Class 6 Hindi Chapter 7: जलाते चलो
- 3 topics
- 60 MCQs
- 18 short answers
- 9 long answers
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- 15 games
- ~86 min read
- Hindi
कविता के पाँच बंद
एक दीया, एक तूफ़ान और एक भरोसा — पाँच बंदों में कवि जो कहते हैं, और हर बंद के अंत में जो आशा रखते हैं।
What you will be able to do
- पाँचों बंदों का भाव क्रम से अपने शब्दों में बताना
- यह समझाना कि कवि किन दीयों को जलाने और किन्हें बुझाने को कहते हैं
- बुझ चुके दीयों के बारे में कवि की सोच बताना
- हर बंद के अंत में रखी गई आशा को पहचानना
Key points
पहला बंद कहता है कि अपनेपन से भरे दीये जलाते चलो, तो एक दिन धरती का अँधेरा मिटेगा।
दूसरा बंद मानता है कि विज्ञान में अमावस को पूर्णिमा जैसा बना देने की शक्ति है।
फिर भी कवि दुखी हैं कि दिन के उजाले में ही दुनिया पर अँधेरा-सा घिरता जा रहा है।
जो दीये बिना स्नेह के जल रहे हैं, उन्हें कवि बुझा देने को कहते हैं, क्योंकि उनसे रास्ता नहीं मिलता।
तीसरा बंद याद दिलाता है कि पहला दीप मनुष्य ने ही जलाया और अँधेरे की चुनौती पहली बार उसी ने स्वीकार की।
तिमिर की नदी पार करने के लिए उसने दीये की नाव बनाई, जिसे बहाते रहने को कहा गया है।
चौथा बंद कहता है कि तूफ़ान ने युगों से अनगिनत दीये बुझाए, पर जो बुझते हुए ज्योति दे गए, उन्हीं से उजाला मिलेगा।
पाँचवाँ बंद कहता है कि धरती पर एक दिया भी बचा रहे, तो कभी न कभी रात को सवेरा मिलेगा।
Full explanation
कविता की बनावट
यह कविता पाँच बंदों में चलती है। हर बंद की पंक्तियाँ एक ही लय में आती हैं। हर बंद के अंत में एक ऐसी पंक्ति है जो कोई न कोई भरोसा दे जाती है। इसी दोहराव से कविता का ढाँचा बन जाता है, और पढ़ने वाला हर बार उसी भरोसे पर आकर रुकता है।
पहला बंद
“जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।”
उसका भाव
कवि कहते हैं कि दीये जलाते रहो, पर स्नेह भरकर। ‘स्नेह’ का अर्थ तेल भी है और प्रेम भी, इसलिए बात दोनों की है। भरोसा यह है कि धरती का अँधेरा एक दिन मिटेगा ही। ध्यान दीजिए कि कवि समय नहीं बताते; वे केवल इतना कहते हैं कि कभी न कभी ऐसा होगा।
दूसरा बंद
“भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी, मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।”
विज्ञान के बाद भी अँधेरा
कवि विज्ञान की शक्ति मानते हैं। उसमें इतना बल है कि वह बिना चाँद वाली रात को पूरे चाँद जैसी बना दे। फिर भी उनका प्रश्न यह है कि इतनी रोशनी के बाद दिन में ही अँधेरा-सा क्यों घिरता जा रहा है।
कौन-से दीये बुझाएँ
इसी बंद में वे कहते हैं कि जो विद्युत-दिये बिना स्नेह के जल रहे हैं, उन्हें बुझा दो, क्योंकि उनसे रास्ता नहीं मिलेगा। भाव यह है कि जो रोशनी अपनेपन से नहीं आती, वह किसी का पथ नहीं बनाती। चमक और उजाला दो अलग बातें हैं, और कवि दूसरी वाली माँग रहे हैं।
तीसरा बंद
“जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी, तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं ने बना दीप की नाव तैयार की थी।”
यह किससे कहा गया है
यह मनुष्य से कहा गया है। कवि उसे उसकी पुरानी जीत याद दिलाते हैं। अँधेरे को चुनौती देने वाला पहला दीप उसी ने जलाया था। अँधेरे की नदी पार करने के लिए नाव भी उसी ने बनाई थी।
नाव बहाते चलो
इसीलिए वे कहते हैं कि उस नाव को निरंतर बहाते चलो, तो कभी न कभी अँधेरे का किनारा भी मिलेगा। यानी कोशिश रुकनी नहीं चाहिए। कवि नाव किनारे लगने का समय नहीं बताते, वे केवल चलते रहने को कहते हैं।
चौथा बंद
“युगों से तुम्हीं ने तिमिर की शिला पर दिये अनगिनत हैं निरंतर जलाए, समय साक्षी है कि जलते हुए दीप अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।”
हार भी और जीत भी
कवि यहाँ एक कड़वी बात मान लेते हैं। तूफ़ान ने युगों से अनगिनत दीये बुझाए हैं, और इतिहास इसका गवाह है। पर वे तुरंत जोड़ देते हैं कि जो दीये बुझते हुए भी अपनी ज्योति दे गए, उन्हीं से अँधेरे को उजाला मिलेगा। यानी हार और जीत, दोनों एक ही बंद में रख दी गई हैं।
पाँचवाँ बंद
“दिये और तूफ़ान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी, जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी।”
अंतिम शर्त
कवि मानते हैं कि यह लड़ाई कभी खत्म नहीं होगी। पर जो पहली लौ जली थी, वह सोने की तरह आज भी जल रही है। अंत में वे केवल एक शर्त रखते हैं — धरती पर एक दिया भी बचा रहे, तो कभी न कभी रात को सवेरा मिल जाएगा।
पूरी कविता एक नज़र में
कविता किसी चमत्कार का वादा नहीं करती। वह मानती है कि अँधेरा कठोर है, तूफ़ान बलवान है, और बहुत दीये बुझ चुके हैं। फिर भी उसका पूरा भरोसा एक बचे हुए दीये पर टिका है, और यही इसे आशा की कविता बनाता है। जब तक एक भी भला प्रयास बाकी है, तब तक हार मान लेने का कोई कारण नहीं बनता।
Concepts and terms
इस कविता में इस शब्द के दो अर्थ एक साथ चलते हैं। दीये में पड़ने वाला तेल भी स्नेह कहलाता है, और मन का प्रेम भी। इसी दोहरे अर्थ से पहली पंक्ति गहरी हो जाती है।
गहरा अँधेरा। कविता में यह केवल रात का अँधेरा नहीं, बल्कि दुनिया की समस्याओं, दुख और अज्ञान का नाम है, इसलिए उससे लड़ने की बात बार-बार आती है।
बिजली से जलने वाले उपकरण, जैसे बल्ब। कवि उनके विरोधी नहीं हैं, पर वे उन्हें बुझाने को कहते हैं जो बिना अपनेपन के, केवल दिखावे के लिए जल रहे हों।
नदी। कवि अँधेरे को नदी कहते हैं, जिसे पार करना पड़ता है, और दीये को उस नदी में चलने वाली नाव, जिसे रुकने नहीं देना है।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा ने पाँचों बंद पढ़े और एक बात देखी। हर बंद के अंत में वही पंक्ति लौटकर आती है। रोहित ने पूछा कि एक ही बात पाँच बार क्यों कही गई। सना ने कहा कि हर बार उससे पहले की बात बदल जाती है। कभी तूफ़ान आता है और कभी अँधेरा गहरा जाता है। लौटती पंक्ति हर बार नई कठिनाई का उत्तर बनती है। अध्यापिका ने कक्षा से पाँचों बंद बारी-बारी बुलवाए। एक बच्चा कठिनाई बोलता और पूरी कक्षा लौटती पंक्ति बोलती। तब बच्चों को समझ आया कि दोहराव कमज़ोरी नहीं, ज़िद है।
Analysis:
लौटती पंक्ति हर बार वही रहती है, पर उसके सामने खड़ी कठिनाई बदलती जाती है। इसी से वह हर बार नई सुनाई देती है।
Activity:
अपनी कोई एक पंक्ति चुनो। उसके पहले तीन अलग कठिनाइयाँ लिखकर तीन बंद बनाओ।
घर पर करके देखो
Title:
एक दीये जितना काम
Safety:
यह काम केवल लिखने का है; कोई ऐसा काम मत चुनो जिसमें आग या बिजली हो।
What You Notice:
छोटे-छोटे काम जुड़कर एक सप्ताह में अच्छी-खासी सूची बन जाते हैं। कविता का दीया इसी छोटे काम का दूसरा नाम है।
Did you know
‘स्नेह’ शब्द का अर्थ तेल भी होता है और प्रेम भी, इसलिए ‘स्नेह भर-भर’ में दोनों बातें एक साथ कही जा रही हैं।
कवि विज्ञान को नकारते नहीं; वे मानते हैं कि उसमें अमावस को पूर्णिमा जैसा बनाने की शक्ति है।
कविता में अँधेरे को कभी पत्थर कहा गया है और कभी नदी, यानी वह कठोर भी है और गहरा भी।
Memory tricks
पाँचों बंदों का क्रम — जलाओ-बुझाओ-बहाओ-ज्योति-एक दिया — जलाते चलो, बिना स्नेह वाले बुझाओ, नाव बहाओ, बुझकर भी ज्योति, और अंत में एक दिया।
हर बंद का अंत — मिटेगा-सकेगा-मिलेगा-मिलेगा-मिलेगा — हर बंद किसी न किसी भरोसे पर जाकर रुकता है।
Practice MCQs with answers (20)
- A तीन
- B पाँच
- C सात
- D नौ
Show answer
Why:
हर बंद के अंत में एक आशा वाली पंक्ति है।
- A पानी और आग
- B मिट्टी और तेल
- C आग और प्रेम
- D तेल और प्रेम
Show answer
Why:
दीये में तेल पड़ता है और मन में प्रेम।
- A स्नेह भरकर दीये जलाते चलने को
- B चुपचाप अँधेरे में बैठे रह जाने को
- C तूफ़ान से बचने को
- D नई बत्तियाँ लगाने को
Show answer
Why:
भरोसा यह है कि अँधेरा एक दिन मिटेगा।
- A आकाश
- B समुद्र
- C धरती
- D पर्वत
Show answer
Why:
उसी का अँधेरा मिटाने की बात है।
- A वह बिलकुल व्यर्थ है
- B वह केवल हानि करता है
- C उसमें बड़ी शक्ति है
- D वह अँधेरा बढ़ाता है
Show answer
Why:
वह अमावस को पूर्णिमा जैसा बना सकता है।
- A बिजली बहुत महँगी है
- B दिन में ही अँधेरा घिर रहा है
- C दीपक बनने बंद हो गए
- D लोग अब रात को जागते ही नहीं हैं
Show answer
Why:
इतनी रोशनी के बाद भी यह हो रहा है।
- A मिट्टी के दीपक
- B मोम से बनी हुई लंबी बत्तियाँ
- C आकाश के तारे
- D बिजली से जलने वाले उपकरण
Show answer
Why:
बल्ब जैसे उपकरण इसी में आते हैं।
- A जो बिना स्नेह के जल रहे हैं
- B जो बहुत पुराने हो गए हैं
- C जो हवा में काँप रहे हैं
- D जो बहुत छोटे हैं
Show answer
Why:
उनसे रास्ता नहीं मिल सकेगा।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही कवि की कसौटी है। दीये का काम चमकना नहीं, पथ दिखाना है।
- A तूफ़ान से
- B दीपकों से
- C मनुष्य से
- D तिमिर से
Show answer
Why:
कवि मनुष्य को उसकी पहली जीत याद दिला रहे हैं।
- A पर्वत
- B नदी
- C जंगल
- D रास्ता
Show answer
Why:
अँधेरे को यहाँ नदी कहा गया है।
- A मछली पकड़ने के लिए
- B किसी दूर की यात्रा पर जाने के लिए
- C सामान ढोने के लिए
- D अँधेरे की नदी पार करने के लिए
Show answer
Why:
उसे निरंतर बहाते रहने को कहा गया है।
- A नई नाव
- B और दीये
- C बहुत-सा धन और सोना
- D तिमिर का किनारा
Show answer
Why:
यानी कठिनाइयों से एक दिन छुटकारा मिलेगा।
- A कि अँधेरा पत्थर की तरह कठोर और भारी है
- B कि अँधेरा बहुत ही हल्का और पतला-सा ही है
- C कि अँधेरा देखने में बड़ा सुंदर लगता है
- D कि अँधेरा अपने आप जल्दी हट जाता है
Show answer
Why:
शिला का अर्थ चट्टान है। कवि अँधेरे को ऐसी चट्टान कहते हैं जिसे तोड़े बिना रास्ता नहीं बनता।
- A बहुत सारी नई नावें बनाईं
- B अँधेरा बढ़ाया
- C अनगिनत दीये बुझाए
- D नदी सुखा दी
Show answer
Why:
कवि कहते हैं कि समय इसका गवाह है।
- A समय बहुत तेज़ है
- B यह बात इतिहास से सिद्ध है
- C समय रुक गया है
- D समय का पता नहीं चलता
Show answer
Why:
‘साक्षी’ का अर्थ गवाह होता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: कवि विज्ञान में बड़ी शक्ति मानते हैं; उनकी चिंता उसके बिना स्नेह जलने पर है।
- A चाँद से
- B सोने से
- C सूरज से
- D तारे से
Show answer
Why:
वह आज भी जल रही है और जलती रहेगी।
- A वह खत्म हो चुकी है
- B वह कभी थी ही नहीं
- C वह अभी शुरू हुई है
- D वह चलती रहेगी
Show answer
Why:
यह लड़ाई सदा से चली आ रही है।
- A धरती पर एक दिया भी बचा रहे
- B तूफ़ान रुक जाए
- C सब लोग मिलकर एक साथ खड़े हो जाएँ
- D आकाश साफ़ हो जाए
Show answer
Why:
तभी निशा को सवेरा मिलेगा।
Important short questions (6)
कवि कहते हैं कि दीये जलाते चलो, पर उनमें स्नेह भरकर। स्नेह का अर्थ तेल भी है और प्रेम भी। उनका भरोसा है कि ऐसा करते रहने से धरती का अँधेरा एक दिन मिटेगा ही।
वे मानते हैं कि विज्ञान बिना चाँद वाली रात को पूरे चाँद जैसी बना सकता है। पर उनका दुख दूसरा है। इतनी रोशनी के बाद भी दुनिया पर दिन में ही अँधेरा-सा घिरता जा रहा है।
वे उन विद्युत-दीयों को बुझाने के लिए कहते हैं जो बिना स्नेह के जल रहे हैं। उनका भाव यह है कि जो रोशनी अपनेपन से नहीं आती, वह किसी का रास्ता नहीं बनाती। वह कितनी ही तेज़ क्यों न हो।
वे याद दिलाते हैं कि पहला दीप मनुष्य ने ही जलाया था। अँधेरे को चुनौती भी पहली बार उसी ने दी थी। नदी पार करने के लिए नाव भी उसी ने बनाई थी, इसलिए अब रुकना ठीक नहीं।
वे मानते हैं कि तूफ़ान ने युगों से अनगिनत दीये बुझाए हैं। पर जो दीये बुझते हुए भी अपनी ज्योति दे गए, उन्हीं से अँधेरे को उजाला मिलेगा। इसलिए उनका बुझना व्यर्थ नहीं गया।
कवि कहते हैं कि धरती पर एक दिया भी बचा रहे, तो कभी न कभी रात को सवेरा मिल ही जाएगा। इसका भाव यह है कि एक भला व्यक्ति भी बचा रहे तो आशा नहीं टूटती।
Long answer questions (3)
पहला बंद कहता है कि स्नेह भरकर दीये जलाते चलो। स्नेह का अर्थ तेल भी है और प्रेम भी। भरोसा यह है कि धरती का अँधेरा एक दिन मिटेगा। दूसरा बंद विज्ञान की शक्ति मानता है, जो बिना चाँद वाली रात को पूरे चाँद जैसी बना सकती है। पर कवि पूछते हैं कि फिर दिन में ही अँधेरा क्यों घिर रहा है। इसी बंद में वे कहते हैं कि बिना स्नेह जलते दीये बुझा दो, क्योंकि उनसे पथ नहीं मिलता। तीसरा बंद मनुष्य को याद दिलाता है कि पहला दीप उसी ने जलाया था और नाव भी उसी ने बनाई थी। इसलिए उस नाव को बहाते रहो, किनारा मिलेगा।
चौथा बंद एक कड़वी बात से शुरू होता है। कवि मानते हैं कि मनुष्य ने युगों से अँधेरे की कठोर शिला पर अनगिनत दीये जलाए। पर तूफ़ान ने उन्हें बुझा भी दिया, और समय इसका गवाह है। फिर वे तुरंत जोड़ते हैं कि जो दीये बुझते हुए भी ज्योति दे गए, उन्हीं से उजाला मिलेगा। पाँचवाँ बंद कहता है कि यह लड़ाई सदा से चली आ रही है। वह आगे भी चलती रहेगी। पर जो पहली लौ जली थी, वह सोने की तरह आज भी जल रही है। अंत में कवि केवल एक शर्त रखते हैं। धरती पर एक दिया भी बचा रहे, तो रात को सवेरा मिलेगा।
कविता कठिनाइयों को छिपाती नहीं। वह मानती है कि अँधेरा पत्थर जैसा कठोर है और नदी जैसा गहरा भी। वह यह भी मान लेती है कि तूफ़ान ने अनगिनत दीये बुझाए हैं। फिर भी हर बंद के अंत में एक भरोसा रखा गया है। पहले बंद में अँधेरा मिटने का, तीसरे में किनारा मिलने का। चौथे में उजाला मिलने का, और पाँचवें में सवेरा मिलने का। सबसे बड़ी बात अंतिम शर्त है। वहाँ कवि पूरी आशा एक बचे हुए दीये पर टिका देते हैं। यानी जब तक एक भी भला प्रयास बाकी है, हार मानने का कारण नहीं। इसीलिए यह आशा जगाने वाली कविता कहलाती है।
Flashcards (15)
Play this topic
- बंदों का क्रम जमाओ
- शब्द और अर्थ
- जलाने वाला या बुझाने वाला?
- सच या भ्रम
- झटपट उत्तर
प्रतीक, शब्द और कविता की रचना
निशा और सवेरा किसके नाम हैं, एक ही शब्द के दो-दो रूप, सा/सी/से का काम, और वह लय जिससे यह कविता चलती है।
What you will be able to do
- कविता के शब्दों को अँधेरे और उजाले के दो समूहों में बाँटना
- निशा और सवेरा का प्रतीकार्थ समझाना
- एक ही शब्द के दो-दो रूप पहचानना और उनका कारण बताना
- सा, सी और से के प्रयोग तथा कविता की लय की विशेषता बताना
Key points
कविता में निशा का सीधा अर्थ रात है, पर यहाँ वह दुख, कठिनाई और अज्ञान की प्रतीक है।
सवेरे का सीधा अर्थ सुबह है, पर यहाँ वह सुख, उजाले और भलाई का प्रतीक है।
अँधेरे की ओर के शब्द हैं तिमिर, अमावस, निशा, तूफ़ान, शिला और बुझना।
उजाले की ओर के शब्द हैं दिये, ज्योति, लौ, पूर्णिमा, स्वर्ण, सवेरा और जलना।
एक ही शब्द के दो रूप कविता में मिलते हैं — दिया और दीप, उजेला और उजाला, अनगिन और अनगिनत, अमावस और अमावस्या।
‘सा’, ‘सी’ और ‘से’ समानता दिखाने के लिए आते हैं, और उनसे पहले योजक चिह्न लगता है।
कविता की हर पंक्ति को बोलने या गाने में लगभग समान समय लगता है, जिससे वह अधिक प्रभावशाली बनती है।
कविता की पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बाँटी गई हैं।
Full explanation
प्रतीक क्या होता है
कुछ शब्द अपने सीधे अर्थ पर नहीं रुकते, वे कोई बड़ी बात भी कह जाते हैं। ऐसे शब्दों को प्रतीक कहते हैं। इस कविता का अर्थ केवल शब्दकोश से नहीं खुलता, क्योंकि उसके मुख्य शब्द प्रतीक ही हैं।
निशा और सवेरा
निशा का सीधा अर्थ रात है और सवेरे का सुबह। पर यहाँ कवि दिन-रात की बात नहीं कर रहे। निशा दुख, कठिनाई और अज्ञान की प्रतीक है, और सवेरा सुख, उजाले और भलाई का।
दो समूह
इसी कारण कविता के शब्दों को दो समूहों में बाँटा जा सकता है। एक ओर हैं तिमिर, अमावस, निशा, तूफ़ान, शिला और बुझना। दूसरी ओर हैं दिये, ज्योति, लौ, पूर्णिमा, स्वर्ण, सवेरा और जलना।
समूह बनाने का लाभ
यह बँटवारा करते ही कविता खुल जाती है। पहला समूह हर उस चीज़ का नाम है जो रास्ता रोकती है, और दूसरा हर उस चीज़ का जो रास्ता दिखाती है। पूरी कविता इन्हीं दो पक्षों की लड़ाई है। इसीलिए कविता पढ़ते समय यह देखते चलना चाहिए कि कौन-सा शब्द किस पक्ष का है।
एक शब्द, दो रूप
कविता में कुछ शब्द दो-दो रूपों में मिलते हैं। ‘दिया’ के साथ ‘दीप’ आता है, ‘उजाला’ के साथ ‘उजेला’, ‘अनगिनत’ के साथ ‘अनगिन’, और ‘अमावस्या’ के साथ ‘अमावस’।
ऐसा होता क्यों है
इन दोनों रूपों का अर्थ एक ही रहता है, बस लिखने-बोलने में थोड़ा अंतर आ जाता है। कविता बोलकर भी चलती है, और बोलने में शब्द थोड़े छोटे या सरल हो जाते हैं। कवि वही रूप चुनते हैं जो लय में ठीक बैठे। इससे यह भी पता चलता है कि कविता में शब्द केवल अर्थ के लिए नहीं, चाल के लिए भी चुने जाते हैं।
शब्द बदलने से अर्थ बदलता है
पाठ एक सुंदर प्रयोग कराता है। ‘जलाते चलो’ में ‘चलो’ की जगह ‘रहो’ रखकर पढ़िए। पंक्ति गलत नहीं होती, पर उसमें से आगे बढ़ते रहने का भाव निकल जाता है। ‘चलो’ में गति है, ‘रहो’ में केवल ठहराव।
ठीक शब्द चुनना
इसी तरह नाव के लिए नैया, नाव और नौका, तीनों चल सकते थे। किनारे के लिए तट, तीर और किनारा। कवि ने वही चुना जो लय में भी बैठे और भाव में भी। यही शब्द-चयन कहलाता है। एक ही अर्थ वाले कई शब्दों में से ठीक शब्द छाँट लेना कविता लिखने का सबसे कठिन हिस्सा माना जाता है।
सा, सी और से
कविता में ‘अमावस निशा-सी’ और ‘स्वर्ण-सी’ आया है। यहाँ ‘सी’ समानता दिखाने के लिए है — अँधेरा अमावस की रात जैसा, और लौ सोने जैसी।
योजक चिह्न का नियम
जब ‘सा’, ‘सी’ या ‘से’ इस तरह समानता के लिए आएँ, तब उनसे पहले योजक चिह्न लगाया जाता है। इसीलिए कविता में ‘निशा-सी’ और ‘स्वर्ण-सी’ लिखा मिलता है।
कविता की लय
अब रचना की सबसे बड़ी विशेषता। कविता की किसी भी दो पंक्तियों को गाकर देखिए, दोनों में लगभग बराबर समय लगेगा। हाथ से ताल देकर पढ़ने पर यह और साफ़ हो जाता है।
लय का लाभ
इसी समानता के कारण कविता अधिक प्रभावशाली बनती है। वह गाई जा सकती है, जल्दी याद हो जाती है, और उसका भाव सुनने वाले तक सीधा पहुँचता है।
पंक्तियों की बनावट
कविता की पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बाँटी गई हैं। हर बंद के अंत में दो पंक्तियाँ ऐसी आती हैं जो कोई भरोसा दे जाती हैं, और वहीं बंद रुक जाता है।
पंक्ति को वाक्य बनाना
कविता में शब्दों का क्रम बदला हुआ होता है, क्योंकि लय सँभालनी होती है। उसी क्रम को सीधा कर देने पर सरल वाक्य बन जाता है। जैसे ‘बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर’ को सीधा करके लिखें तो बनता है — तुम वह नाव निरंतर बहाते चलो। इससे पंक्ति का अर्थ पकड़ना आसान हो जाता है।
Concepts and terms
वह शब्द जो अपने सीधे अर्थ के अलावा कोई बड़ी बात भी कहे। इस कविता में दीया, तूफ़ान, निशा और सवेरा — चारों प्रतीक हैं, इसलिए कविता का अर्थ शब्दकोश से नहीं खुलता।
पंक्तियों की वह चाल जिससे उन्हें गाया जा सके। यहाँ हर पंक्ति को बोलने में लगभग समान समय लगता है, इसलिए कविता पढ़ते ही मन में बैठ जाती है।
दो शब्दों को जोड़ने वाली छोटी रेखा। जब ‘सा’, ‘सी’ या ‘से’ समानता दिखाने के लिए आते हैं, तब उनसे पहले यही चिह्न लगता है, जैसे निशा-सी।
कविता में हर शब्द सोच-समझकर चुना जाता है। एक ही अर्थ वाले कई शब्दों में से कवि वही चुनते हैं जो लय और भाव, दोनों में ठीक बैठे।
सावधान!
सच या भ्रम?
असल जीवन: एक शब्द बदलने पर
Scenario:
कक्षा छह के बच्चों को विद्यालय की दीवार पत्रिका के लिए एक पंक्ति लिखनी थी। सबने मिलकर तय किया कि पंक्ति सफ़ाई पर होगी। पहले उन्होंने लिखा — विद्यालय को साफ़ रखो। शिक्षिका ने कहा कि पंक्ति ठीक है, पर एक बार ‘रखो’ की जगह ‘रखते चलो’ लिखकर देखो। बच्चों ने दोनों पंक्तियाँ बोर्ड पर लिखीं और ज़ोर से पढ़ीं। फिर उन्होंने ‘साफ़’ की जगह ‘सुंदर’ रखकर भी पढ़ा। कक्षा में इस पर देर तक बहस चली कि किस पंक्ति को दीवार पर लगाया जाए।
Analysis:
पढ़ते ही अंतर दिखने लगा। ‘रखो’ में एक आदेश था, जो एक बार का काम लगता है। ‘रखते चलो’ में रोज़ करते रहने का भाव आ गया। इसी तरह ‘साफ़’ में केवल गंदगी न होना था, जबकि ‘सुंदर’ में उससे कुछ अधिक जुड़ गया। शिक्षिका ने तब पाठ की पंक्ति याद दिलाई, जहाँ ‘जलाते चलो’ में ‘चलो’ की जगह ‘रहो’ रखने पर आगे बढ़ते रहने का भाव निकल जाता है। अंत में बच्चों ने वही पंक्ति चुनी जिसमें चलते रहने का भाव था, और यह भी लिखा कि उन्होंने वह क्यों चुनी।
Activity:
अपनी लेखन-पुस्तिका में कोई एक सीख वाली पंक्ति लिखिए। फिर उसमें केवल एक शब्द बदलकर दूसरी पंक्ति बनाइए। दोनों को समूह में पढ़कर सुनाइए और पूछिए कि भाव में क्या अंतर आया।
घर पर करके देखो
Title:
ताल देकर पढ़ो
Safety:
ताल हल्की देना; मेज़ पर ज़ोर से हाथ मत मारना।
What You Notice:
इस कविता की हर पंक्ति पर लगभग बराबर ताल पड़ती है। यही समान लय उसे गाने लायक और याद रहने लायक बनाती है।
Did you know
‘चलो’ की जगह ‘रहो’ रख देने पर पंक्ति गलत नहीं होती, पर उसमें से आगे बढ़ते रहने का भाव निकल जाता है।
कविता की पंक्तियों को हाथ से ताल देकर पढ़ा जाए, तो हर पंक्ति पर लगभग बराबर ताल पड़ती है।
पुराने शब्दों के दो-दो रूप इसलिए बन जाते हैं कि कविता बोलकर भी चलती रही है, केवल लिखकर नहीं।
Memory tricks
दो समूह — निशा-पक्ष और सवेरा-पक्ष — तिमिर, अमावस, तूफ़ान एक ओर; दिये, ज्योति, लौ दूसरी ओर।
दो-दो रूप — दिया-दीप, उजेला-उजाला, अनगिन-अनगिनत — अर्थ एक, लिखने-बोलने में थोड़ा अंतर।
Practice MCQs with answers (20)
- A जिसका अपना कोई सीधा-सादा अर्थ ही न हो
- B जो बहुत पुराना हो
- C जो सीधे अर्थ के साथ बड़ी बात भी कहे
- D जो बहुत लंबा हो
Show answer
Why:
इस कविता के मुख्य शब्द प्रतीक ही हैं।
- A रात
- B सुबह
- C शाम
- D दोपहर
Show answer
Why:
पर कविता में वह प्रतीक बन जाती है।
- A ठंड की
- B नींद की
- C किसी लंबी यात्रा की
- D दुख और अज्ञान की
Show answer
Why:
इसीलिए उससे लड़ने की बात है।
- A गर्मी का
- B सुख और भलाई का
- C काम की शुरुआत का
- D भूख का
Show answer
Why:
वह निशा के उलटे भाव में आता है।
- A ज्योति
- B लौ
- C पूर्णिमा
- D शिला
Show answer
Why:
‘तिमिर की शिला’ अँधेरे की कठोरता बताती है।
- A तूफ़ान
- B अमावस
- C स्वर्ण
- D तिमिर
Show answer
Why:
‘स्वर्ण-सी’ लौ की चमक बताता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: शिला, तिमिर और अमावस अँधेरे वाले समूह में आते हैं; स्वर्ण, ज्योति और लौ उजाले वाले में।
- A उजड़ा
- B उजाला
- C उछला
- D उबला
Show answer
Why:
दोनों का अर्थ एक ही है।
- A अनमोल
- B अनोखा
- C अनगिनत
- D अनजान
Show answer
Why:
कविता में दोनों रूप चलते हैं।
- A दीवा
- B दीया
- C दीपक
- D दीप
Show answer
Why:
‘जला दीप पहला’ में यही आया है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही दोनों रूपों की जड़ है। लय सँभालने के लिए कवि वही रूप चुनता है जो पंक्ति में बैठ जाए।
- A आगे बढ़ते रहने का भाव कम हो जाएगा
- B पूरी पंक्ति व्याकरण की दृष्टि से गलत हो जाएगी
- C पंक्ति का अर्थ पहले जैसा ही बना रहेगा
- D पंक्ति पहले की तुलना में छोटी हो जाएगी
Show answer
Why:
‘रहो’ एक जगह टिके रहने का भाव देता है और ‘चलो’ आगे बढ़ने का। कविता यात्रा की बात कर रही है, ठहरने की नहीं।
- A नैया, नाव या नौका
- B तट, तीर या किनारा
- C धरा, धरती या भूमि
- D प्रात:, सुबह या सवेरा
Show answer
Why:
तीनों का अर्थ एक ही है, पर लय अलग बैठती है।
- A गिनती बताना
- B समानता दिखाना
- C प्रश्न पूछना
- D समय बताना
Show answer
Why:
लौ को सोने जैसा बताया गया है।
- A प्रश्न चिह्न
- B विस्मय चिह्न
- C पूर्ण विराम
- D योजक चिह्न
Show answer
Why:
इसीलिए निशा-सी लिखा जाता है।
- A हर एक बंद अपने अलग ही ढंग से चलता चला जाता है
- B हर पंक्ति को बोलने में लगभग समान समय लगता है
- C इसमें कोई लय नहीं है
- D हर पंक्ति की लंबाई अलग है
Show answer
Why:
ताल देकर पढ़ने पर यह साफ़ दिखता है।
- A वह अधिक प्रभावशाली बनती है
- B वह लंबी हो जाती है
- C वह कठिन हो जाती है
- D उसका पूरा अर्थ ही बदल जाता है
Show answer
Why:
वह गाई जा सकती है और जल्दी याद होती है।
- A 1 और 5 के क्रम में, बारी-बारी
- B 3–3 के क्रम में
- C 2–4, 2–4 के क्रम में
- D सब बराबर
Show answer
Why:
यह पाठ में दी गई जानकारी है।
- A लिखने में आसानी के लिए
- B लय सँभालने के लिए
- C पंक्ति छोटी करने के लिए
- D अर्थ छिपाने के लिए
Show answer
Why:
क्रम सीधा करने पर सरल वाक्य बन जाता है।
- A निरंतर नाव कहाँ है
- B वह नाव निरंतर बहती चली जाएगी
- C नाव बहाना कठिन है
- D तुम वह नाव निरंतर बहाते चलो
Show answer
Why:
केवल शब्दों का क्रम सीधा किया गया है।
Important short questions (6)
जो शब्द अपने सीधे अर्थ के साथ कोई बड़ी बात भी कह जाए, उसे प्रतीक कहते हैं। इस कविता में दीया इसका उदाहरण है। वह मिट्टी का दीपक भी है और भलाई के काम का प्रतीक भी।
एक समूह अँधेरे की ओर का है, जिसमें तिमिर, अमावस, निशा, तूफ़ान और शिला आते हैं। दूसरा उजाले की ओर का है, जिसमें दिये, ज्योति, लौ, पूर्णिमा और सवेरा आते हैं।
दोनों रूपों का अर्थ एक ही रहता है। बस लिखने-बोलने में थोड़ा अंतर आ जाता है। कविता बोलकर भी चलती है, इसलिए कवि वही रूप चुनते हैं जो लय में ठीक बैठे, जैसे उजाला की जगह उजेला।
पंक्ति गलत नहीं होती, पर उसका भाव बदल जाता है। ‘चलो’ में आगे बढ़ते रहने की गति है, जबकि ‘रहो’ में केवल वहीं बने रहने का ठहराव है।
इनका प्रयोग समानता दिखाने के लिए होता है। कविता में ‘निशा-सी’ और ‘स्वर्ण-सी’ इसके उदाहरण हैं। ऐसे प्रयोग में इनसे पहले योजक चिह्न लगाया जाता है।
इसकी हर पंक्ति को बोलने या गाने में लगभग समान समय लगता है। हाथ से ताल देकर पढ़ने पर यह और साफ़ दिखता है, और इसी समानता के कारण कविता अधिक प्रभावशाली बन जाती है।
Long answer questions (3)
प्रतीक वह शब्द होता है जो सीधे अर्थ के साथ कोई बड़ी बात भी कहे। इस कविता के चारों मुख्य शब्द प्रतीक ही हैं। दीया मिट्टी का दीपक भी है और उस भले काम का नाम भी, जो कोई व्यक्ति अपने आसपास करता है। तूफ़ान हवा भी है और वे कठिनाइयाँ भी जो हर भले प्रयास को रोकने आती हैं। निशा का सीधा अर्थ रात है, पर यहाँ वह दुख, कठिनाई और अज्ञान की प्रतीक है। सवेरे का सीधा अर्थ सुबह है, पर यहाँ वह सुख, उजाले और भलाई का प्रतीक है। इन्हीं प्रतीकों के कारण कविता का अर्थ शब्दकोश से नहीं, सोचने से खुलता है।
कविता में हर शब्द सोच-समझकर रखा जाता है, क्योंकि उसे बदल देने पर अर्थ और सुंदरता, दोनों बदल सकते हैं। सबसे अच्छा उदाहरण ‘जलाते चलो’ है। यहाँ ‘चलो’ की जगह ‘रहो’ रख दें तो पंक्ति गलत नहीं होगी, पर आगे बढ़ते रहने का भाव निकल जाएगा। इसी तरह नाव के लिए नैया, नाव और नौका, तीनों शब्द चल सकते थे, और किनारे के लिए तट, तीर और किनारा। कवि ने हर बार वही चुना जो लय में भी बैठे और भाव में भी। एक और उदाहरण दो-दो रूपों का है, जैसे उजाला के साथ उजेला और अनगिनत के साथ अनगिन। अर्थ वही रहता है, पर लय के लिए छोटा रूप अधिक ठीक बैठता है।
पहली विशेषता इसकी लय है। कविता की हर पंक्ति को बोलने या गाने में लगभग समान समय लगता है, जो हाथ से ताल देकर पढ़ने पर साफ़ दिख जाता है। इसी कारण कविता गाई जा सकती है और जल्दी याद हो जाती है। दूसरी विशेषता इसकी बनावट है, क्योंकि पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बाँटी गई हैं। तीसरी विशेषता हर बंद का अंत है, जहाँ दो पंक्तियाँ कोई न कोई भरोसा देकर बंद को रोक देती हैं। चौथी विशेषता शब्दों का उलटा क्रम है, जो लय सँभालने के लिए रखा जाता है; उसे सीधा कर देने पर सरल वाक्य बन जाता है। इन सबके साथ ‘सी’ जैसे छोटे शब्द समानता दिखाकर चित्र बना देते हैं।
Flashcards (15)
Play this topic
- अँधेरे का या उजाले का?
- शब्द और उसका दूसरा रूप
- सच या भ्रम
- पंक्ति को वाक्य बनाओ
- झटपट उत्तर
चाँद की कलाएँ, तिथिपत्र और कवि
अमावस्या और पूर्णिमा होती क्यों हैं, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष क्या हैं, तिथिपत्र कैसे पढ़ा जाता है, और यह कविता किसने लिखी।
What you will be able to do
- अमावस्या और पूर्णिमा होने का कारण समझाना
- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में अंतर बताना
- तिथिपत्र के एक पृष्ठ से तिथि और पक्ष पढ़ना
- कवि का परिचय देना और ‘पवन’ के पर्यायवाची शब्द बताना
Key points
चाँद अपनी रोशनी नहीं बनाता; जो चमक हमें दिखती है, वह सूरज से आती है।
चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, जबकि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है।
इसी कारण चंद्रमा हमें घटता-बढ़ता दिखाई देता है और रोज़ एक-सा नहीं लगता।
जिन दिनों चंद्रमा की कलाएँ घटती हैं, उन्हें कृष्ण पक्ष कहते हैं; ‘कृष्ण’ का एक अर्थ काला है।
जिन दिनों कलाएँ बढ़ती हैं, उन्हें शुक्ल पक्ष कहते हैं; ‘शुक्ल’ का एक अर्थ उजला है।
कृष्ण पक्ष का अंत अमावस्या पर होता है और शुक्ल पक्ष का अंत पूर्णिमा पर।
तिथिपत्र में हर दिन के आगे तिथि और पक्ष दोनों लिखे रहते हैं, इसलिए उससे यह सब पढ़ा जा सकता है।
कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी बाल साहित्य के चर्चित रचनाकार हैं, जिनका जीवनकाल 1916 से 1998 तक रहा।
Full explanation
कविता से विज्ञान तक
कविता में एक पंक्ति आती है कि विज्ञान अमावस को पूर्णिमा जैसा बना सकता है। इसी बहाने पाठ हमें चाँद की ओर ले जाता है और पूछता है कि ये दोनों होती क्यों हैं।
चाँद रोज़ एक-सा नहीं दिखता
आकाश में रात को चाँद देखिए। वह कभी पूरा गोल दिखता है, कभी आधा, कभी पतली-सी रेखा, और कभी बिलकुल नहीं। यह बदलाव हर महीने दोहराया जाता है। यही कारण है कि पुराने समय से लोग चाँद देखकर ही दिन गिनते आए हैं।
सबसे ज़रूरी बात
चाँद के पास अपनी रोशनी है ही नहीं। जो चाँदनी दिखती है, वह सूरज की रोशनी है, जो चाँद पर पड़कर हमारी ओर लौटती है।
घूमना किसके चारों ओर
चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, और पृथ्वी सूर्य की। इन्हीं दोनों चक्करों के कारण चाँद का वह भाग बदलता रहता है जो हमें चमकता हुआ दिखता है।
कला का अर्थ
चाँद का जो भाग हमें चमकता दिखता है, उसे कला कहते हैं। यही कला धीरे-धीरे बढ़ती है और धीरे-धीरे घटती भी है।
बढ़ते-बढ़ते पूर्णिमा
कला धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और एक रात ऐसी आती है जब चाँद पूरा दिखने लगता है। उसी रात को पूर्णिमा कहते हैं, और उसका दूसरा नाम पूर्णमासी है। उस रात आकाश में सबसे अधिक चाँदनी होती है।
घटते-घटते अमावस्या
इसके बाद कला घटने लगती है। घटते-घटते एक रात ऐसी आती है जब आकाश में चाँद दिखाई ही नहीं देता। उसी रात को अमावस्या कहते हैं, जिसका छोटा रूप अमावस है। उस रात चाँद आकाश में रहता तो है, पर उसका चमकता भाग हमारी ओर नहीं होता।
दोनों पक्ष
जिन दिनों कलाएँ घटती जाती हैं, उन्हें कृष्ण पक्ष कहा जाता है। ‘कृष्ण’ का एक मतलब काला होता है, इसलिए नाम अपने आप ठीक बैठ जाता है।
उजला वाला पक्ष
जिन दिनों कलाएँ बढ़ती जाती हैं, उन्हें शुक्ल पक्ष कहा जाता है। ‘शुक्ल’ शब्द का एक अर्थ उजला है। इस तरह कृष्ण पक्ष अमावस्या पर जाकर रुकता है और शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर।
तिथिपत्र क्या है
तिथिपत्र वही है जिसे हम कैलेंडर कहते हैं। उसमें साल के सब महीनों की तिथियों की जानकारी दी जाती है, इसलिए वह केवल तारीख नहीं बताता।
तिथिपत्र कैसे पढ़ें
उसमें हर दिन की तारीख के नीचे तिथि लिखी होती है और साथ में कोष्ठक में पक्ष भी — कृष्ण या शुक्ल। इसी से पता चल जाता है कि उस दिन चाँद बढ़ रहा है या घट रहा है।
उससे क्या-क्या निकाला जा सकता है
तिथिपत्र देखकर बताया जा सकता है कि पूर्णिमा और अमावस्या किस तारीख को पड़ रही हैं, दोनों में कितने दिन का अंतर है, और कोई त्योहार किस तिथि पर है। यह सब बिना आकाश देखे पता चल जाता है। इसी कारण घरों में आज भी तिथिपत्र देखकर कई काम तय किए जाते हैं।
कवि का परिचय
अब कविता के रचयिता की बात। उनका नाम द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी है और उनका जीवनकाल 1916 से 1998 तक रहा। वे बाल साहित्य के चर्चित रचनाकारों में गिने जाते हैं और उन्होंने बच्चों के लिए बहुत लिखा। उनका गीत ‘हम सब सुमन एक उपवन के’ आज भी बहुत लोकप्रिय है।
हवा के कई नाम
कविता में एक पंक्ति है कि अनगिनत दीये पवन ने बुझाए। ‘पवन’ का अर्थ हवा है, और हिंदी में उसके कई नाम चलते हैं — समीर, अनिल, मारुत और वायु। पाठ के अक्षर-जाल में यही नाम छिपे हुए हैं, और उन्हें खोजना एक अच्छा खेल बन जाता है। एक ही चीज़ के कई नाम होना हिंदी की पुरानी आदत है, और कविता में यही आदत बहुत काम आती है, क्योंकि कवि लय के अनुसार नाम चुन लेते हैं। इसी कारण एक ही चीज़ कई नामों से कविता में आ जाती है।
Concepts and terms
चंद्रमा का वह भाग जो हमें चमकता हुआ दिखाई देता है। यह हर दिन थोड़ा घटता या बढ़ता है, इसलिए चाँद कभी पूरा और कभी बिलकुल गायब लगता है।
किसी के चारों ओर घूमना। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है और पृथ्वी सूर्य की; इसी घूमने से चाँद का चमकता भाग बदलता दिखता है।
महीने का आधा भाग, लगभग पंद्रह दिन का। घटती कलाओं वाला भाग कृष्ण पक्ष है और बढ़ती कलाओं वाला शुक्ल पक्ष।
वह पत्र जिसे कैलेंडर भी कहते हैं। उसमें साल के हर महीने की तिथियाँ दी जाती हैं, और हर दिन के आगे तिथि तथा पक्ष लिखा रहता है।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा ने एक महीने तक चाँद देखा और उसे तिथिपत्र से मिलाया। अमावस्या के दिन आकाश में चाँद नहीं दिखा। उसके बाद हर रात वह थोड़ा-थोड़ा बढ़ता गया। पंद्रहवीं रात को पूरा गोल चाँद निकला। बच्चों ने गिना कि बढ़ने और घटने में पंद्रह-पंद्रह दिन लगे। अध्यापिका ने दोनों पक्षों के नाम बताए। बढ़ने वाला शुक्ल पक्ष है और घटने वाला कृष्ण पक्ष। सना ने कहा कि कविता का दीया भी ऐसा ही है। अँधेरा सबसे गहरा होने पर ही उसकी ज़रूरत सबसे अधिक होती है।
Analysis:
तिथिपत्र और आकाश एक ही गिनती बताते हैं। पंद्रह दिन घटने के बाद भी चाँद लौट आता है, और कविता की ज़िद भी यही है।
Activity:
एक महीने तक हर रात चाँद देखो और तिथिपत्र से मिलाओ। कौन-से दिन कौन-सा पक्ष चला, यह लिखो।
घर पर करके देखो
Title:
पंद्रह रातों का चाँद
Safety:
छत पर अकेले मत जाओ; चाँद खिड़की या आँगन से भी देखा जा सकता है।
What You Notice:
चित्र और तिथिपत्र दोनों एक ही बात कहते हैं। इससे समझ आता है कि पक्ष किसी कल्पना का नाम नहीं, आकाश में दिखने वाली सच्ची बात है।
Did you know
चंद्रमा स्वयं नहीं चमकता — जो चाँदनी हमें दिखती है, वह असल में सूरज की ही रोशनी है।
‘कृष्ण’ और ‘शुक्ल’ केवल नाम नहीं हैं; उनके अर्थ ही काला और उजला हैं, इसलिए नाम अपने आप याद रह जाते हैं।
हवा के लिए हिंदी में कई नाम चलते हैं — पवन, समीर, अनिल, मारुत और वायु।
Memory tricks
दोनों पक्ष — कृष्ण यानी काला, शुक्ल यानी उजला — काले वाले में कलाएँ घटती हैं, उजले वाले में बढ़ती हैं।
पक्ष का अंत — कृष्ण से अमावस्या, शुक्ल से पूर्णिमा — घटते-घटते चाँद गायब, बढ़ते-बढ़ते चाँद पूरा।
Practice MCQs with answers (20)
- A सूर्य से, जिसका प्रकाश वह हम तक लौटाता है
- B आकाश के तारों से, जो रात भर जलते रहते हैं
- C पृथ्वी से, जो उसे अपना प्रकाश देती है
- D बादलों से, जो रात में चमकने लगते हैं
Show answer
Why:
चंद्रमा का अपना प्रकाश नहीं है। हम उसका वही भाग देख पाते हैं जिस पर सूर्य का प्रकाश पड़ रहा होता है।
- A सूर्य के
- B तारों के
- C पृथ्वी के
- D बादलों के
Show answer
Why:
पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है।
- A सीधे आगे की ओर चलते जाना
- B किसी के चारों ओर घूमना
- C ऊपर उठना
- D रुक जाना
Show answer
Why:
चाँद और पृथ्वी दोनों यही करते हैं।
- A किरण
- B छाया
- C पक्ष
- D कला
Show answer
Why:
यही घटती और बढ़ती रहती है।
- A चाँद बिलकुल नहीं दिखता
- B चाँद पूरा दिखाई देता है
- C चाँद आधा दिखता है
- D चाँद लाल दिखता है
Show answer
Why:
उसे पूर्णमासी भी कहा जाता है।
- A चाँद दिखाई नहीं देता
- B चाँद पूरा दिखता है
- C बहुत तारे दिखते हैं
- D वर्षा होती है
Show answer
Why:
उसका छोटा रूप अमावस है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: कृष्ण पक्ष अमावस्या पर समाप्त होता है और शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर।
- A जब आकाश साफ़ रहता है
- B जब हवा तेज़ चलती है
- C जब कलाएँ घटती हैं
- D जब कलाएँ बढ़ती हैं
Show answer
Why:
‘शुक्ल’ का एक अर्थ उजला है।
- A पूर्णिमा पर
- B अमावस्या पर
- C सप्तमी पर
- D प्रतिपदा पर
Show answer
Why:
घटते-घटते चाँद गायब हो जाता है।
- A अमावस्या पर
- B चतुर्थी पर
- C किसी भी दिन
- D पूर्णिमा पर
Show answer
Why:
बढ़ते-बढ़ते चाँद पूरा हो जाता है।
- A पंद्रह दिन
- B सात दिन
- C तीस दिन
- D दो दिन
Show answer
Why:
महीने के दो पक्ष होते हैं।
- A कैलेंडर
- B शब्दकोश
- C पंजिका-लेख
- D मानचित्र
Show answer
Why:
उसमें साल के सब महीनों की तिथियाँ होती हैं।
- A केवल त्योहार
- B केवल वार
- C तिथि और पक्ष
- D केवल महीना
Show answer
Why:
पक्ष कोष्ठक में लिखा मिलता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही तिथिपत्र को उपयोगी बनाता है। पक्ष का नाम पढ़कर आकाश देखने से पहले ही उत्तर मिल जाता है।
- A गहरा
- B काला
- C उजला
- D ठंडा
Show answer
Why:
इसीलिए बढ़ती कलाओं के दिनों का यह नाम है।
- A सुदर्शन
- B द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
- C क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल
- D रहीम
Show answer
Why:
वे बाल साहित्य के चर्चित रचनाकार हैं।
- A 1897 से 1927
- B 1906 से 1988
- C 1926 से 2008
- D 1916 से 1998
Show answer
Why:
यह पाठ के कवि-परिचय में दिया गया है।
- A यात्रा वृतांत के लिए
- B इतिहास लेखन के लिए
- C नाटकों के लिए
- D बाल साहित्य के लिए
Show answer
Why:
उन्होंने बच्चों के लिए बहुत लिखा।
- A बढ़े चलो
- B हम सब सुमन एक उपवन के
- C जलाते चलो
- D रोज़-रोज़ बदलता हुआ चाँद
Show answer
Why:
यह उनकी सबसे जानी-पहचानी रचना है।
- A बादल
- B नदी
- C समीर
- D मिट्टी
Show answer
Why:
अनिल और मारुत भी हवा के ही नाम हैं।
Important short questions (6)
चाँद के पास अपनी कोई रोशनी नहीं है। रात में जो चाँदनी हमें दिखती है, वह सूरज से निकली हुई रोशनी है, जो चाँद पर पड़कर हमारी ओर लौट आती है।
चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है और पृथ्वी सूर्य की। इन्हीं चक्करों के कारण चाँद का वह भाग बदलता रहता है जो हमें चमकता हुआ दिखता है, इसलिए वह कभी पूरा और कभी बिलकुल नहीं दिखता।
कृष्ण पक्ष वे दिन हैं जिनमें चाँद की कलाएँ घटती जाती हैं। वह अमावस्या पर जाकर रुकता है। शुक्ल पक्ष वे दिन हैं जिनमें कलाएँ बढ़ती जाती हैं। वह पूर्णिमा पर जाकर पूरा होता है।
‘कृष्ण’ शब्द का एक अर्थ काला है, और उसी पक्ष में चाँद घटते-घटते गायब हो जाता है। ‘शुक्ल’ का एक अर्थ उजला है, और उसी पक्ष में चाँद बढ़ते-बढ़ते पूरा हो जाता है।
उसमें हर दिन की तारीख के साथ तिथि लिखी होती है। कोष्ठक में पक्ष भी लिखा रहता है। इससे पता चल जाता है कि पूर्णिमा और अमावस्या किस दिन पड़ रही हैं, और चाँद बढ़ रहा है या घट रहा है।
इस कविता के रचयिता द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी हैं। उनका जीवनकाल 1916 से 1998 तक रहा। वे बाल साहित्य के चर्चित रचनाकार माने जाते हैं, और उनका गीत ‘हम सब सुमन एक उपवन के’ आज भी लोकप्रिय है।
Long answer questions (3)
सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि चाँद अपनी रोशनी नहीं बनाता। उसकी सारी चमक सूरज से आती है। दूसरी बात यह कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, जबकि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। इन्हीं दोनों चक्करों के कारण चाँद का वह भाग बदलता रहता है जो हमें चमकता हुआ दिखाई देता है, और उसी भाग को कला कहते हैं। कला धीरे-धीरे बढ़ती है, और एक रात चाँद पूरा दिखने लगता है; उसी को पूर्णिमा कहते हैं। इसके बाद कला घटने लगती है, और घटते-घटते एक रात चाँद दिखाई ही नहीं देता; उसी को अमावस्या कहते हैं। इस तरह दोनों तिथियाँ हर महीने लौटकर आती हैं।
महीने के दो पक्ष होते हैं और हर पक्ष लगभग पंद्रह दिन का होता है। जिन दिनों चाँद की कलाएँ घटती जाती हैं, उन्हें कृष्ण पक्ष कहते हैं। इस नाम का कारण यह है कि ‘कृष्ण’ शब्द का एक अर्थ काला भी होता है, और इसी पक्ष में चाँद घटते-घटते गायब हो जाता है। यह पक्ष अमावस्या पर जाकर रुकता है। जिन दिनों कलाएँ बढ़ती जाती हैं, उन्हें शुक्ल पक्ष कहते हैं। ‘शुक्ल’ शब्द का एक अर्थ उजला होता है, और इसी पक्ष में चाँद बढ़ते-बढ़ते पूरा हो जाता है। यह पक्ष पूर्णिमा पर जाकर पूरा होता है। इसीलिए दोनों नाम याद रखने में आसान हैं।
तिथिपत्र वही है जिसे हम कैलेंडर कहते हैं। उसमें साल के सब महीनों की तिथियों की जानकारी दी जाती है। इसलिए वह केवल तारीख बताने वाला कागज़ नहीं है। उसके हर दिन के आगे तिथि लिखी होती है, और कोष्ठक में पक्ष भी। इसी से पता चल जाता है कि उस दिन चाँद बढ़ रहा है या घट रहा है। यह सब बिना आकाश देखे जाना जा सकता है। तिथिपत्र से यह भी निकलता है कि पूर्णिमा और अमावस्या किस दिन पड़ रही हैं। दोनों के बीच कितने दिन का अंतर है, यह भी गिना जा सकता है। इसी कारण घरों में आज भी उसे देखकर काम तय किए जाते हैं।
Flashcards (15)
Play this topic
- चाँद की कलाओं का क्रम
- नाम और अर्थ
- कृष्ण पक्ष का या शुक्ल पक्ष का?
- सच या भ्रम
- झटपट उत्तर
Class 6 Hindi Chapter 7 — frequently asked questions
कवि कहते हैं कि दीये जलाते चलो, पर उनमें स्नेह भरकर। स्नेह का अर्थ तेल भी है और प्रेम भी। उनका भरोसा है कि ऐसा करते रहने से धरती का अँधेरा एक दिन मिटेगा ही।
वे मानते हैं कि विज्ञान बिना चाँद वाली रात को पूरे चाँद जैसी बना सकता है। पर उनका दुख दूसरा है। इतनी रोशनी के बाद भी दुनिया पर दिन में ही अँधेरा-सा घिरता जा रहा है।
वे उन विद्युत-दीयों को बुझाने के लिए कहते हैं जो बिना स्नेह के जल रहे हैं। उनका भाव यह है कि जो रोशनी अपनेपन से नहीं आती, वह किसी का रास्ता नहीं बनाती। वह कितनी ही तेज़ क्यों न हो।
जो शब्द अपने सीधे अर्थ के साथ कोई बड़ी बात भी कह जाए, उसे प्रतीक कहते हैं। इस कविता में दीया इसका उदाहरण है। वह मिट्टी का दीपक भी है और भलाई के काम का प्रतीक भी।
एक समूह अँधेरे की ओर का है, जिसमें तिमिर, अमावस, निशा, तूफ़ान और शिला आते हैं। दूसरा उजाले की ओर का है, जिसमें दिये, ज्योति, लौ, पूर्णिमा और सवेरा आते हैं।
दोनों रूपों का अर्थ एक ही रहता है। बस लिखने-बोलने में थोड़ा अंतर आ जाता है। कविता बोलकर भी चलती है, इसलिए कवि वही रूप चुनते हैं जो लय में ठीक बैठे, जैसे उजाला की जगह उजेला।
चाँद के पास अपनी कोई रोशनी नहीं है। रात में जो चाँदनी हमें दिखती है, वह सूरज से निकली हुई रोशनी है, जो चाँद पर पड़कर हमारी ओर लौट आती है।
चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है और पृथ्वी सूर्य की। इन्हीं चक्करों के कारण चाँद का वह भाग बदलता रहता है जो हमें चमकता हुआ दिखता है, इसलिए वह कभी पूरा और कभी बिलकुल नहीं दिखता।
कृष्ण पक्ष वे दिन हैं जिनमें चाँद की कलाएँ घटती जाती हैं। वह अमावस्या पर जाकर रुकता है। शुक्ल पक्ष वे दिन हैं जिनमें कलाएँ बढ़ती जाती हैं। वह पूर्णिमा पर जाकर पूरा होता है।
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