Class 9 Hindi Chapter 1: दो बैलों की कथा
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झूरी के बैल और पहली वापसी
कहानी गधे और बैल पर एक हल्के व्यंग्य से शुरू होती है, फिर झूरी के दो बैलों हीरा और मोती की दोस्ती दिखाती है। ससुराल भेजे जाने पर दोनों रात में पगहे तोड़कर घर लौट आते हैं, और उनके लौटने पर घर में दो अलग-अलग भाव उठते हैं।
What you will be able to do
- कहानी के आरंभ में गधे और बैल की चर्चा का व्यंग्य समझा सकूँगा।
- हीरा और मोती की दोस्ती के तीन-चार प्रमाण कहानी से दे सकूँगा।
- बैलों के ससुराल से लौटने की पूरी घटना क्रम से बता सकूँगा।
- झूरी और उसकी पत्नी की प्रतिक्रिया की तुलना कर सकूँगा।
- इस भाग के नए शब्दों और मुहावरों का अर्थ लिख सकूँगा।
Key points
कहानी गधे से शुरू होती है, जिसे सीधेपन और सहनशीलता के कारण मूर्ख कहा जाता है।
लेखक पूछता है कि क्या सीधापन संसार में ठीक नहीं बैठता, और यहीं से व्यंग्य शुरू होता है।
बैल को गधे का छोटा भाई कहा गया है, क्योंकि वह कभी-कभी अपना असंतोष दिखा देता है।
झूरी के दो बैल हीरा और मोती पछाईं जाति के थे और बरसों साथ रहकर भाई जैसे हो गए थे।
दोनों बिना बोले, अपनी मूक-भाषा में, एक-दूसरे के मन की बात समझ लेते थे।
काम में दोनों चाहते थे कि ज़्यादा बोझ उसकी अपनी गरदन पर पड़े।
झूरी ने जोड़ी ससुराल भेजी तो बैलों ने समझा कि उन्हें बेच दिया गया है।
वे रात में पगहे तोड़कर घर लौट आए, और झूरी ने उन्हें गले लगा लिया।
झूरी की पत्नी ने उन्हें नमकहराम कहा और केवल सूखा भूसा देने का आदेश दिया।
Full explanation
कहानी गधे से क्यों शुरू होती है
कहानी का नाम बैलों पर है, पर पहला अनुच्छेद गधे के बारे में है। लेखक बताता है कि लोग किसी को बहुत बड़ा मूर्ख कहना चाहें तो उसे गधा कह देते हैं। फिर वह पूछता है कि गधा सचमुच मूर्ख है, या उसके सीधेपन ने उसे यह नाम दिलवा दिया है। गधे को चाहे जितना मारो, चाहे जैसी घास डालो, वह नाराज़ नहीं दिखता। गाय भी कभी सींग मार देती है और कुत्ता भी कभी गुस्सा कर लेता है, पर गधा कभी क्रोध नहीं करता।
लेखक कहता है कि जितने गुण ऋषियों-मुनियों में होते हैं, वे सब गधे में चरम तक पहुँचे हुए हैं, फिर भी उसे मूर्ख कहा जाता है। यहाँ एक सवाल छिपा है कि क्या इस संसार में सीधा होना घाटे का सौदा है। कहानी इस सवाल को केवल पशुओं तक नहीं रखती। यह पूरा अनुच्छेद एक भूमिका है, जो पाठक को बताती है कि आगे की कथा केवल पशुओं की नहीं होगी।
सीधेपन पर चोट: व्यंग्य की पहली झलक
गधे की बात करते-करते लेखक अचानक भारतवासियों पर आ जाता है। वह पूछता है कि अफ़्रीका में भारतीयों की इतनी बुरी दशा क्यों हो रही है, और अमरीका उन्हें अपने यहाँ आने क्यों नहीं देता। वे मेहनत करते हैं, थोड़ा पैसा बुरे दिनों के लिए बचाते हैं, झगड़ा नहीं करते और कड़वी बातें सुनकर भी चुप रह जाते हैं। फिर भी उन्हीं को बुरा कहा जाता है।
लेखक जापान का उदाहरण देता है, जिसे एक ही जीत ने सभ्य देशों में गिनवा दिया। मतलब यह कि दुनिया सीधेपन का आदर नहीं करती, ताक़त का करती है। यह बात सीधे-सीधे कही नहीं गई है; हल्के मज़ाक़ के भीतर रखकर कही गई है। ऊपर से हँसी हो और भीतर किसी अन्याय पर चोट, तो उसे व्यंग्य कहते हैं। प्रेमचंद ने इस व्यंग्य से उस समय के गुलाम भारत की ओर इशारा कर दिया है, जब देश अंग्रेज़ों के शासन में था।
बैल गधे से एक सीढ़ी नीचे क्यों
फिर लेखक बैल पर आता है और उसे गधे का छोटा भाई कहता है। जिस अर्थ में किसी को गधा कहा जाता है, लगभग उसी अर्थ में बछिया का ताऊ भी कहा जाता है। कुछ लोग बैल को मूर्खों में सबसे ऊपर रखेंगे, पर लेखक ऐसा नहीं मानता। वह कहता है कि बैल कभी-कभी मार देता है और कभी अड़ भी जाता है। वह कई तरीक़ों से अपना असंतोष दिखा देता है। इसलिए उसका दर्जा गधे से नीचा है।
यह तर्क उल्टा लगता है, और यही इसकी चतुराई है। जो जितना कम विरोध करे, वह उतना बड़ा मूर्ख माना जाता है। बैल थोड़ा विरोध कर लेता है, इसलिए वह पूरा मूर्ख नहीं है। यही विरोध आगे चलकर पूरी कहानी का बीज बनता है, क्योंकि हीरा और मोती बार-बार अन्याय का विरोध करते हैं।
हीरा और मोती: एक जोड़ी, दो मन
झूरी नाम के किसान के पास दो बैल थे, हीरा और मोती। दोनों पछाईं जाति के थे, यानी पश्चिमी इलाक़े की नस्ल के। वे देखने में सुंदर थे, काम में चौकन्ने थे और ऊँचे क़द के थे। बरसों साथ रहने से दोनों में भाई जैसा प्रेम हो गया था।
वे पास-पास बैठकर बिना बोले एक-दूसरे से बात कर लेते थे। लेखक इसे मूक-भाषा कहता है और मानता है कि यह शक्ति उन पशुओं के पास है, मनुष्य के पास नहीं। वे एक-दूसरे को चाटकर और सूँघकर प्रेम दिखाते थे। कभी-कभी सींग भी मिला लेते थे, पर लड़ने के लिए नहीं, खेल और अपनेपन के लिए। लेखक कहता है कि दोस्तों में ऐसी धौल-धप्पा न हो तो दोस्ती कुछ कच्ची-सी लगती है।
जब दोनों हल या गाड़ी में जोते जाते, तो हर एक की कोशिश रहती कि भार ज़्यादा उसकी अपनी गरदन पर आए। शाम को खुलते तो एक-दूसरे को चाटकर थकान उतारते। नाँद में चारा पड़ता तो दोनों साथ उठते, साथ खाते और साथ बैठते। एक मुँह हटाता तो दूसरा भी हटा लेता। ये छोटी-छोटी बातें मिलकर एक ऐसी दोस्ती बनाती हैं, जिसमें मेरा-तेरा नहीं बचता।
ससुराल की यात्रा और रात का निर्णय
एक दिन झूरी ने अपनी जोड़ी अपने ससुराल भेज दी। बैलों को कोई बताने वाला नहीं था कि उन्हें क्यों भेजा जा रहा है। उन्होंने मान लिया कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है। झूरी का साला गया उन्हें ले जा रहा था और उसे बहुत कठिनाई हुई। पीछे से हाँकता तो वे दाएँ-बाएँ भागते, आगे से खींचता तो पीछे ज़ोर लगाते। लेखक कहता है कि वे बोल पाते तो झूरी से पूछते कि उन्होंने तो कोई सेवा अधूरी नहीं छोड़ी, फिर उन्हें निकाला क्यों जा रहा है।
शाम को वे नए घर पहुँचे। दिन भर के भूखे थे, फिर भी नाँद में मुँह नहीं डाला। नया घर, नया गाँव और नए लोग, सब उन्हें पराए लगे। दोनों ने आँखों-आँखों में सलाह की। जब पूरा गाँव सो गया, तो उन्होंने ज़ोर लगाकर पगहे तोड़ दिए। पगहे मज़बूत थे, पर उस समय उनमें दुगुनी शक्ति आ गई थी, और वे अपने घर की ओर चल पड़े।
सुबह का दृश्य और दो तरह के भाव
सुबह झूरी उठा तो उसने पाया कि दोनों बैल अपनी चरनी पर आ खड़े हैं। गले में आधा-आधा टूटा गराँव लटक रहा था, पाँव घुटनों तक कीचड़ से सने थे, और आँखों में ऐसा स्नेह था जिसमें विद्रोह भी मिला था। यह वाक्य पढ़ते ही आँखों के सामने एक चित्र बन जाता है। भाषा की इस ख़ूबी को चित्रात्मकता कहते हैं।
झूरी प्रेम से भर गया और दौड़कर उन्हें गले लगा लिया। गाँव के लड़के इकट्ठे होकर तालियाँ बजाने लगे। बच्चों की सभा ने तय किया कि इन दोनों पशु-वीरों को अभिनंदन-पत्र मिलना चाहिए। कोई रोटी लाया, कोई गुड़, कोई चोकर और कोई भूसी। एक बच्चे ने तो यहाँ तक कह दिया कि ये पिछले जन्म के आदमी हैं।
पर घर में एक और भाव भी था। झूरी की पत्नी ने बैलों को दरवाज़े पर देखा तो गुस्से से भर उठी। उसने उन्हें नमकहराम कहा, क्योंकि एक दिन भी वहाँ काम किए बिना भाग आए थे। झूरी ने बचाव किया कि वहाँ चारा न मिला होगा। पत्नी ने ताना मारा और कहा कि अब इन्हें केवल सूखा भूसा मिलेगा। मज़दूर को कड़ा आदेश दे दिया गया। झूरी ने चुपके से खली डालने को कहा, तो मज़दूर ने मना कर दिया, क्योंकि उसे मालकिन का डर था।
एक ही घटना पर दो बिलकुल उल्टे भाव, एक ही घर में। कहानी के अभ्यास में इसे विरोधाभास कहा गया है। इसी भाव के कारण बैलों को अगले दिन फिर उसी जगह भेज दिया जाता है, और कहानी आगे बढ़ती है।
Concepts and terms
ऐसा कहना जिसमें ऊपर से हँसी या सीधी बात हो, पर भीतर किसी दोष या अन्याय पर चोट हो। कहानी गधे की बात करते-करते सीधे लोगों के साथ होने वाले अन्याय पर पहुँच जाती है।
बिना शब्दों के, आँखों, स्पर्श और हाव-भाव से की गई बातचीत। हीरा और मोती इसी से सलाह करते हैं, और इसी से लेखक उन्हें सोचने-समझने वाले पात्र बना देता है।
बैलों की जोड़ी। झूरी पूरी जोड़ी को ससुराल भेजता है, इसलिए दोनों बैल साथ ही जाते हैं और साथ ही लौटते हैं।
पगहा वह रस्सी है जिससे पशु बाँधा जाता है, और गराँव गले में पहनाई गई फंदेदार रस्सी। लौटे हुए बैलों के गले में आधा-आधा गराँव लटक रहा था।
नाँद मिट्टी का बड़ा, चौड़ा बरतन है जिसमें पशुओं को चारा दिया जाता है, और चरनी चारा देने की लंबी, ऊँची जगह। सुबह झूरी ने बैलों को चरनी पर खड़ा पाया।
सावधान
भ्रम और सच
Did you know
प्रेमचंद की कहानियाँ मानसरोवर नाम के आठ भागों में इकट्ठी की गई हैं। यह कहानी भी उन्हीं में मिलती है।
पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियों में पशु-पक्षी बोलते और सलाह करते हैं। प्रेमचंद ने इसी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया।
Memory tricks
इस भाग का क्रम: भे–भा–लौ–दो — भेजा, भागे, लौटे, दो भाव। झूरी ने भेजा, बैल रात में भागे, सुबह घर लौटे, और घर में दो भाव उठे — झूरी का स्नेह और पत्नी का क्रोध।
Practice MCQs with answers (25)
- A गधा और घोड़ा, दोनों में अधिक बोझ कौन उठाता है
- B गधे को रोज़ किस तरह की घास खिलानी चाहिए
- C गाँव में गधे पालना ठीक है या नहीं
- D क्या गधे को उसके सीधेपन ने मूर्ख कहलवाया
Show answer
Why:
लेखक यहीं से सीधेपन और अन्याय का सवाल उठाता है।
- A एक गहरा क्रोध
- B एक स्थायी उदासी
- C एक तेज़ चमक-दमक
- D एक हल्की मुस्कान
Show answer
Why:
सुख हो या दुख, उसके चेहरे का भाव नहीं बदलता।
- A यह बताने के लिए कि भारत में गधे सबसे अधिक पाले जाते हैं
- B पाठक को विदेशों के भूगोल की थोड़ी जानकारी देने
- C दोनों के सीधेपन के एक-से अनादर पर चोट करने
- D यह सिद्ध करने कि भारतवासी काम से जी चुराते हैं
Show answer
Why:
यह मज़ाक़ में छिपा व्यंग्य है।
- A कि दुनिया सीधेपन का नहीं, ताक़त का आदर करती है
- B कि जापान में पशुओं के साथ सबसे अच्छा व्यवहार होता है
- C कि जापान के लोग भारतीयों से अधिक मेहनती हैं
- D कि जापान ने भारत से कोई बड़ा युद्ध जीता था
Show answer
Why:
एक ही जीत ने उसे सभ्य देशों में गिनवा दिया।
- A अतिशयोक्ति
- B चित्र-शैली
- C संवाद
- D व्यंग्य
Show answer
Why:
ऊपर हँसी हो और भीतर चोट, तो वह व्यंग्य है।
- A वह गधे की तुलना में बहुत कम बोझ उठा पाता है
- B वह कभी-कभी मारकर या अड़कर असंतोष दिखाता है
- C उसे गधे से कहीं अधिक चारा खिलाना पड़ता है
- D वह गधे से अधिक सुंदर नहीं दिखाई देता
Show answer
Why:
जो जितना कम विरोध करे, उसे उतना बड़ा मूर्ख माना जाता है।
- A बहुत बलवान
- B बहुत लालची
- C भोला या मूर्ख
- D बड़ा चालाक
Show answer
Why:
यह मुहावरा लगभग गधा कहने के ही अर्थ में आता है।
- A वे दो अलग किसानों के बैल थे
- B वे दोनों पश्चिम की पछाईं जाति के थे
- C वे देखने में सुंदर और क़द में ऊँचे थे
- D बरसों साथ रहने से उनमें भाईचारा था
Show answer
Why:
दोनों झूरी के ही बैल थे।
- A मनुष्य की, जो पशुओं को सिखाता है
- B केवल बूढ़े और अनुभवी बैलों की
- C उन पशुओं की, जो मनुष्य के पास नहीं
- D झूरी की, जो मन की बात पढ़ता था
Show answer
Why:
यहाँ ख़ुद को श्रेष्ठ कहने वाले मनुष्य पर भी हल्की चोट है।
- A एक-दूसरे से नाँद का अपना हिस्सा छीनने के लिए
- B खेल-खेल में, अपनेपन और विनोद के भाव से
- C मालिक को अपनी बढ़ती ताक़त दिखाने के लिए
- D आपस में धीरे-धीरे बढ़ती दुश्मनी के कारण
Show answer
Why:
लेखक साफ़ कहता है कि यह लड़ाई नहीं थी।
- A जुते हुए बैलों का अधिक बोझ अपनी गरदन पर चाहना
- B बैलों का नए घर में भूखे रहकर भी नाँद में मुँह न डालना
- C झूरी का सुबह लौटे हुए बैलों को दौड़कर गले लगाना
- D मज़दूर का चुपके से खली डालने से साफ़ मना करना
Show answer
Why:
दोनों दोस्ती में अपना हिस्सा कम नहीं, ज़्यादा लेना चाहती हैं।
- A दोनों को रोज़ ठीक एक ही समय पर भूख लगती थी
- B नाँद में डाला गया चारा हमेशा बहुत कम होता था
- C दूसरा बैल पहले बैल से मन ही मन डरता था
- D दोनों का खाना-पीना तक एक-दूसरे से बँधा था
Show answer
Why:
यह गहरे साथ का एक छोटा-सा प्रमाण है।
- A पास के मेले में
- B गाँव के काँजीहौस में
- C अपने ससुराल
- D किसी कसाई के पास
Show answer
Why:
वह उन्हें अपने साले गया के साथ भेजता है।
- A किसी ने बताया नहीं कि क्यों भेजा जा रहा है
- B गया ने उनसे साफ़-साफ़ कह दिया था कि वे बिक गए
- C झूरी ने उनके सामने बैठकर पूरे दाम गिनवाए थे
- D उन्हें बाज़ार में खड़ा करके बोली लगाई गई थी
Show answer
Why:
बिना बताए भेजे जाने से उन्होंने अपना अर्थ निकाल लिया।
- A नौ-दो-ग्यारह होना
- B जान हथेली पर रखना
- C बगलें झाँकने लगना
- D दाँतों पसीना आना
Show answer
Why:
इसका अर्थ है बहुत कठिनाई होना।
- A नाँद में पड़ा चारा सड़ा हुआ और गिनती में बहुत कम था
- B अपना घर छूट जाने का गहरा दुख और पराया माहौल
- C वे रास्ते में पहले ही पेट भरकर खा चुके थे
- D गया ने उन्हें खाने से पहले बहुत मारा था
Show answer
Why:
दिल भारी था, इसलिए भूख पीछे छूट गई।
- A गया ने रात में पगहे जान-बूझकर ढीले छोड़ दिए थे
- B रस्सियाँ बहुत पहले से पुरानी और गली हुई थीं
- C घर लौटने की इच्छा ने दुगुनी शक्ति भर दी थी
- D झूरी आधी रात को आकर उन्हें खोल गया था
Show answer
Why:
मन की ताक़त शरीर की ताक़त बढ़ा देती है।
- A केवल गहरा डर
- B विद्रोह से भरा स्नेह
- C लंबी यात्रा की थकान
- D चारे की बहुत भूख
Show answer
Why:
प्रेम झूरी के लिए था, विद्रोह भेजे जाने के विरुद्ध।
- A चित्रात्मकता, क्योंकि दृश्य आँखों के सामने बनता है
- B संवादात्मकता, क्योंकि यहाँ पात्र आपस में लंबी बातें करते हैं
- C अतिशयोक्ति, क्योंकि हर बात असंभव ढंग से बढ़ाई गई है
- D व्यंग्य, क्योंकि यहाँ किसी कुरीति पर सीधी चोट है
Show answer
Why:
शब्दों से चित्र बनाना चित्रात्मकता है।
- A उन्हें मारकर कसकर बाँध दिया
- B उन्हें तुरंत गया को लौटा दिया
- C उन्हें बेचने की बात सोचने लगा
- D दौड़कर उन्हें गले लगा लिया
Show answer
Why:
वह स्नेह से गद्गद हो गया।
- A बैलों में मनुष्य जैसी समझ और वफ़ादारी दिखी
- B बच्चे बैलों से डरते थे और उन्हें भूत-प्रेत मानते थे
- C बच्चे सबके सामने झूरी का मज़ाक़ उड़ाना चाहते थे
- D बच्चों को पहले से पता था कि बैल बिक चुके हैं
Show answer
Why:
इतनी दूर से अकेले लौट आना उन्हें अद्भुत लगा।
- A दोनों ने गले लगाकर स्वागत किया
- B दोनों ने केवल सूखा भूसा देने को कहा
- C झूरी नाराज़ हुआ, पत्नी ने बचाव किया
- D झूरी स्नेह से भरा, पत्नी ने नमकहराम कहा
Show answer
Why:
यही विरोधाभास इस भाग की धुरी है।
- A वहाँ उन्हें कई दिन तक चारा बिलकुल नहीं दिया गया
- B वहाँ जमकर काम लिया जाता, और ये कामचोर थे
- C वहाँ के लोगों ने उन्हें बहुत बुरी तरह मारा-पीटा
- D वहाँ के सब लोग उनके सींगों से बहुत डर गए थे
Show answer
Why:
झूरी चारे की बात कहता है, पत्नी काम की।
- A गया
- B बैलों
- C मालकिन
- D गाँव वालों
Show answer
Why:
उसे डर था कि मालकिन उसे मार डालेगी।
- A पत्नी के कहने पर झूरी बैलों को उसी दिन बेच देता है
- B पत्नी ख़ुद बैलों को लेकर अपने मायके चली जाती है
- C गाँव वाले मिलकर पत्नी को समझा लेते हैं और सब ठीक हो जाता है
- D बैलों को फिर गया के घर भेजने का रास्ता खुलता है
Show answer
Why:
अगले भाग में गया फिर आता है और बैलों को ले जाता है।
Important short questions (7)
यह आगे की कहानी की भूमिका है। गधे के सीधेपन के बहाने लेखक पूछता है कि क्या संसार में सीधा होना घाटे का सौदा है। यही सवाल आगे हीरा-मोती और उस समय के भारत तक जाता है।
भारतीय मेहनती, शांत और बचत करने वाले हैं, फिर भी विदेशों में उनकी दुर्दशा है। लेखक कहता है कि वे पत्थर का जवाब पत्थर से देते तो सभ्य कहलाते। यह दुनिया की सोच पर चोट है।
पहला, दोनों चाहते थे कि ज़्यादा बोझ उसकी अपनी गरदन पर आए। दूसरा, वे साथ खाते थे और एक नाँद से मुँह हटाता तो दूसरा भी हटा लेता।
उन्हें किसी ने नहीं बताया था कि क्यों भेजा जा रहा है। उन्होंने मान लिया कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है, और अपना घर छोड़ना उन्हें मंज़ूर नहीं था।
टूटा गराँव, घुटनों तक कीचड़ से सने पाँव और आँखों का भाव पढ़ते ही पूरा दृश्य आँखों के सामने बन जाता है। शब्दों से ऐसा चित्र खड़ा करना ही चित्रात्मकता है।
बच्चों ने तालियाँ बजाईं और तय किया कि दोनों पशु-वीरों को अभिनंदन-पत्र दिया जाए। कोई रोटी, कोई गुड़, कोई चोकर और कोई भूसी लाया।
उसे लगा कि बैल बिना एक दिन काम किए भाग आए हैं, इसलिए वे कामचोर और नमकहराम हैं। उसने उन्हें सज़ा के रूप में केवल सूखा भूसा देने का आदेश दिया।
Long answer questions (3)
ऊपर से यह भाग गधे और बैल की हल्की-फुल्की तुलना लगता है। गधा सबसे सीधा है, कभी क्रोध नहीं करता, इसलिए उसे सबसे बड़ा मूर्ख कहा जाता है। बैल कभी-कभी विरोध कर लेता है, इसलिए उसे गधे से नीचे रखा जाता है। पर इसके भीतर एक गंभीर सवाल है कि क्या सीधापन संसार में ठीक नहीं बैठता। लेखक इसी बहाने उन भारतीयों की बात करता है जो मेहनती और शांत होकर भी विदेशों में अपमानित होते हैं। जापान के उदाहरण से वह बताता है कि दुनिया ताक़त का आदर करती है। यह हँसी के भीतर रखी चोट है, जिसे व्यंग्य कहते हैं, और यह गुलाम भारत की दशा की ओर इशारा करती है।
हीरा और मोती पछाईं जाति के सुंदर, चौकन्ने और ऊँचे बैल थे। बरसों साथ रहने से उनमें भाईचारा हो गया था। वे मूक-भाषा में बात करते, एक-दूसरे को चाटते और खेल में सींग मिलाते थे। काम में दोनों अधिक बोझ अपनी गरदन पर चाहते थे, और साथ खाते-बैठते थे। यह दोस्ती आगे की हर घटना की नींव है। ससुराल से साथ भागना, गया के घर में साथ विरोध करना, साँड़ से साथ लड़ना और संकट में एक-दूसरे को न छोड़ना, ये सब इसी दोस्ती से निकलते हैं। अगर दोनों का मन एक न होता, तो कहानी की कोई भी बड़ी घटना संभव न होती।
झूरी ने बैलों को देखा तो स्नेह से गद्गद हो गया और दौड़कर उन्हें गले लगा लिया। उसके लिए यह लौटना वफ़ादारी का प्रमाण था। गाँव के बच्चों ने इसे एक उत्सव बना दिया। उन्होंने तालियाँ बजाईं, अभिनंदन-पत्र देने का निश्चय किया और रोटी, गुड़, चोकर लेकर आए। एक बच्चे ने तो बैलों को पिछले जन्म का आदमी कह दिया। इसके उलट झूरी की पत्नी गुस्से से भर उठी। उसने बैलों को नमकहराम और कामचोर कहा और केवल सूखा भूसा देने का आदेश दिया। इस तरह एक ही घटना पर स्नेह, उत्साह और क्रोध, तीन भाव दिखते हैं, और पत्नी का क्रोध ही कहानी को आगे बढ़ाता है।
Flashcards (17)
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- पहली वापसी का क्रम
- शब्द और अर्थ
- किसका भाव
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
गया के घर से साँड़ तक
गया के घर बैलों को मार और सूखा भूसा मिलता है, पर भैरो की छोटी लड़की उन्हें रोटियाँ खिलाती है और एक रात खोल देती है। भागते हुए वे रास्ता भूलते हैं, एक साँड़ को मिलकर हराते हैं और मटर के खेत में पकड़े जाते हैं।
What you will be able to do
- गया के घर बैलों के साथ हुए अपमान और उनके विरोध को समझा सकूँगा।
- छोटी लड़की और बैलों के बीच के अपनेपन का कारण बता सकूँगा।
- हीरा और मोती के स्वभाव का अंतर उदाहरण देकर लिख सकूँगा।
- साँड़ से लड़ाई में एकता और योजना की भूमिका समझा सकूँगा।
- हीरा के बताए नियमों से कहानी के मूल्य पहचान सकूँगा।
Key points
गया ने बैलों को गाड़ी और हल में जोता, मोटी रस्सियों से बाँधा और केवल सूखा भूसा दिया।
मोती ने गाड़ी को खाई में गिराना चाहा, पर अधिक सहनशील हीरा ने उसे सँभाल लिया।
हीरा की नाक पर डंडे पड़े तो मोती हल लेकर भागा, और हल-रस्सी सब टूट गए।
भैरो की छोटी लड़की, जिसकी माँ नहीं थी और सौतेली माँ मारती थी, रोज़ उन्हें दो रोटियाँ खिलाती थी।
हीरा ने मोती को रोका, क्योंकि मालिक को मारने से लड़की अनाथ हो जाती और स्त्री पर सींग चलाना मना है।
लड़की ने गराँव खोला और फिर ख़ुद शोर मचाया, ताकि उस पर किसी को संदेह न हो।
भागते-भागते बैल रास्ता भूल गए, और मटर के खेत में पेट भरकर उन्होंने आज़ादी का अनुभव किया।
एक भारी साँड़ से दोनों ने आगे-पीछे से मिलकर हमला किया, और साँड़ हारकर भाग गया।
मोती के मटर खेत में घुसने पर वह कीचड़ में फँसा, और हीरा उसे छोड़कर नहीं गया।
Full explanation
गया के घर दूसरी बार
अगले दिन झूरी का साला गया फिर आया और बैलों को ले गया। इस बार उसने उन्हें गाड़ी में जोता। रास्ते में मोती ने दो-चार बार गाड़ी को सड़क के किनारे की खाई में गिराने की कोशिश की, पर हीरा ने हर बार सँभाल लिया। कहानी बताती है कि हीरा अधिक सहनशील था। यहीं से दोनों के स्वभाव का अंतर साफ़ होने लगता है: मोती जल्दी भड़कता है, हीरा धैर्य रखता है।
शाम को घर पहुँचकर गया ने दोनों को मोटी रस्सियों से बाँधा और पिछले दिन की शरारत की सज़ा दी। उनके सामने फिर सूखा भूसा डाला गया, जबकि अपने बैलों को उसने खली, चूनी सब कुछ दिया। बैलों ने ऐसा अपमान पहले कभी नहीं सहा था। लेखक कहता है कि झूरी उन्हें फूल की छड़ी से भी नहीं छूता था और उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। यह बात बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है, ताकि दोनों घरों का अंतर ज़्यादा चुभे। ऐसे बढ़ाकर कहने को अतिशयोक्ति कहते हैं।
अगले दिन गया ने उन्हें हल में जोता, पर दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की क़सम खा ली थी। गया मारते-मारते थक गया। जब उसने हीरा की नाक पर ज़ोर से डंडे मारे, तो मोती का गुस्सा क़ाबू से बाहर हो गया। वह हल लेकर भागा, और हल, रस्सी, जुआ सब टूट-फूट गए। गले में मोटी रस्सियाँ न होतीं, तो वे पकड़ में न आते।
मोती का गुस्सा, हीरा का धैर्य
पकड़े जाने से पहले दोनों की बातचीत में उनके स्वभाव पूरे दिखते हैं। हीरा कहता है कि भागना बेकार है। मोती जवाब देता है कि गया ने तो हीरा की जान ही ले ली थी। गया दो आदमियों के साथ लाठियाँ लेकर आता दिखता है, तो मोती कहता है कि वह भी कुछ मज़ा चखा दे। हीरा उसे रोकता है और कहता है कि यह उनकी जाति का धर्म नहीं है। मोती मन ही मन ऐंठकर रह जाता है।
इस छोटी बातचीत से एक बात समझ आती है। मोती अन्याय का जवाब तुरंत ताक़त से देना चाहता है, जबकि हीरा कुछ नियमों से बँधा है। दोनों अन्याय का विरोध करते हैं, पर अलग-अलग ढंग से। हीरा का विरोध काम न करने और भागने तक है; मोती का विरोध सींग चलाने तक जाना चाहता है। कहानी किसी एक को पूरी तरह सही या ग़लत नहीं ठहराती। आगे चलकर कभी मोती का साहस काम आता है और कभी हीरा का धैर्य।
भैरो की बेटी: एक छोटा सहारा
उस रात फिर वही सूखा भूसा सामने आया और दोनों चुप खड़े रहे। तभी घर से एक छोटी लड़की दो रोटियाँ लेकर आई, उन्हें खिलाया और लौट गई। एक रोटी से भूख क्या मिटती, पर बैलों के मन को जैसे भोजन मिल गया। उन्हें लगा कि इस घर में भी कोई भला मन रहता है।
यह लड़की भैरो की बेटी थी। उसकी माँ मर चुकी थी, और सौतेली माँ उसे मारती रहती थी। इसलिए उसे इन बैलों से एक ख़ास अपनापन हो गया था। दोनों अपने-अपने ढंग से एक ही दुख सह रहे थे, बिना प्यार के और बिना अपनी मर्ज़ी के। अब यह रोज़ का क्रम बन गया। दिन में बैल जोते जाते, डंडे खाते और अड़ते। रात को वही लड़की उन्हें दो रोटियाँ खिला जाती। लेखक कहता है कि प्रेम के इस प्रसाद की बरकत से सूखा भूसा खाकर भी वे कमज़ोर नहीं हुए, पर उनके रोम-रोम में विद्रोह भरता जा रहा था।
मारें या भागें: हीरा के नियम
एक दिन मोती ने कहा कि अब सहा नहीं जाता, और वह किसी एक को सींगों पर उठाकर फेंक देगा। हीरा ने उसे याद दिलाया कि जो लड़की उन्हें रोटियाँ खिलाती है, वह इसी घर के मालिक की बेटी है। मालिक को कुछ हुआ तो वह बेचारी अनाथ हो जाएगी। मोती ने कहा कि तो फिर मालकिन को ही फेंक दे, क्योंकि वही लड़की को मारती है। हीरा ने कहा कि स्त्री पर सींग चलाना मना है।
तब दोनों ने रस्सी तुड़ाकर भागने का निश्चय किया। हीरा ने उपाय बताया कि पहले रस्सी को थोड़ा चबा लिया जाए, फिर एक झटके में वह टूट जाएगी। रात को दोनों ने रस्सियाँ चबाने की कोशिश की, पर मोटी रस्सी मुँह में ठीक से आती ही नहीं थी। यहाँ हीरा के नियम ध्यान देने लायक़ हैं। वह अन्याय से निकलना चाहता है, पर उस लड़की को कोई दुख नहीं देना चाहता जिसने उन पर दया की।
लड़की ने खोला, लड़की ने ही शोर मचाया
अचानक घर का दरवाज़ा खुला और वही लड़की बाहर आई। दोनों ने सिर झुकाकर उसका हाथ चाटा, और उनकी पूँछें खड़ी हो गईं। लड़की ने बताया कि घर के लोग इनकी नाक में नाथ डालने की तैयारी में हैं। उसने कहा कि वह उन्हें खोल देती है और वे चुपके से भाग जाएँ, नहीं तो लोग उन्हें मार डालेंगे। उसने गराँव खोल दिया।
पर बैल वहीं खड़े रहे। हीरा को चिंता थी कि सुबह सब इस अनाथ लड़की पर ही शक करेंगे। तभी लड़की ने ख़ुद ज़ोर से चिल्लाना शुरू कर दिया कि फूफा वाले बैल भागे जा रहे हैं। यह बहुत समझदारी भरा क़दम था। शोर मचाकर उसने अपने ऊपर से शक हटा दिया, और बैलों को भागने का मौक़ा भी दे दिया। गया उनके पीछे दौड़ा, फिर गाँव के लोगों को साथ लेने लौटा, और इतने में दोनों निकल गए।
रास्ता भूलना और आज़ादी का स्वाद
बैल सीधे दौड़ते गए और इतने आगे निकल गए कि जाना-पहचाना रास्ता पीछे छूट गया। नए-नए गाँव आने लगे। एक खेत के किनारे रुककर वे सोचने लगे कि अब क्या करें। मोती ने कहा कि गया को वहीं मार गिराना था। हीरा ने कहा कि वह अपना धर्म छोड़ दे, तो भी वे अपना धर्म क्यों छोड़ें। यह हीरा के नियमों की एक और कड़ी है।
दोनों भूख से बेहाल थे। सामने मटर का खेत था, और वे चरने लगे। पेट भरा तो उन्हें आज़ादी का अनुभव हुआ और वे मस्ती में उछलने-कूदने लगे। खेल में सींग मिलाए, तो मोती ने हीरा को इतना धकेला कि वह एक खाई में गिर गया। हीरा को गुस्सा आया, पर मोती ने देखा कि खेल झगड़े में बदल रहा है, और वह किनारे हट गया। दोस्ती में यह समझ भी ज़रूरी है कि कब रुकना है।
साँड़ से मुक़ाबला: मिलकर लड़ने की ताक़त
तभी एक भारी साँड़ उनकी ओर आता दिखा। वह इतना बड़ा था कि लेखक उसे पूरा हाथी कहता है। उससे भिड़ना जान गँवाना था, और न भिड़ना भी बचाव नहीं था। मोती ने भागने की बात कही, पर हीरा ने भागने को कायरता कहा। फिर हीरा ने योजना बताई: दोनों एक साथ चोट करेंगे, एक आगे से और दूसरा पीछे या बगल से। दोहरी मार पड़ेगी, तो साँड़ भाग जाएगा।
यही हुआ। साँड़ एक-एक दुश्मन से कुश्ती लड़ने का आदी था, उसे संगठित दुश्मनों का अनुभव नहीं था। वह एक की ओर मुड़ता, तो दूसरा पीछे से वार करता। आख़िर वह घायल होकर भागा, और बेदम होकर गिर पड़ा। मोती का मन था कि उसे मार ही डाले, पर हीरा ने कहा कि गिरे हुए शत्रु पर सींग नहीं चलाने चाहिए। यह प्रसंग बताता है कि बड़ी ताक़त के सामने भी एकता और योजना जीत सकती है।
मटर का खेत फिर: दोस्ती की परीक्षा
भूख फिर लगी, और मोती फिर मटर के खेत में घुस गया। हीरा मना करता रहा, पर मोती ने नहीं सुना। अभी कुछ ही कौर खाए थे कि दो आदमी लाठियाँ लेकर दौड़े और दोनों को घेर लिया। हीरा मेड़ पर था, इसलिए निकल गया। मोती सींचे हुए गीले खेत में था, उसके खुर कीचड़ में धँस गए और वह पकड़ा गया।
हीरा ने देखा कि उसका साथी संकट में है, तो वह लौट आया। उसका मन कहता था कि फँसेंगे तो दोनों साथ फँसेंगे। रखवालों ने उसे भी पकड़ लिया, और सुबह दोनों को काँजीहौस में बंद कर दिया गया। यह भाग दोस्ती की सबसे बड़ी परीक्षा पर ख़त्म होता है। हीरा के पास भागने का रास्ता था, फिर भी उसने अपने मित्र को अकेला नहीं छोड़ा।
Concepts and terms
कष्ट और अन्याय को धैर्य से सह लेना और तुरंत क्रोध में न आना। हीरा मोती से अधिक सहनशील है; वह गाड़ी को खाई में गिरने से बचाता है और मारने की बात पर मोती को रोकता है।
अपनापन, किसी के साथ मन का जुड़ाव। भैरो की लड़की और बैल दोनों अत्याचार सह रहे थे, इसलिए उनके बीच बिना शब्दों के अपनापन बन गया।
हीरा के कुछ नियम हैं, जिन्हें वह किसी हाल में नहीं तोड़ता: स्त्री पर सींग न चलाना, गिरे हुए शत्रु को न मारना, और दूसरा धर्म छोड़ दे तो भी अपना न छोड़ना।
मिलकर, योजना बनाकर किया गया काम। साँड़ एक-एक दुश्मन से लड़ने का आदी था; दोनों बैलों के एक साथ आगे और बगल से हमले ने उसे हरा दिया।
भूखे बैलों ने पहली बार मटर खाकर आज़ादी का अनुभव किया, पर दूसरी बार वही खेत संकट बना। हीरा मेड़ पर था और निकल गया, मोती कीचड़ में धँस गया।
सावधान
भ्रम और सच
करके देखो
Title:
मिलकर हल करो
Safety:
कक्षा का सामान उठाते समय भारी चीज़ें अकेले न उठाएँ; शिक्षक की अनुमति से ही काम करें।
What You Notice:
अधिकतर बार मिलकर, योजना से किया गया काम जल्दी और बेहतर होता है। हीरा-मोती ने साँड़ को भी इसी तरह हराया था।
Did you know
नाक में नाथ डालने का अर्थ है बैल की नाक छेदकर उसमें रस्सी डालना, ताकि उसे क़ाबू में रखा जा सके। लड़की ने यही सलाह सुनकर बैलों को खोल दिया था।
कहानी में बैलों की लड़ाई केवल ताक़त से नहीं जीती गई। साँड़ एक-एक करके लड़ने का आदी था, इसलिए दो ओर से एक साथ हमला उस पर भारी पड़ा।
Memory tricks
इस भाग की चार घटनाएँ: मा–रो–सा–म — मार, रोटी, साँड़, मटर। गया की मार, लड़की की रोटी, साँड़ से लड़ाई, और मटर के खेत में पकड़े जाना।
Practice MCQs with answers (25)
- A हीरा ने
- B मोती ने
- C गया ने
- D भैरो ने
Show answer
Why:
हीरा अधिक सहनशील था।
- A गाँव के बच्चों का उन्हें देखकर हँसना
- B मार के साथ भेदभाव और सूखा भूसा
- C स्त्रियों का उनसे दूर रहना
- D गले की घंटियाँ उतरवा लेना
Show answer
Why:
अपने बैलों को खली-चूनी और इन्हें सूखा भूसा, यह अपमान था।
- A चित्रात्मकता
- B संवादात्मकता
- C विरोधाभास
- D अतिशयोक्ति
Show answer
Why:
बात को बढ़ाकर कहा गया है।
- A बहुत तेज़ी से चलकर सारा खेत एक दिन में जोत डाला
- B गया को देखते ही चुपचाप रस्सी तोड़कर भाग गए
- C पाँव न उठाने की ठान ली, चाहे जितनी मार पड़े
- D खेत के बीच में ही बैठकर ज़ोर-ज़ोर से रँभाने लगे
Show answer
Why:
गया मारते-मारते थक गया, पर उन्होंने पाँव नहीं उठाया।
- A हीरा की नाक पर पड़े डंडों पर उसका गुस्सा फूटा
- B उसे खेत में दूर कोई साँड़ आता दिखाई दिया था
- C उसे गया के घर का सूखा भूसा बहुत बुरा लगा था
- D उसे लगा कि झूरी उसे खेत के उस पार बुला रहा है
Show answer
Why:
उसका गुस्सा अपने लिए नहीं, मित्र के लिए था।
- A तुरंत खेत छोड़कर दूर जंगल की ओर तेज़ी से भाग चले
- B हमला न करे, यह उनकी जाति का धर्म नहीं
- C आगे बढ़कर पहले गया को ही गिरा दे
- D लाठी वालों के आने तक चुपचाप बैठा रहे
Show answer
Why:
हीरा अपने नियमों से बँधा है।
- A हीरा जल्दी भड़कता है, मोती हर बात सह लेता है
- B दोनों का स्वभाव बिलकुल एक जैसा, बिना किसी अंतर का है
- C दोनों में से कोई भी अन्याय का विरोध नहीं करता
- D मोती जल्दी भड़कता है, हीरा अधिक धैर्यवान है
Show answer
Why:
दोनों विरोध करते हैं, पर अलग ढंग से।
- A बैल उसे उपहार में मिले थे
- B उसे बैल चराने का काम मिला था
- C वह भी बिन माँ के, मार सहती थी
- D झूरी ने ध्यान रखने को कहा था
Show answer
Why:
दोनों एक ही तरह का दुख सह रहे थे।
- A रोटी इतनी बड़ी थी कि पेट पूरी तरह भर गया
- B उन्होंने रोटी खाने के बाद नाँद का सूखा भूसा भी खा लिया
- C रोटी के साथ लड़की ने उन्हें गुड़ भी खिला दिया था
- D लड़की का प्रेम पाकर उनका मन तृप्त हो गया
Show answer
Why:
यहाँ भूख मन की है, पेट की नहीं।
- A मालिक बहुत बलवान है और जवाब में उन्हें मार देगा
- B तब रोटी देने वाली लड़की अनाथ हो जाएगी
- C गाँव वाले मिलकर उन्हें तुरंत कसाई को बेच देंगे
- D झूरी को यह बात पता चली तो वह बहुत नाराज़ होगा
Show answer
Why:
हीरा उस पर दया करने वाली का भला सोचता है।
- A स्त्री पर सींग चलाना मना है
- B घर के मालिक की हर बात माननी चाहिए
- C रात में किसी पर हमला नहीं करना चाहिए
- D भूखे रहकर लड़ना नहीं चाहिए
Show answer
Why:
यह हीरा के नियमों में से एक है।
- A पूरी रात भर रँभाकर सबको जगा देना
- B लड़की से कैंची मँगवा लेना
- C पहले चबाकर, फिर एक झटके में तोड़ना
- D नाँद उलटकर दीवार गिरा देना
Show answer
Why:
पर मोटी रस्सी मुँह में ठीक से आई ही नहीं।
- A उनकी नाक में नाथ डालने की सलाह के बारे में
- B कल सुबह उन्हें गाँव के मेले में बेच देने की योजना
- C गया के बैलों के साथ उनकी लड़ाई करवाने की बात
- D उन्हें अगले दिन वापस झूरी के घर भेजने की तैयारी
Show answer
Why:
इसलिए वह कहती है कि भाग जाओ।
- A अँधेरे में घर का रास्ता नहीं दिख रहा था
- B वे थके थे और आराम चाहते थे
- C लगा कि लड़की मज़ाक़ कर रही है
- D सबका शक लड़की पर जाने की चिंता थी
Show answer
Why:
हीरा इस अनाथ पर आफ़त नहीं चाहता था।
- A उसके डर का, क्योंकि वह बैलों से बहुत डरती थी
- B उसकी समझदारी का, जिससे शक उस पर न जाए
- C उसके छल का, क्योंकि वह बैलों को पकड़वाना चाहती थी
- D उसके भोलेपन का, क्योंकि उसे कुछ समझ नहीं थी
Show answer
Why:
खोला भी उसी ने, और शक भी उसी ने हटाया।
- A झूरी की पत्नी और मज़दूर के बीच का संबंध
- B गया और उसके अपने बैलों के बीच का संबंध
- C भैरो की बेटी और बैलों का अपनापन
- D साँड़ और दोनों बैलों के बीच का संबंध
Show answer
Why:
एक-सा दुख अपनापन पैदा कर देता है।
- A उसे मारते तो गाँव वाले हमें ज़िंदा न छोड़ते
- B वह बहुत ताक़तवर था और हम दोनों थके हुए थे
- C हमें भागने में देर हो जाती और लड़की पकड़ी जाती
- D वह अपना धर्म छोड़ दे, पर हम अपना क्यों छोड़ें
Show answer
Why:
हीरा अपने नियम हर हाल में निभाता है।
- A गहरी नींद का
- B आज़ादी का
- C घर की याद का
- D नई थकान का
Show answer
Why:
वे मस्त होकर उछलने-कूदने लगे।
- A हीरा को धक्का देकर और नीचे गिरा दिया
- B दौड़कर अकेला ही घर भाग गया
- C खेल को झगड़ा बनते देखकर किनारे हट गया
- D हीरा से लड़ने के लिए सींग तान लिए
Show answer
Why:
दोस्ती में रुकने की समझ भी ज़रूरी है।
- A संकट से भागने के बजाय सामना करना वीरता है
- B साँड़ इतना धीमा था कि उससे भागना बेकार था
- C उसे विश्वास था कि साँड़ उन्हें कभी नहीं मारेगा
- D मटर का खेत छोड़कर जाने का उसका मन नहीं था
Show answer
Why:
वह योजना बनाकर लड़ने की बात करता है।
- A साँड़ पहले से बहुत बीमार और कमज़ोर था
- B दो ओर से एक साथ, योजना से हमला
- C गाँव के रखवाले लाठियाँ लेकर उनकी मदद को आए
- D साँड़ ने लड़ाई के बीच में ही हार मान ली थी
Show answer
Why:
साँड़ संगठित शत्रुओं से लड़ने का आदी नहीं था।
- A हीरा उसे मारना चाहता था, मोती ने उस पर दया की
- B दोनों उसे वहीं मारकर आगे निकल जाना चाहते थे
- C मोती उसे मारना चाहता था, हीरा ने मना किया
- D दोनों उसे साथ लेकर अपने घर ले जाना चाहते थे
Show answer
Why:
हीरा: गिरे हुए शत्रु पर सींग नहीं चलाना चाहिए।
- A हीरा तेज़ था, मोती बूढ़ा हो चुका था
- B रखवालों ने हीरा को पहचानकर छोड़ा
- C मोती ने ख़ुद जाकर हार मान ली
- D हीरा मेड़ पर था, मोती गीले खेत में धँसा
Show answer
Why:
सींचे हुए खेत के कीचड़ में खुर धँस गए।
- A संकट में मित्र का साथ निभाने के रूप में
- B मूर्खता के रूप में, वह बच सकता था
- C डर के रूप में, कि अकेला न रहे
- D चाल के रूप में, रखवालों को छलने की
Show answer
Why:
फँसेंगे तो दोनों फँसेंगे।
- A गया की गोशाला में
- B झूरी के थान पर
- C मेले के बाड़े में
- D काँजीहौस में
Show answer
Why:
काँजीहौस में दूसरों का खेत चरने वाले पशु बंद किए जाते हैं।
Important short questions (7)
उन्हें गाड़ी और हल में जोतकर बहुत मारा गया और मोटी रस्सियों से बाँधा गया। उनके सामने सूखा भूसा डाला गया, जबकि गया के अपने बैलों को खली-चूनी मिली।
जब गया ने हीरा की नाक पर ज़ोर से डंडे मारे। तब मोती हल लेकर भागा और हल, रस्सी, जुआ सब टूट-फूट गया।
वह ख़ुद मार सहती थी, फिर भी भूखे बैलों को रोज़ रोटियाँ खिलाती थी। उसने उन्हें नाथ डाले जाने से बचाने के लिए खोल दिया और अपने ऊपर से शक भी हटा दिया।
पहला, स्त्री पर सींग नहीं चलाना चाहिए। दूसरा, गिरे हुए शत्रु पर वार नहीं करना चाहिए। वह यह भी मानता है कि दूसरा धर्म छोड़ दे, तब भी अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहिए।
पहला, सबको लगा कि बैल अपने आप भागे हैं, इसलिए लड़की पर शक नहीं गया। दूसरा, गया पहले पीछे दौड़ा और फिर लोगों को बुलाने लौटा, जिससे बैलों को निकलने का समय मिल गया।
बड़ी ताक़त के सामने भी एकता और योजना से जीता जा सकता है। साँड़ एक-एक से लड़ने का आदी था, पर दो ओर से एक साथ हमले के आगे वह टिक नहीं पाया।
हीरा मेड़ पर होने से बच निकला था, पर मोती कीचड़ में फँस गया। हीरा ने उसे अकेला नहीं छोड़ा और लौटकर ख़ुद भी पकड़ा गया। संकट में साथ निभाना ही सच्ची दोस्ती है।
Long answer questions (3)
मोती का विरोध तुरंत और ताक़त वाला है। उसने गाड़ी को खाई में गिराना चाहा, हीरा पर मार पड़ते ही हल लेकर भागा, और गया तथा मालकिन को सींगों पर उठाने की बात कही। हीरा का विरोध धैर्य और नियमों वाला है। उसने काम में पाँव न उठाकर विरोध किया, भागने की योजना बनाई, पर लड़की को अनाथ करने या स्त्री पर सींग चलाने से मना किया। साँड़ के सामने हीरा की योजना और मोती का साहस मिलकर काम आए। इस तरह दोनों के ढंग अलग हैं, पर दोनों एक-दूसरे की कमी पूरी करते हैं।
लड़की छोटी है और कहानी में थोड़ी देर ही आती है, पर उसका असर बड़ा है। उसकी माँ नहीं है और सौतेली माँ उसे मारती है, इसलिए वह बैलों का दुख समझती है। वह रोज़ रात उन्हें दो रोटियाँ खिलाती है, जिससे उनका मन टूटने से बचता है। उसी के कारण हीरा मालिक पर हमले से मोती को रोकता है, क्योंकि वह अनाथ हो जाती। नाथ डालने की सलाह सुनकर वह उन्हें खोल देती है, और फिर शोर मचाकर अपने ऊपर से शक भी हटा लेती है। वह अत्याचार भरे घर में दया का एक छोटा-सा द्वीप है।
भागते हुए बैलों के सामने एक भारी साँड़ आ गया, जिसे लेखक पूरा हाथी कहता है। मोती भागना चाहता था, पर हीरा ने भागने को कायरता कहा और योजना बनाई। दोनों ने एक साथ, एक आगे से और दूसरा बगल से, वार किया। साँड़ एक-एक से लड़ने का आदी था, संगठित हमले से नहीं, इसलिए वह घायल होकर भागा और बेदम गिर पड़ा। फिर भी हीरा ने गिरे हुए शत्रु को मारने नहीं दिया। आज के जीवन में यह सिखाता है कि बड़ी समस्या के सामने मिलकर और योजना से काम करें, और जीतकर भी मर्यादा न छोड़ें।
Flashcards (17)
Play this topic
- भागने की रात
- शब्द और अर्थ
- किसकी बात
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
काँजीहौस, नीलाम और घर वापसी
काँजीहौस में भूखे पशुओं को बचाने के लिए हीरा-मोती दीवार तोड़ते हैं, फिर बँधकर हफ़्ते भर भूखे रहते हैं और नीलाम कर दिए जाते हैं। दढ़ियल ख़रीदार के साथ जाते हुए वे अपना गाँव पहचान लेते हैं और झूरी के पास लौट आते हैं।
What you will be able to do
- काँजीहौस का अर्थ और वहाँ पशुओं की दशा बता सकूँगा।
- दीवार तोड़ने के पीछे हीरा का दूसरों के लिए सोचना समझा सकूँगा।
- गधों के न भागने से भय और संकोच की बात जोड़ सकूँगा।
- नीलाम, दढ़ियल और घर वापसी की घटनाएँ क्रम से लिख सकूँगा।
- कहानी के अंत में मालकिन के बदलने का अर्थ समझा सकूँगा।
Key points
काँजीहौस वह बाड़ा है जहाँ दूसरों का खेत चरने वाले या बेसहारा पशु बंद किए जाते हैं।
वहाँ सारे दिन किसी पशु को चारा नहीं मिला, और भूखे पशु मुरदों की तरह पड़े थे।
हीरा ने कच्ची दीवार पर सींग मारे, ताकि सबकी जान बच सके; चौकीदार ने उसे पीटकर बाँध दिया।
मोती भी जुटा और दो घंटे की मेहनत से आधी दीवार गिर गई; घोड़ियाँ, बकरियाँ, भैंसें भाग निकलीं।
गधे डर के मारे खड़े रहे, तो मोती ने उन्हें सींगों से धकेलकर बाहर निकाला।
मोती हीरा की रस्सी नहीं तोड़ सका, पर उसे छोड़कर नहीं गया और ख़ुद भी बँधा।
हफ़्ते भर केवल पानी पाकर दुर्बल हुए दोनों बैलों को एक दढ़ियल ने नीलाम में ख़रीद लिया।
रास्ते में परिचित खेत और कुआँ देखकर वे दौड़कर अपने थान पर पहुँच गए।
मोती ने दढ़ियल को गाँव के बाहर तक खदेड़ दिया, और अंत में मालकिन ने दोनों के माथे चूम लिए।
Full explanation
काँजीहौस: भूख का बाड़ा
मटर के खेत में पकड़े जाने के बाद दोनों को काँजीहौस में डाल दिया गया। काँजीहौस वह बाड़ा है जहाँ दूसरों का खेत चरने वाले या बेसहारा पशु रखे जाते हैं। जीवन में पहली बार ऐसा हुआ कि पूरा दिन बीत गया और उन्हें खाने को एक तिनका भी नहीं मिला। उन्हें समझ नहीं आता था कि यह कैसा मालिक है। इसकी तुलना में तो गया भी अच्छा लगने लगा था।
वहाँ और भी पशु थे: भैंसें, बकरियाँ, घोड़े और गधे। किसी के सामने चारा नहीं था। सब ज़मीन पर ऐसे पड़े थे जैसे उनमें जान ही न हो, और कुछ तो इतने कमज़ोर थे कि खड़े भी नहीं हो पाते थे। दोनों मित्र पूरे दिन फाटक की ओर देखते रहे कि शायद कोई चारा लेकर आए, पर कोई नहीं आया। आख़िर उन्होंने दीवार की नमकीन मिट्टी चाटनी शुरू की, पर उससे पेट क्या भरता। यह वर्णन बताता है कि जिसे पशुओं की देखरेख की जगह होना चाहिए, वहाँ सबसे बड़ा अन्याय हो रहा था।
हीरा की ज्वाला: दूसरों के लिए दीवार
रात को भी जब कुछ खाने को नहीं मिला, तो हीरा के मन में विद्रोह की ज्वाला भड़क उठी। इस बार दोनों के स्वभाव उलटे दिखते हैं। अब तक मोती जल्दी भड़कता था, पर यहाँ भूख ने उसे तोड़ दिया है। वह कहता है कि उसके तो प्राण निकल रहे हैं। हीरा उसे हिम्मत न हारने को कहता है और भागने का उपाय सोचता है।
बाड़े की दीवार कच्ची थी। हीरा ने अपने नुकीले सींग उसमें गड़ाकर ज़ोर लगाया, तो मिट्टी का एक टुकड़ा निकल आया। उसका साहस बढ़ा और वह दौड़-दौड़कर चोट करने लगा। तभी चौकीदार लालटेन लेकर पशुओं की गिनती करने आया। उसने हीरा का यह उद्दंड काम देखा, उसे कई डंडे मारे और मोटी रस्सी से बाँध दिया।
मोती ने ताना दिया कि मार खाकर क्या मिला। हीरा का उत्तर इस भाग का सबसे बड़ा वाक्य है। उसने कहा कि वह ज़ोर मारता ही रहेगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ें। फिर उसने याद दिलाया कि दीवार गिर जाती तो कितनी जानें बच जातीं। यहाँ बंद सब पशु उनके भाई हैं, और दो-चार दिन यही हाल रहा तो सब मर जाएँगे। अब हीरा केवल अपने लिए नहीं लड़ रहा; वह सबकी मुक्ति के लिए लड़ रहा है। यह बात मोती के मन को छू गई और वह भी जुट गया।
दीवार गिरी, पर गधे नहीं भागे
मोती ने दीवार में उसी जगह सींग मारा। थोड़ी मिट्टी गिरी तो उसकी हिम्मत भी बढ़ी, और वह ऐसे ज़ोर लगाने लगा जैसे किसी दुश्मन से लड़ रहा हो। लगभग दो घंटे की मेहनत के बाद दीवार ऊपर से कुछ गिरी, और अगले धक्के में आधी दीवार गिर पड़ी। दीवार गिरते ही अधमरे पड़े सब पशुओं में जान आ गई। तीनों घोड़ियाँ सरपट भाग निकलीं, फिर बकरियाँ और फिर भैंसें।
पर गधे अपनी जगह खड़े रहे। हीरा ने पूछा कि वे क्यों नहीं भागते। एक गधे ने कहा कि अगर फिर पकड़े गए तो क्या होगा, और उन्हें डर लगता है। यह प्रसंग बहुत कुछ कहता है। मौक़ा सामने हो, दरवाज़ा खुला हो, फिर भी डर और संकोच किसी को बाँधे रख सकता है। याद कीजिए, कहानी गधे के सीधेपन की चर्चा से शुरू हुई थी। यहाँ वही सीधापन डर बनकर उसे क़ैद में रोके हुए है।
आधी रात बीत चुकी थी। गधे अब भी सोच रहे थे, और मोती मित्र का बंधन काटने की कोशिश कर रहा था। रस्सी न टूटी, तो हीरा ने कहा कि मोती अकेला निकल जाए। मोती की आँखों में आँसू आ गए। उसने पूछा कि क्या हीरा उसे इतना स्वार्थी समझता है। इतने दिन साथ रहने के बाद, आज विपत्ति आई तो वह उसे छोड़कर कैसे चला जाए। मोती को पता था कि उस पर बहुत मार पड़ेगी, फिर भी उसे संतोष था कि उनकी मेहनत से कई प्राणी बच निकले। फिर उसने गधों को सींगों से धकेलकर बाड़े से बाहर निकाला और लौटकर अपने मित्र के पास सो गया।
भूख, डुग्गी और नीलाम
सुबह काँजीहौस में ख़ूब हलचल मची। लेखक इसका विस्तार नहीं करता, बस इतना बताता है कि मोती की ख़ूब पिटाई हुई और उसे भी मोटी रस्सी से बाँध दिया गया। पूरे सात दिन दोनों बंधन में रहे। किसी ने चारे का एक तिनका भी नहीं डाला, केवल कभी-कभी पानी दिखा दिया जाता था। वे इतने कमज़ोर हो गए कि उठा नहीं जाता था और शरीर की हड्डियाँ दिखने लगीं।
एक दिन बाड़े के सामने डुग्गी बजी और दोपहर तक पचास-साठ लोग जमा हो गए। दोनों मित्रों को निकालकर दिखाया जाने लगा। लोग उन्हें देखते और निराश होकर चले जाते, क्योंकि ऐसे मरियल बैल कौन ख़रीदता। तभी एक दाढ़ी वाला आदमी आया, जिसकी आँखें लाल थीं और चेहरा बहुत कठोर। उसने बैलों के कूल्हों में उँगली गड़ाकर देखा और मुंशी से बात करने लगा। उसे देखते ही बैलों के दिल काँप उठे। उन्हें समझते देर नहीं लगी कि यह कौन है और उन्हें क्यों टटोल रहा है।
निराशा के बीच भी भरोसा
इस समय दोनों की बातचीत में एक बार फिर उनके स्वभाव दिखते हैं। हीरा को लगा कि गया के घर से भागना बेकार हुआ। मोती ने भगवान पर शिकायत की कि वे सब पर दया करते हैं, तो उन पर क्यों नहीं करते। हीरा ने कहा कि भगवान के लिए जीना-मरना बराबर है, और एक बार उन्होंने उस लड़की के रूप में उन्हें बचाया भी था। जब मोती ने कहा कि यह आदमी छुरी चलाएगा, तो हीरा ने कहा कि उनका माँस, खाल, सींग और हड्डी किसी न किसी काम आ जाएँगे।
नीलाम के बाद वे उस आदमी के साथ चल पड़े। डर से उनका रोम-रोम काँप रहा था। ज़रा धीमे होते तो डंडा पड़ता। रास्ते में गाय-बैलों का एक झुंड हरी घास में मज़े से चर रहा था। दोनों को लगा कि ये सब कितने सुखी हैं, पर कितने स्वार्थी भी, क्योंकि किसी को उनके दो भाइयों की चिंता नहीं जो कसाई के हाथ पड़े हैं।
पहचाना हुआ रास्ता और अपना थान
अचानक उन्हें लगा कि यह रास्ता जाना-पहचाना है। गया उन्हें पहली बार इसी राह से ले गया था। वही खेत, वही बाग़, वही गाँव आने लगे। उनकी चाल तेज़ होने लगी, और सारी थकान और कमज़ोरी जैसे ग़ायब हो गई। फिर वह कुआँ आया, जहाँ वे पुर चलाने आया करते थे। मोती ने कहा कि घर पास आ गया। उसने दढ़ियल को गिराकर भागने की बात कही, पर हीरा ने कहा कि सीधे अपने थान पर चलो, वहाँ से आगे नहीं जाएँगे। दोनों बछड़ों की तरह उछलते-कूदते दौड़े और अपने थान पर जाकर खड़े हो गए।
झूरी अपने दरवाज़े पर बैठा धूप सेंक रहा था। बैलों पर नज़र पड़ते ही वह लपका और एक-एक करके दोनों से लिपट गया। दोनों की आँखों से ख़ुशी के आँसू बहने लगे। दढ़ियल भी पीछे-पीछे आ पहुँचा और रस्सियाँ पकड़ लीं। उसने कहा कि उसने इन्हें मवेशीखाने से नीलाम में ख़रीदा है। झूरी ने कहा कि ये उसके बैल हैं, वह बेचे तभी बिकेंगे, और किसी को उन्हें नीलाम करने का अधिकार नहीं। उसका सबसे सीधा सबूत था कि बैल उसके द्वार पर खड़े हैं।
मोती की अंतिम जीत और मालकिन का बदलना
जब दढ़ियल ज़बरदस्ती बैलों को ले जाने बढ़ा, तो मोती ने सींग चलाया। दढ़ियल पीछे हटा, मोती ने पीछा किया, और उसे गाँव के बाहर तक खदेड़ दिया। फिर वह रास्ता रोककर खड़ा रहा, जबकि दढ़ियल दूर से धमकियाँ देता, गालियाँ बकता और पत्थर फेंकता रहा। गाँव वाले यह तमाशा देखकर हँसते रहे। आख़िर दढ़ियल हारकर चला गया।
लौटकर दोनों की बातचीत कहानी के सबसे गहरे वाक्यों में से है। मोती ने कहा कि वह मर जाएगा, पर उस आदमी के काम नहीं आएगा। फिर एक ने कहा कि उनकी जान को कोई जान ही नहीं समझता, और दूसरे ने उत्तर दिया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि वे इतने सीधे हैं। यह वाक्य हमें वापस कहानी की शुरुआत पर ले जाता है, जहाँ सीधेपन के अनादर की बात हुई थी।
जल्दी ही दोनों की नाँदें खली, चोकर, दाने और भूसे से भर गईं। झूरी उन्हें सहला रहा था और बीसों लड़के तमाशा देख रहे थे। पूरे गाँव में ख़ुशी का माहौल था। तभी मालकिन आई और उसने दोनों बैलों के माथे चूम लिए। जो स्त्री पहली वापसी पर उन्हें नमकहराम कह रही थी, वही अब उन्हें प्यार कर रही थी। संघर्ष, धैर्य और वफ़ादारी ने उसका मन भी बदल दिया।
Concepts and terms
वह बाड़ा जिसमें दूसरों का खेत चरने वाले या बिना मालिक के पशु बंद किए जाते हैं। मालिक दंड देकर उन्हें छुड़ा सकता है, नहीं तो उन्हें नीलाम कर दिया जाता है।
अन्याय के विरुद्ध भीतर से उठा तीव्र भाव। काँजीहौस में भूखी रात के बाद हीरा के मन में यही ज्वाला दहक उठी, और उसने दीवार तोड़ने का निश्चय किया।
मौक़ा सामने हो, फिर भी डर से उसे न पकड़ पाना। दीवार गिरने के बाद भी गधे यही सोचते रहे कि फिर पकड़े गए तो क्या होगा।
बोली लगाकर बेचना, जिसमें सबसे ऊँचा दाम देने वाले को चीज़ मिलती है। हफ़्ते भर भूखे रहने के बाद हीरा-मोती को इसी तरह बेचा गया।
झूरी का तर्क था कि बैल उसके द्वार पर खड़े हैं, यही उसका सबूत है। कहानी में यह संबंध काग़ज़ से नहीं, अपनेपन से तय होता है।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
एक कस्बे के पशु-बाड़े में आवारा पकड़े गए कई पशु रखे गए हैं। बाड़े का बजट काग़ज़ पर है, पर कई दिनों से चारा नहीं पहुँचा। कुछ स्वयंसेवक वहाँ पहुँचते हैं और देखते हैं कि बहुत से पशु कमज़ोर होकर बैठ गए हैं। वे स्थानीय अधिकारी को पत्र लिखते हैं, सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालते हैं और पशु-कल्याण संस्था से संपर्क करते हैं। दो दिन में चारा पहुँच जाता है और एक पशु-चिकित्सक भी आता है। एक स्वयंसेवक कहता है कि अगर हम सब डरकर चुप रहते, तो कुछ नहीं बदलता।
Activity:
अपने इलाक़े में पशुओं की देखभाल से जुड़ी किसी संस्था या नियम के बारे में पता लगाइए और पाँच वाक्यों में लिखिए।
Analysis:
कहानी का काँजीहौस और आज का पशु-बाड़ा एक ही सवाल उठाते हैं: जिनकी देखरेख की ज़िम्मेदारी है, वहीं अन्याय हो तो क्या करें। हीरा ने सबके लिए लड़ाई लड़ी; आज यह काम पत्र, संस्थाओं और क़ानून के रास्ते किया जा सकता है।
Did you know
काँजीहौस शब्द अंग्रेज़ी के काइन हाउस से बना है, यानी पशुओं का बाड़ा। आज इसे मवेशीखाना या पशु-बाड़ा भी कहते हैं।
डुग्गी चमड़े से मढ़ा एक छोटा बाजा है। पहले गाँवों में किसी सूचना या नीलामी की ख़बर देने के लिए डुग्गी बजाई जाती थी।
नीलाम में सामान उसी को मिलता है जो सबसे ऊँची बोली लगाए। कहानी में मरियल बैलों का कोई ख़रीदार नहीं मिल रहा था, तभी दढ़ियल आया।
Memory tricks
इस भाग का क्रम: भू–दी–गा–नी–घ — भूख, दीवार, गधे, नीलाम, घर। काँजीहौस की भूख, दीवार तोड़ना, गधों को निकालना, नीलाम होना, और घर लौटना।
Practice MCQs with answers (25)
- A भरपेट खाकर आराम से साथ खेलते
- B अच्छी देखरेख के साथ बँधे
- C बिना चारे के, मुरदों की तरह पड़े
- D मालिकों के इंतज़ार में रँभाते
Show answer
Why:
कुछ तो इतने कमज़ोर थे कि खड़े भी नहीं हो पाते थे।
- A गया सूखा भूसा देता था, यहाँ तिनका भी नहीं
- B गया उन्हें केवल हल में जोतता था, गाड़ी में नहीं
- C यहाँ का चौकीदार गया से कहीं अधिक ताक़तवर था
- D यहाँ उन्हें भैरो की बेटी की याद अधिक आती थी
Show answer
Why:
भूख की तुलना ने गया को भी अच्छा बना दिया।
- A मिट्टी की पुरानी पसंद को
- B भूख की आख़िरी हद को
- C चौकीदार को चिढ़ाने को
- D दीवार तोड़ने की योजना को
Show answer
Why:
पेट भरने का कोई और साधन नहीं था।
- A इस बार भी मोती भड़का और हीरा ने उसे रोका
- B दोनों ने भूख के आगे हार मानकर कोशिश छोड़ दी
- C दोनों में से किसी के मन में विद्रोह नहीं उठा
- D इस बार मोती की हिम्मत टूटी, हीरा भड़का
Show answer
Why:
संकट में भूमिकाएँ बदल जाती हैं।
- A सुबह चौकीदार के आने से पहले
- B दढ़ियल को आता देखकर
- C रात को भी भोजन न मिलने पर
- D गधों के कहने पर
Show answer
Why:
तभी उसके मन में विद्रोह की ज्वाला दहकी।
- A मोती को नीचा दिखाने की इच्छा
- B अन्याय के आगे न झुकने वाली दृढ़ता
- C चौकीदार से बदला लेने की ज़िद
- D अकेले भाग निकलने का स्वार्थ
Show answer
Why:
बंधन उसके इरादे को नहीं बाँध सके।
- A बंद सब पशुओं की जान बचाने के लिए
- B केवल अपने लिए बाहर निकलने को
- C चौकीदार को सज़ा देने के लिए
- D अपनी ताक़त दिखाने के लिए
Show answer
Why:
यहाँ उसकी लड़ाई सबकी मुक्ति की लड़ाई बन जाती है।
- A लगभग आधा दिन
- B पूरी एक रात
- C कुछ ही पल
- D लगभग दो घंटे
Show answer
Why:
कोई दो घंटे की ज़ोर-आज़माई के बाद दीवार गिरी।
- A घोड़ियाँ
- B गधे
- C बकरियाँ
- D भैंसें
Show answer
Why:
बाक़ी सब भाग निकले।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
कहानी का आरंभ भी गधे के सीधेपन से हुआ था।
- A दढ़ियल ख़रीदार जैसा
- B घमंडी साँड़ जैसा
- C बंधन में डटे हीरा जैसा
- D काँजीहौस के गधों जैसा
Show answer
Why:
मौक़ा सामने है, पर डर पाँव बाँधे है।
- A उसे अकेले रास्ता खोजने में बहुत डर लगता था, इसलिए रुका
- B वह चौकीदार को सबक़ सिखाना चाहता था
- C मित्र को संकट में छोड़कर भागना उसे स्वार्थ लगा
- D उसे गधों पर बिलकुल भरोसा नहीं था
Show answer
Why:
मोती ने मित्र को संकट में नहीं छोड़ा।
- A गधों ने हीरा का बहुत अपमान किया था
- B गधे उसकी नाँद का चारा खा रहे थे
- C वह चौकीदार को सुबह भ्रम में डालना चाहता था
- D डर से रुके गधे भी इस क़ैद से छूट सकें
Show answer
Why:
यह ज़बरदस्ती की भलाई थी।
- A दीवार तोड़ने पर गर्व और चौकीदार का डर
- B गधों के प्रति पुराना ग़ुस्सा और ईर्ष्या
- C अपनी मार से बड़ी दूसरों की भलाई
- D हीरा के प्रति नाराज़गी और अकेलापन
Show answer
Why:
उसे पता था कि मार पड़ेगी, फिर भी वह संतुष्ट था।
- A इतने दुर्बल कि उठा न जाए, ठठरियाँ दिखें
- B थोड़े थके हुए, पर पहले से ज़्यादा बलवान
- C चौकीदार से दोस्ती करके काफ़ी ख़ुश
- D रोज़ भरपेट चारा पाकर मोटे-ताज़े
Show answer
Why:
उन्हें केवल पानी दिखा दिया जाता था।
- A उनका दाम बहुत ऊँचा रखा गया था
- B वे भूख से इतने मरियल थे कि ख़रीदने लायक़ न लगे
- C वे लोगों को देखते ही सींग मारने लगते थे
- D मुंशी ने किसी को उनके पास जाने ही नहीं दिया
Show answer
Why:
ऐसे मृतक-से बैलों का कौन ख़रीदार होता।
- A कि वह उन्हें झूरी के पास लौटा देगा
- B कि वह उन्हें मेले में दौड़ाएगा
- C कि वह उन्हें मारने के लिए ले जाएगा
- D कि वह उन्हें गया को बेच देगा
Show answer
Why:
लाल आँखें, कठोर चेहरा और कूल्हे टटोलना।
- A भगवान ने उस लड़की के रूप में बचाया था
- B कि भगवान केवल मनुष्यों की ही प्रार्थना सुनते हैं
- C कि गया के घर से भागना ग़लत था
- D कि झूरी उन्हें खोजने आ रहा होगा
Show answer
Why:
निराशा में भी हीरा भरोसा नहीं छोड़ता।
- A कि वे भी उनके साथ मिलकर चरने लगें
- B कि वे सब भी जल्दी काँजीहौस पहुँचेंगे
- C कि वे दढ़ियल से उन्हें बचा लेंगे
- D कि वे सुखी हैं, पर कितने स्वार्थी
Show answer
Why:
किसी को उनके दो दुखी भाइयों की चिंता नहीं थी।
- A उनकी चाल और धीमी पड़ गई
- B थकान ग़ायब, चाल तेज़
- C वे डरकर सड़क पर बैठ गए
- D वे दढ़ियल के पीछे छिप गए
Show answer
Why:
घर की आस ने नई ताक़त दी।
- A सीधे थान पर चलना ही सबसे सुरक्षित है
- B दढ़ियल को गिराकर बदला लेना ज़रूरी है
- C किसी पड़ोसी के घर छिपकर समय देखना चाहिए
- D दढ़ियल के साथ चुपचाप आगे चलना चाहिए
Show answer
Why:
अपने थान पर पहुँचना ही सबसे सुरक्षित था।
- A उसके पास बैलों की रसीद थी
- B मुंशी उसका पुराना मित्र था
- C गाँव का मुखिया उसका भाई था
- D बैल उसके द्वार पर खड़े हैं
Show answer
Why:
संबंध काग़ज़ से नहीं, अपनेपन से।
- A गाड़ी को खाई में गिराने की उसकी पुरानी कोशिश से
- B मर जाऊँगा, पर उसके काम न आऊँगा वाली ठान से
- C गधों को डराकर बाड़े में ही रोकने की बात से
- D मटर के खेत में फिर से घुस जाने वाली ज़िद से
Show answer
Why:
अन्याय के आगे न झुकना मोती का स्वभाव है।
- A भैरो की बेटी के रोटियाँ खिलाने वाले प्रसंग की
- B मटर के खेत में आज़ादी के पहले स्वाद की
- C आरंभ में सीधेपन के अनादर पर व्यंग्य की
- D साँड़ से मिलकर लड़ने की योजना की
Show answer
Why:
कहानी जहाँ से शुरू हुई, अंत वहीं लौटता है।
- A वह दढ़ियल को चिढ़ाना और नीचा दिखाना चाहती थी
- B बैलों के संघर्ष और वफ़ादारी ने उसका मन जीत लिया
- C उसे लगा कि अब बैलों को बेचकर अच्छे दाम मिलेंगे
- D वह झूरी को ख़ुश करके कोई बात मनवाना चाहती थी
Show answer
Why:
पहली वापसी पर उसने इन्हें नमकहराम कहा था।
Important short questions (7)
वहाँ भैंसें, बकरियाँ, घोड़े और गधे थे, पर किसी के सामने चारा नहीं था। सब मुरदों की तरह ज़मीन पर पड़े थे और कुछ तो खड़े भी नहीं हो पाते थे।
भूख से उसके मन में विद्रोह उठा। उसका तर्क था कि दीवार गिरने से वहाँ बंद सब पशुओं की जान बच जाएगी, जो उसके भाई जैसे हैं और दो-चार दिन में मर जाएँगे।
उन्हें डर था कि फिर पकड़े जाएँगे। इससे सीख मिलती है कि डर और संकोच अवसर सामने होने पर भी हमें आगे नहीं बढ़ने देते।
हीरा रस्सी से बँधा था और मोती उसे खोल नहीं सका। मित्र को विपत्ति में छोड़कर जाना उसे स्वार्थ लगा, इसलिए वह रुक गया और बाद में ख़ुद भी बँधा।
दढ़ियल को देखकर उनके दिल काँप उठे और उन्हें लगा कि अब जान नहीं बचेगी। मोती भगवान से शिकायत करता है, जबकि हीरा कहता है कि भगवान ने पहले भी लड़की के रूप में बचाया था।
उन्हें लगा कि यही रास्ता गया उन्हें ले गया था। वही खेत, बाग़ और गाँव आने लगे, और फिर वह कुआँ भी, जहाँ वे पुर चलाने आते थे।
पहली वापसी पर उसने बैलों को नमकहराम कहा था। अंत में उसका प्यार दिखाता है कि बैलों के संघर्ष, धैर्य और वफ़ादारी ने उसका मन भी जीत लिया।
Long answer questions (3)
अब तक हीरा-मोती अपने लिए लड़ रहे थे, कभी अपने घर लौटने के लिए और कभी गया की मार से बचने के लिए। काँजीहौस में वे दूसरे भूखे पशुओं को मरता देखते हैं। हीरा कहता है कि दीवार गिरी तो सबकी जानें बचेंगी, क्योंकि यहाँ बंद सब उनके भाई हैं। मार खाकर और बंधन में पड़कर भी वह ज़ोर मारता रहता है। मोती भी जुटता है और आधी दीवार गिरा देता है, फिर डरे हुए गधों को धकेलकर बाहर निकालता है। ख़ुद दोनों बँधे रह जाते हैं, पर उन्हें संतोष है कि नौ-दस प्राणियों की जान बची। इस तरह लड़ाई अपने सुख से आगे बढ़कर सबकी मुक्ति की लड़ाई बन जाती है।
एक सप्ताह भूखे बँधे रहने के बाद डुग्गी बजाकर बैलों को नीलाम के लिए रखा गया। वे इतने मरियल थे कि कोई ख़रीदार नहीं मिला, फिर एक कठोर चेहरे वाले दढ़ियल ने उन्हें ख़रीद लिया। बैल डर गए कि वह उन्हें मार डालेगा। उसके साथ चलते हुए उन्होंने अचानक परिचित रास्ता पहचाना, फिर खेत, गाँव और वह कुआँ भी। उनकी थकान ग़ायब हो गई और वे दौड़कर अपने थान पर जा खड़े हुए। झूरी ने उन्हें गले लगाया। दढ़ियल ने नीलाम की बात कही, पर झूरी ने कहा कि बैल उसके द्वार पर खड़े हैं। मोती ने दढ़ियल को गाँव के बाहर तक खदेड़ दिया।
कहानी गधे के सीधेपन की चर्चा से शुरू हुई थी, जहाँ लेखक ने पूछा था कि क्या सीधा होना संसार में घाटे का सौदा है। अंत में दोनों बैल कहते हैं कि उनकी जान को कोई जान नहीं समझता, क्योंकि वे बहुत सीधे हैं। इस तरह कहानी उसी सवाल पर लौट आती है। पर बैल अब केवल सीधे नहीं रहे; उन्होंने बार-बार अन्याय का विरोध किया है। दूसरी ओर, पहली वापसी पर मालकिन ने उन्हें नमकहराम कहा था और सूखा भूसा देने को कहा था। अंत में वही मालकिन उनके माथे चूमती है। यह बदलाव बताता है कि संघर्ष और वफ़ादारी अंत में आदर दिला देते हैं।
Flashcards (17)
Play this topic
- काँजीहौस से घर तक
- शब्द और अर्थ
- कौन भागा, कौन रुका
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
प्रेमचंद, कहानी की कला और संदेश
प्रेमचंद का जीवन और लेखन, कहानी की भाषा की विशेषताएँ, मुहावरे, हीरा-मोती के एक-दूसरे को पूरा करने वाले गुण, और कहानी में छिपा स्वतंत्रता आंदोलन का संदेश।
What you will be able to do
- प्रेमचंद के जीवन और प्रमुख रचनाओं का परिचय दे सकूँगा।
- चित्रात्मकता, संवाद, विरोधाभास, व्यंग्य और अतिशयोक्ति के उदाहरण कहानी से खोज सकूँगा।
- कहानी के मुहावरों का अर्थ समझकर उनसे नए वाक्य बना सकूँगा।
- हीरा और मोती के गुणों की तुलना करके बता सकूँगा कि वे एक-दूसरे को कैसे पूरा करते हैं।
- कहानी के प्रसंगों को स्वतंत्रता आंदोलन की भावनाओं से जोड़ सकूँगा।
Key points
प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में वाराणसी के पास लमही गाँव में हुआ; उनका मूल नाम धनपत राय था।
असहयोग आंदोलन के समय उन्होंने शिक्षा विभाग की नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह लेखन में लग गए।
उनकी कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में हैं; गोदान, सेवासदन और निर्मला उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं।
कहानी में चित्रात्मक भाषा, संवाद, विरोधाभास, व्यंग्य, संघर्ष और अतिशयोक्ति, सब मिलते हैं।
जल उठना, नौ-दो-ग्यारह होना, जान हथेली पर लेना जैसे मुहावरों ने भाषा को जीवंत बनाया है।
हीरा धैर्यवान और सहनशील है, मोती तेज़ और साहसी; दोनों के गुण मिलकर उन्हें पूरा बनाते हैं।
गिरे हुए शत्रु पर वार न करना और स्त्री पर हाथ न उठाना, ये हीरा के नैतिक मूल्य हैं।
कहानी अंग्रेज़ी शासन के समय लिखी गई; बंधन, भूख और विद्रोह के प्रसंग आज़ादी की लड़ाई की ओर संकेत करते हैं।
पशु-कथा की परंपरा पंचतंत्र और हितोपदेश से चली आती है, जहाँ पशुओं के माध्यम से जीवन की सीख दी जाती है।
Full explanation
प्रेमचंद: लमही से उपन्यास सम्राट तक
प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में वाराणसी के पास लमही गाँव में हुआ। उनका असली नाम धनपत राय था। बचपन कठिनाइयों में बीता। माँ का देहांत जल्दी हो गया, और पढ़ाई भी संघर्ष करके पूरी हुई। बाद में वे शिक्षा विभाग में नौकरी करने लगे।
यह वह समय था जब देश में अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध आंदोलन तेज़ हो रहा था। गांधीजी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया, तो प्रेमचंद ने सरकारी नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन लेखन को सौंप दिया। उन्होंने हंस, जागरण और माधुरी जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया। सन् 1936 में उनका निधन हुआ।
उनकी कहानियाँ मानसरोवर नाम से आठ भागों में संकलित हैं। सेवासदन, निर्मला, रंगभूमि, कर्मभूमि और गोदान उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। इसीलिए उन्हें उपन्यास सम्राट कहा जाता है। प्रेमचंद के पात्र किसान, मज़दूर, स्त्रियाँ और गाँव के आम लोग हैं। उनकी भाषा सरल, जीती-जागती और मुहावरेदार है, जिसमें बोलचाल के शब्द सहज रूप से आते हैं।
पशु-कथा की पुरानी परंपरा
भारत में पशुओं के माध्यम से कहानी कहने की परंपरा बहुत पुरानी है। पंचतंत्र और हितोपदेश की कहानियों में शेर, सियार, कौआ और कछुआ बोलते हैं। वे मनुष्य जैसी बुद्धि, लालच, मित्रता और चालाकी दिखाते हैं। इन कहानियों का उद्देश्य होता है कि पशुओं की कहानी के बहाने मनुष्य को जीवन की सीख मिले।
दो बैलों की कथा इसी परंपरा से जुड़ती है, पर उससे आगे भी जाती है। यहाँ बैल बोलते नहीं, वे मूक-भाषा में बात करते हैं। वे पंचतंत्र के पशुओं जैसे चतुर या चालाक नहीं, बल्कि सीधे, मेहनती और स्वाभिमानी हैं। उनकी समस्याएँ भी असली गाँव की समस्याएँ हैं: भूख, मार, बेगार और अपने घर से बिछड़ना। इसलिए यह कहानी एक साथ पशु-कथा भी है और अपने समय के समाज का चित्र भी।
कहानी की भाषा: चित्र, संवाद और विरोधाभास
प्रेमचंद की इस कहानी को प्रभावशाली बनाने वाली कई विशेषताएँ हैं। पहली है चित्रात्मकता। जब लेखक बताता है कि बैलों के पाँव घुटनों तक कीचड़ में सने हैं, या अचानक दरवाज़ा खुलता है और वही लड़की निकलती है, तो पाठक के मन में पूरा दृश्य बन जाता है। किसी दृश्य को इतना साफ़ दिखाने वाली भाषा को चित्रात्मक भाषा कहते हैं।
दूसरी विशेषता है संवाद। बैल आपस में जो बातें करते हैं, उनसे कहानी आगे बढ़ती है और उनके स्वभाव भी खुलते हैं। मोती का वह कथन कि मर जाएगा पर दढ़ियल के काम नहीं आएगा, किसी भी वर्णन से ज़्यादा उसके स्वभाव को दिखाता है।
तीसरी विशेषता है विरोधाभास, यानी एक साथ दो उलटी बातें। बैल लौटे तो झूरी प्यार से भर गया, पर उसकी पत्नी उन्हें देखकर जल उठी। एक ही घटना पर दो उलटी प्रतिक्रियाएँ कहानी में तनाव पैदा करती हैं।
व्यंग्य, संघर्ष, अतिशयोक्ति और उलझन
कहानी का आरंभ व्यंग्य से होता है। लेखक कहता है कि गधा सीधा है, इसलिए मूर्ख कहलाता है। फिर वह अफ़्रीका में भारतीयों की दुर्दशा की ओर इशारा करता है कि अगर वे भी जवाब देना सीख जाते तो शायद सभ्य माने जाते। हँसी के बीच यह बात चुभती है, और यही व्यंग्य की ताक़त है।
संघर्ष कहानी की रीढ़ है। बैल कभी गया से जूझते हैं, कभी साँड़ से, कभी काँजीहौस की दीवार से। साँड़ वाले प्रसंग में यह संघर्ष सबसे साफ़ है, जहाँ भिड़ने में भी जान का ख़तरा है और न भिड़ने में भी।
अतिशयोक्ति का उदाहरण झूरी का प्यार है, जो उन्हें फूल की छड़ी से भी नहीं छूता था, और जिसकी एक आवाज़ पर बैल उड़ने लगते थे। उलझन या संदेह तब दिखता है जब पात्र तय नहीं कर पाते। काँजीहौस में दिन भर भूखे रहकर बैलों को समझ नहीं आता कि यह कैसा स्वामी है। इन सब विशेषताओं के मेल से कहानी पढ़ने में रोचक और याद रखने में आसान बन जाती है।
मुहावरों से जीवंत भाषा
मुहावरा शब्दों का ऐसा समूह है जिसका अर्थ उसके शब्दों से अलग, एक ख़ास अर्थ होता है। प्रेमचंद की भाषा मुहावरों से भरी है, और इसी कारण उसमें जान है। कुछ मुहावरे और उनके अर्थ देखिए।
दाँतों पसीना आना, यानी बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ना। गया को बैलों को घर ले जाने में यही हुआ। दिल काँप उठना, यानी बहुत डर जाना, जैसे दढ़ियल को देखकर बैलों के साथ हुआ। जल उठना, यानी क्रोध या ईर्ष्या से भर जाना। नौ-दो-ग्यारह होना, यानी भाग जाना। जान हथेली पर लेना, यानी प्राणों की परवाह किए बिना कोई ख़तरनाक काम करना, जैसे साँड़ से लड़ते समय। जान से हाथ धोना, यानी मर जाना। ईंट का जवाब पत्थर से देना, यानी कड़ा बदला लेना। मन फीका होना, यानी उत्साह ख़त्म हो जाना। बगलें झाँकना, यानी जवाब न सूझने पर इधर-उधर देखना।
परीक्षा में मुहावरे का प्रयोग करते समय ध्यान रखिए कि वाक्य से उसका अर्थ अपने-आप स्पष्ट हो। केवल यह लिखना कि राम नौ-दो-ग्यारह हो गया, पर्याप्त नहीं। बेहतर है कि लिखें, पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो-ग्यारह हो गया।
हीरा और मोती: अलग स्वभाव, एक जोड़ी
हीरा और मोती दोनों मेहनती और वफ़ादार हैं, पर उनके स्वभाव अलग हैं। हीरा शांत, धैर्यवान और सहनशील है। वह सोच-समझकर क़दम उठाता है और नियमों का पालन करता है। मोती तेज़, जल्दी भड़कने वाला और साहसी है। वह अन्याय देखते ही उसका उत्तर देना चाहता है।
ये भिन्न गुण एक-दूसरे को पूरा करते हैं। जब मोती गाड़ी को खाई में गिराना चाहता है, तो हीरा उसे सँभालता है। जब काँजीहौस में मोती की हिम्मत टूटती है, तो हीरा उसे संभालता है और दीवार तोड़ने का रास्ता दिखाता है। पर जब साँड़ सामने हो या दढ़ियल ज़बरदस्ती करे, तब मोती का साहस काम आता है। यह जोड़ी हमें सिखाती है कि अलग-अलग गुणों वाले लोग मिलकर किसी भी अकेले व्यक्ति से अधिक मज़बूत बनते हैं। कक्षा में भी कोई धैर्यवान होता है, कोई तेज़, कोई अच्छा वक्ता, और मिलकर काम करने पर हर गुण की ज़रूरत पड़ती है।
मूल्य जो कहानी सिखाती है
कहानी में बैलों का एक नैतिक संसार है। जब साँड़ गिर जाता है, तो हीरा मोती को रोकता है कि गिरे हुए शत्रु पर वार नहीं करना चाहिए। जब मोती गया की पत्नी पर ग़ुस्सा दिखाता है, तो हीरा उसे याद दिलाता है कि स्त्री पर सींग चलाना मना है। गया के घर से भागते समय भी वे कहते हैं कि चाहे दूसरा अपना धर्म छोड़ दे, वे अपना धर्म नहीं छोड़ेंगे।
ये मूल्य भारतीय संस्कृति में गहरे बसे हैं: युद्ध में भी मर्यादा रखना, कमज़ोर पर अत्याचार न करना, अपने कर्तव्य से न डिगना। कहानी में ये मूल्य किसी उपदेश की तरह नहीं, बल्कि पात्रों के व्यवहार में दिखते हैं, और इसीलिए असर करते हैं। साथ ही कहानी पशुओं के प्रति दया का संदेश भी देती है। आज पशुओं के साथ क्रूरता रोकने के लिए क़ानून भी बने हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन का संकेत
यह कहानी उस समय लिखी गई जब भारत पर अंग्रेज़ों का दमनकारी शासन था। प्रेमचंद जैसे लेखक अपनी रचनाओं से लोगों को आज़ादी की लड़ाई के लिए प्रेरित कर रहे थे। इसीलिए कहानी के कई वाक्यों को उस संघर्ष से जोड़कर पढ़ा जाता है।
हीरा का यह संकल्प कि बंधन कितने ही पड़ें, वह ज़ोर मारता रहेगा, उन सेनानियों की याद दिलाता है जो बार-बार जेल गए पर संघर्ष नहीं छोड़ा। मोती का यह कहना कि वह मर जाएगा पर अत्याचारी के काम नहीं आएगा, उस भाव से मेल खाता है कि प्राण देना स्वीकार है, पर अंग्रेज़ों की सेवा नहीं। बैलों का यह दुख कि उनकी जान को कोई जान नहीं समझता, ग़ुलाम भारत में लोगों के अधिकारों और सम्मान की उपेक्षा का संकेत है। साँड़ जैसे ताक़तवर से भी मिलकर भिड़ जाना उस साहस जैसा है, जिससे सेनानियों ने एक बड़े साम्राज्य का सामना किया। और काँजीहौस की दीवार गिराकर दूसरों को मुक्त करना सामूहिक मुक्ति का प्रतीक है।
परीक्षा में इस तरह के प्रश्न का उत्तर लिखते समय पहले कहानी का प्रसंग बताइए, फिर उसका संकेत, और अंत में यह कि दोनों में क्या समानता है।
Concepts and terms
भाषा का ऐसा गुण कि पढ़ते ही आँखों के सामने दृश्य बन जाए। जैसे घुटनों तक कीचड़ में सने पाँव, या अचानक द्वार खुलना और वही लड़की बाहर आना।
एक ही प्रसंग में दो उलटी बातें साथ रखना। बैल लौटे तो झूरी स्नेह से भर गया, जबकि उसकी पत्नी उन्हें देखकर जल उठी।
हँसी या चुभती बात के सहारे किसी दोष या अन्याय पर चोट करना। कहानी के आरंभ में सीधेपन के अनादर और अफ़्रीका में भारतीयों की दशा पर व्यंग्य है।
किसी बात को इतना बढ़ाकर कहना कि वह असंभव लगे। जैसे झूरी उन्हें फूल की छड़ी से भी नहीं छूता था, और उसकी टिटकार पर बैल उड़ने लगते थे।
कोई पात्र या वस्तु जो अपने से बड़ी किसी बात की ओर संकेत करे। हीरा-मोती, काँजीहौस और बंधन को गुलाम भारत और आज़ादी की लड़ाई के प्रतीक के रूप में पढ़ा जा सकता है।
सावधान
भ्रम और सच
करके देखो
Title:
बैलों की ओर से शिकायत-पत्र
Safety:
पत्र में किसी असली व्यक्ति का नाम या पता न लिखें।
What You Notice:
अन्याय की सूची बनाते ही कहानी की घटनाएँ नए ढंग से दिखने लगती हैं, और पत्र लिखने का अभ्यास भी हो जाता है।
Did you know
प्रेमचंद ने आरंभ में उर्दू में नवाबराय नाम से लिखा। उनका कहानी-संग्रह सोज़े-वतन अंग्रेज़ सरकार ने ज़ब्त कर लिया था, तब से वे प्रेमचंद नाम से लिखने लगे।
प्रेमचंद ने हंस, जागरण और माधुरी जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया। हंस पत्रिका आज भी निकलती है।
प्रेमचंद को उपन्यास सम्राट कहा जाता है। उनकी लगभग तीन सौ कहानियाँ मानी जाती हैं।
Memory tricks
कहानी की कला: चि–सं–वि–व्यं–अ — चित्रात्मकता, संवाद, विरोधाभास, व्यंग्य, अतिशयोक्ति। याद रखो: चित्र से संवाद, फिर विरोध, फिर व्यंग्य, और अंत में बढ़ा-चढ़ाकर कहना।
प्रेमचंद के उपन्यास: सेवा–निर्म–रंग–कर्म–गो — सेवासदन, निर्मला, रंगभूमि, कर्मभूमि, गोदान। गोदान सबसे अंत में, सबसे प्रसिद्ध।
Practice MCQs with answers (25)
- A असहयोग आंदोलन के समय
- B पहला उपन्यास छपने के बाद
- C हंस पत्रिका शुरू होने के बाद
- D लमही गाँव लौट जाने के बाद ही
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Why:
यह आज़ादी की लड़ाई में उनका साथ था।
- A गोदान
- B निर्मला
- C कर्मभूमि
- D मधुशाला
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Why:
मधुशाला हरिवंशराय बच्चन की कविता है।
- A मधुबन
- B रंगमहल
- C मानसरोवर
- D सुख-सागर
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Why:
एक झील का नाम।
- A व्यंग्य
- B चित्रात्मकता
- C अतिशयोक्ति
- D संवादात्मकता
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Why:
पढ़ते ही दृश्य दिखता है।
- A चित्रात्मकता
- B संदेह या उलझन
- C अतिशयोक्ति
- D विरोधाभास
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Why:
एक घटना पर उलटी प्रतिक्रियाएँ।
- A विरोधाभास
- B अतिशयोक्ति
- C संवाद
- D व्यंग्य
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Why:
उसका डील-डौल दिखाने को बात बढ़ाई गई।
- A चित्रात्मकता
- B अतिशयोक्ति
- C व्यंग्य
- D संदेह
Show answer
Why:
हँसी के बीच समाज पर चोट।
- A संदेह या उलझन
- B विरोधाभास
- C व्यंग्य
- D चित्रात्मकता
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Why:
पात्र निर्णय पर नहीं पहुँच पाते।
- A गिनती भूलना
- B हिसाब बिगाड़ना
- C भाग जाना
- D जल्दी निपटाना
Show answer
Why:
चोर पुलिस को देखकर यही करता है।
- A बगलें झाँकना
- B जान हथेली पर लेना
- C मन फीका होना
- D नौ-दो-ग्यारह होना
Show answer
Why:
प्राणों की परवाह किए बिना भिड़ना।
- A जल उठना — आग से हाथ जला लेना
- B दाँतों पसीना आना — दाँतों में बहुत तेज़ दर्द होना
- C दिल काँपना — ठंड लगने से शरीर काँपना
- D बगलें झाँकना — उत्तर न सूझने पर इधर-उधर देखना
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Why:
मुहावरे का अर्थ शब्दों से अलग होता है।
- A दाँतों पसीना आना
- B ईंट का जवाब पत्थर से देना
- C जान से हाथ धोना
- D मन फीका होना
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Why:
बैल बार-बार पीछे ज़ोर लगाते रहे।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C I, II और III तीनों
- D केवल I और III
Show answer
Why:
साँड़ को दोनों ने मिलकर हराया था।
- A दोनों बारी-बारी से झूरी के खेत में पूरे दिन काम करते हैं
- B कभी हीरा का धैर्य, कभी मोती का साहस काम आता है
- C हीरा केवल सोचता है और मोती केवल खाना खाता है
- D मोती हर बार हीरा की बात बिना सोचे मान लेता है
Show answer
Why:
साँड़ और दढ़ियल के सामने मोती, काँजीहौस और गाड़ी में हीरा।
- A साँड़ उठकर फिर से दोनों पर हमला कर सकता था
- B झूरी ने उन्हें किसी से लड़ने को मना किया था
- C गिरे हुए शत्रु पर वार करना मर्यादा के विरुद्ध है
- D मोती के सींग पहले से घायल हो चुके थे
Show answer
Why:
युद्ध में भी नैतिकता।
- A दूसरे बुरा करें, तब भी अपना कर्तव्य न छोड़ना
- B हर अन्याय का बदला तुरंत और कड़ाई से लेना
- C अपना काम छोड़कर दूसरों की शिकायत करना
- D मालिक बदलते ही अपना व्यवहार भी बदल लेना
Show answer
Why:
गया के व्यवहार के बाद भी उन्होंने मर्यादा रखी।
- A इसमें पशु इंसानों जैसी भाषा में खुलकर, ज़ोर-ज़ोर से बोलते हैं
- B इसके बैल सीधे हैं और गाँव की असली मुश्किलें झेलते हैं
- C इसमें कोई भी सीख या संदेश नहीं दिया गया है
- D इसमें केवल जंगल के जानवर ही पात्र बने हैं
Show answer
Why:
परंपरा से जुड़ाव भी, नयापन भी।
- A अंग्रेज़ों से समझौता करके सरकारी दफ़्तरों में छोटी नौकरियाँ पा लेना
- B आंदोलन छोड़कर अपने गाँव लौट जाना
- C विदेश जाकर केवल पढ़ाई पर ध्यान देना
- D बार-बार जेल जाकर भी सेनानियों का संघर्ष न छोड़ना
Show answer
Why:
जेल के बंधन भी इरादा नहीं तोड़ सके।
- A भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की उपेक्षा
- B खेती में बैलों की लगातार घटती हुई ज़रूरत और महत्त्व की ओर
- C गाँवों में पशुओं के बढ़ते दाम की ओर
- D नई सड़कों और रेलगाड़ियों के आने की ओर
Show answer
Why:
दासता में अधिकार नहीं होते।
- A ताक़तवर से हमेशा दूर रहना और छिप जाना
- B अपने ही साथियों से आपस में लड़ते रहना
- C बड़े साम्राज्य से भी साहस के साथ टकराना
- D ताक़त के आगे जल्दी से हार मान लेना
Show answer
Why:
अंग्रेज़ी साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
- D अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
Show answer
Why:
दिखाना, बताने से ज़्यादा असर करता है।
- A अतिशयोक्ति, जिसमें बात बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है
- B चित्रात्मकता, जिससे कोई प्राकृतिक दृश्य बनता है
- C संवादात्मकता, जिससे पात्र का स्वभाव खुलता है
- D व्यंग्य, जिसमें हँसी-मज़ाक़ के साथ चोट है
Show answer
Why:
संवाद कहानी को आगे बढ़ाते और पात्र को खोलते हैं।
- A प्रेमचंद
- B नवाबराय
- C मुंशी लमही
- D धनपत वर्मा
Show answer
Why:
पहले वे नवाबराय नाम से लिखते थे।
- A सरस्वती
- B हंस
- C धर्मयुग
- D चाँद
Show answer
Why:
आज भी यह पत्रिका निकलती है।
- A इसमें गांधीजी और नेहरू का नाम कई बार और खुलकर आता है
- B इसमें बैल अंग्रेज़ी भाषा बोलते और समझते हैं
- C कहानी का अंत किसी बड़े युद्ध पर होता है
- D यह अंग्रेज़ी राज में, आंदोलन से जुड़े लेखक ने लिखी
Show answer
Why:
संकेत, नाम नहीं।
Important short questions (7)
प्रेमचंद का जन्म 1880 में लमही, वाराणसी में हुआ। मूल नाम धनपत राय था। असहयोग आंदोलन में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ी, हंस आदि पत्रिकाएँ संपादित कीं और 1936 में उनका निधन हुआ।
जिस भाषा को पढ़कर मन में दृश्य बन जाए, उसे चित्रात्मक भाषा कहते हैं। जैसे बैलों के घुटनों तक कीचड़ में सने पाँव, या अचानक दरवाज़ा खुलना और वही लड़की निकलना।
बैलों के पहली बार लौटने पर झूरी स्नेह से भर गया, जबकि उसकी पत्नी उन्हें देखकर क्रोध से जल उठी। एक ही घटना पर उलटी प्रतिक्रियाएँ कहानी में तनाव बनाती हैं।
सैनिक जान हथेली पर लेकर सीमा की रक्षा करते हैं। पुलिस की गाड़ी देखते ही चोर नौ-दो-ग्यारह हो गए।
हीरा शांत, धैर्यवान और सहनशील है और सोच-समझकर क़दम उठाता है। मोती तेज़, जल्दी भड़कने वाला और साहसी है, जो अन्याय का तुरंत उत्तर देना चाहता है।
गिरे हुए शत्रु पर वार न करना, स्त्री पर हाथ न उठाना और दूसरों के बुरे व्यवहार पर भी अपना धर्म न छोड़ना। ये लड़ाई में भी मर्यादा रखने के मूल्य हैं।
पंचतंत्र की तरह इसमें भी पशुओं के माध्यम से जीवन की सीख दी गई है। पर यहाँ बैल चतुर नहीं, सीधे और स्वाभिमानी हैं, और उनकी मुश्किलें गाँव की असली मुश्किलें हैं।
Long answer questions (3)
प्रेमचंद की भाषा सरल, जीवंत और मुहावरेदार है। इसमें चित्रात्मकता है, जैसे घुटनों तक कीचड़ में सने पाँव का वर्णन, जिससे दृश्य आँखों के सामने आ जाता है। संवादों से पात्रों का स्वभाव खुलता है, जैसे मोती का यह प्रण कि प्राण भले जाएँ, उस क्रूर ख़रीदार की सेवा वह नहीं करेगा। विरोधाभास भी है, जब झूरी स्नेह से भरता है और उसकी पत्नी जल उठती है। आरंभ में सीधेपन के अनादर पर व्यंग्य है, और झूरी के प्यार के वर्णन में अतिशयोक्ति। दाँतों पसीना आना, नौ-दो-ग्यारह होना, जान हथेली पर लेना जैसे मुहावरे भाषा में जान डालते हैं। इन सब से कहानी रोचक बनती है।
हीरा शांत और सहनशील है, जबकि मोती तेज़ और साहसी। जब मोती ग़ुस्से में गाड़ी को खाई में गिराना चाहता है, तब हीरा उसे सँभाल लेता है। गया के घर में मोती बदला लेना चाहता है, पर हीरा उसे धैर्य रखने को कहता है। काँजीहौस में भूख से मोती टूट जाता है, तो हीरा दीवार तोड़ने की राह दिखाता है। दूसरी ओर साँड़ से लड़ाई में और अंत में दढ़ियल को खदेड़ने में मोती का साहस काम आता है। इस तरह एक का धैर्य और दूसरे का साहस मिलकर दोनों को हर संकट से निकालते हैं। यह सिखाता है कि अलग गुणों वाले लोग मिलकर अधिक मज़बूत बनते हैं।
कहानी अंग्रेज़ी शासन के समय लिखी गई, जब प्रेमचंद स्वयं असहयोग आंदोलन से जुड़े थे। पशु-कथा के बहाने वे ग़ुलाम भारत की दशा दिखाते हैं। सीधे को मूर्ख समझने वाली दुनिया पर व्यंग्य उस सोच पर चोट है जो केवल ताक़त का आदर करती है। बैलों का मार खाना, भूखे रहना और बँधना, अत्याचार और दमन का चित्र है। हीरा का बंधनों में भी ज़ोर मारते रहना, मोती का अत्याचारी की सेवा न करने का संकल्प, और सबके लिए दीवार गिराना, आज़ादी की लड़ाई के भाव हैं। अंत में घर लौटना दिखाता है कि लगातार संघर्ष से अपना अधिकार वापस मिलता है।
Flashcards (17)
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- मुहावरे और अर्थ
- भाषा की विशेषता पहचानो
- सही या भ्रम
- प्रेमचंद का जीवन-क्रम
- झटपट उत्तर
Class 9 Hindi Chapter 1 — frequently asked questions
यह आगे की कहानी की भूमिका है। गधे के सीधेपन के बहाने लेखक पूछता है कि क्या संसार में सीधा होना घाटे का सौदा है। यही सवाल आगे हीरा-मोती और उस समय के भारत तक जाता है।
भारतीय मेहनती, शांत और बचत करने वाले हैं, फिर भी विदेशों में उनकी दुर्दशा है। लेखक कहता है कि वे पत्थर का जवाब पत्थर से देते तो सभ्य कहलाते। यह दुनिया की सोच पर चोट है।
पहला, दोनों चाहते थे कि ज़्यादा बोझ उसकी अपनी गरदन पर आए। दूसरा, वे साथ खाते थे और एक नाँद से मुँह हटाता तो दूसरा भी हटा लेता।
उन्हें गाड़ी और हल में जोतकर बहुत मारा गया और मोटी रस्सियों से बाँधा गया। उनके सामने सूखा भूसा डाला गया, जबकि गया के अपने बैलों को खली-चूनी मिली।
जब गया ने हीरा की नाक पर ज़ोर से डंडे मारे। तब मोती हल लेकर भागा और हल, रस्सी, जुआ सब टूट-फूट गया।
वह ख़ुद मार सहती थी, फिर भी भूखे बैलों को रोज़ रोटियाँ खिलाती थी। उसने उन्हें नाथ डाले जाने से बचाने के लिए खोल दिया और अपने ऊपर से शक भी हटा दिया।
वहाँ भैंसें, बकरियाँ, घोड़े और गधे थे, पर किसी के सामने चारा नहीं था। सब मुरदों की तरह ज़मीन पर पड़े थे और कुछ तो खड़े भी नहीं हो पाते थे।
भूख से उसके मन में विद्रोह उठा। उसका तर्क था कि दीवार गिरने से वहाँ बंद सब पशुओं की जान बच जाएगी, जो उसके भाई जैसे हैं और दो-चार दिन में मर जाएँगे।
उन्हें डर था कि फिर पकड़े जाएँगे। इससे सीख मिलती है कि डर और संकोच अवसर सामने होने पर भी हमें आगे नहीं बढ़ने देते।
प्रेमचंद का जन्म 1880 में लमही, वाराणसी में हुआ। मूल नाम धनपत राय था। असहयोग आंदोलन में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ी, हंस आदि पत्रिकाएँ संपादित कीं और 1936 में उनका निधन हुआ।
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