Class 8 Hindi Chapter 10: तरुण के स्वप्न
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स्वप्न और उसका उत्तराधिकार
यह पाठ सुभाषचंद्र बोस के एक भाषण का अंश है, जो उन्होंने मेदिनीपुर के जिला युवक-सम्मेलन में नौजवानों के सामने कहा था। वे देशबंधु चित्तरंजन दास के सपने को याद करते हैं, अपने को उसका उत्तराधिकारी कहते हैं, और बताते हैं कि वह सपना एक नया सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज है।
What you will be able to do
- इस पाठ की विधा बताकर भाषण और लेख का अंतर समझा सकूँगा।
- भाषण का अवसर, तारीख़ और सुनने वाले बता सकूँगा।
- उत्स और निर्झर का अर्थ देकर उनके चुनाव का कारण लिख सकूँगा।
- उत्तराधिकारी होने का अर्थ अपने शब्दों में समझा सकूँगा।
- सर्वांगीण शब्द का अर्थ देकर समाज-पहले वाले क्रम का कारण बता सकूँगा।
Key points
यह पाठ एक भाषण का अंश है। उसे 29 दिसंबर, 1929 के दिन मेदिनीपुर के जिला युवक-सम्मेलन में कहा गया था।
भाषण की भाषा में दोहराव, छोटे वाक्य और सीधा संबोधन मिलते हैं, क्योंकि सुनने वाला पीछे लौट नहीं सकता।
वक्ता अपने सपने को अकेला नहीं बताते; वे उसे अनेक सपनों की कतार में रखते हैं।
देशबंधु चित्तरंजन दास का सपना उनकी ताक़त का सोता और खुशी का झरना बना था।
उत्स का अर्थ सोता है और निर्झर का अर्थ झरना; दोनों शब्द पानी से लिए गए हैं।
उत्तराधिकारी होने का अर्थ यहाँ धन पाना नहीं, एक अधूरा काम आगे ले जाना है।
सपने की प्रेरणा से होने वाले सात काम गिनाए गए हैं, और सातों रोज़ के साधारण काम हैं।
वह सपना एक नया, सर्वांगीण, स्वाधीन और संपन्न समाज है, और उसके ऊपर एक स्वाधीन राष्ट्र।
भाषण का क्रम समाज से राष्ट्र की ओर जाता है, और यही उसकी सबसे अलग बात है।
Full explanation
एक भाषण, जो पाठ बन गया
यह पाठ कोई कहानी या कविता नहीं है। यह एक भाषण का अंश है, और भाषण देने वाले सुभाषचंद्र बोस हैं। उन्होंने यह मेदिनीपुर के जिला युवक-सम्मेलन में कहा था, और तारीख़ थी 29 दिसंबर, 1929। सुनने वाले कौन थे? देश के नौजवान। यह बात पढ़ते समय साथ रखनी चाहिए, क्योंकि भाषण का हर वाक्य उन्हीं के लिए चुना गया है।
भाषण और लेख में अंतर क्या है
लेख पढ़ा जाता है, भाषण सुना जाता है। सुनने वाला पीछे लौटकर कोई पंक्ति फिर नहीं पढ़ सकता, इसलिए बोलने वाला अपनी बात दोहराता है, छोटे वाक्य रखता है, और बीच-बीच में सुनने वालों को सीधे पुकारता है। आगे आप देखेंगे कि इस अंश में ये तीनों बातें हैं। यही इसकी भाषा को और पाठों से अलग करती है।
पहला वाक्य ही सबसे बड़ा दावा है
अंश की शुरुआत बहुत सीधी है — सपने अनेक लोगों ने देखे हैं। ध्यान दीजिए, वक्ता अपने सपने को पहला या अकेला नहीं बताता। वह उसे एक लंबी कतार में रखता है। किसी बड़े विचार को छोटा करके शुरू करना एक सधा हुआ ढंग है, क्योंकि इससे सुनने वाला पहले ही वाक्य पर अपने को भी उसी कतार में खड़ा पा लेता है।
देशबंधु का सपना
इसके बाद वक्ता एक नाम लेते हैं — देशबंधु चित्तरंजन दास। वे सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु माने जाते हैं, और भाषण के समय उनका देहांत हो चुका था। उनके बारे में दो बातें कही जाती हैं। पहली, उन्होंने भी एक सपना देखा था। दूसरी, वही सपना उनकी ताक़त का सोता बना और उनकी खुशी का झरना भी।
उत्स और निर्झर — दो चुने हुए शब्द
उत्स का अर्थ है सोता, यानी वह जगह जहाँ से पानी निकलता है। निर्झर का अर्थ है झरना। दोनों शब्द पानी से लिए गए हैं, और दोनों का काम एक जैसा नहीं है। सोता ज़मीन के नीचे से देता रहता है, झरना ऊपर से गिरता दिखता है। यानी सपने ने उन्हें भीतर से शक्ति दी और बाहर से आनंद भी। एक ही सपना, दो काम।
एक सपना किसी की शक्ति कैसे बनता है
इस प्रश्न पर रुकना चाहिए, क्योंकि यही भाषण का आधार है। जिस व्यक्ति के सामने कोई बड़ा लक्ष्य साफ़ होता है, उसका हर दिन उसी लक्ष्य से तय होने लगता है। वह थकता है, पर रुकता नहीं, क्योंकि रुकने का कारण लक्ष्य से छोटा होता है। इसी को वक्ता शक्ति का सोता कह रहे हैं।
उत्तराधिकारी होने का अर्थ
अब भाषण का सबसे अधिक चर्चित वाक्य आता है — उस सपने के उत्तराधिकारी आज हम हैं। उत्तराधिकारी वह होता है जिसे किसी के बाद उसकी चीज़ मिलती है। यहाँ कोई धन या मकान नहीं मिल रहा, एक अधूरा काम मिल रहा है। इसलिए इस शब्द का अर्थ केवल पाना नहीं है; अर्थ है उस काम को आगे ले जाना।
'हम' किसके लिए आया है
यह शब्द परखने लायक है। वक्ता सभा में खड़े हैं और सामने नौजवान बैठे हैं। 'हम' में वक्ता भी हैं, पर अकेले वक्ता नहीं। 'हम' का सीधा अर्थ यहाँ देश का तरुण वर्ग है, और वक्ता अपने को उसी के भीतर गिन रहे हैं। बोलने वाला अपने को सुनने वालों से अलग न रखे — तो बात मानी जाती है।
सपना दिनचर्या बन जाता है
इसके बाद एक लंबी सूची आती है। वक्ता कहते हैं कि इसी सपने की प्रेरणा से वे उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं, लिखते हैं, भाषण देते हैं और काम-काज करते हैं। सात काम, और सातों रोज़ के साधारण काम हैं। कोई बड़ा और वीरता वाला काम इस सूची में नहीं रखा गया।
साधारण कामों की सूची क्यों रखी गई
क्योंकि इससे सपना आकाश से उतरकर दिन के भीतर आ जाता है। यदि वक्ता कहते कि सपने के लिए वे लड़ते हैं और जेल जाते हैं, तो सुनने वाला नौजवान अपने को उससे बाहर पाता। उठने-बैठने और लिखने-पढ़ने की सूची सुनकर वह अपने को भीतर पाता है। यह सुनने वाले को जोड़ने का बहुत बारीक तरीक़ा है।
फिर एक सीधा प्रश्न
सूची के बाद वक्ता खुद पूछते हैं कि वह सपना या आदर्श आख़िर क्या है। सभा में प्रश्न पूछकर उत्तर अपने ही मुँह से देना एक पुराना ढंग है। इससे सुनने वाले का ध्यान फिर एक बार खिंच आता है, और आगे आने वाला उत्तर अधिक ध्यान से सुना जाता है।
उत्तर — चार शब्दों का एक समाज
उत्तर में एक समाज का नाम आता है, और उसके आगे चार विशेषताएँ जुड़ी हैं। वह समाज नया हो, सर्वांगीण हो, स्वाधीन हो और संपन्न हो। इसके ऊपर एक स्वाधीन राष्ट्र हो। ध्यान दीजिए कि क्रम समाज से राष्ट्र की ओर जाता है, उलटा नहीं। पहले समाज, फिर उस पर राष्ट्र।
सर्वांगीण का अर्थ
अंग का अर्थ है हिस्सा, और सर्वांगीण का अर्थ है सब हिस्सों वाला, यानी पूरा। यह शब्द यहाँ सबसे ज़रूरी है। स्वाधीनता केवल राजनीति की नहीं चाहिए थी। वक्ता के सपने में समाज के सब हिस्से बदलने थे — शिक्षा, जाति, स्त्रियों का स्थान, आमदनी का अंतर और काम की मर्यादा। आगे का पूरा भाषण इसी एक शब्द को खोलता है।
समाज पहले, राष्ट्र बाद में
यह क्रम इस भाषण की सबसे अलग बात है। उस समय का सीधा लक्ष्य अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति था, यानी राष्ट्र की स्वाधीनता। वक्ता उससे आगे की बात रख रहे हैं। उनका कहना है कि नीचे का समाज न बदले तो ऊपर का राष्ट्र स्वाधीन होकर भी वैसा नहीं बनेगा जैसा चाहा गया था। इसी कारण वे समाज को पहले रखते हैं।
इस भाग को आज कैसे पढ़ें
यह भाषण सौ साल से कुछ कम पुराना है, पर इसका प्रश्न आज भी वही है — किसी बड़े काम का उत्तराधिकारी कहलाने के लिए क्या करना पड़ता है। उत्तर भाषण में ही है। उसे अपने दिन के साधारण कामों में उतार लेना पड़ता है। यही इस अंश की सबसे काम की बात है।
Concepts and terms
सभा में लोगों को जगाने और किसी काम के लिए तैयार करने वाला भाषण। यह पाठ ऐसे ही एक उद्बोधन का अंश है, और उसका लक्ष्य देश के नौजवान थे।
सोता, यानी वह जगह जहाँ से पानी निकलता है। भाषण में यह शब्द सपने के लिए आया है, क्योंकि सपना भीतर से ताक़त देता रहता है।
झरना, जो ऊपर से गिरता दिखता है। सोता भीतर से देता है और झरना बाहर दिखता है, इसलिए दोनों शब्द एक साथ दो काम कहते हैं — शक्ति और आनंद।
वह व्यक्ति जिसे किसी के बाद उसकी चीज़ मिलती है। भाषण में धन या मकान नहीं, एक अधूरा काम मिल रहा है, इसलिए अर्थ है उस काम को आगे ले जाना।
सब हिस्सों वाला, यानी पूरा। अंग का अर्थ हिस्सा है। वक्ता को केवल राजनीति की स्वाधीनता नहीं चाहिए थी; उनके सपने में समाज के सब हिस्से बदलने थे।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
एक विद्यालय में सभा हो रही है। प्रधानाचार्य बोलने के लिए खड़े होते हैं। वे शुरू में कहते हैं कि इस विद्यालय को अच्छा बनाने का सपना अनेक लोगों ने देखा है। इसके बाद वे पिछले प्रधानाचार्य का नाम लेते हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने पुस्तकालय बनवाया था और वही काम अब आधा रुका पड़ा है। फिर वे सामने बैठे विद्यार्थियों की ओर देखते हैं। वे कहते हैं कि उस सपने के उत्तराधिकारी अब हम सब हैं। अंत में वे कुछ छोटे काम गिनाते हैं — समय पर आना, पुस्तक लौटाना और कक्षा साफ़ रखना।
Analysis:
ध्यान देने की बात यह है कि प्रधानाचार्य ने कोई नई बात नहीं कही। उन्होंने वही तीन ढंग अपनाए जो इस भाषण में हैं — कतार वाली शुरुआत, हम शब्द, और साधारण कामों की सूची। अच्छा बोलने के ढंग सौ साल बाद भी वही रहते हैं, क्योंकि सुनने वाले का मन वैसा ही रहता है।
Activity:
अपनी कक्षा के लिए चार पंक्तियों का एक छोटा उद्बोधन लिखिए, जिसमें पहली पंक्ति कतार वाली हो और अंतिम पंक्ति में तीन साधारण काम गिनाए गए हों।
करके देखो
Title:
मेरा एक सपना, और मेरे सात काम
Safety:
किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं है; केवल सोचना और लिखना है।
What You Notice:
सात कामों की सूची बनाते ही सपना बातों से निकलकर दिन में आ जाता है। भाषण में यही काम उस लंबी सूची से हुआ था।
Did you know
चित्तरंजन दास को देशबंधु की उपाधि मिली थी, जिसका अर्थ है देश का मित्र। वे स्वराज पार्टी के संस्थापकों में गिने जाते हैं।
भारत में हर वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है, और उसका कारण स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है।
सुभाषचंद्र बोस की जयंती 23 जनवरी को आती है, और सरकार ने उसे पराक्रम दिवस का नाम दिया है।
Memory tricks
सोता और झरना याद रखने का सूत्र — उ–सो, नि–झ — उत्स का सोता, निर्झर का झरना। सोता भीतर से देता रहता है, झरना बाहर से दिखता है; इसी तरह सपने ने भीतर शक्ति दी और बाहर आनंद।
समाज की चार विशेषताएँ — न–स–स–सं — नया, सर्वांगीण, स्वाधीन, संपन्न। चारों एक साथ याद रहें तो भाषण का उत्तर पूरा लिखा जा सकता है।
Practice MCQs with answers (25)
- A एक भाषण के अंश के रूप में
- B एक कहानी के रूप में
- C एक कविता के रूप में
- D एक यात्रा-वृत्तांत के रूप में
Show answer
Why:
सुनने वाले सामने बैठे थे, और हर वाक्य उन्हीं के लिए चुना गया है।
- A कलकत्ता नगर शिक्षक-सम्मेलन में
- B मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में
- C कटक जिला किसान-सम्मेलन में
- D मांडले जेल के बंदी-सम्मेलन में
Show answer
Why:
सुनने वाले देश के नौजवान थे।
- A यह कविता है, क्योंकि इसमें पानी वाले शब्द आते हैं
- B यह सचमुच लेख ही है, और सभा में कभी बोला नहीं गया
- C यह मूल रूप में सभा में बोला गया था, छपना बाद की बात है
- D इसमें कोई कमी नहीं है, क्योंकि छपी हर चीज़ लेख होती है
Show answer
Why:
छपना रूप बदलता है, विधा नहीं।
- A छोटे वाक्य कहने में अधिक समय लगता है
- B बोलने वाले को कठिन और लंबे वाक्य बनाने ही नहीं आते हैं
- C सभा में समय बहुत कम दिया जाता है
- D सुनने वाला पीछे लौटकर कोई पंक्ति फिर नहीं पढ़ सकता
Show answer
Why:
यही भाषण की भाषा को लेख से अलग करता है।
- A वे अनेक लोगों ने देखे हैं
- B वे किसी ने नहीं देखे हैं
- C वे केवल वक्ता ने देखे हैं
- D वे केवल अंग्रेज़ों ने देखे हैं
Show answer
Why:
वक्ता अपने सपने को एक लंबी कतार में रखते हैं।
- A सुनने वाला उस विचार को बिलकुल छोड़ देता है
- B सुनने वाला पहले ही वाक्य पर अपने को साथ पा लेता है
- C सुनने वाला वक्ता पर हँसने लगता है
- D सुनने वाला तो उस विचार को पहले से ही पूरा जान लेता है
Show answer
Why:
किसी बात को छोटा करके शुरू करना एक सधा हुआ ढंग है।
- A चंद्रशेखर आजाद का
- B सरदार वल्लभभाई पटेल का
- C देशबंधु चित्तरंजन दास का
- D जतिन दास का
Show answer
Why:
वे सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु माने जाते हैं।
- A वह उनसे एक बार देखा गया और फिर छूट गया
- B वह उनकी ताक़त का सोता बना, पर खुशी नहीं दे सका
- C वह उनकी खुशी का झरना बना, पर ताक़त नहीं दे सका
- D वह उनकी ताक़त का सोता बना और खुशी का झरना भी
Show answer
Why:
एक ही सपना, और उसके दो काम।
- A सोता, यानी जहाँ से पानी निकले
- B झरना, जो ऊपर से गिरे
- C कोई गहरा और लंबा कुआँ
- D कोई दूर-दूर तक बहती हुई बड़ी नदी
Show answer
Why:
यह शब्द पानी से लिया गया है।
- A सोता
- B झरना
- C तालाब
- D समुद्र
Show answer
Why:
सोता भीतर से देता है और झरना ऊपर से गिरता दिखता है।
- A सपने का पानी से कोई सीधा संबंध था
- B सपने ने भीतर से आनंद दिया, पर शक्ति नहीं
- C सपने ने भीतर से शक्ति दी और बाहर से आनंद भी
- D सपना केवल वक्ता के मन में बना रहा
Show answer
Why:
दोनों शब्द पानी से लिए गए हैं, पर उनका काम एक नहीं है।
- A वह सपना देखने में कोई लाभ नहीं है
- B उस सपने के उत्तराधिकारी कोई नहीं बचा
- C वह सपना अब पूरा हो चुका है
- D उस सपने के उत्तराधिकारी आज हम हैं
Show answer
Why:
यहाँ जो मिल रहा है, वह एक अधूरा काम है।
- A जिसे किसी के बाद उसकी चीज़ मिले
- B जो किसी से पहले आ जाए
- C जो किसी का विरोध करता रहे
- D जो किसी को कुछ देता रहे
Show answer
Why:
यहाँ धन या मकान नहीं, एक अधूरा काम मिल रहा है।
- A उस अधूरे काम को छोड़ देना
- B उस अधूरे काम को आगे ले जाना
- C उस काम का श्रेय अपने नाम कर लेना
- D उस काम पर केवल चर्चा करते रहना
Show answer
Why:
मिल रहा है एक काम, और काम करने के लिए होता है।
- A केवल चित्तरंजन दास के लिए
- B केवल वक्ता के लिए
- C देश के तरुण वर्ग के लिए
- D केवल अंग्रेज़ अधिकारियों के लिए
Show answer
Why:
सभा में सामने नौजवान बैठे थे, और वक्ता अपने को उसी में गिन रहे थे।
- A सुनने वालों को कुछ समझ ही नहीं आता
- B बात कम मानी जाती है, क्योंकि वक्ता छोटा लगता है
- C सुनने वाले सभा छोड़कर चले जाते हैं
- D बात अधिक मानी जाती है, क्योंकि दूरी नहीं बचती
Show answer
Why:
बोलने वाला अपने को सुनने वालों से अलग न रखे, तो बात बैठती है।
- A सात
- B तीन
- C पाँच
- D दस
Show answer
Why:
उठना, बैठना, चलना, फिरना, लिखना, भाषण देना और काम-काज करना।
- A बहुत बड़े और वीरता वाले काम
- B रोज़ के साधारण काम
- C केवल पढ़ने-लिखने वाले काम
- D केवल यात्रा से जुड़े काम
Show answer
Why:
कोई बड़ा और वीरता वाला काम उस सूची में नहीं रखा गया।
- A इससे भाषण की लंबाई बढ़ जाती है
- B इससे सपना और भी ऊँचा हो जाता है
- C इससे सपना दिन के भीतर उतर आता है
- D इससे सुनने वाले थक जाते हैं
Show answer
Why:
जेल और लड़ाई की सूची सुनकर नौजवान अपने को बाहर पाता।
- A एक नया नाम लेकर बात बदल देते हैं
- B सभा से उत्तर माँगकर बिलकुल चुप हो जाते हैं
- C भाषण वहीं समाप्त कर देते हैं
- D खुद एक प्रश्न पूछते हैं और उत्तर भी देते हैं
Show answer
Why:
इससे सुनने वाले का ध्यान फिर एक बार खिंच आता है।
- A नया, सर्वांगीण, स्वाधीन और संपन्न समाज
- B पुराना, छोटा, पराधीन और विपन्न समाज
- C केवल नया और केवल स्वाधीन समाज
- D केवल संपन्न और केवल बड़ा समाज
Show answer
Why:
और उसके ऊपर एक स्वाधीन राष्ट्र।
- A केवल एक हिस्से वाला
- B सब हिस्सों वाला, यानी पूरा
- C बहुत पुराना और बहुत ही बड़ा भी
- D बहुत नया और छोटा
Show answer
Why:
अंग का अर्थ हिस्सा है, और यही शब्द पूरे भाषण को खोलता है।
- A दोनों एक ही समय पर, बिना किसी क्रम के
- B पहले राष्ट्र, फिर उसमें समाज
- C पहले समाज, फिर उस पर राष्ट्र
- D केवल राष्ट्र, और समाज की कोई बात नहीं
Show answer
Why:
यही इस भाषण की सबसे अलग बात है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण अभिकथन को ठीक-ठीक समझाता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
II और III सही हैं। I ग़लत है — वे अपने सपने को एक कतार में रखते हैं।
Important short questions (7)
यह सुभाषचंद्र बोस के एक भाषण का अंश है। उन्होंने इसे 29 दिसंबर, 1929 के दिन कहा था। जगह थी मेदिनीपुर का जिला युवक-सम्मेलन, और सुनने वाले देश के नौजवान थे।
सुनने वाला पीछे लौटकर कोई पंक्ति फिर नहीं पढ़ सकता। इसी कारण बोलने वाला अपनी बात दोहराता है, वाक्य छोटे रखता है और सुनने वालों को बीच-बीच में सीधे पुकारता है।
उत्स का अर्थ सोता है और निर्झर का अर्थ झरना। सोता भीतर से देता रहता है और झरना बाहर गिरता दिखता है। दोनों एक साथ रखकर यह कहा गया है कि एक ही सपने ने भीतर से शक्ति दी और बाहर से आनंद भी।
उत्तराधिकारी वह होता है जिसे किसी के बाद उसकी चीज़ मिलती है। यहाँ कोई धन या मकान नहीं मिल रहा, एक अधूरा काम मिल रहा है। इसलिए अर्थ केवल पाना नहीं, उस काम को आगे ले जाना है।
क्योंकि इससे सपना आकाश से उतरकर दिन के भीतर आ जाता है। लड़ाई और जेल की सूची सुनिए। सुनने वाला नौजवान अपने को उससे बाहर पाता है। अब उठने-बैठने और लिखने-पढ़ने की सूची सुनिए। इस बार वह अपने को भीतर पाता है।
क्योंकि इसका अर्थ है सब हिस्सों वाला। वक्ता को केवल राजनीति की स्वाधीनता नहीं चाहिए थी। उनके सपने में शिक्षा, जाति, स्त्रियों का स्थान, आमदनी का अंतर और काम की मर्यादा — सब बदलने थे, और आगे का पूरा भाषण इसी शब्द को खोलता है।
किसी बड़े विचार को छोटा करके शुरू करना एक सधा हुआ ढंग है। इससे सुनने वाला पहले ही वाक्य पर अपने को भी उसी कतार में खड़ा पा लेता है, और बात अपनी लगने लगती है।
Long answer questions (3)
पहला ढंग शुरुआत का है। वे अपने सपने को पहला या अकेला नहीं बताते, बल्कि कहते हैं कि सपने अनेक लोगों ने देखे हैं। इससे सुनने वाला पहले ही वाक्य पर अपने को उसी कतार में पा लेता है। दूसरा ढंग शब्द का है। वे हम कहते हैं, और उसमें अपने को तथा सामने बैठे नौजवानों को एक साथ गिन लेते हैं। तीसरा ढंग सूची का है। सपने की प्रेरणा से होने वाले काम वे साधारण रखते हैं — उठना, बैठना, चलना, फिरना, लिखना, भाषण देना और काम-काज करना। कोई वीरता वाला काम उसमें नहीं है, इसलिए सपना दिन के भीतर उतर आता है। चौथा ढंग प्रश्न का है। वे खुद पूछते हैं कि वह सपना क्या है, और उत्तर भी खुद देते हैं, जिससे सुनने वाले का ध्यान फिर खिंच आता है।
उत्तर में एक समाज की बात आती है, और उसके आगे चार विशेषताएँ जुड़ी हैं — वह नया हो, सर्वांगीण हो, स्वाधीन हो और संपन्न हो। इसके ऊपर एक स्वाधीन राष्ट्र हो। ध्यान देने की बात यह है कि क्रम समाज से राष्ट्र की ओर जाता है, उलटा नहीं। इसका कारण सर्वांगीण शब्द में छिपा है, जिसका अर्थ है सब हिस्सों वाला। उस समय का सीधा लक्ष्य अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति था, यानी राष्ट्र की स्वाधीनता। वक्ता उससे आगे की बात रखते हैं। उनका कहना है कि नीचे का समाज न बदले तो ऊपर का राष्ट्र स्वाधीन होकर भी वैसा नहीं बनेगा जैसा चाहा गया था। इसी कारण वे समाज को पहले रखते हैं।
दोनों शब्द पानी से लिए गए हैं। उत्स का अर्थ सोता है और निर्झर का अर्थ झरना। पहली बात यह है कि दोनों का काम एक जैसा नहीं है। सोता ज़मीन के नीचे से देता रहता है, और झरना ऊपर से गिरता दिखता है। इससे एक ही सपने के दो काम कहे जाते हैं — भीतर से शक्ति और बाहर से आनंद। दूसरी बात यह है कि पानी कभी रुकता नहीं, इसलिए ये शब्द लगातार मिलने वाली चीज़ का भाव देते हैं। तीसरी बात सुनने वालों की है। सोता और झरना सबने देखे होते हैं, इसलिए कठिन विचार भी एक जाने-पहचाने चित्र से समझ में आ जाता है। यही अच्छे भाषण की पहचान है।
Flashcards (17)
Play this topic
- भाषण का क्रम लगाइए
- शब्द और अर्थ
- किस ओर की बात
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
उस समाज के छह लक्षण
वक्ता सर्वांगीण शब्द को खोलकर उस समाज की छह बातें गिनाते हैं — व्यक्ति हर दृष्टि से मुक्त हो, जाति से ऊँच-नीच न हो, स्त्री को अधिकार के साथ भागीदारी भी मिले, आमदनी का अंतर अन्याय न बने, अवसर सबको मिले, और काम का पूरा आदर हो।
What you will be able to do
- उस समाज की छहों बातें क्रम से गिना सकूँगा।
- समाज के दबाव से मरने वाली बात का अर्थ उदाहरण देकर समझा सकूँगा।
- स्त्रियों के लिए अधिकार और भागीदारी, दोनों की ज़रूरत बता सकूँगा।
- विषमता, मर्यादा और अकर्मण्य का अर्थ लिख सकूँगा।
- समान अवसर से देश की श्रम-शक्ति बढ़ने का कारण समझा सकूँगा।
Key points
वक्ता सर्वांगीण शब्द को खोलकर उस समाज की छह बातें गिनाते हैं।
पहली बात व्यक्ति की मुक्ति है, और वह हर दृष्टि से चाही गई है।
समाज के दबाव से कोई मरे नहीं — यानी समाज किसी के भीतर की बात इतनी न दबाए।
दूसरी बात जाति के आधार पर ऊँच-नीच न होने की है, और वह स्वाधीनता की शर्त में रखी गई है।
तीसरी बात स्त्रियों की है, और उसमें अधिकार तथा भागीदारी दोनों आते हैं।
चौथी बात यह है कि धन का अंतर अन्याय बनने तक न बढ़े; विषमता का अर्थ असमानता है।
पाँचवीं बात शिक्षा और उन्नति के समान अवसर की है, जिससे देश की श्रम-शक्ति बढ़ती है।
छठी बात काम के आदर की है; मर्यादा का अर्थ यहाँ सीमा नहीं, आदर है।
इसी के साथ शर्त है कि आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई जगह नहीं रहेगी।
Full explanation
एक शब्द, और उसके छह हिस्से
पिछले भाग में वक्ता ने समाज को सर्वांगीण कहा था, यानी सब हिस्सों वाला। अब वे उसी शब्द को खोलते हैं। आगे छह बातें आती हैं, और छहों उस समाज के किसी एक हिस्से की हैं। पढ़ते समय इन्हें गिनकर रखना चाहिए, क्योंकि परीक्षा में यही सूची सबसे अधिक पूछी जाती है।
पहला हिस्सा — व्यक्ति की मुक्ति
पहली बात व्यक्ति की है। उस समाज में हर व्यक्ति हर दृष्टि से मुक्त हो। ध्यान दीजिए, यहाँ केवल राजनीति की मुक्ति की बात नहीं है। हर दृष्टि कहने का अर्थ है — सोचने की, बोलने की, काम चुनने की, और अपने ढंग से जीने की। किसी एक तरह की मुक्ति से काम नहीं चलेगा।
'समाज के दबाव से मरे नहीं'
इसके साथ एक बहुत कड़ी बात जुड़ती है। वक्ता कहते हैं कि समाज के दबाव से कोई व्यक्ति मरे नहीं। यह वाक्य चौंकाता है, क्योंकि दबाव से मरने की बात सीधे शरीर की नहीं है। इसका अर्थ है कि समाज किसी व्यक्ति के भीतर की बात इतनी न दबा दे कि वह जीते-जी निर्जीव जैसा हो जाए।
दबाव किस-किस रूप में आता है
यह आज भी देखा जा सकता है। किसी से उसका मनचाहा विषय छुड़ा दिया जाए, किसी को उसकी बात कहने से रोक दिया जाए, किसी को अपने ढंग से जीने पर ताना दिया जाए — ये सब दबाव हैं। इनमें से कोई भी हाथ नहीं उठाता, और फिर भी भीतर कुछ मर जाता है। वक्ता इसी की ओर इशारा करते हैं।
दूसरा हिस्सा — जातिभेद का कोई स्थान नहीं
दूसरी बात समाज के बँटवारे की है। उस समाज में जाति के आधार पर कोई ऊँचा-नीचा न हो। यह बात 1929 में कही गई थी, और उस समय इसे कहना आसान नहीं था। ध्यान देने की बात यह है कि वक्ता इसे सुधार की सूची में नहीं, स्वाधीनता की शर्त में रखते हैं।
तीसरा हिस्सा — स्त्रियों का समान स्थान
तीसरी बात स्त्रियों की है, और वह दो हिस्सों में आती है। पहला हिस्सा अधिकार का है — स्त्री को पुरुष के बराबर अधिकार मिलें। दूसरा हिस्सा काम का है — समाज और देश की सेवा में उसका हिस्सा भी बराबर हो। केवल अधिकार दे देना पूरा नहीं माना गया।
अधिकार और भागीदारी — दोनों क्यों
क्योंकि अधिकार काग़ज़ पर रह सकता है। किसी को वोट देने का अधिकार हो, पर घर से निकलने न दिया जाए, तो अधिकार होकर भी कुछ नहीं हुआ। वक्ता भागीदारी की बात जोड़कर इसी कमी को बंद करते हैं। यही इस भाषण की सबसे आगे की सोच मानी जाती है।
चौथा हिस्सा — आमदनी का अंतर न हो
चौथी बात पैसे की है। उस समाज में धन का अंतर इतना बड़ा न हो कि वह अन्याय बन जाए। भाषण में इसके लिए विषमता शब्द आया है, जिसका अर्थ है असमानता। ध्यान दीजिए कि वक्ता सबको एक जैसा बना देने की बात नहीं करते; वे अंतर को अन्याय बनने से रोकने की बात करते हैं।
पाँचवाँ हिस्सा — शिक्षा और उन्नति का समान अवसर
पाँचवीं बात अवसर की है। हर व्यक्ति को पढ़ने का और आगे बढ़ने का बराबर मौका मिले। यह चौथी बात से जुड़ी हुई है। जिसे पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा, उसकी आमदनी भी पीछे रहेगी, और अगली पीढ़ी भी उसी जगह खड़ी रहेगी। अवसर की समानता ही उस कतार को तोड़ती है।
इस बात का सीधा लाभ क्या है
एक लाभ देश को भी मिलता है। जब सबको पढ़ने और आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, तो काम करने वालों की संख्या और उनकी कुशलता, दोनों बढ़ेंगी। यानी देश की श्रम-शक्ति बढ़ेगी। वक्ता इसे दया का काम नहीं बताते; वे इसे देश के लाभ का काम बताते हैं।
छठा हिस्सा — श्रम और कर्म की मर्यादा
छठी बात काम की है। उस समाज में मेहनत और काम की पूरी इज़्ज़त हो। मर्यादा का अर्थ यहाँ सीमा नहीं, आदर है। यह बात उस समय की एक सच्चाई पर चोट करती है, जब हाथ से किया जाने वाला काम छोटा समझा जाता था और बैठकर किया जाने वाला काम बड़ा।
और एक कड़ी शर्त
इसी के साथ वक्ता एक शर्त जोड़ देते हैं — उस समाज में आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई जगह नहीं रहेगी। अकर्मण्य का अर्थ है काम के अयोग्य, यानी जो काम कर सकता है पर करता नहीं। यह शर्त इसलिए ज़रूरी है कि अधिकार और अवसर माँगने वाले से कर्तव्य भी माँगा जा रहा है।
छहों बातें एक साथ कैसे पढ़ें
इन छह बातों को अलग-अलग सुधार मानकर पढ़ना ठीक नहीं। ये एक ही माँग के छह रूप हैं। व्यक्ति मुक्त हो, जाति से ऊँच-नीच न हो, स्त्री बराबर हो, आमदनी का अंतर अन्याय न बने, अवसर सबको मिले, और काम का आदर हो। इन छहों के बाद ही वक्ता उस समाज को सर्वांगीण कहते हैं।
आज की कसौटी
अब इन्हें आज पर रखकर देखिए। हमारे संविधान में समानता का अधिकार है, शिक्षा का अधिकार है, और जाति के आधार पर भेद मना है। यानी भाषण की बहुत-सी बातें आज कानून बन चुकी हैं। फिर भी पढ़ते समय यह प्रश्न बचा रहता है कि कानून बन जाना और समाज में उतर आना, दोनों एक बात हैं या नहीं।
Concepts and terms
असमानता, यानी किसी चीज़ का बराबर न होना। भाषण में यह शब्द धन के अंतर के लिए आया है, और माँग यह है कि वह अंतर अन्याय बनने तक न बढ़े।
आदर और प्रतिष्ठा। इस प्रसंग में इसका अर्थ सीमा नहीं है। श्रम की मर्यादा का अर्थ है मेहनत से किए गए काम का पूरा आदर।
काम के अयोग्य, यानी आलसी — जो काम कर सकता है पर करता नहीं। उस समाज में ऐसे व्यक्ति के लिए कोई जगह नहीं रखी गई है।
किसी काम में बराबर का हिस्सा लेना। स्त्रियों के लिए अधिकार के साथ यह भी माँगा गया है, क्योंकि केवल अधिकार काग़ज़ पर रह सकता है।
किसी देश में काम करने वालों की संख्या और उनकी कुशलता। सबको शिक्षा और उन्नति का अवसर मिलने से यह बढ़ती है, इसलिए समान अवसर देश के लाभ का काम है।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
एक गाँव में दो बहनें रहती हैं। बड़ी बहन को आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। घर में कहा गया कि लड़की को इतना पढ़ाना बहुत है। छोटी बहन के समय गाँव में एक नया विद्यालय खुल जाता है। वह बारहवीं तक पढ़ती है और फिर एक प्रशिक्षण भी कर लेती है। अब वह उसी विद्यालय में पढ़ाती है। बड़ी बहन के घर में आज भी आमदनी कम है। छोटी बहन अपनी बेटी को शहर के महाविद्यालय में भेज पाती है। गाँव की सभा में यह बात रखी जाती है। सभा पूछती है कि दोनों बहनों का अंतर कहाँ से शुरू हुआ था।
Analysis:
ध्यान देने की बात यह है कि इस प्रसंग में किसी ने किसी के साथ कोई अन्याय नहीं किया। घर में जो कहा गया, वह उस समय का चलन था। फिर भी दो पीढ़ियों का अंतर उसी एक बात से बन गया। भाषण की चौथी और पाँचवीं बात इसी को रोकने के लिए कही गई हैं, और छोटी बहन का उदाहरण बताता है कि एक पीढ़ी में भी कतार टूट सकती है।
Activity:
अपने परिवार के तीन लोगों से पूछिए कि वे कितनी कक्षा तक पढ़े, और उसे एक छोटी तालिका में लिखिए। अंत में एक पंक्ति में लिखिए कि इस तालिका में कोई बदलाव दिखता है या नहीं।
करके देखो
Title:
छह लक्षणों की कसौटी
Safety:
किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं है; किसी व्यक्ति का नाम न लिखिए, केवल व्यवस्था की बात लिखिए।
What You Notice:
छहों बातें एक साथ रखने पर कोई एक जगह ऐसी निकल आती है जहाँ सुधार सबसे आसान है। भाषण भी इसी तरह सूची बनाकर आगे बढ़ता है।
Did you know
भारत के संविधान में अनुच्छेद 15 जाति, धर्म, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को मना करता है। यह भाषण उससे बीस साल से अधिक पहले का है।
शिक्षा का अधिकार भारत में सन् 2009 के एक कानून से मिला, जिससे छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों की मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा तय हुई।
Memory tricks
छह लक्षण याद रखने का सूत्र — मु–जा–ना–ध–अ–का — मुक्ति, जाति, नारी, धन, अवसर, काम। छह शब्दों का यह क्रम याद रहे तो पूरी सूची लिखी जा सकती है।
अधिकार और भागीदारी — अ–भा — अधिकार मिले और भागीदारी भी। केवल अधिकार लिख देना आधा उत्तर है, क्योंकि अधिकार काग़ज़ पर भी रह सकता है।
Practice MCQs with answers (25)
- A तीन
- B छह
- C चार
- D नौ
Show answer
Why:
छहों उस समाज के किसी एक हिस्से की हैं।
- A व्यक्ति की मुक्ति के बारे में
- B राष्ट्र की सीमा के बारे में
- C धन के बँटवारे के बारे में
- D भाषा के चुनाव के बारे में
Show answer
Why:
और वह मुक्ति हर दृष्टि से चाही गई है।
- A केवल पढ़ाई के क्षेत्र में मुक्ति
- B केवल राजनीति और शासन के ही क्षेत्र में मुक्ति
- C सोचने, बोलने, काम चुनने और जीने की मुक्ति
- D केवल यात्रा करने की मुक्ति
Show answer
Why:
किसी एक तरह की मुक्ति से काम नहीं चलेगा।
- A समाज में कोई यात्रा न रोकी जाए
- B समाज में कोई बड़ी बीमारी कहीं भी न फैलने पाए
- C समाज में कोई लड़ाई-झगड़ा न हो
- D समाज किसी के भीतर की बात इतनी न दबाए
Show answer
Why:
बात शरीर की नहीं है; भीतर कुछ मर जाने की है।
- A समाज में आमदनी का अंतर नहीं रहना चाहिए
- B समाज के दबाव से व्यक्ति के भीतर कुछ मर जाता है
- C समाज में काम की पूरी इज़्ज़त होनी चाहिए
- D समाज में जाति के आधार पर भेद नहीं होना चाहिए
Show answer
Why:
किसी ने हाथ नहीं उठाया, और फिर भी दबाव पूरा है।
- A जाति के आधार पर ऊँच-नीच पर
- B भाषा के आधार पर किसी भेद पर
- C उम्र के आधार पर भेद पर
- D गाँव और नगर के भेद पर
Show answer
Why:
वक्ता इसे स्वाधीनता की शर्त में रखते हैं।
- A वह किसी और देश की समस्या है
- B उसे बाद में कभी भी आगे देख ही लिया जा सकता है
- C उसके बिना स्वाधीनता अधूरी ही मानी जाएगी
- D उसका स्वाधीनता से कोई संबंध नहीं है
Show answer
Why:
शर्त वह होती है जिसके बिना बात पूरी नहीं होती।
- A तीन — अधिकार, भागीदारी और धन
- B एक — केवल अधिकार
- C एक — केवल भागीदारी
- D दो — अधिकार और भागीदारी
Show answer
Why:
केवल अधिकार दे देना पूरा नहीं माना गया।
- A क्योंकि अधिकार देना बहुत कठिन होता है
- B क्योंकि अधिकार काग़ज़ पर भी रह सकता है
- C क्योंकि अधिकार की कोई आवश्यकता नहीं थी
- D क्योंकि अधिकार केवल पुरुषों के लिए होता है
Show answer
Why:
वोट का अधिकार हो और घर से निकलने न दिया जाए, तो कुछ नहीं हुआ।
- A असमानता
- B समानता
- C स्वतंत्रता
- D मर्यादा
Show answer
Why:
चौथी बात धन के इसी अंतर पर है।
- A धन का प्रबंध ही न रखा जाए
- B सबकी आमदनी एक जैसी कर दी जाए
- C अंतर अन्याय बनने तक न बढ़े
- D धन की बात समाज से बाहर रखी जाए
Show answer
Why:
वक्ता सबको एक जैसा बना देने की बात नहीं करते।
- A यात्रा और मेलों की सुविधा की
- B घर और ज़मीन के बँटवारे की
- C भाषा और पहनावे के चुनाव की
- D शिक्षा और उन्नति के अवसर की
Show answer
Why:
यह बात आमदनी वाली बात से जुड़ी हुई है।
- A सभा में बैठकर भाषण सुनने की
- B पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक ही जगह खड़े रहने की
- C विद्यालय के बाहर लगने वाली कतार की
- D नौकरी के लिए लगने वाली कतार की
Show answer
Why:
पढ़ने का मौका न मिले तो अगली पीढ़ी भी वहीं खड़ी रहती है।
- A उसकी श्रम-शक्ति बढ़ जाएगी
- B उसका क्षेत्रफल बढ़ जाएगा
- C उसकी भाषाएँ कम हो जाएँगी
- D उसकी सीमाएँ बदल जाएँगी
Show answer
Why:
काम करने वालों की संख्या और कुशलता, दोनों बढ़ेंगी।
- A किसी पुराने रिवाज़ के रूप में
- B किसी पर दया के काम के रूप में
- C देश के लाभ के काम के रूप में
- D किसी कठिन शर्त के रूप में
Show answer
Why:
इसी से देश की श्रम-शक्ति बढ़ती है।
- A उम्र और अनुभव की
- B धन और जायदाद की
- C पद और कुर्सी की
- D मेहनत और काम की
Show answer
Why:
मर्यादा का अर्थ यहाँ सीमा नहीं, आदर है।
- A सीमा के अर्थ में
- B आदर के अर्थ में
- C दूरी के अर्थ में
- D रुकावट के अर्थ में
Show answer
Why:
उस समय हाथ से किया काम छोटा समझा जाता था।
- A हाथ से किया काम छोटा और बैठकर किया काम बड़ा समझा जाता था
- B हाथ से किया काम बड़ा और बैठकर किया काम छोटा समझा जाता था
- C उस समय कोई काम ही नहीं किया जाता था
- D उस समय सब काम एक जैसे समझे जाते थे
Show answer
Why:
इसी कारण काम के आदर की बात अलग से कहनी पड़ी।
- A काम से थक चुका हुआ
- B काम में बहुत कुशल
- C काम के अयोग्य, यानी आलसी
- D काम की तलाश में लगा हुआ
Show answer
Why:
जो काम कर सकता है, पर करता नहीं।
- A क्योंकि इससे भाषण लंबा हो जाता था
- B क्योंकि वक्ता को आलसी और निकम्मे लोगों पर गुस्सा रहा था
- C क्योंकि उस समाज में काम बहुत कम थे
- D क्योंकि अधिकार माँगने वाले से कर्तव्य भी माँगा जा रहा है
Show answer
Why:
यह शर्त अधिकार और अवसर के साथ-साथ आती है।
- A छह अलग-अलग और असंबद्ध सुधारों के रूप में
- B एक ही माँग के छह रूपों के रूप में
- C छह अलग-अलग देशों की समस्याओं के रूप में
- D छह अलग भाषणों के अंशों के रूप में
Show answer
Why:
इन छहों के बाद ही वक्ता उस समाज को सर्वांगीण कहते हैं।
- A संविधान के अधिकारों के रूप में
- B किसी पुरानी कहानी के रूप में
- C किसी एक राज्य के नियम के रूप में
- D किसी विद्यालय के नियम के रूप में
Show answer
Why:
समानता का अधिकार और शिक्षा का अधिकार, दोनों आज मौजूद हैं।
- A वक्ता का जन्म किस नगर में हुआ था
- B भाषण किस तारीख़ को दिया गया था
- C कानून बन जाना और समाज में उतरना एक बात है या नहीं
- D भाषण में कितने नए और कठिन शब्द वहाँ काम में लाए गए थे
Show answer
Why:
बहुत-सी बातें कानून बन चुकी हैं, और प्रश्न फिर भी बचा है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
दोनों सही हैं, और कारण अभिकथन को ठीक-ठीक समझाता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और II सही हैं। III ग़लत है — आलसी और अकर्मण्य के लिए जगह नहीं रखी गई।
Important short questions (7)
पहली, व्यक्ति हर दृष्टि से मुक्त हो। दूसरी, जाति से ऊँच-नीच न हो। तीसरी, स्त्री को बराबर अधिकार और बराबर भागीदारी मिले। चौथी, धन का अंतर अन्याय न बने। पाँचवीं, शिक्षा और उन्नति का अवसर सबको मिले। छठी, काम की पूरी इज़्ज़त हो।
यह वाक्य शरीर की मृत्यु की बात नहीं करता। इसका अर्थ है कि समाज किसी व्यक्ति के भीतर की बात इतनी न दबा दे कि वह जीते-जी निर्जीव जैसा हो जाए। मनचाहा विषय छुड़ा देना या किसी की बात न सुनना भी ऐसा ही दबाव है।
क्योंकि केवल अधिकार दे देना काग़ज़ पर रह सकता है। किसी को वोट देने का अधिकार हो, पर घर से निकलने न दिया जाए, तो अधिकार होकर भी कुछ नहीं हुआ। भागीदारी की बात इसी कमी को बंद करती है।
वे सबकी आमदनी एक जैसी कर देने की बात नहीं करते। उनकी माँग यह है कि धन का अंतर इतना बड़ा न हो कि वह अन्याय बन जाए। भाषण में इसके लिए विषमता शब्द आया है, जिसका अर्थ असमानता है।
जब सबको पढ़ने और आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, तो काम करने वालों की संख्या और उनकी कुशलता दोनों बढ़ेंगी। यानी देश की श्रम-शक्ति बढ़ेगी। इसी कारण वक्ता इसे दया का काम नहीं, देश के लाभ का काम बताते हैं।
उस समय हाथ से किया जाने वाला काम छोटा समझा जाता था और बैठकर किया जाने वाला काम बड़ा। इसी कारण काम के आदर की बात अलग से कहनी पड़ी। मर्यादा का अर्थ यहाँ सीमा नहीं, आदर है।
अकर्मण्य का अर्थ है काम के अयोग्य, यानी जो काम कर सकता है पर करता नहीं। उस समाज में ऐसे व्यक्ति के लिए जगह नहीं रखी गई। इससे पता चलता है कि अधिकार और अवसर माँगने वाले से कर्तव्य भी माँगा जा रहा है।
Long answer questions (3)
पहली बात व्यक्ति की है। वह हर दृष्टि से मुक्त हो — सोचने, बोलने, काम चुनने और अपने ढंग से जीने में। इसके साथ यह भी कहा गया कि समाज के दबाव से कोई भीतर से मर न जाए। दूसरी बात बँटवारे की है, कि जाति के आधार पर कोई ऊँचा-नीचा न हो। तीसरी बात स्त्रियों की है, और उसमें बराबर अधिकार तथा सेवा में बराबर भागीदारी, दोनों आते हैं। चौथी बात धन की है, कि आमदनी का अंतर अन्याय बनने तक न बढ़े। पाँचवीं बात अवसर की है, कि शिक्षा और उन्नति का मौका सबको बराबर मिले, जिससे देश की श्रम-शक्ति भी बढ़े। छठी बात काम की है, कि मेहनत का पूरा आदर हो और आलसी के लिए कोई जगह न रहे। इन छहों के बाद ही वह समाज सर्वांगीण कहा जा सकता है।
कई बातें आज कानून बन चुकी हैं। जाति, धर्म, लिंग और जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव मना है, इसलिए दूसरी और तीसरी बात संविधान में आ गई हैं। समानता का अधिकार धन और अवसर से जुड़ी बातों को छूता है। शिक्षा का अधिकार पाँचवीं बात को सीधा पूरा करता है, क्योंकि छह से चौदह वर्ष तक की शिक्षा मुफ़्त और अनिवार्य है। इतना होने पर भी एक प्रश्न बचा रह जाता है, और वही इस भाषण को आज भी काम का बनाता है। प्रश्न यह है कि कानून बन जाना और उस बात का समाज में उतर आना, दोनों एक ही चीज़ हैं या नहीं। यही कसौटी वक्ता की छहों बातों पर आज रखी जा सकती है।
चौथी बात आमदनी के अंतर की है और पाँचवीं बात अवसर की। ये दोनों एक ही कतार के दो सिरे हैं। जिस बच्चे को पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा, वह आगे बढ़कर कोई कुशल काम नहीं कर पाएगा। उसकी आमदनी पीछे रहेगी, और उसी आमदनी में उसके बच्चों की पढ़ाई भी पीछे रह जाएगी। यानी अंतर अपने आप अगली पीढ़ी तक चला जाता है। अवसर की समानता इसी कतार को तोड़ती है, क्योंकि वह पहली पीढ़ी को ही आगे बढ़ने का रास्ता दे देती है। इसी कारण वक्ता दोनों बातें आगे-पीछे रखते हैं, और समान अवसर को देश के लाभ का काम बताते हैं।
Flashcards (17)
Play this topic
- छह लक्षण क्रम से लगाइए
- शब्द और अर्थ
- किस हिस्से की बात
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
राष्ट्र, सत्य और उपहार
भाषण का अंतिम भाग उस राष्ट्र की बात करता है — पराए प्रभाव से मुक्त, अपने ही समाज का यंत्र, और दुनिया के सामने एक नमूना। वक्ता अपने सपने को सत्य कहते हैं, उसके लिए प्राण तक देने की बात रखते हैं, और अंत में वही सपना नौजवानों को सौंप देते हैं।
What you will be able to do
- उस राष्ट्र की तीनों शर्तें अपने शब्दों में लिख सकूँगा।
- राष्ट्र को समाज का यंत्र कहने का अर्थ उदाहरण देकर समझा सकूँगा।
- सपने को सत्य कहने से भाषण में आए बदलाव का कारण बता सकूँगा।
- त्याग से प्राण तक की चढ़ती सीढ़ी और उसका कारण समझा सकूँगा।
- विशेषण के जोड़े और विपरीतार्थक शब्द पहचानकर लिख सकूँगा।
Key points
वह राष्ट्र हर तरह के पराए प्रभाव से मुक्त रहेगा; विजातीय का अर्थ दूसरी तरह का है।
राष्ट्र को समाज का यंत्र कहा गया है, यानी देश का प्रबंध अपने ही समाज को देखकर बने।
ऐसा राष्ट्र लोगों की कमी मिटाएगा; अभाव का अर्थ कमी है।
वह वहीं नहीं रुकेगा — वह विश्व-मानव के सामने एक नमूना बनेगा, और आदर्श का अर्थ नमूना है।
वक्ता अपने सपने को रोज़ का और कभी न टूटने वाला सत्य बताते हैं; नित्य और अखंड इसी के शब्द हैं।
सपने को सत्य कहने से भाषण कल्पना से निकलकर कर्तव्य की ओर मुड़ जाता है।
उस सत्य के लिए चार बातें क्रम से आती हैं — सबकुछ करना, त्याग, संकट सहना और प्राण देना।
अंत में वक्ता अपने को छोटा बताकर वही सपना उपहार के रूप में देते हैं और उसे स्वीकार करने का निवेदन करते हैं।
भाषा में विशेषण के जोड़े और विपरीतार्थक शब्द — दोनों इसी अंश से लिए जाते हैं।
Full explanation
अब बात राष्ट्र की
समाज की छह बातें कह चुकने के बाद वक्ता ऊपर की मंज़िल पर आते हैं। अब वे उस राष्ट्र की बात करते हैं जो ऐसे समाज पर खड़ा होगा। इस भाग में तीन बातें हैं — वह राष्ट्र कैसा होगा, वह सपना वक्ता के लिए क्या है, और वे उसे सुनने वालों को किस रूप में देते हैं।
पहली शर्त — बाहर का प्रभाव न हो
वक्ता कहते हैं कि वह राष्ट्र हर तरह के पराए प्रभाव से मुक्त रहेगा। भाषण में इसके लिए विजातीय शब्द आया है, जिसका अर्थ है दूसरी जाति या दूसरी तरह का। ध्यान दीजिए कि यह बात केवल शासन की नहीं है। कपड़े, पढ़ाई, कारख़ाने और सोचने का ढंग — सब इसमें आते हैं।
दूसरी शर्त — राष्ट्र समाज का यंत्र हो
यह भाषण की सबसे बारीक बात है। वक्ता राष्ट्र को समाज का यंत्र कहते हैं, यानी औज़ार। औज़ार अपने लिए नहीं चलता; वह उसके काम आता है जो उसे चलाता है। इसका अर्थ यह है कि देश का प्रबंध अपने ही समाज को देखकर बनाया जाए, किसी और की नक़ल करके नहीं।
इससे क्या निकलता है
एक सीधा परिणाम निकलता है। जिस देश की योजनाएँ अपने ही समाज को सामने रखकर बनती हैं, उस देश में किसी चीज़ की कमी नहीं रहती। भाषण में इसके लिए अभाव शब्द आया है, जिसका अर्थ है कमी। वक्ता कहते हैं कि ऐसा राष्ट्र लोगों की कमी को मिटाएगा।
तीसरी शर्त — वह यहीं न रुके
यहाँ वक्ता एक क़दम और आगे जाते हैं। उनका कहना है कि अपने लोगों की कमी मिटाकर वह राष्ट्र रुक नहीं जाएगा। वह आगे बढ़कर सारी मनुष्य-जाति के सामने एक नमूना बनेगा। भाषण में इसके लिए विश्व-मानव शब्द आया है, यानी सारी दुनिया का मनुष्य।
नमूना बनने का अर्थ
आदर्श का अर्थ है नमूना। वक्ता चाहते हैं कि वह समाज और वह राष्ट्र, दोनों दुनिया के सामने नमूने की तरह गिने जाएँ। यह बात 1929 में कहना बहुत बड़ी बात थी, क्योंकि उस समय देश अपना शासन भी अपने हाथ में नहीं रख पाया था। वक्ता पहले से दो क़दम आगे की बात कर रहे थे।
सपना वक्ता के लिए क्या है
अब भाषण का सुर बदलता है। वक्ता कहते हैं कि यह सपना उनके सामने रोज़ का और कभी न टूटने वाला सत्य है। भाषण में इसके लिए नित्य और अखंड शब्द आए हैं। नित्य का अर्थ है रोज़ का, और अखंड का अर्थ है जिसका सिलसिला न टूटे। यानी सपना उनके लिए कल्पना नहीं, एक सच्चाई है।
सत्य कहने का असर क्या है
जब कोई अपनी बात को सपना कहता है, तो सुनने वाला उसे दूर की चीज़ मान लेता है। जब वही व्यक्ति उसे सत्य कहता है, तो बात बदल जाती है, क्योंकि सत्य के लिए कुछ करना पड़ता है। इसी एक शब्द से भाषण कल्पना से निकलकर कर्तव्य की ओर मुड़ जाता है।
उस सत्य के लिए क्या-क्या
इसके बाद चार बातें क्रम से आती हैं, और हर अगली बात पहले से भारी है। पहली, उसके लिए सबकुछ किया जा सकता है। दूसरी, हर तरह का त्याग किया जा सकता है। तीसरी, हर संकट सहा जा सकता है। चौथी, और आख़िरी, उसके लिए प्राण भी दिए जा सकते हैं।
चढ़ती सीढ़ी का ढंग
ध्यान दीजिए कि क्रम हल्के से भारी की ओर जाता है। यदि वक्ता सबसे पहले प्राण की बात कह देते, तो सुनने वाला डर जाता या बात को बहुत दूर का मान लेता। छोटी बात से शुरू करके भारी बात तक पहुँचना सुनने वाले को साथ लिए चलता है। भाषण देने का यह ढंग आज भी काम आता है।
'वह मरण है स्वर्ग समान'
प्राण की बात के साथ एक पंक्ति जुड़ी है, जिसका अर्थ है कि ऐसी मृत्यु स्वर्ग के बराबर है। यहाँ मृत्यु को डर की चीज़ नहीं, आदर की चीज़ कहा गया है। इस एक पंक्ति से पता चलता है कि वक्ता अपने सुनने वालों से कितनी बड़ी बात माँग रहे थे।
सीधा संबोधन, और एक उपहार
अंत में वक्ता सामने बैठे नौजवानों को सीधे पुकारते हैं। वे अपने को बहुत छोटा बताते हैं और कहते हैं कि उनके पास देने लायक कुछ भी नहीं है। उनके पास केवल यह सपना है, जो असीम शक्ति देता है और अपार आनंद भी, तथा जो उनके छोटे-से जीवन को भी अर्थ दे देता है। वही सपना वे उपहार के रूप में देते हैं।
अपने को छोटा बताने का कारण
कोई नेता अपने को छुद्र या छोटा क्यों कहेगा? कारण सुनने वालों की ओर से देखना चाहिए। जब देने वाला अपने को बड़ा बताता है, तो लेने वाला छोटा पड़ जाता है। जब देने वाला अपने को छोटा बताता है, तो उपहार बड़ा लगता है। वक्ता चाहते थे कि उपहार बड़ा लगे, वे नहीं।
उपहार कहने से क्या बदलता है
उपहार माँगा नहीं जाता, दिया जाता है, और लेने वाले को उसे स्वीकार करना पड़ता है। भाषण का अंतिम शब्द यही माँग करता है — इसे स्वीकार करो। आदेश नहीं, निवेदन। और निवेदन का एक लाभ है, क्योंकि जो चीज़ स्वीकार की जाती है, उसकी ज़िम्मेदारी लेने वाले पर आ जाती है।
भाषा की एक बात — विशेषण के जोड़े
इस भाषण में संज्ञा के आगे उसका गुण बताने वाला शब्द बार-बार रखा गया है। सत्य के आगे अखंड, समाज के आगे आदर्श, राष्ट्र के आगे स्वाधीन, जीवन के आगे क्षुद्र, शक्ति के आगे असीम और आनंद के आगे अपार। इन्हें विशेषण कहते हैं, और इनसे बात नापी हुई लगती है।
भाषा की दूसरी बात — उलटे अर्थ वाले शब्द
पाठ के साथ कुछ जोड़े दिए गए हैं जिनमें दूसरा शब्द पहले का उलटा अर्थ देता है — स्वीकार और अस्वीकार, सार्थक और निरर्थक, विषमता और समानता, क्षुद्र और विराट, संपन्न और विपन्न, अकर्मण्य और कर्मण्य, मरण और जीवन। इन्हें विपरीतार्थक शब्द कहते हैं, और इनमें से कई इसी भाषण से लिए गए हैं।
शीर्षक पर एक प्रश्न
अंत में एक प्रश्न बचा रहता है। इस अंश को तरुण के स्वप्न नाम दिया गया है, जबकि सपना वक्ता का है। नाम इसलिए ठीक है कि अंत में वह सपना नौजवानों को दे दिया जाता है। उपहार दे देने के बाद वह सपना देने वाले का नहीं, लेने वाले का हो जाता है। शीर्षक अंत की उसी घटना से बना है।
Concepts and terms
दूसरी जाति या दूसरी तरह का। भाषण में यह शब्द पराए प्रभाव के लिए आया है, और उसमें शासन के साथ कपड़े, पढ़ाई, कारख़ाने तथा सोचने का ढंग भी आते हैं।
औज़ार। राष्ट्र को समाज का यंत्र कहने का अर्थ है कि देश का प्रबंध अपने ही समाज को देखकर बनाया जाए, क्योंकि औज़ार उसके काम आता है जो उसे चलाता है।
सारी दुनिया का मनुष्य। वक्ता चाहते हैं कि वह समाज और वह राष्ट्र अपने लोगों तक सीमित न रहें, बल्कि सारी मनुष्य-जाति के सामने नमूने की तरह गिने जाएँ।
जिसका सिलसिला न टूटे, यानी पूरा और अटूट। भाषण में यह शब्द सत्य के आगे आया है, और उसके साथ नित्य भी है, जिसका अर्थ रोज़ का होता है।
ऐसे दो शब्द जिनमें दूसरा पहले का उलटा अर्थ देता है — स्वीकार और अस्वीकार, क्षुद्र और विराट, संपन्न और विपन्न, मरण और जीवन। कई जोड़े इसी भाषण से लिए गए हैं।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
एक गाँव में पानी की समस्या है। एक इंजीनियर आता है और किसी बड़े शहर का नक़्शा दिखाता है। वह कहता है कि वहाँ जैसी बड़ी टंकी यहाँ भी बना दी जाए। गाँव की सभा उससे कुछ प्रश्न पूछती है। वे बताते हैं कि यहाँ बिजली दिन में थोड़ी देर ही रहती है। वे यह भी बताते हैं कि गाँव के खेत ढलान पर हैं। दूसरा इंजीनियर एक और सुझाव रखता है। वह कहता है कि ढलान का उपयोग करके पुराने तालाब को गहरा किया जाए। सभा उसी सुझाव को चुन लेती है।
Analysis:
ध्यान देने की बात यह है कि पहला सुझाव ग़लत नहीं था। किसी बड़े शहर में वैसी टंकी ठीक काम करती है। कमी नक़ल में थी, टंकी में नहीं। भाषण की बात भी यही है — पराए प्रभाव का विरोध किसी चीज़ से बैर नहीं है, वह अपने समाज को देखकर प्रबंध बनाने की माँग है।
Activity:
अपने मुहल्ले या गाँव की कोई एक समस्या चुनिए और दो पंक्तियों में लिखिए कि उसका हल वहाँ की किन दो बातों को देखकर बनाना होगा।
करके देखो
Title:
विशेषण और उलटे शब्द, दोनों एक पन्ने पर
Safety:
किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं है; केवल लिखना है।
What You Notice:
विशेषण हटाकर पढ़ने पर वही वाक्य ढीला पड़ जाता है। इसी से पता चलता है कि भाषण में ये शब्द जान-बूझकर रखे गए थे।
Did you know
विशेषण पहचानने का एक सरल ढंग है — संज्ञा से पहले कैसा या कितना पूछकर देखिए। उत्तर में जो शब्द आए, वही विशेषण है।
भाषण के अंत में सुनने वालों को कोई चीज़ देने का ढंग बहुत पुराना है, और उसे संबोधन-कला में उपहार-अंत कहा जाता है।
Memory tricks
चढ़ती सीढ़ी याद रखने का सूत्र — स–त्या–सं–प्रा — सबकुछ, त्याग, संकट, प्राण। चारों इसी क्रम में आते हैं, और हर अगली बात पहले से भारी है।
राष्ट्र की तीन शर्तें — मु–यं–न — मुक्त, यंत्र, नमूना। पराए प्रभाव से मुक्त, अपने ही समाज का यंत्र, और दुनिया के सामने नमूना।
Practice MCQs with answers (25)
- A बहुत पुराने समय का
- B अपनी ही जाति का
- C दूसरी जाति या दूसरी तरह का
- D बहुत दूर के ही किसी देश का राजा
Show answer
Why:
वह राष्ट्र हर तरह के पराए प्रभाव से मुक्त रहेगा।
- A केवल कपड़े और खाने-पीने की कुछ चीज़ें भर ही
- B कपड़े, पढ़ाई, कारख़ाने और सोचने का ढंग
- C केवल कारख़ाने और उनकी मशीनें
- D केवल पढ़ाई और उसकी पुस्तकें
Show answer
Why:
इसी कारण यह शर्त इतनी चौड़ी है।
- A समाज के अतिथि के
- B समाज के स्वामी के
- C समाज के किसी शिक्षक के समान
- D समाज के यंत्र, यानी औज़ार के
Show answer
Why:
औज़ार अपने लिए नहीं चलता।
- A देश का प्रबंध अपने ही समाज को देखकर बने
- B देश का प्रबंध किसी बड़े देश की नक़ल पर बने
- C देश का कोई प्रबंध रखने की आवश्यकता नहीं
- D देश का प्रबंध केवल शासक के लिए बने
Show answer
Why:
औज़ार उसके काम आता है जो उसे चलाता है।
- A डर
- B भरा होना
- C कमी
- D आदर
Show answer
Why:
ऐसा राष्ट्र लोगों की कमी को मिटा देगा।
- A राष्ट्र को सारी दुनिया के सामने नमूना बनना चाहिए
- B राष्ट्र को अपने ही समाज का यंत्र होना चाहिए
- C राष्ट्र में काम की पूरी मर्यादा होनी चाहिए
- D राष्ट्र में आमदनी का अंतर नहीं होना चाहिए
Show answer
Why:
योजना अपने ही समाज को सामने रखकर बननी चाहिए।
- A अपने समाज को फिर से बदल देगा
- B अपना काम पूरा मानकर रुक जाएगा
- C किसी दूसरे बड़े देश का नमूना ही अपनाएगा
- D सारी मनुष्य-जाति के सामने नमूना बनेगा
Show answer
Why:
इसके लिए विश्व-मानव शब्द आया है।
- A सारी दुनिया का मनुष्य
- B किसी एक देश का मनुष्य
- C बहुत पुराने समय का मनुष्य
- D बहुत बड़े कद का मनुष्य
Show answer
Why:
वक्ता उसके सामने नमूना बनने की बात करते हैं।
- A आदेश
- B दर्पण
- C नमूना
- D आरंभ
Show answer
Why:
वह समाज और वह राष्ट्र, दोनों नमूने की तरह गिने जाएँ।
- A उस समय दुनिया में कोई दूसरा देश नहीं था
- B उस समय देश अपना शासन भी अपने हाथ में नहीं रख पाया था
- C उस समय किसी भी सभा में भाषण देना मना कर दिया गया था
- D उस समय कोई सुनने वाला नहीं मिलता था
Show answer
Why:
वक्ता पहले से दो क़दम आगे की बात कर रहे थे।
- A नया, और जो बहुत छोटा हो
- B रात का, और जो टूट जाए
- C बहुत पुराना, और जो बहुत ही बड़ा हो
- D रोज़ का, और जिसका सिलसिला न टूटे
Show answer
Why:
इन दो शब्दों से सपना सच्चाई बन जाता है।
- A वह कल्पना से निकलकर कर्तव्य की ओर मुड़ जाता है
- B वह कर्तव्य से निकलकर कल्पना की ओर मुड़ जाता है
- C वह बहुत छोटा और साधारण हो जाता है
- D वह सुनने वालों की समझ से बाहर हो जाता है
Show answer
Why:
सत्य के लिए कुछ करना पड़ता है, सपने के लिए नहीं।
- A छह
- B दो
- C चार
- D सात
Show answer
Why:
सबकुछ करना, त्याग, संकट सहना और प्राण देना।
- A भारी से हल्के की ओर
- B हल्के से भारी की ओर
- C बिना किसी क्रम के
- D केवल एक ही भारी बात
Show answer
Why:
अंत में प्राण की बात आती है।
- A उस बात को सभा में कहना ही मना कर दिया गया था
- B सुनने वाला उसे पहले से जानता था
- C वह बात भाषण में बहुत छोटी थी
- D सुनने वाला डर जाता या बात को दूर का मान लेता
Show answer
Why:
छोटी बात से शुरू करके भारी बात तक पहुँचना साथ लिए चलता है।
- A ऐसी मृत्यु स्वर्ग के बराबर है
- B ऐसी मृत्यु से डरना चाहिए
- C ऐसी मृत्यु कभी नहीं आती है
- D ऐसी मृत्यु बहुत दूर की बात है
Show answer
Why:
यहाँ मृत्यु को आदर की चीज़ कहा गया है।
- A इससे सुनने वाले उन पर दया करने लगते हैं
- B इससे उपहार छोटा लगता है, और देने वाला बड़ा हो जाता है
- C इससे उपहार बड़ा लगता है, और लेने वाला छोटा नहीं पड़ता
- D इससे भाषण जल्दी समाप्त हो जाता है
Show answer
Why:
वक्ता चाहते थे कि उपहार बड़ा लगे, वे नहीं।
- A केवल असीम शक्ति
- B असीम शक्ति और अपार आनंद
- C केवल अपार आनंद
- D केवल थोड़ी-सी शांति और चुप्पी
Show answer
Why:
और वह उनके छोटे-से जीवन को भी अर्थ दे देता है।
- A कि वे उस उपहार पर चर्चा करें
- B कि वे उस उपहार को लौटा दें
- C कि वे उस उपहार की कीमत दें
- D कि वे उस उपहार को स्वीकार करें
Show answer
Why:
आदेश नहीं, निवेदन।
- A उसकी ज़िम्मेदारी
- B उसका मूल्य
- C उसका डर
- D उसका कोई लाभ नहीं
Show answer
Why:
जो चीज़ स्वीकार की जाती है, वह अपनी हो जाती है।
- A क्रिया
- B सर्वनाम
- C विशेषण
- D मुहावरा
Show answer
Why:
ये संज्ञा का गुण बताते हैं और बात नापी हुई लगती है।
- A छोटा
- B विराट
- C कठिन
- D सरल
Show answer
Why:
ऐसे जोड़ों को विपरीतार्थक शब्द कहते हैं।
- A वह सपना किसी नौजवान ने देखा था
- B वह सपना शुरू से ही नौजवानों का था
- C उस सपने में आरंभ से ही केवल नौजवानों की बात है
- D अंत में वह सपना नौजवानों को दे दिया जाता है
Show answer
Why:
उपहार दे देने के बाद सपना लेने वाले का हो जाता है।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
Show answer
Why:
अभिकथन सही है, पर कारण ग़लत — वे उसे सत्य कहते हैं, कल्पना नहीं।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
Show answer
Why:
I और III सही हैं। II ग़लत है — वह विश्व-मानव के सामने नमूना बनेगा।
Important short questions (7)
पहली, वह हर तरह के पराए प्रभाव से मुक्त रहेगा। दूसरी, वह अपने ही समाज के यंत्र की तरह काम करेगा। तीसरी, वह अपने लोगों की कमी मिटाकर सारी दुनिया के सामने एक नमूना बनेगा।
यंत्र का अर्थ औज़ार है, और औज़ार अपने लिए नहीं चलता। वह उसके काम आता है जो उसे चलाता है। इसलिए इसका अर्थ है कि देश का प्रबंध अपने ही समाज को देखकर बनाया जाए, किसी और की नक़ल करके नहीं।
नित्य का अर्थ रोज़ का है। अखंड का अर्थ है जिसका सिलसिला न टूटे। ये दोनों शब्द सत्य के आगे आए हैं। इससे पता चलता है कि वह सपना कोई दूर की कल्पना नहीं था। वह उनके लिए रोज़ की सच्चाई था।
पहले सबकुछ करना, फिर हर तरह का त्याग, फिर हर संकट सहना, और अंत में प्राण देना। क्रम हल्के से भारी की ओर जाता है। प्राण की बात पहले कह देने पर सुनने वाला डर जाता या उसे बहुत दूर का मान लेता।
क्योंकि जब देने वाला अपने को बड़ा बताता है तो लेने वाला छोटा पड़ जाता है। अपने को छोटा बताने से उपहार बड़ा लगता है। वक्ता चाहते थे कि उपहार बड़ा लगे, वे नहीं।
उपहार माँगा नहीं जाता, दिया जाता है, और लेने वाले को उसे स्वीकार करना पड़ता है। इसी कारण भाषण का अंतिम शब्द एक निवेदन है, आदेश नहीं। और जो चीज़ स्वीकार कर ली जाती है, उसकी ज़िम्मेदारी लेने वाले पर आ जाती है।
सपना वक्ता का है, पर अंत में वे उसे नौजवानों को उपहार के रूप में दे देते हैं। उपहार दे देने के बाद वह सपना देने वाले का नहीं, लेने वाले का हो जाता है। शीर्षक अंत की उसी घटना से बना है।
Long answer questions (3)
पहली शर्त बाहर के प्रभाव की है। वह राष्ट्र हर तरह के पराए प्रभाव से मुक्त रहेगा, और यह बात केवल शासन की नहीं है; कपड़े, पढ़ाई, कारख़ाने और सोचने का ढंग भी इसमें आते हैं। दूसरी शर्त सबसे बारीक है। राष्ट्र को समाज का यंत्र कहा गया है, यानी औज़ार। औज़ार अपने लिए नहीं चलता, वह चलाने वाले के काम आता है। इसका अर्थ है कि देश का प्रबंध अपने ही समाज को देखकर बने, और इसी से लोगों की कमी भी मिट जाएगी। तीसरी शर्त और आगे की है। वह राष्ट्र अपने लोगों तक सीमित नहीं रहेगा; वह सारी मनुष्य-जाति के सामने एक नमूना बनेगा। 1929 में यह बहुत बड़ी बात थी, क्योंकि उस समय देश अपना शासन भी अपने हाथ में नहीं रख पाया था।
अंत चार क़दमों में होता है। पहला क़दम सपने को सत्य कहना है। वक्ता उसे रोज़ का और कभी न टूटने वाला सत्य बताते हैं, और इसी एक शब्द से भाषण कल्पना से निकलकर कर्तव्य की ओर मुड़ जाता है। दूसरा क़दम चढ़ती सीढ़ी का है — सबकुछ करना, त्याग, संकट सहना और प्राण देना, जिसमें हर अगली बात पहले से भारी है। इसके साथ जुड़ी पंक्ति कहती है कि ऐसी मृत्यु स्वर्ग के बराबर है, यानी मृत्यु को डर की जगह आदर की चीज़ कहा गया। तीसरा क़दम सीधा संबोधन है; वक्ता सामने बैठे नौजवानों को पुकारते हैं और अपने को बहुत छोटा बताते हैं, जिससे उपहार बड़ा लगे। चौथा क़दम उपहार देना है, और भाषण का अंतिम शब्द उसे स्वीकार करने का निवेदन करता है।
पहली बात विशेषण की है। इस भाषण में संज्ञा के आगे उसका गुण बताने वाला शब्द बार-बार रखा गया है। सत्य के आगे अखंड आया है और समाज के आगे आदर्श। राष्ट्र के आगे स्वाधीन है और जीवन के आगे क्षुद्र। शक्ति के आगे असीम है और आनंद के आगे अपार। ऐसे शब्दों को विशेषण कहते हैं। इनसे बात नापी हुई लगती है, क्योंकि केवल शक्ति कहने और असीम शक्ति कहने में बड़ा अंतर है। दूसरी बात उलटे अर्थ वाले शब्दों की है। पाठ के साथ कुछ जोड़े दिए गए हैं। स्वीकार और अस्वीकार, सार्थक और निरर्थक, विषमता और समानता, क्षुद्र और विराट, संपन्न और विपन्न, अकर्मण्य और कर्मण्य, तथा मरण और जीवन। इन्हें विपरीतार्थक शब्द कहते हैं। ध्यान देने की बात यह है कि इनमें से कई जोड़े अ उपसर्ग से ही बने हैं।
Flashcards (17)
Play this topic
- भाषण के अंत का क्रम लगाइए
- शब्द और अर्थ
- विशेषण या उलटा शब्द
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
नेताजी, नारे और एक पत्र
यह भाग भाषण देने वाले व्यक्ति को सामने रखता है — कटक में जन्म, नेताजी नाम, आजाद हिंद फौज का नेतृत्व, और द इंडियन स्ट्रगल जैसी पुस्तक। अंत में मांडले जेल से लिखा उनका एक पत्र आता है, जिसमें घरेलू उद्योगों की बहुत ठोस बात है।
What you will be able to do
- नेताजी का जन्मस्थान, उद्देश्य और प्रमुख कार्य बता सकूँगा।
- उनके दिए नारे और उनका काम समझा सकूँगा।
- वाङ्मय, दूरदर्शिता और आत्मनिर्भर का अर्थ लिख सकूँगा।
- पाठ के साथ दिए सेनानियों की पहचानें मिला सकूँगा।
- मांडले जेल के पत्र के सुझाव और समिति का काम बता सकूँगा।
Key points
उनका जन्म कटक नगर में हुआ, जो आज ओडिशा में है और उस समय उड़ीसा कहलाता था।
पूरा देश उन्हें नेताजी कहता है, और यह नाम लोगों ने दिया था।
उनका उद्देश्य भारत को अंग्रेज़ी शासन से मुक्त कराना था, और इसमें कई बार जेल जाना पड़ा।
उनकी दूरदर्शिता का सबसे बड़ा प्रमाण आजाद हिंद फौज का नेतृत्व है।
सन् 1857 के बाद ऐसा संगठित प्रयास उन्होंने ही फिर खड़ा किया।
उन्होंने सैनिकों को दिल्ली चलो और जय हिंद के नारे दिए, और 1944 में खून माँगने वाला नारा दिया।
उनकी चर्चित पुस्तक का नाम द इंडियन स्ट्रगल है, और वाङ्मय का अर्थ संपूर्ण लेखन है।
मांडले जेल से लिखा उनका पत्र गृह और कुटीर उद्योग पर है, और उसमें मिट्टी के खिलौने तथा सीप के बटन सुझाए गए हैं।
समिति का काम केवल दो बताया गया — सस्ता कच्चा माल जुटाना, और तैयार माल अच्छे दाम पर बिकवाना।
Full explanation
बोलने वाले कौन थे
अब तक हमने भाषण पढ़ा। अब उस व्यक्ति को देखिए जिसने वह भाषण दिया। उनका जन्म कटक नगर में हुआ था, जो आज ओडिशा राज्य में है और उस समय उड़ीसा कहलाता था। पूरा देश उन्हें नेताजी के नाम से जानता है, और यह नाम उन्हें लोगों ने दिया, किसी सरकार ने नहीं।
उनका लक्ष्य एक ही था
उनका उद्देश्य बहुत साफ़ था — भारत को अंग्रेज़ी शासन से मुक्त कराना। इस काम में उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। ध्यान दीजिए कि पिछले भागों का भाषण भी इसी समय का है, यानी वे जेल और सभा, दोनों के बीच काम कर रहे थे।
आजाद हिंद फौज
उनकी दूरदर्शिता का सबसे बड़ा प्रमाण आजाद हिंद फौज का नेतृत्व है। दूरदर्शिता का अर्थ है दूर तक देख पाना। वे समझ गए थे कि केवल सभा और भाषण से काम पूरा नहीं होगा, इसलिए उन्होंने एक संगठित सेना खड़ी करने का रास्ता चुना।
1857 के बाद पहली बार
पुस्तक एक तुलना देती है। सन् 1857 में भारतीय सैनिकों ने मिलकर स्वतंत्रता के लिए युद्ध किया था। उसके बाद ऐसा संगठित प्रयास बहुत समय तक नहीं हुआ। सुभाषचंद्र बोस ऐसे सेनानी हुए जिन्होंने आजाद हिंद फौज के रास्ते फिर एकजुट होकर चुनौती दी।
तीन नारे, और उनका काम
उन्होंने सैनिकों को दिल्ली चलो और जय हिंद के नारे दिए। बाद में 1944 में उन्होंने एक और नारा दिया, जिसमें उन्होंने खून माँगकर आजादी देने की बात कही। नारे का काम छोटा दिखता है, पर वह बहुत बड़ा होता है। वह एक लंबी बात को चार शब्दों में बाँध देता है, जिससे वह याद रहती है और दोहराई जाती है।
उनका सपना किन दो शब्दों में था
पुस्तक कहती है कि उन्होंने एक स्वाधीन राष्ट्र और एक आत्मनिर्भर समाज का सपना देखा। आत्मनिर्भर का अर्थ है अपने पैरों पर खड़ा। ध्यान दीजिए कि यह बात पिछले भागों के भाषण से मिल जाती है, जहाँ राष्ट्र को समाज का यंत्र कहा गया था।
उनका लिखा हुआ
वे केवल बोलने वाले नहीं थे। उनकी एक चर्चित पुस्तक का नाम द इंडियन स्ट्रगल है। इसके अलावा भारत सरकार के प्रकाशन विभाग ने उनका वाङ्मय छापा है। वाङ्मय का अर्थ है किसी का संपूर्ण लेखन — उसमें उनके काम, उनके पत्र, उनकी टिप्पणियाँ और उनके भाषण, सब सम्मिलित हैं।
उनके साथ के कुछ नाम
पुस्तक इस पाठ के साथ कुछ और सेनानियों के नाम रखती है, और हर नाम के साथ एक पहचान देती है। भगत सिंह को शहीद-ए-आज़म कहा जाता है। चित्तरंजन दास स्वराज पार्टी के संस्थापकों में थे, और नेताजी के राजनीतिक गुरु माने जाते हैं। जतिन दास का देहांत जेल में एक लंबी भूख हड़ताल के दौरान हुआ।
और तीन नाम
महात्मा गांधी के जन्मदिवस पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है। सरदार वल्लभभाई पटेल की एक विशाल प्रतिमा नर्मदा नदी के तट पर स्थापित है, जिसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कहा जाता है। चंद्रशेखर आजाद ने अदालत में अपना नाम आजाद बताया, पिता का नाम स्वतंत्रता, और अपना पता कारावास।
नारों की एक और सूची
पाठ के साथ कुछ नारे भी दिए गए हैं। स्वराज्य को जन्म से मिला अधिकार कहने वाला नारा बाल गंगाधर तिलक का है। करो या मरो महात्मा गांधी का है। आजाद रहने और आजाद ही मरने वाली बात चंद्रशेखर आजाद की है। इंकलाब ज़िंदाबाद भगत सिंह से जुड़ा है, और पूर्ण स्वराज सन् 1929 के कांग्रेस अधिवेशन से।
झरोखे से — एक और लेखन
इसके बाद पुस्तक उनका एक पत्र देती है, और वह भाषण से बहुत अलग है। यह पत्र मांडले जेल से लिखा गया था, और पाने वाले दक्षिण कलकत्ता की सेवक-समिति के उप-मंत्री थे। विषय है गृह और कुटीर उद्योग, यानी घर में ही चलने वाला छोटा उद्योग।
पत्र में पहला सुझाव
वे लिखते हैं कि एक पॉलिटेकनीक में उन्होंने जो काम देखे, उनमें से दो ही घर पर चल सकते हैं — बेंत का काम और मिट्टी के खिलौने बनाना। खिलौनों के बारे में वे एक व्यावहारिक बात जोड़ते हैं। यह काम कुछ दिनों में सीखा जा सकता है, और उसमें रंगों के सिवा कोई बड़ा खर्च नहीं है।
दूसरा सुझाव — सीप के बटन
इसके बाद वे उस काम की बात करते हैं जो उनके मन में बार-बार आता था — सीप से बटन बनाना। वे बताते हैं कि बंगाल के अनेक गाँवों में यह काम घरों के भीतर चल रहा था, और गरीब घरों के स्त्री-पुरुष अपने खाली समय में उसे करते थे। कोई एक व्यक्ति इसे बहुत कम समय में सीख सकता है।
कितने औज़ार चाहिए
यहाँ पत्र सबसे ठोस हो जाता है। वे लिखते हैं कि बटन पत्थर पर घिसकर बनाए जा सकते हैं। छेद करने के लिए कोई पतला औज़ार चाहिए, और गोल काटने के लिए कोई धारदार औज़ार। बस इतना, और कुछ सीप। एक नेता का पत्र इतनी छोटी चीज़ों की गिनती करता है — यही बात ध्यान खींचती है।
समिति का काम क्या हो
वे समिति के लिए दो ही काम बताते हैं। पहला, कच्चा माल सस्ते दाम पर जुटा देना। दूसरा, तैयार चीज़ों को अच्छे दाम पर बिकवा देना। बाक़ी काम वे लोगों पर छोड़ देते हैं, और कहते हैं कि एक बार काम चल निकला तो गरीब परिवार अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए उसे अपने आप शुरू कर देंगे।
एक भ्रम, जो पत्र तोड़ता है
अंत में वे एक आम धारणा पर हाथ रखते हैं। बहुत लोग मानते हैं कि बंगाल के बटन किसी कारख़ाने में बनते हैं। वे बताते हैं कि ऐसा नहीं है। वे गाँव-देहात के घर-घर में, खाली समय में, और रसोई के बाद बचे समय में भी बनते हैं। इसी कारण वे इतने सस्ते मिलते हैं।
भाषण और पत्र — दोनों एक साथ क्यों
यह प्रश्न सबसे ज़रूरी है। भाषण में बड़ी-बड़ी बातें थीं — सर्वांगीण समाज, स्वाधीन राष्ट्र, विश्व-मानव। पत्र में सीप, पत्थर और बटन हैं। दोनों एक ही व्यक्ति के हैं, और यही दिखाने के लिए पुस्तक उन्हें साथ रखती है। बड़ा सपना देखने वाला यदि छोटे काम का हिसाब भी रखता हो, तो सपना बातों में नहीं रहता।
Concepts and terms
दूर तक देख पाने की क्षमता। नेताजी की दूरदर्शिता का प्रमाण आजाद हिंद फौज है, क्योंकि वे समझ गए थे कि केवल सभा और भाषण से काम पूरा नहीं होगा।
किसी व्यक्ति का संपूर्ण लेखन। प्रकाशन विभाग ने नेताजी का वाङ्मय छापा है, जिसमें उनके काम, पत्र, टिप्पणियाँ और भाषण सब सम्मिलित हैं।
अपने पैरों पर खड़ा, यानी दूसरों के सहारे पर न चलने वाला। पुस्तक कहती है कि उन्होंने स्वाधीन राष्ट्र के साथ ऐसे ही समाज का सपना देखा।
घर में ही चलने वाला छोटा उद्योग, जिसमें बड़े कारख़ाने और मशीनों की ज़रूरत नहीं होती। मांडले जेल के पत्र का पूरा विषय यही है।
वह सामग्री जिससे कोई चीज़ बनाई जाती है, जैसे बटन के लिए सीप। पत्र कहता है कि समिति इसे सस्ते दाम पर जुटा दे और तैयार माल अच्छे दाम पर बिकवा दे।
सावधान
भ्रम और सच
मिलाकर देखो
Scenario:
एक कस्बे में कुछ महिलाएँ मिलकर अचार और पापड़ बनाने का काम शुरू करती हैं। वे यह काम अपने घरों में ही करती हैं। कच्चा माल वे अलग-अलग दुकानों से महँगा ख़रीदती हैं। तैयार माल वे गली में घूमकर सस्ते दाम पर बेच देती हैं। इससे बचत बहुत कम होती है। एक स्थानीय संस्था उनसे बात करती है। संस्था आम और उड़द एक साथ थोक में मँगवा देती है। वह एक दुकान से महीने का सौदा भी तय कर देती है। अब उन्हीं घरों से पहले जितना ही माल निकलता है, पर आमदनी बढ़ जाती है।
Analysis:
ध्यान देने की बात यह है कि संस्था ने कोई कारख़ाना नहीं खोला। उसने केवल दो सिरे सँभाले — एक सिरे पर कच्चा माल और दूसरे सिरे पर बिक्री। बीच का काम वहीं रहा जहाँ पहले से हो रहा था। नेताजी का पत्र सौ साल पहले यही ढाँचा सुझा रहा था, और वह आज भी वैसा ही काम करता है।
Activity:
अपने आसपास चल रहे किसी एक घरेलू काम का नाम लिखिए, और दो पंक्तियों में बताइए कि उसमें कच्चा माल कहाँ से आता है और तैयार माल कहाँ बिकता है।
करके देखो
Title:
नारों का एक पन्ना
Safety:
किसी सामग्री की आवश्यकता नहीं है; नाम पता करने के लिए पुस्तकालय या शिक्षक की सहायता ली जा सकती है।
What You Notice:
शब्द गिनने पर एक बात साफ़ दिखती है — लगभग हर चला हुआ नारा बहुत छोटा है। यही उसका बल है, क्योंकि छोटी बात याद रह जाती है।
Did you know
आजाद हिंद फौज में स्त्रियों की भी एक टुकड़ी थी, जिसका नाम रानी झाँसी रेजिमेंट रखा गया था। उसका नाम 1857 की रानी लक्ष्मीबाई से लिया गया।
नेताजी की जयंती 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाती है।
अंडमान के दो द्वीपों के नाम आज शहीद द्वीप और स्वराज द्वीप हैं, और ये नाम नेताजी के सुझाए हुए माने जाते हैं।
Memory tricks
नेताजी के काम याद रखने का सूत्र — क–फ–ना–पु — कटक में जन्म, फौज का नेतृत्व, नारे, और पुस्तक। चार शब्दों में उनका पूरा परिचय आ जाता है।
पत्र के दो सुझाव — खि–ब — खिलौने और बटन। मिट्टी के खिलौने, और सीप के बटन; दोनों घर पर चल सकते हैं।
Practice MCQs with answers (25)
- A यह बात ठीक ही है, उनका जन्म कलकत्ता में हुआ था
- B उनका जन्म मांडले में हुआ था, जो आज म्यांमार में है
- C उनका जन्म मेदिनीपुर में हुआ था, जो आज बंगाल में है
- D उनका जन्म कटक में हुआ था, जो आज ओडिशा में है
Show answer
Why:
उस समय उस राज्य को उड़ीसा कहा जाता था।
- A किसी एक पुस्तक ने
- B अंग्रेज़ सरकार ने
- C देश के लोगों ने
- D किसी एक सभा ने
Show answer
Why:
पूरा देश उन्हें इसी नाम से जानता है।
- A दूर तक चल पाना
- B दूर तक देख पाना
- C दूर से बोल पाना
- D दूर तक सुन पाना
Show answer
Why:
आजाद हिंद फौज का नेतृत्व इसी का प्रमाण है।
- A उन्होंने आजाद हिंद फौज का नेतृत्व भी किया था
- B उन्होंने कोई भाषण कभी कहीं भी दिया ही नहीं था
- C उन्होंने कोई पुस्तक नहीं लिखी थी
- D इसमें कुछ नहीं छूटा, बात पूरी है
Show answer
Why:
वे समझ गए थे कि केवल सभा से काम पूरा नहीं होगा।
- A दिल्ली चलो, और करो या मरो
- B करो या मरो, और स्वराज
- C इंकलाब ज़िंदाबाद, और जय हिंद
- D दिल्ली चलो, और जय हिंद
Show answer
Why:
नारा एक लंबी बात को चार शब्दों में बाँध देता है।
- A वह केवल पढ़ने के लिए होता है
- B वह बहुत लंबा और कठिन होता है
- C वह याद रह जाता है और दोहराया जाता है
- D वह किसी एक व्यक्ति तक सीमित रहता है
Show answer
Why:
लंबी बात चार शब्दों में बँध जाती है।
- A दूसरों के सहारे चलने वाला
- B अपने पैरों पर खड़ा
- C बहुत पुराने समय का
- D बहुत दूर रहने वाला
Show answer
Why:
पुस्तक कहती है कि उन्होंने ऐसे ही समाज का सपना देखा।
- A पुस्तक का नाम द इंडियन स्ट्रगल है; वाङ्मय उनका संपूर्ण लेखन है
- B पुस्तक का नाम वाङ्मय ही है; द इंडियन स्ट्रगल एक नारा है
- C दोनों एक ही पुस्तक के दो नाम हैं
- D यह बात ठीक ही है, पुस्तक का नाम वाङ्मय है
Show answer
Why:
वाङ्मय प्रकाशन विभाग ने छापा था।
- A केवल उनकी अपने हाथ से लिखी एक पुस्तक
- B केवल उनके भाषण
- C केवल उनके पत्र
- D उनके काम, पत्र, टिप्पणियाँ और भाषण
Show answer
Why:
वाङ्मय का अर्थ है किसी का संपूर्ण लेखन।
- A नेताजी
- B देशबंधु
- C शहीद-ए-आज़म
- D देश का लौहपुरुष
Show answer
Why:
पुस्तक हर नाम के साथ एक पहचान देती है।
- A आजाद हिंद फौज के पहले सेनापति, और नेताजी के ही निकट शिष्य
- B स्वराज पार्टी के संस्थापकों में, और नेताजी के राजनीतिक गुरु
- C स्टैच्यू ऑफ यूनिटी वाले नेता, और एक लेखक
- D एक लंबी भूख हड़ताल करने वाले, और एक कवि
Show answer
Why:
उनका सपना भाषण के पहले भाग में याद किया गया था।
- A वह महात्मा गांधी के जन्मदिवस पर मनाया जाता है
- B वह चंद्रशेखर आजाद के जन्मदिवस पर मनाया जाता है
- C वह सरदार पटेल के जन्मदिवस पर मनाया जाता है
- D यह बात ठीक ही है, वह नेताजी के जन्मदिवस पर है
Show answer
Why:
पुस्तक यह पहचान गांधी जी के नाम के साथ देती है।
- A यमुना के तट पर, सरदार पटेल की
- B गंगा के तट पर, महात्मा गांधी की
- C नर्मदा के तट पर, अमर वीर चंद्रशेखर आजाद की
- D नर्मदा के तट पर, सरदार वल्लभभाई पटेल की
Show answer
Why:
वह एक विशाल प्रतिमा है।
- A भगत सिंह का
- B महात्मा गांधी का
- C बाल गंगाधर तिलक का
- D चंद्रशेखर आजाद का
Show answer
Why:
पाठ के साथ दी गई नारों की सूची में यह पहला है।
- A बाल गंगाधर तिलक का
- B महात्मा गांधी का
- C जतिन दास का
- D सरदार पटेल का
Show answer
Why:
नारों की सूची हर नारे को एक सेनानी से जोड़ती है।
- A दक्षिण कलकत्ता की सेवक-समिति के उप-मंत्री को
- B मेदिनीपुर युवक-सम्मेलन के अध्यक्ष को
- C प्रकाशन विभाग के किसी बड़े और नए अधिकारी को
- D आजाद हिंद फौज के किसी सैनिक को
Show answer
Why:
उस पत्र का विषय गृह और कुटीर उद्योग था।
- A किसी सरकारी विभाग का उद्योग
- B किसी बड़े कारख़ाने का उद्योग
- C किसी दूसरे देश का उद्योग
- D घर में ही चलने वाला छोटा उद्योग
Show answer
Why:
पत्र का पूरा विषय इसी पर है।
- A मिट्टी के खिलौने, और लोहे के औज़ार बनाना
- B बेंत का काम, और कपड़े बुनना
- C बेंत का काम, और मिट्टी के खिलौने बनाना
- D कपड़े बुनना, और काग़ज़ बनाना
Show answer
Why:
खिलौनों का काम कुछ दिनों में सीखा जा सकता है।
- A छेद के लिए धारदार, और गोल काटने के लिए पतला
- B छेद के लिए पतला, और गोल काटने के लिए धारदार
- C कोई भी औज़ार नहीं, केवल हाथ
- D एक बड़ी मशीन और बिजली
Show answer
Why:
बटन पत्थर पर घिसकर बनाए जा सकते हैं।
- A सस्ता कच्चा माल जुटाना, और तैयार माल अच्छे दाम पर बिकवाना
- B कारख़ाना खोलना, और मज़दूर रखना
- C बटन बनाना, और उन्हें अपने हाथ से गाँव-गाँव घर-घर जाकर बाँटना
- D पैसा बाँटना, और हिसाब रखना
Show answer
Why:
बाक़ी काम वे लोगों पर छोड़ देते हैं।
- A काम किसी कारख़ाने में चला जाएगा
- B समिति को सारा काम अपने हाथ में लेना पड़ेगा
- C काम धीरे-धीरे बंद हो जाएगा
- D गरीब परिवार उसे अपने आप शुरू कर देंगे
Show answer
Why:
क्योंकि उससे उनकी आमदनी बढ़ती है।
- A उन पर सरकार कोई छूट देती थी
- B वे बहुत बड़े कारख़ानों में एक साथ बनते थे, इसलिए दाम कम ही रहते थे
- C वे घर के खाली समय में बनते थे, और अलग से मज़दूरी नहीं लगती थी
- D उनकी सीप मुफ़्त में मिल जाती थी
Show answer
Why:
रसोई के बाद बचे समय में भी यह काम होता था।
- A यह दिखाने के लिए कि दोनों अलग-अलग लोगों के हैं
- B यह दिखाने के लिए कि बड़ा सपना देखने वाला छोटे काम का हिसाब भी रखता था
- C यह दिखाने के लिए कि पत्र भाषण से बड़ा है
- D यह दिखाने के लिए कि भाषण में कोई बड़ी कमी रह गई थी, जिसे पत्र ने पूरा किया
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Why:
भाषण में विश्व-मानव है, और पत्र में सीप, पत्थर और बटन।
- A दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को समझाता है
- B दोनों सही हैं; कारण अभिकथन को नहीं समझाता
- C अभिकथन सही है; परंतु उसका कारण ग़लत है
- D अभिकथन ग़लत है; परंतु उसका कारण सही है
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Why:
दोनों सही हैं, और कारण अभिकथन को ठीक-ठीक समझाता है।
- A केवल I और II
- B केवल II और III
- C केवल I और III
- D I, II और III
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Why:
I और II सही हैं। III ग़लत है — वह मांडले जेल से लिखा गया पत्र था।
Important short questions (7)
उनका जन्म कटक नगर में हुआ, जो आज ओडिशा में है। पूरा देश उन्हें नेताजी कहता है। उनका उद्देश्य भारत को अंग्रेज़ी शासन से मुक्त कराना था, और उन्होंने आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया। द इंडियन स्ट्रगल नाम की उनकी पुस्तक बहुत पढ़ी गई।
दूरदर्शिता का अर्थ है दूर तक देख पाना। वे समझ गए थे कि केवल सभा और भाषण से स्वतंत्रता का काम पूरा नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने एक संगठित सेना खड़ी करने का रास्ता चुना, और 1857 के बाद ऐसा प्रयास फिर खड़ा हुआ।
नारा एक लंबी बात को चार शब्दों में बाँध देता है। इसी कारण वह याद रह जाता है और दोहराया जाता है। दिल्ली चलो और जय हिंद ऐसे ही नारे हैं, जिन्होंने सैनिकों को एक सूत्र में बाँध दिया।
वाङ्मय का अर्थ है किसी व्यक्ति का संपूर्ण लेखन। भारत सरकार के प्रकाशन विभाग ने नेताजी का वाङ्मय छापा है, और उसमें उनके उपलब्ध सभी काम, उनके पत्र, उनकी टिप्पणियाँ तथा उनके भाषण सम्मिलित हैं।
पहला सुझाव मिट्टी के खिलौने बनाने का है। वह काम कुछ दिनों में सीखा जा सकता है। उसमें रंगों के सिवा बड़ा खर्च नहीं है। दूसरा सुझाव सीप से बटन बनाने का है। वह बंगाल के गाँवों में घर-घर पहले से चल रहा था।
समिति के लिए दो ही काम बताए गए हैं। पहला, कच्चा माल सस्ते दाम पर जुटा देना। दूसरा, तैयार चीज़ों को अच्छे दाम पर बिकवा देना। बाक़ी काम लोगों पर छोड़ दिया गया है, क्योंकि आमदनी बढ़ने पर वे उसे अपने आप आगे ले जाएँगे।
बहुत लोग मानते थे कि बंगाल के बटन किसी कारख़ाने में बनते हैं। पत्र बताता है कि वे गाँव-देहात के घर-घर में, खाली समय में और रसोई के बाद बचे समय में भी बनते हैं। इसी कारण वे इतने सस्ते मिलते हैं।
Long answer questions (3)
भगत सिंह को शहीद-ए-आज़म कहा जाता है, और वे सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने वाले क्रांतिकारी थे। चित्तरंजन दास स्वराज पार्टी के संस्थापकों में थे, और नेताजी के राजनीतिक गुरु माने जाते हैं। जतिन दास का देहांत जेल में एक लंबी भूख हड़ताल के दौरान हुआ, जो वहाँ हो रहे व्यवहार के विरोध में थी। महात्मा गांधी के जन्मदिवस पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है। सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल प्रतिमा नर्मदा नदी के तट पर है, जिसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी कहा जाता है। चंद्रशेखर आजाद ने अदालत में अपना नाम आजाद बताया, पिता का नाम स्वतंत्रता, और अपना पता कारावास।
वह इस बात का प्रमाण है कि बड़ा सपना देखने वाला छोटे काम का हिसाब भी रख सकता है। पत्र का विषय गृह और कुटीर उद्योग है, यानी घर में ही चलने वाला छोटा उद्योग। वे दो सुझाव रखते हैं — मिट्टी के खिलौने और सीप के बटन। इसके बाद वे बहुत ठोस बातें लिखते हैं। बटन पत्थर पर घिसकर बनाए जा सकते हैं, छेद के लिए कोई पतला औज़ार चाहिए, और गोल काटने के लिए कोई धारदार। शुरू करने के लिए कुछ औज़ार और एक बोरा सीप ही चाहिए। समिति के लिए वे केवल दो काम रखते हैं — सस्ता कच्चा माल जुटाना और तैयार माल अच्छे दाम पर बिकवाना। एक नेता का पत्र इतनी छोटी चीज़ों तक पहुँचता है, और यही बात उसे पढ़ने लायक बनाती है।
दोनों एक ही व्यक्ति के लेखन हैं, पर उनका आकार बहुत अलग है। भाषण में बड़ी-बड़ी बातें हैं — सर्वांगीण समाज, स्वाधीन राष्ट्र, और विश्व-मानव के सामने नमूना बनना। पत्र में सीप, पत्थर, रंग और बटन हैं। पहली नज़र में यह अंतर बहुत बड़ा लगता है, पर दोनों को साथ पढ़ने पर एक ही बात निकलती है। भाषण में उन्होंने कहा था कि राष्ट्र अपने ही समाज का यंत्र हो। पत्र इसी बात को काम में बदलकर दिखाता है, क्योंकि उसमें बंगाल के अपने गाँवों का, वहाँ के लोगों के खाली समय का, और वहाँ मिलने वाली सीप का हिसाब है। इसलिए पुस्तक दोनों को साथ रखकर यह बताती है कि सपना और हिसाब, दोनों एक ही आदमी में हो सकते हैं, और तब सपना बातों में नहीं रहता।
Flashcards (17)
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- पत्र का हिसाब क्रम से लगाइए
- सेनानी और पहचान
- भाषण का या पत्र का
- सही या भ्रम
- झटपट उत्तर
Class 8 Hindi Chapter 10 — frequently asked questions
यह सुभाषचंद्र बोस के एक भाषण का अंश है। उन्होंने इसे 29 दिसंबर, 1929 के दिन कहा था। जगह थी मेदिनीपुर का जिला युवक-सम्मेलन, और सुनने वाले देश के नौजवान थे।
सुनने वाला पीछे लौटकर कोई पंक्ति फिर नहीं पढ़ सकता। इसी कारण बोलने वाला अपनी बात दोहराता है, वाक्य छोटे रखता है और सुनने वालों को बीच-बीच में सीधे पुकारता है।
उत्स का अर्थ सोता है और निर्झर का अर्थ झरना। सोता भीतर से देता रहता है और झरना बाहर गिरता दिखता है। दोनों एक साथ रखकर यह कहा गया है कि एक ही सपने ने भीतर से शक्ति दी और बाहर से आनंद भी।
पहली, व्यक्ति हर दृष्टि से मुक्त हो। दूसरी, जाति से ऊँच-नीच न हो। तीसरी, स्त्री को बराबर अधिकार और बराबर भागीदारी मिले। चौथी, धन का अंतर अन्याय न बने। पाँचवीं, शिक्षा और उन्नति का अवसर सबको मिले। छठी, काम की पूरी इज़्ज़त हो।
यह वाक्य शरीर की मृत्यु की बात नहीं करता। इसका अर्थ है कि समाज किसी व्यक्ति के भीतर की बात इतनी न दबा दे कि वह जीते-जी निर्जीव जैसा हो जाए। मनचाहा विषय छुड़ा देना या किसी की बात न सुनना भी ऐसा ही दबाव है।
क्योंकि केवल अधिकार दे देना काग़ज़ पर रह सकता है। किसी को वोट देने का अधिकार हो, पर घर से निकलने न दिया जाए, तो अधिकार होकर भी कुछ नहीं हुआ। भागीदारी की बात इसी कमी को बंद करती है।
पहली, वह हर तरह के पराए प्रभाव से मुक्त रहेगा। दूसरी, वह अपने ही समाज के यंत्र की तरह काम करेगा। तीसरी, वह अपने लोगों की कमी मिटाकर सारी दुनिया के सामने एक नमूना बनेगा।
यंत्र का अर्थ औज़ार है, और औज़ार अपने लिए नहीं चलता। वह उसके काम आता है जो उसे चलाता है। इसलिए इसका अर्थ है कि देश का प्रबंध अपने ही समाज को देखकर बनाया जाए, किसी और की नक़ल करके नहीं।
नित्य का अर्थ रोज़ का है। अखंड का अर्थ है जिसका सिलसिला न टूटे। ये दोनों शब्द सत्य के आगे आए हैं। इससे पता चलता है कि वह सपना कोई दूर की कल्पना नहीं था। वह उनके लिए रोज़ की सच्चाई था।
उनका जन्म कटक नगर में हुआ, जो आज ओडिशा में है। पूरा देश उन्हें नेताजी कहता है। उनका उद्देश्य भारत को अंग्रेज़ी शासन से मुक्त कराना था, और उन्होंने आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया। द इंडियन स्ट्रगल नाम की उनकी पुस्तक बहुत पढ़ी गई।
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