Class 9 Hindi Chapter 2: क्या लिखूँ?
- 3 topics
- 75 MCQs
- 21 short answers
- 9 long answers
- 51 flashcards
- 15 games
- ~130 min read
- Hindi
लिखने की उलझन और आचार्यों के नियम
लेखक को दो विषयों पर आदर्श निबंध लिखना है। गार्डिनर की हैट-खूँटी वाली बात, आचार्यों के नियम, रूपरेखा और शीर्षक की कठिनाई, और शैली पर व्यंग्य, इन सबके बीच लेखक अपना रास्ता खोजता है।
What you will be able to do
- पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का परिचय और उनकी प्रमुख रचनाएँ बता सकूँगा।
- गार्डिनर की हैट और खूँटी वाली उपमा का अर्थ समझा सकूँगा।
- नमिता और अमिता के दिए विषयों पर लिखने में लेखक की कठिनाइयाँ बता सकूँगा।
- आचार्यों के बताए निबंध के अंगों, सामग्री और शैली, को पहचान सकूँगा।
- शैली के नियमों पर लेखक के व्यंग्य को उदाहरण सहित समझा सकूँगा।
Key points
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) में हुआ; वे निबंधकार, आलोचक और कवि थे।
उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन किया; सन् 1971 में उनका निधन हुआ।
क्या लिखूँ? एक आत्मपरक निबंध है, जिसमें लेखक पाठक से सीधे बात करता है।
गार्डिनर के अनुसार मन के भाव असली हैं, विषय तो उन्हें टाँगने की खूँटी भर है।
लेखक मानता है कि उसे बिना सोचे-मेहनत किए भाव अपने-आप नहीं सूझते।
नमिता ने दूर के ढोल सुहावने और अमिता ने समाज-सुधार पर निबंध माँगा है, और समय केवल दो घंटे है।
आचार्यों के अनुसार निबंध छोटा हो, और उसके दो मुख्य अंग हैं: सामग्री और शैली।
रूपरेखा पहले बनाना लेखक को कठिन लगता है; गार्डिनर को तो शीर्षक रखना ही सबसे कठिन लगता था।
लंबे, उलझे वाक्यों और कठिन शैली को विद्वता मानने की सोच पर लेखक हल्का व्यंग्य करता है।
Full explanation
लेखक और निबंध का परिचय
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 में खैरागढ़ में हुआ, जो आज छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव क्षेत्र में है। हिंदी साहित्य में वे आलोचक, कवि, निबंधकार और हास्य-व्यंग्य लेखक के रूप में जाने जाते हैं, पर उनकी सबसे बड़ी पहचान निबंधकार की है। पंच-पात्र, पद्म-वन और कुछ बिखरे पन्ने उनके निबंध-संग्रह हैं। उन्होंने कविताएँ, कहानियाँ और आलोचना भी लिखी। सरस्वती और छाया जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी उन्होंने किया। उनके लेखन में समाज-सुधार, लोकजीवन और भारतीय खेती-किसानी की गहरी समझ मिलती है। सन् 1971 में उनका निधन हुआ।
क्या लिखूँ? एक अनोखा निबंध है। यह किसी बाहरी विषय पर नहीं, बल्कि निबंध लिखने की प्रक्रिया पर ही लिखा गया है। लेखक अपनी उलझनें हमारे सामने खोलकर रख देता है, मानो हमसे बातें कर रहा हो। ऐसी शैली को आत्मपरक शैली कहते हैं। इसमें लेखक मैं बनकर बोलता है, अपनी कमज़ोरियों पर हँसता है, और इसी हँसी-मज़ाक़ में निबंध लिखने के गुर भी समझा देता है।
गार्डिनर की हैट और खूँटी
निबंध की शुरुआत इस वाक्य से होती है कि आज लेखक को लिखना ही पड़ेगा। फिर वह अंग्रेज़ी निबंधकार ए.जी. गार्डिनर की एक बात याद करता है। गार्डिनर के अनुसार लिखने की एक ख़ास मानसिक अवस्था होती है। उस समय मन में उमंग उठती है, दिल में स्फूर्ति आती है, और दिमाग़ में ऐसा आवेग जागता है कि लिखे बिना रहा नहीं जाता। उस घड़ी विषय की चिंता नहीं रहती।
इसे समझाने के लिए गार्डिनर एक सुंदर उपमा देते हैं। टोपी, यानी हैट, किसी भी खूँटी पर टाँगी जा सकती है। असली चीज़ हैट है, खूँटी नहीं। इसी तरह मन के भाव असली हैं; विषय तो बस उन भावों को टाँगने का सहारा है। अर्थात जिसके मन में भाव उमड़ रहे हैं, वह किसी भी विषय पर अच्छा लिख सकता है।
लेखक इस बात को ग़लत नहीं कहता, पर उसकी परेशानी यह है कि उसने कभी ऐसी अवस्था का अनुभव ही नहीं किया। उसके मन में भाव अपने-आप नहीं उठते। उसे सोचना पड़ता है, चिंता करनी पड़ती है, मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर कोई निबंध बनता है। यहाँ लेखक की ईमानदारी दिखती है। वह ख़ुद को बड़ा प्रेरित लेखक नहीं, एक साधारण मेहनती लिखने वाला बताता है, जैसे हम में से ज़्यादातर लोग होते हैं।
नमिता, अमिता और दो कठिन विषय
आज का काम और भी कठिन है, क्योंकि लेखक को कोई साधारण निबंध नहीं, आदर्श निबंध लिखना है। नमिता चाहती है कि वह दूर के ढोल सुहावने होते हैं पर लिखे, और अमिता चाहती है कि समाज-सुधार पर लिखे। दोनों विषय परीक्षा में आ चुके हैं, और लेखक को आदर्श निबंध लिखकर उन्हें निबंध-रचना का रहस्य भी समझाना है।
लेखक को दोनों विषयों में अलग-अलग कठिनाई दिखती है। पहला विषय उसे इतना छोटा लगता है कि उस पर पाँच पन्ने भरना मुश्किल है। दूर के ढोल सुहावने लगते हैं, यह बात तो सच है, पर इस पर इतना क्या लिखा जाए? दूसरा विषय इतना बड़ा है कि उसे पाँच पन्नों में समेटना असंभव लगता है। समाज-सुधार की चर्चा बहुत पुराने समय से चल रही है और बड़े-बड़े विद्वानों में भी उस पर मतभेद है। एक विषय बहुत छोटा, दूसरा बहुत बड़ा, यही लेखक की उलझन है। ऊपर से उसके पास केवल दो घंटे हैं, और वहाँ न कोई विश्वकोश है, न कोई ऐसी किताब जिसमें इन विषयों पर सामग्री मिले।
आचार्यों के नियम: छोटा निबंध, सामग्री और शैली
उलझन सुलझाने के लिए लेखक सोचता है कि पहले निबंधशास्त्र के आचार्यों की राय जान ली जाए, यानी यह समझ लिया जाए कि आदर्श निबंध होता क्या है। वह कई आचार्यों की रचनाएँ पढ़ता है।
एक आचार्य कहते हैं कि निबंध छोटा होना चाहिए, क्योंकि बड़े निबंध में रचना की सुंदरता बनी नहीं रह पाती। लेखक मज़ाक़ में कहता है कि यह नियम मानने में तो उसी का लाभ है, क्योंकि उसे छोटा ही लिखना है।
वही आचार्य बताते हैं कि निबंध के दो मुख्य अंग हैं: सामग्री और शैली। सामग्री के लिए विचार इकट्ठे करने होते हैं, और इसके लिए मनन करना पड़ता है। जिसने किसी विषय का अच्छा अध्ययन किया हो, उसके मन में उस विषय के विचार आते हैं। पर लेखक को क्या पता था कि उसे दूर के ढोल पर भी लिखना पड़ेगा? पहले पता होता तो वह पुस्तकालय जाकर खोजबीन कर लेता। अब तो उसे अपने ही ज्ञान के भरोसे लिखना होगा। यह बात हम सबके काम की है: अच्छी सामग्री रोज़ के पढ़ने, देखने और सोचने से धीरे-धीरे जमा होती है, परीक्षा के दिन अचानक नहीं।
रूपरेखा और शीर्षक की कठिनाई
विद्वानों का अगला नियम है कि लिखने से पहले निबंध की रूपरेखा बना लेनी चाहिए। लेखक को यह बहुत कठिन लगता है। वह कहता है कि निबंध लिख लेने के बाद तो वह उसका सार कुछ वाक्यों में लिख सकता है, पर लिखने से पहले ही उसका सार दस-पाँच शब्दों में कैसे बाँधे? वह यह भी पूछता है कि क्या सचमुच हिंदी के सब लेखक पहले से रूपरेखा बनाकर लिखते हैं।
यहाँ वह फिर गार्डिनर को याद करता है। गार्डिनर को अपने लेखों का शीर्षक रखने में सबसे ज़्यादा परेशानी होती थी, इसलिए वे लेख ख़ुद लिखते और शीर्षक रखने का काम एक मित्र पर छोड़ देते। गार्डिनर ने मज़ाक़ में यह भी कहा था कि शेक्सपीयर को नाटक लिखने में उतनी मुश्किल न हुई होगी, जितनी उनके नाम रखने में। शायद इसीलिए एक नाटक का नाम जैसा तुम चाहो रख दिया गया। इन उदाहरणों से लेखक यह बताना चाहता है कि लिखने के नियम हर लेखक पर एक जैसे लागू नहीं होते। फिर भी परीक्षा में लिखते समय छोटी-सी रूपरेखा, जैसे भूमिका, मुख्य बातें और निष्कर्ष, बहुत मदद करती है।
शैली पर हल्का व्यंग्य
अब लेखक शैली तय करने बैठता है। आचार्य कहते हैं कि भाषा में प्रवाह होना चाहिए, और इसके लिए वाक्य छोटे रहें, पर आपस में जुड़े रहें। लेखक कहता है कि यह तो बिल्कुल ठीक है, और वह छोटे वाक्य अच्छी तरह लिख भी सकता है।
पर तभी वह अपने ऊपर हँसता है। वह कहता है कि वह मास्टर है, और अपनी विद्वता दिखाने के लिए ज़रूरी है कि वाक्य कम-से-कम आधे पन्ने में ख़त्म हों, जैसे बाणभट्ट ने कादंबरी में लिखे। वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि कठिनाई से गंभीरता आती है। इसीलिए श्रीहर्ष ने अपने काव्य में जान-बूझकर ऐसी गुत्थियाँ डालीं जिन्हें अनजान लोग न सुलझा सकें, और सेनापति ने भी अपनी कविता कठिन बना दी। साथ ही अलंकार, मुहावरे और लोकोक्तियाँ भी भरनी चाहिए।
यह सारा कथन व्यंग्य है। लेखक सच में लंबे, उलझे वाक्यों का समर्थन नहीं कर रहा। वह उस सोच पर हँस रहा है जो कठिन भाषा को ही विद्वता मान लेती है। असली संदेश उलटा है: अच्छा निबंध वह है जो साफ़, सहज और प्रवाह वाली भाषा में लिखा जाए। इस भाग के अंत में लेखक ख़ुद पूछता है कि तब क्या किया जाए, और यहीं से निबंध अगले मोड़ की ओर बढ़ता है।
Concepts and terms
ऐसा निबंध जिसमें लेखक मैं बनकर अपने अनुभव, उलझनें और विचार खुलकर रखता है, जैसे पाठक से बातचीत कर रहा हो। क्या लिखूँ? इसी शैली का निबंध है।
गार्डिनर की उपमा: हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी चल जाती है। उसी तरह मन के भाव असली चीज़ हैं, और विषय तो बस उन्हें टाँगने का सहारा है।
निबंध के लिए जुटाए गए विचार, तथ्य और उदाहरण। आचार्यों के अनुसार इसके लिए अध्ययन और मनन ज़रूरी है।
विचारों को प्रकट करने का ढंग। भाषा में प्रवाह, छोटे पर जुड़े हुए वाक्य, और सही जगह मुहावरे-लोकोक्तियाँ, ये सब शैली के अंग हैं।
लिखने से पहले बनाया गया छोटा ढाँचा, जिसमें तय होता है कि निबंध में कौन-सी बात कहाँ आएगी। लेखक को लिखने से पहले सार बाँधना कठिन लगता है।
सावधान
भ्रम और सच
करके देखो
Title:
दो मिनट की रूपरेखा
Safety:
समय पर ध्यान रखें, पर जल्दबाज़ी में घबराएँ नहीं।
What You Notice:
लेखक को रूपरेखा कठिन लगी थी; यह अभ्यास दिखाता है कि छोटी रूपरेखा भी लिखने को आसान बना देती है।
Did you know
ए.जी. गार्डिनर अंग्रेज़ी के निबंधकार थे जो अल्फ़ा ऑफ़ द प्लाउ नाम से छोटे-छोटे हल्के निबंध लिखते थे।
शेक्सपीयर के एक नाटक का नाम है ऐज़ यू लाइक इट, यानी जैसा तुम चाहो। लेखक मज़ाक़ करता है कि शायद नाम न सूझने पर ही यह नाम रखा गया।
बाणभट्ट की कादंबरी संस्कृत गद्य की प्रसिद्ध रचना है, जिसके वाक्य बहुत लंबे और अलंकारों से भरे हैं।
Memory tricks
आचार्यों के नियम: छो–सा–शै–रू — छोटा निबंध, सामग्री, शैली, रूपरेखा। याद रखो: छोटी सी शैली की रूपरेखा।
Practice MCQs with answers (25)
- A केवल दूर के ढोल नाम की प्रसिद्ध लोकोक्ति के अर्थ के बारे में
- B निबंध लिखने की प्रक्रिया और उसकी कठिनाइयों के बारे में
- C अंग्रेज़ी साहित्य के इतिहास और उसके लेखकों के बारे में
- D खैरागढ़ नगर के समाज और वहाँ के लोगों के बारे में
Show answer
Why:
लेखक लिखने की उलझनों पर ही लिख रहा है।
- A खैरागढ़
- B लमही
- C अल्मोड़ा
- D अमृतसर
Show answer
Why:
आज यह छत्तीसगढ़ में है।
- A हंस
- B माधुरी
- C जागरण
- D सरस्वती
Show answer
Why:
छाया पत्रिका का संपादन भी किया।
- A हर लेखक को घर में खूँटी लगानी चाहिए
- B विषय चुनना ही लेखन का सबसे कठिन काम है
- C विषय से अधिक लेखक के भाव महत्त्वपूर्ण हैं
- D तथ्य और आँकड़े भावों से अधिक ज़रूरी हैं
Show answer
Why:
हैट भाव है, खूँटी विषय।
- A लेखक के मन का
- B पाठक की रुचि का
- C निबंध की भाषा का
- D निबंध के विषय का
Show answer
Why:
विषय तो भाव टाँगने का सहारा है।
- A उसे अंग्रेज़ी पढ़नी बिलकुल नहीं आती थी
- B उसके पास लिखने के लिए कोई अच्छी क़लम तक नहीं थी
- C उसे भाव अपने-आप नहीं सूझते, मेहनत करनी पड़ती है
- D उसे गार्डिनर के निबंध बिलकुल पसंद नहीं थे
Show answer
Why:
वह प्रेरणा की अवस्था का अनुभव नहीं कर पाया।
- A दोनों विषय उसे बिलकुल नए और अनसुने लगे
- B एक विषय बहुत छोटा, दूसरा बहुत बड़ा लगा
- C दोनों ही विषय उसे बहुत छोटे और सरल लगे
- D दोनों विषयों पर पहले से उसके निबंध छपे थे
Show answer
Why:
ढोल पर पाँच पेज कठिन, सुधार को पाँच पेज में समेटना कठिन।
- A यह बहुत पुराना और विवादों से भरा विशाल विषय है
- B इस विषय पर उसने कभी कुछ सुना ही नहीं था
- C अमिता ने इसे हिंदी में लिखने से साफ़ मना किया था
- D इस विषय पर लिखना परीक्षा में मना है
Show answer
Why:
बड़े विद्वानों में भी इस पर मतभेद है।
- A शीर्षक और लंबाई
- B सामग्री और शैली
- C कविता और कहानी
- D प्रश्न और उत्तर
Show answer
Why:
क्या कहना है और कैसे कहना है।
- A हँसकर कहता है कि यह नियम उसके लाभ का है
- B वह इस नियम का कड़ा विरोध करता है
- C वह कहता है कि बड़ा निबंध ही सबसे अच्छा है
- D वह इस नियम को ध्यान से नहीं पढ़ता
Show answer
Why:
उसे छोटा ही निबंध लिखना था।
- A उसने पहले कभी कोई पुस्तक नहीं पढ़ी थी
- B उसका पुस्तकालय पूरी तरह बंद हो गया था
- C उसके मित्रों ने उसकी किताबें छिपा दी थीं
- D पहले पता होता तो पुस्तकालय में खोज कर लेता
Show answer
Why:
समय न होने से अब अपने ज्ञान पर भरोसा है।
- A परीक्षा के दिन ही सब कुछ अचानक याद आ जाता है
- B निबंध लिखने के लिए किताबों की कोई ज़रूरत नहीं
- C अच्छी सामग्री रोज़ पढ़ने-सोचने से जमा होती है
- D केवल शैली अच्छी हो तो सामग्री की ज़रूरत नहीं
Show answer
Why:
अध्ययन और मनन धीरे-धीरे होते हैं।
- A उसे रूपरेखा का सही अर्थ ही ठीक से पता नहीं था
- B रूपरेखा बनाने के लिए बहुत पैसे लगते थे
- C आचार्यों ने उसे रूपरेखा बनाने से साफ़-साफ़ मना कर दिया था
- D लिखने से पहले ही सार को शब्दों में बाँधना कठिन लगता है
Show answer
Why:
लिखने के बाद सार बताना आसान है।
- A अपने प्रकाशक को
- B अपने एक मित्र को
- C अपने विद्यार्थियों को
- D अपनी पत्नी को
Show answer
Why:
शीर्षक उन्हें सबसे कठिन लगता था।
- A शेक्सपीयर को हिंदी भाषा बहुत अच्छी आती थी
- B नाटक हमेशा निबंध से बेहतर होते हैं
- C नाम या शीर्षक रखना भी बहुत कठिन काम है
- D हर नाटक का नाम लंबा होना चाहिए
Show answer
Why:
नाम न सूझने पर ऐसा नाम रखा गया, यह मज़ाक़ है।
- A छोटे-छोटे, पर एक-दूसरे से जुड़े
- B बहुत लंबे और अलंकारों से भरे
- C केवल प्रश्नवाचक और विस्मयबोधक
- D बिना विराम चिह्नों के लगातार
Show answer
Why:
प्रवाह जुड़े हुए छोटे वाक्यों से आता है।
- A लंबे वाक्यों का सच्चा समर्थन
- B अध्यापकों के प्रति ग़ुस्सा
- C विद्वता के दिखावे पर व्यंग्य
- D संस्कृत भाषा का विरोध
Show answer
Why:
लेखक अपने ऊपर हँस रहा है।
- A हर पंक्ति को बहुत सरल और छोटा रखा
- B केवल बच्चों के लिए सरल गीत लिखे
- C अपना नाम हर पंक्ति में लिख दिया
- D ऐसी गुत्थियाँ डालीं जो अज्ञों से न सुलझें
Show answer
Why:
दुर्बोधता से गंभीरता दिखाने का प्रयास।
- A साफ़, सहज और प्रवाह वाली भाषा ही अच्छी है
- B जितनी कठिन भाषा हो, उतना ही अच्छा निबंध
- C अलंकार हटाकर केवल आँकड़े लिखने चाहिए
- D निबंध में मुहावरों का प्रयोग मना है
Show answer
Why:
व्यंग्य का उलटा अर्थ ही संदेश है।
- A कुछ न लिखकर अपनी उत्तर-पुस्तिका ख़ाली छोड़ देना
- B अपने अनुभव और ज्ञान से छोटी रूपरेखा बनाकर लिखना
- C जितने कठिन शब्द आते हों, सब भर देना
- D किसी दूसरे विषय पर निबंध लिख देना
Show answer
Why:
लेखक भी अपने ही ज्ञान के भरोसे लिखता है।
- A अच्छी तरह बाँधना
- B खुलकर बोलना
- C जल्दी-जल्दी लिखना
- D ज़ोर से पढ़ना
Show answer
Why:
नि + बंध।
- A ग़लत है, यह केवल तथ्यों की सूची है
- B ग़लत है, इसमें लेखक कहीं नहीं आता
- C सही है, पर केवल अंतिम पंक्ति में
- D सही है, क्योंकि शैली आत्मपरक है
Show answer
Why:
लेखक मैं बनकर बोलता है।
- A गार्डिनर — जैसा तुम चाहो नाटक
- B बाणभट्ट — लंबे वाक्यों वाली कादंबरी
- C शेक्सपीयर — हैट और खूँटी की उपमा
- D श्रीहर्ष — सरस्वती पत्रिका
Show answer
Why:
बाक़ी जोड़े आपस में बदल दिए गए हैं।
- A उसे पढ़ना-लिखना बिलकुल पसंद नहीं है
- B उसे केवल कविता लिखनी है
- C सामग्री जुटाने का कोई बाहरी साधन नहीं है
- D वह निबंध लिखना हमेशा के लिए छोड़ना चाहता है
Show answer
Why:
इसलिए अपने ज्ञान पर भरोसा करना होगा।
- A रोचक, क्योंकि हर नियम पर लेखक की उलझन दिखती है
- B उबाऊ, क्योंकि लेखक हर नियम चुपचाप मान लेता है
- C कठिन, क्योंकि हर नियम संस्कृत में लिखा है
- D छोटा, क्योंकि लेखक कोई नियम नहीं बताता
Show answer
Why:
प्रश्न और हँसी से निबंध जीवंत बनता है।
Important short questions (7)
बख्शी जी का जन्म 1894 में खैरागढ़, छत्तीसगढ़ में हुआ। वे निबंधकार, आलोचक और कवि थे। पंच-पात्र और पद्म-वन उनके निबंध-संग्रह हैं। उन्होंने सरस्वती और छाया का संपादन किया।
टोपी टाँगने के लिए कोई भी खूँटी चल जाती है, असली चीज़ टोपी है। उसी तरह लिखते समय मन के भाव असली हैं, और विषय तो उन्हें प्रकट करने का सहारा भर है।
गार्डिनर के अनुसार लिखने की एक उमंग भरी अवस्था होती है। लेखक कहता है कि उसने ऐसी अवस्था कभी अनुभव नहीं की; उसे सोचकर, चिंता और मेहनत करके लिखना पड़ता है।
दूर के ढोल वाला विषय इतना छोटा था कि पाँच पन्ने भरना कठिन था, और समाज-सुधार इतना बड़ा कि उसे पाँच पन्नों में समेटना कठिन। ऊपर से केवल दो घंटे का समय था।
निबंध छोटा हो; उसके दो अंग, सामग्री और शैली, ठीक हों; लिखने से पहले रूपरेखा बने; और भाषा में छोटे पर जुड़े वाक्यों से प्रवाह हो।
वह कहता है कि शीर्षक या नाम रखना भी बहुत कठिन काम है। गार्डिनर यह काम मित्र पर छोड़ते थे, और शेक्सपीयर के एक नाटक का नाम ही जैसा तुम चाहो रखा गया।
लेखक कहता है कि मास्टर होने के कारण उसे आधे पन्ने के वाक्य लिखने चाहिए। वह सच में ऐसा नहीं मानता; वह कठिन भाषा को विद्वता मानने वाली सोच पर हँस रहा है।
Long answer questions (3)
इस निबंध में लेखक शुरू से अंत तक मैं बनकर बोलता है। वह अपनी कमज़ोरी खुलकर मानता है कि उसे भाव अपने-आप नहीं सूझते और मेहनत करनी पड़ती है। वह पाठक से प्रश्न भी पूछता है, जैसे कि क्या सब लेखक पहले रूपरेखा बनाते हैं। वह अपने ऊपर हँसता भी है, जैसे मास्टर होने के कारण आधे पन्ने के वाक्य लिखने की बात। नमिता और अमिता जैसे घर के प्रसंग निबंध को आत्मीय बनाते हैं। गार्डिनर और शेक्सपीयर जैसे उदाहरण बातचीत के बीच सहज रूप से आते हैं। इन सब कारणों से निबंध भाषण जैसा नहीं, एक मित्र की बातचीत जैसा लगता है।
पहला नियम है कि निबंध छोटा हो; लेखक हँसकर कहता है कि यह तो उसके लाभ का है। दूसरा नियम सामग्री और शैली का है। सामग्री के लिए अध्ययन-मनन चाहिए, पर लेखक के पास न समय है न विश्वकोश, इसलिए उसे अपने ज्ञान पर भरोसा करना पड़ता है। तीसरा नियम रूपरेखा का है; लेखक को लिखने से पहले सार बाँधना कठिन लगता है, और वह गार्डिनर की शीर्षक वाली कठिनाई याद करता है। चौथा नियम प्रवाह वाली भाषा का है; वह इसे ठीक मानता है, पर लंबे-उलझे वाक्यों की विद्वता पर व्यंग्य भी करता है। इस तरह वह हर नियम को अपने अनुभव पर परखता है।
पाठ बताता है कि अच्छे निबंध के लिए सामग्री और शैली दोनों चाहिए। सामग्री अचानक नहीं मिलती; वह रोज़ पढ़ने, देखने और सोचने से जमा होती है। लेखक को पछतावा है कि पहले पता होता तो वह पुस्तकालय में खोजबीन कर लेता। इसलिए हमें भी समाचार, किताबें और आसपास की घटनाएँ ध्यान से देखनी चाहिए। लिखने से पहले छोटी रूपरेखा, जैसे भूमिका, मुख्य बातें और निष्कर्ष, बनाने से निबंध बिखरता नहीं। भाषा सरल और छोटे जुड़े वाक्यों वाली हो, कठिन शब्दों का दिखावा न हो। परीक्षा में मैंने भी पाया है कि दो मिनट की रूपरेखा पूरा उत्तर साफ़ कर देती है।
Flashcards (17)
Play this topic
- नाम और पहचान
- नियम या उलझन
- सही या भ्रम
- निबंध में बातों का क्रम
- झटपट उत्तर
मॉन्टेन की राह और खुसरो का हल
लेखक मॉन्टेन की स्वच्छंद निबंध-पद्धति अपनाता है और अमीर खुसरो की तरह दोनों विषय एक ही निबंध में जोड़ देता है। दूर के ढोल से वह तरुणों और वृद्धों के असंतोष तक पहुँचता है, और वहाँ से कभी न ख़त्म होने वाले समाज-सुधार तक।
What you will be able to do
- मॉन्टेन की निबंध-पद्धति की विशेषताएँ बता सकूँगा।
- अमीर खुसरो की कहानी और उससे लेखक को मिला समाधान समझा सकूँगा।
- दूर के ढोल सुहावने होने का कारण निबंध के आधार पर लिख सकूँगा।
- तरुणों और वृद्धों के वर्तमान से असंतोष की तुलना कर सकूँगा।
- लेखक के अनुसार समाज-सुधार के कभी न रुकने का कारण समझा सकूँगा।
Key points
अंग्रेज़ी निबंधकारों ने आचार्यों से अलग एक स्वच्छंद पद्धति अपनाई, जिसके जन्मदाता मॉन्टेन माने जाते हैं।
मॉन्टेन ने जो देखा, सुना और अनुभव किया, वही अपने निबंधों में लिखा।
ऐसे निबंधों में न कवि की ऊँची कल्पना, न कथाकार की बारीक दृष्टि, न विद्वान का तर्क, बस लेखक का सच्चा अनुभव होता है।
अमीर खुसरो ने चार स्त्रियों की चार माँगें, खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल, एक ही पद्य में पूरी कर दीं।
इसी तरीक़े से लेखक दूर के ढोल और समाज-सुधार को एक ही निबंध में जोड़ देता है।
दूर के ढोल मीठे लगते हैं, क्योंकि उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती और सुनने वाला उसमें अपनी कल्पना भर देता है।
दूर रहने से यथार्थ की कठोरता नहीं दिखती; तरुणों को भविष्य और वृद्धों को अतीत सुहावना लगता है।
दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, इसलिए वर्तमान सदा सुधारों का काल बना रहता है।
बुद्ध से गांधी तक सुधारक हुए, पर न दोषों का अंत है न सुधारों का; कल के सुधार आज के दोष बन जाते हैं।
Full explanation
मॉन्टेन की स्वच्छंद राह
आचार्यों के नियमों में उलझकर लेखक पूछता है कि अब क्या किया जाए। तभी उसे अंग्रेज़ी निबंधकारों की एक दूसरी पद्धति याद आती है। उनके निबंध भले ही आचार्यों की कसौटी पर खरे न उतरें, पर अंग्रेज़ी साहित्य में उनका बहुत मान है। इस पद्धति के जन्मदाता मॉन्टेन माने जाते हैं।
मॉन्टेन ने स्वयं जो देखा, जो सुना और जो अनुभव किया, वही अपने निबंधों में लिख दिया। ऐसे निबंधों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे मन की स्वच्छंद रचनाएँ हैं। उनमें कवि की ऊँची उड़ान वाली कल्पना नहीं होती। उनमें कहानीकार की बारीक नज़र भी नहीं होती। विद्वानों का गंभीर तर्क-वितर्क भी नहीं होता। उनमें होता है लेखक का सच्चा अनुभव, उसके सच्चे भावों की सच्ची अभिव्यक्ति, और उसका उल्लास।
लेखक बताता है कि ऐसे निबंध उस मनःस्थिति में लिखे जाते हैं जिसमें न ज्ञान का बोझ होता है, न कल्पना की चमक। उस समय हम अपने में खो जाते हैं, संसार को अपनी आँख से देखते हैं और अपने ही भाव से ग्रहण करते हैं। लेखक को यह राह अपनी लगती है, क्योंकि इसमें किसी नियम की ज़रूरत नहीं, बस सच्चाई की ज़रूरत है। वह तय करता है कि वह भी इसी पद्धति से लिखेगा। पर एक समस्या अब भी बची है: निबंध एक नहीं, दो लिखने हैं।
अमीर खुसरो की कहानी और लेखक का हल
इस समस्या का हल लेखक को अमीर खुसरो की एक कहानी से मिलता है। एक बार खुसरो को प्यास लगी और वे एक कुएँ पर पहुँचे। वहाँ चार स्त्रियाँ पानी भर रही थीं। खुसरो ने पानी माँगा, तो उन्होंने शर्त रखी कि पहले कविता सुनाओ। एक ने खीर पर कविता माँगी, दूसरी ने चरखे पर, तीसरी ने कुत्ते पर और चौथी ने ढोल पर।
खुसरो प्रतिभाशाली थे। उन्होंने एक ही दोहे में चारों की माँग पूरी कर दी:
खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।
इसमें खीर भी है, चरखा भी, कुत्ता भी और ढोल भी, और साथ में हँसी भी। ऐसी बेमेल बातों को जोड़कर हँसाने वाली कविता को अनमेली कहते हैं।
लेखक विनम्रता से मानता है कि उसमें खुसरो जैसी प्रतिभा नहीं है। पर उनकी इस पद्धति को अपनाने से उसकी आधी कठिनाई दूर हो जाती है। वह तय करता है कि दोनों विषय, दूर के ढोल और समाज-सुधार, एक ही निबंध में जोड़ देगा। यह निबंध का सबसे चतुर मोड़ है। जो दो विषय अलग-अलग बहुत छोटे और बहुत बड़े लग रहे थे, वे मिलकर एक संतुलित निबंध बन जाते हैं।
दूर के ढोल सुहावने क्यों लगते हैं
अब लेखक सचमुच निबंध लिखना शुरू करता है, और यह हिस्सा पढ़ने में सबसे सुंदर है। वह कहता है कि दूर के ढोल इसलिए सुहावने लगते हैं क्योंकि उनकी कर्कशता, यानी कठोर तेज़ आवाज़, दूर तक नहीं पहुँचती। जिस समय ढोल के पास बैठे लोगों के कान फटे जा रहे होते हैं, उसी समय दूर किसी नदी के किनारे शाम को बैठे किसी व्यक्ति को वही आवाज़ मीठी लगती है।
उस आवाज़ को सुनकर दूर बैठा व्यक्ति अपने मन में चित्र बनाता है। वह किसी शादी के उत्सव की कल्पना करता है। वह सोचता है कि शोर से भरे घर के किसी कोने में एक शर्मीली नई दुल्हन बैठी होगी, जिसके मन में प्रेम, उल्लास, संकोच, डर और थोड़ी उदासी, सब एक साथ हैं। उसकी कल्पना के ये भाव ढोल की कठोर आवाज़ को भी मधुर बना देते हैं। लेखक कहता है कि ढोल की आवाज़ में आनंद का कलरव, उत्सव की ख़ुशी और प्रेम का संगीत, तीनों मिले रहते हैं। इसीलिए पास वालों को भी वह बहुत बुरी नहीं लगती, और दूर वालों को तो बहुत मीठी लगती है।
इस वर्णन में लेखक एक गहरी बात कह रहा है: किसी चीज़ का सुख उसकी आवाज़ में नहीं, सुनने वाले की कल्पना में भी होता है। दूरी हमें कठोरता से बचाती है और कल्पना को जगह देती है।
दूरी, कल्पना और यथार्थ
ढोल से लेखक जीवन की बात पर आता है। वह कहता है कि दूर रहने से हमें यथार्थ की कठोरता का अनुभव नहीं होता। जो युवा अभी संसार के जीवन-संघर्ष से दूर हैं, उन्हें दुनिया बहुत मनमोहक लगती है। वे आने वाले कल के सुंदर सपने देखते हैं।
इसी तरह जो लोग बूढ़े हो गए हैं, जो अपने बचपन और जवानी से बहुत दूर आ चुके हैं, उन्हें अपने बीते दिनों की याद बड़ी सुखद लगती है। वे अतीत के ही सपने देखते हैं। लेखक कहता है कि जैसे युवाओं के लिए भविष्य उजला होता है, वैसे ही बूढ़ों के लिए अतीत। दोनों ही अपने से दूर की चीज़ में सुख खोजते हैं, ठीक दूर के ढोल की तरह।
तरुण, वृद्ध और असंतुष्ट वर्तमान
यहाँ से निबंध दूसरे विषय की ओर बढ़ता है। लेखक कहता है कि तरुण और वृद्ध, दोनों को वर्तमान से असंतोष होता है, पर अलग-अलग कारणों से। तरुण भविष्य को अभी वर्तमान में ले आना चाहते हैं, इसलिए वे परिवर्तन और क्रांति के समर्थक होते हैं। वृद्ध अतीत को खींचकर वर्तमान में देखना चाहते हैं, इसलिए वे पुराने गौरव के रक्षक होते हैं।
इन दोनों के खिंचाव के कारण वर्तमान हमेशा अशांत रहता है। एक ओर बदलाव की माँग है, दूसरी ओर पुरानी बातों को बचाने की इच्छा। इसी कारण वर्तमान काल सदा सुधारों का काल बना रहता है। देखिए, कितनी सहजता से लेखक ने दूर के ढोल से समाज-सुधार तक का पुल बना दिया। यही खुसरो वाली पद्धति है, जिसमें दो अलग विषय एक धागे में पिरो दिए जाते हैं।
सुधार कभी ख़त्म क्यों नहीं होते
अंत में लेखक कहता है कि मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा समय नहीं आया जब सुधारों की ज़रूरत न पड़ी हो। भारत में बुद्ध, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी जैसे अनेक सुधारक हुए। पर सुधारकों की गिनती यहीं ख़त्म नहीं होती। हर नगर और हर गाँव में सुधारकों का दल होता है।
फिर भी सुधारों का अंत कभी नहीं हुआ। कारण यह है कि जीवन में नए-नए दोष पैदा होते रहते हैं और उनके लिए नए-नए सुधार होते रहते हैं। लेखक एक बहुत सोचने लायक बात कहता है: कल के सुधार ही आज के दोष बन जाते हैं, और अब उन सुधारों का फिर से सुधार किया जाता है। अर्थात समाज कभी एक जगह नहीं रुकता। इसीलिए जीवन को प्रगतिशील माना गया है।
इस तरह निबंध एक साथ दो काम करता है। वह निबंध लिखने की प्रक्रिया भी सिखाता है, और उसी के भीतर दो विषयों पर एक सुंदर निबंध लिखकर दिखा भी देता है।
Concepts and terms
मन की खुली रचना, जिसमें लेखक नियमों से बँधे बिना अपने देखे, सुने और अनुभव किए को लिखता है। मॉन्टेन इसके जन्मदाता माने जाते हैं।
हास्य से भरी काव्य-शैली जिसमें बेमेल बातें जोड़ी जाती हैं। खुसरो ने खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल को एक ही दोहे में जोड़कर चारों की माँग पूरी कर दी।
लोकोक्ति, जिसका अर्थ है कि दूर की चीज़ अच्छी लगती है, पर पास जाने पर उसकी असलियत पता चलती है। निबंध में लेखक इसका कारण भी बताता है।
तरुण भविष्य को अभी लाना चाहते हैं और वृद्ध अतीत को वापस। दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, और यही खिंचाव वर्तमान को सुधारों का काल बनाता है।
जीवन में नए दोष पैदा होते हैं और नए सुधार होते हैं। कल का सुधार आज दोष बन सकता है, इसलिए सुधार कभी ख़त्म नहीं होते। इसी से जीवन को प्रगतिशील कहा जाता है।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
एक कस्बे के स्कूल में पुराने ढंग से साल में एक बार बड़ी परीक्षा होती थी। नए प्रधानाचार्य ने हर महीने छोटे टेस्ट शुरू किए। युवा शिक्षकों ने इसका स्वागत किया, पर कुछ पुराने शिक्षकों को लगा कि पुरानी व्यवस्था ज़्यादा अच्छी थी। दो साल बाद छात्रों ने शिकायत की कि अब टेस्ट बहुत ज़्यादा हैं और पढ़ने का समय कम मिलता है। स्कूल ने फिर बदलाव किया और टेस्ट के साथ परियोजना-कार्य भी जोड़ दिया। एक शिक्षिका ने कहा कि सुधार कोई एक दिन का काम नहीं, यह चलता ही रहता है।
Activity:
अपने विद्यालय या मोहल्ले में हुए किसी बदलाव के बारे में पता कीजिए और लिखिए कि उस पर युवाओं और बड़ों की राय कैसी थी।
Analysis:
निबंध का विचार कि सुधार लगातार चलते हैं, किसी भी संस्था के इतिहास में दिख जाता है। हर सुधार कुछ समय बाद नई ज़रूरतों के सामने पुराना पड़ता है, और यही आगे बढ़ने का रास्ता है।
Did you know
मिशेल द मॉन्टेन सोलहवीं शताब्दी के फ़्रांसीसी लेखक थे। उनकी पुस्तक का नाम एसे था, यानी प्रयास, और यहीं से अंग्रेज़ी शब्द एसे निकला।
अमीर खुसरो तेरहवीं-चौदहवीं शताब्दी के कवि और संगीतकार थे। उन्होंने हिंदवी में पहेलियाँ, मुकरियाँ और अनमेलियाँ रचीं।
राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध आवाज़ उठाई और स्वामी दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना की। दोनों का नाम निबंध के सुधारकों में है।
Memory tricks
ढोल से सुधार तक: दू–क–त–वृ–सु — दूरी, कल्पना, तरुण, वृद्ध, सुधार। दूर का ढोल कल्पना जगाता है, तरुण आगे देखता है, वृद्ध पीछे, और बीच में सुधार चलता रहता है।
Practice MCQs with answers (25)
- A बाणभट्ट की लंबे वाक्यों की ओर
- B केवल तथ्यों की पद्धति की ओर
- C परीक्षा वाली पद्धति की ओर
- D मॉन्टेन की स्वच्छंद पद्धति की ओर
Show answer
Why:
अंग्रेज़ी निबंधकारों की पद्धति।
- A लेखक के सच्चे भाव और उसकी अनुभूति
- B लेखक का उल्लास
- C विद्वानों जैसा गंभीर तर्क-वितर्क
- D लेखक का अपना अनुभव
Show answer
Why:
उनमें केवल सच्ची अनुभूति होती है।
- A इसमें बहुत कठिन भाषा लिखनी होती है
- B इसमें नियम नहीं, केवल सच्चाई चाहिए
- C इसमें किसी अनुभव की ज़रूरत नहीं
- D इसमें केवल दूसरों के विचार लिखने होते हैं
Show answer
Why:
वह अपने अनुभव से लिख सकता है।
- A उसे एक नहीं, दो निबंध लिखने थे
- B उसे मॉन्टेन की भाषा समझ नहीं आई
- C उसके पास लिखने के लिए काग़ज़ नहीं था
- D नमिता ने विषय बदल दिया था
Show answer
Why:
इसी का हल खुसरो से मिला।
- A उनके घर का पूरा पता-ठिकाना
- B अलग-अलग विषयों पर कविता
- C कुछ पैसे
- D एक गीत की धुन
Show answer
Why:
खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल पर।
- A चार अलग-अलग लंबी कविताएँ सुनाकर
- B चारों को बारी-बारी से कहानियाँ सुनाकर
- C बिना कविता सुनाए वहाँ से चले जाकर
- D एक ही दोहे में चारों विषय जोड़कर
Show answer
Why:
यही उनकी प्रतिभा थी।
- A मुकरी
- B सोरठा
- C अनमेली
- D चौपाई
Show answer
Why:
बेमेल बातें जोड़कर हास्य।
- A दोनों विषय एक ही निबंध में जोड़ देना
- B दोनों विषयों पर कविता लिख देना
- C एक विषय छोड़कर केवल दूसरा लिखना
- D निबंध लिखने का काम किसी और को देना
Show answer
Why:
आधी कठिनाई दूर हो गई।
- A घमंड
- B आलस्य
- C विनम्रता
- D क्रोध
Show answer
Why:
वह फिर भी उनकी पद्धति अपनाता है।
- A दूर के ढोल अधिक महँगे होते हैं
- B उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती
- C दूर बजाने वाले अधिक कुशल होते हैं
- D रात में हवा आवाज़ को तेज़ कर देती है
Show answer
Why:
कठोरता रास्ते में रह जाती है।
- A उसकी अपनी कल्पना उसमें सुंदर भाव भर देती है
- B ढोल बजाने वाला उसके लिए धीरे बजाता है
- C उसके कान ठीक से सुन नहीं पाते
- D वह ढोल की आवाज़ पहचानता ही नहीं
Show answer
Why:
विवाह और नई दुल्हन की कल्पना।
- A आम के आम गुठलियों के दाम
- B जैसी करनी वैसी भरनी
- C अधजल गगरी छलकत जाए
- D दूर के ढोल सुहावने
Show answer
Why:
दूर से अच्छा, पास से कठोर।
- A उनके पास बहुत अधिक धन होता है
- B वे अभी जीवन-संघर्ष से दूर हैं
- C वे संसार को कभी देखते ही नहीं
- D उन्हें संसार की पूरी जानकारी होती है
Show answer
Why:
दूरी कठोरता छिपा लेती है।
- A दोनों अतीत के सपने देखते हैं
- B दोनों क्रांति के समर्थक होते हैं
- C दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं
- D दोनों वर्तमान से पूरी तरह संतुष्ट हैं
Show answer
Why:
कारण अलग, असंतोष एक।
- A वृद्ध — भविष्य को अभी लाने वाले
- B तरुण — अतीत-गौरव के संरक्षक
- C वृद्ध — क्रांति के समर्थक
- D तरुण — क्रांति के समर्थक
Show answer
Why:
वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक हैं।
- A वर्तमान सदा अशांत और सुधारों का काल बना रहता है
- B वर्तमान पूरी तरह शांत, स्थिर और संतुष्ट हो जाता है
- C वर्तमान में कोई भी बदलाव संभव नहीं रहता
- D वर्तमान का महत्त्व पूरी तरह ख़त्म हो जाता है
Show answer
Why:
यहीं से समाज-सुधार का विषय शुरू होता है।
- A ढोल बजाकर सुधार की घोषणा करने के विचार से
- B विवाह में होने वाले ख़र्च को रोकने के विचार से
- C दूरी में सुख और वर्तमान से असंतोष के विचार से
- D संगीत को सुधार का साधन बनाने के विचार से
Show answer
Why:
भविष्य और अतीत, दोनों दूर, दोनों सुहावने।
- A कबीर
- B तुलसीदास
- C नानक
- D दयानंद
Show answer
Why:
सूची में बुद्ध से गांधी तक नाम हैं।
- A नए दोष आते रहते हैं और उनके नए सुधार होते रहते हैं
- B सुधारक बहुत आलसी होते हैं और बीच में ही काम छोड़ देते हैं
- C लोग किसी भी सुधार को कभी नहीं मानते
- D सरकारें सुधारों पर रोक लगा देती हैं
Show answer
Why:
जीवन एक चलता हुआ क्रम है।
- A पुराने समय के सारे सुधारक असल में ग़लत, स्वार्थी और झूठे थे
- B कोई भी सुधार कभी करना ही नहीं चाहिए
- C आज के सारे दोष पुराने समय में भी थे
- D समय के साथ अच्छी चीज़ भी पुरानी पड़कर बदलनी पड़ती है
Show answer
Why:
समाज रुकता नहीं।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
असंतोष ही सुधार की माँग बनता है।
- A केवल I और III
- B केवल I और II
- C केवल II और III
- D I, II और III तीनों
Show answer
Why:
खुसरो ने एक ही दोहे में चारों जोड़े।
- A सही है, गांधी के बाद सुधार रुक गए
- B सही है, दोष कभी नए नहीं आते
- C ग़लत है, सुधार कभी हुए ही नहीं
- D ग़लत है, सुधार लगातार चलते हैं
Show answer
Why:
न दोषों का अंत, न सुधारों का।
- A इसमें केवल ढोल बनाने की पूरी विधि बताई गई है
- B इसमें आचार्यों के नियमों की सूची दी गई है
- C इसमें ध्वनि, कल्पना और भावों का जीवंत चित्र है
- D इसमें संस्कृत के लंबे श्लोक लिखे गए हैं
Show answer
Why:
नदी-तट, शाम और दुल्हन का चित्र।
- A कविता सिखाता है और साथ में नाटक भी लिखता है
- B लिखना सिखाता भी है और लिखकर दिखाता भी है
- C केवल व्याकरण सिखाता है और कुछ नहीं
- D केवल लेखक की जीवनी बताता है
Show answer
Why:
प्रक्रिया और उदाहरण दोनों।
Important short questions (7)
मॉन्टेन ने जो स्वयं देखा, सुना और अनुभव किया, वही लिखा। उनके निबंध मन की स्वच्छंद रचनाएँ हैं, जिनमें तर्क या कल्पना से अधिक लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास होता है।
प्यास लगने पर खुसरो कुएँ पर पहुँचे, जहाँ चार स्त्रियों ने खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल पर कविता माँगी। खुसरो ने एक ही दोहे में चारों को जोड़कर सबकी इच्छा पूरी कर दी।
खुसरो ने चार विषय एक दोहे में जोड़े थे। लेखक ने भी दूर के ढोल और समाज-सुधार, दोनों विषयों को एक ही निबंध में जोड़ दिया, जिससे उसकी आधी कठिनाई दूर हो गई।
दूर तक ढोल की कर्कशता नहीं पहुँचती। साथ ही वह आवाज़ सुनकर किसी विवाह और शर्मीली दुल्हन की कल्पना करता है, और ये भाव आवाज़ को मधुर बना देते हैं।
तरुण भविष्य को अभी वर्तमान में लाना चाहते हैं, इसलिए वर्तमान उन्हें धीमा लगता है। वृद्ध अतीत को वापस लाना चाहते हैं, इसलिए वर्तमान उन्हें बिगड़ा हुआ लगता है।
बुद्ध, महावीर स्वामी, कबीर, नानक और महात्मा गांधी। इनके अलावा नागार्जुन, शंकराचार्य, राजा राममोहन राय और स्वामी दयानंद के नाम भी हैं।
समय बदलने पर पुराना उपाय नई ज़रूरतों के लिए कम पड़ जाता है। जैसे कभी हाथ से चिट्ठी लिखना बड़ी सुविधा थी, पर आज तेज़ संदेश के युग में वही धीमा लगता है।
Long answer questions (3)
लेखक पहले बताता है कि दूर के ढोल इसलिए मीठे लगते हैं क्योंकि उनकी कर्कशता दूर तक नहीं पहुँचती। पास बैठे लोगों के कान फटते हैं, पर नदी किनारे शाम को बैठे व्यक्ति को वही आवाज़ मधुर लगती है। वह आवाज़ उसके मन में विवाह और एक शर्मीली दुल्हन का चित्र बनाती है, जिसके मन में प्रेम, संकोच और डर, सब हैं। इन भावों से कठोर आवाज़ भी मधुर हो जाती है। फिर लेखक इसे जीवन से जोड़ता है: दूरी यथार्थ की कठोरता छिपा लेती है, इसलिए युवाओं को भविष्य और वृद्धों को अतीत सुहावना लगता है। इस तरह एक छोटी लोकोक्ति जीवन के गहरे सत्य तक पहुँच जाती है।
लेखक खुसरो की पद्धति अपनाता है, जिन्होंने चार विषय एक दोहे में जोड़े थे। वह दूर के ढोल से शुरू करता है कि दूर की चीज़ सुहावनी लगती है। फिर कहता है कि युवाओं को दूर का भविष्य और वृद्धों को दूर का अतीत सुहावना लगता है। इसी कारण दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं; एक क्रांति चाहता है, दूसरा पुराना गौरव। इस खिंचाव से वर्तमान सदा सुधारों का काल बना रहता है। यहाँ से वह समाज-सुधार पर आता है और बताता है कि सुधार कभी ख़त्म नहीं होते। इस तरह दूरी, असंतोष और सुधार की कड़ी से दोनों विषय एक धागे में पिरो दिए गए हैं।
यह कथन बिल्कुल सही है। हर युग में कुछ बुराइयाँ होती हैं और कुछ लोग उन्हें बदलने के लिए उठते हैं। बुद्ध और महावीर ने कर्मकांड और हिंसा के विरुद्ध आवाज़ उठाई, कबीर और नानक ने भेदभाव के विरुद्ध, राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध, और गांधी ने छुआछूत और अन्याय के विरुद्ध। आज भी स्वच्छता, पर्यावरण, स्त्री-शिक्षा और दिव्यांगजनों के अधिकार जैसे क्षेत्रों में सुधार चल रहे हैं। समय के साथ नई समस्याएँ आती हैं, जैसे प्लास्टिक का कचरा या इंटरनेट पर झूठी ख़बरें, और उनके लिए नए सुधार चाहिए। इसलिए सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, और यही समाज को आगे ले जाती है।
Flashcards (17)
Play this topic
- किसकी क्या पहचान
- तरुण या वृद्ध
- सही या भ्रम
- निबंध के विचारों का क्रम
- झटपट उत्तर
निबंध की प्रक्रिया और भाषा की बात
निबंध लिखने के चरण, भाव-विस्तार, समास के छह भेद, उपसर्ग और प्रत्यय, लोकोक्ति और अनमेली। पाठ के ही शब्दों और वाक्यों से व्याकरण को समझना।
What you will be able to do
- निबंध लेखन के चरण क्रम से लिख सकूँगा।
- किसी सूक्ति या वाक्य का भाव-विस्तार कर सकूँगा।
- समास के छह भेद पहचानकर समास-विग्रह कर सकूँगा।
- उपसर्ग और प्रत्यय से नए शब्द बना सकूँगा।
- लोकोक्ति और मुहावरे का अंतर समझकर उनका प्रयोग कर सकूँगा।
Key points
निबंध लिखने के मुख्य चरण हैं: प्रेरणा, विषय चयन, सामग्री संग्रह, रूपरेखा, शैली निर्धारण, और लेखन व समापन।
भाव-विस्तार में किसी छोटे वाक्य के अर्थ को उदाहरण और तर्क के साथ फैलाकर लिखा जाता है।
समास में दो या अधिक शब्द मिलकर एक नया छोटा शब्द बनाते हैं; उसे फिर से तोड़ना समास-विग्रह है।
समास के छह भेद हैं: तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि, द्वंद्व और अव्ययीभाव।
तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान, द्वंद्व में दोनों पद प्रधान, और बहुव्रीहि में कोई तीसरा अर्थ प्रधान होता है।
उपसर्ग शब्द के आगे लगते हैं, जैसे दुर् + बोध = दुर्बोध; प्रत्यय पीछे लगते हैं, जैसे सुधार + क = सुधारक।
लोकोक्ति पूरा वाक्य होती है जिसमें लोक का अनुभव छिपा होता है, जैसे दूर के ढोल सुहावने।
मुहावरा वाक्यांश होता है जो वाक्य में घुलकर आता है, जबकि लोकोक्ति अपने-आप में पूरी बात कहती है।
पाठ में एक भाव के लिए कई शब्द आए हैं, जैसे विचार-मनन-चिंतन और सुहावने-मधुर-मनमोहक।
Full explanation
निबंध लिखने के चरण
निबंध का शाब्दिक अर्थ है अच्छी तरह बाँधना। यानी निबंध वह गद्य रचना है जिसमें लेखक किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार और भाव क्रम से, तर्क और भावना के साथ बाँधकर रखता है। क्या लिखूँ? पढ़कर हमने देखा कि लेखक भी इसी प्रक्रिया से गुज़रता है। इसे हम कुछ चरणों में बाँट सकते हैं।
पहला चरण है प्रेरणा, यानी लिखने की इच्छा या ज़रूरत। लेखक के लिए यह प्रेरणा नमिता और अमिता का आग्रह था। दूसरा चरण है विषय चयन। कभी विषय हमें दिया जाता है, जैसे परीक्षा में, और कभी हम ख़ुद चुनते हैं। तीसरा चरण है सामग्री संग्रह, जिसमें विचार, तथ्य और उदाहरण जुटाए जाते हैं। चौथा चरण है रूपरेखा निर्माण, यानी तय करना कि भूमिका में क्या होगा, बीच में कौन-सी बातें किस क्रम से आएँगी, और निष्कर्ष क्या होगा। पाँचवाँ चरण है शैली निर्धारण, यानी किस ढंग से लिखना है: वर्णन से, विचार से, या आत्मपरक बातचीत से। छठा और अंतिम चरण है लेखन और समापन।
ये चरण हर बार एक ही क्रम में चलें, ज़रूरी नहीं। लेखक ने ख़ुद माना कि उसे रूपरेखा पहले बनाना कठिन लगता है। फिर भी परीक्षा में इन चरणों का ध्यान रखने से निबंध साफ़ और पूरा बनता है।
भाव-विस्तार कैसे करें
भाव-विस्तार का अर्थ है किसी छोटे वाक्य में छिपे अर्थ को खोलकर, फैलाकर लिखना। पाठ में एक विचार है कि युवा बदलाव और क्रांति चाहते हैं, जबकि बुज़ुर्ग पुराने गौरव की रक्षा करते हैं। इसका विस्तार इस तरह हो सकता है: युवा पीढ़ी में ऊर्जा और उत्साह भरपूर होता है। उसे हर समस्या का तुरंत हल चाहिए, और वह पुराने तरीक़ों पर लंबी चर्चा के बजाय नया रास्ता अपनाना चाहती है। दूसरी ओर बड़ी उम्र के लोग अनुभव से सीखे हुए होते हैं। उन्हें परंपरा पर भरोसा होता है, क्योंकि उन्होंने उसे परखा है। इसलिए वे बदलाव से पहले सावधानी चाहते हैं।
भाव-विस्तार लिखते समय तीन बातें ध्यान रखिए। पहली, मूल वाक्य का अर्थ साफ़ शब्दों में बताइए। दूसरी, एक-दो उदाहरण या तर्क जोड़िए। तीसरी, अंत में उस विचार का महत्व या सीख लिखिए। पाठ के और वाक्य भी अभ्यास के लिए अच्छे हैं, जैसे यह कि आज के युवा ही कल बूढ़े होकर अतीत के सपने देखेंगे।
समास: छोटा करने की कला
समास का अर्थ है संक्षेप। जब दो या अधिक शब्द मिलकर एक नया छोटा शब्द बनाते हैं और बीच के जोड़ने वाले शब्द, जैसे का, के लिए, और, हट जाते हैं, तो उसे समास कहते हैं। पाठ में आए निबंध-रचना शब्द को देखिए। इसका अर्थ है निबंध की रचना, पर का हटाकर एक शब्द बन गया।
समास में पहले शब्द को पूर्वपद और दूसरे को उत्तरपद कहते हैं। जैसे गंगाजल में गंगा पूर्वपद है और जल उत्तरपद। मिलकर बना शब्द समस्तपद कहलाता है। और समस्तपद को फिर से खोलकर लिखना समास-विग्रह कहलाता है, जैसे गंगाजल = गंगा का जल।
समास के छह भेद
पहला है तत्पुरुष समास। इसमें उत्तरपद प्रधान होता है और बीच के कारक-चिह्न, जैसे का, के लिए, से, में, लुप्त हो जाते हैं। रसोईघर = रसोई के लिए घर; निबंधशास्त्र = निबंध का शास्त्र।
दूसरा है कर्मधारय समास। इसमें पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है, या दोनों में उपमा का संबंध होता है। नीलकमल = नीला है जो कमल। तीसरा है द्विगु समास। इसमें पूर्वपद संख्या बताता है और पूरा शब्द समूह का अर्थ देता है। तिरंगा = तीन रंगों का समूह; चौराहा = चार राहों का समूह।
चौथा है बहुव्रीहि समास। इसमें दोनों पद गौण होते हैं और मिलकर किसी तीसरे की ओर संकेत करते हैं। पीतांबर = पीला है अंबर जिसका, यानी श्रीकृष्ण। लंबोदर = लंबा है उदर जिसका, यानी गणेश।
पाँचवाँ है द्वंद्व समास। इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं और बीच का और, या जैसा शब्द हट जाता है। भाई-बहन = भाई और बहन; माता-पिता = माता और पिता। छठा है अव्ययीभाव समास। इसमें पूर्वपद अव्यय होता है और पूरा शब्द क्रिया-विशेषण की तरह काम करता है। यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार; प्रतिदिन = हर दिन। दोहराए हुए शब्द, जैसे धीरे-धीरे, जल्दी-जल्दी, भी अव्ययीभाव माने जाते हैं।
पहचानने का सरल तरीक़ा याद रखिए: संख्या से शुरू हो तो द्विगु, दोनों बराबर हों तो द्वंद्व, किसी तीसरे की ओर इशारा हो तो बहुव्रीहि।
उपसर्ग और प्रत्यय
पाठ में दुर्बोध शब्द आया है। यह बोध शब्द के आगे दुर् लगाकर बना है, जिसका अर्थ है जो कठिनाई से समझ में आए। इसी तरह अनादि शब्द आदि के आगे अन् लगाकर बना है, यानी जिसका आदि न हो। शब्द के आरंभ में लगकर उसका अर्थ बदलने वाले ऐसे छोटे अंशों को उपसर्ग कहते हैं। उपसर्ग का अपना स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता। कुछ और उदाहरण हैं: सु + मधुर = सुमधुर, अ + संतोष = असंतोष, प्र + गति = प्रगति।
अब सुधारक और कठिनाई शब्द देखिए। सुधार के अंत में क लगकर सुधारक बना, यानी सुधार करने वाला। कठिन के अंत में आई लगकर कठिनाई बनी। शब्द के अंत में लगकर नया शब्द बनाने वाले अंश प्रत्यय कहलाते हैं। मधुर से मधुरता, सुंदर से सुंदरता, समाज से सामाजिक, ये सब प्रत्यय से बने हैं। एक ही मूल शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय दोनों लगाकर कई शब्द बन सकते हैं, जैसे गति से प्रगति, प्रगतिशील।
लोकोक्ति, मुहावरा और अनमेली
दूर के ढोल सुहावने होते हैं एक लोकोक्ति है। लोकोक्ति लोक में प्रचलित ऐसा कथन है जिसमें लोगों का अनुभव और सीख छिपी होती है। यह अपने-आप में पूरा वाक्य होती है। इससे भाषा समृद्ध और असरदार बनती है। एक और लोकोक्ति है आम के आम गुठलियों के दाम, यानी एक काम से दोहरा लाभ। जैसे रसोई के कचरे से जैविक खाद बनाना: कचरा भी घटा और पौधों को खाद भी मिली।
मुहावरा लोकोक्ति से अलग है। मुहावरा वाक्यांश होता है, जो वाक्य में घुलकर आता है और उसका रूप बदलता है, जैसे दाँतों पसीना आना से दाँतों पसीना आ गया। लोकोक्ति प्रायः बिना बदले पूरी बोली जाती है।
खुसरो की खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल वाली पंक्तियाँ अनमेली कहलाती हैं। यह हास्य और व्यंग्य से भरी काव्य-शैली है, जिसमें बेमेल बातें जोड़कर हँसी पैदा की जाती है। खुसरो ने पहेलियाँ और मुकरियाँ भी रचीं, जिनसे वे आम लोगों का मन बहलाते थे।
एक भाव, कई शब्द
पाठ में एक ही भाव के लिए कई शब्दों का प्रयोग हुआ है। सोचने के भाव के लिए विचार, मनन और चिंतन आए हैं। अच्छा लगने के भाव के लिए सुहावने, मधुर और मनमोहक आए हैं। ऐसे शब्दों को पर्यायवाची कहते हैं। पर ध्यान दीजिए, हर पर्यायवाची हर जगह फिट नहीं होता। मनन गहरा और शांत सोचना है, जबकि चिंता में बेचैनी भी जुड़ जाती है। मधुर आवाज़ के लिए अच्छा लगता है, मनमोहक दृश्य के लिए। अच्छे लेखक की पहचान यही है कि वह सही जगह सही शब्द चुने। निबंध लिखते समय एक ही शब्द बार-बार दोहराने के बजाय उचित पर्यायवाची का प्रयोग भाषा को सुंदर बनाता है।
Concepts and terms
किसी छोटे वाक्य, सूक्ति या लोकोक्ति के अर्थ को अपने शब्दों, उदाहरणों और तर्क के साथ फैलाकर लिखना। जैसे तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं, इसका विस्तार युवाओं के उत्साह और जल्दी बदलाव की इच्छा के रूप में।
दो या अधिक शब्दों का ऐसा मेल जिससे एक नया छोटा शब्द बने। पहला शब्द पूर्वपद, दूसरा उत्तरपद, और बना हुआ शब्द समस्तपद कहलाता है।
समस्तपद को फिर से उसके हिस्सों में खोलकर लिखना। जैसे निबंधशास्त्र = निबंध का शास्त्र, या भाई-बहन = भाई और बहन।
उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं, जैसे अन् + आदि = अनादि। प्रत्यय अंत में जुड़ते हैं, जैसे कठिन + आई = कठिनाई।
लोगों में प्रचलित ऐसा कथन जिसमें अनुभव और सीख छिपी हो। यह पूरा वाक्य होती है और बात को असरदार बनाती है, जैसे आम के आम गुठलियों के दाम।
सावधान
भ्रम और सच
Did you know
समास शब्द का अर्थ ही संक्षेप है। समास से भाषा छोटी और कसी हुई बनती है, जैसे रसोई के लिए घर की जगह रसोईघर।
निबंध शब्द को तमिल में कट्टुरै और बांग्ला में प्रबंध कहा जाता है। उर्दू में इसके लिए मज़मून शब्द चलता है।
अमीर खुसरो ने पहेलियाँ और मुकरियाँ भी रचीं। मुकरी में बोलने वाला अपनी बात कहकर आख़िर में मुकर जाता है।
Memory tricks
समास के छह भेद: त–क–द्वि–ब–द्वं–अ — तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि, द्वंद्व, अव्ययीभाव। याद रखो: तक दो बड़े द्वंद्व अब।
निबंध के चरण: प्रे–वि–सा–रू–शै–ले — प्रेरणा, विषय, सामग्री, रूपरेखा, शैली, लेखन। प्रेम से विचार साधो, रूप सजाओ, फिर लिखो।
Practice MCQs with answers (25)
- A प्रेरणा, विषय, सामग्री, रूपरेखा, शैली, लेखन
- B लेखन, शैली, विषय, प्रेरणा, सामग्री, रूपरेखा
- C रूपरेखा, लेखन, प्रेरणा, सामग्री, विषय, शैली
- D शैली, सामग्री, लेखन, विषय, रूपरेखा, प्रेरणा
Show answer
Why:
प्रेरणा से शुरू, लेखन पर समाप्त।
- A समापन
- B प्रेरणा
- C शैली निर्धारण
- D रूपरेखा
Show answer
Why:
उसी से लिखने की ज़रूरत बनी।
- A पूरा वाक्य बिना बदले दो बार लिखना
- B कठिन शब्दों की लंबी सूची बनाना
- C सीधे अंतिम निष्कर्ष लिख देना
- D मूल वाक्य का अर्थ साफ़ शब्दों में बताना
Show answer
Why:
फिर उदाहरण और सीख।
- A विस्तार
- B विरोध
- C संक्षेप
- D विराम
Show answer
Why:
दो शब्दों से एक छोटा शब्द।
- A गंगा
- B जल
- C गंगाजल
- D का
Show answer
Why:
पहला शब्द पूर्वपद।
- A निबंध और शास्त्र
- B शास्त्र जैसा निबंध
- C निबंध है शास्त्र जिसका
- D निबंध का शास्त्र
Show answer
Why:
का लुप्त है, तत्पुरुष।
- A द्वंद्व
- B द्विगु
- C तत्पुरुष
- D बहुव्रीहि
Show answer
Why:
तिरंगा, चौराहा।
- A इसका पहला पद एक निश्चित संख्या बताता है
- B इसके दोनों पद बराबर रूप से प्रधान माने जाते हैं
- C इसका अर्थ किसी तीसरे, श्रीकृष्ण, की ओर जाता है
- D इसका पहला पद एक अव्यय है
Show answer
Why:
पीला है वस्त्र जिसका।
- A चौराहा — बहुव्रीहि
- B माता-पिता — द्वंद्व
- C प्रतिदिन — कर्मधारय
- D नीलकमल — द्विगु
Show answer
Why:
दोनों पद प्रधान, और लुप्त।
- A द्विगु
- B बहुव्रीहि
- C तत्पुरुष
- D अव्ययीभाव
Show answer
Why:
पुनरुक्त शब्द भी अव्ययीभाव।
- A पूर्वपद, रसोई
- B दोनों बराबर
- C उत्तरपद, घर
- D कोई तीसरा अर्थ
Show answer
Why:
तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान।
- A यह बहुव्रीहि है, अर्थ गणेश की ओर जाता है
- B यह द्वंद्व है, दोनों पद बराबर प्रधान हैं
- C यह अव्ययीभाव है, पहला पद अव्यय है
- D यह कर्मधारय है, पहला पद संख्या है
Show answer
Why:
लंबा है उदर जिसका।
- A बोध
- B ध
- C दु
- D दुर्
Show answer
Why:
दुर् + बोध।
- A जो बहुत नया हो
- B जिसका कोई आरंभ न हो
- C जो बहुत जल्दी ख़त्म हो
- D जो सबसे पहले हो
Show answer
Why:
अन् + आदि।
- A उपसर्ग शब्द के आगे, प्रत्यय पीछे लगता है
- B उपसर्ग शब्द के पीछे, प्रत्यय आगे लगता है
- C दोनों हमेशा शब्द के बीच में लगते हैं
- D दोनों का अपना स्वतंत्र अर्थ होता है
Show answer
Why:
सु-मधुर, मधुर-ता।
- A अकठिन
- B कठिनता
- C कठिनाई
- D सुकठिन
Show answer
Why:
आई प्रत्यय से भाववाचक संज्ञा।
- A संतोषी
- B असंतोष
- C संतुष्ट
- D संतोषता
Show answer
Why:
अ + संतोष।
- A सामाजिक
- B प्रगति
- C सुमधुर
- D असंतोष
Show answer
Why:
समाज + इक।
- A लोकोक्ति हमेशा कविता के रूप में ही आती है
- B मुहावरे का कोई अर्थ नहीं होता
- C दोनों में कोई भी अंतर नहीं होता
- D लोकोक्ति पूरा वाक्य है, मुहावरा वाक्यांश
Show answer
Why:
मुहावरा वाक्य में घुलकर रूप बदलता है।
- A दूर के ढोल सुहावने
- B नाच न जाने आँगन टेढ़ा
- C आम के आम गुठलियों के दाम
- D अब पछताए होत क्या
Show answer
Why:
एक काम, दोहरा लाभ।
- A विलोम
- B पर्यायवाची
- C तद्भव
- D अनेकार्थी
Show answer
Why:
एक भाव, कई शब्द।
- A मधुर
- B दोनों बिलकुल नहीं
- C मनमोहक
- D कर्कश
Show answer
Why:
मधुर अधिकतर आवाज़ के लिए।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- B अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- C अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
- D दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Show answer
Why:
रसोई के लिए घर से रसोईघर।
- A केवल I और III
- B केवल I और II
- C केवल II और III
- D I, II और III तीनों
Show answer
Why:
भाई-बहन द्वंद्व है।
- A युवाओं को हर पुरानी बात बहुत प्यारी लगती है
- B युवा ऊर्जा से भरे होते हैं और जल्दी बदलाव चाहते हैं
- C युवा कभी किसी बात पर राय नहीं रखते
- D युवाओं को केवल खेलने में रुचि होती है
Show answer
Why:
अर्थ और उदाहरण से विस्तार।
Important short questions (7)
प्रेरणा, विषय चयन, सामग्री संग्रह, रूपरेखा निर्माण, शैली निर्धारण, और अंत में लेखन व समापन।
दो शब्दों को मिलाकर छोटा शब्द बनाना समास है, जैसे गंगा का जल से गंगाजल। समस्तपद को फिर खोलना समास-विग्रह है, जैसे गंगाजल = गंगा का जल।
द्विगु में पहला पद संख्या बताता है, जैसे तिरंगा = तीन रंगों का समूह। द्वंद्व में दोनों पद प्रधान होते हैं और और लुप्त होता है, जैसे माता-पिता = माता और पिता।
अगर अर्थ केवल पीला वस्त्र हो, तो यह कर्मधारय है। अगर अर्थ पीले वस्त्र वाले, यानी श्रीकृष्ण हो, तो यह बहुव्रीहि है, क्योंकि अर्थ किसी तीसरे की ओर जाता है।
उपसर्ग से: दुर्बोध (दुर् + बोध), असंतोष (अ + संतोष)। प्रत्यय से: सुधारक (सुधार + क), मधुरता (मधुर + ता)।
सुमधुर (सु उपसर्ग), मधुरता (ता प्रत्यय) और मधुरिमा (इमा प्रत्यय)।
लोकोक्ति पूरा वाक्य होती है, जैसे दूर के ढोल सुहावने। मुहावरा वाक्यांश होता है जो वाक्य में घुलकर रूप बदलता है, जैसे दाँतों पसीना आना से दाँतों पसीना आ गया।
Long answer questions (3)
तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान होता है, जैसे रसोईघर = रसोई के लिए घर। कर्मधारय में पूर्वपद विशेषण और उत्तरपद विशेष्य होता है, जैसे नीलकमल = नीला है जो कमल। द्विगु में पूर्वपद संख्या बताता है, जैसे तिरंगा = तीन रंगों का समूह। बहुव्रीहि में दोनों पद गौण होकर किसी तीसरे की ओर संकेत करते हैं, जैसे पीतांबर = पीला है वस्त्र जिसका, अर्थात श्रीकृष्ण। द्वंद्व में दोनों पद प्रधान होते हैं, जैसे भाई-बहन = भाई और बहन। अव्ययीभाव में पूर्वपद अव्यय होता है और शब्द क्रिया-विशेषण की तरह आता है; उदाहरण यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार।
इस वाक्य का अर्थ है कि सोच उम्र के साथ बदलती है। आज का युवा भविष्य के सपनों से भरा है और हर पुरानी चीज़ बदल देना चाहता है। पर समय बीतने के साथ वही युवा अनुभव जुटाता है और बूढ़ा होता है। तब उसे अपनी जवानी के दिन, उस समय के गीत, खेल और लोग सबसे अच्छे लगने लगते हैं, और वह नए बदलावों को शंका से देखता है। हमारे दादा-दादी भी कभी युवा थे और नए विचार लाए थे। इससे सीख मिलती है कि हमें बड़ों की पुरानी यादों का सम्मान करना चाहिए, और बड़ों को भी युवाओं के सपनों को समझना चाहिए, क्योंकि यह चक्र सबके साथ चलता है।
पाठ में एक भाव के लिए कई शब्द आए हैं: विचार, मनन, चिंतन; सुहावने, मधुर, मनमोहक। ये पर्यायवाची लगते हैं, पर हर एक का अपना रंग है। मनन शांत गहरा सोचना है, चिंता में बेचैनी है। मधुर आवाज़ के लिए अच्छा है, मनमोहक दृश्य के लिए। लेखक ने समास, उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्दों, जैसे निबंधशास्त्र, दुर्बोध और सुधारक, से भाषा को कसा हुआ बनाया है। साथ ही वह व्यंग्य करता है कि कठिन शब्दों और गुत्थियों से भाषा अच्छी नहीं बनती। इसलिए अच्छी भाषा का रहस्य है सही जगह पर सही और सरल शब्द, जिससे अर्थ साफ़ पहुँचे और भाषा सुंदर भी लगे।
Flashcards (17)
Play this topic
- समस्तपद और समास
- उपसर्ग या प्रत्यय से बना
- सही या भ्रम
- निबंध लिखने के चरण
- झटपट उत्तर
Class 9 Hindi Chapter 2 — frequently asked questions
बख्शी जी का जन्म 1894 में खैरागढ़, छत्तीसगढ़ में हुआ। वे निबंधकार, आलोचक और कवि थे। पंच-पात्र और पद्म-वन उनके निबंध-संग्रह हैं। उन्होंने सरस्वती और छाया का संपादन किया।
टोपी टाँगने के लिए कोई भी खूँटी चल जाती है, असली चीज़ टोपी है। उसी तरह लिखते समय मन के भाव असली हैं, और विषय तो उन्हें प्रकट करने का सहारा भर है।
गार्डिनर के अनुसार लिखने की एक उमंग भरी अवस्था होती है। लेखक कहता है कि उसने ऐसी अवस्था कभी अनुभव नहीं की; उसे सोचकर, चिंता और मेहनत करके लिखना पड़ता है।
मॉन्टेन ने जो स्वयं देखा, सुना और अनुभव किया, वही लिखा। उनके निबंध मन की स्वच्छंद रचनाएँ हैं, जिनमें तर्क या कल्पना से अधिक लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास होता है।
प्यास लगने पर खुसरो कुएँ पर पहुँचे, जहाँ चार स्त्रियों ने खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल पर कविता माँगी। खुसरो ने एक ही दोहे में चारों को जोड़कर सबकी इच्छा पूरी कर दी।
खुसरो ने चार विषय एक दोहे में जोड़े थे। लेखक ने भी दूर के ढोल और समाज-सुधार, दोनों विषयों को एक ही निबंध में जोड़ दिया, जिससे उसकी आधी कठिनाई दूर हो गई।
प्रेरणा, विषय चयन, सामग्री संग्रह, रूपरेखा निर्माण, शैली निर्धारण, और अंत में लेखन व समापन।
दो शब्दों को मिलाकर छोटा शब्द बनाना समास है, जैसे गंगा का जल से गंगाजल। समस्तपद को फिर खोलना समास-विग्रह है, जैसे गंगाजल = गंगा का जल।
द्विगु में पहला पद संख्या बताता है, जैसे तिरंगा = तीन रंगों का समूह। द्वंद्व में दोनों पद प्रधान होते हैं और और लुप्त होता है, जैसे माता-पिता = माता और पिता।
All Class 9 Hindi chapters
All Hindi chapters · Every Class 9 subject · The whole NCERT library
Study this chapter properly, free
Everything above is on this page to read. In the Veda app the same chapter becomes spaced-repetition flashcards, timed tests that mark themselves, Veda Bites you can swipe, and games — with your progress tracked topic by topic.
Get Veda free