Class 9 Hindi Chapter 7: मैं और मेरा देश

मैं और मेरा देश is Chapter 7 of NCERT / CBSE Class 9 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 2 topics, 50 practice MCQs with answers and explanations, 20 important short and long questions and 34 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
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  • Hindi

लेखक, निबंध और मन में उठा भूकंप

कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का निबंध मैं और मेरा देश बताता है कि व्यक्ति की पूर्णता उसके देश के सम्मान से जुड़ी है। लाला लाजपत राय के एक अनुभव ने लेखक की पूर्णता के भ्रम को तोड़ा, और फिर लेखक ने समझाया कि साधारण नागरिक भी देश के लिए बहुत कुछ कर सकता है।

What you will be able to do

  • निबंध विधा का अर्थ और उसकी प्रमुख विशेषताएँ बता सकूँगा।
  • कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का साहित्यिक परिचय दे सकूँगा।
  • घर, पड़ोस और नगर से मिली पूर्णता और उसमें पड़ी दरार का अर्थ समझा सकूँगा।
  • लाला लाजपत राय के अनुभव को मानसिक भूकंप कहे जाने का कारण बता सकूँगा।
  • जीवन को युद्ध मानकर साधारण नागरिक की भूमिका उदाहरणों से स्पष्ट कर सकूँगा।

Key points

  • मैं और मेरा देश एक विचार-प्रधान निबंध है, जो व्यक्ति और राष्ट्र के अटूट संबंध को सामने रखता है।

  • कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर (1906, सहारनपुर) पत्रकार और निबंधकार थे; स्वतंत्रता संग्राम में कई बार जेल गए और पद्म श्री से सम्मानित हुए।

  • निबंध का अर्थ है भली-भाँति बँधी या गठी हुई रचना (नि + बंध), जिसमें लेखक किसी विषय पर अपने विचार क्रम से रखता है।

  • यह निबंध प्रश्नोत्तर या संवाद शैली में है: बीच-बीच में पाठक प्रश्न पूछता है और लेखक उत्तर देता है।

  • लेखक को लगता था कि घर, पड़ोस और नगर से मिले प्रेम, ज्ञान और सहारे ने उसे पूरा मनुष्य बना दिया है।

  • आनंद की दीवार में दरार पड़ने का अर्थ है पूर्णता के उस भाव पर चोट, जो एक अनुभव से टूट गया।

  • भूकंप धरती में नहीं, लेखक के मन में आया था; उसका कारण लाला लाजपत राय का विदेश-यात्रा वाला अनुभव था।

  • लाला जी को हर देश में यह लगा कि भारत की गुलामी का कलंक उनके माथे पर है, यानी देश हीन हो तो निजी उपलब्धियाँ गौरव नहीं देतीं।

  • जीवन एक युद्ध है, जिसमें लड़ने वालों के साथ रसद पहुँचाने वाले, अन्न उगाने वाले और जय बोलने वाले भी ज़रूरी हैं।

Full explanation

निबंध: विचारों की गठी हुई रचना

मैं और मेरा देश एक निबंध है। निबंध शब्द नि और बंध से बना है, जिसका अर्थ है अच्छी तरह बँधा या गठा हुआ। निबंध गद्य की वह विधा है, जिसमें लेखक किसी एक विषय पर अपने अनुभव, विचार और भावनाएँ एक क्रम में रखता है। कहानी में घटनाएँ और पात्र आगे रहते हैं, जबकि निबंध में लेखक के विचार सबसे आगे रहते हैं। इसीलिए निबंध पढ़ते समय लगता है कि लेखक सीधे हमसे बात कर रहा है।

एक अच्छे निबंध की कुछ विशेषताएँ होती हैं। पहली है विषय-केंद्रीयता, यानी पूरी रचना एक ही विषय के आस-पास घूमे। दूसरी है विचार और भावना का संतुलन। तीसरी है वैयक्तिकता, जिसमें लेखक का अपना अनुभव और व्यक्तित्व झलकता है। चौथी है तार्किकता, यानी हर बात के पीछे कोई कारण या उदाहरण हो। पाँचवीं है संक्षिप्तता और स्पष्टता। इसके अलावा प्रेरणा, चित्रात्मकता और साहित्यिक सौंदर्य भी निबंध को सुंदर बनाते हैं। इस निबंध में ये सभी गुण मिलते हैं। विषय है व्यक्ति और देश का रिश्ता, उदाहरण हैं स्वामी रामतीर्थ, कमालपाशा और पंडित नेहरू की घटनाएँ, और भाषा बोलचाल जैसी सहज है।

इस निबंध की सबसे ख़ास बात इसकी प्रश्नोत्तर शैली है। लेखक बार-बार ऐसे प्रश्न उठाता है, जो पढ़ते समय हमारे मन में आते हैं। जैसे, क्या कोई भूकंप आया था, या एक आदमी इतने बड़े देश के लिए क्या कर सकता है। फिर लेखक उनका उत्तर देता है। इस शैली से निबंध भाषण या उपदेश नहीं लगता, बल्कि दो लोगों की आपसी बातचीत लगता है। लेखक कहता है कि जो प्रश्न बात को आगे बढ़ने का मौक़ा दें और ठीक समय पर पूछे जाएँ, उनका उत्तर देने में उसे बहुत आनंद आता है।

कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर: पत्रकार, सेनानी, निबंधकार

कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का जन्म सन् 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले में हुआ। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था। उन्होंने नया जीवन और विकास नाम के पत्रों का संपादन किया। वे शुरू से ही स्वतंत्रता आंदोलन और समाज-सेवा से जुड़े रहे, इसलिए अंग्रेज़ी शासन ने उन्हें कई बार जेल भेजा। राजनीति और समाज से जुड़े विषयों पर उन्होंने बहुत-से निबंध लिखे।

प्रभाकर जी के निबंध संस्मरण जैसे लगते हैं, क्योंकि उनमें जीवन की सच्ची घटनाएँ और लोगों की यादें होती हैं। उनके प्रसिद्ध संग्रहों में आकाश के तारे धरती के फूल, माटी हो गई सोना और दीप जले शंख बजे गिने जाते हैं। कारवाँ आगे बढ़े, ज़िंदगी मुसकराई और महके आँगन चहके द्वार भी उन्हीं के हैं। क्षण बोले कण मुसकाए, ज़िंदगी लहलहाई तथा बाजे पायलिया के घुँघरू भी इसी सूची में आते हैं। इन रचनाओं में मनुष्य के प्रति गहरा प्रेम और जीवन को देखने की सकारात्मक दृष्टि मिलती है। साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। सन् 1995 में उनका निधन हुआ।

घर, पड़ोस और नगर: पूर्णता का एहसास

निबंध की शुरुआत लेखक के अपने जीवन से होती है। लेखक बताता है कि वह अपने घर में पैदा हुआ और वहीं पला। पड़ोस में खेलते हुए उसे पड़ोसियों का स्नेह मिला। फिर नगर में घूमते-फिरते उसका परिचय बड़े समाज से हुआ। नगर के पुस्तकालयों और विद्वानों से उसे ज्ञान मिला। उसने नगर की सेवा की और बदले में नगर से सहारा पाया। इस तरह वह एक अकेले व्यक्ति से बढ़कर मानो पूरे नगर जैसा भरा-पूरा बन गया।

लेखक के मन में एक संतोष था। वह नगर के लोगों का आदर करता था और लोग भी उसका आदर करते थे। उसे बहुत-से लोगों की ज़रूरत पड़ती थी, और बहुत-से लोगों की ज़रूरतें वह भी पूरी करता था। यह आपसी लेन-देन ही समाज की असली पहचान है। इसलिए लेखक को लगने लगा कि उसकी मनुष्यता में अब कोई कमी नहीं बची। उसके पास घर था, पड़ोस था, नगर था और वह ख़ुद था। उसे अपनी स्थिति सुंदर, संगठित और पूरी लगती थी।

आनंद की दीवार में दरार

फिर एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई। दरार का अर्थ है किसी पक्की चीज़ में आई टूटन। यहाँ दीवार ईंट-पत्थर की नहीं, लेखक के विचारों की है। दरार पड़ने का मतलब है कि पूर्णता के जिस भाव पर लेखक इतना ख़ुश था, उस पर अचानक चोट लगी। लेखक को समझ आया कि घर, पड़ोस और नगर से इतना कुछ पाकर भी उसकी स्थिति बहुत हीन है। कोई भी, कहीं भी उसका अपमान कर सकता है, और वह उस अपमान के ख़िलाफ़ न बदला ले सकता है, न किसी से न्याय की गुहार लगा सकता है।

यह हीनता क्यों थी? क्योंकि उस समय भारत ग़ुलाम था। जिस देश के लोग स्वतंत्र न हों, उनके नागरिकों की निजी उपलब्धियाँ भी उन्हें सम्मान नहीं दिला पातीं। पाठक पूछता है कि क्या कोई भूकंप आया था जिससे दीवार में दरार पड़ी। लेखक इस प्रश्न को बहुत महत्वपूर्ण मानता है, क्योंकि यह बात को खोलने और आगे बढ़ाने का अवसर देता है। वह उत्तर देता है कि हाँ, भूकंप आया था, पर वह किसी प्रांत या प्रदेश में नहीं, उसके अपने मन में आया था।

लाला लाजपत राय का अनुभव: मन का भूकंप

यह मानसिक भूकंप एक तेजस्वी पुरुष के अनुभव से आया। वे थे पंजाब केसरी लाला लाजपत राय। ग़ुलामी के अँधेरे दिनों में जिन लोगों ने अपने ख़ून से देश के गौरव के दीपक जलाए और आँधियों में उन्हें बुझने से बचाया, लाला जी उनमें से एक थे। उनकी लेखनी और वाणी दोनों में अद्भुत तेज था। उनके परिवार, पड़ोस और नगर ने उनके व्यक्तित्व को सबसे अच्छे गुण दिए थे। वे जहाँ जाते, लोगों पर छा जाते।

लाला जी ने अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस और कई दूसरे देशों की यात्रा की। लौटकर उन्होंने अपना पूरा अनुभव एक वाक्य में रख दिया। उनका कहना था कि वे दुनिया में जहाँ भी गए, भारत की पराधीनता की शर्म का दाग़ उनके माथे पर लगा रहा। इतने महान व्यक्ति को भी विदेश में बराबरी का आदर नहीं मिला, क्योंकि उनका देश ग़ुलाम था। यही बात लेखक के मन को झकझोर गई। लेखक के अनुसार किसी के पास स्वर्ग तक के सारे साधन हो सकते हैं। पर अगर उसका देश ग़ुलाम या किसी और रूप में हीन है, तो वे साधन उसे गौरव नहीं दे सकते। ग़ुलामी के उन दिनों को इसीलिए दीन बताया गया है, क्योंकि उनमें लोगों के आत्मसम्मान को कुचला जाता था।

कर्तव्य और अधिकार: दोनों का संतुलन

इस अनुभव से लेखक अपने लिए दो बातें तय करता है। पहली बात कर्तव्य की है। उसे निजी तौर पर पूरी दुनिया का राज्य ही क्यों न मिल रहा हो, वह ऐसा कोई काम न करे जिससे देश की स्वतंत्रता या सम्मान को धक्का लगे। उसके किसी काम से देश की शक्ति भी कम न हो। दूसरी, उसका अधिकार है कि देश के सम्मान में उसे पूरा हिस्सा मिले। वह दुनिया में कहीं भी हो, उसे भरोसा रहे कि देश की शक्ति उसके सम्मान की रक्षा करेगी।

यहाँ लेखक एक गहरी बात कहता है। देश और नागरिक का रिश्ता एकतरफ़ा नहीं है। नागरिक देश की इज़्ज़त बनाता या बिगाड़ता है, और देश की इज़्ज़त नागरिक की इज़्ज़त बनती है। आज भी जब कोई भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक में पदक जीतता है, तो दुनिया भर में बसे भारतीयों का सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है। और जब कोई भारतीय विदेश में ग़लत काम करता है, तो पूरे देश की छवि पर असर पड़ता है।

एक साधारण आदमी क्या कर सकता है?

अब पाठक एक बहुत स्वाभाविक प्रश्न पूछता है। एक अकेला आदमी इतने बड़े देश के लिए क्या कर सकता है? कोई बड़ा वैज्ञानिक हो, तो अपने आविष्कार से देश को ताक़त दे सकता है। कोई बहुत धनी हो, तो भामाशाह की तरह समय पर धन दान कर सकता है। पर हर कोई न वैज्ञानिक बन सकता है, न धनी। और जो बेचारा अपनी रोज़ी-रोटी की चिंता में ही उलझा हो, वह चाहकर भी देश के लिए क्या करे?

लेखक मानता है कि यह प्रश्न सोचने पर मजबूर करता है, पर इसमें जीवन की समझ की भारी कमी है। वह कहता है कि जीवन किसी बच्चे की गुड़िया नहीं है, जिसे देखकर कह दें कि बस इतना ही है। जीवन तो एक बहुत बड़े समुद्र का किनारा है, जिस पर हर किसी के लिए जगह है। दार्शनिकों ने जीवन को बहुमुखी कहा है, यानी उसकी अनेक धाराएँ हैं। इसलिए देश-सेवा का केवल एक रास्ता नहीं होता।

जीवन एक युद्ध: रसद, खेती और जय-जयकार

लेखक जीवन की तुलना युद्ध से करता है। युद्ध में केवल लड़ना ही काम नहीं होता। अगर सैनिकों तक खाने-पीने का सामान, यानी रसद, न पहुँचे, तो वे लड़ेंगे कैसे? और अगर किसान अनाज ही न उगाए, तो रसद पहुँचाने वाले क्या पहुँचाएँगे? इस तरह युद्ध की जीत में सैनिक, रसद पहुँचाने वाला और किसान, तीनों का हिस्सा है। आज के संदर्भ में अध्यापक, डॉक्टर, सफ़ाईकर्मी, मज़दूर, वैज्ञानिक और कलाकार सब इसी तरह देश को आगे बढ़ाते हैं।

लेखक यहाँ तक कहता है कि युद्ध में जय बोलने वालों का भी बड़ा महत्व है। पाठक को यह बात अजीब लगती है, तो लेखक खेल का उदाहरण देता है। मैच में दर्शकों की तालियाँ खिलाड़ियों में बिजली-सी भर देती हैं, और हारते हुए खिलाड़ी भी फिर से उठ खड़े होते हैं। कवि-सम्मेलनों और मुशायरों की सफलता भी दाद देने वालों, यानी सच्ची तारीफ़ करने वालों, पर टिकी होती है। इसलिए लेखक कहता है कि वह कितना भी साधारण नागरिक हो, देश के सम्मान की रक्षा के लिए बहुत कुछ कर सकता है।

अंत में लेखक एक प्रसिद्ध कहावत को चुनौती देता है: अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता। इसका अर्थ है कि अकेला आदमी कोई बड़ा काम नहीं कर सकता। लेखक अपने अनुभव के आधार पर इसे पूरी तरह झूठ बताता है। उसके अनुसार इतिहास गवाह है कि कई बार एक अकेले चने ने भी भाड़ को तोड़ डाला, और इस तरह तोड़ा कि उसका निशान तक न बचा। यानी एक अकेला व्यक्ति भी अपने साहस और लगन से बड़ा बदलाव ला सकता है। इसी बात को समझाने के लिए लेखक आगे दो युवकों की कहानियाँ सुनाता है।

Concepts and terms

निबंध

गद्य की वह विधा जिसमें लेखक किसी एक विषय पर अपने विचार, अनुभव और भावनाएँ क्रम से, तर्क के साथ और कसे हुए रूप में रखता है।

प्रश्नोत्तर शैली

लिखने का वह ढंग जिसमें लेखक ख़ुद पाठक के मन के प्रश्न उठाता है और फिर उनका उत्तर देता है। इससे निबंध बातचीत जैसा जीवंत लगता है।

पूर्णता का भ्रम

यह मान लेना कि घर, पड़ोस और नगर का प्रेम और सहारा पा लेने से मनुष्य पूरा हो गया, जबकि देश की हालत भी उसकी पहचान का हिस्सा है।

मानसिक भूकंप

ऐसा अनुभव जो धरती को नहीं, मन को हिला दे और पुराने विचारों की दीवार में दरार डाल दे।

नागरिक के कर्तव्य और अधिकार

कर्तव्य है कि कोई काम देश के सम्मान को चोट न पहुँचाए; अधिकार है कि देश के सम्मान और शक्ति का सहारा नागरिक को भी मिले।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

मेरी सहयोग-डायरी

Safety:

किसी अनजान व्यक्ति से जानकारी लेनी हो, तो घर के किसी बड़े को साथ रखिए।

What You Notice:

हमारा एक दिन भी दर्जनों लोगों के सहयोग से बनता है; यही आपसी जुड़ाव मिलकर देश बनाता है।

Did you know

लाला लाजपत राय को पंजाब केसरी कहा जाता है। सन् 1928 में साइमन कमीशन के विरोध में निकले जुलूस पर हुए लाठीचार्ज में वे गंभीर रूप से घायल हुए और कुछ ही दिनों बाद उनका देहांत हो गया।

भामाशाह मेवाड़ के एक धनी व्यक्ति थे। कहा जाता है कि संकट के समय उन्होंने महाराणा प्रताप को अपनी सारी संपत्ति सौंप दी थी, इसलिए दानवीरों की बात में उनका नाम आता है।

प्रभाकर जी के कई निबंध-संग्रहों के नाम बहुत काव्यात्मक हैं, जैसे माटी हो गई सोना और आकाश के तारे धरती के फूल।

Memory tricks

घर से देश की सीढ़ी: घ–प–न–दे — घर, पड़ोस, नगर और फिर देश; लेखक की पूर्णता देश तक पहुँचे बिना अधूरी है।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 मैं और मेरा देश को निबंध क्यों कहा जाता है? beginner
  • A इसमें एक विषय पर लेखक के विचार क्रम से रखे गए हैं
  • B इसमें कई पात्रों की लंबी कहानी अलग-अलग दृश्यों में है
  • C इसमें केवल तुकांत पंक्तियाँ और लय वाले छंद दिए गए हैं
  • D इसमें मंच पर खेलने के लिए संवाद और रंग-निर्देश हैं
Show answer
Answer: इसमें एक विषय पर लेखक के विचार क्रम से रखे गए हैं
Why:

विचार-प्रधान गद्य।

Q2 निबंध शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है? beginner
  • A बिना किसी क्रम के इधर-उधर बिखरा
  • B भली-भाँति बँधा या गठा हुआ
  • C छंदों में लिखा हुआ गीत
  • D लंबी यात्रा का पूरा वर्णन
Show answer
Answer: भली-भाँति बँधा या गठा हुआ
Why:

नि + बंध।

Q3 कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का मुख्य कार्यक्षेत्र क्या था? beginner
  • A चित्रकला और मूर्तिकला
  • B वकालत
  • C पत्रकारिता
  • D चिकित्सा
Show answer
Answer: पत्रकारिता
Why:

संपादक।

Q4 इनमें से कौन-सा निबंध-संग्रह प्रभाकर जी का है? intermediate
  • A तुम चंदन हम पानी
  • B गेहूँ और गुलाब
  • C अशोक के फूल
  • D माटी हो गई सोना
Show answer
Answer: माटी हो गई सोना
Why:

दीप जले शंख बजे भी उन्हीं का।

Q5 प्रभाकर जी को कई बार जेल क्यों जाना पड़ा? beginner
  • A पत्रों में झूठी ख़बरें छापने और गाँव-गाँव अफ़वाह फैलाने के कारण
  • B सरकारी नौकरी छोड़कर विदेश भाग जाने की योजना के कारण
  • C स्वतंत्रता आंदोलन और समाज-सेवा में भाग लेने के कारण
  • D किसी पुराने झगड़े में पड़ोसियों से मारपीट के कारण
Show answer
Answer: स्वतंत्रता आंदोलन और समाज-सेवा में भाग लेने के कारण
Why:

सेनानी।

Q6 यह निबंध पढ़ते समय बातचीत जैसा क्यों लगता है? intermediate
  • A लेखक हर अनुच्छेद के अंत में कोई कविता जोड़ देता है
  • B लेखक पूरे निबंध में केवल अपने बचपन की बातें करता है
  • C लेखक कठिन शब्दों के अर्थ कोष्ठक में लिखता चलता है
  • D लेखक पाठक के मन के प्रश्न उठाकर उनका उत्तर देता है
Show answer
Answer: लेखक पाठक के मन के प्रश्न उठाकर उनका उत्तर देता है
Why:

प्रश्नोत्तर शैली।

Q7 किन प्रश्नों के उत्तर देना लेखक को सबसे आनंददायक लगता है? intermediate
  • A जो किसी की समझ को परखने के लिए अचानक पूछे जाएँ
  • B जो बात को खोलें, आगे बढ़ाएँ और ठीक समय पर पूछे जाएँ
  • C जो बिना किसी संदर्भ के केवल मज़ाक़ में पूछे जाएँ
  • D जो पूरी बात का निष्कर्ष तुरंत माँगने के लिए हों
Show answer
Answer: जो बात को खोलें, आगे बढ़ाएँ और ठीक समय पर पूछे जाएँ
Why:

विस्तार देने वाले प्रश्न।

Q8 लेखक के अनुसार उसे ज्ञान का भंडार कहाँ से मिला? beginner
  • A अपने नगर के समाज से
  • B विदेश की लंबी यात्राओं से
  • C केवल अपने घर से
  • D जेल के साथियों से
Show answer
Answer: अपने नगर के समाज से
Why:

संचित ज्ञान।

Q9 मैं भी बहुतों की ज़रूरत का जवाब था। इस भाव से समाज के बारे में क्या पता चलता है? intermediate
  • A समाज में हर कोई केवल अपने ही लिए जीता है
  • B समाज आपसी सहयोग और लेन-देन से चलता है
  • C लेखक पूरे नगर का सबसे धनी व्यक्ति था
  • D नगर के लोग लेखक से बहुत डरते थे
Show answer
Answer: समाज आपसी सहयोग और लेन-देन से चलता है
Why:

परस्पर निर्भरता।

Q10 आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई। यहाँ दरार किस ओर संकेत करती है? intermediate
  • A घर की पुरानी दीवार के टूटने की ओर
  • B पड़ोसियों से हुए झगड़े की ओर
  • C पूर्णता के भाव पर लगी चोट की ओर
  • D सुख-सुविधाओं की कमी की ओर
Show answer
Answer: पूर्णता के भाव पर लगी चोट की ओर
Why:

विचारों की दीवार।

Q11 दरार पड़ने के बाद लेखक को अपनी स्थिति कैसी लगने लगी? intermediate
  • A इतनी ऊँची कि सब उससे सलाह माँगने आते थे
  • B इतनी सुखी कि उसे किसी भी चीज़ की कोई ज़रूरत न थी
  • C इतनी व्यस्त कि उसके पास सोने का समय न था
  • D इतनी हीन कि कोई भी उसका अपमान कर सकता था
Show answer
Answer: इतनी हीन कि कोई भी उसका अपमान कर सकता था
Why:

अपील तक का अधिकार नहीं।

Q12 लेखक के अनुसार जिस भूकंप से दीवार में दरार पड़ी, वह कहाँ आया था? beginner
  • A उसके अपने मन में
  • B पंजाब प्रांत में
  • C सहारनपुर नगर में
  • D हिमालय पर्वत पर
Show answer
Answer: उसके अपने मन में
Why:

मानस।

Q13 लाला लाजपत राय को किस उपाधि से जाना जाता है? beginner
  • A लौह पुरुष सरदार
  • B देशबंधु
  • C लोकमान्य
  • D पंजाब केसरी
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Answer: पंजाब केसरी
Why:

तेजस्वी पुरुष।

Q14 लाला जी का अनुभव लेखक के लिए भूकंप क्यों बन गया? intermediate
  • A उससे पता चला कि विदेश में घूमना बहुत महँगा और थकाने वाला होता है
  • B उससे पता चला कि ग़ुलाम देश के महान व्यक्ति को भी आदर नहीं मिलता
  • C उससे पता चला कि लाला जी को अंग्रेज़ी भाषा ठीक से बिलकुल नहीं आती थी
  • D उससे पता चला कि अमेरिका और फ्रांस में भूकंप बहुत आते हैं
Show answer
Answer: उससे पता चला कि ग़ुलाम देश के महान व्यक्ति को भी आदर नहीं मिलता
Why:

ग़ुलामी का कलंक।

Q15 पराधीनता के दिनों को दीन क्यों कहा गया है? advanced
  • A तब लोगों के आत्मसम्मान और गौरव को दबाया जाता था
  • B तब भोजन, कपड़े और घर की सबसे ज़्यादा कमी थी
  • C तब लोगों को कोई भी त्योहार मनाने नहीं दिया जाता था
  • D तब देश के हर फ़ैसले में जनता की राय ली जाती थी
Show answer
Answer: तब लोगों के आत्मसम्मान और गौरव को दबाया जाता था
Why:

दीन = हीन, दबा हुआ।

Q16 निबंध के अनुसार साधन-संपन्न व्यक्ति भी गौरव का अनुभव कब नहीं कर सकता? intermediate
  • A जब उसे विदेश घूमने के कोई मौक़े न मिल पाएँ
  • B जब उसके नगर की सड़कें टूटी-फूटी हों
  • C जब उसका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो
  • D जब उसके घर में कोई नौकर-चाकर न हो
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Answer: जब उसका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो
Why:

देश की हीनता।

Q17 लेखक नागरिक के रूप में अपना कौन-सा अधिकार मानता है? intermediate
  • A किसी भी काम के लिए सरकार से धन लेने की छूट
  • B देश के सम्मान में हिस्सा और उसकी शक्ति का भरोसा
  • C चुनाव के बिना ही किसी भी बड़े पद पर बैठ जाने की छूट
  • D देश के नियमों को अपनी मर्ज़ी से तोड़ने की छूट
Show answer
Answer: देश के सम्मान में हिस्सा और उसकी शक्ति का भरोसा
Why:

कहीं भी हों, भरोसा रहे।

Q18 पाठक के अनुसार कौन-से दो लोग देश को सीधे बल दे सकते हैं? intermediate
  • A बड़ा गायक और बड़ा कवि
  • B बड़ा पहलवान और बड़ा जादूगर
  • C बड़ा व्यापारी और बड़ा जुआरी
  • D बड़ा वैज्ञानिक और बड़ा धनी
Show answer
Answer: बड़ा वैज्ञानिक और बड़ा धनी
Why:

आविष्कार और दान।

Q19 भामाशाह का उदाहरण निबंध में किस संदर्भ में आया है? intermediate
  • A संकट के समय देश के लिए अपना धन त्याग देने के
  • B बहुत बड़ा आविष्कार करके देश को नई ताक़त देने के
  • C युद्ध के मैदान में अकेले सारी सेना से लड़ने के
  • D दूसरे देशों में घूमकर भारत का नाम फैलाने के
Show answer
Answer: संकट के समय देश के लिए अपना धन त्याग देने के
Why:

दानवीर।

Q20 लेखक जीवन को एक बड़े समुद्र का तट क्यों कहता है? intermediate
  • A क्योंकि जीवन में हर समय तूफ़ान आता रहता है
  • B क्योंकि समुद्र-तट पर घूमना सबको अच्छा लगता है
  • C क्योंकि उस पर हर किसी के लिए अपनी जगह है
  • D क्योंकि जीवन में केवल नमक जैसा खारापन है
Show answer
Answer: क्योंकि उस पर हर किसी के लिए अपनी जगह है
Why:

बहुमुखी जीवन।

Q21 जीवन एक युद्ध है, इस बात से लेखक क्या समझाना चाहता है? advanced
  • A जीवन में हर समय दूसरों से लड़ते रहना ही ज़रूरी है
  • B जीत में लड़ने वाले के साथ हर सहयोगी का भी हिस्सा है
  • C केवल सैनिक ही देश के लिए कुछ कर सकते हैं
  • D युद्ध में किसानों और दर्शकों का कोई काम नहीं होता
Show answer
Answer: जीत में लड़ने वाले के साथ हर सहयोगी का भी हिस्सा है
Why:

रसद, खेती, जय-जयकार।

Q22 मैच के उदाहरण से लेखक किनका महत्व सिद्ध करता है? beginner
  • A तालियों से हौसला बढ़ाने वाले दर्शकों का
  • B मैदान की देखभाल करने वाले माली का
  • C टिकट बेचने वाले कर्मचारियों का
  • D खेल का सामान बनाने वाले छोटे कारीगरों का
Show answer
Answer: तालियों से हौसला बढ़ाने वाले दर्शकों का
Why:

जय बोलने वाले।

Q23 अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, इस कहावत के बारे में लेखक की क्या राय है? beginner
  • A यह पूरी तरह सच है, अकेला आदमी कुछ नहीं कर सकता
  • B यह केवल रसोई और चना भूनने के बारे में ही है
  • C यह पूरी तरह झूठ है, इतिहास इसका उलटा बताता है
  • D यह कहावत केवल गाँवों में ही लागू होती है
Show answer
Answer: यह पूरी तरह झूठ है, इतिहास इसका उलटा बताता है
Why:

सौ फ़ीसदी झूठ।

Q24 अभिकथन: लेखक मानता है कि साधारण नागरिक भी देश के सम्मान की रक्षा कर सकता है। कारण: जीवन बहुमुखी है और उसमें हर तरह के सहयोग का महत्व है। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
  • D दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

जय बोलने वाले भी।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. प्रभाकर जी पद्म श्री से सम्मानित थे। II. लेखक के मन का भूकंप सहारनपुर की धरती हिलने से आया। III. निबंध प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है। लेखक और निबंध के बारे में कौन-से कथन ठीक हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल I और III
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

भूकंप मन में था।

Important short questions (7)

निबंध किसे कहते हैं? मैं और मेरा देश के आधार पर उसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

निबंध गद्य की वह विधा है, जिसमें लेखक एक विषय पर अपने विचार क्रम से रखता है। इस निबंध में पहली विशेषता विषय-केंद्रीयता है, क्योंकि पूरी रचना व्यक्ति और देश के रिश्ते पर टिकी है। दूसरी विशेषता तार्किकता है, क्योंकि हर बात उदाहरण से समझाई गई है।

कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

प्रभाकर जी सन् 1906 में सहारनपुर में जन्मे। वे पत्रकार थे और नया जीवन तथा विकास पत्रों के संपादक रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में वे कई बार जेल गए। उन्हें पद्म श्री मिला और सन् 1995 में उनका निधन हुआ।

लेखक को अपने आप में पूरा हो जाने का एहसास क्यों हुआ था?

लेखक को घर में पालन-पोषण मिला और पड़ोस से स्नेह मिला। नगर से उसे ज्ञान, सम्मान और सहारा मिला। बदले में वह भी लोगों के काम आता था। इस आपसी लेन-देन से उसे लगा कि उसकी मनुष्यता में कोई कमी नहीं बची।

लाला लाजपत राय के अनुभव को मानसिक भूकंप क्यों कहा गया है?

लाला जी ने बताया कि विदेश में हर जगह उन्हें भारत की ग़ुलामी की शर्म झेलनी पड़ी। इस बात ने लेखक के पूर्णता वाले विचार को हिला दिया। धरती नहीं हिली, पर मन की मान्यताएँ टूट गईं, इसलिए इसे मानसिक भूकंप कहा गया।

लेखक नागरिक के कर्तव्य और अधिकार को किस रूप में देखता है?

लेखक का कर्तव्य है कि वह ऐसा कोई काम न करे, जिससे देश के सम्मान या शक्ति को चोट पहुँचे। उसका अधिकार है कि देश के सम्मान में उसे भी पूरा हिस्सा मिले। वह कहीं भी रहे, उसे देश की शक्ति पर भरोसा रहे।

लेखक के अनुसार युद्ध में जय बोलने वालों का क्या महत्व है?

जय बोलने वाले लड़ने वालों का हौसला बढ़ाते हैं। मैच में दर्शकों की तालियों से खिलाड़ियों में नई ताक़त आ जाती है। मुशायरे की सफलता भी दाद देने वालों पर टिकी होती है। इसलिए प्रोत्साहन देना भी देश-सेवा है।

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता कहावत पर लेखक असहमत क्यों है?

लेखक के अनुसार इतिहास में कई बार अकेले व्यक्ति ने ही बड़ा बदलाव किया है। उसने ऐसा भाड़ फोड़ा कि उसका निशान तक मिट गया। इसलिए लेखक मानता है कि लगन और साहस हो, तो एक व्यक्ति भी बहुत कुछ कर सकता है।

Long answer questions (3)

मैं और मेरा देश निबंध की प्रश्नोत्तर शैली की विशेषताएँ उदाहरण सहित समझाइए।

इस निबंध में लेखक पाठक के मन में उठने वाले प्रश्न ख़ुद लिखता है और फिर उनका उत्तर देता है। जैसे, क्या कोई भूकंप आया था, या एक आदमी देश के लिए क्या कर सकता है। इससे निबंध बातचीत जैसा जीवंत लगता है।

इस शैली की पहली विशेषता यह है कि पाठक की जिज्ञासा बनी रहती है। दूसरी, कठिन विचार भी धीरे-धीरे खुलते हैं। तीसरी, लेखक और पाठक के बीच अपनापन बनता है, क्योंकि लेखक हर प्रश्न का स्वागत करता है। चौथी, उपदेश भी बोझ नहीं लगता। इसी शैली के कारण यह निबंध रोचक और प्रभावशाली बना है।

लेखक की पूर्णता की भावना कैसे टूटी? इस प्रसंग से हमें क्या सीख मिलती है?

लेखक को घर, पड़ोस और नगर से स्नेह, ज्ञान और सहारा मिला था। इसलिए उसे लगता था कि वह पूरा मनुष्य बन गया है। फिर लाला लाजपत राय का अनुभव सामने आया। विदेश में हर जगह उन्हें भारत की ग़ुलामी का दाग़ महसूस हुआ। इससे लेखक समझ गया कि ग़ुलाम देश के नागरिक को कहीं भी अपमानित किया जा सकता है।

इस प्रसंग से सीख मिलती है कि व्यक्ति की पहचान केवल उसके घर या नगर से पूरी नहीं होती। देश का सम्मान ही उसके सम्मान की नींव है। इसलिए हमें ऐसे काम करने चाहिए, जिनसे देश का सिर ऊँचा हो। अपनी सुविधाओं पर संतोष करके देश की हालत भूल जाना ठीक नहीं।

एक साधारण नागरिक देश के लिए क्या कर सकता है? निबंध के तर्कों और अपने अनुभव के आधार पर लिखिए।

पाठक सोचता है कि केवल वैज्ञानिक या धनी व्यक्ति ही देश के काम आ सकता है। लेखक इसे जीवन की अधूरी समझ मानता है। उसके अनुसार जीवन एक युद्ध है, जिसमें सैनिक के साथ रसद पहुँचाने वाला, अन्न उगाने वाला और जय बोलने वाला भी ज़रूरी है।

आज के जीवन में भी यही बात सच है। एक विद्यार्थी मन लगाकर पढ़ सकता है और स्कूल को साफ़ रख सकता है। वह अपने छोटे भाई-बहनों को पढ़ा सकता है और सड़क के नियम मान सकता है। खिलाड़ियों की हौसला-अफ़ज़ाई करना और ईमानदारी से काम करना भी देश-सेवा है। इस तरह हर नागरिक अपनी जगह से देश का सम्मान बढ़ा सकता है।

Flashcards (17)

मैं और मेरा देश किस विधा की रचना है?
निबंध।
निबंध शब्द किन दो अंशों से बना है?
नि + बंध।
कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सन् 1906, सहारनपुर।
प्रभाकर जी का मुख्य कार्यक्षेत्र क्या था?
पत्रकारिता।
उन्होंने किन पत्रों का संपादन किया?
नया जीवन और विकास।
प्रभाकर जी को कौन-सा सम्मान मिला?
पद्म श्री।
प्रभाकर जी का निधन कब हुआ?
सन् 1995 में।
इस निबंध की शैली कैसी है?
प्रश्नोत्तर या संवाद शैली।
लेखक को पूर्णता का एहसास किनसे मिला?
घर, पड़ोस और नगर से।
आनंद की दीवार में दरार का संकेत क्या है?
पूर्णता के भाव पर चोट।
लेखक के अनुसार भूकंप कहाँ उठा था?
उसके मानस, यानी मन में।
किसके अनुभव ने लेखक को झकझोर दिया?
लाला लाजपत राय के।
पराधीनता के दिनों को दीन क्यों कहा गया?
उनमें आत्मसम्मान का दमन होता था।
भामाशाह किस बात के लिए प्रसिद्ध हैं?
संकट में देश के लिए धन-दान।
लेखक ने जीवन की तुलना किससे की है?
युद्ध से और समुद्र के तट से।
रसद का अर्थ?
अनाज, खाने का सामान, राशन।
दाद देना का अर्थ?
उचित और सच्ची प्रशंसा करना।

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  • शब्द और अर्थ
  • कर्तव्य या अधिकार
  • सही या भ्रम
  • विचारों का क्रम
  • झटपट उत्तर

दो युवक, सच्ची भावना और देश की कसौटी

जापान की दो घटनाएँ दिखाती हैं कि एक नागरिक का काम पूरे देश का सिर ऊँचा या नीचा कर सकता है। कमालपाशा और पंडित नेहरू के प्रसंग भावना का महत्व बताते हैं, और अंत में लेखक शक्ति-बोध, सौंदर्य-बोध और चुनाव को देश की कसौटी बनाता है।

What you will be able to do

  • स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक की घटना से नागरिक और देश के संबंध को समझा सकूँगा।
  • पुस्तकालय वाली घटना से किसी एक व्यक्ति के ग़लत काम का देश पर असर बता सकूँगा।
  • कमालपाशा और पंडित नेहरू के प्रसंगों से काम के पीछे की भावना का महत्व स्पष्ट कर सकूँगा।
  • शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध को चोट पहुँचाने वाले व्यवहार पहचान सकूँगा।
  • चुनाव को देश की उच्चता की कसौटी मानने का तर्क और शब्दों के संदर्भगत अर्थ समझा सकूँगा।

Key points

  • फल न मिलने पर स्वामी रामतीर्थ ने जापान के फलों पर टिप्पणी की; यह सुनकर एक स्थानीय युवक दौड़कर ताज़े फल ले आया।

  • उस युवक ने फलों के बदले केवल यह माँगा कि स्वामी जी अपने देश में जापान के फलों की बुराई न करें।

  • दूसरे देश के एक विद्यार्थी ने पुस्तकालय की किताब से दुर्लभ चित्र निकाल लिए; उसे जापान से निकाला गया और उसके देश के लोगों का प्रवेश बंद हुआ।

  • इन घटनाओं का निष्कर्ष है कि देश का गौरव नागरिक को मिलता है और नागरिक का गौरव या कलंक देश को।

  • लेखक के अनुसार काम का महत्व उसके आकार में नहीं, उसके पीछे की भावना में है।

  • कमालपाशा ने तीस मील पैदल चलकर आए बूढ़े किसान का शहद सबसे अच्छा उपहार माना; नेहरू जी ने खाट के बदले अपना हस्ताक्षरित फ़ोटो दिया।

  • देश को सबसे पहले शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध चाहिए; हमारा कोई काम कमज़ोरी या कुरुचि न बढ़ाए।

  • अपने देश को बात-बात में हीन बताना शक्ति-बोध को चोट है, जैसे शल्य ने कर्ण का आत्मविश्वास तोड़ा था।

  • देश की उच्चता की कसौटी चुनाव है: जहाँ नागरिक सोच-समझकर ठीक व्यक्ति को मत देते हैं, वह देश उच्च है।

Full explanation

पहली घटना: फलों का मूल्य

अपनी बात को साफ़ करने के लिए लेखक दो छोटी घटनाएँ सुनाता है। वह कहता है कि ये कहानियाँ प्रेमचंद या चेखव की लिखी नहीं हैं, बल्कि दो युवकों के जीवन की सच्ची घटनाएँ हैं। फिर भी उनमें नागरिक और देश को बाँधने वाली गाँठ इतनी साफ़ दिखती है, जितनी मोटी-मोटी किताबें पढ़कर भी न दिखे। यहाँ गाँठ का अर्थ है वह बंधन जो दोनों को जोड़ता है।

भारत के संत स्वामी रामतीर्थ एक बार जापान गए। वे रेल से यात्रा कर रहे थे और उन दिनों केवल फल खाते थे। एक दिन उन्हें कहीं फल नहीं मिले। एक स्टेशन पर गाड़ी रुकी, तो वहाँ भी उन्होंने फल खोजे, पर नहीं मिले। उनके मुँह से अनायास निकल गया कि लगता है इस देश में अच्छे फल होते ही नहीं। प्लेटफ़ॉर्म पर एक जापानी युवक अपनी पत्नी को गाड़ी में बैठाने आया था। उसने यह बात सुन ली। वह अपनी बात अधूरी छोड़कर दौड़ा और कहीं दूर से ताज़े फलों की टोकरी ले आया।

स्वामी जी ने समझा कि वह फल बेचने वाला है, इसलिए दाम पूछे। युवक ने दाम लेने से मना कर दिया। बहुत कहने पर उसने कहा कि अगर आप मूल्य देना ही चाहते हैं, तो अपने देश लौटकर किसी के सामने जापान के फलों की बुराई मत कीजिएगा। स्वामी जी उसका उत्तर सुनकर मुग्ध हो गए। उस युवक ने एक टोकरी फलों से अपने देश का गौरव न जाने कितना बढ़ा दिया। उसके लिए अपने देश की छवि किसी भी धन से ज़्यादा क़ीमती थी। इस युवक के व्यक्तित्व से देशप्रेम, तत्परता, अतिथि-सत्कार और निःस्वार्थ भाव झलकता है।

दूसरी घटना: चित्र फाड़ने वाला विद्यार्थी

लेखक कहता है कि पहली घटना से बढ़े गौरव की ऊँचाई तभी पूरी तरह समझ आएगी, जब दूसरी घटना सुनी जाए। किसी दूसरे देश का एक युवक जापान में पढ़ने आया था। एक दिन वह सरकारी पुस्तकालय से एक किताब लाया, जिसमें कुछ दुर्लभ चित्र थे। उसने वे चित्र किताब से निकाल लिए और किताब लौटा दी। यह करतूत एक जापानी विद्यार्थी की नज़र में आ गई, और उसने पुस्तकालय को सूचना दे दी। पुलिस ने तलाशी ली, चित्र उसके कमरे से बरामद हुए और उसे जापान से निकाल दिया गया।

बात यहीं ख़त्म हो जाती, तो कोई बड़ी बात न थी, क्योंकि अपराधी को सज़ा मिलनी ही चाहिए। पर बात यहीं नहीं रुकी। पुस्तकालय के बाहर बोर्ड लगा दिया गया कि उस विद्यार्थी के देश का कोई भी निवासी इस पुस्तकालय में नहीं आ सकता। यानी एक व्यक्ति की ग़लती की सज़ा उसके पूरे देश को भुगतनी पड़ी। लेखक के अनुसार पहले युवक ने अपने देश का मस्तक गर्व से ऊँचा किया। दूसरे ने अपने देश पर ऐसा दाग़ लगाया, जो बरसों तक दुनिया की नज़र में उसे लांछित, यानी बदनाम, करता रहा।

निष्कर्ष: मैं ही मेरा देश हूँ

इन दोनों घटनाओं से लेखक एक बड़ा निष्कर्ष निकालता है। हर नागरिक अपने देश से बँधा हुआ है। देश की हीनता या गौरव का फल नागरिक को मिलता है, और नागरिक की हीनता या गौरव का फल उसके देश को भी मिलता है। इसलिए लेखक कहता है कि वह अपने देश का नागरिक ही नहीं, ख़ुद अपना देश है। जैसे वह अपने लाभ और सम्मान के लिए छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देता है, वैसे ही देश के हित और इज़्ज़त की ख़ातिर भी उसे छोटी बातों पर ध्यान देना चाहिए। यह उसका कर्तव्य है। और जैसे उसे अपने साधनों से सहारा मिलता है, वैसे ही देश के साधनों और सम्मान से भी सहारा मिले, यह उसका अधिकार है। मैं और मेरा देश दो अलग चीज़ें नहीं हैं, यही इस निबंध का केंद्रीय विचार है।

आज हम इस बात को अपने आस-पास भी देख सकते हैं। विदेश में कोई भारतीय पर्यटक किसी ऐतिहासिक इमारत पर अपना नाम लिख दे, तो ख़बरों में उसका नहीं, भारतीय पर्यटकों का ज़िक्र होता है। वहीं जब कोई भारतीय डॉक्टर विदेश में किसी की जान बचाता है, तो पूरे भारत की प्रशंसा होती है।

भावना ही असली मूल्य है

लेखक अपने जीवन भर के अध्ययन और अनुभव का सार बताता है। किसी काम का महत्व उसके बड़ेपन में नहीं, उसे करने की भावना में है। बहुत बड़ा काम भी छोटा है, अगर उसके पीछे अच्छी भावना नहीं। और बहुत छोटा काम भी महान है, अगर उसके पीछे सच्ची भावना है। इसे समझाने के लिए लेखक दो और घटनाएँ सुनाता है।

तुर्की के राष्ट्रपति कमालपाशा अपनी वर्षगाँठ का उत्सव मनाकर अपने भवन में ऊपर जा चुके थे। तभी एक देहाती बूढ़ा उन्हें उपहार देने आया। सचिव ने कहा कि अब समय बीत चुका है। बूढ़े ने बताया कि वह तीस मील पैदल चलकर आया है, इसलिए देर हो गई। राष्ट्रपति को सूचना भेजी गई। वे आराम के कपड़े पहन चुके थे, फिर भी उन्हीं कपड़ों में नीचे आ गए। बूढ़े का उपहार था मिट्टी की छोटी हँडिया में लगभग पाव-भर शहद, जिसे उसने ख़ुद छत्ते से निकाला था। कमालपाशा ने हँडिया ख़ुद खोली, दो उँगलियाँ भरकर शहद चखा और फिर तीसरी उँगली से बूढ़े को भी चखाया। यह देखकर बूढ़े की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। राष्ट्रपति बोले कि आज का सबसे अच्छा उपहार यही है, क्योंकि इसमें दिल का सच्चा प्यार है। उन्होंने आदेश दिया कि बूढ़े को शाही कार में पूरे सम्मान के साथ उसके गाँव पहुँचाया जाए।

क्या वह शहद बहुत क़ीमती था? क्या उसमें हीरे-मोती मिले थे? नहीं। उसकी क़ीमत लाने वाले की भावना से बढ़ी थी, जिसने उसे सौ लालों में एक लाल बना दिया। भारत में भी ऐसी एक घटना हुई। एक किसान ने रंगीन सुतलियों से एक खाट बुनी और उसे रेल से दिल्ली लाया। स्टेशन से वह खाट कंधे पर रखकर प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कोठी तक पहुँचा। नेहरू जी बाहर आए, तो उसने खाट उन्हें सौंप दी। वह इतना भाव-विभोर था कि कुछ बोल ही न सका। नेहरू जी ने पूछा कि वह क्या चाहता है। उसने कहा, बस इतना कि आप इसे स्वीकार कर लें। नेहरू जी ने खाट स्वीकार की और अपना हस्ताक्षर किया हुआ फ़ोटो उसे उपहार में दिया, जिसके लिए बड़े-बड़े लोग तरसते थे। यह फ़ोटो साधारण खाट का मूल्य नहीं, किसान की भावना का सम्मान था।

शक्ति-बोध: देश को हीन न कहें

पाठक पूछता है कि हम कैसे जानें कि हमारा कोई काम देश के अनुकूल है या नहीं। लेखक इसे बहुत क़ीमती प्रश्न मानता है। वह कहता है कि अपने काम को देश के हित की कसौटी पर परखने की आदत अच्छी है। पर इसमें सफलता तभी मिलेगी, जब हम देश की भीतरी हालत को ठीक से समझें। देश को सबसे पहले दो चीज़ें चाहिए: शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध। हमें ध्यान रखना है कि हमारे किसी काम से देश में कमज़ोरी की भावना या कुरुचि न बढ़े।

लेखक पाठक से पूछता है कि क्या वह रेल, बस, क्लब या चौपाल पर बैठकर ऐसी बातें करता है कि देश में कुछ ठीक नहीं हो रहा, सब गड़बड़ है। या अपने देश की तुलना दूसरे देशों से करके उसे हीन सिद्ध करता है। अगर हाँ, तो वह देश के शक्ति-बोध को भारी चोट पहुँचा रहा है। इससे देश का सामूहिक मनोबल घटता है। इसे लेखक महाभारत के एक उदाहरण से समझाता है। शल्य कर्ण का सारथी था। जब भी कर्ण अपनी जीत की घोषणा करता, शल्य हल्के से अर्जुन के अजेय होने की बात छेड़ देता। बार-बार की इस बात ने कर्ण के पक्के आत्मविश्वास में शक की दरार डाल दी, और यही उसकी हार की नींव बनी। आलोचना ग़लत नहीं है, पर बिना सुधार की इच्छा के हर समय देश को नीचा दिखाना शल्य जैसा काम है।

सौंदर्य-बोध: देश को गंदा न करें

फिर लेखक दूसरा प्रश्न पूछता है। क्या हम केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं, घर का कूड़ा बाहर डाल देते हैं, या गंदी भाषा बोलते हैं? क्या हम इधर की बात उधर लगाते हैं? क्या घर, दफ़्तर और गली को गंदा रखते हैं, सीढ़ियों और कोनों में पान की पीक थूकते हैं? क्या मेलों, उत्सवों, रेलों और खेलों में धक्का-मुक्की करते हैं? अगर हाँ, तो हम देश के सौंदर्य-बोध को गहरी चोट पहुँचा रहे हैं और देश की संस्कृति को नुक़सान पहुँचा रहे हैं।

आज के समय में इसमें और भी बातें जुड़ सकती हैं। जैसे ऐतिहासिक इमारतों पर अपना नाम लिखना, पार्क के पौधे तोड़ना, सड़क पर ज़ोर-ज़ोर से हॉर्न बजाना या पुस्तकालय की किताबों पर निशान लगाना। ये सब छोटे काम लगते हैं, पर इनसे देश की सुंदरता और सुरुचि दोनों घटती हैं। स्वच्छ भारत जैसे अभियान इसी सौंदर्य-बोध को मज़बूत करने की कोशिश हैं।

चुनाव: देश की ऊँचाई की कसौटी

अंत में पाठक पूछता है कि क्या कोई ऐसी कसौटी है, जिससे नागरिकों के आधार पर देश की ऊँचाई और हीनता को तौला जा सके। लेखक कहता है कि यह कसौटी है चुनाव। जिस देश के नागरिक जानते हैं कि किसे मत देना है और किसे नहीं, वह देश ऊँचा है। जहाँ लोग उत्तेजक नारों या किसी के ग़लत प्रभाव में आकर मत देते हैं, वह देश हीन है।

इसलिए लेखक हर नागरिक का कर्तव्य बताता है कि जब भी चुनाव हो, वह सही व्यक्ति को अपना मत दे। साथ ही उसका अधिकार भी बताता है कि उसकी राय लिए बिना कोई भी, चाहे वह दुनिया का सबसे बड़ा महापुरुष क्यों न हो, अधिकार की कुर्सी पर न बैठ सके। यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त है। स्कूल में कक्षा-प्रतिनिधि का चुनाव भी इसी का छोटा रूप है, जहाँ हमें दोस्ती नहीं, योग्यता देखकर मत देना चाहिए।

भाषा की बात: संदर्भ, शब्द-युग्म और उपसर्ग-प्रत्यय

इस निबंध की भाषा में कई शब्द संदर्भ के अनुसार अलग अर्थ देते हैं। दरार का सामान्य अर्थ है दीवार या छत में आई टूटन, पर संबंधों में दरार का अर्थ है आपसी दूरी या मनमुटाव। गाँठ धागे में भी बँधती है, और नागरिक तथा देश के बीच के बंधन को भी गाँठ कहा गया है। पानी का अर्थ जल है, पर पानी-पानी होना का अर्थ है बहुत शर्मिंदा होना, और पानी उतर जाना का अर्थ है इज़्ज़त चली जाना।

निबंध में शब्द-युग्म भी बहुत हैं, जैसे ममता-दुलार, भरा-पूरा, घूम-फिरकर, छोटी-छोटी, बड़ी-बड़ी और ठेलमठेल। इनसे भाषा में सजीवता आती है। कुछ शब्द-युग्म समान अर्थ वाले होते हैं, कुछ एक ही शब्द को दोहराकर बनते हैं, और कुछ उलटे अर्थ वाले शब्दों से। अपूर्णता शब्द में अ उपसर्ग, पूर्ण मूल शब्द और ता प्रत्यय है। इसी तरह अलौकिक में अ, लोक और इक; निरक्षरता में निर्, अक्षर और ता; सम्मानित में सम्, मान और इत; अपमानित में अप, मान और इत; अभिमानी में अभि, मान और ई हैं। देश शब्द को भी भारत की अलग-अलग भाषाओं में अलग नामों से पुकारते हैं। उर्दू में इसके लिए ख़ित्ता और इलाक़ा, मलयालम में देशम्, तेलुगु में प्रदेशमु और नेपाली में मुलुक शब्द भी मिलता है।

Concepts and terms

शक्ति-बोध

देश की अपनी ताक़त पर भरोसा। जब नागरिक बात-बात में अपने देश को कमज़ोर और दूसरे देशों को श्रेष्ठ बताते हैं, तो यह भरोसा टूटता है।

सौंदर्य-बोध

सफ़ाई, शिष्टता और सुरुचि की भावना। कूड़ा फेंकना, थूकना, गाली देना और धक्का-मुक्की करना इसे चोट पहुँचाते हैं।

भावना का महत्व

छोटा काम भी महान है अगर उसके पीछे सच्ची भावना है, और बड़ा काम भी हीन है अगर भावना अच्छी नहीं।

चुनाव की कसौटी

जिस देश के नागरिक नारों और ग़लत प्रभाव में आए बिना ठीक व्यक्ति को मत देते हैं, वह देश ऊँचा है।

शब्द-युग्म

दो शब्दों का जोड़ा, जो मिलकर भाव को गहरा करता है, जैसे ममता-दुलार, भरा-पूरा, छोटी-छोटी।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

स्वच्छता-सर्वे और सुझाव-पत्र

Safety:

सर्वे शिक्षक के साथ ही कीजिए और सड़क पार करते समय सावधानी रखिए।

What You Notice:

सौंदर्य-बोध केवल भाषण से नहीं बनता; छोटे-छोटे सुधार ही किसी जगह को सुंदर बनाते हैं।

मिलाकर देखो

Scenario:

कक्षा नौ के विद्यार्थी शैक्षिक भ्रमण पर एक प्राचीन किले में गए। वहाँ विदेशी पर्यटकों का एक दल भी घूम रहा था। कुणाल ने एक पुरानी दीवार पर अपना नाम खुरचना शुरू किया, तो उसकी सहपाठी ज़ोया ने उसे रोका। उसने याद दिलाया कि मैं और मेरा देश निबंध में चित्र निकालने वाले विद्यार्थी का क्या हाल हुआ था। उसी समय एक विदेशी पर्यटक ने रास्ता पूछा। रोहन ने उसे नक़्शा दिखाकर पूरा रास्ता समझाया और पानी की बोतल भी दी। पर्यटक ने मुस्कुराकर कहा कि भारत के बच्चे बहुत मददगार हैं। लौटते समय कुणाल ने माना कि उससे बड़ी भूल होने वाली थी।

Activity:

अपने स्कूल के लिए धरोहर-स्थलों पर ध्यान रखने योग्य पाँच नियमों का पोस्टर बनाइए।

Analysis:

ज़ोया और रोहन ने वही किया जो निबंध सिखाता है: अपने हर काम को देश के सम्मान की कसौटी पर परखना।

Did you know

मुस्तफ़ा कमाल पाशा आधुनिक तुर्की के संस्थापक और पहले राष्ट्रपति थे। तुर्की के लोग उन्हें आदर से अतातुर्क, यानी तुर्कों का पिता, कहते हैं।

स्वामी रामतीर्थ गणित के प्राध्यापक थे, जो बाद में संन्यासी बने। उन्होंने जापान और अमेरिका में वेदांत पर भाषण दिए।

भारत में हर चुनाव में करोड़ों लोग मतदान करते हैं, और हर मतदाता के लिए एक ही नियम है: एक व्यक्ति, एक मत।

Memory tricks

चार कहानियाँ, दो सबक़: फ–चि–श–खा — फल, चित्र, शहद, खाट; पहली दो नागरिक और देश का बंधन, अगली दो भावना का महत्व सिखाती हैं।

देश के दो बोध: श और सौ — श यानी शक्ति-बोध: देश को हीन न कहें। सौ यानी सौंदर्य-बोध: देश को गंदा न करें।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 स्वामी रामतीर्थ के मुँह से जापान के फलों पर टिप्पणी क्यों निकली? beginner
  • A यात्रा में खोजने पर भी उन्हें कहीं फल नहीं मिले
  • B उन्हें जापान के फल बहुत खट्टे और कड़वे लगे
  • C वे जापान के लोगों से बहुत नाराज़ हो गए थे
  • D किसी ने उन्हें फल बेचने से साफ़ मना कर दिया
Show answer
Answer: यात्रा में खोजने पर भी उन्हें कहीं फल नहीं मिले
Why:

स्टेशन पर भी नहीं।

Q2 जापानी युवक ने फलों का कोई दाम क्यों नहीं लिया? intermediate
  • A उसके पास फल बेचने का कोई सरकारी लाइसेंस नहीं था
  • B उसके लिए अपने देश की छवि धन से ज़्यादा क़ीमती थी
  • C वह स्वामी जी से कोई बड़ा उपहार चाहता था
  • D वे फल पुराने थे, इसलिए बेचे नहीं जा सकते थे
Show answer
Answer: उसके लिए अपने देश की छवि धन से ज़्यादा क़ीमती थी
Why:

देशप्रेम।

Q3 स्वामी जी युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए? beginner
  • A उसने बहुत सस्ते दाम में फल दे दिए थे
  • B उसने स्वामी जी को अपने घर बुला लिया था
  • C उसकी बात में गहरा और निःस्वार्थ देशप्रेम था
  • D उसकी आवाज़ बहुत मीठी और सुरीली थी
Show answer
Answer: उसकी बात में गहरा और निःस्वार्थ देशप्रेम था
Why:

मूल्य: देश की इज़्ज़त।

Q4 फल देने वाले युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि सबसे साफ़ उभरती है? intermediate
  • A चालाक, हर बात में मुनाफ़ा खोजने वाला
  • B आलसी, दूसरों के काम से बचने वाला
  • C घमंडी, विदेशियों का मज़ाक़ उड़ाने वाला
  • D तत्पर, अतिथि का आदर करने वाला देशप्रेमी
Show answer
Answer: तत्पर, अतिथि का आदर करने वाला देशप्रेमी
Why:

दौड़कर फल लाया।

Q5 पुस्तकालय वाली घटना में विद्यार्थी ने किताब से क्या निकाल लिया था? beginner
  • A कुछ पुराने नोट
  • B कुछ दुर्लभ चित्र
  • C एक सोने का पन्ना
  • D एक पुराना नक़्शा
Show answer
Answer: कुछ दुर्लभ चित्र
Why:

फिर किताब लौटा दी।

Q6 विद्यार्थी की चोरी की ख़बर पुस्तकालय तक किसने पहुँचाई? intermediate
  • A उसके अपने छोटे भाई ने
  • B पुस्तकालय के बूढ़े चौकीदार ने
  • C उसके देश के दूत ने
  • D एक जापानी विद्यार्थी ने
Show answer
Answer: एक जापानी विद्यार्थी ने
Why:

उसने देख लिया था।

Q7 लेखक के अनुसार इस मामले की सबसे गंभीर बात क्या थी? intermediate
  • A विद्यार्थी को जापान छोड़ने के लिए कोई समय नहीं मिला
  • B पुलिस ने पूरे छात्रावास की तलाशी ली और सबको डराया
  • C एक की ग़लती से उसके पूरे देश के लोगों पर रोक लगी
  • D पुस्तकालय ने वह किताब हमेशा के लिए बंद कर दी
Show answer
Answer: एक की ग़लती से उसके पूरे देश के लोगों पर रोक लगी
Why:

बोर्ड पर सूचना।

Q8 दोनों युवकों की घटनाओं से लेखक कौन-सा निष्कर्ष निकालता है? beginner
  • A नागरिक का काम पूरे देश के सम्मान को घटा या बढ़ा सकता है
  • B विदेश में पढ़ने वाले हर विद्यार्थी को चोरी की बुरी आदत होती है
  • C जापान के लोग दूसरे देशों के लोगों से बहुत नफ़रत करते हैं
  • D फल बेचना किताबें पढ़ने से ज़्यादा अच्छा और सच्चा काम है
Show answer
Answer: नागरिक का काम पूरे देश के सम्मान को घटा या बढ़ा सकता है
Why:

नागरिक और देश बँधे हैं।

Q9 लेखक कहता है कि दोनों घटनाओं में एक गाँठ साफ़ दिखती है। यह गाँठ किन दोनों को बाँधती है? intermediate
  • A देश और संविधान को
  • B देश और विदेश को
  • C नागरिक और देश को
  • D नौकरी और कमाई को
Show answer
Answer: नागरिक और देश को
Why:

अटूट बंधन।

Q10 मैं और मेरा देश दो अलग चीज़ें नहीं हैं। इस कथन के पीछे लेखक का मुख्य तर्क क्या है? advanced
  • A देश की इज़्ज़त नागरिक की और नागरिक की इज़्ज़त देश की बनती है
  • B देश की सारी संपत्ति पर हर नागरिक का निजी हक़ होता है
  • C हर नागरिक को देश की सरकार में कोई बड़ा पद मिलना चाहिए
  • D नागरिक को देश छोड़कर कभी विदेश नहीं जाना चाहिए
Show answer
Answer: देश की इज़्ज़त नागरिक की और नागरिक की इज़्ज़त देश की बनती है
Why:

दोतरफ़ा असर।

Q11 लेखक के अनुसार किसी काम का असली महत्व किसमें है? beginner
  • A उस पर ख़र्च हुए धन में
  • B उसके आकार और फैलाव में
  • C उसे देखने वालों की गिनती में
  • D उसे करने वाले की भावना में
Show answer
Answer: उसे करने वाले की भावना में
Why:

जीवन का सार।

Q12 कमालपाशा तक उपहार पहुँचाने में बूढ़े को देर क्यों हुई? beginner
  • A वह रास्ता भूलकर दूसरे शहर पहुँच गया
  • B वह तीस मील पैदल चलकर आया था
  • C उसकी बैलगाड़ी बीच रास्ते में टूट गई
  • D सचिव ने उसे सुबह से बाहर रोक रखा था
Show answer
Answer: वह तीस मील पैदल चलकर आया था
Why:

देहाती बूढ़ा।

Q13 आराम के कपड़े बदल चुकने के बाद भी कमालपाशा नीचे क्यों आए? intermediate
  • A उन्हें लगा कि बूढ़ा किसान कोई बहुत बड़ा सरकारी अफ़सर है
  • B उन्हें शहद ख़रीदने की बहुत जल्दी पड़ी थी
  • C सचिव ने उन्हें बार-बार ज़बरदस्ती नीचे बुला लिया था
  • D वे एक साधारण किसान की भावना का आदर करना चाहते थे
Show answer
Answer: वे एक साधारण किसान की भावना का आदर करना चाहते थे
Why:

सच्चा राष्ट्रपति।

Q14 कमालपाशा ने बूढ़े किसान का उपहार सबसे अच्छा क्यों बताया? beginner
  • A उसमें बहुत क़ीमती हीरे-मोती मिलाए गए थे
  • B वह चाँदी की सुंदर हँडिया में रखा था
  • C उसमें दिल का सच्चा और शुद्ध प्यार था
  • D वह सबसे ज़्यादा मात्रा में था
Show answer
Answer: उसमें दिल का सच्चा और शुद्ध प्यार था
Why:

सौ लालों में एक लाल।

Q15 बूढ़े को गाँव तक कैसे पहुँचाया गया? intermediate
  • A सरकारी बस की छत पर बैठाकर
  • B राष्ट्रपति की शाही कार में
  • C सजे हुए घोड़े पर
  • D रेल के पहले डिब्बे में
Show answer
Answer: राष्ट्रपति की शाही कार में
Why:

शाही सम्मान।

Q16 नेहरू जी ने खाट के बदले किसान को अपना हस्ताक्षरित फ़ोटो दिया। यह किस बात का सम्मान था? intermediate
  • A किसान की भावना और उसके परिश्रम का
  • B खाट के बहुत ऊँचे बाज़ार भाव का
  • C किसान के बहुत बड़े पद और ऊँचे नाम का
  • D दिल्ली स्टेशन की लंबी दूरी का
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Answer: किसान की भावना और उसके परिश्रम का
Why:

मामूली खाट, बड़ा भाव।

Q17 लेखक के अनुसार देश को सबसे पहले किन दो चीज़ों की ज़रूरत है? beginner
  • A धन-बल और सेना-बल
  • B खेल-कूद और मनोरंजन
  • C व्यापार और विदेश-नीति
  • D शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध
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Answer: शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध
Why:

दो बोध।

Q18 रेल और बसों में बैठकर अपने देश को बात-बात में हीन बताना किसे चोट पहुँचाता है? intermediate
  • A देश की सीमाओं की रक्षा को
  • B देश के शक्ति-बोध को
  • C रेलवे की आय को
  • D देश के व्यापार को
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Answer: देश के शक्ति-बोध को
Why:

सामूहिक मनोबल।

Q19 शल्य का उदाहरण निबंध में क्या समझाने के लिए आया है? advanced
  • A युद्ध में रथ चलाने वाले सारथी ही सबसे ज़्यादा ताक़तवर होते हैं
  • B अर्जुन और कर्ण दोनों एक ही गुरु के शिष्य थे
  • C बार-बार की निराशा भरी बातें आत्मविश्वास तोड़ देती हैं
  • D महाभारत का युद्ध केवल अठारह दिन तक चला था
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Answer: बार-बार की निराशा भरी बातें आत्मविश्वास तोड़ देती हैं
Why:

कर्ण की हार की नींव।

Q20 इनमें से कौन-सा काम देश के सौंदर्य-बोध को चोट पहुँचाता है? beginner
  • A सीढ़ियों और कोनों में पान की पीक थूकना
  • B मेले में अपनी बारी का शांति से इंतज़ार करना
  • C रास्ते का छिलका उठाकर कूड़ेदान में डालना
  • D पुस्तकालय की किताब समय पर लौटा देना
Show answer
Answer: सीढ़ियों और कोनों में पान की पीक थूकना
Why:

कुरुचि।

Q21 लेखक के अनुसार कौन-सा देश हीन है? intermediate
  • A जहाँ लोग सोच-समझकर सही व्यक्ति को मत देते हैं
  • B जहाँ लोग उत्तेजक नारों के प्रभाव में मत देते हैं
  • C जहाँ चुनाव हर पाँच साल में नियम से होते हैं
  • D जहाँ बहुत से लोग वोट डालने के लिए आते हैं
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Answer: जहाँ लोग उत्तेजक नारों के प्रभाव में मत देते हैं
Why:

चुनाव की कसौटी।

Q22 लेखक के अनुसार नागरिक का चुनाव से जुड़ा अधिकार क्या है? advanced
  • A वह जब चाहे, बिना चुनाव के कोई भी पद ले सकता है
  • B वह किसी एक दल को ही हमेशा मत देने को बँधा है
  • C वह चुनाव के दिन काम से छुट्टी लेकर घूम सकता है
  • D उसका मत लिए बिना कोई अधिकार की कुर्सी पर न बैठे
Show answer
Answer: उसका मत लिए बिना कोई अधिकार की कुर्सी पर न बैठे
Why:

महापुरुष भी नहीं।

Q23 वह पानी-पानी हो गया। इस वाक्य में पानी-पानी होना का अर्थ क्या है? beginner
  • A बहुत तेज़ प्यास लगना
  • B बाढ़ में फँसना
  • C बहुत लज्जित होना
  • D पसीने से भीगना
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Answer: बहुत लज्जित होना
Why:

संदर्भ से अर्थ।

Q24 अभिकथन: नेहरू जी ने किसान की मामूली खाट के बदले अपना हस्ताक्षरित फ़ोटो दिया। कारण: वे उस खाट को बाज़ार में ऊँचे दाम पर बेचना चाहते थे। advanced
  • A अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • C दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
Why:

भावना का सम्मान।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. अभिमानी शब्द में अभि उपसर्ग और ई प्रत्यय है। II. ममता-दुलार उलटे अर्थ वाले शब्दों का युग्म है। III. निरक्षरता में निर् उपसर्ग और ता प्रत्यय है। शब्द-रचना के बारे में कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C I, II और III तीनों
  • D केवल I और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

ममता-दुलार समान भाव वाला है।

Important short questions (7)

टोकरी भर फलों के बदले जापानी युवक की माँग क्या थी? उसके व्यक्तित्व के बारे में आपकी क्या राय है?

युवक ने माँगा कि स्वामी जी अपने देश में जाकर किसी से न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। वह अपने देश की छवि को धन से ऊपर रखता था। वह तत्पर, अतिथि-प्रेमी और सच्चा देशभक्त था।

पुस्तकालय वाली घटना से नागरिक और देश के संबंध के बारे में क्या सीख मिलती है?

एक विद्यार्थी ने किताब से चित्र निकाले, तो उसके पूरे देश के लोगों के लिए पुस्तकालय बंद हो गया। इससे सीख मिलती है कि विदेश में हम अपने देश के प्रतिनिधि होते हैं। हमारा ग़लत काम पूरे देश को बदनाम करता है।

लेखक काम की विशालता से ज़्यादा भावना को महत्व क्यों देता है?

लेखक के अनुसार बिना अच्छी भावना का बड़ा काम भी हीन है। सच्ची भावना से किया छोटा काम भी महान है। कमालपाशा ने पाव-भर शहद को और नेहरू जी ने साधारण खाट को इसी भावना के कारण सम्मान दिया।

शक्ति-बोध को चोट पहुँचाने वाले व्यवहार को शल्य के उदाहरण से समझाइए।

शल्य कर्ण का सारथी था। कर्ण जब भी जीत की बात करता, शल्य अर्जुन की अजेयता याद दिला देता। इससे कर्ण का आत्मविश्वास टूटा। इसी तरह हर समय देश को हीन बताने से लोगों का मनोबल गिरता है।

सौंदर्य-बोध को चोट पहुँचाने वाले चार व्यवहार लिखिए।

रास्ते में केले का छिलका या कूड़ा फेंकना पहला व्यवहार है। कोनों और सीढ़ियों में पीक थूकना दूसरा है। गंदी भाषा बोलना और चुगली करना तीसरा है। मेलों और रेलों में धक्का-मुक्की करना चौथा है।

लेखक चुनाव को देश की उच्चता की कसौटी क्यों मानता है?

चुनाव में नागरिक तय करते हैं कि देश कौन चलाएगा। अगर वे सोच-समझकर सही व्यक्ति को मत दें, तो देश ऊँचा उठता है। अगर वे नारों या ग़लत प्रभाव में आकर मत दें, तो देश हीन बनता है।

दरार शब्द के दो अलग-अलग संदर्भों में प्रयोग वाले वाक्य बनाइए।

पहला वाक्य: भूकंप के बाद स्कूल की दीवार में लंबी दरार दिखाई दी। दूसरा वाक्य: एक छोटी-सी ग़लतफ़हमी ने दो पुराने दोस्तों के रिश्ते में दरार डाल दी। पहले में अर्थ टूटन है, दूसरे में मनमुटाव।

Long answer questions (3)

दोनों युवकों की घटनाओं की तुलना करते हुए स्पष्ट कीजिए कि नागरिक का आचरण देश की छवि को कैसे प्रभावित करता है।

पहली घटना में जापानी युवक ने स्वामी रामतीर्थ के लिए दौड़कर ताज़े फल लाए। उसने दाम नहीं लिया और बस इतना चाहा कि जापान की बुराई न हो। इससे उसके देश का गौरव बहुत बढ़ गया। दूसरी घटना में एक विदेशी विद्यार्थी ने पुस्तकालय की किताब से दुर्लभ चित्र निकाल लिए। उसे निकाला गया और उसके पूरे देश के लोगों का प्रवेश बंद हो गया।

दोनों घटनाएँ बताती हैं कि दुनिया किसी व्यक्ति को उसके देश के प्रतिनिधि के रूप में देखती है। अच्छा आचरण देश का सिर ऊँचा करता है और बुरा आचरण उस पर कलंक लगाता है। इसलिए देश में हों या विदेश में, हर नागरिक को सोच-समझकर व्यवहार करना चाहिए।

कमालपाशा और पंडित नेहरू के प्रसंगों के आधार पर भावना के महत्व पर अपने विचार लिखिए।

कमालपाशा के पास एक बूढ़ा किसान तीस मील पैदल चलकर मिट्टी की हँडिया में शहद लाया। राष्ट्रपति आराम के कपड़ों में ही नीचे आए, शहद चखा और बूढ़े को भी चखाया। उन्होंने उसे सबसे अच्छा उपहार कहा और शाही कार से उसे गाँव भिजवाया। नेहरू जी ने भी रंगीन सुतलियों की खाट लाने वाले किसान को अपना हस्ताक्षरित फ़ोटो दिया।

इन प्रसंगों से पता चलता है कि उपहार की क़ीमत उसके दाम से नहीं, देने वाले के मन से तय होती है। हमारे जीवन में भी किसी बच्चे का बनाया कार्ड महँगे तोहफ़े से ज़्यादा प्यारा लगता है। इसलिए हमें हर काम सच्चे मन से करना चाहिए, क्योंकि भावना ही काम को महान बनाती है।

शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध से लेखक का क्या आशय है? इन्हें मज़बूत करने के लिए विद्यार्थी क्या कर सकते हैं?

शक्ति-बोध का अर्थ है देश की ताक़त पर भरोसा। बात-बात में देश को हीन बताना इसे कमज़ोर करता है, जैसे शल्य ने कर्ण का आत्मविश्वास तोड़ा। सौंदर्य-बोध का अर्थ है सफ़ाई, शिष्टता और सुरुचि। कूड़ा फेंकना, थूकना, गंदी भाषा और धक्का-मुक्की इसे चोट पहुँचाते हैं।

विद्यार्थी इन्हें मज़बूत करने के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। वे देश की उपलब्धियों के बारे में पढ़ें और दूसरों को बताएँ। किसी कमी की बात करें, तो साथ में सुधार का उपाय भी सुझाएँ। स्कूल, गली और सार्वजनिक स्थानों को साफ़ रखें। ऐतिहासिक इमारतों पर कुछ न लिखें और कतार में अपनी बारी का इंतज़ार करें।

Flashcards (17)

स्वामी रामतीर्थ किस देश गए थे?
जापान।
उन दिनों स्वामी जी का भोजन क्या था?
केवल फल।
जापानी युवक प्लेटफ़ॉर्म पर क्यों आया था?
अपनी पत्नी को गाड़ी में बैठाने।
युवक ने फलों का क्या मूल्य माँगा?
जापान के फलों की बुराई न करना।
दूसरे विद्यार्थी ने क्या ग़लत किया?
किताब से दुर्लभ चित्र निकाल लिए।
उस विद्यार्थी को क्या सज़ा मिली?
जापान से निकाल दिया गया।
पुस्तकालय के बोर्ड पर क्या लिखा गया?
उसके देश के लोग अंदर नहीं आ सकते।
लेखक किसे अपना देश मानता है?
ख़ुद को।
काम का महत्व किसमें है?
उसके पीछे की भावना में।
कमालपाशा किस देश के राष्ट्रपति थे?
तुर्की के।
बूढ़ा किसान कितनी दूर से पैदल आया था?
तीस मील से।
बूढ़े का उपहार क्या था?
मिट्टी की हँडिया में पाव-भर शहद।
किसान नेहरू जी के लिए क्या लाया?
रंगीन सुतलियों से बुनी खाट।
देश को सबसे पहले किन दो बोधों की ज़रूरत है?
शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध।
शल्य किसका सारथी था?
कर्ण का।
देश की उच्चता की कसौटी क्या है?
चुनाव।
अपूर्णता में उपसर्ग और प्रत्यय कौन-से हैं?
अ उपसर्ग, ता प्रत्यय।

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  • घटना और सीख
  • किस बोध को चोट
  • सही या भ्रम
  • रामतीर्थ वाली घटना का क्रम
  • झटपट उत्तर

Class 9 Hindi Chapter 7 — frequently asked questions

निबंध किसे कहते हैं? मैं और मेरा देश के आधार पर उसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

निबंध गद्य की वह विधा है, जिसमें लेखक एक विषय पर अपने विचार क्रम से रखता है। इस निबंध में पहली विशेषता विषय-केंद्रीयता है, क्योंकि पूरी रचना व्यक्ति और देश के रिश्ते पर टिकी है। दूसरी विशेषता तार्किकता है, क्योंकि हर बात उदाहरण से समझाई गई है।

कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

प्रभाकर जी सन् 1906 में सहारनपुर में जन्मे। वे पत्रकार थे और नया जीवन तथा विकास पत्रों के संपादक रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में वे कई बार जेल गए। उन्हें पद्म श्री मिला और सन् 1995 में उनका निधन हुआ।

लेखक को अपने आप में पूरा हो जाने का एहसास क्यों हुआ था?

लेखक को घर में पालन-पोषण मिला और पड़ोस से स्नेह मिला। नगर से उसे ज्ञान, सम्मान और सहारा मिला। बदले में वह भी लोगों के काम आता था। इस आपसी लेन-देन से उसे लगा कि उसकी मनुष्यता में कोई कमी नहीं बची।

टोकरी भर फलों के बदले जापानी युवक की माँग क्या थी? उसके व्यक्तित्व के बारे में आपकी क्या राय है?

युवक ने माँगा कि स्वामी जी अपने देश में जाकर किसी से न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। वह अपने देश की छवि को धन से ऊपर रखता था। वह तत्पर, अतिथि-प्रेमी और सच्चा देशभक्त था।

पुस्तकालय वाली घटना से नागरिक और देश के संबंध के बारे में क्या सीख मिलती है?

एक विद्यार्थी ने किताब से चित्र निकाले, तो उसके पूरे देश के लोगों के लिए पुस्तकालय बंद हो गया। इससे सीख मिलती है कि विदेश में हम अपने देश के प्रतिनिधि होते हैं। हमारा ग़लत काम पूरे देश को बदनाम करता है।

लेखक काम की विशालता से ज़्यादा भावना को महत्व क्यों देता है?

लेखक के अनुसार बिना अच्छी भावना का बड़ा काम भी हीन है। सच्ची भावना से किया छोटा काम भी महान है। कमालपाशा ने पाव-भर शहद को और नेहरू जी ने साधारण खाट को इसी भावना के कारण सम्मान दिया।

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