Class 9 Hindi Chapter 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद is Chapter 9 of NCERT / CBSE Class 9 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
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  • Hindi

तुलसीदास, रामचरितमानस और सभा में परशुराम

तुलसीदास भक्तिकाल के प्रसिद्ध रामभक्त कवि हैं और रामचरितमानस उनका अवधी महाकाव्य है। शिव-धनुष टूटने पर परशुराम जनक की सभा में आते हैं; राजा डर जाते हैं, जनक आदर देते हैं, और परशुराम राम-लक्ष्मण को आशीष देकर भीड़ का कारण पूछते हैं।

What you will be able to do

  • तुलसीदास के जीवन, भाषा और प्रमुख रचनाओं का परिचय दे सकूँगा।
  • रामचरितमानस, उसके सात कांडों और चौपाई-दोहा शैली के बारे में बता सकूँगा।
  • सीता-स्वयंवर और शिव-धनुष टूटने के प्रसंग की पृष्ठभूमि समझा सकूँगा।
  • परशुराम के आगमन पर सभा के राजाओं, जनक और विश्वामित्र के व्यवहार का अर्थ अपने शब्दों में लिख सकूँगा।
  • पाठ के कठिन अवधी शब्दों, जैसे भुआला, ढोटा, जोटा और बहोरि, के अर्थ बता सकूँगा।

Key points

  • हिंदी साहित्य कोश के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास सन् 1532 से 1623 के बीच हुए; उनका जन्म आज के उत्तर प्रदेश में और देहांत काशी में हुआ।

  • रामचरितमानस उनका महाकाव्य है, जिसे उन्होंने अवधी में रचा; विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में हैं।

  • उनकी दूसरी रचनाएँ हैं: दोहावली, हनुमान बाहुक, गीतावली, कृष्णगीतावली, कवितावली और विनयपत्रिका।

  • तुलसी के राम मनुष्य के आदर्श आचरण के प्रतीक हैं; उनके द्वारा कवि नीति, शील, विनय, स्नेह और त्याग जैसे मूल्य सामने रखते हैं।

  • पाठ का अंश रामचरितमानस के पहले कांड, बालकांड, से है; यह सीता-स्वयंवर में राम द्वारा शिव-धनुष तोड़े जाने के बाद का प्रसंग है।

  • धनुष टूटने की ख़बर पाकर भृगुवंशी मुनि परशुराम क्रोध में जनक की सभा में आते हैं; उनका भयानक वेष देखकर सब राजा डरकर खड़े हो जाते हैं।

  • राजा अपने पिता के नाम के साथ अपना नाम बताकर ज़मीन पर लेटकर प्रणाम करते हैं; जिसे परशुराम सहज भाव से देख लें, वह भी समझता है कि उसकी आयु पूरी हुई।

  • जनक सिर झुकाते हैं और सीता से प्रणाम करवाते हैं; विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को परशुराम के चरणों में झुकाते हैं और परशुराम दोनों को आशीष देते हैं।

  • राम का अपार रूप देखकर परशुराम की आँखें ठहर जाती हैं; फिर वे सब जानते हुए भी अनजान की तरह जनक से भीड़ का कारण पूछते हैं और उनके शरीर में क्रोध भर जाता है।

Full explanation

तुलसीदास: कवि, भक्त और विद्वान

गोस्वामी तुलसीदास हिंदी के भक्तिकाल के सबसे बड़े कवियों में गिने जाते हैं। हिंदी साहित्य कोश के अनुसार उनका जीवन-काल सन् 1532 से 1623 के बीच माना जाता है। उनका जन्म आज के उत्तर प्रदेश में हुआ और काशी में उनका देहांत हुआ। वे राम के अनन्य भक्त थे, पर उनकी भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं थी। उन्होंने राम के जीवन के ज़रिए यह दिखाया कि एक अच्छा मनुष्य, अच्छा बेटा, अच्छा भाई और अच्छा राजा कैसा होना चाहिए।

तुलसीदास संस्कृत के गहरे जानकार थे, फिर भी उन्होंने अपनी सबसे बड़ी रचना आम लोगों की भाषा में लिखी। उनका अवधी और ब्रज, दोनों भाषाओं पर बराबर अधिकार था। रामचरितमानस अवधी में है, जबकि विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में हैं। उनकी दूसरी प्रमुख रचनाएँ गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली और हनुमान बाहुक हैं।

तुलसी के काव्य में राम मनुष्य की मर्यादा और आदर्शों के प्रतीक हैं। राम के चरित्र से कवि नीति, शील, विनय, स्नेह और त्याग जैसे मूल्यों को लोगों के मन तक पहुँचाते हैं। उनके काव्य में गाँव का जीवन, परिवार के रिश्ते, प्रकृति और मनुष्य का स्वभाव बहुत बारीकी से दिखता है। यही कारण है कि सदियों बाद भी लोग उनकी चौपाइयाँ रोज़ की बातचीत में कहावत की तरह बोलते हैं।

रामचरितमानस और उसकी छंद-योजना

रामचरितमानस का अर्थ है राम के चरित्र का सरोवर, यानी ऐसी झील जिसमें राम की कथा भरी हो। यह एक महाकाव्य है, जिसे सात कांडों में बाँटा गया है: बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड। हमारे पाठ का अंश बालकांड से लिया गया है, जिसमें राम के जन्म, शिक्षा, विश्वामित्र के साथ वन-यात्रा और सीता से विवाह की कथा है।

मानस की सबसे बड़ी पहचान उसकी छंद-योजना है। इसमें ज़्यादातर चौपाइयाँ हैं, और कुछ चौपाइयों के बाद एक दोहा आता है। चौपाई चार चरणों वाला छंद है, जिसके हर चरण में सोलह मात्राएँ होती हैं। दोहे में दो पंक्तियाँ होती हैं, और वह अक्सर कथा के एक हिस्से का निचोड़ या मोड़ बनकर आता है। हमारे पाठ में भी चौपाइयों के बीच-बीच में दोहे आते हैं।

चौपाई और दोहे की यह लय मानस को गाने योग्य बनाती है। गाँवों में लोग मंडली बनाकर मानस का पाठ गाते हैं, और रामलीला के मंच पर भी इन्हीं पंक्तियों के सहारे कथा आगे बढ़ती है। जब आप पाठ पढ़ें, तो उसे ज़ोर से, लय के साथ पढ़कर देखिए; अवधी के कठिन लगने वाले शब्द भी तब अपने-आप खुलने लगते हैं।

प्रसंग की पृष्ठभूमि: स्वयंवर और शिव का धनुष

मिथिला के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रखा था। उनके पास भगवान शिव का एक बहुत भारी और पुराना धनुष था। शर्त यह थी कि जो राजा उस धनुष पर डोरी चढ़ा दे, उसी से सीता का विवाह होगा। दूर-दूर से बड़े-बड़े राजा आए, पर कोई धनुष को हिला तक न सका।

ऋषि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को अपने साथ लेकर उसी सभा में पहुँचे थे। गुरु की आज्ञा पाकर राम उठे और उन्होंने धनुष उठाकर डोरी चढ़ानी चाही। उसी समय वह विशाल धनुष टूट गया। सभा में ख़ुशी फैल गई, सीता ने राम के गले में जयमाला डाल दी, और अनेक राजा मन ही मन जलने लगे।

शिव का यह धनुष मुनि परशुराम के लिए बहुत आदरणीय था, क्योंकि शिव उनके गुरु और आराध्य थे। जैसे ही धनुष टूटने की ख़बर उन तक पहुँची, वे क्रोध से भरकर जनक की सभा की ओर चल पड़े। हमारा पाठ यहीं से शुरू होता है: खुशी से भरी सभा अचानक डर से सन्न हो जाती है।

परशुराम कौन थे

परशुराम महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे और भृगु ऋषि के वंश में जन्मे थे। इसी कारण कवि उन्हें भृगुपति, भृगुकुल का ध्वज और भृगुकुलकेतु जैसे नामों से पुकारते हैं। वे फरसा धारण करते थे, इसलिए परसुधर भी कहलाते हैं। उनके स्वभाव में तप का तेज भी था और बहुत तीखा क्रोध भी, इसलिए पाठ में उन्हें मुनि कोही, यानी क्रोधी मुनि, कहा गया है।

कथा के अनुसार राजा सहस्रबाहु ने उनके पिता के आश्रम की कामधेनु गाय छीन ली थी। परशुराम ने सहस्रबाहु को मार डाला। बाद में उसके पुत्रों ने बदले में जमदग्नि की हत्या कर दी। तब परशुराम ने बहुत बार धरती के अत्याचारी क्षत्रिय राजाओं से युद्ध किया। इसीलिए राजा उनका नाम सुनकर ही काँप उठते थे।

यह पृष्ठभूमि पाठ को समझने के लिए बहुत ज़रूरी है। सभा में बैठे ज़्यादातर लोग राजा ही हैं, और परशुराम राजाओं के लिए डर का दूसरा नाम हैं। इसलिए उनके आते ही सभा का माहौल बदल जाता है। आगे जब परशुराम सहस्रबाहु का नाम लेते हैं, तो वह केवल पुरानी कहानी नहीं, सीधी चेतावनी है।

भयानक वेष और डरी हुई सभा

पाठ की पहली चौपाई में परशुराम के आते ही सभा का दृश्य बदल जाता है। भृगुपति का कराला, यानी भयानक, वेष देखकर सभी राजा, जिन्हें कवि भुआला कहते हैं, डर से व्याकुल होकर उठ खड़े होते हैं। बिकल शब्द का अर्थ है बेचैन या घबराया हुआ। कवि ने एक ही पंक्ति में बता दिया कि सभा का ध्यान अब स्वयंवर से हटकर इस क्रोधी मुनि पर टिक गया है।

अगली पंक्ति में राजा अपने-अपने पिता के नाम के साथ अपना नाम बताने लगते हैं और दंड प्रणाम करते हैं। पिता का नाम बताने से पूरा कुल परिचय में आ जाता है, जो बड़ों के सामने आदर दिखाने का पुराना तरीक़ा था। पर यहाँ इस आदर के पीछे डर भी छिपा है। कहि कहि, यानी बार-बार कह-कहकर, शब्दों का दोहराव दिखाता है कि हर राजा जल्दी-जल्दी अपना परिचय देकर बचना चाहता है।

तीसरी पंक्ति सबसे गहरी है। परशुराम जिस राजा को सहज भाव से, उसे भला मानकर भी देख लेते, वह राजा मान बैठता कि अब उसकी आयु पूरी हो गई। खुटानी का अर्थ है ख़त्म हो जाना। यानी परशुराम की स्नेह-भरी नज़र भी राजाओं को मौत जैसी लगती है। तुलसी ने डर को बिना शोर किए, एक नज़र के सहारे दिखा दिया है।

जनक, सीता और विश्वामित्र का शिष्टाचार

राजाओं के बाद राजा जनक आगे आते हैं। बहोरि का अर्थ है फिर। जनक फिर आकर सिर झुकाते हैं और सीता को बुलाकर उनसे भी प्रणाम करवाते हैं। यह एक मेज़बान राजा का शिष्ट व्यवहार है। जनक जानते हैं कि मुनि नाराज़ हैं, फिर भी वे घबराकर भागते नहीं, बल्कि उचित आदर देते हैं।

परशुराम सीता को आशीर्वाद देते हैं। यह देखकर सीता की सखियाँ ख़ुश हो जाती हैं, और वे समझदार सखियाँ, जिन्हें कवि सयानीं कहते हैं, सीता को अपनी मंडली में वापस ले जाती हैं। सखियों की यह समझदारी ध्यान देने लायक़ है। वे जानती हैं कि क्रोधित मुनि के सामने ज़्यादा देर खड़े रहना ठीक नहीं, इसलिए आशीष मिलते ही सीता को सुरक्षित वहाँ से हटा लेती हैं।

इसके बाद विश्वामित्र आकर परशुराम से मिलते हैं और दोनों भाइयों को उनके कमल जैसे चरणों में झुका देते हैं। पद सरोज में चरणों को कमल ही मान लिया गया है, इसलिए यहाँ रूपक अलंकार है। विश्वामित्र परिचय देते हैं कि ये दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण हैं। ढोटा का अर्थ है पुत्र और जोटा का अर्थ है जोड़ी। परशुराम उस सुंदर जोड़ी को देखकर आशीष देते हैं।

राम को देखकर ठहरी आँखें, फिर एक प्रश्न

परशुराम राम को देखते ही रह जाते हैं; उनके लोचन, यानी आँखें, जैसे थक कर वहीं रुक जाती हैं। राम का रूप अपार है, और कवि कहते हैं कि यह रूप मार, यानी कामदेव, के घमंड को भी छुड़ा देने वाला है। मार मद मोचन में म की ध्वनि बार-बार आती है, जो अनुप्रास अलंकार का सुंदर उदाहरण है। क्रोध से भरे मुनि का एक पल के लिए ठहर जाना बताता है कि राम के व्यक्तित्व में कितना आकर्षण है।

इसके बाद दोहा आता है। परशुराम फिर से चारों ओर देखकर विदेह, यानी जनक, से पूछते हैं कि यहाँ इतनी भारी भीड़ क्यों है। कवि बताते हैं कि वे यह प्रश्न ऐसे पूछते हैं, जैसे कुछ जानते न हों, जबकि उन्हें सब पता है। जिमि का अर्थ है जैसे, इसलिए यहाँ उपमा का भाव है। पूछते-पूछते उनके पूरे शरीर में क्रोध फैल जाता है।

जानकर भी अनजान बनकर प्रश्न पूछना एक तरह की कड़ी परीक्षा है। परशुराम चाहते हैं कि अपराध की बात जनक के मुँह से ही निकले। इस तरह पहला दोहा कथा को अगले मोड़ पर ले आता है, जहाँ जनक सब कुछ बताते हैं और परशुराम की नज़र टूटे हुए धनुष पर पड़ती है। आगे का पूरा संवाद इसी उबलते क्रोध से जन्म लेता है।

Concepts and terms

महाकाव्य

बड़ी, सर्गों या कांडों में बँटी कथा-कविता, जिसमें किसी महान नायक का पूरा जीवन और समाज का बड़ा चित्र हो। रामचरितमानस ऐसा ही महाकाव्य है।

चौपाई और दोहा

मानस की मुख्य छंद-योजना। कई चौपाइयों के बाद एक दोहा आता है, जो कथा के एक हिस्से को समेटता है।

स्वयंवर

प्राचीन विवाह-रीति, जिसमें कन्या या उसका परिवार एक शर्त रखता है और शर्त पूरी करने वाले से विवाह होता है। सीता-स्वयंवर की शर्त शिव-धनुष पर डोरी चढ़ाना थी।

भृगुवंश

महर्षि भृगु का कुल। परशुराम इसी कुल के थे, इसलिए उन्हें भृगुपति और भृगुकुलकेतु कहा गया है।

शिष्टाचार

बड़ों और अतिथियों के सामने विनम्र, उचित व्यवहार। जनक का सिर झुकाना और सीता से प्रणाम करवाना शिष्टाचार है, भले मन में डर भी हो।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

सभा का दृश्य: स्थिर-चित्र नाटक

Safety:

गत्ते के हथियार ही इस्तेमाल कीजिए और दंड प्रणाम साफ़ फ़र्श या दरी पर ही कीजिए।

What You Notice:

बिना शब्दों के दृश्य बनाने पर पता चलता है कि तुलसी ने हर पंक्ति में कितना साफ़ चित्र खींचा है।

Did you know

रामचरितमानस को सात हिस्सों में बाँटा गया है, जिन्हें कांड कहते हैं: बाल, अयोध्या, अरण्य, किष्किंधा, सुंदर, लंका और उत्तर। पाठ का अंश पहले कांड, यानी बालकांड, से है।

जनक को विदेह भी कहा जाता है, और इसीलिए सीता को वैदेही कहते हैं। पाठ के दोहे में परशुराम जिस बिदेह से प्रश्न करते हैं, वे जनक ही हैं।

उत्तर भारत के गाँव-कस्बों में हर साल रामलीला होती है, और उसमें धनुष-यज्ञ तथा परशुराम-लक्ष्मण का संवाद सबसे पसंद किए जाने वाले दृश्यों में गिना जाता है।

Memory tricks

मानस के सात कांड: बा-अ-अ-कि-सुं-लं-उ — बाल, अयोध्या, अरण्य, किष्किंधा, सुंदर, लंका, उत्तर। बालक अयोध्या से अरण्य गया, किष्किंधा में मित्र मिले, सुंदर सेतु से लंका पहुँचा, फिर उत्तर में लौटा।

राम की कथा अवध की, विनती और कवित्त ब्रज के — राम अवध के राजा थे, इसलिए उनकी कथा, मानस, अवधी में; प्रभु से विनती वाली विनयपत्रिका और कवित्तों वाली कवितावली ब्रजभाषा में।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 तुलसीदास के राम उनके काव्य में मुख्य रूप से किसके प्रतीक बनकर आते हैं? beginner
  • A केवल युद्ध में जीत पाने वाले वीर के
  • B मनुष्य के आदर्श आचरण और मर्यादा के
  • C राजमहल के ठाट-बाट और धन के
  • D जंगल में अकेले रहने वाले किसी तपस्वी के
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Answer: मनुष्य के आदर्श आचरण और मर्यादा के
Why:

मर्यादा और आदर्श।

Q2 तुलसीदास ने संस्कृत के विद्वान होते हुए भी मानस अवधी में क्यों रचा होगा? intermediate
  • A क्योंकि उस समय संस्कृत लिखने पर रोक लगी थी
  • B क्योंकि अवधी में लिखने पर राजा इनाम देते थे
  • C क्योंकि संस्कृत में राम की कोई भी कथा लिखी ही नहीं गई थी
  • D ताकि राम की कथा आम लोगों तक उनकी बोली में पहुँचे
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Answer: ताकि राम की कथा आम लोगों तक उनकी बोली में पहुँचे
Why:

लोक की भाषा।

Q3 इनमें से कौन-सी रचना तुलसीदास ने ब्रजभाषा में लिखी? beginner
  • A विनयपत्रिका
  • B रामचरितमानस
  • C पद्मावत
  • D रामचंद्रिका
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Answer: विनयपत्रिका
Why:

मानस अवधी में है।

Q4 रामचरितमानस में चौपाइयों के बीच-बीच में आने वाला दोहा प्रायः क्या काम करता है? intermediate
  • A पूरी कथा का अंत बताकर पाठक को रोक देता है
  • B हर बार एक नए कवि का परिचय करवाता है
  • C कथा के एक हिस्से को समेटकर आगे बढ़ाता है
  • D केवल पात्रों के नाम गिनाकर चुप हो जाता है
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Answer: कथा के एक हिस्से को समेटकर आगे बढ़ाता है
Why:

छंद-योजना।

Q5 चौपाई के हर चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं? intermediate
  • A तेरह
  • B सोलह
  • C चौबीस
  • D ग्यारह
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Answer: सोलह
Why:

चार चरण।

Q6 जनक की सभा में राजाओं के इकट्ठा होने का कारण क्या था? beginner
  • A राज्य का बँटवारा
  • B शिव का वार्षिक मेला
  • C सीता का स्वयंवर
  • D नई राजधानी का उत्सव
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Answer: सीता का स्वयंवर
Why:

धनुष-यज्ञ।

Q7 परशुराम के धनुष टूटने पर इतना क्रोधित होने का सबसे ठीक कारण कौन-सा है? beginner
  • A वह धनुष उनके गुरु और आराध्य शिव का था
  • B वह धनुष उन्होंने ख़ुद बनाकर जनक को बेचा था
  • C उन्हें स्वयंवर में बुलाया ही नहीं गया था
  • D वे सीता से अपने शिष्य का विवाह चाहते थे
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Answer: वह धनुष उनके गुरु और आराध्य शिव का था
Why:

शिव-धनुष।

Q8 पाठ में परशुराम को मुनि कोही कहने से उनके किस गुण पर ज़ोर पड़ता है? beginner
  • A उनकी मधुर वाणी पर
  • B उनके कोमल मन पर
  • C उनकी भारी दौलत पर
  • D उनके तीखे क्रोध पर
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Answer: उनके तीखे क्रोध पर
Why:

कोही यानी क्रोधी।

Q9 राजाओं के मन में परशुराम का इतना डर क्यों बैठा था? intermediate
  • A वे हर राजा से हर साल बहुत भारी कर वसूलते थे
  • B वे पहले कई अत्याचारी राजाओं से लड़ चुके थे
  • C वे सभी राजाओं के कुलगुरु बनकर दंड देते थे
  • D उन्होंने किसी भी राजा को कभी आशीष नहीं दिया था
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Answer: वे पहले कई अत्याचारी राजाओं से लड़ चुके थे
Why:

सहस्रबाहु की कथा।

Q10 भयानक वेष देखते ही सभी राजा उठ खड़े हुए। इसमें उनका कौन-सा भाव सबसे साफ़ है? beginner
  • A घबराहट से भरा आदर
  • B ख़ुशी से भरा स्वागत
  • C मन में छिपा हुआ भारी घमंड
  • D मुनि को हराने की तैयारी
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Answer: घबराहट से भरा आदर
Why:

भय बिकल।

Q11 राजा अपने नाम के साथ पिता का नाम भी जोड़कर क्यों बता रहे थे? intermediate
  • A ताकि परशुराम उनके पिता से पुराना हिसाब माँग लें
  • B क्योंकि उन्हें अपना नाम ठीक से याद नहीं था
  • C ताकि सभा में सबसे पहले उन्हीं का नाम लिया जाए
  • D ताकि कुल की पहचान देकर आदर दिखा सकें
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Answer: ताकि कुल की पहचान देकर आदर दिखा सकें
Why:

पितु समेत।

Q12 कहि कहि में शब्द के दोहराव से राजाओं की किस हालत का पता चलता है? intermediate
  • A राजा आराम से बैठकर कहानी सुना रहे हैं
  • B राजा आपस में मज़ाक़ करते हुए हँस रहे हैं
  • C हर राजा हड़बड़ी में परिचय दे रहा है
  • D राजा परशुराम से कोई प्रश्न पूछ रहे हैं
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Answer: हर राजा हड़बड़ी में परिचय दे रहा है
Why:

पुनरुक्ति।

Q13 जिसे परशुराम भला मानकर सहज भाव से देख लेते, वह भी अपनी आयु पूरी मान लेता। इस बात से कवि क्या दिखाना चाहते हैं? advanced
  • A डर इतना गहरा था कि स्नेह की नज़र भी मौत लगती थी
  • B परशुराम हर राजा को घूर-घूरकर देखते हुए वहीं सज़ा सुनाते थे
  • C परशुराम की आँखों से सचमुच आग की लपटें निकलती थीं
  • D राजा परशुराम को देखते ही वहाँ से भाग खड़े हुए थे
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Answer: डर इतना गहरा था कि स्नेह की नज़र भी मौत लगती थी
Why:

जनु आइ खुटानी।

Q14 जनक के बारे में सही बात चुनिए। beginner
  • A उन्होंने परशुराम को सभा के भीतर आने से रोक दिया
  • B वे सभा छोड़कर चुपचाप महल में चले गए
  • C उन्होंने परशुराम से सबसे पहले विवाद किया
  • D डरते हुए भी उन्होंने सीता से प्रणाम करवाया
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Answer: डरते हुए भी उन्होंने सीता से प्रणाम करवाया
Why:

शिष्ट मेज़बान।

Q15 सीता की सखियों को सयानीं, यानी समझदार, क्यों कहा गया होगा? intermediate
  • A उन्होंने परशुराम को धनुष टूटने की पूरी कहानी शुरू से सुना दी
  • B उन्होंने राम से धनुष दोबारा जोड़ने की प्रार्थना की
  • C आशीष मिलते ही वे सीता को मुनि के सामने से ले गईं
  • D उन्होंने सभा के सारे राजाओं को बाहर निकाल दिया
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Answer: आशीष मिलते ही वे सीता को मुनि के सामने से ले गईं
Why:

मौक़े की समझ।

Q16 विश्वामित्र दोनों भाइयों को परशुराम के चरणों में झुकाते हैं। इससे विश्वामित्र के बारे में क्या समझ आता है? intermediate
  • A वे राम-लक्ष्मण को कड़ी सज़ा दिलवाना चाहते हैं
  • B वे आदर करवाकर माहौल शांत रखना चाहते हैं
  • C वे परशुराम से युद्ध करने की तैयारी में हैं
  • D वे सभा से राम-लक्ष्मण को छिपा रहे हैं
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Answer: वे आदर करवाकर माहौल शांत रखना चाहते हैं
Why:

गुरु की समझ।

Q17 पद सरोज में कौन-सा अलंकार है? beginner
  • A अनुप्रास
  • B उपमा
  • C यमक
  • D रूपक
Show answer
Answer: रूपक
Why:

चरण ही कमल।

Q18 रामु लखनु दसरथ के ढोटा में ढोटा शब्द का अर्थ ______ है। beginner
  • A पुत्र
  • B सेवक
  • C मित्र
  • D राजा
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Answer: पुत्र
Why:

दशरथ के बेटे।

Q19 परशुराम ने राम-लक्ष्मण को आशीष किस बात से प्रभावित होकर दिया? beginner
  • A दोनों से धनुष टूटने की पूरी कथा सुनकर
  • B जनक से दहेज़ की बात सुनकर
  • C दोनों भाइयों की सुंदर जोड़ी देखकर
  • D सीता की सखियों की विनती पर
Show answer
Answer: दोनों भाइयों की सुंदर जोड़ी देखकर
Why:

भल जोटा।

Q20 राम के रूप को कामदेव का घमंड छुड़ाने वाला क्यों कहा गया है? advanced
  • A कामदेव राम के सबसे बड़े शत्रु थे और सभा में मौजूद थे
  • B राम का रूप सुंदरता के देवता कामदेव से भी बढ़कर है
  • C राम ने उसी समय कामदेव से लड़कर उन्हें हराया था
  • D कामदेव ने ही राम को धनुष तोड़ने के लिए उकसाया था
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Answer: राम का रूप सुंदरता के देवता कामदेव से भी बढ़कर है
Why:

मार मद मोचन।

Q21 मार मद मोचन में म ध्वनि की बार-बार आवृत्ति किस अलंकार का उदाहरण है? intermediate
  • A रूपक
  • B उत्प्रेक्षा
  • C अनुप्रास
  • D श्लेष
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Answer: अनुप्रास
Why:

वर्ण की आवृत्ति।

Q22 पहले दोहे में परशुराम का जानकर भी अनजान बनकर प्रश्न पूछना किस बात की ओर इशारा करता है? advanced
  • A उन्हें सच में कुछ भी पता नहीं था कि यह सभा क्यों जुटी है
  • B वे चाहते हैं कि धनुष टूटने की बात जनक ख़ुद स्वीकार करें
  • C वे सभा में मज़ाक़ करके सबका डर दूर करना चाहते थे
  • D वे भीड़ देखकर वहाँ से लौट जाना चाहते थे
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Answer: वे चाहते हैं कि धनुष टूटने की बात जनक ख़ुद स्वीकार करें
Why:

पूछत जानि अजान जिमि।

Q23 पहले अंश के अंत तक परशुराम के मन की दशा कैसे बदलती है? advanced
  • A पल भर राम पर ठहरते हैं, फिर क्रोध भर जाता है
  • B शुरू से अंत तक वे पूरी तरह शांत और प्रसन्न रहते हैं
  • C पहले क्रोध में रहते हैं, फिर सीता को देखकर फूट-फूटकर रोने लगते हैं
  • D पहले डरते हैं, फिर राजाओं की बात सुनकर हँस पड़ते हैं
Show answer
Answer: पल भर राम पर ठहरते हैं, फिर क्रोध भर जाता है
Why:

भाव का उतार-चढ़ाव।

Q24 अभिकथन: परशुराम के आते ही स्वयंवर की ख़ुशी भरी सभा डर से सन्न हो गई। कारण: सभा में ज़्यादातर राजा थे और परशुराम का अत्याचारी राजाओं से युद्ध प्रसिद्ध था। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
  • D दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

राजाओं का डर।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. रामचरितमानस सात कांडों में बँटा अवधी का महाकाव्य है। II. परशुराम ने राम-लक्ष्मण को आशीष देने से मना कर दिया। III. दोहे में परशुराम जनक को बिदेह कहकर संबोधित करते हैं। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

परशुराम ने आशीष दिया था।

Important short questions (7)

तुलसीदास की भाषा के बारे में दो बातें लिखिए।

तुलसीदास का अवधी और ब्रज, दोनों पर समान अधिकार था। रामचरितमानस अवधी में है। विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में हैं। वे संस्कृत के भी बड़े विद्वान थे।

रामचरितमानस की छंद-योजना संक्षेप में समझाइए।

मानस में मुख्य रूप से चौपाई और दोहा छंद हैं। चौपाई के चार चरण होते हैं। हर चरण में सोलह मात्राएँ होती हैं। कुछ चौपाइयों के बाद एक दोहा कथा को समेटता है।

परशुराम धनुष टूटने पर जनक की सभा में क्यों आए?

सभा में शिव का धनुष टूट गया था। शिव परशुराम के गुरु और आराध्य थे। धनुष टूटने की ख़बर से वे बहुत क्रोधित हुए। इसलिए वे तुरंत जनक की सभा में आ पहुँचे।

परशुराम को देखकर राजाओं ने कैसा व्यवहार किया? उसका कारण भी लिखिए।

राजा डर से घबराकर उठ खड़े हुए। उन्होंने पिता के नाम सहित परिचय दिया। फिर धरती पर लेटकर प्रणाम किया। कारण यह था कि परशुराम अत्याचारी राजाओं से कई युद्ध कर चुके थे।

राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी बात आपको अच्छी लगी और क्यों?

मुझे जनक का धैर्य अच्छा लगा। सभा डरी हुई थी, फिर भी वे आगे आए। उन्होंने सिर झुकाकर आदर दिया। सीता से भी प्रणाम करवाया। मुश्किल घड़ी में भी उन्होंने शिष्टता नहीं छोड़ी।

पद सरोज मेले दोउ भाई वाले अंश का अर्थ और उसमें आया अलंकार बताइए।

विश्वामित्र ने दोनों भाइयों को परशुराम के चरणों में झुकाया। कवि ने चरणों को कमल ही मान लिया है। उपमेय पर उपमान का आरोप होने से यहाँ रूपक अलंकार है।

पूछत जानि अजान जिमि से परशुराम के स्वभाव के बारे में क्या समझ आता है?

परशुराम सब जानते थे, फिर भी अनजान की तरह भीड़ का कारण पूछते हैं। इससे लगता है कि वे अपराधी को सामने लाना चाहते थे। वे जनक के मुँह से सच सुनना चाहते थे। उनका क्रोध भीतर ही भीतर उबल रहा था।

Long answer questions (3)

तुलसीदास का साहित्यिक परिचय दीजिए।

गोस्वामी तुलसीदास भक्तिकाल के प्रमुख रामभक्त कवि हैं। हिंदी साहित्य कोश के अनुसार उनका जीवन-काल सन् 1532 से 1623 के बीच है। उनका जन्म आज के उत्तर प्रदेश में और देहांत काशी में हुआ। रामचरितमानस उनका अवधी में रचा महाकाव्य है। विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में हैं। गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली और हनुमान बाहुक उनकी दूसरी रचनाएँ हैं। उनके राम मनुष्य की मर्यादा के प्रतीक हैं। राम के माध्यम से वे नीति, शील, विनय, स्नेह और त्याग का संदेश देते हैं। लोकजीवन और मनुष्य के स्वभाव की गहरी समझ उनके काव्य को आज भी जीवित रखती है।

परशुराम के आगमन से लेकर उनके प्रश्न तक सभा का दृश्य अपने शब्दों में लिखिए।

स्वयंवर में धनुष टूटने से सभा में ख़ुशी थी। तभी भयानक वेष में परशुराम आ पहुँचे। उन्हें देखकर सारे राजा डर से उठ खड़े हुए। हर राजा पिता के नाम सहित अपना परिचय देकर धरती पर लेट गया। परशुराम जिसे सहज भाव से देखते, वह भी अपनी मौत पास समझता। जनक ने सिर झुकाया और सीता से प्रणाम करवाया। आशीष मिलते ही सखियाँ सीता को ले गईं। विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण को उनके चरणों में झुकाया। राम का रूप देखकर परशुराम कुछ पल ठहर गए। फिर उन्होंने अनजान बनकर जनक से भीड़ का कारण पूछा। पूछते-पूछते उनका शरीर क्रोध से भर गया।

इस अंश में डर और शिष्टाचार साथ-साथ कैसे दिखाई देते हैं? उदाहरणों से समझाइए।

इस अंश में लगभग हर व्यवहार के पीछे दो भाव हैं। राजा पिता के नाम सहित परिचय देते हैं और दंड प्रणाम करते हैं। यह आदर का तरीक़ा है, पर इसके पीछे जान बचाने का डर है। जनक भी डरे हुए हैं, फिर भी मेज़बान होने के नाते सिर झुकाते हैं और सीता से प्रणाम करवाते हैं। सखियाँ आशीष मिलते ही सीता को हटा लेती हैं, जो डर में दिखाई समझदारी है। विश्वामित्र दोनों भाइयों को चरणों में झुकाकर माहौल शांत रखना चाहते हैं। तुलसी दिखाते हैं कि डर के समय भी अच्छा व्यवहार मनुष्य की पहचान बना रहता है।

Flashcards (17)

तुलसीदास का जीवन-काल किस अवधि में माना जाता है?
सन् 1532 से 1623 के बीच।
तुलसीदास का देहांत कहाँ हुआ?
काशी में।
रामचरितमानस किस भाषा में है?
अवधी।
ब्रजभाषा में लिखी तुलसी की दो रचनाएँ?
विनयपत्रिका और कवितावली।
पाठ का अंश मानस के किस कांड से है?
बालकांड।
स्वयंवर की शर्त क्या थी?
शिव-धनुष पर डोरी चढ़ाना।
परशुराम के पिता और माता?
जमदग्नि और रेणुका।
परसुधर का अर्थ?
फरसा धारण करने वाला।
भुआला किसे कहा गया है?
राजाओं को।
कराला का अर्थ?
भयानक।
राजा परिचय में अपने साथ किसका नाम लेते हैं?
अपने पिता का।
खुटानी का अर्थ?
समाप्त हो जाना।
बहोरि का अर्थ?
फिर, दोबारा।
ढोटा और जोटा का अर्थ?
पुत्र और जोड़ी।
मार मद मोचन में मार कौन है?
कामदेव।
दोहे में बिदेह किसे कहा गया है?
राजा जनक को।
जिमि शब्द का अर्थ?
जैसे, की तरह।

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  • अवधी शब्द और अर्थ
  • डर या आदर
  • सही या भ्रम
  • आगमन से प्रश्न तक
  • झटपट उत्तर

परशुराम का क्रोध, राम का विनय और लक्ष्मण का व्यंग्य

टूटा धनुष देखकर परशुराम जनक को कड़े वचन कहते हैं और धरती उलटने की धमकी देते हैं। राम बिना हर्ष-विषाद के विनम्र उत्तर देते हैं, लक्ष्मण व्यंग्य करते हैं। साथ में संवाद की नाटकीयता, अनुप्रास, अतिशयोक्ति और अवधी भाषा।

What you will be able to do

  • टूटा धनुष देखने के बाद परशुराम के क्रोध और उनकी चेतावनी को अपने शब्दों में समझा सकूँगा।
  • सभा के अलग-अलग लोगों, जैसे जनक, कुटिल राजा, सुनयना और सीता, की प्रतिक्रिया की तुलना कर सकूँगा।
  • राम के विनय और लक्ष्मण के व्यंग्य को उदाहरणों से अलग-अलग पहचान सकूँगा।
  • पाठ में अनुप्रास, अतिशयोक्ति और रूपक अलंकार पहचानकर उनकी व्याख्या कर सकूँगा।
  • अवधी के शब्दों और संवाद-शैली की विशेषताएँ बताकर पाठ का काव्य-सौंदर्य लिख सकूँगा।

Key points

  • जनक सारी बात बताते हैं; परशुराम दूसरी ओर देखते हैं और धरती पर पड़े धनुष के टुकड़े देखकर बहुत क्रोधित होते हैं।

  • वे जनक को जड़ कहकर पूछते हैं कि धनुष किसने तोड़ा, और धमकी देते हैं कि जल्दी न दिखाया, तो जनक के राज्य तक की धरती उलट देंगे।

  • डर के कारण जनक उत्तर नहीं देते; कुटिल राजा मन ही मन ख़ुश होते हैं; देवता, मुनि, नाग और नगर के सब लोग चिंता में डूब जाते हैं।

  • सीता की माता पछताती हैं कि विधाता ने बनी हुई बात बिगाड़ दी; परशुराम का स्वभाव सुनकर सीता को आधा पल भी एक कल्प जैसा लंबा लगता है।

  • सबको डरा हुआ देखकर राम बिना हर्ष और बिना विषाद के कहते हैं कि शिव-धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा; आपकी क्या आज्ञा है।

  • परशुराम कहते हैं कि सेवक वह है जो सेवा करे; शत्रु जैसा काम करने वाले से तो लड़ाई ही होगी। तोड़ने वाला सहस्रबाहु जैसा उनका शत्रु है।

  • वे चेतावनी देते हैं कि तोड़ने वाला सभा से अलग हो जाए, नहीं तो सारे राजा मारे जाएँगे।

  • लक्ष्मण मुसकाकर व्यंग्य करते हैं कि बचपन में उन्होंने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब कभी ऐसा क्रोध नहीं हुआ; इस धनुष पर इतनी ममता क्यों।

  • परशुराम लक्ष्मण को काल के वश में बोलने वाला राजकुमार कहते हैं; आगे राम के विनय, विश्वामित्र के समझाने और राम की शक्ति की परीक्षा के बाद उनका क्रोध शांत होता है।

Full explanation

टूटा धनुष और जनक पर बरसता क्रोध

पहले विषय में हमने देखा कि परशुराम जानते हुए भी जनक से भीड़ का कारण पूछते हैं। अब जनक सारा समाचार सुना देते हैं कि किस कारण इतने राजा सभा में जुटे हैं। बात सुनते ही परशुराम नज़र घुमाकर दूसरी ओर देखते हैं। वहाँ धरती पर शिव-धनुष के टुकड़े पड़े हैं। पाठ में इन्हें चापखंड कहा गया है, यानी धनुष के खंड।

टुकड़े देखते ही उनका क्रोध भड़क उठता है और वे बहुत कड़े वचन बोलते हैं। वे जनक को जड़, यानी मूर्ख, कहकर पूछते हैं कि बताओ, धनुष किसने तोड़ा। फिर धमकी देते हैं कि जल्दी दिखाओ, नहीं तो आज जहाँ तक तुम्हारा राज्य है, वहाँ तक की धरती उलट दूँगा। उलटउँ महि वाली बात बताती है कि उनका क्रोध केवल एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे राज्य पर टूट पड़ने को तैयार है।

ध्यान दीजिए कि जनक मेज़बान राजा हैं और कुछ देर पहले ही उन्होंने परशुराम का आदर किया था। फिर भी परशुराम उनसे बहुत रूखे ढंग से बात करते हैं। इससे पता चलता है कि क्रोध में मनुष्य अक्सर सामने वाले का पद और व्यवहार दोनों भूल जाता है। तुलसी यह बात बिना किसी उपदेश के, केवल पात्र के बोलने के ढंग से दिखा देते हैं।

एक धमकी, अनेक चेहरे

परशुराम की धमकी के बाद कवि सभा के अलग-अलग लोगों के मन में झाँकते हैं। सबसे पहले जनक हैं, जो इतने डर जाते हैं कि कोई उत्तर ही नहीं दे पाते। उनकी चुप्पी कमज़ोरी नहीं, उस समय की असहायता है, क्योंकि वे सच बताएँ तो राम संकट में पड़ें।

दूसरी ओर कुटिल राजा हैं, जो मन ही मन ख़ुश हो रहे हैं। वे स्वयंवर में धनुष नहीं उठा पाए थे और राम की जीत से जल रहे थे। अब उन्हें लगता है कि परशुराम राम को सज़ा देंगे। यह मनुष्य के स्वभाव की एक कड़वी सच्चाई है: कई लोग दूसरों की मुसीबत में अपनी हार का बदला देखते हैं।

तीसरी ओर देवता, मुनि, नाग और नगर के सब स्त्री-पुरुष हैं। सब सोच में डूबे हैं और सबके मन में भारी डर है। सुर मुनि नाग नगर नर नारी में न ध्वनि बार-बार आती है, इसलिए यहाँ अनुप्रास है। इस पंक्ति से लगता है कि डर पूरे संसार में फैल गया है, केवल राजसभा तक सीमित नहीं।

माँ का पछतावा और सीता का लंबा पल

सीता की माता सुनयना मन ही मन पछताती हैं। उन्हें लगता है कि विधाता ने अब बनी-बनाई बात बिगाड़ दी। अभी कुछ देर पहले राम ने धनुष तोड़कर स्वयंवर जीता था और विवाह तय हो गया था। अब परशुराम के क्रोध से सब कुछ उलटता दिख रहा है। एक माँ की यह चिंता बहुत स्वाभाविक है, इसलिए यह पंक्ति आज भी पाठक के मन को छूती है।

सीता परशुराम के स्वभाव के बारे में सुनती हैं, तो उनका आधा पल भी एक कल्प जितना लंबा बीतता है। निमेष का अर्थ है पलक झपकने जितना समय, और कल्प का अर्थ है युगों जितना लंबा समय। किसी को आधा पल कल्प जैसा लगे, यह असंभव-सी बात है। इसीलिए यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है, यानी बात को बहुत बढ़ाकर कहना।

यह अतिशयोक्ति झूठ नहीं, भावना की सच्चाई है। जब हम परीक्षा के परिणाम का इंतज़ार करते हैं या किसी अपने के लौटने की राह देखते हैं, तो कुछ मिनट भी घंटों जैसे लगते हैं। सीता के मन में राम की चिंता है, इसलिए समय रुका-सा लगता है। तुलसी ने एक छोटी-सी पंक्ति में बेचैनी का पूरा चित्र बना दिया।

राम का उत्तर: न हर्ष, न विषाद

दोहे में राम देखते हैं कि सब लोग डरे हुए हैं और जानकी भी भयभीत हैं। तब वे बोलते हैं। कवि बताते हैं कि उस समय राम के हृदय में न हर्ष था, न विषाद। यानी न जीत का घमंड, न डर या दुख। यह मन का अद्भुत संतुलन है, जो मुश्किल समय में ही सबसे साफ़ दिखता है।

राम कहते हैं: हे नाथ, शिव का धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा। फिर विनती करते हैं कि आज्ञा दीजिए, मुझे क्या करना है। इस उत्तर में तीन बातें हैं। राम सच नहीं छिपाते, क्योंकि वे ख़ुद को दास कहकर अपराध अपने ऊपर ले लेते हैं। वे परशुराम को नाथ कहकर उनका आदर करते हैं। और आज्ञा पूछकर वे क्रोध को आदेश की ओर मोड़ देते हैं।

यह विनम्रता कमज़ोरी नहीं है। जिसने अभी-अभी वह धनुष तोड़ा, जिसे कोई राजा हिला न सका, उसकी शक्ति पर कोई शक नहीं। फिर भी राम झुककर बोलते हैं, ताकि बात बिगड़े नहीं और सभा का डर दूर हो। जीवन में भी अक्सर वही व्यक्ति बड़ा माना जाता है, जो ताक़त होते हुए भी नम्रता से बात सँभाल ले।

परशुराम का पलटवार: सेवक और शत्रु

राम की नम्र बात सुनकर भी क्रोधी मुनि और भड़क जाते हैं। वे कहते हैं कि सेवक वह होता है, जो सेवा का काम करे। जो शत्रु जैसा काम करे, उससे तो लड़ाई ही करनी पड़ती है। अरि करनी करि करिअ लराई में क और र ध्वनियाँ बार-बार आती हैं, जिससे अनुप्रास की गूँज बनती है और बात और कड़ी लगती है।

फिर वे राम को सुनाकर कहते हैं कि जिसने शिव-धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान मेरा शत्रु है। यहाँ सहस्रबाहु का नाम लेना एक भयानक इशारा है, क्योंकि परशुराम ने उसे मार डाला था। वे आदेश देते हैं कि तोड़ने वाला सभा छोड़कर अलग खड़ा हो जाए। अगर ऐसा न हुआ, तो यहाँ बैठे सारे राजा मारे जाएँगे।

इस चेतावनी का असर पूरी सभा पर पड़ता है। जो कुटिल राजा अभी तक ख़ुश थे, अब उनकी अपनी जान ख़तरे में है। एक के अपराध के लिए सबको दंड देने की धमकी बताती है कि क्रोध न्याय और अन्याय का भेद भी मिटा देता है। तुलसी इस तरह परशुराम के तेज के साथ उनके क्रोध की सीमा भी दिखा देते हैं।

लक्ष्मण का व्यंग्य और परशुराम का क्रोध

परशुराम के वचन सुनकर लक्ष्मण मुसकाते हैं और उनका अपमान करते हुए बोलते हैं। वे कहते हैं: गोसाईं, बचपन में हमने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं, पर आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया। फिर इस धनुष पर इतनी ममता किस कारण है? यह सीधा प्रश्न नहीं, चुभता हुआ व्यंग्य है, क्योंकि लक्ष्मण शिव के धनुष को खिलौने वाली धनुही के बराबर रख देते हैं।

लक्ष्मण का मुसकाना भी अर्थ से भरा है। राम ने नम्रता से बात सँभालनी चाही, पर परशुराम ने उन्हें शत्रु कहा और सब राजाओं को मारने की धमकी दी। लक्ष्मण को भाई का यह अपमान सहन नहीं होता। उनके व्यंग्य में तर्क भी है: एक पुराना धनुष टूट गया, तो इतना बड़ा क्रोध क्यों?

परशुराम यह सुनकर, जिन्हें कवि भृगुकुलकेतु कहते हैं, और भड़क जाते हैं। वे कहते हैं: अरे राजकुमार, तू काल के वश में होकर बोल रहा है, तुझे अपनी बात का होश नहीं। सारे संसार में प्रसिद्ध शिव का धनुष क्या किसी धनुही के बराबर है? इसी तीखे सवाल-जवाब पर पाठ का अंश रुकता है।

आगे की कथा और दो रास्ते

मानस में यह संवाद आगे भी चलता है। लक्ष्मण और परशुराम के बीच व्यंग्य भरी बातें होती रहती हैं, पर राम हर बार धैर्य और गंभीरता से शांत बने रहते हैं। अंत में राम के विनय, विश्वामित्र के समझाने और राम की शक्ति की परीक्षा लेने के बाद परशुराम का क्रोध शांत होता है।

तुलसी ने एक ही परिस्थिति में दो भाइयों के दो रास्ते दिखाए हैं। राम का रास्ता विनय का है: आदर देकर, सच स्वीकार करके क्रोध को ठंडा करना। लक्ष्मण का रास्ता तर्क और व्यंग्य का है: अन्याय भरी बात पर चुप न रहना। दोनों के पीछे सही भावना है, पर क्रोध को शांत करने में विनय अधिक काम आता है, जबकि व्यंग्य उसे और भड़काता है।

कहावत है कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। राम इसी का उदाहरण हैं, क्योंकि वे मन को डगमगाने नहीं देते। आप भी सोचिए: जब कोई बहुत ग़ुस्से में हो, तब आप कौन-सा रास्ता चुनते हैं? और किस हालत में चुप रहने के बजाय साफ़ बोलना ज़रूरी हो जाता है?

पाठ का काव्य-सौंदर्य

यह अंश अवधी भाषा में है, जो आज के पूर्वी उत्तर प्रदेश की बोली है। इसमें शब्दों के अंत में उ लगाने की प्रवृत्ति दिखती है, जैसे रामु, लखनु, कोपु, सिरु और बेषु। कोही का अर्थ क्रोधी, भुआला का अर्थ राजा और महतारी का अर्थ माता है। बोलचाल के ऐसे शब्द पाठ को लोक से जोड़ते हैं।

छंद-योजना चौपाई और दोहे की है। चौपाइयों में कथा तेज़ी से आगे बढ़ती है और दोहे बड़े मोड़ पर आते हैं, जैसे परशुराम का प्रश्न या राम का बोलना। पूरा अंश संवाद में चलता है, जिसमें हर पात्र की बोली उसके स्वभाव से मेल खाती है। परशुराम के वाक्य कड़े हैं, राम के नम्र हैं और लक्ष्मण के चुटीले हैं। इसी कारण यह अंश पढ़ने में नाटक जैसा लगता है।

अलंकारों से पाठ और सुंदर बनता है। पद सरोज में रूपक है, सुर मुनि नाग नगर नर नारी में अनुप्रास, और आधे पल को कल्प के बराबर बताने में अतिशयोक्ति। परशुराम के कई नाम, जैसे भृगुपति, परसुधर, भृगुकुलकेतु और मुनि कोही, उनके कुल, हथियार और स्वभाव, तीनों की याद दिलाते हैं।

Concepts and terms

विनय

नम्रता और शील से भरा व्यवहार, जिसमें अपनी बात भी कही जाए और सामने वाले का आदर भी बना रहे। राम का उत्तर विनय का उदाहरण है।

व्यंग्य

सीधे न कहकर, उलटे या मज़ाक़ भरे ढंग से चुभती बात कहना। लक्ष्मण का धनुहियों वाला प्रश्न व्यंग्य है।

अतिशयोक्ति अलंकार

जहाँ किसी बात को उसकी असली सीमा से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाए, जैसे आधे पल को कल्प के बराबर बताना।

संवाद की नाटकीयता

पात्रों की बातचीत से कथा आगे बढ़े और हर उत्तर के साथ तनाव बदलता दिखे, तो कविता नाटक जैसी लगती है।

भावनात्मक संतुलन

ख़ुशी या दुख, डर या क्रोध, किसी भी हालत में मन को डगमगाने न देना। राम के हृदय में न हर्ष है, न विषाद।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

स्कूल के खेल-कक्ष में रखा एक पुराना क्रिकेट बल्ला अभ्यास के दौरान टूट गया। उस बल्ले पर स्कूल की पहली जीत वाली टीम के हस्ताक्षर थे। कोच मलिक सर बहुत नाराज़ हुए और पूरी टीम से बोले कि तोड़ने वाला सामने आए, नहीं तो सबका अभ्यास बंद। तन्वी ने आगे बढ़कर शांत स्वर में कहा कि बल्ला उसी से टूटा है और वह जो सज़ा मिले, स्वीकार करेगी। उसी समय ऋषभ हँसकर बोला कि सर, पिछले महीने भी दो बल्ले टूटे थे, तब तो कोई कुछ नहीं बोला। यह सुनकर कोच और भड़क गए। बाद में तन्वी की बात और कप्तान के समझाने पर कोच का ग़ुस्सा शांत हुआ।

Activity:

अपने जीवन की कोई ऐसी घटना लिखिए, जब किसी के ग़ुस्से को आपने या किसी और ने नम्रता से शांत किया हो।

Analysis:

तन्वी ने पाठ के राम की तरह ज़िम्मेदारी ली; इस प्रसंग से दिखता है कि पुरानी कथा आज के खेल के मैदान पर भी उतनी ही सच्ची है।

Did you know

कल्प हिंदू काल-गणना में बहुत लंबे समय का नाम है, जो करोड़ों वर्षों का माना जाता है। आधे पल को कल्प के बराबर कहना इसीलिए अतिशयोक्ति है।

शिव को त्रिपुरारि कहा जाता है, क्योंकि कथा के अनुसार उन्होंने त्रिपुर नाम के तीन असुर-नगरों का नाश किया था। दोहे में तिपुरारि धनु का अर्थ है शिव का धनुष।

धनुष के लिए भारत की भाषाओं में अलग-अलग शब्द हैं: पंजाबी में धणुख, मराठी में धनुष्य, बांग्ला में धनुक, कन्नड़ में बिल्लु और तमिल में विल्।

Memory tricks

तीन उत्तर, तीन रंग: राम-विनय, लक्ष्मण-व्यंग्य, परशुराम-रोष — राम झुकते हैं, लक्ष्मण चुभाते हैं, परशुराम भड़कते हैं। र-ल-प के साथ वि-व्यं-रो याद रखिए।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 जनक की बात सुनकर परशुराम की नज़र किस पर पड़ती है, जिससे उनका क्रोध भड़क उठता है? beginner
  • A धरती पर पड़े धनुष के टुकड़ों पर
  • B राम के गले में पड़ी जयमाला पर
  • C सभा में रखे राजाओं के मुकुटों पर
  • D सीता की सखियों की मंडली पर
Show answer
Answer: धरती पर पड़े धनुष के टुकड़ों पर
Why:

चापखंड महि डारे।

Q2 परशुराम का जनक को जड़ कहना उनके किस स्वभाव को दिखाता है? intermediate
  • A हर राजा से मीठा बोलने की आदत को
  • B क्रोध में पद और आदर भूल जाने को
  • C जनक से अपनी पुरानी गहरी दोस्ती को
  • D सभा में मज़ाक़ करने के शौक़ को
Show answer
Answer: क्रोध में पद और आदर भूल जाने को
Why:

कठोर वचन।

Q3 धरती उलट देने की धमकी में परशुराम के क्रोध का दायरा कहाँ तक है? intermediate
  • A केवल सभा के एक छोटे कोने तक
  • B केवल राम के रथ तक
  • C जहाँ तक जनक का राज्य फैला है
  • D केवल महल के दरवाज़े तक
Show answer
Answer: जहाँ तक जनक का राज्य फैला है
Why:

जहँ लहि तव राजू।

Q4 जनक के चुप रह जाने का सबसे उचित कारण कौन-सा है? advanced
  • A उन्हें परशुराम की भाषा समझ में नहीं आ रही थी
  • B वे परशुराम को सबक़ सिखाने की योजना बना रहे थे
  • C उन्हें धनुष टूटने की ख़बर ही नहीं मिली थी
  • D सच बताते तो राम संकट में पड़ते, और डर भी बहुत था
Show answer
Answer: सच बताते तो राम संकट में पड़ते, और डर भी बहुत था
Why:

अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं।

Q5 कुटिल राजाओं का मन ही मन ख़ुश होना मनुष्य के किस स्वभाव की ओर इशारा करता है? intermediate
  • A हर हाल में सच का साथ देने की ओर
  • B दूसरे की मुसीबत में ख़ुशी ढूँढ़ने की ओर
  • C बड़ों की हर बात चुपचाप मान लेने की ओर
  • D दुख में सबकी मदद करने की ओर
Show answer
Answer: दूसरे की मुसीबत में ख़ुशी ढूँढ़ने की ओर
Why:

कुटिल भूप हरषे।

Q6 सुर, मुनि, नाग और नगर के लोगों का डरना इस प्रसंग के बारे में क्या बताता है? intermediate
  • A सब लोग परशुराम से मिलकर युद्ध करना चाहते थे
  • B सभा में अचानक कोई भूकंप आ गया था
  • C डर केवल सभा तक नहीं, पूरे जगत में फैल गया था
  • D लोग स्वयंवर ख़त्म होने से ऊब गए थे
Show answer
Answer: डर केवल सभा तक नहीं, पूरे जगत में फैल गया था
Why:

त्रास उर भारी।

Q7 सीता की माता किस बात पर पछताती हैं? beginner
  • A विधाता ने बनी हुई विवाह की बात बिगाड़ दी
  • B उन्होंने परशुराम को स्वयंवर का न्योता नहीं भेजा था
  • C राम ने धनुष उठाने में बहुत देर कर दी
  • D सीता ने जयमाला ठीक से नहीं पहनाई थी
Show answer
Answer: विधाता ने बनी हुई विवाह की बात बिगाड़ दी
Why:

बिधि बात बिगारी।

Q8 सीता का आधा पल भी कल्प जैसा बीतना उनकी किस मनःस्थिति का परिचय देता है? intermediate
  • A आराम, जिसमें समय पता ही न चले
  • B ग़ुस्सा, जिसमें बदला लेने का मन हो
  • C ऊब, जिसमें कुछ भी अच्छा न लगे
  • D बेचैनी, जिसमें समय रुका हुआ-सा लगे
Show answer
Answer: बेचैनी, जिसमें समय रुका हुआ-सा लगे
Why:

प्रतीक्षा की चिंता।

Q9 अरध निमेष कलप सम बीता में मुख्य रूप से कौन-सा अलंकार माना जाता है? intermediate
  • A रूपक
  • B अतिशयोक्ति
  • C श्लेष
  • D मानवीकरण
Show answer
Answer: अतिशयोक्ति
Why:

बहुत बढ़ाकर।

Q10 राम के हृदय में न हर्ष था, न विषाद। इससे राम के बारे में कौन-सी बात सबसे सही है? advanced
  • A उन्हें स्वयंवर जीतने की कोई ख़ुशी नहीं थी
  • B उन्हें परशुराम की बातें सुनाई नहीं दे रही थीं
  • C वे जीत और संकट, दोनों में मन को स्थिर रखते हैं
  • D वे सीता से विवाह नहीं करना चाहते थे
Show answer
Answer: वे जीत और संकट, दोनों में मन को स्थिर रखते हैं
Why:

भावनात्मक संतुलन।

Q11 राम ने बोलने से पहले किस बात पर ध्यान दिया? beginner
  • A लक्ष्मण ग़ुस्से में उठ खड़े हुए हैं
  • B विश्वामित्र सभा छोड़ने वाले हैं
  • C राजा युद्ध की तैयारी कर रहे हैं
  • D सब लोग और जानकी भयभीत हैं
Show answer
Answer: सब लोग और जानकी भयभीत हैं
Why:

सभय बिलोके लोग।

Q12 धनुष तोड़ने वाले को परशुराम का दास बताकर राम क्या साधना चाहते हैं? advanced
  • A सच स्वीकार करते हुए आदर देकर क्रोध को ठंडा करना
  • B अपराध किसी दूसरे सेवक के सिर डालकर ख़ुद बच निकलना
  • C परशुराम को सभा के सामने नीचा दिखाकर चुप कराना
  • D सभा के राजाओं को परशुराम से लड़ने के लिए उकसाना
Show answer
Answer: सच स्वीकार करते हुए आदर देकर क्रोध को ठंडा करना
Why:

होइहि केउ एक दास।

Q13 राम आज्ञा पूछकर परशुराम के क्रोध को किस दिशा में मोड़ते हैं? intermediate
  • A सभा से हटाकर जंगल की ओर
  • B जनक से हटाकर सीता की ओर
  • C धनुष से हटाकर रथ की ओर
  • D क्रोध से हटाकर आदेश देने की ओर
Show answer
Answer: क्रोध से हटाकर आदेश देने की ओर
Why:

आयसु काह।

Q14 परशुराम सेवक की कौन-सी परिभाषा देते हैं? beginner
  • A जो राजा के घर जन्मे, वही सेवक है
  • B जो सेवा का काम करे, वही सेवक है
  • C जो सबसे बलवान हो, वही सेवक है
  • D जो सबसे कम बोले, वही सेवक है
Show answer
Answer: जो सेवा का काम करे, वही सेवक है
Why:

करै सेवकाई।

Q15 अरि करनी करि करिअ लराई में ध्वनि का कौन-सा सौंदर्य है? intermediate
  • A क और र वर्णों की आवृत्ति से बना अनुप्रास
  • B चरणों को कमल मान लेने वाला रूपक
  • C एक शब्द के दो अर्थों वाला श्लेष
  • D निर्जीव को जीवित दिखाने वाला मानवीकरण
Show answer
Answer: क और र वर्णों की आवृत्ति से बना अनुप्रास
Why:

वर्णों की गूँज।

Q16 धनुष तोड़ने वाले को सहस्रबाहु के समान शत्रु कहने में कौन-सी चेतावनी छिपी है? advanced
  • A तोड़ने वाले को भी हज़ार भुजाएँ दी जाएँगी
  • B तोड़ने वाले को सहस्रबाहु का राज्य मिलेगा
  • C जैसे सहस्रबाहु मारा गया, वैसे ही यह भी मारा जाएगा
  • D तोड़ने वाला सहस्रबाहु का पुत्र मानकर पूजा जाएगा
Show answer
Answer: जैसे सहस्रबाहु मारा गया, वैसे ही यह भी मारा जाएगा
Why:

सहसबाहु सम सो रिपु।

Q17 सारे राजाओं को मार देने की चेतावनी का सबसे गहरा असर किन पर पड़ा होगा? advanced
  • A सीता की उन सखियों पर, जो मंडली में बैठी थीं
  • B नगर के उन बच्चों पर, जो खेल रहे थे
  • C उन देवताओं पर, जो पहले से निश्चिंत थे
  • D उन कुटिल राजाओं पर, जो अभी तक मन में ख़ुश थे
Show answer
Answer: उन कुटिल राजाओं पर, जो अभी तक मन में ख़ुश थे
Why:

न त मारे जैहहिं सब राजा।

Q18 लक्ष्मण बचपन की धनुहियों की बात किस उद्देश्य से करते हैं? intermediate
  • A बचपन की मीठी यादें सुनाकर पूरी सभा को हँसाने के लिए
  • B शिव-धनुष पर परशुराम की ममता का मज़ाक़ उड़ाने के लिए
  • C परशुराम से नए धनुष बनवाने की विनती के लिए
  • D राम की गलती को छिपाने के लिए झूठ बोलने को
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Answer: शिव-धनुष पर परशुराम की ममता का मज़ाक़ उड़ाने के लिए
Why:

व्यंग्य।

Q19 लक्ष्मण ने परशुराम को किस आदर-सूचक शब्द से पुकारा, जिसमें व्यंग्य भी झलकता है? intermediate
  • A महाराज
  • B गुरुदेव
  • C गोसाईं
  • D स्वामी
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Answer: गोसाईं
Why:

गोसाइँ।

Q20 परशुराम लक्ष्मण को काल के वश में बोलने वाला क्यों कहते हैं? advanced
  • A लक्ष्मण बिना सोचे मौत बुलाने वाली बात कह रहे हैं
  • B क्योंकि लक्ष्मण सभा में बहुत देर से पहुँचे थे
  • C क्योंकि लक्ष्मण ने बार-बार समय पूछकर बात बदल दी थी
  • D क्योंकि लक्ष्मण ने परशुराम का धनुष चुराया था
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Answer: लक्ष्मण बिना सोचे मौत बुलाने वाली बात कह रहे हैं
Why:

बोलत तोहि न सँभार।

Q21 संवाद में परशुराम, राम और लक्ष्मण की बोली का सही मेल कौन-सा है? intermediate
  • A परशुराम की नम्र, राम की चुटीली, लक्ष्मण की कड़ी
  • B परशुराम चुटीली, राम कड़ी, लक्ष्मण नम्र
  • C परशुराम कड़ी, राम नम्र, लक्ष्मण चुटीली
  • D तीनों की बोली एक जैसी नम्र
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Answer: परशुराम कड़ी, राम नम्र, लक्ष्मण चुटीली
Why:

स्वभाव और बोली।

Q22 रामु, लखनु और कोपु जैसे शब्द पाठ की किस भाषा-विशेषता को दिखाते हैं? intermediate
  • A अवधी में शब्दों के अंत में उ लगना
  • B ब्रजभाषा में शब्दों के अंत में ओ लगना
  • C खड़ी बोली में शब्दों के अंत में आ लगना
  • D संस्कृत में शब्दों के अंत में म् लगना
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Answer: अवधी में शब्दों के अंत में उ लगना
Why:

अवधी।

Q23 परशुराम का क्रोध अंततः किन कारणों से शांत होता है? intermediate
  • A लक्ष्मण के और तीखे व्यंग्य सुन-सुनकर थक जाने से
  • B जनक के धनुष दोबारा जुड़वा देने से
  • C सभा के राजाओं के युद्ध में हार जाने से
  • D राम के विनय, विश्वामित्र और शक्ति-परीक्षा से
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Answer: राम के विनय, विश्वामित्र और शक्ति-परीक्षा से
Why:

आगे की कथा।

Q24 अभिकथन: परशुराम का क्रोध शांत करने में लक्ष्मण के व्यंग्य से अधिक राम का विनय काम आता है। कारण: व्यंग्य सामने वाले के अहं को चोट पहुँचाकर क्रोध भड़काता है, जबकि विनय आदर देकर उसे ठंडा करता है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
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Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

विनय बनाम व्यंग्य।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. सुर मुनि नाग नगर नर नारी में अनुप्रास अलंकार है। II. राम ने धनुष तोड़ने की बात से साफ़ इनकार कर दिया। III. लक्ष्मण शिव-धनुष की तुलना बचपन की धनुहियों से करते हैं। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C I, II और III तीनों
  • D केवल I और III
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Answer: केवल I और III
Why:

राम ने ख़ुद को दास कहा।

Important short questions (7)

टूटा धनुष देखकर परशुराम ने जनक से क्या कहा?

परशुराम ने जनक को जड़ कहकर पूछा कि धनुष किसने तोड़ा। उन्होंने कहा कि तोड़ने वाले को जल्दी दिखाओ। नहीं तो जहाँ तक जनक का राज्य है, वहाँ तक की धरती उलट देंगे।

परशुराम की धमकी पर सभा के अलग-अलग लोगों की प्रतिक्रिया लिखिए।

जनक डर के कारण कोई उत्तर नहीं दे पाए। कुटिल राजा मन ही मन ख़ुश हुए। देवता, मुनि, नाग और नगर के लोग चिंता और डर में डूब गए। सीता की माता पछताने लगीं।

सीता की माता के पछतावे का कारण समझाइए।

राम ने धनुष तोड़कर स्वयंवर जीत लिया था। सीता का विवाह तय हो गया था। अब परशुराम के क्रोध से सब बिगड़ता दिख रहा था। इसलिए माँ को लगा कि विधाता ने बनी बात बिगाड़ दी।

अरध निमेष कलप सम बीता पंक्ति का भाव और अलंकार लिखिए।

परशुराम का स्वभाव सुनकर सीता चिंता में पड़ गईं। उनका आधा पल भी एक कल्प जितना लंबा बीता। यानी बेचैनी में समय रुका-सा लगा। बात को बहुत बढ़ाकर कहने से यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।

राम के उत्तर से उनके व्यक्तित्व के कौन-से गुण प्रकट होते हैं?

राम के उत्तर में विनय और धैर्य दिखता है। वे परशुराम को नाथ कहकर आदर देते हैं। वे ख़ुद को दास कहकर सच भी स्वीकार करते हैं। संकट में भी उनका मन न डरता है, न घमंड करता है।

लक्ष्मण के वचनों में व्यंग्य कैसे है? स्पष्ट कीजिए।

लक्ष्मण मुसकाकर कहते हैं कि बचपन में उन्होंने बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ीं। तब परशुराम ने कभी क्रोध नहीं किया। फिर इस धनुष पर इतनी ममता क्यों? शिव-धनुष को खिलौने के बराबर रखना ही व्यंग्य है।

पाठ की भाषा अवधी है। इसकी दो विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

पहली विशेषता यह है कि शब्दों के अंत में उ लगता है। जैसे रामु, लखनु और कोपु। दूसरी, इसमें लोक के शब्द हैं। जैसे कोही यानी क्रोधी और महतारी यानी माता।

Long answer questions (3)

राम और लक्ष्मण की प्रतिक्रियाओं की तुलना कीजिए। क्रोध शांत करने के लिए आप किसका रास्ता उचित मानते हैं और क्यों?

एक ही परिस्थिति में दोनों भाई अलग ढंग से बोलते हैं। राम बिना हर्ष-विषाद के नम्रता से कहते हैं कि तोड़ने वाला आपका दास होगा, आपकी क्या आज्ञा है। लक्ष्मण मुसकाकर व्यंग्य करते हैं कि बचपन में बहुत धनुहियाँ तोड़ीं, तब क्रोध क्यों नहीं हुआ। राम आदर देकर बात सँभालना चाहते हैं, जबकि लक्ष्मण अन्याय भरी धमकी का तर्क से उत्तर देते हैं। मेरे विचार में क्रोध शांत करने के लिए राम का विनय अधिक उचित है। ग़ुस्से में व्यक्ति तर्क नहीं सुनता, और व्यंग्य उसके अहं को और चोट पहुँचाता है। फिर भी लक्ष्मण का साहस यह सिखाता है कि अन्याय पर हमेशा चुप रहना ठीक नहीं।

परशुराम की चेतावनी का सभा में उपस्थित लोगों पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? पाठ के आधार पर लिखिए।

परशुराम ने कहा कि धनुष तोड़ने वाला सभा से अलग हो जाए, नहीं तो सारे राजा मारे जाएँगे। इस चेतावनी से पूरी सभा में खलबली मच गई होगी। जो कुटिल राजा अभी तक राम पर संकट देखकर ख़ुश थे, उन्हें अब अपनी जान की चिंता होने लगी होगी। निर्दोष राजा सोच रहे होंगे कि दूसरे की गलती की सज़ा उन्हें क्यों मिले। जनक और सुनयना की चिंता और बढ़ गई होगी, क्योंकि अब उनकी पूरी सभा ख़तरे में थी। इस तरह एक चेतावनी ने सबको एक ही डर में बाँध दिया।

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद के काव्य-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।

यह अंश रामचरितमानस के बालकांड से है और अवधी भाषा में है। भाषा में रामु, लखनु और कोपु जैसे उकारांत शब्द तथा कोही, महतारी जैसे लोक-शब्द हैं। छंद चौपाई और दोहा हैं; चौपाइयाँ कथा आगे बढ़ाती हैं और दोहे बड़े मोड़ पर आते हैं। पूरा अंश संवाद-शैली में है, जिससे इसमें नाटकीयता आ गई है। हर पात्र की बोली उसके स्वभाव जैसी है: परशुराम की कड़ी, राम की नम्र और लक्ष्मण की चुटीली। अलंकारों में पद सरोज में रूपक, सुर मुनि नाग नगर नर नारी में अनुप्रास और आधे पल को कल्प कहने में अतिशयोक्ति है।

Flashcards (17)

चापखंड का अर्थ?
धनुष के टुकड़े।
परशुराम जनक को किस शब्द से पुकारते हैं?
जड़, यानी मूर्ख।
परशुराम क्या उलट देने की धमकी देते हैं?
जनक के राज्य तक की धरती।
जनक उत्तर क्यों नहीं देते?
बहुत अधिक डर के कारण।
कुटिल राजा मन में क्यों ख़ुश हुए?
राम पर संकट आता देखकर।
सीय महतारी कौन?
सीता की माता सुनयना।
निमेष का अर्थ?
पलक झपकने जितना समय।
अरध निमेष कलप सम बीता में अलंकार?
अतिशयोक्ति।
बोलते समय राम के हृदय में क्या नहीं था?
न हर्ष, न विषाद।
राम धनुष तोड़ने वाले को क्या बताते हैं?
परशुराम का ही कोई दास।
परशुराम के अनुसार सेवक कौन है?
जो सेवा का काम करे।
परशुराम तोड़ने वाले को किसके समान शत्रु कहते हैं?
सहस्रबाहु के।
लक्ष्मण बचपन में क्या तोड़ने की बात कहते हैं?
बहुत-सी धनुहियाँ।
त्रिपुरारि किसे कहते हैं?
शिव को।
भृगुकुलकेतु का अर्थ?
भृगुवंश का ध्वज, यानी परशुराम।
सुर मुनि नाग नगर नर नारी में कौन-सा वर्ण दोहराया गया?
न।
मराठी में धनुष को क्या कहते हैं?
धनुष्य।

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  • परशुराम के नाम और अर्थ
  • राम या लक्ष्मण
  • सही या भ्रम
  • धमकी से व्यंग्य तक
  • झटपट उत्तर

Class 9 Hindi Chapter 9 — frequently asked questions

तुलसीदास की भाषा के बारे में दो बातें लिखिए।

तुलसीदास का अवधी और ब्रज, दोनों पर समान अधिकार था। रामचरितमानस अवधी में है। विनयपत्रिका और कवितावली ब्रजभाषा में हैं। वे संस्कृत के भी बड़े विद्वान थे।

रामचरितमानस की छंद-योजना संक्षेप में समझाइए।

मानस में मुख्य रूप से चौपाई और दोहा छंद हैं। चौपाई के चार चरण होते हैं। हर चरण में सोलह मात्राएँ होती हैं। कुछ चौपाइयों के बाद एक दोहा कथा को समेटता है।

परशुराम धनुष टूटने पर जनक की सभा में क्यों आए?

सभा में शिव का धनुष टूट गया था। शिव परशुराम के गुरु और आराध्य थे। धनुष टूटने की ख़बर से वे बहुत क्रोधित हुए। इसलिए वे तुरंत जनक की सभा में आ पहुँचे।

टूटा धनुष देखकर परशुराम ने जनक से क्या कहा?

परशुराम ने जनक को जड़ कहकर पूछा कि धनुष किसने तोड़ा। उन्होंने कहा कि तोड़ने वाले को जल्दी दिखाओ। नहीं तो जहाँ तक जनक का राज्य है, वहाँ तक की धरती उलट देंगे।

परशुराम की धमकी पर सभा के अलग-अलग लोगों की प्रतिक्रिया लिखिए।

जनक डर के कारण कोई उत्तर नहीं दे पाए। कुटिल राजा मन ही मन ख़ुश हुए। देवता, मुनि, नाग और नगर के लोग चिंता और डर में डूब गए। सीता की माता पछताने लगीं।

सीता की माता के पछतावे का कारण समझाइए।

राम ने धनुष तोड़कर स्वयंवर जीत लिया था। सीता का विवाह तय हो गया था। अब परशुराम के क्रोध से सब बिगड़ता दिख रहा था। इसलिए माँ को लगा कि विधाता ने बनी बात बिगाड़ दी।

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