Class 6 Hindi Chapter 2: गोल

गोल is Chapter 2 of NCERT / CBSE Class 6 Hindi (Hindi medium). This page has the complete chapter notes across 3 topics , 60 practice MCQs with answers and explanations , 27 important short and long questions and 45 flashcards — all written to the NCERT / CBSE syllabus and free to read.

मैदान की वह घटना और बदले का ढंग

सन् 1933 के एक मुकाबले में लेखक के सिर पर स्टिक लगी। वे लौटे, बदला लेने की बात कही, छह गोल किए, और अंत में विरोधी को समझाकर चले गए।

What you will be able to do

  • मैं सन् 1933 की घटना को क्रम से सुना सकता/सकती हूँ।
  • मैं बता सकता/सकती हूँ कि लेखक ने बदला किस ढंग से लिया।
  • मैं समझा सकता/सकती हूँ कि विरोधी खिलाड़ी क्यों घबरा गया।
  • मैं अपने शब्दों में लिख सकता/सकती हूँ कि खेल भावना किसे कहते हैं।

Key points

  • यह घटना सन् 1933 की है, जब लेखक पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेलते थे।

  • मुकाबला पंजाब रेजिमेंट और सैंपर्स एंड माइनर्स के बीच हो रहा था।

  • विरोधी खिलाड़ी गेंद छीनने में बार-बार असफल हो रहे थे, इसी झुँझलाहट में एक ने स्टिक मारी।

  • चोट लगने पर लेखक को मैदान से बाहर ले जाना पड़ा, पर वे पट्टी बँधवाकर लौट आए।

  • उन्होंने उसी खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रखकर कहा कि बदला अवश्य लिया जाएगा।

  • वह खिलाड़ी शेष मैच में खेल पर नहीं, लेखक पर नज़र रखता रहा।

  • लेखक ने एक के बाद एक छह गोल किए, यही उनका बदला था।

  • अंत में उन्होंने समझाया कि खेल में इतना क्रोध ठीक नहीं, और खिलाड़ी लज्जित हो गया।

Full explanation

मैदान का सच

लेखक पाठ का आरंभ एक स्वीकार से करते हैं। खेल के मैदान पर धक्का-मुक्की होती है और नोंक-झोंक भी। यह किसी एक दौर की बात नहीं। जब वे खेलते थे, तब भी यही सब चलता था। इस एक वाक्य से पाठक तैयार हो जाता है कि आगे कोई कड़वी घटना आने वाली है।

सन् 1933 का मुकाबला

घटना सन् 1933 की है। उन दिनों लेखक पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करते थे। एक दिन उनकी टीम का मुकाबला सैंपर्स एंड माइनर्स से था। मैच साधारण ढंग से चल रहा था, पर एक बात असाधारण थी।

गेंद हाथ नहीं आती

विरोधी दल के खिलाड़ी बार-बार लेखक से गेंद छीनने का प्रयत्न करते। हर बार असफल रहते। सोचिए कि ऐसा बार-बार हो तो सामने वाले के मन में क्या चलेगा। पहले आश्चर्य, फिर झुँझलाहट, और अंत में क्रोध।

क्रोध का एक क्षण

वही क्रोध एक खिलाड़ी से गलती करा देता है। वह अपनी स्टिक लेखक के सिर पर दे मारता है। खेल रुक जाता है और लेखक को मैदान से बाहर ले जाना पड़ता है। यहाँ तक घटना किसी भी मैदान की हो सकती थी। आगे जो हुआ, वही इस पाठ को विशेष बनाता है।

पट्टी बाँधकर वापसी

थोड़ी देर बाद लेखक पट्टी बँधवाकर लौट आते हैं। वे बाहर बैठे नहीं रहते। लौटते ही वे सीधे उसी खिलाड़ी के पास जाते हैं और उसकी पीठ पर हाथ रखते हैं। यह स्पर्श मारने वाले का नहीं, समझाने वाले का है।

एक वाक्य, जिसने खेल बदल दिया

वे कहते हैं कि चिंता मत करो, बदला मैं अवश्य लूँगा। सुनने में यह धमकी लगती है। खिलाड़ी घबरा जाता है। अब वह गेंद पर नहीं, लेखक पर नज़र रखता है। उसे लगता है कि किसी भी क्षण उसके सिर पर भी वार हो सकता है।

डर का असली काम

यहीं पाठ की सबसे गहरी बात छिपी है। उस खिलाड़ी को किसी ने छुआ तक नहीं, फिर भी उसका खेल बिगड़ गया। जो आदमी बुरा काम करता है, वह भीतर से डरा रहता है। उसे लगता रहता है कि उसके साथ भी वही किया जाएगा। यह डर बाहर से नहीं आता, भीतर से उठता है।

छह गोल

इसी बीच लेखक एक के बाद एक छह गोल कर देते हैं। ध्यान दीजिए कि उन्होंने अपना समय किसमें लगाया। बदले की योजना बनाने में नहीं, खेल में। जो शक्ति क्रोध में जा सकती थी, वह गेंद पर लगी।

खेल के बाद की बात

मैच समाप्त होने पर वे फिर उसी खिलाड़ी के पास जाते हैं और उसकी पीठ थपथपाते हैं। वे कहते हैं कि खेल में इतना क्रोध अच्छा नहीं, और उनका बदला पूरा हो चुका है। फिर वे एक बात और जोड़ते हैं, जो पूरे पाठ की जान है।

सबसे चुभने वाला वाक्य

वे कहते हैं कि यदि चोट न लगी होती तो शायद जीत का अंतर केवल दो गोल का रहता। अर्थात उस खिलाड़ी की स्टिक ने ही लेखक को और अधिक खेलने के लिए तैयार किया। यह सुनकर वह सचमुच बहुत लज्जित होता है।

बदला, पर किस भाषा में

अब ‘बदला’ शब्द पर लौटिए। लेखक ने बदला लिया अवश्य, पर उसी भाषा में नहीं जिसमें उन पर वार हुआ था। उन्होंने उत्तर अपने खेल से दिया। चोट का जवाब चोट होता तो दोनों बराबर हो जाते। खेल से उत्तर देकर उन्होंने स्वयं को ऊपर रखा।

खेल भावना क्या है

खेल भावना का अर्थ यही है। विरोधी हराने योग्य प्रतिद्वंद्वी है, शत्रु नहीं। उसे हराइए, पर मैदान के नियमों के भीतर रहकर। और जब खेल समाप्त हो जाए तो कटुता वहीं छोड़ दीजिए। लेखक ने पीठ थपथपाकर ठीक यही किया।

आज भी काम की बात

यह घटना लगभग सौ वर्ष पुरानी है, पर आज भी काम की है। कक्षा में, खेल में या घर में जब कोई अन्याय करे, तो उत्तर देने के दो रास्ते होते हैं। एक वही करना जो सामने वाले ने किया। दूसरा अपना काम इतना अच्छा कर देना कि उत्तर अपने आप मिल जाए। लेखक ने दूसरा रास्ता चुना।

Concepts and terms

खेल भावना

खेल को नियम और आदर के साथ खेलने का भाव। इसमें विरोधी हराने योग्य प्रतिद्वंद्वी होता है, शत्रु नहीं। यही भाव लेखक को चोट खाकर भी शांत बनाए रखता है।

संयम

क्रोध आने पर भी स्वयं को रोक लेने की शक्ति। लेखक के पास बदला लेने का अवसर था, पर उन्होंने उसे स्टिक से नहीं, गोल से चुकाया।

संस्मरण

वह लेखन जिसमें लेखक अपने जीवन की सच में बीती बातें स्वयं सुनाता है। इसी कारण इस पाठ में ‘मैं’ शब्द बार-बार आता है और घटनाएँ वर्ष के साथ बताई जाती हैं।

लज्जित होना

अपनी ही करनी पर भीतर से शर्म अनुभव करना। विरोधी खिलाड़ी को किसी ने दंड नहीं दिया, फिर भी वह अपने व्यवहार पर स्वयं लज्जित हो गया।

सावधान!

सच या भ्रम?

Case Study

Scenario:

कक्षा में प्रश्न उठा कि लेखक ने बदला लिया या नहीं। अमन ने कहा कि उन्होंने बदला लिया, क्योंकि उन्होंने ऐसा कहा भी था। सना ने पूछा कि बदला आख़िर किस चीज़ से लिया गया। उन्होंने किसी को मारा नहीं। उन्होंने छह गोल किए और खेल जीत लिया। अध्यापिका ने दोनों तरह के बदले बोर्ड पर लिखे। एक में चोट का उत्तर चोट से दिया जाता है। दूसरे में चोट का उत्तर अपने खेल से दिया जाता है। बच्चों ने देखा कि पहला रास्ता झगड़ा बढ़ाता है। दूसरे रास्ते में विरोधी भी अंत में समझ जाता है।

Analysis:

लेखक ने बदला लिया भी और नहीं भी। उन्होंने उत्तर दिया, पर उस भाषा में दिया जिसमें मैदान बात करता है।

Activity:

खेल के मैदान की कोई ऐसी घटना लिखो जब किसी ने गुस्से का उत्तर अपने खेल से दिया हो।

घर पर करके देखो

Title:

उत्तर देने के दो रास्ते

Safety:

यह गतिविधि केवल लेखन की है। किसी का नाम लिखने की आवश्यकता नहीं, घटना भर लिखिए।

What You Notice:

बायाँ खाना प्रायः छोटा रह जाता है और उसमें केवल क्रोध बचता है। दायाँ खाना बड़ा होता जाता है, क्योंकि अपने काम से दिया गया उत्तर आगे तक काम आता है।

Did you know

हॉकी में एक ही मैच में छह गोल करना आज भी असाधारण माना जाता है।

हॉकी स्टिक का निचला सिरा मुड़ा हुआ होता है, इसी से गेंद पर नियंत्रण बनता है।

खेलों में जान-बूझकर चोट पहुँचाने पर खिलाड़ी को मैदान से बाहर कर दिया जाता है।

Memory tricks

घटना का क्रम — छी-चो-लौ-छह-सी — छीनने की कोशिश, चोट, लौटना, छह गोल, सीख। पूरी घटना इसी क्रम में चलती है।

बदले का ढंग — स्टिक नहीं, गोल — उन्होंने उत्तर उसी भाषा में नहीं दिया। चोट का जवाब खेल से दिया गया।

Practice MCQs with answers (20)

Q1 पाठ के आरंभ में लेखक मैदान के बारे में क्या स्वीकार करते हैं? beginner
  • A कि वहाँ नोंक-झोंक होती रहती है
  • B कि वहाँ कभी झगड़ा नहीं होता
  • C कि वहाँ दर्शक नहीं आते
  • D कि वहाँ केवल सैनिक खेलते हैं
Show answer
Answer: कि वहाँ नोंक-झोंक होती रहती है
Why:

वे कहते हैं कि यह सब पहले भी चलता था और आज भी चलता है।

Q2 उस समय लेखक सेना की एक टुकड़ी की ओर से मैदान में उतरे थे। वे किस दल की ओर से खेलते थे? beginner
  • A सैंपर्स एंड माइनर्स
  • B पंजाब रेजिमेंट
  • C फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट
  • D झाँसी क्लब
Show answer
Answer: पंजाब रेजिमेंट
Why:

सन् 1933 में वे पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करते थे।

Q3 विरोधी खिलाड़ियों की कौन-सी कोशिश बेकार जा रही थी? beginner
  • A मैदान का आकार बदलने की
  • B मैच जल्दी समाप्त कराने की
  • C लेखक से गेंद छीनने की
  • D दर्शकों को शांत कराने की
Show answer
Answer: लेखक से गेंद छीनने की
Why:

यही असफलता एक खिलाड़ी के क्रोध का कारण बनी।

Q4 विरोधी खिलाड़ी ने क्रोध में आकर स्टिक चला दी और लेखक को पट्टी बँधवानी पड़ी। स्टिक शरीर के किस भाग पर लगी? beginner
  • A पैर पर
  • B हाथ पर
  • C पीठ पर
  • D सिर पर
Show answer
Answer: सिर पर
Why:

सिर पर चोट लगने के कारण ही उन्हें बाहर ले जाना पड़ा।

Q5 लौटने पर लेखक ने विरोधी खिलाड़ी को कैसे छुआ? intermediate
  • A उसकी पीठ पर हाथ रखकर
  • B उसका हाथ ज़ोर से पकड़कर
  • C उसे मैदान से बाहर करके
  • D उसकी स्टिक छीनकर फेंककर
Show answer
Answer: उसकी पीठ पर हाथ रखकर
Why:

वह स्पर्श मारने वाले का नहीं, समझाने वाले का था।

Q6 ‘बदला मैं जरूर लूँगा’ सुनकर खिलाड़ी ने क्या किया? intermediate
  • A तुरंत क्षमा माँग ली
  • B लेखक को ही देखता रहा
  • C मैदान छोड़कर चला गया
  • D पहले से तेज़ खेलने लगा
Show answer
Answer: लेखक को ही देखता रहा
Why:

उसका ध्यान गेंद से हटकर लेखक पर टिक गया, और खेल बिगड़ गया।

Q7 उस खिलाड़ी के घबराने का असली कारण क्या था? advanced
  • A उसे पैर में गहरी चोट लग चुकी थी
  • B वह लगातार दौड़ने से बहुत थक चुका था
  • C उसे भीतर से वैसा ही होने का भय था
  • D दर्शक शोर मचाकर उसका ध्यान भटका रहे थे
Show answer
Answer: उसे भीतर से वैसा ही होने का भय था
Why:

लेखक कहते हैं कि बुरा काम करने वाला सदा इसी भय में रहता है।

Q8 लेखक ने अपनी शक्ति किसमें लगाई? intermediate
  • A झगड़े में
  • B शिकायत में
  • C विश्राम में
  • D खेल में
Show answer
Answer: खेल में
Why:

बदले की योजना बनाने के स्थान पर उन्होंने गेंद पर ध्यान दिया।

Q9 मैच के बाद लेखक ने विरोधी को क्या समझाया? intermediate
  • A कि खेल में इतना क्रोध ठीक नहीं
  • B कि उसे अब यह दल छोड़ देना चाहिए
  • C कि वह ठीक से खेलना नहीं जानता है
  • D कि उसे सबके सामने क्षमा माँगनी चाहिए
Show answer
Answer: कि खेल में इतना क्रोध ठीक नहीं
Why:

उन्होंने उसे दंड नहीं दिया, केवल समझाया।

Q10 मैच समाप्त होने पर लेखक ने चोट और गोलों के अंतर को जोड़कर एक बात कही। चोट न लगती तो जीत का अंतर कितना होता? intermediate
  • A पूरे चार गोल का
  • B केवल दो गोल का
  • C लगभग आठ गोल का
  • D किसी भी गोल का
Show answer
Answer: केवल दो गोल का
Why:

अर्थात उस स्टिक ने ही उन्हें और अधिक खेलने को तैयार कर दिया।

Q11 यह सुनकर विरोधी खिलाड़ी की क्या दशा हुई? beginner
  • A वह ज़ोर से हँस पड़ा
  • B वह और अधिक क्रोधित हुआ
  • C वह बहुत लज्जित हुआ
  • D वह चुपचाप चला गया
Show answer
Answer: वह बहुत लज्जित हुआ
Why:

उसे किसी ने दंड नहीं दिया, फिर भी वह अपनी करनी पर शर्मिंदा था।

Q12 पाठ में एक शब्द उस भाव के लिए आया है जो किसी को अपनी भूल का अनुभव कराता है। ‘लज्जित’ शब्द का सबसे निकट अर्थ क्या है? beginner
  • A प्रसन्न
  • B थका हुआ
  • C क्रोधित
  • D शर्मिंदा
Show answer
Answer: शर्मिंदा
Why:

लज्जा अर्थात शर्म, इसलिए लज्जित का अर्थ शर्मिंदा हुआ।

Q13 लेखक के बदले को असाधारण क्यों कहा जा सकता है? advanced
  • A क्योंकि उन्होंने उत्तर उसी भाषा में नहीं दिया
  • B क्योंकि उन्होंने रेफ़री से तुरंत शिकायत कर दी
  • C क्योंकि उन्होंने बीच में ही खेल छोड़ दिया
  • D क्योंकि उन्होंने उस खिलाड़ी से कुछ नहीं कहा
Show answer
Answer: क्योंकि उन्होंने उत्तर उसी भाषा में नहीं दिया
Why:

चोट का उत्तर चोट होता तो दोनों बराबर हो जाते।

Q14 खेल भावना पर इन कथनों पर विचार कीजिए। I. जान-बूझकर चोट पहुँचाना खेल भावना के विरुद्ध है। II. विरोधी का आदर करना खेल भावना के विरुद्ध है। III. हार को स्वीकार कर लेना खेल भावना का अंग है। कौन-से कथन सही हैं? advanced
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

I और III सही हैं। II उल्टा है: विरोधी का आदर करना ही खेल भावना की पहली शर्त है।

Q15 मैदान में छोटी-छोटी कहा-सुनी होती रहती थी, यह लेखक स्वयं स्वीकार करते हैं। ‘नोंक-झोंक’ का अर्थ क्या है? intermediate
  • A गहरी मित्रता
  • B लंबी यात्रा
  • C हल्की कहा-सुनी
  • D गहरी नींद
Show answer
Answer: हल्की कहा-सुनी
Why:

मैदान पर होने वाली छोटी-मोटी कहा-सुनी को नोंक-झोंक कहा गया है।

Q16 लेखक ने पट्टी बँधवाकर लौटकर क्या दिखाया? advanced
  • A कि वे डर गए थे
  • B कि उन्हें खेल में रुचि नहीं
  • C कि वे शिकायत करेंगे
  • D कि वे हार मानने वाले नहीं
Show answer
Answer: कि वे हार मानने वाले नहीं
Why:

वे बाहर बैठे नहीं रहे, लौटकर खेल पूरा किया।

Q17 अभिकथन: लेखक ने स्टिक उठाकर उस खिलाड़ी से बदला नहीं लिया। कारण: ऐसा करने पर वे भी उसी खिलाड़ी जैसे हो जाते। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

दोनों सही हैं, और कारण ही लेखक का संयम समझाता है। बदले से दोनों का अंतर मिट जाता, और लेखक वही अंतर बनाए रखना चाहते थे।

Q18 पाठ की यह घटना आज भी क्यों काम की है? advanced
  • A क्योंकि हॉकी आज भी बहुत लोकप्रिय खेल बनी हुई है
  • B क्योंकि अन्याय का उत्तर अपने काम से दिया जा सकता है
  • C क्योंकि सेना की छावनियों में आज भी खेल होते रहते हैं
  • D क्योंकि मैदान पर किए गए गोल सदा गिने जाते रहते हैं
Show answer
Answer: क्योंकि अन्याय का उत्तर अपने काम से दिया जा सकता है
Why:

कक्षा हो या मैदान, अपना काम अच्छा कर देना सबसे अच्छा उत्तर है।

Q19 ‘संस्मरण’ में लेखक किसकी बातें सुनाता है? intermediate
  • A किसी और के जीवन की
  • B अपने जीवन की बीती हुई
  • C कल्पना से गढ़ी हुई
  • D आने वाले समय की
Show answer
Answer: अपने जीवन की बीती हुई
Why:

इसी कारण इस पाठ में ‘मैं’ शब्द बार-बार आता है।

Q20 इस प्रसंग से सबसे बड़ी सीख कौन-सी निकलती है? advanced
  • A केवल तेज़ खेलने से ही जीत मिल जाती है
  • B क्रोध दिखाने से सामने वाला तुरंत सुधर जाता है
  • C चोट लगने पर खेल तुरंत छोड़ देना चाहिए
  • D संयम रखकर उत्तर अपने काम से देना चाहिए
Show answer
Answer: संयम रखकर उत्तर अपने काम से देना चाहिए
Why:

लेखक ने यही किया, और इसी से विरोधी भी बदल गया।

Important short questions (6)

स्टिक मारने वाले खिलाड़ी के क्रोध का कारण क्या था?

वह बार-बार लेखक से गेंद छीनने की कोशिश कर रहा था और हर बार असफल हो रहा था। उसी झुँझलाहट ने उसे क्रोध तक पहुँचा दिया।

लेखक की कही बात सुनकर खिलाड़ी का खेल क्यों बिगड़ गया?

उसका ध्यान गेंद से हटकर लेखक पर टिक गया। उसे हर क्षण यही लगता रहा कि अब उस पर वार होगा, और इसी भय में वह ठीक से खेल ही नहीं पाया।

लेखक के बदले को ‘असाधारण’ क्यों कहा जा सकता है?

क्योंकि उन्होंने उत्तर उसी भाषा में नहीं दिया जिसमें उन पर वार हुआ था। उन्होंने चोट का जवाब अपने खेल से दिया और छह गोल कर दिए।

मैच के बाद की बातचीत से लेखक के स्वभाव का कौन-सा पक्ष दिखता है?

वे जीतकर भी विरोधी को नीचा दिखाना नहीं चाहते थे। पीठ थपथपाकर समझाना बताता है कि उनके मन में कटुता नहीं, केवल सीख देने का भाव था।

‘बुरा काम करने वाला सदा डरता रहता है’ — इस बात को उदाहरण से समझाइए।

स्टिक मारने वाला खिलाड़ी शेष मैच में डरा रहा, जबकि उसे किसी ने छुआ तक नहीं था। उसका भय बाहर से नहीं आया, अपनी ही करनी से भीतर उठा।

खेल भावना का अर्थ अपने शब्दों में लिखिए।

खेल भावना का अर्थ है नियमों के भीतर रहकर खेलना और विरोधी का आदर करना। वह हराने योग्य प्रतिद्वंद्वी होता है, शत्रु नहीं, और खेल समाप्त होते ही कटुता भी समाप्त हो जानी चाहिए।

Long answer questions (3)

सन् 1933 की घटना को आरंभ से अंत तक क्रम में लिखिए।

पंजाब रेजिमेंट और सैंपर्स एंड माइनर्स का मुकाबला चल रहा था। विरोधी खिलाड़ी बार-बार लेखक से गेंद छीनने में असफल हो रहे थे। क्रोध में आकर एक खिलाड़ी ने अपनी स्टिक उनके सिर पर मार दी और उन्हें मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। थोड़ी देर बाद वे पट्टी बँधवाकर लौटे और उसी खिलाड़ी से कहा कि बदला अवश्य लेंगे। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक छह गोल किए। खेल समाप्त होने पर उन्होंने उसकी पीठ थपथपाकर समझाया कि इतना क्रोध ठीक नहीं, और वह खिलाड़ी बहुत लज्जित हुआ।

इस प्रसंग में डर की क्या भूमिका है? विस्तार से लिखिए।

डर इस प्रसंग का असली पात्र है। लेखक ने केवल एक वाक्य कहा और किसी को छुआ तक नहीं। इसके बाद भी विरोधी खिलाड़ी शेष मैच में सहज नहीं रह सका। वह गेंद के स्थान पर लेखक को देखता रहा, क्योंकि उसे लगता रहा कि किसी भी क्षण उस पर वार हो सकता है। लेखक इसी से यह निष्कर्ष निकालते हैं कि बुरा काम करने वाला सदा डरता रहता है। उसका दंड बाहर से नहीं आता, उसके भीतर से ही उठता है। इस तरह एक वाक्य ने वह काम कर दिया जो कोई प्रहार नहीं कर पाता।

यदि आपके साथ खेल के मैदान पर ऐसा हो तो आप क्या करेंगे? पाठ से जोड़कर लिखिए।

पहली इच्छा तो यही होगी कि वैसा ही उत्तर दे दिया जाए, क्योंकि क्रोध उसी क्षण सबसे तेज़ होता है। पर पाठ पढ़कर लगता है कि यह सबसे कमज़ोर रास्ता है। मैं पहले चोट की जाँच कराऊँगा और शिक्षक को बताऊँगा, क्योंकि जान-बूझकर चोट पहुँचाना नियम के विरुद्ध है। इसके बाद मैं लौटकर अपना खेल पूरा करूँगा, ताकि मेरा उत्तर मेरे खेल से मिले। खेल समाप्त होने पर मैं उससे हाथ मिलाऊँगा, जैसे लेखक ने पीठ थपथपाई थी। इससे मैदान पर कटुता भी नहीं बचेगी।

Flashcards (15)

यह घटना किस वर्ष की है?
सन् 1933 की, जब लेखक पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेलते थे।
मुकाबला किन दो दलों के बीच था?
पंजाब रेजिमेंट और सैंपर्स एंड माइनर्स के बीच।
विरोधी खिलाड़ी ने स्टिक क्यों मारी?
क्योंकि वह बार-बार गेंद छीनने में असफल हो रहा था और क्रोध में आ गया।
चोट लगने पर तुरंत क्या करना पड़ा?
लेखक को मैदान से बाहर ले जाना पड़ा।
लेखक कितनी देर बाद लौटे?
थोड़ी ही देर बाद, सिर पर पट्टी बँधवाकर।
लौटकर उन्होंने सबसे पहले क्या किया?
उसी खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रखकर बदला लेने की बात कही।
उस खिलाड़ी पर इस बात का क्या असर हुआ?
वह घबरा गया और सारा समय लेखक को ही देखता रहा।
लेखक ने उस मैच में कितने गोल किए?
छह गोल, एक के बाद एक।
मैच के बाद लेखक ने क्या कहा?
कि खेल में इतना क्रोध अच्छा नहीं, और उनका बदला पूरा हो चुका है।
उन्होंने अंत में कौन-सी बात जोड़ी?
कि चोट न लगती तो जीत का अंतर शायद केवल दो गोल का रहता।
यह सुनकर विरोधी खिलाड़ी का क्या हुआ?
वह सचमुच बहुत लज्जित हुआ।
‘लज्जित होना’ का अर्थ क्या है?
अपनी ही करनी पर भीतर से शर्म अनुभव करना।
बुरा काम करने वाले के बारे में लेखक क्या कहते हैं?
कि वह सदा भीतर से डरा रहता है कि कहीं उसके साथ भी वैसा न हो।
‘खेल भावना’ किसे कहते हैं?
खेल को नियम और आदर के साथ खेलने के भाव को, जिसमें विरोधी शत्रु नहीं होता।
लेखक ने बदला किस चीज़ से लिया?
अपनी स्टिक से नहीं, अपने खेल और गोलों से।

Play this topic

  • घटना का क्रम जमाओ
  • खेल भावना या उसके विरुद्ध?
  • शब्द और अर्थ
  • सच या भ्रम
  • झटपट उत्तर

साधारण सिपाही से कप्तान तक

प्रयाग में जन्म, झाँसी में बसना, सोलह की उम्र में सेना, बिना रुचि के उठाई गई हॉकी, और बर्लिन में कप्तानी — एक नौसिखिया की पूरी यात्रा।

What you will be able to do

  • मैं लेखक के जीवन के पड़ावों को क्रम से बता सकता/सकती हूँ।
  • मैं बता सकता/सकती हूँ कि खेल में रुचि न होते हुए भी वे आगे कैसे बढ़े।
  • मैं समझा सकता/सकती हूँ कि उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ क्यों कहा गया।
  • मैं अपने शब्दों में लिख सकता/सकती हूँ कि गेंद साथी को देने की आदत क्या बताती है।

Key points

  • लेखक का जन्म सन् 1905 में प्रयाग के एक साधारण परिवार में हुआ था।

  • बाद में उनका परिवार झाँसी आकर बस गया।

  • सोलह वर्ष की आयु में वे फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट में साधारण सिपाही बने।

  • उनकी रेजिमेंट का हॉकी में नाम था, पर आरंभ में उनकी खेल में कोई रुचि नहीं थी।

  • सूबेदार मेजर तिवारी बार-बार उन्हें खेलने के लिए कहते रहे।

  • छावनी में अभ्यास का कोई बँधा हुआ समय नहीं था, सैनिक अपनी सुविधा से मैदान पहुँचते।

  • खेल में निखार आने के साथ-साथ उन्हें सेना में तरक्की भी मिलती गई।

  • सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में वे कप्तान बने, उस समय वे लांस नायक थे।

Full explanation

एक साधारण घर

लेखक का जन्म सन् 1905 में प्रयाग में हुआ। वे बताते हैं कि परिवार साधारण था। यह बात वे छिपाते नहीं, बल्कि आरंभ में ही कह देते हैं। इससे पाठक को पता चल जाता है कि आगे जो कुछ हुआ, वह किसी सुविधा से नहीं आया।

झाँसी की ओर

कुछ समय बाद परिवार झाँसी आकर बस गया। यही वह नगर है जिससे लेखक का नाम आगे चलकर जुड़ गया। एक जगह से दूसरी जगह जाना उस समय के कितने ही परिवारों की कहानी है।

सोलह की उम्र में सेना

सोलह वर्ष की आयु में वे फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट में भर्ती हो गए। किस पद पर? एक साधारण सिपाही के रूप में। इस उम्र में आज बच्चे विद्यालय में होते हैं। उस समय परिस्थितियाँ अलग थीं।

रुचि नहीं थी

अब सबसे चौंकाने वाली बात। जिस खेल ने उन्हें संसार भर में पहचान दी, आरंभ में उसमें उनकी कोई रुचि नहीं थी। उनकी रेजिमेंट का हॉकी में अच्छा नाम था, पर वह नाम उनका नहीं था। वे स्वयं को नौसिखिया कहते हैं।

जो बार-बार कहते रहे

यहाँ एक व्यक्ति आते हैं, जिनका नाम पाठ में एक बार ही आता है, पर भूमिका बड़ी है। सूबेदार मेजर तिवारी बार-बार लेखक से हॉकी खेलने के लिए कहते। किसी को आगे बढ़ते देखने के लिए ऐसा ही कोई चाहिए, जो हार न माने।

छावनी का मैदान

छावनी में अभ्यास का कोई बँधा हुआ समय नहीं था। सैनिक अपनी सुविधा से मैदान पहुँचते और खेलना आरंभ कर देते। सोचिए कि इसका अर्थ क्या है। जिसे लगन हो, उसके लिए मैदान हर समय खुला था।

अभ्यास और निखार

यहीं से यात्रा मुड़ती है। लेखक कहते हैं कि जैसे-जैसे उनके खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे उन्हें तरक्की भी मिलती गई। ध्यान दीजिए कि क्रम क्या है। पहले खेल सुधरा, फिर पद बढ़ा। उलटा नहीं हुआ।

बर्लिन का बुलावा

सन् 1936 में बर्लिन ओलंपिक हुआ और लेखक को भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया। उस समय सेना में उनका पद लांस नायक था। यह जोड़ी ध्यान देने योग्य है। सेना में छोटा पद, खेल में सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी।

जादूगर नाम कैसे मिला

बर्लिन में दर्शक उनके का खेल देखकर दर्शक इतने मुग्ध हुए कि उन्होंने उन्हें हॉकी का जादूगर कहना आरंभ कर दिया। यह नाम किसी समिति ने नहीं दिया। यह मैदान के किनारे खड़े लोगों के मुँह से निकला।

पर सारे गोल मेरे नहीं

लेखक इस नाम पर तुरंत एक बात जोड़ देते हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि सारे गोल वे स्वयं नहीं करते थे। उनकी कोशिश तो यह रहती थी कि गेंद गोल के पास ले जाकर किसी साथी को दे दें, ताकि श्रेय उसे मिले।

श्रेय बाँटने वाला खिलाड़ी

यह एक छोटी-सी आदत है, पर इससे पूरा स्वभाव खुल जाता है। जिसे अपना नाम सबसे प्रिय हो, वह गेंद कभी न देता। लेखक के लिए दल की जीत अपने नाम से बड़ी थी। इसी उदारता से उन्होंने दुनिया भर के खेल प्रेमियों का मन जीत लिया।

स्वर्ण पदक

बर्लिन ओलंपिक में भारतीय टीम को स्वर्ण पदक मिला। यह किसी एक खिलाड़ी की जीत नहीं थी। कप्तान वही होता है जो अपनी टीम से सबसे अच्छा खेल निकलवा ले, और यही उन्होंने किया।

हार-जीत किसकी

अंत में वे एक बात कहते हैं जो पूरे पाठ की सबसे ऊँची पंक्ति है। वे कहते थे कि खेलते समय वे सदा यही ध्यान रखते थे कि हार या जीत उनकी नहीं, पूरे देश की है। मैदान पर वे स्वयं को नहीं, देश को खेलता हुआ मानते थे।

यात्रा क्या सिखाती है

इस पूरी यात्रा में कहीं कोई जादू नहीं है। एक साधारण परिवार, एक साधारण पद, और एक ऐसा खेल जिसमें आरंभ में मन ही नहीं लगता था। इन सबके बीच केवल एक चीज़ लगातार चलती रही, और वह थी अभ्यास। बाकी सब उसी के पीछे-पीछे आया।

Concepts and terms

नौसिखिया

वह व्यक्ति जिसने किसी काम में अभी-अभी हाथ डाला हो। लेखक स्वयं को इसी नाम से पुकारते हैं, जिससे पता चलता है कि आरंभ में वे किसी से आगे नहीं थे।

छावनी

वह स्थान जहाँ सेना की टुकड़ी रहती है। यहाँ इसका महत्व यह है कि वहाँ अभ्यास का कोई बँधा समय नहीं था, इसलिए जिसे लगन हो वह जितना चाहे खेल सकता था।

निखार

किसी काम में धीरे-धीरे आने वाला सुधार और चमक। लेखक कहते हैं कि जैसे-जैसे खेल में निखार आया, वैसे-वैसे उन्हें आगे बढ़ने के अवसर भी मिलते गए।

श्रेय

किसी अच्छे काम का नाम या यश। गोल के पास पहुँचकर गेंद साथी को दे देने का अर्थ था कि यश भी साथी को मिले, स्वयं को नहीं।

सावधान!

सच या भ्रम?

असल जीवन: विद्यालय की नई टीम

Scenario:

एक सरकारी विद्यालय में इस वर्ष पहली बार हॉकी टीम बनाई जा रही है। कोच के पास केवल एक पुराना मैदान है और दोपहर का आधा घंटा। कक्षा छह का आमिर सबसे तेज़ दौड़ता है और अकेले ही गेंद लेकर गोल तक जाना चाहता है। उसकी सहपाठी नंदिनी धीमी है, पर वह पास देना जानती है। पहले दो मैचों में आमिर ने चार गोल किए, फिर भी टीम दोनों बार हार गई। कोच किसी को डाँटते नहीं। वे केवल एक काम करते हैं। वे पूरी टीम को एक रजिस्टर दिखाते हैं जिसमें लिखा है कि किस खिलाड़ी को कितनी बार गेंद मिली।

Analysis:

रजिस्टर से पता चलता है कि गेंद नब्बे बार आमिर के पास गई और बाकी दस खिलाड़ियों के पास मिलाकर बीस बार। जब भी दो विरोधी आमिर को घेर लेते, गेंद वहीं रुक जाती, क्योंकि पास देने की आदत ही नहीं बनी थी। नंदिनी सुझाव देती है कि गोल के पास पहुँचकर गेंद उसे दी जाए जिसके सामने जगह खुली हो। तीसरे मैच में आमिर तीन बार गेंद आगे बढ़ाता है और टीम पहली बार जीतती है। उसके अपने गोल घटकर दो रह जाते हैं, पर जीत टीम की होती है।

Activity:

अपनी कक्षा के किसी खेल में दस मिनट तक यह गिनिए कि गेंद या बारी किस-किस के पास कितनी बार गई। फिर समूह में बैठकर बताइए कि क्या कोई खिलाड़ी खेल से बाहर रह गया, और अगली बार उसे कैसे जोड़ा जा सकता है।

घर पर करके देखो

Title:

अपना निखार-रजिस्टर

Safety:

यदि कोई शारीरिक अभ्यास चुनें तो किसी बड़े को बताकर ही कीजिए और थकान होने पर रुक जाइए।

What You Notice:

एक दिन में अंतर दिखाई नहीं देता, पर सातवें दिन पहली पंक्ति पढ़ते ही दिख जाता है। लेखक के साथ भी यही हुआ था — निखार धीरे-धीरे आया, और तरक्की उसके पीछे आई।

Did you know

सन् 1936 का ओलंपिक बर्लिन में हुआ था और भारतीय हॉकी टीम ने वहाँ जीत दर्ज की।

लांस नायक सेना का एक छोटा पद है, यानी कप्तानी खेल की थी, पद की नहीं।

हॉकी में गेंद साथी तक पहुँचाने को ‘पास’ कहते हैं, और अच्छा पास गोल जितना ही मूल्यवान माना जाता है।

Memory tricks

जीवन के पड़ाव — प्र-झाँ-से-अ-क — प्रयाग में जन्म, झाँसी में बसना, सेना में भर्ती, अभ्यास, कप्तानी। पूरी यात्रा इसी क्रम में है।

आगे बढ़ने का सूत्र — निखार तो तरक्की — पहले खेल सुधरा, तब आगे बढ़ने के अवसर मिले। क्रम उलटा नहीं था।

Practice MCQs with answers (20)

Q1 पाठ के अंत में लेखक का परिचय दिया गया है और उसमें उनका जन्मस्थान भी लिखा है। लेखक का जन्म किस नगर में हुआ था? beginner
  • A झाँसी नगर में
  • B प्रयाग नगर में
  • C बर्लिन नगर में
  • D लखनऊ नगर में
Show answer
Answer: प्रयाग नगर में
Why:

जन्म प्रयाग में हुआ और परिवार बाद में झाँसी गया।

Q2 उनका परिवार बाद में कहाँ बसा? beginner
  • A प्रयाग में
  • B दिल्ली में
  • C लाहौर में
  • D झाँसी में
Show answer
Answer: झाँसी में
Why:

इसी नगर से आगे चलकर उनका नाम जुड़ गया।

Q3 लेखक बहुत कम आयु में ही सेना में भर्ती हो गए थे, यह पाठ में बताया गया है। भर्ती के समय उनकी आयु कितनी थी? beginner
  • A सोलह वर्ष
  • B बीस वर्ष
  • C चौदह वर्ष
  • D पच्चीस वर्ष
Show answer
Answer: सोलह वर्ष
Why:

उस आयु में वे एक साधारण सिपाही बने।

Q4 वे किस रेजिमेंट में भर्ती हुए? intermediate
  • A पंजाब रेजिमेंट में
  • B सैंपर्स एंड माइनर्स में
  • C फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट में
  • D गढ़वाल रेजिमेंट में
Show answer
Answer: फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट में
Why:

पंजाब रेजिमेंट की ओर से वे बाद में खेले थे।

Q5 सेना में भर्ती होने पर लेखक को सबसे नीचे का पद मिला था। भर्ती के समय उनका पद क्या था? beginner
  • A कप्तान का पद
  • B रेजिमेंट के सूबेदार का पद
  • C साधारण सिपाही का पद
  • D मेजर का पद
Show answer
Answer: साधारण सिपाही का पद
Why:

वे बिलकुल नीचे से आरंभ करते हैं, और यही यात्रा को बड़ा बनाता है।

Q6 रेजिमेंट में हॉकी की स्थिति कैसी थी? intermediate
  • A उसका खेल में अच्छा नाम था
  • B वहाँ हॉकी खेली ही नहीं जाती थी
  • C वहाँ केवल दौड़ होती थी
  • D वहाँ खेल मना था
Show answer
Answer: उसका खेल में अच्छा नाम था
Why:

नाम रेजिमेंट का था, लेखक का नहीं। वह उन्हें बाद में बनाना पड़ा।

Q7 अपने आरंभिक दिनों की बात करते हुए लेखक अपने लिए एक विनम्र शब्द चुनते हैं। आरंभ में वे स्वयं को क्या मानते थे? beginner
  • A सबसे अच्छा खिलाड़ी
  • B दल का कप्तान
  • C एक अच्छा प्रशिक्षक
  • D एक नौसिखिया खिलाड़ी
Show answer
Answer: एक नौसिखिया खिलाड़ी
Why:

यह स्वीकार ही यात्रा की सच्चाई दिखाता है।

Q8 ‘नौसिखिया’ शब्द का अर्थ क्या है? intermediate
  • A बहुत थका हुआ व्यक्ति
  • B नया सीखने वाला व्यक्ति
  • C बहुत अनुभवी व्यक्ति
  • D बहुत आलसी व्यक्ति
Show answer
Answer: नया सीखने वाला व्यक्ति
Why:

नौ अर्थात नया, इसलिए नौसिखिया वह है जिसने अभी सीखना आरंभ किया।

Q9 छावनी में एक वरिष्ठ अधिकारी लेखक को बार-बार मैदान में भेजते रहते थे। लेखक को खेलने के लिए कौन प्रेरित करते थे? beginner
  • A उनके पिता जी
  • B रेजिमेंट के कप्तान
  • C एक जर्मन दर्शक
  • D सूबेदार मेजर तिवारी
Show answer
Answer: सूबेदार मेजर तिवारी
Why:

उनका नाम पाठ में एक ही बार आता है, पर भूमिका बड़ी है।

Q10 छावनी के अभ्यास की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी? advanced
  • A अभ्यास का कोई बँधा हुआ समय ही नहीं होता था
  • B अभ्यास केवल रविवार के दिन ही कराया जाता था
  • C अभ्यास केवल रात के समय ही हो पाता था
  • D अभ्यास पूरे वर्ष में एक ही बार होता था
Show answer
Answer: अभ्यास का कोई बँधा हुआ समय ही नहीं होता था
Why:

छावनी में जब भी समय मिलता, खेल आरंभ हो जाता। इसी खुली छूट ने लेखक को घंटों अभ्यास का अवसर दिया।

Q11 सेना की टुकड़ी जहाँ रहती है, उस स्थान के लिए पाठ में एक शब्द आया है। ‘छावनी’ किसे कहते हैं? intermediate
  • A खेल का बड़ा मैदान
  • B नगर का मुख्य बाज़ार
  • C सेना की टुकड़ी का निवास
  • D विद्यालय का बड़ा भवन
Show answer
Answer: सेना की टुकड़ी का निवास
Why:

छावनी वह स्थान है जहाँ सैनिक रहते हैं।

Q12 लेखक के खेल और पद पर इन कथनों पर विचार कीजिए। I. भर्ती के समय वे साधारण सिपाही के पद पर थे। II. कप्तान बनते समय वे मेजर के पद पर थे। III. पाठ के अनुसार पहले खेल में निखार आया, फिर तरक्की हुई। कौन-से कथन सही हैं? advanced
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

I और III सही हैं। II सही नहीं है: बर्लिन में कप्तान बनते समय वे लांस नायक थे।

Q13 ‘निखार’ का सबसे निकट भाव क्या है? intermediate
  • A थकान बढ़ना
  • B रुचि घटना
  • C धीरे-धीरे सुधरना
  • D अचानक रुक जाना
Show answer
Answer: धीरे-धीरे सुधरना
Why:

निखार का अर्थ है काम में चमक और सुधार आना।

Q14 सन 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय दल का नेतृत्व लेखक को सौंपा गया था। उन्हें वहाँ क्या ज़िम्मेदारी मिली? beginner
  • A दल के प्रशिक्षक की
  • B दल के कप्तान की
  • C दल के प्रबंधक की
  • D दल के चिकित्सक की
Show answer
Answer: दल के कप्तान की
Why:

सन् 1936 में उन्हें भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया।

Q15 कप्तान बनते समय सेना में उनका पद क्या था? advanced
  • A मेजर का
  • B सूबेदार का
  • C कर्नल का
  • D लांस नायक का
Show answer
Answer: लांस नायक का
Why:

सेना में छोटा पद, पर खेल में सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी।

Q16 लेखक को जो नाम सबसे अधिक प्रसिद्ध हुआ, वह उन्हें किसी विदेशी नगर में मिला था। ‘हॉकी का जादूगर’ नाम कहाँ मिला? intermediate
  • A झाँसी की छावनी में
  • B बर्लिन ओलंपिक में
  • C प्रयाग के विद्यालय में
  • D पंजाब के मैदान में
Show answer
Answer: बर्लिन ओलंपिक में
Why:

वहाँ के दर्शक उनके खेलने के ढंग से बहुत प्रभावित हुए थे।

Q17 इस नाम पर लेखक ने तुरंत क्या स्पष्ट किया? advanced
  • A कि सारे गोल वे नहीं करते थे
  • B कि यह नाम उन्हें पसंद नहीं
  • C कि वे अब खेल छोड़ देंगे
  • D कि नाम किसी और का है
Show answer
Answer: कि सारे गोल वे नहीं करते थे
Why:

वे नाम को स्वीकार करते हैं, पर सारा श्रेय अपने पास नहीं रखते।

Q18 अभिकथन: लेखक गोल करने का अवसर छोड़कर गेंद साथी को दे देते थे। कारण: वे गोल का श्रेय अपने साथी को देना चाहते थे। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

दोनों सही हैं, और कारण ही ‘जादूगर’ नाम पर उनका उत्तर है। गोल पूरा दल करता है, अकेला खिलाड़ी नहीं।

Q19 बर्लिन में हुए उस ओलंपिक में भारतीय हॉकी दल सबसे आगे रहा था। भारतीय टीम को वहाँ क्या मिला? beginner
  • A रजत पदक
  • B काँस्य पदक
  • C कोई पदक नहीं
  • D स्वर्ण पदक
Show answer
Answer: स्वर्ण पदक
Why:

उस ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने जीत दर्ज की थी।

Q20 मैदान पर हार-जीत को वे किसकी मानते थे? advanced
  • A केवल कप्तान की
  • B पूरे देश की
  • C केवल अपनी
  • D केवल दर्शकों की
Show answer
Answer: पूरे देश की
Why:

वे स्वयं को नहीं, देश को खेलता हुआ मानते थे।

Important short questions (6)

लेखक के आरंभिक जीवन की दो बातें लिखिए।

उनका जन्म सन् 1905 में प्रयाग के एक साधारण परिवार में हुआ। बाद में उनका परिवार झाँसी आकर बस गया।

आरंभ में उनकी खेल के प्रति क्या स्थिति थी?

उनकी हॉकी में कोई रुचि नहीं थी और वे स्वयं को नौसिखिया मानते थे। दूसरी ओर उनकी रेजिमेंट का इस खेल में अच्छा नाम था।

छावनी में अभ्यास का कोई बँधा समय न होना क्यों लाभदायक रहा?

सैनिक जब चाहे मैदान में पहुँचकर खेल सकते थे। इसका अर्थ यह हुआ कि जिसे लगन हो, उसके लिए अभ्यास का अवसर दिन भर खुला रहता था।

पाठ में निखार और तरक्की का क्रम क्या है? वह क्यों महत्वपूर्ण है?

पहले खेल में निखार आया, उसके बाद तरक्की मिली। यह क्रम बताता है कि आगे बढ़ने का रास्ता काम को सुधारने से खुलता है, किसी और चीज़ से नहीं।

‘हॉकी का जादूगर’ नाम मिलने के बाद लेखक ने क्या स्पष्ट किया?

उन्होंने कहा कि इसका यह अर्थ नहीं कि सारे गोल वे ही करते थे। वे गेंद गोल के पास ले जाकर साथी को दे देते थे, ताकि श्रेय उसे मिल सके।

‘हार या जीत पूरे देश की है’ — इस सोच से खिलाड़ी के खेल पर क्या असर पड़ता होगा?

इससे खिलाड़ी अपने नाम के लिए नहीं खेलता। वह ऐसा कोई काम नहीं करता जिससे दल को हानि हो, और कठिन क्षण में भी हार नहीं मानता।

Long answer questions (3)

साधारण सिपाही से कप्तान बनने तक की यात्रा को क्रम से लिखिए।

लेखक का जन्म सन् 1905 में प्रयाग के एक साधारण परिवार में हुआ और बाद में परिवार झाँसी आ बसा। सोलह वर्ष की आयु में वे फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट में साधारण सिपाही बन गए। उस समय हॉकी में उनकी कोई रुचि नहीं थी और वे स्वयं को नौसिखिया मानते थे। सूबेदार मेजर तिवारी बार-बार उन्हें खेलने के लिए कहते रहे। छावनी में अभ्यास का कोई निश्चित समय न होने से वे जितना चाहें खेल सकते थे। खेल में निखार आने के साथ उन्हें तरक्की मिलती गई, और सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में वे कप्तान बना दिए गए।

गेंद साथी को दे देने की आदत से लेखक के व्यक्तित्व के बारे में क्या-क्या पता चलता है?

यह आदत बताती है कि उनके लिए दल की जीत अपने नाम से बड़ी थी। जिसे केवल अपना यश प्रिय हो, वह गोल के इतने पास पहुँचकर गेंद कभी न देता। इससे उनकी उदारता दिखती है, क्योंकि वे श्रेय बाँटना जानते थे। इससे उनका खेल-ज्ञान भी दिखता है, क्योंकि वे समझते थे कि जिस साथी की स्थिति बेहतर है, गोल उसी से होना चाहिए। यही स्वभाव था जिसने उन्हें केवल अच्छा खिलाड़ी नहीं, अच्छा कप्तान भी बनाया और दुनिया भर के खेल प्रेमियों का मन जीत लिया।

इस यात्रा से आपको अपने जीवन के लिए क्या सीख मिलती है? उदाहरण देकर लिखिए।

सबसे बड़ी सीख यह है कि आरंभ में किसी काम में मन न लगना कोई अंत नहीं होता। लेखक को भी हॉकी में रुचि नहीं थी, फिर भी वे उसी खेल के जादूगर कहलाए। दूसरी सीख यह है कि आगे बढ़ने का क्रम काम सुधारने से आरंभ होता है। जैसे यदि मुझे गणित कठिन लगता है तो पहले प्रतिदिन थोड़ा अभ्यास करना होगा, अंक अपने आप बाद में सुधरेंगे। तीसरी सीख श्रेय बाँटने की है। समूह के काम में यदि मैं अपने साथी का नाम भी लूँ तो पूरा समूह और अच्छा काम करता है।

Flashcards (15)

लेखक का जन्म कब और कहाँ हुआ?
सन् 1905 में प्रयाग के एक साधारण परिवार में।
परिवार बाद में कहाँ जाकर बसा?
झाँसी में।
वे किस आयु में सेना में भर्ती हुए?
सोलह वर्ष की आयु में।
वे किस रेजिमेंट में भर्ती हुए थे?
फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट में, एक साधारण सिपाही के रूप में।
आरंभ में खेल के प्रति उनका भाव कैसा था?
कोई रुचि नहीं थी, और वे स्वयं को नौसिखिया मानते थे।
‘नौसिखिया’ का अर्थ क्या है?
जिसने काम में अभी-अभी हाथ डाला हो।
उन्हें खेलने के लिए कौन कहते रहे?
सूबेदार मेजर तिवारी।
छावनी में अभ्यास का समय कैसा था?
कोई बँधा हुआ समय नहीं था, सैनिक अपनी सुविधा से मैदान पहुँचते।
‘निखार’ का अर्थ क्या है?
धीरे-धीरे आने वाला सुधार और चमक।
खेल सुधरने पर उन्हें क्या मिलता गया?
सेना में तरक्की।
वे कप्तान किस अवसर पर बनाए गए?
सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में।
उस समय सेना में उनका पद क्या था?
लांस नायक।
‘हॉकी का जादूगर’ नाम किसने दिया?
बर्लिन ओलंपिक के दर्शकों ने, उनके खेलने के ढंग से प्रभावित होकर।
गोल के पास पहुँचकर वे क्या करते थे?
गेंद साथी को दे देते थे, ताकि श्रेय उसे मिले।
मैदान पर हार-जीत को वे किसकी मानते थे?
पूरे देश की, अपनी नहीं।

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  • जीवन के पड़ाव जमाओ
  • वर्ष और घटना
  • खेल का पद या सेना का?
  • सच या भ्रम
  • झटपट उत्तर

संस्मरण की भाषा और तीन मंत्र

यह पाठ संस्मरण क्यों है, ‘मैं’ के प्रयोग से क्या बनता है, शीर्षक ‘गोल’ क्यों उपयुक्त है, और लगन, साधना तथा खेल भावना का अर्थ क्या है।

What you will be able to do

  • मैं संस्मरण की पहचान बताकर उसे कहानी से अलग कर सकता/सकती हूँ।
  • मैं बता सकता/सकती हूँ कि पाठ में ‘मैं’ के प्रयोग से क्या प्रभाव पड़ता है।
  • मैं लगन, साधना और खेल भावना का अर्थ अपने शब्दों में लिख सकता/सकती हूँ।
  • मैं समझा सकता/सकती हूँ कि शीर्षक ‘गोल’ इस पाठ के लिए उपयुक्त क्यों है।

Key points

  • संस्मरण वह लेखन है जिसमें लेखक अपने जीवन की सच में बीती बातें स्वयं सुनाता है।

  • इसी कारण पूरे पाठ में ‘मैं’ शब्द बार-बार आता है और घटनाएँ वर्ष के साथ बताई जाती हैं।

  • पाठ में संवाद उद्धरण चिह्नों के भीतर रखे गए हैं, जिससे कही गई बात अलग दिखती है।

  • लेखक कहते थे कि उनके पास सफलता का कोई गुरु-मंत्र नहीं है।

  • वे लगन, साधना और खेल भावना को ही सबसे बड़े मंत्र मानते थे।

  • शीर्षक ‘गोल’ पढ़ते ही खेल का संकेत मिल जाता है, और पाठ भी खेल की ही बात करता है।

  • लेखक के जन्मदिन को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

  • भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार ‘खेल रत्न’ कहलाता है।

Full explanation

यह पाठ किस प्रकार का है

पाठ पढ़ते ही एक बात ध्यान खींचती है। लिखने वाला किसी और के बारे में नहीं बता रहा। वह अपनी ही बीती बातें सुना रहा है। ऐसे लेखन को संस्मरण कहते हैं। इसमें कल्पना नहीं होती, इसीलिए यहाँ वर्ष, नगर और दलों के नाम तक साफ़ दिए गए हैं।

‘मैं’ का असर

पूरे पाठ में ‘मैं’ शब्द बार-बार आता है। सोचिए कि यदि यही घटना कोई और सुनाता तो क्या होता। तब वह एक समाचार बन जाती। लेखक स्वयं सुना रहे हैं, इसलिए पाठक को लगता है कि वह पास बैठकर बात सुन रहा हो।

तारीखें क्यों दी गई हैं

सन् 1933, सन् 1905, सन् 1936 — पाठ में वर्ष बार-बार आते हैं। कहानी में तारीख की आवश्यकता नहीं होती, पर संस्मरण में होती है। तारीख यह बताती है कि बात सच में घटी थी।

संवाद और उद्धरण चिह्न

पाठ में जहाँ कोई बात कही गई है, वह उद्धरण चिह्नों के भीतर रखी गई है। इससे पाठक तुरंत समझ जाता है कि यह लेखक का वर्णन नहीं, किसी के मुँह से निकला वाक्य है। लिखते समय यह चिह्न बात के आरंभ में खुलता है और अंत में बंद हो जाता है।

सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

लेखक बताते हैं कि जहाँ भी वे जाते हैं, लोग उन्हें घेर लेते हैं। बच्चे भी और बूढ़े भी। सबका प्रश्न एक ही होता है — सफलता का रहस्य क्या है। यह प्रश्न आज भी उतना ही पूछा जाता है।

उनका उत्तर

उनका उत्तर बहुत सीधा है। वे कहते हैं कि उनके पास कोई गुरु-मंत्र नहीं है। गुरु-मंत्र का अर्थ है ऐसा गुप्त सूत्र जिससे काम तुरंत बन जाए। इतना कहकर वे यह भी कह देते हैं कि छोटा रास्ता होता ही नहीं।

पहला मंत्र: लगन

फिर वे तीन बातें गिनाते हैं। पहली है लगन। लगन का अर्थ है काम से मन का इस तरह जुड़ जाना कि उसे छोड़ा न जाए। यह बात उनके जीवन से मिलती है, क्योंकि आरंभ में रुचि न होने पर भी वे मैदान पर जाते रहे।

दूसरा मंत्र: साधना

दूसरी है साधना। साधना एक दिन का परिश्रम नहीं है। वह लंबे समय तक लगातार किया गया अभ्यास है। छावनी के मैदान पर वर्षों चलने वाला अभ्यास ही उनकी साधना थी।

तीसरा मंत्र: खेल भावना

तीसरी है खेल भावना। यही वह बात है जो पूरे पाठ में घटनाओं के रूप में दिखाई देती है। चोट खाकर भी संयम रखना, विरोधी की पीठ थपथपाना, और गेंद साथी को दे देना — ये तीनों उसी भावना के रूप हैं।

तीनों का मेल

ध्यान दीजिए कि ये तीनों अलग-अलग काम करते हैं। लगन आरंभ कराती है, साधना टिकाए रखती है, और खेल भावना बताती है कि जीत किस ढंग से पानी है। तीनों में से कोई एक हट जाए तो चित्र अधूरा रह जाता है।

शीर्षक ‘गोल’

अब शीर्षक पर आइए। ‘गोल’ शब्द सुनते ही कुछ गोल वस्तुएँ मन में आती हैं। पर यहाँ वह खेल का गोल है। शीर्षक पढ़ते ही पता चल जाता है कि लिखने वाले का जीवन खेल से जुड़ा रहा होगा। एक ही शब्द में पूरा परिचय आ जाता है।

आगे की पहचान

लेखक का नाम आज भी जीवित है। भारत में उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि लाखों लोग उनके जीवन से प्रेरणा लें। देश का सर्वोच्च खेल पुरस्कार ‘खेल रत्न’ कहलाता है।

पाठ हमसे क्या कहता है

अंत में देखिए कि यह पाठ क्या माँगता है। वह यह नहीं कहता कि सब हॉकी खेलें। वह यह कहता है कि जो भी काम हो, उसमें लगन रखिए, लगातार अभ्यास कीजिए, और जीत का रास्ता ऐसा चुनिए जिस पर बाद में लज्जा न आए।

Concepts and terms

संस्मरण

वह गद्य-विधा जिसमें लेखक अपने जीवन की बीती हुई सच्ची बातें स्वयं सुनाता है। इसमें कल्पना नहीं होती, इसीलिए इस पाठ में वर्ष, नगर और दलों के नाम तक दिए गए हैं।

लगन

किसी काम से मन का इस तरह जुड़ जाना कि उसे छोड़ा ही न जाए। लेखक इसे सफलता का पहला मंत्र मानते हैं, क्योंकि रुचि न होने पर भी वे मैदान पर जाते रहे।

साधना

लंबे समय तक लगातार किया जाने वाला अभ्यास। एक दिन का परिश्रम साधना नहीं होता। छावनी के मैदान पर वर्षों चला अभ्यास ही उनकी साधना थी।

गुरु-मंत्र

कोई ऐसा गुप्त सूत्र जिससे काम तुरंत बन जाए। लेखक साफ़ कहते हैं कि उनके पास ऐसा कुछ नहीं था, अर्थात छोटा रास्ता होता ही नहीं।

सावधान!

सच या भ्रम?

Case Study

Scenario:

कक्षा ने एक ही घटना दो तरह से लिखी। पहले उन्होंने उसे मैं से लिखा। फिर उसी घटना को वह से लिखा। दोनों पन्ने साथ रखकर पढ़े गए। मैं वाले पन्ने में डर और गुस्सा साफ़ महसूस हुआ। वह वाले पन्ने में केवल घटना दिखी, भीतर की बात नहीं। सना ने कहा कि संस्मरण इसीलिए मैं से लिखा जाता है। लेखक अपनी याद सुना रहा होता है। फिर बच्चों ने शीर्षक पर बात की। गोल शब्द में खेल भी है और उस दिन का उत्तर भी।

Analysis:

दोनों पन्नों में घटना एक ही थी। मैं जोड़ते ही भीतर की बात भी पन्ने पर आ गई, और वही संस्मरण को ख़बर से अलग करती है।

Activity:

अपनी कोई याद पहले मैं से लिखो, फिर वह से। दोनों पढ़कर बताओ कि कौन-सी अधिक सच्ची लगी।

घर पर करके देखो

Title:

अपना छोटा संस्मरण

Safety:

यह गतिविधि केवल लेखन की है। किसी का नाम लिखना आवश्यक नहीं, घटना भर लिखिए।

What You Notice:

तारीख और स्थान लिखते ही आपका लेखन कहानी जैसा नहीं, सच्ची बात जैसा लगने लगता है। यही अंतर संस्मरण को कहानी से अलग करता है।

Did you know

भारत में हर वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है।

संस्मरण और आत्मकथा में अंतर है। आत्मकथा पूरा जीवन कहती है, संस्मरण कुछ चुनी हुई यादें।

उद्धरण चिह्न दो जोड़ी होते हैं — एक बात के आरंभ में और दूसरा उसके अंत में।

Memory tricks

सफलता के तीन मंत्र — ल-सा-खे — लगन, साधना, खेल भावना। लेखक ने इन्हीं तीन को सबसे बड़ा बताया।

संस्मरण की पहचान — मैं और तारीख — ‘मैं’ का प्रयोग और सच्ची तारीखें — दोनों मिलें तो समझिए यह संस्मरण है।

Practice MCQs with answers (20)

Q1 पाठ में लेखक अपने ही जीवन की बीती घटना अपने शब्दों में सुनाते हैं। इस पाठ की विधा कौन-सी है? beginner
  • A एक लंबी कविता
  • B एक काल्पनिक कहानी
  • C एक सच्चा संस्मरण
  • D एक समाचार लेख
Show answer
Answer: एक सच्चा संस्मरण
Why:

लेखक अपनी बीती बातें स्वयं सुना रहे हैं, इसलिए यह संस्मरण है।

Q2 संस्मरण में कल्पना की क्या स्थिति होती है? intermediate
  • A कल्पना नहीं होती
  • B सब कुछ कल्पना होता है
  • C आधा सच, आधी कल्पना
  • D केवल नाम कल्पित होते हैं
Show answer
Answer: कल्पना नहीं होती
Why:

इसीलिए पाठ में वर्ष और दलों के नाम तक साफ़ दिए गए हैं।

Q3 पूरे पाठ में लेखक स्वयं बोलते हैं, इसलिए एक शब्द बार-बार लौटकर आता है। सबसे अधिक बार आने वाला शब्द कौन-सा है? intermediate
  • A गोल शब्द
  • B मैं शब्द
  • C खेल शब्द
  • D देश शब्द
Show answer
Answer: मैं शब्द
Why:

यही संस्मरण की सबसे बड़ी पहचान है।

Q4 पाठ में वर्ष देने का उद्देश्य क्या है? advanced
  • A पाठ को और लंबा बनाना
  • B पाठकों को गिनती सिखाना
  • C घटना की सच्चाई दिखाना
  • D पाठक को उलझन में डालना
Show answer
Answer: घटना की सच्चाई दिखाना
Why:

कहानी में तारीख की आवश्यकता नहीं होती, संस्मरण में होती है।

Q5 पाठ में कुछ वाक्य विशेष चिह्नों के भीतर रखे गए हैं, जैसे ‘बदला मैं जरूर लूँगा’। उद्धरण चिह्न किस काम आते हैं? beginner
  • A कही गई बात अलग दिखाने के
  • B पंक्ति को और लंबा करने के
  • C लिखने वाले का नाम छिपाने के
  • D पन्ने पर अंक जोड़ने के
Show answer
Answer: कही गई बात अलग दिखाने के
Why:

इनसे पाठक समझ जाता है कि यह किसी के मुँह से निकला वाक्य है।

Q6 लोग लेखक से घेरकर क्या पूछते थे? beginner
  • A उनका पता कहाँ है
  • B उनकी आयु कितनी है
  • C उनकी सफलता का रहस्य
  • D उनका पद क्या है
Show answer
Answer: उनकी सफलता का रहस्य
Why:

बच्चे और बूढ़े, दोनों यही एक प्रश्न पूछते थे।

Q7 लोग लेखक से उनकी सफलता का कोई छोटा और तुरंत काम करने वाला उपाय पूछते थे। ‘गुरु-मंत्र’ का अर्थ क्या है? intermediate
  • A किसी गुरु का दिया हुआ नाम
  • B पूजा में बोला जाने वाला मंत्र
  • C एक प्रकार की पुरानी पुस्तक
  • D तुरंत काम बनाने वाला गुप्त सूत्र
Show answer
Answer: तुरंत काम बनाने वाला गुप्त सूत्र
Why:

लेखक कहते हैं कि ऐसा कोई सूत्र उनके पास नहीं था।

Q8 लेखक के बताए सफलता के मंत्रों पर इन कथनों पर विचार कीजिए। I. लगन सफलता के मंत्रों में से एक है। II. भाग्य को लेखक सफलता का मंत्र मानते हैं। III. खेल भावना भी इन्हीं मंत्रों में आती है। कौन-से कथन सही हैं? advanced
  • A केवल I और II
  • B केवल II और III
  • C केवल I और III
  • D I, II और III
Show answer
Answer: केवल I और III
Why:

I और III सही हैं। II सही नहीं है: लेखक लगन, साधना और खेल भावना गिनाते हैं; भाग्य का नाम वे कहीं नहीं लेते।

Q9 ‘लगन’ का सबसे निकट अर्थ क्या है? beginner
  • A काम से मन जुड़ जाना
  • B काम करते-करते थक जाना
  • C काम को आगे के लिए टालना
  • D काम करना ही भूल जाना
Show answer
Answer: काम से मन जुड़ जाना
Why:

लगन वह है जो काम छोड़ने ही न दे।

Q10 लेखक साधना को वर्षों तक चलने वाला अभ्यास मानते हैं, एक दिन का काम नहीं। ‘साधना’ की सबसे बड़ी शर्त क्या है? advanced
  • A वह बहुत तेज़ हो
  • B वह किसी के सामने हो
  • C वह लंबे समय तक लगातार चले
  • D वह एक ही दिन में पूरी हो
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Answer: वह लंबे समय तक लगातार चले
Why:

एक दिन का परिश्रम साधना नहीं कहलाता।

Q11 तीनों मंत्रों में से कौन जीत का ढंग तय करता है? advanced
  • A केवल लगन
  • B केवल साधना
  • C केवल गुरु-मंत्र
  • D खेल भावना
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Answer: खेल भावना
Why:

वह बताती है कि जीत किस रास्ते से पानी है।

Q12 अभिकथन: पाठ से लेखक की लगन सिद्ध होती है। कारण: मन न लगने के दिनों में भी वे मैदान पहुँचते रहे। advanced
  • A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
  • B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
  • C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
  • D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Answer: दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
Why:

दोनों सही हैं, और कारण ही लगन की पहचान है। रुचि के दिनों में सब जाते हैं; लगन अरुचि के दिनों में दिखाई देती है।

Q13 पुस्तक में पाठ का शीर्षक देखकर पढ़ने से पहले ही मन में एक अनुमान बन जाता है। ‘गोल’ शीर्षक पढ़कर सबसे पहले क्या अनुमान होता है? intermediate
  • A कि पाठ ज्यामिति से जुड़ा है
  • B कि पाठ चंद्रमा से जुड़ा है
  • C कि पाठ भोजन से जुड़ा है
  • D कि पाठ खेल से जुड़ा है
Show answer
Answer: कि पाठ खेल से जुड़ा है
Why:

एक ही शब्द में लिखने वाले का परिचय आ जाता है।

Q14 हर वर्ष 29 अगस्त को देश भर में एक विशेष दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय खेल दिवस क्यों मनाया जाता है? intermediate
  • A नया खेल आरंभ कराने के लिए
  • B लोग उनके जीवन से प्रेरणा लें
  • C सबको पुरस्कार बाँटने के लिए
  • D विद्यालय में छुट्टी देने के लिए
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Answer: लोग उनके जीवन से प्रेरणा लें
Why:

यह दिन लेखक के जन्मदिन पर मनाया जाता है।

Q15 खेल के क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा सम्मान किसी खिलाड़ी को दिया जाता है। भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार कौन-सा है? beginner
  • A स्वर्ण पदक
  • B खेल रत्न
  • C ओलंपिक पदक
  • D राष्ट्रीय खेल दिवस
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Answer: खेल रत्न
Why:

पाठ के साथ दी गई जानकारी में यही बताया गया है।

Q16 संस्मरण और कहानी में मुख्य अंतर क्या है? advanced
  • A संस्मरण सच्ची बीती बात है और कहानी गढ़ी हुई
  • B कहानी छोटी होती है और संस्मरण बहुत लंबा होता है
  • C कहानी में किसी व्यक्ति का नाम नहीं आता है
  • D दोनों में कोई अंतर नहीं होता, नाम भर अलग हैं
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Answer: संस्मरण सच्ची बीती बात है और कहानी गढ़ी हुई
Why:

संस्मरण में लेखक अपनी बीती बात सुनाता है, इसलिए उसमें कल्पना की जगह नहीं रहती। कहानी गढ़ी जाती है।

Q17 यदि यही घटना कोई और सुनाता तो वह क्या बन जाती? advanced
  • A एक सुंदर कविता
  • B एक समाचार जैसी बात
  • C एक छोटा-सा नाटक
  • D एक कठिन पहेली
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Answer: एक समाचार जैसी बात
Why:

‘मैं’ हटते ही पाठ की आत्मीयता भी चली जाती।

Q18 पाठ पढ़कर सबसे बड़ी माँग क्या निकलती है? advanced
  • A सब लोग हॉकी खेलना सीखें
  • B सब लोग सेना में भर्ती हों
  • C सब लोग बर्लिन घूमने जाएँ
  • D सब अपने काम में लगन रखें
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Answer: सब अपने काम में लगन रखें
Why:

पाठ खेल नहीं, खेलने का ढंग सिखाता है।

Q19 खेल भावना पाठ में किस रूप में दिखाई देती है? intermediate
  • A केवल गोल गिनने की बात में
  • B संयम और विरोधी के आदर में
  • C केवल मैच जीत जाने की बात में
  • D केवल रोज़ अभ्यास करने में
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Answer: संयम और विरोधी के आदर में
Why:

चोट पर संयम और मैच के बाद पीठ थपथपाना, दोनों इसी के रूप हैं।

Q20 पाठ में लेखक ‘मैं’ कहकर अपनी बात कहते हैं, किसी तीसरे व्यक्ति के रूप में नहीं। इससे पाठक को क्या अनुभव होता है? intermediate
  • A बात बहुत ही दूर से कही जा रही है
  • B बात कठिन हो गई है
  • C बात अधूरी रह गई है
  • D बात पास बैठकर कही जा रही है
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Answer: बात पास बैठकर कही जा रही है
Why:

यही आत्मीयता संस्मरण को समाचार से अलग करती है।

Important short questions (6)

संस्मरण की दो पहचान लिखिए।

पहली यह कि लेखक अपनी ही बीती बातें सुनाता है और ‘मैं’ का प्रयोग करता है। दूसरी यह कि उसमें सच्ची तारीखें और वास्तविक नाम आते हैं।

पाठ में उद्धरण चिह्नों का प्रयोग किसलिए हुआ है?

जहाँ किसी ने कुछ कहा है, वह बात उद्धरण चिह्नों के भीतर रखी गई है। इससे पाठक समझ जाता है कि यह लेखक का वर्णन नहीं, किसी के मुँह से निकला वाक्य है।

‘मेरे पास कोई गुरु-मंत्र नहीं’ कहकर लेखक क्या समझाना चाहते हैं?

वे यह बताना चाहते हैं कि सफलता का कोई छोटा या गुप्त रास्ता नहीं होता। जो कुछ मिला, वह लगन और लगातार अभ्यास से ही मिला।

लगन और साधना में क्या अंतर है?

लगन मन के जुड़ाव की बात है, जो काम आरंभ कराती है। साधना समय की बात है, क्योंकि वह लंबे समय तक लगातार चलने वाला अभ्यास है।

तीनों मंत्रों में से किसी एक को हटा दें तो क्या होगा?

चित्र अधूरा रह जाएगा। लगन के बिना काम आरंभ नहीं होगा, साधना के बिना वह टिकेगा नहीं, और खेल भावना के बिना जीत का ढंग ही गलत हो जाएगा।

शीर्षक ‘गोल’ के दो अर्थ बताइए।

एक सामान्य अर्थ है गोल आकार की वस्तु, जैसे गेंद या रोटी। दूसरा अर्थ खेल का गोल है, और पाठ इसी दूसरे अर्थ पर टिका है।

Long answer questions (3)

यह पाठ संस्मरण है, कहानी नहीं। इस बात को प्रमाणों सहित सिद्ध कीजिए।

पहला प्रमाण ‘मैं’ का प्रयोग है। पूरे पाठ में लेखक स्वयं बोलते हैं, किसी और के बारे में नहीं बताते। दूसरा प्रमाण तारीखों का है। सन् 1905, सन् 1933 और सन् 1936 जैसे वर्ष बार-बार आते हैं, और कहानी में ऐसी तारीखों की आवश्यकता नहीं होती। तीसरा प्रमाण वास्तविक नामों का है, जैसे पंजाब रेजिमेंट, सैंपर्स एंड माइनर्स और सूबेदार मेजर तिवारी। चौथा प्रमाण यह है कि पाठ में कहीं कोई गढ़ी हुई बात नहीं जोड़ी गई। इन सब कारणों से यह स्पष्ट है कि यह लेखक के जीवन का सच्चा संस्मरण है।

लगन, साधना और खेल भावना — तीनों को पाठ की घटनाओं से जोड़कर समझाइए।

लगन वह है जो काम से मन जोड़ देती है। पाठ में इसका प्रमाण यह है कि आरंभ में रुचि न होने पर भी वे मैदान जाते रहे। साधना लंबे समय तक चलने वाला अभ्यास है। छावनी में समय बँधा न था। वे वर्षों तक खेलते रहे। खेल भावना जीत का ढंग तय करती है। इसके तीन प्रमाण हैं। पहला, चोट पर संयम। दूसरा, विरोधी की पीठ थपथपाना। तीसरा, गेंद साथी को दे देना। तीनों मिलकर उन्हें वह खिलाड़ी बनाते हैं जिसे आज भी याद किया जाता है।

यदि आपको अपने किसी अनुभव पर संस्मरण लिखना हो तो आप किन बातों का ध्यान रखेंगे?

सबसे पहले मैं कोई सच्ची घटना चुनूँगा। संस्मरण में कल्पना नहीं चलती। मैं ‘मैं’ का प्रयोग करूँगा, ताकि बात पास बैठकर कही गई लगे। मैं समय और स्थान भी लिखूँगा। इससे घटना सच्ची लगती है। जहाँ किसी ने कुछ कहा हो, उसे मैं उद्धरण चिह्नों के भीतर रखूँगा। अंत में मैं यह भी लिखूँगा कि उस घटना से मैंने क्या सीखा। लेखक ने भी अपने प्रसंग के अंत में यही किया है।

Flashcards (15)

‘संस्मरण’ किसे कहते हैं?
उस लेखन को जिसमें लेखक अपने जीवन की सच में बीती बातें स्वयं सुनाता है।
संस्मरण की सबसे बड़ी पहचान क्या है?
‘मैं’ का बार-बार प्रयोग और सच्ची तारीखों का आना।
पाठ में वर्ष क्यों दिए गए हैं?
ताकि पता चले कि घटनाएँ सचमुच घटी थीं।
उद्धरण चिह्न का काम क्या है?
कही गई बात को लेखक के वर्णन से अलग दिखाना।
उद्धरण चिह्न कहाँ खुलता और बंद होता है?
बात के आरंभ में खुलता है और उसके अंत में बंद हो जाता है।
‘गुरु-मंत्र’ का अर्थ क्या है?
ऐसा गुप्त सूत्र जिससे काम तुरंत बन जाए।
लेखक के अनुसार क्या उनके पास कोई गुरु-मंत्र था?
नहीं, वे साफ़ कहते थे कि ऐसा कोई सूत्र उनके पास नहीं है।
सफलता के तीन मंत्र कौन-से हैं?
लगन, साधना और खेल भावना।
‘लगन’ का अर्थ क्या है?
काम से मन का इस तरह जुड़ जाना कि उसे छोड़ा न जाए।
‘साधना’ का अर्थ क्या है?
लंबे समय तक लगातार किया जाने वाला अभ्यास।
तीनों मंत्र अलग-अलग क्या करते हैं?
लगन आरंभ कराती है, साधना टिकाए रखती है, और खेल भावना जीत का ढंग तय करती है।
शीर्षक ‘गोल’ उपयुक्त क्यों है?
क्योंकि पढ़ते ही खेल का संकेत मिलता है और लेखक का जीवन खेल से ही जुड़ा था।
राष्ट्रीय खेल दिवस किस अवसर पर मनाया जाता है?
लेखक के जन्मदिन पर, ताकि लोग उनके जीवन से प्रेरणा लें।
भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार कौन-सा है?
खेल रत्न।
यह पाठ सबसे बड़ी बात क्या कहता है?
कि किसी भी काम में लगन रखिए, लगातार अभ्यास कीजिए, और जीत का ढंग भी ठीक रखिए।

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  • संस्मरण या कहानी?
  • मंत्र और उसका काम
  • सच या भ्रम
  • संस्मरण लिखने का क्रम
  • झटपट उत्तर

Class 6 Hindi Chapter 2 — frequently asked questions

स्टिक मारने वाले खिलाड़ी के क्रोध का कारण क्या था?

वह बार-बार लेखक से गेंद छीनने की कोशिश कर रहा था और हर बार असफल हो रहा था। उसी झुँझलाहट ने उसे क्रोध तक पहुँचा दिया।

लेखक की कही बात सुनकर खिलाड़ी का खेल क्यों बिगड़ गया?

उसका ध्यान गेंद से हटकर लेखक पर टिक गया। उसे हर क्षण यही लगता रहा कि अब उस पर वार होगा, और इसी भय में वह ठीक से खेल ही नहीं पाया।

लेखक के बदले को ‘असाधारण’ क्यों कहा जा सकता है?

क्योंकि उन्होंने उत्तर उसी भाषा में नहीं दिया जिसमें उन पर वार हुआ था। उन्होंने चोट का जवाब अपने खेल से दिया और छह गोल कर दिए।

लेखक के आरंभिक जीवन की दो बातें लिखिए।

उनका जन्म सन् 1905 में प्रयाग के एक साधारण परिवार में हुआ। बाद में उनका परिवार झाँसी आकर बस गया।

आरंभ में उनकी खेल के प्रति क्या स्थिति थी?

उनकी हॉकी में कोई रुचि नहीं थी और वे स्वयं को नौसिखिया मानते थे। दूसरी ओर उनकी रेजिमेंट का इस खेल में अच्छा नाम था।

छावनी में अभ्यास का कोई बँधा समय न होना क्यों लाभदायक रहा?

सैनिक जब चाहे मैदान में पहुँचकर खेल सकते थे। इसका अर्थ यह हुआ कि जिसे लगन हो, उसके लिए अभ्यास का अवसर दिन भर खुला रहता था।

संस्मरण की दो पहचान लिखिए।

पहली यह कि लेखक अपनी ही बीती बातें सुनाता है और ‘मैं’ का प्रयोग करता है। दूसरी यह कि उसमें सच्ची तारीखें और वास्तविक नाम आते हैं।

पाठ में उद्धरण चिह्नों का प्रयोग किसलिए हुआ है?

जहाँ किसी ने कुछ कहा है, वह बात उद्धरण चिह्नों के भीतर रखी गई है। इससे पाठक समझ जाता है कि यह लेखक का वर्णन नहीं, किसी के मुँह से निकला वाक्य है।

‘मेरे पास कोई गुरु-मंत्र नहीं’ कहकर लेखक क्या समझाना चाहते हैं?

वे यह बताना चाहते हैं कि सफलता का कोई छोटा या गुप्त रास्ता नहीं होता। जो कुछ मिला, वह लगन और लगातार अभ्यास से ही मिला।

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