Class 6 Hindi Chapter 6: मेरी माँ

मेरी माँ is Chapter 6 of NCERT / CBSE Class 6 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 3 topics , 60 practice MCQs with answers and explanations , 27 important short and long questions and 45 flashcards — all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.

बिस्मिल, उनकी आत्मकथा और सत्य

तीस साल की उम्र में फाँसी पाने वाले एक क्रांतिकारी, जेल में चोरी-छिपे लिखी उनकी आत्मकथा, और एक हस्ताक्षर जो उन्होंने नहीं किए।

What you will be able to do

  • रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ का परिचय अपने शब्दों में देना
  • यह बताना कि उनकी आत्मकथा किन परिस्थितियों में लिखी और छपी
  • आत्मकथा विधा की पहचान करना और उसे कहानी से अलग बताना
  • वकालतनामे वाली घटना से उनके स्वभाव के बारे में निष्कर्ष निकालना

Key points

  • रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी थे, जिनका जीवनकाल 1897 से 1927 तक रहा।

  • वे अच्छे कवि और लेखक भी थे, और ‘सरफरोशी की तमन्ना’ उन्हीं की लिखी है।

  • भगत सिंह ने उन्हें होनहार नौजवान और ग़ज़ब का शायर कहा, और यह भी कि कहीं और जन्म लेते तो सेनाध्यक्ष बनते।

  • केवल तीस साल की उम्र में अंग्रेज़ों ने उन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया।

  • जेल में रहते हुए उन्होंने चोरी-छिपे अपनी आत्मकथा लिखी और पन्ने बाहर भिजवाते रहे।

  • साथियों ने उसे ‘निज जीवन की एक छटा’ नाम से छपवाया, और उस पुस्तक ने अंग्रेज़ों के होश उड़ा दिए।

  • आत्मकथा अपनी ही कथा होती है, इसलिए उसमें लेखक स्वयं ‘मैं’ कहकर बोलता है।

  • वकील के कहने पर भी उन्होंने पिताजी के हस्ताक्षर बनाने से मना कर दिया, चाहे मुकदमा खारिज हो जाए।

Full explanation

पाठ किस पुस्तक से है

‘मेरी माँ’ कोई अलग कहानी नहीं है। यह रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा का एक हिस्सा है, जिसे पाठ्यपुस्तक ने अलग निकालकर हमारे सामने रखा है। इसीलिए इसे पढ़ते समय यह याद रखना चाहिए कि आगे-पीछे और भी बहुत कुछ है, जो यहाँ नहीं आया।

बिस्मिल कौन थे

वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी थे। उनका जीवनकाल 1897 से 1927 तक रहा। उनके जन्म के समय देश पर अंग्रेज़ों का शासन था, और बहुत छोटी उम्र से ही वे उनसे लड़ते रहे।

केवल तीस वर्ष

अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें पकड़कर जेल भेजा और फिर फाँसी की सज़ा सुना दी। उस समय उनकी आयु केवल तीस वर्ष थी। जेल में उन्हें बहुत अत्याचार भी सहने पड़े। तीस वर्ष की आयु आज के हिसाब से बहुत कम है, और इतने ही समय में उन्होंने यह सब कर दिखाया।

कलम भी उतनी ही तेज़

वे केवल लड़ने वाले नहीं थे। वे एक अच्छे कवि और लेखक भी थे, और ‘सरफरोशी की तमन्ना’ जैसा प्रसिद्ध तराना उन्हीं का लिखा हुआ है। उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं।

भगत सिंह की राय

पाठ के आरंभ में भगत सिंह के कहे शब्द दिए गए हैं। उन्होंने बिस्मिल को होनहार नौजवान और ग़ज़ब का शायर बताया, और यह भी कहा कि किसी दूसरे देश या दूसरे समय में जन्म लेते तो वे सेनाध्यक्ष बनते।

जेल के भीतर लिखी किताब

सबसे बड़ी बात यह है कि आत्मकथा उन्होंने जेल में रहते हुए लिखी। वह भी चोरी-छिपे, क्योंकि पकड़े जाने का डर हर पल बना रहता था।

पन्ने बाहर कैसे गए

लिखे हुए पन्ने वे अंग्रेज़ों की नज़र बचाकर जेल से बाहर भिजवाते रहे। बाहर उनके साथियों ने उन पन्नों को सँभाला और आगे चलकर पूरी पुस्तक छपवा दी।

पुस्तक का नाम और असर

उसका नाम रखा गया ‘निज जीवन की एक छटा’। छपते ही उसने अंग्रेज़ों के होश उड़ा दिए, क्योंकि लोगों में उनके विरुद्ध क्रोध और बढ़ गया। नाम का अर्थ है अपने जीवन की एक झलक, जो उस छोटी-सी पुस्तक के लिए ठीक बैठता है।

हार किसकी हुई

अंग्रेज़ों ने बिस्मिल को फाँसी दे दी, पर उनकी लिखी पुस्तक जीवित रह गई। इसीलिए कहा जाता है कि मार डालने के बाद भी वे उन्हें हरा नहीं सके।

आत्मकथा क्या होती है

आत्मकथा यानी अपनी ही कथा। उसमें लेखक किसी और के बारे में नहीं, स्वयं अपने बारे में लिखता है। इसीलिए पूरे पाठ में ‘मैं’ आता है और अंत में ‘तुम’, क्योंकि वहाँ वे सीधे माँ से बात करने लगते हैं।

कहानी से यह कैसे अलग है

कहानी में पात्र गढ़े जा सकते हैं, पर आत्मकथा में सब कुछ सचमुच का होता है। इसीलिए यहाँ नाम, जगह और तारीखें असली हैं — शाहजहाँपुर, लखनऊ, आर्यसमाज। दूसरा अंतर यह है कि लेखक अपनी कमज़ोरी भी छिपाता नहीं, जो किसी गढ़े हुए नायक के साथ नहीं होता।

घर का विरोध

बिस्मिल लखनऊ कांग्रेस में जाना चाहते थे, पर दादीजी और पिताजी इसके विरोध में थे। उन्हीं दिनों शाहजहाँपुर में सेवा-समिति शुरू हुई थी, जिसमें वे बड़े उत्साह से काम करते थे। यह भी घर वालों को अच्छा नहीं लगता था।

वकालतनामे वाली घटना

एक बार पिताजी ने किसी पर दीवानी मुकदमा किया और वकील से कह दिया कि काम बेटे से करा लें। ज़रूरत पड़ने पर वकील ने बिस्मिल को बुलाकर कहा कि वे पिताजी के हस्ताक्षर वकालतनामे पर कर दें।

उन्होंने क्या किया

उन्होंने तुरंत मना कर दिया और कहा कि यह धर्म के विरुद्ध होगा, ऐसा पाप वे कभी नहीं करेंगे। वकील ने बहुत समझाया कि इससे मुकदमा खारिज हो जाएगा, पर उन पर कोई असर नहीं हुआ और हस्ताक्षर नहीं किए। वे लिखते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, वे सच ही कहते थे।

Concepts and terms

आत्मकथा

अपने ही जीवन की कथा, जिसे लेखक स्वयं लिखता है। इसीलिए उसमें ‘मैं’ आता है, और पाठक को घटनाएँ उसी व्यक्ति की आँखों से दिखती हैं जिसने उन्हें भोगा।

क्रांतिकारी

वह व्यक्ति जो किसी अन्यायपूर्ण व्यवस्था को जड़ से बदलने के लिए लड़े। बिस्मिल बचपन से ही देश को आज़ाद कराने के लिए अंग्रेज़ों से भिड़ते रहे।

सेवा-समिति

लोगों की सहायता के लिए बनी एक संस्था, जो उन्हीं दिनों शाहजहाँपुर में शुरू हुई थी। बिस्मिल उसमें बड़े उत्साह से काम करते थे, जो घर वालों को पसंद नहीं था।

वकालतनामा

वह कागज़ जिस पर हस्ताक्षर करके कोई व्यक्ति वकील को अपनी ओर से मुकदमा लड़ने का अधिकार देता है। उसी पर पिताजी के हस्ताक्षर बनाने से बिस्मिल ने मना कर दिया था।

सावधान!

सच या भ्रम?

Case Study

Scenario:

कक्षा में प्रश्न उठा कि जेल में लिखना कितना कठिन रहा होगा। बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा चोरी-छिपे लिखी। लिखे हुए कागज़ बाहर भेजना और भी कठिन था। अध्यापिका ने पूछा कि उन्होंने वह हस्ताक्षर क्यों नहीं किए। बच्चों ने सोचकर उत्तर दिया। हस्ताक्षर करने का अर्थ अपनी बात से पीछे हटना था। सना ने कहा कि तीस वर्ष की उम्र में ऐसा कर पाना आसान नहीं रहा होगा। अध्यापिका ने कहा कि इसीलिए वह आत्मकथा आज भी पढ़ी जाती है। उसमें लिखी बात और जीने का ढंग एक ही हैं।

Analysis:

आत्मकथा का मोल केवल उसकी घटनाओं में नहीं है। वह इसलिए टिकी है क्योंकि लिखने वाला अपनी लिखी बात पर अंत तक खड़ा रहा।

Activity:

किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में पता करो जिसने अपनी बात पर टिके रहकर कठिनाई उठाई हो। उस पर पाँच वाक्य लिखो।

घर पर करके देखो

Title:

एक दिन की आत्मकथा

Safety:

यह काम लिखने-पढ़ने का है; किसी की निजी बात बिना पूछे मत लिखो।

What You Notice:

‘मैं’ वाले लेखन में मन के भाव अपने आप आ जाते हैं, जो ‘वह’ वाले में छूट जाते हैं। आत्मकथा की ताकत यही है।

Did you know

बिस्मिल केवल तीस वर्ष जिए, और उतने ही समय में उन्होंने अनेक पुस्तकें भी लिख डालीं।

‘बिस्मिल’ उनका असली नाम नहीं, उपनाम था, जैसा उस समय के कई शायर रखते थे।

जिस आत्मकथा को अंग्रेज़ रोकना चाहते थे, वही छपकर उनके विरुद्ध सबसे बड़ा हथियार बन गई।

Memory tricks

आत्मकथा का सफ़र — जेल-छिपाकर-बाहर-छपाई — जेल में लिखी, छिपाकर बाहर भेजी, साथियों ने छपवाई।

बिस्मिल की पहचान — क्रांति-कविता-कलम — वे क्रांतिकारी थे, कवि थे, और लेखक भी।

Practice MCQs with answers (20)

Q1 ‘मेरी माँ’ पाठ असल में क्या है? beginner
  • A एक स्वतंत्र कहानी
  • B एक आत्मकथा का अंश
  • C एक कविता
  • D एक पत्र-संग्रह
Show answer
Answer: एक आत्मकथा का अंश
Why:

यह पूरी पुस्तक से निकाला गया एक हिस्सा है।

Q2 बिस्मिल का जन्म उस समय हुआ जब देश अपने ही घर में पराधीन था। उनके जन्म के समय भारत की क्या स्थिति थी? intermediate
  • A देश स्वतंत्र हो चुका था
  • B देश में कोई शासन नहीं था
  • C देश बँट चुका था
  • D देश पर अंग्रेज़ों का शासन था
Show answer
Answer: देश पर अंग्रेज़ों का शासन था
Why:

इसी कारण वे छोटी उम्र से ही लड़ते रहे।

Q3 बिस्मिल का जीवनकाल कौन-सा है? advanced
  • A 1897 से 1927
  • B 1857 से 1887
  • C 1917 से 1947
  • D 1877 से 1907
Show answer
Answer: 1897 से 1927
Why:

यह पाठ के लेखक-परिचय में दिया गया है।

Q4 अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें क्या सज़ा दी? beginner
  • A देश से निकाल दिया
  • B जुर्माना लगाया
  • C फाँसी की सज़ा दी
  • D संपत्ति छीन ली
Show answer
Answer: फाँसी की सज़ा दी
Why:

जेल में उन्हें अनेक अत्याचार भी सहने पड़े।

Q5 एक प्रसिद्ध गीत आज भी देशभक्ति के अवसरों पर गाया जाता है। ‘सरफरोशी की तमन्ना’ के बारे में क्या सही है? intermediate
  • A यह भगत सिंह ने लिखी
  • B यह बिस्मिल ने लिखी
  • C यह उनकी माँ ने लिखी
  • D यह गुरु सोमदेव ने लिखी
Show answer
Answer: यह बिस्मिल ने लिखी
Why:

वे एक अच्छे कवि और लेखक भी थे।

Q6 भगत सिंह ने बिस्मिल को क्या कहा? advanced
  • A साधारण नौजवान
  • B होनहार नौजवान
  • C कठोर नौजवान
  • D चुप रहने वाला नौजवान
Show answer
Answer: होनहार नौजवान
Why:

उन्होंने उन्हें ग़ज़ब का शायर भी कहा।

Q7 भगत सिंह बिस्मिल की क्षमता पर बड़ी बात कह गए थे। उनके अनुसार वे किसी और देश में जन्मते तो क्या बनते? beginner
  • A कोई बड़ा व्यापारी
  • B कोई प्रसिद्ध वैद्य
  • C कोई बड़ा शिक्षक
  • D सेनाध्यक्ष
Show answer
Answer: सेनाध्यक्ष
Why:

यह उनकी योग्यता की सबसे बड़ी प्रशंसा है।

Q8 आत्मकथा लिखते समय बिस्मिल कहाँ थे? intermediate
  • A जेल में
  • B अपने घर में
  • C किसी यात्रा पर
  • D विद्यालय में
Show answer
Answer: जेल में
Why:

वहीं रहते हुए उन्होंने चोरी-छिपे लिखा।

Q9 जेल में लिखे पन्ने वहीं नहीं रह जाते थे, उनका कोई प्रबंध किया जाता था। लिखे हुए पन्नों के साथ क्या किया जाता था? advanced
  • A उन्हें छिपाकर बाहर भेजा जाता
  • B उन्हें जला दिया जाता
  • C उन्हें दीवार में गाड़ दिया जाता
  • D उन्हें अंग्रेज़ों को दिखाया जाता
Show answer
Answer: उन्हें छिपाकर बाहर भेजा जाता
Why:

बाहर साथियों ने उन्हें सँभाला।

Q10 आत्मकथा किसने छपवाई? beginner
  • A अंग्रेज़ सरकार ने
  • B उनकी माताजी ने
  • C उनके साथियों ने
  • D उनके वकील ने
Show answer
Answer: उनके साथियों ने
Why:

पन्ने उन तक पहुँचते रहे थे।

Q11 बिस्मिल के बाद उनकी आत्मकथा पुस्तक के रूप में सामने आई थी। छपी हुई पुस्तक का नाम क्या रखा गया? intermediate
  • A मेरी माँ
  • B निज जीवन की एक छटा
  • C ऐ मातृभूमि
  • D सरफरोशी की तमन्ना
Show answer
Answer: निज जीवन की एक छटा
Why:

इसी नाम से वह पाठकों तक पहुँची।

Q12 पुस्तक छपने पर लोगों में क्या हुआ? advanced
  • A लोग डरकर चुप हो गए और घरों में बैठ गए
  • B लोग डर गए
  • C लोग बँट गए
  • D अंग्रेज़ों के विरुद्ध क्रोध बढ़ गया
Show answer
Answer: अंग्रेज़ों के विरुद्ध क्रोध बढ़ गया
Why:

इसीलिए वह अंग्रेज़ों के लिए खतरा बन गई।

Q13 ‘फाँसी के बाद भी हरा न सके’ का क्या अर्थ है? advanced
  • A उनकी लिखी पुस्तक उनके बाद भी काम करती रही
  • B अंग्रेज़ सरकार ने अंत में सज़ा रोक दी थी
  • C वे फाँसी के फंदे से बचकर निकल गए थे
  • D मुकदमा पूरा होते ही उन्हें छोड़ ही दिया गया था
Show answer
Answer: उनकी लिखी पुस्तक उनके बाद भी काम करती रही
Why:

शरीर समाप्त हो गया, पर उनकी आत्मकथा छपकर लोगों तक पहुँची। विचार को फाँसी नहीं दी जा सकती।

Q14 इस पाठ की विधा पर इन कथनों पर विचार कीजिए। I. आत्मकथा में लेखक अपने ही बारे में लिखता है। II. ‘मेरी माँ’ एक स्वतंत्र कहानी है। III. आत्मकथा लिखते समय बिस्मिल जेल में थे। कौन-से कथन सही हैं? advanced
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

I और III सही हैं। II सही नहीं है: यह पाठ बिस्मिल की आत्मकथा का एक अंश है, गढ़ी हुई कहानी नहीं।

Q15 उन दिनों शाहजहाँपुर में सेवा का एक नया संगठन आरंभ हुआ था। वहाँ क्या शुरू हुआ था? advanced
  • A एक विद्यालय
  • B एक अस्पताल
  • C सेवा-समिति
  • D एक छापाखाना
Show answer
Answer: सेवा-समिति
Why:

बिस्मिल उसमें उत्साह से काम करते थे।

Q16 लखनऊ जाने की बात पर घर में एक मत नहीं था। लखनऊ जाने के विरोध में कौन थे? beginner
  • A उनके साथी
  • B दादीजी और पिताजी
  • C उनके गुरुजी
  • D उनकी माताजी और बहनें
Show answer
Answer: दादीजी और पिताजी
Why:

खर्च अंत में माताजी ने ही दिया।

Q17 एक मुकदमे के सिलसिले में वकील ने बिस्मिल को अपने पास बुलवाया था। वकील ने उन्हें क्यों बुलाया था? intermediate
  • A मुकदमे की सारी बातें समझाने के लिए
  • B गवाही दिलवाने
  • C पैसे लेने
  • D वकालतनामे पर हस्ताक्षर करवाने
Show answer
Answer: वकालतनामे पर हस्ताक्षर करवाने
Why:

पिताजी कह गए थे कि काम बेटे से करा लें।

Q18 बिस्मिल ने हस्ताक्षर करने से मना करते हुए क्या कहा? advanced
  • A कि उन्हें लिखना-पढ़ना अभी आता ही नहीं
  • B कि वे बाद में करेंगे
  • C कि यह धर्म के विरुद्ध और पाप होगा
  • D कि पिताजी से पूछना होगा
Show answer
Answer: कि यह धर्म के विरुद्ध और पाप होगा
Why:

उन्होंने साफ़ शब्दों में मना कर दिया।

Q19 हस्ताक्षर से मना करने पर वकील ने एक हानि की ओर ध्यान दिलाया। वकील ने क्या चेतावनी दी थी? beginner
  • A कि जुर्माना लगेगा
  • B कि उनके पिताजी बहुत नाराज़ होंगे
  • C कि वे जेल जाएँगे
  • D कि मुकदमा खारिज हो जाएगा
Show answer
Answer: कि मुकदमा खारिज हो जाएगा
Why:

फिर भी बिस्मिल पर कोई असर नहीं हुआ।

Q20 अभिकथन: बिस्मिल ने वकालतनामे पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। कारण: वे उसे धर्म के विरुद्ध और पाप मानते थे। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

दोनों सही हैं, और कारण ही उनका चरित्र खोल देता है। मुकदमा खारिज होने का भय भी उन्हें सच से नहीं हटा सका।

Important short questions (6)

रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी थे और उनका जीवनकाल 1897 से 1927 तक रहा। वे अच्छे कवि और लेखक भी थे। केवल तीस साल की उम्र में अंग्रेज़ों ने उन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया।

बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा किन परिस्थितियों में लिखी?

वे जेल में बंद थे और उन पर फाँसी की सज़ा हो चुकी थी। वहीं उन्होंने चोरी-छिपे लिखा, क्योंकि पकड़े जाने का डर हर पल था। लिखे हुए पन्ने वे नज़र बचाकर बाहर भिजवाते रहे।

उस आत्मकथा का अंग्रेज़ों पर क्या असर हुआ?

उनके साथियों ने उसे ‘निज जीवन की एक छटा’ नाम से छपवाया। छपते ही उस पुस्तक ने अंग्रेज़ों के होश उड़ा दिए, क्योंकि लोगों में उनके विरुद्ध क्रोध और बढ़ गया।

आत्मकथा और कहानी में क्या अंतर है?

कहानी में पात्र और घटनाएँ गढ़ी जा सकती हैं। आत्मकथा में लेखक स्वयं अपने बीते जीवन के बारे में लिखता है, इसलिए वहाँ नाम, जगह और घटनाएँ असली होती हैं।

बिस्मिल के घर वालों को उनका कौन-सा काम पसंद नहीं था?

उन्हें लखनऊ कांग्रेस में जाना था, पर दादीजी और पिताजी इसके विरोध में थे। शाहजहाँपुर की सेवा-समिति में उनका उत्साह से काम करना भी उन्हें अच्छा नहीं लगता था।

वकालतनामे वाली घटना संक्षेप में लिखिए।

पिताजी ने किसी पर मुकदमा किया था। जाते समय वे वकील से कह गए कि काम बेटे से करा लें। वकील ने बिस्मिल से पिताजी के हस्ताक्षर बनाने को कहा। उन्होंने उसे पाप बताकर साफ़ मना कर दिया।

Long answer questions (3)

इस आत्मकथा की यात्रा जेल से पाठक तक कैसे पहुँची? पूरा क्रम लिखिए।

बिस्मिल जेल में बंद थे और उन पर फाँसी की सज़ा हो चुकी थी। वहीं रहते हुए उन्होंने चोरी-छिपे अपनी आत्मकथा लिखनी शुरू की। पकड़े जाने का डर हर पल बना रहता था, इसलिए लिखने का काम छिपाकर करना पड़ता था। जो पन्ने तैयार होते, उन्हें वे अंग्रेज़ों की नज़र बचाकर जेल से बाहर भिजवा देते। बाहर उनके साथियों ने उन पन्नों को सँभाला और आगे चलकर पूरी पुस्तक छपवा दी। उसका नाम रखा गया ‘निज जीवन की एक छटा’। छपते ही उसने अंग्रेज़ों के होश उड़ा दिए और लोगों का क्रोध और बढ़ा दिया। इसी कारण कहा जाता है कि फाँसी दे देने के बाद भी वे बिस्मिल को हरा नहीं सके।

वकालतनामे वाली घटना विस्तार से लिखिए और बताइए कि उससे क्या पता चलता है।

बिस्मिल के पिताजी ने किसी पर दीवानी मुकदमा किया था। जाते समय वे वकील से कह गए कि जो काम हो, वह बेटे से करा लें। कुछ दिनों बाद ज़रूरत पड़ने पर वकील ने बिस्मिल को बुलाया और कहा कि वे पिताजी के हस्ताक्षर वकालतनामे पर कर दें। बिस्मिल ने तुरंत मना कर दिया और कहा कि यह धर्म के विरुद्ध होगा, ऐसा पाप वे कभी नहीं कर सकते। वकील ने बहुत समझाया कि ऐसा न करने पर मुकदमा ही खारिज हो जाएगा। फिर भी उन पर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए। इससे पता चलता है कि अपनी ही हानि उठाकर भी वे सच पर टिके रहते थे।

आत्मकथा विधा की पहचान इस पाठ से समझाइए।

आत्मकथा का अर्थ है अपनी ही कथा, जिसमें लेखक स्वयं अपने बीते जीवन के बारे में लिखता है। इस पाठ में यह हर पंक्ति से दिखता है। लेखक अपने लिए ‘मैं’ कहता है, और जब वह सीधे माँ को संबोधित करने लगता है तो ‘तुम’ पर आ जाता है। दूसरी पहचान यह है कि यहाँ कुछ भी गढ़ा हुआ नहीं है। शाहजहाँपुर, लखनऊ, आर्यसमाज और सेवा-समिति जैसे नाम असली हैं, और वकालतनामे वाली घटना भी सचमुच घटी थी। तीसरी बात यह कि लेखक अपनी कमज़ोरियाँ भी छिपाता नहीं, जैसे यह मानना कि माँ का आदेश निभाने के लिए उसे अपनी प्रतिज्ञा तोड़नी पड़ी। कहानी में पात्र गढ़े जा सकते हैं, आत्मकथा में नहीं।

Flashcards (15)

यह पाठ किसकी आत्मकथा से है?
रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की।
बिस्मिल का जीवनकाल?
1897 से 1927 तक।
उन्हें किस आयु में फाँसी दी गई?
तीस वर्ष की आयु में।
उनका प्रसिद्ध तराना कौन-सा है?
‘सरफरोशी की तमन्ना’।
भगत सिंह ने उनके बारे में क्या कहा?
होनहार नौजवान और ग़ज़ब का शायर।
भगत सिंह के अनुसार वे और कहीं जन्म लेते तो?
सेनाध्यक्ष बनते।
आत्मकथा उन्होंने कहाँ लिखी?
जेल में, चोरी-छिपे।
लिखे पन्नों का क्या किया जाता था?
उन्हें बचाकर जेल से बाहर भेजा जाता था।
छपी पुस्तक का नाम?
‘निज जीवन की एक छटा’।
उस पुस्तक का क्या असर हुआ?
अंग्रेज़ों के होश उड़ गए, लोगों का क्रोध बढ़ा।
आत्मकथा किसे कहते हैं?
अपने ही जीवन की कथा को।
शाहजहाँपुर में कौन-सी संस्था शुरू हुई थी?
सेवा-समिति।
लखनऊ जाने का विरोध किसने किया?
दादीजी और पिताजी ने।
वकील ने उनसे क्या करने को कहा?
वकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर बनाने को।
उन्होंने मना क्यों किया?
क्योंकि उन्हें वह धर्म के विरुद्ध और पाप लगा।

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  • आत्मकथा का सफ़र
  • नाम और पहचान
  • बिस्मिल का या पुस्तक का?
  • सच या भ्रम
  • झटपट उत्तर

माँ का अपना सफ़र

ग्यारह साल की एक लड़की जो पढ़ना नहीं जानती थी, और जिसने अपने बल पर पढ़ना सीखकर अपनी बेटियों को पढ़ाया।

What you will be able to do

  • माताजी के जीवन की घटनाओं को क्रम से बताना
  • यह समझाना कि उन्होंने स्वयं को कैसे शिक्षित किया
  • उनके उदार और स्वतंत्र विचारों के प्रमाण पाठ से खोजना
  • शिक्षा के महत्व पर उनकी समझ को अपने शब्दों में बताना

Key points

  • ग्यारह वर्ष की आयु में विवाह होकर माताजी शाहजहाँपुर आईं, और तब उन्होंने पढ़ना-लिखना बिलकुल नहीं सीखा था।

  • दादीजी ने अपनी छोटी बहन को बुलाया, जिन्होंने माताजी को घर का काम सिखाया।

  • थोड़े ही दिनों में माताजी घर का सारा काम और भोजन का प्रबंध सँभालने लगीं।

  • बेटा पैदा होने के पाँच-सात साल बाद उन्होंने हिंदी पढ़नी शुरू की, और यह इच्छा उनके अपने मन से उठी थी।

  • घर आने वाली पढ़ी-लिखी सहेलियों से वे अक्षर सीखतीं और काम निपटाकर बचे समय में अभ्यास करतीं।

  • परिश्रम के फल से वे देवनागरी की पुस्तकें पढ़ने लगीं।

  • अपनी बेटियों को छोटी आयु में माताजी ही पढ़ाया करती थीं।

  • आर्यसमाज में बेटे के जाने के बाद माँ-बेटे में खूब बातचीत होती, और उनके विचार और उदार हो गए।

Full explanation

शुरुआत कहाँ से

माताजी का विवाह ग्यारह वर्ष की आयु में हुआ और वे शाहजहाँपुर आ गईं। उस समय उन्होंने पढ़ना-लिखना बिलकुल नहीं सीखा था, और गाँव की किसी भी लड़की की तरह घर के बाहर की दुनिया उनके लिए नई थी। आज उस उम्र में बच्चे छठी कक्षा में होते हैं, और यहाँ एक लड़की पूरा घर सँभालने चली आई थी।

पहला पड़ाव — घर का काम

यहाँ आने पर दादीजी ने अपनी एक छोटी बहन को बुलवा लिया। उन्हीं से माताजी ने गृहकार्य सीखा, यानी घर चलाने का सारा काम।

जल्दी सीख गईं

कुछ ही समय में उन्होंने घर की हर ज़िम्मेदारी पकड़ ली और रसोई तथा बाकी सब प्रबंध खुद सँभालने लगीं। यहीं से पता चलता है कि सीखने में वे तेज़ थीं।

दूसरा पड़ाव — पढ़ने की इच्छा

बेटा पैदा होने के पाँच-सात साल बीत जाने पर उन्होंने हिंदी पढ़नी शुरू की। सबसे बड़ी बात यह है कि यह शौक उन्हें किसी के कहने पर नहीं, स्वयं पैदा हुआ था।

शिक्षक कौन थीं

मुहल्ले की जो सखी-सहेलियाँ घर आया करती थीं, उनमें से जो पढ़ी-लिखी थीं, माताजी उन्हीं से अक्षर सीखतीं। यानी उनके लिए कोई विद्यालय नहीं था, कोई अलग शिक्षिका नहीं थी।

समय कहाँ से निकाला

दिन भर का काम निपट जाने के बाद जितना समय बचता, वही उनकी पढ़ाई का हिस्सा था। किसी ने उन्हें अलग से समय नहीं दिया; उन्होंने बचे हुए समय से काम चलाया।

परिश्रम का फल

थोड़े ही दिनों में वे देवनागरी की पुस्तकें पढ़ने लगीं। जो शुरुआत अक्षरों की पहचान से हुई थी, वह पूरी किताब पढ़ लेने तक पहुँच गई। यह सफ़र किसी भी विद्यार्थी के लिए लंबा होता है, और उन्होंने इसे बिना किसी विद्यालय के तय किया।

तीसरा पड़ाव — पढ़ाना

अब वे केवल पढ़ने वाली नहीं रहीं। बिस्मिल लिखते हैं कि उनकी बहनों को छोटी आयु में माताजी ही शिक्षा दिया करती थीं। जो उन्होंने कठिनाई से पाया, वह उन्होंने आगे बाँट दिया। इससे एक बात और खुलती है — जो सीखा जाता है, वह रुकता नहीं, आगे बढ़ जाता है।

शिक्षा का महत्व वे समझती थीं

यह बात केवल उनके अपने पढ़ने से नहीं दिखती। दादीजी और पिताजी बेटे के विवाह के लिए बहुत अनुरोध करते थे, पर माताजी का कहना था कि शिक्षा पूरी होने के बाद ही विवाह उचित होगा।

विचार और खुले हुए

जब से बिस्मिल ने आर्यसमाज में प्रवेश किया, माँ-बेटे में खूब बातचीत होने लगी। बिस्मिल लिखते हैं कि पहले की तुलना में अब उनके विचार कुछ और उदार हो गए हैं। यानी पढ़ाई ने उनके भीतर सोचने का ढंग भी बदल दिया।

उदार होने का अर्थ

उदार होना केवल बातों में नहीं था। घर भर के विरोध के बीच लखनऊ जाने का खर्च उन्होंने ही दिया, और बेटे का उत्साह टूटने नहीं दिया।

इसकी कीमत भी चुकाई

इस साथ की कीमत उन्हें चुकानी पड़ती थी। बेटे का उत्साह बनाए रखने के कारण उन्हें अक्सर पिताजी की डाँट-फटकार और दंड तक सहना पड़ता था। फिर भी उन्होंने बेटे का साथ नहीं छोड़ा, और यही उनके चरित्र की सबसे बड़ी बात है।

बेटे की नज़र में

बिस्मिल अपनी माता को देवी कहते हैं। वे लिखते हैं कि उनमें जो जीवन और साहस आया, वह माताजी और गुरुदेव श्री सोमदेव जी की कृपा का ही परिणाम है।

सबसे बड़ी बात

वे यह भी लिखते हैं कि ऐसी माँ न मिली होती तो उनका जीवन भी बाकी लोगों जैसा बीत जाता। बस दुनिया के चक्कर में उलझा हुआ एक साधारण जीवन। यानी उन्हें जो दिशा मिली, वह माँ के कारण मिली। आगे वे कहते हैं कि क्रांति की राह में भी माँ ने उनका वैसा ही साथ दिया, जैसा इटली के मेजिनी को उनकी माता से मिला था।

Concepts and terms

अक्षर-बोध

अक्षरों की पहचान हो जाना, यानी पढ़ने की पहली सीढ़ी। माताजी ने यही अपनी सहेलियों से सीखा, और वहीं से उनका पूरा पढ़ना शुरू हुआ।

देवनागरी

भारत की एक भाषा-लिपि, जिसमें हिंदी, संस्कृत और मराठी जैसी भाषाएँ लिखी जाती हैं। माताजी परिश्रम करके इसी लिपि की पुस्तकें पढ़ने लगी थीं।

आर्यसमाज

महर्षि दयानंद द्वारा स्थापित एक संस्था। बेटे के उसमें जाने के बाद माँ-बेटे में खूब बातचीत होने लगी, जिससे माताजी के विचार और खुले हो गए।

उदार विचार

ऐसी सोच जो पुरानी रोक-टोक से बँधी न हो। माताजी ने विवाह से पहले शिक्षा पर ज़ोर दिया और घर के विरोध के बावजूद बेटे को लखनऊ भेजा।

सावधान!

सच या भ्रम?

असल जीवन: बचे हुए समय का हिसाब

Scenario:

कक्षा छह में शिक्षिका ने एक काम दिया। हर बच्चे को घर के किसी बड़े से पूछना था। पूछना यह था कि वे दिन भर में कौन-कौन से काम करते हैं। और यह भी कि कोई नई चीज़ सीखने का समय उन्हें कब मिलता है। रिया की नानी ने बताया कि वे दोपहर में एक घंटा सिलाई सीखती थीं। तब तक सब काम निपट चुका होता था। अब वे पूरे मुहल्ले के कपड़े सी देती हैं। अमन के पिताजी ने बताया कि वे रात को आधा घंटा एक ऐप से अंग्रेज़ी सीखते हैं। कक्षा में जब सब उत्तर जोड़े गए, तो एक बात सबमें एक जैसी निकली।

Analysis:

वह एक जैसी बात यह थी कि किसी को भी सीखने के लिए खाली दिन नहीं मिला। सबने अपने दिन के बचे हुए टुकड़े से ही समय निकाला — कोई दोपहर का एक घंटा, कोई रात का आधा घंटा। शिक्षिका ने तब पाठ की ओर ध्यान दिलाया, जहाँ बिस्मिल की माताजी भी दिन भर का काम निपटने के बाद बचे समय में ही पढ़ती थीं और उसी से पुस्तकें पढ़ने लगीं। बच्चों ने अंत में अपना-अपना समय-चक्र बनाया और उसमें वह खाली टुकड़ा ढूँढ़ा जो हर दिन बरबाद हो जाता है।

Activity:

अपने एक दिन का समय-चक्र बनाइए और उसमें वे टुकड़े रंग दीजिए जो हर दिन खाली चले जाते हैं। फिर लिखिए कि उनमें से किसी एक टुकड़े में आप कौन-सी नई चीज़ सीखना चाहेंगे और क्यों।

घर पर करके देखो

Title:

घर की एक कहानी

Safety:

यह काम घर के भीतर ही कीजिए; किसी अजनबी से बात न कीजिए।

What You Notice:

लगभग हर घर में कोई न कोई ऐसा है जिसने कुछ अपने बल पर सीखा। सीखने की इच्छा ही सबसे बड़ी शिक्षिका होती है।

Did you know

माताजी ने पढ़ना तब शुरू किया जब वे एक बड़े बेटे और बेटियों की माँ बन चुकी थीं।

उनकी कोई शिक्षिका नहीं थी — मुहल्ले की वही सहेलियाँ पढ़ातीं जो स्वयं पढ़ी-लिखी थीं।

एक शताब्दी पहले लड़कियों की पढ़ाई आम बात नहीं थी, फिर भी वे अपनी बेटियों को स्वयं पढ़ाती थीं।

Memory tricks

माँ का सफ़र — विवाह-गृहकार्य-अक्षर-पुस्तक-पढ़ाना — पाँच पड़ाव, इसी क्रम में।

उनकी पढ़ाई का ढंग — सहेली, बचा समय, अपना शौक — शिक्षक सहेलियाँ, समय काम के बाद, और इच्छा अपनी।

Practice MCQs with answers (20)

Q1 उन दिनों विवाह बहुत छोटी आयु में कर दिया जाता था, यह पाठ से पता चलता है। विवाह के समय माताजी की आयु क्या थी? beginner
  • A चौदह वर्ष
  • B सोलह वर्ष
  • C ग्यारह वर्ष
  • D अठारह वर्ष
Show answer
Answer: ग्यारह वर्ष
Why:

उसी आयु में वे शाहजहाँपुर आ गई थीं।

Q2 शाहजहाँपुर आते समय उनकी शिक्षा कैसी थी? intermediate
  • A उन्होंने पढ़ना-लिखना नहीं सीखा था
  • B वे अच्छी पढ़ी-लिखी थीं
  • C वे केवल गिनती और जोड़-घटाना जानती थीं
  • D वे संस्कृत जानती थीं
Show answer
Answer: उन्होंने पढ़ना-लिखना नहीं सीखा था
Why:

पढ़ाई का पूरा सफ़र उन्होंने बाद में तय किया।

Q3 शाहजहाँपुर आने पर माताजी को घर का काम सिखाने का प्रबंध किया गया। घर का काम सिखाने के लिए किसे बुलाया गया? advanced
  • A पड़ोस की एक महिला को
  • B माताजी की अपनी माँ को
  • C एक नौकरानी को
  • D दादीजी की छोटी बहन को
Show answer
Answer: दादीजी की छोटी बहन को
Why:

यह माताजी के आने के थोड़े दिनों बाद हुआ।

Q4 गृहकार्य सीखने में उन्हें कितना समय लगा? beginner
  • A कई वर्ष
  • B थोड़े ही दिन
  • C पूरा एक जीवन
  • D कुछ महीनों से अधिक
Show answer
Answer: थोड़े ही दिन
Why:

इसके बाद वे भोजन आदि का प्रबंध करने लगीं।

Q5 माताजी ने पढ़ना उस समय आरंभ किया जब घर में बच्चे हो चुके थे। माताजी ने हिंदी पढ़ना कब शुरू किया? intermediate
  • A विवाह से पहले
  • B शाहजहाँपुर आते ही, विवाह के तुरंत बाद
  • C बुढ़ापे में
  • D बेटे के जन्म के पाँच-सात वर्ष बाद
Show answer
Answer: बेटे के जन्म के पाँच-सात वर्ष बाद
Why:

उस समय वे कई बच्चों की माँ बन चुकी थीं।

Q6 पढ़ने की इच्छा माताजी के मन में किसी के कहने से नहीं आई थी। उनका पढ़ने का शौक कैसे जागा? advanced
  • A अपने पति के बार-बार कहने पर
  • B सास के कहने पर
  • C उन्हें स्वयं ही पैदा हुआ
  • D बेटे के कहने पर
Show answer
Answer: उन्हें स्वयं ही पैदा हुआ
Why:

पाठ में यह बात साफ़ शब्दों में कही गई है।

Q7 घर पर आने-जाने वाली स्त्रियों में कुछ पढ़ी-लिखी भी थीं, और उन्हीं से यह काम आरंभ हुआ। माताजी को अक्षर किसने सिखाए? beginner
  • A घर आने वाली पढ़ी-लिखी सहेलियों ने
  • B गाँव के पुराने गुरुजी ने, घर पर आकर
  • C उनके बेटे ने
  • D एक विद्यालय ने
Show answer
Answer: घर आने वाली पढ़ी-लिखी सहेलियों ने
Why:

मुहल्ले की वही सहेलियाँ उनकी शिक्षिकाएँ बनीं।

Q8 दिन भर के काम के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना सरल नहीं था। वे पढ़ने के लिए समय कब निकालतीं? intermediate
  • A सुबह सबसे पहले, सब के उठने से पहले
  • B घर का सब काम निपटाने के बाद
  • C रात भर जागकर
  • D काम के बीच में
Show answer
Answer: घर का सब काम निपटाने के बाद
Why:

उन्हें अलग से कोई समय नहीं दिया गया था।

Q9 कुछ वर्षों के परिश्रम के बाद माताजी की पढ़ाई आगे बढ़ गई थी। परिश्रम के बाद वे क्या करने लगीं? advanced
  • A केवल अपना नाम और पता लिखने भर
  • B देवनागरी की पुस्तकें पढ़ने
  • C अंग्रेज़ी बोलने
  • D कविताएँ लिखने
Show answer
Answer: देवनागरी की पुस्तकें पढ़ने
Why:

शुरुआत अक्षरों की पहचान से हुई थी।

Q10 ‘अक्षर-बोध’ का अर्थ क्या है? beginner
  • A अक्षरों को सुंदर ढंग से लिखना
  • B अक्षर गिनना
  • C अक्षर मिटाना
  • D अक्षरों की पहचान हो जाना
Show answer
Answer: अक्षरों की पहचान हो जाना
Why:

यह पढ़ने की पहली सीढ़ी होती है।

Q11 बिस्मिल की बहनों को आरंभिक शिक्षा किसने दी? intermediate
  • A गाँव के गुरुजी ने
  • B दादीजी ने
  • C माताजी ने
  • D पिताजी ने
Show answer
Answer: माताजी ने
Why:

जो उन्होंने कठिनाई से पाया, वह आगे बाँट दिया।

Q12 माताजी के विचारों पर इन कथनों पर विचार कीजिए। I. वे शिक्षा पूरी होने के बाद ही विवाह के पक्ष में थीं। II. उन्होंने पढ़ना-लिखना विवाह से पहले ही सीख लिया था। III. बिस्मिल की बहनों को आरंभिक शिक्षा उन्होंने ही दी। कौन-से कथन सही हैं? advanced
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

I और III सही हैं। II सही नहीं है: शाहजहाँपुर आते समय वे पढ़ना-लिखना नहीं जानती थीं; वह उन्होंने बाद में सीखा।

Q13 आर्यसमाज में जाने के बाद माँ-बेटे के बीच क्या हुआ? beginner
  • A बातचीत बंद हो गई
  • B झगड़ा होने लगा
  • C खूब बातचीत होने लगी
  • D चिट्ठियाँ चलने लगीं
Show answer
Answer: खूब बातचीत होने लगी
Why:

इसी से उनके विचार और उदार हुए।

Q14 ‘उदार विचार’ का क्या अर्थ है? advanced
  • A वह सोच जो पुरानी रोक-टोक से बँधी न हो
  • B अपने धन का बहुत बड़ा भाग खर्च कर देना
  • C हर किसी की हर बात चुपचाप मान लेना
  • D किसी भी बात पर कुछ न बोलकर चुप रहना
Show answer
Answer: वह सोच जो पुरानी रोक-टोक से बँधी न हो
Why:

उदार का अर्थ खुला है। माताजी का बेटी को पढ़ाना और बेटे को आगे बढ़ने देना, दोनों इसी खुलेपन से आए।

Q15 लखनऊ जाने के लिए धन की आवश्यकता थी और पिताजी इसके विरुद्ध थे। लखनऊ जाने का खर्च किसने दिया? advanced
  • A पिताजी ने
  • B दादीजी ने
  • C उनके साथियों ने
  • D माताजी ने
Show answer
Answer: माताजी ने
Why:

घर के बाकी लोग इसके विरोध में थे।

Q16 अभिकथन: माताजी ने बेटे को लखनऊ जाने का खर्च स्वयं दिया। कारण: बेटे का उत्साह बनाए रखने के लिए वे पिताजी की डाँट सहने को तैयार थीं। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

दोनों सही हैं, और कारण ही उनके साहस का माप है। उन्होंने सहायता चुपचाप नहीं, कीमत चुकाकर दी।

Q17 बिस्मिल ने अपनी माता को किस नाम से पुकारा है? intermediate
  • A गुरु
  • B देवी
  • C मित्र
  • D रानी
Show answer
Answer: देवी
Why:

यह शब्द उन्होंने बड़े आदर से लिखा है।

Q18 बिस्मिल के जीवन और साहस का श्रेय किसे है? advanced
  • A केवल पिताजी को
  • B माताजी और गुरुदेव सोमदेव जी को
  • C केवल उनके क्रांतिकारी साथियों को
  • D केवल उनकी पढ़ाई को
Show answer
Answer: माताजी और गुरुदेव सोमदेव जी को
Why:

यह उन्होंने स्वयं आत्मकथा में लिखा है।

Q19 बिस्मिल अपनी माँ की सहायता को इटली की एक माता की सहायता जैसा बताते हैं। माँ की सहायता की तुलना उन्होंने किससे की? beginner
  • A गुरु गोबिंद सिंह की माता से
  • B भगत सिंह की माता से
  • C महर्षि दयानंद की माता से
  • D मेजिनी की माता से
Show answer
Answer: मेजिनी की माता से
Why:

मेजिनी इटली के एक नेता थे।

Q20 माताजी के जीवन से सबसे बड़ी सीख कौन-सी मिलती है? intermediate
  • A सीखने की कोई उम्र नहीं होती
  • B घर का काम सबसे ज़रूरी है
  • C शिक्षा केवल विद्यालय में मिलती है
  • D बड़ों की हर बात माननी चाहिए
Show answer
Answer: सीखने की कोई उम्र नहीं होती
Why:

उन्होंने माँ बनने के बाद पढ़ना शुरू किया था।

Important short questions (6)

माताजी शाहजहाँपुर कब और किस स्थिति में आईं?

ग्यारह वर्ष की आयु में विवाह होकर वे शाहजहाँपुर आईं। उस समय उन्होंने पढ़ना-लिखना बिलकुल नहीं सीखा था और घर चलाने का काम भी उन्हें नहीं आता था।

उन्होंने स्वयं को परिवार के अनुकूल कैसे ढाला?

दादीजी ने अपनी छोटी बहन को बुलाया, जिन्होंने उन्हें गृहकार्य सिखाया। कुछ ही समय में उन्होंने घर की हर ज़िम्मेदारी पकड़ ली और रसोई तथा बाकी प्रबंध सँभालने लगीं।

माताजी ने पढ़ना कैसे सीखा?

पढ़ने की इच्छा उन्हें स्वयं हुई थी। घर आने वाली सहेलियों में से जो पढ़ी-लिखी थीं, उन्हीं से वे अक्षर सीखतीं। दिन भर का काम निपट जाने के बाद जितना बचता, उसी में अभ्यास करतीं।

शिक्षा के महत्व की उनकी समझ किन दो बातों से दिखती है?

पहली, उन्होंने माँ बनने के बाद भी स्वयं पढ़ना शुरू किया और पुस्तकें पढ़ने तक पहुँचीं। दूसरी, उन्होंने अपनी बेटियों को स्वयं पढ़ाया और बेटे के विवाह से पहले शिक्षा पूरी होने पर ज़ोर दिया।

माताजी को उदार विचारों वाली क्यों कहा जा सकता है?

घर भर के विरोध के बीच उन्होंने बेटे को लखनऊ जाने का खर्च दिया और उसका उत्साह टूटने नहीं दिया। आर्यसमाज की बातचीत के बाद बिस्मिल लिखते हैं कि उनके विचार और भी उदार हो गए।

माताजी ने बेटे का साथ देने की क्या कीमत चुकाई?

बेटे का उत्साह बनाए रखने के कारण उन्हें अक्सर पिताजी की डाँट-फटकार सहनी पड़ती थी। कई बार तो उन्हें दंड तक सहन करना पड़ता था, फिर भी उन्होंने साथ नहीं छोड़ा।

Long answer questions (3)

माताजी के जीवन के पड़ावों को क्रम से लिखिए।

पहला पड़ाव विवाह का है। ग्यारह वर्ष की आयु में वे शाहजहाँपुर आईं और तब उन्होंने पढ़ना-लिखना बिलकुल नहीं सीखा था। दूसरा पड़ाव गृहकार्य का है। दादीजी की छोटी बहन ने उन्हें घर का काम सिखाया, और थोड़े ही दिनों में वे सारा प्रबंध सँभालने लगीं। तीसरा पड़ाव पढ़ाई का है। बेटे के जन्म के पाँच-सात वर्ष बाद उन्होंने हिंदी पढ़ना शुरू किया, और यह इच्छा उन्हें स्वयं हुई थी। चौथा पड़ाव पुस्तकों तक पहुँचने का है, क्योंकि परिश्रम से वे देवनागरी की किताबें पढ़ने लगीं। पाँचवाँ पड़ाव पढ़ाने का है, जब उन्होंने अपनी बेटियों को स्वयं शिक्षा देनी शुरू की।

बिना विद्यालय गए माताजी ने शिक्षा कैसे पाई? विस्तार से लिखिए।

उनके पास न कोई विद्यालय था, न कोई अलग शिक्षिका। सबसे पहले उनके भीतर पढ़ने की इच्छा जागी, और वह भी किसी के कहने पर नहीं। इसके बाद उन्होंने अपने आसपास ही शिक्षक ढूँढ़ लिए। मुहल्ले की जो सहेलियाँ घर आया करती थीं, उनमें से जो पढ़ी-लिखी थीं, उन्हीं से वे अक्षर सीखने लगीं। समय भी उन्हें किसी ने अलग से नहीं दिया। दिन भर का काम निपट जाने के बाद जितना बचता, वही उनकी पढ़ाई का समय था। इसी लगातार परिश्रम का फल यह निकला कि थोड़े ही दिनों में वे देवनागरी की पुस्तकें पढ़ने लगीं। आगे चलकर उन्होंने यही शिक्षा अपनी बेटियों को भी दी।

माताजी बिस्मिल के जीवन में कितनी बड़ी शक्ति थीं? उदाहरण देकर बताइए।

बिस्मिल अपनी माता को देवी कहते हैं और लिखते हैं कि उनमें जो जीवन और साहस आया, वह माताजी तथा गुरुदेव सोमदेव जी की कृपा का परिणाम है। इसके प्रमाण पूरे पाठ में बिखरे हैं। घर भर के विरोध के बीच लखनऊ जाने का खर्च उन्होंने ही दिया। बेटे का उत्साह उन्होंने कभी टूटने नहीं दिया, चाहे इसके लिए उन्हें पिताजी की डाँट और दंड सहना पड़ा। विवाह के दबाव के सामने उन्होंने शिक्षा को पहले रखा। उनके प्रोत्साहन से बिस्मिल में वह दृढ़ता आई कि संकट के समय भी उन्होंने अपना संकल्प नहीं छोड़ा। वे स्वयं लिखते हैं कि ऐसी माता न मिलतीं तो वे भी एक साधारण जीवन बिता देते।

Flashcards (15)

विवाह के समय माताजी की आयु?
ग्यारह वर्ष।
वे विवाह के बाद कहाँ आईं?
शाहजहाँपुर।
उस समय उनकी पढ़ाई कितनी थी?
उन्होंने पढ़ना-लिखना बिलकुल नहीं सीखा था।
घर का काम उन्हें किसने सिखाया?
दादीजी की छोटी बहन ने।
उन्होंने पढ़ना कब शुरू किया?
बेटे के जन्म के पाँच-सात वर्ष बाद।
पढ़ने की इच्छा किसने जगाई?
किसी ने नहीं, वह उन्हें स्वयं हुई।
उन्हें अक्षर किसने सिखाए?
घर आने वाली पढ़ी-लिखी सहेलियों ने।
पढ़ने का समय कहाँ से निकलता था?
घर का सब काम निपटाने के बाद जो बचता।
परिश्रम का क्या फल निकला?
वे देवनागरी की पुस्तकें पढ़ने लगीं।
बहनों को किसने पढ़ाया?
माताजी ने स्वयं।
विवाह के बारे में माताजी का मत?
शिक्षा पूरी होने के बाद ही उचित होगा।
आर्यसमाज के बाद क्या बदला?
माँ-बेटे में खूब बातचीत हुई, विचार और उदार हुए।
साथ देने की कीमत क्या थी?
पिताजी की डाँट-फटकार और दंड सहना।
बिस्मिल ने माँ को क्या कहा?
देवी।
उनके जीवन और साहस का श्रेय किन्हें?
माताजी और गुरुदेव सोमदेव जी को।

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  • माँ के सफ़र का क्रम
  • शब्द और अर्थ
  • पहले का या बाद का?
  • सच या भ्रम
  • झटपट उत्तर

बेटे का पत्र और पाठ की भाषा

आत्मकथा का वह हिस्सा जहाँ बेटा सीधे माँ से बात करने लगता है, और उस भाषा की बातें — जुड़े हुए शब्द, विशेषण और चार नाम।

What you will be able to do

  • अंतिम भाग में बेटा माँ से जो कहता है, उसे क्रम से बताना
  • माँ के सबसे बड़े आदेश और उसकी कठिनाई को समझाना
  • जुड़े हुए शब्दों और विशेषणों को पाठ में पहचानना
  • पाठ में आए चार नामों का परिचय देना

Key points

  • पाठ के अंतिम भाग में लेखक ‘मैं’ से हटकर सीधे ‘तुम’ पर आ जाता है और माँ को संबोधित करने लगता है।

  • वे माँ को जन्मदात्री और जीवनदात्री कहते हैं और मानते हैं कि उनका ॠण अनेक जन्मों में भी नहीं चुकेगा।

  • माँ का सबसे बड़ा आदेश यह था कि किसी का प्राण न जाए, शत्रु का भी नहीं।

  • उस आदेश को निभाने के लिए बिस्मिल को दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा तोड़नी पड़ी।

  • उनकी एक ही इच्छा बची थी कि एक बार माँ के चरणों की सेवा कर लें, पर वे जानते थे कि यह पूरी न होगी।

  • वे माँ से धैर्य रखने को कहते हैं और गुरु गोबिंद सिंह जी की धर्मपत्नी का उदाहरण देते हैं।

  • ‘अक्षर-बोध’ और ‘पढ़ना-लिखना’ जैसे शब्द दो शब्दों को मिलाकर बने हैं, जिससे समय, स्याही और कागज़ बचते हैं।

  • पाठ में देवनागरी, आर्यसमाज, मेजिनी और गुरु गोबिंद सिंह — चार नाम आए हैं, जिनका अपना-अपना संदर्भ है।

Full explanation

भाषा अचानक बदल जाती है

पाठ का बड़ा हिस्सा ‘मैं’ में चलता है। फिर एक जगह आकर लेखक रुकता है और सीधे ‘तुम’ पर आ जाता है। यहीं से आत्मकथा एक पत्र जैसी लगने लगती है, जो माँ के नाम लिखा गया हो।

माँ को क्या-क्या कहा

वे माँ को जन्मदात्री और जीवनदात्री कहकर पुकारते हैं। दोनों शब्दों का अर्थ है जीवन देने वाली, पर उनमें जो आदर है वह ‘माँ’ शब्द से भी आगे जाता है।

जो ॠण चुकाया नहीं जा सकता

वे लिखते हैं कि इस जीवन में तो उनका ॠण उतारने का अवसर भी नहीं मिला। इस जन्म में तो क्या, अनेक जन्मों में भी प्रयत्न करें तो भी वे उऋण नहीं हो सकते।

सारा श्रेय माँ को

वे गिनाते हैं कि जो कुछ उन्हें मिला, माँ के कारण मिला। देश-सेवा में वे माँ की दया से लग सके। धार्मिक जीवन में माँ के प्रोत्साहन ने सहायता दी। जो शिक्षा उन्होंने पाई, उसका श्रेय भी माँ को ही है।

डाँट का ढंग

एक छोटी-सी बात वे विशेष रूप से याद करते हैं। माँ को कभी उन्हें ताड़ना भी देनी हुई, तो उन्होंने बड़े स्नेह से हर बात समझा दी। माँ का ढंग इससे भी नहीं बदला। बेटे की धृष्टता के जवाब में भी उनके शब्द स्नेह से भरे रहे, और कहा इतना ही — मन का करो, पर अंजाम भला न निकलेगा।

सबसे बड़ा आदेश

माँ का सबसे बड़ा आदेश यह था कि किसी का प्राण न जाए। वे कहती थीं कि दुश्मन के साथ भी ऐसा मत करना। एक क्रांतिकारी के लिए इससे कठिन वचन और कोई नहीं हो सकता था।

उसकी कीमत

बिस्मिल स्वयं मानते हैं कि यह आदेश निभाने के लिए उन्हें मजबूरी में एक-दो बार अपना ही वचन तोड़ना पड़ा। यानी माँ का कहा उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा से भी ऊपर रखा।

बची हुई एक इच्छा

वे कहते हैं कि उन्हें इस संसार में किसी भोग-विलास या ऐश्वर्य की इच्छा नहीं। बस एक इच्छा है — एक बार श्रद्धा से माँ के चरणों की सेवा करके अपना जीवन सफल कर लें।

जो पूरी न होगी

पर वे जानते हैं कि यह इच्छा पूरी होती नहीं दिखती, और माँ को उनकी मृत्यु की खबर सुनाई जाएगी। इसी जगह पूरा पाठ सबसे भारी हो जाता है।

माँ से धैर्य की विनती

वे माँ से धैर्य रखने को कहते हैं। उनका पुत्र भारत माता की सेवा में अपना जीवन दे गया। उसने माँ का नाम नीचा नहीं किया। वह अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहा।

इतिहास के पन्ने पर

वे यह भी कहते हैं कि आज़ाद भारत का इतिहास जब लिखा जाएगा, तब उसके किसी पन्ने पर चमकते अक्षरों में माँ का नाम भी आएगा।

एक उदाहरण

धैर्य की बात समझाने के लिए वे गुरु गोबिंद सिंह जी की धर्मपत्नी का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने पुत्रों के बलिदान की खबर सुनकर मिठाई बाँटी थी।

अंतिम वर

अंत में वे माँ से एक ही वर माँगते हैं। वह यह कि अंतिम समय भी उनका हृदय विचलित न हो। वे माँ के चरणों को प्रणाम करके, परमात्मा का स्मरण करते हुए शरीर त्यागना चाहते हैं।

जुड़े हुए शब्द

अब भाषा की एक बात। पाठ में ‘अक्षर-बोध’ का अर्थ है अक्षरों का बोध, और ‘पढ़ना-लिखना’ का अर्थ है पढ़ना और लिखना। दो शब्द मिलाकर एक बना दिए गए हैं। पाठ बताता है कि ऐसा करने से समय, स्याही और कागज़ की बचत होती है, और संक्षेप में कहना मनुष्य का स्वभाव भी है।

विशेषण और चार नाम

पाठ में विशेषण भी बहुत हैं — मंगलमयी, महान, साधारण, स्वाधीन, दुखभरी। साथ ही चार नाम आते हैं जिनका संदर्भ जान लेना चाहिए। देवनागरी भारत की एक भाषा-लिपि है, जिसमें हिंदी, संस्कृत और मराठी लिखी जाती हैं। आर्यसमाज महर्षि दयानंद की स्थापित एक संस्था है। मेजिनी इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल के सेनापति थे, जिन्होंने वहाँ के लोगों को एक सूत्र में बाँधा। गुरु गोबिंद सिंह जी सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे, जिन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।

Concepts and terms

संबोधन

किसी को सीधे पुकारना। पाठ के अंतिम भाग में लेखक माँ को जन्मदात्री और जीवनदात्री कहकर पुकारता है, जिससे आत्मकथा अचानक एक पत्र जैसी लगने लगती है।

उऋण होना

किसी का कर्ज़ पूरी तरह चुका देना। बिस्मिल कहते हैं कि माँ के ॠण से वे अनेक जन्मों में भी उऋण नहीं हो सकते, यानी वह कर्ज़ अपार है।

संक्षेपीकरण

शब्दों को मिलाकर छोटा कर देना, जैसे अक्षर-बोध और पढ़ना-लिखना। पाठ कहता है कि इससे समय, स्याही और कागज़ बचते हैं और यह मनुष्य का स्वभाव भी है।

विशेषण

वह शब्द जो किसी की विशेषता या गुण बताए। पाठ में मंगलमयी, महान, साधारण और स्वाधीन जैसे अनेक विशेषण आए हैं।

सावधान!

सच या भ्रम?

Case Study

Scenario:

पाठ के उस हिस्से में बेटा सीधे माँ से बात करने लगता है। कक्षा ने पहले उसे वैसे ही पढ़ा। फिर उन्होंने वही हिस्सा तीसरे पुरुष में बदलकर पढ़ा। बदला हुआ रूप किसी ख़बर जैसा लगा। मूल रूप में एक पुकार सुनाई देती है। सना ने कहा कि सीधे बात करने से दूरी मिट जाती है। अध्यापिका ने कक्षा से एक काम कराया। हर बच्चे ने अपने किसी बड़े को चार पंक्तियों की चिट्ठी लिखी। उन्होंने देखा कि आप लिखते ही भाषा अपने आप नरम हो जाती है।

Analysis:

वही शब्द तीसरे पुरुष में ख़बर बन जाते हैं और सीधे संबोधन में पुकार। किसे संबोधित किया जा रहा है, यही भाषा का तापमान तय करता है।

Activity:

अपने किसी बड़े को चार पंक्तियों की चिट्ठी लिखो। फिर उसी बात को ख़बर की तरह लिखकर अंतर बताओ।

घर पर करके देखो

Title:

अपने घर के जुड़े शब्द

Safety:

यह काम केवल सुनने और लिखने का है; किसी की बात बीच में मत काटो।

What You Notice:

ऐसे शब्द बोलचाल में बहुत मिलते हैं। इससे समझ आता है कि संक्षेप में कहना सचमुच मनुष्य का स्वभाव है।

Did you know

पाठ के अंत में दी गई ‘ऐ मातृभूमि’ रचना भी बिस्मिल की ही लिखी हुई है।

‘मेजिनी’ को इटली का मसीहा कहा जाता था, क्योंकि उन्होंने वहाँ के लोगों को एक सूत्र में बाँधा।

गुरु गोबिंद सिंह जी सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे, जिन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।

Memory tricks

पत्र में क्या-क्या है — ॠण-श्रेय-इच्छा-धैर्य-वर — न चुकने वाला ॠण, माँ को श्रेय, एक बची इच्छा, धैर्य की बात, और अंतिम वर।

चार नाम — लिपि-संस्था-इटली-गुरु — देवनागरी लिपि, आर्यसमाज संस्था, मेजिनी इटली के, गोबिंद सिंह दसवें गुरु।

Practice MCQs with answers (20)

Q1 पाठ के अंतिम भाग में भाषा में क्या बदलाव आता है? beginner
  • A लेखक सीधे माँ से बात करने लगता है
  • B लेखक अचानक कविता की पंक्तियाँ लिखने लगता है
  • C कोई तीसरा व्यक्ति पूरी कथा सुनाने लगता है
  • D भाषा कठिन हो जाती है
Show answer
Answer: लेखक सीधे माँ से बात करने लगता है
Why:

‘मैं’ से हटकर वह ‘तुम’ पर आ जाता है।

Q2 अंतिम भाग में बिस्मिल अपनी माँ को कई नामों से पुकारते हैं। माँ के लिए इनमें कौन-सा संबोधन पाठ में आया है? intermediate
  • A गुरुदेव
  • B सेनानी
  • C जन्मदात्री
  • D मंगलमूर्ति
Show answer
Answer: जन्मदात्री
Why:

जीवनदात्री भी उन्होंने कहा है।

Q3 माँ के ॠण की बात करते समय पाठ में एक कठिन शब्द आता है। ‘उऋण’ शब्द का अर्थ क्या है? advanced
  • A कर्ज़ लेना
  • B कर्ज़ से मुक्त हो जाना
  • C किसी और का कर्ज़ अपने ऊपर ले लेना
  • D कर्ज़ भूल जाना
Show answer
Answer: कर्ज़ से मुक्त हो जाना
Why:

वे कहते हैं कि वे कभी उऋण नहीं हो सकते।

Q4 बिस्मिल के अनुसार माँ का ॠण कितने समय में चुक सकता है? beginner
  • A कुछ ही वर्षों की सेवा करने से
  • B इसी जन्म में
  • C एक जन्म और में
  • D अनेक जन्मों में भी नहीं
Show answer
Answer: अनेक जन्मों में भी नहीं
Why:

उन्हें इस जीवन में प्रयत्न का अवसर तक नहीं मिला।

Q5 देश-सेवा के मार्ग पर आने का कारण बिस्मिल अपने में नहीं देखते। इसका श्रेय वे किसे देते हैं? intermediate
  • A अपने साथियों के सहयोग को
  • B अपनी माँ की दया को
  • C अपने गुरुजी को
  • D अपने पिताजी को
Show answer
Answer: अपनी माँ की दया को
Why:

धार्मिक जीवन और शिक्षा का श्रेय भी वे माँ को देते हैं।

Q6 बेटे के कठोर उत्तर पर भी माँ ने क्रोध नहीं किया। कठोर उत्तर मिलने पर माँ क्या करती थीं? advanced
  • A प्रेम से समझा देती थीं
  • B चुप हो जाती थीं
  • C पिताजी से शिकायत कर देती थीं
  • D घर से निकाल देती थीं
Show answer
Answer: प्रेम से समझा देती थीं
Why:

वे कहतीं कि जो अच्छा लगे वह करो, पर परिणाम अच्छा न होगा।

Q7 माँ ने बेटे को एक बात की प्रतिज्ञा करा ली थी, जो सबसे बड़ी थी। माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था? beginner
  • A हर हाल में सदा सच बोलना
  • B खूब पढ़ना
  • C किसी का प्राण न लेना
  • D घर न छोड़ना
Show answer
Answer: किसी का प्राण न लेना
Why:

वे शत्रु को भी प्राणदंड देने से रोकती थीं।

Q8 अभिकथन: माँ का आदेश एक क्रांतिकारी के लिए निभाना कठिन था। कारण: उसकी राह में हिंसा बार-बार सामने आ जाती थी। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

दोनों सही हैं, और कारण ही उनकी कठिनाई है। वे स्वयं लिखते हैं कि दो-एक बार उन्हें वह प्रतिज्ञा तोड़नी पड़ी।

Q9 आदेश निभाने के लिए बिस्मिल को क्या करना पड़ा? advanced
  • A घर लौटना पड़ा
  • B दो-एक बार प्रतिज्ञा तोड़नी पड़ी
  • C साथी छोड़ने पड़े
  • D अपनी आत्मकथा लिखना रोक देना पड़ा
Show answer
Answer: दो-एक बार प्रतिज्ञा तोड़नी पड़ी
Why:

उन्होंने इसे स्वयं मजबूरी बताया है।

Q10 बिस्मिल को किस चीज़ की इच्छा नहीं थी? beginner
  • A माँ की सेवा की
  • B भोग-विलास और ऐश्वर्य की
  • C देश की स्वतंत्रता देखने की
  • D सच बोलने की
Show answer
Answer: भोग-विलास और ऐश्वर्य की
Why:

उनकी केवल एक इच्छा बची थी।

Q11 जेल में बिस्मिल को किसी सुख की चाह नहीं थी, केवल एक इच्छा शेष थी। उनकी वह एक इच्छा क्या थी? intermediate
  • A एक बार माँ के चरणों की सेवा करना
  • B एक बार घर लौटना
  • C एक बार लखनऊ जाकर साथियों से मिलना
  • D एक और पुस्तक लिखना
Show answer
Answer: एक बार माँ के चरणों की सेवा करना
Why:

वे जानते थे कि यह पूरी नहीं होगी।

Q12 माँ को धैर्य देने के लिए वे क्या कहते हैं? advanced
  • A कि वे जल्दी लौट आएँगे
  • B कि अंग्रेज़ सरकार जल्दी ही उनकी सज़ा माफ़ कर देगी
  • C कि उनका पुत्र भारत माता की सेवा में जीवन दे गया
  • D कि उन्हें कोई कष्ट नहीं हुआ
Show answer
Answer: कि उनका पुत्र भारत माता की सेवा में जीवन दे गया
Why:

वे यह भी कहते हैं कि वे अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहे।

Q13 बिस्मिल माँ को धैर्य देने के लिए सिखों के इतिहास का उदाहरण देते हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी की धर्मपत्नी ने पुत्रों के बलिदान पर क्या किया? beginner
  • A घर छोड़ दिया
  • B चुप रह गईं
  • C मिठाई बाँटी
  • D युद्ध किया
Show answer
Answer: मिठाई बाँटी
Why:

बिस्मिल ने यही उदाहरण धैर्य के लिए दिया।

Q14 स्वाधीन भारत के इतिहास के बारे में बिस्मिल क्या कहते हैं? advanced
  • A कि उसके किसी पृष्ठ पर उनकी माँ का नाम भी होगा
  • B कि उसमें उनका अपना नाम सबसे ऊपर लिखा जाएगा
  • C कि उसमें जेल के दिनों का पूरा वर्णन होगा
  • D कि उसे लिखने वाला कोई भी नहीं मिलेगा
Show answer
Answer: कि उसके किसी पृष्ठ पर उनकी माँ का नाम भी होगा
Why:

वे अपने लिए कुछ नहीं माँगते। उनके लिए माँ का नाम इतिहास में आना ही सबसे बड़ी बात है।

Q15 अंत में बिस्मिल माँ से क्या माँगते हैं? advanced
  • A धन-संपत्ति
  • B जेल से छूटकर घर लौटने का वर
  • C लंबी आयु
  • D अंतिम समय हृदय विचलित न हो
Show answer
Answer: अंतिम समय हृदय विचलित न हो
Why:

वे परमात्मा का स्मरण करते हुए शरीर त्यागना चाहते थे।

Q16 पाठ के अंतिम भाग और उसकी भाषा पर इन कथनों पर विचार कीजिए। I. अंतिम भाग में लेखक सीधे अपनी माँ से बात करने लगते हैं। II. बिस्मिल माँ का ॠण इसी जन्म में चुका देना चाहते हैं। III. ‘पढ़ना-लिखना’ दो शब्द मिलाकर बना है। कौन-से कथन सही हैं? advanced
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

I और III सही हैं। II सही नहीं है: वे कहते हैं कि यह ॠण अनेक जन्मों में भी नहीं चुकाया जा सकता।

Q17 शब्दों को जोड़कर छोटा करने से क्या बचता है? intermediate
  • A केवल लिखने वाला कागज़
  • B केवल समय
  • C केवल स्याही
  • D समय, स्याही और कागज़
Show answer
Answer: समय, स्याही और कागज़
Why:

पाठ इसे मनुष्य का स्वभाव भी कहता है।

Q18 कक्षा में पाठ के शब्दों को संज्ञा और विशेषण में बाँटा जा रहा है। इनमें कौन-सा शब्द विशेषण है? advanced
  • A शाहजहाँपुर
  • B मंगलमयी
  • C आत्मकथा
  • D प्रतिज्ञा
Show answer
Answer: मंगलमयी
Why:

यह माँ की मूर्ति के लिए आया है।

Q19 बिस्मिल जिस समाज से जुड़े, उसकी स्थापना उनसे बहुत पहले हुई थी। ‘आर्यसमाज’ की स्थापना किसने की? beginner
  • A गुरु गोबिंद सिंह ने
  • B मेजिनी ने
  • C बिस्मिल ने
  • D महर्षि दयानंद ने
Show answer
Answer: महर्षि दयानंद ने
Why:

यह पाठ की मिलान-सूची में दिया गया है।

Q20 ‘मेजिनी’ के बारे में क्या सही है? intermediate
  • A वे एक संस्था के संस्थापक थे
  • B वे सिखों के गुरु थे
  • C वे एक भाषा-लिपि का नाम हैं जिसमें हिंदी लिखी जाती है
  • D वे इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल के सेनापति थे
Show answer
Answer: वे इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल के सेनापति थे
Why:

उन्होंने वहाँ के लोगों को एक सूत्र में बाँधा।

Important short questions (6)

पाठ के अंतिम भाग में भाषा कैसे बदल जाती है?

उससे पहले तक लेखक अपने लिए ‘मैं’ कहता है। अंतिम भाग में वह सीधे माँ को ‘तुम’ कहकर संबोधित करने लगता है। इससे आत्मकथा अचानक एक पत्र जैसी लगने लगती है।

माँ के ॠण के बारे में बिस्मिल क्या कहते हैं?

वे कहते हैं कि इस जीवन में तो उनका ॠण उतारने का अवसर ही नहीं मिला। अनेक जन्मों में भी प्रयत्न करें, तब भी वे उऋण नहीं हो सकते। यानी वह कर्ज़ अपार है।

माँ के सबसे बड़े आदेश की कठिनाई क्या थी?

आदेश यह था कि किसी का प्राण न जाए, शत्रु का भी नहीं। बिस्मिल की राह क्रांति की थी, जिसमें हिंसा सामने आती ही है। इसीलिए उन्हें उस आदेश को निभाने के लिए अपनी प्रतिज्ञा दो-एक बार तोड़नी पड़ी।

बिस्मिल माँ से धैर्य रखने के लिए क्या-क्या कहते हैं?

वे कहते हैं कि माँ धैर्य रखें। उनका पुत्र भारत माता की सेवा में जीवन दे गया। वह अपनी प्रतिज्ञा पर अंत तक दृढ़ रहा। इसी बात के लिए वे गुरु गोबिंद सिंह जी की धर्मपत्नी का उदाहरण भी देते हैं।

जुड़े हुए शब्द किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए।

जब दो शब्दों को मिलाकर एक छोटा रूप बना लिया जाता है, उसे जुड़ा हुआ शब्द कहते हैं। ‘अक्षर-बोध’ का अर्थ है अक्षरों का बोध, और ‘पढ़ना-लिखना’ का अर्थ है पढ़ना और लिखना।

‘आर्यसमाज’ और ‘गुरु गोबिंद सिंह’ के बारे में एक-एक वाक्य लिखिए।

आर्यसमाज महर्षि दयानंद द्वारा स्थापित एक संस्था है। गुरु गोबिंद सिंह जी सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे, जिन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की थी।

Long answer questions (3)

पाठ के अंतिम भाग में बेटा माँ से जो कहता है, उसे क्रम से लिखिए।

वह पहले माँ को जन्मदात्री कहकर पुकारता है। वह मानता है कि उनका ॠण अनेक जन्मों में भी नहीं चुक सकता। फिर वह गिनाता है कि जो कुछ उसे मिला, माँ के कारण मिला। देश-सेवा, धार्मिक जीवन और शिक्षा, तीनों का श्रेय वह माँ को देता है। इसके बाद वह याद करता है कि माँ डाँटते समय भी स्नेह से समझाती थीं। आगे वह कहता है कि उसे किसी भोग-विलास की इच्छा नहीं। बस एक बार माँ के चरणों की सेवा करना चाहता है। अंत में वह माँ से धैर्य रखने को कहता है। वह गुरु गोबिंद सिंह जी की धर्मपत्नी का उदाहरण देता है। और यही वर माँगता है कि अंतिम समय उसका हृदय विचलित न हो।

इस पाठ में माँ का चरित्र कैसा उभरता है? उदाहरण देकर लिखिए।

सबसे पहले वे साहस देने वाली हैं। घर भर के विरोध के बीच उन्होंने बेटे को लखनऊ जाने का खर्च दिया और उसका उत्साह टूटने नहीं दिया, चाहे इसके लिए उन्हें डाँट और दंड सहना पड़ा। दूसरी बात यह कि वे समझाने वाली हैं। ताड़ना देनी हुई तब भी उन्होंने स्नेह से बात कही, और कठोर उत्तर मिलने पर भी प्रेम भरे शब्दों में ही समझाया। तीसरी बात उनकी दया है, क्योंकि उनका सबसे बड़ा आदेश यही था कि किसी का प्राण न जाए, शत्रु का भी नहीं। चौथी बात उनकी दूरदृष्टि है, जो विवाह से पहले शिक्षा पर उनके ज़ोर में दिखती है। इन्हीं गुणों के कारण बिस्मिल उन्हें देवी कहते हैं।

पाठ में आए चार नामों का परिचय दीजिए।

पहला नाम देवनागरी है। यह भारत की एक भाषा-लिपि है, जिसमें हिंदी, संस्कृत और मराठी लिखी जाती हैं। माताजी इसी लिपि की पुस्तकें पढ़ने लगी थीं। दूसरा नाम आर्यसमाज है, जो महर्षि दयानंद की स्थापित एक संस्था है। उसमें जाने के बाद माँ-बेटे में खूब बातचीत होने लगी। तीसरा नाम मेजिनी है। वे इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल के सेनापति थे। उन्हें वहाँ का मसीहा कहा गया, क्योंकि उन्होंने लोगों को एक सूत्र में बाँधा। बिस्मिल ने अपनी माँ की सहायता की तुलना उन्हीं की माता से की है। चौथा नाम गुरु गोबिंद सिंह जी का है। वे सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे और उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।

Flashcards (15)

अंतिम भाग में लेखक किसे संबोधित करता है?
अपनी माँ को, सीधे ‘तुम’ कहकर।
माँ के लिए कौन-से दो नाम आए हैं?
जन्मदात्री और जीवनदात्री।
‘उऋण’ का अर्थ?
कर्ज़ से पूरी तरह मुक्त हो जाना।
बिस्मिल ॠण के बारे में क्या कहते हैं?
कि अनेक जन्मों में भी वे उऋण नहीं हो सकते।
माँ का सबसे बड़ा आदेश?
कि किसी का प्राण न जाए, शत्रु का भी नहीं।
उस आदेश की कीमत क्या चुकानी पड़ी?
दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा तोड़नी पड़ी।
उनकी एकमात्र बची इच्छा क्या थी?
एक बार माँ के चरणों की सेवा करना।
माँ से धैर्य के लिए कौन-सा उदाहरण दिया?
गुरु गोबिंद सिंह जी की धर्मपत्नी का।
इतिहास के बारे में उन्होंने क्या कहा?
कि किसी पृष्ठ पर माँ का नाम भी लिखा जाएगा।
अंत में वे कौन-सा वर माँगते हैं?
कि अंतिम समय हृदय विचलित न हो।
‘अक्षर-बोध’ कैसे बना है?
दो शब्द मिलाकर।
शब्द जोड़ने से क्या बचता है?
समय, स्याही और कागज़।
‘देवनागरी’ क्या है?
एक भाषा-लिपि, जिसमें हिंदी और संस्कृत लिखी जाती हैं।
‘मेजिनी’ कौन थे?
इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल के सेनापति।
गुरु गोबिंद सिंह जी की पहचान?
सिखों के दसवें और अंतिम गुरु, खालसा पंथ के संस्थापक।

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  • नाम और परिचय
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Class 6 Hindi Chapter 6 — frequently asked questions

रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिकारी थे और उनका जीवनकाल 1897 से 1927 तक रहा। वे अच्छे कवि और लेखक भी थे। केवल तीस साल की उम्र में अंग्रेज़ों ने उन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया।

बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा किन परिस्थितियों में लिखी?

वे जेल में बंद थे और उन पर फाँसी की सज़ा हो चुकी थी। वहीं उन्होंने चोरी-छिपे लिखा, क्योंकि पकड़े जाने का डर हर पल था। लिखे हुए पन्ने वे नज़र बचाकर बाहर भिजवाते रहे।

उस आत्मकथा का अंग्रेज़ों पर क्या असर हुआ?

उनके साथियों ने उसे ‘निज जीवन की एक छटा’ नाम से छपवाया। छपते ही उस पुस्तक ने अंग्रेज़ों के होश उड़ा दिए, क्योंकि लोगों में उनके विरुद्ध क्रोध और बढ़ गया।

माताजी शाहजहाँपुर कब और किस स्थिति में आईं?

ग्यारह वर्ष की आयु में विवाह होकर वे शाहजहाँपुर आईं। उस समय उन्होंने पढ़ना-लिखना बिलकुल नहीं सीखा था और घर चलाने का काम भी उन्हें नहीं आता था।

उन्होंने स्वयं को परिवार के अनुकूल कैसे ढाला?

दादीजी ने अपनी छोटी बहन को बुलाया, जिन्होंने उन्हें गृहकार्य सिखाया। कुछ ही समय में उन्होंने घर की हर ज़िम्मेदारी पकड़ ली और रसोई तथा बाकी प्रबंध सँभालने लगीं।

माताजी ने पढ़ना कैसे सीखा?

पढ़ने की इच्छा उन्हें स्वयं हुई थी। घर आने वाली सहेलियों में से जो पढ़ी-लिखी थीं, उन्हीं से वे अक्षर सीखतीं। दिन भर का काम निपट जाने के बाद जितना बचता, उसी में अभ्यास करतीं।

पाठ के अंतिम भाग में भाषा कैसे बदल जाती है?

उससे पहले तक लेखक अपने लिए ‘मैं’ कहता है। अंतिम भाग में वह सीधे माँ को ‘तुम’ कहकर संबोधित करने लगता है। इससे आत्मकथा अचानक एक पत्र जैसी लगने लगती है।

माँ के ॠण के बारे में बिस्मिल क्या कहते हैं?

वे कहते हैं कि इस जीवन में तो उनका ॠण उतारने का अवसर ही नहीं मिला। अनेक जन्मों में भी प्रयत्न करें, तब भी वे उऋण नहीं हो सकते। यानी वह कर्ज़ अपार है।

माँ के सबसे बड़े आदेश की कठिनाई क्या थी?

आदेश यह था कि किसी का प्राण न जाए, शत्रु का भी नहीं। बिस्मिल की राह क्रांति की थी, जिसमें हिंसा सामने आती ही है। इसीलिए उन्हें उस आदेश को निभाने के लिए अपनी प्रतिज्ञा दो-एक बार तोड़नी पड़ी।

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