Class 7 Hindi Chapter 5: नहीं होना बीमार
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अस्पताल की चाह और एक योजना
कहानी का लड़का पहली बार अस्पताल जाता है और वहाँ का शांत माहौल तथा बीमार काका की देखभाल देखकर मुग्ध हो जाता है। उसे लगता है कि बीमार होना तो ठाठ की बात है। कुछ दिन बाद स्कूल से बचने के लिए वह स्वयं बीमार पड़ने की योजना बना लेता है।
What you will be able to do
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि लड़का अस्पताल क्यों और किसके साथ गया।
- मैं अस्पताल के माहौल का वर्णन अपने शब्दों में कर सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि लड़के के मन में कौन-सी इच्छा जागी।
- मैं उसकी योजना के पीछे के दो कारण लिख सकता/सकती हूँ।
- मैं कहानी की आत्मकथात्मक शैली को पहचान सकता/सकती हूँ।
Key points
कहानी लड़का स्वयं सुना रहा है, इसलिए हर जगह मैं शब्द आता है।
नानीजी उसे साथ लेकर पड़ोसी सुधाकर काका को देखने अस्पताल जाती हैं।
अस्पताल जाने का यह लड़के का पहला अवसर था।
वार्ड में एक जैसे पलंग, सफ़ेद चादरें और लाल कंबल थे।
खिड़कियों पर हरे परदे थे और फ़र्श चमक रहा था।
बाहर न यातायात का शोर था, न धूल और न मच्छर-मक्खी।
नानीजी साबूदाने की खीर बनाकर ले गई थीं और काका को चम्मच से खिलाई।
लड़के को लगा कि बीमारों के तो ठाठ हैं।
कुछ दिन बाद होमवर्क न करने के कारण उसने बीमार पड़ने का बहाना सोचा।
Full explanation
कहानी कौन सुना रहा है
पहली पंक्ति पढ़ते ही एक बात साफ़ हो जाती है। कहानी कोई बाहर से नहीं बता रहा। लड़का स्वयं अपनी बात कह रहा है, इसलिए हर जगह मैं शब्द आता है। इसी को आत्मकथात्मक शैली कहते हैं, और इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि हमें उसके मन की बातें भी सुनाई देती रहती हैं।
अस्पताल तक की वजह
एक दिन नानीजी उसे अपने साथ अस्पताल ले जाती हैं, जहाँ पड़ोस के सुधाकर काका भर्ती हैं। लड़का बताता है कि अस्पताल जाने का यह उसका पहला अवसर था। यह छोटी-सी बात आगे की पूरी कहानी समझने के काम आती है।
वार्ड का पहला दृश्य
एक बड़े वार्ड में एक जैसे पलंग कतार में लगे थे। सब पर एक जैसी सफ़ेद चादर और लाल कंबल पड़ा था। दीवारें सफ़ेद थीं, छत ऊँची थी, खिड़कियों पर हरे परदे झूल रहे थे और फ़र्श चमक रहा था। एक पलंग पर काका लेटे थे, जो पास पहुँचने पर ही दिखाई दिए।
नानीजी का बर्ताव
हमें देखकर काका जैसे ख़ुश हो गए। नानीजी ने उनके माथे पर हाथ रखा, सिरहाने खड़ी हो गईं और हालचाल पूछने लगीं। ये छोटी-छोटी बातें बताती हैं कि पड़ोसी का रिश्ता वहाँ कितना अपनापन लिए हुए था।
बाहर का शांत संसार
लड़के को वहाँ का माहौल बहुत भाता है। बड़ी खिड़कियों के पास हरे पेड़ झूम रहे थे। न यातायात का शोर था, न धूल और न मच्छर-मक्खी। केवल लोगों के धीरे बोलने की हल्की गुनगुन सुनाई दे रही थी, बाक़ी पूरी शांति थी।
नर्स और दवा
तभी सफ़ेद कपड़ों में एक नर्स आती है। वह नानीजी को देखकर सिर हिलाकर अभिवादन करती है और काका को दवा खिलाती है। ध्यान दीजिए कि दवा वाली बात कहानी में आ तो जाती है, पर लड़के का ध्यान उस पर टिकता नहीं।
साबूदाने की खीर
काका के लिए नानीजी घर से साबूदाने की खीर बनाकर लाई थीं। उन्होंने नर्स से पूछकर अनुमति ली और फिर चम्मच से धीरे-धीरे काका को खीर खिलाई। काका ने उसे बहुत स्वाद लेकर खाया। यही दृश्य लड़के के मन में सबसे गहरा उतरता है।
लड़के का निष्कर्ष
वह सोचता है कि बीमारों के भी क्या ठाठ हैं। साफ़-सुथरे बिस्तर पर आराम से लेटे रहो और खीर खाते रहो। वह यहाँ तक सोच लेता है कि काश वह काका की जगह होता, और फिर पूछता है कि वह कब बीमार पड़ेगा।
नज़र में क्या छूट गया
यहीं कहानी का असली बीज छिपा है। लड़के ने देखभाल देखी, पर बीमारी नहीं देखी। उसने यह नहीं सोचा कि काका को दवा लेनी पड़ रही है, वे उठ-बैठ नहीं सकते और घर से दूर पड़े हैं। एक ही दृश्य के दो पहलू थे, पर उसे केवल एक दिखा।
कुछ दिन बाद
कुछ रोज़ बाद एक दिन उसका स्कूल जाने का मन नहीं हुआ। कारण भी वह स्वयं बता देता है, कि उसने होमवर्क नहीं किया था। स्कूल जाता तो सज़ा मिलना तय था। यहाँ कहानी हँसी की ओर मुड़ने लगती है।
दिन का चुनाव
वह सोचता है कि बीमार पड़ने के लिए आज का दिन पूरी तरह ठीक रहेगा। यह वाक्य पढ़ते ही हँसी आती है, क्योंकि बीमारी कोई तय करने वाली चीज़ नहीं होती। लेखक लड़के की इसी सोच से हल्का-सा व्यंग्य खड़ा कर देते हैं।
पहला क़दम
अगली सुबह वह रजाई से निकलता ही नहीं। नानीजी उठाने आती हैं तो वह कहता है कि आज वह बीमार है। पूछे जाने पर वह एक साथ तीन शिकायतें गिना देता है, सिर में दर्द, पेट में दर्द और बुख़ार।
तीन शिकायतें क्यों
एक साथ तीन बातें गिनाना ही उसकी पोल खोल देता है। सचमुच बीमार बच्चा प्राय: एक ही तकलीफ़ बताता है। यहाँ वह जितना अधिक कहता है, उतना ही कम विश्वसनीय लगता है, और पढ़ने वाला यह ताड़ जाता है।
नानीजी का जाना
नानीजी कुछ कहे बिना चली जाती हैं। यह चुप्पी दिलचस्प है, क्योंकि उसमें न डाँट है और न चिंता। कहानी आगे बताएगी कि घर के बड़े इस खेल को समझ रहे थे या नहीं, पर इस क्षण लड़के को लगता है कि उसकी चाल चल गई।
अकेला घर
रजाई में पड़े-पड़े वह घर की आवाज़ों से अनुमान लगाता रहता है। छोटे मामा नहाकर निकले, कुसुम मौसी बस पकड़ने भागीं, मुन्नू जूता ढूँढ़ रहा है। फिर सब चले जाते हैं और घर में वह अकेला रह जाता है। यहीं से उसकी असली परीक्षा शुरू होने वाली है।
घर की आवाज़ें ही घड़ी हैं
ध्यान दीजिए कि लड़के के पास घड़ी नहीं है। वह आवाज़ों से समय पहचानता है। किसी का नहाना, किसी का भागना, किसी का जूता ढूँढ़ना। इन्हीं से उसे पता चलता रहता है कि घर में क्या चल रहा है। यह ब्योरा बाद में बहुत काम आता है।
अकेलापन शुरू होता है
सब के जाते ही घर खाली हो जाता है। जिस शांति को वह अस्पताल में सराह रहा था, वही अब उसके अपने घर में है। पर यहाँ वह अच्छी नहीं लगती। यही मोड़ आगे की पूरी कहानी खोलता है।
Concepts and terms
जब लेखक कहानी को मैं कहकर सुनाए, तो उसे आत्मकथात्मक शैली कहते हैं। यहाँ पूरा वर्णन लड़के की अपनी आँखों से आता है, इसलिए हमें उसके मन की बात भी पता चलती रहती है, जो किसी और शैली में इतनी आसानी से नहीं मिलती।
किसी जगह का वातावरण, यानी वहाँ का रंग-रूप, आवाज़ें और समूचा असर। लेखक अस्पताल का माहौल कई छोटी बातों से बनाते हैं, जैसे हरे परदे, चमकता फ़र्श, झूमते पेड़ और लोगों की धीमी गुनगुन।
आराम और शान से भरी स्थिति। लड़का बीमार काका को देखकर यही शब्द सोचता है, क्योंकि उसे केवल साफ़ बिस्तर और खीर दिखाई देती है। उसे बीमारी की तकलीफ़ नहीं दिखती, और यही उसकी भूल का आरंभ है।
किसी दृश्य का केवल एक हिस्सा देखकर पूरी बात मान लेना। लड़का अस्पताल में देखभाल तो देखता है, पर यह नहीं देखता कि काका को दवा लेनी पड़ रही है और वे चल-फिर नहीं सकते। कहानी इसी अधूरी नज़र पर टिकी है।
किसी काम से बचने के लिए गढ़ा गया झूठा कारण। लड़का स्कूल और सज़ा से बचने के लिए बीमारी का बहाना चुनता है। कहानी आगे दिखाती है कि बहाना गढ़ने वाला अक्सर स्वयं ही उसमें फँस जाता है।
यहाँ ध्यान रखिए
आम भ्रम
एक छोटा प्रसंग
Scenario:
सातवीं कक्षा की रीना अपनी सहेली अंजू के घर गई, जो पैर में मोच आने के कारण तीन दिन से स्कूल नहीं आ रही थी। रीना ने देखा कि अंजू आराम से तकिए के सहारे बैठी है, उसकी माँ उसके लिए गरम सूप ले आई हैं और छोटा भाई उसके पास बैठकर उसे चित्रकथा पढ़कर सुना रहा है। घर के सब लोग उसका ध्यान रख रहे थे। लौटते समय रीना सोचने लगी कि चोट लग जाना तो बहुत आरामदायक है। अगले दिन उसने माँ से कहा कि उसके घुटने में दर्द है, जबकि ऐसा कुछ नहीं था। दिन भर उसे लेटे रहना पड़ा, दवा पीनी पड़ी और खेलने भी नहीं मिला।
Analysis:
यह प्रसंग कहानी के पहले भाग को लगभग ज्यों का त्यों दोहराता है। रीना ने भी वही देखा जो लड़के ने देखा था, यानी देखभाल, आराम और घरवालों का ध्यान। उसने भी वही नहीं देखा जो लड़के ने नहीं देखा था, यानी अंजू की चोट, उसका दर्द और उसका बाहर न निकल पाना। दोनों जगह एक ही भूल है, कि दृश्य का सुख वाला आधा हिस्सा देखकर पूरी स्थिति का अंदाज़ा लगा लिया गया। अंतर केवल इतना है कि रीना का सबक एक ही दिन में मिल गया।
Activity:
कक्षा में कोई एक ऐसी स्थिति चुनिए जो बाहर से अच्छी लगती है, जैसे छुट्टी का दिन या घर पर रहना। फिर दो सूचियाँ बनाइए, एक उसके सुख वाले पक्ष की और दूसरी उसकी कठिनाइयों की।
दो पहलू ढूँढ़िए
Title:
दो पहलू ढूँढ़िए
Safety:
यह गतिविधि केवल पढ़ने और लिखने की है, इसलिए किसी सावधानी की आवश्यकता नहीं है।
What You Notice:
आप देखेंगे कि पाठ में दोनों तरह के ब्योरे मौजूद हैं, पर लड़का केवल एक तरफ़ के ब्योरे पर ध्यान देता है। इससे यह भी समझ आता है कि लेखक ने दवा वाली बात जान-बूझकर रखी है, जिससे पढ़ने वाला वह देख सके जो पात्र नहीं देख पाया।
Did you know
कहानी में लड़के का नाम एक बार भी नहीं आता, क्योंकि वही सुना रहा है।
साबूदाने की खीर बीमारों को इसलिए दी जाती है कि वह हल्की होती है और आसानी से पच जाती है।
कहानी के सभी नाम, जैसे मुन्नू, कुसुम मौसी और छोटे मामा, एक भरे-पूरे घर का चित्र खड़ा कर देते हैं।
Memory tricks
उसने क्या देखा — साफ़ बिस्तर, हरे परदे, खीर और देखभाल। दवा और तकलीफ़ नहीं।
योजना के दो कारण — होमवर्क नहीं किया, और स्कूल जाने का मन नहीं।
Practice MCQs with answers (25)
- A आत्मकथात्मक शैली में
- B पत्र शैली में
- C संवाद शैली में
- D किसी वर्णन की शैली में
Show answer
Why:
लड़का स्वयं मैं कहकर अपनी बात सुनाता है।
- A नानाजी के साथ
- B नानीजी के साथ
- C मुन्नू के साथ
- D छोटे मामा के साथ
Show answer
Why:
नानीजी ही उसे साथ लेकर पड़ोसी को देखने गई थीं।
- A कुसुम मौसी को
- B मुन्नू को
- C सुधाकर काका को
- D नानाजी को
Show answer
Why:
वे पड़ोसी थे और बीमार होकर भर्ती थे।
- A उसे उस दिन की छुट्टी मिली हुई थी
- B उसे मिठाई मिलनी थी
- C वह उस दिन वहाँ अकेला ही जा रहा था
- D वह पहली बार अस्पताल जा रहा था
Show answer
Why:
वह स्वयं बताता है कि यह उसका पहला अवसर था।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और II सही हैं। तीसरा कथन ग़लत है, क्योंकि पाठ कहता है कि बाहर न शोर था, न धूल और न मच्छर-मक्खी।
- A सफ़ेद
- B हरे
- C नीले
- D लाल
Show answer
Why:
बाहर के पेड़ों के साथ यही रंग मेल खाता है।
- A भीड़ भरा बाज़ार
- B सूखी ज़मीन
- C झूमते हुए हरे पेड़
- D ऊँची इमारतें
Show answer
Why:
बड़ी खिड़कियों के पास पेड़ झूम रहे थे।
- A पलंग, परदे और दीवारें
- B पेड़, खिड़कियाँ और छत
- C नर्स, दवा और खीर
- D शोर, धूल और मच्छर-मक्खी
Show answer
Why:
इन्हीं के न होने से वहाँ की शांति बनती है।
- A धीमी बातचीत की आवाज़ के लिए
- B किसी चलती मशीन की आवाज़ के लिए
- C पेड़ पर बैठे पक्षियों की आवाज़ के लिए
- D तेज़-तेज़ चलती हवा की आवाज़ के लिए
Show answer
Why:
लोग धीरे-धीरे बात कर रहे थे, और वही हल्की आवाज़ सुनाई देती थी।
- A कमरे का कोना
- B बिस्तर का वह सिरा जिधर सिर रहता है
- C पलंग के नीचे की ख़ाली जगह, छिपने को
- D खिड़की के पास पड़ी वह ख़ाली जगह और कुर्सी
Show answer
Why:
नानीजी वहीं खड़ी होकर हालचाल पूछने लगीं।
- A दवा देना
- B चुप रहना
- C नमस्कार करना
- D पूछताछ करना
Show answer
Why:
नर्स ने नानीजी को देखकर सिर हिलाकर यही किया।
- A फल की टोकरी
- B दवा की छोटी शीशी
- C गरम दूध
- D साबूदाने की खीर
Show answer
Why:
उन्होंने नर्स से पूछकर उसे चम्मच से खिलाया।
- A नर्स से अनुमति ली
- B डॉक्टर को बुलाया
- C काका को उठाया
- D खिड़की बंद की
Show answer
Why:
नर्स के हाँ कहने के बाद ही उन्होंने खिलाना शुरू किया।
- A कि वहाँ बहुत डर लगता है
- B कि बीमारों के तो ठाठ हैं
- C कि वहाँ बहुत शोर है
- D कि दवा बहुत कड़वी होती है
Show answer
Why:
उसे केवल साफ़ बिस्तर और खीर दिखाई दी।
- A कोई बड़ी कठिनाई
- B बहुत जल्दबाज़ी और हड़बड़ी
- C आराम और शान
- D गहरी थकान और सुस्ती
Show answer
Why:
लड़का बीमारी में भी यही देख पाता है।
- A कि वह वार्ड बहुत बड़ा और खुला-खुला सा था
- B कि नानीजी उसके लिए वह खीर लेकर आई थीं
- C कि वहाँ की खिड़कियाँ बहुत बड़ी और ऊँची थीं
- D कि काका को बीमारी की तकलीफ़ भी थी
Show answer
Why:
उसने देखभाल देखी, पर दवा और बेबसी नहीं देखी।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं और कारण अभिकथन को समझाता है। साफ़ बिस्तर, खीर और सबका ध्यान देखकर उसे बीमारी आराम जैसी लगी।
- A उसे रास्ता लंबा लगता था
- B उसने होमवर्क नहीं किया था
- C उसके मित्र नहीं आ रहे थे
- D उसकी किताब खो गई थी
Show answer
Why:
स्कूल जाने पर सज़ा मिलना तय था।
- A क्योंकि दिन बहुत गरम था
- B क्योंकि स्कूल बंद था
- C क्योंकि बीमारी तय करके नहीं आती
- D क्योंकि नानीजी घर पर नहीं थीं
Show answer
Why:
लेखक इसी सोच से हल्का व्यंग्य खड़ा कर देते हैं।
- A रजाई
- B कमरे
- C घर
- D आँगन
Show answer
Why:
यही उसकी योजना का पहला क़दम था।
- A केवल सिर दर्द की
- B केवल बुख़ार की
- C केवल पेट दर्द की, और किसी तकलीफ़ की नहीं
- D सिर दर्द, पेट दर्द और बुख़ार, तीनों की
Show answer
Why:
तीनों एक साथ गिनाना ही उसकी पोल खोल देता है।
- A बात सच्ची लगने के बजाय कम विश्वसनीय लगने लगती है
- B बात पहले से कहीं अधिक सच्ची लगने लगती है, इसलिए
- C सुनने वाला घबराकर तुरंत डॉक्टर को बुला लेता है
- D सुनने वाला उसे बिना पूछे ही अस्पताल ले जाता है
Show answer
Why:
एक तकलीफ़ पर भरोसा हो सकता है। सिर, पेट और बुख़ार एक ही साँस में गिनाने से नानीजी को बहाना समझ आ जाता है।
- A डाँटने लगीं और समझाने लगीं
- B दवा ले आईं
- C कुछ कहे बिना चली गईं
- D नानाजी को तुरंत बुला लाईं
Show answer
Why:
उनकी इस चुप्पी में न डाँट थी और न घबराहट।
- A खिड़की से देखकर
- B आवाज़ों से अनुमान लगाकर
- C किसी के बताने और समझाने से
- D घड़ी देखकर
Show answer
Why:
वह रजाई में पड़े-पड़े घर की हलचल का अंदाज़ा लगाता रहा।
- A शायद उसे बीमारी ठाठ न लगती
- B वह उस दिन और जल्दी बीमार पड़ जाता
- C वह नानीजी से और खीर माँग लेता
- D वह वहीं नर्स से बातें करता रहता
Show answer
Why:
पूरी कहानी इसी अधूरी नज़र पर टिकी है।
Important short questions (7)
वह अपनी नानीजी के साथ गया। वे पड़ोसी सुधाकर काका को देखने जा रही थीं, जो बीमार होकर भर्ती थे।
एक जैसे पलंग कतार में लगे थे और सब पर सफ़ेद चादर तथा लाल कंबल था। दीवारें सफ़ेद, छत ऊँची, परदे हरे और फ़र्श चमकता हुआ था।
वहाँ न शोर था, न धूल और न मच्छर-मक्खी। खिड़कियों के पास हरे पेड़ झूम रहे थे और केवल धीमी गुनगुन सुनाई देती थी।
उन्होंने सिर पर हाथ फेरा और हालचाल पूछा। फिर नर्स से अनुमति लेकर चम्मच से धीरे-धीरे खीर खिलाई।
उसे केवल साफ़ बिस्तर, आराम और खीर दिखाई दी। दवा और बेबसी वाला हिस्सा उसकी नज़र से छूट गया।
उसने होमवर्क नहीं किया था और स्कूल जाने पर सज़ा मिलनी तय थी। इसी से बचने के लिए उसने यह बहाना चुना।
सचमुच बीमार बच्चा प्राय: एक ही तकलीफ़ बताता है। तीनों बातें एक साथ गिनाने से उसकी बात बनावटी लगने लगती है।
Long answer questions (3)
लड़का पहली बार अस्पताल गया था, इसलिए उसने हर चीज़ ध्यान से देखी। एक बड़े वार्ड में एक जैसे पलंग कतार में लगे हुए थे और सब पर एक ही तरह का बिछावन था, यानी सफ़ेद चादर और लाल कंबल। दीवारें सफ़ेद थीं, छत ऊँची थी और फ़र्श इतना साफ़ था कि चमक रहा था। खिड़कियों पर हरे परदे लगे थे और उनके पास बाहर हरे पेड़ झूम रहे थे। सबसे बड़ी बात वहाँ की शांति थी, क्योंकि न यातायात का शोर सुनाई देता था, न धूल उड़ती थी और न मच्छर-मक्खी परेशान करते थे। केवल लोगों के धीरे-धीरे बात करने की हल्की आवाज़ आ रही थी। यही सब मिलकर लड़के के मन पर गहरा असर छोड़ते हैं।
इसका कारण यह है कि उसने पूरा दृश्य नहीं देखा। उसे केवल उसका एक हिस्सा दिखा। उसने देखा कि काका साफ़ बिस्तर पर आराम से लेटे हैं। उसने यह भी देखा कि वहाँ कोई शोर नहीं है। बाहर हरे पेड़ झूम रहे थे। फिर उसने नानीजी को सिर पर हाथ फेरते देखा। उन्होंने चम्मच से खीर भी खिलाई। काका ने उसे बड़े स्वाद से खाया। इतना देखकर उसने तय कर लिया कि बीमार होना आराम की बात है। पर कुछ बातें उसकी नज़र से छूट गईं। काका को दवा लेनी पड़ रही थी। वे अपनी मर्ज़ी से उठ भी नहीं सकते थे। और वे अपने घर से दूर पड़े थे। एक ही दृश्य के दो पहलू थे। उसे केवल सुख वाला पहलू दिखा।
कुछ दिन बाद एक सुबह उसका स्कूल जाने का मन नहीं हुआ। पहला कारण यह था कि उसने होमवर्क नहीं किया था। स्कूल पहुँचने पर सज़ा मिलना तय था। दूसरा कारण अस्पताल वाला दृश्य था। वह दृश्य उसके मन में बैठ गया था। उसे बीमारी आराम की स्थिति लगने लगी थी। दोनों बातें मिलीं और उसने वही दिन चुन लिया। पहला क़दम यह था कि वह रजाई से बाहर ही नहीं निकला। नानीजी उठाने आईं तो उसने कह दिया कि वह बीमार है। पूछे जाने पर उसने तीन शिकायतें गिना दीं।
Flashcards (17)
Play this topic
- दिखा या नहीं दिखा
- शब्द और अर्थ
- घटनाएँ क्रम में
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
बीमारी का दिन और उसका अंत
नानाजी जाँच करते हैं और बुख़ार नहीं मिलता। थर्मामीटर भी नहीं मिलता, पर कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय मिल जाती है। दिन भर भूख, ऊब और अकेलापन झेलने के बाद लड़का तय करता है कि अब कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाएगा।
What you will be able to do
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि नानाजी ने जाँच किस तरह की।
- मैं थर्मामीटर वाली चाल और उसके नतीजे को समझा सकता/सकती हूँ।
- मैं बीमार दिन की तीन कठिनाइयाँ गिना सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि कहानी का अंत किस सीख पर होता है।
- मैं स्वयं प्रकाश के लेखन की दो विशेषताएँ बता सकता/सकती हूँ।
Key points
नानाजी आकर माथा छूते हैं, पेट देखते हैं और नब्ज़ देखने लगते हैं।
वे कहते हैं कि बुख़ार तो नहीं है।
लड़का थर्मामीटर लगाने को कहता है, क्योंकि उसे लगता है कि देखेगा कौन।
थर्मामीटर बहुत ढूँढ़ने पर भी नहीं मिलता।
उसे न चाहते हुए भी कड़वी पुड़िया खानी और काढ़े जैसी चाय पीनी पड़ती है।
नानाजी कहते हैं कि आज इसे कुछ खाने को मत देना।
दिन भर लेटे रहने से उसे पीठ दर्द और भारी ऊब होती है।
वह रसोई की ख़ुशबू और चबाने की आवाज़ें सुनता रहता है।
मुन्नू को आम चूसते देखकर उसे जलन होती है और वह भूखा ही रह जाता है।
Full explanation
नानाजी की जाँच
लड़के की झपकी टूटती है और नानाजी आ पहुँचते हैं। वे रजाई हटाकर उसका माथा छूते हैं, पेट देखते हैं और फिर नब्ज़ देखने लगते हैं। नब्ज़ देखना यानी कलाई पर उँगली रखकर नाड़ी की चाल पहचानना। यह पुराना तरीक़ा है और नानाजी इसी पर भरोसा करते हैं।
पहला झटका
नानीजी भी आ जाती हैं और पूछती हैं कि क्या हुआ। नानाजी सीधा कह देते हैं कि बुख़ार तो नहीं है। यह लड़के के लिए पहला झटका है, क्योंकि उसकी पूरी योजना इसी एक बात पर टिकी थी कि कोई जाँच न सके।
थर्मामीटर वाली चाल
वह तुरंत कहता है कि आपको पता नहीं चल रहा है, थर्मामीटर लगाकर देख लीजिए। उसकी सोच साफ़ है। उसे मालूम है कि घर में कोई नहीं है, इसलिए थर्मामीटर लगा भी लिया तो पढ़ेगा कौन। अपनी बीमारी साबित करने के लिए यह चाल उसे अच्छी लगती है।
चाल उलटी पड़ती है
पर होता कुछ और है। बहुत ढूँढ़ने पर भी थर्मामीटर मिलता ही नहीं, क्योंकि शायद कोई माँगकर ले गया था। जो चीज़ उसने अपनी रक्षा के लिए माँगी थी, वह मिली ही नहीं। और इसके बदले में उसे वह मिल गया जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
कड़वी दवा
नानाजी की आवाज़ आती है कि पुड़िया खा ले। न चाहते हुए भी उसे कड़वी पुड़िया खानी पड़ती है और काढ़े जैसी चाय भी पीनी पड़ती है। यह पहली क़ीमत है जो उसे अपने बहाने के बदले चुकानी पड़ती है।
सबसे भारी आदेश
इसके बाद नानाजी जो कहते हैं, वही सबसे भारी पड़ता है। वे कहते हैं कि आज इसे खाना न दिया जाए, लेटा रहने दो, और शाम को फिर देखा जाएगा। दोनों चले जाते हैं। अब लड़का अकेला है, और उसके आगे पूरा दिन पड़ा है।
बाहर जाने की इच्छा
नींद टूटने पर उसे तेज़ इच्छा होती है कि बाहर निकलकर गली की चहल-पहल देखे। वह सोचता है कि चंदूभाई क्या कर रहे होंगे, तेजराम की दुकान पर कितने ग्राहक हैं और तारों पर कितनी चिड़िया बैठी हैं। पर मजबूरी है, लेटे ही रहना है।
ऊब, पीठ दर्द और दूसरी पुड़िया
कुछ देर वह स्कूल और दोस्तों की बातें सोचता रहता है। फिर लेटे-लेटे पीठ दुखने लगती है तो वह उठकर बैठ जाता है। पर बाहर आहट होते ही फिर लेट जाता है। यह छोटा-सा ब्योरा बताता है कि बहाना निभाना भी अपने आप में एक मेहनत है। इसी बीच नानाजी फिर आते हैं और पूछते हैं कि सिरदर्द कैसा है। वह कहता है कि ठीक है, फिर भी वे एक पुड़िया और खिला जाते हैं। अब उसे समझ आने लगता है कि इस खेल में हर जवाब की क़ीमत दवा के रूप में चुकानी पड़ती है।
भूख जागती है
अचानक उसे भूख लगती है। वह सोचता है कि फल या खीर मिलने की उम्मीद तो सुबह ही ख़त्म हो चुकी है। नानीजी से कहने पर भी ज़्यादा से ज़्यादा दूध मिलेगा, या वे नानाजी से पूछने चली जाएँगी। और नानाजी का उत्तर उसे पहले से मालूम है।
सारे विकार निकल जाएँगे
नानाजी का तर्क यह है कि तबीयत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय भूखे रहना है, इससे सारे विकार निकल जाएँगे। लड़के के लिए यही वाक्य सबसे बड़ी सज़ा बन जाता है, क्योंकि इसका अर्थ है दिन भर कुछ नहीं मिलेगा।
बोरियत का असली चेहरा
वह सोचता है कि यह तो अच्छी-ख़ासी बोरियत हो गई, और पूरा दिन कोई कैसे लेटा रहे। उसे यह भी डर है कि शाम को बाक़ी बच्चे आँगन में खेलेंगे और वह बिस्तर में पड़ा रहेगा। ऊपर से आज का होमवर्क भी छूट गया, और कॉपी किससे माँगेगा। वह रुआँसा हो जाता है।
आवाज़ों से बना दृश्य
पास के कमरे की खटर-पटर से उसे पता चलता है कि मुन्नू स्कूल से आ गया। फिर बर्तनों की आवाज़ आती है और समझ आता है कि सब खाना खाने बैठे हैं। उसे यह बात चुभती है कि मुन्नू एक बार भी उसे देखने नहीं आया।
ख़ुशबू की पहचान
अब वह ख़ुशबू से पहचानने लगता है। दाल-चावल की महक आती है, और वह मन ही मन पूरा ब्योरा गिन लेता है, यानी हींग-जीरे का बघार, कटा हरा धनिया, आधा चम्मच घी और ऊपर से नीबू। वह चाहता है कि थोड़ा-सा उसे भी मिल जाए।
झाँककर देखना
जब नहीं रहा जाता तो वह रजाई फेंककर उठ खड़ा होता है और दबे पाँव दरवाज़े तक जाकर चुपके से झाँकता है। वहाँ दाल-चावल और तली हुई हरी मिर्च तो है ही, पर उससे बड़ी बात कुछ और दिखती है।
आम और जलन
मुन्नू आम चूस रहा है, वह भी उस मौसम में। वह सोचता है कि ज़रूर बंबई वाले चाचाजी ने भेजे होंगे। उसे मुन्नू का चूसना बुरा लगता है और वह उसे भुक्कड़ तक कह देता है। जलन, ग़ुस्से और कुढ़न में पाँव पटकता वह वापस बिस्तर में आ जाता है।
दिन का हिसाब
उस पूरे दिन उसे भूखे पेट ही रहना पड़ता है। लेखक यहाँ एक छोटा-सा व्यंग्य करते हैं, कि सारे विकार निकल गए। यह वही वाक्य है जो नानाजी ने कहा था, और अब वह लड़के के अनुभव से होकर लौटता है।
अंतिम वाक्य
कहानी का अंत बहुत छोटा है। वह कहता है कि इसके बाद विद्यालय से छुट्टी मारने की सोचकर उसने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया। किसी ने उसे डाँटा नहीं और किसी ने उपदेश नहीं दिया। सीख उसे अपने ही एक दिन के अनुभव से मिल गई।
लेखक की पहचान
यह कहानी स्वयं प्रकाश की है, जो हिंदी के प्रसिद्ध लेखक थे। उनकी कहानियाँ पढ़ते समय लगता है कि ये हमारे ही जीवन की बातें हैं। उन्होंने बच्चों के लिए बहुत सी रोचक कहानियाँ लिखीं। मात्रा और भार, अगली किताब तथा ज्योति रथ के सारथी तथा फीनिक्स उनकी रचनाएँ हैं।
Concepts and terms
कलाई पर उँगली रखकर नाड़ी की चाल देखना, जिससे शरीर की हालत का अंदाज़ा लगता है। नानाजी यही करते हैं और इसी से वे बिना थर्मामीटर के कह देते हैं कि बुख़ार नहीं है।
कोई तरकीब अपनाने वाले पर ही भारी पड़ जाना। लड़का थर्मामीटर माँगता है, यह सोचकर कि घर में कोई है ही नहीं तो देखेगा कौन। थर्मामीटर मिलता नहीं, पर कड़वी दवा और भूख उसे ज़रूर मिल जाती है।
शरीर में आई गड़बड़ी या दोष। नानाजी का मानना है कि तबीयत ढीली हो तो भूखे रहने से सारे विकार निकल जाते हैं। लड़के के लिए यही वाक्य सबसे भारी सज़ा बन जाता है।
किसी बात को हल्के ढंग से कहकर उसकी कमज़ोरी दिखाना। लेखक कहीं लड़के को डाँटते नहीं। वे केवल उसके मन की बातें लिखते चलते हैं, और पढ़ने वाला स्वयं हँस पड़ता है।
अपनी भूल स्वयं मान लेना। कहानी के अंत में लड़का यह स्वीकार कर लेता है कि उसने फिर कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाया। यह स्वीकृति किसी के डाँटने से नहीं, उसके अपने अनुभव से आती है।
यहाँ ध्यान रखिए
आम भ्रम
एक छोटा प्रसंग
Scenario:
आठवीं कक्षा के कबीर को गणित के पाठ का अभ्यास पूरा करना था, पर उसने दो दिन तक टाल दिया। जाँच वाले दिन सुबह उसने माँ से कहा कि उसके गले में बहुत दर्द है और कुछ निगला नहीं जा रहा। माँ ने उसका गला देखा, पानी गरम करके गरारे कराए और कहा कि आज कुछ ठंडा नहीं मिलेगा। दिन भर उसे केवल दलिया और गरम पानी मिला, बाहर खेलने जाना बंद रहा और टीवी भी नहीं चला। शाम तक उसे पता चल गया कि अगले दिन वही जाँच फिर होगी, क्योंकि शिक्षक ने अनुपस्थित बच्चों के लिए दूसरी तारीख़ रख दी थी। कबीर ने उसी रात बैठकर पूरा अभ्यास किया।
Analysis:
यह प्रसंग कहानी के ढाँचे को दोहराता है, पर एक नई बात भी जोड़ता है। कबीर ने भी बचने के लिए बीमारी का बहाना चुना, और उसे भी वही मिला जो लड़के को मिला था, यानी परहेज़, पाबंदी और ऊब। कहानी की तरह यहाँ भी किसी ने उसे झूठा नहीं कहा। नई बात यह है कि जिस काम से वह बचना चाहता था, वह टला नहीं, केवल आगे खिसक गया। दोनों जगह निष्कर्ष एक ही है, कि बहाना कठिनाई को हटाता नहीं, उसमें एक और कठिनाई जोड़ देता है।
Activity:
अपनी कॉपी में एक ऐसी बात लिखिए जिसे आपने कभी टाला हो। फिर दो स्तंभ बनाइए, एक में टालने से मिली राहत और दूसरे में टालने से बढ़ी परेशानी, और दोनों की तुलना कीजिए।
आवाज़ों से दृश्य बनाइए
Title:
आवाज़ों से दृश्य बनाइए
Safety:
आँखें बंद करते समय अपनी जगह पर ही बैठे रहिए और चलिए मत, वरना टकराने का ख़तरा रहता है।
What You Notice:
आप देखेंगे कि कुछ ही आवाज़ों से पूरा दृश्य बन जाता है। यह भी समझ आएगा कि कहानी का लड़का कमरे में बंद होकर भी पूरे घर का हाल क्यों जान पाता है, और उसका अकेलापन इतना गहरा क्यों लगता है।
Did you know
कहानी का अंतिम वाक्य सबसे छोटा है, और वही पूरी सीख कह देता है।
पूरे दिन में घर का कोई सदस्य लड़के को देखने नहीं आता, और यही अकेलापन उसकी सबसे बड़ी सज़ा बन जाता है।
स्वयं प्रकाश की कहानियाँ पढ़ते समय लगता है, मानो कोई पुराना मित्र बातें कर रहा हो।
Memory tricks
दिन भर क्या मिला — कड़वी पुड़िया, काढ़े जैसी चाय, भूख, ऊब और जलन।
क्या नहीं मिला — न बुख़ार, न थर्मामीटर, न खीर, न आम।
Practice MCQs with answers (25)
- A माथा छूकर
- B दवा देकर
- C थर्मामीटर लगाकर
- D डॉक्टर बुलाकर
Show answer
Why:
उन्होंने रजाई हटाकर पहले माथा छुआ, फिर पेट देखा और नब्ज़ देखी।
- A आँखें, जीभ और गला, तीनों देखना
- B गला देखना और जीभ भी दिखवाना
- C कलाई पर नाड़ी की चाल देखना
- D जीभ देखना
Show answer
Why:
यह पुराना तरीक़ा है, और नानाजी इसी पर भरोसा करते हैं।
- A बुख़ार बहुत तेज़ है
- B बुख़ार तो नहीं है
- C पेट में गड़बड़ है
- D आराम की ज़रूरत नहीं
Show answer
Why:
यही लड़के के लिए पहला झटका बनता है।
- A उसे अपने बुख़ार का यक़ीन था
- B उसे थर्मामीटर पसंद था
- C नानीजी ने कहा था
- D उसे लगा कि पढ़ेगा कोई नहीं
Show answer
Why:
घर ख़ाली था, इसलिए उसे यह चाल सुरक्षित लगी।
- A ग़लत, वह कहीं नहीं मिला
- B सही, वह अलमारी में रखा था
- C सही, पर उसका पारा चढ़ा नहीं
- D ग़लत, घर में वह कभी आया ही नहीं
Show answer
Why:
शायद कोई उसे माँगकर ले गया था, इसलिए वह मिला ही नहीं।
- A जो माँगा वह नहीं मिला, पर कड़वी दवा मिल गई
- B उसे उसी दिन अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था
- C उसे स्कूल जाना पड़ा
- D उसका बहाना पकड़ा गया
Show answer
Why:
थर्मामीटर न मिलने पर भी दवा और भूख उसे ज़रूर मिल गई।
- A गरम दूध
- B फल का रस
- C ठंडा और मीठा पानी
- D काढ़े जैसी चाय
Show answer
Why:
कड़वी पुड़िया के साथ यही उसकी पहली क़ीमत थी।
- A उसे अस्पताल जाना पड़ा
- B उसे दिन भर भूखा रहना पड़ा
- C उसे स्कूल भेज दिया गया
- D उसे बाहर खेलने भेजा गया
Show answer
Why:
उन्होंने कह दिया था कि आज इसे कुछ खाने को मत देना।
- A क्योंकि उसका पूरा दिन बिना कुछ खाए ही बीतना था
- B क्योंकि वह कड़वी दवा से पहले से बहुत डरता रहता था
- C क्योंकि उसे शाम तक सारा छूटा हुआ होमवर्क पूरा करना था
- D क्योंकि उसे उसी दिन अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था
Show answer
Why:
बहाना आराम के लिए बनाया गया था। रसोई की ख़ुशबू और चबाने की आवाज़ों के बीच दिन भर भूखा रहना उसी बहाने की क़ीमत बन गया।
- A कोई विचार या सोच
- B कोई बहुत गहरी इच्छा
- C शरीर की गड़बड़ी
- D कोई आदत
Show answer
Why:
नानाजी का तर्क इसी शब्द पर टिका है।
- A गली
- B छत
- C बाज़ार
- D स्कूल
Show answer
Why:
उसे दुकानों के ग्राहक और तारों पर बैठी चिड़िया तक याद आ रही थीं।
- A पीठ दुखने लगी
- B सिर घूमने लगा
- C आँखें जलने लगीं
- D गला सूखने लगा
Show answer
Why:
तब वह उठकर बैठ गया, पर आहट होते ही फिर लेट गया।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं; परंतु कारण अभिकथन को नहीं समझाता। लेट जाने का अर्थ उसके अपने व्यवहार से निकलता है, लेखक के नाम से नहीं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
II और III सही हैं। पहला कथन ग़लत है, क्योंकि थर्मामीटर घर में मिला ही नहीं; जाँच माथा छूकर और नब्ज़ देखकर हुई।
- A किसी ने बताया
- B उसने खिड़की से झाँककर देखा
- C घड़ी देखकर
- D पास के कमरे की खटर-पटर से
Show answer
Why:
पूरे दिन वह आवाज़ों से ही घर का हाल जानता रहा।
- A कि दवा कड़वी थी
- B कि मुन्नू उसे देखने नहीं आया
- C कि घर में थर्मामीटर नहीं मिला
- D कि नानाजी ने जाँच की
Show answer
Why:
वह सोचता है कि आया भी होगा तो दबे पाँव आकर लौट गया होगा।
- A उसका बुख़ार उतर जाता
- B उसे दवा न मिलती
- C उसकी भूख इतनी न जागती
- D मुन्नू उसे देखने आता
Show answer
Why:
ख़ुशबू और आवाज़ें ही उसका ध्यान भोजन पर टिकाए रखती हैं।
- A चादर
- B तकिया
- C किताब
- D रजाई
Show answer
Why:
इसके बाद वह दबे पाँव दरवाज़े तक गया।
- A दौड़कर जाना
- B गिरते-पड़ते जाना
- C बिना आवाज़ किए जाना
- D किसी के साथ जाना
Show answer
Why:
वह चाहता था कि कोई उसे खड़ा देख न ले।
- A क्योंकि उसे आम पसंद ही नहीं रहे थे, पहले से
- B क्योंकि वह बेमौसम था और उसे मिला ही नहीं
- C क्योंकि मुन्नू ने उसे भी आम देने के लिए बुलाया था
- D क्योंकि नानाजी वहीं बैठे थे
Show answer
Why:
भूखे रहकर दूसरे को वह चीज़ खाते देखना ही उसका धीरज तोड़ देता है।
- A ख़ुशी, उत्साह और अपनापन
- B भय, चिंता और घबराहट
- C जलन, ग़ुस्सा और कुढ़न
- D दया, करुणा और अपनापन
Show answer
Why:
वह पाँव पटकता हुआ वापस बिस्तर में आ गया।
- A गर्व के भाव से
- B व्यंग्य के भाव से
- C भय के भाव से
- D कृतज्ञता के भाव से
Show answer
Why:
यह नानाजी का ही वाक्य है, जो अब लड़के के अनुभव से होकर लौटता है।
- A कि वह अब रोज़ ही स्कूल जाएगा, बिना नागा
- B कि इस तरह भूखा रहना शरीर के लिए अच्छा होता है
- C कि वह बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाएगा
- D कि वह आम ज़रूर खाएगा
Show answer
Why:
सीख उसे किसी के डाँटने से नहीं, अपने अनुभव से मिली।
- A अनुपम मिश्र
- B स्वयं प्रकाश
- C हरिऔध
- D मैथिलीशरण गुप्त
Show answer
Why:
उनकी कहानियाँ बच्चों और बड़ों, दोनों के दिलों को छूती हैं।
- A उसे साबूदाने की वही खीर मिल जाती थी
- B उसे उसी समय तैयार करके स्कूल भेज दिया जाता
- C नानाजी चले जाते
- D लड़के का बहाना तुरंत पकड़ा जाता
Show answer
Why:
तब उसकी चाल उसी समय खुल जाती और दिन भर का नाटक चलता ही नहीं।
Important short questions (7)
उन्होंने रजाई हटाकर माथा छुआ, फिर पेट देखा और अंत में नब्ज़ देखी। इसी के आधार पर उन्होंने कहा कि बुख़ार नहीं है।
उसे लगा कि घर में कोई है ही नहीं, इसलिए थर्मामीटर लगा भी लिया तो पढ़ने वाला कोई नहीं होगा। उसे यह चाल सुरक्षित लगी।
थर्मामीटर मिला ही नहीं, इसलिए उसका कोई लाभ नहीं हुआ। बदले में उसे कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय मिल गई।
उसे भूखा रहना पड़ा, लेटे-लेटे पीठ दुखी और भारी ऊब हुई। ऊपर से होमवर्क भी छूट गया।
लड़का कमरे से बाहर नहीं जा सकता, इसलिए पूरा घर उसे सुनाई और सूँघकर ही पता चलता है। इसी से उसका अकेलापन और गहरा लगता है।
उसे जलन, ग़ुस्सा और कुढ़न हुई। वह पाँव पटकता हुआ वापस बिस्तर में आ गया।
किसी ने उसे डाँटा नहीं और न कोई उपदेश दिया। उसे यह सीख अपने ही एक दिन के अनुभव से मिल गई।
Long answer questions (3)
पहले नानाजी आते हैं और पूछते हैं कि क्या हुआ। लड़का कराहते हुए कहता है कि बुख़ार आ गया। इसके बाद नानाजी रजाई हटाकर उसका माथा छूते हैं। फिर वे पेट देखते हैं और अंत में नब्ज़ देखने लगते हैं। इसी बीच नानीजी भी आ जाती हैं। नानाजी साफ़ कह देते हैं कि बुख़ार तो नहीं है। तब लड़का कहता है कि थर्मामीटर लगाकर देखिए। बहुत ढूँढ़ने पर भी थर्मामीटर नहीं मिलता। इसके बाद नानाजी उसे कड़वी पुड़िया खिलाते हैं और काढ़े जैसी चाय पिलाते हैं। अंत में वे कह जाते हैं कि आज इसे कुछ खाने को मत देना।
उसका दिन बहुत भारी बीता। पहले उसे कड़वी दवा लेनी पड़ी और खाने पर रोक लग गई। फिर उसे तेज़ इच्छा हुई कि बाहर जाकर गली की चहल-पहल देखे, पर उसे लेटे ही रहना पड़ा। कुछ देर में पीठ दुखने लगी और भारी ऊब होने लगी। उसे यह भी चिंता हुई कि शाम को सब बच्चे खेलेंगे और वह बिस्तर में पड़ा रहेगा। दोपहर में आवाज़ों से उसे पता चला कि सब खाना खाने बैठ गए हैं। ख़ुशबू से उसने दाल-चावल पहचान लिया और मन ही मन पूरा ब्योरा गिन लिया। अंत में झाँककर देखने पर उसे मुन्नू आम चूसता दिखा, जिससे उसे जलन हुई। उस पूरे दिन उसे भूखे पेट ही रहना पड़ा।
मुझे यह अंत बहुत अच्छा लगा। इसका पहला कारण यह है कि इसमें किसी ने लड़के को डाँटा नहीं। न नानाजी ने उपदेश दिया और न नानीजी ने उसकी पोल खोली। दूसरा कारण यह है कि सीख उसे अपने ही अनुभव से मिली, और ऐसी सीख देर तक याद रहती है। तीसरी बात यह कि अंतिम वाक्य बहुत छोटा है, जिसमें वह केवल इतना कहता है कि उसने फिर कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाया। इस छोटे वाक्य में कोई भाषण नहीं है, फिर भी पूरी बात आ जाती है। मुझे यह भी अच्छा लगा कि लेखक लड़के को बुरा नहीं कहते, वे उसकी मूर्खता पर केवल हल्की-सी हँसी लाते हैं।
Flashcards (17)
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- दिन क्रम में लगाइए
- शब्द और अर्थ
- चाहा या मिला
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
Class 7 Hindi Chapter 5 — frequently asked questions
वह अपनी नानीजी के साथ गया। वे पड़ोसी सुधाकर काका को देखने जा रही थीं, जो बीमार होकर भर्ती थे।
एक जैसे पलंग कतार में लगे थे और सब पर सफ़ेद चादर तथा लाल कंबल था। दीवारें सफ़ेद, छत ऊँची, परदे हरे और फ़र्श चमकता हुआ था।
वहाँ न शोर था, न धूल और न मच्छर-मक्खी। खिड़कियों के पास हरे पेड़ झूम रहे थे और केवल धीमी गुनगुन सुनाई देती थी।
उन्होंने रजाई हटाकर माथा छुआ, फिर पेट देखा और अंत में नब्ज़ देखी। इसी के आधार पर उन्होंने कहा कि बुख़ार नहीं है।
उसे लगा कि घर में कोई है ही नहीं, इसलिए थर्मामीटर लगा भी लिया तो पढ़ने वाला कोई नहीं होगा। उसे यह चाल सुरक्षित लगी।
थर्मामीटर मिला ही नहीं, इसलिए उसका कोई लाभ नहीं हुआ। बदले में उसे कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय मिल गई।
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