Class 6 Hindi Chapter 5: रहीम के दोहे
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- Hindi
सात दोहे और उनके भाव
सुई, पेड़, धागा, पानी, विपदा, जीभ और सच्चा मित्र — सात दोहे, और हर एक में जीने का एक छोटा-सा नियम।
What you will be able to do
- सातों दोहों को क्रम से पहचानना और हर एक का भाव अपने शब्दों में बताना
- यह बताना कि रहीम किस तरह रोज़ की चीज़ों से बड़ी बात कह जाते हैं
- ‘पानी’ वाले दोहे के तीनों अर्थ अलग-अलग करके समझाना
- सातों दोहों में जो बात साझी है, उसे पहचानना
Key points
दोहा दो पंक्तियों का छोटा छंद है, और पाठ के सातों दोहे इसी रूप में हैं।
पहला दोहा कहता है कि बड़ा देखकर छोटे को छोड़ना नहीं चाहिए, क्योंकि सिलाई सुई से ही होगी।
दूसरे दोहे में पेड़ और तालाब का उदाहरण है, जो अपनी कमाई स्वयं नहीं भोगते।
तीसरा दोहा प्रेम को धागा कहता है, जो टूटकर जुड़े तो उसमें गाँठ रह जाती है।
चौथे दोहे में ‘पानी’ तीन अर्थ देता है — मोती के साथ चमक, मनुष्य के साथ मान, और चूने के साथ जल।
पाँचवाँ दोहा थोड़े दिन की विपदा को भला बताता है, क्योंकि उसी में अपने-पराये की पहचान होती है।
छठा दोहा कहता है कि जीभ बिना सोचे बोल जाती है और मार सिर को पड़ती है।
सातवाँ दोहा विपत्ति को कसौटी कहता है, जिस पर खरा उतरने वाला ही सच्चा मित्र है।
Full explanation
दोहा क्या होता है
दोहा दो पंक्तियों का एक छोटा छंद है। इतनी-सी जगह में पूरी बात कह देनी होती है, इसलिए एक भी शब्द फ़ालतू नहीं रहता। छोटा और लयदार होने के कारण यह सुनते ही याद हो जाता है।
रहीम की पहचान
रहीम भक्तिकाल के कवि थे। उनके दोहों में कोई कथा नहीं चलती; हर दोहा व्यवहार का एक नियम देकर रुक जाता है। इसी कारण इन्हें नीति के दोहे कहा जाता है।
पहला दोहा
“रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।।”
उसका भाव
बड़ा देखकर छोटे को फेंक देना समझदारी नहीं है। जहाँ सिलाई का काम है वहाँ सुई ही चलेगी, और तलवार वहाँ एक टाँका तक नहीं लगा पाएगी। उपयोगिता आकार से नहीं, काम से तय होती है। सुई जोड़ने का काम करती है और तलवार काटने का, इसलिए दोनों की जगह अलग है। चाहे हाथी हो या चींटी, हर किसी का अपना काम बना हुआ है।
दूसरा दोहा
“तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।”
उसका भाव
पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाता और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीता। दोनों जो जोड़ते हैं, वह दूसरों के लिए होता है। समझदार व्यक्ति भी अपना संचय इसी भाव से रखता है। रहीम यहाँ कोई उपदेश नहीं देते, बस दो चीज़ें दिखा देते हैं जो हर बच्चे ने देखी हैं। इतने से ही परोपकार की पूरी बात खुल जाती है।
तीसरा दोहा
“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।”
उसका भाव
प्रेम को यहाँ धागा कहा गया है। झटके से तोड़ा हुआ धागा जुड़ तो जाता है, पर उसमें गाँठ रह जाती है। रिश्ते के साथ भी यही होता है — सुलह के बाद भी मन में कहीं एक खटक बची रह जाती है।
चौथा दोहा
“रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।”
तीन अर्थ एक साथ
यहाँ एक ही शब्द तीन काम कर रहा है। मोती के साथ उसका अर्थ चमक बनता है, मनुष्य के साथ मान, और चूने के साथ जल। तीनों में से जो भी चला जाए, वह चीज़ किसी काम की नहीं रहती। ‘सून’ का अर्थ सूना या खाली है। इसीलिए इस दोहे को याद रखना आसान भी है और उसका अर्थ खोलना दिलचस्प भी।
पाँचवाँ दोहा
“रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।”
उसका भाव
रहीम विपदा को भला कहते हैं, पर साथ में एक शर्त जोड़ देते हैं — वह थोड़े दिन की हो। ऐसे समय में यह साफ़ दिख जाता है कि कौन सचमुच अपना है और कौन केवल अच्छे दिनों का साथी था। ‘हित’ का अर्थ अपना है और ‘अनहित’ का पराया, इसलिए दोहा कहता है कि दोनों की पहचान इसी संसार में हो जाती है।
छठा दोहा
“रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।।”
जीभ और सिर
‘बावरी’ का अर्थ है पगली, बिना सोच-विचार वाली। जीभ जो मन में आए कह जाती है, फिर मुँह के भीतर सुरक्षित बैठ जाती है। भुगतना सिर को पड़ता है। कहने वाला और भरने वाला अलग-अलग हो जाए, इससे बड़ी विडंबना क्या होगी।
सातवाँ दोहा और उसका भाव
“कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।”
सुख के दिनों में तरह-तरह से बहुत लोग अपने बन जाते हैं। पर विपत्ति एक कसौटी है, और उस पर घिसकर ही पता चलता है कि कौन खरा है। जो वहाँ टिका, वही सच्चा मित्र है।
सातों की साझी बात
हर दोहा दो पंक्तियों में रुक जाता है और हर दोहे में एक जानी-पहचानी चीज़ है। सुई, पेड़, धागा, पानी, जीभ — इनमें कुछ भी कठिन नहीं। कठिन बात को आसान चीज़ से कह देना ही रहीम की सबसे बड़ी कला है। यही कारण है कि ये दोहे स्कूल की किताब से बाहर भी, लोगों की रोज़ की बातचीत में चलते रहे हैं।
Concepts and terms
दो पंक्तियों का छोटा छंद, जिसमें पूरी बात कह दी जाती है। छोटा होने के कारण यह जल्दी याद हो जाता है, और यही कारण है कि रहीम के दोहे आज भी बोलचाल में चलते हैं।
जीने का ढंग और व्यवहार का नियम। इन सातों दोहों में कोई कथा नहीं है, हर दोहा व्यवहार की एक सीख देता है, इसलिए इन्हें नीति के दोहे कहा जाता है।
वह पत्थर जिस पर घिसकर सोने की शुद्धता परखी जाती है। रहीम विपत्ति को यही नाम देते हैं, क्योंकि कठिन समय में ही मित्र की सच्चाई परखी जाती है।
समझदार और भला व्यक्ति। दूसरे दोहे में ऐसा ही व्यक्ति अपना संचय अपने भोग के लिए नहीं, दूसरों के काम आने के लिए रखता है।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा ने सुई वाले दोहे को जाँचने का तय किया। रहीम कहते हैं कि छोटी चीज़ को देखकर बड़ी को मत छोड़ो। बच्चों ने कल्पना में एक तलवार और एक सुई सामने रखी। फिर उन्होंने पूछा कि टूटे बटन को कौन जोड़ेगा। उत्तर सबको पता था। अध्यापिका ने कहा कि यही दोहे का अर्थ है। हर चीज़ का अपना काम होता है और आकार से उसे नहीं आँका जाता। बच्चों ने ऐसी पाँच छोटी चीज़ें गिनाईं जिनके बिना काम रुक जाता है। चाबी, सुई, दीयासलाई, पिन और धागा उनमें थे।
Analysis:
दोहा किसी को बड़ा या छोटा नहीं बताता। वह केवल यह कहता है कि काम के समय आकार नहीं, उपयोग गिना जाता है।
Activity:
घर की पाँच छोटी चीज़ें चुनो। हर एक के सामने लिखो कि उसके बिना कौन-सा काम रुक जाएगा।
घर पर करके देखो
Title:
एक धागे की गाँठ
Safety:
धागा हाथ पर कसकर मत लपेटो; खींचने से उँगली में निशान पड़ सकता है।
What You Notice:
धागा जुड़ जाता है और काम भी करने लगता है, पर उँगली गाँठ पर अटक जाती है। रहीम इसी अटकने की बात रिश्तों के लिए कह रहे हैं।
Did you know
रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था, और वे रामायण तथा महाभारत जैसे ग्रंथों के अच्छे जानकार माने जाते हैं।
ये दोहे रहीम ग्रंथावली से लिए गए हैं, जिसका संपादन विद्यानिवास मिश्र ने किया था।
कसौटी सचमुच एक काला पत्थर होता है; सोने को उस पर घिसकर देखा जाता है कि वह असली है या नहीं।
Memory tricks
सातों दोहों का क्रम — सुई-पेड़-धागा-पानी-विपदा-जीभ-मित्र — हर दोहे की एक पहचान वाली चीज़, इसी क्रम में।
पानी के तीन अर्थ — मोती-मानुष-चून — मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए मान, चूने के लिए जल।
Practice MCQs with answers (20)
- A चार पंक्तियों का
- B दो पंक्तियों का
- C आठ पंक्तियों का
- D एक पंक्ति का
Show answer
Why:
इतनी कम जगह में पूरी बात कह दी जाती है।
- A क्योंकि इनमें कथाएँ हैं
- B क्योंकि इनमें भक्ति है
- C क्योंकि ये केवल प्रकृति का वर्णन करते हैं
- D क्योंकि हर दोहा व्यवहार का नियम देता है
Show answer
Why:
किसी दोहे में कोई कहानी नहीं चलती।
- A सिलाई के काम की
- B खेती के काम की
- C लिखने के काम की
- D पकाने के काम की
Show answer
Why:
वह काम सुई से ही हो सकता है।
- A जो छोटा है उसे फेंक नहीं देना चाहिए
- B छोटी चीज़ें हाथ से जल्दी खो जाती हैं
- C बड़ी चीज़ें ही अधिक काम आती हैं
- D छोटी चीज़ें बाज़ार में सस्ती मिलती हैं
Show answer
Why:
सुई छोटी है, पर तलवार सिलाई नहीं कर सकती। रहीम आकार को मोल का मापदंड नहीं मानते।
- A आकार से
- B मूल्य से
- C काम से
- D नाम से
Show answer
Why:
यही पहले दोहे का मूल भाव है।
- A तालाब
- B पेड़
- C पर्वत
- D बगीचा
Show answer
Why:
उसी पंक्ति में ‘सरवर’ का अर्थ तालाब है।
- A वह सूख जाता है
- B वह गहरा होता है
- C वह दूर से सबको दिखता है
- D वह अपना जल नहीं पीता
Show answer
Why:
पेड़ भी अपना फल नहीं खाता।
- A दूसरों के काम आने के लिए
- B अपने बुढ़ापे के लिए
- C अपने परिवार के लिए
- D अपनी यात्रा के लिए
Show answer
Why:
पेड़ और तालाब का उदाहरण यही बताता है।
- A बाज़ार से
- B युद्ध से
- C प्रकृति से
- D रसोई से
Show answer
Why:
पेड़ और तालाब, दोनों प्रकृति की चीज़ें हैं।
- A धीरे खोलना
- B कसकर बाँधना
- C झटके से तोड़ना
- D ऊपर फेंकना
Show answer
Why:
रहीम प्रेम के धागे के साथ यही करने से रोकते हैं।
- A धागा महँगा होता है
- B टूटा रिश्ता पहले जैसा नहीं रहता
- C धागा हाथ में बहुत जल्दी उलझ जाता है
- D धागा कमज़ोर होता है
Show answer
Why:
जुड़ने पर उसमें गाँठ रह जाती है।
- A एक
- B दो
- C चार
- D तीन
Show answer
Why:
मोती, मनुष्य और चूने के साथ तीन अलग अर्थ बनते हैं।
- A उसका आकार
- B उसका मूल्य
- C उसका वज़न
- D उसकी चमक
Show answer
Why:
चमक न रहे तो मोती फीका पड़ जाता है।
- A उसका मान
- B उसका बल
- C उसका धन
- D उसका ज्ञान
Show answer
Why:
मान चला जाए तो उसका बचना कठिन हो जाता है।
- A बहुत गहरा और भरा
- B मीठा
- C सूना या खाली
- D ठंडा
Show answer
Why:
उसके बिना सब खाली पड़ जाता है।
- A कि वह बहुत बड़ी हो
- B कि वह थोड़े दिन की हो
- C कि वह अकेले आए
- D कि वह बचपन में आए
Show answer
Why:
लंबी विपदा को वे भला नहीं कहते।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही विपदा को कसौटी बनाता है। सुख के दिनों में सब साथ दिखते हैं।
- A कहने वाला बच जाता है और भुगतना दूसरे को पड़ता है
- B जीभ को साफ़ रखने से ही बोली मीठी बनी रहती है
- C सिर पर चोट लगने पर उसे तुरंत किसी को दिखाना चाहिए
- D कम बोलने वाला हर बहस में आसानी से जीत जाता है
Show answer
Why:
दोहे में बोलने वाली जीभ मुँह के भीतर सुरक्षित बैठ जाती है और मार सिर को सहनी पड़ती है। बिना सोचे कही गई बात का परिणाम किसी और के हिस्से आ जाता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II अधूरा है: रहीम शर्त जोड़ते हैं कि विपदा थोड़े दिन की हो, तभी वह अपने-पराए की पहचान कराती है।
- A जीभ को
- B संपत्ति को
- C मित्रता को
- D विपत्ति को
Show answer
Why:
उस पर खरा उतरने वाला ही सच्चा मित्र है।
Important short questions (6)
दोहा दो पंक्तियों का छोटा छंद है। इतनी कम जगह में पूरी बात कहनी होती है, इसलिए एक भी शब्द फ़ालतू नहीं रहता। छोटा और लयदार होने के कारण वह सुनते ही याद हो जाता है।
बड़ा देखकर छोटे को फेंक देना समझदारी नहीं है। जहाँ सिलाई का काम है वहाँ सुई ही चलेगी। तलवार वहाँ एक टाँका तक नहीं लगा पाएगी, इसलिए उपयोगिता आकार से नहीं, काम से तय होती है।
पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाता और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीता। दोनों जो जोड़ते हैं वह दूसरों के लिए होता है। यही परोपकार का गुण समझदार व्यक्ति में भी होना चाहिए।
धागा दो चीज़ों को जोड़ता है और खींचने पर जल्दी टूट भी जाता है। जुड़ने पर उसमें गाँठ रह जाती है। बिगड़े रिश्ते में भी सुलह के बाद एक खटक बची रह जाती है।
वह शब्द तीन अलग चीज़ों के साथ जोड़ा गया है। मोती के साथ उसका अर्थ चमक बनता है, मनुष्य के साथ मान, और चूने के साथ जल। तीनों में से जो भी चला जाए, वह चीज़ काम की नहीं रहती।
हर दोहा दो पंक्तियों में रुक जाता है और हर दोहे में एक जानी-पहचानी चीज़ है। सुई, पेड़, धागा, पानी और जीभ में कुछ भी कठिन नहीं है। बड़ी बात को आसान चीज़ से कह देना ही रहीम की कला है।
Long answer questions (3)
पहला दोहा कहता है कि बड़ा देखकर छोटे को छोड़ना नहीं चाहिए। सिलाई सुई से ही होगी, तलवार वहाँ काम नहीं आएगी। दूसरा दोहा पेड़ और तालाब का उदाहरण देता है। दोनों अपनी कमाई स्वयं नहीं भोगते, और समझदार व्यक्ति भी अपना संचय दूसरों के लिए रखता है। तीसरा दोहा प्रेम को धागा कहता है। झटके से तोड़ा गया धागा जुड़ तो जाता है, पर उसमें गाँठ रह जाती है। चौथा दोहा कहता है कि उसके बिना सब सूना है। वहाँ एक ही शब्द तीन अर्थ देता है — मोती के साथ चमक, मनुष्य के साथ मान, और चूने के साथ जल।
पाँचवाँ दोहा विपदा को भला बताता है, पर एक शर्त के साथ — वह थोड़े दिन की हो। ऐसे समय में यह साफ़ दिख जाता है कि कौन सचमुच अपना है और कौन केवल अच्छे दिनों का साथी था। छठा दोहा जीभ की बात करता है। वह बिना सोचे जो मन में आए कह जाती है और फिर मुँह के भीतर सुरक्षित बैठ जाती है, जबकि भुगतना सिर को पड़ता है। इसी से बोलने से पहले सोचने की सीख मिलती है। सातवाँ दोहा कहता है कि सुख के दिनों में बहुत लोग अपने बन जाते हैं। विपत्ति एक कसौटी है, और उस पर जो खरा उतरे वही सच्चा मित्र है।
दोहा बहुत छोटा छंद है, इसलिए उसमें लंबी व्याख्या के लिए जगह नहीं होती। ऐसे में सबसे अच्छा रास्ता यही है कि कोई ऐसी चीज़ उठाई जाए जिसे हर पाठक पहले से जानता हो। सुई का उदाहरण देते ही यह बात अपने आप समझ आ जाती है कि उपयोगिता आकार से तय नहीं होती। पेड़ और तालाब से दूसरों के लिए जोड़ने की बात एक क्षण में खुल जाती है। धागे की गाँठ बताने भर से बिगड़े रिश्ते की पूरी बात आ जाती है। जीभ और सिर का उदाहरण बिना किसी उपदेश के सोचकर बोलने की सीख दे देता है। यही कारण है कि ये दोहे आज भी आम बोलचाल में याद रह गए हैं।
Flashcards (15)
Play this topic
- दोहा और उसका भाव
- दोहों का क्रम जमाओ
- अपने बारे में या दूसरों के बारे में?
- सच या भ्रम
- झटपट उत्तर
दोहों की भाषा, शब्द और कवि
पुराने शब्दों के अर्थ, एक शब्द के अनेक अर्थ, एक ही दोहे के दो-दो प्रचलित रूप, और रहीम का परिचय।
What you will be able to do
- दोहों में आए पुराने शब्दों के आज के अर्थ बताना
- एक शब्द के अनेक अर्थ पहचानना और उदाहरण देना
- यह समझाना कि एक ही दोहे के दो-दो रूप क्यों मिल जाते हैं
- रहीम का परिचय और उनके दोहों की लोकप्रियता का कारण बताना
Key points
दोहों की भाषा पुरानी है, इसलिए कई शब्दों के आज के रूप अलग हैं — जैसे तरुवर का पेड़ और सरवर का तालाब।
‘साँचे मीत’ का अर्थ सच्चे मित्र है, और ‘बिपति’ का अर्थ मुसीबत।
कुछ शब्द जगह बदलते ही अर्थ बदल देते हैं; पाठ में ‘पानी’ इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।
‘कल’, ‘पत्र’, ‘कर’ और ‘फल’ भी तीन-तीन अर्थ देने वाले शब्द हैं।
एक ही दोहे के दो-दो रूप प्रचलित हैं, जैसे छिटकाय के साथ चटकाय और मानुष के साथ मानस।
ऐसा इसलिए हुआ कि ये दोहे लिखे जाने से अधिक बोले गए, और बोलते-बोलते शब्द थोड़े बदल गए।
रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था; उनका जन्म सोलहवीं और मृत्यु सत्रहवीं शताब्दी में मानी जाती है।
कबीर, तुलसी, वृंद और बिहारी के दोहे भी आज तक लोगों की बोलचाल में चलते हैं।
Full explanation
भाषा पुरानी है
ये दोहे सैकड़ों साल पहले लिखे गए थे, इसलिए इनके कई शब्द आज की हिंदी में वैसे नहीं मिलते। पर ध्यान से देखने पर अर्थ पकड़ में आ जाता है, क्योंकि बात रोज़ की चीज़ों की हो रही है। शब्द बदल गए हैं, पर सुई, धागा और तालाब आज भी वैसे ही हैं।
पेड़ और तालाब के पुराने नाम
दूसरे दोहे में पेड़ के लिए तरुवर और तालाब के लिए सरवर आया है। दोनों शब्द आज बोलचाल में नहीं चलते, पर कविता में अब भी मिल जाते हैं।
छोटे-छोटे शब्द
लघु का अर्थ छोटा है और बिपति का अर्थ मुसीबत। साँचे मीत यानी सच्चे मित्र, और कपाल यानी सिर। ये चार शब्द अलग-अलग दोहों में आए हैं।
दो और शब्द
सुजान का अर्थ समझदार और भला व्यक्ति है। छिटकाय का भाव है झटके से तोड़ देना, इसलिए तीसरे दोहे में उसी से रोका गया है।
कठिन लगने वाले रूप
जिह्वा का अर्थ जीभ है और बावरी का अर्थ पगली। ऊबरै का अर्थ बचना या उबरना है, और सून का अर्थ सूना। थोरे का अर्थ थोड़े है।
एक शब्द, अनेक अर्थ
कुछ शब्द जगह बदलते ही अर्थ बदल देते हैं। इन्हें अनेकार्थी शब्द कहते हैं। ऐसे शब्द हर भाषा में मिलते हैं, और वे भाषा को छोटा तथा चुस्त बना देते हैं। इस पाठ में इसका सबसे अच्छा उदाहरण चौथा दोहा है।
पाठ का सबसे अच्छा उदाहरण
वहाँ ‘पानी’ तीन बार आता है और तीनों बार अलग अर्थ देता है — मोती के साथ चमक, मनुष्य के साथ मान, और चूने के साथ जल। शब्द एक है, अर्थ तीन।
और चार ऐसे शब्द
पाठ में ‘कल’, ‘पत्र’, ‘कर’ और ‘फल’ पर भी यही काम करने को कहा गया है। चारों तीन-तीन अर्थ देते हैं, और चारों रोज़ बोले जाने वाले शब्द हैं।
‘कल’ और ‘पत्र’
कल का अर्थ बीता हुआ दिन भी है, आने वाला दिन भी, और मशीन का पुर्ज़ा भी। पत्र का अर्थ पेड़ का पत्ता भी है, चिट्ठी भी, और समाचार-पत्र भी।
‘कर’ और ‘फल’
कर का अर्थ हाथ भी है, सूरज की किरण भी, और सरकार को दिया जाने वाला शुल्क भी। फल का अर्थ खाने वाला फल भी है, किसी काम का परिणाम भी, और चाकू का धारदार हिस्सा भी।
एक दोहा, दो रूप
पाठ में एक और दिलचस्प बात दिखाई गई है। तीसरे दोहे में ‘मिले’ की जगह ‘जुड़े’ और ‘छिटकाय’ की जगह ‘चटकाय’ भी चलता है।
और भी रूप
पहले दोहे में ‘डारि’ की जगह ‘डार’ और ‘तलवारि’ की जगह ‘तरवार’ मिल जाता है। चौथे दोहे में ‘मानुष’ की जगह ‘मानस’ भी सुनने को मिलता है।
ऐसा होता क्यों है
ये दोहे पुस्तकों से अधिक ज़बान पर चले। एक व्यक्ति ने दूसरे को सुनाया, दूसरे ने तीसरे को। इसी में कहीं कोई शब्द अपनी जगह मिलते-जुलते शब्द से बदल गया, और दोनों रूप साथ-साथ चलते रहे। इससे यह भी पता चलता है कि ये दोहे किसी एक जगह बंद नहीं रहे, बल्कि दूर-दूर तक पहुँचे।
रहीम कौन थे
उनका पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था और वे भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं। उनका जन्म सोलहवीं शताब्दी में और मृत्यु सत्रहवीं शताब्दी में हुई मानी जाती है।
उन्होंने क्या-क्या लिखा
उन्होंने नीति, भक्ति और प्रेम — तीनों विषयों पर लिखा। भाषा उन्होंने दो चुनीं, अवधी और ब्रजभाषा। वे रामायण तथा महाभारत जैसे ग्रंथों के अच्छे जानकार भी माने जाते हैं। ये दोहे रहीम ग्रंथावली से लिए गए हैं, जिसका संपादन विद्यानिवास मिश्र ने किया।
आज भी ज़िंदा
रहीम के साथ कबीर, तुलसी, वृंद और बिहारी के दोहे भी आज तक चलते हैं। लोग बातचीत में अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए बीच में कोई दोहा कह देते हैं, ठीक जैसे कोई कहावत कहते हों। कक्षा में इन्हें गाया भी जा सकता है, और इनसे अंत्याक्षरी भी खेली जा सकती है।
Concepts and terms
ऐसा शब्द जो अलग-अलग जगह पर अलग-अलग अर्थ दे दे। पाठ में ‘पानी’ तीन अर्थ देता है, और ‘कल’, ‘पत्र’, ‘कर’ तथा ‘फल’ भी इसी तरह के शब्द हैं।
किसी पंक्ति का वह दूसरा रूप जो लोगों की ज़बान पर चल पड़ा हो। जैसे छिटकाय के साथ चटकाय, और मानुष के साथ मानस भी सुनने को मिल जाता है।
ब्रज क्षेत्र की भाषा, जिसमें उस समय बहुत कविता लिखी गई। रहीम ने इसमें भी लिखा और अवधी में भी, इसलिए उनकी पहुँच बहुत बड़े क्षेत्र तक रही।
हिंदी साहित्य का वह समय जिसमें भक्ति और नीति की बहुत रचनाएँ हुईं। रहीम इसी काल के कवि माने जाते हैं, और कबीर तथा तुलसी भी इसी समय के हैं।
सावधान!
सच या भ्रम?
असल जीवन: एक शब्द, तीन घर
Scenario:
कक्षा छह में शब्दों का खेल चल रहा है। शिक्षक बोर्ड पर केवल एक शब्द लिखते हैं — फल। आरव कहता है कि यह आम और केला वाला फल है। उसकी साथी ज़ोया कहती है कि उसकी माँ कहती हैं कि मेहनत का फल मिलता है, तो वहाँ कोई आम नहीं होता। तीसरा साथी विवेक कहता है कि उसके घर में चाकू के धार वाले हिस्से को भी यही कहा जाता है। तीनों अपनी-अपनी बात पर अड़ जाते हैं और झगड़ा होने लगता है कि सही कौन है। शिक्षक कुछ नहीं कहते। वे बोर्ड पर तीन वाक्य लिखते हैं और तीनों में यही शब्द रख देते हैं।
Analysis:
तीनों वाक्य पढ़ते ही झगड़ा खत्म हो जाता है। बच्चों को दिखता है कि तीनों सही थे, क्योंकि हर वाक्य में साथ वाले शब्द अलग थे। पहले वाक्य में टोकरी की बात थी, दूसरे में मेहनत की, तीसरे में चाकू की। ज़ोया कहती है कि तब अर्थ अकेले शब्द में नहीं रहता। शिक्षक इसी पर पाठ का चौथा दोहा याद दिलाते हैं, जहाँ एक शब्द मोती, मनुष्य और चूने के साथ तीन अलग अर्थ दे देता है। अंत में तीनों मिलकर ऐसे और शब्दों की सूची बनाते हैं और हर शब्द के आगे तीन-तीन वाक्य लिखते हैं।
Activity:
‘कल’, ‘पत्र’ और ‘कर’ में से कोई एक शब्द चुनिए। उसके तीन अर्थ लिखिए और हर अर्थ के लिए अपना एक वाक्य बनाइए। फिर वे तीनों वाक्य अपने समूह को पढ़कर सुनाइए और पूछिए कि अर्थ कैसे पकड़ में आया।
घर पर करके देखो
Title:
अपनी भाषा का शब्दकोश
Safety:
यह काम घर के भीतर ही कीजिए; किसी अजनबी से जानकारी न पूछिए।
What You Notice:
कुछ शब्द बोली बदलने पर भी लगभग वैसे ही रह जाते हैं, और कुछ बिलकुल बदल जाते हैं। इसी से समझ आता है कि दोहों के दो-दो रूप कैसे बन गए होंगे।
Did you know
‘कर’ शब्द के तीन अर्थ हैं — हाथ, सूरज की किरण, और सरकार को दिया जाने वाला शुल्क।
‘पत्र’ का अर्थ पेड़ का पत्ता भी है, चिट्ठी भी, और समाचार-पत्र भी।
लोग आज भी अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए बीच में कोई दोहा कह देते हैं, जैसे कोई कहावत कहते हों।
Memory tricks
चार अनेकार्थी शब्द — क-प-क-फ — कल, पत्र, कर, फल। चारों तीन-तीन अर्थ देते हैं।
रहीम का परिचय — 16-17, अवधी-ब्रज — जन्म सोलहवीं, मृत्यु सत्रहवीं शताब्दी; लिखा दोनों भाषाओं में।
Practice MCQs with answers (20)
- A तालाब
- B नदी
- C पेड़
- D पहाड़
Show answer
Why:
वह अपने फल स्वयं नहीं खाता।
- A तालाब के लिए
- B बादल के लिए
- C कुएँ के लिए
- D झरने के लिए
Show answer
Why:
वह अपना जल स्वयं नहीं पीता।
- A तेज़
- B भारी
- C छोटा
- D गहरा
Show answer
Why:
पहले दोहे में उसे छोड़ने से रोका गया है।
- A संपत्ति
- B प्रसन्नता
- C मित्रता
- D मुसीबत
Show answer
Why:
उसी को रहीम कसौटी कहते हैं।
- A उस व्यक्ति को जो समझदार और विवेकवाला हो
- B उस व्यक्ति को जिसके पास बहुत धन हो
- C उस व्यक्ति को जो बहुत बलवान हो
- D उस व्यक्ति को जो दूर की यात्रा करता हो
Show answer
Why:
सु का अर्थ अच्छा और जान का अर्थ जानना है। रहीम के लिए सुजान वही है जो अपना संचय दूसरों के काम आने देता है।
- A पुराने साथी
- B पड़ोस के लोग
- C सच्चे मित्र
- D बहुत से मित्र
Show answer
Why:
विपत्ति की परख में वही खरे उतरते हैं।
- A सिर
- B हाथ
- C पीठ
- D पैर
Show answer
Why:
जीभ की कही बात की मार वहीं पड़ती है।
- A मीठी
- B पगली
- C कोमल
- D तेज़
Show answer
Why:
जीभ के लिए यही विशेषण आया है।
- A बहुत गहरा और भरा
- B सूना या खाली
- C ठंडा
- D मीठा
Show answer
Why:
उसके बिना सब खाली पड़ जाता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: पुर्ज़े का अर्थ ‘कल’ देता है; ‘पत्र’ का अर्थ पत्ता या चिट्ठी है।
- A धागा
- B कसौटी
- C पानी
- D तलवार
Show answer
Why:
वह एक ही दोहे में तीन अर्थ दे देता है।
- A मशीन का पुर्ज़ा
- B पेड़ का पत्ता
- C सूरज की किरण
- D चाकू का धार वाला हिस्सा
Show answer
Why:
बाकी दो अर्थ बीते और आने वाले दिन के हैं।
- A काम का परिणाम
- B सूरज की किरण
- C मशीन का पुर्ज़ा
- D पेड़ का पत्ता
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Why:
उसके दो और अर्थ चिट्ठी तथा समाचार-पत्र हैं।
- A पत्ता, चिट्ठी, अख़बार
- B हाथ, किरण, शुल्क
- C दिन, रात, समय
- D फल, फूल, पत्ती
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Why:
तीनों अर्थ आज भी बोलचाल में चलते हैं।
- A सूरज की किरण
- B किसी मशीन का छोटा पुर्ज़ा
- C चिट्ठी
- D चाकू का धार वाला हिस्सा
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Why:
बाकी दो अर्थ खाने का फल और काम का परिणाम हैं।
- A झटकाय
- B भटकाय
- C लटकाय
- D चटकाय
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Why:
पाठ में यही दूसरा रूप दिखाया गया है।
- A तरवाल
- B तरवार
- C तलवान
- D तलवाड़
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Why:
पहले दोहे में ‘डारि’ की जगह ‘डार’ भी मिलता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
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Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही दोनों रूपों की जड़ है। मुँह से मुँह चलते शब्द अपने क्षेत्र का रूप ले लेते हैं।
- A संस्कृत और पालि
- B अवधी और ब्रजभाषा
- C मैथिली और भोजपुरी
- D मराठी और गुजराती
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Why:
दोनों उस समय की प्रमुख काव्य भाषाएँ थीं।
- A निराला
- B सुदर्शन
- C प्रेमचंद
- D कबीर
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Why:
तुलसी, वृंद और बिहारी के दोहे भी लोकप्रिय हैं।
Important short questions (6)
तरुवर का अर्थ पेड़ है और सरवर का अर्थ तालाब। सुजान का अर्थ समझदार और भला व्यक्ति है। तीनों शब्द दूसरे दोहे में आए हैं।
ऐसे शब्द को कहते हैं जो अलग-अलग जगह पर अलग अर्थ दे दे। पाठ में ‘पानी’ इसका उदाहरण है। वह मोती के साथ चमक, मनुष्य के साथ मान, और चूने के साथ जल का अर्थ देता है।
पहला अर्थ बीता हुआ दिन है और दूसरा आने वाला दिन। तीसरा अर्थ मशीन का पुर्ज़ा है, जैसे किसी यंत्र का कोई भाग। एक ही शब्द तीनों जगह चल जाता है।
कर का अर्थ हाथ है, सूरज की किरण है, और सरकार को दिया जाने वाला शुल्क भी। फल का अर्थ खाने वाला फल है, किसी काम का परिणाम है, और चाकू का धार वाला हिस्सा भी।
ये दोहे पुस्तकों से अधिक ज़बान पर चले। एक व्यक्ति ने दूसरे को सुनाया और दूसरे ने तीसरे को। इसी में कोई शब्द मिलते-जुलते शब्द से बदल गया, और दोनों रूप साथ चलते रहे।
वे बहुत छोटे और लयदार हैं, इसलिए जल्दी याद हो जाते हैं। उनमें बात रोज़ की चीज़ों से कही गई है, इसलिए हर किसी को समझ आ जाती है। लोग बातचीत में ज़ोर देने के लिए उन्हें कहावत की तरह कह देते हैं।
Long answer questions (3)
तरुवर का अर्थ पेड़ है और सरवर का अर्थ तालाब। लघु का अर्थ छोटा है और बिपति का अर्थ मुसीबत। सुजान का अर्थ समझदार तथा भला व्यक्ति है, और साँचे मीत का अर्थ सच्चे मित्र। छिटकाय का भाव है झटके से तोड़ देना। कपाल का अर्थ सिर है और जिह्वा का अर्थ जीभ। बावरी का अर्थ पगली या बिना सोच-विचार वाली है। इनके साथ ऊबरै का अर्थ बचना, सून का अर्थ सूना, और थोरे का अर्थ थोड़े भी जान लेना चाहिए। ये सब शब्द आज की बोलचाल में नहीं चलते, पर कविता में अब भी मिल जाते हैं।
कुछ शब्द जगह बदलते ही अर्थ बदल देते हैं। इन्हें अनेकार्थी शब्द कहते हैं। पाठ का सबसे अच्छा उदाहरण चौथा दोहा है। वहाँ एक ही शब्द तीन बार आता है और हर बार अर्थ बदल जाता है। मोती के साथ चमक, मनुष्य के साथ मान, और चूने के साथ जल। कल का अर्थ बीता दिन, आने वाला दिन और मशीन का पुर्ज़ा है। पत्र का अर्थ पत्ता, चिट्ठी और समाचार-पत्र है। कर का अर्थ हाथ, किरण और शुल्क है। फल का अर्थ खाने वाला फल, काम का परिणाम और चाकू का धार वाला हिस्सा है। अर्थ अकेले शब्द से नहीं, उसके साथ वाली बात से तय होता है।
उनका पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था और वे भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं। उनका जन्म सोलहवीं शताब्दी में और मृत्यु सत्रहवीं शताब्दी में हुई मानी जाती है। उन्होंने नीति, भक्ति और प्रेम — तीनों विषयों पर लिखा, और भाषा दो चुनीं, अवधी तथा ब्रजभाषा। वे रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों के अच्छे जानकार भी माने जाते हैं। उनके दोहे आज तक इसलिए चल रहे हैं कि वे बहुत छोटे और लयदार हैं, इसलिए सुनते ही याद हो जाते हैं। साथ ही उनमें बात किसी कठिन शास्त्र से नहीं, सुई, धागे और पेड़ जैसी जानी-पहचानी चीज़ों से कही गई है। लोग बातचीत में अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए उन्हें कहावत की तरह कह देते हैं।
Flashcards (15)
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- शब्द और अर्थ
- पुराना शब्द या अनेकार्थी?
- सच या भ्रम
- अर्थ तक पहुँचने का क्रम
- झटपट उत्तर
Class 6 Hindi Chapter 5 — frequently asked questions
दोहा दो पंक्तियों का छोटा छंद है। इतनी कम जगह में पूरी बात कहनी होती है, इसलिए एक भी शब्द फ़ालतू नहीं रहता। छोटा और लयदार होने के कारण वह सुनते ही याद हो जाता है।
बड़ा देखकर छोटे को फेंक देना समझदारी नहीं है। जहाँ सिलाई का काम है वहाँ सुई ही चलेगी। तलवार वहाँ एक टाँका तक नहीं लगा पाएगी, इसलिए उपयोगिता आकार से नहीं, काम से तय होती है।
पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाता और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीता। दोनों जो जोड़ते हैं वह दूसरों के लिए होता है। यही परोपकार का गुण समझदार व्यक्ति में भी होना चाहिए।
तरुवर का अर्थ पेड़ है और सरवर का अर्थ तालाब। सुजान का अर्थ समझदार और भला व्यक्ति है। तीनों शब्द दूसरे दोहे में आए हैं।
ऐसे शब्द को कहते हैं जो अलग-अलग जगह पर अलग अर्थ दे दे। पाठ में ‘पानी’ इसका उदाहरण है। वह मोती के साथ चमक, मनुष्य के साथ मान, और चूने के साथ जल का अर्थ देता है।
पहला अर्थ बीता हुआ दिन है और दूसरा आने वाला दिन। तीसरा अर्थ मशीन का पुर्ज़ा है, जैसे किसी यंत्र का कोई भाग। एक ही शब्द तीनों जगह चल जाता है।
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