Class 7 Hindi Chapter 4: पानी रे पानी
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- Hindi
जल-चक्र और पानी का चक्कर
पाठ पहले किताबी जल-चक्र याद दिलाता है, जिसमें समुद्र से उठी भाप बादल बनकर बरसती है और नदी फिर समुद्र में मिल जाती है। इसके बाद वह आज का चक्कर दिखाता है, जहाँ कहीं नल सूखे हैं और कहीं बस्तियाँ डूब रही हैं।
What you will be able to do
- मैं जल-चक्र के चरणों को क्रम से बता सकता/सकती हूँ।
- मैं पानी की कमी के कारण होने वाली तीन कठिनाइयाँ लिख सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि मोटर लगवाना पड़ोसियों का हक़ क्यों छीनता है।
- मैं समझा सकता/सकती हूँ कि अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू क्यों हैं।
- मैं पाठ की भाषा में आए बोलचाल के शब्दों को पहचान सकता/सकती हूँ।
Key points
भूगोल की किताब में जल-चक्र का एक सुंदर चित्र दिया रहता है।
उस चित्र में सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती और बरसात की बूँदें होती हैं।
समुद्र के ऊपर बनी भाप ऊपर उठकर बादल बनती है और फिर पानी बनकर गिरती है।
नदी अपने चारों तरफ़ का पानी लेकर उसी समुद्र में जा मिलती है।
आज नलों में पूरे समय पानी नहीं आता और आता है तो बेवक़्त।
झगड़ों से बचने के लिए कई घर पाइप में मोटर लगवा लेते हैं।
मोटर लगते ही आसपास के घरों का हिस्सा सिमटकर एक ही जगह पहुँचने लगता है।
शहरों में अब पानी भी बिकने लगा है और कई जगह अकाल जैसी हालत बनती है।
बरसात में वही पानी घरों, सड़कों और रेल की पटरियों पर भर जाता है।
Full explanation
एक प्रश्न से शुरुआत
पाठ किसी वर्णन से नहीं, एक प्रश्न से शुरू होता है। हमारा पानी कहाँ से आता है और फिर कहाँ चला जाता है। लेखक तुरंत जोड़ते हैं कि शायद हमने इस पर कभी सोचा न हो, पर पढ़ा ज़रूर है। यही पढ़ने और सोचने का अंतर पूरे पाठ की नींव है।
किताब वाला जल-चक्र
भूगोल की किताब में जल-चक्र का एक सुंदर चित्र दिया रहता है। उसमें सूरज है, समुद्र है, बादल हैं, हवा है, धरती है और बरसात की बूँदें हैं। चित्र में एक नदी बहती दिखती है, और उसके किनारे कोई गाँव या शहर बसा होता है।
चित्र के तीर
चित्र के दूसरे हिस्से में यही नदी आसपास का सारा जल समेटकर समुद्र तक पहुँचती दिखाई देती है। बीच-बीच में कुछ तीर भी खिंचे रहते हैं। ऊपर उठी भाप पहले बादल का रूप लेती है और फिर बूँदों में बदल जाती है। इन्हीं निशानों के सहारे पूरा सफ़र वहीं लौट आता है जहाँ से चला था।
किताबी बात और असली बात
यहीं लेखक एक वाक्य से रुख बदल देते हैं। वे कहते हैं कि यह सब तो जल-चक्र की किताबी बात है। इसके तुरंत बाद वे आज का चक्कर दिखाने लगते हैं। किताब का चक्र साफ़-सुथरा है, पर घर का चक्कर उलझा हुआ है।
नलों का हाल
अब नलों में पूरे समय पानी नहीं आता। नल खोलने पर पानी के बदले सूँ-सूँ की आवाज़ आने लगती है। पानी कभी आता भी है तो बेवक़्त, कभी देर रात और कभी बहुत सबेरे। लोग मीठी नींद छोड़कर बाल्टियाँ, बर्तन और घड़े भरते फिरते हैं।
झगड़े और मोटर
पानी को लेकर कई बार पड़ोसियों के बीच कहासुनी तक नौबत पहुँच जाती है। इन्हीं रोज़-रोज़ के झगड़ों से बचने के लिए कई घर अपने पाइप में मोटर लगवा लेते हैं। उन्हें लगता है कि इससे उनकी परेशानी मिट जाएगी।
हक़ छीनने जैसा काम
पर लेखक इसे साफ़ शब्दों में कहते हैं। मोटर लगने से पड़ोस के हिस्से का पानी सिमटकर एक ही जगह पहुँच जाता है, और यह आस-पास का हक़ छीनने जैसा काम है। एक घर इसे मजबूरी मानकर कर बैठे, तो मोहल्ले के और कई घर भी यही करने लगते हैं।
कमी और बढ़ जाती है
नतीजा उलटा निकलता है। जो मोटर एक घर की परेशानी घटाने के लिए लगी थी, वह पूरे मोहल्ले की कमी बढ़ा देती है। यह पाठ का एक महत्वपूर्ण सबक है, कि अकेले-अकेले निकाला गया हल सबके लिए नई समस्या बन सकता है।
पानी अब बिकने लगा
लेखक बताते हैं कि शहरों में पानी भी अब दुकान की चीज़ बन गया है। जो चीज़ कभी सबके लिए थी, वह अब ख़रीदी जाने लगी है। यह बदलाव छोटा नहीं है और पाठ इसे एक वाक्य में बहुत चुपचाप कह देता है।
बड़े शहर भी नहीं बचे
यह कमी केवल गाँवों या छोटे शहरों की नहीं है। प्रदेशों की राजधानियों तथा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई तथा बैंगलोर जैसे बड़े शहरों में भी लोग भयानक कष्ट में पड़ जाते हैं। देश के कई हिस्सों में अकाल जैसी हालत बन जाती है।
अब बरसात का मौसम
यह सब गर्मी के मौसम की बात थी। बरसात आते ही दृश्य पूरी तरह पलट जाता है। अब सब तरफ़ पानी ही बहने लगता है। घरों, स्कूलों, सड़कों और रेल की पटरियों तक पर पानी भर जाता है।
बाढ़ किसी को नहीं छोड़ती
देश के कई भाग बाढ़ में डूब जाते हैं। लेखक जोड़ते हैं कि यह बाढ़ न गाँवों को छोड़ती है और न मुंबई जैसे बड़े शहरों को। कुछ दिन सारा काम रुक जाता है, और बहुत कुछ बह भी जाता है।
एक ही सिक्के के दो पहलू
अब लेखक दोनों बातों को जोड़ देते हैं। अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, यानी पानी का बेहद कम हो जाना और बेहद ज़्यादा हो जाना। ऊपर से वे उलटी लगती हैं, पर उनकी जड़ एक ही है।
समझ और सँभाल
लेखक कहते हैं कि इन दोनों को पहचान लेना और उन पर क़ाबू पा लेना, दोनों ज़रूरी हैं। ऐसा हो जाए तो बहुत-सी परेशानियाँ अपने आप घट जाती हैं। ध्यान दीजिए कि वे दो काम कहते हैं, समझना और सँभालना। केवल जान लेना पर्याप्त नहीं माना गया।
पाठ की भाषा
इस पाठ की भाषा घर की भाषा है। तू-तू मैं-मैं, झगड़े-टंटे, बेवक़्त और सूँ-सूँ जैसे शब्द बोलचाल से सीधे आए हैं। इसी कारण बात भारी नहीं लगती और पाठक को लगता है कि कोई उसके पास बैठकर बात कर रहा है।
दो दृश्य, एक ही पाठ
ध्यान दीजिए कि लेखक पहले गर्मी का पूरा दृश्य खड़ा करते हैं और फिर बरसात का। दोनों दृश्य आमने-सामने रखने से उनका विरोध साफ़ दिखने लगता है। यही विरोध आगे सिक्के वाली बात तक ले जाता है। यदि केवल एक मौसम की बात होती, तो समस्या अधूरी दिखती।
लेखक किसी पर दोष नहीं डालते
पूरे पाठ में कहीं किसी व्यक्ति का नाम लेकर दोष नहीं दिया गया। मोटर लगवाने वालों को भी लेखक मजबूरी मानने वाला कहते हैं। वे काम को ग़लत बताते हैं, करने वाले को नहीं। इसी ढंग से बात चुभती नहीं और पहुँच भी जाती है।
Concepts and terms
पानी का वह गोल रास्ता, जिसमें वह समुद्र से भाप बनकर उठता है, बादल बनकर बरसता है, नदी बनकर बहता है और फिर समुद्र में लौट जाता है। यह चक्र कभी रुकता नहीं, इसीलिए इसे चक्र कहा जाता है। किताब में इसे तीरों वाले चित्र से दिखाया जाता है।
जब वर्षा न हो और पानी तथा अन्न की भारी कमी पड़ जाए, तो उस स्थिति को अकाल कहते हैं। पाठ बताता है कि देश के कई हिस्सों में गर्मी के मौसम में ऐसी ही हालत बन जाती है, जब नल सूख जाते हैं।
जब इतना पानी आ जाए कि वह अपनी जगह से बाहर निकलकर बस्तियों में भर जाए, तो उसे बाढ़ कहते हैं। पाठ कहता है कि यह न गाँवों को छोड़ती है और न मुंबई जैसे बड़े शहरों को।
यह एक मुहावरा है, जिसका अर्थ है एक ही चीज़ के दो रूप। लेखक अकाल और बाढ़ को इसी तरह जोड़ते हैं। दोनों अलग-अलग दिखती हैं, पर दोनों की जड़ एक ही है, कि हमने पानी को सँभालना छोड़ दिया।
किसी का जायज़ अधिकार ले लेना। जब एक घर पाइप में मोटर लगवा लेता है, तो वही पानी जो सबके लिए था, एक घर में खिंच आता है। लेखक इसे साफ़ शब्दों में आस-पास का हक़ छीनने जैसा काम कहते हैं।
यहाँ ध्यान रखिए
आम भ्रम
एक छोटा प्रसंग
Scenario:
एक मोहल्ले में सुबह केवल एक घंटे पानी आता है और सभी घर उसी समय अपने बर्तन भरते हैं। एक दिन कोने वाला घर अपने पाइप में मोटर लगवा लेता है, जिससे उनके यहाँ पानी तेज़ी से भर जाता है। अगले ही सप्ताह दो और घर मोटर ले आते हैं, फिर चार और। महीने भर में गली के आख़िरी छोर वाले घरों तक पानी पहुँचना लगभग बंद हो जाता है, जबकि नल का समय पहले जितना ही है। उन घरों के बच्चे अब दूर के हैंडपंप से पानी ढोकर लाते हैं और कई बार विद्यालय देर से पहुँचते हैं। मोहल्ले की बैठक बुलाई जाती है और सब एक-दूसरे पर दोष डालने लगते हैं।
Analysis:
यह प्रसंग पाठ की बात को लगभग ज्यों का त्यों दोहराता है। पहला घर कोई बुरा काम करने की नीयत से मोटर नहीं लगवाता, वह केवल अपनी परेशानी घटाना चाहता है। पर पाठ जिस बात पर ज़ोर देता है, वह यहीं दिखती है, कि ऐसा उपाय वहीं नहीं रुकता। हर अगला घर वही करता है और अंत में सबसे कमज़ोर स्थिति वालों तक पानी पहुँचना बंद हो जाता है। लेखक इसी को आस-पास का हक़ छीनना कहते हैं, और यह प्रसंग दिखाता है कि वह हक़ सबसे पहले किससे छिनता है।
Activity:
अपने घर में एक दिन गिनिए कि पानी किन-किन कामों में लगा। फिर सोचकर लिखिए कि इनमें से किन दो कामों में थोड़ा कम पानी से भी काम चल सकता था।
जल-चक्र बनाइए
Title:
जल-चक्र बनाइए
Safety:
यह गतिविधि केवल कॉपी पर बनाने की है। पानी लेकर कोई प्रयोग मत कीजिए और नल खुला छोड़कर मत जाइए।
What You Notice:
आप देखेंगे कि चक्र का कोई आरंभ या अंत नहीं है, क्योंकि किसी भी बिंदु से शुरू करके वहीं लौटा जा सकता है। यह भी दिखेगा कि बाहर लिखी दोनों बातें, यानी अकाल और बाढ़, इसी एक चक्र से जुड़ी हुई हैं।
Did you know
पाठ कहता है कि शहरों में पानी भी अब दुकान की चीज़ बन गया है।
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बैंगलोर जैसे बड़े शहरों में भी लोग पानी की कमी से भारी कष्ट पाते हैं।
बाढ़ आने पर कुछ दिनों तक तो जैसे सब कुछ ठहर जाता है और सब कुछ बह भी जाता है।
Memory tricks
जल-चक्र के पड़ाव — समुद्र, भाप, बादल, बरसात, नदी, फिर समुद्र। गोल घूमकर वहीं।
एक ही जड़ — गर्मी में सूखा नल, बरसात में डूबी सड़क। दोनों एक ही भूल से।
Practice MCQs with answers (25)
- A एक प्रश्न से
- B एक कहानी से
- C एक सूची से
- D एक पत्र से
Show answer
Why:
लेखक पहले ही वाक्य में पूछते हैं कि हमारा पानी कहाँ से आता है।
- A गणित की
- B भूगोल की
- C इतिहास की
- D हिंदी की
Show answer
Why:
पाठ में भूगोल की किताब का ही उल्लेख है।
- A नदी में
- B बर्फ़ में
- C बादल में
- D ओस में
Show answer
Why:
भाप बादल बनती है और फिर वही पानी बनकर बरसती है।
- A किसी तालाब में
- B किसी झील में
- C किसी कुएँ में
- D समुद्र में
Show answer
Why:
वह अपने चारों तरफ़ का पानी लेकर उसी समुद्र में जा मिलती है।
- A जल की यात्रा की दिशा का
- B नदी की गहराई का
- C आकाश में बादलों की संख्या का
- D समुद्र की दूरी और गहराई का
Show answer
Why:
इन्हीं तीरों के सहारे चक्र पूरा होता दिखाया जाता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है। चित्र ग़लत नहीं है, असल जीवन का चक्कर उससे अलग चलता है।
- A टप-टप
- B छप-छप
- C सूँ-सूँ
- D खट-खट
Show answer
Why:
यह ध्वनि की सीधी नकल करने वाला शब्द है।
- A ग़लत समय पर
- B बहुत जल्दी
- C ठीक समय पर
- D बार-बार
Show answer
Why:
पानी कभी देर रात और कभी बहुत सबेरे आता है, यानी बेवक़्त।
- A नल की मरम्मत करते हैं
- B मोटर ख़रीदने जाते हैं
- C पानी के लिए झगड़ते हैं
- D बर्तन और घड़े भरते हैं
Show answer
Why:
पानी बेवक़्त आता है, इसलिए उसी समय भरना पड़ता है।
- A आपसी झगड़े का
- B आपसी सहायता का
- C हँसी-मज़ाक का
- D चुप्पी का
Show answer
Why:
यह बोलचाल का प्रयोग है, जो कहासुनी के लिए आता है।
- A पानी साफ़ करने और छानने के लिए
- B रोज़ के झगड़ों से बचने के लिए
- C घर की बिजली बचा लेने के लिए
- D घर के पुराने नल बदलवाने के लिए
Show answer
Why:
लोग इसे मजबूरी मानकर यह काम कर बैठते हैं।
- A आसपास के घरों का हक़ छीनकर अपने घर खींच लेना
- B पानी के झगड़ों को सदा के लिए ख़त्म करने का उपाय
- C नल की मरम्मत से बचने का एक सस्ता और सीधा तरीक़ा
- D हर घर में पानी पहुँचाने का एक बहुत आवश्यक सुधार
Show answer
Why:
मोटर लगते ही पाइप का पानी एक ही घर में सिमट आता है। जो हिस्सा दूसरों का था, वह उन तक पहुँचना बंद हो जाता है।
- A और कई घर भी वही करने लगते हैं
- B सब लोग अपनी-अपनी मोटर हटा देते हैं
- C पानी की कमी अपने आप मिट जाती है
- D नल का समय तय हो जाता है
Show answer
Why:
इसी से पानी की कमी और बढ़ जाती है।
- A वह मुफ़्त बाँटा जा रहा है
- B वह केवल रात में आता है
- C वह बिकने लगा है
- D वह साफ़ हो गया है
Show answer
Why:
लेखक कहते हैं कि कई चीज़ों की तरह पानी भी बिकने लगा है।
- A दिल्ली
- B चेन्नई
- C कोलकाता
- D जयपुर
Show answer
Why:
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बैंगलोर के नाम आए हैं।
- A भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति
- B पानी और अन्न की भारी कमी
- C बहुत तेज़ आँधी का अचानक आना
- D नदी का सूख जाना
Show answer
Why:
देश के कई हिस्सों में गर्मी के मौसम में ऐसी ही हालत बनती है।
- A केवल खेतों में
- B केवल नदियों में, और कहीं नहीं
- C केवल गाँवों में
- D घरों, सड़कों और पटरियों पर
Show answer
Why:
स्कूल भी इसी सूची में गिनाए गए हैं।
- A वह केवल गाँवों में आती है
- B वह केवल बड़े शहरों में आती है
- C वह किसी को नहीं छोड़ती
- D वह अब आना बंद हो गई है
Show answer
Why:
वह न गाँवों को छोड़ती है और न मुंबई जैसे बड़े शहरों को।
- A क्योंकि दोनों एक ही मौसम में आते हैं
- B क्योंकि दोनों की जड़ एक ही है
- C क्योंकि दोनों से कोई हानि नहीं होती
- D क्योंकि दोनों केवल शहरों में होते हैं
Show answer
Why:
ऊपर से वे उलटी दिखती हैं, पर दोनों पानी को न सँभालने से आती हैं।
- A ख़रीदना और बेचना
- B पढ़ना और लिखना
- C समझना और सँभालना
- D गिनना और बाँटना
Show answer
Why:
केवल जान लेना पर्याप्त नहीं माना गया।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। दूसरा कथन ग़लत है, क्योंकि लेखक जल-चक्र को किताबी बात कहकर असल हालत उससे अलग बताते हैं।
- A वह बहुत कठिन है
- B वह घर की बोलचाल जैसी है
- C वह पूरी तरह संस्कृतनिष्ठ है
- D वह केवल अंकों में चलती है
Show answer
Why:
तू-तू मैं-मैं, झगड़े-टंटे और बेवक़्त जैसे शब्द इसी से आए हैं।
- A सबको पहले से अधिक पानी मिलेगा
- B और कई घर भी मोटर लगवाने लगेंगे
- C नल का समय तय हो जाएगा
- D मोहल्ले में पानी बिकना बंद होगा
Show answer
Why:
इसी से पूरे मोहल्ले की कमी और बढ़ जाती है।
- A किसी उत्सव के
- B किसी यात्रा के
- C किसी भोजन के
- D किसी झगड़े के
Show answer
Why:
झगड़े-टंटे एक साथ आए हैं और दोनों कहासुनी के लिए हैं।
- A मोटर
- B टोंटी
- C जाली
- D ताला
Show answer
Why:
पाठ कहता है कि पानी के झगड़ों से बचने के लिए कई घर पाइप में मोटर लगवा लेते हैं, और उससे आसपास का हिस्सा एक ही घर में सिमट जाता है।
Important short questions (7)
पानी के उस गोल रास्ते को, जिसमें वह समुद्र से भाप बनकर उठता है। फिर वह बादल बनकर बरसता है और नदी बनकर समुद्र में लौट जाता है।
क्योंकि किताब का चित्र साफ़-सुथरा और सीधा है। आज घरों में पानी का असली चक्कर उससे बहुत अलग और उलझा हुआ है।
नलों में पूरे समय पानी नहीं आता और आता है तो बेवक़्त। लोग नींद छोड़कर बर्तन भरते हैं और कभी-कभी आपस में झगड़ भी पड़ते हैं।
दूसरों के नल सूखे रह जाते हैं और पानी एक ही जगह भर जाता है। इससे बाक़ी घरों के हिस्से का पानी घट जाता है।
क्योंकि यह आस-पास का हक़ छीनने जैसा काम है। एक घर की सुविधा पूरे मोहल्ले की कमी बढ़ा देती है।
सब तरफ़ पानी बहने लगता है। घरों, स्कूलों, सड़कों और रेल की पटरियों तक पानी चढ़ आता है और कई भाग बाढ़ में डूब जाते हैं।
दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक में पानी बहुत कम होता है और दूसरे में बहुत ज़्यादा, पर दोनों की जड़ एक ही है।
Long answer questions (3)
भूगोल की किताब में जल-चक्र का एक सुंदर चित्र दिया रहता है। उस चित्र में सूरज, समुद्र, बादल, हवा और धरती सब एक साथ दिखाए जाते हैं, और साथ में बरसात की बूँदें भी। उसी में एक बहती हुई नदी होती है और उसके किनारे बसा कोई गाँव या शहर भी दिखता है। चित्र के दूसरे भाग में वही नदी अपने चारों तरफ़ का पानी समेटकर समुद्र में जा मिलती है। चित्र में कुछ तीर भी बने दिखाई देते हैं, जो यात्रा की दिशा बताते हैं। समुद्र से उठी भाप ऊपर जाकर बादल बनती है और वही बादल पानी बनकर बरसता है। इस तरह पानी एक ओर से चलकर फिर समुद्र में लौट आता है और जल-चक्र पूरा हो जाता है।
लेखक बताते हैं कि पानी बेवक़्त आता है और उसी को लेकर घरों में रोज़-रोज़ झगड़े होने लगते हैं। इन्हीं झगड़ों से बचने के लिए कई लोग अपने पाइप में मोटर लगवा लेते हैं। इसका असर यह होता है कि पड़ोस के हिस्से का पानी सिमटकर एक ही जगह पहुँच जाता है। लेखक इसे साफ़ शब्दों में आस-पास का हक़ छीनने जैसा काम कहते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह काम वहीं नहीं रुकता। जब मोहल्ले में कोई एक घर इसे मजबूरी मानकर कर बैठता है, तो और कई घर भी यही करने लगते हैं। इस तरह जो उपाय एक घर की परेशानी घटाने के लिए किया गया था, वह अंत में पूरे मोहल्ले की कमी बढ़ा देता है।
यह कहना पूरी तरह ठीक लगता है। ऊपर से देखने पर दोनों एक-दूसरे की उलटी स्थितियाँ हैं, क्योंकि एक में पानी बहुत कम हो जाता है और दूसरे में बहुत ज़्यादा। गर्मी के दिनों में नल सूख जाते हैं और कई जगह अकाल जैसी हालत बन जाती है। बरसात आते ही वही जगहें डूबने लगती हैं और सड़कों तथा पटरियों तक पर पानी भर जाता है। पर ध्यान से देखें तो दोनों का कारण एक ही है, कि हमने बरसात के पानी को रोककर रखना छोड़ दिया। जो पानी ज़मीन में जाना चाहिए था, वह बहकर निकल जाता है, इसलिए बरसात में बाढ़ आती है और बाद में कमी पड़ जाती है। इसीलिए लेखक कहते हैं कि दोनों को एक साथ समझना और सँभालना चाहिए।
Flashcards (17)
Play this topic
- जल-चक्र क्रम में
- शब्द और अर्थ
- कौन-सा मौसम
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
धरती की गुल्लक और उसकी रखवाली
लेखक धरती को एक विशाल गुल्लक कहते हैं, जिसमें प्रकृति वर्षा का पानी जमा करती है। तालाब और झीलें यही जमा करने का काम करती हैं। हमने उन्हें कचरे से पाटकर मकान और बाज़ार खड़े कर दिए, और उसी भूल की सज़ा अब भुगत रहे हैं।
What you will be able to do
- मैं गुल्लक वाली तुलना को अपने शब्दों में समझा सकता/सकती हूँ।
- मैं बता सकता/सकती हूँ कि तालाब और झीलें भूजल भंडार कैसे भरते हैं।
- मैं उस भूल को बता सकता/सकती हूँ जिसकी सज़ा पाठ में बताई गई है।
- मैं लेखक के सुझाए उपायों को क्रम से लिख सकता/सकती हूँ।
- मैं अनुपम मिश्र के बारे में चार बातें बता सकता/सकती हूँ।
Key points
लेखक पानी के चक्कर से हटकर गुल्लक की याद दिलाते हैं।
गुल्लक में हम थोड़े-थोड़े सिक्के और नोट जमा करते जाते हैं।
ज़रूरत पड़ने पर उसी बचत का उपयोग कर लेते हैं।
धरती भी मिट्टी की बनी एक खूब बड़ी गुल्लक है।
प्रकृति वर्षा के मौसम में उसमें खूब पानी बरसाती है।
धरती की इस गुल्लक को भरने का काम तालाब और झील करते हैं।
उनका पानी रिसकर और छनकर भूजल भंडार में जा मिलता है।
हमने ज़मीन के लालच में तालाबों को कचरे से पाटकर समतल कर दिया।
उन पर मकान, बाज़ार, स्टेडियम और सिनेमा खड़े हो गए।
Full explanation
पानी से हटकर गुल्लक तक
लेखक अचानक विषय बदलते हैं। वे कहते हैं, अब पानी की बात कुछ देर छोड़ दो और एक पल अपनी गुल्लक के बारे में सोचो। यह छलाँग अटपटी लगती है, पर आगे पता चलता है कि यही पूरे पाठ की सबसे काम की तुलना है।
गुल्लक कैसे भरती है
किसी से थोड़े पैसे मिलते ही बच्चा दौड़कर उन्हें अपनी गुल्लक के हवाले कर देता है। उसमें कभी सिक्के डाले जाते हैं और कभी कोई छोटा नोट। यह सब बहुत धीरे-धीरे इकट्ठा होता रहता है, और एक ही दिन में कोई गुल्लक नहीं भरती।
और कब काम आती है
फिर जब कभी कुछ पैसों की ज़रूरत पड़ती है, तो हम उसी बचत का उपयोग कर लेते हैं। ध्यान दीजिए कि जमा करना और निकालना, दोनों अलग-अलग समय पर होते हैं। जमा पहले होता है और काम बाद में आता है।
धरती भी एक गुल्लक है
अब लेखक तुलना खोलते हैं। हमारी धरती भी ठीक ऐसी ही एक गुल्लक है, बस बहुत बड़ी और मिट्टी से बनी। बारिश के दिनों में प्रकृति इसी में जी भरकर पानी उड़ेलती रहती है। बरसात ही वह समय है जब जमा होना चाहिए।
रुपयों से कीमती
लेखक जोड़ते हैं कि यह वर्षा रुपयों से भी कई गुना कीमती है। इसलिए उसे इस बड़ी गुल्लक में जमा कर लेना चाहिए। यहाँ तुलना एक क़दम और आगे बढ़ जाती है, क्योंकि अब पानी केवल पानी नहीं, बचत बन गया है।
तालाब और झील का काम
गाँव और शहर में जो छोटे-बड़े तालाब और झील हैं, वे धरती के भीतर पानी पहुँचाने का रास्ता बनाए रखते हैं। वे केवल सुंदर दिखने वाली जगहें नहीं हैं। उनका असली काम दिखाई नहीं देता, क्योंकि वह ज़मीन के नीचे होता है।
रिसकर और छनकर
तालाब में ठहरा पानी धीरे-धीरे रिसता और छनता हुआ नीचे जाता है, और वहाँ छिपे जल-भंडार में मिल जाता है। रिसना यानी टपककर नीचे जाना और छनना यानी मिट्टी से होकर साफ़ होना। इसी से भूजल भंडार समृद्ध होता जाता है।
न दिखने वाला ख़ज़ाना
लेखक इसे ख़ज़ाना कहते हैं। पानी का यह ख़ज़ाना हमें दिखता नहीं, लेकिन इसी से हम बरसात बीत जाने के बाद पूरे साल भर पानी निकालते हैं। घर में, खेतों में और पाठशाला में, सब जगह यही काम आता है।
एक दौर ऐसा भी आया
फिर कहानी मुड़ती है। लेखक कहते हैं कि आगे चलकर समय ऐसा आया, जब हम इस छिपे ख़ज़ाने की क़ीमत भूल बैठे। भूलने का कारण भी वे बताते हैं, और वह है ज़मीन का लालच।
तालाब पाट दिए गए
इसी लालच में तालाबों को कचरे से भर दिया गया और ज़मीन समतल कर ली गई। पाटना यानी गड्ढे को भरकर बराबर कर देना। जो जगह पानी जमा करती थी, वह अब सपाट ज़मीन बन गई।
उन पर क्या खड़ा हुआ
देखते-ही-देखते इन पर कहीं मकान खड़े हो गए, कहीं बाज़ार, कहीं स्टेडियम और कहीं सिनेमा। ये सब काम की चीज़ें हैं, पर वे उस जगह पर बनीं जो धरती की गुल्लक का मुँह थी। मुँह बंद हो गया तो जमा होना भी बंद हो गया।
सज़ा अब मिल रही है
लेखक सीधा कहते हैं कि इस बड़ी गलती की सज़ा अब हम सबको मिल रही है। गर्मी आते ही नल जवाब दे जाते हैं, और बरसात में वही बस्तियाँ पानी में घिर जाती हैं। दोनों कष्ट उसी एक भूल से निकले हैं।
अब करना क्या है
इसीलिए लेखक कहते हैं कि यदि अकाल और बाढ़ से बचना है, तो अपने चारों ओर के जलस्रोतों, तालाबों और नदियों की अच्छे ढंग से रखवाली करनी पड़ेगी। रखवाली शब्द ध्यान देने योग्य है, क्योंकि उसमें देखभाल भी है और बचाव भी।
चार बातें, एक नतीजा
अंत में लेखक चार बातें एक साथ रखते हैं। जल-चक्र को ठीक से समझें, बरसात का पानी रोककर रखें, नीचे का भंडार बचाकर रखें, और अपनी गुल्लक भरते चलें। तभी ज़रूरत के समय पानी की कमी कभी सामने नहीं आएगी।
चेतावनी वाला अंत
पाठ का अंतिम वाक्य एक चेतावनी है। उनका कहना है कि इस चक्र से सही काम न लिया गया, तो पानी की उलझन हमें और गहरे खींचती चली जाएगी। यहाँ चक्र और चक्कर, दोनों शब्द साथ आते हैं और यही पाठ के शीर्षक तक ले जाते हैं।
तुलना इतनी अच्छी क्यों बैठती है
गुल्लक की तुलना बच्चों के लिए चुनी गई है। हर बच्चा गुल्लक जानता है। उसे पता है कि वह एक दिन में नहीं भरती। उसे यह भी पता है कि फोड़ देने पर सब ख़त्म हो जाता है। लेखक इसी जानी-पहचानी बात के सहारे एक अनजानी बात समझा देते हैं।
शीर्षक तक लौटना
पाठ का नाम है पानी रे पानी। अंत में लेखक चक्र और चक्कर, दोनों शब्द साथ रख देते हैं। चक्र प्रकृति का है और चक्कर हमारा बनाया हुआ। यदि पहले को न समझें तो दूसरे में फँसना तय है। शीर्षक इसी दोहरे अर्थ की ओर संकेत करता है।
Concepts and terms
लेखक धरती को मिट्टी की बनी एक बहुत बड़ी गुल्लक कहते हैं। जैसे हम सिक्के थोड़े-थोड़े करके जमा करते हैं और ज़रूरत पर निकालते हैं, वैसे ही वर्षा का पानी धरती में जमा होता है और बाद में साल भर काम आता है।
ज़मीन के नीचे छिपा हुआ पानी का वह भंडार, जिससे हम कुएँ और नल के ज़रिए पानी लेते हैं। लेखक इसे ख़ज़ाना कहते हैं, जो दिखता नहीं पर पूरे साल काम आता है। तालाबों का पानी रिसकर इसी भंडार को समृद्ध करता है।
रिसना यानी धीरे-धीरे टपककर नीचे जाना और छनना यानी मिट्टी की परतों से होकर साफ़ होते जाना। तालाब का पानी इन्हीं दो तरीक़ों से ज़मीन के नीचे पहुँचता है, इसलिए वह केवल जमा नहीं होता, साफ़ भी होता जाता है।
किसी गड्ढे या तालाब को मिट्टी या कचरे से भरकर बराबर कर देना। पाठ कहता है कि हमने अपने तालाबों को कचरे से पाटकर समतल बना दिया। इसी एक शब्द में पूरी भूल आ जाती है।
किसी चीज़ की देखभाल और रक्षा करना। लेखक कहते हैं कि अकाल और बाढ़ से बचने के लिए हमें अपने आस-पास के जलस्रोतों, तालाबों और नदियों की अच्छे ढंग से रखवाली करनी पड़ेगी।
यहाँ ध्यान रखिए
आम भ्रम
एक छोटा प्रसंग
Scenario:
एक कस्बे के बीचोंबीच पुराना तालाब था, जिसमें बरसात का पानी भरकर महीनों रहता था। आसपास के कुओं में साल भर पानी रहता और लोग कहते थे कि यह तालाब की देन है। कुछ वर्ष पहले तालाब में कचरा डाला जाने लगा और धीरे-धीरे वह भर गया। उसी जगह एक बड़ा बाज़ार और पक्की सड़क बन गई, जिससे दुकानदारों को लाभ भी हुआ। अब स्थिति यह है कि गर्मी आते ही कुएँ जवाब दे जाते हैं और लोग टैंकर से पानी ख़रीदते हैं। उधर बरसात में वही बाज़ार दो-दो फुट पानी में डूब जाता है, क्योंकि पानी को फैलने की पुरानी जगह नहीं मिलती। कस्बे की सभा में अब बहस चल रही है कि किया क्या जाए।
Analysis:
यह प्रसंग पाठ की दोनों बातों को एक साथ दिखाता है। पहली यह कि तालाब का असली काम दिखाई नहीं देता था, और इसीलिए उसे भरते समय किसी को नुक़सान नहीं लगा। कुओं में साल भर पानी रहना उसी रिसाव का नतीजा था, जिसे लेखक रिसकर और छनकर कहते हैं। दूसरी बात यह कि एक ही भूल ने दोनों मौसम बिगाड़ दिए, क्योंकि गर्मी में कुएँ सूखे और बरसात में बाज़ार डूबा। यह ठीक वही है जिसे लेखक एक सिक्के के दो पहलू कहते हैं।
Activity:
अपने गाँव या मोहल्ले का एक नक़्शा बनाइए और उसमें हर वह जगह चिह्नित कीजिए जहाँ बरसात का पानी ठहरता है। फिर लिखिए कि इनमें से कौन-सी जगह अब भी खुली है और कौन-सी भर दी गई है।
पानी कहाँ जाता है
Title:
पानी कहाँ जाता है
Safety:
बहुत थोड़ा पानी लीजिए और उसे फ़र्श पर मत गिराइए, वरना फिसलने का ख़तरा रहता है। प्रयोग शिक्षक की उपस्थिति में ही कीजिए।
What You Notice:
आप देखेंगे कि मिट्टी और घास वाली जगह पानी को जल्दी सोख लेती है, जबकि पक्के फ़र्श पर वह बहता रहता है। इसी से समझ आता है कि तालाब और खुली ज़मीन धरती की गुल्लक का मुँह क्यों कहलाते हैं।
Did you know
अनुपम मिश्र लेखक और संपादक होने के साथ-साथ छायाकार भी थे।
उनकी पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब का अनुवाद ब्रेल लिपि सहित अनेक भाषाओं में हुआ है।
गांधी मार्ग नाम की पत्रिका उन्होंने ही शुरू की थी और वर्षों उसका संपादन किया।
Memory tricks
गुल्लक का सूत्र — बरसात में जमा करो, साल भर निकालो।
लेखक के चार काम — चक्र समझो, बरसात थामो, भंडार बचाओ, गुल्लक भरो।
Practice MCQs with answers (25)
- A नदी की
- B किताब की
- C गुल्लक की
- D बारिश की
Show answer
Why:
यह छलाँग अटपटी लगती है, पर यही पाठ की सबसे काम की तुलना है।
- A कि बच्चों को बचपन से ही बचत करनी चाहिए
- B कि पानी भी इसी तरह जमा करके रखा जाता है
- C कि सिक्के मिट्टी के ही बने होते हैं, और कुछ नहीं
- D कि गुल्लक बहुत बड़ी होती है, भारी भी होती है
Show answer
Why:
जमा पहले होता है और काम बाद में आता है, दोनों जगह यही नियम चलता है।
- A काँच की
- B लोहे की
- C मिट्टी की
- D लकड़ी की
Show answer
Why:
वे उसे मिट्टी की बनी विशाल गुल्लक कहते हैं।
- A नगरपालिका
- B किसान
- C विद्यालय
- D प्रकृति
Show answer
Why:
वर्षा के मौसम में प्रकृति ही खूब पानी बरसाती है।
- A रुपयों से
- B अनाज से
- C सोने के गहनों से
- D ज़मीन के भीतर से
Show answer
Why:
वे कहते हैं कि यह रुपयों से भी कई गुना कीमती है।
- A उन पर नाव चलाना और घुमाना
- B उनमें मछली पालना और बेचना
- C धरती की गुल्लक को भरना
- D आसपास का दृश्य सुंदर बनाना
Show answer
Why:
उनका असली काम दिखाई नहीं देता, क्योंकि वह ज़मीन के नीचे होता है।
- A बहकर
- B रिसकर
- C उड़कर
- D जमकर
Show answer
Why:
रिसना यानी टपककर नीचे जाना।
- A पानी का जम जाना
- B पानी का भाप बनकर उड़ जाना
- C पानी का बहुत तेज़ बहने लगना
- D पानी का साफ़ होते जाना
Show answer
Why:
मिट्टी की परतों से होकर पानी साफ़ होता चला जाता है।
- A ख़ज़ाना
- B सागर
- C कुआँ
- D नहर
Show answer
Why:
यह ख़ज़ाना दिखता नहीं, फिर भी साल भर काम आता है।
- A वह बहुत दूर है
- B वह ज़मीन के नीचे है
- C वह बहुत छोटा है
- D वह रात में ही रहता है
Show answer
Why:
इसी कारण उसका महत्व भूल जाना आसान हो जाता है।
- A केवल घर में
- B केवल खेतों और बाग़-बग़ीचों में
- C केवल पाठशाला में, घर या खेत में नहीं
- D घर, खेत और पाठशाला, तीनों में
Show answer
Why:
बरसात बीत जाने के बाद पूरे साल भर यही काम आता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है। पाठ कारण समय की कमी नहीं, ज़मीन का लालच बताता है।
- A गहरा खोदकर बड़ा करना
- B ऊँचा उठाकर बड़ा करना
- C भरकर बराबर करना
- D घेर देना
Show answer
Why:
तालाबों को कचरे से पाटकर समतल बना दिया गया।
- A रेत से
- B कचरे से
- C पत्थरों से
- D पेड़ों से
Show answer
Why:
पाठ में कचरे से पाटने की बात कही गई है।
- A मकान
- B बाज़ार
- C स्टेडियम
- D अस्पताल
Show answer
Why:
पाठ में मकान, बाज़ार, स्टेडियम और सिनेमा गिनाए गए हैं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
तीनों कथन पाठ में हैं, और तीसरा पहले दोनों की सज़ा समझा देता है: भरने वाले रास्ते ही बंद कर दिए गए।
- A जलस्रोतों, तालाबों और नदियों की
- B मकानों, बाज़ारों और नई दुकानों की
- C सिनेमा और स्टेडियम की
- D सड़कों और पटरियों की
Show answer
Why:
इसी से अकाल और बाढ़, दोनों से बचा जा सकता है।
- A ख़रीद और बिक्री
- B देखभाल और बचाव
- C गिनती और बँटवारा
- D सफ़ाई और सजावट
Show answer
Why:
इसी कारण लेखक ने यही शब्द चुना है।
- A दो
- B तीन
- C चार
- D पाँच
Show answer
Why:
चक्र समझना, बरसात थामना, भंडार बचाना और गुल्लक भरना।
- A एक चेतावनी के रूप में
- B एक प्रश्न के रूप में
- C एक कहानी के रूप में
- D एक धन्यवाद के रूप में
Show answer
Why:
वे कहते हैं कि तब हम पानी के इस फेर में उलझते चले जाएँगे।
- A अनुपम मिश्र
- B हरिऔध
- C मैथिलीशरण गुप्त
- D सोहनलाल द्विवेदी
Show answer
Why:
वे लेखक, संपादक और पर्यावरणविद थे।
- A खेल के
- B संगीत, कला और नृत्य के
- C पर्यावरण संरक्षण के
- D चिकित्सा के
Show answer
Why:
उन्होंने इस क्षेत्र में अनेक प्रयोगात्मक कार्य किए।
- A एक पत्रिका
- B एक कविता
- C एक नाटक
- D एक पुस्तक
Show answer
Why:
यह उनकी सबसे चर्चित पुस्तक है।
- A एक पत्रिका
- B एक सड़क
- C एक पुस्तक
- D एक विद्यालय
Show answer
Why:
वे इसके संस्थापक और संपादक भी थे।
- A बरसात कम हो जाएगी
- B भूजल भंडार भरना कम हो जाएगा
- C नल का समय बढ़ जाएगा
- D पानी पहले से और सस्ता हो जाएगा
Show answer
Why:
तालाब ही वह जगह है जहाँ से पानी रिसकर नीचे जाता है।
Important short questions (7)
मिट्टी की बनी एक बड़ी गुल्लक से। जैसे गुल्लक में थोड़ा-थोड़ा धन जमा होता है, वैसे ही धरती में वर्षा का पानी जमा होता है।
धरती की इस गुल्लक को भरने का काम वही करती हैं। उनका पानी रिसकर और छनकर ज़मीन के नीचे भूजल भंडार तक पहुँचता है।
क्योंकि वह बहुत क़ीमती है और हमें दिखाई नहीं देता। फिर भी बरसात बीत जाने के बाद पूरे साल भर हमारे काम आता है।
ज़मीन के लालच में तालाबों को कचरे से पाटकर समतल बना देना। और उन पर मकान, बाज़ार तथा सिनेमा खड़े कर देना।
गर्मी आते ही नल जवाब दे जाते हैं। बरसात आने पर वही बस्तियाँ पानी में घिर जाती हैं।
जल-चक्र ठीक से समझें, बरसात हो तो उसे थाम लें, भूजल भंडार सुरक्षित रखें और अपनी गुल्लक भरते रहें।
वे प्रखर लेखक, संपादक, पर्यावरणविद और छायाकार थे। आज भी खरे हैं तालाब उनकी सबसे चर्चित पुस्तक है।
Long answer questions (3)
लेखक पहले साधारण गुल्लक की बात करते हैं। जब भी कोई हमें पैसा देता है, हम ख़ुश होकर उसे गुल्लक में डाल देते हैं। इस तरह एक रुपया, दो रुपया, कभी सिक्के तो कभी नोट धीरे-धीरे जमा होते चले जाते हैं। फिर जब ज़रूरत पड़ती है, तो उसी बचत से काम चल जाता है। इसके बाद वे इसी बात को धरती पर लागू करते हैं। धरती भी मिट्टी की बनी एक खूब बड़ी गुल्लक है, जिसमें प्रकृति वर्षा के दिनों में खूब पानी बरसा देती है। तालाब और झीलें उसमें पानी भरने का काम करती हैं, क्योंकि उनका पानी रिसकर और छनकर भूजल भंडार तक पहुँचता है। बाद में बरसात बीत जाने पर हम उसी जमा पानी को साल भर निकालकर काम में लाते हैं। तुलना इसलिए ठीक बैठती है, क्योंकि दोनों जगह जमा करने और निकालने का समय अलग-अलग होता है।
इसका कारण लेखक ज़मीन का लालच बताते हैं। एक दौर ऐसा आया जब लोग ज़मीन के नीचे छिपे पानी के ख़ज़ाने का महत्व भूल गए और अपने तालाबों को कचरे से पाटकर समतल बना दिया। देखते-ही-देखते उन जगहों पर कहीं मकान, कहीं बाज़ार, कहीं स्टेडियम और कहीं सिनेमा खड़े हो गए। परिणाम दो रूपों में सामने आया। पहला यह कि वर्षा का पानी अब ज़मीन के नीचे जाने के बजाय ऊपर ही बहकर निकल जाता है, इसलिए गर्मी आते ही नल जवाब देने लगते हैं। दूसरा यह कि उसी बहते पानी को रुकने की जगह नहीं मिलती, इसलिए बरसात में बस्तियाँ पानी में घिर जाती हैं। लेखक इसी को बड़ी गलती की सज़ा कहते हैं।
लेखक चार बातें कहते हैं। जल-चक्र ठीक से समझें। बरसात हो तो उसे थाम लें। भूजल भंडार सुरक्षित रखें। और अपनी गुल्लक भरते रहें। मुझे इनमें बरसात को थाम लेना सबसे ज़रूरी लगता है। इसका कारण यह है कि बाक़ी तीनों बातें इसी पर टिकी हैं। यदि बरसात का पानी रोका ही न जाए तो भंडार भरेगा नहीं। और जब भंडार ही नहीं भरेगा तो उसे बचाने का प्रश्न बाद का हो जाता है। दूसरी बात यह है कि यही एक काम दोनों कष्ट घटाता है। रुका हुआ पानी बरसात में बाढ़ कम करता है। वही पानी बाद में कमी भी कम करता है। तीसरी बात यह है कि यह काम अपने मोहल्ले में भी शुरू हो सकता है। इसलिए यह सोचने की नहीं, करने की बात है।
Flashcards (17)
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- पानी का रास्ता क्रम में
- शब्द और अर्थ
- गुल्लक भरती है या ख़ाली करती है
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
Class 7 Hindi Chapter 4 — frequently asked questions
पानी के उस गोल रास्ते को, जिसमें वह समुद्र से भाप बनकर उठता है। फिर वह बादल बनकर बरसता है और नदी बनकर समुद्र में लौट जाता है।
क्योंकि किताब का चित्र साफ़-सुथरा और सीधा है। आज घरों में पानी का असली चक्कर उससे बहुत अलग और उलझा हुआ है।
नलों में पूरे समय पानी नहीं आता और आता है तो बेवक़्त। लोग नींद छोड़कर बर्तन भरते हैं और कभी-कभी आपस में झगड़ भी पड़ते हैं।
मिट्टी की बनी एक बड़ी गुल्लक से। जैसे गुल्लक में थोड़ा-थोड़ा धन जमा होता है, वैसे ही धरती में वर्षा का पानी जमा होता है।
धरती की इस गुल्लक को भरने का काम वही करती हैं। उनका पानी रिसकर और छनकर ज़मीन के नीचे भूजल भंडार तक पहुँचता है।
क्योंकि वह बहुत क़ीमती है और हमें दिखाई नहीं देता। फिर भी बरसात बीत जाने के बाद पूरे साल भर हमारे काम आता है।
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