बड़ी और सामूहिक है।

तीसरी बार कवि मिट्टी की ओर आता है। फसल में किसी एक-दो खेतों की नहीं, बल्कि हज़ारों खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म है। इस तरह एक, दो, फिर हज़ार, लाख और कोटि जैसे शब्द एक ऊँचाई की तरह बढ़ते जाते हैं। यह दोहराव कविता में एक लय भी पैदा करता है, जो लोकगीत जैसी लगती है।

फसल क्या है? कवि का उत्तर

इसके बाद कवि सीधा सवाल पूछता है: फसल आख़िर है क्या? और फिर ख़ुद ही जवाब देता है। यह प्रश्नोत्तर शैली कविता को बहुत असरदार बनाती है। पढ़ने वाला सवाल के साथ रुकता है, सोचता है, और फिर कवि का उत्तर सुनता है।

कवि का उत्तर है कि फसल असल में अनेक नदियों के जल का जादू है। उसमें किसानों के हाथों से मिली महिमा भी है। वह भूरी, काली और संदली मिट्टी का गुण-धर्म है। वह सूरज की किरणों का बदला हुआ रूप है। और वह हवा की थिरकन का सिमटा हुआ संकोच है।

ध्यान दीजिए कि कविता के पहले हिस्से में कवि ने हाथों के स्पर्श की गरिमा कहा था, और दूसरे हिस्से में महिमा कहता है। गरिमा का अर्थ है गौरव या सम्मान, और महिमा का अर्थ है महानता या बड़प्पन। दोनों शब्दों से कवि बताता है कि किसान का श्रम केवल मेहनत नहीं है, बल्कि सम्मान के योग्य एक महान काम है। जो हाथ फसल उगाते हैं, वे पूरे समाज का पेट भरते हैं।

मिट्टी का गुण-धर्म: भूरी, काली, संदली

कवि ने मिट्टी के तीन रंग गिनाए हैं: भूरी, काली और संदली। भारत के अलग-अलग इलाक़ों में मिट्टी अलग-अलग होती है। कहीं नदियों की लाई भूरी जलोढ़ मिट्टी है, कहीं काली मिट्टी, तो कहीं चंदन जैसी हल्की पीली मिट्टी। हर मिट्टी की अपनी ख़ासियत है, और हर मिट्टी कोई न कोई फसल उगाती है।

गुण-धर्म का अर्थ है किसी चीज़ का स्वभाव और उसकी ताक़त। मिट्टी का गुण-धर्म है बीज को सँभालना, उसे पोषण देना और पौधे को खड़ा रहने की ज़मीन देना। मिट्टी में खनिज, नमी और सूक्ष्म जीव होते हैं, जो पौधे को बढ़ने में मदद करते हैं। अगर मिट्टी अपना यह स्वभाव छोड़ दे, तो फसल ही नहीं, धरती पर जीवन भी संकट में पड़ जाए।

आज के समय में यह बात और ज़रूरी हो जाती है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों का ज़्यादा इस्तेमाल, प्लास्टिक का कचरा और पेड़ों की कटाई मिट्टी की ताक़त को कम कर रहे हैं। इसलिए मिट्टी के गुण-धर्म को बचाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। जैविक खाद, फसल-चक्र, पेड़ लगाना और कचरा कम करना इसमें मदद कर सकते हैं।

सूरज की किरणों का रूपांतर

कवि कहता है कि फसल सूरज की किरणों का रूपांतर है। रूपांतर का अर्थ है एक रूप का दूसरे रूप में बदल जाना। सूरज की धूप पौधों की हरी पत्तियों पर पड़ती है। पौधे उस रोशनी, पानी और हवा से अपना भोजन बनाते हैं और बढ़ते हैं। धीरे-धीरे वही ऊर्जा दानों में जमा होती है।

यानी जो अनाज हम खाते हैं, उसमें असल में सूरज की ऊर्जा ही छिपी है। विज्ञान इसे प्रकाश-संश्लेषण कहता है, और कवि इसे किरणों का रूपांतर कहता है। यह बहुत सुंदर बात है कि एक कवि विज्ञान के सच को इतने सहज और काव्यात्मक ढंग से कह देता है। सुनहरे गेहूँ की बालियाँ जैसे सूरज की किरणों का ही दूसरा रूप लगती हैं।

हवा की थिरकन का सिमटा संकोच

कविता की अंतिम पंक्ति सबसे गहरी है। कवि कहता है कि फसल हवा की थिरकन का सिमटा हुआ संकोच है। थिरकन का अर्थ है नाचना या हल्के-हल्के हिलना। जब हवा चलती है, तो खेत की फसल लहराती है, जैसे नाच रही हो। हवा परागण में मदद करती है, पौधों को साँस देती है और उन्हें मज़बूत बनाती है।

सिमटा हुआ संकोच का अर्थ है कि हवा की वह सारी चंचलता और नाच फसल के भीतर समा गया है। जैसे कोई चंचल चीज़ शरमाकर सिमट जाए, वैसे ही हवा की थिरकन फसल के दानों में सिमट गई है। यहाँ हवा का मानवीकरण किया गया है, क्योंकि संकोच मनुष्य का भाव है।

इन दो बिंबों से कवि दिखाता है कि फसल में केवल ठोस चीज़ें, जैसे मिट्टी और पानी, ही नहीं, बल्कि अदृश्य चीज़ें, जैसे धूप और हवा, भी शामिल हैं। प्रकृति का हर तत्व फसल में अपना हिस्सा डालता है। इसलिए फसल प्रकृति का सबसे सुंदर उपहार है।

कविता का संदेश: कृषि-संस्कृति की ओर वापसी

आज हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहाँ लोग चीज़ें ख़रीदते और इस्तेमाल करते हैं, पर यह नहीं सोचते कि वे बनीं कैसे। दुकान से पैकेट में आटा या चावल लाते समय हमें खेत, किसान और मिट्टी याद नहीं आते। इसे उपभोक्ता-संस्कृति कहा जाता है।

फसल कविता हमें इसी दौर में फिर से खेती की दुनिया के पास ले जाती है। वह याद दिलाती है कि हर दाने के पीछे नदियों का पानी, किसानों का पसीना, मिट्टी का पोषण, सूरज की धूप और हवा का स्पर्श है। जब हम यह समझते हैं, तो भोजन का सम्मान करना, उसे बर्बाद न करना और किसान का आदर करना सीखते हैं।

कविता यह भी सिखाती है कि प्रकृति और मनुष्य एक-दूसरे के साथी हैं, विरोधी नहीं। अगर मनुष्य प्रकृति का शोषण करेगा, तो फसल नहीं उगेगी। और अगर मनुष्य मेहनत नहीं करेगा, तो प्रकृति अकेले खेत नहीं जोत सकती। यही सहयोग जीवन का आधार है।

दोनों कविताओं का शिल्प और तुलना

फसल की भाषा बोलचाल की खड़ी बोली है। एक के नहीं, दो के नहीं का दोहराव कविता में एक लय और गति पैदा करता है। फसल क्या है? जैसा सवाल प्रश्नोत्तर शैली का उदाहरण है। लाख-लाख, कोटि-कोटि और हज़ार-हज़ार में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। हवा की थिरकन के सिमटे संकोच में मानवीकरण है, और मिट्टी के तीन रंगों में सुंदर दृश्य-बिंब है।

अगर दोनों कविताओं की तुलना करें, तो यह दंतुरित मुसकान एक बच्चे के निजी, घरेलू और कोमल अनुभव की कविता है। उसमें वात्सल्य और प्रेम का भाव है। फसल एक बड़े, सामाजिक और प्राकृतिक सच की कविता है, जिसमें पूरे देश के किसान, नदियाँ और खेत शामिल हैं। एक कविता घर के भीतर की है, तो दूसरी पूरे देश के खेतों की।

फिर भी दोनों में एक गहरी समानता है। दोनों कविताएँ जीवन और सृजन का उत्सव मनाती हैं। एक में बच्चे की मुसकान कठोर मन में जीवन भरती है, तो दूसरी में प्रकृति और मनुष्य मिलकर धरती पर अन्न उगाते हैं। दोनों में नागार्जुन का वह मन दिखता है, जो साधारण चीज़ों में असाधारण सौंदर्य खोज लेता है।

Concepts and terms

सामूहिक सृजन

ऐसा निर्माण, जिसमें बहुत-से लोगों और तत्वों का हाथ हो। फसल प्रकृति और लाखों किसानों का सामूहिक सृजन है।

गुण-धर्म

किसी चीज़ का स्वभाव और उसकी ख़ास क्षमता। मिट्टी का गुण-धर्म है उपजाऊ होना और बीज को पोषण देना।

रूपांतर

एक रूप का बदलकर दूसरा रूप बन जाना। सूरज की किरणें पौधों में बदलकर अन्न का रूप ले लेती हैं।

कृषि-संस्कृति

खेती, मिट्टी, पशु और प्रकृति से जुड़ी जीवन-शैली, जिसमें श्रम और धरती का सम्मान हो।

उपभोक्ता-संस्कृति

ऐसी जीवन-शैली, जिसमें चीज़ों को केवल ख़रीदने और इस्तेमाल करने पर ज़ोर हो, उनके बनने की मेहनत पर नहीं।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

विद्यालय के इको-क्लब ने पास के गाँव में एक दिन की खेत-यात्रा रखी। वहाँ किसान रामदुलारी जी ने बच्चों को अपना गेहूँ का खेत दिखाया। उन्होंने बताया कि वे नहर के पानी से सिंचाई करती हैं और गोबर की खाद डालती हैं।

रामदुलारी जी ने यह भी बताया कि पड़ोस के खेत वाले ने कई साल तक बहुत ज़्यादा रासायनिक खाद डाली। अब उसकी मिट्टी सख़्त हो गई है और पैदावार घट गई है। उन्होंने बच्चों को मुट्ठी भर अपनी नरम, भुरभुरी मिट्टी और पड़ोसी की सख़्त मिट्टी, दोनों छूने को दीं।

लौटते समय समीर ने कहा कि उसने आज पहली बार सोचा कि उसकी रोटी में कितने लोगों और चीज़ों का हाथ है।

Activity:

अपने घर के एक दिन के भोजन की सूची बनाइए। हर चीज़ के आगे लिखिए कि उसे बनाने में कौन-कौन से प्राकृतिक तत्व और किन-किन लोगों की मेहनत लगी।

Analysis:

जब हम भोजन के पीछे की पूरी यात्रा समझते हैं, तो उसे बर्बाद करना कम होता है और किसान व प्रकृति के प्रति सम्मान बढ़ता है। फसल कविता यही दृष्टि देती है।

Did you know

पौधे सूरज की रोशनी, हवा की कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से अपना भोजन बनाते हैं। इसे प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं, और कविता का किरणों का रूपांतर इसी सच को कविता की भाषा में कहता है।

भारत में मिट्टी कई तरह की होती है, जैसे जलोढ़, काली, लाल और रेतीली। काली मिट्टी कपास के लिए और जलोढ़ मिट्टी गेहूँ-धान के लिए बहुत उपजाऊ मानी जाती है।

एक चम्मच उपजाऊ मिट्टी में करोड़ों सूक्ष्म जीव रहते हैं। यही जीव मिट्टी को ज़िंदा और पोषक बनाए रखते हैं।

Memory tricks

फसल के पाँच साथी: न-हा-मि-सू-ह — नदी, हाथ, मिट्टी, सूरज, हवा। नहा मिसूह, फसल के पाँच साथी।

मिट्टी के तीन रंग: भू-का-सं — भूरी, काली, संदली।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 फसल कविता के अनुसार फसल किसकी देन है? beginner
  • A केवल अकेले किसान की
  • B केवल सरकार की
  • C प्रकृति और मनुष्य की
  • D केवल बाज़ार की
Show answer
Answer: प्रकृति और मनुष्य की
Why:

साझा सृजन।

Q2 एक के नहीं, दो के नहीं का दोहराव कविता में क्या बताता है? intermediate
  • A फसल केवल दो किसानों की मेहनत है
  • B कवि गिनती भूल गया
  • C फसल बहुत कम है
  • D फसल अनगिनत की देन है
Show answer
Answer: फसल अनगिनत की देन है
Why:

व्यापकता।

Q3 कवि नदियों के पानी को जादू क्यों कहता है? intermediate
  • A पानी सूखे बीज में जान डालता है
  • B पानी से जादूगर बहुत-से खेल दिखाते हैं
  • C नदियाँ अचानक ग़ायब हो जाती हैं
  • D पानी रंग बदलता है
Show answer
Answer: पानी सूखे बीज में जान डालता है
Why:

अंकुरण।

Q4 लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों से कवि किसकी ओर संकेत करता है? intermediate
  • A मशीनों और कारख़ानों के मज़दूर
  • B किसानों का सामूहिक श्रम
  • C सेना के जवान
  • D व्यापारियों का धन
Show answer
Answer: किसानों का सामूहिक श्रम
Why:

मेहनत।

Q5 हाथों के स्पर्श को गरिमा और महिमा कहकर कवि क्या जताना चाहता है? advanced
  • A किसान को हाथों से खेती छोड़ देनी चाहिए
  • B हाथ गंदे हो जाते हैं
  • C स्पर्श से फसल ख़राब होती है
  • D किसान का श्रम सम्मान के योग्य है
Show answer
Answer: किसान का श्रम सम्मान के योग्य है
Why:

गौरव।

Q6 कविता में मिट्टी के कितने रंगों का उल्लेख है? beginner
  • A दो
  • B तीन
  • C चार
  • D सात
Show answer
Answer: तीन
Why:

भूरी, काली, संदली।

Q7 संदली मिट्टी का रंग किससे मिलता-जुलता है? intermediate
  • A कोयले से
  • B आकाश से
  • C चंदन से
  • D हरी घास से
Show answer
Answer: चंदन से
Why:

संदल।

Q8 मिट्टी का गुण-धर्म किसे कहा जा सकता है? intermediate
  • A बीज को पोषण देने की क्षमता
  • B मिट्टी को बाज़ार में बेचने की क़ीमत
  • C मिट्टी का भारीपन
  • D मिट्टी की गंध भर
Show answer
Answer: बीज को पोषण देने की क्षमता
Why:

स्वभाव।

Q9 रूपांतर है सूरज की किरणों का, इसके पीछे कौन-सा वैज्ञानिक सच है? advanced
  • A गुरुत्वाकर्षण
  • B वाष्पीकरण
  • C चुंबकत्व
  • D प्रकाश-संश्लेषण
Show answer
Answer: प्रकाश-संश्लेषण
Why:

पत्तियाँ भोजन बनाती हैं।

Q10 हवा की थिरकन का सिमटा संकोच कहने में कौन-सा अलंकार है? intermediate
  • A अतिशयोक्ति
  • B उत्प्रेक्षा
  • C मानवीकरण
  • D अनुप्रास
Show answer
Answer: मानवीकरण
Why:

संकोच मनुष्य का भाव।

Q11 फसल में हवा का क्या योगदान है? intermediate
  • A पौधों को साँस और परागण
  • B फसल को जड़ से उखाड़कर ले जाना
  • C केवल धूल उड़ाना
  • D पानी सुखाना
Show answer
Answer: पौधों को साँस और परागण
Why:

थिरकन।

Q12 फसल क्या है? वाली पंक्ति कविता की किस शैली को दिखाती है? beginner
  • A आत्मकथा
  • B प्रश्नोत्तर शैली
  • C संवाद-नाटक
  • D पत्र
Show answer
Answer: प्रश्नोत्तर शैली
Why:

सवाल-जवाब।

Q13 कविता में लाख-लाख और कोटि-कोटि में कौन-सा अलंकार है? intermediate
  • A उत्प्रेक्षा
  • B दृष्टांत अलंकार
  • C पुनरुक्ति प्रकाश
  • D श्लेष
Show answer
Answer: पुनरुक्ति प्रकाश
Why:

शब्द दोहराए।

Q14 फसल कविता की भाषा कैसी है? beginner
  • A बोलचाल वाली
  • B कठिन संस्कृत और ब्रजभाषा
  • C अवधी
  • D अंग्रेज़ी
Show answer
Answer: बोलचाल वाली
Why:

सहज लय।

Q15 कविता उपभोक्ता-संस्कृति के दौर में हमें कहाँ ले जाती है? intermediate
  • A बड़े शहरों के बाज़ारों में
  • B कारख़ानों में
  • C विदेश
  • D खेती के क़रीब
Show answer
Answer: खेती के क़रीब
Why:

कृषि-संस्कृति।

Q16 पैकेट का आटा ख़रीदते समय खेत और किसान याद न आना किस सोच का उदाहरण है? advanced
  • A कृषि-संस्कृति
  • B उपभोक्ता-संस्कृति
  • C लोक-संस्कृति
  • D ग्राम-संस्कृति
Show answer
Answer: उपभोक्ता-संस्कृति
Why:

केवल इस्तेमाल।

Q17 मिट्टी अपना गुण-धर्म छोड़ दे, तो सबसे बड़ा असर किस पर पड़ेगा? advanced
  • A केवल मिट्टी के रंग और बनावट
  • B केवल गाड़ियों पर
  • C धरती पर जीवन
  • D केवल पहाड़ों पर
Show answer
Answer: धरती पर जीवन
Why:

अन्न नहीं।

Q18 रासायनिक खाद के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल से मिट्टी पर क्या असर पड़ता है? intermediate
  • A उपजाऊपन घटता है
  • B मिट्टी हमेशा के लिए और उपजाऊ हो जाती है
  • C मिट्टी का रंग नीला हो जाता है
  • D कोई असर नहीं
Show answer
Answer: उपजाऊपन घटता है
Why:

सूक्ष्म जीव।

Q19 रूपांतर का अर्थ है ______। beginner
  • A रंग चढ़ाना
  • B टूट जाना
  • C छिप जाना
  • D रूप बदलना
Show answer
Answer: रूप बदलना
Why:

किरणें से अन्न।

Q20 गरिमा का अर्थ है ______। beginner
  • A थकान
  • B गौरव
  • C गंदगी
  • D डर
Show answer
Answer: गौरव
Why:

स्पर्श की गरिमा।

Q21 यह दंतुरित मुसकान और फसल में मुख्य अंतर क्या है? advanced
  • A एक निजी, दूसरी सामाजिक
  • B दोनों कविताएँ अलग-अलग कवियों की हैं
  • C दोनों ब्रज में हैं
  • D दोनों दोहे हैं
Show answer
Answer: एक निजी, दूसरी सामाजिक
Why:

घर बनाम देश।

Q22 दोनों कविताओं में कौन-सा भाव साझा है? intermediate
  • A निराशा, शोक और गहरा अकेलापन
  • B युद्ध
  • C जीवन और सृजन का उत्सव
  • D हास्य
Show answer
Answer: जीवन और सृजन का उत्सव
Why:

साधारण में सुंदर।

Q23 फसल कविता का मूल संदेश क्या है? beginner
  • A मनुष्य अकेले ही सब कुछ कर सकता है
  • B प्रकृति बेकार है
  • C खेती छोड़ दें
  • D सहयोग से ही सृजन
Show answer
Answer: सहयोग से ही सृजन
Why:

प्रकृति और मनुष्य।

Q24 अभिकथन: फसल को सूरज की किरणों का रूपांतर कहा गया है। कारण: पौधे धूप की ऊर्जा से भोजन बनाते हैं, और वही ऊर्जा दानों में जमा होती है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

प्रकाश-संश्लेषण।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. फसल में अनेक नदियों का पानी है। II. कवि के अनुसार फसल केवल एक खेत की मिट्टी से बनती है। III. कविता में हवा का मानवीकरण है। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

हज़ारों खेत।

Important short questions (7)

कवि के अनुसार फसल बनने में कौन-कौन से तत्व शामिल हैं?

कवि के अनुसार फसल में ढेर सारी नदियों का पानी, लाखों किसानों के हाथों की मेहनत और हज़ारों खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म है। इसके साथ सूरज की किरणें और हवा की थिरकन भी उसमें समाई है।

एक के नहीं, दो के नहीं वाली शैली का कविता में क्या महत्त्व है?

यह दोहराव बताता है कि फसल किसी एक-दो की नहीं, अनगिनत नदियों, हाथों और खेतों की देन है। इससे कविता में व्यापकता आती है। साथ ही दोहराव से लोकगीत जैसी लय भी बनती है।

कवि ने किसानों के श्रम को महिमा क्यों कहा है?

किसान जुताई से कटाई तक हर काम अपने हाथों से करते हैं और पूरे समाज का पेट भरते हैं। उनका यह श्रम केवल मेहनत नहीं, बल्कि महान और सम्मान के योग्य काम है। इसलिए कवि इसे महिमा कहता है।

मिट्टी के गुण-धर्म को अपने शब्दों में समझाइए।

मिट्टी का गुण-धर्म उसका वह स्वभाव है, जिससे वह बीज को सँभालती और पोषण देती है। उसमें खनिज, नमी और सूक्ष्म जीव होते हैं। यही गुण पौधे को बढ़ने और फसल को पकने में मदद करते हैं।

हवा की थिरकन के सिमटे संकोच का भाव लिखिए।

हवा चलने पर फसल लहराती है, जैसे नाच रही हो। हवा की यह चंचलता और नाच फसल के भीतर समा गया है। जैसे कोई चंचल चीज़ शरमाकर सिमट जाए, वैसे ही हवा फसल में सिमट गई है।

आज की जीवन-शैली मिट्टी को किन तरीक़ों से नुक़सान पहुँचा रही है?

रासायनिक खाद और कीटनाशकों का ज़्यादा प्रयोग मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को नष्ट करता है। प्लास्टिक का कचरा मिट्टी में घुलता नहीं, और पेड़ कटने से मिट्टी बहकर चली जाती है। इससे मिट्टी का उपजाऊपन घटता है।

फसल कविता की भाषा की दो विशेषताएँ बताइए।

कविता बोलचाल की सहज खड़ी बोली में है, जिससे वह आम पाठक तक आसानी से पहुँचती है। एक के नहीं, दो के नहीं जैसे दोहराव और प्रश्नोत्तर शैली उसकी लय और असर को बढ़ाते हैं।

Long answer questions (3)

फसल कविता के आधार पर सिद्ध कीजिए कि कोई भी सृजन प्रकृति और मनुष्य के सहयोग से ही संभव है।

फसल कविता बताती है कि खेत में उगी फसल किसी अकेले की देन नहीं है। उसमें प्रकृति के कई तत्व हैं। नदियों का पानी बीज में जान डालता है, अलग-अलग रंगों की मिट्टी उसे पोषण देती है, सूरज की किरणें पौधे में ऊर्जा भरती हैं और हवा उसे साँस देती है। पर केवल प्रकृति से फसल नहीं उगती। लाखों-करोड़ों किसानों के हाथ खेत जोतते, बीज बोते, सिंचाई करते और फसल काटते हैं। कवि इसे हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा कहता है। अगर प्रकृति साथ न दे, तो किसान की मेहनत बेकार है, और अगर किसान मेहनत न करे, तो प्रकृति अकेले खेत नहीं जोत सकती। यही सच हर सृजन पर लागू होता है। घर, पुल, कपड़ा या कोई भी निर्माण प्रकृति के संसाधनों और मनुष्य के श्रम, दोनों से बनता है। इसलिए दोनों का सहयोग ही जीवन का आधार है।

यह दंतुरित मुसकान और फसल की तुलना कीजिए। दोनों में क्या अंतर और क्या समानता है?

यह दंतुरित मुसकान एक निजी और घरेलू अनुभव की कविता है। उसमें लंबे प्रवास से लौटे कवि और एक नन्हे बच्चे की पहली मुलाक़ात है। उसका भाव वात्सल्य और कोमल प्रेम है, और उसके बिंब, जैसे कमल, पत्थर और फूल, मन के बदलाव को दिखाते हैं। फसल एक व्यापक और सामाजिक कविता है। उसमें पूरे देश की नदियाँ, खेत और करोड़ों किसान शामिल हैं। उसका भाव श्रम का सम्मान और प्रकृति के प्रति आभार है। इसकी शैली में दोहराव और प्रश्नोत्तर है। अंतर के बावजूद दोनों कविताओं में गहरी समानता है। दोनों जीवन और सृजन का उत्सव मनाती हैं। एक में मुसकान कठोर मन में जीवन भरती है, दूसरी में प्रकृति और मनुष्य मिलकर अन्न उगाते हैं। दोनों में नागार्जुन की सहज भाषा और साधारण में सुंदरता खोजने वाली दृष्टि दिखती है।

किसानों की स्थिति सुधारने के लिए अपने सुझाव देते हुए किसी समाचार-पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।

सेवा में, संपादक महोदय, जन-आवाज़ समाचार-पत्र। विषय: किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सुझाव। महोदय, इस पत्र का उद्देश्य आपके पाठकों का ध्यान किसानों की कठिनाइयों की ओर दिलाना है। आज कई किसान महँगे बीज, अनियमित बारिश और फसल के कम दाम से परेशान हैं। मेरा पहला सुझाव है कि हर गाँव में मिट्टी-जाँच की सुविधा हो, ताकि किसान सही खाद चुन सकें। दूसरा, छोटे किसानों के लिए सस्ते ऋण और फसल-बीमा आसान बनाया जाए। तीसरा, गाँवों में भंडार-घर और सीधी बिक्री वाली मंडियाँ बनें, ताकि बिचौलिए कम हों। चौथा, खेती में काम करने वाली महिलाओं को किसान के रूप में पहचान और प्रशिक्षण मिले। अंत में, स्कूलों में भी बच्चों को खेती और किसान के महत्त्व के बारे में पढ़ाया जाए। धन्यवाद। भवदीय, एक विद्यार्थी, कक्षा दस।

Flashcards (17)

फसल कविता के कवि?
नागार्जुन।
कवि के अनुसार फसल में किनका पानी है?
ढेर सारी नदियों का।
फसल में किनके हाथों का स्पर्श है?
लाखों-करोड़ों किसानों का।
फसल में कितने खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म है?
हज़ार-हज़ार खेतों की।
कविता में मिट्टी के कौन-से तीन रंग हैं?
भूरी, काली, संदली।
फसल किसकी किरणों का रूपांतर है?
सूरज की।
फसल में हवा का क्या सिमटा है?
थिरकन का संकोच।
गरिमा का अर्थ?
गौरव, सम्मान।
महिमा का अर्थ?
महानता, बड़प्पन।
संदली का अर्थ?
चंदन जैसे रंग की।
रूपांतर का अर्थ?
रूप बदलना।
थिरकन का अर्थ?
नाचना, हल्का हिलना।
कोटि का अर्थ?
करोड़।
कविता की शैली?
प्रश्नोत्तर और दोहराव।
कविता का मूल संदेश?
प्रकृति और मनुष्य के सहयोग से सृजन।
कविता हमें किस संस्कृति के पास ले जाती है?
कृषि-संस्कृति।
दोनों कविताओं की समानता?
दोनों जीवन और सृजन का उत्सव हैं।

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  • शब्द और अर्थ
  • फसल का कौन-सा योगदानकर्ता?
  • सही या भ्रम
  • कविता का क्रम
  • झटपट उत्तर

Class 10 Hindi Chapter 5 — frequently asked questions

नागार्जुन के जीवन की यात्राओं के बारे में संक्षेप में बताइए।

संस्कृत पाठशाला के बाद नागार्जुन पढ़ने के लिए बनारस और कलकत्ता गए। सन् 1936 में वे श्रीलंका पहुँचे और बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए। लौटकर उन्होंने घुमक्कड़ स्वभाव के कारण कई बार पूरे भारत की यात्रा की।

बच्चे की मुसकान देखकर कवि के मन में कौन-सा बदलाव आता है?

कवि का मन, जो लंबे संघर्षों से कठोर और रूखा हो चुका था, कोमल हो उठता है। उसे लगता है जैसे पत्थर पिघल गया हो और बबूल से फूल झरने लगे हों। उसके मन में प्यार और आनंद उमड़ आता है।

झोंपड़ी में खिलते जलजात की कल्पना का क्या भाव है?

कमल तालाब में खिलता है, झोंपड़ी में नहीं। पर बच्चे की सुंदरता से कवि को अपनी साधारण झोंपड़ी भी कमलों से भरी लगती है। यानी बच्चे से ग़रीब घर भी सुंदर हो उठता है।

कवि के अनुसार फसल बनने में कौन-कौन से तत्व शामिल हैं?

कवि के अनुसार फसल में ढेर सारी नदियों का पानी, लाखों किसानों के हाथों की मेहनत और हज़ारों खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म है। इसके साथ सूरज की किरणें और हवा की थिरकन भी उसमें समाई है।

एक के नहीं, दो के नहीं वाली शैली का कविता में क्या महत्त्व है?

यह दोहराव बताता है कि फसल किसी एक-दो की नहीं, अनगिनत नदियों, हाथों और खेतों की देन है। इससे कविता में व्यापकता आती है। साथ ही दोहराव से लोकगीत जैसी लय भी बनती है।

कवि ने किसानों के श्रम को महिमा क्यों कहा है?

किसान जुताई से कटाई तक हर काम अपने हाथों से करते हैं और पूरे समाज का पेट भरते हैं। उनका यह श्रम केवल मेहनत नहीं, बल्कि महान और सम्मान के योग्य काम है। इसलिए कवि इसे महिमा कहता है।

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