Class 5 Hindi Chapter 4: साङकेन
- 3 topics
- 45 MCQs
- 15 short answers
- 6 long answers
- 36 flashcards
- 15 games
- ~88 min read
- Hindi
कहानी: चौखाम में साङकेन
वल्लरी दिल्ली से चौखाम आई है। वहाँ वह अपने मित्र चाऊतान के साथ साङकेन देखती है। यह अरुणाचल प्रदेश का नववर्ष पर्व है।
What you will be able to do
- मैं 'साङकेन' पाठ की कहानी अपने शब्दों में सुना सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि साङकेन कहाँ और कैसे मनाया जाता है।
- मैं साङकेन और होली की समानताएँ खोज सकता/सकती हूँ।
Key points
साङकेन अरुणाचल प्रदेश का त्योहार है। इससे वहाँ नया वर्ष शुरू होता है।
वल्लरी के पिताजी चौखाम के मंडल कार्यालय में अधिकारी हैं।
गाँव के लोग मूर्तियों की शोभायात्रा नदी किनारे बने नए मंदिर तक ले गए।
लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं और चेहरों पर चावल का आटा लगाते हैं।
साङकेन तीन दिन चलता है। तीसरे दिन मूर्तियाँ बौद्ध-विहार लौट जाती हैं।
Full explanation
दिल्ली से चौखाम तक
वल्लरी अब तक दिल्ली में रहती थी। वहाँ सड़कों पर भीड़ रहती थी। कारें और बसें दिन भर हॉर्न बजाती थीं। अब उसके पिताजी चौखाम के दफ़्तर में अधिकारी हैं। वे परिवार को अरुणाचल प्रदेश बुला लाए हैं। यहाँ चारों ओर हरियाली है। हर तरफ़ फूल खिले हैं। वल्लरी को यह शांत जगह अच्छी लगती है। यहाँ के लोग हमेशा मुसकराते मिलते हैं।
चाऊतान का न्योता
एक दिन वल्लरी के मित्र चाऊतान ने उसे घर बुलाया। वल्लरी पिताजी के साथ पहुँची। उस समय चाऊतान के पिताजी अपने घर की सफ़ाई में लगे थे। मेहमानों को देखते ही उन्होंने झाड़ू रख दी। फिर दोनों को आदर से बिठाया। थोड़ी देर में चाऊतान की माताजी पकवान ले आईं। सब मिलकर खाने लगे। त्योहार से पहले घर की सफ़ाई हर जगह होती है।
खिड़की के बाहर जुलूस
खाते-खाते वल्लरी की नज़र सड़क पर गई। वहाँ एक लंबी शोभायात्रा जा रही थी। कई लोग अपने कंधों पर पालकी उठाए हुए थे। पालकियों के भीतर बड़ी और सुंदर मूर्तियाँ रखी थीं। सब लोग नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे। उनके चेहरों पर बहुत उत्साह था। वल्लरी ने पूछा कि यह भीड़ किधर जा रही है।
मूर्तियाँ नए मंदिर की ओर
चाऊतान ने बताया कि गाँव में नया मंदिर बना है। वह नदी के किनारे है। गाँव वाले विहार से मूर्तियाँ लेकर आए हैं। इनमें भगवान बुद्ध और उनके शिष्य हैं। ये तीन दिन तक उसी मंदिर में रहेंगी। गाँव के लोग रोज़ इन पर जल चढ़ाएँगे और पूजा करेंगे। वल्लरी के पिताजी ने भी शोभायात्रा में चलने की इच्छा बताई।
बाँस का सादा मंदिर
थोड़ी देर में जुलूस मंदिर तक पहुँच गया। मंदिर की दीवारें जालीदार थीं। वे बाँस और बाँस की पतली खपच्चियों से बनी थीं। बीच-बीच में हरी टहनियाँ लगाई गई थीं। उन पर रंग-बिरंगे फूल खोंस दिए गए थे। ऐसा सादा और सुंदर मंदिर उसने इससे पहले कभी नहीं देखा था।
पानी और चावल का आटा
मंदिर के द्वार पर भीड़ जुटने लगी। भिक्षुओं ने मंत्र पढ़े। उन्होंने मूर्तियों को पालकी से उतारकर मंदिर में रखा। फिर पूजा शुरू हुई और मूर्तियों पर जल चढ़ाया गया। बाहर लोग बालटियों से एक-दूसरे को भिगो रहे थे। कुछ लोग चेहरों पर चावल का आटा लगा रहे थे। चारों ओर हँसी गूँज रही थी।
यह तो होली जैसा है
वल्लरी को अपने घर की होली याद आने लगी। उसने चाऊतान से पूछा कि यहाँ भी क्या वही धूम है। चाऊतान हँसा। उसने बताया कि आज साङकेन है। इसी दिन से उनका नया वर्ष शुरू होता है। वल्लरी ने कहा कि होली से भी उनके यहाँ नया साल आरंभ होता है। दोनों मित्र एक-दूसरे के त्योहार सुनकर खुश हुए।
बड़ों का आशीर्वाद
चाऊतान ने बताया कि शाम को वे ताऊजी के घर जाएँगे। ताईजी ने तरह-तरह के पकवान बनाए होंगे। बच्चे बड़ों को प्रणाम करेंगे और आशीर्वाद पाएँगे। अगले दिन बुआजी और फूफाजी उनके घर आएँगे। तभी किसी ने दोनों मेहमानों पर पानी की पूरी बालटी उड़ेल दी। दोनों भीग गए और खिलखिलाकर हँस पड़े।
तीसरे दिन विदाई
साङकेन तीन दिन तक चलता है। तीसरे दिन भिक्षु मूर्तियों को फिर पालकियों में रखते हैं। वे उन्हें बौद्ध-विहार ले जाते हैं। वहाँ मंत्र पढ़कर मूर्तियाँ अपनी जगह रख दी जाती हैं। गाँव के लोग विहार जाकर भिक्षुओं को प्रणाम करते हैं। भिक्षु उन्हें अच्छी फसल और अच्छी सेहत का आशीर्वाद देते हैं।
त्योहार हमें क्या सिखाते हैं
हर त्योहार में कुछ बातें एक जैसी होती हैं। घर की सफ़ाई, पकवान, नए कपड़े और मेहमानों का स्वागत। बड़ों का आशीर्वाद और बच्चों की खुशी भी हर जगह मिलती है। नाम और तरीका अलग होता है, पर खुशी एक ही रहती है। दूसरों के त्योहार में शामिल होने से दोस्ती बढ़ती है।
Concepts and terms
अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों का नववर्ष पर्व। यह तीन दिन चलता है। इसमें पूजा होती है और लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं।
गाजे-बाजे के साथ निकलने वाला जुलूस। इसमें लोग नाचते-गाते चलते हैं। पाठ में यह मूर्तियों को नए मंदिर तक ले जाती है।
भारत में नया साल हर जगह एक ही दिन शुरू नहीं होता। किसी के यहाँ साङकेन से, किसी के यहाँ होली या बैसाखी से।
सावधान!
सच या भ्रम?
असली दुनिया में
Scenario:
असम के एक गाँव में बिहू की तैयारी चल रही थी। दसवीं कक्षा की दीदी ने बच्चों की टोली बनाई। उसने कहा कि इस बार त्योहार में पानी बर्बाद नहीं होगा। बच्चों ने घर-घर जाकर एक बात समझाई। नहाने का बचा पानी बालटी में रखो और उसी से खेलो। नल खुला मत छोड़ो। गाँव के कुएँ का पानी गर्मी में कम हो जाता है। बच्चों ने एक चार्ट भी बनाया। उस पर रोज़ का पानी गिना गया। त्योहार के बाद हिसाब लगा तो पिछले साल से बहुत कम पानी लगा था। खुशी भी पूरी रही और कुआँ भी नहीं सूखा। दीदी ने कहा कि असली त्योहार यही है।
Analysis:
त्योहार की खुशी और पानी की बचत साथ-साथ चल सकती हैं। सोच-समझकर मनाया गया त्योहार सबके काम आता है।
Activity:
अपने घर में एक दिन गिनो कि कितनी बालटी पानी लगता है। फिर सोचो कि दो बालटी कैसे बचाई जा सकती हैं।
घर पर करके देखो
Title:
कागज़ और टहनियों से छोटा सजा हुआ द्वार
Safety:
कैंची चलाते समय किसी बड़े को पास बुलाओ। सींक की नोक से आँख बचाओ।
What You Notice:
सस्ती और आसान चीज़ों से भी बहुत सुंदर सजावट बन जाती है। पाठ का बाँस वाला मंदिर भी ऐसे ही सजा था।
Did you know
भारत में सूरज की पहली किरन अरुणाचल प्रदेश पर ही पड़ती है। इसीलिए इसे उगते सूरज का प्रदेश कहते हैं।
अप्रैल के महीने में कई राज्यों का नया साल आता है, जैसे असम का बिहू और पंजाब की बैसाखी।
Memory tricks
साङकेन की झलक — पालकी, पकवान, पानी — तीनों साङकेन की निशानी। — पालकी में मूर्तियाँ, घर में पकवान और गली में पानी। यही तीन चीज़ें पाठ में सबसे पहले दिखती हैं।
तीन दिन का क्रम — पहले दिन आई, बीच में पूजा, तीसरे दिन विदाई। — मूर्तियाँ मंदिर आती हैं, तीन दिन वहाँ पूजी जाती हैं, फिर बौद्ध-विहार लौट जाती हैं।
Practice MCQs with answers (15)
- A केरल में
- B गुजरात में
- C राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में
- D अरुणाचल प्रदेश में
Show answer
Why:
पाठ में चौखाम अरुणाचल प्रदेश की जगह है, जहाँ साङकेन मनाया जाता है।
- A क्योंकि इससे वहाँ नया वर्ष शुरू होता है
- B क्योंकि उस दिन बहुत तेज़ बारिश होती है
- C क्योंकि उस दिन सभी स्कूल बंद रहते हैं
- D क्योंकि उस दिन गाँव में बड़ा मेला लगता है
Show answer
Why:
चाऊतान बताता है कि इसी दिन से उनका नया वर्ष आरंभ होता है।
- A क्या यहाँ से मंदिर तक रास्ता बहुत लंबा है
- B क्या पकवान और भी बनाए जाने वाले हैं
- C क्या कल गाँव के सभी स्कूल बंद रहेंगे
- D क्या वे भी शोभायात्रा में चल सकते हैं
Show answer
Why:
उन्होंने शोभायात्रा में शामिल होने की इच्छा बताई थी।
- A पक्की ईंट और सीमेंट
- B बड़े पत्थर और चूने
- C बाँस और खपच्चियों
- D लोहे की छड़ और काँच
Show answer
Why:
दीवारें बाँस की पतली खपच्चियों से बनी जाली जैसी थीं।
- A टोकरियों
- B पालकियों
- C गाड़ियों
- D नावों
Show answer
Why:
लोग कंधों पर पालकियाँ उठाकर चल रहे थे।
- A कि गाँव में कोई परीक्षा चल रही है
- B कि सब लोग नाराज़ हैं
- C कि कोई त्योहार मनाया जा रहा है
- D कि कहीं आग लगी है
Show answer
Why:
नाच, गाना और पानी खुशी और उत्सव की निशानी हैं।
- A वहाँ किसी तरह का कोई पकवान नहीं बनाया जाता
- B वहाँ भी सफ़ाई, पकवान और मेहमानों का स्वागत होता है
- C वहाँ मेहमानों को बुलाने की कोई परंपरा नहीं है
- D वहाँ केवल मिठाई बाँटकर पूरा त्योहार खत्म कर दिया जाता है
Show answer
Why:
पाठ में चाऊतान के घर सफ़ाई हो रही थी और पकवान बने थे।
- A मूर्तियाँ तीन दिन मंदिर में रहकर विहार लौट जाती हैं।
- B मूर्तियाँ हमेशा के लिए उसी नए मंदिर में रख दी जाती हैं।
- C मूर्तियाँ उसी दिन शाम तक विहार वापस पहुँचा दी जाती हैं।
- D मूर्तियों को पूजा के बाद नदी के पानी में बहा दिया जाता है।
Show answer
Why:
तीसरे दिन भिक्षु उन्हें फिर बौद्ध-विहार ले जाते हैं।
- A 1-क, 2-ग, 3-ख, 4-घ
- B 1-ग, 2-क, 3-घ, 4-ख
- C 1-ग, 2-घ, 3-क, 4-ख
- D 1-ख, 2-क, 3-घ, 4-ग
Show answer
Why:
पालकी में मूर्ति, खपच्ची से दीवार, बालटी से पानी और आटा चेहरे पर।
- A क्योंकि वे काम करते-करते बहुत थक चुके थे
- B क्योंकि सफ़ाई का काम उस समय पूरा हो चुका था
- C क्योंकि उन्हें उसी समय बाहर कहीं जाना पड़ रहा था
- D क्योंकि अतिथि का स्वागत पहले किया जाता है
Show answer
Why:
घर आए मेहमान का स्वागत सबसे पहले किया जाता है।
- A ऊँची इमारतें और भीड़
- B लंबी कतारें और शोर
- C खुला, शांत और हरियाली भरा वातावरण
- D धूल भरी सड़कें और तेज़ गर्मी का मौसम
Show answer
Why:
दिल्ली की भीड़ के बाद चौखाम उसे शांत और हरा-भरा लगा।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: साङकेन पानी का त्योहार है, दीयों का नहीं।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही जाने का उद्देश्य है। त्योहार पर बड़ों से मिलना उसी का एक हिस्सा है।
- A साङकेन एक ही दिन में खत्म हो जाता है।
- B साङकेन पर लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं।
- C साङकेन से ही नया वर्ष शुरू होता है।
- D साङकेन पर घर में पकवान बनते हैं।
Show answer
Why:
साङकेन तीन दिन तक मनाया जाता है।
- A साफ़ मना कर देना और घर पर ही बैठे रहना
- B खुशी से जाना और उनके रीति-रिवाज का आदर करना
- C वहाँ जाकर उनके रीति-रिवाज का मज़ाक उड़ाकर लौट आना
- D वहाँ जाकर चुपचाप नाराज़ बैठे रहना और कुछ न कहना
Show answer
Why:
वल्लरी का परिवार भी दूसरे त्योहार में खुशी से शामिल हुआ था।
Important short questions (5)
क्योंकि लोग एक-दूसरे को पानी से भिगो रहे थे। कुछ लोग चेहरों पर आटा भी मल रहे थे।
दिल्ली में भीड़, शोर और लंबी कतारें थीं। चौखाम खुला, शांत और हरियाली से भरा है।
दीवारें बाँस की खपच्चियों से बनी थीं। बीच-बीच में हरी टहनियाँ लगाकर उन पर फूल खोंसे गए थे।
भिक्षु मूर्तियों को फिर पालकी में रखकर विहार पहुँचा देते हैं। वहाँ मंत्र पढ़कर उन्हें रखा जाता है।
मुझे दादी और नानी आशीर्वाद देती हैं। वे कहती हैं कि मैं खूब पढ़ूँ और सेहतमंद रहूँ।
Long answer questions (2)
जुलूस के आगे ढोल बज रहा था। कंधों पर पालकियाँ थीं और उनमें सुंदर मूर्तियाँ रखी थीं। लोग नाचते हुए आगे बढ़ रहे थे। नदी के किनारे बाँस का छोटा मंदिर सजा हुआ था। वहाँ भिक्षुओं ने मंत्र पढ़े और जल चढ़ाया। बाहर बच्चे एक-दूसरे पर पानी डालकर हँस रहे थे। मैं भी भीग गया और खूब खुश हुआ।
दोनों त्योहारों में लोग एक-दूसरे को भिगोते हैं। साङकेन पर चावल का आटा लगाते हैं और होली पर गुलाल। दोनों से नया वर्ष शुरू होता है। दोनों में घर की सफ़ाई होती है और पकवान बनते हैं। दोनों में लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं और बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं। नाम अलग हैं, पर खुशी एक जैसी है।
Flashcards (12)
Play this topic
- जोड़ी ढूँढो
- कहानी क्रम से लगाओ
- किसका है यह?
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
कविता: होली आई, होली आई
भवानी प्रसाद मिश्र की यह कविता फागुन की खुशी दिखाती है। खेत, बाग, जंगल और गलियाँ, सब जगह रंग, गीत और उमंग भर जाती है।
What you will be able to do
- मैं कविता की तुक पहचानकर उसे लय में पढ़ सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि होली आने पर प्रकृति में क्या-क्या बदलता है।
- मैं कविता के कठिन शब्दों का अर्थ अपने शब्दों में लिख सकता/सकती हूँ।
Key points
यह कविता भवानी प्रसाद मिश्र ने लिखी है।
पहली पंक्ति बार-बार लौटती है, इससे कविता में गीत जैसी लय बनती है।
कविता में खेत, अमराई, जंगल और आँगन, सब जगह की खुशी दिखाई गई है।
'सोना' का अर्थ यहाँ पकी फसल का सुनहरा रंग है, धातु नहीं।
कविता के अंत में सब लोग मिलकर नाचने-गाने की बात है।
Full explanation
चिट्ठी में एक सवाल
वल्लरी ने दिल्ली में अपनी सहेली मीरा को चिट्ठी लिखी। उसने साङकेन के बारे में सब बताया। मीरा ने जवाब में लिखा कि यहाँ फागुन आ गया है। उसने एक कविता भी भेजी। कविता का नाम है 'होली आई, होली आई'। मीरा ने लिखा कि इसे ताली बजाकर पढ़ना। आओ, हम भी वही कविता पढ़ते हैं।
कवि की बात
यह कविता भवानी प्रसाद मिश्र ने लिखी है। कविता में एक ही पंक्ति बार-बार लौटती है। ऐसी पंक्ति को टेक कहते हैं। हर बार वह पंक्ति आती है और खुशी दोहरा देती है। कवि पूछते हैं कि होली अपने साथ क्या-क्या लाई है। इसके बाद पूरी कविता इसी सवाल का जवाब देती है।
खेतों में सोना
कवि कहते हैं कि खेतों में सोना आ गया है। यहाँ सोना धातु नहीं है। यह पकी फसल का सुनहरा रंग है। सरसों के पीले फूल खिल उठे हैं। गेहूँ की बालियाँ हवा में झूम रही हैं। खेत का हर कोना चमकता दिखता है। किसान के लिए यही असली सोना है।
अमराई की महक
आम के बगीचे को अमराई कहते हैं। फागुन में आम पर बौर आता है। पूरा बगीचा महक उठता है। हवा भी अब नई-सी लगती है। वह ठंडी नहीं रहती और हल्की गरमाहट लाती है। कवि कहते हैं कि हवा लहराती हुई चलती है। यह सब बसंत के आने की निशानी है।
कानों से सुनो
कविता में सिर्फ़ दिखता नहीं, सुनाई भी देता है। कोयल कुहक रही है। भौंरे फूलों के पास गूँज रहे हैं। चिकने पत्ते हवा में झूम रहे हैं। आँखें बंद करके पढ़ोगे, तो ये आवाज़ें सुनाई देंगी। अच्छी कविता ऐसे ही कानों में बजती है।
जंगल में लाल टेसू
जंगल में टेसू के पेड़ फूलों से भर जाते हैं। इसे पलाश भी कहते हैं। इसके फूल लाल और नारंगी होते हैं। दूर से लगता है कि जंगल में आग-सी लगी हो। पहले इन्हीं फूलों को पानी में उबालकर होली का रंग बनाया जाता था। कवि कहते हैं कि सारी दुनिया मंगल में डूब गई है।
आँगन में ताल
अब कविता गाँव के घरों में पहुँचती है। एक आँगन में मंजीरे खनक रहे हैं। दूसरे आँगन में पैरों के नूपुर बज रहे हैं। रास्तों में ढोलक की थाप सुनाई देती है। बच्चे और बूढ़े, सब उमंग में हैं। त्योहार किसी एक घर का नहीं होता। वह पूरी गली का होता है।
गली-गली फाग
होली पर गाए जाने वाले गीतों को फाग कहते हैं। कविता में हर गली से फाग की आवाज़ आती है। चौराहों पर होलिका जलाई जाती है। लोग रास्तों में एक-दूसरे से मिलते हैं। गले मिलते हैं और शिकवे भुला देते हैं। कवि कहते हैं कि जहाँ देखो वहीं प्यार है।
तुक का मज़ा
कविता की पंक्तियों के आखिर सुनो। 'आई' के साथ 'लाई' की आवाज़ मिलती है। 'खनके' के साथ 'रनके' मिलता है। इसी मिलान को तुक कहते हैं। तुक से कविता गाने लायक बन जाती है। ताली बजाकर पढ़ो, तो लय अपने आप पकड़ में आ जाएगी।
कविता हमें क्या देती है
कविता के अंत में कवि सबको बुलाते हैं। वे कहते हैं कि नाचो, गाओ और झूमो। यह खुशी अकेले की नहीं है। खेत, बाग, जंगल और गली, सब साथ मना रहे हैं। साङकेन में भी ऐसी ही साझी खुशी थी। दोनों त्योहार यह सिखाते हैं कि मिलकर मनाने से खुशी बढ़ती है।
Concepts and terms
पंक्तियों के आखिर में मिलती-जुलती आवाज़ आना। जैसे 'आई' और 'लाई'। तुक से कविता गाने में आसान लगती है।
कवि शब्दों से ऐसा दृश्य बनाता है कि वह आँखों के सामने दिखने लगे। पीले खेत और लाल टेसू ऐसे ही चित्र हैं।
कविता में बार-बार लौटने वाली पंक्ति। यहाँ पहली पंक्ति बार-बार आती है और खुशी का ढोल-सा बजाती है।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कविता पढ़कर कबीर ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार है। नेहा ने कविता की पंक्तियाँ फिर से पढ़ीं। उसने दिखाया कि कवि खेत, बाग और जंगल की बात करता है। होली फागुन में आती है, जब फ़सल पक चुकी होती है। कक्षा ने अपने आस-पास जाकर देखा। खेतों में सरसों कट चुकी थी। पेड़ों पर नई कोंपलें निकल रही थीं। दिन कुछ लंबे हो गए थे। कबीर ने माना कि त्योहार मौसम के साथ चलता है। रंग तो उस खुशी का एक रूप भर हैं।
Analysis:
कविता की खुशी केवल रंगों की नहीं है। वह पकी फ़सल, नई कोंपल और लंबे होते दिन की भी है।
Activity:
अपने आस-पास के किसी त्योहार को चुनो। पता करो कि वह किस मौसम में आता है और तब खेतों में क्या होता है।
घर पर करके देखो
Title:
फूलों से अपना रंग बनाओ
Safety:
गरम पानी अकेले मत डालो, किसी बड़े से मदद लो। रंग आँखों से दूर रखो।
What You Notice:
फूलों से बना रंग हल्का और महकदार होता है। यह त्वचा को नुकसान नहीं पहुँचाता।
Did you know
टेसू के लाल-नारंगी फूलों से पहले होली का रंग बनाया जाता था। इसे पलाश भी कहते हैं।
फागुन हिंदी महीनों में आखिरी महीना है। इसी महीने में होली आती है।
Memory tricks
कविता के तीन दृश्य — खेत पीला, जंगल लाल, आँगन में ताल। — सरसों से खेत पीला, टेसू से जंगल लाल और आँगन में मंजीरे-नूपुर की ताल।
कठिन शब्द — अमराई माने आम, फाग माने गीत। — अमराई आम के पेड़ों का बगीचा है और फाग होली पर गाए जाने वाले गीत हैं।
Practice MCQs with answers (15)
- A निरंकार देव 'सेवक'
- B सुभद्रा कुमारी चौहान
- C भवानी प्रसाद मिश्र
- D जैनेंद्र कुमार
Show answer
Why:
कविता के नीचे कवि का नाम भवानी प्रसाद मिश्र लिखा है।
- A सोने के गहने
- B पकी फसल का सुनहरा रंग
- C सोने का कोई पुराना सिक्का
- D सोने की खान
Show answer
Why:
यहाँ सोना धातु नहीं, फसल की सुनहरी चमक है।
- A आम
- B अमरूद
- C अनार
- D आँवला
Show answer
Why:
अमराई आम के पेड़ों के बगीचे को कहते हैं।
- A टेसू
- B गुलाब
- C चंपा
- D सूरजमुखी
Show answer
Why:
टेसू यानी पलाश के फूल लाल-नारंगी होते हैं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: ‘सोना’ पकी फसल के सुनहरे रंग के लिए आया है।
- A धान
- B सरसों
- C कपास
- D गन्ना
Show answer
Why:
सरसों के फूल पीले होते हैं और उसके बीजों से तेल निकलता है।
- A समुद्र की लहर
- B रेल की सीटी
- C कोयल की कुहक
- D बारिश की बौछार
Show answer
Why:
कविता में कोयल कुहकती है और भौंरे गूँजते हैं।
- A हाँ, कविता भी यही कहती है
- B यह केवल तरह-तरह की मिठाई खाकर खुश होने का दिन है
- C यह फसल, फूल, गीत और मेल-मिलाप का त्योहार भी है
- D यह केवल छुट्टी का दिन है
Show answer
Why:
कविता में खेत, बाग, जंगल, गीत और गले मिलना, सब आते हैं।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही दोहराव का काम है। होली का गीत गाते समय वही पंक्ति सब मिलकर बोलते हैं।
- A आँगनों में मंजीरे और नूपुर बज रहे हैं।
- B गलियाँ और आँगन दोनों बिल्कुल सूने पड़े हैं।
- C सब लोग घरों में बंद बैठे हैं।
- D किसी को कोई गीत याद नहीं है।
Show answer
Why:
कविता में आँगन, गली और रास्ते, सब जगह संगीत है।
- A 1-क, 2-ग, 3-घ, 4-ख
- B 1-ग, 2-घ, 3-क, 4-ख
- C 1-ग, 2-क, 3-ख, 4-घ
- D 1-घ, 2-ग, 3-क, 4-ख
Show answer
Why:
अमराई आम का बगीचा, टेसू लाल फूल, फाग गीत और नूपुर पायल है।
- A खेतों के बीच
- B नदी के भीतर
- C घर की छत पर
- D चौराहों पर
Show answer
Why:
कविता में चौराहों पर होलिका जलने की बात आई है।
- A चुपचाप बैठने को
- B मिलकर नाचने, गाने और झूमने को
- C घर लौट जाने को
- D रंग अगले साल के लिए बचाकर रखने को
Show answer
Why:
अंत में कवि सबको मिलकर खुशी मनाने का न्योता देते हैं।
- A क्योंकि हवा सच में कपड़े की तरह बुनकर बनाई जाती है
- B क्योंकि हवा दिखाई देती है
- C क्योंकि हवा रुक गई थी
- D क्योंकि मौसम बदलने पर हवा हल्की और सुहानी लगती है
Show answer
Why:
बसंत में ठंड कम होती है और हवा में हल्की गरमाहट आ जाती है।
- A खाने का हलवा
- B फूलों की एक लंबी माला
- C कागज़ की नाव
- D होली का प्राकृतिक रंग
Show answer
Why:
पहले टेसू के फूलों से ही होली का रंग बनता था।
Important short questions (5)
सरसों के पीले फूल खिल जाते हैं। गेहूँ की बालियाँ पक कर सुनहरी दिखने लगती हैं।
कोयल की कुहक, भौंरों की गूँज और ढोलक की थाप सुनाई देती है।
पंक्तियों के आखिर में मिलती-जुलती आवाज़ को तुक कहते हैं। जैसे आई और लाई।
क्योंकि फूल, फसल, गीत और मेल-मिलाप से चारों ओर खुशी भर गई है।
बाज़ार में रंग और पिचकारियाँ दिखने लगती हैं। घर में गुझिया और पकवान बनने लगते हैं।
Long answer questions (2)
मुझे एक गाँव दिखाई देता है। खेतों में सरसों के पीले फूल लहरा रहे हैं। पास के बगीचे में आम के बौर महक रहे हैं। जंगल की ओर टेसू के लाल फूल खिले हैं। आँगन से मंजीरों की खनक आ रही है। बच्चे और बूढ़े मिलकर फाग गा रहे हैं। चौराहे पर होलिका जल रही है और लोग गले मिल रहे हैं।
कविता में हर गली से फाग की आवाज़ आती है। चौराहों पर होलिका जलती है और लोग वहीं मिलते हैं। रास्तों पर एक-दूसरे से गले मिलने की बात आई है। बच्चे और बूढ़े, दोनों उमंग में दिखाए गए हैं। अंत में कवि सबको साथ नाचने और गाने का न्योता देते हैं। इससे पता चलता है कि यह त्योहार लोगों को जोड़ता है।
Flashcards (12)
Play this topic
- शब्द और अर्थ मिलाओ
- आँख या कान?
- सही या गलत
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
भाषा की बात: वचन, समानार्थी और उद्धरण चिह्न
पाठ के शब्दों से वचन बदलना सीखो। समानार्थी शब्द पहचानो। किसी की कही बात लिखते समय उद्धरण चिह्न लगाना और वर्णमाला क्रम भी सीखो।
What you will be able to do
- मैं शब्दों का वचन बदलकर सही वाक्य बना सकता/सकती हूँ।
- मैं दिए गए शब्द का समानार्थी शब्द चुन सकता/सकती हूँ।
- मैं किसी की कही बात को उद्धरण चिह्न में लिख सकता/सकती हूँ।
Key points
एक के लिए एकवचन और एक से अधिक के लिए बहुवचन शब्द आता है।
ई से खत्म होने वाले कई शब्दों में 'याँ' जुड़ता है, जैसे पालकी से पालकियाँ।
समानार्थी शब्द वे हैं जिनका अर्थ मिलता-जुलता हो, जैसे मित्र और दोस्त।
किसी की कही बात हूबहू लिखनी हो, तो उद्धरण चिह्न लगते हैं।
शब्दकोश में शब्द वर्णमाला के क्रम से रखे जाते हैं।
Full explanation
वल्लरी की लेखन-पुस्तिका
वल्लरी साङकेन का वर्णन लिख रही है। उसने लिखा कि कंधों पर पालकी थीं। मीरा ने पढ़ा और हँस पड़ी। एक पालकी थी या कई? गिनती बदलती है, तो शब्द का रूप भी बदलता है। इसी बदलाव को वचन कहते हैं। आओ, पाठ के शब्दों से यह खेल सीखते हैं।
एक और अनेक
एक चीज़ की बात हो, तो एकवचन आता है। जैसे मंदिर, मूर्ति, बालटी। एक से अधिक की बात हो, तो बहुवचन आता है। जैसे मूर्तियाँ, बालटियाँ। वाक्य में क्रिया भी साथ बदलती है। एक मूर्ति रखी थी, पर कई मूर्तियाँ रखी थीं। पढ़ते समय दोनों को मिलाकर देखो।
ई वाले शब्द
बहुत-से स्त्रीलिंग शब्द बड़ी ई से खत्म होते हैं। ऐसे शब्दों में 'ियाँ' जुड़ता है। पालकी से पालकियाँ बनता है। बालटी से बालटियाँ और खपच्ची से खपच्चियाँ बनता है। नदी से नदियाँ और लड़की से लड़कियाँ भी ऐसे ही बनते हैं। बड़ी ई छोटी हो जाती है, यह ध्यान रखो।
आ वाले और बाकी शब्द
आ से खत्म होने वाले कई पुल्लिंग शब्दों में 'ए' आता है। कमरा से कमरे और लड़का से लड़के बनता है। कुछ शब्दों के आगे 'एँ' जुड़ता है। बात से बातें और किताब से किताबें बनता है। कुछ शब्द वैसे ही रहते हैं, जैसे फल, फूल और पानी। इन्हें वाक्य से पहचानना पड़ता है।
समानार्थी शब्द
कुछ शब्दों के अर्थ मिलते-जुलते होते हैं। इन्हें समानार्थी शब्द कहते हैं। मित्र के लिए दोस्त या सखा कह सकते हैं। नदी के लिए सरिता और त्योहार के लिए पर्व। प्रसन्न के लिए खुश और स्वागत के लिए अभिनंदन। इनसे लिखते समय एक ही शब्द बार-बार नहीं दोहराना पड़ता।
वाक्य बदलकर देखो
अब एक खेल करो। पाठ का कोई वाक्य लो। उसमें एक शब्द के बदले उसका समानार्थी रखो। मित्र चाऊतान की जगह दोस्त चाऊतान लिखो। अर्थ वही रहता है, पर शब्द नया हो जाता है। ध्यान रहे, हर जगह हर समानार्थी ठीक नहीं बैठता। पढ़कर देखो कि वाक्य सुनने में अच्छा लगे।
किसी की कही बात
कहानी में लोग आपस में बात करते हैं। जब कोई बात हूबहू उसी रूप में लिखनी हो, तब उद्धरण चिह्न लगता है। पहले बोलने वाले का नाम आता है। फिर अल्पविराम और उसके बाद खुला चिह्न। बात पूरी होने पर चिह्न बंद कर दिया जाता है। इससे पता चलता है कि ये शब्द किसके हैं।
चिह्न का सही उपयोग
एक उदाहरण देखो। चाऊतान बोला, “आज हमारे यहाँ नया वर्ष शुरू हुआ है।” यहाँ बात चिह्न के भीतर बंद है। पूर्ण विराम भी भीतर ही लगा है। बिना चिह्न के लिखने पर बात का मालिक गुम हो जाता है। पाठ में ऐसे कई वाक्य हैं। उन्हें ढूँढ़कर अपनी पुस्तिका में लिखो।
वर्णमाला का क्रम
शब्दकोश में शब्द ढूँढ़ने के लिए क्रम जानना ज़रूरी है। पहले क, ख, ग आते हैं। फिर च, छ, ज और आगे के वर्ण। पहला अक्षर एक जैसा हो, तो दूसरा अक्षर देखो। जैसे मटका पहले आएगा और मठ बाद में। इसी क्रम से सूची बनाना आसान हो जाता है।
छोटा-सा अभ्यास
अपनी पुस्तिका में तीन काम करो। पहला, पाठ से पाँच शब्द चुनकर उनका बहुवचन लिखो। दूसरा, तीन शब्दों के समानार्थी लिखो। तीसरा, अपने घर की कोई बात उद्धरण चिह्न में लिखो। रोज़ थोड़ा अभ्यास करोगे, तो ये नियम अपने आप याद हो जाएँगे।
Concepts and terms
शब्द का वह रूप जो गिनती बताता है। एक चीज़ के लिए एकवचन और एक से अधिक के लिए बहुवचन।
मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द। जैसे नदी और सरिता। इनसे लेखन में एक ही शब्द बार-बार नहीं दोहराना पड़ता।
किसी के कहे शब्दों को ज्यों का त्यों लिखने पर लगने वाला चिह्न। बात इसी चिह्न के भीतर रखी जाती है।
सावधान!
सच या भ्रम?
असली दुनिया में
Scenario:
कक्षा पाँच के बच्चों ने एक दीवार-पत्रिका बनाई। उसका नाम रखा गया नमस्ते भारत। हर बच्चे ने अपने राज्य के अभिवादन का शब्द लिखा। किसी ने नमस्कार लिखा, किसी ने सत श्री अकाल, किसी ने वणक्कम और किसी ने नमस्कारम। शिक्षिका ने कहा कि सूची वर्णमाला के क्रम से लगाओ। बच्चों ने पहले अक्षर देखे और शब्द जमाए। फिर उन्होंने हर शब्द के आगे राज्य का नाम लिखा। किसी बड़े से पूछी गई बात उद्धरण चिह्न में लिखी गई। पत्रिका दीवार पर लगी तो सब रुककर पढ़ने लगे। बच्चों ने जाना कि नमस्ते के भी कई रूप हैं।
Analysis:
भाषा के नियम सिर्फ़ अभ्यास-पुस्तिका के लिए नहीं हैं। सूची बनाने और बात लिखने में वे रोज़ काम आते हैं।
Activity:
अपने घर के बड़ों से पूछो कि वे किस शब्द से अभिवादन करते हैं। पाँच शब्दों की सूची वर्णमाला क्रम से बनाओ।
घर पर करके देखो
Title:
वचन बदलने का पत्ता-खेल
What You Notice:
कुछ शब्दों में याँ लगता है, कुछ में ए और कुछ में एँ। खेलते-खेलते नियम अपने आप याद हो जाते हैं।
Did you know
हिंदी शब्दकोश में शब्द वर्णमाला के क्रम से मिलते हैं। पहले अक्षर एक हो, तो दूसरा अक्षर देखा जाता है।
हिंदी में केवल दो वचन होते हैं। कुछ पुरानी भारतीय भाषाओं में दो के लिए अलग वचन भी था।
Memory tricks
ई वाले शब्दों का बहुवचन — पालकी, बालटी, खपच्ची — सबमें याँ लगेगी सच्ची। — इन शब्दों की बड़ी ई हटती है और 'ियाँ' जुड़ जाता है।
उद्धरण चिह्न — बात शुरू, चिह्न खुला; बात पूरी, चिह्न बंद। — कही हुई बात दोनों ओर से चिह्न के भीतर बंद रहनी चाहिए।
Practice MCQs with answers (15)
- A बालटीयाँ
- B बालटियां
- C बालटियाँ
- D बालटिए
Show answer
Why:
बड़ी ई छोटी होकर 'ियाँ' बनता है।
- A पालकी
- B पालकीयाँ
- C पालकियां
- D पालकियाँ
Show answer
Why:
एक से अधिक की बात है, इसलिए बहुवचन रूप आएगा।
- A कमरे
- B कमरें
- C कमराएँ
- D कमरियाँ
Show answer
Why:
आ से खत्म होने वाले कई शब्दों में 'ए' आता है।
- A नदी - सरिता
- B दिन - रात
- C ऊपर - नीचे
- D आना - जाना
Show answer
Why:
बाकी तीनों जोड़े उलटे अर्थ वाले हैं।
- A पर्वत
- B सागर
- C सड़क
- D सरिता
Show answer
Why:
सरिता नदी का समानार्थी शब्द है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही कमी बताता है। बोलने वाले का नाम तो वहाँ है; चिह्न नहीं हैं।
- A यह बताने के लिए कि ये शब्द किसी के कहे हुए हैं
- B किसी कठिन शब्द का सही अर्थ बता देने के लिए
- C वाक्य को पहले से और लंबा कर देने के लिए
- D वाक्य के भीतर गिनती को दिखा देने के लिए
Show answer
Why:
उद्धरण चिह्न के भीतर जो है, वह किसी के मुँह से निकला है। उससे कहने वाले की बात लेखक की बात से अलग दिखती है।
- A कोयल
- B ढोलक
- C आम
- D मंदिर
Show answer
Why:
स्वर वाले अक्षर व्यंजनों से पहले आते हैं।
- A खपच्चीयाँ
- B खपच्चियाँ
- C खपच्चें
- D खपच्चे
Show answer
Why:
यह भी पालकी वाले नियम से बनता है।
- A माँ ने कहा आज पकवान बनेंगे।”
- B माँ ने कहा, “आज पकवान बनेंगे।”
- C माँ ने कहा, “आज पकवान बनेंगे।
- D “माँ ने कहा आज पकवान बनेंगे।
Show answer
Why:
बात दोनों ओर से चिह्न के भीतर बंद होनी चाहिए।
- A खपच्चियाँ
- B खपच्ची
- C खपच्चियों
- D खपच्चीयाँ
Show answer
Why:
यहाँ एक की बात है, इसलिए एकवचन आएगा।
- A 1-क, 2-ग, 3-ख, 4-घ
- B 1-घ, 2-ख, 3-ग, 4-क
- C 1-ग, 2-घ, 3-क, 4-ख
- D 1-घ, 2-ग, 3-ख, 4-क
Show answer
Why:
हर शब्द का मिलता-जुलता अर्थ वाला साथी चुनो।
- A नदीयाँ
- B नदी
- C नदियाँ
- D नदियों
Show answer
Why:
अनेक की बात है, इसलिए बहुवचन रूप आएगा।
- A गईं की जगह गया लिखना
- B बालटी की जगह बालटियाँ लिखना
- C सारी की जगह सारा लिखना
- D पानी की जगह पानियाँ लिखना
Show answer
Why:
सारी और गईं बहुवचन हैं, इसलिए शब्द भी बहुवचन होना चाहिए।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: नदी और सरिता का अर्थ एक है, पर पहला अक्षर अलग है।
Important short questions (5)
शब्द का वह रूप जो गिनती बताता है। जैसे एक मूर्ति और कई मूर्तियाँ।
मित्र का समानार्थी दोस्त है। नदी का समानार्थी सरिता है।
बोलने वाले के नाम के बाद अल्पविराम लगाऊँगा। बात पूरी होने पर चिह्न बंद करना नहीं भूलूँगा।
आम, ढोलक, मंदिर।
क्योंकि याँ जुड़ने पर बड़ी ई छोटी हो जाती है। सही रूप पालकियाँ है।
Long answer questions (2)
वल्लरी ने पूछा, “ये पालकियाँ कहाँ जा रही हैं?” चाऊतान बोला, “इनमें मूर्तियाँ रखी हैं।” वल्लरी ने कहा, “मंदिर कितना सुंदर सजा है!” चाऊतान हँसकर बोला, “अब बालटियाँ भी आने वाली हैं।” तभी किसी ने दोनों पर पानी डाल दिया। दोनों मित्र खिलखिलाकर हँस पड़े।
एक ही शब्द बार-बार आए, तो लेख नीरस लगता है। समानार्थी शब्द जानने से हम उसे बदल सकते हैं। जैसे हर वाक्य में मित्र की जगह कहीं दोस्त और कहीं सखा लिख सकते हैं। नदी की जगह सरिता भी चल जाता है। इससे भाषा सुंदर लगती है और शब्द-भंडार भी बढ़ता है।
Flashcards (12)
Play this topic
- समानार्थी जोड़ी
- एकवचन या बहुवचन?
- वर्णमाला क्रम में लगाओ
- सही या गलत
- झटपट सवाल
Class 5 Hindi Chapter 4 — frequently asked questions
क्योंकि लोग एक-दूसरे को पानी से भिगो रहे थे। कुछ लोग चेहरों पर आटा भी मल रहे थे।
दिल्ली में भीड़, शोर और लंबी कतारें थीं। चौखाम खुला, शांत और हरियाली से भरा है।
दीवारें बाँस की खपच्चियों से बनी थीं। बीच-बीच में हरी टहनियाँ लगाकर उन पर फूल खोंसे गए थे।
सरसों के पीले फूल खिल जाते हैं। गेहूँ की बालियाँ पक कर सुनहरी दिखने लगती हैं।
कोयल की कुहक, भौंरों की गूँज और ढोलक की थाप सुनाई देती है।
पंक्तियों के आखिर में मिलती-जुलती आवाज़ को तुक कहते हैं। जैसे आई और लाई।
शब्द का वह रूप जो गिनती बताता है। जैसे एक मूर्ति और कई मूर्तियाँ।
मित्र का समानार्थी दोस्त है। नदी का समानार्थी सरिता है।
बोलने वाले के नाम के बाद अल्पविराम लगाऊँगा। बात पूरी होने पर चिह्न बंद करना नहीं भूलूँगा।
All Class 5 Hindi chapters
All Hindi chapters · Every Class 5 subject · The whole NCERT library
Study this chapter properly, free
Everything above is on this page to read. In the Veda app the same chapter becomes spaced-repetition flashcards, timed tests that mark themselves, Veda Bites you can swipe, and games — with your progress tracked topic by topic.
Get Veda free