Class 9 Hindi Chapter 4: ऐसी भी बातें होती हैं

ऐसी भी बातें होती हैं is Chapter 4 of NCERT / CBSE Class 9 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 3 topics, 75 practice MCQs with answers and explanations, 30 important short and long questions and 51 flashcards, all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.
  • 3 topics
  • 75 MCQs
  • 21 short answers
  • 9 long answers
  • 51 flashcards
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  • ~135 min read
  • Hindi

साक्षात्कार, पिता की सीख और संघर्ष के दिन

यतींद्र मिश्र लता मंगेशकर से बातचीत में उनके बचपन, पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर की यादों, स्वाभिमान की सीख, फ़िल्मों की नक़ल वाले खेल, अभिनय से दूरी और परिवार के लिए दिन-रात की मेहनत के बारे में पूछते हैं।

What you will be able to do

  • साक्षात्कार विधा की पहचान और उसके मुख्य बिंदु बता सकूँगा।
  • यतींद्र मिश्र और लता मंगेशकर का संक्षिप्त परिचय दे सकूँगा।
  • पिता दीनानाथ मंगेशकर के अनुशासन, संगीत और संस्कारों का लता जी पर प्रभाव समझा सकूँगा।
  • पिता के निधन के बाद लता जी के संघर्ष और कर्तव्यनिष्ठा का मूल्यांकन कर सकूँगा।
  • बचपन के खेल, अभिनय से दूरी और मेडल वाले सपने के प्रसंगों का अर्थ बता सकूँगा।

Key points

  • ऐसी भी बातें होती हैं एक साक्षात्कार है, जिसमें यतींद्र मिश्र प्रश्न पूछते हैं और लता मंगेशकर उत्तर देती हैं।

  • यतींद्र मिश्र (जन्म 1977, अयोध्या) कवि और संगीत-कला के लेखक हैं; यदा-कदा और ड्योढ़ी पर आलाप उनके काव्य-संग्रह हैं।

  • भारत रत्न लता मंगेशकर इंदौर में जन्मीं और पाँच वर्ष की उम्र से पिता से संगीत सीखने लगीं।

  • पिता बिना डाँटे केवल गंभीर नज़र से बच्चों को समझा देते थे; यह अनुशासन डर से ज़्यादा सम्मान पर टिका था।

  • दीनानाथ जी की ड्रामा कंपनी के संगीत-नाटक रात भर चलते थे और वे मराठी रंगमंच में कर्नाटक व पंजाब का संगीत लाए।

  • लता जी ने पिता से सबसे बड़ी सीख स्वाभिमान की पाई: सही लगे तो करो, किसी के आगे हाथ मत फैलाओ।

  • बचपन में भाई-बहन संत तुकाराम जैसी फ़िल्मों की नक़ल करते, गद्दे-तकियों से स्वर्ग बनाकर खेलते थे।

  • लता जी को अभिनय कभी अच्छा नहीं लगा; परिवार के लिए वे सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो दौड़ती रहीं।

  • बचपन में कुमार गंधर्व को मेडल लगाकर गाते देख उन्होंने भी ऐसे मेडल पाने का सपना देखा।

Full explanation

साक्षात्कार: बातचीत से बना पाठ

यह पाठ कोई कहानी या निबंध नहीं, बल्कि एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में कोई एक सवाल करता है और सामने वाला अपने अनुभवों और विचारों के सहारे उत्तर देता है। यहाँ प्रश्न पूछने वाले हैं यतींद्र मिश्र और उत्तर देने वाली हैं भारत की स्वर-कोकिला लता मंगेशकर। साक्षात्कार की ख़ूबी यह है कि पाठक को किसी बड़े व्यक्ति की बातें उसी की ज़बानी, उसी के अंदाज़ में सुनने को मिलती हैं। इसलिए इसमें आत्मीयता, संस्मरण और विचार तीनों साथ चलते हैं।

पाठ के आरंभ में ही साक्षात्कार की एक ख़ास शैली दिखती है। यतींद्र मिश्र पहले लता जी का आदर से अभिवादन करते हैं और बताते हैं कि वे करोड़ों प्रशंसकों की ओर से प्रश्न पूछ रहे हैं। लता जी भी उतने ही अपनेपन से उत्तर देती हैं कि वे पूछें, और जो कुछ उन्होंने संगीत में रहकर जाना है, वह बताने की कोशिश करेंगी। वे अपने प्रशंसकों का आभार भी मानती हैं और कहती हैं कि जितना प्यार उन्हें मिला, शायद उतना धन्यवाद वे गाकर भी नहीं दे पाईं। इस शुरुआत से पता चल जाता है कि यह बातचीत औपचारिक सवाल-जवाब नहीं, बल्कि आत्मीय और भावनात्मक संवाद है। साक्षात्कार के मुख्य बिंदु, जैसे आमंत्रण और परिचय, प्रश्नोत्तर, संस्मरण, उदाहरण और समापन, इस पाठ में साफ़ पहचाने जा सकते हैं।

यतींद्र मिश्र और लता मंगेशकर

सन् 1977 में अयोध्या में जन्मे यतींद्र मिश्र ने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। वे कवि हैं और संगीत, नृत्य तथा अन्य ललित कलाओं पर गहराई से लिखते हैं। यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ और ड्योढ़ी पर आलाप उनके काव्य-संग्रह हैं। उन्होंने प्रसिद्ध गायिका गिरिजा देवी के जीवन पर गिरिजा नाम की पुस्तक भी लिखी और रीतिकाल के कवि द्विजदेव की ग्रंथावली का सह-संपादन किया। आजकल वे स्वतंत्र लेखन करते हैं और सहित नाम की पत्रिका का संपादन भी करते हैं। लता जी से उनकी लंबी बातचीत बाद में एक बड़ी पुस्तक के रूप में भी आई।

लता मंगेशकर का जन्म सन् 1929 में इंदौर में हुआ। उनकी आवाज़ ने भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में करोड़ों दिलों को छुआ, इसलिए कहा जाता है कि उनकी आवाज़ ही उनकी पहचान थी। केवल पाँच वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पिता से संगीत की पहली शिक्षा ली और जीवन भर संगीत को समर्पित रहीं। उन्होंने हज़ारों गीत अनेक भारतीय भाषाओं में गाए। उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार और भारत रत्न जैसे बड़े सम्मान मिले। सन् 2022 में उनका निधन हुआ, पर जैसा वे ख़ुद कहती थीं, उनका गाना आज भी जीवित है। इस साक्षात्कार में हम उनके जीवन के उतार-चढ़ाव, संघर्ष और परिवार के प्रति ज़िम्मेदारी को उन्हीं के शब्दों के भाव में जान पाते हैं।

पिता का मौन अनुशासन

यतींद्र मिश्र पूछते हैं कि पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर की कौन-सी यादें आज भी उनके मन में ताज़ा हैं। लता जी एक बहुत प्यारी बात बताती हैं। बचपन में जब बच्चे बहुत शरारत करते, तो पिताजी सबको बुलाकर अपने सामने खड़ा कर लेते। वे कुछ कहते नहीं थे, न डाँटते थे, बस गंभीर नज़र से देखते रहते। इतने भर से बच्चे रो पड़ते और समझ जाते कि उन्हें क्यों बुलाया गया है। फिर पिताजी पूछते कि बात समझ में आ गई न, बच्चे हाँ कहते, और वे उन्हें बाहर खेलने भेज देते।

यह प्रसंग बताता है कि अनुशासन के लिए चिल्लाना या मारना ज़रूरी नहीं होता। पिता का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि उनकी चुप्पी ही काफ़ी थी। इस अनुशासन में डर से ज़्यादा सम्मान था, क्योंकि बच्चों को पता था कि पिता उनसे प्यार करते हैं। सज़ा के बाद तुरंत खेलने भेज देना दिखाता है कि उनका ग़ुस्सा लंबा नहीं खिंचता था। पाठ्यपुस्तक इसे अनुशासन और स्नेह के संतुलन का उदाहरण मानती है। आज भी कई घरों में माता-पिता या दादा-दादी बिना बोले, केवल हाव-भाव से बच्चों को समझा देते हैं। इसे संकेतों की भाषा भी कह सकते हैं, और यह किसी भी शब्द से ज़्यादा असर करती है।

रंगमंच और रागदारी वाले पिता

लता जी अपने पिता को कमाल का आदमी बताती हैं, जो हमेशा अपने काम और संगीत में डूबे रहते थे। उनकी नाटक मंडली के खेल रात के नौ बजे आरंभ होकर देर रात दो-तीन बजे तक चलते थे। इतना समय इसलिए लगता था क्योंकि एक नाटक में पाँच अंक होते थे और बीच-बीच में लंबी रागदारी वाले गीत गाए जाते थे। रागदारी का अर्थ है शास्त्रीय ढंग से राग गाना। जब पिताजी गाना शुरू करते, तो दर्शक सीटियाँ और तालियाँ बजाते और बार-बार फिर से गाने की माँग करते।

दीनानाथ जी की एक बड़ी ख़ूबी यह थी कि वे गाते-गाते किसी दूसरे सुर को आधार बनाकर राग बदल देते और फिर उसी सहजता से पहले राग में लौट आते। यह बहुत कठिन कला मानी जाती है। वे पहली बार मराठी रंगमंच पर कर्नाटक और पंजाब का संगीत लेकर आए, और इसके लिए उन्होंने बाक़ायदा कर्नाटक जाकर वहाँ का संगीत सीखा। जिन दिनों नाटक नहीं होता, उस दिन घर में शास्त्रीय संगीत की महफ़िल जमती। उनके गाए शास्त्रीय संगीत के रेकॉर्ड भी निकले। ऐसे माहौल में पली बच्ची का संगीत की ओर खिंच जाना बिलकुल स्वाभाविक था। इस हिस्से से यह भी समझ आता है कि लता जी का संगीत किसी एक दिन में नहीं बना, बल्कि बचपन से घर में बहती सुरों की धारा से बना।

स्वाभिमान की सबसे बड़ी सीख

जब पूछा जाता है कि संगीत के अलावा पिता से क्या सीखा, तो लता जी का उत्तर है: स्वाभिमान से जीना। उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि उन्होंने कभी किसी से पैसे या कोई चीज़ नहीं माँगी। पिता ने उन्हें सिखाया था कि जो बात सही लगे, उसे बेझिझक करो, उसके लिए किसी के सामने सिर झुकाना ज़रूरी नहीं। माँ का संस्कार भी यही था कि कैसी भी हालत हो, आत्मसम्मान से जीना है, पर किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना। यहाँ हाथ पसारना एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है किसी से कुछ माँगना या याचना करना।

लता जी बताती हैं कि उन्होंने अच्छे और बुरे दोनों तरह के दिन देखे। जब पिता की कंपनी अच्छी चलती थी, तो घर शान से चलता था। पिता के निधन के बाद परिवार को कठिन दिन देखने पड़े। उसी समय ये संस्कार उनके सबसे ज़्यादा काम आए। आज उनके पास नाम और पैसा दोनों हैं, फिर भी वे एक छोटे-से घर में ख़ुश रहती हैं। वे ईश्वर को धन्यवाद देती हैं कि सब भाई-बहनों ने पिता की राह पर चलने की कोशिश की। इस हिस्से में लता जी के व्यक्तित्व के कई गुण दिखते हैं: स्वाभिमान, कृतज्ञता, सादगी और दृढ़ता। परीक्षा में व्यक्तित्व पर प्रश्न आए, तो इन्हीं गुणों को उदाहरण के साथ लिखिए।

बचपन का खेल और अभिनय से दूरी

बचपन में लता जी और उनके भाई-बहन फ़िल्में देखकर उनकी नक़ल करते थे। प्रभात फ़िल्म कंपनी की फ़िल्म संत तुकाराम उन्हें ख़ास याद है। फ़िल्म में संत तुकाराम सशरीर बैकुंठ जाते हैं और उन्हें लेने भगवान का विमान आता है। बच्चे घर के सारे गद्दे-तकिये परत-दर-परत जमाकर ऊँचा स्वर्ग बनाते। लता जी उस पर बैठकर तुकाराम का मराठी अभंग गातीं, और नीचे मीना, आशा और फुफेरे भाई पंढरीनाथ भक्त बनकर रोते कि हमें भी साथ ले चलो। सबसे छोटी उषा तब इन खेलों में नहीं होती थी। पिताजी केवल धार्मिक और देशभक्ति की फ़िल्में देखने देते थे, इसलिए यह खेल चोरी-चोरी तभी होता जब वे घर से बाहर होते।

यह जानकर हैरानी होती है कि लता जी ने शुरू में छह-सात फ़िल्मों में अभिनय भी किया था, पर उन्हें यह कभी अच्छा नहीं लगा। मेकअप करना, तेज़ रोशनी के सामने जाना और बहुत-से लोगों के सामने कभी रोना, कभी हँसना उन्हें पसंद नहीं था। वे अच्छी फ़िल्मों की तारीफ़ तो करती थीं, पर अभिनय के बारे में सोच भी नहीं सकती थीं। केवल एक अपवाद था: हिंदी-मराठी फ़िल्म छत्रपति शिवाजी। शिवाजी के प्रति गहरे आदर के कारण उन्होंने भालजी पेंढारकर से ख़ुद कहा कि फ़िल्म के आख़िरी गीत की दो पंक्तियाँ वे परदे पर आकर गाएँगी। इससे पता चलता है कि वे जो काम मन से चाहती थीं, वही करती थीं।

मेहनत के दिन और मेडल का सपना

यतींद्र मिश्र पूछते हैं कि उस दौर में काम की परिस्थितियाँ कैसी थीं। लता जी कहती हैं कि उन्होंने कभी इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया कि हालात अच्छे हैं या बुरे। उनकी रेकॉर्डिंग सुबह से रात तक चलती और एक स्टूडियो से दूसरे, फिर तीसरे स्टूडियो के चक्कर में दिन बीत जाता। उन्हें अपने गानों के सिवा किसी चीज़ की सुध नहीं रहती थी। मन में बस एक ही बात घूमती थी कि परिवार को कैसे सँभालना है और उनकी ज़रूरतें कैसे पूरी करनी हैं। उन्हें रेकॉर्डिंग की तकलीफ़ से कम और इस बात से ज़्यादा फ़र्क़ पड़ता था कि आने वाले कल में कितने गीत रेकॉर्ड होने हैं।

सोचिए, तेरह साल की एक लड़की, जिस पर पूरे घर का भार हो, उस ज़माने में जब स्त्रियों का फ़िल्मों में काम करने को समाज अच्छी नज़र से नहीं देखता था। भोजन, आने-जाने का किराया, सुरक्षा और थकान, ये सब उसकी रोज़ की चुनौतियाँ रही होंगी। फिर भी लता जी इन मुश्किलों की शिकायत नहीं करतीं। यही उनकी कर्तव्यनिष्ठा और एकाग्रता है। बचपन के सपने के बारे में पूछने पर वे एक मासूम याद बताती हैं। पिताजी कार्यक्रम में जाते समय अपने सारे मेडल सीने पर लगाते थे। फिर उन्होंने कुमार गंधर्व को काली शेरवानी पर ढेर सारे मेडल लगाकर गाते देखा। तब छोटी लता ने सोचा था कि बड़ी होकर उन्हें भी ऐसे मेडल मिलेंगे। आगे चलकर उन्हें इतने सम्मान मिले कि वह सपना कई गुना पूरा हुआ।

Concepts and terms

साक्षात्कार

किसी व्यक्ति से प्रश्न पूछकर उसके जीवन, अनुभव और विचारों को सामने लाने वाली गद्य-विधा। इसमें एक प्रश्नकर्ता और एक उत्तरदाता होता है।

मौन अनुशासन

बिना डाँटे या मारे, केवल नज़र और व्यवहार से बच्चों को सही-ग़लत समझा देना। लता जी के पिता इसी तरह अनुशासन रखते थे।

स्वाभिमान

अपनी प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान की रक्षा का भाव। लता जी ने कभी किसी से पैसे या चीज़ नहीं माँगी, इसे वे पिता का संस्कार मानती हैं।

कर्तव्यनिष्ठा

अपने दायित्व को पूरी लगन से निभाना। पिता के जाने के बाद लता जी ने अपनी सुध भूलकर परिवार की ज़रूरतें पूरी कीं।

पाश्र्वगायन

परदे पर दिखने वाले कलाकार के लिए पीछे से गाना, जिसे प्लेबैक सिंगिंग भी कहते हैं। लता जी इसी क्षेत्र की सबसे बड़ी आवाज़ बनीं।

सावधान

भ्रम और सच

करके देखो

Title:

घर के बड़े से साक्षात्कार

Safety:

रेकॉर्डिंग केवल उनकी अनुमति से करें और निजी बातें बिना पूछे किसी को न बताएँ।

What You Notice:

साक्षात्कार में सुनना सबसे ज़रूरी है; अच्छे प्रश्न ही अच्छे उत्तर निकालते हैं।

Did you know

लता मंगेशकर को सन् 2001 में देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भारत रत्न मिला। सन् 1989 में उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार भी मिला था।

यतींद्र मिश्र की पुस्तक लता: सुर-गाथा को सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला। यह पाठ उन्हीं लंबी बातचीतों की झलक देता है।

सन् 1942 में पिता के निधन के समय लता जी केवल तेरह वर्ष की थीं, और उन्होंने माँ तथा छोटे भाई-बहनों की ज़िम्मेदारी उठा ली।

Memory tricks

बा की तीन सीख: न–स्वा–झु — नज़र से अनुशासन, स्वाभिमान से जीना, सही बात पर किसी के आगे न झुकना।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 ऐसी भी बातें होती हैं पाठ किस विधा में लिखा गया है? beginner
  • A साक्षात्कार
  • B आत्मकथा
  • C संस्मरण
  • D यात्रा-वृत्तांत
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Answer: साक्षात्कार
Why:

प्रश्नकर्ता और उत्तरदाता।

Q2 साक्षात्कार विधा की सबसे बड़ी विशेषता क्या है? intermediate
  • A इसमें लेखक केवल अपनी कल्पना से कोई नई कहानी गढ़ता है
  • B पाठक बड़े व्यक्ति के अनुभव उसी के अंदाज़ में जान पाता है
  • C इसमें कवि छंद और तुक के नियमों का पालन करता है
  • D इसमें केवल किसी जगह की यात्रा का रोचक वर्णन होता है
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Answer: पाठक बड़े व्यक्ति के अनुभव उसी के अंदाज़ में जान पाता है
Why:

प्रश्न और उत्तर का संवाद।

Q3 यतींद्र मिश्र का जन्म किस नगर में हुआ? beginner
  • A लखनऊ
  • B वाराणसी
  • C इंदौर
  • D अयोध्या
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Answer: अयोध्या
Why:

सन् 1977।

Q4 इनमें से कौन-सी रचना यतींद्र मिश्र की नहीं है? intermediate
  • A ड्योढ़ी पर आलाप
  • B यदा-कदा
  • C कोसी का घटवार
  • D गिरिजा
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Answer: कोसी का घटवार
Why:

वह शेखर जोशी की है।

Q5 लता जी का यह कहना कि वे गाकर भी प्रशंसकों का पूरा आभार नहीं जता पाईं, उनके किस गुण को दिखाता है? intermediate
  • A विनम्रता और कृतज्ञता
  • B घमंड और बहुत कठोर स्वभाव
  • C भय और संशय
  • D लोभ और चतुराई
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Answer: विनम्रता और कृतज्ञता
Why:

प्रेम के प्रति आभार।

Q6 आरंभ के प्रश्न-उत्तर से यह साक्षात्कार कैसा लगता है? intermediate
  • A कठोर और पूरी तरह औपचारिक पूछताछ
  • B अदालत में होने वाली कड़ी जिरह
  • C समाचार-पत्र की सूखी सूचना
  • D आत्मीय और भावनात्मक बातचीत
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Answer: आत्मीय और भावनात्मक बातचीत
Why:

प्रणाम और आभार से शुरुआत।

Q7 शरारत करने पर लता जी के पिता बच्चों के साथ क्या करते थे? beginner
  • A सबको ज़ोर से डाँटकर अलग कमरे में बंद कर देते
  • B सबका खाना बंद करके भूखा सुला देते
  • C सामने खड़ा करके चुपचाप गंभीर नज़र से देखते
  • D सबको माँ के पास शिकायत के लिए भेजते
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Answer: सामने खड़ा करके चुपचाप गंभीर नज़र से देखते
Why:

बच्चे ख़ुद रो पड़ते।

Q8 समझ गए न? के बाद बच्चों को बाहर खेलने भेज देना पिता के बारे में क्या बताता है? advanced
  • A वे बच्चों से जल्दी छुटकारा पाकर अपना काम करना चाहते थे
  • B उनका अनुशासन स्नेह से भरा था और ग़ुस्सा लंबा नहीं खिंचता था
  • C वे बच्चों की शरारत से बिलकुल भी नाराज़ नहीं होते थे
  • D वे बच्चों को घर के अंदर रहने ही नहीं देते थे
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Answer: उनका अनुशासन स्नेह से भरा था और ग़ुस्सा लंबा नहीं खिंचता था
Why:

अनुशासन और स्नेह का संतुलन।

Q9 पिताजी के नाटक देर रात तक क्यों चलते थे? intermediate
  • A पाँच अंकों और लंबी रागदारी वाले गीतों के कारण
  • B दर्शक बहुत देर से नाटक देखने आते थे
  • C मंच पर रोशनी बहुत देर से जलाई जाती थी
  • D कलाकार हर अंक के बीच घंटों लंबा आराम करते थे
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Answer: पाँच अंकों और लंबी रागदारी वाले गीतों के कारण
Why:

एक नाटक, पाँच अंक।

Q10 पिता के नाटकों में रागदारी वाला गायन होता था, यानी ______। intermediate
  • A लोकगीत ज़ोर-ज़ोर से गाते जाना
  • B शास्त्रीय ढंग से राग गाना
  • C फ़िल्मी गीत गुनगुनाना
  • D बिना धुन के कविता पढ़ना
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Answer: शास्त्रीय ढंग से राग गाना
Why:

भारतीय शास्त्रीय संगीत।

Q11 दीनानाथ जी की गायकी की कौन-सी बात सबसे अनोखी बताई गई है? advanced
  • A वे हमेशा केवल एक ही राग बार-बार दोहराते रहते थे
  • B वे बिना किसी वाद्य के बहुत धीमी आवाज़ में गाते थे
  • C वे केवल अंग्रेज़ी गीत गाकर दर्शकों को चौंकाते थे
  • D गाते-गाते सुर बदलकर नया राग रचना और फिर लौट आना
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Answer: गाते-गाते सुर बदलकर नया राग रचना और फिर लौट आना
Why:

किसी भी सुर को सा बनाना।

Q12 मराठी रंगमंच में दीनानाथ जी का नया योगदान क्या था? intermediate
  • A पहली बार बिजली की रोशनी लगाना
  • B नाटकों से संगीत पूरी तरह हटाना
  • C कर्नाटक और पंजाब का संगीत लाना
  • D केवल अंग्रेज़ी नाटक खेलना
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Answer: कर्नाटक और पंजाब का संगीत लाना
Why:

ख़ुद कर्नाटक जाकर सीखा।

Q13 लता जी ने पिता से संगीत के अलावा सबसे बड़ी कौन-सी सीख ली? beginner
  • A स्वाभिमान से जीने की
  • B हर हाल में अधिक पैसे कमाने की
  • C सबसे आगे रहने की
  • D चुप रहकर सहने की
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Answer: स्वाभिमान से जीने की
Why:

किसी के आगे न झुकना।

Q14 किसी के आगे हाथ नहीं पसारना है। इस वाक्य में रेखांकित मुहावरे का अर्थ है ______। beginner
  • A किसी को गले लगाना
  • B किसी से हाथ मिलाना
  • C किसी को धक्का देना
  • D किसी से कुछ माँगना
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Answer: किसी से कुछ माँगना
Why:

याचना करना।

Q15 पिता के निधन के बाद परिवार सँभालने का निर्णय लता जी के किस जीवन-मूल्य का द्योतक है? intermediate
  • A भौतिकता
  • B निराशा
  • C कर्तव्यनिष्ठा
  • D उदासीनता और आलस
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Answer: कर्तव्यनिष्ठा
Why:

ज़िम्मेदारी का भाव।

Q16 नाम और पैसा होने पर भी लता जी छोटे घर में ख़ुश रहने की बात करती हैं। इससे उनका कौन-सा गुण झलकता है? beginner
  • A दिखावा और घमंड
  • B सादगी और संतोष
  • C कंजूसी और लालच
  • D डर और संकोच
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Answer: सादगी और संतोष
Why:

ईश्वर को धन्यवाद।

Q17 संत तुकाराम की नक़ल वाले खेल में लता जी क्या बनती थीं? beginner
  • A स्वर्ग जाते संत तुकाराम
  • B विमान चलाने वाले देवदूत
  • C रोते हुए भक्त अनुयायी
  • D फ़िल्म बनाने वाले निर्देशक
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Answer: स्वर्ग जाते संत तुकाराम
Why:

गद्दों के ढेर पर बैठकर गाना।

Q18 फ़िल्मों की नक़ल का खेल चोरी-चोरी क्यों खेला जाता था? intermediate
  • A घर में गद्दे-तकिये बहुत कम थे और माँ इस पर नाराज़ होती थीं
  • B पड़ोसी शोर की शिकायत लेकर बार-बार आ जाते थे
  • C छोटी बहन उषा सबकी शिकायत पिताजी से कर देती थी
  • D पिताजी सख़्त थे और केवल धार्मिक-देशभक्ति फ़िल्में देखने देते थे
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Answer: पिताजी सख़्त थे और केवल धार्मिक-देशभक्ति फ़िल्में देखने देते थे
Why:

पिता के बाहर होने पर ही।

Q19 लता जी को अभिनय करना क्यों पसंद नहीं था? intermediate
  • A उन्हें फ़िल्मों में बहुत कम पैसा मिलता था और काम भी बहुत कम मिलता था
  • B मेकअप, तेज़ रोशनी और भीड़ के सामने रोना-हँसना उन्हें अच्छा नहीं लगता था
  • C उनके पिता ने उन्हें फ़िल्मों में जाने से साफ़ मना किया था
  • D उन्हें कोई भी निर्देशक काम देने को तैयार ही नहीं था
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Answer: मेकअप, तेज़ रोशनी और भीड़ के सामने रोना-हँसना उन्हें अच्छा नहीं लगता था
Why:

मन से गायिका थीं।

Q20 छत्रपति शिवाजी फ़िल्म में दो पंक्तियाँ परदे पर गाने की इच्छा किस भाव से जागी? intermediate
  • A ज़्यादा पैसे कमाने की गहरी चाह से
  • B अभिनय में लौटने की ज़िद से
  • C शिवाजी के प्रति गहरे आदर से
  • D किसी के दबाव और डर से
Show answer
Answer: शिवाजी के प्रति गहरे आदर से
Why:

मन जिस काम को चाहे।

Q21 संघर्ष के दिनों में लता जी को किस बात से ज़्यादा फ़र्क़ पड़ता था? intermediate
  • A स्टूडियो में कितनी कुर्सियाँ और पंखे लगे हैं
  • B रेकॉर्डिंग के बाद कितना आराम करने को मिलेगा
  • C दूसरे गायक उनके बारे में क्या सोचते हैं
  • D आने वाले दिनों में कितने गीत रेकॉर्ड होने हैं
Show answer
Answer: आने वाले दिनों में कितने गीत रेकॉर्ड होने हैं
Why:

परिवार की ज़रूरतें।

Q22 मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के सिवा कुछ सुध नहीं रहती थी। यह कथन लता जी के किस गुण को दिखाता है? beginner
  • A आलस और भारी लापरवाही
  • B घमंड और ज़िद
  • C एकाग्रता और समर्पण
  • D भय और घबराहट
Show answer
Answer: एकाग्रता और समर्पण
Why:

काम में डूब जाना।

Q23 बचपन में लता जी को किस कलाकार के मेडल देखकर सपना जागा? intermediate
  • A उस्ताद अली अकबर खाँ
  • B पंडित कुमार गंधर्व
  • C पंडित रविशंकर
  • D नौशाद साहब
Show answer
Answer: पंडित कुमार गंधर्व
Why:

काली शेरवानी पर मेडल।

Q24 अभिकथन: लता जी ने कठिन दिनों में भी किसी से मदद नहीं माँगी। कारण: माता-पिता ने उन्हें आत्मसम्मान से जीने और हाथ न फैलाने का संस्कार दिया था। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

संस्कार से व्यवहार।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. लता जी ने पिता से पाँच वर्ष की उम्र में संगीत सीखना शुरू किया। II. लता जी को अभिनय सबसे अधिक प्रिय था। III. पिता के नाटकों में पाँच अंक होते थे। कौन-से कथन सही हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

अभिनय उन्हें अच्छा नहीं लगता था।

Important short questions (7)

साक्षात्कार किसे कहते हैं? इस पाठ के आधार पर उसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

साक्षात्कार वह विधा है जिसमें कोई एक सवाल करता है और सामने वाला अपने अनुभवों से उत्तर देता है। इस पाठ में यतींद्र मिश्र प्रश्नकर्ता और लता मंगेशकर उत्तरदाता हैं। इसकी पहली विशेषता आत्मीय वातावरण है, जो प्रणाम और आभार से बनता है। दूसरी विशेषता संस्मरण हैं, जैसे पिता की यादें और बचपन के खेल।

लता जी के पिता का अनुशासन कैसा था?

उनके पिता बच्चों को डाँटते या मारते नहीं थे। शरारत होने पर वे सबको सामने खड़ा करके केवल गंभीर नज़र से देखते थे। बच्चे इतने में ही रो पड़ते और अपनी ग़लती समझ जाते। फिर पिता उन्हें खेलने भेज देते, जिससे पता चलता है कि अनुशासन में स्नेह भी था।

दीनानाथ मंगेशकर की संगीत-प्रतिभा के दो उदाहरण दीजिए।

पहला, वे गाते-गाते किसी दूसरे सुर को आधार बनाकर नया राग रच देते थे। फिर उसी सहजता से पहले राग में लौट आते। दूसरा, वे मराठी रंगमंच पर पहली बार कर्नाटक और पंजाब का संगीत लाए। इसके लिए उन्होंने ख़ुद कर्नाटक जाकर संगीत सीखा।

लता जी ने अपने माता-पिता से स्वाभिमान की कौन-सी सीख पाई?

पिता ने सिखाया कि जो बात सही लगे, वह करो और किसी के आगे झुको मत। माँ का संस्कार था कि कैसी भी हालत हो, आत्मसम्मान से जीना है और किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना। इसी कारण लता जी ने कठिन दिनों में भी किसी से पैसे या चीज़ नहीं माँगी।

संत तुकाराम की नक़ल वाले खेल का वर्णन कीजिए।

बच्चे घर के गद्दे-तकिये परत-दर-परत जमाकर ऊँचा स्वर्ग बनाते थे। लता जी उस पर बैठकर तुकाराम का अभंग गातीं। नीचे मीना, आशा और पंढरीनाथ भक्त बनकर रोते और साथ ले चलने की गुहार लगाते। यह खेल पिताजी के बाहर होने पर चोरी-चोरी होता था।

लता जी ने अभिनय क्यों छोड़ा? किस फ़िल्म में वे फिर परदे पर आईं?

उन्हें मेकअप करना, तेज़ रोशनी में जाना और भीड़ के सामने रोना-हँसना अच्छा नहीं लगता था। इसलिए छह-सात फ़िल्मों के बाद उन्होंने अभिनय छोड़ दिया। केवल छत्रपति शिवाजी फ़िल्म में, शिवाजी के प्रति आदर के कारण, उन्होंने आख़िरी गीत की दो पंक्तियाँ परदे पर गाईं।

बचपन में लता जी ने मेडल का कैसा सपना देखा था?

उनके पिता कार्यक्रमों में अपने सारे मेडल सीने पर लगाकर जाते थे। बाद में उन्होंने कुमार गंधर्व को काली शेरवानी पर ढेर सारे मेडल लगाकर गाते देखा। तब उन्हें लगा कि बड़ी होकर उन्हें भी ऐसे मेडल मिलेंगे, जिन्हें पहनकर वे कार्यक्रम में जाएँगी।

Long answer questions (3)

लता मंगेशकर के व्यक्तित्व पर उनके पिता का क्या प्रभाव पड़ा? पाठ के उदाहरणों से समझाइए।

लता जी के व्यक्तित्व की नींव उनके पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर ने रखी। संगीत की पहली शिक्षा उन्हें पाँच वर्ष की उम्र में पिता से मिली। घर में रात भर चलने वाले संगीत-नाटक और शास्त्रीय संगीत की महफ़िलें उनके लिए पाठशाला जैसी थीं, जिससे सुरों की समझ उनमें बचपन से ही आ गई।

संगीत से भी बड़ा प्रभाव संस्कारों का था। पिता ने सिखाया कि सही बात पर डटे रहो और किसी के आगे मत झुको। इसी के कारण लता जी ने बुरे दिनों में भी किसी से मदद नहीं माँगी। पिता का मौन अनुशासन उनके धैर्य और गंभीरता में दिखता है। अंत में वे कहती हैं कि उन्हें सबसे ज़्यादा ख़ुशी इस बात की है कि उन्होंने पिता का नाम थोड़ा आगे बढ़ाया। इस तरह उनका संगीत, स्वाभिमान और कृतज्ञता, तीनों पिता की देन हैं।

पिता के निधन के बाद लता जी के संघर्ष का वर्णन कीजिए। इससे आपको क्या प्रेरणा मिलती है?

सन् 1942 में पिता के निधन के समय लता जी केवल तेरह वर्ष की थीं। माँ और छोटे भाई-बहनों की पूरी ज़िम्मेदारी उन पर आ गई। उस दौर में लड़कियों का फ़िल्मों में काम करने को समाज अच्छी नज़र से नहीं देखता था, फिर भी उन्होंने काम किया। उनकी रेकॉर्डिंग सुबह से रात तक चलती और वे एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो दौड़ती रहतीं।

इतनी मुश्किलों के बावजूद उन्होंने कभी शिकायत नहीं की, न किसी के आगे हाथ फैलाया। उन्हें बस यही चिंता रहती थी कि परिवार की ज़रूरतें कैसे पूरी हों। इससे प्रेरणा मिलती है कि कठिन समय में घबराने के बजाय मेहनत, धैर्य और ज़िम्मेदारी से आगे बढ़ना चाहिए। आत्मसम्मान बनाए रखकर भी बड़ी से बड़ी मुश्किल पार की जा सकती है।

इस साक्षात्कार की शुरुआत औपचारिक है या आत्मीय? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

यह शुरुआत आत्मीय है। यतींद्र मिश्र लता जी को दी कहकर संबोधित करते हैं और करोड़ों प्रशंसकों की ओर से प्रणाम करते हुए प्रश्न पूछने की अनुमति माँगते हैं। उनके शब्दों में आदर के साथ अपनापन भी है, जैसे कोई छोटा भाई अपनी बड़ी बहन से बात कर रहा हो।

लता जी का उत्तर भी उतना ही अपनापन लिए है। वे धन्यवाद देती हैं, कहती हैं कि वे पूछें, और वादा करती हैं कि जो कुछ संगीत में रहकर जाना है, वह बताने की कोशिश करेंगी। वे प्रशंसकों के प्रेम के लिए आभार भी मानती हैं। औपचारिक साक्षात्कार में केवल नपे-तुले प्रश्न-उत्तर होते हैं, जबकि यहाँ भावनाएँ, संस्मरण और विनम्रता खुलकर सामने आती हैं।

Flashcards (17)

ऐसी भी बातें होती हैं किस विधा का पाठ है?
साक्षात्कार।
इस साक्षात्कार में प्रश्न कौन पूछता है?
यतींद्र मिश्र।
यतींद्र मिश्र का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सन् 1977, अयोध्या।
यतींद्र मिश्र के एक काव्य-संग्रह का नाम?
ड्योढ़ी पर आलाप।
लता मंगेशकर का जन्म कहाँ हुआ?
इंदौर, मध्य प्रदेश।
लता जी ने संगीत की पहली शिक्षा कब ली?
पाँच वर्ष की उम्र में, पिता से।
लता जी के पिता का नाम?
पं. दीनानाथ मंगेशकर।
शरारत पर पिता बच्चों को कैसे समझाते थे?
बस गंभीर नज़र से देखकर।
पिता के नाटक कब से कब तक चलते थे?
रात नौ से दो-तीन बजे तक।
पिता मराठी रंगमंच में कौन-सा नया संगीत लाए?
कर्नाटक और पंजाब का।
पिता से संगीत के अलावा सबसे बड़ी सीख?
स्वाभिमान से जीना।
हाथ पसारना मुहावरे का अर्थ?
किसी से कुछ माँगना।
बचपन में किस फ़िल्म की नक़ल की बात आई है?
संत तुकाराम।
पिता बच्चों को कैसी फ़िल्में देखने देते थे?
धार्मिक और देशभक्ति की।
किस फ़िल्म में लता जी ने ख़ुद परदे पर आने की इच्छा जताई?
छत्रपति शिवाजी।
संघर्ष के दिनों में लता जी की सबसे बड़ी चिंता?
परिवार की ज़रूरतें पूरी करना।
किसे मेडल लगाकर गाते देखकर सपना जागा?
पंडित कुमार गंधर्व।

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  • कौन, क्या
  • संगीत या संस्कार
  • सही या भ्रम
  • लता जी का आरंभिक जीवन
  • झटपट उत्तर

बदलता संगीत, त्योहार और साथी कलाकार

टाइम मशीन वाले रोचक प्रश्न से पुरानी और नई तकनीक की तुलना, होली, गुड़ी पड़वा और दीवाली की यादें, नौशाद साहब को तड़के मिठाई देने का प्रसंग, मंगलागौर जैसे लोकपर्व और कोरस में गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी का आत्मीय रिश्ता।

What you will be able to do

  • टाइम मशीन वाले प्रश्न के आधार पर पुराने और नए संगीत-निर्माण की तुलना कर सकूँगा।
  • लता जी के घर में होली, रंग-पंचमी और गुड़ी पड़वा मनाने की परंपरा का वर्णन कर सकूँगा।
  • नौशाद साहब वाले दीवाली-प्रसंग से लता जी और संगीतकारों के रिश्ते समझा सकूँगा।
  • फाग, सोहर, बधावा और मंगलागौर जैसे लोकगीतों और लोकपर्वों की सामाजिक भूमिका बता सकूँगा।
  • कोरस के साथियों के प्रति लता जी के आत्मीय व्यवहार से सहयोग का महत्व समझा सकूँगा।

Key points

  • यतींद्र मिश्र पूछते हैं कि अगर 1949-50 के गीत रहमान या जतिन-ललित बनाते, तो कैसे बनते; लता जी इसे रोचक कल्पना मानती हैं।

  • आएगा आने वाला की रेकॉर्डिंग में लता जी को हॉल में दूर से धीरे-धीरे चलकर माइक तक आना पड़ा, ताकि आवाज़ पास आती लगे।

  • पुराने संगीतकार कम तकनीक में नए टोटके आज़माकर ख़ास प्रभाव पैदा करते थे; लता जी दोनों पीढ़ियों का सम्मान करती हैं।

  • सफ़ेद साड़ी पहनने वाली लता जी के घर होली राख वाली गुड़वड़ और रंग-पंचमी पर केसर के छींटों से मनती थी।

  • महाराष्ट्र में नवरात्र गुड़ी पड़वा से शुरू होकर रामनवमी तक राम-आगमन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

  • दीवाली की तड़के लता जी संगीतकारों के घर मिठाई ले जातीं; नौशाद साहब ने कहा कि मिठास तो तुमने हमारी धुनों में घोली है।

  • फाग, धमार, छठ के गीत, सोहर और बधावा जैसे संस्कार-गीत घर-मोहल्ले की स्त्रियाँ गाती हैं।

  • मंगलागौर नई बहू के स्वागत का लोकपर्व है, जिसमें स्त्रियाँ गाती-नाचती हैं; अब यह धीरे-धीरे कम हो रहा है।

  • लता जी कोरस की लड़कियों को घर जैसा मानतीं, उनके साथ स्टूडियो में ज़मीन पर बैठकर बातें करती थीं।

Full explanation

टाइम मशीन वाला प्रश्न

साक्षात्कार का यह हिस्सा एक बहुत रोचक कल्पना से शुरू होता है। यतींद्र मिश्र कहते हैं कि मान लीजिए हम समय का पहिया घुमाकर 1949-50 में पहुँच जाएँ। उन दिनों लता जी फ़िल्मों में नई-नई थीं, और उनके साथ हुस्नलाल-भगतराम, शंकर-जयकिशन तथा खेमचंद प्रकाश जैसे संगीतकार काम कर रहे थे। आएगा आने वाला, हवा में उड़ता जाए और चले जाना नहीं जैसे गीतों ने उनके लिए मज़बूत ज़मीन बनाई और एक नए युग की शुरुआत की। अब प्रश्न यह है कि अगर उसी दौर में ए.आर. रहमान, जतिन-ललित या शंकर-एहसान-लॉय होते, तो ये गीत कैसे बनते?

लता जी हँसकर कहती हैं कि यह बड़ा मज़ेदार प्रश्न है, पर इसका ठीक-ठीक उत्तर देना कठिन है। वे मानती हैं कि शायद गीत बहुत बढ़िया बनते या बिलकुल अलग अंदाज़ में सामने आते, उनकी धुनें भी अलग होतीं। फिर वे उलटकर एक प्रश्न पूछ लेती हैं। उन्होंने रहमान और जतिन-ललित के लिए भी गीत गाए हैं, जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे का एक गीत। अगर वही गीत श्याम सुंदर, नौशाद या अनिल विश्वास रचते, तो वे कैसे बनते? उत्तरदाता का प्रश्नकर्ता से प्रश्न पूछना साक्षात्कार को और भी जीवंत बना देता है। इससे पता चलता है कि यह बातचीत खुली और बराबरी वाली है, जिसमें दोनों मिलकर सोच रहे हैं।

एक माइक और दबे पाँव चलती गायिका

लता जी बताती हैं कि जब उन्होंने महल, बड़ी बहन, बरसात, तराना, बाज़ार और संगदिल जैसी फ़िल्मों में पाश्र्वगायन किया, तब सिनेमा में तकनीक बहुत आगे नहीं बढ़ी थी। आएगा आने वाला गाते समय उन्हें हॉल में बहुत दूर से धीरे-धीरे चलते हुए रेकॉर्डिंग वाले माइक तक आना पड़ता था। इसी दूरी के हिसाब से आवाज़ का उतार-चढ़ाव रेकॉर्ड होता था, ताकि सुनने वाले को लगे कि आवाज़ धीरे-धीरे पास आ रही है। आज यही असर एक बटन से कंप्यूटर पर पैदा किया जा सकता है।

वे याद करती हैं कि सी. रामचंद्र, सलिल चौधरी, अनिल विश्वास, सज्जाद हुसैन और श्याम सुंदर जैसे संगीतकार ख़ास प्रभाव लाने के लिए नए-नए और अजीब तरीक़े आज़माते थे। लता जी का मानना है कि अगर इन लोगों को आज की तकनीक मिलती, तो कमाल हो जाता, और वे न जाने कितना उन्नत संगीत रचते। उसी तरह अगर आज के संगीतकार पुराने ज़माने में जाकर काम करते, तो उन्हें कितनी मुश्किलें आतीं, इसका भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है। इस उत्तर में लता जी की संतुलित सोच दिखती है। वे न पुराने ज़माने को केवल महान बताती हैं, न नए ज़माने को केवल आसान। वे दोनों पीढ़ियों की प्रतिभा और मेहनत का सम्मान करती हैं। वे यह भी मानती हैं कि तकनीक कला को पंख दे सकती है, पर कला की जड़ कलाकार की साधना में ही होती है।

सफ़ेद साड़ी और बचपन की होली

अब बातचीत निजी जीवन की ओर मुड़ती है। यतींद्र मिश्र कहते हैं कि लता जी ने हमेशा पहनावे में रंगों से परहेज़ किया; उनकी सफ़ेद साड़ियों पर बस किनारी या बूटों में थोड़ा रंग दिखता है। तो वे रंगों का त्योहार होली कैसे मनाती होंगी? लता जी बताती हैं कि बचपन में, जब पिताजी जीवित थे, वे होली खेलती थीं। पर अब सालों से उन्होंने होली खेलना छोड़ दिया है, क्योंकि दिन भर भीगना और देर शाम नहाना उन्हें अच्छा नहीं लगता।

वे यह भी बताती हैं कि उनके घर होली उस ढंग से नहीं मनती थी जैसे आज पूरे देश में मनती है। होलिका-दहन के समय पूजा होती, प्रसाद की मिठाइयाँ होलिका में डाली जातीं और अंत में नारियल जलाया जाता। जलने के बाद नारियल निकालकर तोड़ा जाता और प्रसाद बँटता। अगले दिन होलिका की राख एक-दूसरे पर डाली जाती, जिसे उनके यहाँ गुड़वड़ कहते थे। होली के पाँचवें दिन रंग-पंचमी आती, जब माता-पिता बच्चों पर थोड़ा-सा केसर घोलकर छिड़कते। माँ कुछ मीठा बनाकर भगवान को चढ़ातीं, बच्चों को प्रसाद मिलता और माँ सबकी अलग-अलग आरती उतारतीं। इस प्रसंग से पता चलता है कि एक ही त्योहार अलग-अलग क्षेत्रों और घरों में अलग ढंग से मनाया जाता है, और यही भारत की विविधता की सुंदरता है।

गुड़ी पड़वा और राम-आगमन का नवरात्र

लता जी बताती हैं कि उनके घर दशहरा और दीवाली का ज़्यादा महत्व था, और नवरात्र भी धूमधाम से मनाया जाता था। नवरात्र के पहले दिन गुड़ी पड़वा मनाया जाता है। इस दिन घर के बाहर गुड़ी बाँधी जाती है और कलश की स्थापना होती है। सूर्योदय के समय गुड़ी पर बताशों की माला चढ़ाई जाती है, जो शाम ढलने से पहले उतरती है और फिर सबमें प्रसाद की तरह बँटती है। मान्यता है कि जब भगवान राम चौदह साल बाद अयोध्या लौटे, तो हर घर में बताशों की लड़ी सजाकर गुड़ी बाँधी गई थी।

महाराष्ट्र में यह नौ दिन का उत्सव राम के आगमन के रूप में मनता है, और इसके अंत में नवमी को रामनवमी आती है। लता जी ध्यान दिलाती हैं कि गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में नवरात्र दुर्गा की आराधना के रूप में मनाया जाता है। यानी एक ही समय का पर्व अलग-अलग जगहों पर अलग देवता और अलग कथा से जुड़ जाता है। इससे विद्यार्थी समझ सकते हैं कि हमारे त्योहार केवल पूजा नहीं, बल्कि क्षेत्र की संस्कृति, कथाओं और खान-पान का भी उत्सव हैं। अपने घर के किसी त्योहार को आप भी इसी तरह, उसकी विशेष रीतियों के साथ, लिख सकते हैं।

दीवाली की सुबह और नौशाद साहब

त्योहारों से जुड़ी अपनी एक प्यारी परंपरा के बारे में लता जी बताती हैं। पचास का दशक था और फ़िल्मी दुनिया में उनका काम चल निकला था। तब उन्होंने कुछ वर्षों तक दीवाली के दिन अपने वरिष्ठ संगीतकारों के घर मिठाई ले जाने की रीत शुरू की। वे दीवाली की तड़के पाँच बजे ही नहा-धोकर कई संगीतकारों के घर पहुँच जाती थीं।

एक बार वे सुबह साढ़े पाँच बजे नौशाद साहब के घर पहुँचीं और घंटी बजाई। नींद से जागे नौशाद साहब उन्हें दरवाज़े पर देखकर घबरा गए और पूछा कि सब ठीक तो है, इतनी सुबह कोई मुसीबत तो नहीं? लता जी ने हँसकर बताया कि वे दीवाली की बधाई और मिठाई देने आई हैं, और अभी अनिल विश्वास, रोशनलाल, मदन मोहन और बर्मन दा के घर भी पहुँचना है। नौशाद साहब लाड़ से बोले कि पहले बैठो, चाय पियो, मुँह मीठा करो। फिर उन्होंने एक बहुत सुंदर बात कही: तुम हम सबको मिठाई बाँट रही हो, जबकि हम संगीतकारों को मिलकर तुम्हें मिठाई खिलानी चाहिए, क्योंकि तुमने हमारी धुनों में मिठास घोली है। लता जी ने बस यही आशीर्वाद माँगा कि हर दीवाली के साथ वे और मधुर गीत गा सकें। इस प्रसंग में लता जी की विनम्रता, बड़ों के प्रति आदर और रिश्तों को निभाने की कला एक साथ दिखती है।

लोकगीत और मंगलागौर

यतींद्र मिश्र ध्यान दिलाते हैं कि भारत के अधिकांश प्रदेशों में पर्वों और संस्कारों पर घर-घर गीत गाने की परंपरा है। होली पर फाग और धमार गाए जाते हैं, बिहार में छठ पूजा के गीत, और जन्माष्टमी व रामनवमी पर ईश्वर के जन्म की ख़ुशी में सोहर और बधावा। ये गीत ज़्यादातर घर और मोहल्ले की स्त्रियाँ गाती हैं, और गायन एक रिवाज़ की तरह चलता आया है। वे पूछते हैं कि महाराष्ट्र में ऐसे कौन-से अवसर हैं।

लता जी बताती हैं कि उनके यहाँ होली-दीवाली पर घरों में ऐसे गीत नहीं होते, पर विवाह के बाद जब नई बहू घर आती है, तब मंगलागौर नाम की पूजा होती है। इसमें पास-पड़ोस की बहुत-सी स्त्रियाँ आती हैं, मगन होकर गाती हैं, नाचती हैं, और कोई भी रूप धरकर नौटंकी या तमाशे की तरह अभिनय भी करती हैं। यह उत्सव पूरे देसी, गँवई अंदाज़ में होता है। लता जी बचपन में ऐसे आयोजनों में ख़ूब नाचती-गाती थीं। पर वे दुख के साथ कहती हैं कि यह परंपरा धीरे-धीरे ख़त्म हो रही है। इससे हमें समझ आता है कि लोकगीत केवल मनोरंजन नहीं हैं, वे समाज को जोड़ते हैं, नए सदस्य का स्वागत करते हैं और स्त्रियों को मिल-बैठकर आनंद मनाने का अवसर देते हैं। ऐसी परंपराओं को बचाना और लिखकर सहेजना भी हमारी ज़िम्मेदारी है।

कोरस के साथी: घर जैसा रिश्ता

अंत में यतींद्र मिश्र पूछते हैं कि कोरस में गाने वाली लड़कियों से लता जी का नाता कैसा था। लता जी बताती हैं कि उस समय एक ही समूह नौशाद, मदन मोहन, शंकर-जयकिशन, बर्मन पिता-पुत्र और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, सबके यहाँ कोरस गाने जाता था। इसलिए जान-पहचान गहरे अपनेपन में बदल गई। वे कहती हैं कि कोरस की लड़कियाँ बिलकुल उनके घर जैसी थीं और उनका घर में आना-जाना था। मीना की शादी कोल्हापुर में हुई, तो कोरस की पूरी टोली वहाँ पहुँची और ख़ूब गाया-नाचा।

उन्हें कविता, गांधारी, कल्याणी, सुमन और रेखा जैसे नाम आज भी याद हैं। वे बताती हैं कि स्टूडियो में कुर्सियाँ कम होती थीं, तो ये लड़कियाँ ज़मीन पर बैठ जातीं, और लता जी भी उनके साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करती थीं। इतनी बड़ी गायिका का यह व्यवहार उनकी सरलता और विनम्रता को दिखाता है। वे यह भी बताती हैं कि अस्सी के बाद रेकॉर्डिंग का तरीक़ा बदल गया; कोरस का हिस्सा पहले रेकॉर्ड हो जाता और मुख्य गायक बाद में आकर गाते। पहले, चाहे डुएट हो या सोलो, कोरस साथ-साथ ही गाता था। इस हिस्से से सीख मिलती है कि कोई भी बड़ा काम अकेले नहीं होता। मुख्य कलाकार की सफलता के पीछे साथियों का सहयोग होता है, और उस सहयोग का सम्मान करना ही सच्चा बड़प्पन है।

Concepts and terms

तकनीकी विकास

समय के साथ औज़ारों और मशीनों का बेहतर होना। पुराने दौर में एक माइक था, आज अलग-अलग ट्रैक और कंप्यूटर हैं।

लोकपर्व

गाँव-घर में परंपरा से मनाया जाने वाला उत्सव, जिसमें मोहल्ला मिलकर गाता-नाचता है। मंगलागौर ऐसा ही लोकपर्व है।

संस्कार-गीत

जन्म, विवाह जैसे अवसरों पर गाए जाने वाले गीत। सोहर बच्चे के जन्म पर और बधावा मंगल-बधाई में गाया जाता है।

कोरस

मुख्य गायक के साथ समूह में गाने वाले कलाकार। पुराने दौर में कोरस मुख्य गायक के साथ ही रेकॉर्ड होता था।

आत्मीयता

दूसरों से घर जैसा अपनापन रखना। लता जी कोरस की लड़कियों के साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करती थीं।

सावधान

भ्रम और सच

मिलाकर देखो

Scenario:

नेहा की दादी राजस्थान के एक गाँव की हैं। उनके गाँव में शादी के समय घर-मोहल्ले की औरतें ढोलक लेकर बैठतीं और रात भर बन्ना-बन्नी के गीत गाती थीं। इस बार चचेरे भाई की शादी में किसी ने गीत नहीं गाए, बस डीजे पर तेज़ फ़िल्मी गाने बजे। दादी उदास हो गईं। नेहा ने अपने मोबाइल पर दादी से दस पुराने गीत रेकॉर्ड करवाए और स्कूल की परियोजना में उन्हें लिखकर जमा किया। उसकी शिक्षिका को यह काम बहुत पसंद आया। उन्होंने बाक़ी बच्चों को भी अपने-अपने घर के ऐसे गीत खोजने को कहा, ताकि कक्षा का एक लोकगीत-संग्रह बन सके।

Activity:

अपने घर के किसी बड़े से किसी त्योहार या संस्कार का एक लोकगीत सुनिए, उसे लिखिए और कक्षा में उसका अर्थ बताइए।

Analysis:

पाठ और यह प्रसंग दोनों दिखाते हैं कि लोकगीत समाज को जोड़ते हैं। बदलते समय में उन्हें सहेजने की ज़िम्मेदारी नई पीढ़ी की है।

Did you know

आएगा आने वाला फ़िल्म महल (1949) का गीत है। उस समय एक ही माइक से पूरा गीत एक बार में रेकॉर्ड होता था, इसलिए दूर-पास का असर गायिका को चलकर पैदा करना पड़ता था।

गुड़ी पड़वा चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है और महाराष्ट्र में इसे नए साल की शुरुआत भी माना जाता है।

आज की रेकॉर्डिंग में हर वाद्य और हर आवाज़ अलग-अलग ट्रैक पर रेकॉर्ड होकर बाद में कंप्यूटर पर जोड़ी जा सकती है।

Memory tricks

त्योहार-क्रम: हो–रं–गु–दी — होली की राख, रंग-पंचमी का केसर, गुड़ी पड़वा की बताशा-माला, दीवाली की मिठाई।

संस्कार-गीत: फा–सो–ब — फाग होली पर, सोहर जन्म पर, बधावा बधाई पर।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 टाइम मशीन वाले प्रश्न में यतींद्र मिश्र क्या जानना चाहते हैं? intermediate
  • A लता जी आगे किस साल कौन-सी फ़िल्म में गाएँगी
  • B लता जी को कौन-सी मशीन चलाना सबसे पसंद है
  • C सन् 1949 में फ़िल्मों के टिकट कितने के थे
  • D पुराने गीत आज के संगीतकार बनाते तो कैसे बनते
Show answer
Answer: पुराने गीत आज के संगीतकार बनाते तो कैसे बनते
Why:

रहमान, जतिन-ललित की कल्पना।

Q2 यतींद्र मिश्र के अनुसार 1949-50 के किन गीतों ने लता जी को मज़बूत ज़मीन दी? intermediate
  • A ऐ मेरे वतन के लोगो और लग जा गले
  • B आएगा आने वाला और हवा में उड़ता जाए
  • C मेरे ख़्वाबों में जो आए और तुझे देखा
  • D केवल शास्त्रीय राग और भजन
Show answer
Answer: आएगा आने वाला और हवा में उड़ता जाए
Why:

महल और बरसात।

Q3 टाइम मशीन वाले प्रश्न पर लता जी का उलटकर प्रश्न पूछना साक्षात्कार को कैसा बनाता है? advanced
  • A कठोर और पूरी तरह एकतरफ़ा पूछताछ
  • B उबाऊ और बिना किसी भाव वाला
  • C खुला, जीवंत और बराबरी का संवाद
  • D झगड़े और बहस से भरा हुआ
Show answer
Answer: खुला, जीवंत और बराबरी का संवाद
Why:

दोनों मिलकर सोचते हैं।

Q4 आएगा आने वाला की रेकॉर्डिंग में लता जी को दूर से चलकर माइक तक क्यों आना पड़ता था? intermediate
  • A आवाज़ धीरे-धीरे पास आने का असर पैदा करने के लिए
  • B स्टूडियो में बिजली न होने से रोशनी बहुत कम रहती थी
  • C संगीतकार चाहते थे कि वे थोड़ा व्यायाम करें
  • D माइक बहुत ऊँचे मंच पर रखा हुआ था
Show answer
Answer: आवाज़ धीरे-धीरे पास आने का असर पैदा करने के लिए
Why:

तकनीक की कमी।

Q5 लता जी के अनुसार पुराने संगीतकारों को आज की तकनीक मिलती, तो क्या होता? beginner
  • A वे संगीत बनाना पूरी तरह छोड़कर चले जाते
  • B उनकी धुनें बिलकुल बेकार हो जातीं
  • C वे केवल पुराने गीत दोहराते रहते
  • D वे और भी उन्नत और कमाल का संगीत रचते
Show answer
Answer: वे और भी उन्नत और कमाल का संगीत रचते
Why:

न जाने कितना एडवांस।

Q6 पुरानी और नई पीढ़ी के संगीतकारों के बारे में लता जी की सोच कैसी है? advanced
  • A केवल पुराने को महान और नए को कमज़ोर मानने वाली
  • B केवल नए को महान और पुराने को बेकार मानने वाली
  • C संतुलित, दोनों की प्रतिभा का सम्मान करने वाली
  • D दोनों से नाराज़ और पूरी तरह निराश
Show answer
Answer: संतुलित, दोनों की प्रतिभा का सम्मान करने वाली
Why:

दोनों ओर की मुश्किलें।

Q7 यतींद्र मिश्र होली के बारे में प्रश्न क्यों पूछते हैं? intermediate
  • A लता जी ने होली पर कई प्रसिद्ध गीत गाए थे
  • B लता जी पहनावे में हमेशा रंगों से बचती रहीं
  • C उस दिन ठीक होली का त्योहार चल रहा था
  • D लता जी को रंग बनाने का बहुत शौक़ था
Show answer
Answer: लता जी पहनावे में हमेशा रंगों से बचती रहीं
Why:

सफ़ेद साड़ी।

Q8 लता जी के बचपन में होलिका की राख एक-दूसरे पर डालने की रीत को क्या कहते थे? beginner
  • A गुड़वड़
  • B गुड़ी
  • C धमार
  • D फाग
Show answer
Answer: गुड़वड़
Why:

होली के अगले दिन।

Q9 होली के पाँचवें दिन रंग-पंचमी पर लता जी के माता-पिता क्या करते थे? intermediate
  • A बच्चों को पानी के रंगीन गुब्बारे देते
  • B पूरे मोहल्ले में रंग बाँटते
  • C बच्चों को मेले में ले जाते
  • D बच्चों पर थोड़ा केसर घोलकर छिड़कते
Show answer
Answer: बच्चों पर थोड़ा केसर घोलकर छिड़कते
Why:

माँ आरती भी उतारतीं।

Q10 लता जी का होली-वर्णन भारतीय त्योहारों की कौन-सी ख़ूबी दिखाता है? intermediate
  • A एक ही पर्व अलग क्षेत्रों में अलग रीतियों से मनता है
  • B होली केवल महाराष्ट्र राज्य में ही मनाई जाती है
  • C पूरे देश में होली की रीत एक जैसी होती है
  • D होली में रंगों का कोई स्थान नहीं होता
Show answer
Answer: एक ही पर्व अलग क्षेत्रों में अलग रीतियों से मनता है
Why:

विविधता।

Q11 गुड़ी पड़वा पर गुड़ी पर चढ़ाई गई बताशों की माला का क्या होता है? intermediate
  • A उसे अगले साल तक गुड़ी पर ही लगा रहने देते हैं
  • B सूर्यास्त तक उतारकर सबको प्रसाद में दी जाती है
  • C उसे नदी में बहा दिया जाता है
  • D उसे होलिका के साथ जला दिया जाता है
Show answer
Answer: सूर्यास्त तक उतारकर सबको प्रसाद में दी जाती है
Why:

सूर्योदय पर चढ़ती है।

Q12 महाराष्ट्र और गुजरात के नवरात्र में मुख्य अंतर क्या बताया गया है? intermediate
  • A एक में दस दिन, दूसरे में केवल एक ही दिन
  • B एक में केवल नाच, दूसरे में केवल व्रत
  • C एक में राम-आगमन, दूसरे में दुर्गा की आराधना
  • D एक में दीपक, दूसरे में रंग खेलना
Show answer
Answer: एक में राम-आगमन, दूसरे में दुर्गा की आराधना
Why:

अलग कथा, अलग देवता।

Q13 दीवाली की सुबह लता जी संगीतकारों के घर क्या लेकर जाती थीं? beginner
  • A मिठाई और बधाई
  • B नए गीतों के रेकॉर्ड
  • C रंग और गुलाल
  • D दीये और पटाखे
Show answer
Answer: मिठाई और बधाई
Why:

तड़के पाँच बजे।

Q14 सुबह साढ़े पाँच बजे लता जी को दरवाज़े पर देखकर नौशाद साहब क्यों घबरा गए? beginner
  • A उन्हें लगा कि रेकॉर्डिंग रद्द हो गई है
  • B उन्हें लता जी से कोई पुराना झगड़ा याद आया
  • C उनके घर पहले से बहुत मेहमान ठहरे थे
  • D उन्हें लगा कि कोई मुसीबत आन पड़ी है
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Answer: उन्हें लगा कि कोई मुसीबत आन पड़ी है
Why:

इतनी सुबह का आना।

Q15 नौशाद साहब के अनुसार संगीतकारों को लता जी को मिठाई क्यों खिलानी चाहिए? intermediate
  • A क्योंकि लता जी को मिठाई सबसे ज़्यादा पसंद थी
  • B क्योंकि उन्होंने उनकी धुनों में मिठास घोली है
  • C क्योंकि उस दिन लता जी का जन्मदिन भी था
  • D क्योंकि वे बहुत दूर से चलकर आई थीं
Show answer
Answer: क्योंकि उन्होंने उनकी धुनों में मिठास घोली है
Why:

आवाज़ की मिठास।

Q16 दीवाली पर संगीतकारों से मिलने की लता जी की रीत उनके किस गुण को दिखाती है? advanced
  • A काम पाने की चतुराई और दिखावे की आदत
  • B सुबह जल्दी उठने की मजबूरी
  • C बड़ों के प्रति आदर और रिश्ते निभाने की कला
  • D त्योहारों से ऊब और थकान
Show answer
Answer: बड़ों के प्रति आदर और रिश्ते निभाने की कला
Why:

सीनियर संगीतकारों का सम्मान।

Q17 शिशु के जन्म की ख़ुशी में गाया जाने वाला मंगलगीत ______ कहलाता है। beginner
  • A फाग
  • B धमार
  • C अभंग
  • D सोहर
Show answer
Answer: सोहर
Why:

जन्माष्टमी पर भी।

Q18 यतींद्र मिश्र के अनुसार पर्वों और संस्कारों के घर-घर गीत प्रायः कौन गाता है? intermediate
  • A घर और मोहल्ले की स्त्रियाँ
  • B केवल मंदिरों के पुजारी
  • C फ़िल्मी गायक और नामी गायिकाएँ
  • D स्कूल के बच्चे और शिक्षक
Show answer
Answer: घर और मोहल्ले की स्त्रियाँ
Why:

रिवाज़ की तरह।

Q19 मंगलागौर का उत्सव समाज में संगीत की किस भूमिका को उजागर करता है? advanced
  • A लोकगीतों पर विदेशी संगीत का असर
  • B त्योहारों में संगीत का कोई भी स्थान न होना
  • C संगीत और नृत्य की गहरी सामाजिक भूमिका
  • D स्त्रियों का केवल घर में बंद रहना
Show answer
Answer: संगीत और नृत्य की गहरी सामाजिक भूमिका
Why:

नई बहू का स्वागत।

Q20 लता जी मंगलागौर के बारे में किस बात पर दुख जताती हैं? intermediate
  • A इसमें बहुत ज़्यादा ख़र्च होने लगा है
  • B यह परंपरा धीरे-धीरे ख़त्म हो रही है
  • C इसमें अब केवल पुरुष ही गाते हैं
  • D यह अब केवल बड़े शहरों में मनाया जाता है
Show answer
Answer: यह परंपरा धीरे-धीरे ख़त्म हो रही है
Why:

आहिस्ता-आहिस्ता।

Q21 कोरस की गायिकाओं से लता जी का रिश्ता किस तरह का था? beginner
  • A औपचारिक और दूर के
  • B कामकाजी और सूखे
  • C आत्मीय, घर जैसे
  • D होड़ और जलन भरे
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Answer: आत्मीय, घर जैसे
Why:

घर आना-जाना।

Q22 स्टूडियो में ज़मीन पर बैठकर कोरस की लड़कियों से बात करना लता जी के किस गुण का प्रमाण है? intermediate
  • A कंजूसी और संकोची स्वभाव
  • B सरलता और विनम्रता
  • C थकान और ऊब
  • D घमंड और ज़िद
Show answer
Answer: सरलता और विनम्रता
Why:

बड़ी गायिका, सरल व्यवहार।

Q23 अभिकथन: पुराने दौर में कोरस और मुख्य गायक एक साथ रेकॉर्ड होते थे। कारण: उस समय हर आवाज़ को अलग ट्रैक पर रेकॉर्ड करके बाद में जोड़ने की सुविधा आम नहीं थी। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

तकनीक की सीमा।

Q24 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. महाराष्ट्र में नवरात्र गुड़ी पड़वा से शुरू होता है। II. लता जी आज भी हर साल रंगों से होली खेलती हैं। III. मीना की शादी में कोरस की टोली कोल्हापुर गई। इनमें से कौन-से कथन ठीक हैं? intermediate
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C I, II और III तीनों
  • D केवल I और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

होली खेलना छोड़ दिया।

Q25 आपके स्कूल के वार्षिक उत्सव में मुख्य गायक को सबसे ज़्यादा तालियाँ मिलीं। लता जी के व्यवहार से सीखें, तो उसे क्या करना चाहिए? intermediate
  • A अकेले मंच पर रुककर सारी तालियाँ अपने नाम कर लेना
  • B साथ गाने वाले समूह और वादकों का भी आभार जताना
  • C समूह के साथियों को अगली बार न बुलाने को कहना
  • D कहना कि बाक़ी लोगों के कारण गाना बिगड़ गया
Show answer
Answer: साथ गाने वाले समूह और वादकों का भी आभार जताना
Why:

सहयोग का सम्मान।

Important short questions (7)

टाइम मशीन वाले प्रश्न का लता जी ने क्या उत्तर दिया?

लता जी ने इसे बड़ा मज़ेदार प्रश्न बताया, पर कहा कि ठीक-ठीक आकलन करना कठिन है। उनके अनुसार गीत शायद बहुत बढ़िया बनते या बिलकुल अलग अंदाज़ में आते। फिर उन्होंने उलटकर पूछा कि उनके नए गीत अगर नौशाद या अनिल विश्वास रचते, तो कैसे बनते।

पुराने दौर में रेकॉर्डिंग की तकनीक कैसी थी? एक उदाहरण दीजिए।

उस समय सिनेमा में तकनीक बहुत आगे नहीं बढ़ी थी। एक ही माइक पर पूरा गीत रेकॉर्ड होता था। आएगा आने वाला गाते समय लता जी को हॉल में दूर से धीरे-धीरे चलकर माइक तक आना पड़ा, ताकि आवाज़ पास आती लगे।

लता जी के घर में होली कैसे मनाई जाती थी?

होलिका-दहन पर पूजा होती, प्रसाद की मिठाइयाँ और अंत में नारियल होलिका में डाला जाता। अगले दिन होलिका की राख एक-दूसरे पर डाली जाती, जिसे गुड़वड़ कहते थे। पाँचवें दिन रंग-पंचमी पर माता-पिता बच्चों पर केसर छिड़कते और माँ आरती उतारतीं।

गुड़ी पड़वा कैसे मनाया जाता है?

नवरात्र के पहले दिन घर के बाहर गुड़ी बाँधी जाती है और कलश की स्थापना होती है। सूर्योदय पर गुड़ी पर बताशों की माला चढ़ाई जाती है, जो शाम ढलने से पहले उतारकर सबमें प्रसाद की तरह बाँटी जाती है। इसे राम के अयोध्या लौटने की ख़ुशी से जोड़ा जाता है।

नौशाद साहब वाले प्रसंग से क्या पता चलता है?

इससे पता चलता है कि लता जी बड़ों का बहुत आदर करती थीं और रिश्ते निभाना जानती थीं। साथ ही नौशाद साहब के उत्तर से पता चलता है कि संगीतकार भी उनकी आवाज़ की मिठास का दिल से सम्मान करते थे। आदर और प्रशंसा दोनों ओर से थी।

मंगलागौर क्या है? लता जी उसके बारे में क्या कहती हैं?

मंगलागौर विवाह के बाद नई बहू के घर आने पर होने वाली पूजा है। इसमें पड़ोस की स्त्रियाँ मिलकर गाती, नाचती और रूप धरकर तमाशा करती हैं। लता जी बताती हैं कि बचपन में वे भी इसमें ख़ूब नाचती-गाती थीं, पर अब यह परंपरा धीरे-धीरे ख़त्म हो रही है।

कोरस की साथी गायिकाओं से लता जी का रिश्ता कैसा था? दो उदाहरण दीजिए।

उनके संबंध बहुत आत्मीय थे। पहला, स्टूडियो में कुर्सियाँ कम होने पर वे भी कोरस की लड़कियों के साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करती थीं। दूसरा, मीना की शादी में कोरस की पूरी टोली कोल्हापुर जाकर नाची-गाई।

Long answer questions (3)

लता जी के अनुसार पुराने और नए संगीत-निर्माण में क्या अंतर है? तकनीक कला को कैसे प्रभावित करती है?

पुराने दौर में तकनीक सीमित थी। एक ही माइक पर गीत रेकॉर्ड होता, और ख़ास असर लाने के लिए कलाकार को ख़ुद मेहनत करनी पड़ती, जैसे आएगा आने वाला में लता जी का दूर से चलकर माइक तक आना। अनिल विश्वास, सलिल चौधरी, सी. रामचंद्र जैसे संगीतकार नए टोटके आज़माते थे। कोरस भी मुख्य गायक के साथ ही गाता था।

आज तकनीक इतनी विकसित है कि हर आवाज़ अलग रेकॉर्ड होकर बाद में जोड़ी जा सकती है और कोई भी असर कंप्यूटर से पैदा हो सकता है। लता जी मानती हैं कि पुराने संगीतकारों को यह तकनीक मिलती तो वे कमाल करते, और नए संगीतकारों को पुराने दौर में बहुत संघर्ष करना पड़ता। यानी तकनीक कला को नई ऊँचाई दे सकती है, पर कला की असली ताक़त कलाकार की कल्पना, मेहनत और साधना में होती है।

इस पाठ में वर्णित त्योहारों और लोकगीतों से भारतीय संस्कृति की कौन-सी विशेषताएँ सामने आती हैं?

पहली विशेषता विविधता है। लता जी के घर होली राख वाली गुड़वड़ और केसर वाली रंग-पंचमी से मनती थी, जबकि बाक़ी देश में रंगों से। महाराष्ट्र में नवरात्र राम-आगमन का उत्सव है, जबकि गुजरात और उत्तर प्रदेश में दुर्गा की आराधना। दूसरी विशेषता लोक-भागीदारी है; फाग, छठ के गीत, सोहर और बधावा घर-मोहल्ले की स्त्रियाँ मिलकर गाती हैं।

तीसरी विशेषता यह है कि त्योहार और संस्कार रिश्ते जोड़ते हैं। मंगलागौर नई बहू का स्वागत है, और दीवाली पर लता जी का संगीतकारों के घर मिठाई ले जाना आदर का प्रतीक है। चौथी बात यह कि कई परंपराएँ अब कम हो रही हैं, इसलिए उन्हें जानना, लिखना और सहेजना ज़रूरी है। इस तरह त्योहार हमारी पहचान, आस्था और सामूहिकता के उत्सव हैं।

किसी भी बड़े काम में सहयोगियों की क्या भूमिका होती है? लता जी और कोरस के साथियों के संबंध के आधार पर लिखिए।

कोई भी बड़ा काम अकेले पूरा नहीं होता। एक फ़िल्मी गीत में संगीतकार, वादक, रेकॉर्डिस्ट, मुख्य गायक और कोरस, सबका योगदान होता है। लता जी के दौर में कोरस मुख्य गायक के साथ ही गाता था, इसलिए उनकी हर रेकॉर्डिंग में ये साथी बराबर के हिस्सेदार थे।

लता जी इस बात को समझती थीं। वे कोरस की लड़कियों को घर जैसा मानतीं, उनके साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करतीं और उनके नाम बरसों बाद भी याद रखती थीं। मीना की शादी में पूरी टोली का आना इसी अपनेपन का प्रमाण है। हमारे स्कूल, घर या मोहल्ले के कामों में भी, जैसे वार्षिक उत्सव, सफ़ाई अभियान या किसी समारोह की तैयारी, सहयोग से ही सफलता मिलती है। सहयोगियों का सम्मान करना ही सच्चा नेतृत्व है।

Flashcards (17)

टाइम मशीन वाला प्रश्न किस वर्ष की बात करता है?
सन् 1949-50।
आएगा आने वाला किस फ़िल्म का गीत है?
महल।
इस गीत की रेकॉर्डिंग में क्या करना पड़ा?
दूर से चलकर माइक तक आना।
लता जी ने उलटकर क्या प्रश्न पूछा?
नए गीत पुराने संगीतकार बनाते तो कैसे बनते।
लता जी पहनावे में किस रंग के लिए जानी जाती थीं?
सफ़ेद।
होलिका की राख डालने की रीत का नाम?
गुड़वड़।
होली के पाँचवें दिन कौन-सा पर्व?
रंग-पंचमी।
नवरात्र का पहला दिन महाराष्ट्र में?
गुड़ी पड़वा।
गुड़ी पर क्या चढ़ाया जाता है?
बताशों की माला।
महाराष्ट्र में नवरात्र किसकी स्मृति में?
राम के अयोध्या आगमन की।
दीवाली पर लता जी कितने बजे निकलतीं?
तड़के पाँच बजे।
नौशाद साहब के अनुसार मिठास किसने घोली?
लता जी ने, उनकी धुनों में।
सोहर कब गाया जाता है?
बच्चे के जन्म पर।
फाग किस त्योहार से जुड़ा है?
होली।
मंगलागौर कब होता है?
विवाह के बाद नई बहू के आने पर।
मीना की शादी कहाँ हुई?
कोल्हापुर।
अस्सी के बाद कोरस रेकॉर्डिंग में क्या बदला?
कोरस पहले रेकॉर्ड होने लगा।

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संगीत की शक्ति, अमर नाम और भाषा की बात

तानसेन के दीपक राग वाली जनश्रुति पर लता जी की संतुलित राय, अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटने का प्रसंग, गाँव बह जाए पर नाम रह जाए वाली मराठी कहावत, साक्षात्कार के मुख्य बिंदु, हाथ से जुड़े मुहावरे, संगीत के शब्द और साइबर सुरक्षा।

What you will be able to do

  • तानसेन और दीपक राग जैसी जनश्रुतियों पर लता जी के संतुलित दृष्टिकोण को समझा सकूँगा।
  • अली अकबर खाँ के प्रसंग से संगीत की असीम शक्ति वाले विचार की व्याख्या कर सकूँगा।
  • गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ बता सकूँगा।
  • साक्षात्कार के मुख्य बिंदु पहचानकर पाठ से उनके उदाहरण दे सकूँगा।
  • हाथ से जुड़े मुहावरों, संगीत के शब्दों और आवाज़ बदलकर होने वाली ठगी से बचाव का प्रयोग कर सकूँगा।

Key points

  • जनश्रुति है कि तानसेन के दीपक राग से दीये जल उठे और उनकी पुत्रियों के मेघ राग से वर्षा हुई।

  • लता जी कहती हैं कि आदर में ऐसा मान लेते हैं, पर वे निश्चित रूप से नहीं कह सकतीं, क्योंकि उनका ऐसा अनुभव नहीं है।

  • फिर भी वे मानती हैं कि संगीत में असीम शक्ति है, जो कभी-कभी अनसोचा कुछ रच देती है।

  • अली अकबर खाँ का सरोद बजाते-बजाते तार टूटा; उन्होंने कहा कि जब सुर बहुत सधा हो, तो तार टूट जाता है।

  • यतींद्र मिश्र उन्हें अमर कहते हैं; लता जी कहती हैं कि गाना अमर है, शरीर नहीं, और इसका उन्हें कोई अफ़सोस नहीं।

  • मराठी कहावत गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन का अर्थ है: गाँव बह जाता है, नाम रह जाता है; यानी कर्म अमर रहते हैं।

  • उन्हें सबसे बड़ी ख़ुशी इस बात की है कि उन्होंने पिता का नाम थोड़ा आगे बढ़ाया; अंत में वे सब कलाकारों के लिए प्रार्थना करती हैं।

  • हाथ पसारना यानी माँगना; हाथ धो बैठना, हाथ से निकल जाना, हाथ का मैल होना जैसे मुहावरे भी हाथ से जुड़े हैं।

  • आज ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता से किसी की आवाज़ की नक़ल करके धोखा देते हैं; अनजान कॉल पर पैसे या ओटीपी कभी न दें।

Full explanation

जनश्रुतियाँ और लता जी की संतुलित राय

संगीत की प्राचीन परंपरा में कई कथाएँ चलती आई हैं जो संगीत की महिमा बढ़ाती हैं। स्वामी हरिदास और तानसेन के युग से जुड़ी एक प्रसिद्ध जनश्रुति है कि तानसेन ने दीपक राग गाया तो दीये अपने-आप जल उठे। एक और कथा कहती है कि उनकी पुत्रियों ने मेघ राग गाया तो वर्षा होने लगी। यतींद्र मिश्र लता जी से पूछते हैं कि वे ऐसी मान्यताओं के बारे में क्या सोचती हैं।

लता जी का उत्तर बहुत सधा हुआ और ईमानदार है। वे मानती हैं कि हरिदास और तानसेन बहुत ऊँचे दर्जे के कलाकार थे। हो सकता है उनके गायन में कोई ऐसा खरा स्वर या भीतर की पुकार रही हो, जिससे कुछ अनोखा घट गया हो। इसलिए आदर के भाव से हम इसे मान लेते हैं। पर वे साफ़ कहती हैं कि ऐसा पक्का हुआ होगा, यह वे नहीं कह सकतीं, क्योंकि उन्हें ख़ुद ऐसा कोई अनुभव नहीं हुआ। यहाँ उनकी स्पष्टवादिता दिखती है। वे परंपरा का अनादर भी नहीं करतीं और अंधविश्वास को सच भी नहीं बतातीं। फिर वे जोड़ती हैं कि संगीत में ऐसी असीम शक्ति ज़रूर है कि वह कभी-कभी कुछ अनसोचा रच देती है। उन्होंने अपने पिता को सुनते हुए भी कई बार ऐसा अनुभव किया था। यह एक कलाकार का अनुभव पर टिका विश्वास है, जिसे संतुलित दृष्टिकोण कहा जा सकता है।

सरोद का टूटा तार

अपनी बात समझाने के लिए लता जी एक सच्ची घटना सुनाती हैं। मुंबई में वे पंडित रविशंकर और उस्ताद अली अकबर खाँ के एक कार्यक्रम सुन रही थीं और श्रोताओं में सबसे आगे बैठी थीं। अली अकबर खाँ सरोद पर ऐसा मंत्रमुग्ध कर देने वाला वादन कर रहे थे कि सब डूबे हुए थे। लगभग एक घंटा बीता होगा कि अचानक ठन की आवाज़ के साथ सरोद का एक तार टूट गया और उन्हें बजाना रोकना पड़ा।

जब अली अकबर खाँ भीतर ग्रीन रूम में गए, तो लता जी उनसे मिलने पहुँचीं। उन्होंने कहा कि आप बहुत सुंदर बजा रहे थे, काश तार साथ देता और राग पूरा हो पाता। इस पर अली अकबर खाँ ने एक बहुत मार्मिक बात कही, जिसे लता जी कभी नहीं भूलीं। उन्होंने कहा कि बहन, जब सुर बहुत सधकर लगता है, तो तार टूट जाता है। लता जी इसका अर्थ यह समझती हैं कि वादक ने इतने पवित्र भाव से और इतना डूबकर सुर लगाया कि तार उस शुद्ध स्वर की चोट सह नहीं पाया। इसी अनुभव के कारण अब उनका मन करता है कि वे मान लें कि शायद तानसेन से भी ऐसा कोई सच्चा सुर लगा होगा जिससे बारिश हो गई या दीपक जल उठे। ध्यान दीजिए, यहाँ विश्वास तर्क से नहीं, एक जिए हुए अनुभव से पैदा हुआ है। वैज्ञानिक दृष्टि से तार कई कारणों से टूट सकता है, पर इस प्रसंग का असली संदेश है साधना की गहराई।

अमर कौन: गाना या शरीर?

बातचीत के आख़िर में यतींद्र मिश्र भावुक हो उठते हैं। वे कहते हैं कि लता जी हर घर में बसी हैं और उनकी आवाज़ के साथ लोगों का दिन शुरू होता है। संकोच के साथ वे जोड़ते हैं कि लता जी अमर हैं और उनके जैसा कोई दूसरा नहीं हो सकता। इस प्रशंसा पर लता जी का उत्तर उनके दार्शनिक स्वभाव को दिखाता है। वे कहती हैं कि भगवान ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, उन्हें कोई शिकायत नहीं, वे बहुत ख़ुश हैं। लोग अगर उन्हें अमर मानते हैं, तो यह उसी प्यार का रूप है जो दुनिया ने उन्हें दिया।

फिर वे एक गहरी बात कहती हैं: उनका गाना अमर है, पर शरीर अमर नहीं। उसे आज नहीं तो कल, कल नहीं तो किसी दिन जाना ही है, और इस बात का उन्हें कोई अफ़सोस नहीं, क्योंकि यह तो होकर रहेगा। यहाँ जीवन की नश्वरता को सहज भाव से स्वीकार करने का साहस दिखता है। मृत्यु से डरने के बजाय वे अपने काम के बने रहने में संतोष पाती हैं। उन्हें सबसे ज़्यादा ख़ुशी इस बात की है कि उन्होंने अपने पिता का नाम, थोड़ा ही सही, आगे बढ़ाया। यह वाक्य बताता है कि उनके लिए नाम आगे बढ़ाना केवल प्रसिद्धि नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी थी: पिता की संगीत-परंपरा और संस्कारों को सम्मान के साथ आगे ले जाना।

गाँव बह जाता है, नाम रह जाता है

लता जी अपनी बात एक मराठी कहावत से पक्की करती हैं: गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन। इसका सीधा अर्थ है कि गाँव तो बह गया, पर नाम रह गया। इसका प्रतीकात्मक अर्थ यह है कि इस संसार में शरीर, घर, संपत्ति, सब कुछ समय की बाढ़ में बह जाता है, पर अच्छे कर्मों से बना नाम बचा रहता है। यानी देह मिट जाती है, पर अच्छे काम बचे रहते हैं। ध्यान रखिए, यहाँ नाव शब्द मराठी में नाम के अर्थ में है, नदी की नाव के अर्थ में नहीं; यह परीक्षा में अक्सर पूछा जाने वाला भ्रम है।

साक्षात्कार का समापन एक प्रार्थना से होता है। लता जी ईश्वर से कहती हैं कि तुमने जो दिया, वह बहुत दिया, दूसरों से कहीं ज़्यादा दिया। जैसे अपनी कृपा की छाया मुझ पर रखी, वैसे ही हर कलाकार और हर नेक इंसान पर रखना। इस अंत में कृतज्ञता, विनम्रता और मानवता तीनों झलकते हैं। वे अपने लिए नहीं, सब कलाकारों के लिए आशीर्वाद माँगती हैं। एक अच्छा साक्षात्कार किसी भावपूर्ण विचार पर ख़त्म होता है, और यह पाठ ठीक ऐसा ही करता है।

साक्षात्कार के मुख्य बिंदु और व्यक्तित्व की छवि

पाठ्यपुस्तक साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु गिनाती है और कहती है कि उन्हें पाठ में खोजिए। पहला है साक्षात्कार लेने और देने वाले का नाम, जो हर प्रश्न-उत्तर के आगे लिखा है। दूसरा है प्रश्नोत्तर, जो पूरे पाठ का ढाँचा है। तीसरा है आमंत्रण, स्वागत और परिचय, जो शुरुआत में प्रणाम और आभार से बनता है। चौथा है भावनात्मक वातावरण, जैसे अंत की प्रार्थना। पाँचवाँ है उत्तर देने की शैली का संकेत, जैसे कोष्ठक में लिखा हँसते हुए या खिलखिलाकर हँसती हैं। छठा है विचार और उदाहरण, जैसे संगीत की शक्ति पर राय और सरोद का प्रसंग। सातवाँ है संस्मरण, जैसे पिता की यादें, तुकाराम का खेल और नौशाद साहब वाली दीवाली। और आठवाँ है समापन, जो प्रार्थना से होता है।

पूरे पाठ को पढ़कर लता जी का जो चित्र मन में उभरता है, वह सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की है। पाठ के अलग-अलग वाक्यों से उनके गुण पहचाने जा सकते हैं। गानों के सिवा कुछ सुध न रहना एकाग्रता और समर्पण दिखाता है। सही बात पर किसी के आगे न झुकना स्वाभिमान और दृढ़ता दिखाता है। लोग अमर मानें तो उसे प्यार समझना विनम्रता और कृतज्ञता है। गाना अमर पर शरीर नहीं, यह दार्शनिकता है। परीक्षा में दिए गए शब्दों की सूची से गुण चुनते समय ध्यान रखिए कि घमंड या कठोरता जैसे शब्द उनके व्यक्तित्व से मेल नहीं खाते।

हाथ वाले मुहावरे और संगीत के शब्द

पाठ में आया हाथ नहीं पसारना एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है किसी से कुछ न माँगना। हिंदी में हाथ से जुड़े बहुत-से मुहावरे हैं। हाथ में आना यानी अधिकार या पकड़ में आना, जैसे बहुत कोशिश के बाद चोर पुलिस के हाथ आया। हाथ का मैल होना यानी बहुत तुच्छ चीज़ होना, जैसे वह कहता है कि पैसा तो हाथ का मैल है। हाथ से हाथ मिलाना यानी सहयोग करना। हाथ साफ़ करना यानी चुपके से चुरा लेना। हाथ से निकल जाना यानी अवसर खो देना, और हाथ धो बैठना यानी किसी चीज़ को पूरी तरह गँवा देना, जैसे लापरवाही से वह नौकरी से हाथ धो बैठा।

पाठ में संगीत के कई शब्द भी आए हैं। राग स्वरों की एक तय रचना है जो किसी ख़ास भाव और समय से जुड़ी होती है, जैसे यमन, भैरवी या जयजयवंती। सुर यानी स्वर, संगीत की मूल ध्वनियाँ: सा, रे, ग, म, प, ध, नि। सा को षड्ज कहा जाता है। बंदिश किसी राग में बँधी हुई गायन-रचना है। अभंग मराठी संतों की भक्ति-रचना है। सोहर जन्म के अवसर का मंगलगीत है, फाग होली पर गाया जाता है, और बधावा बधाई का गीत है। पाश्र्वगायन यानी परदे के पीछे से किसी अभिनेता के लिए गाना। इन शब्दों को जानने से न केवल पाठ समझ आता है, बल्कि भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से भी परिचय होता है।

आवाज़ की नक़ल और साइबर सुरक्षा

लता जी ने कहा था कि आज तकनीक इतनी आगे बढ़ गई है कि पुराने संगीतकारों को यह मिलती तो कमाल हो जाता। पर तकनीक का एक ख़तरनाक पहलू भी है, जिसकी ओर पाठ्यपुस्तक ध्यान दिलाती है। आज कुछ ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता के ज़रिये किसी की आवाज़ की हूबहू नक़ल बना लेते हैं। फिर वे उसी आवाज़ में फ़ोन करके परिवार वालों से कहते हैं कि मैं मुसीबत में हूँ, तुरंत पैसे भेजो। सुनने वाला अपनों की आवाज़ पहचानकर घबरा जाता है और ठगी का शिकार हो जाता है।

ऐसी धोखाधड़ी से बचने के कुछ सीधे नियम हैं। अनजान नंबर से आई घबराहट भरी कॉल पर तुरंत पैसे न भेजें। फ़ोन काटकर उस व्यक्ति के असली नंबर पर ख़ुद कॉल करके सच जाँचिए। परिवार में एक गुप्त शब्द तय कर लीजिए जो संकट की असली कॉल में बोला जाए। ओटीपी, पिन या बैंक की जानकारी किसी को भी फ़ोन पर न बताइए। सोशल मीडिया पर अपनी आवाज़ के लंबे वीडियो सोच-समझकर डालिए। अगर ठगी हो जाए, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर या cybercrime.gov.in पर शिकायत कीजिए। जिस आवाज़ से लता जी करोड़ों दिलों तक पहुँचीं, आज उसी आवाज़ की नक़ल से धोखा भी हो सकता है, इसलिए सावधानी ज़रूरी है। भाषा संगम वाला अभ्यास भी याद रखिए: संगीत को उर्दू में मूसीक़ी या मौसिक़ी, तेलुगु में संगीतमु और तमिल में इशै कहते हैं।

Concepts and terms

जनश्रुति

लोगों में सुनी-सुनाई चलती आ रही कथा, जिसका पक्का प्रमाण न हो। तानसेन के दीपक राग से दीये जलने की बात ऐसी ही जनश्रुति है।

संतुलित दृष्टिकोण

न आँख मूँदकर मानना, न तुरंत नकारना, बल्कि अनुभव के आधार पर राय बनाना। लता जी इन कथाओं पर यही दृष्टि रखती हैं।

असीम शक्ति

ऐसी ताक़त जिसकी कोई सीमा न हो। लता जी के अनुसार सच्चे सुर में ऐसी शक्ति होती है कि अनसोचा कुछ घट सकता है।

प्रतीकात्मक अर्थ

शब्दों के सीधे अर्थ के पीछे छिपा गहरा भाव। गाँव बह जाना यानी शरीर और संसार नश्वर है; नाम रह जाना यानी कर्म अमर हैं।

साइबर सुरक्षा

इंटरनेट और फ़ोन पर होने वाली ठगी से बचने के नियम। आवाज़ की नक़ल वाली कॉल पर भरोसा करने से पहले सच की जाँच ज़रूरी है।

सावधान

भ्रम और सच

Did you know

तानसेन अकबर के दरबार के नवरत्नों में गिने जाते थे। उनके गुरु स्वामी हरिदास वृंदावन के प्रसिद्ध संत-संगीतकार माने जाते हैं।

सरोद एक तार-वाद्य है, जिसकी गर्दन पर पर्दे नहीं होते और जिसे नारियल के खोल जैसी जवा से बजाया जाता है। अली अकबर खाँ इसके महान वादक थे।

भारत सरकार का पोर्टल cybercrime.gov.in और हेल्पलाइन नंबर 1930 साइबर ठगी की शिकायत के लिए बनाए गए हैं।

Memory tricks

लता जी की तीन बातें: सु–ता–ना — सुर में असीम शक्ति, तार का टूटना, नाम रह जाता है।

Practice MCQs with answers (25)

Q1 दीपक राग से दीये जलने वाली तानसेन की कथा को क्या कहा जाएगा? beginner
  • A इतिहास
  • B जनश्रुति
  • C विज्ञान
  • D क़ानून
Show answer
Answer: जनश्रुति
Why:

सुनी-सुनाई कथा।

Q2 जनश्रुतियों पर लता जी का दृष्टिकोण कैसा है? advanced
  • A आदर के साथ पर अनुभव के आधार पर संतुलित
  • B पूरी तरह अंधविश्वास भरा और बिना किसी सोच वाला
  • C पूरी तरह मज़ाक़ उड़ाने और ठुकराने वाला
  • D डर और घबराहट से भरा हुआ
Show answer
Answer: आदर के साथ पर अनुभव के आधार पर संतुलित
Why:

मानती हैं, पर पक्का नहीं कहतीं।

Q3 लता जी तानसेन वाली बात को निश्चित रूप से सच क्यों नहीं कहतीं? intermediate
  • A क्योंकि उन्हें तानसेन बिलकुल पसंद नहीं थे
  • B क्योंकि उन्होंने कभी दीपक राग सुना ही नहीं
  • C क्योंकि यतींद्र जी ने उन्हें मना किया था
  • D क्योंकि उन्हें स्वयं ऐसा कोई अनुभव नहीं हुआ
Show answer
Answer: क्योंकि उन्हें स्वयं ऐसा कोई अनुभव नहीं हुआ
Why:

स्पष्टवादिता।

Q4 लता मंगेशकर के अनुसार हरिदास और तानसेन की कथाओं से कौन-सा निष्कर्ष निकाला जा सकता है? advanced
  • A संगीत से दीपक जलाए जा सकते हैं
  • B मेघ राग गाने से वर्षा होती है
  • C संगीत में अपरिमित शक्ति होती है
  • D सुर में वाद्य बजाने से तार टूटते हैं
Show answer
Answer: संगीत में अपरिमित शक्ति होती है
Why:

शक्ति असीम है, बाक़ी कथा।

Q5 अली अकबर खाँ का सरोद-वादन किस शहर के कार्यक्रम में रुका? beginner
  • A मुंबई
  • B कोलकाता
  • C दिल्ली
  • D इंदौर
Show answer
Answer: मुंबई
Why:

रविशंकर भी थे।

Q6 तार टूटने के बाद लता जी ने अली अकबर खाँ से क्या कहा? intermediate
  • A आपको और अभ्यास करने की ज़रूरत है
  • B काश तार साथ देता और राग पूरा हो पाता
  • C आपको नया सरोद ख़रीदना चाहिए
  • D आज का कार्यक्रम बिलकुल अच्छा नहीं था
Show answer
Answer: काश तार साथ देता और राग पूरा हो पाता
Why:

ग्रीन रूम में।

Q7 अली अकबर खाँ के सधे सुर और टूटे तार वाले उत्तर का भाव क्या है? advanced
  • A सस्ते तार बहुत जल्दी और बार-बार अपने-आप टूट जाते हैं
  • B वादक को ग़ुस्से में बजाना पसंद था
  • C सरोद बजाना बहुत ख़तरनाक काम है
  • D डूबकर साधे सुर की तीव्रता तार भी नहीं सह पाता
Show answer
Answer: डूबकर साधे सुर की तीव्रता तार भी नहीं सह पाता
Why:

साधना की गहराई।

Q8 सरोद वाले प्रसंग के बाद लता जी तानसेन की कथा के बारे में क्या सोचने लगीं? intermediate
  • A वह कथा पूरी तरह झूठी और बेकार है
  • B तानसेन भी सरोद ही बजाते थे
  • C शायद उनसे भी कोई सच्चा सुर लगा हो
  • D उनका तार भी शायद किसी दिन टूटा होगा
Show answer
Answer: शायद उनसे भी कोई सच्चा सुर लगा हो
Why:

अनुभव से विश्वास।

Q9 लता जी के जैसा दूसरा कोई नहीं हो सकता, यह बात पाठ में कौन कहता है? beginner
  • A नौशाद साहब का
  • B अली अकबर खाँ का
  • C दीनानाथ जी का
  • D यतींद्र मिश्र का
Show answer
Answer: यतींद्र मिश्र का
Why:

अंत का प्रश्न।

Q10 लोग मुझे अमर मानते हैं तो यह उनके प्यार जैसा है। यह कथन लता जी के किस गुण को दिखाता है? beginner
  • A विनम्रता
  • B घमंड
  • C सख़्त मिज़ाज
  • D अमरता
Show answer
Answer: विनम्रता
Why:

प्रशंसा को प्रेम मानना।

Q11 गीत रहेंगे, देह नहीं रहेगी, लता जी की इस बात से लता जी के व्यक्तित्व का कौन-सा पक्ष उभरता है? intermediate
  • A उत्सवप्रियता
  • B दार्शनिकता
  • C सख़्त मिज़ाज
  • D चतुराई
Show answer
Answer: दार्शनिकता
Why:

नश्वरता की स्वीकृति।

Q12 गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है? intermediate
  • A नाव गाँव में नहीं, नदी में बहती है
  • B फ़िल्मों में गाने से बड़ी प्रसिद्धि मिलती है
  • C देह मिट जाती है, पर अच्छे काम बचे रहते हैं
  • D गाँव छोड़कर शहर में बसना चाहिए
Show answer
Answer: देह मिट जाती है, पर अच्छे काम बचे रहते हैं
Why:

नाव = नाम।

Q13 कहावत में आया मराठी शब्द नाव हिंदी के किस शब्द के अर्थ में है? intermediate
  • A नदी की नाव
  • B नया-सा
  • C गाँव
  • D नाम
Show answer
Answer: नाम
Why:

नाम रह जाता है।

Q14 लता जी जब पिता का नाम आगे बढ़ाने की बात करती हैं, तो उनका आशय क्या है? advanced
  • A केवल ख़ूब पैसा कमाकर अपने लिए एक बहुत बड़ा घर बना लेना
  • B पिता की संगीत-परंपरा और संस्कार सम्मान से आगे ले जाना
  • C पिता की ड्रामा कंपनी फिर से खोलना
  • D अपने नाम के आगे पिता का नाम लिखना
Show answer
Answer: पिता की संगीत-परंपरा और संस्कार सम्मान से आगे ले जाना
Why:

प्रसिद्धि से बढ़कर ज़िम्मेदारी।

Q15 साक्षात्कार के अंत में लता जी ईश्वर से किसके लिए कृपा माँगती हैं? intermediate
  • A हर कलाकार और नेक इंसान के लिए
  • B केवल अपने परिवार के लिए
  • C केवल अपने प्रशंसकों के लिए
  • D केवल फ़िल्मी संगीतकारों के लिए
Show answer
Answer: हर कलाकार और नेक इंसान के लिए
Why:

मानवता का भाव।

Q16 पाठ में कोष्ठक में लिखे हँसते हुए जैसे शब्द साक्षात्कार के किस बिंदु के उदाहरण हैं? intermediate
  • A साक्षात्कार का समापन
  • B आमंत्रण और परिचय
  • C उत्तर देने की शैली का संकेत
  • D विचार और उदाहरण
Show answer
Answer: उत्तर देने की शैली का संकेत
Why:

बोलने का भाव।

Q17 पाठ पढ़कर लता जी के व्यक्तित्व का कौन-सा चित्र सबसे ज़्यादा उभरता है? intermediate
  • A प्रसिद्धि में डूबी और आत्ममुग्ध
  • B सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
  • C कठोर, सिद्धांतवादी और रूखी
  • D आधुनिकता की विरोधी और रूढ़िवादी
Show answer
Answer: सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
Why:

पूरे पाठ का सार।

Q18 इनमें से कौन-सा शब्द लता जी के व्यक्तित्व से मेल नहीं खाता? beginner
  • A घमंड
  • B कृतज्ञता
  • C समर्पण
  • D स्वाभिमान
Show answer
Answer: घमंड
Why:

वे विनम्र हैं।

Q19 लापरवाही के कारण वह अपनी नौकरी से ______। रिक्त स्थान के लिए उचित मुहावरा चुनिए। intermediate
  • A हाथ में आया
  • B हाथ मिला बैठा
  • C हाथ पसार बैठा
  • D हाथ धो बैठा
Show answer
Answer: हाथ धो बैठा
Why:

पूरी तरह गँवाना।

Q20 हाथ साफ़ करना मुहावरे का अर्थ क्या है? beginner
  • A हाथ धोकर खाना खाना
  • B किसी की मदद करना
  • C चुपके से चुरा लेना
  • D मेहनत से काम करना
Show answer
Answer: चुपके से चुरा लेना
Why:

चोरी के लिए।

Q21 किसी राग में बँधी हुई गायन-रचना को क्या कहते हैं? intermediate
  • A बधावा
  • B बंदिश
  • C अभंग
  • D सोहर
Show answer
Answer: बंदिश
Why:

बँधी हुई।

Q22 आपको किसी अनजान नंबर से अपने भाई की आवाज़ में कॉल आती है कि तुरंत पैसे भेजो, वह मुसीबत में है। सबसे सही क़दम क्या है? intermediate
  • A फ़ोन काटकर भाई के असली नंबर पर ख़ुद बात करके सच जाँचना
  • B घबराकर तुरंत माँगी गई पूरी रक़म भेज देना
  • C कॉल करने वाले को अपना ओटीपी और पिन तुरंत बता देना
  • D बिना किसी को बताए चुपचाप बैंक का पासवर्ड बदलना
Show answer
Answer: फ़ोन काटकर भाई के असली नंबर पर ख़ुद बात करके सच जाँचना
Why:

आवाज़ की नक़ल संभव है।

Q23 फ़ोन पर ठगी का शिकार हुए आपके दादाजी को तुरंत शिकायत के लिए कौन-सा नंबर मिलाना चाहिए? beginner
  • A 100
  • B 108
  • C 1930
  • D 1098
Show answer
Answer: 1930
Why:

cybercrime.gov.in भी।

Q24 अभिकथन: लता जी तानसेन की कथा को आदर से मानती हैं, पर पक्का सच नहीं कहतीं। कारण: वे परंपरा का सम्मान करती हैं, पर बिना अनुभव के किसी बात का दावा नहीं करतीं। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • C अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
  • D दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

संतुलित दृष्टि।

Q25 नीचे दिए कथनों को पढ़िए। I. संगीत को तमिल में इशै कहते हैं। II. अभंग बंगाल के लोकगीत हैं। III. संगीत को उर्दू में मूसीक़ी कहते हैं। इनमें से कौन-से कथन सही ठहरते हैं? intermediate
  • A केवल I और III
  • B केवल I और II
  • C केवल II और III
  • D I, II और III तीनों
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

अभंग मराठी संतों के।

Important short questions (7)

तानसेन की जनश्रुतियों पर लता जी की क्या राय है?

लता जी कहती हैं कि तानसेन जैसे महान कलाकार से कोई सच्चा सुर लगा होगा, इसलिए आदर में हम ऐसी कथाएँ मान लेते हैं। पर वे इन्हें पक्का सच नहीं कह सकतीं, क्योंकि उन्हें ऐसा अनुभव नहीं हुआ। फिर भी वे मानती हैं कि संगीत में असीम शक्ति है।

अली अकबर खाँ वाले प्रसंग का वर्णन कीजिए।

मुंबई के एक कार्यक्रम में अली अकबर खाँ बहुत डूबकर सरोद बजा रहे थे। लगभग एक घंटे बाद ठन से एक तार टूट गया। लता जी ने ग्रीन रूम में जाकर अफ़सोस जताया। तब उन्होंने कहा कि जब सुर बहुत सधकर लगता है, तो तार टूट जाता है।

गीत अमर हैं पर शरीर नश्वर है, लता जी के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

लता जी मानती हैं कि शरीर नश्वर है और उसे एक दिन जाना ही है। पर उनके गाए गीत लोगों के मन में हमेशा जीवित रहेंगे। इसलिए उन्हें मृत्यु का कोई अफ़सोस नहीं। यह जीवन की सच्चाई को सहजता से स्वीकार करने का भाव है।

गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन कहावत का अर्थ और प्रयोग लिखिए।

यह एक मराठी कहावत है, जिसका अर्थ है कि गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है। यानी संसार की हर चीज़ नष्ट हो जाती है, पर अच्छे कर्मों से बना नाम बचा रहता है। लता जी इसे अपने गीतों के अमर होने के संदर्भ में कहती हैं।

साक्षात्कार के किन्हीं चार मुख्य बिंदुओं को पाठ के उदाहरण के साथ लिखिए।

आमंत्रण और परिचय: शुरुआत में प्रणाम और आभार। संस्मरण: पिता की यादें और तुकाराम का खेल। उत्तर की शैली का संकेत: कोष्ठक में हँसते हुए। समापन: अंत में सब कलाकारों के लिए प्रार्थना।

हाथ से जुड़े किन्हीं दो मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।

हाथ से निकल जाना, यानी अवसर खो देना: देर से पहुँचने पर अच्छी सीट हाथ से निकल गई। हाथ का मैल होना, यानी तुच्छ चीज़ होना: उदार सेठ जी कहते थे कि पैसा तो हाथ का मैल है।

आवाज़ की नक़ल से होने वाली ठगी से बचने के दो उपाय लिखिए।

पहला, घबराहट भरी अनजान कॉल पर तुरंत पैसे न भेजें; फ़ोन काटकर उस व्यक्ति के असली नंबर पर ख़ुद बात करें। दूसरा, ओटीपी, पिन या बैंक की जानकारी फ़ोन पर कभी न बताएँ। ठगी हो जाए तो 1930 पर शिकायत करें।

Long answer questions (3)

संगीत में असीम शक्ति होती है। लता जी ने इस विचार को किन तर्कों और उदाहरणों से पुष्ट किया है?

लता जी पहले तानसेन की जनश्रुति पर संतुलित राय देती हैं। वे कहती हैं कि दीये जलना या वर्षा होना वे पक्का नहीं कह सकतीं, क्योंकि उनका ऐसा अनुभव नहीं, पर आदर में हम इसे मान लेते हैं। इसके बाद वे अपने अनुभव का सहारा लेती हैं। वे बताती हैं कि पिता दीनानाथ मंगेशकर को सुनते हुए उन्हें कई बार कुछ अनसोचा अनुभव होता था।

फिर वे अली अकबर खाँ का प्रसंग सुनाती हैं। मुंबई के कार्यक्रम में डूबकर बजाते हुए उनके सरोद का तार टूट गया, और उन्होंने कहा कि सधे सुर में तार टूट जाता है। लता जी इसे इस बात का प्रमाण मानती हैं कि शुद्ध स्वर का आघात तार भी नहीं सह पाता। इस अनुभव के बाद उन्हें लगता है कि तानसेन से भी कोई सच्चा सुर लगा होगा। इस तरह वे अंधविश्वास नहीं, बल्कि अनुभव और साधना पर टिका विश्वास सामने रखती हैं।

साक्षात्कार के अंतिम भाग से लता मंगेशकर के जीवन-दर्शन के बारे में क्या पता चलता है?

अंतिम भाग में यतींद्र मिश्र उन्हें अमर कहते हैं। लता जी इस प्रशंसा पर घमंड नहीं करतीं, बल्कि इसे दुनिया के प्यार का रूप मानती हैं। वे कहती हैं कि भगवान ने बहुत दिया है और उन्हें कोई शिकायत नहीं। इससे उनकी विनम्रता और संतोष का पता चलता है।

वे मानती हैं कि गाना अमर है, पर शरीर नहीं, और इसका उन्हें कोई अफ़सोस नहीं। मराठी कहावत गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन से वे बताती हैं कि जीवन नश्वर है, पर कर्म बचे रहते हैं। उनकी सबसे बड़ी ख़ुशी पिता का नाम आगे बढ़ाना है, और अंत में वे सब कलाकारों और नेक लोगों के लिए प्रार्थना करती हैं। इस तरह उनका जीवन-दर्शन कर्म, कृतज्ञता, विनम्रता और मानवता पर टिका है।

मान लीजिए आप भी उस बातचीत में बैठे हैं। आप लता जी से कौन-से तीन नए प्रश्न पूछते और क्यों?

पहला प्रश्न: आपको अपना कौन-सा गीत सबसे प्रिय है और क्यों? यह इसलिए पूछता क्योंकि हज़ारों गीतों में से किसी एक का चुनाव उनके मन की झलक देगा। दूसरा प्रश्न: रोज़ रियाज़ के लिए आप कितना समय निकालती थीं और गले की देखभाल कैसे करती थीं? इससे विद्यार्थियों को साधना और अनुशासन की सीख मिलती।

तीसरा प्रश्न: आज के युवा गायकों को आप कौन-सी तीन सलाह देंगी? यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि नई पीढ़ी को उनके अनुभव से दिशा मिल सकती है। ये प्रश्न साक्षात्कार को और व्यक्तिगत, प्रेरक और उपयोगी बनाते, और पाठकों को उनके संगीत के पीछे छिपी मेहनत से परिचित कराते।

Flashcards (17)

जनश्रुति का अर्थ?
लोगों में सुनी-सुनाई चलती कथा।
किसके दीपक राग से दीये जलने की कथा है?
तानसेन।
किस राग से वर्षा होने की बात कही जाती है?
मेघ राग।
जनश्रुतियों पर लता जी की राय?
आदर में मानती हैं, पक्का नहीं कह सकतीं।
लता जी संगीत में कैसी शक्ति मानती हैं?
असीम, अनसोचा रचने वाली।
किसके सरोद का तार टूटा?
उस्ताद अली अकबर खाँ।
उस कार्यक्रम में दूसरे बड़े कलाकार कौन थे?
पंडित रविशंकर।
तार टूटने पर अली अकबर खाँ ने क्या कहा?
सधे सुर में तार टूट जाता है।
यतींद्र जी ने लता जी को क्या कहा?
अमर, दूसरी लता संभव नहीं।
लता जी के अनुसार क्या अमर है?
गाना, शरीर नहीं।
गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन का अर्थ?
गाँव बह जाता है, नाम रह जाता है।
लता जी की सबसे बड़ी ख़ुशी?
पिता का नाम आगे बढ़ाना।
साक्षात्कार का समापन कैसे होता है?
सबके लिए प्रार्थना से।
हाथ धो बैठना का अर्थ?
पूरी तरह गँवा देना।
हाथ का मैल होना का अर्थ?
तुच्छ चीज़ होना।
अभंग क्या है?
मराठी संतों की भक्ति-रचना।
साइबर ठगी की शिकायत का हेल्पलाइन नंबर?
1930।

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  • बात और उसका अर्थ
  • गुण या अवगुण
  • सही या भ्रम
  • सरोद वाला प्रसंग
  • झटपट उत्तर

Class 9 Hindi Chapter 4 — frequently asked questions

साक्षात्कार किसे कहते हैं? इस पाठ के आधार पर उसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

साक्षात्कार वह विधा है जिसमें कोई एक सवाल करता है और सामने वाला अपने अनुभवों से उत्तर देता है। इस पाठ में यतींद्र मिश्र प्रश्नकर्ता और लता मंगेशकर उत्तरदाता हैं। इसकी पहली विशेषता आत्मीय वातावरण है, जो प्रणाम और आभार से बनता है। दूसरी विशेषता संस्मरण हैं, जैसे पिता की यादें और बचपन के खेल।

लता जी के पिता का अनुशासन कैसा था?

उनके पिता बच्चों को डाँटते या मारते नहीं थे। शरारत होने पर वे सबको सामने खड़ा करके केवल गंभीर नज़र से देखते थे। बच्चे इतने में ही रो पड़ते और अपनी ग़लती समझ जाते। फिर पिता उन्हें खेलने भेज देते, जिससे पता चलता है कि अनुशासन में स्नेह भी था।

दीनानाथ मंगेशकर की संगीत-प्रतिभा के दो उदाहरण दीजिए।

पहला, वे गाते-गाते किसी दूसरे सुर को आधार बनाकर नया राग रच देते थे। फिर उसी सहजता से पहले राग में लौट आते। दूसरा, वे मराठी रंगमंच पर पहली बार कर्नाटक और पंजाब का संगीत लाए। इसके लिए उन्होंने ख़ुद कर्नाटक जाकर संगीत सीखा।

टाइम मशीन वाले प्रश्न का लता जी ने क्या उत्तर दिया?

लता जी ने इसे बड़ा मज़ेदार प्रश्न बताया, पर कहा कि ठीक-ठीक आकलन करना कठिन है। उनके अनुसार गीत शायद बहुत बढ़िया बनते या बिलकुल अलग अंदाज़ में आते। फिर उन्होंने उलटकर पूछा कि उनके नए गीत अगर नौशाद या अनिल विश्वास रचते, तो कैसे बनते।

पुराने दौर में रेकॉर्डिंग की तकनीक कैसी थी? एक उदाहरण दीजिए।

उस समय सिनेमा में तकनीक बहुत आगे नहीं बढ़ी थी। एक ही माइक पर पूरा गीत रेकॉर्ड होता था। आएगा आने वाला गाते समय लता जी को हॉल में दूर से धीरे-धीरे चलकर माइक तक आना पड़ा, ताकि आवाज़ पास आती लगे।

लता जी के घर में होली कैसे मनाई जाती थी?

होलिका-दहन पर पूजा होती, प्रसाद की मिठाइयाँ और अंत में नारियल होलिका में डाला जाता। अगले दिन होलिका की राख एक-दूसरे पर डाली जाती, जिसे गुड़वड़ कहते थे। पाँचवें दिन रंग-पंचमी पर माता-पिता बच्चों पर केसर छिड़कते और माँ आरती उतारतीं।

तानसेन की जनश्रुतियों पर लता जी की क्या राय है?

लता जी कहती हैं कि तानसेन जैसे महान कलाकार से कोई सच्चा सुर लगा होगा, इसलिए आदर में हम ऐसी कथाएँ मान लेते हैं। पर वे इन्हें पक्का सच नहीं कह सकतीं, क्योंकि उन्हें ऐसा अनुभव नहीं हुआ। फिर भी वे मानती हैं कि संगीत में असीम शक्ति है।

अली अकबर खाँ वाले प्रसंग का वर्णन कीजिए।

मुंबई के एक कार्यक्रम में अली अकबर खाँ बहुत डूबकर सरोद बजा रहे थे। लगभग एक घंटे बाद ठन से एक तार टूट गया। लता जी ने ग्रीन रूम में जाकर अफ़सोस जताया। तब उन्होंने कहा कि जब सुर बहुत सधकर लगता है, तो तार टूट जाता है।

गीत अमर हैं पर शरीर नश्वर है, लता जी के इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

लता जी मानती हैं कि शरीर नश्वर है और उसे एक दिन जाना ही है। पर उनके गाए गीत लोगों के मन में हमेशा जीवित रहेंगे। इसलिए उन्हें मृत्यु का कोई अफ़सोस नहीं। यह जीवन की सच्चाई को सहजता से स्वीकार करने का भाव है।

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