Class 6 Hindi Chapter 1: मातृभूमि
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कविता का चित्र: धरती और उस पर जन्मे लोग
कवि पहले हिमालय से समुद्र तक की धरती दिखाते हैं, फिर उन महापुरुषों को याद करते हैं जिन्होंने यहाँ जन्म लिया। दोनों मिलकर देश की पहचान बनाते हैं।
What you will be able to do
- मैं कविता में आए प्राकृतिक चित्रों को क्रम से बता सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि कविता में किन महापुरुषों का नाम आया है और क्यों।
- मैं समझा सकता/सकती हूँ कि कवि ने एक ही भूमि को कई नाम क्यों दिए।
- मैं अपने शब्दों में कह सकता/सकती हूँ कि कविता में देश का कौन-सा रूप बनता है।
Key points
कविता का आरंभ हिमालय से होता है, जो इतना ऊँचा है कि आकाश तक जा पहुँचता है।
हिमालय के चरणों में सिंधु यानी समुद्र झूमता रहता है, इससे उत्तर और दक्षिण एक चित्र में आ जाते हैं।
गंगा, यमुना और त्रिवेणी का उल्लेख देश की नदियों की ओर ले जाता है।
पहाड़ियों के झरने, झाड़ियों की चिड़ियाँ, अमराई की कोयल और मलय पवन मिलकर ऋतु का चित्र बनाते हैं।
कवि रघुपति, सीता, श्रीकृष्ण और गौतम बुद्ध को इसी भूमि पर जन्मा बताते हैं।
श्रीकृष्ण वंशी और गीता से जुड़ते हैं, गौतम बुद्ध दया और प्रकाश से।
हर छंद के अंत में भूमि को नया नाम मिलता है और हर नाम उसका एक अलग गुण खोलता है।
कविता के रचयिता सोहनलाल द्विवेदी हैं, जिनका प्रिय विषय देशभक्ति रहा।
Full explanation
दो पंक्तियों में पूरा देश
कविता पहली ही साँस में बहुत बड़ा चित्र खींच देती है। एक ओर हिमालय है, इतना ऊँचा कि आकाश तक जा पहुँचे। दूसरी ओर सिंधु है, जो उसके चरणों में झूमता रहता है। सिंधु का अर्थ समुद्र है। हिमालय देश के उत्तर में है और समुद्र दक्षिण में। इस तरह दो पंक्तियों में ही पूरा देश आँखों के सामने आ जाता है।
ऊँचाई और झुकाव
ध्यान दीजिए कि कवि ने क्रिया कैसे चुनी है। पर्वत चूमता है और समुद्र झुककर झूमता है। एक ऊपर उठता है, दूसरा नीचे लहराता है। दोनों में कोई होड़ नहीं है। यह देश का पहला परिचय है — बड़ा, पर शांत।
नदियों की कतार
इसके बाद नदियाँ आती हैं। गंगा और यमुना का नाम आता है, और त्रिवेणी का भी। त्रिवेणी का अर्थ है तीन धाराओं का संगम। कवि कहते हैं कि नदियाँ लहर रही हैं। लहर का अर्थ है हिलोरा, मौज, जोश। नदियाँ यहाँ केवल बह नहीं रहीं, वे उमंग में हैं।
पग-पग पर छटा
एक पंक्ति कहती है कि छटा पग-पग छहर रही है। ‘छहर’ का अर्थ है बिखरना या फैलना। कवि यह नहीं कह रहे कि सुंदरता किसी एक जगह है। वे कह रहे हैं कि वह हर कदम पर बिखरी पड़ी है। पढ़ते समय लगता है जैसे हम स्वयं चलते जा रहे हों।
पहाड़ी और झरने
अब दृश्य पास आता है। पहाड़ियों में अनेक झरने झरते हैं। झाड़ियों में चिड़ियाँ मस्त होकर चहकती हैं। पहले हमने पूरा देश दूर से देखा था। अब हम एक पहाड़ी के पास खड़े हैं और आवाज़ें सुन रहे हैं।
अमराई की कोयल
फिर आम के बगीचे आते हैं, जिन्हें अमराई कहते हैं। वहाँ से कोयल पुकारती है। कोयल की पुकार वसंत की पहचान मानी जाती है। इस एक शब्द से कविता में ऋतु भी आ जाती है।
तन और मन, दोनों
मलय पवन बहती है। यह दक्षिण के मलय पर्वत से आने वाली सुगंधित हवा है। कवि कहते हैं कि वह तन-मन सँवारती है। ठंडक शरीर को ताज़ा करती है और सुगंध मन को। एक हवा दो काम कर जाती है।
अब लोग आते हैं
यहाँ तक कविता में केवल धरती थी। अब कवि उन लोगों को याद करते हैं जिन्होंने इसी धरती पर जन्म लिया। पहले रघुपति, यानी श्रीराम, जो दशरथ के पुत्र थे। फिर सीता, जो जनक की पुत्री थीं और जानकी भी कहलाईं।
वंशी और गीता
इसके बाद श्रीकृष्ण आते हैं। वे वसुदेव के पुत्र थे। कविता उन्हें दो चीज़ों से जोड़ती है — वंशी और गीता। गीता वह ग्रंथ है जिसमें महाभारत के समय श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए प्रश्न-उत्तर संगृहीत हैं। एक ओर बाँसुरी का संगीत, दूसरी ओर गहरी बात।
दया और दीपक
अंत में गौतम बुद्ध आते हैं। कवि कहते हैं कि उनके जन्म से इस भूमि का सुयश बढ़ा। उन्होंने जगत को दया सिखाई और दीपक दिखाया। दीपक का अर्थ यहाँ रोशनी है — वह रास्ता जो अँधेरे में दिखाई दे।
एक भूमि, कई नाम
हर छंद के अंत में कवि भूमि को नया नाम देते हैं। कभी पुण्य-भूमि, कभी स्वर्ण-भूमि। कभी धर्मभूमि, कभी कर्मभूमि। नाम बदलता है, पर ‘भूमि’ वही रहती है। इसलिए बात एक ही देश की बनी रहती है और हर बार उसका एक नया गुण खुलता है।
युद्ध और बुद्ध
सबसे सुंदर जोड़ी अंत में आती है — युद्ध-भूमि और बुद्ध-भूमि। सुनने में दोनों शब्द लगभग एक जैसे हैं, पर अर्थ में एक-दूसरे से दूर। एक में वीरता है, दूसरे में करुणा। कवि कहना चाहते हैं कि यह भूमि लड़ना भी जानती है और क्षमा करना भी।
कविता अपनी क्यों लगती है
हर नाम के साथ एक छोटा-सा शब्द लौटता है — ‘मेरी’। कवि देश को दूर से देखकर वर्णन नहीं करते। वे उसे अपना कहते हैं। इसी कारण पढ़ते-पढ़ते पाठक को भी लगने लगता है कि यह उसकी अपनी भूमि है। कविता का शीर्षक ‘मातृभूमि’ इसी भाव से निकला है।
Concepts and terms
वह भूमि जिसे व्यक्ति माँ की तरह अपना मानता है। कविता में कवि बार-बार ‘मेरी’ कहते हैं, और यही अपनापन इस शब्द का असली अर्थ खोल देता है।
तीन धाराओं का मिलकर एक हो जाना, यानी संगम। ‘त्रि’ का अर्थ तीन है। कविता में यह शब्द देश की नदियों के साथ आता है और जल की भरपूरी दिखाता है।
दक्षिण भारत के मलय पर्वत की ओर से आती हुई हवा, जो अपने साथ सुगंध लाती है। वह ठंडक और महक दोनों देती है, इसीलिए कवि कहते हैं कि वह तन और मन, दोनों को सँवार देती है।
अच्छी कीर्ति, भला नाम। कवि कहते हैं कि गौतम के जन्म से इस भूमि का सुयश बढ़ा, अर्थात उनके कारण देश का नाम संसार में और ऊँचा हुआ।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा छह में कविता पर दो राय बनीं। रोहित के दल ने कहा कि यह कविता धरती की है, क्योंकि उसमें हिमालय, नदियाँ और समुद्र आते हैं। मीरा के दल ने कहा कि यह कविता लोगों की है, क्योंकि उसमें उन महापुरुषों के नाम हैं जिन्होंने यहाँ जन्म लिया। अध्यापिका ने दोनों दलों से कविता का एक-एक चित्र बनवाया। पहले दल ने केवल पहाड़ और समुद्र बनाए। दूसरे दल ने केवल लोगों के चेहरे बनाए। दोनों चित्र अधूरे लगे। तब बच्चों ने दोनों को एक ही कागज़ पर जोड़ दिया। तभी कविता का पूरा चित्र सामने आया।
Analysis:
दोनों दल आधे-आधे सही थे। कविता धरती और उस पर जन्मे लोगों को साथ रखती है, और अलग करते ही चित्र अधूरा रह जाता है।
Activity:
अपने राज्य का एक चित्र बनाओ। उसमें तीन जगहें और तीन ऐसे लोग दिखाओ जिन्होंने वहाँ जन्म लिया।
घर पर करके देखो
Title:
अपने आसपास की मातृभूमि
Safety:
छत पर जाते समय किसी बड़े को साथ लीजिए और किनारे से दूर रहिए।
What You Notice:
जैसे ही आप अंत में ‘मेरा’ लिखते हैं, वही जगह पहले से अधिक अपनी लगने लगती है। कवि ने भी यही किया था।
Did you know
‘सिंधु’ शब्द से ही हमारे देश के कई नाम बने। इसी शब्द से आगे चलकर ‘हिंद’ और ‘इंडिया’ जैसे नाम जुड़े।
मलय पर्वत दक्षिण भारत में है और वहाँ चंदन के वन रहे हैं। इसी कारण वहाँ से आती हवा को सुगंधित कहा गया।
सोहनलाल द्विवेदी की एक और पंक्ति बहुत प्रसिद्ध हुई — कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
Memory tricks
याद रखने की कुंजी — हि-सि-न-झ-को — हिमालय, सिंधु, नदियाँ, झरने, कोयल — कविता के प्राकृतिक चित्र इसी क्रम में आते हैं।
याद रखने की कुंजी — रा-सी-कृ-बु — राम, सीता, कृष्ण, बुद्ध — कविता में चार नाम इसी क्रम में आते हैं।
Practice MCQs with answers (20)
- A आकाश चूमता है
- B नदियाँ रोकता है
- C बादल बनाता है
- D समुद्र में झुकता है
Show answer
Why:
कवि हिमालय को इतना ऊँचा दिखाते हैं कि वह आकाश तक जा पहुँचे।
- A एक पर्वत के लिए
- B समुद्र के लिए
- C एक नगर के लिए
- D एक वन के लिए
Show answer
Why:
सिंधु का अर्थ समुद्र है, और वह हिमालय के चरणों में झूमता बताया गया है।
- A तीन पर्वत
- B तीन ऋतुओं का आना-जाना
- C तीन नदियों का संगम
- D तीन गाँव
Show answer
Why:
‘त्रि’ अर्थात तीन। त्रिवेणी तीन धाराओं का मिलना है।
- A रुकना
- B डूबना
- C सूखना
- D बिखरना
Show answer
Why:
छहर का अर्थ फैलना या छितराना है, और कविता में छटा पग-पग छहर रही है।
- A नदी के किनारे
- B झाड़ियों में
- C अमराई में
- D आकाश में
Show answer
Why:
पहाड़ियों के झरनों के साथ ही कवि झाड़ियों में चहकती चिड़ियों का चित्र रखते हैं।
- A मैना
- B गौरैया
- C मोरनी
- D कोयल
Show answer
Why:
अमराई आम का बगीचा है और वहीं से कोयल की पुकार आती है।
- A तन और मन दोनों को
- B केवल खेतों को
- C केवल नदियों को
- D केवल ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों को
Show answer
Why:
उसकी ठंडक शरीर को ताज़ा करती है और सुगंध मन को प्रसन्न।
- A गौतम बुद्ध का
- B श्रीकृष्ण का
- C श्रीराम का
- D कवि का
Show answer
Why:
रघु के वंश में जन्म लेने के कारण श्रीराम को रघुपति कहा जाता है।
- A राधा
- B जानकी
- C यशोदा
- D सुनयना
Show answer
Why:
पिता जनक के नाम पर ही उनका नाम जानकी पड़ा।
- A राम और सीता
- B बुद्ध और शिष्य
- C कवि और पाठक
- D श्रीकृष्ण और अर्जुन
Show answer
Why:
महाभारत के समय हुआ यही संवाद गीता कहलाता है।
- A भूमि का सुयश बढ़ा
- B नदियाँ बढ़ गईं
- C पर्वत ऊँचा हो गया
- D वर्षा होने लगी
Show answer
Why:
कवि कहते हैं कि उनके जन्म से इस भूमि की कीर्ति और बढ़ी।
- A देना
- B दीपक
- C दिन
- D दिशा
Show answer
Why:
यहाँ दिया अर्थात दीपक, यानी अँधेरे में दिखने वाला रास्ता।
- A बड़ा धन
- B लंबी आयु
- C अच्छी कीर्ति
- D गहरी नींद
Show answer
Why:
सु अर्थात अच्छा और यश अर्थात नाम — मिलकर अच्छी कीर्ति।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: ‘जल-भूमि’ नाम कविता में कहीं नहीं आता, जबकि पुण्य-भूमि और कर्मभूमि दोनों आते हैं।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही इस जोड़ी का अर्थ है। एक ही भूमि लड़ भी सकती है और क्षमा भी कर सकती है।
- A पहले महापुरुष, फिर प्रकृति
- B दोनों एक साथ
- C पहले प्रकृति, फिर महापुरुष
- D केवल प्रकृति आती है
Show answer
Why:
पहले मंच बनता है, फिर उस पर खड़े लोग दिखाई देते हैं।
- A मेरी
- B तेरी
- C सबकी
- D उसकी
Show answer
Why:
‘मेरी’ के लौटने से ही देश के प्रति अपनापन बनता है।
- A 1856–1938
- B 1936–2008
- C 1806–1888
- D 1906–1988
Show answer
Why:
पुस्तक में कवि-परिचय के साथ यही वर्ष दिए गए हैं।
- A हास्य
- B देशभक्ति
- C यात्रा
- D खेल
Show answer
Why:
वे परतंत्र भारत में देश के गौरव का गान करते रहे।
- A देश की नदियों को गिनकर बताने के भाव से
- B देश की सीमा को नाप-जोखकर देखने के भाव से
- C देश को दूर खड़े होकर देखने के भाव से
- D देश को माँ की तरह अपना मानने के भाव से
Show answer
Why:
मातृ का अर्थ माँ है। कवि देश को अपनी माँ कहकर उससे वही संबंध जोड़ लेते हैं जो बच्चे का अपनी माँ से होता है।
Important short questions (6)
आकाश छूता हुआ ऊँचा हिमालय और उसके चरणों में झूमता हुआ सिंधु, यानी समुद्र।
लहर का अर्थ है हिलोरा, मौज, उमंग या जोश। छहर का अर्थ है बिखरना, छितराना या फैलना।
वह दक्षिण के मलय पर्वत से सुगंध लेकर आती है। ठंडक से शरीर ताज़ा होता है और सुगंध से मन प्रसन्न हो जाता है।
रघुपति यानी श्रीराम, जनक की पुत्री सीता, वसुदेव के पुत्र श्रीकृष्ण और दया सिखाने वाले गौतम बुद्ध।
हर नाम देश का एक अलग गुण खोलता है। कोई नाम उसकी पवित्रता बताता है, कोई मूल्य, कोई आस्था और कोई परिश्रम। मिलकर वे पूरी पहचान बनाते हैं।
दिया अर्थात दीपक। आशय यह है कि गौतम बुद्ध ने संसार को अज्ञान के अँधेरे से निकलने का रास्ता दिखाया, जैसे दीपक अँधेरे में राह दिखाता है।
Long answer questions (3)
कवि सबसे पहले सीमाएँ दिखाते हैं। उत्तर में हिमालय है, जो आकाश तक जा पहुँचता है, और उसके चरणों में सिंधु झूमता रहता है। इसके बाद नदियाँ आती हैं — गंगा, यमुना और त्रिवेणी — जिनका पानी उमंग में लहराता है। फिर दृश्य पास आता है और पहाड़ियों के झरने तथा झाड़ियों में चहकती चिड़ियाँ दिखाई देती हैं। अंत में ऋतु का चित्र बनता है, जिसमें अमराई से कोयल पुकारती है और मलय पवन सुगंध लेकर बहती है। इस तरह कविता दूर से पास की ओर चलती है।
यदि कविता में केवल पर्वत, नदी और वन होते तो वह देश का भूगोल भर रह जाती। कवि उसे पहचान देना चाहते हैं, इसलिए वे उन लोगों को याद करते हैं जिन्होंने यहाँ जन्म लिया। रघुपति और सीता आते हैं, फिर श्रीकृष्ण, जिन्होंने वंशी बजाई और गीता सुनाई। अंत में गौतम बुद्ध आते हैं, जिन्होंने संसार को दया सिखाई। इन नामों से पता चलता है कि यह भूमि केवल सुंदर नहीं है, यहाँ ऐसे लोग भी हुए जिन्होंने पूरे जगत को कुछ देना चाहा।
ये दोनों शब्द सुनने में लगभग एक जैसे हैं, पर उनका अर्थ एक-दूसरे से बहुत दूर है। युद्ध में वीरता और संघर्ष है, बुद्ध में करुणा और शांति। कवि इन्हें एक ही पंक्ति में रखकर कहते हैं कि यह भूमि दोनों जानती है। वह अन्याय के सामने लड़ना भी जानती है और क्षमा करना भी। ध्वनि की समानता के कारण पंक्ति सहज ही याद रह जाती है, और अर्थ की दूरी के कारण वह सोचने पर भी विवश करती है। यही इस जोड़ी की सुंदरता है।
Flashcards (15)
Play this topic
- शब्द और अर्थ
- प्रकृति या व्यक्ति?
- कविता का क्रम जमाओ
- सच या भ्रम
- झटपट उत्तर
कविता की भाषा और शिल्प
कविता की लय कहाँ से आती है, तुक और टेक क्या हैं, जोड़े गए शब्द कैसे बनते हैं, और कवि किन शब्दों को प्रतीक की तरह बरतते हैं।
What you will be able to do
- मैं तुक और टेक को पहचानकर उनका अंतर बता सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि कविता की लय किन तीन बातों से बनती है।
- मैं ‘जन्मभूमि’ जैसे जुड़े हुए शब्दों को तोड़कर उनका अर्थ खोल सकता/सकती हूँ।
- मैं कविता में आए प्रतीक शब्दों का आशय अपने शब्दों में लिख सकता/सकती हूँ।
Key points
तुक का अर्थ है पंक्तियों के अंत में मिलती हुई आवाज़, जैसे ‘रही हैं’ और ‘लहर रही हैं’।
टेक वह पंक्ति या जोड़ी है जो हर छंद के बाद लौटकर आती है।
कविता की लय तीन बातों से बनती है — छोटी पंक्तियाँ, मिलती हुई तुक और लौटती हुई टेक।
‘जन्मभूमि’, ‘मातृभूमि’, ‘कर्मभूमि’ जैसे शब्द दो शब्दों के जुड़ने से बने हैं।
जुड़े हुए शब्द में पहला भाग बदलता है और दूसरा भाग वही रहता है, इससे अर्थ बदलता जाता है।
प्रतीक वह शब्द है जो अपने सामान्य अर्थ से आगे कुछ और कहता है, जैसे ‘दिया’ यहाँ रोशनी का प्रतीक है।
कवि ने कठिन शब्द कम रखे हैं, इसीलिए कविता गाकर पढ़ने में सहज लगती है।
कविता में देश का नाम कहीं नहीं आता, फिर भी चित्रों और नामों से पहचान बन जाती है।
Full explanation
कविता गाकर क्यों पढ़ी जाती है
इस कविता को पढ़ते ही मन गाने लगता है। इसका कारण कोई जादू नहीं है। तीन बातें मिलकर यह लय बनाती हैं। पंक्तियाँ छोटी हैं, उनके अंत में तुक मिलती है, और हर छंद के बाद एक जोड़ी लौट आती है। इन तीनों को अलग-अलग देखने पर कविता का ढाँचा साफ़ दिखने लगता है।
तुक क्या है
तुक का अर्थ है अंत में मिलती हुई आवाज़। जब दो पंक्तियाँ एक जैसी ध्वनि पर रुकती हैं तो कान को अच्छा लगता है। पढ़ने वाला अगली पंक्ति का इंतज़ार करने लगता है। तुक कविता को बाँधकर रखती है।
टेक क्या है
टेक वह पंक्ति है जो बार-बार लौटती है। इस कविता में हर छंद के बाद वही जोड़ी आती है, जिसमें भूमि को नया नाम मिलता है। लौटने से दो काम होते हैं। बात मन में गहरी बैठती है, और कविता एक सूत्र में बँधी रहती है।
छोटी पंक्ति का लाभ
यहाँ पंक्तियाँ लगभग बराबर लंबाई की हैं। कोई पंक्ति इतनी लंबी नहीं कि साँस टूट जाए। इसी कारण कविता समूह में एक साथ बोली जा सकती है। लोकगीतों में भी यही ढंग मिलता है।
एक शब्द जो बदलता नहीं
अब शब्दों को देखिए। जन्मभूमि, मातृभूमि, कर्मभूमि, धर्मभूमि। हर बार ‘भूमि’ वही रहती है और उससे पहले वाला भाग बदल जाता है। टिका हुआ भाग बात को एक ही विषय पर रखता है, और बदलता हुआ भाग हर बार नया अर्थ जोड़ देता है।
जुड़े शब्द तोड़कर देखिए
ऐसे शब्दों को तोड़कर पढ़ना चाहिए। जन्म और भूमि से जन्मभूमि बना, यानी वह भूमि जहाँ जन्म हुआ। कर्म और भूमि से कर्मभूमि, यानी वह भूमि जहाँ परिश्रम किया जाता है। तोड़ते ही अर्थ अपने आप खुल जाता है।
प्रतीक का काम
कुछ शब्द अपने सीधे अर्थ पर नहीं रुकते। ‘दिया’ का सीधा अर्थ दीपक है। पर कविता में वह रोशनी का प्रतीक बन जाता है, यानी वह रास्ता जो अँधेरे में दिखाई दे। ऐसे शब्द कविता को गहरा बनाते हैं।
सिंधु भी एक प्रतीक
इसी तरह ‘सिंधु’ केवल जल नहीं है। वह देश की दक्षिणी सीमा का संकेत है। एक शब्द से पूरा भूगोल आ जाता है। कवि को लंबा वर्णन नहीं करना पड़ता।
कठिन शब्द कम क्यों हैं
कविता में कठिन शब्द बहुत कम हैं। जो कुछ हैं भी, उनके अर्थ पुस्तक में दिए गए हैं। कवि चाहते थे कि बात हर पाठक तक पहुँचे। देशभक्ति की कविता यदि समझ में ही न आए तो वह किसे जगाएगी।
शब्दकोश का उपयोग
जब कोई शब्द अटक जाए तो शब्दकोश देखना चाहिए। उसमें शब्द वर्णमाला के क्रम में रखे होते हैं। ‘अमराई’ पहले मिलेगा और ‘मलय’ बाद में। यह आदत आगे हर पाठ में काम आएगी।
नाम के बिना पहचान
एक बात ध्यान देने योग्य है। कविता में देश का नाम एक बार भी नहीं आता। फिर भी पढ़ते ही पता चल जाता है कि बात किसकी हो रही है। चित्र और नाम मिलकर पहचान बना देते हैं। यही कवि का कौशल है।
भाव और चित्र साथ-साथ
कविता में भाव अकेले नहीं आता। हर भाव के साथ एक चित्र आता है। गर्व के साथ हिमालय, स्नेह के साथ कोयल, श्रद्धा के साथ महापुरुषों के नाम। इसी कारण कविता भाषण नहीं लगती।
पढ़ते समय क्या करें
इस कविता को पढ़ते समय पहले पूरी बार पढ़िए, फिर छंद अलग करके देखिए। हर छंद के अंत में लौटती जोड़ी पर रुकिए। पूछिए कि इस बार भूमि को कौन-सा नाम मिला और क्यों। इस तरह पढ़ने से कविता खुलती चली जाती है।
छंद क्या होता है
कविता की कुछ पंक्तियाँ मिलकर एक इकाई बनाती हैं, जिसे छंद कहते हैं। इस कविता में हर छंद के बाद टेक लौटती है, इसलिए छंद की सीमा पहचानना कठिन नहीं है। जहाँ लौटती जोड़ी समाप्त हो, वहीं एक छंद पूरा होता है और अगला आरंभ हो जाता है। छंद पहचान लेने पर कविता को टुकड़ों में पढ़ना सरल हो जाता है।
अपनी कविता कैसे बनाएँ
इन तीनों बातों को अपनी रचना में भी आज़माया जा सकता है। पहले अपनी जगह के बारे में चार छोटी पंक्तियाँ लिखिए। फिर दो ऐसे शब्द खोजिए जिनकी आखिरी आवाज़ मिलती हो और उन्हें पंक्तियों के अंत में रखिए। अंत में एक पंक्ति ऐसी बनाइए जिसमें अपनी जगह को अपना कहा गया हो, और उसे बार-बार दोहराइए। इतना करते ही आपकी रचना में भी वही लय आने लगेगी।
Concepts and terms
पंक्तियों के अंत में आने वाली मिलती-जुलती आवाज़। जब दो पंक्तियाँ एक जैसी ध्वनि पर समाप्त होती हैं तो पढ़ने में संगीत-सा बनता है और अगली पंक्ति की प्रतीक्षा होने लगती है।
वह पंक्ति या जोड़ी जो हर छंद के बाद लौटकर आती है। इस कविता में हर बार भूमि को नया नाम देती हुई जोड़ी लौटती है, और उसी से कविता बँधी रहती है।
ऐसा शब्द जो अपने सीधे अर्थ से आगे कुछ और कहे। कविता में ‘दिया’ केवल दीपक नहीं है, वह उस रास्ते का प्रतीक है जो अँधेरे में दिखाई देता है।
दो शब्दों के मिलने से बना एक नया शब्द, जैसे जन्म और भूमि से जन्मभूमि। पहला भाग बदलने पर अर्थ बदल जाता है, पर दूसरा भाग बात को एक ही विषय पर टिकाए रखता है।
सावधान!
सच या भ्रम?
असल जीवन: विद्यालय की प्रार्थना-सभा
Scenario:
एक विद्यालय की प्रार्थना-सभा में कक्षा छह के बच्चों को दो मिनट का कार्यक्रम देना है। मीरा चाहती है कि सब मिलकर ‘मातृभूमि’ कविता बोलें, क्योंकि उसे वह कविता बहुत भाती है। अरमान इससे सहमत नहीं है। उसका कहना है कि इतनी बड़ी कविता दो दिन में याद नहीं होगी, और मंच पर आधे बच्चे बीच में ही अटक जाएँगे। दोनों अपनी शिक्षिका के पास पहुँचते हैं। वे कोई निर्णय नहीं सुनातीं। वे केवल इतना कहती हैं कि कविता को एक बार फिर खोलो और यह देखकर आओ कि उसमें कौन-सी बात याद रखने में सहायता करेगी।
Analysis:
बच्चे कविता पर लौटते हैं और तीन बातें देखते हैं। पंक्तियाँ छोटी हैं, इसलिए एक साँस में पूरी हो जाती हैं। अंत में तुक मिलती है, इसलिए अगला शब्द अपने आप याद आ जाता है। और हर छंद के बाद वही जोड़ी लौटती है, जिसे सब एक साथ बोल सकते हैं। मीरा सुझाव देती है कि छंद अलग-अलग समूह बोलें और लौटती जोड़ी पूरी कक्षा एक साथ। अरमान की चिंता इससे हल हो जाती है, क्योंकि किसी एक बच्चे पर पूरी कविता का भार नहीं रहता।
Activity:
अपनी कक्षा को दो समूहों में बाँटिए। एक समूह छंद बोले और दूसरा समूह केवल लौटती जोड़ी। फिर समूह बदलकर दोहराइए और बताइए कि किस बार बोलना अधिक सरल लगा।
घर पर करके देखो
Title:
अपनी टेक बनाइए
Safety:
यह गतिविधि पूरी तरह लेखन की है, इसमें किसी सावधानी की आवश्यकता नहीं।
What You Notice:
जहाँ पंक्ति लंबी हो जाती है, वहीं ताली की लय टूटती है। छोटी पंक्ति और लौटती टेक मिलकर रचना को अपने आप गाने जैसा बना देती हैं।
Did you know
टेक लौटाने की परंपरा लोकगीतों से आई है। खेत और चक्की के गीतों में भी एक पंक्ति बार-बार लौटती है।
‘मल्हार’ एक राग का नाम भी है, जिसे वर्षा से जोड़ा जाता है। आपकी पाठ्यपुस्तक का नाम वहीं से आया है।
शब्दकोश में शब्द वर्णमाला के क्रम में मिलते हैं, इसीलिए ‘अमराई’ ‘मलय’ से पहले आएगा।
Memory tricks
कविता की लय के तीन कारण — छो-तु-टे — छोटी पंक्ति, तुक, टेक। तीनों मिलकर कविता को गाने जैसा बना देते हैं।
जुड़े शब्दों का ढाँचा — बदलता + टिका — पहला भाग बदलता है, दूसरा भाग टिका रहता है। जन्म, मातृ, कर्म — सबके साथ ‘भूमि’ वही रहती है।
Practice MCQs with answers (20)
- A पंक्ति के अंत की आवाज़ से
- B पंक्ति की लंबाई और गिनती से
- C कवि के नाम से
- D छंद की संख्या से
Show answer
Why:
तुक अंत में मिलती हुई ध्वनि है, जो कविता को बाँधती है।
- A तुक
- B टेक
- C छंद
- D भाव
Show answer
Why:
लौटकर आने वाली पंक्ति या जोड़ी को टेक कहा जाता है।
- A मात और भूमि
- B मातृ और भूमि
- C मा और तृभूमि
- D मातृभू और मि
Show answer
Why:
मातृ अर्थात माता, और भूमि अर्थात धरती।
- A पहला भाग
- B कोई नहीं
- C दोनों भाग
- D दूसरा भाग
Show answer
Why:
‘भूमि’ टिकी रहती है और उससे पहले वाला भाग बदलता जाता है।
- A देने की क्रिया के रूप में
- B प्रतीक के रूप में
- C व्यक्ति के नाम के रूप में
- D स्थान के नाम के रूप में
Show answer
Why:
यहाँ दिया अर्थात दीपक, जो रास्ता दिखाने का प्रतीक बन जाता है।
- A छोटी पंक्तियाँ
- B मिलती हुई तुक
- C बहुत कठिन शब्द
- D लौटती हुई टेक
Show answer
Why:
कठिन शब्द लय को तोड़ते हैं, बनाते नहीं। कवि ने उन्हें कम रखा है।
- A वह भूमि जहाँ युद्ध हो
- B वह भूमि जहाँ खेती हो
- C वह भूमि जहाँ जन्म हो
- D वह भूमि जहाँ वर्षा हो
Show answer
Why:
रण अर्थात युद्ध। पहला भाग बदला, तो अर्थ भी बदल गया।
- A तीन बार, पहले तीन छंदों में
- B एक बार
- C दो बार
- D एक बार भी नहीं
Show answer
Why:
नाम लिए बिना ही चित्र और महापुरुष मिलकर पहचान बना देते हैं।
- A मलय
- B अमराई
- C दोनों साथ
- D कोई नहीं मिलेगा
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Why:
वर्णमाला में ‘अ’ ‘म’ से पहले आता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
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Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही टेक का काम है। कवि जिस बात को सबसे ज़रूरी मानते हैं, उसे वे लौटाते रहते हैं।
- A परिश्रम या काम
- B पूजा
- C यात्रा
- D विश्राम और आराम करना
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Why:
कर्म अर्थात किया जाने वाला काम, इसलिए कर्मभूमि परिश्रम की भूमि है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
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Why:
I और III सही हैं। II उल्टा है: जन्मभूमि, धर्मभूमि और कर्मभूमि में दूसरा भाग ‘भूमि’ वही रहता है और पहला भाग बदलता है।
- A पन्ने भरने के लिए
- B ताकि कविता भाषण न लगे
- C अंत में तुक मिलाने के लिए ही
- D शब्द बढ़ाने के लिए
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Why:
चित्र भाव को दिखाई देने योग्य बना देता है, इसी से कविता जीवंत लगती है।
- A उत्तर
- B पूर्व
- C पश्चिम
- D दक्षिण
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Why:
समुद्र देश के दक्षिण में फैला है, इसलिए सिंधु दक्षिणी सीमा का संकेत है।
- A क्योंकि उसकी पंक्तियाँ छोटी और बराबर लय में हैं
- B क्योंकि उसमें व्यक्तियों और स्थानों के नाम बहुत हैं
- C क्योंकि वह आरंभ से अंत तक बहुत लंबी कविता है
- D क्योंकि उसमें पाठक से कई प्रश्न पूछे गए हैं
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Why:
बराबर लंबाई की पंक्तियाँ और मिलती हुई तुक सबको एक ही लय पर ले आती हैं। इसी से पूरी कक्षा एक साथ बोल पाती है।
- A कठिन शब्द
- B विदेशी शब्द
- C सीधे अर्थ से आगे कहने वाला शब्द
- D पंक्ति के अंत में तुक मिलाने वाला शब्द
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Why:
प्रतीक अपने सामान्य अर्थ पर नहीं रुकता, वह कुछ और की ओर संकेत करता है।
- A गणित से
- B समाचार से
- C पत्रों से
- D लोकगीतों से
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Why:
खेत और चक्की के गीतों में भी एक पंक्ति बार-बार लौटती है।
- A केवल अंतिम छंद ध्यान से पढ़िए
- B केवल कठिन शब्द पढ़िए
- C पहले पूरी, फिर छंद अलग करके
- D उलटे क्रम में पढ़िए
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Why:
पहले पूरा भाव लीजिए, फिर हर छंद की लौटती जोड़ी पर रुककर सोचिए।
- A जल की ओर
- B वन की ओर
- C पर्वत की ओर
- D रेत की ओर
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Why:
मरु अर्थात रेगिस्तान, इसलिए मरुभूमि रेत की भूमि है।
- A कवि को कठिन शब्द नहीं आते थे
- B छपाई सस्ती पड़ती थी
- C बात हर पाठक तक पहुँचे
- D पुस्तक छोटी रखनी थी
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Why:
देशभक्ति की कविता तभी काम करती है जब वह सबकी समझ में आए।
Important short questions (6)
तुक पंक्तियों के अंत में मिलती हुई आवाज़ है। टेक वह पंक्ति या जोड़ी है जो हर छंद के बाद लौटकर आती है।
यह धर्म और भूमि से बना है। अर्थ है वह भूमि जहाँ आस्था और धर्म की परंपरा रही हो।
छोटी और लगभग बराबर पंक्तियाँ, अंत में मिलती हुई तुक, और हर छंद के बाद लौटती हुई टेक।
प्रतीक वह शब्द है जो अपने सीधे अर्थ से आगे कुछ और कहे। कविता में ‘दिया’ दीपक होते हुए भी रास्ता दिखाने का प्रतीक है।
हिमालय, सिंधु और गंगा जैसे चित्र और राम, कृष्ण तथा बुद्ध जैसे नाम हैं। ये मिलकर बता देते हैं कि बात किस भूमि की हो रही है।
वे चाहते थे कि उनकी बात हर पाठक तक पहुँचे। देशभक्ति की कविता तभी किसी को जगा सकती है जब वह समझ में आए।
Long answer questions (3)
पहला कारण पंक्तियों की लंबाई है। यहाँ हर पंक्ति छोटी और लगभग बराबर है, इसलिए पढ़ते समय साँस नहीं टूटती और कविता समूह में बोली जा सकती है। दूसरा कारण तुक है, यानी पंक्तियों के अंत में मिलती हुई आवाज़, जो कान को बाँधकर अगली पंक्ति तक ले जाती है। तीसरा कारण टेक है। हर छंद के बाद वही जोड़ी लौट आती है, जिसमें भूमि को एक नया नाम मिलता है। इन तीनों के मेल से कविता गाने जैसी हो जाती है और एक बार पढ़ने पर ही याद रहने लगती है।
ये शब्द दो भागों के जुड़ने से बने हैं। दूसरा भाग हर बार ‘भूमि’ ही रहता है, इसलिए बात एक ही विषय पर टिकी रहती है। पहला भाग बदलता जाता है और हर बार नया अर्थ जोड़ देता है। जन्मभूमि का अर्थ है वह भूमि जहाँ जन्म हुआ। कर्मभूमि वह है जहाँ परिश्रम किया जाता है। धर्मभूमि आस्था की ओर ले जाती है और मातृभूमि उसे माँ की तरह अपना बना देती है। इसी ढाँचे से रणभूमि और मरुभूमि जैसे शब्द भी बनते हैं।
यदि कवि केवल यह कहते कि मुझे अपने देश पर गर्व है, तो वह एक वाक्य रह जाता और पाठक उसे पढ़कर आगे बढ़ जाता। कवि इसके स्थान पर आकाश छूता हिमालय दिखाते हैं, और गर्व अपने आप महसूस होने लगता है। स्नेह के साथ अमराई की कोयल आती है, श्रद्धा के साथ महापुरुषों के नाम। इस तरह हर भाव के पीछे एक दृश्य खड़ा हो जाता है। पाठक भाव को सुनता नहीं, देखता है। इसी कारण कविता भाषण नहीं लगती और देर तक मन में ठहरती है।
Flashcards (15)
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- शब्द और उसका भाग
- तुक या टेक?
- कविता पढ़ने का क्रम
- सच या भ्रम
- भाषा की दौड़
Class 6 Hindi Chapter 1 — frequently asked questions
आकाश छूता हुआ ऊँचा हिमालय और उसके चरणों में झूमता हुआ सिंधु, यानी समुद्र।
लहर का अर्थ है हिलोरा, मौज, उमंग या जोश। छहर का अर्थ है बिखरना, छितराना या फैलना।
वह दक्षिण के मलय पर्वत से सुगंध लेकर आती है। ठंडक से शरीर ताज़ा होता है और सुगंध से मन प्रसन्न हो जाता है।
तुक पंक्तियों के अंत में मिलती हुई आवाज़ है। टेक वह पंक्ति या जोड़ी है जो हर छंद के बाद लौटकर आती है।
यह धर्म और भूमि से बना है। अर्थ है वह भूमि जहाँ आस्था और धर्म की परंपरा रही हो।
छोटी और लगभग बराबर पंक्तियाँ, अंत में मिलती हुई तुक, और हर छंद के बाद लौटती हुई टेक।
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