Class 10 Hindi Chapter 3: आत्मकथ्य
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आत्मकथा लिखने से कवि की हिचक
मित्र चाहते थे कि प्रसाद हंस के विशेषांक के लिए आत्मकथा लिखें। कवि कहता है कि हर जीवन की कथा उपहास भरी है, उसका अपना मन ख़ाली गागर जैसा है, और कथा कहने में अपनी भूलें या दूसरों के छल ही खुलेंगे।
What you will be able to do
- जयशंकर प्रसाद के जीवन, प्रमुख रचनाओं और छायावाद में उनके स्थान के बारे में बता सकेंगे।
- हंस के आत्मकथा विशेषांक और कविता के जन्म की पृष्ठभूमि अपने शब्दों में समझा सकेंगे।
- मधुप, मुरझाती पत्तियाँ और अनंत नीलिमा जैसे बिंबों का अर्थ और उनमें छिपा भाव स्पष्ट कर सकेंगे।
- ख़ाली गागर, रस लेकर भरने वाले और सरलता की विडंबना जैसे कथनों से कवि की हिचक के कारण बता सकेंगे।
- कविता के कठिन शब्दों, जैसे मधुप, व्यंग्य-मलिन, रीती और प्रवंचना, के अर्थ पहचान सकेंगे।
Key points
प्रसाद सन् 1889 में वाराणसी में जन्मे; आठवीं के बाद स्कूल छूटा, पर घर पर संस्कृत, हिंदी और फ़ारसी सीखी; सन् 1937 में निधन हुआ।
वे छायावाद के चार बड़े कवियों में गिने जाते हैं; कामायनी उनकी सबसे बड़ी काव्य-कृति है, जिस पर उन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला।
प्रसाद कवि ही नहीं, नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार भी थे; चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, तितली और आकाशदीप उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।
प्रेमचंद के संपादन में हंस पत्रिका का आत्मकथा विशेषांक निकलना था; मित्रों ने प्रसाद से आत्मकथा लिखने को कहा, पर वे राज़ी नहीं थे।
इसी असहमति से यह कविता जन्मी, जो सन् 1932 में हंस के उसी विशेषांक में छपी।
कविता की शुरुआत में मन रूपी भौंरा गुनगुनाकर कोई कहानी कह रहा है, और चारों ओर पत्तियाँ मुरझाकर गिर रही हैं; यह जीवन की नश्वरता का संकेत है।
कवि कहता है कि इस अनंत आकाश के नीचे अनगिनत जीवन-कथाएँ एक-दूसरे का मज़ाक़ उड़ाती रहती हैं; फिर भी मित्र चाहते हैं कि वह अपनी कमज़ोरियाँ कह डाले।
कवि अपने मन को ख़ाली गागर बताता है और चेतावनी देता है कि सुनने वाले कहीं ख़ुद को ही उसे ख़ाली करने वाला न पाएँ।
कवि नहीं चाहता कि आत्मकथा लिखकर वह अपनी सरलता की हँसी उड़ाए, अपनी भूलें गिनाए या दूसरों के धोखे उजागर करे।
Full explanation
जयशंकर प्रसाद: छायावाद के बहुमुखी रचनाकार
जयशंकर प्रसाद सन् 1889 में वाराणसी में जन्मे। उनका परिवार काशी का एक प्रसिद्ध व्यापारी परिवार था। उन्हें पढ़ने के लिए काशी के क्वींस कॉलेज भेजा गया, पर घर के हालात ऐसे बने कि वे आठवीं कक्षा से आगे स्कूल में नहीं पढ़ पाए। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और घर पर ही संस्कृत, हिंदी और फ़ारसी का गहरा अध्ययन किया। सन् 1937 में, केवल अड़तालीस वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
प्रसाद छायावाद के सबसे बड़े कवियों में से एक हैं। उनकी प्रमुख काव्य-रचनाएँ हैं चित्राधार, कानन-कुसुम, झरना, आँसू, लहर और कामायनी। कामायनी को आधुनिक हिंदी की सबसे श्रेष्ठ काव्य-कृतियों में गिना जाता है, और इस पर उन्हें मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला। इसमें मनु और श्रद्धा की कथा के सहारे मनुष्य के मन की यात्रा दिखाई गई है।
प्रसाद सिर्फ़ कवि नहीं थे, गद्य में भी उनकी क़लम उतनी ही चली। उनके प्रसिद्ध नाटकों में चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, अजातशत्रु और ध्रुवस्वामिनी आते हैं, जिनमें भारत के प्राचीन इतिहास की झलक है। कंकाल, तितली और इरावती उनके उपन्यास हैं। उनकी कहानियाँ आकाशदीप, आँधी और इंद्रजाल नाम के संग्रहों में मिलती हैं। इतिहास और दर्शन से उनका गहरा लगाव उनकी हर विधा में दिखता है।
उनके साहित्य में कोमलता और मिठास भी है, और शक्ति और ओज भी। छायावाद की ख़ास बातें, जैसे बहुत ऊँची कल्पना, सौंदर्य का बारीक चित्रण, प्रकृति से प्रेम, देश-प्रेम और लाक्षणिक शैली, उनकी कविता में भरपूर मिलती हैं। लाक्षणिक शैली का अर्थ है ऐसी भाषा, जिसमें शब्द अपने सीधे अर्थ से आगे बढ़कर कोई संकेत देते हैं। आत्मकथ्य कविता इसी शैली का सुंदर उदाहरण है।
कविता का जन्म: एक इनकार से निकली रचना
इस कविता के पीछे एक रोचक कहानी है। प्रेमचंद उस समय हंस नाम की एक साहित्यिक पत्रिका निकालते थे। उन्होंने तय किया कि हंस का एक आत्मकथा विशेषांक निकाला जाए, जिसमें बड़े लेखक अपने जीवन के बारे में लिखें। प्रसाद के मित्रों ने उनसे बहुत आग्रह किया कि वे भी अपनी आत्मकथा लिखें।
पर प्रसाद इसके लिए तैयार नहीं थे। उन्हें लगता था कि उनके जीवन में ऐसा कुछ नहीं, जिसे दुनिया के सामने बड़े गर्व से रखा जाए। दूसरी ओर, जो दुख और भूलें हैं, उन्हें सबके सामने खोलना भी उन्हें ठीक नहीं लगता था। इसी उलझन और असहमति से एक कविता जन्मी, जिसका नाम उन्होंने रखा आत्मकथ्य।
यह कविता सन् 1932 में हंस के उसी आत्मकथा विशेषांक में छपी। यानी प्रसाद ने आत्मकथा तो नहीं लिखी, पर आत्मकथा क्यों नहीं लिख रहे, यह बताते हुए एक कविता लिख दी। मज़े की बात यह है कि इस इनकार में भी उनके जीवन, उनके दुख और उनके स्वभाव की बहुत साफ़ झलक मिल जाती है। इसलिए इसे आत्मकथा न होकर आत्मकथ्य कहा गया, यानी अपने बारे में कही गई बात।
इस कविता में दो बातें साथ-साथ चलती हैं। एक ओर कवि अपने जीवन के कड़वे सच और कमियों को स्वीकार करता है। दूसरी ओर इसमें एक बड़े कवि की विनम्रता है, जो अपने जीवन को साधारण बताता है। प्रसाद यह कहना चाहते हैं कि उनकी कथा एक आम आदमी की कथा है, जिसमें लोग वाह-वाह करने लायक़ कुछ नहीं पाएँगे।
पहला दृश्य: गुनगुनाता भौंरा और मुरझाती पत्तियाँ
कविता एक सुंदर पर उदास दृश्य से शुरू होती है। एक भौंरा गुनगुनाता हुआ पता नहीं कौन-सी अपनी कहानी कहे जा रहा है। यहाँ मधुप का अर्थ है भौंरा, पर कवि ने इसे मन रूपी भौंरे के अर्थ में लिया है। यानी कवि का अपना मन भी भौंरे की तरह गुनगुनाकर अपनी कहानी कहना चाहता है।
पर उसी समय कवि देखता है कि आज बहुत-सी पत्तियाँ मुरझाकर गिर रही हैं। यह दृश्य जीवन की नश्वरता का संकेत है। जैसे पत्तियाँ हरी होकर फिर सूख जाती हैं, वैसे ही मनुष्य का जीवन, उसके सुख और उसके सपने भी मुरझा जाते हैं। पतझड़ का यह चित्र पूरी कविता को एक उदास रंग दे देता है।
इसके बाद कवि आकाश की ओर देखता है। वह कहता है कि इस गहरे, अंतहीन नीले विस्तार के नीचे अनगिनत लोगों के जीवन-इतिहास हैं। और ये सब इतिहास मानो एक-दूसरे का मैला-सा मज़ाक़ उड़ाते रहते हैं। व्यंग्य-मलिन उपहास का अर्थ है बुरे ढंग से की गई निंदा या हँसी। यानी दुनिया में हर व्यक्ति दूसरे की कहानी पर हँसता है, उसकी कमियाँ खोजता है।
कवि का संकेत साफ़ है। जब इतनी सारी जीवन-कथाएँ पहले से ही उपहास का विषय बनी हुई हैं, तो उसकी अपनी कथा भी उसी भीड़ में एक और हँसी का कारण बनेगी। इसलिए वह सोचता है कि अपनी कहानी सुनाने से क्या फ़ायदा। यहीं से कविता का असली सवाल उठता है: मैं अपनी कथा क्यों कहूँ?
ख़ाली गागर और रस लेने वाले
कवि मित्रों से सीधे बात करने लगता है। वह कहता है कि यह सब देखते हुए भी तुम कहते हो कि मैं अपनी बीती हुई कमज़ोरियाँ कह डालूँ। दुर्बलता का अर्थ है कमज़ोरी। कवि को लगता है कि आत्मकथा का मतलब होगा अपनी हर कमज़ोरी को सबके सामने रख देना, और यह उसे सहज नहीं लगता।
फिर कवि कहता है कि तुम मेरी कथा सुनकर सुख पाओगे, और देखोगे कि यह गागर तो ख़ाली है। गागर रीती का सीधा अर्थ है ख़ाली घड़ा, पर यहाँ इसका अर्थ है ऐसा मन, जिसमें कोई सुख या उपलब्धि नहीं बची। कवि को लगता है कि उसके जीवन में ऐसा कुछ नहीं, जो दूसरों को भर सके। यह उसकी विनम्रता भी है और उसका दुख भी।
इसके बाद कवि एक तीखी बात कहता है। वह कहता है कि कहीं ऐसा न हो कि तुम ही अपने को वह व्यक्ति पाओ, जिसने मेरी गागर ख़ाली की। यानी जो लोग आज उसकी कथा सुनना चाहते हैं, उन्हीं में से कुछ ने कभी उसके जीवन का रस लेकर अपनी गागर भरी होगी। यह इशारा उन मित्रों और परिचितों की ओर है, जिन्होंने कवि से लाभ उठाया, पर बदले में दुख दिया।
यह पंक्ति बहुत गहरी है। आत्मकथा लिखने का अर्थ होगा उन लोगों के नाम और काम भी खोलना, जिन्होंने उसे धोखा दिया। कवि नहीं चाहता कि उसकी कथा दूसरों पर आरोप लगाने का ज़रिया बने। इसलिए वह चुप रहना बेहतर समझता है।
सरलता की विडंबना: भूलें या दूसरों का छल
कवि आगे कहता है कि यह कैसी विडंबना है। वह अपनी सरलता को संबोधित करता है: अरी सरलता, क्या मैं तेरी हँसी उड़ाऊँ? यानी कवि का स्वभाव बहुत सरल और भोला रहा। उसने लोगों पर भरोसा किया, और इसी भोलेपन के कारण उसे धोखे मिले। अब आत्मकथा लिखने का अर्थ होगा अपने ही भोलेपन का मज़ाक़ बनाना।
फिर कवि दो रास्तों की बात करता है। अगर वह अपनी कथा लिखे, तो या तो उसे अपनी भूलें दिखानी पड़ेंगी, या दूसरों की प्रवंचना। प्रवंचना का अर्थ है धोखा या छल। दोनों ही बातें उसे अच्छी नहीं लगतीं। अपनी भूलें गिनाना उसे शर्मिंदा करेगा, और दूसरों के छल उजागर करना उसके स्वभाव में नहीं।
इस हिस्से से प्रसाद के व्यक्तित्व की एक सुंदर झलक मिलती है। वे अपने दुखों के लिए दूसरों को दोष देकर बदला नहीं लेना चाहते। वे अपनी सरलता पर पछताते भी नहीं, बस उस पर हँसना नहीं चाहते। यह एक सज्जन और संवेदनशील व्यक्ति का स्वभाव है, जो अपने घाव चुपचाप सह लेता है।
कुछ कठिन शब्द और उनका अर्थ
इस कविता की भाषा तत्सम शब्दों से भरी, कोमल खड़ी बोली है। मधुप का अर्थ है भौंरा, और यहाँ मन रूपी भौंरा। घनी यानी बहुत अधिक। अनंत नीलिमा यानी अंतहीन नीला आकाश, यानी अंतहीन विस्तार। असंख्य यानी अनगिनत।
व्यंग्य-मलिन का अर्थ है बुरे या मैले ढंग से की गई निंदा। उपहास यानी मज़ाक़। दुर्बलता यानी कमज़ोरी। गागर रीती यानी ख़ाली घड़ा, यानी भावों से ख़ाली मन। विडंबना यानी उलटा, कड़वा सच। सरलते यानी हे सरलता। प्रवंचना यानी धोखा।
इन शब्दों को समझने के बाद कविता का अर्थ खुलने लगता है। छायावादी कवि सीधी बात नहीं कहते, बल्कि चित्रों और संकेतों से कहते हैं। इसलिए इस कविता को पढ़ते समय हर बिंब के पीछे छिपे भाव को पकड़ना ज़रूरी है।
Concepts and terms
लेखक द्वारा अपने ही जीवन की कहानी लिखना। इसमें ईमानदारी और साहस, दोनों चाहिए, क्योंकि अपनी कमियाँ भी खोलनी पड़ती हैं।
हिंदी कविता की एक धारा, लगभग 1918 से 1936 तक। इसमें कल्पना, प्रकृति-प्रेम, सूक्ष्म सौंदर्य और लाक्षणिक शैली प्रमुख है।
शब्दों का सीधा अर्थ छोड़कर संकेत वाला अर्थ लेना। गागर रीती का अर्थ ख़ाली घड़ा नहीं, भावों से ख़ाली मन है।
ऐसी स्थिति, जिसमें उलटा या कड़वा सच छिपा हो। कवि कहता है कि अपनी ही सरलता की हँसी उड़ाना विडंबना है।
शब्दों से बना ऐसा चित्र, जो आँख, कान या मन के सामने उभर आए। मुरझाकर गिरती पत्तियाँ एक दृश्य बिंब है।
सावधान
भ्रम और सच
करके देखो
Title:
मेरी डायरी का एक पन्ना
Safety:
किसी दूसरे के निजी जीवन की बात उसकी अनुमति के बिना मत लिखिए।
What You Notice:
ख़ुद लिखकर समझ आता है कि प्रसाद आत्मकथा से क्यों हिचके; सच कहना और किसी को दुख न देना, दोनों साथ निभाना कठिन है।
Did you know
हंस पत्रिका प्रेमचंद ने सन् 1930 में शुरू की थी और 1936 तक निकाली। सन् 1986 से यह फिर निकलने लगी, और लंबे समय तक इसके संपादक राजेंद्र यादव रहे।
छायावाद के चार बड़े स्तंभ माने जाते हैं: जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा।
हिंदी की पहली आत्मकथा बनारसीदास जैन की अर्धकथानक मानी जाती है। यह सन् 1641 में लिखी गई थी, और पूरी की पूरी कविता में है।
Memory tricks
हिचक के तीन कारण: ख़ा-भू-स — ख़ाली गागर, भूलें और प्रवंचना, सरलता की हँसी। ख़ाभूस, कथा नहीं।
Practice MCQs with answers (25)
- A प्रगतिवाद
- B छायावाद
- C प्रयोगवाद
- D रीतिकाल
Show answer
Why:
प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी।
- A आँसू
- B झरना
- C कामायनी
- D लहर
Show answer
Why:
मनु और श्रद्धा।
- A उन्हें पढ़ाई में कोई रुचि नहीं थी और वे खेलते रहते थे
- B स्कूल बंद हो गया
- C वे विदेश चले गए
- D घर के हालात अनुकूल न रहे
Show answer
Why:
स्थितियाँ।
- A घर पर गहन स्वाध्याय से
- B विदेश के विश्वविद्यालयों में पढ़कर
- C किसी राजा की मदद से
- D केवल यात्राएँ करके
Show answer
Why:
संस्कृत, हिंदी, फ़ारसी।
- A सरस्वती
- B माधुरी
- C हंस
- D चाँद
Show answer
Why:
प्रेमचंद की पत्रिका।
- A आत्मकथा लिखने से कवि की असहमति
- B प्रेमचंद से कवि का पुराना और गहरा झगड़ा
- C किसी पुरस्कार की घोषणा
- D कवि की विदेश यात्रा
Show answer
Why:
इनकार से रचना।
- A यह किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन की पूरी कहानी है
- B इसमें केवल कल्पना है
- C यह गद्य में लिखी गई है
- D यह अपने बारे में कही बात है, पूरी कथा नहीं
Show answer
Why:
कथ्य यानी कहने योग्य।
- A वसंत ऋतु का
- B कवि के मन का
- C किसी राजा का
- D बगीचे के माली का
Show answer
Why:
मन रूपी भौंरा।
- A वसंत के आने की ख़ुशी और नई शुरुआत
- B बगीचे की सफ़ाई
- C तेज़ आँधी
- D जीवन और सुखों की नश्वरता
Show answer
Why:
पतझड़।
- A दुनिया में अनगिनत कथाएँ पहले से हैं
- B आकाश में बहुत सारे तारे चमक रहे हैं
- C इतिहास की किताबें नीली होती हैं
- D कवि आकाश में उड़ना चाहता है
Show answer
Why:
कथाओं की भीड़।
- A लोग एक-दूसरे की कथा की सच्चे मन से तारीफ़ करते हैं
- B इतिहास बहुत रोचक है
- C लोग एक-दूसरे की कथा पर बुरी तरह हँसते हैं
- D आकाश मैला है
Show answer
Why:
मैली हँसी।
- A ढेर सारा पैसा कमाना
- B अपनी कमज़ोरियाँ खोल देना
- C बड़ा पुरस्कार पाना
- D नई यात्रा पर निकलना
Show answer
Why:
दुर्बलता अपनी बीती।
- A उसके घर में बहुत सारे घड़े और बर्तन रखे हैं
- B उसे प्यास लगी है
- C उसका घड़ा टूट गया है
- D उसमें देने लायक़ कुछ नहीं बचा
Show answer
Why:
ख़ाली मन।
- A उसके मित्र उसके लिए हर दिन ताज़ा रस लाते थे
- B कुछ अपनों ने उससे लाभ लेकर उसे दुख दिया
- C वह रस बेचने का काम करता था
- D उसके पास बहुत रस था
Show answer
Why:
छिपा आरोप।
- A दूसरों की सरलता की ख़ूब प्रशंसा करने की
- B सरल भाषा में कविता लिखने की
- C अपने ही भोलेपन का मज़ाक़ उड़ाने की
- D सरलता को छोड़ देने की
Show answer
Why:
अरी सरलते।
- A अपनी भूलें और दूसरों के छल
- B अपनी जीत और दूसरों की हार
- C अपना धन और अपना घर
- D अपने गीत और अपने चित्र
Show answer
Why:
भूलें, प्रवंचना।
- A डर
- B आलस्य
- C सज्जनता
- D घमंड
Show answer
Why:
बदला नहीं।
- A प्रशंसा
- B धोखा
- C प्रार्थना
- D प्रकाश
Show answer
Why:
औरों की।
- A वर्णनात्मक शैली
- B हास्य शैली
- C संवाद शैली
- D लाक्षणिक शैली
Show answer
Why:
संकेत से अर्थ।
- A चंद्रगुप्त
- B गोदान
- C कंकाल
- D आकाशदीप
Show answer
Why:
मौर्य काल।
- A सत्य के प्रयोग
- B अर्धकथानक
- C मेरी कहानी
- D आत्मकथ्य
Show answer
Why:
बनारसीदास जैन।
- A सबसे अनोखी और प्रेरक कहानी
- B बहुत बड़ा सम्मान
- C एक मज़ेदार खेल
- D एक और उपहास का कारण
Show answer
Why:
असंख्य कथाएँ।
- A उत्साह और जोश से भरा हुआ वीर
- B हास्य से भरा
- C उदास और संकोच भरा
- D क्रोध से भरा
Show answer
Why:
पतझड़ और हिचक।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
हिचक का कारण।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C I, II और III तीनों
- D केवल I और III
Show answer
Why:
आठवीं तक पढ़े।
Important short questions (7)
प्रसाद छायावाद के प्रमुख कवि थे, और कामायनी उनकी सबसे बड़ी कृति है। वे नाटककार भी थे, जैसे चंद्रगुप्त और स्कंदगुप्त। कंकाल और तितली उनके उपन्यास हैं, और आकाशदीप उनका कहानी-संग्रह है।
प्रेमचंद के संपादन में हंस का आत्मकथा विशेषांक निकलना था। मित्रों ने प्रसाद से भी आत्मकथा लिखने को कहा। प्रसाद इससे सहमत नहीं थे, और इसी असहमति से यह कविता जन्मी।
गुनगुनाता भौंरा कवि के मन का प्रतीक है, जो अपनी कहानी कहना चाहता है। मुरझाकर गिरती पत्तियाँ बताती हैं कि जीवन और उसके सुख नश्वर हैं।
कवि कहता है कि अनंत आकाश के नीचे अनगिनत जीवन-कथाएँ एक-दूसरे पर हँसती रहती हैं। उसकी कथा भी इसी भीड़ में एक और उपहास बन जाएगी। इसलिए उसे कथा कहना बेकार लगता है।
गागर रीती का सीधा अर्थ ख़ाली घड़ा है। यहाँ इसका अर्थ है कवि का ऐसा मन और जीवन, जिसमें कोई सुख या उपलब्धि नहीं बची।
कवि का स्वभाव भोला और भरोसा करने वाला रहा। इसी भोलेपन के कारण उसे धोखे मिले। आत्मकथा लिखना अपने ही भोलेपन का मज़ाक़ बनाने जैसा होगा, जो उसे विडंबना लगती है।
कवि सज्जन है और बदला लेना नहीं चाहता। दूसरों के धोखे उजागर करना उसे उन पर आरोप लगाने जैसा लगता है। इसलिए वह अपने घाव चुपचाप सहना बेहतर समझता है।
Long answer questions (3)
कवि की हिचक के कई कारण हैं। पहला कारण यह है कि दुनिया में पहले से ही असंख्य जीवन-कथाएँ हैं, जो एक-दूसरे का बुरी तरह उपहास करती रहती हैं। कवि को लगता है कि उसकी कथा भी इसी भीड़ में एक और हँसी का विषय बनेगी। दूसरा कारण उसकी विनम्रता और दुख है। वह अपने मन को ख़ाली गागर बताता है, जिसमें दूसरों को देने लायक़ कुछ नहीं। उसे लगता है कि लोग कथा सुनकर बस यही पाएँगे कि उसका जीवन रीता है। तीसरा कारण यह है कि कथा में उन लोगों की बात भी आएगी, जिन्होंने उसका रस लेकर अपनी गागर भरी। चौथा कारण यह है कि कथा लिखने पर या तो अपनी भूलें दिखानी होंगी, या दूसरों के छल। अपनी सरलता का मज़ाक़ उड़ाना और दूसरों पर आरोप लगाना, दोनों उसे पसंद नहीं। इसलिए वह आत्मकथा से बचता है।
प्रसाद का जीवन संघर्ष और लगन का उदाहरण है। हालात के कारण वे आठवीं से आगे स्कूल में नहीं पढ़ सके, पर उन्होंने घर पर संस्कृत, हिंदी और फ़ारसी का गहरा अध्ययन किया। इससे उनकी आत्मनिर्भरता और ज्ञान के प्रति प्रेम दिखता है। उनकी रचनाएँ बताती हैं कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कामायनी जैसा महाकाव्य लिखा, चंद्रगुप्त और स्कंदगुप्त जैसे नाटक लिखे, तितली जैसे उपन्यास और आकाशदीप जैसी कहानियाँ भी लिखीं। इतिहास और दर्शन से उन्हें गहरा लगाव था। आत्मकथ्य से उनके स्वभाव की झलक मिलती है। वे विनम्र थे, अपने जीवन को साधारण मानते थे और दूसरों के छल उजागर करके बदला नहीं लेना चाहते थे। इस तरह प्रसाद एक विद्वान, कलाकार और संवेदनशील सज्जन के रूप में सामने आते हैं।
मेरे विचार से किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से उसके निजी जीवन की हर बात जानने की ज़िद करना ठीक नहीं है। प्रसिद्ध होने का अर्थ यह नहीं कि उसका हर दुख, हर भूल और हर रिश्ता सबकी संपत्ति बन जाए। आत्मकथ्य में प्रसाद यही कहते हैं। मित्र उनसे आत्मकथा लिखवाना चाहते हैं, पर उन्हें लगता है कि इसमें उनकी भूलें और दूसरों के धोखे उजागर होंगे। उनकी हिचक का सम्मान होना चाहिए। दूसरी ओर, अगर कोई अपनी इच्छा से अपनी कथा लिखे, तो वह दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकती है, जैसे गांधीजी की आत्मकथा। इसलिए निर्णय उसी व्यक्ति का होना चाहिए। हम उसके काम की चर्चा करें, पर उसकी निजता की सीमा भी समझें।
Flashcards (17)
Play this topic
- शब्द और अर्थ
- प्रसाद की रचना: कविता या गद्य
- सही या भ्रम
- कविता का भाव-क्रम
- झटपट उत्तर
अधूरा सपना, स्मृति का सहारा और मौन
कवि कहता है कि चाँदनी रातों की उज्ज्वल गाथा वह कैसे गाए, जब जिस सुख का सपना देखा, वह मुस्कुराकर भाग गया। अब प्रिय की स्मृति ही थके पथिक का पाथेय है। छोटे जीवन की बड़ी कथा कहने के बजाय वह मौन रहना और दूसरों की सुनना चाहता है।
What you will be able to do
- चाँदनी रातों की उज्ज्वल गाथा न गा पाने के पीछे कवि का दुख समझा सकेंगे।
- स्वप्न में देखे सुख के मुस्कुराकर भाग जाने और प्रिय के सौंदर्य-चित्र का भाव स्पष्ट कर सकेंगे।
- स्मृति को पाथेय और जीवन को कंथा कहने के प्रतीकात्मक अर्थ बता सकेंगे।
- छोटे जीवन की बड़ी कथा न कहने और मौन रहने के निर्णय में कवि की विनम्रता पहचान सकेंगे।
- कविता की छायावादी काव्य-भाषा, बिंब, मानवीकरण और प्रश्न-शैली को उदाहरण सहित समझा सकेंगे।
Key points
कवि पूछता है कि मधुर चाँदनी रातों की उज्ज्वल गाथा वह कैसे गाए, उन बातों की, जो खिलखिलाकर हँसते हुए होती थीं; यानी सुख के पल अब बीत चुके हैं।
जिस सुख का सपना देखकर वह जाग उठा, वह उसे कभी मिला ही नहीं; वह आलिंगन में आते-आते मुस्कुराकर भाग गया।
कवि अपनी प्रिय के लाल गालों की सुंदर छाया का चित्र देता है, जिसकी लालिमा से प्रेम भरी उषा भी अपनी माँग का सिंदूर लेती थी।
अब उस प्रिय की स्मृति ही थके हुए यात्री की राह का पाथेय, यानी सहारा या संबल बन गई है।
कवि कहता है कि मेरी गुदड़ी, यानी कंथा, की सिलाई उधेड़कर क्यों देखना चाहते हो; यानी मेरे अंतर्मन के घाव क्यों खोलना चाहते हो।
वह पूछता है कि इस छोटे-से जीवन की बड़ी कथाएँ वह कैसे कहे; क्या यह अच्छा नहीं कि वह दूसरों की सुने और ख़ुद चुप रहे।
कवि अपनी आत्मकथा को भोली बताता है और कहता है कि अभी उसे कहने का समय भी नहीं है, क्योंकि उसकी मौन व्यथा थककर सोई हुई है।
कविता में तत्सम शब्दों से भरी कोमल खड़ी बोली, सुंदर बिंब, मानवीकरण और प्रश्न-शैली का प्रयोग है, जो छायावाद की पहचान है।
पूरी कविता में यथार्थ की स्वीकृति और एक बड़े कवि की विनम्रता, दोनों साथ-साथ दिखती हैं।
Full explanation
उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ: बीते सुख की टीस
कविता के दूसरे भाग में कवि अपने जीवन के सबसे कोमल हिस्से की ओर मुड़ता है। वह पूछता है कि मैं मधुर चाँदनी रातों की उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ? उज्ज्वल गाथा का अर्थ है सुख और प्रेम भरी, चमकती हुई कहानी। चाँदनी रातें यहाँ प्रेम के उन सुंदर पलों का प्रतीक हैं, जो कवि ने कभी जिए थे या जीना चाहा था।
फिर कवि उन बातों की याद करता है, जो खिलखिलाकर हँसते हुए होती थीं। यानी कभी उसके जीवन में भी हँसी, बातचीत और अपनापन था। पर अब वह सब बीत चुका है। ऐसी सुखद यादों को सबके सामने गाना उसे अजीब लगता है, क्योंकि उनके साथ अब दुख भी जुड़ गया है।
इस प्रश्न में दो भाव हैं। एक यह कि वे पल इतने निजी और कोमल हैं कि उन्हें सबके सामने खोलना ठीक नहीं। दूसरा यह कि जो सुख अब नहीं रहा, उसकी उज्ज्वल गाथा गाना अपने ही घाव कुरेदने जैसा है। इसलिए कवि कहता है कि यह गाथा मैं कैसे गाऊँ। यह प्रश्न इनकार भी है और पीड़ा भी।
सपने का सुख: मुस्कुराकर भाग गया
अब कवि अपने जीवन का सबसे बड़ा दुख बताता है। वह कहता है कि जिस सुख का मैं सपना देखता रहा, वह मुझे मिला कहाँ? मैं सपना देखकर जाग गया, और सुख वहीं छूट गया। यानी कवि ने जीवन में जिस आनंद और प्रेम की कल्पना की थी, वह कभी सच नहीं हो सका।
फिर कवि एक बहुत सुंदर चित्र देता है। वह सुख आलिंगन में आते-आते मुस्कुराकर भाग गया। जैसे कोई प्रिय व्यक्ति बाँहों में आने ही वाला हो, और तभी मुस्कुराकर दूर चला जाए। सुख को यहाँ एक व्यक्ति की तरह दिखाया गया है, जो पास आकर छल कर गया। यह मानवीकरण का सुंदर उदाहरण है।
इस चित्र में एक गहरी टीस है। अगर सुख कभी पास ही न आता, तो शायद इतना दुख न होता। पर जब वह बिल्कुल पास आकर फिसल जाए, तो उसकी कमी और चुभती है। बहुत-से लोग मानते हैं कि यहाँ कवि अपनी पत्नी के जल्दी बिछड़ जाने की ओर संकेत कर रहा है, जिनके साथ का सुख वह पूरा नहीं जी सका।
अरुण कपोल और अनुरागिनी उषा
कवि अपनी प्रिय के सौंदर्य को याद करता है। वह कहता है कि उसके लाल गालों की मतवाली, सुंदर छाया थी। अरुण का अर्थ है लाल, और कपोल का अर्थ है गाल। मतवाली छाया का अर्थ है ऐसी सुंदरता, जो देखने वाले को मदहोश कर दे।
फिर कवि कहता है कि उस सुंदर छाया में प्रेम भरी उषा भी अपना सुहाग लेती थी। उषा यानी भोर, सुबह की लालिमा। अनुरागिनी का अर्थ है प्रेम करने वाली। सुहाग लेना यानी माँग में सिंदूर भरना। कवि का अर्थ यह है कि भोर की लालिमा भी उसकी प्रिय के गालों की लाली से रंग उधार लेती थी।
यह कल्पना छायावाद की पहचान है। यहाँ प्रकृति, यानी उषा, को एक स्त्री की तरह दिखाया गया है, जो सिंदूर भरती है। और प्रिय की सुंदरता को प्रकृति से भी बढ़कर बताया गया है। यह अतिशयोक्ति भी है और मानवीकरण भी। मधुमाया का अर्थ है मधुर माया, यानी मीठा जादू। पूरी पंक्ति में सौंदर्य का एक रंगीन, कोमल चित्र बनता है।
स्मृति का पाथेय और कंथा की सीवन
वह प्रिय अब कवि के जीवन में नहीं है, पर उसकी याद बची है। कवि कहता है कि उसकी स्मृति ही थके हुए पथिक के रास्ते का पाथेय बन गई है। पथिक यानी यात्री, और पंथा यानी रास्ता। कवि ख़ुद को एक थका हुआ यात्री मानता है, जो जीवन की लंबी राह पर चल रहा है।
पाथेय का अर्थ है वह भोजन या सामान, जो यात्री रास्ते के लिए साथ रखता है। जैसे कलेवा थके यात्री को ताक़त देता है, वैसे ही प्रिय की याद कवि को जीने की ताक़त देती है। यानी कवि के पास अब कोई सुख नहीं, बस एक याद है, और वही उसका सहारा है। इसीलिए वह उसे सबके सामने नहीं खोलना चाहता।
फिर कवि मित्रों से पूछता है कि तुम मेरी कंथा की सीवन उधेड़कर क्यों देखोगे? कंथा का अर्थ है गुदड़ी, जो कई पुराने कपड़ों को जोड़कर सिली जाती है। सीवन का अर्थ है सिलाई। यहाँ कंथा कवि के अंतर्मन का प्रतीक है, जिसमें उसने अपने दुखों को सीकर छिपा रखा है।
सिलाई उधेड़ने का अर्थ है उन छिपे घावों को फिर से खोल देना। आत्मकथा लिखना कवि को ऐसा ही लगता है। जो दुख उसने बड़ी मुश्किल से सी-सीकर ढक रखे हैं, उन्हें दुनिया के सामने उधेड़ना उसे पीड़ा देगा। यह बिंब बहुत मार्मिक है, क्योंकि गुदड़ी ग़रीबी और पुरानेपन की भी याद दिलाती है।
छोटा जीवन, बड़ी कथा और मौन का निर्णय
कविता के अंत में कवि अपनी पूरी बात समेटता है। वह पूछता है कि इस छोटे-से जीवन की बड़ी-बड़ी कथाएँ मैं आज कैसे कहूँ? यहाँ कवि की विनम्रता साफ़ दिखती है। हिंदी का इतना बड़ा कवि अपने जीवन को छोटा बता रहा है, जिसमें बड़ी कहानियाँ कहने लायक़ कुछ नहीं।
फिर वह एक सुझाव देता है: क्या यह अच्छा नहीं कि मैं दूसरों की कथाएँ सुनूँ और ख़ुद मौन रहूँ? यानी अपनी कथा सुनाने से बेहतर है कि वह दूसरों के अनुभव सुने। यह एक संवेदनशील व्यक्ति का स्वभाव है, जो बोलने से ज़्यादा सुनने में विश्वास करता है।
कवि आगे पूछता है कि मेरी भोली आत्मकथा सुनकर तुम क्या भला करोगे? यानी उसकी कथा से किसी का कोई लाभ नहीं होगा। और अंत में वह कहता है कि अभी समय भी नहीं है। उसकी मौन व्यथा अभी थककर सोई हुई है। अगर कथा कही गई, तो वह सोई हुई व्यथा जाग जाएगी, और फिर से दर्द देगी।
इस अंतिम पंक्ति में व्यथा का मानवीकरण है। दुख को एक थके हुए व्यक्ति की तरह दिखाया गया है, जो बड़ी मुश्किल से सो पाया है। कोई भी उसे जगाना नहीं चाहेगा। इसी तरह कवि भी अपने दुख को नहीं जगाना चाहता। कविता यहीं, एक कोमल मौन पर, समाप्त होती है।
काव्य-भाषा और शिल्प: छायावाद का सुंदर उदाहरण
इस कविता की भाषा तत्सम शब्दों से भरी, कोमल और मधुर खड़ी बोली है। अनंत नीलिमा, प्रवंचना, अनुरागिनी, पाथेय और कंथा जैसे शब्द भाषा को गरिमा देते हैं। फिर भी कविता बोझिल नहीं लगती, क्योंकि उसमें लय और संगीत है।
कविता की सबसे बड़ी ताक़त उसके बिंब हैं। मुरझाती पत्तियाँ, ख़ाली गागर, मुस्कुराकर भागता सुख, लाल गालों की छाया, थका पथिक, गुदड़ी की सिलाई और सोई हुई व्यथा, ये सब आँखों के सामने चित्र बना देते हैं। हर बिंब किसी गहरे भाव का संकेत है, इसलिए यह लाक्षणिक शैली है।
कविता में मानवीकरण भी बार-बार आता है। सुख मुस्कुराकर भागता है, उषा सुहाग लेती है, व्यथा थककर सोती है। इसके अलावा प्रश्न-शैली पूरी कविता में फैली है: कह डालूँ?, कैसे गाऊँ?, क्यों देखोगे?, कैसे कहूँ? ये सवाल कवि की हिचक को जीवंत बनाते हैं और पाठक को सोचने पर मजबूर करते हैं।
कुल मिलाकर इस कविता में दो चीज़ें एक साथ हैं। एक ओर कवि अपने जीवन के अभाव और दुख को ईमानदारी से स्वीकार करता है। दूसरी ओर उसमें एक बड़े कवि की गहरी विनम्रता है, जो अपनी कथा को भोली और छोटी बताता है। यही इस कविता को आत्मकथा से भी ज़्यादा सच्चा आत्म-परिचय बना देता है।
Concepts and terms
यात्रा का भोजन या संबल। कवि के लिए प्रिय की स्मृति ही जीवन की थकी राह का सहारा है।
गुदड़ी, पुराने कपड़ों से जोड़कर सिली चादर। यहाँ यह कवि के अंतर्मन और जीवन का प्रतीक है।
जब किसी निर्जीव या प्राकृतिक चीज़ को मनुष्य की तरह काम करते दिखाया जाए। अनुरागिनी उषा का सुहाग लेना मानवीकरण है।
बात को सवाल के रूप में रखना, ताकि पाठक ख़ुद सोचे। कवि बार-बार पूछता है कि वह अपनी कथा क्यों और कैसे कहे।
ऐसा दुख, जो कहा नहीं गया, भीतर ही दबा है। कवि कहता है कि यह व्यथा अभी थककर सोई है।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
विद्यालय की पत्रिका के लिए कक्षा दस की छात्रा नेहा से कहा गया कि वह अपने जीवन की सबसे बड़ी घटना पर लेख लिखे। नेहा के पिता का दो वर्ष पहले देहांत हुआ था, और वह इस बारे में किसी से बात नहीं करती थी।
संपादक-मंडल के कुछ सदस्यों ने कहा कि अगर नेहा लिखेगी, तो लेख बहुत मार्मिक बनेगा। पर नेहा ने विनम्रता से मना कर दिया। उसने कहा कि कुछ यादें उसके लिए राह का सहारा हैं, उन्हें वह अभी सबके सामने नहीं खोलना चाहती।
हिंदी शिक्षिका ने संपादक-मंडल को आत्मकथ्य कविता याद दिलाई। उन्होंने कहा कि किसी की चुप्पी का भी सम्मान करना चाहिए, और नेहा को दूसरा कोई विषय चुनने की छूट दे दी।
Activity:
कक्षा में चर्चा कीजिए: किसी के दुख के बारे में बात करते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? पाँच नियमों की एक सूची बनाइए।
Analysis:
आत्मकथ्य केवल एक कवि की बात नहीं है। यह हर उस व्यक्ति की बात है, जिसके मन में कोई कोमल याद या घाव है। कविता हमें सिखाती है कि मौन भी एक भाषा है, और उसे समझना संवेदनशीलता है।
Did you know
पाथेय का शाब्दिक अर्थ है राह का भोजन, यानी वह कलेवा, जो यात्री साथ लेकर चलता है। कवि ने प्रिय की स्मृति को यही कलेवा बना दिया है।
कंथा का अर्थ है गुदड़ी, यानी पुराने कपड़ों को जोड़कर सिली गई चादर। साधु-संत इसे ओढ़ते थे। कवि अपने जीवन को ऐसी ही जोड़-जोड़कर बनी गुदड़ी मानता है।
हरिवंशराय बच्चन की आत्म-परिचय कविता भी अपने बारे में कही गई कविता है। पर उसमें मस्ती और दीवानगी का स्वर है, जबकि प्रसाद के आत्मकथ्य में संकोच और व्यथा का।
Memory tricks
अंत के तीन प्रतीक: पा-कं-मौ — पाथेय यानी स्मृति, कंथा यानी अंतर्मन, मौन यानी सोई व्यथा। पाकंमौ, कथा नहीं।
Practice MCQs with answers (25)
- A प्रेम के सुंदर पलों का
- B पूर्णिमा के धार्मिक त्योहार का
- C रात की पढ़ाई का
- D चाँद की यात्रा का
Show answer
Why:
उज्ज्वल गाथा।
- A उसे गाना बिल्कुल नहीं आता और आवाज़ ख़राब है
- B चाँदनी रात में गाना मना है
- C वह सुख बीत चुका है और याद दुख देती है
- D उसके पास वाद्य नहीं
Show answer
Why:
घाव कुरेदना।
- A कवि हमेशा से बहुत दुखी और अकेला रहा था
- B कवि हास्य कवि था
- C कवि को हँसी पसंद नहीं
- D कभी जीवन में अपनापन और हँसी थी
Show answer
Why:
बीता सुख।
- A कवि को रात में नींद बिल्कुल नहीं आती थी
- B सपने का सुख सच नहीं हो सका
- C कवि सुबह जल्दी उठता था
- D सपना बहुत डरावना था
Show answer
Why:
मिला कहाँ वह सुख।
- A अनुप्रास
- B श्लेष
- C उत्प्रेक्षा
- D मानवीकरण
Show answer
Why:
सुख एक व्यक्ति जैसा।
- A दूर की चीज़ हमेशा ज़्यादा प्यारी और मीठी लगती है
- B कवि को सुख चाहिए ही नहीं था
- C पास आकर छूटी चीज़ की कमी ज़्यादा चुभती है
- D सुख लौट आया
Show answer
Why:
अधूरापन।
- A लाल गाल
- B नीली आँखें
- C काले बाल
- D सफ़ेद माथा
Show answer
Why:
अरुण = लाल।
- A भोर बहुत देर से और धीरे-धीरे होती थी
- B प्रिय का सौंदर्य भोर से भी बढ़कर था
- C उषा कवि की बहन थी
- D प्रिय सुबह जल्दी उठती थी
Show answer
Why:
लाली उधार।
- A यमक
- B पुनरुक्ति प्रकाश
- C श्लेष
- D मानवीकरण
Show answer
Why:
उषा स्त्री जैसी।
- A याद ही अब जीने का सहारा है
- B यात्रा के लिए बहुत सारा भोजन चाहिए
- C स्मृति एक रास्ते का नाम है
- D कवि भूखा है
Show answer
Why:
राह का संबल।
- A वह सचमुच बहुत लंबी पैदल यात्रा पर निकला था
- B जीवन की लंबी राह और दुखों से वह थक चुका है
- C उसे चलने की बीमारी थी
- D वह यात्रा-लेखक था
Show answer
Why:
जीवन एक यात्रा।
- A पुरानी गुदड़ी को सचमुच सुई से फिर सिलना
- B नया कपड़ा ख़रीदना
- C मन के छिपे घाव खोलना
- D चादर धोना
Show answer
Why:
अंतर्मन की सिलाई।
- A बहुत चमकदार, नया और सुंदर जीवन
- B जोड़-जोड़कर सँभाला जीवन
- C राजसी ठाट-बाट
- D केवल कपड़ों का शौक़
Show answer
Why:
पुराने टुकड़े।
- A विनम्रता
- B घमंड
- C क्रोध
- D लालच
Show answer
Why:
बड़ा कवि, छोटा जीवन।
- A उसकी आवाज़ बहुत धीमी है और कोई सुनता नहीं
- B उसे बोलना मना है
- C अपनी कथा से किसी का भला नहीं होगा
- D वह थका हुआ है और सोना चाहता है
Show answer
Why:
भोली आत्मकथा।
- A उसके पास लिखने के लिए बिल्कुल फ़ुरसत नहीं थी
- B पत्रिका देर से छपेगी
- C रात हो गई है
- D सोई हुई व्यथा जाग उठेगी
Show answer
Why:
थकी सोई है।
- A सुख का
- B दुख का
- C उषा का
- D पथिक का
Show answer
Why:
व्यथा सोती है।
- A घर की छत
- B नदी का किनारा
- C राह का संबल
- D पेड़ की छाया
Show answer
Why:
यात्रा का कलेवा।
- A कवि की हिचक जीवंत होती है
- B कविता एक परीक्षा-पत्र जैसी उबाऊ बन जाती है
- C अर्थ बिल्कुल छिप जाता है
- D छंद टूट जाता है
Show answer
Why:
प्रश्न-शैली।
- A ठेठ ग्रामीण बोली और देसी मुहावरे
- B अंग्रेज़ी शब्दों की भरमार
- C उर्दू-फ़ारसी के कठिन शब्द
- D तत्सम शब्दों वाली कोमल खड़ी बोली
Show answer
Why:
छायावादी भाषा।
- A दोनों में केवल क्रोध और विद्रोह का स्वर
- B एक में संकोच-व्यथा, दूसरी में मस्ती
- C दोनों में हास्य
- D दोनों में युद्ध
Show answer
Why:
दो आत्म-कथन।
- A घमंड और अपना दिखावा
- B युद्ध और उसमें विजय
- C धन और राजसी वैभव
- D सच्चाई और विनम्रता
Show answer
Why:
सच और नम्रता।
- A कोमल मौन पर
- B ज़ोरदार ललकार पर
- C ठहाके पर
- D विजय-गीत पर
Show answer
Why:
सोई व्यथा।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
स्मृति ही सहारा।
- A केवल I और III
- B केवल I और II
- C केवल II और III
- D I, II और III तीनों
Show answer
Why:
सुख मिला नहीं।
Important short questions (7)
चाँदनी रातें और हँसी भरी बातें कवि के बीते सुख की याद हैं। वह सुख अब नहीं रहा। उसकी गाथा गाना अपने ही घाव कुरेदने जैसा है, इसलिए कवि हिचकता है।
कवि कहता है कि सुख का सपना देखकर वह जाग गया, पर सुख मिला नहीं। वह आलिंगन में आते-आते मुस्कुराकर भाग गया। यहाँ सुख को एक छलने वाले व्यक्ति की तरह दिखाया गया है।
कवि कहता है कि प्रिय के लाल गालों की छाया इतनी सुंदर थी कि प्रेम भरी उषा भी उससे सुहाग लेती थी। यानी भोर की लाली भी उसी से रंग उधार लेती थी।
पाथेय यात्री का राह का भोजन होता है। कवि के जीवन में अब सुख नहीं बचा, बस प्रिय की याद बची है। वही याद उसे थकी राह पर आगे चलने की ताक़त देती है।
कंथा गुदड़ी है, जो कवि के अंतर्मन का प्रतीक है। उसकी सिलाई में कवि ने अपने दुख छिपा रखे हैं। आत्मकथा लिखना उन छिपे घावों को उधेड़ने जैसा होगा।
कवि कहता है कि उसकी मौन व्यथा थककर सोई हुई है। आत्मकथा कहने से वह फिर जाग जाएगी और दर्द देगी। इसलिए अभी मौन रहना ही ठीक है।
पहला उदाहरण है सुख का आलिंगन में आते-आते मुस्कुराकर भाग जाना। दूसरा है उषा का प्रिय के गालों की छाया में सुहाग लेना। व्यथा का थककर सोना भी मानवीकरण है।
Long answer questions (3)
आत्मकथ्य की भाषा तत्सम शब्दों से भरी, कोमल और मधुर खड़ी बोली है। अनंत नीलिमा, प्रवंचना, अनुरागिनी, पाथेय और कंथा जैसे शब्द भाषा को गरिमा देते हैं, पर लय के कारण कविता बोझिल नहीं लगती। कविता की सबसे बड़ी विशेषता उसके बिंब हैं। मुरझाती पत्तियाँ, ख़ाली गागर, थका पथिक और गुदड़ी की सिलाई जैसे चित्र आँखों के सामने उभर आते हैं। हर बिंब किसी गहरे भाव का संकेत है, इसलिए यह लाक्षणिक शैली है। मानवीकरण भी बार-बार आता है: सुख मुस्कुराकर भागता है, उषा सुहाग लेती है और व्यथा थककर सोती है। इसके अलावा पूरी कविता में प्रश्न-शैली है, जैसे कैसे गाऊँ, क्यों देखोगे, कैसे कहूँ। ये सब मिलकर कविता को छायावाद का सुंदर उदाहरण बनाते हैं।
आत्मकथ्य से प्रसाद एक विनम्र और संवेदनशील व्यक्ति के रूप में सामने आते हैं। हिंदी के इतने बड़े कवि होते हुए भी वे अपने जीवन को छोटा और अपनी कथा को भोली बताते हैं। उन्हें लगता है कि उनके जीवन में वाह-वाह करने लायक़ कुछ नहीं। वे सरल और भरोसा करने वाले स्वभाव के थे, और इसी कारण उन्हें धोखे मिले। फिर भी वे दूसरों के छल उजागर करके बदला नहीं लेना चाहते। यह उनकी सज्जनता है। वे भीतर से दुखी हैं; जिस सुख का सपना देखा, वह नहीं मिला, और अब प्रिय की स्मृति ही उनका सहारा है। पर वे अपने दुख का प्रदर्शन नहीं करते, बल्कि उसे मौन में सहेज लेते हैं। वे बोलने से ज़्यादा सुनना पसंद करते हैं। इस तरह प्रसाद एक गंभीर, विनम्र और गहरी भावनाओं वाले कवि दिखते हैं।
मैं भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की आत्मकथा पढ़ना चाहूँगा या चाहूँगी। वे रामेश्वरम के एक साधारण परिवार में जन्मे थे, पर अपनी मेहनत से देश के सबसे बड़े वैज्ञानिकों और राष्ट्रपति तक पहुँचे। मैं जानना चाहूँगा या चाहूँगी कि बचपन में अख़बार बाँटते हुए उन्होंने पढ़ाई कैसे की, असफलताओं के समय उन्होंने हिम्मत कैसे रखी, और कौन-से शिक्षक उनकी प्रेरणा बने। ऐसी आत्मकथा इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि उसमें सफलता के साथ संघर्ष और कमज़ोरियाँ भी होती हैं। प्रसाद ने अपनी कथा नहीं कही, पर जो लोग ईमानदारी से अपनी कथा कहते हैं, वे हम जैसे साधारण बच्चों को सिखाते हैं कि बड़े सपने देखना और उन्हें पूरा करना संभव है।
Flashcards (17)
Play this topic
- प्रतीक और अर्थ
- जो छूट गया या जो बचा है
- सही या भ्रम
- दूसरे भाग का भाव-क्रम
- झटपट उत्तर
Class 10 Hindi Chapter 3 — frequently asked questions
प्रसाद छायावाद के प्रमुख कवि थे, और कामायनी उनकी सबसे बड़ी कृति है। वे नाटककार भी थे, जैसे चंद्रगुप्त और स्कंदगुप्त। कंकाल और तितली उनके उपन्यास हैं, और आकाशदीप उनका कहानी-संग्रह है।
प्रेमचंद के संपादन में हंस का आत्मकथा विशेषांक निकलना था। मित्रों ने प्रसाद से भी आत्मकथा लिखने को कहा। प्रसाद इससे सहमत नहीं थे, और इसी असहमति से यह कविता जन्मी।
गुनगुनाता भौंरा कवि के मन का प्रतीक है, जो अपनी कहानी कहना चाहता है। मुरझाकर गिरती पत्तियाँ बताती हैं कि जीवन और उसके सुख नश्वर हैं।
चाँदनी रातें और हँसी भरी बातें कवि के बीते सुख की याद हैं। वह सुख अब नहीं रहा। उसकी गाथा गाना अपने ही घाव कुरेदने जैसा है, इसलिए कवि हिचकता है।
कवि कहता है कि सुख का सपना देखकर वह जाग गया, पर सुख मिला नहीं। वह आलिंगन में आते-आते मुस्कुराकर भाग गया। यहाँ सुख को एक छलने वाले व्यक्ति की तरह दिखाया गया है।
कवि कहता है कि प्रिय के लाल गालों की छाया इतनी सुंदर थी कि प्रेम भरी उषा भी उससे सुहाग लेती थी। यानी भोर की लाली भी उसी से रंग उधार लेती थी।
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