Class 10 Hindi Chapter 4: उत्साह और अट नहीं रही है
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निराला और गरजता बादल: उत्साह
उत्साह एक आह्वान गीत है, जिसमें कवि बादल से बरसने के बजाय गरजने को कहता है। बादल एक ओर तपती धरती और प्यासे लोगों को जल देता है, तो दूसरी ओर उसके भीतर बिजली और वज्र छिपा है, जो पुराने को तोड़कर नया जीवन लाता है।
What you will be able to do
- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जीवन, संघर्ष, रचनाओं और काव्य-विशेषताओं के बारे में बता सकेंगे।
- आह्वान गीत का अर्थ समझते हुए बता सकेंगे कि कवि बादल से गरजने को क्यों कहता है।
- कविता में बादल के दो रूपों, यानी जल देने वाले और क्रांति लाने वाले, की व्याख्या कर सकेंगे।
- बादल और कवि की समानता, यानी नवजीवन और नूतन कविता, का भाव स्पष्ट कर सकेंगे।
- घेर घेर घोर गगन जैसे शब्दों में नाद-सौंदर्य और अनुप्रास पहचान सकेंगे।
Key points
निराला का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ, पर वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के गढ़ाकोला गाँव के थे।
उनकी स्कूली पढ़ाई नौवीं तक हुई; बाद में उन्होंने स्वाध्याय से संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी सीखी; रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद का उन पर गहरा असर था।
उनका पारिवारिक जीवन दुखों से भरा रहा, अपनों की असमय मृत्यु ने उन्हें तोड़ा; सन् 1961 में उनका देहांत हुआ।
अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते उनकी प्रमुख काव्य-रचनाएँ हैं; छायावादी कवियों में सबसे पहले मुक्त छंद उन्होंने ही अपनाया।
उत्साह एक आह्वान गीत है; कवि बादल को पुकारकर कहता है कि गरजो, और पूरे आकाश को घेर लो।
कवि बादलों को सुंदर, काले, घुँघराले बालों जैसा और बच्चे की कल्पना की तरह पले हुए बताता है।
बादल के हृदय में बिजली की चमक है और भीतर वज्र छिपा है; कवि उससे कहता है कि नई कविता भर दो।
गर्मी से सारे लोग बेचैन और अनमने हैं; अनंत आकाश के बादल अनजानी दिशा से आए हैं, और कवि उनसे तपती धरती को शीतल करने को कहता है।
बादल यहाँ प्यासे लोगों की आशा पूरी करने वाला भी है और पुराने को तोड़कर क्रांति लाने वाला भी; कवि ख़ुद को भी नवजीवन वाला मानता है।
Full explanation
निराला: संघर्ष में तपे विद्रोही कवि
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ। पर उनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के गढ़ाकोला गाँव का था। उनकी औपचारिक पढ़ाई महिषादल में ही नौवीं कक्षा तक हुई। इसके बाद उन्होंने ख़ुद पढ़-पढ़कर संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी भाषाएँ सीखीं। वे संगीत और दर्शनशास्त्र के भी गहरे जानकार थे।
निराला के विचारों पर रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद का गहरा प्रभाव था। उनसे उन्होंने मनुष्य की सेवा और आत्म-शक्ति का भाव पाया। पर निराला का निजी जीवन बहुत दुख भरा रहा। उनकी पत्नी और बेटी सरोज समेत कई प्रियजन असमय चल बसे, जिससे वे भीतर तक टूट गए। साहित्य की दुनिया में भी उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ा। सन् 1961 में उनका देहांत हुआ।
अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते उनके प्रसिद्ध काव्य-संग्रह हैं। उन्होंने उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध भी लिखे। उनका सारा साहित्य निराला रचनावली के आठ खंडों में प्रकाशित है। यानी वे केवल कवि नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के हर क्षेत्र में सक्रिय रहे।
निराला की कविता का संसार बहुत बड़ा है। उसमें दर्शन है, विद्रोह और क्रांति है, प्रेम की कोमलता है और प्रकृति का विशाल, भव्य चित्र भी। उनके विद्रोही स्वभाव ने कविता के भाव और शिल्प, दोनों में नए प्रयोग किए। छायावाद के कवियों में मुक्त छंद सबसे पहले उन्होंने ही अपनाया। उनकी कविता में शोषितों और पीड़ितों के लिए गहरी सहानुभूति है, तो अन्याय करने वाली सत्ता के ख़िलाफ़ तीखा ग़ुस्सा भी।
उत्साह: बादल को पुकारता एक गीत
उत्साह एक आह्वान गीत है। आह्वान का अर्थ है पुकारना, बुलाना या जगाना। इस कविता में कवि बादल को पुकारता है और उससे कहता है कि गरजो! बादल निराला का बहुत प्रिय विषय है। उन्होंने बादल पर कई कविताएँ लिखी हैं, जिनमें बादल कभी जीवन देने वाला है, तो कभी क्रांति लाने वाला।
कविता का शीर्षक उत्साह बहुत सोच-समझकर रखा गया है। पूरी कविता में एक जोश, एक ऊर्जा है। कवि बादल से धीमी फुहार या रिमझिम नहीं माँगता, बल्कि उसे ज़ोर से गरजने को कहता है। यह गर्जन उत्साह का प्रतीक है, जो सोए हुए लोगों को जगाता है और उनमें नई ताक़त भरता है। इसलिए कविता का नाम उत्साह बिल्कुल सटीक है।
कवि कहता है कि हे धाराधर, आकाश को घेर-घेरकर घोर गर्जन करो। धाराधर का अर्थ है बादल, यानी जल की धाराएँ धारण करने वाला। घेर घेर घोर गगन जैसे शब्दों में ध्वनि ही बादलों की गड़गड़ाहट जैसी लगती है। कवि चाहता है कि बादल पूरे आकाश पर छा जाए और उसका गर्जन चारों ओर गूँजे।
सुंदर बादल, बालक की कल्पना और नवजीवन
फिर कवि बादलों की सुंदरता का वर्णन करता है। वह उन्हें ललित, यानी सुंदर, काले और घुँघराले बताता है। बादल ऐसे लगते हैं, जैसे किसी के सुंदर, काले, घुँघराले बाल हों। यह एक कोमल और प्यारा चित्र है, जो बादल के भयंकर गर्जन के साथ एक विरोध भी रचता है।
कवि यह भी कहता है कि ये बादल बाल-कल्पना के समान पाले हुए हैं। बच्चे की कल्पना बहुत बड़ी, रंगीन और बेरोक-टोक होती है। बादल भी वैसे ही आकाश में उमड़ते-घुमड़ते, नए-नए आकार लेते हैं। यानी बादलों में बच्चे की कल्पना जैसी आज़ादी और नयापन है।
इसके बाद कवि बादल को सीधे कवि कहकर पुकारता है। वह कहता है कि तुम्हारे हृदय में बिजली की चमक है, और तुम नवजीवन वाले हो। यहाँ बादल और कवि एक हो जाते हैं। जैसे बादल धरती को नया जीवन देता है, वैसे ही कवि अपनी कविता से समाज को नया जीवन देता है। बिजली की चमक कवि की प्रतिभा और प्रेरणा का प्रतीक है।
छिपा हुआ वज्र और नूतन कविता
कवि बादल से कहता है कि तुम्हारे भीतर वज्र छिपा है, और तुम नई कविता फिर से भर दो। वज्र का अर्थ है कठोर, भीषण शक्ति, जैसे बिजली का गिरना। बादल के भीतर जल की कोमलता भी है और वज्र की कठोरता भी। यह कठोरता पुराने, सड़े-गले को तोड़ने के लिए है।
यहाँ कवि साहित्य की भूमिका की बात कर रहा है। समाज में बदलाव लाने के लिए साहित्य बहुत ज़रूरी है। कवि चाहता है कि नई कविता लोगों में जोश भरे और अन्याय के ख़िलाफ़ खड़ा होने की ताक़त दे। नूतन कविता का अर्थ है ऐसी कविता, जो पुरानी लीक तोड़कर नए विचार और नई ऊर्जा लाए।
इस तरह बादल का गर्जन, उसकी बिजली और उसका वज्र, सब क्रांति के संकेत हैं। पर यह क्रांति केवल विनाश के लिए नहीं, बल्कि नए निर्माण के लिए है। जैसे तेज़ बारिश पुरानी मिट्टी बहाकर नए अंकुरों के लिए ज़मीन तैयार करती है, वैसे ही क्रांति पुरानी व्यवस्था हटाकर नए समाज की नींव रखती है। इसीलिए कविता में बादल बार-बार गरजने के लिए पुकारा जाता है।
तपती धरती और बेचैन लोग: बादल का दूसरा रूप
कविता के दूसरे हिस्से में कवि एक अलग दृश्य दिखाता है। वह कहता है कि संसार के सारे लोग गर्मी से बेचैन और अनमने हैं। विकल का अर्थ है व्याकुल, और उन्मन का अर्थ है ऐसा मन, जो कहीं न टिके। निदाघ का अर्थ है गर्मी, और सकल का अर्थ है सब। यानी भीषण गर्मी में सबका मन बेचैन है।
तभी अनंत आकाश से, किसी अनजानी दिशा से बादल आ जाते हैं। कवि उनसे विनती करता है कि तपती धरती को फिर से जल से शीतल कर दो। यहाँ बादल प्यासे और दुखी लोगों की आशा पूरी करने वाला है। वह जीवन देने वाला है, जो धरती की प्यास बुझाता है।
यह गर्मी केवल मौसम की गर्मी नहीं है। यह समाज के दुख, शोषण और निराशा का भी प्रतीक है। जो लोग अन्याय और ग़रीबी की तपिश में झुलस रहे हैं, उनके लिए बादल राहत और आशा लेकर आता है। इस तरह बादल के दो रूप सामने आते हैं: एक, क्रांति लाने वाला, जो गरजता है और वज्र छिपाए है; दूसरा, जीवन देने वाला, जो तपती धरती को ठंडक देता है।
कविता का शिल्प: नाद, अनुप्रास और आह्वान
उत्साह की सबसे बड़ी ख़ूबी उसका नाद-सौंदर्य है। घेर घेर घोर गगन में घ और ग की आवृत्ति बादलों की गड़गड़ाहट जैसी लगती है। ललित ललित, विकल विकल, उन्मन थे उन्मन जैसे शब्द दोहराने से लय और ज़ोर, दोनों बढ़ते हैं। यह पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार भी है।
कविता में अनुप्रास अलंकार भरपूर है, जैसे घेर घेर घोर गगन, धाराधर। बादलों की तुलना घुँघराले बालों और बाल-कल्पना से की गई है, जिसमें उपमा है। बादल को कवि कहकर संबोधित करना और उससे बात करना मानवीकरण है।
बार-बार आने वाली पंक्ति बादल, गरजो कविता की टेक है। यह हर हिस्से के अंत में लौटकर आती है और आह्वान को और मज़बूत बनाती है। भाषा तत्सम शब्दों से भरी खड़ी बोली है, जैसे धाराधर, विद्युत-छबि, नूतन और निदाघ। छोटी-छोटी पंक्तियाँ और जोशीली लय कविता को एक गीत जैसा बना देती हैं, जिसे गाकर पढ़ने में मज़ा आता है।
Concepts and terms
ऐसा गीत, जिसमें किसी को पुकारकर कोई काम करने के लिए जगाया जाए। उत्साह में कवि बादल को गरजने के लिए पुकारता है।
कविता का ऐसा रूप, जिसमें मात्राओं और तुक का कड़ा नियम न हो, फिर भी अपनी लय हो। निराला इसके अग्रदूत माने जाते हैं।
शब्दों की ऐसी ध्वनि, जो भाव या दृश्य को सुनाई देने लायक़ बना दे। घेर घेर घोर गगन में बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई देती है।
कोई चीज़, जो अपने से बड़े किसी भाव को दिखाए। उत्साह में बादल क्रांति, नवजीवन और कवि की रचनाशक्ति का प्रतीक है।
पुरानी, जड़ व्यवस्था को तोड़कर नया बनाने का भाव। बादल का गर्जन और उसमें छिपा वज्र इसी चेतना के संकेत हैं।
सावधान
भ्रम और सच
करके देखो
Title:
बादल की ध्वनि-कविता
Safety:
वाद्य बहुत ज़ोर से मत बजाइए; पास की कक्षाओं का ध्यान रखिए।
What You Notice:
ध्वनि के साथ पढ़ने पर समझ आता है कि नाद-सौंदर्य कविता को केवल पढ़ने की नहीं, सुनने की चीज़ भी बना देता है।
Did you know
निराला ने अपनी बेटी सरोज की असमय मृत्यु पर सरोज स्मृति नाम की लंबी कविता लिखी। इसे हिंदी का सबसे मार्मिक शोक-गीत माना जाता है।
मुक्त छंद का अर्थ है ऐसी कविता, जिसमें तय मात्राओं या तुक का बंधन न हो, पर अपनी लय हो। निराला की जूही की कली इसका शुरुआती उदाहरण है, जिसे शुरू में कई संपादकों ने छापने से मना कर दिया था।
बादल निराला का बहुत प्रिय विषय है। उन्होंने बादल राग नाम से कविताओं की एक पूरी शृंखला लिखी, जिसमें बादल क्रांति का प्रतीक है।
Memory tricks
बादल के तीन काम: ग-भ-शी — गरजो, नई कविता भर दो, तपती धरती शीतल कर दो। गभशी, बादल आओ।
Practice MCQs with answers (25)
- A गढ़ाकोला
- B वाराणसी
- C महिषादल
- D इलाहाबाद
Show answer
Why:
बंगाल।
- A निराला
- B प्रसाद
- C पंत
- D महादेवी
Show answer
Why:
विद्रोही शिल्प।
- A गांधी और नेहरू
- B तुलसी और सूर
- C टैगोर और शरतचंद्र
- D रामकृष्ण और विवेकानंद
Show answer
Why:
आत्म-शक्ति।
- A सुख-सुविधा और ऐश्वर्य से भरा हुआ
- B दुखों और संघर्षों से भरा
- C पूरी तरह शांत और आसान
- D केवल यात्राओं वाला
Show answer
Why:
अपनों का बिछोह।
- A इसमें केवल बादलों के रंग और आकार का वर्णन है
- B यह किसी त्योहार का गीत है
- C इसमें बादल को पुकारकर जगाया गया है
- D यह लोरी है
Show answer
Why:
पुकार।
- A गर्जन से सोया समाज जागेगा
- B रिमझिम से फ़सलें पूरी तरह ख़राब हो जाती हैं
- C गर्जन सुनना कवि का शौक़ था
- D रिमझिम से सर्दी होती है
Show answer
Why:
जागरण।
- A कविता में केवल उदासी और निराशा है
- B पूरी कविता में जोश और ऊर्जा है
- C शीर्षक का कविता से कोई संबंध नहीं
- D कविता में हास्य है
Show answer
Why:
आह्वान का जोश।
- A करुण रस
- B हास्य
- C संवाद
- D नाद-सौंदर्य
Show answer
Why:
गड़गड़ाहट।
- A पर्वत
- B बादल
- C नदी
- D समुद्र
Show answer
Why:
धाराएँ धारण करने वाला।
- A कोमल सुंदरता
- B भयंकर क्रोध
- C गहरी उदासी
- D तीखा व्यंग्य
Show answer
Why:
ललित ललित।
- A बादलों को किसी ने घर में पालकर रखा था
- B बादल बहुत छोटे और कमज़ोर हैं
- C उनमें बच्चे की कल्पना जैसी आज़ादी है
- D बादल खिलौने हैं
Show answer
Why:
उन्मुक्त कल्पना।
- A दोनों बहुत ज़ोर से बोलते हैं
- B दोनों आकाश में रहते हैं
- C दोनों काले हैं
- D दोनों नया जीवन देते हैं
Show answer
Why:
बादल और कवि।
- A बिजली के बिल और ख़र्चे का
- B डर और ख़तरे का
- C प्रेरणा और प्रतिभा का
- D रात के अँधेरे का
Show answer
Why:
भीतर की रोशनी।
- A पुराने को तोड़ने वाली शक्ति
- B केवल कोमल और ठंडी फुहार
- C सुंदर रंगीन इंद्रधनुष
- D शांत चाँदनी
Show answer
Why:
क्रांति।
- A पुरानी कविताएँ फिर से छापी जाएँ
- B कविता लिखना बंद हो
- C बादल गीत गाएँ
- D समाज में नए विचार और ऊर्जा आए
Show answer
Why:
साहित्य से बदलाव।
- A बारिश में भीगते बच्चों की
- B गर्मी से बेचैन लोगों की
- C नाचते मोरों की
- D सोते पशुओं की
Show answer
Why:
निदाघ के सकल जन।
- A सर्दी
- B वर्षा
- C गर्मी
- D वसंत
Show answer
Why:
तपन।
- A रेगिस्तान की रेत और ऊँटों का
- B समाज के दुख और शोषण का
- C चूल्हे की आग का
- D सूरज की पूजा का
Show answer
Why:
प्रतीकात्मक तपन।
- A विनाशक
- B चोर
- C शत्रु
- D जीवनदाता
Show answer
Why:
प्यास बुझाना।
- A टेक
- B तुक
- C छंद
- D शीर्षक
Show answer
Why:
लौटती पंक्ति।
- A उत्प्रेक्षा
- B पुनरुक्ति प्रकाश
- C दृष्टांत अलंकार
- D रूपक
Show answer
Why:
शब्द दोहराए गए।
- A यमक
- B श्लेष
- C अनुप्रास
- D मानवीकरण
Show answer
Why:
बादल व्यक्ति जैसा।
- A एक
- B चार
- C दो
- D छह
Show answer
Why:
जल और वज्र।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
वज्र और गर्जन।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C I, II और III तीनों
- D केवल I और III
Show answer
Why:
कवि गर्जन माँगता है।
Important short questions (7)
निराला की स्कूली पढ़ाई नौवीं तक ही हुई, बाक़ी उन्होंने ख़ुद सीखा। उनका पारिवारिक जीवन बहुत दुख भरा रहा, क्योंकि पत्नी और बेटी समेत कई अपने असमय चले गए। साहित्य की दुनिया में भी उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ा।
कवि समाज में जोश और बदलाव लाना चाहता है। फुहार कोमल है, पर गर्जन सोए लोगों को जगाता है। इसलिए वह बादल से गरजकर क्रांति और नवजीवन का संदेश देने को कहता है।
पूरी कविता जोश और ऊर्जा से भरी है। कवि बादल को गरजने, नई कविता भरने और धरती को शीतल करने के लिए पुकारता है। यह पुकार उत्साह जगाती है, इसलिए शीर्षक सटीक है।
बच्चे की कल्पना बेरोक-टोक, रंगीन और नई-नई होती है। बादल भी आकाश में ऐसे ही उमड़ते और आकार बदलते हैं। इसलिए उनमें बालक की कल्पना जैसी आज़ादी है।
बादल बरसकर धरती को नया जीवन देता है। कवि भी अपनी कविता से समाज में नया जीवन और नए विचार भरता है। इस समानता के कारण बादल को कवि कहा गया है।
कवि बताता है कि भीषण गर्मी में संसार के सारे लोग बेचैन और अनमने हैं। यह गर्मी समाज के दुख और निराशा का भी प्रतीक है। ऐसे लोगों को बादल से राहत की आशा है।
घेर घेर घोर गगन में बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई देती है। विकल विकल, उन्मन थे उन्मन में दोहराव से बेचैनी की ध्वनि उभरती है।
Long answer questions (3)
उत्साह में बादल कई अर्थों का प्रतीक है। पहला अर्थ जीवनदाता का है। गर्मी से बेचैन लोग और तपती धरती बादल की राह देख रहे हैं, और कवि उससे धरती को शीतल करने को कहता है। यहाँ बादल प्यासे लोगों की आशा पूरी करता है। दूसरा अर्थ क्रांति का है। बादल गरजता है, उसके हृदय में बिजली है और भीतर वज्र छिपा है। यह कठोर शक्ति पुराने, जड़ और अन्यायपूर्ण को तोड़कर नए के लिए जगह बनाती है। तीसरा अर्थ कवि और रचनाशक्ति का है। कवि बादल को कवि और नवजीवन वाला कहकर पुकारता है और उससे नई कविता भरने को कहता है। जैसे बादल धरती को नया जीवन देता है, वैसे ही कविता समाज को। इस तरह बादल जल, क्रांति और कविता, तीनों का प्रतीक है।
निराला का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ, पर उनका मूल गाँव उन्नाव ज़िले का गढ़ाकोला था। नौवीं तक पढ़ने के बाद उन्होंने स्वाध्याय से संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी सीखी। रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद का उन पर गहरा असर था। उनका जीवन दुखों से भरा रहा। अपनों की असमय मृत्यु और साहित्यिक संघर्षों ने उन्हें तोड़ा, पर उनकी कविता और प्रखर होती गई। सन् 1961 में उनका देहांत हुआ। अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। उनकी कविता में दर्शन, विद्रोह, प्रेम और प्रकृति का भव्य चित्र है। छायावादी कवियों में मुक्त छंद सबसे पहले उन्होंने अपनाया। उनमें शोषितों के लिए गहरी सहानुभूति है और अन्यायी सत्ता के लिए तीखा प्रतिकार। उत्साह जैसी कविताएँ उनके इसी क्रांतिकारी स्वर का उदाहरण हैं।
आज समाज में कई तरह की तपन है। कहीं ग़रीबी और बेरोज़गारी है, कहीं लड़कियों की पढ़ाई में रुकावटें हैं, और कहीं पर्यावरण तेज़ी से बिगड़ रहा है। ये सब समस्याएँ उस निदाघ जैसी हैं, जिससे लोग बेचैन हैं। उत्साह का बादल सिखाता है कि बदलाव के लिए दो चीज़ें चाहिए: अन्याय के ख़िलाफ़ गरजने का साहस और दुखी लोगों के लिए ठंडक भरा सहारा। मैं बादल की तरह अपने आसपास के बच्चों को पढ़ाने में मदद करना चाहूँगा या चाहूँगी, ताकि उनके जीवन में नई रोशनी आए। साथ ही पेड़ लगाने और पानी बचाने की मुहिम में भाग लूँगा या लूँगी। और जहाँ अन्याय दिखे, वहाँ चुप रहने के बजाय विनम्र पर दृढ़ आवाज़ उठाऊँगा या उठाऊँगी।
Flashcards (17)
Play this topic
- शब्द और अर्थ
- बादल का कौन-सा रूप?
- सही या भ्रम
- कविता का क्रम
- झटपट उत्तर
फागुन की आभा जो कहीं समाती नहीं
अट नहीं रही है में फागुन की सुंदरता इतनी है कि वह कहीं समा नहीं रही। फागुन घर-घर को सुगंध से भर देता है, मन को उड़ने के लिए पंख देता है, और हरी-लाल डालों, फूलों की मालाओं से हर जगह शोभा बिखेर देता है। कवि की आँख उससे हटती ही नहीं।
What you will be able to do
- अट नहीं रही है कविता में फागुन की व्यापक सुंदरता का वर्णन अपने शब्दों में कर सकेंगे।
- फागुन को एक जीवित व्यक्ति की तरह दिखाने वाले मानवीकरण को उदाहरण सहित समझा सकेंगे।
- मन की प्रसन्नता और बाहर की सुंदरता के बीच के संबंध, यानी छायावादी सामंजस्य, को स्पष्ट कर सकेंगे।
- अट, सट, हट, पट जैसे तुकांत शब्दों से बनी लय और संगीत को पहचान सकेंगे।
- उत्साह और अट नहीं रही है, दोनों कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की तुलना कर सकेंगे।
Key points
अट नहीं रही है फागुन की मादकता और सुंदरता की कविता है; अट का अर्थ है समाना।
कवि कहता है कि फागुन की आभा, यानी चमक, इतनी ज़्यादा है कि वह कहीं समा नहीं रही, तन में भी नहीं सट रही।
फागुन जब कहीं साँस लेता है, तो घर-घर सुगंध से भर जाता है; यह फागुन का मानवीकरण है।
फागुन आकाश में उड़ने के लिए मानो पंख-पंख लगा देता है; यानी मन उमंग से उड़ने लगता है।
कवि अपनी आँख हटाना चाहता है, पर फागुन की सुंदरता से नज़र हटती ही नहीं।
पेड़ों की डालें पत्तों से लदी हैं, कहीं हरी, कहीं लाल; कहीं हृदय पर मंद सुगंध वाले फूलों की माला पड़ी है।
जगह-जगह, पाट-पाट पर सौंदर्य भरा है, और वह भी कहीं समा नहीं रहा।
कविता बताती है कि जब मन प्रसन्न हो, तो हर ओर फागुन का ही उल्लास दिखता है; यही मन और प्रकृति का सामंजस्य है।
अट, सट, हट, पट जैसे तुकांत शब्द, छोटी पंक्तियाँ और कोमल शब्द कविता को ख़ुद फागुन जैसा सुंदर और लयबद्ध बना देते हैं।
Full explanation
अट नहीं रही है: फागुन की कविता
अट नहीं रही है निराला की एक छोटी, पर बहुत सुंदर कविता है। इसमें फागुन महीने की मादकता और सुंदरता का चित्र है। फागुन वह महीना है, जब सर्दी जा चुकी होती है और गर्मी अभी आई नहीं होती। पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं, फूल खिलते हैं, हवा में सुगंध घुल जाती है और होली का उल्लास चारों ओर छा जाता है।
कविता का शीर्षक ही उसका मूल भाव है। अट का अर्थ है समाना। कवि कहता है कि फागुन की सुंदरता इतनी ज़्यादा है कि वह कहीं समा नहीं रही। जैसे कोई पात्र छलक जाए, वैसे ही फागुन की शोभा हर ओर से छलक रही है। यह एक बहुत सुंदर कल्पना है, जो फागुन की भरपूरता को दिखाती है।
कवि फागुन की आभा की बात करता है। आभा का अर्थ है चमक। फागुन में सब कुछ चमकता-सा लगता है: पेड़ों के नए पत्ते, रंग-बिरंगे फूल, सुनहरी धूप और लोगों के खिले चेहरे। कवि कहता है कि यह आभा तन में भी नहीं सट रही, यानी शरीर में भी नहीं समा पा रही। मन इतना भर गया है कि सुंदरता बाहर छलक रही है।
इस कविता में फागुन केवल एक महीना नहीं, बल्कि एक जीवित व्यक्ति की तरह है। वह साँस लेता है, घरों को भरता है, पंख लगाता है। कवि उससे सीधे बात करता है, तुम कहकर। इस तरह पूरी कविता फागुन के साथ एक प्यारी बातचीत जैसी लगती है।
फागुन की साँस और उड़ने के पंख
कवि फागुन से कहता है कि तुम कहीं साँस लेते हो, तो घर-घर को भर देते हो। यहाँ साँस का अर्थ है फागुन की सुगंधित हवा। जब फूलों की ख़ुशबू हवा में घुलकर बहती है, तो लगता है जैसे फागुन साँस ले रहा हो। और यह सुगंध हर घर में भर जाती है। यह मानवीकरण का सुंदर उदाहरण है।
फिर कवि कहता है कि तुम आकाश में उड़ने के लिए पर-पर कर देते हो। पर का अर्थ है पंख। यानी फागुन के आते ही मन में ऐसी उमंग भरती है कि लगता है, पंख लग गए हों और हम आकाश में उड़ जाएँ। यहाँ पंख मन की ख़ुशी और आज़ादी का प्रतीक हैं। पक्षी भी इस मौसम में ख़ूब चहचहाते और उड़ते हैं।
फिर एक बहुत सहज और मीठी पंक्ति आती है। कवि कहता है कि मैं आँख हटाना चाहता हूँ, पर वह हटती ही नहीं। फागुन की सुंदरता इतनी मोहक है कि नज़र उससे बँधकर रह जाती है। यह पंक्ति हर उस व्यक्ति के अनुभव से मेल खाती है, जिसने कभी वसंत के फूलों से लदा बाग़ देखा हो।
कवि की आँख इसलिए नहीं हटती, क्योंकि फागुन की सुंदरता हर ओर फैली है। जिधर भी देखो, कोई न कोई रंग, फूल या ख़ुशबू नज़र को रोक लेती है। साथ ही कवि का मन भी प्रसन्न है, इसलिए उसे यह सौंदर्य और भी मोहक लगता है। मन और प्रकृति, दोनों मिलकर नज़र को बाँध लेते हैं।
हरी-लाल डालें और फूलों की माला
कविता के अंतिम हिस्से में कवि पेड़ों का चित्र देता है। वह कहता है कि डालें पत्तों से लदी हैं, कहीं हरी हैं और कहीं लाल। फागुन में कई पेड़ों पर नए लाल-लाल कोमल पत्ते आते हैं, जैसे आम और पीपल पर। कुछ पेड़ों पर हरे पत्ते हैं। इस तरह पूरा बाग़ हरे और लाल रंगों से सजा दिखता है।
फिर कवि कहता है कि कहीं हृदय पर मंद सुगंध वाले फूलों की माला पड़ी है। उर का अर्थ है हृदय या छाती। मानो प्रकृति ने अपने गले में फूलों की माला डाल रखी हो, जिसकी हल्की-हल्की सुगंध चारों ओर फैल रही हो। मंद-गंध-पुष्प-माल एक सुंदर सामासिक शब्द है, जिसमें धीमी सुगंध, फूल और माला, तीनों एक साथ बँधे हैं।
अंत में कवि कहता है कि पाट-पाट पर शोभा-श्री भरी है, और वह भी पट नहीं रही। पाट-पाट का अर्थ है जगह-जगह। शोभा-श्री का अर्थ है सौंदर्य से भरपूर। पट का अर्थ है समाना या भर जाना। यानी हर जगह इतना सौंदर्य है कि वह कहीं समा नहीं पा रहा। कविता जहाँ से शुरू हुई थी, वहीं के भाव पर लौट आती है: फागुन की शोभा अपार है।
मन और प्रकृति का मेल: छायावादी दृष्टि
छायावाद की एक ख़ास विशेषता है मन के भावों का बाहर की दुनिया से मेल बिठाना। इस कविता में यह बहुत साफ़ दिखता है। जब कवि का मन प्रसन्न है, तो उसे हर ओर फागुन का ही सौंदर्य और उल्लास दिखता है। अगर मन उदास होता, तो शायद यही फूल भी फीके लगते।
फागुन की आभा का तन में न समाना इसी मेल का उदाहरण है। बाहर की सुंदरता कवि के भीतर उतर आई है, और भीतर की ख़ुशी बाहर छलक रही है। आँख का न हटना भी यही बताता है कि बाहर का दृश्य मन को बाँध रहा है। और उड़ने के पंख मन की उमंग हैं, जो प्रकृति ने दिए हैं।
इस तरह यह कविता केवल प्रकृति का वर्णन नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के रिश्ते की कविता है। कवि बताता है कि सुंदरता केवल बाहर नहीं होती; उसे देखने वाला मन भी उतना ही ज़रूरी है। फागुन की मादकता मन में उतरकर ही पूरी होती है।
दो कविताएँ, दो स्वर
उत्साह और अट नहीं रही है, दोनों निराला की कविताएँ हैं, पर दोनों का स्वर बिल्कुल अलग है। उत्साह में जोश है, गर्जन है, क्रांति की पुकार है। अट नहीं रही है में कोमलता है, सुगंध है, सौंदर्य में डूबा मन है। यह दिखाता है कि निराला की कविता का संसार कितना बड़ा था: वे विद्रोह के कवि भी थे और सौंदर्य के भी।
दोनों कविताओं में प्रकृति का मानवीकरण है। उत्साह में बादल को कवि कहा गया है, जिसके हृदय में बिजली है। अट नहीं रही है में फागुन साँस लेता है और पंख लगाता है। दोनों में कवि प्रकृति से सीधे बात करता है, एक में बादल, गरजो कहकर, दूसरी में तुम कहकर।
भाषा और लय: निराला का शिल्प
दोनों कविताओं में ध्वनि और लय पर बहुत ध्यान दिया गया है। उत्साह में घेर घेर घोर गगन जैसा नाद-सौंदर्य है। अट नहीं रही है में अट, सट, हट, पट जैसे तुकांत शब्द और घर-घर, पर-पर, पाट-पाट जैसे दोहराव हैं, जो कविता को संगीत जैसा बनाते हैं। दोनों में छोटी पंक्तियाँ हैं, जो गीत की तरह गाई जा सकती हैं।
भाषा दोनों की खड़ी बोली है, पर उत्साह में तत्सम शब्द ज़्यादा हैं, जैसे धाराधर, निदाघ और विद्युत-छबि। अट नहीं रही है की भाषा ज़्यादा सरल और बोलचाल के क़रीब है, जैसे अट, सट, हट, पट। इस तरह निराला भाव के अनुसार भाषा बदल लेते हैं: जोश के लिए गंभीर, भारी शब्द और कोमलता के लिए हल्के, मीठे शब्द।
Concepts and terms
प्रकृति या किसी निर्जीव चीज़ को मनुष्य की तरह काम करते दिखाना। फागुन का साँस लेना और पंख लगा देना मानवीकरण है।
समाना या भीतर आ जाना। अट नहीं रही का अर्थ है इतनी ज़्यादा कि कहीं समा नहीं रही।
दो चीज़ों का आपस में मेल। छायावाद में मन के भाव और बाहर की प्रकृति एक-दूसरे से मेल खाते दिखाए जाते हैं।
पंक्तियों के अंत में मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द। अट, सट, हट, पट तुकांत शब्द हैं।
चमक या प्रकाश। फागुन की आभा यानी उसकी चमकती सुंदरता।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
मार्च के महीने में विद्यालय ने प्रकृति-भ्रमण का आयोजन किया। कक्षा दस के विद्यार्थी पास के एक बाग़ में गए, जहाँ आम पर बौर आ चुका था और पलाश के पेड़ लाल फूलों से लदे थे।
हिंदी अध्यापक ने सबसे कहा कि अट नहीं रही है कविता को याद करते हुए अपने मन में उठे भाव लिखें। ज़ोया ने लिखा कि हवा इतनी सुगंधित है, मानो पेड़ साँस ले रहे हों। मनप्रीत ने लिखा कि उसका मन तितली की तरह उड़ना चाहता है।
पर अर्जुन चुप बैठा था। पूछने पर उसने बताया कि उसकी दादी बीमार हैं, इसलिए उसे सब फीका लग रहा है। अध्यापक ने कहा कि यही तो छायावाद की बात है: मन जैसा हो, प्रकृति भी वैसी ही दिखती है।
Activity:
किसी पार्क या पेड़ के पास दो अलग दिनों पर जाइए: एक दिन जब आप बहुत ख़ुश हों, एक दिन जब थोड़े उदास हों। दोनों बार अपने अनुभव लिखकर तुलना कीजिए।
Analysis:
सुंदरता केवल बाहर नहीं, देखने वाले के मन में भी होती है। अट नहीं रही है हमें सिखाती है कि प्रकृति का पूरा आनंद तभी मिलता है, जब मन भी उसके लिए खुला हो।
Did you know
फागुन हिंदू पंचांग का आख़िरी महीना है, जो फ़रवरी-मार्च के आसपास आता है। इसी महीने की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है।
फागुन में गाए जाने वाले लोकगीतों को फाग या होरी कहते हैं। उत्तर भारत के गाँवों में ढोलक और मंजीरे के साथ आज भी फाग गाया जाता है।
निराला ने फागुन पर और भी कविताएँ लिखीं। एक में वे आम पर आए बौर, वन-वन में टूटते भौंरों और अबीर-गुलाल से लाल माथों का चित्र देते हैं।
Memory tricks
चार तुक: अ-स-ह-प — अट नहीं रही, सट नहीं रही, हट नहीं रही, पट नहीं रही। असहप, फागुन अपार।
Practice MCQs with answers (25)
- A सावन
- B कार्तिक
- C पौष
- D फागुन
Show answer
Why:
होली का महीना।
- A समाना
- B उड़ना
- C टूटना
- D जलना
Show answer
Why:
अट नहीं रही।
- A फागुन बहुत छोटा और कमज़ोर महीना है
- B फागुन में अँधेरा रहता है
- C सुंदरता अपार और छलकती हुई है
- D फागुन जल्दी बीत जाता है
Show answer
Why:
भरपूरता।
- A शरीर बीमार और कमज़ोर हो गया है
- B मन ख़ुशी से छलक रहा है
- C कपड़े छोटे पड़ गए हैं
- D धूप तेज़ है
Show answer
Why:
भीतर-बाहर का मेल।
- A हर घर में ठंडी हवा और कोहरा भर जाता है
- B घर लोगों से भर जाते हैं
- C घरों में धुआँ भर जाता है
- D फूलों की सुगंध हर घर में फैल जाती है
Show answer
Why:
सुगंधित हवा।
- A यमक
- B मानवीकरण
- C श्लेष
- D उत्प्रेक्षा
Show answer
Why:
मनुष्य जैसा काम।
- A मन में उड़ने जैसी उमंग जागती है
- B पक्षियों के पंख टूटकर गिरने लगते हैं
- C आकाश में बादल छा जाते हैं
- D पतंगें कट जाती हैं
Show answer
Why:
पंख यानी उमंग।
- A आँख में कुछ चला गया है और दर्द है
- B कवि सो रहा है
- C सौंदर्य हर ओर फैला और मोहक है
- D कवि को चश्मा चाहिए
Show answer
Why:
नज़र बँध गई।
- A पेड़ों पर रंग पोतकर सजावट
- B पेड़ों का सूख जाना
- C आग लग जाना
- D नए पत्तों से सजी प्रकृति
Show answer
Why:
नई कोंपलें।
- A कवि की प्रिय के
- B देवता की मूर्ति के
- C प्रकृति के
- D राजा के
Show answer
Why:
उर में।
- A बहुत तेज़
- B हल्की, धीमी
- C सड़ी हुई
- D कड़वी-तीखी
Show answer
Why:
मंद गंध।
- A जगह-जगह
- B घाट-घाट
- C पत्थर-पत्थर
- D पेड़-पेड़
Show answer
Why:
हर ओर।
- A फागुन ख़त्म हो गया है और उदासी है
- B शोभा कहीं समा नहीं रही
- C कवि सो गया है
- D बारिश शुरू हो गई है
Show answer
Why:
पट नहीं रही।
- A भारीपन
- B कठिनाई
- C लय और संगीत
- D गहरी उदासी
Show answer
Why:
तुक।
- A उपमा
- B रूपक
- C दृष्टांत अलंकार
- D पुनरुक्ति प्रकाश
Show answer
Why:
शब्द दोहराए।
- A देखने वाले के प्रसन्न मन पर
- B बाग़ के माली की मेहनत पर
- C बाज़ार के रंगों पर
- D मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर
Show answer
Why:
मन और प्रकृति।
- A युद्ध और वीरता का वर्णन
- B मन के भावों का प्रकृति से मेल
- C राजनीतिक व्यंग्य
- D धार्मिक उपदेश
Show answer
Why:
सामंजस्य।
- A हे देवता कहकर, एक मूर्ति की तरह
- B एक दुश्मन की तरह
- C तुम कहकर, एक व्यक्ति की तरह
- D एक मशीन की तरह
Show answer
Why:
आत्मीय बातचीत।
- A एक में जोश, दूसरी में कोमलता
- B दोनों में केवल दुख और उदासी
- C दोनों में हास्य
- D दोनों में युद्ध
Show answer
Why:
गर्जन बनाम सुगंध।
- A लंबी कथा का वर्णन
- B गद्य शैली
- C संस्कृत श्लोक
- D प्रकृति का मानवीकरण
Show answer
Why:
बादल और फागुन।
- A ज़्यादा कठिन और तत्सम शब्दों से भरी
- B पूरी तरह ब्रजभाषा
- C ज़्यादा सरल और बोलचाल के क़रीब
- D अंग्रेज़ी मिश्रित
Show answer
Why:
अट, सट, हट।
- A कजरी
- B फाग
- C सोहर
- D आल्हा
Show answer
Why:
होरी भी।
- A फ़रवरी-मार्च
- B जून-जुलाई
- C अक्टूबर-नवंबर
- D दिसंबर-जनवरी
Show answer
Why:
होली।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- C अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
- D दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Show answer
Why:
मन और प्रकृति।
- A केवल I और III
- B केवल I और II
- C केवल II और III
- D I, II और III तीनों
Show answer
Why:
सुंदरता अपार है।
Important short questions (7)
यह कविता फागुन की अपार सुंदरता और मादकता की कविता है। कवि कहता है कि फागुन की शोभा इतनी है कि कहीं समा नहीं रही। घर, आकाश, पेड़ और मन, सब उससे भर गए हैं।
कविता में फागुन साँस लेता है और घर-घर को सुगंध से भर देता है। वह उड़ने के लिए पंख भी लगा देता है। कवि उसे तुम कहकर एक व्यक्ति की तरह संबोधित करता है।
फागुन की सुंदरता हर ओर फैली है: हरी-लाल डालें, फूलों की माला और सुगंध। कवि का मन भी प्रसन्न है। इसलिए यह सौंदर्य उसकी नज़र को बाँध लेता है।
फागुन में पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं। कुछ पेड़ों के नए पत्ते लाल होते हैं, कुछ के हरे। इससे पूरा बाग़ हरे और लाल रंगों से सजा दिखता है।
पाट-पाट का अर्थ है जगह-जगह, और शोभा-श्री का अर्थ है भरपूर सौंदर्य। कवि कहता है कि हर जगह इतना सौंदर्य है कि वह कहीं समा नहीं पा रहा।
छायावाद में मन के भावों का बाहर की प्रकृति से मेल दिखाया जाता है। इस कविता में कवि का प्रसन्न मन फागुन की सुंदरता से एक हो जाता है। आभा का तन में न समाना इसका उदाहरण है।
अट, सट, हट और पट जैसे तुकांत शब्दों से कविता में ताल जैसी लय आती है। घर-घर, पर-पर और पाट-पाट जैसे दोहराव भी संगीत बढ़ाते हैं। छोटी पंक्तियाँ इसे गीत जैसा बना देती हैं।
Long answer questions (3)
कवि ने फागुन की सुंदरता को कई रूपों में फैला हुआ दिखाया है। पहले वह कहता है कि फागुन की आभा कहीं समा नहीं रही, तन में भी नहीं। यानी सौंदर्य शरीर और मन, दोनों में छलक रहा है। फिर वह बताता है कि फागुन साँस लेता है, तो घर-घर भर जाता है। यानी उसकी सुगंध हर घर तक पहुँचती है। वह आकाश में उड़ने के लिए पंख भी लगा देता है, जिससे सौंदर्य धरती से आकाश तक फैल जाता है। इसके बाद कवि पेड़ों की हरी-लाल डालों और प्रकृति के हृदय पर पड़ी फूलों की माला का चित्र देता है। अंत में वह कहता है कि पाट-पाट, यानी जगह-जगह, शोभा भरी है। इस तरह घर, आकाश, बाग़, मन और हर कोना फागुन की सुंदरता से भर गया है।
दोनों कविताएँ निराला के बहुमुखी शिल्प का उदाहरण हैं। उत्साह में जोश, गर्जन और क्रांति की पुकार है, जबकि अट नहीं रही है में कोमलता, सुगंध और सौंदर्य है। यानी निराला भाव के अनुसार अपना स्वर बदल लेते हैं। दोनों में प्रकृति का मानवीकरण है। बादल को कवि कहा गया है, और फागुन साँस लेता है, पंख लगाता है। दोनों में कवि प्रकृति से सीधे बात करता है। ध्वनि और लय पर दोनों में बहुत ध्यान है। उत्साह में घेर घेर घोर गगन जैसा नाद-सौंदर्य है, और अट नहीं रही है में अट, सट, हट, पट जैसे तुकांत शब्द। दोनों में पुनरुक्ति प्रकाश और अनुप्रास है। भाषा खड़ी बोली है, पर उत्साह में तत्सम शब्द ज़्यादा हैं और अट नहीं रही है में सरल शब्द। छोटी पंक्तियाँ दोनों को गेय बनाती हैं।
होली के आसपास सर्दी विदा हो चुकी होती है और हवा में हल्की गरमाहट आ जाती है। पेड़ों पर नए-नए पत्ते आते हैं, जिनमें कुछ लाल और कुछ हरे होते हैं, जैसे कविता में कहा गया है। आम पर बौर आता है और पलाश लाल फूलों से लद जाता है। हवा में फूलों की सुगंध घुल जाती है, और कोयल की कूक सुनाई देने लगती है। खेतों में सरसों के पीले फूल लहराते हैं और गेहूँ की बालियाँ सुनहरी होने लगती हैं। मेरे मोहल्ले में भी लोग घरों की सफ़ाई करते हैं, गुझिया बनती है और बच्चे पिचकारियाँ ख़रीदते हैं। शाम को कहीं-कहीं फाग के गीत सुनाई देते हैं। सबका मन ख़ुश रहता है। कविता की तरह मुझे भी लगता है कि इस समय की ख़ुशी कहीं समा नहीं रही।
Flashcards (17)
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- शब्द और अर्थ
- किस कविता से?
- सही या भ्रम
- कविता का क्रम
- झटपट उत्तर
Class 10 Hindi Chapter 4 — frequently asked questions
निराला की स्कूली पढ़ाई नौवीं तक ही हुई, बाक़ी उन्होंने ख़ुद सीखा। उनका पारिवारिक जीवन बहुत दुख भरा रहा, क्योंकि पत्नी और बेटी समेत कई अपने असमय चले गए। साहित्य की दुनिया में भी उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ा।
कवि समाज में जोश और बदलाव लाना चाहता है। फुहार कोमल है, पर गर्जन सोए लोगों को जगाता है। इसलिए वह बादल से गरजकर क्रांति और नवजीवन का संदेश देने को कहता है।
पूरी कविता जोश और ऊर्जा से भरी है। कवि बादल को गरजने, नई कविता भरने और धरती को शीतल करने के लिए पुकारता है। यह पुकार उत्साह जगाती है, इसलिए शीर्षक सटीक है।
यह कविता फागुन की अपार सुंदरता और मादकता की कविता है। कवि कहता है कि फागुन की शोभा इतनी है कि कहीं समा नहीं रही। घर, आकाश, पेड़ और मन, सब उससे भर गए हैं।
कविता में फागुन साँस लेता है और घर-घर को सुगंध से भर देता है। वह उड़ने के लिए पंख भी लगा देता है। कवि उसे तुम कहकर एक व्यक्ति की तरह संबोधित करता है।
फागुन की सुंदरता हर ओर फैली है: हरी-लाल डालें, फूलों की माला और सुगंध। कवि का मन भी प्रसन्न है। इसलिए यह सौंदर्य उसकी नज़र को बाँध लेता है।
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