Class 10 Hindi Chapter 2: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद is Chapter 2 of NCERT / CBSE Class 10 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
  • 2 topics
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टूटा धनुष, क्रोधित मुनि और दो भाइयों के उत्तर

शिव-धनुष टूटने पर परशुराम क्रोध में सभा में आते हैं। राम विनम्र होकर ख़ुद को उनका दास बताते हैं, जबकि लक्ष्मण मुस्कुराकर कहते हैं कि बचपन में ऐसी कई धनुहियाँ टूटीं, तब तो किसी ने क्रोध नहीं किया।

What you will be able to do

  • तुलसीदास के जीवन, प्रमुख रचनाओं और भाषा-छंद की विशेषताओं के बारे में बता सकेंगे।
  • सीता-स्वयंवर, शिव-धनुष के टूटने और परशुराम के आगमन का प्रसंग अपने शब्दों में समझा सकेंगे।
  • राम के विनम्र उत्तर और परशुराम की सेवक-शत्रु वाली कसौटी का अर्थ स्पष्ट कर सकेंगे।
  • लक्ष्मण के पहले व्यंग्य में छिपे तर्क और परशुराम की प्रतिक्रिया की तुलना कर सकेंगे।
  • प्रसंग में आए अवधी शब्दों, जैसे भंजनिहारा, रिसाइ, रिपु, बिलगाउ और लरिकाईं के अर्थ पहचान सकेंगे।

Key points

  • तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में बाँदा ज़िले के राजापुर गाँव में माना जाता है; कुछ विद्वान एटा ज़िले के सोरों को उनका जन्म-स्थान मानते हैं।

  • बचपन में ही माता-पिता से बिछड़ने के कारण तुलसी का जीवन संघर्ष भरा रहा; गुरु की कृपा से उन्हें रामभक्ति की राह मिली; सन् 1623 में काशी में उनका देहांत हुआ।

  • रामचरितमानस अवधी में है; विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में हैं; तुलसी का दोनों भाषाओं पर समान अधिकार था।

  • यह प्रसंग रामचरितमानस के बालकांड से है: सीता-स्वयंवर में राम ने शिव का धनुष तोड़ा, और यह सुनकर परशुराम क्रोध में सभा में आ पहुँचे।

  • राम विनम्र होकर कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा; आज्ञा दीजिए, क्या करना है।

  • परशुराम कहते हैं कि सेवक वह है जो सेवा करे; जिसने धनुष तोड़ा, वह सहस्रबाहु जैसा मेरा शत्रु है और उसे सभा से अलग हो जाना चाहिए।

  • लक्ष्मण मुस्कुराकर कहते हैं कि बचपन में हमने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया; इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों।

  • परशुराम लक्ष्मण को काल के वश में बोलने वाला राजकुमार कहते हैं और याद दिलाते हैं कि शिव का धनुष सारे संसार में प्रसिद्ध है, कोई छोटी धनुही नहीं।

  • इस हिस्से में राम का विनय, परशुराम का क्रोध और लक्ष्मण का व्यंग्य, तीनों स्वभाव आमने-सामने आ जाते हैं।

Full explanation

तुलसीदास: लोक के कवि, राम के भक्त

माना जाता है कि तुलसीदास सन् 1532 में राजापुर में जन्मे, जो आज उत्तर प्रदेश के बाँदा ज़िले में है। कुछ विद्वान एटा ज़िले के सोरों को भी उनका जन्म-स्थान मानते हैं। उनका बचपन बहुत कठिन था, क्योंकि छोटी उम्र में ही वे माता-पिता से बिछड़ गए। माना जाता है कि गुरु की कृपा से उन्हें रामभक्ति का रास्ता मिला, और फिर उनका पूरा जीवन इसी में रम गया। सन् 1623 में काशी में उनका देहांत हुआ।

रामभक्ति की परंपरा में तुलसी का कोई जोड़ नहीं है। उनका सबसे बड़ा ग्रंथ रामचरितमानस है, जो आज भी उत्तर भारत के घर-घर में पढ़ा और गाया जाता है। इसके अलावा कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली और विनयपत्रिका भी उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। तुलसी के राम केवल देवता नहीं, बल्कि मर्यादा और आदर्श के प्रतीक हैं। उनके ज़रिए तुलसी ने नीति, स्नेह, शील, विनय और त्याग जैसे मूल्यों को लोगों के दिल तक पहुँचाया।

तुलसी की एक बड़ी ख़ूबी यह है कि वे दो भाषाओं में बराबर कुशल थे। रामचरितमानस उन्होंने अवधी में लिखा, जबकि विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में हैं। उस समय जितने काव्य-रूप चलन में थे, लगभग सब उनकी रचनाओं में मिल जाते हैं। मानस का मुख्य छंद चौपाई है, और बीच-बीच में दोहे, सोरठे और हरिगीतिका जैसे छंद आते हैं। विनयपत्रिका गाने लायक़ पदों में है, और कवितावली में सवैया और कवित्त की छटा है।

तुलसी ने प्रबंध काव्य भी लिखा और मुक्तक भी। प्रबंध का अर्थ है ऐसी रचना, जिसमें एक लंबी कथा क्रम से चलती है; रामचरितमानस इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। मुक्तक में हर पद या छंद अपने आप में पूरा होता है, जैसे विनयपत्रिका के पद। हमारा पाठ मानस से लिया गया है, इसलिए इसमें कथा भी है और नाटक जैसा जीवंत संवाद भी।

प्रसंग की पृष्ठभूमि: एक धनुष, एक स्वयंवर

यह अंश रामचरितमानस के बालकांड से है। राजा जनक ने अपनी बेटी सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रखा था। शर्त यह थी कि जो वीर शिव के विशाल धनुष पर डोरी चढ़ा देगा, सीता उसी से विवाह करेंगी। देश-देश के राजा आए, पर कोई उस धनुष को हिला तक नहीं पाया। फिर विश्वामित्र की आज्ञा से राम उठे, और धनुष उनके हाथ में आते ही टूट गया।

धनुष टूटने की ख़बर परशुराम तक पहुँची। परशुराम शिव के बड़े भक्त थे और शिव से ही उन्हें वह फरसा मिला था, जिससे वे पहचाने जाते हैं। अपने आराध्य का धनुष टूटा देखकर वे आगबबूला हो गए। वे कंधे पर फरसा रखे, क्रोध से तमतमाते हुए सभा में आ पहुँचे। उन्हें देखते ही बड़े-बड़े राजा डर गए।

यहीं से पाठ का संवाद शुरू होता है। एक ओर परशुराम हैं, जो क्रोध में हर किसी को धमका रहे हैं। दूसरी ओर दो भाई हैं, राम और लक्ष्मण, जो दोनों बहादुर हैं, पर जिनके स्वभाव बिल्कुल अलग हैं। तुलसी ने इन तीनों के बीच की बातचीत को ऐसे लिखा है कि पढ़ते हुए लगता है, मानो हम सामने कोई नाटक देख रहे हों।

इस पूरे प्रसंग का अंत यह है कि आगे चलकर परशुराम का क्रोध शांत होता है। राम का विनय, विश्वामित्र का समझाना और राम की शक्ति की परख, ये सब मिलकर उन्हें शांत करते हैं। पर हमारे पाठ में वह हिस्सा है, जब क्रोध अपने चरम पर है और लक्ष्मण उसमें अपने व्यंग्यों से और घी डाल रहे हैं।

राम का उत्तर: जिसने तोड़ा, वह आपका ही दास होगा

सबसे पहले राम बोलते हैं। वे परशुराम को नाथ कहकर संबोधित करते हैं और कहते हैं कि शिव का धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा। फिर वे विनम्रता से पूछते हैं कि आपकी क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते। भंजनिहारा का अर्थ है तोड़ने वाला। राम सीधे यह नहीं कहते कि धनुष मैंने तोड़ा, बल्कि ख़ुद को परशुराम का सेवक बताकर उनका मान रखते हैं।

राम के इस उत्तर में बहुत समझदारी है। वे जानते हैं कि क्रोध में बैठे व्यक्ति से बहस करने पर आग और भड़कती है। इसलिए वे पहले उसका सम्मान करते हैं, फिर उसकी बात सुनने को तैयार दिखते हैं। यह कमज़ोरी नहीं है, क्योंकि यही राम अभी-अभी वह धनुष तोड़कर आए हैं, जिसे कोई राजा हिला भी नहीं पाया। शक्ति होते हुए भी नम्र रहना ही राम का असली बड़प्पन है।

पर परशुराम इस विनय से शांत नहीं होते। वे ग़ुस्से में कहते हैं कि सेवक वह होता है, जो सेवा का काम करे। शत्रु जैसा काम करके लड़ाई ही करनी हो, तो फिर सेवक कैसा? यानी परशुराम के लिए काम ही असली पहचान है, शब्द नहीं। धनुष तोड़ना उनकी नज़र में दुश्मनी का काम है, सेवा का नहीं।

फिर परशुराम एक बहुत कड़ी बात कहते हैं। वे कहते हैं कि जिसने यह धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान मेरा शत्रु है। सहस्रबाहु वह राजा था, जिससे परशुराम का पुराना बैर था। परशुराम कहते हैं कि वह व्यक्ति सभा से अलग होकर सामने आ जाए, वरना यहाँ बैठे सारे राजा मारे जाएँगे। इस धमकी से पूरी सभा सहम जाती है।

सहस्रबाहु की कथा: परशुराम का पुराना बैर

परशुराम बार-बार सहस्रबाहु का नाम क्यों लेते हैं, यह समझने के लिए एक पुरानी कथा जाननी होगी। परशुराम ऋषि जमदग्नि के पुत्र थे। ऋषि के आश्रम में कामधेनु नाम की एक अद्भुत गाय थी, जो हर इच्छा पूरी करती थी। राजा कार्तवीर्य सहस्रबाहु एक दिन शिकार के दौरान आश्रम पहुँचा और उसने वह गाय माँग ली।

ऋषि ने गाय देने से मना कर दिया, तो सहस्रबाहु उसे ज़बरदस्ती ले गया। यह सुनकर परशुराम का ख़ून खौल उठा, और उन्होंने सहस्रबाहु को मार डाला। उनके पिता को यह हिंसा अच्छी नहीं लगी, और उन्होंने परशुराम से प्रायश्चित करने को कहा। पर बदले की आग यहीं नहीं रुकी। सहस्रबाहु के बेटों ने ग़ुस्से में आकर ऋषि जमदग्नि की हत्या कर दी।

पिता की मृत्यु से परशुराम का क्रोध भयंकर हो गया। उन्होंने प्रण लिया कि वे धरती को क्षत्रिय राजाओं से ख़ाली कर देंगे। कहा जाता है कि उन्होंने कई बार राजाओं का संहार किया। इसीलिए जब वे धनुष तोड़ने वाले को सहस्रबाहु जैसा शत्रु कहते हैं, तो उसका अर्थ बहुत डरावना है। वे उसे उसी तरह मारने की बात कर रहे हैं, जैसे उन्होंने सहस्रबाहु को मारा था।

लक्ष्मण की मुस्कान: बचपन में तो बहुत धनुहियाँ तोड़ीं

परशुराम की धमकी सुनकर लक्ष्मण मुस्कुरा उठते हैं। यह मुस्कान ही बताती है कि वे डरे नहीं हैं, बल्कि उन्हें परशुराम का यह क्रोध कुछ बढ़ा-चढ़ा लग रहा है। वे परशुराम का अपमान-सा करते हुए कहते हैं कि बचपन में हमने बहुत-सी छोटी धनुहियाँ तोड़ डालीं। तब तो आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया, हे गोसाईं।

फिर लक्ष्मण पूछते हैं कि इसी धनुष पर आपकी इतनी ममता किस कारण है? यह सवाल सुनने में भोला लगता है, पर इसमें तीखा व्यंग्य है। लक्ष्मण शिव के धनुष को बच्चों के खेल की धनुही जैसा बता रहे हैं। वे जताना चाहते हैं कि एक पुराने धनुष के टूटने पर इतना हंगामा करना ठीक नहीं।

लक्ष्मण के इस व्यंग्य में एक तर्क भी छिपा है। अगर धनुष तोड़ना अपराध है, तो पहले भी धनुष टूटे हैं; फिर इस बार इतना क्रोध क्यों? यही सवाल परशुराम को और भड़का देता है। तुलसी ने यहाँ लक्ष्मण को एक चंचल, निडर और हाज़िरजवाब युवक के रूप में दिखाया है, जो बड़ों से भी आँख मिलाकर बात करता है।

परशुराम का पलटवार: यह कोई छोटी धनुही नहीं

लक्ष्मण की बात सुनकर भृगुवंश के ध्वज परशुराम और ग़ुस्से में आ जाते हैं। वे लक्ष्मण को राजा का बालक कहकर डाँटते हैं। वे कहते हैं कि तू काल के वश में होकर बोल रहा है, तुझे अपनी बात का होश नहीं। यानी उनकी नज़र में लक्ष्मण अपनी मौत को न्योता दे रहे हैं।

फिर परशुराम पूछते हैं कि क्या शिव का धनुष किसी छोटी धनुही के समान है? वह तो पूरे संसार में प्रसिद्ध है। यहाँ त्रिपुरारि का अर्थ है शिव, जिन्होंने त्रिपुर नाम के असुर का नाश किया था। परशुराम के लिए यह धनुष सिर्फ़ एक हथियार नहीं, उनके आराध्य की निशानी है। इसीलिए उसकी तुलना धनुही से होना उन्हें अपमान लगता है।

इस हिस्से में तीनों स्वभाव साफ़ उभर आते हैं। राम शांत और विनम्र हैं; वे आग पर पानी डालना चाहते हैं। परशुराम क्रोध और गर्व से भरे हैं; उन्हें अपने बल और अपने आराध्य, दोनों पर अभिमान है। लक्ष्मण निडर और व्यंग्य-प्रिय हैं; वे आग से खेलने में मज़ा ले रहे हैं। आगे के हिस्से में यही टकराव और तीखा होता है।

कुछ अवधी शब्द, आज की हिंदी में

इस अंश की भाषा अवधी है, इसलिए कुछ शब्दों का अर्थ जानना ज़रूरी है। भंजनिहारा का अर्थ है तोड़ने वाला, और केउ का अर्थ है कोई। आयेसु यानी आज्ञा, और काह यानी क्या। रिसाइ का अर्थ है क्रोध करके, और कोही का अर्थ है क्रोधी।

अरिकरनी का अर्थ है शत्रु जैसा काम, और लराई यानी लड़ाई। रिपु यानी शत्रु, बिलगाउ यानी अलग हो जाए, और बिहाइ यानी छोड़कर। अवमाने का अर्थ है अपमान करते हुए, और लरिकाईं यानी बचपन में। रिस का अर्थ है ग़ुस्सा, और गोसाईं यानी स्वामी।

कालबस का अर्थ है काल यानी मृत्यु के वश में, और सँभार यानी होश। धनुही यानी छोटा धनुष, और बिदित यानी प्रसिद्ध। भृगुकुलकेतू का अर्थ है भृगु वंश का ध्वज, यानी परशुराम। इन शब्दों को देखें, तो पता चलता है कि अवधी और आज की हिंदी के बीच बहुत गहरा रिश्ता है।

Concepts and terms

संवाद

दो या अधिक पात्रों के बीच बातचीत। इस प्रसंग में राम, लक्ष्मण और परशुराम के संवाद से ही कथा आगे बढ़ती है और स्वभाव खुलते हैं।

विनय

नम्रता और आदर का भाव। राम क्रोधित परशुराम के सामने भी शांत रहते हैं और ख़ुद को उनका दास कहते हैं।

व्यंग्य

सीधी बात न कहकर ऐसी चुभती बात कहना, जिसमें छिपा अर्थ ज़्यादा तीखा हो। लक्ष्मण बचपन की धनुहियों का ज़िक्र करके परशुराम पर व्यंग्य करते हैं।

चौपाई

चार चरणों वाला मात्रिक छंद, जिसके हर चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। रामचरितमानस का मुख्य छंद यही है।

दोहा

दो पंक्तियों का मात्रिक छंद; पहले और तीसरे चरण में 13-13 तथा दूसरे और चौथे में 11-11 मात्राएँ होती हैं।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

तीन स्वभाव, तीन मुखौटे

Safety:

परशुराम की भूमिका में ज़ोर से चिल्लाइए नहीं; आवाज़ में गंभीरता से क्रोध दिखाइए।

What You Notice:

मुखौटे और संवाद से समझ आता है कि तुलसी ने केवल बातों से तीन अलग-अलग व्यक्तित्व कैसे खड़े कर दिए।

Did you know

तुलसी से पहले सूफ़ी कवि भी अवधी में दोहा-चौपाई लिखते थे। मलिक मुहम्मद जायसी का पद्मावत इसी शैली का प्रसिद्ध काव्य है, जिसे तुलसी ने आगे और ऊँचाई दी।

शिव को त्रिपुरारि इसलिए कहा जाता है कि कथा के अनुसार उन्होंने त्रिपुर नाम के तीन असुर-नगरों का नाश किया था। इसलिए त्रिपुरारि-धनु का अर्थ है शिव का धनुष।

परशुराम विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं, और राम सातवें। इसलिए कुछ विद्वान इस प्रसंग को एक अवतार से दूसरे अवतार तक शक्ति के पहुँचने की कथा भी कहते हैं।

Memory tricks

तीन स्वभाव: वि-क्रो-व्यं — राम का विनय, परशुराम का क्रोध, लक्ष्मण का व्यंग्य। विनय क्रोध को व्यंग्य से मिलाता है।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 तुलसीदास का जन्म-स्थान किस गाँव को माना जाता है? beginner
  • A राजापुर
  • B रुनकता
  • C सीही
  • D लमही
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Answer: राजापुर
Why:

बाँदा ज़िला।

Q2 रामचरितमानस की भाषा कौन-सी है? beginner
  • A ब्रजभाषा
  • B मैथिली
  • C खड़ी बोली
  • D अवधी
Show answer
Answer: अवधी
Why:

मानस अवधी में।

Q3 पाठ का प्रसंग मानस के किस कांड से है? beginner
  • A अयोध्याकांड
  • B सुंदरकांड
  • C बालकांड
  • D लंकाकांड
Show answer
Answer: बालकांड
Why:

पहला कांड।

Q4 रामचरितमानस का मुख्य छंद कौन-सा है? intermediate
  • A सवैया
  • B चौपाई
  • C कवित्त
  • D कुंडलिया
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Answer: चौपाई
Why:

चार चरण, सोलह मात्राएँ।

Q5 परशुराम के सभा में आने का तात्कालिक कारण क्या था? beginner
  • A शिव के धनुष का टूटना
  • B सीता का अपहरण हो जाना
  • C जनक का युद्ध छेड़ना
  • D राम का वनवास जाना
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Answer: शिव के धनुष का टूटना
Why:

स्वयंवर।

Q6 राम परशुराम से कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला कौन होगा? beginner
  • A कोई दूर देश का राजा
  • B आपका ही कोई दास
  • C कोई राक्षस या दानव
  • D स्वयं जनक
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Answer: आपका ही कोई दास
Why:

विनम्र उत्तर।

Q7 राम ख़ुद को तोड़ने वाला न कहकर दास क्यों बताते हैं? intermediate
  • A उन्हें परशुराम से बहुत डर लगता था और वे भागना चाहते थे
  • B वे अपराध छिपाना चाहते थे
  • C क्रोधी को सम्मान देकर शांत करने के लिए
  • D उन्हें याद नहीं था
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Answer: क्रोधी को सम्मान देकर शांत करने के लिए
Why:

विनय की नीति।

Q8 परशुराम के अनुसार सच्चा सेवक कौन है? intermediate
  • A जो केवल मीठी बातें करे
  • B जो सबसे पहले आए
  • C जिसके पास धन हो
  • D जो सेवा का काम करे
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Answer: जो सेवा का काम करे
Why:

काम से पहचान।

Q9 अरिकरनी करि करिअ लराई, इसमें अरिकरनी का अर्थ क्या है? intermediate
  • A मित्र जैसा व्यवहार
  • B शत्रु जैसा काम
  • C राजा जैसा भोजन
  • D सेवक जैसी विनय
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Answer: शत्रु जैसा काम
Why:

अरि यानी शत्रु।

Q10 परशुराम धनुष तोड़ने वाले की तुलना किससे करते हैं? beginner
  • A रावण से
  • B कंस से
  • C दुर्योधन से
  • D सहस्रबाहु से
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Answer: सहस्रबाहु से
Why:

पुराना शत्रु।

Q11 परशुराम की यह धमकी सुनकर सभा पर क्या असर हुआ होगा? beginner
  • A राजा डर से सहम गए होंगे
  • B सब ज़ोर-ज़ोर से हँसने और ताली बजाने लगे होंगे
  • C सब नाचने लगे होंगे
  • D सब सो गए होंगे
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Answer: राजा डर से सहम गए होंगे
Why:

सारे राजा मारे जाएँगे।

Q12 सहस्रबाहु से परशुराम के बैर की जड़ क्या थी? intermediate
  • A परशुराम का धनुष तोड़ देना
  • B आश्रम में आग लगाना
  • C कामधेनु गाय को छीनना
  • D जनक से झगड़ा करना
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Answer: कामधेनु गाय को छीनना
Why:

जमदग्नि का आश्रम।

Q13 पिता की हत्या ने परशुराम के क्रोध को किस दिशा में मोड़ दिया? intermediate
  • A सब कुछ छोड़कर शांत तपस्या की ओर
  • B पूरे क्षत्रिय वर्ग से बदले की ओर
  • C राजा बनकर राज करने की ओर
  • D शिव-धनुष की पूजा की ओर
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Answer: पूरे क्षत्रिय वर्ग से बदले की ओर
Why:

बदले का संकल्प।

Q14 धमकी सुनकर लक्ष्मण का मुस्कुराना उनके बारे में क्या बताता है? beginner
  • A वे डर छिपाने का नाटक कर रहे थे
  • B उन्हें धमकी समझ नहीं आई
  • C वे भीतर से ज़रा भी नहीं डरे
  • D वे परशुराम को पहचानते नहीं थे
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Answer: वे भीतर से ज़रा भी नहीं डरे
Why:

निडरता।

Q15 बचपन की धनुहियों का ज़िक्र करके लक्ष्मण क्या जताना चाहते हैं? intermediate
  • A धनुष टूटना इतनी बड़ी बात नहीं
  • B बचपन में उन्हें धनुष चलाना बिल्कुल नहीं आता था
  • C वे परशुराम के शिष्य थे
  • D धनुहियाँ बहुत महँगी थीं
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Answer: धनुष टूटना इतनी बड़ी बात नहीं
Why:

छोटा करके दिखाना।

Q16 इसी धनुष पर ममता क्यों, इस प्रश्न में कौन-सा भाव है? intermediate
  • A सच्चे मन से जानकारी लेने की उत्सुकता
  • B गहरा पछतावा
  • C डर और विनती
  • D तर्क के साथ चुभता व्यंग्य
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Answer: तर्क के साथ चुभता व्यंग्य
Why:

भोला सवाल, तीखी चोट।

Q17 परशुराम लक्ष्मण को कालबस क्यों कहते हैं? intermediate
  • A लक्ष्मण मौत को बुला रहे हैं
  • B लक्ष्मण बहुत देर से सभा में पहुँचे थे
  • C लक्ष्मण घड़ी देख रहे थे
  • D लक्ष्मण बीमार थे
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Answer: लक्ष्मण मौत को बुला रहे हैं
Why:

काल यानी मृत्यु।

Q18 त्रिपुरारि किसे कहा गया है? beginner
  • A विष्णु को
  • B इंद्र को
  • C ब्रह्मा को
  • D शिव को
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Answer: शिव को
Why:

त्रिपुर का नाश।

Q19 परशुराम को धनुष की धनुही से तुलना अपमान क्यों लगती है? advanced
  • A वह धनुष बहुत सस्ता और साधारण था
  • B धनुही उनकी अपनी थी
  • C वह उनके आराध्य शिव की निशानी है
  • D उन्हें धनुष पसंद नहीं था
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Answer: वह उनके आराध्य शिव की निशानी है
Why:

आस्था का प्रश्न।

Q20 इस हिस्से में राम और लक्ष्मण के स्वभाव में मुख्य अंतर क्या है? intermediate
  • A दोनों ही बहुत डरपोक और चुप रहने वाले
  • B एक शांत और नम्र, दूसरा निडर और चुटीला
  • C दोनों ही क्रोधी
  • D एक राजा, दूसरा सेवक
Show answer
Answer: एक शांत और नम्र, दूसरा निडर और चुटीला
Why:

विनय बनाम व्यंग्य।

Q21 राम का विनय कमज़ोरी नहीं है, यह किस बात से पता चलता है? advanced
  • A वे पूरी सभा में सबसे छोटे और कमज़ोर थे
  • B उन्होंने युद्ध से इनकार किया
  • C वे चुप रहे
  • D उन्होंने अजेय धनुष तोड़ा था
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Answer: उन्होंने अजेय धनुष तोड़ा था
Why:

शक्ति के साथ नम्रता।

Q22 तुलसी के राम किन मूल्यों के प्रतीक माने जाते हैं? beginner
  • A मर्यादा और आदर्श
  • B धन और विलास
  • C छल और कपट
  • D क्रोध और बदला
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Answer: मर्यादा और आदर्श
Why:

मर्यादा पुरुषोत्तम।

Q23 भंजनिहारा शब्द का अर्थ है ______। beginner
  • A जोड़ने वाला
  • B तोड़ने वाला
  • C बचाने वाला
  • D बनाने वाला
Show answer
Answer: तोड़ने वाला
Why:

भंजन = तोड़ना।

Q24 अभिकथन: परशुराम राम के विनय से शांत नहीं होते। कारण: उनके लिए शब्द से ज़्यादा काम मायने रखता है, और धनुष तोड़ना उन्हें शत्रु का काम लगता है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

सेवक की कसौटी।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. तुलसी ने मानस अवधी में लिखा। II. लक्ष्मण धमकी सुनकर डर जाते हैं। III. परशुराम धनुष तोड़ने वाले को सहस्रबाहु जैसा शत्रु कहते हैं। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

लक्ष्मण मुस्कुराते हैं।

Important short questions (7)

तुलसीदास के जीवन और रचनाओं का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में राजापुर में माना जाता है। बचपन में ही वे माता-पिता से बिछड़ गए। रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली और दोहावली उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। सन् 1623 में काशी में उनका देहांत हुआ।

परशुराम क्रोधित होकर स्वयंवर-सभा में क्यों आए?

स्वयंवर में राम के हाथ से शिव का धनुष टूट गया था। परशुराम शिव के भक्त थे। अपने आराध्य का धनुष टूटा जानकर वे आगबबूला होकर सभा में आ पहुँचे।

राम ने क्रोधित परशुराम से क्या कहा? इससे राम का कौन-सा गुण झलकता है?

राम ने कहा कि शिव का धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा। उन्होंने आज्ञा भी माँगी। इससे उनका विनय और धैर्य झलकता है।

परशुराम के अनुसार सेवक और शत्रु में क्या अंतर है?

परशुराम कहते हैं कि सेवक वह है, जो सेवा का काम करे। जो शत्रु जैसा काम करके लड़ाई मोल ले, वह सेवक नहीं, शत्रु है। उनके लिए काम ही असली पहचान है।

परशुराम बार-बार सहस्रबाहु का नाम क्यों लेते हैं?

सहस्रबाहु ने उनके पिता की कामधेनु छीनी थी, और परशुराम ने उसे मारा था। धनुष तोड़ने वाले को सहस्रबाहु जैसा कहकर वे उसे उसी तरह दंड देने की धमकी देते हैं।

लक्ष्मण बचपन की धनुहियों का ज़िक्र करके क्या कहना चाहते हैं?

लक्ष्मण कहते हैं कि बचपन में बहुत-सी धनुहियाँ टूटीं, तब परशुराम ने क्रोध नहीं किया। फिर इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों? इसमें व्यंग्य भी है और तर्क भी।

लक्ष्मण की बात पर परशुराम ने क्या उत्तर दिया?

परशुराम ने लक्ष्मण को काल के वश में बोलने वाला राजकुमार कहा। उन्होंने कहा कि शिव का धनुष कोई धनुही नहीं, वह सारे संसार में प्रसिद्ध है।

Long answer questions (3)

इस प्रसंग के आधार पर राम, लक्ष्मण और परशुराम के स्वभाव की तुलना कीजिए।

राम का स्वभाव शांत, धैर्यवान और विनम्र है। परशुराम क्रोध में धमकियाँ दे रहे हैं, फिर भी राम उन्हें नाथ कहते हैं और ख़ुद को उनका दास बताते हैं। वे आज्ञा माँगते हैं, जिससे पता चलता है कि वे झगड़ा नहीं, शांति चाहते हैं। लक्ष्मण का स्वभाव इसके ठीक उलट है। वे धमकी सुनकर मुस्कुराते हैं और कहते हैं कि बचपन में बहुत धनुहियाँ टूटीं, तब ऐसा क्रोध नहीं हुआ। वे निडर, हाज़िरजवाब और व्यंग्य-प्रिय हैं। परशुराम क्रोधी और अपने बल पर गर्व करने वाले हैं। वे धनुष तोड़ने वाले को सहस्रबाहु जैसा शत्रु बताते हैं और सारे राजाओं को मारने की धमकी देते हैं। शिव के प्रति उनकी भक्ति सच्ची है, पर क्रोध उनकी समझ पर हावी है। तीनों मिलकर प्रसंग को नाटकीय बनाते हैं।

तुलसीदास की काव्य-भाषा और छंद-योजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

तुलसी अवधी और ब्रज, दोनों भाषाओं के कुशल कवि थे। रामचरितमानस अवधी में है, जबकि विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में हैं। उनकी भाषा में संस्कृत के तत्सम शब्द भी हैं और गाँव की बोली के शब्द भी, जैसे धनुही और लरिकाईं। छंदों के मामले में तुलसी बहुत समृद्ध हैं। मानस का मुख्य छंद चौपाई है, जिसके हर चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। बीच-बीच में दोहे आते हैं, जो कथा को एक पड़ाव देते हैं। इसके अलावा सोरठा और हरिगीतिका भी हैं। विनयपत्रिका गेय पदों में है, और कवितावली में सवैया और कवित्त हैं। तुलसी ने प्रबंध और मुक्तक, दोनों तरह के काव्य रचे। उनकी भाषा में संगीत है, इसलिए मानस की चौपाइयाँ आज भी लय के साथ गाई जाती हैं।

क्रोधित व्यक्ति के सामने विनम्र रहना कब समझदारी है और कब कमज़ोरी? राम के उदाहरण से अपने विचार लिखिए।

मेरे विचार से क्रोधित व्यक्ति के सामने विनम्र रहना ज़्यादातर समझदारी है। ग़ुस्से में आदमी तर्क नहीं सुनता, और बहस से उसकी आग और भड़कती है। राम यही करते हैं: वे परशुराम को नाथ कहते हैं और ख़ुद को उनका दास बताते हैं, ताकि पहले उनका मन ठंडा हो। राम का विनय कमज़ोरी नहीं है, क्योंकि उन्होंने वह धनुष तोड़ा था, जिसे कोई हिला तक नहीं पाया। ताक़त होते हुए भी झुकना बड़प्पन है। पर विनय तब कमज़ोरी बन जाता है, जब कोई अन्याय कर रहा हो और हम डर से चुप रहें। ऐसे में साफ़ और दृढ़ बोलना ज़रूरी है। इसलिए विनय और साहस, दोनों का संतुलन ही सबसे अच्छा रास्ता है।

Flashcards (17)

तुलसीदास का जन्म कहाँ माना जाता है?
बाँदा ज़िले के राजापुर गाँव में।
तुलसीदास का देहांत कब और कहाँ हुआ?
सन् 1623 में, काशी में।
रामचरितमानस किस भाषा में है?
अवधी में।
विनयपत्रिका और कवितावली की भाषा?
ब्रजभाषा।
मानस का मुख्य छंद?
चौपाई।
यह प्रसंग किस कांड से है?
बालकांड से।
धनुष किसका था?
शिव का।
परशुराम किसके पुत्र थे?
ऋषि जमदग्नि के।
राम परशुराम को किस नाम से संबोधित करते हैं?
नाथ।
भंजनिहारा का अर्थ?
तोड़ने वाला।
रिपु का अर्थ?
शत्रु।
बिलगाउ का अर्थ?
अलग हो जाए।
लरिकाईं का अर्थ?
बचपन में।
कोही का अर्थ?
क्रोधी।
परशुराम लक्ष्मण को क्या कहकर डाँटते हैं?
काल के वश में बोलने वाला राजकुमार।
सहस्रबाहु ने क्या छीना था?
जमदग्नि की कामधेनु गाय।
लक्ष्मण का पहला सवाल क्या था?
इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों?

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  • अवधी शब्द और अर्थ
  • किसकी बात?
  • सही या भ्रम
  • प्रसंग का क्रम
  • झटपट उत्तर

फरसे का गर्व और व्यंग्य की धार

लक्ष्मण तर्क देते हैं कि पुराना धनुष छूते ही टूट गया, इसमें राम का दोष नहीं। परशुराम अपने बल और फरसे का बखान करते हैं, तो लक्ष्मण कुम्हड़बतिया और फूँक से पहाड़ उड़ाने जैसे तानों से उत्तर देते हैं। प्रसंग वीर रस और व्यंग्य से भरा है।

What you will be able to do

  • धनुष टूटने के पक्ष में लक्ष्मण के दिए तर्कों को अपने शब्दों में समझा सकेंगे।
  • परशुराम के आत्म-परिचय में आए दावों और उनके पीछे छिपे गर्व को पहचान सकेंगे।
  • कुम्हड़बतिया, तरजनी और फूँक से पहाड़ जैसे व्यंग्यों का अर्थ और प्रभाव बता सकेंगे।
  • लक्ष्मण के कुल की मर्यादा, यानी देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय पर वीरता न दिखाने की बात समझा सकेंगे।
  • प्रसंग की भाषा, छंद, रस और अनुप्रास, उपमा जैसे अलंकारों को उदाहरण सहित पहचान सकेंगे।

Key points

  • लक्ष्मण कहते हैं कि हमारी समझ में सब धनुष एक समान हैं; पुराना धनुष टूटने से क्या नफ़ा-नुक़सान।

  • राम ने तो उसे नया समझकर देखा भर था, और वह छूते ही टूट गया; इसमें रघुपति का कोई दोष नहीं, फिर बिना कारण क्रोध क्यों।

  • परशुराम फरसे की ओर देखकर कहते हैं कि मुझे केवल मुनि समझकर भूल मत करो; मैं बाल ब्रह्मचारी, बहुत क्रोधी और क्षत्रियकुल का शत्रु हूँ।

  • वे बताते हैं कि अपनी भुजाओं के बल से उन्होंने धरती को राजाओं से ख़ाली कर दिया और कई बार ब्राह्मणों को दान में दे दी।

  • वे कहते हैं कि उनका फरसा सहस्रबाहु की भुजाएँ काटने वाला है और इतना भयंकर है कि गर्भ के बच्चों तक का नाश कर देता है।

  • लक्ष्मण हँसकर कहते हैं कि मुनि अपने को बड़ा योद्धा मानते हैं, बार-बार कुल्हाड़ा दिखाते हैं, मानो फूँक से पहाड़ उड़ा देना चाहते हों।

  • लक्ष्मण कहते हैं कि यहाँ कोई कुम्हड़े का छोटा फल नहीं, जो तर्जनी उँगली देखते ही मुरझा जाए।

  • लक्ष्मण बताते हैं कि उनके कुल में देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्त और गाय पर वीरता नहीं दिखाई जाती; इन्हें मारने में पाप है और इनसे हारने में अपकीर्ति।

  • अंत में लक्ष्मण कहते हैं कि आपके वचन ही करोड़ों वज्रों जैसे कठोर हैं, धनुष-बाण और फरसा तो व्यर्थ ही धारण करते हैं।

Full explanation

लक्ष्मण के तर्क: पुराना धनुष, छूते ही टूटा

परशुराम की डाँट सुनकर भी लक्ष्मण नहीं रुकते। वे हँसते हुए कहते हैं कि हे देव, हमारी समझ में तो सारे धनुष एक जैसे होते हैं। एक पुराना धनुष टूट गया, तो इसमें किसका नफ़ा और किसका नुक़सान? जून का अर्थ है पुराना। लक्ष्मण का इशारा यह है कि जिस धनुष पर इतना हंगामा हो रहा है, वह तो पुराना और जर्जर था।

फिर लक्ष्मण कहते हैं कि राम ने तो उसे नए के धोखे में बस देखा भर था। यानी राम को लगा कि यह मज़बूत धनुष होगा, पर वह छूते ही टूट गया। इसमें रघुपति का क्या दोष? लक्ष्मण पूछते हैं कि हे मुनि, आप बिना कारण क्रोध क्यों कर रहे हैं। यह एक तरह की वकालत है, जिसमें लक्ष्मण अपने भाई को निर्दोष साबित कर रहे हैं।

इन तर्कों को ध्यान से देखें, तो इनमें तीन बातें हैं। पहली, सब धनुष बराबर हैं, इसलिए इस धनुष को ख़ास मानने का कोई कारण नहीं। दूसरी, धनुष पुराना था, तो उसका टूटना स्वाभाविक था। तीसरी, राम ने उसे तोड़ने की कोशिश नहीं की, वह अपने आप टूट गया। तीनों तर्क परशुराम के ग़ुस्से को बेबुनियाद ठहराते हैं।

पर इन तर्कों के पीछे व्यंग्य भी छिपा है। लक्ष्मण जानते हैं कि यह कोई साधारण धनुष नहीं था; बड़े-बड़े राजा इसे हिला तक नहीं पाए थे। फिर भी वे इसे पुराना और कमज़ोर बताकर परशुराम की आस्था पर चोट करते हैं। यही उनकी हाज़िरजवाबी है: बात भोली, पर मार गहरी।

परशुराम का आत्म-परिचय: मुझे केवल मुनि मत समझो

लक्ष्मण के तर्क सुनकर परशुराम अपने फरसे की ओर देखते हैं और बोलते हैं। वे लक्ष्मण को सठ, यानी मूर्ख, कहकर पुकारते हैं। वे कहते हैं कि तूने अभी मेरा स्वभाव नहीं सुना है। मैं तुझे बालक समझकर नहीं मार रहा। हे मूर्ख, तू मुझे केवल एक मुनि समझ रहा है।

फिर परशुराम अपना पूरा परिचय देते हैं। वे कहते हैं कि मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ, यानी बचपन से ब्रह्मचर्य का पालन कर रहा हूँ। मैं बहुत क्रोधी हूँ, और सारा संसार जानता है कि मैं क्षत्रिय कुल का शत्रु हूँ। ब्रह्मचर्य उनकी तपस्या दिखाता है, तो क्रोध और बैर उनकी भयंकरता।

परशुराम आगे बताते हैं कि अपनी भुजाओं के बल से उन्होंने धरती को राजाओं से ख़ाली कर दिया। और फिर वह धरती उन्होंने बार-बार ब्राह्मणों को दान में दे दी। वे राजकुमार लक्ष्मण से कहते हैं कि सहस्रबाहु की भुजाएँ काटने वाले इस फरसे को ज़रा देख। यानी वे लक्ष्मण को डराने के लिए अपना इतिहास और अपना हथियार, दोनों सामने रख देते हैं।

गर्भ के बच्चों तक का नाश करने वाला फरसा

परशुराम का आख़िरी दावा सबसे डरावना है। वे लक्ष्मण से कहते हैं कि हे राजकुमार, अपने माता-पिता को चिंता में मत डाल। यानी अगर तू ऐसे ही बोलता रहा, तो मरेगा, और तेरे माता-पिता दुख में डूब जाएँगे। यह धमकी सीधे जान लेने की है।

फिर वे कहते हैं कि मेरा फरसा इतना भयंकर है कि वह गर्भ में पल रहे बच्चों तक का नाश कर देता है। अर्भक का अर्थ है बच्चा। यह बात सुनकर कोई भी काँप उठे। परशुराम अपने हथियार की क्रूरता को अपनी ताक़त की तरह पेश करते हैं।

यहाँ तुलसी ने परशुराम के चरित्र का एक कमज़ोर पहलू भी दिखा दिया है। जो व्यक्ति बार-बार अपनी ताक़त का बखान करे, वह कहीं न कहीं अंदर से असुरक्षित होता है। सच्चा वीर अपनी वीरता गिनाता नहीं, दिखाता है। परशुराम का यह आत्म-गौरव ही आगे लक्ष्मण के सबसे तीखे व्यंग्य का निशाना बनता है।

लक्ष्मण का दूसरा वार: फूँक से पहाड़ और कुम्हड़बतिया

परशुराम का यह बखान सुनकर लक्ष्मण कोमल वाणी में हँसकर बोलते हैं। वे कहते हैं कि अहो, मुनीश्वर तो अपने को बड़ा भारी योद्धा मानते हैं! महाभट का अर्थ है महान योद्धा, और मानी का अर्थ है घमंडी। यानी लक्ष्मण कह रहे हैं कि आप अपनी वीरता के घमंड में डूबे हैं।

फिर लक्ष्मण कहते हैं कि आप बार-बार मुझे कुल्हाड़ा दिखा रहे हैं, मानो फूँक मारकर पहाड़ उड़ा देना चाहते हों। यह बहुत सुंदर व्यंग्य है। पहाड़ फूँक से नहीं उड़ता; वैसे ही लक्ष्मण बार-बार फरसा दिखाने से डरने वाले नहीं। परशुराम की धमकी को वे एक हास्यास्पद कोशिश बना देते हैं।

इसके बाद लक्ष्मण का सबसे प्रसिद्ध ताना आता है। वे कहते हैं कि यहाँ कोई कुम्हड़बतिया नहीं है, जो तर्जनी उँगली देखते ही मर जाए। लोक-विश्वास है कि कुम्हड़े के छोटे फल की ओर उँगली उठाओ, तो वह मुरझा जाता है। लक्ष्मण कहते हैं कि हम ऐसे कमज़ोर नहीं कि आपकी उँगली देखकर ही डर जाएँ।

लक्ष्मण आगे सफ़ाई भी देते हैं कि मैंने कुछ अभिमान से कहा, तो वह आपके कुठार और धनुष-बाण देखकर कहा। यानी आपने हथियार उठाए, तो मैंने आपको योद्धा समझकर उसी तरह बात की। फिर वे कहते हैं कि अब आपको भृगुवंशी और जनेऊधारी ब्राह्मण समझकर, आप जो कहेंगे, वह मैं क्रोध रोककर सह लूँगा।

कुल की मर्यादा: किन पर वीरता नहीं दिखाते

लक्ष्मण अपनी बात को एक ऊँचे स्तर पर ले जाते हैं। वे बताते हैं कि उनके रघुकुल में चार पर वीरता नहीं दिखाई जाती: देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्त और गाय। सुर यानी देवता, महिसुर यानी ब्राह्मण, और हरिजन यानी हरि के भक्त। सुराई का अर्थ है वीरता।

फिर लक्ष्मण इसका कारण बताते हैं। इन्हें मारने से पाप लगता है, और इनसे हार जाने पर अपकीर्ति, यानी बदनामी होती है। इसलिए अगर आप हमें मारें, तो भी हम आपके पैर ही पड़ेंगे। यह बात सुनने में बहुत विनम्र लगती है, पर इसमें भी व्यंग्य है। लक्ष्मण कह रहे हैं कि हम आपसे लड़ेंगे नहीं, क्योंकि आप ब्राह्मण हैं, इसलिए नहीं कि आप ज़्यादा ताक़तवर हैं।

इसके बाद लक्ष्मण का अंतिम वार आता है। वे कहते हैं कि आपके वचन ही करोड़ों वज्रों के समान कठोर हैं। फिर आप धनुष, बाण और फरसा व्यर्थ ही धारण करते हैं। यानी आपकी ज़बान ही इतनी तीखी है कि हथियारों की ज़रूरत नहीं। इस एक वाक्य में परशुराम की कठोर भाषा पर भी चोट है और उनके हथियारों पर भी।

अंत में लक्ष्मण क्षमा भी माँगते हैं। वे कहते हैं कि हे धीर महामुनि, इन्हें देखकर मैंने कुछ अनुचित कहा हो, तो क्षमा कीजिए। पर यह क्षमा-याचना भी व्यंग्य से ख़ाली नहीं, क्योंकि जिन्हें वे धीर कह रहे हैं, वे क्रोध से काँप रहे हैं। यह सुनकर भृगुवंश के मणि परशुराम क्रोध में गंभीर वाणी से बोल पड़ते हैं, और प्रसंग एक नए तनाव पर रुकता है।

प्रसंग का काव्य-सौंदर्य: भाषा, छंद, रस और अलंकार

इस प्रसंग की भाषा अवधी है, जिसमें संस्कृत के तत्सम शब्द और लोक के ठेठ शब्द, दोनों घुले-मिले हैं। एक ओर त्रिपुरारि, महिसुर और अर्भक जैसे शब्द हैं, तो दूसरी ओर धनुही, लरिकाईं और कुम्हड़बतिया जैसे घरेलू शब्द। यही मेल इसे विद्वानों और गाँव के लोगों, दोनों के लिए प्रिय बनाता है।

छंद की दृष्टि से इसमें चौपाई और दोहा हैं। चौपाइयाँ संवाद को तेज़ी से आगे बढ़ाती हैं, और बीच में आए दोहे जैसे किसी दृश्य पर ठहराव लाते हैं। इसीलिए पूरा प्रसंग पढ़ते हुए नाटक जैसा लगता है, जिसमें हर पात्र अपनी बारी पर बोलता है।

रस की दृष्टि से इसमें मुख्य रूप से वीर रस है, क्योंकि दोनों पक्ष ललकार रहे हैं। परशुराम के वचनों में रौद्र रस, यानी क्रोध का भाव भी है। और लक्ष्मण के तानों में हास्य और व्यंग्य का पुट है, जो पाठक को मुस्कुराने पर मजबूर करता है।

अलंकारों में अनुप्रास सबसे ज़्यादा है, जैसे बालकु बोलि बधौं में ब की आवृत्ति, या भुजबल भूमि भूप में भ की आवृत्ति। कोटि कुलिस सम बचनु में उपमा है, क्योंकि वचनों की तुलना वज्र से हुई है। फूँक से पहाड़ उड़ाने वाली बात में अतिशयोक्ति और व्यंग्य का सुंदर मेल है। इस प्रसंग की असली जान व्यंजना शैली है, जिसमें बात सीधे न कहकर संकेत से कही जाती है।

Concepts and terms

वीर रस

वह रस, जिसमें उत्साह स्थायी भाव होता है। लक्ष्मण और परशुराम के ललकार भरे वचनों में वीर रस की झलक है।

व्यंजना शैली

सीधे शब्दों के बजाय संकेत से अर्थ कहने का ढंग। लक्ष्मण कुम्हड़बतिया कहकर बताते हैं कि वे कमज़ोर नहीं।

अनुप्रास अलंकार

जब एक ही वर्ण बार-बार आए। बालकु बोलि बधौं में ब वर्ण की आवृत्ति अनुप्रास है।

उपमा अलंकार

जब किसी की तुलना सम, सरिस, जैसा आदि शब्दों से की जाए। कोटि कुलिस सम बचनु में वचनों की तुलना वज्र से है।

आत्म-प्रशंसा

अपने मुँह से अपने गुणों और कामों का बखान। परशुराम अपने ब्रह्मचर्य, बल और फरसे की प्रशंसा करते हैं।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

एक क़स्बे की रामलीला में इस बार पहली बार स्कूल के बच्चों को परशुराम-लक्ष्मण संवाद खेलने का मौक़ा मिला। आरव लक्ष्मण बना और इशिता परशुराम। अभ्यास में आरव हर ताने पर इतनी ज़ोर से हँसता था कि इशिता की गंभीरता भंग हो जाती थी। निर्देशक दादाजी ने उसे समझाया कि लक्ष्मण का व्यंग्य ठहाका नहीं, धीमी मुस्कान है। उन्होंने कहा कि कोमल आवाज़ और तीखे शब्द, यही इस भूमिका की कुंजी है। मंचन वाले दिन आरव ने धीमे स्वर में कुम्हड़बतिया वाली बात कही, तो पूरा पंडाल हँसी से गूँज उठा।

Activity:

अपनी कक्षा में यही संवाद दो तरह से बोलकर देखिए: एक बार ज़ोर से हँसते हुए, एक बार धीमी मुस्कान के साथ। फिर तय कीजिए कि कौन-सा तरीक़ा पाठ के ज़्यादा क़रीब है।

Analysis:

अभिनय में स्वर और हाव-भाव से अर्थ बदल जाता है। तुलसी ने मृदु बानी लिखकर जो संकेत दिया है, उसे समझे बिना लक्ष्मण का चरित्र अधूरा रह जाता है।

Did you know

कुम्हड़बतिया कुम्हड़े या काशीफल का बहुत छोटा, कच्चा फल है। लोक-मान्यता है कि उसकी ओर तर्जनी उँगली उठाने से वह मुरझा जाता है। लक्ष्मण इसी लोक-विश्वास से व्यंग्य गढ़ते हैं।

महिसुर और महिदेव, दोनों का अर्थ ब्राह्मण है। मही यानी धरती, और सुर या देव यानी देवता; यानी धरती के देवता।

रामलीला में परशुराम-लक्ष्मण संवाद को कई जगह अलग दिन मंचित किया जाता है। अच्छे कलाकार इसकी चौपाइयाँ गाकर बोलते हैं और दर्शक साथ-साथ दोहराते हैं।

Memory tricks

लक्ष्मण के तीन तर्क: स-पु-छू — सब धनुष समान, पुराना धनुष, छूते ही टूटा। सपु छू, दोष नहीं।

परशुराम के चार दावे: ब्र-क्ष-भू-फ — ब्रह्मचारी, क्षत्रियकुल-द्रोही, भूमि राजाओं से ख़ाली, फरसा भयंकर।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 लक्ष्मण के अनुसार उनकी समझ में सब धनुष कैसे हैं? beginner
  • A एक समान
  • B अलग-अलग क़ीमत के
  • C बहुत भारी
  • D केवल खिलौने
Show answer
Answer: एक समान
Why:

सब धनुष समाना।

Q2 जून धनु तोड़ने से क्या फ़र्क़ पड़ता है, यह पूछकर लक्ष्मण क्या जताते हैं? intermediate
  • A पुराना धनुष सबसे क़ीमती होता है
  • B धनुष नया था
  • C राम को धनुष चाहिए था
  • D पुराने धनुष का टूटना मामूली बात है
Show answer
Answer: पुराने धनुष का टूटना मामूली बात है
Why:

जून यानी पुराना।

Q3 लक्ष्मण के अनुसार राम ने धनुष को किस धोखे में देखा? intermediate
  • A खिलौना समझकर
  • B साँप समझकर
  • C नया समझकर
  • D लकड़ी समझकर
Show answer
Answer: नया समझकर
Why:

नयन के भोरें।

Q4 छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू, इस अंश में लक्ष्मण का बचाव किस बात पर टिका है? intermediate
  • A राम ने जान-बूझकर पूरी ताक़त से धनुष तोड़ा
  • B धनुष अपने आप टूटा, राम ने बल नहीं लगाया
  • C जनक ने धनुष तोड़ा
  • D धनुष पहले से टूटा था
Show answer
Answer: धनुष अपने आप टूटा, राम ने बल नहीं लगाया
Why:

छूते ही।

Q5 परशुराम लक्ष्मण को केवल मुनि समझने की भूल न करने को क्यों कहते हैं? intermediate
  • A वे बताना चाहते हैं कि वे योद्धा भी हैं
  • B वे चाहते हैं कि सब उन्हें राजा मानें
  • C वे मुनि का पद छोड़ चुके हैं
  • D वे लक्ष्मण के गुरु हैं
Show answer
Answer: वे बताना चाहते हैं कि वे योद्धा भी हैं
Why:

मुनि भी, योद्धा भी।

Q6 परशुराम लक्ष्मण को अब तक क्यों नहीं मार रहे, उनके अनुसार? beginner
  • A उनसे डरकर
  • B राम के कहने पर
  • C उन्हें बालक समझकर
  • D फरसा भूल जाने से
Show answer
Answer: उन्हें बालक समझकर
Why:

बालकु बोलि।

Q7 बाल ब्रह्मचारी कहकर परशुराम अपनी किस बात पर ज़ोर देते हैं? intermediate
  • A अपने बहुत छोटे और कमज़ोर होने पर
  • B बचपन से चले आ रहे तप और संयम पर
  • C अपनी पढ़ाई पर
  • D अपने परिवार पर
Show answer
Answer: बचपन से चले आ रहे तप और संयम पर
Why:

तपस्वी।

Q8 भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही, इस दावे से परशुराम क्या बताते हैं? intermediate
  • A उन्होंने बहुत बड़ा राज्य बसाया
  • B उन्होंने खेती शुरू की
  • C उन्होंने वन लगाए
  • D धरती राजाओं से ख़ाली की
Show answer
Answer: धरती राजाओं से ख़ाली की
Why:

भूप बिनु।

Q9 परशुराम राजाओं से जीती धरती का क्या करते रहे? intermediate
  • A ब्राह्मणों को दान देते रहे
  • B ख़ुद उस पर राज करते रहे
  • C उसे बेचते रहे
  • D उसे वन बनाते रहे
Show answer
Answer: ब्राह्मणों को दान देते रहे
Why:

बिपुल बार।

Q10 गर्भ के अर्भकों तक का नाश करने वाला फरसा, इस धमकी से परशुराम का कौन-सा रूप दिखता है? intermediate
  • A बहुत दयालु और कोमल हृदय वाला
  • B डरपोक
  • C अत्यंत भयंकर और कठोर
  • D मज़ाक़िया
Show answer
Answer: अत्यंत भयंकर और कठोर
Why:

रौद्र रूप।

Q11 मातु पितहि जनि सोचबस करसि, इस चेतावनी का आशय क्या है? advanced
  • A माता-पिता को तुरंत चिट्ठी लिखकर बुला लो
  • B ऐसे बोलोगे, तो मरोगे और माता-पिता दुखी होंगे
  • C माता-पिता से पूछकर बोलो
  • D घर लौट जाओ
Show answer
Answer: ऐसे बोलोगे, तो मरोगे और माता-पिता दुखी होंगे
Why:

छिपी धमकी।

Q12 महाभट मानी कहकर लक्ष्मण परशुराम के किस गुण पर चोट करते हैं? intermediate
  • A उनके तप और ज्ञान पर
  • B उनकी बूढ़ी उम्र पर
  • C उनके कपड़ों पर
  • D अपनी वीरता के घमंड पर
Show answer
Answer: अपनी वीरता के घमंड पर
Why:

मानी यानी घमंडी।

Q13 फूँक से पहाड़ उड़ाने वाली बात से लक्ष्मण क्या कहना चाहते हैं? intermediate
  • A फरसा दिखाने से वे नहीं डरेंगे
  • B परशुराम सचमुच पहाड़ उड़ा सकते हैं
  • C पहाड़ बहुत हल्के होते हैं
  • D हवा बहुत तेज़ है
Show answer
Answer: फरसा दिखाने से वे नहीं डरेंगे
Why:

असंभव कोशिश।

Q14 कुम्हड़बतिया वाला ताना लक्ष्मण के किस भाव को सामने लाता है? intermediate
  • A हमें कुम्हड़े की सब्ज़ी बहुत पसंद है
  • B हम बहुत कमज़ोर हैं
  • C हम इशारे भर से डरने वाले नहीं
  • D हमें उँगली से डर है
Show answer
Answer: हम इशारे भर से डरने वाले नहीं
Why:

तर्जनी से मुरझाना।

Q15 लक्ष्मण कहते हैं कि उन्होंने अभिमान भरी बात किस कारण कही? intermediate
  • A राम के कहने पर
  • B मुनि के हाथ में हथियार देखकर
  • C सभा के राजाओं को ख़ुश करने के लिए
  • D डर के मारे
Show answer
Answer: मुनि के हाथ में हथियार देखकर
Why:

योद्धा समझकर।

Q16 जनेऊ देखकर लक्ष्मण क्रोध रोककर सहने की बात क्यों कहते हैं? advanced
  • A जनेऊ से उन्हें बहुत डर लगता था
  • B वे थक गए थे
  • C राम ने रोका था
  • D ब्राह्मण पर वार उनकी रीति नहीं
Show answer
Answer: ब्राह्मण पर वार उनकी रीति नहीं
Why:

कुल की मर्यादा।

Q17 लक्ष्मण के कुल में किन चार पर वीरता नहीं दिखाई जाती? intermediate
  • A राजा, सैनिक, व्यापारी और किसान
  • B देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय
  • C शेर, हाथी, घोड़ा और बैल
  • D गुरु, शिष्य, मित्र और शत्रु
Show answer
Answer: देवता, ब्राह्मण, भक्त और गाय
Why:

सुर महिसुर हरिजन गाई।

Q18 लक्ष्मण के अनुसार इनसे हार जाने पर क्या मिलता है? intermediate
  • A पुण्य
  • B धन
  • C अपकीर्ति
  • D राज्य
Show answer
Answer: अपकीर्ति
Why:

बधें पापु, हारें अपकीरति।

Q19 मारतहू पा परिअ तुम्हारें, इस बात में छिपा व्यंग्य क्या है? advanced
  • A हम लड़ेंगे नहीं, पर आपकी ताक़त से डरकर नहीं
  • B हम सचमुच आपसे बहुत डरते हैं और काँप रहे हैं
  • C हम आपके शिष्य बनना चाहते हैं
  • D हम भाग जाएँगे
Show answer
Answer: हम लड़ेंगे नहीं, पर आपकी ताक़त से डरकर नहीं
Why:

विनय के भीतर चुनौती।

Q20 कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा में किस अलंकार की पहचान होती है? intermediate
  • A यमक
  • B श्लेष
  • C मानवीकरण
  • D उपमा
Show answer
Answer: उपमा
Why:

सम शब्द।

Q21 वचनों को वज्र जैसा बताकर हथियारों को व्यर्थ कहने का क्या अर्थ है? advanced
  • A आपकी ज़बान ही इतनी कठोर है
  • B आपके हथियार पुराने और टूटे हुए हैं
  • C आपको हथियार चलाना नहीं आता
  • D वज्र सबसे अच्छा हथियार है
Show answer
Answer: आपकी ज़बान ही इतनी कठोर है
Why:

दोहरी चोट।

Q22 बालकु बोलि बधौं नहि तोही में कौन-सा अलंकार है? intermediate
  • A उपमा
  • B रूपक
  • C अनुप्रास
  • D उत्प्रेक्षा
Show answer
Answer: अनुप्रास
Why:

ब की आवृत्ति।

Q23 इस प्रसंग में मुख्य रूप से कौन-सा रस है? beginner
  • A शांत रस
  • B वीर रस
  • C करुण रस
  • D भयानक रस
Show answer
Answer: वीर रस
Why:

ललकार और उत्साह।

Q24 अभिकथन: लक्ष्मण का क्षमा माँगना भी व्यंग्य से भरा है। कारण: वे क्रोध से काँपते परशुराम को धीर महामुनि कहकर संबोधित करते हैं। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
  • D दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

उलटा विशेषण।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. लक्ष्मण धनुष को पुराना बताते हैं। II. परशुराम कहते हैं कि वे केवल एक शांत मुनि हैं। III. लक्ष्मण कहते हैं कि यहाँ कोई कुम्हड़बतिया नहीं। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
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Answer: केवल I और III
Why:

परशुराम ख़ुद को योद्धा बताते हैं।

Important short questions (7)

धनुष टूटने के बचाव में लक्ष्मण कौन-से तर्क देते हैं?

लक्ष्मण कहते हैं कि उनकी समझ में सब धनुष एक जैसे हैं। यह धनुष पुराना था, इसलिए इसके टूटने से किसी का कुछ नहीं बिगड़ा। राम ने तो उसे बस छुआ था, और वह टूट गया।

परशुराम अपने बारे में सभा में क्या-क्या दावे करते हैं?

परशुराम कहते हैं कि वे बाल ब्रह्मचारी और बहुत क्रोधी हैं। वे क्षत्रिय कुल के शत्रु हैं। उन्होंने धरती को राजाओं से ख़ाली करके ब्राह्मणों को दान दिया। उनका फरसा सहस्रबाहु की भुजाएँ काट चुका है।

परशुराम के फरसे को इतना भयंकर क्यों बताया गया है?

परशुराम कहते हैं कि उनका फरसा सहस्रबाहु की भुजाएँ काट चुका है। वह इतना घोर है कि गर्भ के बच्चों तक का नाश कर देता है। इससे वे लक्ष्मण को डराना चाहते हैं।

कुम्हड़बतिया वाले ताने का भाव समझाइए।

कुम्हड़बतिया कुम्हड़े का बहुत छोटा फल है, जो तर्जनी दिखाने से मुरझा जाता है, ऐसा माना जाता है। लक्ष्मण कहते हैं कि हम ऐसे कमज़ोर नहीं हैं। आपकी उँगली या फरसा देखकर हम नहीं डरेंगे।

लक्ष्मण किन पर वीरता न दिखाने की बात करते हैं, और क्यों?

लक्ष्मण कहते हैं कि उनके कुल में देवता, ब्राह्मण, भगवान के भक्त और गाय पर वीरता नहीं दिखाई जाती। इन्हें मारने से पाप लगता है। इनसे हारने पर बदनामी होती है।

लक्ष्मण परशुराम के धनुष-बाण और फरसे को व्यर्थ क्यों कहते हैं?

लक्ष्मण कहते हैं कि आपके वचन ही करोड़ों वज्रों जैसे कठोर हैं। जब ज़बान ही इतनी घातक है, तो हथियार रखने की ज़रूरत नहीं। यह परशुराम की कठोर बातों पर व्यंग्य है।

इस प्रसंग में प्रयुक्त दो अलंकारों के उदाहरण दीजिए।

बालकु बोलि बधौं नहि तोही में ब वर्ण बार-बार आया है, इसलिए अनुप्रास अलंकार है। कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा में वचनों की तुलना वज्र से हुई है, इसलिए उपमा अलंकार है।

Long answer questions (3)

इस प्रसंग में लक्ष्मण के व्यंग्य की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

लक्ष्मण का व्यंग्य इस प्रसंग की जान है। उनकी पहली ख़ूबी यह है कि वे बड़ी बात को छोटा करके दिखाते हैं। शिव के विशाल धनुष को वे बचपन की धनुही और पुराना धनुष कहते हैं, जिससे परशुराम का ग़ुस्सा बेमानी लगने लगता है। दूसरी ख़ूबी है लोक-जीवन से लिए गए उदाहरण। फूँक से पहाड़ उड़ाना और कुम्हड़बतिया का उँगली देखते ही मुरझाना, दोनों रोज़ की बातें हैं, पर इनसे परशुराम की धमकियाँ हास्यास्पद बन जाती हैं। तीसरी ख़ूबी है विनय के भीतर छिपी चुनौती। वे कहते हैं कि आप मारें, तो भी हम पैर पड़ेंगे; आपके वचन ही वज्र हैं; और धीर महामुनि, क्षमा कीजिए। ऊपर से ये बातें नम्र हैं, पर हर एक में चोट है। यही व्यंजना शैली है, जिसमें बात संकेत से कही जाती है और ज़्यादा गहरी लगती है।

परशुराम के चरित्र पर टिप्पणी कीजिए। क्या आपको उनमें केवल क्रोध दिखता है?

पहली नज़र में परशुराम क्रोध की मूर्ति लगते हैं। वे धनुष तोड़ने वाले को शत्रु कहते हैं, सारे राजाओं को मारने की धमकी देते हैं और लक्ष्मण को मूर्ख कहकर डाँटते हैं। अपने फरसे को वे गर्भ के बच्चों तक का नाश करने वाला बताते हैं। पर उनके चरित्र में और भी पहलू हैं। वे शिव के सच्चे भक्त हैं, और उनका क्रोध अपने आराध्य के धनुष के टूटने से उपजा है। वे बाल ब्रह्मचारी और तपस्वी हैं, और उन्होंने जीती हुई धरती ख़ुद नहीं रखी, बल्कि दान कर दी। वे लक्ष्मण को बालक समझकर अब तक मार भी नहीं रहे। उनकी कमज़ोरी उनका अहंकार और आत्म-प्रशंसा है। वे बार-बार अपनी वीरता गिनाते हैं, जिससे लक्ष्मण को व्यंग्य का मौक़ा मिलता है। इस तरह परशुराम एक जटिल चरित्र हैं: भक्त, त्यागी और वीर, पर क्रोध और घमंड से घिरे हुए।

क्या लक्ष्मण का बड़ों से इस तरह व्यंग्य करना ठीक था? पक्ष और विपक्ष, दोनों पर विचार करके अपना मत लिखिए।

पक्ष में यह कहा जा सकता है कि परशुराम बिना पूरी बात सुने सबको मारने की धमकी दे रहे थे। राम की विनम्रता का भी उन पर असर नहीं हुआ। ऐसे में लक्ष्मण ने अपने तर्कों और व्यंग्यों से उनके घमंड को आईना दिखाया। अन्याय भरी धमकी के आगे चुप रहना भी ठीक नहीं होता। विपक्ष में यह कहा जा सकता है कि परशुराम उम्र, तप और ज्ञान में बड़े थे। लक्ष्मण के तानों से उनका क्रोध और भड़का, और मामला बिगड़ सकता था। राम का रास्ता ज़्यादा समझदारी भरा था। मेरे विचार से लक्ष्मण का साहस सराहनीय है, पर शब्दों में थोड़ा संयम होता, तो बेहतर होता। असहमति जताई जा सकती है, पर सम्मान के साथ। इसीलिए आगे चलकर राम का विनय ही परशुराम को शांत करता है।

Flashcards (17)

जून का अर्थ?
पुराना।
लक्ष्मण के अनुसार धनुष क्यों टूटा?
वह पुराना था और छूते ही टूट गया।
परशुराम लक्ष्मण को किस शब्द से डाँटते हैं?
सठ, यानी मूर्ख।
परशुराम किस कुल के द्रोही हैं?
क्षत्रिय कुल के।
परशुराम ने धरती किसे दान दी?
ब्राह्मणों को।
अर्भक का अर्थ?
बच्चा।
महाभट का अर्थ?
महान योद्धा।
कुठार का अर्थ?
कुल्हाड़ा, फरसा।
कुम्हड़बतिया क्या है?
कुम्हड़े का बहुत छोटा फल, यानी कमज़ोर व्यक्ति।
तरजनी किसे कहते हैं?
अँगूठे के पास वाली उँगली।
महिसुर का अर्थ?
ब्राह्मण।
सुराई का अर्थ?
वीरता।
कुलिस का अर्थ?
वज्र, यानी बहुत कठोर।
सरोष का अर्थ?
क्रोध सहित।
बालकु बोलि बधौं नहि तोही में अलंकार?
अनुप्रास।
कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा में अलंकार?
उपमा।
प्रसंग का मुख्य रस?
वीर रस, साथ में रौद्र और हास्य का पुट।

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  • कठिन शब्द
  • किसका कथन?
  • सही या भ्रम
  • संवाद का क्रम
  • झटपट उत्तर

Class 10 Hindi Chapter 2 — frequently asked questions

तुलसीदास के जीवन और रचनाओं का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

तुलसीदास का जन्म सन् 1532 में राजापुर में माना जाता है। बचपन में ही वे माता-पिता से बिछड़ गए। रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली और दोहावली उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। सन् 1623 में काशी में उनका देहांत हुआ।

परशुराम क्रोधित होकर स्वयंवर-सभा में क्यों आए?

स्वयंवर में राम के हाथ से शिव का धनुष टूट गया था। परशुराम शिव के भक्त थे। अपने आराध्य का धनुष टूटा जानकर वे आगबबूला होकर सभा में आ पहुँचे।

राम ने क्रोधित परशुराम से क्या कहा? इससे राम का कौन-सा गुण झलकता है?

राम ने कहा कि शिव का धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा। उन्होंने आज्ञा भी माँगी। इससे उनका विनय और धैर्य झलकता है।

धनुष टूटने के बचाव में लक्ष्मण कौन-से तर्क देते हैं?

लक्ष्मण कहते हैं कि उनकी समझ में सब धनुष एक जैसे हैं। यह धनुष पुराना था, इसलिए इसके टूटने से किसी का कुछ नहीं बिगड़ा। राम ने तो उसे बस छुआ था, और वह टूट गया।

परशुराम अपने बारे में सभा में क्या-क्या दावे करते हैं?

परशुराम कहते हैं कि वे बाल ब्रह्मचारी और बहुत क्रोधी हैं। वे क्षत्रिय कुल के शत्रु हैं। उन्होंने धरती को राजाओं से ख़ाली करके ब्राह्मणों को दान दिया। उनका फरसा सहस्रबाहु की भुजाएँ काट चुका है।

परशुराम के फरसे को इतना भयंकर क्यों बताया गया है?

परशुराम कहते हैं कि उनका फरसा सहस्रबाहु की भुजाएँ काट चुका है। वह इतना घोर है कि गर्भ के बच्चों तक का नाश कर देता है। इससे वे लक्ष्मण को डराना चाहते हैं।

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