Class 7 Hindi Chapter 10: मीरा के पद
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- Hindi
बसो मेरे नैनन में नंदलाल
पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से विनती करती हैं कि वे उनकी आँखों में बस जाएँ। वे उनकी मोहनी मूरत, साँवली सूरत और विशाल नैनों का वर्णन करती हैं, और होंठों की मुरली, वैजयंती माला, कमर की घंटियाँ तथा पैरों के नूपुर तक गिनाती हैं।
What you will be able to do
- मैं पहले पद का भाव अपने शब्दों में बता सकता/सकती हूँ।
- मैं श्रीकृष्ण के शरीर और शृंगार का वर्णन गिना सकता/सकती हूँ।
- मैं नंदलाल, गिरधर और गोपाल जैसे नामों का अर्थ बता सकता/सकती हूँ।
- मैं आँखों से जुड़े तीन मुहावरों का अर्थ समझा सकता/सकती हूँ।
- मैं मीरा के जीवन के बारे में तीन बातें बता सकता/सकती हूँ।
Key points
मीरा श्रीकृष्ण से विनती करती हैं कि वे उनकी आँखों में बस जाएँ।
वे उनकी मूरत को मोहनी और सूरत को साँवली बताती हैं।
उनके नैनों को वे विशाल, यानी बड़े कहती हैं।
श्रीकृष्ण के होंठों पर सुरीली धुनों वाली मुरली सजी है।
उनके सीने पर वैजयंती माला शोभा पा रही है।
उनकी कमर पर नन्हीं-नन्हीं घंटियाँ सजी हुई हैं।
उनके पैरों के नूपुर मीठी आवाज़ में बोल रहे हैं।
वे श्रीकृष्ण को संतों को सुख देने वाला कहती हैं।
अंत में वे उन्हें भक्तों से स्नेह करने वाला गोपाल कहती हैं।
Full explanation
पद की पहली विनती
पद एक विनती से शुरू होता है। मीरा कहती हैं कि नंदलाल मेरी आँखों में बस जाएँ। नंदलाल का अर्थ है नंद के पुत्र, यानी श्रीकृष्ण। ध्यान दीजिए, वे कुछ माँगती नहीं। वे केवल यह चाहती हैं कि उनका ध्यान हर समय बना रहे।
आँखों में बसना
आँखों में बस जाना एक मुहावरा ही है। जब कोई व्यक्ति या वस्तु इतनी प्रिय लगने लगे कि उसका ध्यान हर समय मन में रहे, तब यह मुहावरा चलता है। इसी अर्थ का एक और मुहावरा है, आँखों में घर करना।
मोहनी मूरत
इसके बाद वर्णन शुरू होता है। वे कहती हैं कि उनकी मूरत मोहनी है, यानी मन मोह लेने वाली। मूरत का अर्थ है रूप या छवि। मोहनी शब्द से पता चलता है कि वह रूप देखने वाले को अपनी ओर खींच लेता है।
साँवली सूरत
साथ ही वे सूरत को साँवरि कहती हैं। साँवरि वही शब्द है, जिसे आज हम साँवली कहते हैं। श्रीकृष्ण का रंग साँवला माना जाता है, और मीरा उसे छिपाती नहीं, वे उसी को सुंदरता के रूप में गिनाती हैं।
विशाल नैना
उसी पंक्ति का तीसरा वर्णन आँखों का है। वे कहती हैं कि उनके नैना विशाल बने हैं। विशाल का अर्थ है बड़ा और फैला हुआ। इस तरह पहली पंक्ति में ही तीन बातें आ जाती हैं, रूप, रंग और आँखें।
अधर और मुरली
अगली पंक्ति होंठों पर आती है। अधर का अर्थ होंठ है। वे कहती हैं कि अधर पर सुधा-रस वाली मुरली सजी है। सुधा का अर्थ अमृत है, इसलिए यह मुरली ऐसी है जिसकी धुन अमृत जैसी मीठी हो।
वैजयंती माला
उसी पंक्ति में सीने का वर्णन है। उर का अर्थ सीना या छाती है, और वहाँ वैजयंती माला सजी है। यह माला वैजयंती पौधे के बीजों से बनती है। वह श्रीकृष्ण की पहचान का एक चिह्न मानी जाती है।
कमर की घंटियाँ
तीसरी पंक्ति कमर पर आती है। कटितट का अर्थ है कमर का भाग। वहाँ क्षुद्र घंटिका, यानी छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं। क्षुद्र का अर्थ बहुत छोटा होता है।
नूपुर की आवाज़
उसी पंक्ति के अंत में पैरों की बात आती है। नूपुर पैरों में बाँधा जाने वाला गहना है, जिससे चलने पर आवाज़ निकलती है। मीरा उस आवाज़ को रसाल कहती हैं, यानी रसभरी और मीठी।
वर्णन का क्रम
यदि इन सब वर्णनों को क्रम से देखें, तो एक सीढ़ी बन जाती है। पहले नैना, फिर अधर, फिर उर, फिर कटितट और अंत में चरण। मीरा ऊपर से नीचे उतरती हैं, मानो वे आँखों से पूरी छवि को धीरे-धीरे देख रही हों।
छोटी बातों का बड़ा काम
एक बात ध्यान देने योग्य है। मीरा केवल बड़ी-बड़ी बातें नहीं कहतीं। वे घंटियों और नूपुर जैसी छोटी चीज़ें भी गिनाती हैं। इसी से वर्णन जीवित हो जाता है, क्योंकि छोटी-छोटी बातें ही किसी छवि को अपनी-सी बनाती हैं।
आवाज़ भी, रूप भी
वर्णन में केवल दिखने वाली बातें नहीं हैं। मुरली, घंटियाँ और नूपुर, तीनों से मधुर ध्वनियाँ निकलती हैं। यानी पद में रूप के साथ आवाज़ भी आ जाती है, और पढ़ने वाले को वह छवि सुनाई भी देती है।
संतन सुखदाई
अंतिम पंक्ति में भाव बदल जाता है। अब तक रूप की बात थी, अब गुण की बात आती है। मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु संतों को सुख देने वाले हैं। यानी उनका बड़प्पन उनके रूप में नहीं, उनके स्वभाव में है।
भक्त वछल गोपाल
उसी पंक्ति में वे उन्हें भक्त वछल गोपाल कहती हैं। भक्त वछल का अर्थ है भक्तों से स्नेह करने वाला। गोपाल का अर्थ है गायों का पालन करने वाला, जो श्रीकृष्ण का एक और नाम है।
अपना नाम पद में
मीरा अंतिम पंक्ति में अपना नाम भी रख देती हैं। उनके समय के अनेक कवि अपनी रचना के आख़िर में अपना नाम जोड़ देते थे। आज भी कुछ कवि ऐसा करते हैं, और इससे रचना पर उनकी मुहर जैसी लग जाती है।
पद और कविता
मीरा की ये रचनाएँ पद कहलाती हैं। पद छोटी-छोटी पंक्तियों वाली वह रचना है, जिसे गाया जा सके। इसी कारण उसमें लय बहुत ज़रूरी होती है। यही वजह है कि मीरा के पद आज भी गाए जाते हैं, केवल पढ़े नहीं जाते। गाने योग्य होने से वे लोगों की ज़ुबान पर चढ़ गए और पीढ़ियों तक चलते रहे।
कृष्ण के कई नाम
पाठ में श्रीकृष्ण के लिए एक नाम नहीं, कई नाम आते हैं। नंदलाल, गोपाल, गिरधर और हरि, सब उन्हीं के नाम हैं। हर नाम एक अलग बात बताता है। नंदलाल से उनका नाता पता चलता है, गोपाल से उनका पालने वाला रूप, और गिरधर से उनकी शक्ति। इस तरह एक ही व्यक्ति के कई रूप सामने आ जाते हैं।
कवयित्री का परिचय
यह रचना आज से लगभग पाँच सौ वर्ष पहले रची गई थी। इसे हिंदी की महान कवयित्री और कृष्ण भक्त मीरा ने रचा था। कहा जाता है कि बचपन से ही उनका मन कृष्ण की भक्ति में डूबा रहता था। राजकुमारी होकर भी उन्होंने संतों जैसा जीवन अपनाया। महल पीछे छोड़े और वे तीर्थों की राह पर निकल पड़ीं।
Concepts and terms
नंद के पुत्र, यानी श्रीकृष्ण। मीरा उन्हें इसी नाम से पुकारती हैं, और इससे पद के आरंभ में ही पता चल जाता है कि विनती किससे की जा रही है।
वैजयंती पौधे के बीजों से तैयार होने वाली माला। वह श्रीकृष्ण के सीने पर सजी रहती है और उनकी पहचान का एक चिह्न मानी जाती है।
छोटी-छोटी घंटियाँ। क्षुद्र का अर्थ है बहुत छोटा। ये घंटियाँ कटितट, यानी कमर के भाग पर सजी रहती हैं।
पैरों में बाँधा जाने वाला गहना, जिससे चलने पर आवाज़ होती है। मीरा उसकी आवाज़ को रसाल, यानी रसभरी और मीठी कहती हैं।
ऐसा वाक्यांश, जिसका अर्थ उसके शब्दों से सीधे नहीं निकलता। आँखों में बस जाना एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है किसी का ध्यान हर समय मन में बना रहना।
यहाँ ध्यान रखिए
आम भ्रम
एक छोटा प्रसंग
Scenario:
सातवीं कक्षा की आरुषि को अपनी दादी पर एक अनुच्छेद लिखना था। पहली बार उसने लिखा कि दादी बहुत अच्छी हैं, बहुत प्रेम करती हैं और सबका ध्यान रखती हैं। शिक्षिका ने पढ़कर कहा कि बात सच्ची है, पर तस्वीर नहीं बनी। उन्होंने आरुषि से कहा कि वह मीरा का पहला पद दोबारा पढ़े और देखे कि वहाँ क्या-क्या गिनाया गया है। आरुषि ने दूसरी बार लिखा कि दादी के चश्मे की एक कमानी टेढ़ी है, उनकी चूड़ियाँ चलते समय खनकती रहती हैं, और वे हर सुबह सबसे पहले तुलसी में पानी डालती हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि दादी किसी को ख़ाली हाथ नहीं जाने देतीं। इस बार पूरी कक्षा ने कहा कि दादी आँखों के सामने दिख गईं।
Analysis:
यह प्रसंग मीरा के ढंग को एक कक्षा के काम में रख देता है। पहली बार आरुषि ने केवल बड़ी बातें लिखी थीं, और वैसी बातें किसी के बारे में भी लिखी जा सकती हैं। दूसरी बार उसने छोटी-छोटी बातें गिनाईं, ठीक जैसे मीरा कमर की घंटियाँ और पैरों के नूपुर तक गिनाती हैं। चूड़ियों की खनक भी पद की ध्वनि वाली बात से मिलती है, क्योंकि वहाँ भी मुरली, घंटियाँ और नूपुर आवाज़ देते हैं। सबसे ज़रूरी बात अंतिम वाक्य है। ख़ाली हाथ न जाने देना एक गुण है, और पद भी अंत में रूप छोड़कर गुण पर आ जाता है। इसी क्रम से वर्णन सूची नहीं रहता, वह एक जीवित छवि बन जाता है।
Activity:
अपने किसी प्रिय व्यक्ति पर पाँच वाक्य लिखिए। उनमें चार वाक्य छोटी-छोटी बातों के रखिए और अंतिम वाक्य उनके किसी गुण का।
आँखों के मुहावरे
Title:
आँखों के मुहावरे
Safety:
किसी साथी के लिए बुरे भाव वाला मुहावरा मत बोलिए, वाक्य काल्पनिक ही रखिए।
What You Notice:
आप देखेंगे कि एक ही अंग से बने मुहावरे अलग-अलग भाव देते हैं। आँखों का तारा प्रेम बताता है, आँख का काँटा बैर बताता है, और आँख भर आना भावुक होना बताता है।
Did you know
यह रचना आज से लगभग पाँच सौ वर्ष पहले रची गई थी।
मीरा एक राजकुमारी थीं, फिर भी उन्होंने संतों का जीवन चुना।
उनके गाए भजन आज भी लोग श्रद्धा और प्रेम से गाते-सुनाते हैं।
Memory tricks
ऊपर से नीचे — नैना, अधर, उर, कटितट, चरण।
कृष्ण के चार नाम — नंदलाल, गोपाल, गिरधर, हरि।
Practice MCQs with answers (25)
- A संतों से
- B श्रीकृष्ण से
- C घरवालों से
- D भक्तों से
Show answer
Why:
वे उन्हें नंदलाल कहकर पुकारती हैं।
- A आनंद देने वाला कोई संत
- B नंद के पुत्र, यानी श्रीकृष्ण
- C कोई बड़ा राजा और शासक
- D पर्वत को धारण करने वाला कोई जन
Show answer
Why:
पद के आरंभ में ही पता चल जाता है कि विनती किससे है।
- A युद्ध और शांति की बात
- B ज्ञान और शिक्षा की बात
- C प्रेम और भक्ति की बात
- D प्रकृति की सुंदरता का वर्णन
Show answer
Why:
पूरा पद एक विनती और एक वर्णन से बना है।
- A आँखों में कुछ गिर जाना
- B किसी को बहुत ही ध्यान से देखते रहना
- C आँखें बंद कर लेना
- D किसी का ध्यान हर समय मन में रहना
Show answer
Why:
आँखों में घर करना भी इसी अर्थ का मुहावरा है।
- A कि वे कुछ पाना नहीं चाहतीं, केवल ध्यान बना रहने देना चाहती हैं
- B कि उन्हें कुछ भी चाहिए ही नहीं था, और इसीलिए वे चुप ही रह गई थीं
- C कि वे कोई प्रश्न पूछ रही हैं और उसका कोई उत्तर भी तुरंत ही चाहती हैं
- D कि वे किसी से नाराज़ हैं
Show answer
Why:
यही भक्ति को माँग से अलग कर देता है।
- A बहुत बड़ी और फैली हुई
- B मन मोह लेने वाली
- C बहुत पुरानी और प्रसिद्ध
- D बहुत दूर दिखाई देने वाली
Show answer
Why:
मूरत का अर्थ रूप या छवि है।
- A सुंदर
- B सँवारी
- C साँवली
- D सवेरा
Show answer
Why:
पुराने पदों में शब्दों के रूप आज से थोड़े अलग मिलते हैं।
- A कि उन्हें रंगों के बारे में कुछ पता ही नहीं था
- B कि वे किसी और ही व्यक्ति की बात कर रही होंगी
- C कि वे रंग को छिपाने की चीज़ नहीं मानतीं
- D कि वे केवल पंक्ति की तुक ही मिला रही हैं
Show answer
Why:
श्रीकृष्ण का रंग साँवला माना जाता है, और वही उनकी पहचान है।
- A मुरली, माला और घंटियाँ
- B नूपुर, कमर और चरण
- C रूप, रंग और आँखें
- D स्वभाव, नाम और गुण
Show answer
Why:
मोहनी मूरत, साँवली सूरत और विशाल नैना, तीनों एक ही पंक्ति में हैं।
- A आधा हिस्सा
- B कोई आधार
- C अँधेरा
- D होंठ
Show answer
Why:
अधर पर ही मुरली सजी हुई है।
- A कि उसकी धुन अमृत जैसी मीठी है
- B कि वह बहुत पुरानी और टूटी हुई है
- C कि वह बहुत बड़ी है
- D कि वह शुद्ध सोने की ही बनी हुई है
Show answer
Why:
सुधा का अर्थ अमृत होता है।
- A कोई ऊपर का भाग
- B सीना या छाती
- C कोई उड़ान
- D कोई आवाज़
Show answer
Why:
वहीं वैजयंती माला शोभा पा रही है।
- A सोने के छोटे मनकों से
- B फूलों की पंखुड़ियों से
- C किसी नदी के पत्थरों से
- D वैजयंती पौधे के बीजों से
Show answer
Why:
वह श्रीकृष्ण की पहचान का एक चिह्न मानी जाती है।
- A कमर का भाग
- B किसी नदी का किनारा
- C कोई कटा हुआ हिस्सा
- D कोई ऊँचा टीला
Show answer
Why:
वहाँ छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं।
- A बहुत भारी और बड़ा
- B बहुत ही छोटा-सा
- C बहुत कीमती और सुंदर
- D बहुत तेज़ आवाज़ वाला
Show answer
Why:
क्षुद्र घंटिका का अर्थ है छोटी-छोटी घंटियाँ।
- A गले में
- B हाथ में
- C पैरों में
- D कमर में
Show answer
Why:
चलने पर उससे मीठी आवाज़ निकलती है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है। रसाल उसी मीठी आवाज़ के लिए आया है, माला के लिए नहीं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
तीनों कथन पद में हैं, और उनका क्रम ही उत्तर है: वर्णन ऊपर नैनों से आरंभ होकर नीचे चरणों तक उतरता है।
- A वर्णन बहुत लंबा और दूर तक फैला हो जाता है
- B वर्णन जीवित और अपना-सा लगने लगता है
- C अर्थ कठिन हो जाता है और समझ में नहीं आता
- D भाव बदल जाता है और बात कुछ और हो जाती है
Show answer
Why:
छोटी-छोटी बातें ही किसी छवि को अपनी-सी बनाती हैं।
- A माला, मूरत और सूरत
- B नैना, अधर और उर
- C मूरत, कटितट और चरण
- D मुरली, घंटियाँ और नूपुर
Show answer
Why:
इसी से पद में रूप के साथ आवाज़ भी आ जाती है।
- A रूप की बात से गुण की बात पर आ जाता है
- B गुण की बात से रूप की बात पर आ जाता है
- C विनती से प्रश्न पर आ जाता है
- D वर्णन से किसी कथा पर आ जाता है
Show answer
Why:
अब तक शरीर और शृंगार की बात थी।
- A क्योंकि वे संतों को सुख देने वाले हैं
- B क्योंकि वे संतों के साथ ही रहा करते हैं
- C क्योंकि संत उन्हें हर समय सुख देते रहते हैं
- D क्योंकि वे स्वयं भी एक संत बन गए थे
Show answer
Why:
यहाँ उनका बड़प्पन रूप में नहीं, स्वभाव में दिखता है।
- A भक्तों से दूर रहने वाला
- B भक्तों की परीक्षा लेने वाला
- C भक्तों से स्नेह करने वाला
- D भक्तों को उपदेश देने वाला
Show answer
Why:
गोपाल का अर्थ गायों का पालन करने वाला होता है।
- A मनवा
- B आँगन
- C घर
- D नैनन
Show answer
Why:
आँखों में बस जाना एक मुहावरा है।
- A उनसे जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी गिनाएँगे
- B केवल उनकी बड़ी-बड़ी बातें ही लिखते रहेंगे
- C कोई कहानी सुनाएँगे
- D केवल उनका नाम लिखेंगे
Show answer
Why:
मीरा भी घंटियों और नूपुर जैसी छोटी चीज़ें गिनाती हैं।
Important short questions (7)
वे श्रीकृष्ण से कहती हैं कि वे उनकी आँखों में बस जाएँ। यानी वे कुछ माँगती नहीं, केवल यह चाहती हैं कि उनका ध्यान हर समय बना रहे।
उनकी मूरत मोहनी है, सूरत साँवली है और नैना विशाल हैं। उनके अधर पर मुरली सजी है और उर पर वैजयंती माला।
कमर पर नन्हीं घंटियाँ सजी हैं, और पैरों में नूपुर बाँधे हुए हैं, जिनकी आवाज़ मीठी बताई गई है।
वह नैनों से शुरू होकर अधर, उर, कटितट और अंत में चरणों तक जाता है। इससे लगता है मानो मीरा पूरी छवि को धीरे-धीरे आँखों से देख रही हों।
मुरली, कमर की घंटियाँ और पैरों के नूपुर, तीनों से मधुर ध्वनियाँ निकलती हैं। इसी से वह छवि दिखाई भी देती है और सुनाई भी।
कि वे संतों को सुख देने वाले हैं और भक्तों से स्नेह करने वाले हैं। यहाँ बात रूप से हटकर स्वभाव पर आ जाती है।
वे एक राजकुमारी थीं, फिर भी उन्होंने संतों का जीवन चुना। उन्होंने महल छोड़कर तीर्थों की यात्राएँ कीं और मंदिरों में भजन गाना तथा सत्संग करना शुरू किया।
Long answer questions (3)
मीरा श्रीकृष्ण से विनती करती हैं कि वे उनकी आँखों में बस जाएँ। इसके बाद वे उनका वर्णन करने लगती हैं। उनकी मूरत मन मोह लेने वाली है, सूरत साँवली है और नैना बड़े हैं। उनके होंठों पर ऐसी मुरली सजी है, जिसकी धुन अमृत जैसी मीठी है, और सीने पर वैजयंती माला शोभा पा रही है। उनकी कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हैं और पैरों के नूपुर मीठी आवाज़ में बोल रहे हैं। अंत में वे कहती हैं कि उनके प्रभु संतों को सुख देने वाले और भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल हैं।
पहला उपाय क्रम का है। वे ऊपर नैनों से शुरू करती हैं और नीचे चरणों तक उतरती हैं, इसलिए छवि एक-एक हिस्से में बनती चलती है। दूसरा उपाय छोटी बातों का है। वे केवल रूप और रंग नहीं कहतीं, वे कमर की छोटी घंटियाँ और पैरों के नूपुर तक गिनाती हैं। तीसरा उपाय ध्वनि का है। मुरली, घंटियाँ और नूपुर, तीनों से आवाज़ निकलती है, इसलिए वह छवि सुनाई भी देती है। चौथा उपाय अंत का है, जहाँ वे रूप छोड़कर गुण पर आ जाती हैं और उन्हें संतों का सुखदाई तथा भक्तों से स्नेह करने वाला कहती हैं। इन सबसे वर्णन केवल सूची नहीं रहता, वह एक जीवित छवि बन जाता है।
सबसे पहले मैं पूछता कि महल छोड़ना कितना कठिन लगा था। वे एक राजकुमारी थीं, इसलिए यह निर्णय आसान नहीं हो सकता। दूसरा प्रश्न यात्राओं का होता। मैं पूछता कि तीर्थों में उन्हें कौन-सी बात सबसे अधिक याद रह गई। तीसरा प्रश्न उनके भजनों के बारे में होता। मैं पूछता कि वे उन्हें पहले लिखती थीं या गाते-गाते बन जाते थे। इसके बाद मैं एक बात कहता भी। मैं बताता कि उनके पद आज भी गाए जाते हैं। यह सुनकर उन्हें अच्छा लगता। अंत में मैं एक सलाह माँगता। मैं पूछता कि किसी काम में मन लगाने का सीधा रास्ता क्या है। यही बात उनके जीवन में सबसे साफ़ दिखती है।
Flashcards (17)
Play this topic
- वर्णन क्रम में लगाइए
- शब्द और अर्थ
- रूप या गुण
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
बरसे बदरिया सावन की
दूसरे पद में सावन के बादल बरस रहे हैं और मीरा का मन उमंग से भर गया है, क्योंकि उन्होंने हरि के आने की भनक सुनी है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर आते हैं, बिजली चमकती है, नन्हीं बूँदें गिरती हैं और शीतल पवन बहती है।
What you will be able to do
- मैं दूसरे पद का भाव अपने शब्दों में बता सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि सावन के बारे में क्या-क्या कहा गया है।
- मैं बदरिया, दामिन और मेहा जैसे शब्दों के आज के रूप लिख सकता/सकती हूँ।
- मैं पद में एक ही वर्ण की आवृत्ति पहचान सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि कवि अपना नाम पद में क्यों रखते थे।
Key points
सावन की बदरिया बरस रही है और वह मन को भाने वाली है।
सावन में मीरा का मन उमंग से भर उठा है।
उनके मन में उमंग का कारण हरि के आने की भनक है।
बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आ गए हैं।
बिजली चमक रही है और वर्षा की झड़ी लग गई है।
नन्हीं-नन्हीं बूँदों वाला मेह बरस रहा है।
उसके साथ शीतल और सुहावनी पवन बह रही है।
मीरा अपने प्रभु को गिरधरनागर कहकर पुकारती हैं।
पद का अंत आनंद और मंगल गाने की बात पर होता है।
Full explanation
पद की पहली पंक्ति
पद एक दृश्य से शुरू होता है। सावन की बदरिया बरस रही है और मीरा उसे मन भावन कहती हैं, यानी मन को भाने वाली। बदरिया बादल का एक प्यार वाला रूप है। छोटे रूप में कहने से उसमें अपनापन आ जाता है।
दोहराव की लय
पहली पंक्ति में सावन की शब्द दो बार आता है। एक बार बदरिया के साथ और एक बार मन भावन के साथ। इसी दोहराव से पंक्ति में गीत जैसी लय बन जाती है, और पढ़ते समय वह अपने आप गुनगुनाने लगती है।
मन की उमंग
दूसरी पंक्ति भीतर की बात कहती है। सावन में मीरा का मन उमग गया, यानी उमंग से भर उठा। उमग्यो वही शब्द है, जिसे आज हम उमगा या उमंग से भरा कहते हैं। मनवा भी मन का ही प्यार वाला रूप है।
उमंग का कारण
उसी पंक्ति में कारण भी आ जाता है। उन्होंने हरि के आने की भनक सुनी है। भनक का अर्थ है हल्की-सी ख़बर या आहट। ध्यान दीजिए, उन्हें पूरी ख़बर नहीं मिली। केवल एक आहट से ही उनका मन भर गया, और यही भक्ति का भाव है।
चारों दिशाओं से
अब दृश्य बड़ा होता है। बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आ गए हैं। उमड़ना और घुमड़ना, दोनों शब्द मिलकर एक हलचल बना देते हैं। बादल सीधे नहीं आते, वे चढ़ते और घूमते हुए आते हैं।
बिजली और झड़ी
उसी पंक्ति में दामिन, यानी बिजली आती है। उसे आज दामिनी भी कहा जाता है। वह दमककर झड़ी ले आती है। झड़ी का अर्थ है लगातार होती वर्षा, यानी वह बारिश जो रुकती नहीं।
नन्हीं बूँदें
अगली पंक्ति में बारिश का रूप बदल जाता है। अब नन्हीं-नन्हीं बूँदों वाला मेह बरसता है। मेहा का अर्थ मेह या वर्षा है। नन्हीं कहने से पता चलता है कि यह तेज़ बौछार नहीं, एक कोमल बारिश है।
शीतल पवन
उसी पंक्ति के अंत में हवा आती है। पवन शीतल और सोहावन, यानी ठंडी और सुहावनी है। बारिश के साथ हवा का आना ही मौसम को पूरा करता है, और यहीं पद का सबसे सुखद क्षण बनता है।
दृश्य का क्रम
यदि इन्हें क्रम से देखें, तो एक सीढ़ी बनती है। पहले बरसती बदरिया, फिर मन की उमंग, फिर चारों दिशाओं के बादल, फिर बिजली और झड़ी, फिर नन्हीं बूँदें और अंत में शीतल पवन। मीरा बड़े दृश्य से शुरू करके कोमल दृश्य पर आती हैं।
भीतर और बाहर
पद में दो चीज़ें साथ-साथ चलती हैं। एक बाहर का मौसम है, जिसमें बादल, बिजली और बूँदें हैं। दूसरा भीतर का मन है, जिसमें उमंग है। दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं, क्योंकि बाहर की बरसात भीतर की उमंग का कारण बन जाती है।
गिरधरनागर
अंतिम पंक्ति में मीरा अपने प्रभु को गिरधरनागर कहती हैं। गिरधर का अर्थ है पर्वत को धारण करने वाला, जो श्रीकृष्ण का एक नाम है। इस तरह दोनों पदों में वे उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारती हैं।
आनंद और मंगल
पद का अंत आनंद और मंगल गाने की बात पर होता है। मंगल का अर्थ है शुभ। यानी यह पद किसी माँग पर नहीं, एक गीत पर समाप्त होता है। पहला पद विनती पर शुरू होकर गुण पर समाप्त हुआ था, और यह पद दृश्य पर शुरू होकर गीत पर।
नाम रखने की परंपरा
दोनों पदों की अंतिम पंक्ति में मीरा अपना नाम रखती हैं। उनके समय के अनेक कवि ऐसा करते थे, और आज भी कुछ कवि अपना नाम अपनी कविता में जोड़ देते हैं। इससे रचना पर उनकी मुहर जैसी लग जाती है और पढ़ने वाले को रचनाकार का पता चल जाता है।
ब वर्ण की आवृत्ति
पहली पंक्ति में बरसे और बदरिया, दोनों शब्द साथ आते हैं और दोनों ब वर्ण से शुरू होते हैं। इसी को वर्ण की आवृत्ति कहते हैं, यानी एक ही वर्ण का बार-बार आना। इससे पंक्ति बोलने में और भी सुंदर बन जाती है।
और भी उदाहरण
पद में ऐसे और उदाहरण मिलते हैं। उमड़ और घुमड़ में ड़ की ध्वनि दोहराई जाती है। मन भावन और मनवा में म वर्ण लौटता है। नन्हीं नन्हीं में तो पूरा शब्द ही दोहरा दिया गया है, जिससे बूँदों का छोटा आकार और साफ़ दिखने लगता है।
दोनों पद साथ
पाठ के दोनों पद एक ही कवयित्री के हैं, पर उनका ढंग अलग है। पहला पद एक विनती से शुरू होता है और श्रीकृष्ण के रूप तथा गुण पर टिका रहता है। दूसरा पद एक दृश्य से शुरू होता है और मौसम के साथ मन की बात कहता है। दोनों में एक बात समान है, कि अंतिम पंक्ति में मीरा अपना नाम रख देती हैं।
शब्द तब और अब
इस पद के कई शब्द आज बदले हुए रूप में बोले जाते हैं। बदरिया को हम बादल कहते हैं और दामिन को बिजली। मेहा के लिए आज वर्षा या बारिश चलता है, मनवा के लिए मन, आवन के लिए आना, और दिश के लिए दिशा। सोभित आज शोभित लिखा जाता है और नैनन के लिए नयनों।
Concepts and terms
बादल का एक प्यार वाला रूप, जिसे आज हम बादल कहते हैं। छोटे रूप में कहने से उसमें अपनापन आ जाता है, जैसे कोई अपनी बात किसी मित्र से कह रहा हो।
किसी बात की हल्की-सी ख़बर या आहट। मीरा कहती हैं कि उन्होंने हरि के आने की भनक सुनी है, यानी पूरी ख़बर नहीं, केवल एक आहट।
बिजली। उसे आज दामिनी भी कहा जाता है। पद में वह झड़ी लाने वाली बिजली के रूप में आती है।
मेह या वर्षा। पद में नन्हीं-नन्हीं बूँदों वाला मेह बरसता है, इसलिए वह तेज़ बौछार नहीं, कोमल बारिश है।
किसी वर्ण का बार-बार आना। बरसे और बदरिया, दोनों ब वर्ण से शुरू होते हैं, और इसी आवृत्ति से पंक्ति सुंदर बन जाती है।
यहाँ ध्यान रखिए
आम भ्रम
एक छोटा प्रसंग
Scenario:
कक्षा सात के बच्चों को सावन पर चार पंक्तियाँ लिखने को कहा गया। हर्ष ने लिखा कि बादल काले हैं, बिजली चमकती है, बारिश होती है और सड़क गीली हो जाती है। शिक्षिका ने कहा कि सब ठीक है, पर इसमें हर्ष कहीं नहीं है। उन्होंने मीरा का दूसरा पद दोबारा पढ़वाया और पूछा कि उसमें मौसम के साथ और क्या है। बच्चों ने बताया कि उसमें मीरा का मन भी है। हर्ष ने दूसरी बार तीन बातें लिखीं। पहली बूँद गिरते ही उसे दादी के घर की याद आ जाती है। भीगी मिट्टी की गंध से उसका मन हल्का हो जाता है। छत से गिरती धार देखकर उसे काग़ज़ की नाव बनाने का मन करता है। इस बार कक्षा ने कहा कि अब पंक्तियाँ उसकी अपनी लगती हैं।
Analysis:
यह प्रसंग इस पद की सबसे बड़ी बात को एक कक्षा के काम में रख देता है। हर्ष की पहली कोशिश में केवल बाहर का मौसम था, और वैसा मौसम किसी भी जगह का हो सकता है। दूसरी कोशिश में उसने भीतर का भाव जोड़ दिया, ठीक जैसे मीरा बादल और बिजली के साथ अपने मन की उमंग रखती हैं। एक बात और ध्यान देने योग्य है। हर्ष ने पहली बूँद से याद आने की बात कही, यानी उसे भी पूरी बारिश की ज़रूरत नहीं पड़ी। यह मीरा की भनक वाली बात से मिलता है, जहाँ हल्की-सी आहट से ही मन भर जाता है। इसीलिए दूसरी कोशिश अपनी लगती है।
Activity:
सावन पर चार पंक्तियाँ लिखिए। दो पंक्तियाँ बाहर के दृश्य की रखिए और दो अपने मन के भाव की।
आवृत्ति ढूँढ़िए
Title:
आवृत्ति ढूँढ़िए
Safety:
बोलकर पढ़ते समय आवाज़ बहुत ऊँची न रखिए, वरना बग़ल की कक्षा को असुविधा होगी।
What You Notice:
आप देखेंगे कि एक ही वर्ण लौटने से पंक्ति बोलने में आसान और सुनने में सुंदर लगती है। बरसे बदरिया में ब लौटता है, और उमड़ घुमड़ में ड़ की ध्वनि लौटती है।
Did you know
सावन श्रावण का महीना है, जो आषाढ़ के बाद और भाद्रपद से पहले आता है।
उस समय के बहुत से कवि अंतिम पंक्ति में अपना नाम रख देते थे।
गिरधर का अर्थ पर्वत को धारण करने वाला होता है।
Memory tricks
सावन के पाँच दृश्य — बदरिया, बिजली, झड़ी, बूँदें, पवन।
शब्द तब और अब — बदरिया यानी बादल, दामिन यानी बिजली, मेहा यानी वर्षा।
Practice MCQs with answers (25)
- A सर्दी
- B वर्षा
- C गर्मी
- D वसंत
Show answer
Why:
सावन उसी ऋतु का महीना है।
- A कोई धारा
- B कोई बादल
- C कोई चादर
- D कोई बदलाव
Show answer
Why:
यह बादल का एक प्यार वाला छोटा रूप है।
- A शब्द कठिन हो जाता है
- B अर्थ बदल जाता है
- C उसमें अपनापन आ जाता है
- D तुक टूट जाती है
Show answer
Why:
लगता है मानो कोई अपनी बात किसी मित्र से कह रहा हो।
- A आषाढ़ का
- B भाद्रपद का
- C कार्तिक का
- D श्रावण का
Show answer
Why:
वह आषाढ़ के बाद और भाद्रपद से पहले आता है।
- A पंक्ति में गीत जैसी लय बन जाती है
- B पंक्ति लंबी हो जाती है और धीमी पड़ जाती है
- C अर्थ दोहरा हो जाता है
- D पंक्ति बहुत ही कठिन और उलझी हो जाती है
Show answer
Why:
पढ़ते समय वह अपने आप गुनगुनाने लगती है।
- A मन में बसी हुई कोई याद
- B मन को भा जाने वाली
- C मन की कोई गहरी इच्छा
- D मन में उठने वाला कोई भाव
Show answer
Why:
मीरा सावन की बदरिया को यही कहती हैं।
- A कि वे उदास हैं
- B कि वे चिंतित हैं
- C कि वे प्रसन्न हैं
- D कि वे दुखी हैं
Show answer
Why:
पद का अंत आनंद और मंगल गाने की बात पर होता है।
- A उमंग से भर उठा
- B थक गया
- C घूमकर वापस आ गया
- D चुप हो गया, थम गया
Show answer
Why:
सावन में मीरा के मन की यही हालत हुई।
- A कि सावन का महीना आ गया है, वर्षा का
- B कि बादल चारों दिशाओं से उठकर आ गए हैं
- C कि उन्होंने हरि के आने की भनक सुनी
- D कि शीतल पवन बह रही है
Show answer
Why:
भनक का अर्थ है हल्की-सी ख़बर या आहट।
- A कि भक्ति में पूरी ख़बर की ज़रूरत नहीं पड़ती
- B कि उन्हें पहले से ही बहुत कम सुनाई पड़ता था
- C कि वे उस समय किसी बहुत ही बड़ी जल्दी में थीं
- D कि उन्हें किसी ने आकर पहले ही सब बता दिया था
Show answer
Why:
केवल एक आहट से ही उनका मन भर गया।
- A केवल पूर्व दिशा से
- B केवल पश्चिम दिशा से
- C किसी एक पर्वत की ओर से
- D चारों दिशाओं से
Show answer
Why:
वे उमड़-घुमड़कर आते हैं।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं और कारण अभिकथन को समझाता है। उमड़ना ऊपर चढ़ना है और घुमड़ना घूमना, इसलिए शब्द ही उनकी चाल बता देते हैं।
- A बिजली
- B दामन या आँचल
- C किसी तरह का दाम
- D कोई दिशा
Show answer
Why:
उसे आज दामिनी भी कहा जाता है।
- A कोई पुरानी झाड़ी
- B किसी तरह का झाड़ू
- C लगातार होती वर्षा
- D कोई झड़ा हुआ पत्ता
Show answer
Why:
यानी वह बारिश, जो रुकती नहीं।
- A कोई मेहराब
- B किसी तरह की मेहनत
- C कोई मेला
- D मेह या वर्षा
Show answer
Why:
पद में नन्हीं-नन्हीं बूँदों वाला मेह बरसता है।
- A कि वह कोमल बारिश है, तेज़ बौछार नहीं
- B कि वह बहुत देर तक लगातार होती रहती है
- C कि वह रुक-रुककर होती है
- D कि वह रात में होती है
Show answer
Why:
पूरा शब्द दोहराने से बूँदों का छोटा आकार साफ़ दिखने लगता है।
- A तेज़ और भारी
- B शीतल और सोहावन
- C गरम और सूखी
- D धीमी और ठहरी
Show answer
Why:
यानी ठंडी और सुहावनी हवा।
- A कोमल दृश्य से बड़े दृश्य की ओर
- B किसी क्रम में नहीं
- C बड़े दृश्य से कोमल दृश्य की ओर
- D भीतर से बाहर की ओर ही
Show answer
Why:
पहले बादल और बिजली, फिर नन्हीं बूँदें और शीतल पवन।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
तीनों कथन पद में हैं, और तीसरा ही बताता है कि बाहर का मौसम और भीतर का मन साथ-साथ चलते हैं।
- A गीत धारण करने वाला
- B पर्वत को धारण करने वाला
- C गायों को चराने वाला
- D गाँव की रक्षा करने वाला
Show answer
Why:
यह श्रीकृष्ण का एक नाम है।
- A किसी माँग पर
- B किसी प्रश्न या किसी बड़ी-सी शंका पर
- C आनंद और मंगल गाने की बात पर
- D किसी शिकायत या किसी बड़ी उलझन पर
Show answer
Why:
मंगल का अर्थ शुभ होता है।
- A रचना पर अपनी मुहर लगाने के लिए
- B रचना को और भी अधिक लंबी करने के लिए
- C केवल पंक्ति की तुक मिलाने के लिए ही
- D किसी नियम के कारण
Show answer
Why:
इससे पढ़ने वाले को रचनाकार का पता चल जाता है।
- A दोनों के अर्थ एक हैं
- B दोनों ब वर्ण से शुरू होते हैं
- C दोनों क्रिया हैं
- D दोनों पंक्ति के अंत में आते हैं
Show answer
Why:
इसी को वर्ण की आवृत्ति कहते हैं।
- A भारी
- B तेज़
- C गरम
- D शीतल
Show answer
Why:
यहीं पद का सबसे सुखद क्षण बनता है।
- A केवल बादलों के रंग लिखेंगे
- B केवल अपने मन की बात लिखेंगे, बाहर की कोई नहीं
- C कोई कहानी सुनाएँगे
- D बाहर का दृश्य और भीतर का भाव, दोनों रखेंगे
Show answer
Why:
इस पद में भी मौसम और मन, दोनों साथ चलते हैं।
Important short questions (7)
सावन की बदरिया बरस रही है और वह मन को भाने वाली है। उसमें बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आते हैं, बिजली चमकती है, नन्हीं बूँदें गिरती हैं और शीतल पवन बहती है।
क्योंकि उन्होंने हरि के आने की भनक सुनी है। भनक का अर्थ हल्की-सी ख़बर है, यानी पूरी ख़बर मिली भी नहीं थी।
मीरा कहती हैं कि नन्हीं-नन्हीं बूँदों वाला मेह बरस रहा है। साथ ही पवन शीतल और सुहावनी बताई गई है, इसलिए दृश्य डरावना नहीं, सुखद बनता है।
बाहर बादल, बिजली और बूँदें हैं, और भीतर मन की उमंग है। दोनों जुड़े हुए हैं, क्योंकि बाहर की बरसात ही भीतर की उमंग का कारण बनती है।
किसी एक वर्ण के बार-बार आने को आवृत्ति कहते हैं। बरसे और बदरिया, दोनों ब वर्ण से शुरू होते हैं, और इसी से पंक्ति सुंदर बन जाती है।
बदरिया का बादल, दामिन का बिजली, मेहा का वर्षा और मनवा का मन। सोभित को आज शोभित लिखा जाता है।
पहला पद श्रीकृष्ण के गुण पर समाप्त होता है, जहाँ उन्हें संतों का सुखदाई कहा गया है। दूसरा पद आनंद और मंगल गाने की बात पर समाप्त होता है।
Long answer questions (3)
मीरा कहती हैं कि सावन की बदरिया बरस रही है और वह मन को भाने वाली है। इस महीने में उनका मन उमंग से भर उठा है। कारण यह है कि उन्होंने हरि के आने की हल्की-सी ख़बर सुन ली है। आगे वे दृश्य बताती हैं। बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आ गए हैं और बिजली दमककर वर्षा की झड़ी ले आई है। उसके बाद नन्हीं-नन्हीं बूँदों वाला मेह बरसने लगता है और शीतल, सुहावनी पवन बहने लगती है। अंत में वे अपने प्रभु गिरधर को याद करके आनंद और मंगल गाने की बात कहती हैं।
मुझे लगता है कि बादल कोई लंबी बात नहीं कहते। वे पहले दूर से धीमी गरज में बोलते, मानो कोई आहट दे रहे हों। फिर बिजली एक बार चमककर उजाला कर देती, जैसे किसी के आने का रास्ता दिखाया जाता है। उसके बाद वे चारों दिशाओं से इकट्ठा होकर आते और कहते कि तैयार रहो, वह आ रहा है। बूँदें गिरते समय वे धीरे-धीरे बोलते, क्योंकि बड़ी ख़बर ऊँची आवाज़ में नहीं कही जाती। अंत में शीतल पवन उनका संदेश पूरा कर देती। यही कारण है कि मीरा को पूरी ख़बर नहीं, केवल भनक मिलती है, और उतने से ही उनका मन भर जाता है।
सबसे पहले आकाश बदल जाता है, क्योंकि उस पर घने बादल छा जाते हैं। दोपहर में भी हल्का अँधेरा जैसा लगने लगता है। गर्मी की तपन उतर जाती है और हवा ठंडी हो जाती है, ठीक जैसे पद में शीतल पवन की बात है। गली-मोहल्ले की ख़ाली ज़मीन पर हरी घास उग आती है और पेड़ धुलकर साफ़ दिखने लगते हैं। नालियों और गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे कहीं-कहीं आना-जाना कठिन हो जाता है। शाम को मेंढकों और कीड़ों की आवाज़ें बढ़ जाती हैं। इन सबके बीच मन अपने आप हल्का लगने लगता है, और यही बात इस पद में भी कही गई है।
Flashcards (17)
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- पद क्रम में लगाइए
- शब्द और आज का रूप
- बाहर या भीतर
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
Class 7 Hindi Chapter 10 — frequently asked questions
वे श्रीकृष्ण से कहती हैं कि वे उनकी आँखों में बस जाएँ। यानी वे कुछ माँगती नहीं, केवल यह चाहती हैं कि उनका ध्यान हर समय बना रहे।
उनकी मूरत मोहनी है, सूरत साँवली है और नैना विशाल हैं। उनके अधर पर मुरली सजी है और उर पर वैजयंती माला।
कमर पर नन्हीं घंटियाँ सजी हैं, और पैरों में नूपुर बाँधे हुए हैं, जिनकी आवाज़ मीठी बताई गई है।
सावन की बदरिया बरस रही है और वह मन को भाने वाली है। उसमें बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आते हैं, बिजली चमकती है, नन्हीं बूँदें गिरती हैं और शीतल पवन बहती है।
क्योंकि उन्होंने हरि के आने की भनक सुनी है। भनक का अर्थ हल्की-सी ख़बर है, यानी पूरी ख़बर मिली भी नहीं थी।
मीरा कहती हैं कि नन्हीं-नन्हीं बूँदों वाला मेह बरस रहा है। साथ ही पवन शीतल और सुहावनी बताई गई है, इसलिए दृश्य डरावना नहीं, सुखद बनता है।
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