Class 5 Hindi Chapter 9: न्याय
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पहला दृश्य: उद्यान में घायल हंस
शाम के राज-उद्यान में सिद्धार्थ और उनका सखा बैठे हैं। ऊपर उड़ते हंस को तीर लगता है। घायल हंस सिद्धार्थ की गोद में गिर पड़ता है।
What you will be able to do
- मैं पहले दृश्य की घटनाएँ क्रम से सुना सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि सिद्धार्थ ने घायल हंस के लिए क्या-क्या किया।
- मैं समझा सकता/सकती हूँ कि दोनों भाइयों में झगड़ा क्यों हुआ।
Key points
पहला दृश्य शाम के समय राज-उद्यान में होता है। वहाँ सिद्धार्थ और उनका सखा बैठे हैं।
सिद्धार्थ कपिलवस्तु के राजकुमार हैं। देवदत्त उनके चचेरे भाई हैं।
देवदत्त के तीर से घायल हंस सिद्धार्थ की गोद में आ गिरता है।
सिद्धार्थ तीर निकालते हैं और सखा को मरहम लाने भेजते हैं।
देवदत्त हंस माँगता है, पर सिद्धार्थ देने से मना कर देते हैं।
Full explanation
शाम का राज-उद्यान
परदा उठता है और सामने एक बगीचा दिखता है। यह राजा का उद्यान है। शाम ढल रही है। आसमान पर हल्की लाली फैली हुई है। फूल हवा में झूम रहे हैं। दूर से लौटती गायों की आवाज़ आ रही है। पक्षी अपने घोंसलों की ओर उड़ रहे हैं।
दो मित्र बैठे हैं
उद्यान में एक ऊँची जगह पर राजकुमार सिद्धार्थ बैठे हैं। वे कपिलवस्तु के राजकुमार हैं। उनके पास उनका सखा बैठा है। सखा का अर्थ है मित्र। दोनों शाम की शांति देखकर खुश हैं। वे आपस में धीरे-धीरे बातें कर रहे हैं।
हर चीज़ का अपना स्वभाव
सिद्धार्थ पूछते हैं कि पक्षी घर लौटने का समय कैसे जान लेते हैं। सखा के पास कोई पक्का उत्तर नहीं है। फिर दोनों और बातें सोचते हैं। भूख अपने समय पर लगती है। नींद अपने समय पर आती है। सूरज रोज़ एक ही दिशा से निकलता है। सिद्धार्थ कहते हैं कि हर चीज़ का अपना स्वभाव होता है।
आसमान में राजहंस
तभी ऊपर पंखों की फड़फड़ाहट सुनाई देती है। दोनों मित्र आसमान की ओर देखते हैं। वहाँ सुंदर राजहंस उड़ते जा रहे हैं। उनकी गरदनें आगे की ओर तनी हुई हैं। सखा कहता है कि वे हवा में तैरते हुए लगते हैं। दोनों उन्हें देखते ही रह जाते हैं।
अचानक एक तीर
उसी समय कुछ अनहोनी हो जाती है। एक तीर सनसनाता हुआ ऊपर जाता है। एक हंस तेज़ी से नीचे गिरने लगता है। उसकी दर्द भरी आवाज़ पूरे उद्यान में गूँज जाती है। बाकी पक्षी घबराकर तितर-बितर हो जाते हैं। सखा डर से काँप उठता है।
गोद में गिरा पक्षी
सिद्धार्थ दौड़कर आगे बढ़ते हैं। घायल हंस उड़कर सीधे उनकी गोद में जा गिरता है। उसके बदन में तीर धँसा है और खून बह रहा है। सिद्धार्थ उसे बहुत प्यार से सँभालते हैं। उनका मन दुख से भर जाता है। वे पूछते हैं कि इस भोले पक्षी ने किसी का क्या बिगाड़ा था।
सुंदर होना कोई दोष नहीं
सखा धीरे से कहता है कि पक्षी सुंदर है, शायद इसीलिए उस पर तीर चला। सिद्धार्थ यह बात नहीं मानते। वे कहते हैं कि सुंदर होना कोई अपराध नहीं है। घर में माँ उन्हें प्यारा कहती हैं, तो और स्नेह करती हैं। फिर वे तीर धीरे-धीरे बाहर खींच लेते हैं।
मरहम के लिए दौड़
तीर निकलते ही हंस को आराम मिलता है। वह सिद्धार्थ की गोद में दुबक जाता है। सिद्धार्थ उसकी पीठ पर हाथ फेरते रहते हैं। फिर वे सखा से राजवैद्य के पास जाने को कहते हैं। सखा तुरंत मरहम लेने दौड़ पड़ता है।
देवदत्त का दावा
तभी राजकुमार देवदत्त तेज़ कदमों से वहाँ आते हैं। वे सिद्धार्थ के चचेरे भाई हैं। वे खुश होकर बताते हैं कि उन्होंने एक उड़ते हंस को तीर से गिराया है। वे गवाही भी माँगते हैं। सिद्धार्थ शांत स्वर में कहते हैं कि गवाही ज़रूर देंगे।
मैंने मारा, मैंने बचाया
देवदत्त गोद में बैठे हंस को देख लेते हैं। वे उसे तुरंत माँगते हैं। उनका कहना है कि तीर उन्हीं का है, इसलिए पक्षी भी उन्हीं का है। सिद्धार्थ मना कर देते हैं। वे कहते हैं कि जिसने जान बचाई, पक्षी उसी का हुआ। हंस देवदत्त को देखकर और सिमट जाता है।
झगड़ा नहीं सुलझा
दोनों भाई अपनी-अपनी बात पर अड़ जाते हैं। देवदत्त याद दिलाते हैं कि वे भी राजकुमार हैं। सिद्धार्थ उनकी बात मान लेते हैं, पर हंस देने से फिर मना करते हैं। इतने में सखा मरहम लेकर लौटता है और हंस पर लगा देता है। हंस थोड़ी देर में शांत हो जाता है।
महाराज के पास चलें
सखा एक सुझाव देता है। वह कहता है कि इस तरह बात नहीं बनेगी। उसकी राय है कि दोनों महाराज के पास चलें। देवदत्त गुस्से में पहले ही निकल पड़ते हैं। सिद्धार्थ भी हंस को गोद में लेकर चल देते हैं। परदा गिर जाता है।
Concepts and terms
नाटक का एक हिस्सा, जो एक ही जगह और एक ही समय में चलता है। जगह बदलने पर नया दृश्य शुरू होता है।
मित्र के लिए आने वाला पुराना शब्द। नाटक में सिद्धार्थ का एक सखा हर समय उनके साथ रहता है।
किसी के पास बचने के लिए आ जाना। घायल हंस उड़कर सिद्धार्थ की गोद में आ गिरा, यानी उनकी शरण में आया।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा में बहस हुई कि हंस किसका था। कुछ बच्चों ने कहा कि जिसने तीर मारा, हंस उसी का है। कुछ ने कहा कि जिसने बचाया, हंस उसी का है। अध्यापिका ने दोनों पक्षों को बोलने का पूरा समय दिया। फिर उन्होंने एक प्रश्न पूछा। हंस स्वयं किसके पास रहना चाहेगा? कक्षा एक पल के लिए चुप हो गई। मीना ने कहा कि जीव कोई वस्तु नहीं होता। उसकी अपनी इच्छा भी गिनी जानी चाहिए। यही बात नाटक के फ़ैसले की जड़ में है।
Analysis:
दोनों दल हंस पर अपना दावा कर रहे थे। किसी ने हंस से नहीं पूछा था, और वही प्रश्न फ़ैसला बदल देता है।
Activity:
कक्षा को दो दलों में बाँटो। एक दल मारने वाले की ओर से बोले और दूसरा बचाने वाले की ओर से। अंत में अपना फ़ैसला लिखो।
घर पर करके देखो
Title:
पक्षियों के लिए पानी और दाने की जगह
Safety:
छत या ऊँची जगह पर रखते समय किसी बड़े को साथ बुलाओ।
What You Notice:
पहले दिन शायद कोई नहीं आएगा। कुछ दिनों में वही पक्षी रोज़ उसी समय आने लगेंगे।
Did you know
यह नाटक विष्णु प्रभाकर ने लिखा है। वे बच्चों के लिए सरल हिंदी में लिखते थे।
राजहंस बहुत ऊँचाई तक उड़ सकते हैं। वे झुंड बनाकर एक कतार में उड़ते हैं।
Memory tricks
पहले दृश्य का क्रम — शाम, बातचीत, तीर, गोद — पहला दृश्य इसी मोड़। — शाम का उद्यान, दो मित्रों की बातचीत, अचानक चला तीर और गोद में गिरा हंस। यही चार पड़ाव हैं।
दो भाई, दो सोच — देवदत्त ने तीर चलाया, सिद्धार्थ ने मरहम लगवाया। — एक ने पक्षी को गिराया और दूसरे ने उसे बचाया। यही अंतर पूरे नाटक की जड़ है।
Practice MCQs with answers (15)
- A भोर का
- B शाम का
- C दोपहर का
- D आधी रात का
Show answer
Why:
मंच पर लाली फैली है और गायें वन से लौट रही हैं।
- A उद्यान में इस समय कितने फूल खिले हुए हैं
- B पक्षी घर लौटने का समय कैसे जान लेते हैं
- C महाराज की सभा कब लगेगी
- D तीर चलाना कैसे सीखा जाता है
Show answer
Why:
इसी सवाल से स्वभाव वाली बात शुरू होती है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: हंस सिद्धार्थ की गोद में आ गिरा।
- A राजहंस
- B कबूतर
- C तोते
- D कौवे
Show answer
Why:
उनकी गरदनें आगे की ओर तनी थीं।
- A तालाब के पानी में
- B सिद्धार्थ की गोद में
- C देवदत्त के पैरों के पास
- D उद्यान की ऊँची दीवार पर
Show answer
Why:
इसी से वह उनकी शरण में आया माना गया।
- A पक्षी बहुत ज़ोर से चिल्ला रहा था
- B पक्षी सुंदर और प्यारा लगता है
- C पक्षी खेतों को नुकसान पहुँचाता है
- D पक्षी बहुत नीचे उड़ रहा था
Show answer
Why:
सिद्धार्थ ने यह कारण नहीं माना।
- A सुंदर पक्षी सबसे पहले मारे जाते हैं
- B सुंदर पक्षी उड़ ही नहीं सकते
- C सुंदर होना कोई दोष नहीं है
- D सुंदर पक्षी उद्यान में नहीं आते
Show answer
Why:
उन्होंने माँ के प्यार का उदाहरण दिया।
- A तीर निकालते समय हंस उड़कर भाग गया।
- B सिद्धार्थ ने तीर निकालने से मना कर दिया।
- C तीर निकलते ही हंस को आराम मिला।
- D सखा ने अकेले ही तीर बाहर खींचा।
Show answer
Why:
वह गोद में दुबककर शांत हो गया।
- A राजवैद्य से मरहम लाने
- B महाराज को बुलाने
- C देवदत्त को ढूँढ़ने
- D उद्यान का द्वार बंद करने
Show answer
Why:
मरहम लगाने पर ही घाव भर सकता था।
- A 1-ख, 2-घ, 3-ग, 4-क
- B 1-घ, 2-ग, 3-क, 4-ख
- C 1-घ, 2-ख, 3-क, 4-ग
- D 1-क, 2-ख, 3-घ, 4-ग
Show answer
Why:
सिद्धार्थ ने बचाया और देवदत्त ने तीर मारा।
- A सिद्धार्थ के साथ कुछ देर खेलने
- B महाराज का संदेश देने
- C उद्यान के फूल तोड़ने
- D अपना गिराया हुआ पक्षी ढूँढ़ने
Show answer
Why:
उन्होंने खुद उसे गिरते देखा था।
- A वे उम्र में सिद्धार्थ से बड़े हैं
- B पक्षी उनके ही बगीचे में पला-बढ़ा हुआ है
- C उन्होंने उस पक्षी को पहले देखा था
- D तीर उनका था, इसलिए पक्षी उनका है
Show answer
Why:
वे उसे अपने आखेट का हक़ मानते थे।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही आगे के न्याय का आधार बनता है। पक्षी का डर ही सबूत बन गया।
- A किसी बड़े को बुलाकर उसे सुरक्षित जगह रखोगे
- B उसे पकड़कर दोस्तों को दिखाओगे
- C उसे फिर से उड़ाने के लिए हवा में उछाल दोगे
- D उसे वहीं छोड़कर खेलने चले जाओगे
Show answer
Why:
सिद्धार्थ ने भी पहले उसे सँभाला और फिर इलाज कराया।
- A हंस को उद्यान में छोड़ दिया जाए
- B दोनों भाई आपस में लड़ लें
- C हंस को दो हिस्सों में बाँट दिया जाए
- D दोनों महाराज के पास जाएँ
Show answer
Why:
झगड़ा आपस में नहीं सुलझ रहा था।
Important short questions (5)
आसमान पर शाम की लाली फैली दिखती है। दूर से वन से लौटती गायों का स्वर सुनाई देता है।
उन्होंने उसे गोद में सँभाला और तीर बाहर खींचा। फिर सखा को मरहम लाने भेजा।
उन्होंने कहा कि सुंदर होना कोई दोष नहीं है। माँ भी उन्हें प्यारा कहकर और स्नेह करती हैं।
देवदत्त का दावा तीर मारने पर टिका था। सिद्धार्थ का दावा जान बचाने पर टिका था।
क्योंकि उन्हीं के तीर से उसे चोट लगी थी। वह उन्हें अपना दुश्मन समझ रहा था।
Long answer questions (2)
शाम को सिद्धार्थ और उनका सखा उद्यान में बैठे बातें कर रहे थे। तभी ऊपर से राजहंस उड़ते हुए निकले। अचानक एक तीर चला और एक हंस नीचे गिरने लगा। वह सीधे सिद्धार्थ की गोद में आ गिरा। सिद्धार्थ ने तीर निकालकर उसे सँभाला। सखा मरहम लेने दौड़ गया। तभी देवदत्त आकर पक्षी माँगने लगे। झगड़ा न सुलझने पर सब महाराज के पास चल पड़े।
मुझे लगता है कि उन्होंने ठीक किया। हंस घायल था और डर के मारे उनकी गोद में सिमटा हुआ था। देवदत्त को देखकर वह फिर से चीख उठा। अगर वह उन्हें दे दिया जाता, तो शायद उसकी जान चली जाती। जिसने जान बचाई हो, उसी के पास घायल जीव सुरक्षित रहता है। इसीलिए सिद्धार्थ का मना करना सही था।
Flashcards (12)
Play this topic
- कौन, क्या
- पहला दृश्य क्रम से लगाओ
- किसने किया?
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
दूसरा दृश्य: सभा में न्याय
महाराज शुद्धोदन की सभा में दोनों भाई अपना-अपना दावा रखते हैं। मंत्री एक आसान तरकीब से फ़ैसला करवा देते हैं।
What you will be able to do
- मैं दूसरे दृश्य की घटनाएँ क्रम से बता सकता/सकती हूँ।
- मैं दोनों भाइयों के दावे अपने शब्दों में समझा सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि मंत्री ने फ़ैसला किस तरकीब से कराया।
Key points
दूसरा दृश्य महाराज शुद्धोदन की सभा में होता है। वहाँ मंत्री भी बैठे हैं।
प्रतिहारी सभा में आने-जाने की सूचना देता है।
देवदत्त कहते हैं कि आखेट उनका है, इसलिए पक्षी भी उनका है।
सिद्धार्थ कहते हैं कि शरण में आए पक्षी को लौटाया नहीं जा सकता।
मंत्री हंस को आसन पर बैठाकर दोनों से बुलवाते हैं और वही फ़ैसला कर देता है।
Full explanation
सभा का दृश्य खुलता है
परदा फिर उठता है। इस बार मंच पर महाराज की सभा है। महाराज का नाम शुद्धोदन है। उनका आसन सबसे ऊँचा है। नीचे मंत्री अपने-अपने आसनों पर बैठे हैं। उस समय मंत्री कुछ बात रख रहे हैं। सभा में शांति है।
प्रतिहारी की सूचना
तभी द्वार से प्रतिहारी भीतर आता है। वह प्रणाम करके चुपचाप खड़ा हो जाता है। महाराज पूछते हैं कि क्या बात है। प्रतिहारी बताता है कि देवदत्त भीतर आना चाहते हैं। महाराज को यह समय कुछ अजीब लगता है। फिर भी वे उन्हें बुला लेते हैं।
देवदत्त की शिकायत
देवदत्त भीतर आकर प्रणाम करते हैं। महाराज पूछते हैं कि वे उद्यान क्यों नहीं गए। देवदत्त सीधे अपनी बात रखते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें न्याय चाहिए। उनकी शिकायत यह है कि सिद्धार्थ उनका पक्षी नहीं लौटा रहे।
राजकुमार को बुलावा
महाराज पूछते हैं कि कुमार इस समय कहाँ हैं। देवदत्त बताते हैं कि वे उद्यान में हैं। महाराज प्रतिहारी को उन्हें बुलाने भेजते हैं। प्रतिहारी मुड़ने ही वाला होता है। तभी सिद्धार्थ हंस को गोद में लिए सभा में आ जाते हैं। उनके पीछे उनका सखा भी है।
महाराज के सवाल
महाराज पहले सिद्धार्थ से पूछते हैं कि गोद वाला पक्षी वही है या नहीं। सिद्धार्थ सच बता देते हैं कि वही है। फिर महाराज पूछते हैं कि पक्षी किसका है। सिद्धार्थ कहते हैं कि वह उनका है। देवदत्त फिर बीच में बोल पड़ते हैं।
सच छिपाया नहीं गया
महाराज देवदत्त को शांत रहने को कहते हैं। फिर वे सिद्धार्थ से एक सीधा सवाल पूछते हैं। क्या शिकार सचमुच देवदत्त ने किया था? सिद्धार्थ साफ़-साफ़ मान लेते हैं कि हाँ, किया था। वे अपने पक्ष में झूठ नहीं बोलते। सभा में सब चुप होकर सुनते हैं।
बचाने वाले का हक़
अब महाराज पूछते हैं कि फिर पक्षी सिद्धार्थ का कैसे हुआ। सिद्धार्थ अपनी बात रखते हैं। देवदत्त ने उसे घायल किया और उन्होंने उसे बचाया। जो जान बचाता है, वह जान लेने वाले से बड़ा है। सभा में यह सुनकर खुशी की लहर दौड़ जाती है।
वीर और शरणागत
महाराज एक और बात कहते हैं। वीर अपना शिकार नहीं छोड़ता। सिद्धार्थ यह बात मान लेते हैं। पर वे जोड़ते हैं कि वीर शरण में आए को भी नहीं छोड़ता। हंस उनकी शरण में आ चुका है। इसलिए वे उसे लौटा नहीं सकते। सभा फिर खुशी से भर जाती है।
समस्या जटिल हो गई
देवदत्त कहते हैं कि उन्होंने पहले मारा, इसलिए पक्षी उनका है। सिद्धार्थ का उत्तर तैयार है। मारा था, तभी तो वह उनकी शरण में आया। दोनों बातें सुनकर सभा हैरान रह जाती है। महाराज मंत्री की ओर देखते हैं और रास्ता पूछते हैं।
मंत्री की तरकीब
मंत्री कहते हैं कि समस्या आसान है। वे आज्ञा लेकर आगे बढ़ते हैं। पहले वे दोनों राजकुमारों से उनका दावा दोहरवाते हैं। फिर वे सिद्धार्थ से कहते हैं कि हंस को आसन पर बैठा दें। सिद्धार्थ उसे बैठाकर पीछे हट जाते हैं।
पहले देवदत्त, फिर सिद्धार्थ
मंत्री देवदत्त से कहते हैं कि अब वे हंस को अपने पास बुलाएँ। देवदत्त पुचकारते हैं। पक्षी डरकर फड़फड़ाता है और चीख उठता है। फिर सिद्धार्थ की बारी आती है। उनके प्यार से पुकारते ही हंस उड़कर उनकी गोद में आ चिपकता है।
हंस ने खुद फ़ैसला किया
मंत्री कहते हैं कि पक्षी ने खुद अपना फ़ैसला सुना दिया है। वह सिद्धार्थ के पास रहना चाहता है। महाराज यह फ़ैसला मान लेते हैं। वे आज्ञा देते हैं कि हंस सिद्धार्थ के पास ही रहेगा। सभा जय-जयकार करने लगती है और देवदत्त चुपचाप सिर झुका लेते हैं।
Concepts and terms
राजा और उनके मंत्रियों के बैठने की जगह। वहाँ राज्य की बातें तय होती हैं और झगड़ों का फ़ैसला भी होता है।
सभा के द्वार पर खड़ा रहने वाला सेवक। वह भीतर आने वालों की सूचना देता है और आज्ञा लेकर उन्हें बुलाता है।
शिकार के लिए आने वाला पुराना शब्द। देवदत्त हंस को अपना आखेट बताकर उस पर अपना हक़ जताते हैं।
सावधान!
सच या भ्रम?
असली दुनिया में
Scenario:
एक सरकारी स्कूल के मैदान में एक पिल्ला घायल पड़ा मिला। दो बच्चों ने उसे पहले देखा। आरिफ़ ने कहा कि वह उसे घर ले जाएगा। सुनीता ने कहा कि पहले इलाज ज़रूरी है। दोनों में बहस होने लगी। शिक्षिका ने बहस रोक दी। उन्होंने पूछा कि पिल्ले के लिए इस समय सबसे अच्छा क्या है। बच्चों ने सोचकर कहा कि दवा और पानी। दोनों मिलकर उसे पशु-चिकित्सालय ले गए। वहाँ उसकी टाँग पर पट्टी बँधी। स्कूल ने बरामदे के कोने में उसके लिए जगह बना दी। अब पूरी कक्षा बारी-बारी उसका ध्यान रखती है।
Analysis:
झगड़ा इस बात पर नहीं होना चाहिए कि जीव किसका है। सवाल यह है कि उसके लिए सबसे अच्छा क्या है।
Activity:
अपनी कक्षा में तय करो कि घायल जीव मिलने पर क्या-क्या करना है। पाँच कदमों की एक सूची बनाकर दीवार पर लगाओ।
सभा बैठाओ
Title:
एक चीज़, दो दावे
Safety:
दावे वाली चीज़ खींचतान में टूटने वाली न हो, नरम चीज़ चुनो।
What You Notice:
जब तक दोनों बोलते रहते हैं, फ़ैसला नहीं निकलता। निकलता तब है जब चीज़ को खुद चुनने का मौका मिलता है। नाटक में मंत्री ने यही किया था।
Did you know
पुराने समय में राजा खुद बैठकर लोगों के झगड़े सुनते थे। उसी को राज-सभा कहते थे।
हंस पालतू नहीं होता। फिर भी जो उसे प्यार से छूता है, उसके पास वह लौट आता है।
Memory tricks
दूसरे दृश्य का क्रम — शिकायत, सवाल, जवाब, तरकीब — इसी क्रम से न्याय। — देवदत्त की शिकायत, महाराज के सवाल, सिद्धार्थ का जवाब और अंत में मंत्री की तरकीब।
दोनों दावे — आखेट बनाम शरण। — देवदत्त का दावा आखेट पर टिका है और सिद्धार्थ का दावा शरण पर। मंत्री ने हंस से ही पुछवा लिया।
Practice MCQs with answers (15)
- A राजा का उद्यान
- B नदी का किनारा
- C महाराज की सभा
- D गाँव की पाठशाला
Show answer
Why:
जगह बदलने पर नया दृश्य शुरू होता है।
- A सभा का कोई मंत्री
- B द्वार वाला प्रतिहारी
- C महाराज शुद्धोदन
- D राजकुमार देवदत्त
Show answer
Why:
सबसे ऊँचा आसन राजा का होता है।
- A मंत्री ने
- B प्रतिहारी ने
- C सखा ने
- D राजवैद्य ने
Show answer
Why:
वही द्वार पर खड़ा रहता है।
- A एक नया धनुष
- B सभा में आसन
- C न्याय
- D उद्यान की चाबी
Show answer
Why:
उनका कहना था कि उनका पक्षी नहीं लौटाया जा रहा।
- A शिकार
- B आदर
- C आँगन
- D आज्ञा
Show answer
Why:
देवदत्त हंस को अपना आखेट बता रहे थे।
- A चुप रहकर कोई भी उत्तर ही नहीं दिया
- B सच मानकर देवदत्त का नाम बता दिया
- C शिकार को अपने नाम कर लिया
- D अपने सखा की ओर इशारा कर दिया
Show answer
Why:
उन्होंने अपने पक्ष में झूठ नहीं बोला।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: उन्होंने सच मानकर देवदत्त का नाम बता दिया।
- A कि वीर कभी शिकार पर नहीं जाता
- B कि वीर हमेशा राजा की बात मानता है
- C कि वीर सभा में कभी नहीं बोलता
- D कि वीर शरण में आए को भी नहीं छोड़ता
Show answer
Why:
हंस उनकी शरण में आ चुका था।
- A मंत्री ने महाराज से आज्ञा लेकर फ़ैसला कराया।
- B मंत्री ने बिना पूछे ही फ़ैसला सुना दिया।
- C मंत्री ने इस झगड़े से अलग रहने को कहा।
- D मंत्री ने हंस को दो हिस्सों में बाँटने को कहा।
Show answer
Why:
सभा में बोलने से पहले आज्ञा माँगने की रीत थी।
- A महाराज की गोद में
- B सभा के एक आसन पर
- C प्रतिहारी के हाथ में
- D सभा के बाहर पेड़ पर
Show answer
Why:
वहाँ से वह खुद चुन सकता था।
- A 1-क, 2-घ, 3-ग, 4-ख
- B 1-घ, 2-ख, 3-क, 4-ग
- C 1-ग, 2-क, 3-ख, 4-घ
- D 1-घ, 2-क, 3-ख, 4-ग
Show answer
Why:
मंत्री ने आसन वाली तरकीब सुझाई थी।
- A खुश होकर उनकी गोद में चला गया
- B डरकर फड़फड़ाया और चीख उठा
- C चुपचाप आसन पर बैठा रहा
- D उड़कर सभा से बाहर निकल गया
Show answer
Why:
उसे उसी तीर की याद थी।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही उसकी खूबी है। किसी की गवाही नहीं; हंस ने स्वयं चुन लिया।
- A कोई ऐसी पहचान पूछना जो सिर्फ़ असली मालिक बता सके
- B कलम को बीच से तोड़कर दोनों में बाँट देना
- C जो दोनों में ज़्यादा ज़ोर से बोले, उसी को वह कलम दे देना
- D कलम को कक्षा से ही बाहर फेंक देना
Show answer
Why:
मंत्री ने भी ऐसी जाँच रखी, जिसका उत्तर सच ही दे सके।
- A मंत्री ने अपना फ़ैसला वापस ले लिया।
- B सभा चुप रह गई और देवदत्त हँसने लगे।
- C सभा वहीं से उठकर चली गई और महाराज बहुत नाराज़ हो गए।
- D सभा जय-जयकार करने लगी और देवदत्त ने सिर झुका लिया।
Show answer
Why:
महाराज ने मंत्री का फ़ैसला मान लिया था।
Important short questions (5)
वह सभा के द्वार पर खड़ा रहता था। भीतर आने वालों की सूचना वही देता था।
वे सिद्धार्थ की शिकायत करने आए थे। उनका कहना था कि पक्षी उन्हें लौटाया जाए।
क्योंकि उनका दावा शिकार पर नहीं, जान बचाने पर टिका था। झूठ बोलने की ज़रूरत ही नहीं थी।
उन्होंने हंस को आसन पर बैठवाया। फिर दोनों राजकुमारों से बारी-बारी उसे बुलवाया।
फ़ैसला ज़ोर या पद से नहीं होता। सच और दया से ही सही फ़ैसला निकलता है।
Long answer questions (2)
मुझे यह तरकीब बहुत अच्छी लगी। इसमें किसी पर कोई फ़ैसला थोपा नहीं गया। दोनों राजकुमारों को बराबर मौका मिला। जिस पक्षी का झगड़ा था, चुनाव उसी ने किया। डरा हुआ पक्षी उसी के पास गया, जिसने उसे बचाया था। इससे सबको उत्तर साफ़ दिख गया। इसीलिए सभा ने भी यह फ़ैसला खुशी से मान लिया।
नाटक से मैंने सीखा कि जान बचाना सबसे बड़ा काम है। जो दया करता है, जीव उसी पर भरोसा करते हैं। मैंने यह अपने घर में भी देखा है। हमारे आँगन में एक घायल गिलहरी आ गिरी थी। मैंने उसे दूध और पानी दिया और छाया में रखा। ठीक होने के बाद भी वह कई दिन वहीं आती रही। दया से ही भरोसा बनता है।
Flashcards (12)
Play this topic
- कौन, क्या करता है
- सभा का क्रम लगाओ
- किसका दावा?
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
नाटक की भाषा: बिंदी, चंद्रबिंदु और विलोम
इस भाग में नाटक के अंग समझे जाते हैं। साथ में अनुस्वार और चंद्रबिंदु का अंतर, उलटे अर्थ वाले शब्द और कुछ मुहावरे सीखे जाते हैं।
What you will be able to do
- मैं नाटक के अंग पहचानकर उन्हें पढ़ सकता/सकती हूँ।
- मैं अनुस्वार और चंद्रबिंदु वाले शब्द सही लिख सकता/सकती हूँ।
- मैं उलटे अर्थ वाले शब्द और कुछ मुहावरे वाक्य में लगा सकता/सकती हूँ।
Key points
नाटक में पात्र परिचय, दृश्य, कोष्ठक के संकेत और संवाद होते हैं।
कोष्ठक में लिखी बात बोली नहीं जाती। वह करके दिखाई जाती है।
अनुस्वार सीधी बिंदी है, जैसे हंस और मंदिर।
चंद्रबिंदु आधे चाँद पर बिंदी है, जैसे हँस और आँख।
उलटे अर्थ वाले शब्द विलोम कहलाते हैं, जैसे उदय और अस्त।
Full explanation
कक्षा में नाटक खेलने की तैयारी
पाठ पढ़ने के बाद बच्चों ने नाटक खेलने की ठानी। सबसे पहले सवाल उठा कि कौन क्या बनेगा। शिक्षिका ने कहा कि पहले पाठ को ध्यान से देखो। नाटक पढ़ने का ढंग कहानी से अलग होता है। उसमें कुछ हिस्से खास काम के लिए बने होते हैं।
सबसे पहले पात्र परिचय
पाठ की शुरुआत में एक छोटा डिब्बा दिया है। उसमें सब पात्रों के नाम हैं। हर नाम के आगे उसका परिचय लिखा है। इसी से पता चलता है कि देवदत्त चचेरे भाई हैं। नाटक खेलने से पहले यही डिब्बा सबसे पहले पढ़ा जाता है।
दृश्य क्या होता है
नाटक टुकड़ों में बँटा होता है। हर टुकड़े को दृश्य कहते हैं। एक दृश्य एक ही जगह पर चलता है। जगह या समय बदलते ही नया दृश्य शुरू होता है। इसी नाटक में दो दृश्य हैं। पहला उद्यान में और दूसरा सभा में।
कोष्ठक में छिपे संकेत
कई जगह बात गोल कोष्ठक के भीतर लिखी है। ये पंक्तियाँ बोली नहीं जातीं। ये बताती हैं कि मंच पर क्या दिखेगा। ये यह भी बताती हैं कि पात्र किस भाव से बोलेगा। जैसे हँसकर, घबराकर या शांत स्वर में। खेलते समय इन्हें करके दिखाना पड़ता है।
संवाद यानी बातचीत
हर पात्र के नाम के आगे उसकी बात लिखी है। इसी को संवाद कहते हैं। संवाद ही नाटक को आगे बढ़ाते हैं। इनमें कहानी वाला वर्णन नहीं होता। सब कुछ पात्रों के कहने और करने से समझ आता है।
अब बात भाषा की
इस पाठ में दो मिलते-जुलते शब्द आए हैं। एक है हंस और दूसरा है हँस। पहला पक्षी का नाम है। दूसरा हँसने से बना है। दोनों की बिंदी अलग तरह की है। यही छोटा-सा अंतर पूरा अर्थ बदल देता है।
अनुस्वार की पहचान
अक्षर के ऊपर सीधी बिंदी लगे तो उसे अनुस्वार कहते हैं। बोलते समय आवाज़ नाक तक जाकर रुक जाती है। हंस, मंदिर, संदेश और अंगूर इसी के उदाहरण हैं। इनमें बिंदी के नीचे कोई चाँद नहीं होता।
चंद्रबिंदु की पहचान
जब बिंदी आधे चाँद के ऊपर बैठी हो, तब उसे चंद्रबिंदु कहते हैं। बोलते समय आवाज़ नाक से खुलकर निकलती है। हँस, आँख, गाँव और चाँद इसी तरह लिखे जाते हैं। दोनों को बोलकर देखो, अंतर अपने आप सुनाई देगा।
उलटे अर्थ वाले शब्द
नाटक में कई शब्दों के उलटे अर्थ भी छिपे हैं। ऐसे शब्दों को विलोम कहते हैं। सूरज का उदय होता है और अस्त भी होता है। देवदत्त ने मारा और सिद्धार्थ ने बचाया। हंस निर्दोष था, दोषी नहीं। मंत्री ने जटिल समस्या को सरल बना दिया।
विलोम से बात साफ़ होती है
विलोम शब्दों से अंतर तुरंत समझ आ जाता है। खुशी के साथ दुख रखो तो दोनों उभर आते हैं। शांति के साथ शोर रखो तो फ़र्क साफ़ दिखता है। इसीलिए लेखक इन्हें जोड़े में लाते हैं।
मुहावरे क्या हैं
कुछ बोलचाल की बातें अपने शब्दों से अलग अर्थ देती हैं। इन्हें मुहावरा कहते हैं। आँखें भर आना का अर्थ है आँसू आ जाना। कान खड़े होना का अर्थ है चौकन्ना हो जाना। हाथ बँटाना का अर्थ है काम में मदद करना। इन्हें ज्यों का त्यों नहीं समझा जाता।
अब नाटक खेलकर देखो
बच्चों ने कक्षा को चार टोलियों में बाँट लिया। हर टोली ने अपने पात्र चुने। किसी ने दुपट्टे से मुकुट बनाया और किसी ने कागज़ का तीर। संवाद बोलते समय भाव भी दिखाए गए। खेलकर देखने से नाटक बहुत जल्दी याद हो गया।
Concepts and terms
पात्र परिचय बताता है कि कौन-कौन है। दृश्य बताता है कि कहाँ और कब। संवाद पात्रों की बातचीत है।
अनुस्वार सीधी बिंदी है और आवाज़ नाक तक जाकर रुकती है। चंद्रबिंदु में आवाज़ नाक से खुलकर निकलती है।
उलटे अर्थ वाले शब्द। जैसे दिन का विलोम रात और सुख का विलोम दुख। इनसे बात और साफ़ हो जाती है।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा ने बिंदी और चंद्रबिंदु का अंतर जाँचा। हंस और हँस बोर्ड पर साथ-साथ लिखे गए। पहला एक पक्षी है और दूसरा हँसने की क्रिया। केवल एक चिह्न ने दोनों को अलग कर दिया। बच्चों ने ऐसे और जोड़े खोजे। आंख और आँख, दांत और दाँत सूची में आए। फिर उन्होंने नाटक के अपने पन्ने जाँचे। अठारह जगह चंद्रबिंदु छूटा हुआ मिला। सुधार के बाद संवाद पढ़ने में आसान हो गए। छोटा-सा चिह्न अर्थ और उच्चारण दोनों बदल देता है।
Analysis:
चंद्रबिंदु सजावट नहीं है। अठारह जगह उसके छूटने से पढ़ना कठिन हो गया था।
Activity:
चंद्रबिंदु वाले आठ शब्द खोजो। हर एक को वाक्य में लिखो और कक्षा में बोलकर सुनाओ।
घर पर करके देखो
Title:
घर पर एक छोटा दृश्य खेलो
What You Notice:
भाव के साथ बोलने पर वही संवाद कहीं ज़्यादा सजीव लगता है। कोष्ठक के संकेत ही नाटक में जान डालते हैं।
Did you know
नाटक पढ़ने से ज़्यादा मज़ा उसे खेलने में आता है। इसी से आवाज़ और हाव-भाव सीखे जाते हैं।
पुराने नाटकों में परदा हाथ से खींचा जाता था। इसीलिए परदा गिरना और उठना लिखा जाता है।
Memory tricks
हंस और हँस — बिंदी वाला उड़ता है, चाँद वाला हँसता है। — पक्षी वाले हंस पर सीधी बिंदी लगती है। हँसने वाले हँस पर चंद्रबिंदु लगता है।
नाटक के अंग — पात्र, दृश्य, कोष्ठक, संवाद। — पहले कौन, फिर कहाँ, फिर क्या करना है, और अंत में क्या कहना है।
Practice MCQs with answers (15)
- A पात्रों का परिचय देने के
- B कहानी का अंत बताने के
- C लेखक का पता देने के
- D मंच की लंबाई बताने के
Show answer
Why:
उसी से पता चलता है कि कौन किसका क्या लगता है।
- A जब कोई नया पात्र बोलता है
- B जब जगह या समय बदल जाता है
- C जब कोई पात्र चुप हो जाता है
- D जब लेखक का नाम आता है
Show answer
Why:
इसी नाटक में एक दृश्य उद्यान का और दूसरा सभा का है।
- A उन्हें करके दिखाना होता है
- B उन्हें सबसे ऊँची आवाज़ में पढ़ना होता है
- C उन्हें पूरी तरह छोड़ देना होता है
- D उन्हें सबसे अंत में पढ़ना होता है
Show answer
Why:
वे बताती हैं कि मंच पर क्या दिखेगा।
- A परिचय
- B प्रस्तावना
- C परदा
- D संवाद
Show answer
Why:
संवाद ही नाटक को आगे बढ़ाते हैं।
- A मंदिर
- B आँख
- C गाँव
- D चाँद
Show answer
Why:
इसमें अक्षर के ऊपर सीधी बिंदी है।
- A संदेश
- B आँगन
- C अंगूर
- D मंत्री
Show answer
Why:
इसमें बिंदी आधे चाँद के ऊपर बैठी है।
- A हँस
- B हँसी
- C हँसना
- D हंस
Show answer
Why:
यहाँ पक्षी की बात है, इसलिए सीधी बिंदी आएगी।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: चंद्रबिंदु में आवाज़ नाक से होकर निकलती है, जैसे आँगन में।
- A आरंभ
- B आगमन
- C अस्त
- D अवसर
Show answer
Why:
उदय का विलोम अस्त होता है।
- A 1-ख, 2-घ, 3-ग, 4-क
- B 1-घ, 2-क, 3-ख, 4-ग
- C 1-क, 2-ख, 3-घ, 4-ग
- D 1-घ, 2-ख, 3-क, 4-ग
Show answer
Why:
ये सब उलटे अर्थ वाले जोड़े हैं।
- A विलोम शब्द केवल पशुओं के नाम होते हैं।
- B विलोम शब्द एक ही अर्थ वाले शब्द होते हैं।
- C विलोम शब्द उलटे अर्थ वाले शब्द होते हैं।
- D विलोम शब्द हमेशा दो अक्षरों के होते हैं।
Show answer
Why:
जैसे दिन का विलोम रात है।
- A आँखें बंद कर लेना
- B आँखों में आँसू आ जाना
- C आँखों में धूल चली जाना
- D आँखें मलते हुए उठना
Show answer
Why:
मुहावरे का अर्थ उसके शब्दों से नहीं निकलता।
- A गहरी नींद में सो जाना
- B बहुत ज़ोर से हँस पड़ना
- C चौकन्ना हो जाना
- D कानों में रुई डाल लेना
Show answer
Why:
यह सावधान हो जाने के लिए कहा जाता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही पहला काम तय करता है। परदा और मुकुट बाद की बातें हैं।
- A संवाद छोटा करने के
- B बोलने का भाव बताने के
- C पात्र का नाम बदलने के
- D दृश्य खत्म करने के
Show answer
Why:
ऐसे संकेत कोष्ठक में दिए होते हैं।
Important short questions (5)
पात्र परिचय, दृश्य, कोष्ठक के संकेत और संवाद। इन्हीं चारों से नाटक बनता है।
वह बताती है कि मंच पर क्या दिखेगा। वह पात्र का भाव भी बताती है।
हंस एक पक्षी है और उस पर सीधी बिंदी लगती है। हँस हँसने से बना है और उस पर चंद्रबिंदु लगता है।
मारना का विलोम बचाना है। निर्दोष का विलोम दोषी है।
इसका अर्थ है काम में मदद करना। छोटी बहन ने रसोई में माँ का हाथ बँटाया।
Long answer questions (2)
पहला अंतर यह कि नाटक संवादों से चलता है। कहानी में लेखक खुद वर्णन करता है। दूसरा अंतर यह कि नाटक दृश्यों में बँटा होता है। तीसरा अंतर कोष्ठक के संकेतों का है, जो कहानी में नहीं होते। चौथा अंतर यह कि नाटक मंच पर खेला जा सकता है। कहानी ज़्यादातर पढ़कर ही सुनी जाती है।
अनुस्वार अक्षर के ऊपर लगी सीधी बिंदी है। बोलते समय आवाज़ नाक तक जाकर रुक जाती है। मंदिर, संदेश और हंस इसके उदाहरण हैं। चंद्रबिंदु आधे चाँद पर बैठी बिंदी है। इसमें आवाज़ नाक से खुलकर निकलती है। आँख, गाँव और हँस इसके उदाहरण हैं। बिंदी बदलते ही अर्थ भी बदल जाता है।
Flashcards (12)
Play this topic
- कौन-सी बिंदी?
- विलोम जोड़ो
- मुहावरे का अर्थ
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
Class 5 Hindi Chapter 9 — frequently asked questions
आसमान पर शाम की लाली फैली दिखती है। दूर से वन से लौटती गायों का स्वर सुनाई देता है।
उन्होंने उसे गोद में सँभाला और तीर बाहर खींचा। फिर सखा को मरहम लाने भेजा।
उन्होंने कहा कि सुंदर होना कोई दोष नहीं है। माँ भी उन्हें प्यारा कहकर और स्नेह करती हैं।
वह सभा के द्वार पर खड़ा रहता था। भीतर आने वालों की सूचना वही देता था।
वे सिद्धार्थ की शिकायत करने आए थे। उनका कहना था कि पक्षी उन्हें लौटाया जाए।
क्योंकि उनका दावा शिकार पर नहीं, जान बचाने पर टिका था। झूठ बोलने की ज़रूरत ही नहीं थी।
पात्र परिचय, दृश्य, कोष्ठक के संकेत और संवाद। इन्हीं चारों से नाटक बनता है।
वह बताती है कि मंच पर क्या दिखेगा। वह पात्र का भाव भी बताती है।
हंस एक पक्षी है और उस पर सीधी बिंदी लगती है। हँस हँसने से बना है और उस पर चंद्रबिंदु लगता है।
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