Class 9 Hindi Chapter 5: आखिरी चट्टान तक

आखिरी चट्टान तक is Chapter 5 of NCERT / CBSE Class 9 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
  • 2 topics
  • 50 MCQs
  • 14 short answers
  • 6 long answers
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  • Hindi

आखिरी चट्टान, टीलों की चढ़ाई और सूर्यास्त

मोहन राकेश कन्याकुमारी में समुद्र के बीच की चट्टानों पर खड़े होकर तीन सागरों का संगम देखते हैं, फिर एक के बाद एक रेत के टीले पार करके पश्चिम के खुले क्षितिज पर डूबते सूरज के बदलते रंग निहारते हैं।

What you will be able to do

  • यात्रा-वृत्तांत विधा की पहचान और उसके मुख्य तत्व बता सकूँगा।
  • मोहन राकेश का साहित्यिक परिचय दे सकूँगा।
  • कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति और तीन सागरों के संगम का वर्णन कर सकूँगा।
  • शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति जैसे कथनों का भाव समझा सकूँगा।
  • सूर्यास्त के बदलते रंगों के चित्रण में लेखक की भाषा-शैली की विशेषताएँ बता सकूँगा।

Key points

  • आखिरी चट्टान तक मोहन राकेश का यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें वे कन्याकुमारी की यात्रा के अनुभव लिखते हैं।

  • मोहन राकेश (1925, अमृतसर) नाटककार, कहानीकार और उपन्यासकार थे; आषाढ़ का एक दिन उनका प्रसिद्ध नाटक है।

  • कन्याकुमारी में बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर का मिलन होता है; यहीं विवेकानंद चट्टान है।

  • चट्टान पर खड़े लेखक को समुद्र की अपार शक्ति और फैलाव एक साथ महसूस होता है।

  • दृश्य में खोकर लेखक कुछ पल अपना अस्तित्व भूल जाते हैं और ख़ुद को एक छोटी चट्टान जैसा पाते हैं।

  • बढ़ते पानी से घिरी चट्टान देखकर वे सिहर उठते हैं और कूदते-फाँदते किनारे लौटते हैं।

  • सैंड हिल पर भीड़ थी, पर पूरा पश्चिमी क्षितिज देखने के लिए लेखक आगे के ऊँचे टीलों की ओर बढ़ते जाते हैं।

  • अंत में खुले क्षितिज वाला टीला मिलने पर उन्हें किसी ऊँची चोटी को पहली बार जीतने जैसा संतोष होता है।

  • डूबते सूरज के साथ पानी का रंग सुनहरे से लाल, फिर बैंगनी और अंत में काला हो जाता है।

Full explanation

यात्रा-वृत्तांत: यात्रा को शब्दों में जीना

जब कोई लेखक किसी जगह घूमने जाता है और लौटकर वहाँ के दृश्य, लोग, घटनाएँ और अपने मन के भाव लिखता है, तो वह रचना यात्रा-वृत्तांत कहलाती है। यात्रा-वृत्तांत में केवल जानकारी नहीं होती कि कोई जगह कहाँ है या वहाँ क्या-क्या देखने लायक़ है। उसमें लेखक की आँखें और उसका मन दोनों बोलते हैं। पढ़ने वाला ख़ुद को लेखक का हमसफ़र मानकर उसी रास्ते पर चलने लगता है, वही हवा महसूस कर रहा है और वही रंग देख रहा है।

आखिरी चट्टान तक ऐसा ही एक रोचक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें मोहन राकेश दक्षिण भारत के छोर पर बसे कन्याकुमारी की यात्रा का अनुभव सुनाते हैं। पाठ में चार बड़ी बातें साथ-साथ चलती हैं। पहली, प्रकृति का सजीव चित्रण, जैसे समुद्र, चट्टानें, लहरें, रेत और आकाश। दूसरी, लेखक की अपनी भावनाएँ, जैसे विस्मय, रोमांच, डर, शांति और उदासी। तीसरी, वहाँ के लोगों और समाज की झलक, जैसे पर्यटक, मल्लाह, बेरोज़गार युवक और मंदिर के भक्त। चौथी, जीवन के बारे में कुछ गहरे विचार, जैसे मनुष्य का छोटा होना और प्रकृति का विराट होना। इसलिए यह पाठ भूगोल की किताब जैसा नहीं, बल्कि एक जीवित अनुभव जैसा लगता है।

मोहन राकेश: बहुमुखी रचनाकार

मोहन राकेश सन् 1925 में पंजाब के अमृतसर में जन्मे। वे हिंदी के उन लेखकों में गिने जाते हैं जिन्होंने कई विधाओं में एक साथ ऊँचा काम किया। उन्होंने कहानियाँ, उपन्यास, नाटक, डायरी और यात्रा-वृत्तांत सब लिखे। आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे उनके चर्चित नाटक हैं। अँधेरे बंद कमरे, अंतराल और न आने वाला कल उनके उपन्यास हैं। उनकी कहानियों के कई संग्रह आए, और उनकी डायरी भी पुस्तक के रूप में छपी।

संगीत नाटक अकादमी ने उनके नाटक आषाढ़ का एक दिन को पुरस्कृत किया। कुछ समय तक उन्होंने सारिका नाम की कथा-पत्रिका का संपादन भी किया। उनके लेखन की ख़ास पहचान है आधुनिक जीवन की उलझनों को पकड़ना और मनुष्य के मन की बारीक हलचलों को शब्द देना। हिंदी में नई कहानी नाम के आंदोलन के प्रमुख लेखकों में भी उनका नाम आता है। सन् 1972 में बहुत कम उम्र में उनका निधन हो गया, फिर भी उनकी रचनाएँ आज तक पढ़ी और मंच पर खेली जाती हैं। आखिरी चट्टान तक पढ़ते हुए भी यही गहराई दिखती है, क्योंकि लेखक बाहर का दृश्य दिखाते-दिखाते अपने भीतर की यात्रा भी करवा देते हैं।

कन्याकुमारी: तीन सागरों का मिलन

कन्याकुमारी तमिलनाडु राज्य में भारत की मुख्य भूमि के सबसे दक्षिणी सिरे पर बसा तटीय नगर है। इसके पश्चिम में अरब सागर, दक्षिण में हिंद महासागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। तीनों का पानी यहाँ आकर मिलता-सा दिखता है, इसलिए इसे संगम-स्थल कहा जाता है। लेखक इसे सुनहले सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि कहकर पाठ आरंभ करते हैं, क्योंकि यहाँ समुद्र से ही सूरज उगता और समुद्र में ही डूबता दिखाई देता है।

पाठ की शुरुआत में लेखक केप होटल के सामने बने स्नान-कुंड के पास समुद्र से उभरी एक काली चट्टान पर खड़े हैं। उनकी नज़र भारत की धरती की उस अंतिम चट्टान पर टिकी है, जिस पर कभी स्वामी विवेकानंद ने ध्यान लगाया था। पीछे कन्याकुमारी के मंदिर की लाल और सफ़ेद धारियाँ चमक रही हैं। वह चट्टान चारों ओर से पानी की चोट सहती है, फिर भी शांत खड़ी है। लेखक को वह ख़ुद भी ध्यान में डूबी, यानी समाधिस्थ, लगती है। यहाँ एक निर्जीव चट्टान को ध्यान करते साधु जैसा दिखाना मानवीकरण का सुंदर उदाहरण है। यही चट्टान आगे चलकर पाठ के शीर्षक का आधार बनती है।

शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति

लेखक के आस-पास हिंद महासागर की ऊँची लहरें काली चट्टानों से टकरा रही हैं। मुड़ती-घूमती लहरें राह की नुकीली शिलाओं से टूटकर आगे बढ़तीं और उनके ऊपर बारीक बूँदों की जाली-सी बन जाती। इस दृश्य को लेखक केवल आँखों से नहीं, अपनी पूरी चेतना से महसूस करते हैं। उनके मुँह से निकलता है: शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति। इस छोटे-से वाक्य में बड़ा अर्थ छिपा है। समुद्र जितना फैला है, उतनी ही उसकी ताक़त है, और उसकी ताक़त जितनी है, उतना ही उसका फैलाव। दोनों एक-दूसरे को बढ़ाते हैं।

तीनों ओर क्षितिज तक पानी ही पानी था, पर सामने का हिंद महासागर वाला क्षितिज बाक़ी दोनों से ज़्यादा दूर और गहरा लगता था, जैसे उस तरफ़ कोई दूसरा किनारा हो ही नहीं। ऐसे विराट दृश्य के सामने लेखक कुछ देर के लिए भूल जाते हैं कि वे एक अलग व्यक्ति हैं, दूर से आए यात्री या दर्शक। वे ख़ुद को दृश्य का ही एक हिस्सा मानने लगते हैं, जैसे विशाल शिलाओं के बीच कोई नन्ही शिला। इसे आत्म-विस्मृति या विस्मय की अवस्था कह सकते हैं। प्रकृति की विशालता के सामने मनुष्य को अपनी लघुता का एहसास होता है, और यही एहसास उसे विनम्र भी बनाता है।

होश लौटा, तो पानी चढ़ आया था

जब लेखक का ध्यान टूटा, तो उन्होंने देखा कि बढ़ते पानी ने उनकी चट्टान को काफ़ी हद तक घेर लिया है। उनका पूरा शरीर सिहर उठा। यह सिहरन डर की थी, पर उसमें एक रोमांच भी था। उन्होंने सामने उमड़ते समुद्र पर एक और नज़र डाली और फिर पास की एक सुरक्षित चट्टान पर कूद गए। इसी तरह एक चट्टान से दूसरी पर होते हुए वे किनारे तक पहुँच गए।

इस छोटे-से प्रसंग से पता चलता है कि प्रकृति सुंदर होने के साथ ख़तरनाक भी हो सकती है। समुद्र में ज्वार के समय पानी तेज़ी से बढ़ता है, और जो चट्टान कुछ देर पहले किनारे से जुड़ी लगती है, वह जल्दी ही टापू बन जाती है। लेखक का अनुभव हमें सिखाता है कि किसी सुंदर दृश्य में खो जाना अच्छा है, पर आस-पास की स्थिति पर नज़र रखना भी उतना ही ज़रूरी है। यात्रा में आनंद और सावधानी दोनों साथ चलें, तभी यात्रा सुखद रहती है।

सैंड हिल की रंगीन भीड़ और टीलों की दौड़

पश्चिम में सूरज धीरे-धीरे नीचे जा रहा था, इसलिए लेखक सूर्यास्त की दिशा में चल पड़े। किनारे के घुमाव पर दूर एक ऊँचा पीला टीला नज़र आ रहा था, जिसे सब सैंड हिल कहते थे। पर्यटकों की कई टोलियाँ उसी ओर जा रही थीं। वहाँ रंग-बिरंगे रेशमी कपड़ों में सजी युवतियाँ, कुछ युवक और गांधी टोपी वाले कुछ सज्जन थे। सरकारी अतिथि-गृह के बैरे उन्हें कॉफ़ी पिला रहे थे। हवा उनके रेशम में भी समुद्र जैसी लहरें पैदा कर रही थी। लेखक इस पूरे दृश्य को एक कैनवस की तरह देखते हैं, जिसमें बैठी युवतियाँ रंगीन बिंदु हैं और वे ख़ुद एक रंगहीन बिंदु।

पर लेखक वहाँ अधिक देर नहीं रुके। सैंड हिल से सामने तो सब दिखता था, पर अरब सागर की ओर का हिस्सा एक और ऊँचे टीले की ओट में छिपा था। वे पूरे क्षितिज की पृष्ठभूमि में सूर्यास्त देखना चाहते थे, इसलिए आगे बढ़ गए। पर हर टीले के आगे एक और ऊँचा टीला मिल जाता। उनकी टाँगें थक रही थीं, पर मन हार मानने को तैयार नहीं था। हर बार लगता कि बस एक टीला और, फिर खुला क्षितिज दिखेगा। यही लगन, धैर्य और खोज की भूख इस प्रसंग का सबसे बड़ा संदेश है। भीड़ जहाँ रुक गई, वहाँ से आगे जाने का साहस ही उन्हें सबसे सुंदर दृश्य तक ले गया।

चोटी सर करने जैसा संतोष

आख़िर एक टीले पर पहुँचकर पश्चिमी क्षितिज का खुला फैलाव सामने आ गया। वहाँ से रेत की एक लंबी ढलान समुद्र तक जाती थी, मानो टीले से पानी में उतरने का रास्ता बना हो। सूरज तब पानी से थोड़ा ही ऊपर था। लेखक अपनी मेहनत को सफल पाकर संतोष से टीले पर बैठ गए। उन्हें लगा जैसे यह टीला दुनिया की सबसे ऊँची चोटी है और उसे पहली बार उन्होंने, केवल उन्होंने, जीता है। सर करना मुहावरे का अर्थ है जीत लेना या फ़तह करना। यहाँ यह भाव बताता है कि मेहनत से पाया छोटा लक्ष्य भी बहुत बड़ा लगता है।

पीछे दाईं ओर नारियल के पेड़ों के झुरमुट थे, जिनकी टहनियाँ तेज़ हवा में ऊपर उठी हुई थीं। पश्चिमी तट के साथ सूखी पहाड़ियों की एक कतार दूर तक चली गई थी, जो रेत के कारण रूखी, बीहड़ और वीरान लगती थी। सुनहली किरणों ने पीली रेत को ऐसा नया रंग दिया था, जैसे उसे अभी बनाकर वहाँ बिछाया गया हो। लेखक ने रेत पर अपने पैरों के लंबे निशान देखे। उन्हें लगा जैसे वह रेत पहली बार किसी के क़दमों से टूटी हो। इस विचार से मन में सिहरन भी हुई और हल्की उदासी भी। यह उदासी शायद इस बात की थी कि सुंदर क्षण भी हमेशा नहीं टिकते।

सोने से स्याही तक: सूर्यास्त के रंग

जैसे ही सूरज का गोला पानी की सतह से छुआ, दूर तक पानी पर सोना-सा पिघलकर फैल गया। पर रंग इतनी तेज़ी से बदल रहे थे कि किसी एक पल को कोई एक नाम देना असंभव था। लेखक को लगा कि सूरज मजबूर होकर पानी के लावे में डूबता जा रहा है। जब वह पूरा डूब गया, तो जहाँ अभी सोना बह रहा था, वहाँ लहू-सा लाल रंग दिखने लगा। कुछ ही देर में वह लाल रंग बैंगनी हुआ और फिर काला पड़ गया। पूरा दृश्य स्याही में डूब गया।

इस वर्णन में लेखक की चित्रात्मक भाषा अपने सबसे सुंदर रूप में है। सोना, लावा, लहू और स्याही जैसे शब्द आँखों के सामने रंगों का पूरा क्रम खड़ा कर देते हैं। नारियल के काले पड़ चुके झुरमुट ऐसे लगते हैं, जैसे सिर धुन रहे हों और हाथ-पैर पटक रहे हों। सिर धुनना मुहावरा पछतावे या शोक में सिर पीटने के लिए आता है। यहाँ यह अँधेरा उतरने पर प्रकृति के बेचैन रूप को दिखाता है। लेखक भी उठकर खड़े हो जाते हैं और मुट्ठियाँ भींचते-खोलते कभी पेड़ों और कभी समुद्र को देखते हैं। यह बेचैनी बताती है कि सौंदर्य के बाद आने वाला अँधेरा मन में भी उतर आया है, और आगे लौटने की चिंता शुरू होने वाली है।

Concepts and terms

यात्रा-वृत्तांत

किसी यात्रा में देखे स्थान, लोग और मन में उठे भावों का लेखक द्वारा किया गया सजीव वर्णन। इसमें दृश्य-चित्रण और आत्मानुभूति साथ चलते हैं।

त्रिवेणी संगम

तीन जलधाराओं का मिलन। कन्याकुमारी में पश्चिमी सागर, दक्षिणी महासागर और पूर्वी खाड़ी का मिलन-स्थल इसी नाम से पुकारा जाता है।

क्षितिज

वह रेखा जहाँ दूर देखने पर धरती या समुद्र आकाश से मिलता दिखता है। इसे दृष्टि की सीमा भी कहते हैं।

आत्म-विस्मृति

किसी दृश्य या काम में इतना डूब जाना कि अपने होने का ध्यान ही न रहे। चट्टान पर खड़े लेखक के साथ यही हुआ।

चित्रात्मक भाषा

ऐसी भाषा जो पढ़ते समय आँखों के सामने दृश्य का चित्र बना दे। रंग, आकार और गति के शब्द इसमें सहायक होते हैं।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

सूर्यास्त की रंग-डायरी

Safety:

सूरज की ओर सीधे देर तक न देखें; आँखों को नुक़सान हो सकता है। अँधेरा होने से पहले घर लौट आएँ।

What You Notice:

रंग बहुत तेज़ी से बदलते हैं; उन्हें नाम देने की कोशिश से ही चित्रात्मक भाषा बनती है।

Did you know

विवेकानंद चट्टान पर बना स्मारक सन् 1970 में पूरा हुआ। माना जाता है कि सन् 1892 के अंत में स्वामी विवेकानंद ने यहाँ तीन दिन ध्यान किया था।

कन्याकुमारी भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणी सिरा है। पूरे देश का सबसे दक्षिणी बिंदु इंदिरा पॉइंट है, जो ग्रेट निकोबार द्वीप पर है।

कन्याकुमारी उन गिनी-चुनी जगहों में है, जहाँ एक ही तट से समुद्र में सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों देखे जा सकते हैं।

Memory tricks

तीन सागर: अ–हि–बं — अरब सागर पश्चिम में, हिंद महासागर दक्षिण में, बंगाल की खाड़ी पूर्व में।

सूर्यास्त के रंग: सो–ल–बैं–का — सोना, फिर लहू जैसा लाल, फिर बैंगनी, और अंत में काला।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 आखिरी चट्टान तक पाठ को किस विधा में रखा जाता है? beginner
  • A आत्मकथा-अंश
  • B एकांकी नाटक
  • C यात्रा-वृत्तांत
  • D रेखाचित्र-लेख
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Answer: यात्रा-वृत्तांत
Why:

यात्रा के अनुभव।

Q2 यात्रा-वृत्तांत को केवल किसी जगह की सूचना से अलग क्या बनाता है? intermediate
  • A उसमें केवल रेल और बस का समय लिखा होता है
  • B उसमें दृश्य के साथ लेखक के मन के भाव भी जुड़े होते हैं
  • C उसमें हर पंक्ति छंद और तुक में बँधी होती है
  • D उसमें केवल नक़्शे और आँकड़े दिए जाते हैं, कोई भाव नहीं
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Answer: उसमें दृश्य के साथ लेखक के मन के भाव भी जुड़े होते हैं
Why:

आत्मानुभूति।

Q3 इनमें से कौन-सी रचना मोहन राकेश का नाटक है? intermediate
  • A लहरों के राजहंस
  • B अँधेरे बंद कमरे
  • C न आने वाला कल
  • D कोसी का घटवार
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Answer: लहरों के राजहंस
Why:

अँधेरे बंद कमरे उपन्यास है।

Q4 मोहन राकेश को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार किस रचना पर मिला? intermediate
  • A आधे-अधूरे
  • B अंतराल
  • C लहरों के राजहंस
  • D आषाढ़ का एक दिन
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Answer: आषाढ़ का एक दिन
Why:

प्रसिद्ध नाटक।

Q5 लेखक कन्याकुमारी को सुनहले सूर्योदय और सूर्यास्त की भूमि क्यों कहते होंगे? intermediate
  • A वहाँ सूरज समुद्र से उगता और समुद्र में ही डूबता दिखता है
  • B वहाँ की रेत असली सोने के छोटे कणों से बनी हुई है
  • C वहाँ पूरे साल केवल सुबह और शाम ही रहती है, दोपहर कभी नहीं
  • D वहाँ के मंदिर की सारी दीवारें सोने से रँगी हुई हैं
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Answer: वहाँ सूरज समुद्र से उगता और समुद्र में ही डूबता दिखता है
Why:

तीन ओर समुद्र।

Q6 कन्याकुमारी के पूर्व में कौन-सा जल-क्षेत्र है? beginner
  • A अरब सागर
  • B दक्षिणी हिंद महासागर
  • C लाल सागर तट
  • D बंगाल की खाड़ी
Show answer
Answer: बंगाल की खाड़ी
Why:

अ–हि–बं: पश्चिम, दक्षिण, पूर्व।

Q7 लेखक को विवेकानंद वाली चट्टान ख़ुद समाधिस्थ-सी क्यों लगी? intermediate
  • A उस पर उस समय कई साधु बैठकर गहरा ध्यान लगा रहे थे
  • B वह चारों ओर से पानी की मार सहकर भी शांत और स्थिर खड़ी थी
  • C वह हर दिन समुद्र में डूबकर फिर से ऊपर निकल आती थी
  • D उस पर एक बड़ा मंदिर बना था, जहाँ दिन भर घंटियाँ बजती थीं
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Answer: वह चारों ओर से पानी की मार सहकर भी शांत और स्थिर खड़ी थी
Why:

स्थिरता और धैर्य।

Q8 चट्टान को ध्यानमग्न साधु जैसा दिखाने में कौन-सा भाषा-प्रयोग है? advanced
  • A अनुप्रास
  • B यमक-प्रयोग
  • C मानवीकरण
  • D पुनरुक्ति
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Answer: मानवीकरण
Why:

निर्जीव में मानवीय गुण।

Q9 शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति कथन मुख्य रूप से किसकी ओर संकेत करता है? intermediate
  • A लेखक के शरीर की थकान और कमज़ोरी की
  • B सागर की अपार व्यापकता और उसकी ताक़त की
  • C सैंड हिल पर जुटी भारी भीड़ के शोर की
  • D मंदिर की ऊँची दीवारों पर बनी रंगीन धारियों की
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Answer: सागर की अपार व्यापकता और उसकी ताक़त की
Why:

फैलाव और बल साथ-साथ।

Q10 लहरें नुकीली चट्टानों से कटकर आतीं, तो उनके ऊपर क्या बन जाता था? beginner
  • A सफ़ेद रेत का टीला
  • B हरे शैवाल की परत
  • C बारीक बूँदों की जाली
  • D मोटी बर्फ़ की तह
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Answer: बारीक बूँदों की जाली
Why:

चूरा बूँदें।

Q11 तीनों ओर के क्षितिजों में से कौन-सा लेखक को सबसे दूर और गहरा लगा? intermediate
  • A हिंद महासागर वाला
  • B अरब सागर वाला
  • C बंगाल की खाड़ी वाला
  • D पहाड़ियों वाला
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Answer: हिंद महासागर वाला
Why:

सामने का क्षितिज।

Q12 दृश्य में खोकर लेखक ख़ुद को किस रूप में महसूस करने लगे? intermediate
  • A समुद्र पर उड़ता हुआ एक बड़ा पक्षी
  • B मंदिर में बजती हुई एक बड़ी घंटी
  • C किनारे पर खड़ा एक ऊँचा नारियल
  • D बड़ी चट्टानों के बीच एक छोटी चट्टान
Show answer
Answer: बड़ी चट्टानों के बीच एक छोटी चट्टान
Why:

दृश्य का हिस्सा।

Q13 मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं एक अलग यात्री हूँ। लेखक की यह अवस्था किस भाव से उपजी? intermediate
  • A विराट दृश्य से उपजा विस्मय
  • B भूख और प्यास की बेचैनी
  • C अकेलेपन का गहरा डर
  • D भीड़ पर उपजा ग़ुस्सा भी
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Answer: विराट दृश्य से उपजा विस्मय
Why:

आत्म-विस्मृति।

Q14 होश में आने पर लेखक का शरीर क्यों सिहर गया? beginner
  • A ठंडी हवा से उन्हें तेज़ बुख़ार हो गया था
  • B किसी ने पीछे से उन्हें ज़ोर से पुकारा था
  • C उनका कैमरा अचानक पानी में गिर गया था
  • D उनकी चट्टान बढ़ते पानी से घिर चुकी थी
Show answer
Answer: उनकी चट्टान बढ़ते पानी से घिर चुकी थी
Why:

ज्वार का पानी।

Q15 घिरती चट्टान वाले प्रसंग से यात्री के लिए सबसे उचित सीख क्या है? intermediate
  • A समुद्र के किनारे कभी भी, किसी भी हाल में नहीं जाना चाहिए
  • B सुंदर दृश्य में खोते हुए भी आस-पास की स्थिति पर ध्यान रखना
  • C हमेशा भीड़ के साथ रहना और अकेले कुछ भी न देखना
  • D दृश्य देखने के बजाय केवल फ़ोटो खींचकर तुरंत लौट आना
Show answer
Answer: सुंदर दृश्य में खोते हुए भी आस-पास की स्थिति पर ध्यान रखना
Why:

आनंद और सावधानी।

Q16 लेखक ने पहले सूर्यास्त देखने के लिए किस टीले की ओर जाने का सोचा? beginner
  • A काली चट्टानों के ढेर की ओर
  • B नारियल के घने बाग़ की ओर
  • C पीली रेत के ऊँचे टीले की ओर
  • D मंदिर के ऊँचे शिखर की ओर
Show answer
Answer: पीली रेत के ऊँचे टीले की ओर
Why:

तट-रेखा के मोड़ पर।

Q17 सैंड हिल पर पर्यटकों को सूर्यास्त के समय कौन कॉफ़ी पिला रहे थे? intermediate
  • A अतिथि-गृह के बैरे
  • B स्थानीय मछुआरे
  • C मंदिर के पुजारी
  • D होटल के मालिक
Show answer
Answer: अतिथि-गृह के बैरे
Why:

गवर्नमेंट गेस्ट हाउस।

Q18 भीड़ से कुछ दूर बैठे लेखक ख़ुद को रंगहीन बिंदु क्यों कहते हैं? intermediate
  • A उनके कपड़े समुद्र के पानी से पूरी तरह भीगकर फीके हो गए थे
  • B वे चित्रकार थे और वहाँ बैठकर चित्र बना रहे थे
  • C वे बीमार होने के कारण बहुत पीले दिख रहे थे
  • D रंगीन रेशम पहने भीड़ के बीच वे सादे और अकेले थे
Show answer
Answer: रंगीन रेशम पहने भीड़ के बीच वे सादे और अकेले थे
Why:

दृश्य एक कैनवस।

Q19 लेखक सैंड हिल पर अधिक देर क्यों नहीं रुके? beginner
  • A वहाँ की भीड़ ने उन्हें तुरंत वहाँ से जाने को कहा था
  • B वहाँ कॉफ़ी नहीं मिली, इसलिए वे नाराज़ होकर चले गए
  • C अरब सागर की ओर का क्षितिज एक और टीले की ओट में था
  • D उन्हें होटल में किसी ज़रूरी काम से तुरंत लौटना था
Show answer
Answer: अरब सागर की ओर का क्षितिज एक और टीले की ओट में था
Why:

पूरा विस्तार देखना था।

Q20 शरीर थका, पर मन ने हार नहीं मानी। टीलों वाला यह प्रसंग लेखक के किस गुण को दिखाता है? beginner
  • A आलस और हर काम को टालने की आदत
  • B लगन और हार न मानने की प्रवृत्ति
  • C डर और जल्दी से लौटने की चाह
  • D घमंड और दूसरों से कड़ी होड़
Show answer
Answer: लगन और हार न मानने की प्रवृत्ति
Why:

एक टीला और।

Q21 अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होने का अर्थ इस प्रसंग में क्या है? intermediate
  • A भीड़ से बचकर अकेले बैठकर कॉफ़ी पीने का मौक़ा पा लेना
  • B बिना चले किसी गाड़ी से ऊँचे टीले तक पहुँच जाना
  • C सूरज डूबने से पहले ही होटल लौटकर आराम करना
  • D मेहनत से खुले क्षितिज वाला टीला पाकर मन भर जाना
Show answer
Answer: मेहनत से खुले क्षितिज वाला टीला पाकर मन भर जाना
Why:

लक्ष्य मिला।

Q22 टीले पर बैठे लेखक ने ऐसा महसूस किया, मानो उन्होंने कोई ऊँची चोटी पहली बार ______ हो। beginner
  • A सर की
  • B पार की
  • C खो दी
  • D छू ली
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Answer: सर की
Why:

मुहावरा: जीत लेना।

Q23 अभिकथन: लेखक ने सूर्यास्त सैंड हिल की भीड़ के बीच बैठकर नहीं देखा। कारण: वे बिना रुकावट वाले पूरे पश्चिमी क्षितिज की पृष्ठभूमि में सूर्यास्त देखना चाहते थे। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

ओट वाला टीला।

Q24 सूरज के डूब जाने पर पानी पर लहू जैसा रंग दिखने के बाद अगला रंग कौन-सा था? intermediate
  • A सुनहरा
  • B बैंगनी
  • C हल्का हरा
  • D आसमानी
Show answer
Answer: बैंगनी
Why:

फिर काला।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. कन्याकुमारी तमिलनाडु में है। II. लेखक ने सूर्यास्त सैंड हिल की भीड़ में बैठकर देखा। III. काले पड़े नारियल-झुरमुट सिर धुनते-से लगे। इनमें से कौन-से कथन पाठ से मेल खाते हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C I, II और III तीनों
  • D केवल I और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

वे आगे के टीले पर गए।

Important short questions (7)

यात्रा-वृत्तांत किसे कहते हैं? इस पाठ के आधार पर उसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

किसी यात्रा में देखे स्थान, लोग और मन के भावों के सजीव वर्णन को यात्रा-वृत्तांत कहते हैं। इस पाठ की पहली विशेषता प्रकृति का चित्रात्मक वर्णन है, जैसे लहरें, टीले और सूर्यास्त के रंग। दूसरी विशेषता आत्मानुभूति है, जैसे विस्मय, डर और संतोष।

मोहन राकेश का साहित्यिक परिचय संक्षेप में दीजिए।

मोहन राकेश का जन्म सन् 1925 में अमृतसर में हुआ। उन्होंने नाटक, उपन्यास, कहानी, डायरी और यात्रा-वृत्तांत लिखे। आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे उनके प्रसिद्ध नाटक हैं। उन्होंने सारिका पत्रिका का संपादन भी किया।

कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति के बारे में पाठ से क्या पता चलता है?

कन्याकुमारी भारत की मुख्य भूमि के दक्षिणी छोर पर है। इसके पश्चिम में अरब सागर, दक्षिण में हिंद महासागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। तीनों यहाँ मिलते दिखते हैं, इसलिए सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समुद्र पर दिखते हैं।

शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति से लेखक क्या कहना चाहते हैं?

लेखक कहते हैं कि समुद्र जितना फैला है, उतनी ही उसकी ताक़त है। उसकी ताक़त ही उसे इतना विशाल बनाती है। ऊँची लहरें, अनंत क्षितिज और चट्टानों से टकराता पानी, सब इस भाव को जगाते हैं। इस विराटता के सामने मनुष्य को अपनी लघुता का बोध होता है।

चट्टान पर खड़े लेखक कुछ देर अपने को क्यों भूल गए?

तीनों ओर क्षितिज तक फैला समुद्र और ऊँची लहरें देखकर वे विस्मय में डूब गए। उन्हें लगा कि वे अलग व्यक्ति या दर्शक नहीं, बल्कि उसी दृश्य का एक हिस्सा हैं। वे ख़ुद को बड़ी चट्टानों के बीच एक छोटी चट्टान जैसा मानने लगे।

लेखक ने सैंड हिल पर रुकने के बजाय आगे के टीलों की ओर बढ़ना क्यों चुना?

सैंड हिल से सामने का दृश्य तो दिखता था, पर अरब सागर की ओर का हिस्सा एक ऊँचे टीले के पीछे छिपा था। लेखक पूरे खुले क्षितिज की पृष्ठभूमि में सूर्यास्त देखना चाहते थे। इसलिए वे थकान के बावजूद एक के बाद एक टीले पार करते गए।

सूर्यास्त के समय पानी के बदलते रंगों का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

सूरज के पानी को छूते ही दूर तक सोना-सा फैल गया। रंग इतनी तेज़ी से बदल रहे थे कि उन्हें नाम देना कठिन था। सूरज डूबने पर पानी लहू जैसा लाल हुआ। फिर वह बैंगनी बना और अंत में काला पड़ गया।

Long answer questions (3)

पाठ के दो प्रसंगों से सिद्ध कीजिए कि लेखक मन के पक्के थे और आसानी से हार नहीं मानते थे।

सूर्यास्त देखने की चाह में लेखक पहले सैंड हिल पहुँचे, जहाँ अधिकतर पर्यटक रुक गए थे। उन्होंने देखा कि अरब सागर की ओर का क्षितिज एक ऊँचे टीले की ओट में है, इसलिए वे आगे बढ़े। हर टीले के बाद एक और ऊँचा टीला मिलता रहा। उनकी टाँगें थक रही थीं, फिर भी मन हार मानने को तैयार नहीं था। हर बार वे सोचते कि बस एक टीला और, और चलते रहते।

आख़िर उन्हें वह टीला मिल गया, जहाँ से पूरा पश्चिमी क्षितिज खुला दिखता था। वहाँ पहुँचकर उन्हें चोटी सर करने जैसा संतोष हुआ। लौटते समय भी जब अँधेरा, बढ़ता पानी और ऊँची चट्टान सामने आई, तो वे घबराकर रुके नहीं। उन्होंने जूते हाथ में लिए, दौड़े और चट्टान पर चढ़कर रास्ता पाया। ये दोनों प्रसंग उनकी लगन, धैर्य और दृढ़ता के प्रमाण हैं।

आखिरी चट्टान तक की भाषा को चित्रात्मक क्यों कहा जाता है? उदाहरण देकर समझाइए।

चित्रात्मक भाषा वह है जो पढ़ते समय आँखों के सामने दृश्य खड़ा कर दे। इस पाठ में लेखक रंग, गति और आकार के ऐसे शब्द चुनते हैं कि हर दृश्य साफ़ दिखने लगता है। लहरें बल खाती हुई आती हैं, नुकीली चट्टानों से कटती हैं और ऊपर बूँदों की जाली बनाती हैं। चट्टान समाधिस्थ साधु जैसी लगती है।

सूर्यास्त का वर्णन तो रंगों का पूरा चित्र है: पहले पानी पर सोना ढुलता है, फिर लहू बहता लगता है, फिर बैंगनी और अंत में स्याही फैल जाती है। सैंड हिल की भीड़ कैनवस पर बिखरे रंगीन बिंदुओं जैसी दिखती है। नारियल के काले झुरमुट सिर धुनते और हाथ-पैर पटकते लगते हैं। उपमा, मानवीकरण और रंगों के भावपूर्ण प्रयोग से पाठक लेखक के साथ यात्रा करता-सा महसूस करता है।

प्रकृति की विशालता के सामने मनुष्य को अपनी लघुता का बोध कैसे होता है? पाठ और अपने अनुभव के आधार पर लिखिए।

पाठ में लेखक जब चट्टान पर खड़े होकर तीनों ओर क्षितिज तक फैला समुद्र देखते हैं, तो उन्हें शक्ति और विस्तार का एक साथ अनुभव होता है। उस विराट दृश्य में वे भूल जाते हैं कि वे एक अलग व्यक्ति हैं। उन्हें लगता है कि वे विशाल शिलाओं के बीच एक नन्हा-सा पत्थर भर हैं। यही अपनी लघुता का बोध है। बढ़ते पानी से घिरने पर यह बोध डर में बदल जाता है।

ऐसा अनुभव हममें से कई लोगों को होता है। ऊँचे पहाड़ के नीचे खड़े होकर, तारों भरा आकाश देखकर या किसी बड़ी नदी के किनारे बैठकर मन अपने आप शांत हो जाता है। रोज़ की छोटी चिंताएँ छोटी लगने लगती हैं। यह बोध हमें विनम्र बनाता है और सिखाता है कि प्रकृति का आदर करें, उससे होड़ न करें। साथ ही यह मन को नई ऊर्जा भी देता है।

Flashcards (17)

आखिरी चट्टान तक किस विधा की रचना है?
यात्रा-वृत्तांत।
मोहन राकेश का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सन् 1925, अमृतसर।
मोहन राकेश के किस नाटक को अकादमी पुरस्कार मिला?
आषाढ़ का एक दिन।
मोहन राकेश ने किस पत्रिका का संपादन किया?
सारिका।
मोहन राकेश के दो उपन्यासों के नाम?
अँधेरे बंद कमरे, अंतराल।
कन्याकुमारी किस राज्य में है?
तमिलनाडु।
कन्याकुमारी में कौन-से तीन जल-क्षेत्र मिलते हैं?
अरब सागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी।
लेखक कन्याकुमारी को किसकी भूमि कहते हैं?
सुनहले सूर्योदय और सूर्यास्त की।
आखिरी चट्टान पर किसने ध्यान लगाया था?
स्वामी विवेकानंद ने।
समाधिस्थ का अर्थ?
ध्यान में डूबा हुआ।
समुद्र देखकर लेखक को कौन-सा भाव सूझा?
शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति।
कौन-सा क्षितिज सबसे दूर और गहरा लगा?
हिंद महासागर का।
होश आने पर लेखक ने क्या देखा?
चट्टान बढ़ते पानी से घिर गई थी।
सैंड हिल का अर्थ?
रेत या बालू का टीला।
लेखक सैंड हिल से आगे क्यों गए?
पूरा पश्चिमी क्षितिज देखने के लिए।
सर करना मुहावरे का अर्थ?
जीत लेना, फ़तह करना।
सूर्यास्त के बाद पानी के रंगों का क्रम?
सोना, लाल, बैंगनी, काला।

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  • क्या, कहाँ
  • दृश्य या भाव
  • सही या भ्रम
  • शाम का क्रम
  • झटपट उत्तर

अँधेरे में वापसी, सूर्योदय और भाषा की बात

अँधेरा घिरने पर लेखक तट के रास्ते लौटते हैं, अनाम रंगों वाली रेत में खो जाते हैं, बढ़ते पानी से जूझते हैं; अगली सुबह विवेकानंद चट्टान से सूर्योदय के साथ कन्याकुमारी के बेरोज़गार युवकों और भक्तों की झलक पाते हैं।

What you will be able to do

  • अँधेरे में लौटते समय लेखक के निर्णय, डर और साहस का वर्णन कर सकूँगा।
  • रंग-बिरंगी रेत और बढ़ते ज्वार वाले प्रसंगों में आए भावों की तुलना कर सकूँगा।
  • सूर्योदय के दृश्य में दिखी कन्याकुमारी की सामाजिक स्थिति, विशेषकर बेरोज़गारी, समझा सकूँगा।
  • क्रिया-विशेषण की पहचान करके वाक्यों में उसका प्रयोग कर सकूँगा।
  • नाव शब्द के भारतीय भाषाओं में रूपों और पाठ के कठिन शब्दों का अर्थ बता सकूँगा।

Key points

  • अँधेरा घिरते ही लेखक को लौटने की चिंता हुई; टीलों में भटकने के डर से वे रेत पर फिसलकर नीचे तट पर उतर गए।

  • तट की रेत में इतने अनाम और मिले-जुले रंग थे कि लेखक कुछ देर अँधेरे की बात ही भूल गए।

  • हर रंग की थोड़ी रेत रखने की इच्छा पूरी न होने से वे उदास मन से आगे बढ़े।

  • ज्वार से तट सिकुड़ता गया; लहर ने पैर भिगोए तो लेखक जूते हाथ में लेकर दौड़ पड़े और एक चट्टान से टकरा गए।

  • चट्टान पर चढ़कर देखा कि उस पार खुला चौड़ा तट और ऊपर सड़क का रास्ता है, मानो उनके साथ मज़ाक़ हुआ हो।

  • सुबह आठ लोग रबड़ के तीन तनों से बनी छोटी नाव में विवेकानंद चट्टान पहुँचे; डर लेखक की टाँगों में काँपता रहा।

  • एक ग्रेजुएट युवक ने बताया कि आठ हज़ार की आबादी में चार-पाँच सौ पढ़े-लिखे युवक बेरोज़गार हैं।

  • सूर्योदय के समय घाट पर अर्घ्य, शंख-मालाओं का मोल-तोल और दूरबीन से सूर्य-दर्शन साथ-साथ चल रहे थे।

  • जिस शब्द से क्रिया की विशेषता पता चले, वह क्रिया-विशेषण है, जैसे जल्दी-जल्दी चलने लगा।

Full explanation

अँधेरा, चिंता और तुरंत निर्णय

सूरज डूबने के बाद अचानक लेखक को ख़याल आया कि अब उन्हें लौटना भी है। यह सोचते ही वे काँप उठे। उन्होंने दूर सैंड हिल की तरफ़ नज़र डाली, तो वहाँ अँधेरे में कुछ धुँधले रंग हिलते दिख रहे थे, पर इतनी दूर से किसी आकृति को अलग पहचानना संभव नहीं था। उनके और सैंड हिल के बीच काले पड़ते रेत के कई टीले थे। मन में डर बैठने लगा कि अँधेरा होने से पहले क्या वे उन सबको पार कर पाएँगे। कुछ क़दम उस ओर बढ़े भी, पर लगा कि उस रास्ते से गए तो रेत में ही भटकते रह जाएँगे।

यहाँ लेखक एक समझदार निर्णय लेते हैं। वे सोचते हैं कि नीचे समुद्र-तट पर उतर जाना बेहतर है, क्योंकि तट का रास्ता निश्चित रूप से केप होटल के सामने तक पहुँचाएगा। निर्णय तुरंत लेना था, इसलिए बिना ज़्यादा सोचे वे रेत पर बैठकर फिसलते हुए नीचे तट तक पहुँच गए। इस प्रसंग से सीख मिलती है कि मुश्किल में घबराने के बजाय सबसे सुरक्षित और पहचाना हुआ रास्ता चुनना चाहिए। अँधेरे में अनजान टीलों की जगह तट की सीधी रेखा पकड़ना यही समझदारी है। पाठ यहाँ रोमांच से भर जाता है, क्योंकि पाठक भी लेखक के साथ सोचने लगता है कि अब क्या होगा।

अनाम रंगों वाली रेत

तट पर पहुँचकर लेखक कुछ पल फिर बढ़ते अँधेरे को भूल गए। कारण था वहाँ की रेत। उन्होंने पहले भी कई समुद्र-तटों पर सुरमई, ख़ाकी, पीली और लाल रेत देखी थी, पर यहाँ की रेत में जो रंग थे, वैसे पहले कहीं नहीं देखे थे। हर इंच पर रंग बदल जाता था, और हर रंग में कई दूसरे रंगों की झलक होती थी। लेखक एक अनोखी कल्पना करते हैं। मानो बादलों की कालिमा और आँधी की लाली को घोलकर किसी ने रेत बना दी हो, और उस घोल के सारे मेल उस तट पर बिखरे हों। बल्कि रंग उससे भी ज़्यादा थे।

लेखक ने अलग-अलग रंगों की रेत हाथ में ली, देखी और मसलकर गिर जाने दी। जिन रंगों तक हाथ नहीं पहुँचा, उन्हें पैरों से मसल दिया। मन करता था कि हर रंग की एक-एक मुट्ठी साथ ले चलें, पर इसका कोई उपाय नहीं था। वे यह सोचकर आगे बढ़े कि किसी और दिन आकर यह रेत बटोरेंगे, पर उनका मन उदास था। इस अंश में अनाम रंग शब्द बहुत अर्थपूर्ण है। प्रकृति इतनी समृद्ध है कि हमारी भाषा के पास उसके हर रंग के लिए नाम ही नहीं है। साथ ही यह प्रसंग बताता है कि सुंदर चीज़ को अपने पास बाँधकर रखने की इच्छा हर मनुष्य में होती है, पर कुछ अनुभव केवल याद में ही सहेजे जा सकते हैं।

बढ़ता पानी और एक मज़ाक़-सी राहत

अब समुद्र में पानी तेज़ी से बढ़ रहा था और तट की चौड़ाई घटती जा रही थी। एक लहर ने लेखक के पैर भिगो दिए, तब उन्हें अचानक ख़तरे का एहसास हुआ। वे जल्दी-जल्दी चलने लगे। तट का बस तीन-चार फ़ुट हिस्सा पानी से बाहर बचा था और लगता था कि वह भी जल्दी डूब जाएगा। ऊपर जाने का रास्ता भी नहीं था, क्योंकि काली पड़ती रेत दीवार की तरह खड़ी थी। डर बढ़ा तो वे दौड़ने लगे, जूते उतारकर हाथ में ले लिए और एक ऊँची लहर से ऐसे बचकर भागे, मानो वह सचमुच उन्हें लपेटने आ रही हो।

सामने एक ऊँची चट्टान आई। सँभलने की कोशिश के बावजूद वे उससे टकरा गए और बाँहों पर हल्की खरोंच आ गई। वह चट्टान समुद्र में भीतर तक फैली थी, और उसके पार जाने के लिए पानी में उतरना पड़ता, जिसका साहस उस समय नहीं था। इसलिए वे चट्टान की नोकों पर पैर रखते हुए उसके ऊपर चढ़ गए। ऊपर पहुँचते ही उन्हें लगा जैसे किसी ने उनके साथ मज़ाक़ किया हो। चट्टान के उस पार लगभग सौ फ़ुट चौड़ा खुला तट था, जहाँ बहुत-से लोग आराम से टहल रहे थे और ऊपर सड़क तक जाने का रास्ता भी बना था। डर निकलते ही लेखक को बहुत हल्का लगा और वे नीचे कूद गए। यह प्रसंग दिखाता है कि कई बार हमारा डर स्थिति से बड़ा होता है, और अँधेरे में छोटी बाधा भी बहुत बड़ी लगती है।

रात का लॉन और सुबह की नाव

रात का दृश्य कुछ ही वाक्यों में खींचा गया है। होटल के लॉन से सामने का अँधेरा समुद्र दिखता है, जिस पर किसी पौधे की काली टहनियाँ लकीरें-सी खींचती हैं। नीचे सड़क पर कोई टॉर्च जलाता-बुझाता चलता है। दूर दक्षिण-पूर्व में किसी जहाज़ की धीमी रोशनी टिमटिमाती है। इन छोटे टुकड़ों से पूरी शांत रात आँखों के सामने आ जाती है। यह शैली किसी फ़िल्म के अलग-अलग दृश्यों जैसी है।

अगली सुबह सूर्योदय के समय लेखक आठ लोगों के साथ विवेकानंद चट्टान पर बैठे थे। यह चट्टान तट से सौ-सवा सौ गज़ आगे समुद्र में है, वहाँ जहाँ बंगाल की खाड़ी की सीमा समाप्त होती है। उनके साथ कन्याकुमारी के तीन युवक थे और चार मल्लाह, जो उन्हें एक छोटी मछुआ नाव में लाए थे। वह नाव क्या थी, बस रबड़ के पेड़ के तीन तनों को साथ जोड़ दिया गया था। नीचे नुकीली चट्टानें और ऊपर ऊँची लहरें थीं। रास्ते भर लेखक आसमान की ओर देखते रहे और अपने डर को ऊपरी उदासीनता से ढकने की कोशिश करते रहे। पर चट्टान पर पहुँचकर भी डर उनकी टाँगों में उतर आया था, जो बैठे-बैठे हल्के-हल्के काँप रही थीं। लेखक अपने डर को छिपाते नहीं, ईमानदारी से लिखते हैं, और यही ईमानदारी यात्रा-वृत्तांत को विश्वसनीय बनाती है।

सूर्योदय के साथ बेरोज़गारी की बात

चट्टान पर साथ बैठा एक ग्रेजुएट युवक लेखक को अपने नगर की बड़ी समस्या बताता है। लगभग आठ हज़ार लोगों के उस नगर में चार-पाँच सौ से ज़्यादा पढ़े-लिखे युवक बेकार बैठे हैं, जिनमें सौ के आस-पास ग्रेजुएट हैं। उनका मुख्य काम नौकरी के लिए अर्ज़ियाँ भेजना और बैठकर आपस में बहस करना है। वह युवक ख़ुद पर्यटकों को फ़ोटो-एल्बम बेचता है, और बाक़ी भी ऐसे ही छोटे-मोटे काम करते हैं। वह हँसते हुए कहता है कि वे सीपियों का गूदा खाकर दर्शन के सिद्धांतों पर बहस करते हैं, और इस चट्टान से उन्हें कम-से-कम इतनी प्रेरणा तो मिलती ही है। फिर वह एक सीपी तोड़कर उसका गूदा मुँह में डाल लेता है।

इस बातचीत में गहरा व्यंग्य और दर्द है। जिस चट्टान पर विवेकानंद ने युवाओं को जगाने का सपना देखा, उसी पर बैठे पढ़े-लिखे युवक काम के बिना हैं। उनकी बात में हास्य है, पर उसके पीछे निराशा छिपी है। लेखक यहाँ समाज की उस सच्चाई को दिखाते हैं जो पर्यटकों की नज़र से अक्सर छूट जाती है। यही यात्रा-वृत्तांत का सामाजिक पक्ष है: सुंदर दृश्य के साथ वहाँ के लोगों का जीवन भी दिखाना। परीक्षा में इसे कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों की स्थिति वाले प्रश्न में ज़रूर लिखिए।

घाट, मंदिर और बसों का टाइम-टेबल

समुद्र में टापुओं-सी बिखरी काली चट्टानों के पीछे से सूरज उग रहा था, और पानी तथा आसमान दोनों में अनेक रंग झिलमिला रहे थे। किनारे के घाट पर भीड़ सूरज को जल चढ़ाने, यानी अर्घ्य देने, आई थी। थोड़ी दूर सरकारी अतिथि-गृह के बैरे सरकारी मेहमानों को सूर्योदय की कॉफ़ी पिला रहे थे। दो स्थानीय युवतियाँ अपनी टोकरियों से उन्हें शंख और मालाएँ दिखा रही थीं। मेहमान एक हाथ से दाम पर मोल-भाव करते और दूसरी ओर दूरबीन से उगता सूरज भी देखते। इस दृश्य में आस्था, पर्यटन, व्यापार और ग़रीबी सब एक साथ दिखाई देते हैं।

उधर लेखक का साथी मोहल्ले-मोहल्ले के हिसाब से बेरोज़गारी के आँकड़े गिना रहा था। आस-पास कई कडल-काक, यानी समुद्री पक्षी, तैर रहे थे, जो बेरोज़गारी की समस्या और सूर्योदय की ख़ूबसूरती दोनों से बे-लाग, यानी बिलकुल अछूते थे। मंदिर में पूजा की घंटियाँ बज रही थीं और भक्तों की एक मंडली दीवार को प्रणाम कर रही थी। नावों के पाल और पक्षियों के पंख धूप में एक जैसे चमक रहे थे। पाठ का अंत बहुत सहज और मानवीय है। लेखक की आँखें नाव और किनारे की दूरी नाप रही हैं और मन में बसों का समय दोहराया जा रहा है: तीसरी बस नौ चालीस पर, चौथी। इस अधूरे वाक्य से पता चलता है कि यात्रा का जादू धीरे-धीरे रोज़ की चिंताओं में लौट रहा है।

भाषा की बात: क्रिया-विशेषण

जैसे संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द विशेषण कहलाते हैं, वैसे ही क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। पाठ के उस वाक्य को लीजिए जिसमें तट धीरे-धीरे सिकुड़ता है। यहाँ धीरे-धीरे बताता है कि सिकुड़ने की क्रिया किस गति से हुई। इसी तरह मैं जल्दी-जल्दी चलने लगा में जल्दी-जल्दी चलने की क्रिया की विशेषता है। मैं देर तक चट्टान को देखता रहा में देर तक बताता है कि देखने की क्रिया कितनी देर चली।

क्रिया-विशेषण कई तरह के होते हैं। कुछ बताते हैं कि क्रिया कैसे हुई, जैसे धीरे-धीरे, तेज़ी से। कुछ बताते हैं कब हुई, जैसे अचानक, सुबह। कुछ बताते हैं कहाँ हुई, जैसे ऊपर, नीचे, दूर। और कुछ बताते हैं कितनी हुई, जैसे बहुत, थोड़ा। पहचानने का आसान तरीक़ा है: क्रिया पर कैसे, कब, कहाँ या कितना का प्रश्न पूछिए; जो उत्तर मिले, वही क्रिया-विशेषण है। ध्यान रहे, सुंदर लहरें में सुंदर विशेषण है, क्योंकि वह संज्ञा लहरें की विशेषता बताता है, किसी क्रिया की नहीं।

नाव के अनेक नाम और कठिन शब्द

पाठ में मल्लाह नाव को लहरों से बचाते हुए लाते हैं। नाव शब्द भारत की अनेक भाषाओं में अलग-अलग रूपों में मिलता है। संस्कृत में नौ या नौका, पंजाबी और सिंधी में बेड़ी, उर्दू में किश्ती, मराठी में होड़ी, बांग्ला में नाओ, तेलुगु में पडव, तमिल में ओडम्, मलयालम में तोणि और कन्नड़ में दोणि। इन रूपों में कई जगह नौ या नाव की ध्वनि साफ़ सुनाई देती है, जिससे पता चलता है कि भारतीय भाषाएँ आपस में जुड़ी हुई हैं।

पाठ के कुछ कठिन शब्द भी समझ लीजिए। स्याह का अर्थ है काला। समाधिस्थ का अर्थ है ध्यान में डूबा हुआ। क्षितिज वह रेखा है जहाँ धरती और आकाश मिलते दिखते हैं। झुरमुट पास-पास उगे पेड़ों का समूह है। बीहड़ का अर्थ है ऊबड़-खाबड़ और विकट। सुरमई हल्के नीले-काले, यानी सुरमे के रंग को कहते हैं। अर्घ्य पूजा में अर्पित जल या वस्तु है। बाइनाक्यूलर दूरबीन है। बे-लाग का अर्थ है खरा या अछूता। अनुपूरक पाठ में निर्मल वर्मा के प्रयाग कुंभ वाले यात्रा-वृत्तांत का अंश भी है। उसमें भोर की सीटी, किले पर ऊँघता पूर्णिमा का चाँद और रेत पर चलते हज़ारों पैर उसी चित्रात्मक शैली में दिखते हैं।

Concepts and terms

ज्वार

समुद्र के पानी का नियमित रूप से ऊपर चढ़ना और तट की ओर बढ़ना। पानी उतरने को भाटा कहते हैं।

शिक्षित बेरोज़गारी

पढ़े-लिखे लोगों को उनकी योग्यता के अनुसार काम न मिलना। लेखक का साथी युवक कन्याकुमारी की इसी समस्या के आँकड़े बताता है।

दिखावटी उदासीनता

मन के डर को छिपाने के लिए ऊपर से बेपरवाह दिखना। नाव में बैठे लेखक आसमान की ओर देखकर ऐसा ही करते हैं।

क्रिया-विशेषण

वे शब्द जो क्रिया की विशेषता बताएँ, जैसे कैसे, कब, कहाँ या कितना। धीरे-धीरे, जल्दी-जल्दी, देर तक इसके उदाहरण हैं।

विरोधाभासी चित्र

एक ही दृश्य में विपरीत बातें साथ दिखाना। पाठ में सूर्योदय की सुंदरता के साथ बेरोज़गारी के आँकड़े भी चलते हैं।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

कक्षा नौ के विद्यार्थी शैक्षिक भ्रमण पर समुद्र-तट गए। उनके साथ आरव भी था, जो व्हीलचेयर से चलता है। तट पर रेत नरम थी और व्हीलचेयर के पहिये उसमें धँसने लगे। कुछ बच्चे दौड़कर लहरों की ओर चले गए, पर तनु और कबीर आरव के पास रुके। उन्होंने होटल वालों से बात की और पता चला कि पास में एक लकड़ी का रास्ता बना है, जो पानी के पास तक जाता है। तीनों उस रास्ते से गए और साथ बैठकर सूर्यास्त देखा। लौटते समय शिक्षिका ने सबको याद दिलाया कि शाम को ज्वार बढ़ता है, इसलिए किनारे की चट्टानों पर न जाएँ। अगले दिन कक्षा ने मिलकर ऐसी यात्राओं के लिए सुझावों की सूची बनाई।

Activity:

अपने विद्यालय या आस-पास के किसी पर्यटन-स्थल पर जाकर देखिए कि वहाँ विशेष आवश्यकता वाले लोगों के लिए क्या सुविधाएँ हैं, और तीन सुधार सुझाइए।

Analysis:

यात्रा तभी सबकी होती है, जब सब साथ चल सकें। सावधानी, जानकारी और साथ निभाने का भाव पाठ और इस प्रसंग दोनों की सीख है।

Did you know

विवेकानंद स्मारक के पास वाली छोटी चट्टान पर तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर की 133 फ़ुट ऊँची प्रतिमा है। यह संख्या उनके ग्रंथ तिरुक्कुरल के 133 अध्यायों की याद दिलाती है।

स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन 12 जनवरी को भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

समुद्र में ज्वार-भाटा मुख्य रूप से चंद्रमा के खिंचाव से आता है, इसलिए शाम को तट पर पानी कुछ ही देर में काफ़ी आगे तक चढ़ आ सकता है।

Memory tricks

वापसी के चार पड़ाव: फि–रं–ल–च — फिसलकर तट पर, रंगों में खोए, लहर से डरे, चट्टान पार करके राहत।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 सूरज डूबते ही लेखक के शरीर में कँपकँपी क्यों भर गई? beginner
  • A समुद्र की ठंडी हवा से उन्हें बुख़ार चढ़ आया था
  • B उन्हें याद आया कि अँधेरे में लौटना भी है
  • C उन्होंने किसी को डूबते हुए देख लिया था
  • D उनके पैर में एक काँटा चुभ गया था
Show answer
Answer: उन्हें याद आया कि अँधेरे में लौटना भी है
Why:

लौटने का ख़याल।

Q2 सैंड हिल की ओर देखने पर लेखक को अँधेरे में क्या दिखाई दिया? intermediate
  • A साफ़ चमकती बत्तियाँ
  • B एक ऊँचा प्रकाश-स्तंभ
  • C बहुत-से जलते अलाव
  • D कुछ धुँधले हिलते रंग
Show answer
Answer: कुछ धुँधले हिलते रंग
Why:

आकृतियाँ अलग नहीं दिखीं।

Q3 टीलों की जगह तट से लौटने का निर्णय लेखक की किस समझ को दिखाता है? intermediate
  • A संकट में पहचाना हुआ और सुरक्षित रास्ता चुनना
  • B सबसे छोटा रास्ता ढूँढ़कर बस दौड़ते जाना
  • C भीड़ के पीछे-पीछे बिना सोचे चल पड़ना
  • D कहीं बैठकर चुपचाप सुबह होने का इंतज़ार करते रहना
Show answer
Answer: संकट में पहचाना हुआ और सुरक्षित रास्ता चुनना
Why:

तट होटल तक ले जाता।

Q4 तट पर पहुँचकर लेखक कुछ क्षण बढ़ते अँधेरे की बात क्यों भूल गए? beginner
  • A वहाँ उन्हें एक पुराना मित्र अचानक मिल गया
  • B वहाँ एक सुंदर नाव किनारे पर खड़ी थी
  • C वहाँ की रेत के अनोखे रंगों ने उन्हें मोह लिया
  • D वहाँ बहुत तेज़ रोशनी वाली बत्तियाँ जल रही थीं
Show answer
Answer: वहाँ की रेत के अनोखे रंगों ने उन्हें मोह लिया
Why:

अनाम रंग।

Q5 लेखक ने पहले किन रंगों वाली रेत समुद्र-तटों पर देखी थी? intermediate
  • A हरी, नीली, सफ़ेद और गुलाबी
  • B सुरमई, ख़ाकी, पीली और लाल
  • C काली, बैंगनी, सुनहरी और भूरी
  • D नारंगी, पीली, चाँदी और लाल
Show answer
Answer: सुरमई, ख़ाकी, पीली और लाल
Why:

चार परिचित रंग।

Q6 बादल की कालिमा और आँधी की लाली वाली कल्पना रेत के बारे में क्या बताती है? advanced
  • A वहाँ उस समय सचमुच भयंकर आँधी आ रही थी
  • B रेत बहुत गरम थी और छूने से हाथ जल जाता
  • C रेत के रंगों का मेल अनगिनत और अनोखा था
  • D आकाश पूरी तरह बादलों से ढका हुआ था
Show answer
Answer: रेत के रंगों का मेल अनगिनत और अनोखा था
Why:

अनाम रंगों की कल्पना।

Q7 हर रंग की थोड़ी रेत अपने पास रख लेने की इच्छा लेखक के मन के किस भाव को दिखाती है? intermediate
  • A रेत बेचकर पैसे कमाने का लालच
  • B दूसरों से होड़ जीतने की ज़िद
  • C प्रकृति को नुक़सान पहुँचाने का भाव
  • D सुंदरता को सहेज लेने की चाह
Show answer
Answer: सुंदरता को सहेज लेने की चाह
Why:

फिर आकर बटोरूँगा।

Q8 अभिकथन: लहर से पैर भीगते ही लेखक तेज़ी से चलने और फिर दौड़ने लगे। कारण: ज्वार से तट सिकुड़ रहा था और पानी से बाहर बस थोड़ा-सा हिस्सा बचा था। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

ख़तरे का एहसास।

Q9 लेखक ने खड़ी रेत पर चढ़कर ऊपर जाने का विचार क्यों छोड़ दिया? intermediate
  • A ऊपर कुछ जंगली जानवर घूम रहे थे
  • B ऊपर जाने पर पहरेदार रोक रहे थे
  • C काली पड़ती रेत दीवार जैसी खड़ी थी
  • D ऊपर पहुँचकर भी आगे कोई रास्ता नहीं था
Show answer
Answer: काली पड़ती रेत दीवार जैसी खड़ी थी
Why:

चढ़ना बेकार।

Q10 एक ऊँची लहर से बचते हुए लेखक ऐसे भागे, जैसे ______। beginner
  • A वह उनसे खेलने आ रही हो
  • B वह उनसे बात करने आई हो
  • C वह उन्हें रास्ता दिखा रही हो
  • D वह उन्हें लपेटने आ रही हो
Show answer
Answer: वह उन्हें लपेटने आ रही हो
Why:

डर का चित्र।

Q11 चट्टान पर चढ़कर लेखक को अपने साथ मज़ाक़ होने जैसा क्यों लगा? intermediate
  • A चट्टान के उस पार भी गहरा पानी था और कोई रास्ता नहीं था
  • B उस पार खुला तट था, लोग टहल रहे थे और सड़क का रास्ता था
  • C उनके साथी उन्हें देखकर ज़ोर-ज़ोर से हँस रहे थे
  • D चट्टान पर उनसे पहले ही कोई बैठा हुआ था
Show answer
Answer: उस पार खुला तट था, लोग टहल रहे थे और सड़क का रास्ता था
Why:

डर बेवजह बड़ा था।

Q12 रात वाले दृश्य में दक्षिण-पूर्व के क्षितिज पर क्या दिख रहा था? intermediate
  • A एक जहाज़ की धीमी रोशनी
  • B मंदिर के दीयों की कतार
  • C चाँद का पूरा गोला
  • D बिजली की चमक
Show answer
Answer: एक जहाज़ की धीमी रोशनी
Why:

मद्धिम-सी रोशनी।

Q13 मल्लाह जिस नाव में यात्रियों को विवेकानंद चट्टान तक लाए, वह कैसी थी? beginner
  • A मोटर से चलने वाली बड़ी सरकारी नाव
  • B रबड़ के तीन तने जोड़कर बनी छोटी नाव
  • C पाल वाली सजी हुई सुंदर लकड़ी की नाव
  • D लोहे की चादरों से बना मज़बूत बड़ा जहाज़
Show answer
Answer: रबड़ के तीन तने जोड़कर बनी छोटी नाव
Why:

मछुआ नाव।

Q14 नाव में लेखक का आसमान की ओर देखते रहना किस बात का संकेत है? intermediate
  • A वे बादलों से बारिश का अनुमान लगा रहे थे
  • B वे आकाश में उड़ते जहाज़ को ढूँढ़ रहे थे
  • C वे अपने डर को उदासीनता के पीछे छिपा रहे थे
  • D वे तारों की मदद से दिशा पहचान रहे थे
Show answer
Answer: वे अपने डर को उदासीनता के पीछे छिपा रहे थे
Why:

दिखावटी उदासीनता।

Q15 ग्रेजुएट युवक के अनुसार कन्याकुमारी के बेरोज़गार युवकों का मुख्य धंधा क्या था? intermediate
  • A नौकरी के लिए अर्ज़ियाँ भेजना और बहस करना
  • B समुद्र में जाकर रोज़ मछलियाँ पकड़ना और बेचना
  • C मंदिर में पूजा कराना और प्रसाद बाँटना
  • D खेतों में नारियल और रबड़ उगाना
Show answer
Answer: नौकरी के लिए अर्ज़ियाँ भेजना और बहस करना
Why:

पढ़े-लिखे पर काम नहीं।

Q16 हम सीपियों का गूदा खाकर दर्शन पर बहस करते हैं। युवक के इस कथन में मुख्य रूप से क्या झलकता है? advanced
  • A अपने भोजन पर बहुत गहरा घमंड
  • B दर्शन-शास्त्र से सच्चा गहरा प्रेम
  • C पर्यटकों के प्रति भरा ग़ुस्सा
  • D हँसी में छिपी निराशा और व्यंग्य
Show answer
Answer: हँसी में छिपी निराशा और व्यंग्य
Why:

बेरोज़गारी का दर्द।

Q17 विवेकानंद चट्टान पर बेरोज़गारी की बात होना पाठ में कैसा विरोधाभास रचता है? advanced
  • A समुद्र के बीच की चट्टान पर नौकरी के दफ़्तर खुले हैं
  • B सूर्योदय के समय सब लोग सो रहे हैं
  • C युवाओं के प्रेरक की चट्टान पर ही युवा बेकार बैठे हैं
  • D मंदिर में घंटियाँ बजते हुए भी सब चुप हैं
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Answer: युवाओं के प्रेरक की चट्टान पर ही युवा बेकार बैठे हैं
Why:

राष्ट्रीय युवा दिवस से जोड़िए।

Q18 घाट पर सरकारी मेहमान कौन-से दो काम एक साथ कर रहे थे? intermediate
  • A सूर्य को अर्घ्य देना और मंदिर में पूजा करना
  • B मालाओं का मोल-तोल और दूरबीन से सूर्य-दर्शन
  • C नाव चलाना और मछलियाँ पकड़ना
  • D फ़ोटो-एल्बम बेचना और अर्ज़ियाँ लिखना
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Answer: मालाओं का मोल-तोल और दूरबीन से सूर्य-दर्शन
Why:

शंख और मालाएँ।

Q19 कडल-काकों को बेरोज़गारी और सूर्योदय दोनों से बे-लाग कहने का अर्थ है ______। advanced
  • A वे इन दोनों बातों से बहुत दुखी थे
  • B वे इन दोनों पर ज़ोर से चिल्ला रहे थे
  • C वे इन दोनों के बारे में सब जानते थे
  • D वे इन दोनों बातों से बिलकुल अछूते थे
Show answer
Answer: वे इन दोनों बातों से बिलकुल अछूते थे
Why:

बे-लाग: खरा, अछूता।

Q20 पाठ का अंत बसों के टाइम-टेबल पर होना क्या सुझाता है? advanced
  • A यात्रा का जादू धीरे-धीरे रोज़ की चिंताओं में लौट रहा है
  • B लेखक को बसों का कारोबार करने का बहुत गहरा शौक़ था
  • C कन्याकुमारी में दिन भर में केवल चार बसें ही चलती थीं
  • D लेखक सूर्योदय देखकर पूरी तरह ऊब गए थे और जाना चाहते थे
Show answer
Answer: यात्रा का जादू धीरे-धीरे रोज़ की चिंताओं में लौट रहा है
Why:

तीसरी बस नौ चालीस।

Q21 मैं जल्दी-जल्दी चलने लगा। इस वाक्य में क्रिया-विशेषण कौन-सा है? beginner
  • A चलने लगा था
  • B जल्दी-जल्दी
  • C मैं स्वयं
  • D लगा था
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Answer: जल्दी-जल्दी
Why:

चलने की गति।

Q22 मैं देर तक आखिरी चट्टान को देखता रहा। इसमें देर तक क्रिया की कौन-सी बात बताता है? intermediate
  • A देखने की क्रिया कितनी देर चली
  • B चट्टान कितनी ऊँची और कितनी बड़ी थी
  • C लेखक किस जगह पर खड़े थे
  • D चट्टान का रंग कैसा दिखता था
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Answer: देखने की क्रिया कितनी देर चली
Why:

समय-सूचक।

Q23 इनमें से किस वाक्यांश में रेखांकित शब्द क्रिया-विशेषण नहीं, बल्कि विशेषण है? advanced
  • A लहरें तेज़ी से आ रही थीं
  • B पानी धीरे-धीरे बढ़ा
  • C सुंदर लहरें आ रही थीं
  • D वह अचानक रुक गया
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Answer: सुंदर लहरें आ रही थीं
Why:

सुंदर संज्ञा की विशेषता बताता है।

Q24 पंजाबी और सिंधी दोनों में नाव के लिए कौन-सा शब्द मिलता है? intermediate
  • A तोणि
  • B ओडम्
  • C पडव
  • D बेड़ी
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Answer: बेड़ी
Why:

सिंधी में किश्ती भी।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. लेखक टीलों से फिसलकर तट पर उतरे। II. चट्टान से टकराकर लेखक को गहरी चोट लगी। III. विवेकानंद चट्टान पर कुल आठ लोग थे। पाठ के अनुसार कौन-से कथन सही ठहरते हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
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Answer: केवल I और III
Why:

बस हल्की खरोंच आई।

Important short questions (7)

अँधेरा घिरने पर लेखक ने लौटने का कौन-सा रास्ता चुना और क्यों?

लेखक ने काले पड़ते टीलों के रास्ते की जगह नीचे समुद्र-तट का रास्ता चुना। उन्हें डर था कि टीलों में वे अँधेरे में भटक जाएँगे। तट का रास्ता निश्चित रूप से केप होटल तक ले जाता, इसलिए वे रेत पर फिसलकर नीचे उतर गए।

तट की रेत के रंगों का लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?

रेत में इतने अनाम और मिले-जुले रंग थे कि लेखक कुछ देर बढ़ता अँधेरा ही भूल गए। उन्होंने रेत हाथों में लेकर देखी और मसलकर गिराई। वे हर रंग की थोड़ी रेत रखना चाहते थे, पर उपाय न होने से उदास मन से आगे बढ़े।

बढ़ते पानी के बीच लेखक ने ख़ुद को कैसे बचाया?

लहर से पैर भीगने पर लेखक तेज़ चलने लगे, फिर जूते हाथ में लेकर दौड़ पड़े। सामने ऊँची चट्टान से टकराने पर उन्होंने पानी में उतरने के बजाय उसकी नोकों पर पैर रखकर ऊपर चढ़ना चुना। उस पार खुला तट मिलने पर वे नीचे कूद गए।

विवेकानंद चट्टान तक की नाव-यात्रा में लेखक का डर कैसे प्रकट हुआ?

नाव केवल रबड़ के तीन तनों से बनी थी और नीचे नुकीली चट्टानें तथा ऊपर ऊँची लहरें थीं। लेखक रास्ते भर आसमान देखकर डर को ऊपरी उदासीनता से ढकते रहे। पर चट्टान पर पहुँचने के बाद भी उनकी टाँगें हल्के-हल्के काँपती रहीं।

लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के बारे में क्या बताया?

ग्रेजुएट युवक के अनुसार आठ हज़ार की आबादी में चार-पाँच सौ पढ़े-लिखे युवक बेरोज़गार थे। वे अर्ज़ियाँ भेजते और बहस करते, या फ़ोटो-एल्बम बेचने जैसे छोटे काम करते। मल्लाह नाव चलाते और युवतियाँ पर्यटकों को शंख-मालाएँ बेचती थीं।

सूर्योदय के समय घाट के दृश्य में कौन-कौन से काम साथ-साथ चल रहे थे?

घाट पर लोग उगते सूर्य को अर्घ्य दे रहे थे। बैरे सरकारी मेहमानों को कॉफ़ी पिला रहे थे। दो युवतियाँ शंख और मालाएँ दिखा रही थीं, और मेहमान मोल-तोल करते हुए दूरबीन से सूरज देख रहे थे। मंदिर में घंटियाँ बज रही थीं।

क्रिया-विशेषण किसे कहते हैं? पाठ से दो उदाहरण दीजिए।

जो शब्द क्रिया की विशेषता बताए, उसे क्रिया-विशेषण कहते हैं। वह बताता है कि क्रिया कैसे, कब, कहाँ या कितनी हुई। पाठ में तट धीरे-धीरे कम होता गया में धीरे-धीरे, और लेखक जल्दी-जल्दी चलने लगे में जल्दी-जल्दी क्रिया-विशेषण हैं।

Long answer questions (3)

आखिरी चट्टान तक में प्रकृति-सौंदर्य के साथ समाज की सच्चाई भी दिखाई गई है। सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

पाठ का बड़ा हिस्सा प्रकृति के सौंदर्य से भरा है। तीन सागरों का संगम, बल खाती लहरें, सोने से स्याही तक बदलते सूर्यास्त के रंग, अनाम रंगों वाली रेत और चट्टानों के पीछे से उगता सूरज, सब बहुत सजीव ढंग से दिखाए गए हैं। पाठक को लगता है कि वह ख़ुद उस तट पर खड़ा है।

पर लेखक केवल सुंदरता पर नहीं रुकते। सूर्योदय के समय उनका साथी युवक बताता है कि सैकड़ों पढ़े-लिखे युवक बेरोज़गार हैं और अर्ज़ियाँ भेजने तथा बहस करने के सिवा उनके पास काम नहीं। मल्लाहों की कच्ची नाव, शंख-मालाएँ बेचती युवतियाँ और कॉफ़ी पीते सरकारी मेहमान आर्थिक अंतर दिखाते हैं। विवेकानंद की चट्टान पर बेकार युवकों की बात एक तीखा विरोधाभास रचती है। इस तरह पाठ सौंदर्य और यथार्थ दोनों को साथ रखता है।

लौटते समय लेखक के मन में आए भावों का क्रम लिखिए। इससे आप क्या सीखते हैं?

सूरज डूबते ही लेखक को लौटने की चिंता हुई और शरीर में कँपकँपी भर गई। काले टीलों में भटकने के डर से उन्होंने तुरंत तट पर उतरने का निर्णय लिया। तट पर पहुँचकर अनाम रंगों वाली रेत देखकर वे कुछ देर डर भूल गए और विस्मय में डूब गए। फिर रेत साथ न ले जा पाने की उदासी आई।

इसके बाद लहर से पैर भीगे, तो ख़तरे का एहसास हुआ और डर तेज़ी से बढ़ा। वे दौड़े, चट्टान से टकराए और उस पर चढ़े। उस पार खुला तट देखकर डर निकल गया और उन्हें बहुत हल्का लगा, मानो उनके साथ मज़ाक़ हुआ हो। इससे सीख मिलती है कि संकट में घबराने के बजाय सोच-समझकर निर्णय लें। साथ ही अँधेरे में डर अक्सर स्थिति से बड़ा लगता है, इसलिए धैर्य बनाए रखना चाहिए।

सफ़र में अचानक मुश्किल आ पड़े, तो यात्री के कौन-से गुण उसे बचाते हैं? पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए।

पहला गुण सतर्कता है। चट्टान पर खड़े लेखक दृश्य में खो गए थे और पानी ने उन्हें घेर लिया; होश आते ही उन्होंने ख़तरा पहचाना। दूसरा गुण तुरंत निर्णय लेने की क्षमता है। अँधेरे में उन्होंने टीलों की जगह तट का पहचाना रास्ता चुना। तीसरा गुण साहस है। बढ़ते पानी में वे जूते हाथ में लेकर दौड़े और चट्टान पर चढ़ गए।

चौथा गुण धैर्य है। हर टीले के बाद नया टीला मिलने पर भी वे रुके नहीं। पाँचवाँ गुण ईमानदारी से अपने डर को स्वीकार करना है, जैसा उन्होंने नाव-यात्रा में किया। इनके साथ यात्रा से पहले जानकारी जुटाना, जैसे ज्वार का समय और लौटने का रास्ता, भी ज़रूरी है। ये गुण हों तो चुनौती भी एक यादगार अनुभव बन जाती है।

Flashcards (17)

सूरज डूबने के बाद लेखक को कौन-सी चिंता हुई?
अँधेरे में वापस लौटने की।
लेखक ने टीलों के रास्ते न लौटने का निर्णय क्यों लिया?
रेत में भटक जाने का डर था।
लेखक नीचे तट पर कैसे उतरे?
रेत पर बैठकर फिसलते हुए।
तट का रास्ता कहाँ तक ले जाता?
केप होटल के सामने तक।
लेखक ने पहले किन रंगों की रेत देखी थी?
सुरमई, ख़ाकी, पीली और लाल।
अनाम रंगों का अर्थ?
ऐसे रंग जिनका कोई नाम न हो।
लहर ने पैर भिगोए तो लेखक ने क्या महसूस किया?
ख़तरे का एहसास।
दौड़ते समय लेखक ने जूतों का क्या किया?
उतारकर हाथ में ले लिए।
चट्टान से टकराने पर क्या चोट आई?
बाँहों पर हल्की खरोंच।
चट्टान के उस पार क्या था?
लगभग सौ फ़ुट खुला तट और सड़क का रास्ता।
विवेकानंद चट्टान तक नाव किससे बनी थी?
रबड़ के तीन तनों से।
चट्टान पर कुल कितने लोग थे?
आठ।
कन्याकुमारी में कितने शिक्षित युवक बेरोज़गार थे?
कम-से-कम चार-पाँच सौ।
ग्रेजुएट युवक क्या बेचता था?
फ़ोटो-एल्बम।
अर्घ्य का अर्थ?
पूजा में अर्पित जल या वस्तु।
क्रिया-विशेषण किसे कहते हैं?
क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द को।
तमिल में नाव को क्या कहते हैं?
ओडम्।

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  • भाषा और नाव
  • विशेषण या क्रिया-विशेषण
  • सही या भ्रम
  • शाम से सुबह तक
  • झटपट उत्तर

Class 9 Hindi Chapter 5 — frequently asked questions

यात्रा-वृत्तांत किसे कहते हैं? इस पाठ के आधार पर उसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

किसी यात्रा में देखे स्थान, लोग और मन के भावों के सजीव वर्णन को यात्रा-वृत्तांत कहते हैं। इस पाठ की पहली विशेषता प्रकृति का चित्रात्मक वर्णन है, जैसे लहरें, टीले और सूर्यास्त के रंग। दूसरी विशेषता आत्मानुभूति है, जैसे विस्मय, डर और संतोष।

मोहन राकेश का साहित्यिक परिचय संक्षेप में दीजिए।

मोहन राकेश का जन्म सन् 1925 में अमृतसर में हुआ। उन्होंने नाटक, उपन्यास, कहानी, डायरी और यात्रा-वृत्तांत लिखे। आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस और आधे-अधूरे उनके प्रसिद्ध नाटक हैं। उन्होंने सारिका पत्रिका का संपादन भी किया।

कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति के बारे में पाठ से क्या पता चलता है?

कन्याकुमारी भारत की मुख्य भूमि के दक्षिणी छोर पर है। इसके पश्चिम में अरब सागर, दक्षिण में हिंद महासागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। तीनों यहाँ मिलते दिखते हैं, इसलिए सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समुद्र पर दिखते हैं।

अँधेरा घिरने पर लेखक ने लौटने का कौन-सा रास्ता चुना और क्यों?

लेखक ने काले पड़ते टीलों के रास्ते की जगह नीचे समुद्र-तट का रास्ता चुना। उन्हें डर था कि टीलों में वे अँधेरे में भटक जाएँगे। तट का रास्ता निश्चित रूप से केप होटल तक ले जाता, इसलिए वे रेत पर फिसलकर नीचे उतर गए।

तट की रेत के रंगों का लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?

रेत में इतने अनाम और मिले-जुले रंग थे कि लेखक कुछ देर बढ़ता अँधेरा ही भूल गए। उन्होंने रेत हाथों में लेकर देखी और मसलकर गिराई। वे हर रंग की थोड़ी रेत रखना चाहते थे, पर उपाय न होने से उदास मन से आगे बढ़े।

बढ़ते पानी के बीच लेखक ने ख़ुद को कैसे बचाया?

लहर से पैर भीगने पर लेखक तेज़ चलने लगे, फिर जूते हाथ में लेकर दौड़ पड़े। सामने ऊँची चट्टान से टकराने पर उन्होंने पानी में उतरने के बजाय उसकी नोकों पर पैर रखकर ऊपर चढ़ना चुना। उस पार खुला तट मिलने पर वे नीचे कूद गए।

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