Class 8 Hindi Chapter 7: मत बाँधो
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पंख और गति
कविता एक मनाही से शुरू होती है और सपनों के पंख तथा गति, दोनों की रक्षा माँगती है। फिर सुगंध, बीज और अग्नि-धूम के तीन एकतरफ़ा उदाहरण रखकर यह दिखाया जाता है कि सपना ही वह चीज़ है जिसमें दोनों गति हैं — वह उड़ता है और आँखों में लौट आता है।
What you will be able to do
- सौरभ, नभ, गगन और धूम शब्दों के अर्थ लिख सकूँगा।
- पंख काटने और गति बाँधने का अंतर अपने शब्दों में बता सकूँगा।
- तीनों एकतरफ़ा उदाहरण गिनाकर उनकी साझा बात समझा सकूँगा।
- सपने में दोनों गति होने का अर्थ उदाहरण देकर लिख सकूँगा।
- कविता की मनाही अपने आसपास की किसी स्थिति पर लगा सकूँगा।
Key points
कविता का शीर्षक कोई नाम नहीं, एक मनाही है — और वही उसका स्वर तय करता है।
पंख काटना क्षमता छीनना है; गति बाँधना क्षमता रहने देकर सीमा तय करना है।
कविता किसी का नाम नहीं लेती, इसलिए मनाही हर पाठक पर लागू हो जाती है।
सौरभ यानी सुगंध ऊपर जाकर फैल जाती है और लौटाई नहीं जा सकती।
बीज नीचे गिरकर वहीं रह जाता है, यानी उसकी गति उलटी दिशा की एकतरफ़ा गति है।
अग्नि नीचे ही जलती है और धुआँ ऊपर ही उठता है — एक घटना, दो बँधे हिस्से।
सपने में दोनों गति हैं, और वह उड़कर आँखों में लौट आता है।
पहले दो उदाहरण प्रश्न के रूप में रखे गए हैं, जिससे उत्तर पाठक के मन में बनता है।
कविता में मनाही है, पर कोई नाम, कोई शिकायत और कोई दंड नहीं है।
Full explanation
शीर्षक ही एक मनाही है
इस कविता का शीर्षक कोई नाम नहीं है। वह एक मनाही है — मत बाँधो। ध्यान दीजिए, कवयित्री यह नहीं कहतीं कि सपने देखो। वे किसी और से कुछ न करने को कहती हैं। इससे कविता का स्वर आरंभ से ही बदल जाता है। यह सलाह नहीं है, यह एक निवेदन है, और निवेदन उसी से किया जाता है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति हो। पूरी कविता इसी एक स्वर में चलती है।
पहली दो पंक्तियाँ
कविता शुरू होती है — इन सपनों के पंख न काटो, इन सपनों की गति मत बाँधो! दोनों पंक्तियाँ एक ही बात कहती दिखती हैं, पर उनमें अंतर है। पंख काटना क्षमता छीन लेना है; गति बाँधना क्षमता रहने देकर उसका उपयोग तय कर देना है। पहली मनाही बड़ी है, दूसरी बारीक। दोनों को साथ रखकर कवयित्री कहती हैं कि रोक किसी भी रूप में न हो।
संबोधन किसके लिए है
कविता में कोई नाम नहीं आता, इसलिए यह सवाल बचा रहता है कि मनाही किससे की जा रही है। उत्तर कई हो सकते हैं। घर के बड़े, शिक्षक, समाज — वे सब जो किसी के सपने पर कुछ कह सकते हैं। और एक उत्तर यह भी है कि हम स्वयं। कई बार अपनी ही गति हम डर के कारण बाँध लेते हैं। नाम न लेने से कविता हर पाठक पर लागू हो जाती है।
पहला उदाहरण — सौरभ
अब कवयित्री उदाहरण देने लगती हैं, और पहला उदाहरण सुगंध का है — सौरभ उड़ जाता है नभ में, फिर वह लौट कहाँ आता है? सौरभ का अर्थ है सुगंध। फूल से उठकर वह हवा में फैल जाती है, और फिर उसे लौटाया नहीं जा सकता। यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि कवयित्री इसे दोष नहीं कह रही हैं। वे केवल एक तथ्य रख रही हैं — यह गति एक तरफ़ की है।
दूसरा उदाहरण — बीज
दूसरा उदाहरण पहले का उलटा है — बीज धूलि में गिर जाता जो, वह नभ में कब उड़ पाता है? बीज नीचे गिरता है और वहीं रह जाता है। उसकी गति भी एक तरफ़ की है, पर दिशा उलटी है। पहला उदाहरण ऊपर जाता था और लौटता नहीं था; यह नीचे आता है और ऊपर नहीं जाता। दोनों मिलकर एक जोड़ा बना देते हैं।
तीसरा उदाहरण — अग्नि और धूम
तीसरा उदाहरण दो चीज़ों का है — अग्नि सदा धरती पर जलती, धूम गगन में मँडराता है! अग्नि नीचे ही रहती है और धुआँ ऊपर ही उठता है। यहाँ एक ही घटना के दो हिस्से हैं, और हर हिस्सा अपनी एक दिशा में बँधा है। आग ऊपर नहीं जा सकती, धुआँ नीचे नहीं लौट सकता। तीनों उदाहरण अब पूरे हो गए।
तीनों में एक ही कमी
इन तीनों उदाहरणों में जो बात साझा है, वही कविता का तर्क बनाती है। हर चीज़ की गति एक तरफ़ की है। सुगंध जाकर लौटती नहीं, बीज गिरकर उठता नहीं, आग और धुआँ अपनी-अपनी जगह बँधे हैं। प्रकृति की ये चीज़ें शक्तिशाली हैं, फिर भी आधी-आधी हैं। कवयित्री इन्हें कमज़ोर नहीं कह रही हैं; वे इन्हें एक पैमाना बना रही हैं।
और फिर सपना
अब वह पंक्ति आती है जिसके लिए पूरी तैयारी हुई थी — सपनों में दोनों ही गति हैं। एक छोटे वाक्य में सपना उन तीनों से आगे निकल जाता है। जो काम सुगंध नहीं कर सकती और बीज नहीं कर सकता, वह सपना कर लेता है — वह ऊपर भी जाता है और नीचे भी आता है। तुलना इतनी देर से खोली गई है कि पढ़ने वाला उसे मानने के लिए तैयार हो चुका होता है।
उड़कर आँखों में आना
अगली पंक्ति उस वापसी का चित्र देती है — उड़ कर आँखों में आता है! ध्यान दीजिए कि सपना आकाश से लौटकर किसी और जगह नहीं आता, आँखों में आता है। यह चुनाव सोचा हुआ है। आँख वही जगह है जहाँ सपना पहले बना था, और वही जगह है जहाँ से वह दूसरों को दिख सकता है। लौटना यहाँ हार नहीं है, पूरा होना है।
प्रश्न पूछकर कहने का ढंग
पहले दो उदाहरणों में कवयित्री सीधा कथन नहीं देतीं। वे प्रश्न पूछती हैं — सुगंध कहाँ लौटती है, बीज कब उड़ पाता है? प्रश्न का उत्तर पहले से मालूम है, फिर भी वह पूछा जाता है। इसका कारण यह है कि उत्तर पाठक के मन में बने तो वह अधिक देर टिकता है। यह कविता का एक औज़ार है, और आगे भी काम करता रहेगा।
पंख की कल्पना क्यों
सपनों के साथ पंख जोड़ने का चुनाव भी देखिए। पंख वाली चीज़ अपनी मरज़ी से दिशा चुनती है, ऊँचाई चुनती है, और लौटने का समय भी चुनती है। बस एक बात उस पर टिकी है — पंख बचे रहें। इसीलिए पहली पंक्ति में सबसे पहले पंख का नाम आता है। कवयित्री सबसे पहले उसी चीज़ की रक्षा माँगती हैं जिस पर पूरी उड़ान टिकी है।
कविता किसी को दोष नहीं देती
यह बात ध्यान में रखने योग्य है। पूरी कविता में कोई नाम नहीं है, कोई शिकायत नहीं है, और कोई दंड नहीं बताया गया। मनाही है, पर क्रोध नहीं। कवयित्री किसी को बुरा नहीं कहतीं — वे केवल एक अनुरोध रखती हैं और उसके पीछे तीन उदाहरण रख देती हैं। इस ढंग से कही गई बात सुनने वाले को लड़ने का कारण नहीं देती।
पुकार एक नहीं, बार-बार
मत बाँधो, मत रोको, न काटो — ये शब्द कविता में लौट-लौटकर आते हैं। एक ही बात दोहराने से वह हल्की नहीं पड़ती, भारी हो जाती है। जैसे कोई व्यक्ति बहुत ज़रूरी बात कहते समय उसे दो बार कहता है। अंत में कविता उन्हीं दो पंक्तियों पर लौट आती है जिनसे वह शुरू हुई थी, और इस तरह पूरा घेरा बंद हो जाता है।
आज के जीवन में
इस भाग की जाँच रोज़ हो सकती है। कोई साथी कहे कि वह चित्र बनाना चाहता है और उससे कहा जाए कि इसमें कुछ नहीं होता — वहाँ पंख काटे जा रहे हैं। किसी से कहा जाए कि सपना देखो, पर इतना ही — वहाँ गति बाँधी जा रही है। कविता का काम यही बताना है कि दूसरी बात पहली से कम नहीं है।
Concepts and terms
सुगंध। फूल से उठकर वह हवा में फैल जाती है और उसे लौटाया नहीं जा सकता, इसलिए कविता उसे एकतरफ़ा गति का पहला उदाहरण बनाती है।
दोनों का अर्थ आकाश है। कविता एक ही चीज़ के लिए दो शब्द लाती है, और यह चुनाव लय के लिए भी है और दोहराव से बचने के लिए भी।
धुआँ। अग्नि नीचे ही जलती रहती है और धुआँ ऊपर ही उठता है, इसलिए एक घटना के दोनों हिस्से अपनी-अपनी दिशा में बँधे रह जाते हैं।
क्षमता रहने देकर उसका उपयोग तय कर देना। पंख काटने से यह अलग है, क्योंकि वहाँ क्षमता ही छीन ली जाती है।
किसी को सीधे पुकारकर कुछ कहना। इस कविता में पुकार है, पर नाम नहीं, इसलिए वह हर उस व्यक्ति पर लागू हो जाती है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति है।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
आठवीं कक्षा की एक विद्यार्थी कक्षा में बताती है कि वह बड़ी होकर चित्र बनाना चाहती है और उसी को अपना काम बनाना चाहती है। एक साथी हँसकर कहता है कि इसमें कुछ नहीं होता। घर पर उसकी बात सुनकर कहा जाता है कि चित्र बनाना ठीक है, पर वह रविवार की शाम तक ही सीमित रहे। कुछ सप्ताह बाद वह अपनी रंगों की पेटी अलमारी में रख देती है और किसी से कुछ नहीं कहती। उसकी एक सहेली पूछती है तो वह कहती है कि अब मन नहीं करता।
Analysis:
ध्यान दीजिए कि इस प्रसंग में कोई बुरा व्यक्ति नहीं है। साथी हँसा, घर ने एक सीमा रखी, और उसने स्वयं पेटी रख दी। कविता किसी को दोष नहीं देती; वह केवल यह दिखाती है कि तीन अलग-अलग जगहों से एक ही काम हो गया।
Activity:
ऐसी तीन बातें लिखिए जो आपने अपने किसी काम के बारे में सुनी हैं, और हर एक के आगे लिखिए कि वह पंख काटने के पास है या गति बाँधने के।
करके देखो
Title:
दो तीर, एक पन्ना
Safety:
किसी नुकीली वस्तु की आवश्यकता नहीं है।
What You Notice:
तीन तीर एक ही दिशा में निकलते हैं और केवल चौथी जगह दो तीर बनते हैं। कविता का पूरा तर्क इसी गिनती में दिख जाता है।
Did you know
सुगंध हवा में इसलिए फैलती है कि उसके कण लगातार हिलते रहते हैं और अपने आप चारों ओर बिखर जाते हैं। यही कारण है कि उसे लौटाया नहीं जा सकता।
धुआँ ऊपर उठता है, क्योंकि गरम हवा आसपास की ठंडी हवा से हल्की होती है। आग का नीचे रहना और धुएँ का ऊपर जाना, दोनों इसी एक कारण से हैं।
Memory tricks
तीन एकतरफ़ा उदाहरण याद रखने का सूत्र — सौ–बी–अ — सौरभ, बीज, अग्नि। पहला ऊपर जाकर लौटता नहीं, दूसरा नीचे गिरकर उठता नहीं, तीसरा दो हिस्सों में बँटकर भी अपनी-अपनी दिशा में बँधा है।
Practice MCQs with answers (25)
- A एक मनाही
- B एक प्रश्न
- C एक वरदान
- D एक नाम
Show answer
Why:
शीर्षक कोई नाम नहीं है; वह किसी से कुछ न करने को कहता है।
- A एक क्षमता बढ़ाती है, दूसरी उसे घटाकर छोड़ देती है
- B एक क्षमता छीनती है, दूसरी उसका उपयोग तय कर देती है
- C एक सपनों की बात है, दूसरी पक्षियों की बात निकलती है
- D दोनों में सचमुच कोई भी अंतर नहीं रह जाता है
Show answer
Why:
पंख काटना क्षमता छीनना है; गति बाँधना क्षमता रहने देकर सीमा तय करना।
- A मनाही केवल घर के बड़ों पर लागू होती
- B मनाही किसी पर भी लागू नहीं रहती है
- C मनाही हर पाठक पर लागू हो जाती है
- D मनाही केवल विद्यालय तक सीमित रह जाती
Show answer
Why:
नाम न लेने से कविता हर उस व्यक्ति पर लागू हो जाती है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति है।
- A सवेरा
- B सूरज
- C सागर
- D सुगंध
Show answer
Why:
सौरभ यानी सुगंध, जो फूल से उठकर हवा में फैल जाती है।
- A उसकी गति केवल एक तरफ़ की रह जाती है
- B उसकी गति दोनों तरफ़ चलती रहती है
- C उसकी कोई गति ही नहीं होती है
- D उसकी गति सपनों से तेज़ होती है
Show answer
Why:
वह ऊपर जाकर फैल जाती है और लौटाई नहीं जा सकती।
- A बीज ऊपर जाता है, और नीचे नहीं आ पाता
- B बीज नीचे आता है, और ऊपर नहीं जा पाता
- C बीज दोनों दिशाओं में सहज चला जाता है
- D बीज किसी भी दिशा में हिल ही नहीं पाता
Show answer
Why:
एक की गति ऊपर की है और दूसरे की नीचे की; दोनों एक तरफ़ा हैं।
- A बीज और धूलि
- B अग्नि और सौरभ
- C अग्नि और धूम
- D धूलि और गगन
Show answer
Why:
आग नीचे ही रहती है और धुआँ ऊपर ही उठता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
अभिकथन ठीक नहीं है — वे चीज़ें शक्तिशाली हैं, केवल एकतरफ़ा हैं। कारण सही है।
- A हर चीज़ की गति एक ही तरफ़ की है
- B हर चीज़ धरती पर ही रह जाती है
- C हर चीज़ आकाश में ही चली जाती है
- D हर चीज़ किसी फूल से ही निकलती है
Show answer
Why:
सुगंध लौटती नहीं, बीज उठता नहीं, आग और धुआँ अपनी जगह बँधे हैं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और II सही हैं। III ग़लत है — लौटना ही सपने की विशेषता बताई गई है।
- A पाठक को तीनों उदाहरण भूल जाने पड़ते हैं
- B पाठक तुलना मानने के लिए तैयार हो चुका होता है
- C पाठक के मन में कोई नया प्रश्न ही खड़ा हो जाता है
- D पाठक को कविता छोटी लगने लगती है
Show answer
Why:
तुलना इतनी देर से खोली जाती है कि वह अपने आप बन जाती है।
- A मेघों में
- B धूलि में
- C आँखों में
- D तारों में
Show answer
Why:
आँख वही जगह है जहाँ सपना पहले बना था।
- A क्योंकि वहाँ वह सुगंध जैसा बन जाता है
- B क्योंकि वहाँ वह सबसे ऊँचाई पर पहुँचता है
- C क्योंकि वहाँ उसकी गति रुक ही जाती है
- D क्योंकि वहीं से वह दूसरों को दिख सकता है
Show answer
Why:
आँख वही जगह है जहाँ वह बना था और जहाँ से वह दिखता भी है।
- A आदेश देती हैं
- B प्रश्न पूछती हैं
- C कहानी सुनाती हैं
- D गिनती बताती हैं
Show answer
Why:
उत्तर पहले से मालूम है, फिर भी प्रश्न पूछा जाता है।
- A प्रश्न से पाठक को उत्तर ढूँढ़ना पड़ता
- B प्रश्न से कविता की लंबाई बढ़ जाती है
- C अपने आप बना उत्तर अधिक देर टिकता है
- D प्रश्न से कवयित्री का काम घट जाता है
Show answer
Why:
यह कविता का एक औज़ार है, और आगे भी काम करता रहता है।
- A वे धरती पर ही टिककर रह जाते हैं
- B वे किसी एक दिशा में ही उड़ते रह जाते हैं
- C वे किसी दूसरे पक्षी के सहारे ही उड़ान भर पाते हैं
- D वे दिशा, ऊँचाई और लौटने का समय स्वयं चुनते हैं
Show answer
Why:
पंख वाली चीज़ अपनी मरज़ी से उड़ती है; शर्त यही है कि पंख बचे रहें।
- A क्योंकि पूरी उड़ान उसी एक चीज़ पर टिकी है
- B क्योंकि पंख शब्द कविता में सबसे छोटा है
- C क्योंकि पंख से कविता की लय ठीक बैठती है
- D क्योंकि पंख पक्षी की पहचान माना जाता है
Show answer
Why:
कवयित्री सबसे पहले उसी चीज़ की रक्षा माँगती हैं।
- A कोई प्रकृति का उदाहरण
- B किसी व्यक्ति का नाम
- C कोई दोहराया गया शब्द
- D कोई सीधा संबोधन
Show answer
Why:
कोई नाम, कोई शिकायत और कोई दंड कविता में नहीं है।
- A सुनने वाले को उत्तर देना ही पड़ता है
- B सुनने वाले को बात समझ ही नहीं आती है
- C सुनने वाले को लड़ने का कारण नहीं मिलता
- D सुनने वाले को कविता लंबी लगने लगती
Show answer
Why:
अनुरोध के पीछे तीन उदाहरण रख दिए जाते हैं, आरोप नहीं।
- A बात का अर्थ अंत में उलट ही जाता है
- B बात हर बार कुछ और कहने लगती है
- C बात पढ़ने में कठिन होती चली जाती है
- D बात हल्की नहीं पड़ती, भारी हो जाती है
Show answer
Why:
जैसे कोई ज़रूरी बात कहते समय उसे दो बार कहता है।
- A उन्हीं दो पहली पंक्तियों पर
- B किसी बिलकुल नए उदाहरण पर
- C किसी सीधे उपदेश पर
- D किसी बड़े प्रश्न पर
Show answer
Why:
इस तरह पूरा घेरा बंद हो जाता है।
- A उसके सपनों की गति बाँधी जा रही है
- B उसके सपनों के पंख काटे जा रहे हैं
- C उसके सपनों को आरोहण मिल रहा है
- D उसके सपनों पर कुछ भी असर नहीं है
Show answer
Why:
यह पहली मनाही है — क्षमता पर ही सवाल उठा देना।
- A आरोहण रोकने के अधिक पास
- B पंख काटने के अधिक पास
- C गति बाँधने के अधिक पास
- D किसी भी मनाही के पास नहीं
Show answer
Why:
क्षमता रहने दी जाती है, पर उसका उपयोग तय कर दिया जाता है।
- A लागू होगी, क्योंकि वहाँ उसके पंख कट गए हैं
- B लागू नहीं होगी, क्योंकि वहाँ कोई और नहीं है
- C लागू नहीं होगी, क्योंकि कविता घर की बात है
- D लागू होगी, क्योंकि बाँधने वाला वह स्वयं है
Show answer
Why:
संबोधन में कोई नाम नहीं है, इसलिए वह स्वयं पर भी लागू होता है।
- A पहले उदाहरण, फिर उनसे निकला एक निष्कर्ष
- B पहले निष्कर्ष, फिर उसके लिए कुछ उदाहरण
- C पहले कोई प्रश्न, फिर उसी का सीधा उत्तर
- D पहले उपदेश, फिर उसी का एक दोहराव
Show answer
Why:
तीन एकतरफ़ा उदाहरण, और उनके बाद सपने की दोनों गति।
Important short questions (7)
शीर्षक कोई नाम नहीं, एक मनाही है। वह किसी और से कुछ न करने को कहता है। इससे कविता सलाह नहीं रह जाती। वह एक निवेदन बन जाती है, और निवेदन उसी से होता है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति हो।
पहली मनाही पंख काटने की है, यानी क्षमता ही छीन लेने की। दूसरी गति बाँधने की है, यानी क्षमता रहने देकर उसका उपयोग तय कर देने की। पहली बड़ी है और दूसरी बारीक, पर दोनों एक ही दिशा में जाती हैं।
पहला सुगंध का है, जो ऊपर जाकर लौटती नहीं। दूसरा बीज का है, जो नीचे गिरकर उठता नहीं। तीसरा अग्नि और धुएँ का है, जो अपनी-अपनी दिशा में बँधे हैं। साझा बात यह है कि हर चीज़ की गति एक ही तरफ़ की है।
क्योंकि वे प्रकृति की शक्तिशाली चीज़ें हैं। कवयित्री उनकी निंदा नहीं कर रही हैं। वे उन्हें एक पैमाना बना रही हैं, जिससे सपने की दोनों गति और भी साफ़ दिख जाए।
क्योंकि आँख वही जगह है जहाँ सपना पहले बना था, और वही जगह है जहाँ से वह दूसरों को दिख सकता है। इसलिए लौटना यहाँ हार नहीं है। वह सपने का पूरा होना है।
उत्तर पाठक के मन में अपने आप बनता है, और अपने आप बना उत्तर अधिक देर टिकता है। इसी कारण कवयित्री पहले दो उदाहरणों में सीधा कथन नहीं देतीं।
सुनने वाले को लड़ने का कोई कारण नहीं मिलता। कविता किसी का नाम नहीं लेती और कोई दंड नहीं बताती। वह एक अनुरोध रखती है और उसके पीछे तीन उदाहरण रख देती है।
Long answer questions (3)
कवयित्री पहले तीन उदाहरण देती हैं और सपने की बात सबसे बाद में रखती हैं। पहला उदाहरण सुगंध का है, जो ऊपर जाकर लौटती नहीं। दूसरा बीज का है, जो नीचे गिरकर उठता नहीं। तीसरा अग्नि और धुएँ का है, जहाँ एक नीचे ही रहता है और दूसरा ऊपर ही जाता है। तीनों पढ़ चुकने पर पाठक के मन में एक बात बैठ जाती है कि प्रकृति की गतियाँ एकतरफ़ा होती हैं। अब जब कहा जाता है कि सपनों में दोनों गति हैं, तो वह बात मानने के लिए कोई तर्क नहीं माँगता। यदि यही बात आरंभ में कह दी जाती, तो वह केवल एक दावा रहती।
पहली मनाही क्षमता छीन लेने की है और दूसरी क्षमता रहने देकर उसका उपयोग तय कर देने की। पहला उदाहरण लीजिए। कोई साथी कहता है कि वह चित्र बनाना चाहता है, और उससे कहा जाता है कि इसमें कुछ नहीं होता। यहाँ उसकी क्षमता पर ही सवाल उठा दिया गया, इसलिए यह पंख काटना है। दूसरा उदाहरण लीजिए। किसी से कहा जाता है कि चित्र बनाओ, पर केवल रविवार को और केवल आधा घंटा। यहाँ क्षमता मानी जा रही है, पर उसकी सीमा तय कर दी गई, इसलिए यह गति बाँधना है। दूसरी बात पहली से कम नहीं है, और कविता की पहली दो पंक्तियाँ दोनों को साथ रखकर यही कहती हैं।
कविता में कोई नाम नहीं आता, और यही उसकी पहुँच बढ़ा देता है। यदि कवयित्री किसी एक को पुकारतीं, तो बाक़ी पाठक उसे अपने लिए नहीं मानते। नाम न होने से मनाही हर उस व्यक्ति पर लागू हो जाती है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति है। घर के बड़े इसमें आते हैं, शिक्षक आते हैं, और वह समाज भी आता है जो किसी काम को कम मानता है। एक उत्तर इससे भी आगे जाता है। कई बार अपनी गति हम स्वयं बाँध लेते हैं, डर के कारण या किसी की कही बात के कारण। उस समय मनाही अपने ही लिए पढ़नी पड़ती है, और कविता उसकी भी अनुमति देती है।
Flashcards (17)
Play this topic
- कविता का क्रम लगाइए
- शब्द और अर्थ
- किस दिशा की गति
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
आरोहण और अवरोहण
कविता का दूसरा भाग उड़ान के दोनों हिस्सों की छूट माँगता है। सपना मुक्त गगन में घूमकर तारों तक पहुँचता है, और लौटते समय बादलों से रंग तथा किरणों से चमक लेकर आता है। इन्हीं से वह भूमि को सुखद स्थान बनाने का शिल्प सिखा देता है।
What you will be able to do
- आरोहण, अवरोहण, विचरण, मेघ, दीप्ति और भू शब्दों के अर्थ लिख सकूँगा।
- विलोम जोड़े से पूरी बात बनने का कारण समझा सकूँगा।
- सपने की वापसी में मिलने वाले दो उपहारों में अंतर बता सकूँगा।
- स्वर्ग और शिल्प का अर्थ कविता के संदर्भ में लिख सकूँगा।
- सपने के पूरे चक्र का क्रम बताकर उसे अपने जीवन पर लगा सकूँगा।
Key points
आरोहण का अर्थ चढ़ना है और अवरोहण का अर्थ उतरना; यह जोड़ा विलोम कहलाता है।
दोनों को साथ रखने से पता चलता है कि उड़ान का कोई एक हिस्सा काफ़ी नहीं है।
एक आधा रोक देने पर पूरा चक्र टूट जाता है, इसलिए आधी छूट छूट नहीं है।
विचरण का अर्थ घूमना है, और गगन के साथ मुक्त शब्द कविता के विषय से जुड़ता है।
सपने का तारों में मिल जाना बताता है कि छूट मिलने पर पहुँच की सीमा नहीं रहती।
वह खाली नहीं लौटता — मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेकर आता है।
रंग सुंदरता देता है और दीप्ति उसे दिखने लायक़ बनाती है।
स्वर्ग का आशय सुखद स्थान है, और शिल्प का अर्थ हुनर या कारीगरी।
सपना भूमि को सिखाता है, क्योंकि जो ऊपर देखा गया उसे नीचे लाकर काम में लगाना है।
Full explanation
मोड़ के बाद एक नई माँग
सपने की दोनों गति बता चुकने के बाद कवयित्री एक नई माँग रखती हैं — इसका आरोहण मत रोको, इसका अवरोहण मत बाँधो! ध्यान दीजिए कि अब मनाही दो बार नहीं, दो चीज़ों के लिए हो रही है। पहले पंख और गति की बात थी; अब उड़ान के दोनों हिस्सों की बात है। माँग पहले से बारीक हो गई है, क्योंकि अब यह कहा जा रहा है कि आधी छूट भी छूट नहीं है।
आरोहण और अवरोहण
इन दो शब्दों का अर्थ जान लेना ज़रूरी है। आरोहण का मतलब चढ़ना है, यानी नीचे से ऊपर की ओर बढ़ना। अवरोहण का मतलब उतरना है, यानी ऊपर से नीचे की ओर आ जाना। दोनों एक-दूसरे के उलटे हैं, और ऐसे जोड़े को विलोम कहा जाता है। पर्वत पर चढ़ना आरोहण है और नदी का पहाड़ से उतरना अवरोहण। गणित में भी बड़ी संख्या से छोटी की ओर जाना अवरोही क्रम कहलाता है।
विलोम जोड़े का काम
कवयित्री दो उलटे शब्द एक साथ क्यों रखती हैं? इसका कारण यह है कि जोड़ा पूरी बात बना देता है। अगर केवल आरोहण की बात होती, तो पाठक समझता कि सपने का काम ऊपर जाना है। अगर केवल अवरोहण की बात होती, तो लगता कि लौटना ही मूल्यवान है। दोनों साथ रखने से पता चलता है कि उड़ान का कोई एक हिस्सा काफ़ी नहीं है।
आधी छूट कोई छूट नहीं
इन दो पंक्तियों की सबसे बारीक बात यही है। कोई कह सकता है कि उड़ने दो, पर लौटने की बात मत करो; या लौट आओ, पर ऊपर जाने की बात मत करो। कवयित्री दोनों को मना करती हैं। एक चक्र में से कोई एक आधा रोक देने पर चक्र ही टूट जाता है। सपना ऊपर जाकर रुक जाए तो वह कल्पना रह जाता है, और नीचे ही रह जाए तो वह कभी बड़ा नहीं होता।
मुक्त गगन में विचरण
अब कवयित्री बताती हैं कि छूट मिलने पर सपना क्या करेगा — मुक्त गगन में विचरण कर यह, तारों में फिर मिल जायेगा। विचरण का अर्थ है घूमना, टहलना। ध्यान दीजिए कि गगन के साथ मुक्त शब्द लगाया गया है। आकाश अपने आप खुला है, फिर भी उसे मुक्त कहा जाता है, क्योंकि कविता में बँधने और छूटने की बात ही चल रही है।
तारों में मिल जाना
सपना तारों में मिल जाएगा — यह चित्र बड़ा है। तारे वे चीज़ें हैं जो सबसे दूर और सबसे ऊँची मानी जाती हैं। सपने का उनमें मिल जाना यह बताता है कि छूट मिलने पर उसकी पहुँच की कोई सीमा नहीं रहती। पर ध्यान रखिए, कविता यहाँ रुकती नहीं। तारों तक पहुँचना अंत नहीं है; अगली पंक्ति वापसी की बात करती है।
लौटते समय क्या साथ आता है
अगली दो पंक्तियाँ वापसी का चित्र देती हैं — मेघों से रंग औ किरणों से, दीप्ति लिए भू पर आयेगा। मेघ यानी बादल, दीप्ति यानी चमक, और भू यानी धरती। यानी सपना खाली नहीं लौटता। वह बादलों से रंग लेता है और किरणों से चमक, और दोनों साथ लेकर धरती पर आता है। यह कविता का सबसे सुंदर मोड़ है।
रंग और दीप्ति — दो उपहार
इन दो उपहारों पर रुककर सोचिए। रंग वह चीज़ है जो किसी को सुंदर बनाती है, और दीप्ति वह है जो उसे दिखने लायक़ बनाती है। बादल रंग देते हैं क्योंकि वे खुद सुबह और शाम रंग बदलते हैं; किरणें चमक देती हैं क्योंकि प्रकाश उन्हीं से आता है। दोनों उपहार आकाश के हैं, और दोनों धरती पर काम आते हैं।
स्वर्ग बनाने का शिल्प
अगली पंक्तियाँ बताती हैं कि इन उपहारों से क्या होगा — स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प, भूमि को सिखलायेगा! स्वर्ग का अर्थ यहाँ कोई दूर का लोक नहीं है। पुस्तक स्वयं बताती है कि स्वर्ग का आशय सुखद स्थान है, यानी वह जगह जहाँ सुख, शांति और आनंद हो। यानी लौटा हुआ सपना धरती को ही सुखद बनाने का तरीक़ा सिखा देता है।
शिल्प शब्द का अर्थ
शिल्प का अर्थ है हुनर या कारीगरी — हाथ से कोई चीज़ गढ़ने की कला, जैसे बरतन बनाना या कपड़े सिलना। शब्दकोश उसके और अर्थ भी देता है, जैसे दक्षता, कौशल और निर्माण। कवयित्री इसी शब्द को चुनती हैं, क्योंकि सुखद स्थान बनाना भी एक कारीगरी है। वह अपने आप नहीं हो जाता; उसे गढ़ना पड़ता है।
भूमि को सिखाना
ध्यान दीजिए कि सपना भूमि को सिखाता है। वह आकाश को कुछ नहीं सिखाता, और तारों को भी नहीं। सीखने वाली जगह वही है जहाँ से उड़ान शुरू हुई थी। इससे एक बात निकलती है — ऊपर जाना केवल देखने के लिए नहीं है। जो देखा गया, उसे नीचे लाकर काम में लगाना पड़ता है, और यही अवरोहण का मूल्य है।
अंतिम माँग
कविता के अंत में कवयित्री फिर से दोनों सिरों की बात करती हैं — नभ तक जाने से मत रोको, धरती से इसको मत बाँधो! पहली पंक्ति ऊपर जाने की छूट माँगती है और दूसरी नीचे बँधे न रहने की। दोनों मिलकर वही बात दोहराती हैं जो आरोहण और अवरोहण वाली पंक्तियों में थी, पर अब सीधे शब्दों में।
दो सिरे, एक अनुरोध
पूरे भाग में कवयित्री कभी भी किसी एक सिरे को नहीं चुनतीं। वे न कहती हैं कि आकाश बड़ा है और न यह कि धरती बड़ी है। उनका अनुरोध दोनों के बीच आने-जाने की छूट का है। यह संतुलन कविता की सबसे पक्की बात है, और इसी कारण वह किसी एक पक्ष की नहीं लगती।
चक्र पूरा होना
इन पंक्तियों को साथ रखकर पढ़िए तो एक पूरा चक्र बनता है। सपना आँखों में बनता है, गगन में घूमता है, तारों तक पहुँचता है, बादलों और किरणों से कुछ लेकर धरती पर आता है, और अंत में भूमि को एक हुनर सिखा देता है। चक्र के हर क़दम का अपना काम है। किसी एक क़दम को रोक देने से आगे के सब क़दम रुक जाते हैं।
आज के जीवन में
इस भाग की जाँच आसान है। किसी को किसी नए विषय को पढ़ने की छूट मिले, पर यह न पूछा जाए कि उससे क्या बना — वहाँ अवरोहण रुका हुआ है। और किसी से कहा जाए कि काम तो करो, पर कुछ नया सोचना मत — वहाँ आरोहण रुका हुआ है। कविता दोनों रुकावटों को एक जैसी बताती है।
Concepts and terms
नीचे से ऊपर की ओर जाना, यानी चढ़ना। पर्वत पर चढ़ना आरोहण है, और गणित में छोटी संख्या से बड़ी की ओर जाना आरोही क्रम कहलाता है।
ऊपर से नीचे की ओर आना, यानी उतरना। नदी का पहाड़ से उतरना अवरोहण है, और बड़ी संख्या से छोटी की ओर जाना अवरोही क्रम कहलाता है।
एक-दूसरे के उलटे अर्थ देने वाले शब्दों का जोड़ा। कविता में आरोहण और अवरोहण ऐसा ही जोड़ा हैं, और जोड़ा साथ आने से पूरी बात बन जाती है।
चमक। सपना किरणों से यही लेकर लौटता है, और रंग के साथ मिलकर यह उसे दिखने लायक़ बनाती है।
हुनर या कारीगरी, यानी हाथ से कोई चीज़ गढ़ने की कला। शब्दकोश में दक्षता, कौशल और निर्माण भी इसके अर्थ मिलते हैं।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
आठवीं कक्षा के एक समूह को विद्यालय का कोना हरा बनाने का काम मिलता है। वे पूरा सप्ताह पुस्तकालय में बैठकर योजना बनाते हैं और बहुत सुंदर विचार निकालते हैं — कौन-से पौधे लगेंगे, पानी कहाँ से आएगा, छाया किस ओर पड़ेगी। सोमवार को शिक्षक पूछते हैं कि ज़मीन पर क्या हुआ, और पता चलता है कि अभी कुछ भी नहीं हुआ। एक विद्यार्थी कहता है कि योजना तो पूरी तैयार है। दूसरा कहता है कि मिट्टी खोदने का समय ही नहीं मिला।
Analysis:
ध्यान दीजिए कि इस प्रसंग में समूह ने कुछ ग़लत नहीं किया। उनकी योजना सचमुच अच्छी है, और कविता सोचने से मना नहीं करती। वह केवल यह कहती है कि आधी यात्रा पूरी यात्रा नहीं है।
Activity:
अपने तीन ऐसे विचार लिखिए जो अभी केवल सोच में हैं, और हर एक के आगे वह पहला छोटा काम लिखिए जो उसे ज़मीन पर उतार देगा।
करके देखो
Title:
आरोहण और अवरोहण, तीन-तीन उदाहरण
Safety:
किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं है; केवल लिखना है।
What You Notice:
जुड़े हुए जोड़े ढूँढ़ना कठिन नहीं है, पर उनमें से एक रोक देने पर दूसरा भी रुक जाता है। कविता की बात इसी गिनती में दिख जाती है।
Did you know
बादल सुबह और शाम रंग बदलते दिखते हैं, क्योंकि उस समय सूरज की किरणों को हवा में अधिक दूरी पार करनी पड़ती है। कविता का रंग वाला उपहार इसी अनुभव से आया लगता है।
संगीत में भी आरोह और अवरोह शब्द चलते हैं। स्वरों के ऊपर चढ़ने का क्रम आरोह कहलाता है और नीचे उतरने का अवरोह।
Memory tricks
चक्र के पाँच क़दम याद रखने का सूत्र — आँ–ग–ता–धर–भू — आँखों में बनना, गगन में घूमना, तारों तक पहुँचना, धरती पर लौटना, भूमि को सिखाना। क्रम उलटा नहीं किया जा सकता, और कोई क़दम छोड़ा भी नहीं जा सकता।
Practice MCQs with answers (25)
- A उतरना और चढ़ना
- B चढ़ना और उतरना
- C रुकना और चलना
- D घूमना और लौटना
Show answer
Why:
आरोहण नीचे से ऊपर जाना है और अवरोहण ऊपर से नीचे आना।
- A विलोम
- B पर्यायवाची
- C अनेकार्थी
- D तत्सम
Show answer
Why:
दोनों शब्द एक-दूसरे के उलटे अर्थ देते हैं।
- A क्योंकि अवरोहण आरोहण से बड़ा माना जाता है
- B क्योंकि दोनों शब्द एक ही अर्थ देने लगते हैं
- C क्योंकि एक आधा रुकने पर पूरा चक्र टूट जाता है
- D क्योंकि आरोहण अवरोहण से बड़ा माना जाता है
Show answer
Why:
ऊपर जाकर रुका सपना कल्पना रह जाता है, और नीचे रुका कभी बड़ा नहीं होता।
- A कि सपना तारों तक पहुँच ही नहीं सकता
- B कि सपने का पूरा काम लौट आना ही है
- C कि सपने की कोई गति होती ही नहीं है
- D कि सपने का पूरा काम ऊपर जाना ही है
Show answer
Why:
जोड़ा साथ रखने से ही पूरी बात बनती है।
- A चमकना
- B घूमना
- C रुकना
- D गिरना
Show answer
Why:
विचरण यानी घूमना या टहलना।
- A कविता में बँधने और छूटने की बात ही चल रही है
- B आकाश सचमुच किसी डोरी से बँधा हुआ रहता है
- C मुक्त शब्द से कविता की लय ठीक बैठ जाती है
- D मुक्त शब्द आकाश का एक दूसरा नाम ही है
Show answer
Why:
आकाश अपने आप खुला है, फिर भी वही शब्द कविता के विषय से जुड़ता है।
- A छूट मिलने पर वह अपने आप बहुत छोटा हो जाता
- B छूट मिलने पर वह धरती पर कभी नहीं लौटता है
- C छूट मिलने पर उसकी पहुँच की कोई सीमा नहीं रहती
- D छूट मिलने पर वह केवल बादलों तक पहुँच पाता
Show answer
Why:
तारे सबसे दूर और सबसे ऊँचे माने जाते हैं।
- A क्योंकि वहाँ कविता का अंत हो ही जाता है
- B क्योंकि तारे धरती से बहुत दूर माने जाते हैं
- C क्योंकि कवयित्री को लय बनानी पड़ती थी
- D क्योंकि अगली पंक्ति वापसी की बात करती है
Show answer
Why:
तारों तक पहुँचना अंत नहीं है; चक्र का आधा हिस्सा बाक़ी है।
- A मेघों से चमक, और किरणों से रंग
- B मेघों से रंग, और किरणों से चमक
- C तारों से रंग, और मेघों से चमक
- D धरती से रंग, और तारों से चमक
Show answer
Why:
मेघ यानी बादल और दीप्ति यानी चमक।
- A बादल, चमक और धरती
- B बादल, चमक और आकाश
- C धुआँ, चमक और धरती
- D बादल, रंग और धरती
Show answer
Why:
तीनों शब्द वापसी वाली पंक्तियों में आते हैं।
- A एक आकाश से आता है, दूसरा धरती से आता है
- B एक दिखने लायक़ बनाता है, दूसरा सुंदर बनाता है
- C एक सुंदर बनाता है, दूसरा दिखने लायक़ बनाता है
- D दोनों में सचमुच कोई भी अंतर नहीं रह जाता
Show answer
Why:
रंग सुंदरता देता है और चमक उसे दिखने लायक़ बनाती है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण सचमुच अभिकथन को समझा देता है।
- A खुला आकाश
- B ऊँचा पर्वत
- C दूर का लोक
- D सुखद स्थान
Show answer
Why:
वह जगह जहाँ सुख, शांति और आनंद हो।
- A कोई बड़ा भवन
- B हुनर या कारीगरी
- C कोई पुराना गीत
- D कोई लंबी यात्रा
Show answer
Why:
हाथ से कोई चीज़ गढ़ने की कला; शब्दकोश दक्षता और कौशल भी देता है।
- A क्योंकि शिल्प का अर्थ कोई बड़ा भवन बनाना होता है
- B क्योंकि शिल्प शब्द कविता में सबसे छोटा पड़ता है
- C क्योंकि वह अपने आप नहीं होता, उसे गढ़ना पड़ता है
- D क्योंकि शिल्प शब्द से पंक्ति की लय ठीक बैठ जाती
Show answer
Why:
सुखद स्थान बनाना भी एक कारीगरी है।
- A मेघों को
- B गगन को
- C तारों को
- D भूमि को
Show answer
Why:
सीखने वाली जगह वही है जहाँ से उड़ान शुरू हुई थी।
- A जो ऊपर देखा गया, उसे ऊपर ही छोड़ देना चाहिए
- B जो ऊपर देखा गया, उसे नीचे लाकर काम में लगाना है
- C जो नीचे है, उसे ऊपर पहुँचाना ही सबसे ज़रूरी है
- D जो नीचे है, वह कभी कुछ सीख ही नहीं सकता है
Show answer
Why:
यही अवरोहण का मूल्य है।
- A नभ तक जाने की छूट, और धरती से न बँधना
- B धरती से न बँधना, और नभ तक जाने की छूट
- C तारों तक जाना, और मेघों से रंग लाना
- D मेघों से रंग लाना, और तारों तक जाना
Show answer
Why:
पहली ऊपर जाने की छूट माँगती है और दूसरी नीचे बँधे न रहने की।
- A वे केवल एक सिरे की बात करके रुक जाती हैं
- B वे पहले से बिलकुल नई बात कह देती हैं
- C वे वही बात सीधे शब्दों में दोहरा देती हैं
- D वे कविता का अर्थ अंत में उलट ही देती हैं
Show answer
Why:
दोनों जोड़े एक ही अनुरोध को दो ढंग से रखते हैं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
II और III सही हैं। I ग़लत है — किसी एक सिरे को बड़ा नहीं कहा गया।
- A गगन में घूमना, धरती पर लौटना, आँखों में, तारों तक
- B तारों तक जाना, आँखों में बनना, गगन में घूमना, लौटना
- C धरती पर लौटना, आँखों में बनना, तारों तक, गगन में
- D आँखों में बनना, गगन में घूमना, तारों तक, धरती पर लौटना
Show answer
Why:
चक्र के हर क़दम का अपना काम है, और क्रम बदला नहीं जा सकता।
- A अवरोहण
- B आरोहण
- C विचरण
- D कुछ भी नहीं
Show answer
Why:
ऊपर जाना चल रहा है, पर नीचे लाकर काम में लगाना रुका हुआ है।
- A दोनों एक साथ
- B अवरोहण
- C आरोहण
- D कुछ भी नहीं
Show answer
Why:
ऊपर चढ़ना ही रोक दिया गया है, जबकि काम नीचे चल रहा है।
- A तारों तक पहुँचने वाला क़दम
- B गगन में विचरण करने वाला क़दम
- C आँखों में सपना बनने वाला क़दम
- D भूमि को शिल्प सिखाने वाला क़दम
Show answer
Why:
सोचना हो गया, पर लौटकर धरती पर कुछ गढ़ा नहीं गया।
- A सपने का तारों तक पहुँचना
- B सपने का उपहार लेकर लौटना
- C सपने का गगन में घूमना
- D सपने का आँखों में बनना
Show answer
Why:
वह खाली नहीं लौटता — रंग और चमक, दोनों साथ लाता है।
Important short questions (7)
आरोहण में कोई चीज़ नीचे से ऊपर की ओर बढ़ती है। पर्वत पर चढ़ना इसका उदाहरण है। अवरोहण में वह ऊपर से नीचे की ओर आ जाती है। नदी का पहाड़ से उतरना इसका उदाहरण है।
पूरी बात बन जाती है। केवल आरोहण की बात होती तो लगता कि सपने का काम ऊपर जाना है। केवल अवरोहण की बात होती तो लगता कि लौटना ही मूल्यवान है। दोनों साथ रखने से उड़ान के दोनों हिस्से ज़रूरी दिखते हैं।
क्योंकि एक आधा रोक देने पर पूरा चक्र टूट जाता है। ऊपर जाकर रुका सपना केवल कल्पना रह जाता है, और नीचे ही रह गया सपना कभी बड़ा नहीं होता।
वह बादलों से रंग लेता है और किरणों से चमक, और दोनों साथ लेकर धरती पर आता है। इसी कारण कहा जाता है कि वह खाली हाथ नहीं लौटता।
रंग वह चीज़ है जो किसी को सुंदर बनाती है। दीप्ति वह है जो उसे दिखने लायक़ बनाती है। दोनों उपहार आकाश के हैं, और दोनों धरती पर काम आते हैं।
स्वर्ग का आशय यहाँ कोई दूर का लोक नहीं, बल्कि सुखद स्थान है — वह जगह जहाँ सुख, शांति और आनंद हो। शिल्प का अर्थ है हुनर या कारीगरी, यानी हाथ से कोई चीज़ गढ़ने की कला।
क्योंकि सीखने वाली जगह वही है जहाँ से उड़ान शुरू हुई थी। इससे यह बात निकलती है कि ऊपर जाना केवल देखने के लिए नहीं है। जो देखा गया, उसे नीचे लाकर काम में लगाना पड़ता है।
Long answer questions (3)
चक्र आँखों से शुरू होता है, जहाँ सपना बनता है। फिर वह मुक्त गगन में घूमता है और तारों तक पहुँच जाता है। लौटते समय वह बादलों से रंग और किरणों से चमक लेता है, और धरती पर आता है। अंत में वह भूमि को सुखद स्थान बनाने का हुनर सिखा देता है। हर क़दम का अपना काम है। यदि गगन में जाने से रोक दिया जाए, तो उपहार ही नहीं मिलते। यदि लौटने से रोक दिया जाए, तो उपहार धरती तक नहीं पहुँचते और सपना कल्पना बना रह जाता है। इसी कारण कवयित्री दोनों सिरों की छूट माँगती हैं।
कवयित्री कहीं भी किसी एक सिरे को बड़ा नहीं कहतीं, और यही इस भाग का संतुलन है। आकाश का मूल्य इसलिए है कि वहीं घूमकर सपना तारों तक पहुँचता है और वहीं से रंग तथा चमक मिलती है। धरती का मूल्य इसलिए है कि सीखने वाली जगह वही है, और वहीं सुखद स्थान बनाना है। ध्यान देने की बात यह भी है कि सपना आकाश को कुछ नहीं सिखाता, भूमि को सिखाता है। अंतिम दो माँगें भी दोनों सिरों की हैं — एक ऊपर जाने की छूट माँगती है और दूसरी नीचे बँधे न रहने की। इसलिए कविता किसी एक पक्ष की नहीं लगती; वह आने-जाने की छूट माँगती है।
शिल्प का अर्थ है हुनर या कारीगरी, यानी हाथ से कोई चीज़ गढ़ने की कला। शब्दकोश उसके और अर्थ भी देता है, जैसे दक्षता, कौशल और निर्माण। यह चुनाव इसलिए ठीक बैठता है कि सुखद स्थान बनाना भी एक कारीगरी है। वह अपने आप नहीं हो जाता; उसे गढ़ना पड़ता है, और गढ़ने के लिए हुनर सीखना पड़ता है। दूसरा कारण यह है कि शिल्प में हाथ का काम शामिल है। सपना आकाश से केवल एक विचार नहीं लाता, वह एक तरीक़ा लाता है जिसे धरती पर करके दिखाया जा सकता है। तीसरा कारण यह है कि कविता स्वयं एक शिल्प है। उसमें विलोम, समानार्थी और दोहराव जैसे औज़ार सोच-समझकर लगाए गए हैं।
Flashcards (17)
Play this topic
- चक्र के क़दम क्रम में लगाइए
- शब्द और अर्थ
- किस आधे की बात
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
शिल्प, काल और कवयित्री
कविता में छह औज़ार साफ़ दिखते हैं — विलोम, दोहराव, समानार्थी शब्द, प्रश्न, संबोधन और मानवीकरण — और छहों मिलकर सपने को जीवित प्राणी जैसा दिखा देते हैं। इसी भाग में काल बदलने का अभ्यास, शिल्प शब्द का परिवार और कवयित्री महादेवी वर्मा का परिचय आता है।
What you will be able to do
- कविता के छह शिल्प-औज़ार गिनाकर हर एक का काम बता सकूँगा।
- मानवीकरण और संबोधन का अर्थ उदाहरण सहित लिख सकूँगा।
- एक वाक्य को तीनों कालों में बदलकर लिख सकूँगा।
- शिल्प शब्द के परिवार के चार शब्द और उनके अर्थ लिख सकूँगा।
- कवयित्री का परिचय और उनकी कुछ रचनाएँ बता सकूँगा।
Key points
कविता स्वयं एक शिल्प है, और उसमें छह औज़ार सोच-समझकर लगाए गए हैं।
विलोम जोड़ा दोनों सिरे एक साथ सामने ले आता है।
दोहराव से माँग हल्की नहीं पड़ती, भारी हो जाती है।
आकाश के लिए दो शब्द आने से छोटी पंक्ति की लय सँभल जाती है।
प्रश्न वाला औज़ार उत्तर पाठक के मन से निकलवाता है।
संबोधन में पुकार है, पर नाम नहीं — इसलिए वह हर रोकने वाले तक पहुँचती है।
किसी अमूर्त चीज़ को प्राणी की तरह दिखाना मानवीकरण कहलाता है।
काल बदलने पर कर्ता और स्थान वही रहते हैं; बदलती केवल क्रिया है।
शिल्प का अर्थ हुनर है, और उसी से शिल्पी, शिल्पकला तथा शिल्पशाला बने हैं।
Full explanation
कविता भी एक शिल्प है
कविता में शिल्प शब्द आया है, और वह केवल विषय का शब्द नहीं है। कविता स्वयं एक शिल्प है। उसमें कुछ औज़ार सोच-समझकर लगाए गए हैं, जैसे कोई कारीगर अपने औज़ार चुनता है। इस भाग में हम वही औज़ार गिनेंगे। छह औज़ार साफ़ दिखते हैं, और हर एक का अपना काम है। मिलाकर वे सब एक ही काम करते हैं — सपने को जीवित प्राणी जैसा दिखा देना।
पहला औज़ार — विलोम शब्द
पहला औज़ार उलटे अर्थ वाले शब्दों का जोड़ा है। जिन दो पंक्तियों में ऊपर चढ़ने और नीचे उतरने की बात आती है, वहीं यह औज़ार लगा है। उलटे शब्द साथ आने से बात का घेरा पूरा हो जाता है, क्योंकि दोनों सिरे एक साथ सामने आ जाते हैं। यही कारण है कि कवयित्री एक सिरा चुनकर नहीं रुकतीं।
दूसरा औज़ार — एक शब्द बार-बार
दूसरा औज़ार दोहराव है। शीर्षक वाले दो शब्द कविता में लौट-लौटकर आते हैं, और उसी से शीर्षक भी बना है। दोहराव से बात हल्की नहीं पड़ती; वह भारी हो जाती है। जैसे कोई माँग दोहराने पर अधिक सुनाई देती है। कविता के आरंभ और अंत में वही दो पंक्तियाँ रखकर कवयित्री इस औज़ार को और मज़बूत कर देती हैं।
तीसरा औज़ार — समानार्थी शब्द
तीसरा औज़ार एक ही अर्थ के लिए दो शब्द लाना है। आकाश के लिए कविता में दो शब्द आते हैं, और दोनों का अर्थ वही है। इसका एक लाभ लय का है, क्योंकि छोटी पंक्ति में शब्द की लंबाई मायने रखती है। दूसरा लाभ यह है कि एक ही शब्द बार-बार आने से पंक्तियाँ ऊबाऊ नहीं लगतीं। ध्यान दीजिए, दोहराव जान-बूझकर है और यह बचाव भी जान-बूझकर।
चौथा औज़ार — प्रश्न
चौथा औज़ार प्रश्न है। सुगंध और बीज वाले उदाहरणों में कवयित्री सीधा कथन नहीं देतीं; वे पूछती हैं। उत्तर पाठक को पहले से मालूम है, फिर भी प्रश्न पूछा जाता है। इसका कारण यह है कि अपने आप बना हुआ उत्तर किसी बताए हुए उत्तर से अधिक देर टिकता है। यही औज़ार उस तुलना को भी तैयार करता है जो आगे आने वाली है।
पाँचवाँ औज़ार — संबोधन
पाँचवाँ औज़ार संबोधन है, यानी किसी को सीधे पुकारकर कुछ कहना। पूरी कविता किसी से कह रही है — रोको मत, बाँधो मत, काटो मत। पर वह किसी का नाम नहीं लेती। नाम न होने से पुकार हर उस व्यक्ति तक पहुँच जाती है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति है, और कई बार वह व्यक्ति पाठक स्वयं निकलता है।
छठा औज़ार — मानवीकरण
छठा औज़ार सबसे बड़ा है। सपने के पंख बताए जाते हैं, उसकी गति बताई जाती है, वह उड़ता है, घूमता है, कुछ लेकर लौटता है और किसी को कुछ सिखाता भी है। यह सब कोई जीवित प्राणी करता है। किसी निर्जीव या अमूर्त चीज़ को मनुष्य या प्राणी की तरह दिखाना मानवीकरण कहलाता है। इस औज़ार के बिना यह कविता बन ही नहीं सकती थी।
छहों औज़ार एक ही दिशा में
अब इन छह औज़ारों को साथ रखकर देखिए। विलोम जोड़ा दोनों सिरे दिखाता है, दोहराव माँग को भारी करता है, समानार्थी शब्द लय सँभालते हैं, प्रश्न उत्तर पाठक से निकलवाता है, संबोधन बात को किसी तक पहुँचाता है, और मानवीकरण सपने को प्राणी बना देता है। छहों मिलकर वही काम करते हैं जो एक कारीगर के औज़ार करते हैं — वे चीज़ को गढ़ते हैं।
काल बदलने का अभ्यास
पुस्तक इस कविता के साथ एक व्याकरण का अभ्यास भी देती है। कविता की कई पंक्तियाँ वर्तमान काल में हैं, और उन्हें भूतकाल तथा भविष्य काल में बदलकर लिखना है। एक सरल उदाहरण लीजिए — पतंग आकाश में उड़ जाती है। यह वर्तमान काल है। भूतकाल में यह बनेगा — पतंग आकाश में उड़ गई थी। और भविष्य काल में — पतंग आकाश में उड़ जाएगी।
काल में बदलता क्या है
ऊपर के तीनों वाक्यों को ध्यान से देखिए। कर्ता वही है, स्थान वही है, और काम भी वही है। बदलती है केवल क्रिया। इसी कारण काल पहचानने के लिए वाक्य के अंत को देखना पड़ता है। जाती है वर्तमान बताता है, गई थी भूत बताता है, और जाएगी भविष्य बताता है। एक ही वाक्य तीन कालों में लिखकर देखने से यह नियम अपने आप साफ़ हो जाता है।
शिल्प शब्द का परिवार
शब्दकोश में शिल्प के कई अर्थ मिलते हैं — हाथ से कुछ गढ़ने का काम, कला से जुड़ा व्यवसाय, दक्षता, कौशल, और निर्माण भी। इसी शब्द से कई और शब्द बने हैं। जो व्यक्ति यह काम करता है वह शिल्पी या शिल्पकार कहलाता है। इस काम की कला शिल्पकला है, और उसमें मिली दक्षता शिल्पकौशल। जहाँ यह काम होता है, उस जगह को शिल्पशाला कहा जाता है।
एक शब्द से बने शब्द पहचानना
शिल्प के परिवार को देखने से एक आदत बनती है। किसी एक शब्द के आगे-पीछे कुछ जोड़कर नए शब्द बनते हैं, और हर नए शब्द में मूल अर्थ बचा रहता है। शिल्पी में करने वाला है, शिल्पकला में कला है, शिल्पशाला में जगह है। यही आदत बाक़ी शब्दों पर भी लगाई जा सकती है, और इससे शब्दकोश देखना आसान हो जाता है।
कवयित्री का परिचय
इस कविता की रचनाकार महादेवी वर्मा हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ, और उनका जीवन-काल उन्नीस सौ सात से उन्नीस सौ सत्तासी तक रहा। कविता लिखना उन्होंने बहुत छोटी आयु में ही शुरू कर दिया था। हिंदी में उनका नाम बहुत आदर से लिया जाता है, और उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिला।
उनकी रचनाएँ
उनके कविता-संग्रहों में नीरजा का नाम आता है, और उसके साथ रश्मि, दीपशिखा, नीहार तथा सांध्य गीत भी। बच्चों के लिए भी उन्होंने कविताएँ लिखीं, जिनमें बारहमासा और अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी गिनी जाती हैं। गद्य में उनकी पुस्तकें भी पढ़ी जाती हैं — अतीत के चलचित्र, पथ के साथी, स्मृति की रेखाएँ और मेरा परिवार। उनके गद्य के पात्र पाठकों को देर तक याद रहते हैं।
एक और हुनर
महादेवी वर्मा केवल लिखती नहीं थीं। वे चित्र भी बनाती थीं। इस कविता के साथ यह बात जोड़कर देखने लायक़ है, क्योंकि कविता में रंग और चमक के चित्र भरे हुए हैं। जो व्यक्ति रंगों से काम करता हो, उसे बादलों से रंग और किरणों से चमक लेने की कल्पना सहज आ सकती है। शिल्प शब्द का चुनाव भी इसी से जुड़ा लगता है।
इस भाग का काम
इस भाग को पढ़ चुकने पर कविता दो बार पढ़ने लायक़ हो जाती है। पहली बार उसका अर्थ पढ़ा जाता है, और दूसरी बार उसका शिल्प। दूसरी बार पढ़ते समय यह दिखने लगता है कि कौन-सा शब्द किस काम के लिए रखा गया है। यही पढ़ना किसी भी कविता पर लगाया जा सकता है, और इसीलिए यह भाग केवल इस पाठ के लिए नहीं है।
Concepts and terms
किसी निर्जीव या अमूर्त चीज़ को मनुष्य या प्राणी की तरह दिखाना। इस कविता में सपना उड़ता है, लौटता है और सिखाता भी है, और यह सब इसी औज़ार से बनता है।
किसी को सीधे पुकारकर कुछ कहना। इस कविता में पुकार है, पर नाम नहीं, इसलिए वह हर उस व्यक्ति तक पहुँच जाती है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति है।
एक ही शब्द या पंक्ति का बार-बार आना। शीर्षक वाले दो शब्द कविता में लौट-लौटकर आते हैं, और इससे माँग भारी हो जाती है।
वाक्य में काम के समय का पता देने वाला रूप। एक ही वाक्य तीनों कालों में लिखने पर कर्ता और स्थान वही रहते हैं और केवल क्रिया बदलती है।
वह जगह जहाँ गढ़ने का काम होता है। शिल्प शब्द के परिवार में शिल्पी करने वाला है, शिल्पकला उसकी कला है, और शिल्पकौशल उसमें मिली दक्षता।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
आठवीं कक्षा में शिक्षक बोर्ड पर एक पंक्ति लिखते हैं और कहते हैं कि इसमें जितने औज़ार दिखें, गिनकर बताओ। पंक्ति है — सुबह की हवा खिड़की खोलकर भीतर आ जाती है, और शाम की हवा उसे बंद कर देती है। एक विद्यार्थी कहता है कि इसमें हवा को मनुष्य जैसा दिखाया गया है। दूसरा कहता है कि सुबह और शाम उलटे अर्थ के शब्द हैं। तीसरा कहता है कि हवा शब्द दो बार आया है। चौथा कहता है कि यह वाक्य वर्तमान काल में है।
Analysis:
ध्यान दीजिए कि एक छोटी पंक्ति में भी तीन-चार औज़ार निकल आते हैं, और दो औज़ार नहीं निकलते। इसी से पता चलता है कि औज़ार गिनने का काम हर पंक्ति पर अलग उतरता है।
Activity:
अपनी पाठ्यपुस्तक से कोई एक पंक्ति चुनिए और उसमें छहों औज़ारों को एक-एक करके खोजिए, और जो न मिले उसके आगे क्रॉस लगा दीजिए।
करके देखो
Title:
एक वाक्य, तीन काल
Safety:
किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं है; केवल लिखना है।
What You Notice:
रेखा खींचने पर वाक्य का बड़ा हिस्सा बिना बदला दिखता है। केवल अंत वाला टुकड़ा तीनों बार अलग निकलता है।
Did you know
मानवीकरण केवल कविता का औज़ार नहीं है। रोज़ की बातचीत में भी हम कहते हैं कि हवा ने दरवाज़ा खोल दिया या घड़ी भाग रही है।
हिंदी में काल के तीन मुख्य भेद हैं, पर हर भेद के भीतर कई रूप होते हैं। इसी कारण एक ही काम को कई ढंग से कहा जा सकता है।
Memory tricks
छह औज़ार याद रखने का सूत्र — वि–दो–स–प्र–सं–मा — विलोम, दोहराव, समानार्थी, प्रश्न, संबोधन, मानवीकरण। पहले तीन शब्दों के हैं, चौथा और पाँचवाँ कहने के ढंग के, और छठा पूरी कविता को खड़ा करता है।
Practice MCQs with answers (25)
- A एक ही शब्द का दोहराव
- B समानार्थी शब्दों का जोड़ा
- C विलोम शब्दों का जोड़ा
- D किसी को सीधी पुकार
Show answer
Why:
उलटे अर्थ वाले शब्द साथ आने से बात का घेरा पूरा हो जाता है।
- A दोनों शब्द एक ही अर्थ देने लगते हैं
- B दोनों सिरे एक साथ सामने आ जाते हैं
- C पंक्ति की लंबाई बहुत बढ़ जाती है
- D पाठक को अर्थ समझना कठिन हो जाता
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Why:
यही कारण है कि कवयित्री एक सिरा चुनकर नहीं रुकतीं।
- A दोहराव, जिससे लय बिगड़ने लगती है
- B दोहराव, जिससे कविता लंबी हो जाती है
- C दोहराव, जिससे अर्थ बदलता चला जाता है
- D दोहराव, जिससे माँग भारी हो जाती है
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Why:
जैसे कोई माँग दोहराने पर अधिक सुनाई देती है।
- A छोटी पंक्ति में लय सँभल जाती है
- B पंक्ति का अर्थ दोगुना हो जाता है
- C पाठक को दो जगहें दिखने लगती हैं
- D कविता में एक भूल दिखने लगती है
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Why:
छोटी पंक्ति में शब्द की लंबाई मायने रखती है।
- A दोनों एक ही पंक्ति में कभी नहीं आते हैं
- B दोहराव भूल से हुआ है, और बचाव जान-बूझकर
- C दोहराव जान-बूझकर है, और वह बचाव भी जान-बूझकर
- D दोनों में सचमुच एक सीधा विरोध बना ही रह जाता है
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Why:
जिस शब्द को दोहराना है उसे दोहराया जाता है, और जिसे नहीं, उसके लिए दूसरा शब्द आ जाता है।
- A आरोहण और अवरोहण वाली पंक्तियों में
- B सुगंध और बीज वाले उदाहरणों में
- C मेघ और किरण वाली पंक्तियों में
- D भूमि को सिखाने वाली पंक्ति में
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Why:
वहाँ वे सीधा कथन न देकर पूछती हैं।
- A प्रश्न से कवयित्री का काम घट जाता है
- B प्रश्न से कविता की लंबाई बढ़ जाती है
- C प्रश्न से पाठक को पढ़ना पड़ता है
- D अपने आप बना उत्तर अधिक देर टिकता है
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Why:
यह औज़ार आगे आने वाली तुलना को भी तैयार करता है।
- A किसी को सीधे पुकारकर कुछ कहना
- B किसी वस्तु का वर्णन करना
- C किसी शब्द का उलटा अर्थ देना
- D किसी बात को दोहरा देना
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Why:
पूरी कविता किसी से कह रही है, पर नाम नहीं लेती।
- A पुकार केवल घर के बड़ों तक जाती है
- B पुकार किसी तक भी नहीं पहुँच पाती है
- C पुकार हर रोकने वाले तक पहुँच जाती है
- D पुकार केवल कवयित्री तक सीमित रहती
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Why:
और कई बार वह व्यक्ति पाठक स्वयं निकलता है।
- A अनुप्रास
- B मानवीकरण
- C उपमा
- D पुनरुक्ति
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Why:
सपने के पंख, उसकी उड़ान और उसका सिखाना — सब इसी औज़ार से बने हैं।
- A यह सबसे अंत में आने वाला औज़ार है
- B इसका नाम बाक़ी औज़ारों से लंबा पड़ता है
- C यह कविता की हर पंक्ति में एक बार आता है
- D इसके बिना यह कविता बन ही नहीं सकती थी
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Why:
सपना उड़ता है, लौटता है और सिखाता है — यह सब प्राणी का काम है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
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Why:
दोनों सही हैं, और कारण सचमुच अभिकथन को समझा देता है।
- A भविष्य काल
- B भूतकाल
- C वर्तमान काल
- D किसी काल में नहीं
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Why:
जाती है वर्तमान बताता है।
- A पतंग आकाश में उड़ जाएगी
- B पतंग आकाश में उड़ गई थी
- C पतंग आकाश में उड़ती रहती है
- D पतंग आकाश में उड़ रही है
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Why:
गई थी भूत बताता है।
- A पूरा वाक्य
- B केवल कर्ता
- C केवल स्थान
- D केवल क्रिया
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Why:
कर्ता, स्थान और काम वही रहते हैं।
- A अंत में, जहाँ क्रिया आती है
- B आरंभ में, जहाँ कर्ता आता है
- C बीच में, जहाँ स्थान आता है
- D कहीं भी, कोई नियम नहीं है
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Why:
जाती है, गई थी और जाएगी — तीनों अंत में ही बदलते हैं।
- A दक्षता या कौशल
- B हाथ से गढ़ने का काम
- C कोई लंबी यात्रा
- D निर्माण या रचना
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Why:
बाक़ी तीनों अर्थ शब्दकोश में मिलते हैं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
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Why:
I और II सही हैं। III ग़लत है — शिल्पशाला वह जगह है जहाँ यह काम होता है।
- A मूल शब्द की लंबाई
- B मूल शब्द का अर्थ
- C मूल शब्द का पहला अक्षर
- D मूल शब्द का कोई अर्थ नहीं
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Why:
शिल्पी में करने वाला, शिल्पकला में कला, शिल्पशाला में जगह।
- A सूर्यकांत त्रिपाठी
- B सुभद्रा कुमारी चौहान
- C सुमित्रानंदन पंत
- D महादेवी वर्मा
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Why:
उनका जीवन-काल उन्नीस सौ सात से उन्नीस सौ सत्तासी तक रहा।
- A मुरादाबाद
- B इलाहाबाद
- C फर्रुखाबाद
- D अहमदाबाद
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Why:
वह नगर उत्तर प्रदेश में है।
- A भारत रत्न
- B भारतीय ज्ञानपीठ
- C साहित्य शिरोमणि
- D कालिदास सम्मान
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Why:
हिंदी में उनका नाम बहुत आदर से लिया जाता है।
- A सांध्य गीत
- B दीपशिखा
- C नीरजा
- D साये में धूप
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Why:
बाक़ी तीनों उनके कविता-संग्रह हैं।
- A कविता में रंग और चमक के चित्र भरे हुए हैं
- B कविता में किसी चित्रकार का नाम आता है
- C कविता के साथ पुस्तक में कोई चित्र है
- D इस बात का कविता से कोई संबंध नहीं है
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Why:
जो रंगों से काम करता हो, उसे ऐसी कल्पना सहज आ सकती है।
- A कविता के कठिन शब्दों की सूची बना लेना
- B कविता एक बार पढ़कर उसका अर्थ लिख लेना
- C कविता दो बार पढ़ना — अर्थ के लिए, फिर शिल्प के लिए
- D उस कविता को केवल गाकर याद ही कर लेना अधिक ठीक रहेगा
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Why:
दूसरी बार पढ़ते समय दिखता है कि कौन-सा शब्द किस काम के लिए रखा गया है।
Important short questions (7)
क्योंकि उसमें कुछ औज़ार सोच-समझकर लगाए गए हैं, जैसे कोई कारीगर अपने औज़ार चुनता है। छह औज़ार साफ़ दिखते हैं, और हर एक का अपना काम है।
क्योंकि दोनों चुनाव जान-बूझकर हैं। जिस शब्द को दोहराना था, उसे दोहराया गया; और जिसे नहीं दोहराना था, उसके लिए दूसरा शब्द ले आया गया।
पुकार हर उस व्यक्ति तक पहुँच जाती है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति है। कई बार वह व्यक्ति पाठक स्वयं निकलता है, और तब मनाही अपने लिए पढ़नी पड़ती है।
क्योंकि इसके बिना यह कविता बन ही नहीं सकती थी। सपने के पंख, उसकी उड़ान, उसका लौटना और किसी को सिखाना — यह सब कोई जीवित प्राणी ही करता है।
वर्तमान काल में — पतंग आकाश में उड़ जाती है। भूतकाल में — पतंग आकाश में उड़ गई थी। भविष्य काल में — पतंग आकाश में उड़ जाएगी। कर्ता और स्थान वही रहे।
शिल्पी वह है जो गढ़ने का काम करता है। शिल्पकार भी वही अर्थ देता है। शिल्पकला इस काम की कला है, और शिल्पशाला वह जगह है जहाँ यह काम होता है।
वे उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में जन्मी थीं, और उनका जीवन-काल उन्नीस सौ सात से उन्नीस सौ सत्तासी तक रहा। कविता लिखना उन्होंने बहुत छोटी आयु में शुरू किया, और उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिला।
Long answer questions (3)
छह औज़ार हैं — विलोम जोड़ा, दोहराव, समानार्थी शब्द, प्रश्न, संबोधन और मानवीकरण। विलोम जोड़ा दोनों सिरे एक साथ सामने ले आता है, जिससे कोई एक पक्ष भारी नहीं पड़ता। दोहराव माँग को भारी कर देता है। समानार्थी शब्द छोटी पंक्ति की लय सँभालते हैं। प्रश्न उत्तर पाठक से निकलवाता है, और अपने आप बना उत्तर देर तक टिकता है। संबोधन बात को किसी तक पहुँचा देता है, और नाम न होने से वह सब तक पहुँच जाती है। मानवीकरण सपने को प्राणी बना देता है। छहों मिलकर वही करते हैं जो कारीगर के औज़ार करते हैं — वे चीज़ को गढ़ते हैं।
किसी एक शब्द के आगे-पीछे कुछ जोड़कर नए शब्द बनते हैं, और हर नए शब्द में मूल अर्थ बचा रहता है। शिल्प का अर्थ है हुनर या गढ़ने का काम। उसी से शिल्पी बना, जिसमें करने वाला जुड़ गया। शिल्पकला बना, जिसमें कला जुड़ गई। शिल्पकौशल बना, जिसमें उस काम की दक्षता जुड़ी। और शिल्पशाला बना, जिसमें वह जगह जुड़ गई जहाँ काम होता है। इस आदत का लाभ दो तरह का है। पहला, कोई नया शब्द मिलने पर उसका अर्थ अनुमान से निकाला जा सकता है। दूसरा, शब्दकोश देखना आसान हो जाता है, क्योंकि मूल शब्द ढूँढ़ने से पूरा परिवार एक जगह मिल जाता है।
महादेवी वर्मा केवल लिखती नहीं थीं; वे चित्र भी बनाती थीं। इस बात को कविता के साथ रखकर पढ़ने से कुछ चुनाव समझ में आने लगते हैं। कविता में रंग और चमक के चित्र भरे हुए हैं। सपना बादलों से रंग लेता है और किरणों से दीप्ति, और दोनों साथ लेकर धरती पर आता है। जो व्यक्ति रंगों से काम करता हो, उसे ऐसी कल्पना सहज आ सकती है। शिल्प शब्द का चुनाव भी इसी से जुड़ा लगता है, क्योंकि शिल्प हाथ से गढ़ने का काम है और चित्र बनाना भी वही है। ध्यान रखने की बात यह है कि यह एक पढ़ने का ढंग है, कोई प्रमाण नहीं। कविता इस जानकारी के बिना भी समझी जा सकती है, पर इसके साथ वह अधिक खुल जाती है।
Flashcards (17)
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- कौन-सा औज़ार
- शब्द और अर्थ
- काल बदलने के क़दम लगाइए
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
Class 8 Hindi Chapter 7 — frequently asked questions
शीर्षक कोई नाम नहीं, एक मनाही है। वह किसी और से कुछ न करने को कहता है। इससे कविता सलाह नहीं रह जाती। वह एक निवेदन बन जाती है, और निवेदन उसी से होता है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति हो।
पहली मनाही पंख काटने की है, यानी क्षमता ही छीन लेने की। दूसरी गति बाँधने की है, यानी क्षमता रहने देकर उसका उपयोग तय कर देने की। पहली बड़ी है और दूसरी बारीक, पर दोनों एक ही दिशा में जाती हैं।
पहला सुगंध का है, जो ऊपर जाकर लौटती नहीं। दूसरा बीज का है, जो नीचे गिरकर उठता नहीं। तीसरा अग्नि और धुएँ का है, जो अपनी-अपनी दिशा में बँधे हैं। साझा बात यह है कि हर चीज़ की गति एक ही तरफ़ की है।
आरोहण में कोई चीज़ नीचे से ऊपर की ओर बढ़ती है। पर्वत पर चढ़ना इसका उदाहरण है। अवरोहण में वह ऊपर से नीचे की ओर आ जाती है। नदी का पहाड़ से उतरना इसका उदाहरण है।
पूरी बात बन जाती है। केवल आरोहण की बात होती तो लगता कि सपने का काम ऊपर जाना है। केवल अवरोहण की बात होती तो लगता कि लौटना ही मूल्यवान है। दोनों साथ रखने से उड़ान के दोनों हिस्से ज़रूरी दिखते हैं।
क्योंकि एक आधा रोक देने पर पूरा चक्र टूट जाता है। ऊपर जाकर रुका सपना केवल कल्पना रह जाता है, और नीचे ही रह गया सपना कभी बड़ा नहीं होता।
क्योंकि उसमें कुछ औज़ार सोच-समझकर लगाए गए हैं, जैसे कोई कारीगर अपने औज़ार चुनता है। छह औज़ार साफ़ दिखते हैं, और हर एक का अपना काम है।
क्योंकि दोनों चुनाव जान-बूझकर हैं। जिस शब्द को दोहराना था, उसे दोहराया गया; और जिसे नहीं दोहराना था, उसके लिए दूसरा शब्द ले आया गया।
पुकार हर उस व्यक्ति तक पहुँच जाती है जिसके हाथ में रोकने की शक्ति है। कई बार वह व्यक्ति पाठक स्वयं निकलता है, और तब मनाही अपने लिए पढ़नी पड़ती है।
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