Class 10 Hindi Chapter 5: यह दंतुरित मुसकान और फसल
- 2 topics
- 50 MCQs
- 14 short answers
- 6 long answers
- 34 flashcards
- 10 games
- ~100 min read
- Hindi
नागार्जुन और यह दंतुरित मुसकान
इस कविता में कवि एक नन्हे बच्चे की नए दाँतों वाली मुसकान देखकर मुग्ध हो जाता है। उसे लगता है कि यह मुसकान पत्थर जैसे कठोर मन को भी पिघला सकती है। लंबे प्रवास से लौटा कवि माँ के माध्यम से ही बच्चे से परिचय पाता है।
What you will be able to do
- नागार्जुन के जीवन, यात्राओं, रचनाओं और जनकवि वाले स्वभाव के बारे में बता सकेंगे।
- दंतुरित मुसकान का अर्थ समझकर बता सकेंगे कि यह मुसकान कवि के मन को कैसे बदल देती है।
- कविता में आए जलजात, पाषाण और शेफालिका जैसे बिंबों का भाव स्पष्ट कर सकेंगे।
- कवि, बच्चे और माँ के आपसी संबंध को समझकर माँ की माध्यम वाली भूमिका समझा सकेंगे।
- कविता की भाषा, बिंब-योजना, अलंकार और बोलचाल वाली लय की पहचान कर सकेंगे।
Key points
नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था; उनका जन्म सन् 1911 में बिहार के दरभंगा ज़िले के एक गाँव सतलखा में हुआ।
संस्कृत पाठशाला के बाद वे पढ़ने बनारस और कलकत्ता गए; श्रीलंका जाकर उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली।
घुमक्कड़ और अक्खड़ स्वभाव वाले नागार्जुन ने पूरे भारत की कई यात्राएँ कीं; सन् 1998 में उनका देहांत हुआ।
वे हिंदी और मैथिली, दोनों में लिखते थे; मैथिली में उनका नाम यात्री है, और व्यंग्य के कारण उन्हें आधुनिक कबीर कहा गया।
दंतुरित मुसकान यानी ऐसी मुसकान, जिसमें बच्चे के नए-नए निकले दाँत झलकते हों।
कवि को लगता है कि यह मुसकान मरे हुए में भी जान डाल दे और कठोर पत्थर को पिघलाकर पानी बना दे।
धूल से सना बच्चा कवि की झोंपड़ी में कमल जैसा खिला लगता है; उसके छूने से बाँस या बबूल से भी फूल झरने लगते हैं।
बच्चा कवि को पहचानता नहीं, इसलिए एकटक देखता है; कवि सोचता है कि कहीं वह थक न गया हो।
लंबे समय तक बाहर रहा कवि ख़ुद को पराया मानता है; माँ ही उसके और बच्चे के बीच माध्यम बनती है।
Full explanation
नागार्जुन: घुमक्कड़ जनकवि
नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। उनका जन्म सन् 1911 में सतलखा नाम के गाँव में हुआ, जो बिहार के दरभंगा ज़िले में है। शुरुआती पढ़ाई एक संस्कृत पाठशाला में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वे बनारस और कलकत्ता गए। सन् 1936 में वे श्रीलंका पहुँचे और वहीं बौद्ध धर्म में दीक्षा ली। लगभग दो साल वहाँ रहकर सन् 1938 में वे भारत लौटे।
नागार्जुन का स्वभाव घुमक्कड़ और अक्खड़ था। उन्हें एक जगह टिककर रहना पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने कई बार पूरे देश की यात्राएँ कीं। वे राजनीति में भी सक्रिय रहे और इसी कारण कई बार जेल गए। सन् 1998 में उनका देहांत हुआ। उनका जीवन ख़ुद एक लंबी यात्रा जैसा था, और यही यात्री वाला भाव इस कविता में भी झलकता है।
वे हिंदी और मैथिली, दोनों भाषाओं में बराबर लिखते रहे। उन्होंने बांग्ला और संस्कृत में भी कविताएँ लिखीं। अपनी मातृभाषा मैथिली में वे यात्री नाम से प्रसिद्ध हैं। मैथिली कविता के लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला। इसके अलावा दिल्ली की हिंदी अकादमी ने उन्हें शिखर सम्मान दिया। उत्तर प्रदेश ने भारत भारती से और बिहार ने राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार से उनका सम्मान किया।
नागार्जुन की रचनाएँ और उनका स्वर
युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, हज़ार-हज़ार बाँहों वाली और तुमने कहा था उनके चर्चित कविता-संग्रह हैं। पुरानी जूतियों का कोरस और मैं मिलटरी का बूढ़ा घोड़ा भी उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उन्होंने उपन्यास और गद्य की दूसरी विधाओं में भी ख़ूब लिखा। उनका पूरा साहित्य सात खंडों वाली नागार्जुन रचनावली में छपा है।
नागार्जुन का मन हमेशा आम लोगों के जीवन से जुड़ा रहा। भ्रष्टाचार, स्वार्थ भरी राजनीति और समाज की गिरती हालत पर वे खुलकर लिखते थे। व्यंग्य में वे इतने माहिर थे कि लोग उन्हें आधुनिक कबीर कहने लगे। जैसे कबीर ने अपने समय के पाखंड पर चोट की, वैसे ही नागार्जुन ने अपने समय की बुराइयों पर तीखे व्यंग्य किए।
उनकी कविता गाँव की चौपाल में भी उतनी ही पसंद की गई, जितनी विद्वानों की सभा में। छायावाद के बाद के दौर में ऐसा कोई दूसरा कवि नहीं दिखता, जो दोनों जगह इतना लोकप्रिय हो। इसीलिए उन्हें सच्चे अर्थों में जनकवि कहा जाता है। उन्होंने छंद वाली कविताएँ भी लिखीं और मुक्त छंद वाली भी। पर यह दंतुरित मुसकान में उनका व्यंग्य वाला रूप नहीं, बल्कि एक कोमल, भावुक और स्नेह से भरा रूप दिखता है।
दंतुरित मुसकान: नन्हे दाँतों का जादू
दंतुरित शब्द दाँत से बना है। जब छोटे बच्चे के पहले-पहले दाँत निकलते हैं और वह हँसता है, तो उसके नन्हे दाँत झलकते हैं। ऐसी मुसकान को ही दंतुरित मुसकान कहा गया है। यह मुसकान भोलेपन, ताज़गी और नए जीवन से भरी होती है।
कवि जब इस मुसकान को देखता है, तो उसका मन जैसे खिल उठता है। वह कहता है कि यह मुसकान इतनी जीवंत है कि मरे हुए व्यक्ति में भी प्राण फूँक सकती है। यह बात अतिशयोक्ति है, यानी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है। पर इसके पीछे एक सच्चा भाव है: बच्चे की हँसी में इतनी ताक़त होती है कि वह उदास और थके हुए मन में भी जीवन भर देती है।
कवि आगे बच्चे के शरीर का चित्र भी खींचता है। बच्चा धूल में खेलकर आया है, इसलिए उसके अंग धूल-मिट्टी से सने हैं। धूलि-धूसर गात का यही अर्थ है। पर यह धूल उसकी सुंदरता कम नहीं करती, बल्कि उसे और स्वाभाविक बना देती है। गाँव का बच्चा, मिट्टी में खेलता हुआ, अपनी सहज सुंदरता में और प्यारा लगता है।
झोंपड़ी में खिलता कमल और पिघलता पत्थर
कवि को लगता है कि जैसे कमल के फूल तालाब छोड़कर उसकी झोंपड़ी में खिल रहे हों। जलजात का अर्थ है कमल, यानी जल में जन्मा फूल। कमल तालाब में खिलता है, झोंपड़ी में नहीं। पर बच्चे की सुंदरता ऐसी है कि कवि को अपनी साधारण झोंपड़ी में भी कमल खिले हुए दिखाई देते हैं। यानी बच्चे की मौजूदगी से ग़रीब घर भी सुंदर और पवित्र हो उठता है।
इसके बाद कवि एक और कल्पना करता है। वह कहता है कि बच्चे का स्पर्श पाकर कठोर पत्थर भी पिघलकर पानी बन गया होगा। पाषाण का अर्थ है पत्थर। यहाँ पत्थर किसी कठोर हृदय का प्रतीक है। शायद कवि अपने ही मन की बात कर रहा है। लंबी यात्राओं, संघर्षों और जीवन की कठिनाइयों ने उसका मन कठोर बना दिया होगा। पर बच्चे के प्यार भरे स्पर्श से वह कठोरता घुल जाती है।
यह बिंब बहुत गहरा है। पत्थर का पिघलना असंभव है, पर प्रेम और कोमलता असंभव को भी संभव कर देते हैं। बड़े लोग अक्सर अपनी भावनाएँ छिपा लेते हैं और भीतर से सख़्त हो जाते हैं। एक बच्चे की निश्छल हँसी उस सख़्ती को तोड़ देती है और भीतर छिपी कोमलता बाहर ले आती है।
बाँस और बबूल से झरते शेफालिका के फूल
कवि की अगली कल्पना और भी सुंदर है। वह कहता है कि बच्चे का स्पर्श पाकर शेफालिका के फूल झरने लगे। शेफालिका को हरसिंगार भी कहते हैं, जिसके सफ़ेद, सुगंधित फूल अपने आप झरते हैं। फिर कवि चौंककर पूछता है कि जिसे बच्चे ने छुआ, वह बाँस था या बबूल?
बाँस सूखा और कड़ा होता है, और बबूल में काँटे ही काँटे होते हैं। इनमें कोमल, सुगंधित फूल नहीं खिलते। यहाँ बाँस और बबूल फिर से कवि के शुष्क और कँटीले मन के प्रतीक हैं। बच्चे के स्पर्श से उस नीरस मन में भी फूल झरने लगे। यानी कवि के मन में प्रेम, ममता और आनंद उमड़ पड़ा।
ध्यान दीजिए कि कवि बार-बार एक ही बात को नए-नए चित्रों से कहता है। मृतक में जान, झोंपड़ी में कमल, पिघलता पत्थर और बबूल से झरते फूल, ये सब एक ही भाव के अलग-अलग रूप हैं। यह भाव है: बच्चे की मुसकान कठोर, सूखे और निर्जीव को भी कोमल, हरा और जीवंत बना देती है। कविता की ताक़त इन्हीं बिंबों में छिपी है, जो पढ़ने वाले की आँखों के सामने दृश्य खड़ा कर देते हैं।
अनजान अतिथि और एकटक देखता बच्चा
कविता का दूसरा हिस्सा कवि और बच्चे की पहली मुलाक़ात का है। बच्चा कवि को पहचानता नहीं, क्योंकि कवि लंबे समय से घर से बाहर था। इसलिए बच्चा उसे बिना पलक झपकाए लगातार देखता रहता है। अनिमेष का यही अर्थ है। बच्चा जैसे समझने की कोशिश कर रहा है कि यह नया व्यक्ति कौन है।
कवि बच्चे से प्यार भरे सवाल पूछता है। वह पूछता है कि क्या तुम मुझे पहचान नहीं पाए? क्या तुम देखते-देखते थक गए हो? फिर वह कहता है कि अगर तुम थक गए हो, तो मैं अपनी नज़र हटा लूँ। यह कवि की संवेदनशीलता है। वह बच्चे पर अपना प्यार थोपना नहीं चाहता। वह बच्चे की सुविधा का ध्यान रखता है, ताकि बच्चा असहज न हो।
कवि को इस बात का दुख भी नहीं है कि बच्चा उसे पहचान नहीं पाया। वह ख़ुद को समझाता है कि पहली बार में जान-पहचान न हो सकी, तो क्या हुआ। यानी कवि धैर्य रखता है और मानता है कि परिचय धीरे-धीरे होगा। यह बात बहुत स्वाभाविक है। छोटे बच्चे अजनबियों से तुरंत घुलते-मिलते नहीं, पहले उन्हें ध्यान से परखते हैं।
माँ: कवि और बच्चे के बीच की कड़ी
कवि मानता है कि अगर बच्चे की माँ बीच में माध्यम न बनी होती, तो वह यह मुसकान न देख पाता और न जान पाता। माँ ने ही बच्चे को कवि से मिलवाया और दोनों के बीच प्यार का पुल बनाया। इसलिए कवि बच्चे को धन्य कहता है, और उसकी माँ को भी धन्य कहता है।
इसके बाद कवि अपने बारे में एक सच्ची और थोड़ी दुखी बात कहता है। वह कहता है कि मैं तो हमेशा बाहर रहने वाला प्रवासी हूँ, पराया हूँ, कोई दूसरा हूँ। इतर और अन्य, दोनों का अर्थ है दूसरा या पराया। इस अतिथि से बच्चे का क्या संपर्क रहा होगा? यानी कवि मानता है कि वह इस घर में एक मेहमान जैसा है, जिससे बच्चे का कोई रिश्ता अभी बना ही नहीं।
दूसरी ओर माँ ने बच्चे को हर दिन अपनी उँगलियों से मधुपर्क चटाया है। मधुपर्क पूजा और सत्कार में दिया जाने वाला मीठा मिश्रण है। यहाँ इसका अर्थ है माँ का वह मीठा, पोषण देने वाला प्यार, जो बच्चे को हर रोज़ मिलता है। इसलिए बच्चे का गहरा रिश्ता माँ से है, कवि से नहीं। कवि इसे बिना शिकायत, सहज भाव से स्वीकार करता है।
कनखी, आँखें चार और छविमान मुसकान
कविता के अंत में एक प्यारा दृश्य है। बच्चा कवि को सीधे नहीं, बल्कि तिरछी नज़र से, यानी कनखियों से देखता है। फिर जब दोनों की नज़रें मिलती हैं, यानी आँखें चार होती हैं, तब बच्चा मुसकरा देता है। कवि को वह मुसकान उस पल बहुत ही सुंदर लगती है। छविमान का अर्थ है सुंदर, शोभा से भरा।
इस दृश्य में बच्चे का संकोच और जिज्ञासा, दोनों हैं। वह अजनबी को देखना भी चाहता है और थोड़ा शरमाता भी है। इसलिए कनखी मारकर देखता है। और जब नज़रें मिलती हैं, तो उसका संकोच टूटता है और मुसकान खिल उठती है। यहीं से कवि और बच्चे के बीच एक नया रिश्ता शुरू होता है।
कविता की भाषा बोलचाल के बहुत क़रीब है, फिर भी उसमें जलजात, पाषाण, अनिमेष और मधुपर्क जैसे तत्सम शब्द हैं। मृतक में जान डालना और पत्थर का पिघलना अतिशयोक्ति के उदाहरण हैं। धूलि-धूसर में अनुप्रास है। कविता में दृश्य-बिंब भरपूर हैं, जैसे झोंपड़ी में खिला कमल और झरते फूल। कवि बच्चे से सीधे बात करता है, इसलिए कविता में संवाद जैसी आत्मीयता भी है।
Concepts and terms
नन्हे बच्चे की वह मुसकान, जिसमें उसके नए निकले दाँत दिखते हों। यह भोलेपन और नए जीवन का प्रतीक है।
शब्दों से बना ऐसा चित्र, जो आँखों के सामने कोई दृश्य खड़ा कर दे। झोंपड़ी में खिलता कमल एक सुंदर दृश्य-बिंब है।
ऐसा कवि, जो आम लोगों के जीवन, दुख और संघर्ष को उनकी अपनी भाषा में लिखे। नागार्जुन को जनकवि कहा जाता है।
जो लंबे समय तक अपने घर से दूर रहे। कविता में कवि ख़ुद को चिर प्रवासी कहता है, यानी हमेशा बाहर रहने वाला।
दो लोगों को जोड़ने वाली कड़ी। कविता में माँ ही वह कड़ी है, जिसके कारण कवि बच्चे की मुसकान देख पाता है।
सावधान
भ्रम और सच
करके देखो
Title:
पहली मुलाक़ात की डायरी
Safety:
बच्चे को ज़बरदस्ती गोद में मत लीजिए; उसके माता-पिता की अनुमति और उपस्थिति ज़रूरी है।
What You Notice:
आप देखेंगे कि बच्चे अजनबी को पहले परखते हैं, फिर धीरे-धीरे खुलते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कविता में होता है।
Did you know
नागार्जुन ने बौद्ध धर्म की दीक्षा श्रीलंका में ली थी। नागार्जुन नाम भी एक प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक के नाम से जुड़ा है, जिसे उन्होंने अपना लिया।
मधुपर्क दही, घी, शहद, जल और दूध को मिलाकर बनता है, जिसे पूजा और अतिथि-सत्कार में दिया जाता है। आम बोलचाल में इसे पंचामृत भी कहते हैं।
शेफालिका को हरसिंगार या पारिजात भी कहते हैं। इसके सफ़ेद फूल, नारंगी डंडी वाले, रात में खिलते हैं और सुबह ज़मीन पर बिछ जाते हैं।
Memory tricks
मुसकान के तीन चमत्कार: जा-पि-फू — जान डाल दे, पत्थर पिघला दे, फूल झरा दे। जापिफू, मुसकान का जादू।
Practice MCQs with answers (25)
- A उत्तर प्रदेश
- B बंगाल
- C बिहार
- D मध्य प्रदेश
Show answer
Why:
दरभंगा ज़िला।
- A निराला
- B बच्चन
- C दिनकर
- D यात्री
Show answer
Why:
घुमक्कड़ी।
- A तीखा व्यंग्य
- B भक्ति के पद और भजन
- C दोहे लिखना
- D जुलाहे का काम
Show answer
Why:
समाज पर चोट।
- A वे केवल राजाओं और दरबारों के लिए लिखते थे
- B उनकी कविता आम लोगों में लोकप्रिय रही
- C वे केवल अंग्रेज़ी में लिखते थे
- D उन्होंने कविता छापी नहीं
Show answer
Why:
चौपाल से सभा तक।
- A बूढ़े व्यक्ति की ठहाके वाली हँसी
- B व्यंग्य भरी हँसी
- C नन्हे दाँतों वाली हँसी
- D नक़ली हँसी
Show answer
Why:
नए दाँत।
- A यमक
- B श्लेष
- C दृष्टांत अलंकार
- D अतिशयोक्ति
Show answer
Why:
बढ़ा-चढ़ाकर कहना।
- A बच्चे की गंदगी पर नाराज़गी जताने को
- B उसकी सहज, स्वाभाविक सुंदरता दिखाने को
- C माँ की लापरवाही बताने को
- D गाँव की ग़रीबी पर व्यंग्य करने को
Show answer
Why:
मिट्टी में खेलता बच्चा।
- A बच्चे से साधारण घर भी सुंदर हो गया
- B झोंपड़ी के पास नया तालाब बना है
- C कवि ने घर में फूल उगाए हैं
- D बारिश से झोंपड़ी भर गई
Show answer
Why:
जलजात।
- A गर्मी से चट्टानों का टूटकर बिखरना
- B नदी का रास्ता बदलना
- C बर्फ़ का गलना
- D कठोर मन का कोमल होना
Show answer
Why:
प्रतीक।
- A घने और हरे-भरे जंगल के
- B खेत की फ़सल के
- C शुष्क, नीरस मन के
- D नदी किनारे के
Show answer
Why:
सूखा और कँटीला।
- A गुलमोहर
- B हरसिंगार
- C अमलतास
- D रातरानी
Show answer
Why:
पारिजात।
- A वह कवि को पहचान नहीं पा रहा
- B कवि ने बच्चे को बहुत ज़ोर से डाँटा था
- C बच्चे को नींद आ रही थी
- D बच्चा खिलौना माँग रहा था
Show answer
Why:
नया चेहरा।
- A बच्चे पर गहरा ग़ुस्सा और नाराज़गी
- B जल्दबाज़ी
- C बच्चे की सुविधा का ध्यान
- D घमंड
Show answer
Why:
संवेदनशीलता।
- A बहुत दुखी और नाराज़ होने वाली
- B ग़ुस्से भरी
- C उदासीन
- D धैर्य भरी
Show answer
Why:
तो क्या हुआ।
- A पड़ोसी के
- B माँ के
- C पिता के
- D मित्र के
Show answer
Why:
माध्यम।
- A दोनों ने उसे यह सुख दिया
- B दोनों ने उसके लिए बहुत अच्छा भोजन बनाया
- C दोनों बहुत अमीर थे
- D दोनों गा रहे थे
Show answer
Why:
मुसकान का सुख।
- A वह इसी गाँव में जन्मा और कभी कहीं नहीं गया
- B वह विदेशी नागरिक है
- C वह लंबे समय से घर से दूर रहा
- D वह बीमार है
Show answer
Why:
इतर, अन्य।
- A मंदिर में होने वाली पूजा का
- B दवा पिलाने का
- C रसोई के काम का
- D माँ के मीठे, पोषक प्यार का
Show answer
Why:
पंचामृत।
- A गहरा ग़ुस्सा और खीज
- B संकोच और जिज्ञासा
- C डर और रोना
- D थकान
Show answer
Why:
तिरछी नज़र।
- A नज़रें मिलना
- B चश्मा लगाना
- C आँखें बंद करना
- D रो पड़ना
Show answer
Why:
मुहावरा।
- A आँखें कसकर मूँदकर
- B मुँह दूसरी ओर फेरकर
- C रोते हुए
- D बिना पलक झपकाए
Show answer
Why:
एकटक।
- A अनुप्रास
- B उत्प्रेक्षा
- C दृष्टांत अलंकार
- D श्लेष
Show answer
Why:
ध की आवृत्ति।
- A तीखा और कटु व्यंग्यकार वाला
- B कोमल, स्नेही
- C राजनीतिक भाषण
- D हास्य
Show answer
Why:
वात्सल्य।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
चिर प्रवासी।
- A केवल I और III
- B केवल I और II
- C केवल II और III
- D I, II और III तीनों
Show answer
Why:
बच्चा पहचान नहीं पाता।
Important short questions (7)
संस्कृत पाठशाला के बाद नागार्जुन पढ़ने के लिए बनारस और कलकत्ता गए। सन् 1936 में वे श्रीलंका पहुँचे और बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए। लौटकर उन्होंने घुमक्कड़ स्वभाव के कारण कई बार पूरे भारत की यात्रा की।
कवि का मन, जो लंबे संघर्षों से कठोर और रूखा हो चुका था, कोमल हो उठता है। उसे लगता है जैसे पत्थर पिघल गया हो और बबूल से फूल झरने लगे हों। उसके मन में प्यार और आनंद उमड़ आता है।
कमल तालाब में खिलता है, झोंपड़ी में नहीं। पर बच्चे की सुंदरता से कवि को अपनी साधारण झोंपड़ी भी कमलों से भरी लगती है। यानी बच्चे से ग़रीब घर भी सुंदर हो उठता है।
बच्चा अनजान कवि को एकटक देखते-देखते शायद थक गया है। कवि उसकी सुविधा का ध्यान रखता है और उस पर अपना प्यार थोपना नहीं चाहता। इसलिए वह पूछता है कि क्या मैं नज़र हटा लूँ।
कवि लंबे समय से घर से बाहर रहा है, इसलिए बच्चे के लिए वह अजनबी है। इतर और अन्य का अर्थ है दूसरा या पराया। इन शब्दों से कवि स्वीकार करता है कि वह इस घर में मेहमान जैसा है।
माँ कवि और बच्चे के बीच प्यार का पुल बनती है। उसके कारण ही कवि बच्चे की मुसकान देख और जान पाता है। माँ ही बच्चे को रोज़ अपनी उँगलियों से मीठा प्यार देती है।
बच्चा संकोच के कारण कवि को सीधे नहीं, तिरछी नज़र से देखता है। फिर जब दोनों की नज़रें मिलती हैं, तो वह मुसकरा देता है। उस पल वह मुसकान कवि को बहुत सुंदर लगती है।
Long answer questions (3)
कवि बच्चे की मुसकान का असर एक के बाद एक कई चित्रों में दिखाता है। पहले वह कहता है कि यह मुसकान मरे हुए में भी जान डाल दे। यानी यह थके और उदास मन में भी जीवन भर देती है। फिर वह कहता है कि उसकी झोंपड़ी में तालाब छोड़कर कमल खिल रहे हैं। बच्चे की सुंदरता से साधारण घर भी सुंदर हो गया है। इसके बाद वह कल्पना करता है कि बच्चे के स्पर्श से कठोर पत्थर पिघलकर पानी बन गया। यह कठोर मन के कोमल होने का संकेत है। अंत में वह कहता है कि बाँस या बबूल से भी शेफालिका के फूल झरने लगे। सूखे और कँटीले मन में भी प्यार के फूल खिल उठे। ये सब चित्र एक ही भाव को दिखाते हैं: बच्चे की निश्छल मुसकान कठोर, नीरस और निर्जीव को भी जीवंत बना देती है।
नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था। उनका जन्म सन् 1911 में सतलखा नाम के गाँव में हुआ, जो दरभंगा ज़िले में है। बनारस और कलकत्ता में पढ़ने के बाद वे श्रीलंका गए और बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। घुमक्कड़ और अक्खड़ स्वभाव के कारण उन्होंने बार-बार पूरे देश की यात्रा की और राजनीतिक सक्रियता के कारण जेल भी गए। सन् 1998 में उनका देहांत हुआ। वे हिंदी और मैथिली में बराबर लिखते थे और मैथिली में यात्री नाम से प्रसिद्ध हैं। युगधारा, सतरंगे पंखों वाली और तुमने कहा था उनकी चर्चित कृतियाँ हैं। उनका साहित्य सात खंडों की रचनावली में है। उनकी कविता आम लोगों के जीवन से गहराई से जुड़ी है। भ्रष्टाचार और स्वार्थी राजनीति पर तीखे व्यंग्य के कारण उन्हें आधुनिक कबीर कहा गया। गाँव की चौपाल और विद्वानों की सभा, दोनों में लोकप्रिय होने के कारण वे सच्चे जनकवि हैं।
पिछले साल परीक्षा के परिणाम आए, तो मेरे अंक उम्मीद से कम थे। घर लौटकर मेरा किसी से बात करने का मन नहीं था, बस अपने कमरे में चुप बैठे रहने का मन था। तभी मेरी मौसी अपने आठ-नौ महीने के बेटे को लेकर आईं। वह मुझे पहली बार देख रहा था, इसलिए कुछ देर एकटक देखता रहा। फिर अचानक उसने अपने दो नन्हे दाँत दिखाते हुए हँस दिया। उस पल मेरा सारा दुख जैसे पिघल गया। मेरे चेहरे पर भी हँसी आ गई, और अगला पूरा घंटा उसके साथ खेलते हुए बीता। तब मुझे यह दंतुरित मुसकान कविता का भाव सच में समझ आया। कवि का कठोर मन जैसे बच्चे की हँसी से कोमल हुआ, वैसे ही मेरा उदास मन भी हल्का हो गया। बच्चे की हँसी में सच में जीवन का संदेश छिपा होता है।
Flashcards (17)
Play this topic
- शब्द और अर्थ
- किसके बारे में?
- सही या भ्रम
- कविता का क्रम
- झटपट उत्तर
फसल: प्रकृति और मनुष्य का साझा सृजन
फसल कविता बताती है कि खेत में उगी फसल किसी एक की देन नहीं है। उसमें अनगिनत नदियों का पानी, लाखों किसानों की मेहनत, तरह-तरह की मिट्टी, सूरज की किरणें और हवा, सबका योगदान है।
What you will be able to do
- कवि के अनुसार फसल का अर्थ और उसके पीछे छिपे सभी तत्वों को पहचान सकेंगे।
- एक के नहीं, दो के नहीं वाली शैली के ज़रिए व्यापकता और सामूहिकता का भाव समझा सकेंगे।
- हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा के माध्यम से किसान के श्रम का महत्त्व बता सकेंगे।
- सूरज की किरणों के रूपांतर और हवा की थिरकन वाले बिंबों का भाव स्पष्ट कर सकेंगे।
- मिट्टी के गुण-धर्म, कृषि-संस्कृति और आज की उपभोक्ता जीवन-शैली के संबंध पर विचार कर सकेंगे।
Key points
कवि बताता है कि फसल में किसी एक या दो नहीं, बल्कि ढेर सारी नदियों के पानी का जादू समाया है।
लाखों-करोड़ों किसानों के हाथों की मेहनत और उनके स्पर्श की गरिमा भी फसल में शामिल है।
हज़ारों खेतों की भूरी, काली और संदली मिट्टी का गुण-धर्म फसल को पोषण देता है।
सूरज की किरणें पौधों में बदलकर अन्न बनती हैं; इसलिए फसल को किरणों का रूपांतर कहा गया है।
हवा की थिरकन भी फसल में सिमटकर बैठी है; यानी हवा ने भी फसल को बढ़ने में मदद दी है।
कविता का मूल संदेश है कि प्रकृति और मनुष्य, दोनों के सहयोग से ही कोई सृजन संभव होता है।
एक के नहीं, दो के नहीं की दोहराई गई शैली कविता में लय भी लाती है और व्यापकता भी बताती है।
कविता बोलचाल की भाषा में है; उसकी सहज गति और लय उसे प्रभावशाली बनाती है।
उपभोक्ता-संस्कृति के इस दौर में यह कविता हमें फिर से खेती, किसान और मिट्टी के क़रीब ले जाती है।
Full explanation
फसल कविता की पृष्ठभूमि
फसल शब्द सुनते ही हमारी आँखों के सामने हरे-भरे, लहलहाते खेत आ जाते हैं। पर हम कम ही सोचते हैं कि यह फसल बनी कैसे। हमारी थाली में आई रोटी या चावल के पीछे किन-किन की मेहनत छिपी है? नागार्जुन अपनी कविता फसल में इसी सवाल का जवाब खोजते हैं।
कवि का कहना है कि फसल किसी एक व्यक्ति या एक चीज़ से पैदा नहीं होती। उसमें प्रकृति के बहुत-से तत्व और करोड़ों मनुष्यों का श्रम शामिल है। इस तरह कविता एक बड़ा सच सामने रखती है: कोई भी सृजन, कोई भी निर्माण, प्रकृति और मनुष्य के सहयोग से ही संभव है। अकेले न प्रकृति फसल उगा सकती है, न अकेला मनुष्य।
यह कविता नागार्जुन के जनकवि वाले रूप से गहरे जुड़ी है। वे गाँव, खेत और किसान के जीवन को बहुत क़रीब से जानते थे। उनकी कविता में किसान कोई दूर का पात्र नहीं, बल्कि समाज की नींव है। फसल कविता उसी किसान और उसकी धरती को सम्मान देती है।
एक के नहीं, दो के नहीं: व्यापकता की शैली
कविता की शुरुआत एक ख़ास ढंग से होती है। कवि बार-बार कहता है कि यह एक का नहीं, दो का नहीं है। फिर वह बताता है कि असल में यह बहुत सारे लोगों और चीज़ों का है। यह शैली पढ़ने वाले को धीरे-धीरे एक बड़ी तस्वीर की ओर ले जाती है।
पहले कवि पानी की बात करता है। वह कहता है कि फसल में किसी एक-दो नदियों का नहीं, बल्कि ढेर सारी नदियों के पानी का जादू है। भारत की गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा जैसी अनगिनत नदियाँ खेतों को सींचती हैं। पानी के बिना बीज अंकुरित ही नहीं हो सकता। इसलिए कवि पानी को जादू कहता है, जो सूखे बीज में जान डाल देता है।
फिर कवि मनुष्य के श्रम की बात करता है। वह कहता है कि फसल में लाखों-करोड़ों हाथों के स्पर्श की गरिमा है। जुताई, बुवाई, सिंचाई, निराई, कटाई, हर काम में किसानों के हाथ लगते हैं। लाख-लाख और कोटि-कोटि जैसे शब्द बताते हैं कि यह मेहनत कितनी बड़ी और सामूहिक है।
तीसरी बार कवि मिट्टी की ओर आता है। फसल में किसी एक-दो खेतों की नहीं, बल्कि हज़ारों खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म है। इस तरह एक, दो, फिर हज़ार, लाख और कोटि जैसे शब्द एक ऊँचाई की तरह बढ़ते जाते हैं। यह दोहराव कविता में एक लय भी पैदा करता है, जो लोकगीत जैसी लगती है।
फसल क्या है? कवि का उत्तर
इसके बाद कवि सीधा सवाल पूछता है: फसल आख़िर है क्या? और फिर ख़ुद ही जवाब देता है। यह प्रश्नोत्तर शैली कविता को बहुत असरदार बनाती है। पढ़ने वाला सवाल के साथ रुकता है, सोचता है, और फिर कवि का उत्तर सुनता है।
कवि का उत्तर है कि फसल असल में अनेक नदियों के जल का जादू है। उसमें किसानों के हाथों से मिली महिमा भी है। वह भूरी, काली और संदली मिट्टी का गुण-धर्म है। वह सूरज की किरणों का बदला हुआ रूप है। और वह हवा की थिरकन का सिमटा हुआ संकोच है।
ध्यान दीजिए कि कविता के पहले हिस्से में कवि ने हाथों के स्पर्श की गरिमा कहा था, और दूसरे हिस्से में महिमा कहता है। गरिमा का अर्थ है गौरव या सम्मान, और महिमा का अर्थ है महानता या बड़प्पन। दोनों शब्दों से कवि बताता है कि किसान का श्रम केवल मेहनत नहीं है, बल्कि सम्मान के योग्य एक महान काम है। जो हाथ फसल उगाते हैं, वे पूरे समाज का पेट भरते हैं।
मिट्टी का गुण-धर्म: भूरी, काली, संदली
कवि ने मिट्टी के तीन रंग गिनाए हैं: भूरी, काली और संदली। भारत के अलग-अलग इलाक़ों में मिट्टी अलग-अलग होती है। कहीं नदियों की लाई भूरी जलोढ़ मिट्टी है, कहीं काली मिट्टी, तो कहीं चंदन जैसी हल्की पीली मिट्टी। हर मिट्टी की अपनी ख़ासियत है, और हर मिट्टी कोई न कोई फसल उगाती है।
गुण-धर्म का अर्थ है किसी चीज़ का स्वभाव और उसकी ताक़त। मिट्टी का गुण-धर्म है बीज को सँभालना, उसे पोषण देना और पौधे को खड़ा रहने की ज़मीन देना। मिट्टी में खनिज, नमी और सूक्ष्म जीव होते हैं, जो पौधे को बढ़ने में मदद करते हैं। अगर मिट्टी अपना यह स्वभाव छोड़ दे, तो फसल ही नहीं, धरती पर जीवन भी संकट में पड़ जाए।
आज के समय में यह बात और ज़रूरी हो जाती है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों का ज़्यादा इस्तेमाल, प्लास्टिक का कचरा और पेड़ों की कटाई मिट्टी की ताक़त को कम कर रहे हैं। इसलिए मिट्टी के गुण-धर्म को बचाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। जैविक खाद, फसल-चक्र, पेड़ लगाना और कचरा कम करना इसमें मदद कर सकते हैं।
सूरज की किरणों का रूपांतर
कवि कहता है कि फसल सूरज की किरणों का रूपांतर है। रूपांतर का अर्थ है एक रूप का दूसरे रूप में बदल जाना। सूरज की धूप पौधों की हरी पत्तियों पर पड़ती है। पौधे उस रोशनी, पानी और हवा से अपना भोजन बनाते हैं और बढ़ते हैं। धीरे-धीरे वही ऊर्जा दानों में जमा होती है।
यानी जो अनाज हम खाते हैं, उसमें असल में सूरज की ऊर्जा ही छिपी है। विज्ञान इसे प्रकाश-संश्लेषण कहता है, और कवि इसे किरणों का रूपांतर कहता है। यह बहुत सुंदर बात है कि एक कवि विज्ञान के सच को इतने सहज और काव्यात्मक ढंग से कह देता है। सुनहरे गेहूँ की बालियाँ जैसे सूरज की किरणों का ही दूसरा रूप लगती हैं।
हवा की थिरकन का सिमटा संकोच
कविता की अंतिम पंक्ति सबसे गहरी है। कवि कहता है कि फसल हवा की थिरकन का सिमटा हुआ संकोच है। थिरकन का अर्थ है नाचना या हल्के-हल्के हिलना। जब हवा चलती है, तो खेत की फसल लहराती है, जैसे नाच रही हो। हवा परागण में मदद करती है, पौधों को साँस देती है और उन्हें मज़बूत बनाती है।
सिमटा हुआ संकोच का अर्थ है कि हवा की वह सारी चंचलता और नाच फसल के भीतर समा गया है। जैसे कोई चंचल चीज़ शरमाकर सिमट जाए, वैसे ही हवा की थिरकन फसल के दानों में सिमट गई है। यहाँ हवा का मानवीकरण किया गया है, क्योंकि संकोच मनुष्य का भाव है।
इन दो बिंबों से कवि दिखाता है कि फसल में केवल ठोस चीज़ें, जैसे मिट्टी और पानी, ही नहीं, बल्कि अदृश्य चीज़ें, जैसे धूप और हवा, भी शामिल हैं। प्रकृति का हर तत्व फसल में अपना हिस्सा डालता है। इसलिए फसल प्रकृति का सबसे सुंदर उपहार है।
कविता का संदेश: कृषि-संस्कृति की ओर वापसी
आज हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहाँ लोग चीज़ें ख़रीदते और इस्तेमाल करते हैं, पर यह नहीं सोचते कि वे बनीं कैसे। दुकान से पैकेट में आटा या चावल लाते समय हमें खेत, किसान और मिट्टी याद नहीं आते। इसे उपभोक्ता-संस्कृति कहा जाता है।
फसल कविता हमें इसी दौर में फिर से खेती की दुनिया के पास ले जाती है। वह याद दिलाती है कि हर दाने के पीछे नदियों का पानी, किसानों का पसीना, मिट्टी का पोषण, सूरज की धूप और हवा का स्पर्श है। जब हम यह समझते हैं, तो भोजन का सम्मान करना, उसे बर्बाद न करना और किसान का आदर करना सीखते हैं।
कविता यह भी सिखाती है कि प्रकृति और मनुष्य एक-दूसरे के साथी हैं, विरोधी नहीं। अगर मनुष्य प्रकृति का शोषण करेगा, तो फसल नहीं उगेगी। और अगर मनुष्य मेहनत नहीं करेगा, तो प्रकृति अकेले खेत नहीं जोत सकती। यही सहयोग जीवन का आधार है।
दोनों कविताओं का शिल्प और तुलना
फसल की भाषा बोलचाल की खड़ी बोली है। एक के नहीं, दो के नहीं का दोहराव कविता में एक लय और गति पैदा करता है। फसल क्या है? जैसा सवाल प्रश्नोत्तर शैली का उदाहरण है। लाख-लाख, कोटि-कोटि और हज़ार-हज़ार में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। हवा की थिरकन के सिमटे संकोच में मानवीकरण है, और मिट्टी के तीन रंगों में सुंदर दृश्य-बिंब है।
अगर दोनों कविताओं की तुलना करें, तो यह दंतुरित मुसकान एक बच्चे के निजी, घरेलू और कोमल अनुभव की कविता है। उसमें वात्सल्य और प्रेम का भाव है। फसल एक बड़े, सामाजिक और प्राकृतिक सच की कविता है, जिसमें पूरे देश के किसान, नदियाँ और खेत शामिल हैं। एक कविता घर के भीतर की है, तो दूसरी पूरे देश के खेतों की।
फिर भी दोनों में एक गहरी समानता है। दोनों कविताएँ जीवन और सृजन का उत्सव मनाती हैं। एक में बच्चे की मुसकान कठोर मन में जीवन भरती है, तो दूसरी में प्रकृति और मनुष्य मिलकर धरती पर अन्न उगाते हैं। दोनों में नागार्जुन का वह मन दिखता है, जो साधारण चीज़ों में असाधारण सौंदर्य खोज लेता है।
Concepts and terms
ऐसा निर्माण, जिसमें बहुत-से लोगों और तत्वों का हाथ हो। फसल प्रकृति और लाखों किसानों का सामूहिक सृजन है।
किसी चीज़ का स्वभाव और उसकी ख़ास क्षमता। मिट्टी का गुण-धर्म है उपजाऊ होना और बीज को पोषण देना।
एक रूप का बदलकर दूसरा रूप बन जाना। सूरज की किरणें पौधों में बदलकर अन्न का रूप ले लेती हैं।
खेती, मिट्टी, पशु और प्रकृति से जुड़ी जीवन-शैली, जिसमें श्रम और धरती का सम्मान हो।
ऐसी जीवन-शैली, जिसमें चीज़ों को केवल ख़रीदने और इस्तेमाल करने पर ज़ोर हो, उनके बनने की मेहनत पर नहीं।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
विद्यालय के इको-क्लब ने पास के गाँव में एक दिन की खेत-यात्रा रखी। वहाँ किसान रामदुलारी जी ने बच्चों को अपना गेहूँ का खेत दिखाया। उन्होंने बताया कि वे नहर के पानी से सिंचाई करती हैं और गोबर की खाद डालती हैं।
रामदुलारी जी ने यह भी बताया कि पड़ोस के खेत वाले ने कई साल तक बहुत ज़्यादा रासायनिक खाद डाली। अब उसकी मिट्टी सख़्त हो गई है और पैदावार घट गई है। उन्होंने बच्चों को मुट्ठी भर अपनी नरम, भुरभुरी मिट्टी और पड़ोसी की सख़्त मिट्टी, दोनों छूने को दीं।
लौटते समय समीर ने कहा कि उसने आज पहली बार सोचा कि उसकी रोटी में कितने लोगों और चीज़ों का हाथ है।
Activity:
अपने घर के एक दिन के भोजन की सूची बनाइए। हर चीज़ के आगे लिखिए कि उसे बनाने में कौन-कौन से प्राकृतिक तत्व और किन-किन लोगों की मेहनत लगी।
Analysis:
जब हम भोजन के पीछे की पूरी यात्रा समझते हैं, तो उसे बर्बाद करना कम होता है और किसान व प्रकृति के प्रति सम्मान बढ़ता है। फसल कविता यही दृष्टि देती है।
Did you know
पौधे सूरज की रोशनी, हवा की कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से अपना भोजन बनाते हैं। इसे प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं, और कविता का किरणों का रूपांतर इसी सच को कविता की भाषा में कहता है।
भारत में मिट्टी कई तरह की होती है, जैसे जलोढ़, काली, लाल और रेतीली। काली मिट्टी कपास के लिए और जलोढ़ मिट्टी गेहूँ-धान के लिए बहुत उपजाऊ मानी जाती है।
एक चम्मच उपजाऊ मिट्टी में करोड़ों सूक्ष्म जीव रहते हैं। यही जीव मिट्टी को ज़िंदा और पोषक बनाए रखते हैं।
Memory tricks
फसल के पाँच साथी: न-हा-मि-सू-ह — नदी, हाथ, मिट्टी, सूरज, हवा। नहा मिसूह, फसल के पाँच साथी।
मिट्टी के तीन रंग: भू-का-सं — भूरी, काली, संदली।
Practice MCQs with answers (25)
- A केवल अकेले किसान की
- B केवल सरकार की
- C प्रकृति और मनुष्य की
- D केवल बाज़ार की
Show answer
Why:
साझा सृजन।
- A फसल केवल दो किसानों की मेहनत है
- B कवि गिनती भूल गया
- C फसल बहुत कम है
- D फसल अनगिनत की देन है
Show answer
Why:
व्यापकता।
- A पानी सूखे बीज में जान डालता है
- B पानी से जादूगर बहुत-से खेल दिखाते हैं
- C नदियाँ अचानक ग़ायब हो जाती हैं
- D पानी रंग बदलता है
Show answer
Why:
अंकुरण।
- A मशीनों और कारख़ानों के मज़दूर
- B किसानों का सामूहिक श्रम
- C सेना के जवान
- D व्यापारियों का धन
Show answer
Why:
मेहनत।
- A किसान को हाथों से खेती छोड़ देनी चाहिए
- B हाथ गंदे हो जाते हैं
- C स्पर्श से फसल ख़राब होती है
- D किसान का श्रम सम्मान के योग्य है
Show answer
Why:
गौरव।
- A दो
- B तीन
- C चार
- D सात
Show answer
Why:
भूरी, काली, संदली।
- A कोयले से
- B आकाश से
- C चंदन से
- D हरी घास से
Show answer
Why:
संदल।
- A बीज को पोषण देने की क्षमता
- B मिट्टी को बाज़ार में बेचने की क़ीमत
- C मिट्टी का भारीपन
- D मिट्टी की गंध भर
Show answer
Why:
स्वभाव।
- A गुरुत्वाकर्षण
- B वाष्पीकरण
- C चुंबकत्व
- D प्रकाश-संश्लेषण
Show answer
Why:
पत्तियाँ भोजन बनाती हैं।
- A अतिशयोक्ति
- B उत्प्रेक्षा
- C मानवीकरण
- D अनुप्रास
Show answer
Why:
संकोच मनुष्य का भाव।
- A पौधों को साँस और परागण
- B फसल को जड़ से उखाड़कर ले जाना
- C केवल धूल उड़ाना
- D पानी सुखाना
Show answer
Why:
थिरकन।
- A आत्मकथा
- B प्रश्नोत्तर शैली
- C संवाद-नाटक
- D पत्र
Show answer
Why:
सवाल-जवाब।
- A उत्प्रेक्षा
- B दृष्टांत अलंकार
- C पुनरुक्ति प्रकाश
- D श्लेष
Show answer
Why:
शब्द दोहराए।
- A बोलचाल वाली
- B कठिन संस्कृत और ब्रजभाषा
- C अवधी
- D अंग्रेज़ी
Show answer
Why:
सहज लय।
- A बड़े शहरों के बाज़ारों में
- B कारख़ानों में
- C विदेश
- D खेती के क़रीब
Show answer
Why:
कृषि-संस्कृति।
- A कृषि-संस्कृति
- B उपभोक्ता-संस्कृति
- C लोक-संस्कृति
- D ग्राम-संस्कृति
Show answer
Why:
केवल इस्तेमाल।
- A केवल मिट्टी के रंग और बनावट
- B केवल गाड़ियों पर
- C धरती पर जीवन
- D केवल पहाड़ों पर
Show answer
Why:
अन्न नहीं।
- A उपजाऊपन घटता है
- B मिट्टी हमेशा के लिए और उपजाऊ हो जाती है
- C मिट्टी का रंग नीला हो जाता है
- D कोई असर नहीं
Show answer
Why:
सूक्ष्म जीव।
- A रंग चढ़ाना
- B टूट जाना
- C छिप जाना
- D रूप बदलना
Show answer
Why:
किरणें से अन्न।
- A थकान
- B गौरव
- C गंदगी
- D डर
Show answer
Why:
स्पर्श की गरिमा।
- A एक निजी, दूसरी सामाजिक
- B दोनों कविताएँ अलग-अलग कवियों की हैं
- C दोनों ब्रज में हैं
- D दोनों दोहे हैं
Show answer
Why:
घर बनाम देश।
- A निराशा, शोक और गहरा अकेलापन
- B युद्ध
- C जीवन और सृजन का उत्सव
- D हास्य
Show answer
Why:
साधारण में सुंदर।
- A मनुष्य अकेले ही सब कुछ कर सकता है
- B प्रकृति बेकार है
- C खेती छोड़ दें
- D सहयोग से ही सृजन
Show answer
Why:
प्रकृति और मनुष्य।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
प्रकाश-संश्लेषण।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III तीनों
Show answer
Why:
हज़ारों खेत।
Important short questions (7)
कवि के अनुसार फसल में ढेर सारी नदियों का पानी, लाखों किसानों के हाथों की मेहनत और हज़ारों खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म है। इसके साथ सूरज की किरणें और हवा की थिरकन भी उसमें समाई है।
यह दोहराव बताता है कि फसल किसी एक-दो की नहीं, अनगिनत नदियों, हाथों और खेतों की देन है। इससे कविता में व्यापकता आती है। साथ ही दोहराव से लोकगीत जैसी लय भी बनती है।
किसान जुताई से कटाई तक हर काम अपने हाथों से करते हैं और पूरे समाज का पेट भरते हैं। उनका यह श्रम केवल मेहनत नहीं, बल्कि महान और सम्मान के योग्य काम है। इसलिए कवि इसे महिमा कहता है।
मिट्टी का गुण-धर्म उसका वह स्वभाव है, जिससे वह बीज को सँभालती और पोषण देती है। उसमें खनिज, नमी और सूक्ष्म जीव होते हैं। यही गुण पौधे को बढ़ने और फसल को पकने में मदद करते हैं।
हवा चलने पर फसल लहराती है, जैसे नाच रही हो। हवा की यह चंचलता और नाच फसल के भीतर समा गया है। जैसे कोई चंचल चीज़ शरमाकर सिमट जाए, वैसे ही हवा फसल में सिमट गई है।
रासायनिक खाद और कीटनाशकों का ज़्यादा प्रयोग मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को नष्ट करता है। प्लास्टिक का कचरा मिट्टी में घुलता नहीं, और पेड़ कटने से मिट्टी बहकर चली जाती है। इससे मिट्टी का उपजाऊपन घटता है।
कविता बोलचाल की सहज खड़ी बोली में है, जिससे वह आम पाठक तक आसानी से पहुँचती है। एक के नहीं, दो के नहीं जैसे दोहराव और प्रश्नोत्तर शैली उसकी लय और असर को बढ़ाते हैं।
Long answer questions (3)
फसल कविता बताती है कि खेत में उगी फसल किसी अकेले की देन नहीं है। उसमें प्रकृति के कई तत्व हैं। नदियों का पानी बीज में जान डालता है, अलग-अलग रंगों की मिट्टी उसे पोषण देती है, सूरज की किरणें पौधे में ऊर्जा भरती हैं और हवा उसे साँस देती है। पर केवल प्रकृति से फसल नहीं उगती। लाखों-करोड़ों किसानों के हाथ खेत जोतते, बीज बोते, सिंचाई करते और फसल काटते हैं। कवि इसे हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा कहता है। अगर प्रकृति साथ न दे, तो किसान की मेहनत बेकार है, और अगर किसान मेहनत न करे, तो प्रकृति अकेले खेत नहीं जोत सकती। यही सच हर सृजन पर लागू होता है। घर, पुल, कपड़ा या कोई भी निर्माण प्रकृति के संसाधनों और मनुष्य के श्रम, दोनों से बनता है। इसलिए दोनों का सहयोग ही जीवन का आधार है।
यह दंतुरित मुसकान एक निजी और घरेलू अनुभव की कविता है। उसमें लंबे प्रवास से लौटे कवि और एक नन्हे बच्चे की पहली मुलाक़ात है। उसका भाव वात्सल्य और कोमल प्रेम है, और उसके बिंब, जैसे कमल, पत्थर और फूल, मन के बदलाव को दिखाते हैं। फसल एक व्यापक और सामाजिक कविता है। उसमें पूरे देश की नदियाँ, खेत और करोड़ों किसान शामिल हैं। उसका भाव श्रम का सम्मान और प्रकृति के प्रति आभार है। इसकी शैली में दोहराव और प्रश्नोत्तर है। अंतर के बावजूद दोनों कविताओं में गहरी समानता है। दोनों जीवन और सृजन का उत्सव मनाती हैं। एक में मुसकान कठोर मन में जीवन भरती है, दूसरी में प्रकृति और मनुष्य मिलकर अन्न उगाते हैं। दोनों में नागार्जुन की सहज भाषा और साधारण में सुंदरता खोजने वाली दृष्टि दिखती है।
सेवा में, संपादक महोदय, जन-आवाज़ समाचार-पत्र। विषय: किसानों की स्थिति सुधारने के लिए सुझाव। महोदय, इस पत्र का उद्देश्य आपके पाठकों का ध्यान किसानों की कठिनाइयों की ओर दिलाना है। आज कई किसान महँगे बीज, अनियमित बारिश और फसल के कम दाम से परेशान हैं। मेरा पहला सुझाव है कि हर गाँव में मिट्टी-जाँच की सुविधा हो, ताकि किसान सही खाद चुन सकें। दूसरा, छोटे किसानों के लिए सस्ते ऋण और फसल-बीमा आसान बनाया जाए। तीसरा, गाँवों में भंडार-घर और सीधी बिक्री वाली मंडियाँ बनें, ताकि बिचौलिए कम हों। चौथा, खेती में काम करने वाली महिलाओं को किसान के रूप में पहचान और प्रशिक्षण मिले। अंत में, स्कूलों में भी बच्चों को खेती और किसान के महत्त्व के बारे में पढ़ाया जाए। धन्यवाद। भवदीय, एक विद्यार्थी, कक्षा दस।
Flashcards (17)
Play this topic
- शब्द और अर्थ
- फसल का कौन-सा योगदानकर्ता?
- सही या भ्रम
- कविता का क्रम
- झटपट उत्तर
Class 10 Hindi Chapter 5 — frequently asked questions
संस्कृत पाठशाला के बाद नागार्जुन पढ़ने के लिए बनारस और कलकत्ता गए। सन् 1936 में वे श्रीलंका पहुँचे और बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए। लौटकर उन्होंने घुमक्कड़ स्वभाव के कारण कई बार पूरे भारत की यात्रा की।
कवि का मन, जो लंबे संघर्षों से कठोर और रूखा हो चुका था, कोमल हो उठता है। उसे लगता है जैसे पत्थर पिघल गया हो और बबूल से फूल झरने लगे हों। उसके मन में प्यार और आनंद उमड़ आता है।
कमल तालाब में खिलता है, झोंपड़ी में नहीं। पर बच्चे की सुंदरता से कवि को अपनी साधारण झोंपड़ी भी कमलों से भरी लगती है। यानी बच्चे से ग़रीब घर भी सुंदर हो उठता है।
कवि के अनुसार फसल में ढेर सारी नदियों का पानी, लाखों किसानों के हाथों की मेहनत और हज़ारों खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म है। इसके साथ सूरज की किरणें और हवा की थिरकन भी उसमें समाई है।
यह दोहराव बताता है कि फसल किसी एक-दो की नहीं, अनगिनत नदियों, हाथों और खेतों की देन है। इससे कविता में व्यापकता आती है। साथ ही दोहराव से लोकगीत जैसी लय भी बनती है।
किसान जुताई से कटाई तक हर काम अपने हाथों से करते हैं और पूरे समाज का पेट भरते हैं। उनका यह श्रम केवल मेहनत नहीं, बल्कि महान और सम्मान के योग्य काम है। इसलिए कवि इसे महिमा कहता है।
All Class 10 Hindi chapters
All Hindi chapters · Every Class 10 subject · The whole NCERT library
Study this chapter properly, free
Everything above is on this page to read. In the Veda app the same chapter becomes spaced-repetition flashcards, timed tests that mark themselves, Veda Bites you can swipe, and games — with your progress tracked topic by topic.
Get Veda free