Class 5 Hindi Chapter 11: हमारे ये कलामंदिर
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निशा की अजंता यात्रा
दशहरे की छुट्टियों में निशा मौसी के साथ अजंता पहुँचती है। पहाड़ी काटकर बनी गुफाओं के भीतर उसे सजीव चित्र दिखाई देते हैं।
What you will be able to do
- मैं निशा की यात्रा का रास्ता क्रम से बता सकता/सकती हूँ।
- मैं अजंता की गुफाओं की बनावट अपने शब्दों में लिख सकता/सकती हूँ।
- मैं समझा सकता/सकती हूँ कि वहाँ के रंग आज तक क्यों टिके हैं।
Key points
मौसी ने निशा से छुट्टियों में ये दोनों जगहें दिखाने का वादा किया था।
रेलगाड़ी का आरक्षण छत्रपति संभाजीनगर तक था। वह महाराष्ट्र का एक नगर है।
संभाजीनगर से अजंता की दूरी करीब सौ किलोमीटर है। वहाँ तक वे बस से पहुँचीं।
पहाड़ी पर एक पंक्ति में उनतीस गुफाएँ हैं, जिनका मुँह पूर्व की ओर है।
गुफाओं की दीवारों पर बने चित्र दो हज़ार साल बाद भी फीके नहीं पड़े।
Full explanation
एक वादा और एक सपना
निशा के मन में एक सवाल बहुत दिनों से घूम रहा था। पुस्तकों में उसने अजंता और एलोरा के बारे में पढ़ा था। वे गुफाएँ देखने में कैसी होंगी? इस बार मौसी ने वादा किया कि छुट्टियों में वे उसे यह सब दिखाएँगी।
छुट्टियाँ आ गईं
दशहरे की छुट्टियाँ आईं और दोनों ने तारीख़ तय कर ली। रेल का आरक्षण छत्रपति संभाजीनगर तक कराया गया। यह नगर महाराष्ट्र राज्य में है। वहाँ पहुँचते-पहुँचते रात हो गई।
रात का ठहराव
इतनी रात में आगे जाना ठीक नहीं था। दोनों ने स्टेशन के विश्रामगृह में ही रात बिताई। अगले दिन वे बड़े सवेरे उठ गईं और बस पकड़कर अजंता की ओर चल दीं। वहाँ से दूरी लगभग सौ किलोमीटर है।
पहला ही दृश्य मन मोह गया
अजंता पहुँचते ही सामने का नज़ारा मन मोह लेने वाला था। पास ही एक पतली नदी बहती दिखी। उसमें बड़े-बड़े शिलाखंड पड़े थे। घाटी में तरह-तरह के रंगीन फूल खिले थे।
पंक्ति में खड़ी गुफाएँ
नदी के दक्षिण में एक पहाड़ी है। उस पर एक ही पंक्ति में उनतीस गुफाएँ बनी हैं। इन सबके मुँह पूरब की तरफ़ खुलते हैं। इसीलिए सुबह की धूप सीधे उन पर पड़ रही थी। गुफा के ठीक नीचे पानी भरा एक कुंड है।
भीतर की दीवारें बोलती हैं
निशा मौसी के साथ गुफाओं के भीतर गई। वहाँ दीवारों पर बहुत सुंदर चित्र बने थे। कई चित्र गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े थे। उनमें घर छोड़ना, उपदेश देना और भिक्षा माँगना दिखाया गया है।
सिर्फ़ बुद्ध नहीं
दीवारों पर और भी बहुत कुछ था। पेड़-पौधों के चित्र थे। पशु-पक्षियों के चित्र थे। स्त्रियों के चित्र भी बने थे। यह सब देखकर निशा के मुँह से बस एक शब्द निकला।
दो हज़ार साल पुराने रंग
उन चित्रों में भरे रंग आज भी चमकते हैं। मौसी ने बताया कि ये गुफाएँ दो हज़ार वर्ष पुरानी हैं। निशा हैरान रह गई। इतने साल बीतने पर भी रंग फीके क्यों नहीं पड़े?
रंग कहाँ से आते थे
मौसी ने इसका कारण बताया। उन दिनों रंग तैयार करने का तरीका बहुत अनोखा था। माना जाता है कि रंग पत्तों, जड़ी-बूटियों और फूलों से बनाए जाते थे। ये प्राकृतिक रंग बहुत टिकाऊ निकले।
चित्रों की बारीकी
निशा टकटकी लगाए देखती रही। चित्रों में हाथों की मुद्राएँ साफ़ थीं। आँखों के भाव और अंगों की लोच भी दिखती थी। चेहरों पर सुख-दुख और झुर्रियाँ तक बनी थीं। लगता था कि ये अभी बोल पड़ेंगे।
पहाड़ काटकर बनी जगह
कुछ गुफाएँ बहुत लंबी-चौड़ी थीं और कुछ छोटी। निशा को सबसे बड़ा अचरज एक और बात पर हुआ। ये गुफाएँ पहाड़ में से काट-काटकर गढ़ी गई थीं। भीतर की मूर्तियाँ भी पत्थर तराशकर बनी थीं।
Concepts and terms
पहाड़ के भीतर बना खोखला हिस्सा। अजंता की गुफाएँ अपने आप नहीं बनीं, उन्हें काटकर बनाया गया।
चट्टान का बड़ा टुकड़ा। अजंता के पास बहती नदी में ऐसे ही बड़े टुकड़े पड़े हैं।
पानी भरा हुआ छोटा तालाब जैसा गड्ढा। गुफाओं के ठीक नीचे ऐसा ही एक कुंड बना है।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
निशा की यात्रा पढ़कर कक्षा में प्रश्न उठा। अजंता की गुफ़ाएँ किसने और कैसे बनाईं। अध्यापिका ने बताया कि वे पहाड़ी काटकर बनाई गईं। बाहर से पत्थर लाकर उन्हें जोड़ा नहीं गया। बच्चों ने इसका अर्थ समझने के लिए एक बात सोची। मिट्टी के ढेले में से चम्मच से कमरा खोदना कैसा होगा। फिर उन्होंने सोचा कि पत्थर में यही काम कितना कठिन रहा होगा। सना ने पूछा कि चित्र इतने वर्षों बाद भी कैसे बचे। अध्यापिका ने बताया कि गुफ़ा के भीतर धूप और वर्षा नहीं पहुँचती।
Analysis:
गुफ़ा जोड़कर नहीं बनी, काटकर बनी है। जो चीज़ पहाड़ के भीतर है, वह मौसम से भी बची रहती है।
Activity:
अपने आस-पास कोई पुरानी इमारत देखो। पता करो कि वह किस चीज़ से बनी है और कितनी पुरानी है।
घर पर करके देखो
Title:
अपने घर का दिशा-नक्शा
What You Notice:
पूर्व वाली दीवार सुबह सबसे ज़्यादा चमकती है। अजंता की गुफाओं के साथ भी यही होता है।
Did you know
अजंता की गुफाएँ एक घुमावदार पहाड़ी पर बनी हैं। पास से वाघोरा नदी बहती है।
उन दिनों बिजली नहीं थी। सुबह की धूप ही गुफा के भीतर रोशनी का सहारा थी।
Memory tricks
यात्रा का रास्ता — रेल से नगर, नगर से बस, बस से गुफा। — रेलगाड़ी संभाजीनगर तक गई। वहाँ से बस ने अजंता पहुँचाया।
पूर्व की ओर मुँह — सूरज पूरब से, इसलिए उजाला गुफा में। — गुफाओं का मुँह पूर्व की ओर है, इसलिए सुबह की धूप सीधे भीतर पड़ती है।
Practice MCQs with answers (15)
- A दीवाली की
- B दशहरे की
- C गरमी की
- D सर्दी की
Show answer
Why:
छुट्टियाँ आते ही कार्यक्रम बन गया था।
- A अजंता की पहाड़ी
- B एलोरा का कैलाश मंदिर
- C छत्रपति संभाजीनगर
- D वाघोरा नदी का किनारा
Show answer
Why:
आगे का रास्ता बस से तय हुआ।
- A नाव से
- B रेलगाड़ी से
- C हवाई जहाज़ से
- D बस से
Show answer
Why:
सवेरे उठकर वे बस में बैठीं।
- A एक ही पंक्ति में
- B गोल घेरे में
- C चार अलग टोलियों में
- D बिखरी हुई जगहों पर
Show answer
Why:
पहाड़ी की ढलान पर वे कतार में हैं।
- A सुबह की धूप भीतर तक पहुँचती है
- B बारिश का पानी भीतर नहीं आता
- C नदी की आवाज़ सुनाई नहीं देती
- D गुफा का तापमान हमेशा गरम रहता
Show answer
Why:
उस ज़माने में यही रोशनी का सहारा थी।
- A शिलाखंड
- B कुंड
- C घाटी
- D पंक्ति
Show answer
Why:
यह चट्टान का बड़ा टुकड़ा होता है।
- A गुफा के भीतर लगे बड़े-बड़े दीयों से
- B पूर्व से आती सूरज की किरणों से
- C नदी के बहते पानी की चमक से
- D कुंड में लगे बड़े शीशों से
Show answer
Why:
गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा में है।
- A राजा भगीरथ का
- B गौतम बुद्ध का
- C आचार्य विष्णु शर्मा का
- D कवि कालिदास का
Show answer
Why:
घर छोड़ना और उपदेश देना भी दिखाया गया है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही उनके टिकने की वजह है। प्राकृतिक रंग सतह में भीतर तक बैठ जाते हैं।
- A दो लाख
- B दो सौ
- C बीस हज़ार
- D दो हज़ार
Show answer
Why:
मौसी ने निशा को यही बताया था।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: वहाँ कुछ जोड़ा नहीं गया; पहाड़ में से काटकर बनाया गया।
- A वे हर घंटे अपने आप ही रंग बदलते रहते हैं
- B वे छूने पर हिलने लगते हैं
- C उनमें भाव और झुर्रियाँ तक साफ़ दिखती हैं
- D वे रात में अपने आप चमकते हैं
Show answer
Why:
हाथों की मुद्रा और आँखों के भाव भी बने हैं।
- A गुफा के भीतर
- B स्टेशन के विश्रामगृह में
- C बस अड्डे की बेंच पर
- D नदी किनारे के तंबू में
Show answer
Why:
इतनी रात में आगे जाना ठीक नहीं था।
- A घाटी
- B शिलाखंड
- C कुंड
- D पंक्ति
Show answer
Why:
उसमें पानी भरा रहता है।
- A यहाँ ऊँचे पहाड़ों पर कभी कोई नहीं जाता
- B यहाँ के रंग हमेशा जल्दी उड़ जाते हैं
- C यहाँ की गुफाएँ केवल रहने के लिए बनीं
- D यहाँ कला बहुत पुरानी और उन्नत रही है
Show answer
Why:
दो हज़ार साल पुरानी कारीगरी आज भी हैरान करती है।
Important short questions (5)
उसने किताबों में इन गुफाओं के बारे में पढ़ रखा था। तभी से उन्हें देखने का मन बना हुआ था।
रेलगाड़ी से वे संभाजीनगर पहुँचीं। अगली सुबह वहाँ से बस लेकर अजंता गईं।
एक ओर छोटी नदी बह रही थी और उसमें बड़े शिलाखंड पड़े थे। घाटी में रंगीन फूल खिले थे।
सुबह की धूप सीधे भीतर पड़े, इसलिए। उस ज़माने में यही रोशनी का सहारा थी।
वे रंग पत्तों, जड़ी-बूटियों और फूलों से बनाए जाते थे। ये प्राकृतिक रंग बहुत टिकाऊ निकले।
Long answer questions (2)
दशहरे की छुट्टियों में निशा मौसी के साथ यात्रा पर निकली। रेलगाड़ी उन्हें संभाजीनगर तक ले गई। रात स्टेशन के विश्रामगृह में बीती। सवेरे बस से वे अजंता पहुँचीं। वहाँ नदी, शिलाखंड और रंगीन फूल दिखे। पहाड़ी पर एक पंक्ति में उनतीस गुफाएँ थीं। भीतर दीवारों पर सजीव चित्र बने थे। निशा उन्हें देखती ही रह गई।
मुझे यह बात सबसे अनोखी लगी कि ये गुफाएँ पहाड़ काटकर बनाई गईं। उस ज़माने में न मशीनें थीं और न बिजली। फिर भी इतनी बड़ी जगह भीतर से गढ़ ली गई। भीतर की मूर्तियाँ भी उसी पत्थर से तराशी गईं। इतनी मेहनत और इतनी बारीकी साथ-साथ देखना हैरान कर देता है। इसी से पुराने कारीगरों की कुशलता समझ आती है।
Flashcards (12)
Play this topic
- यात्रा क्रम से लगाओ
- शब्द और अर्थ
- अजंता में क्या, क्या नहीं
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
एलोरा और कैलाश मंदिर
अजंता के बाद निशा एलोरा पहुँचती है। वहाँ पहाड़ काटकर बने लगभग तीस मंदिर हैं और कैलाश मंदिर एक ही चट्टान से गढ़ा गया है।
What you will be able to do
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि एलोरा में क्या-क्या बना हुआ है।
- मैं कैलाश मंदिर की खास बात अपने शब्दों में लिख सकता/सकती हूँ।
- मैं अजंता और एलोरा का अंतर समझा सकता/सकती हूँ।
Key points
अजंता देखकर दोनों संभाजीनगर लौटीं और अगले दिन बस से एलोरा गईं।
संभाजीनगर से एलोरा की दूरी करीब चालीस किलोमीटर है।
वहाँ पहाड़ काटकर लगभग तीस मंदिर बनाए गए हैं।
वहाँ की मूर्तियाँ बौद्ध, हिंदू और जैन, तीनों धर्मों से जुड़ी हैं।
कैलाश मंदिर एक ही चट्टान से निकला है और उसे ऊपरी हिस्से से गढ़ा गया।
Full explanation
वापसी और अगला पड़ाव
अजंता की गुफाएँ देखकर निशा का मन भरा नहीं था। दोनों संभाजीनगर लौट आईं। अगले दिन वे फिर बस में बैठीं। इस बार रास्ता एलोरा की ओर था।
कितनी दूर है एलोरा
संभाजीनगर से एलोरा की दूरी करीब चालीस किलोमीटर रह जाती है। यह रास्ता अजंता से छोटा है। निशा रास्ते भर सोचती रही कि अब क्या नया दिखेगा।
पहाड़ों में बने मंदिर
एलोरा पहुँचकर निशा ने जो देखा, वह चौंकाने वाला था। वहाँ लगभग तीस मंदिर पहाड़ के भीतर से ही गढ़ डाले गए हैं। ये किसी मैदान पर ईंट जोड़कर नहीं उठाए गए।
तीन धर्मों का मेल
मंदिरों के भीतर बहुत सुंदर मूर्तियाँ हैं। ये मूर्तियाँ केवल बौद्ध धर्म से जुड़ी नहीं हैं। इनमें से कुछ हिंदू धर्म से जुड़ी हैं और कुछ जैन धर्म से। एक ही जगह पर तीनों का मेल दिखता है।
कारीगरी ही कारीगरी
विशाल शिलाओं को छेनी से तराशा गया था। उन्हीं में से इतनी बड़ी इमारतें और मूर्तियाँ निकल आईं। निशा यह सब देखकर बार-बार चौंक रही थी।
मौसी ने एक मंदिर दिखाया
तभी मौसी ने एक खास मंदिर की ओर इशारा किया। यह कैलाश मंदिर था। उन्होंने बताया कि यह बहुत प्रसिद्ध है और इसकी बनावट सबसे अनोखी है।
ऊपर से नीचे की ओर
आम इमारत नींव से शुरू होकर ऊपर उठती है। कैलाश मंदिर इसके उलट बना। यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी में, ऊपरी हिस्से से शुरू करके नीचे की ओर गढ़ा गया।
एक ही चट्टान का करिश्मा
सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी इमारत एक ही चट्टान से बनी है। इसके हिस्से अलग-अलग जोड़े नहीं गए। इतनी बड़ी और सुंदर रचना एक ही पत्थर से निकली, यह सोचकर हैरानी होती है।
नक्काशी की बारीकी
निशा ने पास जाकर एक मूर्ति को ध्यान से देखा। उसके गहने और कपड़ों की सिलवटें तक पत्थर पर उभरी हुई थीं। हाथ की उँगलियाँ अलग-अलग साफ़ दिखती थीं। इतनी बारीकी छेनी से गढ़ना आसान काम नहीं रहा होगा।
निशा का गर्व
निशा के मुँह से निकला कि यह अद्भुत है। उसने कहा कि यह गर्व की बात है। हज़ारों वर्ष पहले भी हमारे देश में कला इतनी आगे बढ़ चुकी थी।
दोनों जगहों का फ़र्क
अब निशा दोनों जगहों की तुलना कर पा रही थी। अजंता में दीवारों के चित्र सबसे खास हैं। एलोरा में पत्थर से गढ़ी मूर्तियाँ और इमारतें सबसे खास हैं। दोनों की कला अलग-अलग है।
लौटकर भी मन वहीं
यात्रा पूरी करके दोनों घर लौट आईं। पर निशा का मन अब भी उन बेजोड़ कलाकृतियों में अटका था। उसने तय किया कि वह इनके बारे में और पढ़ेगी।
Concepts and terms
पत्थर को छेनी से काट-छाँटकर मनचाहा रूप देना। एलोरा की मूर्तियाँ इसी तरह गढ़ी गईं।
कलाकार के हाथों बनी कोई रचना। चित्र, मूर्ति और नक्काशी सब कलाकृति कहलाती हैं।
पुरखों से मिली अनमोल चीज़, जिसे सँभालकर आगे पहुँचाना होता है। अजंता और एलोरा ऐसी ही धरोहर हैं।
सावधान!
सच या भ्रम?
असली दुनिया में
Scenario:
कक्षा पाँच के बच्चे अपने शहर के पुराने किले की सैर पर गए। गाइड ने बताया कि किले की दीवारें बलुआ पत्थर से बनी हैं और उन पर बेल-बूटे तराशे गए हैं। एक बच्चे ने देखा कि किसी ने दीवार पर अपना नाम खुरच दिया है। गाइड ने बताया कि खुरचने से पत्थर की ऊपरी परत उखड़ जाती है। उसके बाद बारिश का पानी भीतर जाकर नक्काशी को और नुकसान पहुँचाता है। बच्चों ने लौटकर कक्षा में एक सूची बनाई। उसमें उन्होंने लिखा कि दीवार पर कुछ न लिखें, मूर्तियों को न छुएँ और कचरा साथ लेकर लौटें। शिक्षिका ने वह सूची कक्षा के बाहर लगा दी।
Analysis:
यह दिखाता है कि पत्थर की कला कितनी नाज़ुक है। थोड़ी-सी लापरवाही सैकड़ों साल की मेहनत मिटा देती है।
Activity:
अपने आस-पास की किसी पुरानी इमारत के लिए तीन सावधानियों का एक चार्ट बनाओ।
ऊपर से गढ़ो
Title:
साबुन की एक ही टिकिया से मंदिर
Safety:
चम्मच का किनारा शरीर से दूर रखकर खुरचो। साबुन आँख में न जाए, हाथ बाद में धो लो।
What You Notice:
कुछ जोड़ा नहीं गया, सिर्फ़ हटाया गया, और आकार एक ही टुकड़े का रहा। एलोरा का कैलाश मंदिर इसी तरह बना — एक ही चट्टान से, ऊपरी हिस्से से गढ़ते हुए।
Did you know
पत्थर तराशने में गलती सुधारी नहीं जा सकती। जो हिस्सा कट गया, उसे दोबारा जोड़ा नहीं जा सकता।
एलोरा में तीन धर्मों की मूर्तियाँ एक ही जगह मिलती हैं। यह मेल अपने आप में खास है।
Memory tricks
दोनों जगहों की दूरी — अजंता सौ, एलोरा चालीस। — संभाजीनगर से अजंता लगभग सौ किलोमीटर है और एलोरा लगभग चालीस।
कैलाश मंदिर की खूबी — ऊपर से नीचे, एक ही पत्थर। — यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी में, ऊपरी हिस्से से शुरू करके नीचे की ओर गढ़ा गया।
Practice MCQs with answers (15)
- A सौ
- B चार
- C चालीस
- D चार सौ
Show answer
Why:
अजंता की दूरी इससे ज़्यादा है।
- A तीन
- B तेरह
- C तीस
- D तीन सौ
Show answer
Why:
ये सब पहाड़ काटकर बने हैं।
- A वे ईंटें जोड़कर बनाए गए हैं
- B वे लकड़ी से बनाए गए हैं
- C वे मिट्टी से बनाए गए हैं
- D वे पहाड़ काटकर बनाए गए हैं
Show answer
Why:
उनमें बनी मूर्तियाँ भी तराशी गई हैं।
- A केवल बौद्ध धर्म के लोग
- B केवल हिंदू
- C केवल जैन
- D बौद्ध, हिंदू और जैन
Show answer
Why:
एक ही जगह तीनों का मेल मिलता है।
- A वह एक ही चट्टान से बना है
- B वह लकड़ी के खंभों पर टिका है
- C वह नदी के बीच में बना है
- D वह हर साल रंगा जाता है
Show answer
Why:
हिस्से अलग-अलग जोड़े नहीं गए।
- A पहाड़ की नीचे वाली तलहटी से
- B नदी के किनारे से
- C पहाड़ के ऊपरी हिस्से से
- D गुफा के भीतर से
Show answer
Why:
आम इमारतें नींव से ऊपर उठती हैं।
- A पत्थर पर हाथी का ढाँचा खींचोगे
- B पत्थर के टुकड़े जोड़कर चिपकाओगे
- C पत्थर पर रंग भर दोगे
- D पत्थर को पानी में डाल दोगे
Show answer
Why:
तराशने का काम ढाँचे से शुरू होता है।
- A ढूँढ़कर ले आना
- B काट-छाँटकर रूप देना
- C रंग से भर देना
- D जोड़कर चिपकाना
Show answer
Why:
'तलाशना' अलग शब्द है, उसका अर्थ ढूँढ़ना है।
- A एलोरा में मूर्तियाँ खास हैं, अजंता में चित्र
- B एलोरा में चित्र खास हैं, अजंता में मूर्तियाँ
- C दोनों ही जगह केवल चित्र ही बने हुए हैं
- D दोनों ही जगह केवल मूर्तियाँ ही बनी हुई हैं
Show answer
Why:
अजंता दीवारों के चित्रों के लिए जाना जाता है और एलोरा पत्थर में गढ़ी मूर्तियों के लिए।
- A अपनी लंबी यात्रा पर
- B देश की पुरानी कला पर
- C बस के तेज़ चलने पर
- D मौसी के बड़े कैमरे पर
Show answer
Why:
उसने इसे गर्व की बात कहा था।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही सावधानी का कारण है। मिट्टी जोड़ी जा सकती है; पत्थर नहीं।
- A पकी हुई ईंटों से
- B विशाल शिलाओं से
- C लोहे की छड़ों से
- D बाँस की फट्टियों से
Show answer
Why:
शिला यानी बड़ा पत्थर।
- A वहाँ हर रोज़ बड़ा मेला लगता है
- B वहाँ बहुत सारे लोग रहते हैं
- C वहाँ रंग ही बेचे जाते हैं
- D वहाँ कला का खज़ाना भरा है
Show answer
Why:
चित्र, मूर्तियाँ और नक्काशी सब कला ही हैं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: कैलाश मंदिर एलोरा में है, अजंता में नहीं।
- A अगली रेल यात्रा में
- B उन बेजोड़ कलाकृतियों में
- C बस के लंबे रास्ते में
- D स्टेशन के विश्रामगृह में
Show answer
Why:
उसने उनके बारे में और पढ़ने की ठानी।
Important short questions (5)
उसने देखा कि पहाड़ काटकर लगभग तीस मंदिर बनाए गए हैं। उनमें बहुत सुंदर मूर्तियाँ थीं।
वहाँ बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी मूर्तियाँ हैं। तीनों एक ही जगह पर मिलती हैं।
उसे एक ऊँचे पहाड़ से ऊपर की ओर से तराशा गया। पूरी इमारत एक ही चट्टान से निकली है।
तराशना यानी पत्थर को काट-छाँटकर रूप देना। तलाशना यानी किसी चीज़ को ढूँढ़ना।
अजंता में दीवारों पर बने चित्र सबसे खास हैं। एलोरा में तराशी हुई मूर्तियाँ और इमारतें खास हैं।
Long answer questions (2)
कैलाश मंदिर एलोरा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। इसे एक ऊँचे पहाड़ से गढ़ा गया है। आम इमारत नींव से ऊपर उठती है, पर यह उलटा बना। पहले ऊपर का हिस्सा तराशा गया और फिर नीचे की ओर काम बढ़ा। सबसे बड़ी बात यह है कि पूरी इमारत एक ही चट्टान से निकली है। इसके हिस्से अलग-अलग जोड़े नहीं गए।
ये इमारतें हमारे पुरखों की मेहनत से बनी हैं। इनमें सैकड़ों साल पुरानी कला सुरक्षित है। एक बार टूट जाने पर इन्हें दोबारा नहीं बनाया जा सकता। दीवार पर नाम लिखना या मूर्ति को खुरचना इन्हें चुपचाप नुकसान पहुँचाता है। इनसे हमारे देश की शोभा भी बढ़ती है। इसलिए घूमते समय हमें सावधानी रखनी चाहिए और दूसरों को भी रोकना चाहिए।
Flashcards (12)
Play this topic
- अजंता या एलोरा
- शब्द और अर्थ
- मूर्ति कैसे बनती है
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
रंगों का संसार और शब्दों का मेल
रसोई और बगीचे की चीज़ों से रंग बनते हैं। साथ ही हम दो शब्दों से बने नए शब्द और कुछ मुहावरे भी पहचानेंगे।
What you will be able to do
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि कौन-सी चीज़ से कौन-सा रंग मिलता है।
- मैं दो शब्दों से बने नए शब्द पहचान सकता/सकती हूँ।
- मैं तीन मुहावरों का अर्थ बताकर उन्हें वाक्य में जोड़ सकता/सकती हूँ।
Key points
अजंता के रंग पत्तों, जड़ी-बूटियों और फूलों से बनाए जाते थे।
हरा रंग पालक या पुदीने से और पीला रंग हल्दी से मिलता है।
लाल रंग चुकंदर से और भूरा रंग चाय की पत्ती से बनाया जा सकता है।
दो शब्द जुड़कर नया शब्द बनाते हैं, जैसे विश्राम और गृह से विश्रामगृह।
मुहावरे का अर्थ शब्दों के सीधे अर्थ से अलग होता है।
Full explanation
एक सवाल जो रह गया
अजंता से लौटकर निशा के मन में एक बात अटकी रही। मौसी ने बताया था कि वहाँ के रंग पत्तों और फूलों से बनते थे। निशा सोचने लगी कि क्या ऐसा रंग वह भी बना सकती है।
रसोई में छिपे रंग
उसने रसोई में झाँका और हैरान रह गई। वहाँ कई चीज़ें ऐसी थीं जिनका अपना गहरा रंग था। हल्दी पीली थी, चुकंदर गहरा लाल था और पालक चमकीला हरा।
हरा और पीला
पालक, पुदीना या हरा धनिया हरे रंग का स्रोत हैं। इन्हें पीसकर छान लेने पर गाढ़ा हरा रंग मिल जाता है। पीले रंग के लिए हल्दी सबसे आसान चीज़ है। थोड़े पानी में घोलते ही वह गहरा पीला दे देती है।
लाल, नीला और भूरा
चुकंदर को उबालकर पीसने पर गहरा लाल रंग निकलता है। कपड़ों में डाला जाने वाला नील पानी में घुलकर नीला रंग देता है। चाय की पत्ती या कॉफ़ी उबालने पर भूरा रंग तैयार हो जाता है।
ये रंग टिकते क्यों हैं
प्राकृतिक रंगों की एक बड़ी खूबी है। वे धीरे-धीरे सूखते हैं और सतह में भीतर तक बैठ जाते हैं। अजंता के चित्र इसी का सबूत हैं। दो हज़ार साल बीतने पर भी वे रंग नहीं उड़े।
अब शब्दों की बात
यात्रा में निशा ने एक शब्द बार-बार सुना था। स्टेशन पर वे विश्रामगृह में रुकी थीं। मौसी ने बताया कि यह शब्द दो टुकड़ों से बना है।
दो शब्द, एक नया शब्द
विश्राम यानी आराम और गृह यानी घर। दोनों जुड़कर बनता है विश्रामगृह, यानी आराम करने की जगह। नए शब्द का अर्थ दोनों टुकड़ों से मिलकर निकल आता है।
और भी जुड़े हुए शब्द
ऐसे शब्द हमारे आस-पास बहुत हैं। शिला और खंड से शिलाखंड बना है, यानी चट्टान का टुकड़ा। हिम और आलय से हिमालय बना है। पुस्तक और आलय से पुस्तकालय बना है।
मुहावरे क्या होते हैं
कुछ वाक्यांश ऐसे होते हैं जिनका सीधा अर्थ काम नहीं करता। इन्हें मुहावरा कहते हैं। जैसे किसी को देखकर दंग रह जाना, यानी हैरान रह जाना। वहाँ कोई सचमुच रुकता नहीं।
यात्रा के काम आने वाले मुहावरे
निशा की यात्रा में कई मुहावरे फ़िट बैठते हैं। चित्रों ने उसका मन मोह लिया। मूर्तियों को देखकर वह दंग रह गई। वह दीवारों से आँखें नहीं हटा पाई।
हमारी साझी धरोहर
ये गुफाएँ और मंदिर हमारे देश की धरोहर हैं। इन्हें छूने, खुरचने या इन पर कुछ लिखने से नुकसान पहुँचता है। घूमते समय सावधानी रखना हम सबका काम है।
Concepts and terms
पेड़-पौधों या खाने की चीज़ों से बनाया गया रंग। इसमें कारखाने का कोई रसायन नहीं मिलाया जाता।
दो अलग शब्द जुड़कर एक नया शब्द बना देते हैं। नए शब्द का अर्थ दोनों टुकड़ों से मिलकर निकलता है।
ऐसा जमा हुआ वाक्यांश, जिसका अर्थ उसके शब्दों के सीधे अर्थ से अलग होता है।
सावधान!
सच या भ्रम?
Case Study
Scenario:
कक्षा ने रसोई और बगीचे की चीज़ों से रंग बनाए। हल्दी से पीला, चुकंदर से गुलाबी और पालक से हरा रंग निकला। हर रंग को कागज़ पर लगाकर धूप में रखा गया। तीन दिन बाद बच्चों ने फिर से देखा। हल्दी का पीला कुछ हल्का पड़ गया था। चुकंदर का गुलाबी सबसे अधिक फीका हुआ। पालक का हरा लगभग वैसा ही रहा। सना ने पूछा कि अजंता के रंग क्यों नहीं उड़े। अध्यापिका ने याद दिलाया कि वे रंग गुफ़ा के भीतर थे, धूप से दूर।
Analysis:
रंग धूप में बैठ नहीं पाते। यही कारण है कि गुफ़ा के भीतर के चित्र आज तक बचे हुए हैं।
Activity:
रसोई की तीन चीज़ों से रंग बनाओ। कागज़ पर लगाकर तीन दिन धूप में रखो और बदलाव लिखो।
घर पर करके देखो
Title:
कौन-सा रंग धूप में ज़्यादा टिकता है
Safety:
चुकंदर काटने या कुचलने का काम घर के किसी बड़े से ही कराओ।
What You Notice:
धूप वाला हिस्सा कुछ हल्का पड़ जाएगा। दोनों रंगों में फीका पड़ने की रफ़्तार अलग दिखेगी।
Did you know
हल्दी का रंग कपड़े पर लग जाए तो जल्दी नहीं छूटता। इसी गुण के कारण वह अच्छा रंग देती है।
पुराने समय में कागज़ और कपड़े दोनों प्राकृतिक रंगों से रँगे जाते थे।
Memory tricks
रसोई के रंग — हल्दी पीली, चुकंदर लाल, पालक हरा। — तीनों चीज़ें रसोई में मिल जाती हैं और तीनों से अलग-अलग रंग बनते हैं।
शब्द जोड़ने का नियम — टुकड़ा जोड़ो, अर्थ जोड़ो। — विश्राम यानी आराम और गृह यानी घर। दोनों जुड़कर आराम करने की जगह बन जाते हैं।
Practice MCQs with answers (15)
- A पीला
- B हरा
- C नीला
- D भूरा
Show answer
Why:
थोड़े पानी में घोलते ही रंग मिल जाता है।
- A हल्दी
- B पालक
- C चुकंदर
- D चाय की पत्ती
Show answer
Why:
उसका अपना रंग ही गहरा लाल होता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II सही नहीं है: चुकंदर से गहरा लाल रंग मिलता है; भूरा चाय की पत्ती से बनता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण ही अजंता के रंगों का राज़ है। ऊपर चढ़ा रंग उड़ जाता है; भीतर बैठा नहीं।
- A विश्व और राम
- B विश्राम और गृह
- C विशाल और गृह
- D विश्राम और ग्रह
Show answer
Why:
अर्थ हुआ आराम करने की जगह।
- A पहाड़ की चोटी
- B पानी का कुंड
- C गुफा का दरवाज़ा
- D चट्टान का टुकड़ा
Show answer
Why:
शिला यानी बड़ा पत्थर और खंड यानी टुकड़ा।
- A हिम और लय
- B हिमा और लय
- C हि और मालय
- D हिम और आलय
Show answer
Why:
हिम यानी बर्फ़ और आलय यानी घर।
- A उसमें हमेशा पाँच शब्द होते हैं
- B उसका अर्थ सीधे शब्दों से अलग होता है
- C उसे केवल कविता में लिखा जाता है
- D उसका अर्थ हर बार बदलता रहता है
Show answer
Why:
इसे पूरा ही समझना पड़ता है।
- A आँखें न हटा पाना
- B हाथ बँटाना
- C कान खड़े होना
- D पैर भारी होना
Show answer
Why:
इसका अर्थ है लगातार देखते रहना।
- A नाराज़ हो जाना
- B थक जाना
- C हैरान रह जाना
- D डर जाना
Show answer
Why:
एलोरा की मूर्तियाँ देखकर यही हुआ था।
- A हल्दी को पानी में घोलकर रखोगे
- B चाय की पत्ती पानी में उबालोगे
- C पालक पीसकर छानोगे
- D नील पानी में मिलाओगे
Show answer
Why:
कॉफ़ी से भी यही रंग मिलता है।
- A उन्हें हर बरस दोबारा रँगा जाता है
- B उनमें आज तक कोई बदलाव नहीं आया
- C वे हर मौसम में रंग बदलते हैं
- D वे केवल रात में दिखाई देते हैं
Show answer
Why:
इस मुहावरे का अर्थ ही यही है।
- A बहुत दूर खड़े होकर तस्वीर खींचते रहने से
- B रास्ते पर चलने से
- C दीवारों को खुरचने और उन पर लिखने से
- D गाइड की बात सुनने से
Show answer
Why:
ऊपरी परत उखड़ जाए तो नक्काशी बिगड़ती है।
- A आलय
- B लय
- C काल
- D पुस्त
Show answer
Why:
आलय का अर्थ घर या स्थान होता है।
- A वे धूप पड़ते ही तुरंत उड़कर गायब हो जाते हैं
- B वे केवल कारखाने में ही बनते हैं
- C वे कभी कपड़े पर नहीं चढ़ते
- D वे पेड़-पौधों और खाने की चीज़ों से बनते हैं
Show answer
Why:
अजंता के रंग इसी तरह बने थे।
Important short questions (5)
पालक, पुदीना या हरा धनिया काम आते हैं। इन्हें पीसकर छान लेने पर गाढ़ा हरा रंग मिलता है।
वे धीरे-धीरे सूखते हैं और सतह में भीतर तक बैठ जाते हैं। इसी से वे जल्दी नहीं उड़ते।
विश्राम का अर्थ आराम है और गृह का अर्थ घर। दोनों मिलकर आराम करने की जगह बनाते हैं।
उसका अर्थ शब्दों के सीधे अर्थ से अलग होता है। पूरे वाक्यांश का एक ही जमा हुआ अर्थ होता है।
इससे पत्थर की ऊपरी परत बिगड़ जाती है। एक बार खराब हुई नक्काशी दोबारा नहीं बनाई जा सकती।
Long answer questions (2)
पीले रंग के लिए मैं थोड़ी हल्दी लूँगा और उसे पानी में घोल लूँगा। हरे रंग के लिए पालक की पत्तियाँ पीसकर कपड़े से छान लूँगा। लाल रंग के लिए चुकंदर के टुकड़े उबालूँगा और ठंडा होने पर पीस लूँगा। तीनों रंगों को अलग कटोरियों में रखूँगा। उबालने का काम घर के किसी बड़े की मदद से ही करूँगा।
गुफा के भीतर घुसते ही दीवारों के चित्रों ने मेरा मन मोह लिया। इतने पुराने रंग देखकर मैं दंग रह गया। मूर्तियों की बारीकी ऐसी थी कि मैं आँखें नहीं हटा पाया। चेहरों के भाव दिल को छू गए। बाहर निकलकर भी वह दृश्य मेरे मन में बसा रहा। ऐसी जगह हर बच्चे को एक बार देखनी चाहिए।
Flashcards (12)
Play this topic
- चीज़ और उसका रंग
- जुड़े हुए शब्द
- रंग या शब्द
- सच या भ्रम?
- झटपट सवाल
Class 5 Hindi Chapter 11 — frequently asked questions
उसने किताबों में इन गुफाओं के बारे में पढ़ रखा था। तभी से उन्हें देखने का मन बना हुआ था।
रेलगाड़ी से वे संभाजीनगर पहुँचीं। अगली सुबह वहाँ से बस लेकर अजंता गईं।
एक ओर छोटी नदी बह रही थी और उसमें बड़े शिलाखंड पड़े थे। घाटी में रंगीन फूल खिले थे।
उसने देखा कि पहाड़ काटकर लगभग तीस मंदिर बनाए गए हैं। उनमें बहुत सुंदर मूर्तियाँ थीं।
वहाँ बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी मूर्तियाँ हैं। तीनों एक ही जगह पर मिलती हैं।
उसे एक ऊँचे पहाड़ से ऊपर की ओर से तराशा गया। पूरी इमारत एक ही चट्टान से निकली है।
पालक, पुदीना या हरा धनिया काम आते हैं। इन्हें पीसकर छान लेने पर गाढ़ा हरा रंग मिलता है।
वे धीरे-धीरे सूखते हैं और सतह में भीतर तक बैठ जाते हैं। इसी से वे जल्दी नहीं उड़ते।
विश्राम का अर्थ आराम है और गृह का अर्थ घर। दोनों मिलकर आराम करने की जगह बनाते हैं।
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