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जीवन की उत्पत्ति

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Veda Bites

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Veda Bites are swipeable micro-lessons — each one teaches exactly one idea. The bites below come from this kit — swipe through them in the app.

💡 Key Idea

जैवरासायनिक उत्पत्ति: मूल अवधारणा

जीवन रसायन से, रासायनिक विकास से।

जीवन की जैवरासायनिक उत्पत्ति (Biochemical Origin) के अनुसार, पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत निर्जीव रासायनिक पदार्थों से हुई। यह प्रक्रिया रासायनिक विकास (Chemical Evolution) कहलाती है, जिसमें सरल अकार्बनिक अणुओं से जटिल कार्बनिक अणु (जैसे अमीनो अम्ल, शर्करा) बने, और फिर उनसे प्रथम जीवित कोशिका का निर्माण हुआ।

↳ जीवन की उत्पत्ति निर्जीव रसायनों से क्रमिक रासायनिक विकास द्वारा हुई।

🕰️ Timeline

उत्पत्ति के चरण: अकार्बनिक से कार्बनिक तक

चार चरणों में जीवन का उदय।

↳ जीवन की उत्पत्ति चार क्रमिक चरणों में हुई: अकार्बनिक → कार्बनिक → बहुलक → कोशिका।

⭐ Important Fact

प्राथमिक वातावरण: अपचायक (Reducing)

आदिम पृथ्वी पर ऑक्सीजन नहीं थी।

आदिम पृथ्वी का वातावरण अपचायक (reducing) था, जिसमें मुक्त ऑक्सीजन (O₂) अनुपस्थित थी। इसमें मुख्य रूप से मीथेन (CH₄), अमोनिया (NH₃), जलवाष्प (H₂O), और हाइड्रोजन (H₂) गैसें थीं। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति ने सरल अणुओं को टूटने से बचाया और उन्हें संयोजित होकर जटिल अणु बनाने का अवसर दिया।

↳ आदिम पृथ्वी का अपचायक वातावरण जीवन की उत्पत्ति के लिए आवश्यक शर्त थी।

✏️ Example

मिलर-यूरे प्रयोग (Miller-Urey Experiment)

प्रयोगशाला में जीवन के निर्माण खंड।

1953 में स्टेनली मिलर और हैरोल्ड यूरे ने आदिम पृथ्वी के वातावरण को प्रयोगशाला में बनाकर दिखाया कि सरल अकार्बनिक अणुओं से कार्बनिक अणु बन सकते हैं। उन्होंने CH₄, NH₃, H₂O और H₂ के मिश्रण में विद्युत निर्वहन (बिजली की चिंगारी) दी, जो आदिम पृथ्वी पर बिजली का अनुकरण था।

↳ मिलर-यूरे प्रयोग ने दिखाया कि आदिम वातावरण में अमीनो अम्ल जैसे कार्बनिक अणु बन सकते हैं।

➗ Formula

रासायनिक विकास का सार

सरल से जटिल की ओर।

यह अभिक्रिया दर्शाती है कि सरल अकार्बनिक गैसें ऊर्जा पाकर कार्बनिक अणुओं में परिवर्तित हो जाती हैं। यही रासायनिक विकास का आधार है।

↳ ऊर्जा की उपस्थिति में अकार्बनिक अणु कार्बनिक अणुओं में बदल जाते हैं।

💡 Key Idea

कोएसर्वेट्स (Coacervates) और प्रोटोबायोन्ट्स

जीवन के अग्रदूत बूँदें।

ओपेरिन ने बताया कि जटिल कार्बनिक अणु (प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल) पानी में मिलकर कोएसर्वेट्स नामक गोल बूँदें बनाते हैं। ये बूँदें अपने चारों ओर एक झिल्ली जैसी परत बना लेती हैं और पर्यावरण से पदार्थ ग्रहण कर सकती हैं। इन्हीं को प्रोटोबायोन्ट्स (आद्य-जीव) कहा जाता है।

↳ कोएसर्वेट्स निर्जीव से सजीव की ओर संक्रमण का चरण हैं।

⚖️ Comparison

ओपेरिन-हाल्डेन सिद्धांत बनाम स्वतःजनन सिद्धांत

पुराना बनाम नया दृष्टिकोण।

↳ ओपेरिन-हाल्डेन सिद्धांत स्वतःजनन की तुलना में वैज्ञानिक रूप से सही है।

⚠️ Common Mistake

आदिम वातावरण में ऑक्सीजन की भ्रांति

ऑक्सीजन थी या नहीं?

कई विद्यार्थी मानते हैं कि आदिम पृथ्वी का वातावरण आज जैसा था, जिसमें ऑक्सीजन थी। यह गलत है। आदिम वातावरण में ऑक्सीजन नहीं थी; यह अपचायक था। ऑक्सीजन बाद में प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनी।

↳ आदिम वातावरण में ऑक्सीजन नहीं थी, यह अपचायक था।

🌍 Real World

अंतरिक्ष में कार्बनिक अणु

जीवन के निर्माण खंड ब्रह्मांड में।

वैज्ञानिकों ने उल्कापिंडों (जैसे मर्चिसन उल्कापिंड) में अमीनो अम्ल और अन्य कार्बनिक अणु खोजे हैं। यह दर्शाता है कि रासायनिक विकास के चरण पृथ्वी के अलावा अन्य स्थानों पर भी हो सकते हैं। यह इस सिद्धांत को बल देता है कि जीवन के निर्माण खंड ब्रह्मांड में सर्वव्यापी हो सकते हैं।

↳ उल्कापिंडों में कार्बनिक अणुओं की खोज जैवरासायनिक उत्पत्ति को समर्थन देती है।

🎯 Exam Tip

परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न

इन बिंदुओं पर ध्यान दें।

↳ इन अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से याद रखें, ये अक्सर परीक्षा में पूछी जाती हैं।

🧠 Memory Trick

याद रखने की तरकीब: गैसों का क्रम

CH₄, NH₃, H₂O, H₂ को याद रखें।

आदिम वातावरण की गैसों को याद रखने के लिए संक्षिप्त नाम 'C-N-O-H' (कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन) का प्रयोग करें, लेकिन ध्यान रखें कि ऑक्सीजन मुक्त रूप में नहीं, बल्कि जल (H₂O) में बंधी थी।

↳ C-N-O-H संक्षिप्त नाम से आदिम वातावरण की गैसें याद रखें।

❓ Did You Know

मिलर का मूल प्रयोग

एक सप्ताह में अमीनो अम्ल।

मिलर-यूरे प्रयोग में मात्र एक सप्ताह के भीतर कई प्रकार के अमीनो अम्ल बन गए थे। बाद में उन्होंने अपने उपकरण में संग्रहीत नमूनों का पुनः विश्लेषण किया और पाया कि 20 से अधिक विभिन्न अमीनो अम्ल बने थे।

↳ यह प्रयोग दर्शाता है कि जीवन के निर्माण खंड तेजी से बन सकते हैं।

🔗 Analogy

ईंटों से घर तक: जीवन की उत्पत्ति

जैसे ईंटों से घर, वैसे अणुओं से कोशिका।

जिस प्रकार एक घर बनाने के लिए ईंटें, सीमेंट और मजदूरों की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार जीवन बनाने के लिए अमीनो अम्ल (ईंटें), ऊर्जा (मजदूर) और जल (सीमेंट) आवश्यक हैं। पहले ईंटें बनती हैं, फिर उन्हें जोड़कर दीवारें (प्रोटीन), और अंत में घर (कोशिका) तैयार होता है।

↳ जीवन की उत्पत्ति एक क्रमिक निर्माण प्रक्रिया है, जैसे ईंटों से घर बनाना।

✅ Best Practice

अध्ययन के लिए सुझाव

इन बातों का ध्यान रखें।

↳ चरणों को क्रम से और प्रयोगों को चित्र सहित याद करें।

Smart notes

What you'll study, topic by topic

1

जीवन की जैवरासायनिक उत्पत्ति (Biochemical Origin of Life)

8 min

जीवन की जैवरासायनिक उत्पत्ति के अनुसार, आदिम पृथ्वी के अपचायक वातावरण में सरल अकार्बनिक अणुओं से ऊर्जा की उपस्थिति में कार्बनिक अणु बने, जिनसे बहुलक और फिर प्रथम कोशिका का विकास हुआ। ओपेरिन-हाल्डेन सिद्धांत और मिलर-यूरे…

  • जीवन की उत्पत्ति निर्जीव रासायनिक पदार्थों से रासायनिक विकास द्वारा हुई।
  • आदिम पृथ्वी का वातावरण अपचायक (reducing) था, जिसमें O₂ अनुपस्थित थी।
  • मुख्य गैसें: CH₄, NH₃, H₂O, H₂ थीं।

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Leveled MCQ practice

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All 18 questions, laddered from warm-up to topper-level, each with its answer and the reasoning behind it.

Warm-up · 5 questions

Q1. जीवन की जैवरासायनिक उत्पत्ति की आधुनिक अवधारणा के अनुसार, पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति सबसे पहले किस चरण में हुई?

Beginner
A जैव-रासायनिक विकास (Biochemical evolution)
B रासायनिक विकास (Chemical evolution)
C जैविक विकास (Biological evolution)
D भौगोलिक विकास (Geological evolution)
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B · रासायनिक विकास (Chemical evolution)

जीवन की उत्पत्ति से पहले सरल अकार्बनिक अणुओं से कार्बनिक अणुओं (जैसे अमीनो अम्ल) का निर्माण हुआ, जिसे रासायनिक विकास कहते हैं। यह जैविक विकास से पहले का चरण है।

Q2. ओपेरिन और हाल्डेन की परिकल्पना के अनुसार, आदिम पृथ्वी का वातावरण कैसा था?

Beginner
A निष्क्रिय (Inert)
B अम्लीय (Acidic)
C अपचायक (Reducing)
D ऑक्सीजन युक्त (Oxidizing)
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C · अपचायक (Reducing)

ओपेरिन-हाल्डेन परिकल्पना के अनुसार, आदिम पृथ्वी का वातावरण अपचायक (reducing) था, जिसमें मुक्त ऑक्सीजन नहीं थी, बल्कि मीथेन, अमोनिया, हाइड्रोजन और जल वाष्प जैसी गैसें थीं।

Q3. मिलर-यूरे प्रयोग में, आदिम वातावरण में ऊर्जा का स्रोत क्या था?

Beginner
A विद्युत निर्वहन (Electric discharge)
B उष्मीय ऊर्जा (Thermal energy)
C रेडियोधर्मी क्षय (Radioactive decay)
D पराबैंगनी विकिरण (UV radiation)
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A · विद्युत निर्वहन (Electric discharge)

मिलर-यूरे प्रयोग में, उन्होंने आदिम पृथ्वी पर बिजली के कड़कने (lightning) का अनुकरण करने के लिए विद्युत निर्वहन (electric discharge) का उपयोग ऊर्जा स्रोत के रूप में किया।

Q4. आदिम पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिए सबसे पहले किस प्रकार के अणुओं का निर्माण होना आवश्यक था?

Beginner
A जटिल प्रोटीन
B न्यूक्लिक अम्ल (DNA, RNA)
C कोएसरवेट्स
D सरल कार्बनिक अणु (जैसे अमीनो अम्ल)
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D · सरल कार्बनिक अणु (जैसे अमीनो अम्ल)

जीवन के निर्माण के लिए सबसे पहले सरल कार्बनिक अणुओं (जैसे अमीनो अम्ल, नाइट्रोजन क्षारक) का निर्माण होना आवश्यक था, जो बाद में मिलकर जटिल अणु (प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल) बनाते हैं।

Q5. ओपेरिन और हाल्डेन दोनों ने स्वतंत्र रूप से यह सुझाव दिया कि आदिम पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति निर्जीव कार्बनिक पदार्थों से हुई।

Beginner
A True
B False
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A · True

सोवियत वैज्ञानिक अलेक्जेंडर ओपेरिन (1923) और ब्रिटिश वैज्ञानिक जे.बी.एस. हाल्डेन (1929) ने स्वतंत्र रूप से यह परिकल्पना प्रस्तुत की कि आदिम पृथ्वी की अपचायक परिस्थितियों में निर्जीव पदार्थों से कार्बनिक अणु बने, जिससे जीवन की उत्पत्ति हुई।

Building up · 9 questions

Q6. स्टेनली मिलर और हेरोल्ड यूरे ने 1953 में अपने प्रयोग में आदिम पृथ्वी के वातावरण का अनुकरण करने के लिए किस गैस मिश्रण का उपयोग किया?

Intermediate
A CO₂, N₂, O₂ और H₂O
B H₂, N₂, CO₂ और H₂O
C CH₄, CO₂, NH₃ और O₂
D CH₄, NH₃, H₂ और H₂O
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D · CH₄, NH₃, H₂ और H₂O

मिलर-यूरे प्रयोग में उन्होंने आदिम वातावरण का अनुकरण करने के लिए मीथेन (CH₄), अमोनिया (NH₃), हाइड्रोजन (H₂) और जल वाष्प (H₂O) के मिश्रण का उपयोग किया, जो अपचायक वातावरण का प्रतिनिधित्व करता था।

Q7. मिलर-यूरे प्रयोग के परिणामस्वरूप, उन्हें किस प्रकार के कार्बनिक यौगिकों का निर्माण हुआ?

Intermediate
A केवल कार्बोहाइड्रेट
B प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल
C केवल लिपिड
D अमीनो अम्ल और अन्य सरल कार्बनिक अणु
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D · अमीनो अम्ल और अन्य सरल कार्बनिक अणु

मिलर-यूरे प्रयोग में, विद्युत निर्वहन के बाद, उन्होंने अमीनो अम्ल (जैसे ग्लाइसिन, ऐलेनिन) और अन्य सरल कार्बनिक अणुओं का निर्माण देखा, जो जीवन के निर्माण खंड हैं।

Q8. जीवन की उत्पत्ति के संदर्भ में, 'प्राइमोर्डियल सूप' (Primordial soup) शब्द का क्या अर्थ है?

Intermediate
A आदिम पृथ्वी पर ज्वालामुखी से निकला लावा
B आदिम महासागरों में निर्मित कार्बनिक अणुओं का घोल
C पहले जीवाणुओं का निवास स्थान
D वायुमंडल में उपस्थित जल वाष्प
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B · आदिम महासागरों में निर्मित कार्बनिक अणुओं का घोल

'प्राइमोर्डियल सूप' (आदिम शोरबा) वह सैद्धांतिक मिश्रण है जो आदिम महासागरों में सरल कार्बनिक अणुओं के संचय से बना था, जहाँ से जीवन का विकास हुआ।

Q9. मिलर-यूरे प्रयोग ने जीवन की उत्पत्ति के किस पहलू को प्रमाणित किया?

Intermediate
A प्रथम कोशिका का निर्माण
B अजैविक (abiotic) स्रोतों से कार्बनिक अणुओं का निर्माण
C जीवाणुओं की उत्पत्ति
D जैविक विकास की प्रक्रिया
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B · अजैविक (abiotic) स्रोतों से कार्बनिक अणुओं का निर्माण

मिलर-यूरे प्रयोग ने यह सिद्ध किया कि सरल अकार्बनिक अणु, भौतिक ऊर्जा स्रोतों की उपस्थिति में, जैविक प्रक्रियाओं के बिना (अजैविक रूप से) कार्बनिक अणुओं (जैसे अमीनो अम्ल) में परिवर्तित हो सकते हैं।

Q10. जीवन की उत्पत्ति के संदर्भ में, 'अभिकल्पना' (hypothesis) और 'सिद्धांत' (theory) में क्या अंतर है?

Intermediate
A अभिकल्पना केवल प्रयोगशाला में बनती है, सिद्धांत केवल प्रकृति में
B अभिकल्पना एक प्रस्तावित व्याख्या है, जबकि सिद्धांत व्यापक रूप से स्वीकृत और परीक्षित व्याख्या है
C अभिकल्पना और सिद्धांत एक ही हैं
D सिद्धांत एक प्रस्तावित व्याख्या है, जबकि अभिकल्पना व्यापक रूप से स्वीकृत है
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B · अभिकल्पना एक प्रस्तावित व्याख्या है, जबकि सिद्धांत व्यापक रूप से स्वीकृत और परीक्षित व्याख्या है

अभिकल्पना (hypothesis) एक अस्थायी, परीक्षण योग्य प्रस्ताव है। जब इसे बार-बार परीक्षण और साक्ष्यों द्वारा समर्थित किया जाता है और व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है, तो यह सिद्धांत (theory) बन जाती है।

Q11. जीवन की उत्पत्ति के जैवरासायनिक सिद्धांत के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा चरण सबसे पहले आता है?

Intermediate
A प्रथम जीवाणु का निर्माण
B जटिल कार्बनिक अणुओं (जैसे प्रोटीन) का निर्माण
C सरल कार्बनिक अणुओं का निर्माण
D कोएसरवेट्स का निर्माण
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C · सरल कार्बनिक अणुओं का निर्माण

जैवरासायनिक उत्पत्ति का क्रम है: पहले सरल कार्बनिक अणु (जैसे अमीनो अम्ल) बने, फिर वे संयोजित होकर जटिल अणु (जैसे प्रोटीन) बने, फिर कोएसरवेट्स बने और अंततः प्रथम जीवाणु का निर्माण हुआ।

Q12. ओपेरिन-हाल्डेन परिकल्पना के अनुसार, आदिम पृथ्वी पर कार्बनिक अणुओं के निर्माण के लिए ऊर्जा के प्रमुख स्रोत कौन से थे?

Intermediate
A केवल उल्कापिंडों की टक्कर से उत्पन्न ऊर्जा
B केवल सूर्य का प्रकाश
C विद्युत निर्वहन, पराबैंगनी विकिरण और ज्वालामुखीय ऊष्मा
D केवल रेडियोधर्मी खनिज
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C · विद्युत निर्वहन, पराबैंगनी विकिरण और ज्वालामुखीय ऊष्मा

आदिम पृथ्वी पर ऊर्जा के कई स्रोत थे, जिनमें विद्युत निर्वहन (बिजली), पराबैंगनी विकिरण (सूर्य से), और ज्वालामुखीय ऊष्मा प्रमुख थे। इन्होंने सरल अणुओं को कार्बनिक अणुओं में बदलने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान की।

Q13. जीवन की जैवरासायनिक उत्पत्ति के सिद्धांत को कभी-कभी 'अजैविक अभिकल्पना' (Abiogenic hypothesis) भी कहा जाता है। इसका क्या आशय है?

Intermediate
A जीवन की उत्पत्ति एक दैवीय घटना थी
B जीवन की उत्पत्ति केवल जीवों से हुई
C जीवन की उत्पत्ति निर्जीव पदार्थों से हुई
D जीवन की उत्पत्ति अन्य ग्रहों से हुई
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C · जीवन की उत्पत्ति निर्जीव पदार्थों से हुई

'अजैविक' (abiogenic) का अर्थ है 'जीवन के बिना' या 'निर्जीव से'। यह सिद्धांत कहता है कि जीवन की उत्पत्ति निर्जीव रासायनिक पदार्थों से, रासायनिक विकास की प्रक्रिया द्वारा हुई, न कि किसी पूर्व-मौजूद जीव से।

Q14. मिलर-यूरे प्रयोग ने साबित कर दिया कि आदिम पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई।

Intermediate
A True
B False
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B · False

मिलर-यूरे प्रयोग ने केवल यह सिद्ध किया कि अजैविक परिस्थितियों में सरल कार्बनिक अणु (जैसे अमीनो अम्ल) बन सकते हैं। इसने जीवन की उत्पत्ति के पहले चरण (रासायनिक विकास) को प्रमाणित किया, लेकिन यह नहीं दिखाया कि उन अणुओं से जीवन (कोशिका) कैसे बना।

Topper level · 4 questions

Q15. जीवन की जैवरासायनिक उत्पत्ति के सिद्धांत के अनुसार, सबसे पहले किस प्रकार की संरचनाओं का निर्माण हुआ जो कोशिका-जैसी थीं?

Advanced
A क्रोमोसोम
B कोएसरवेट्स (Coacervates)
C राइबोसोम
D माइटोकॉन्ड्रिया
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B · कोएसरवेट्स (Coacervates)

ओपेरिन के अनुसार, कार्बनिक अणुओं के एकत्रीकरण से कोएसरवेट्स (coacervates) नामक कोलॉइडल बूँदें बनीं, जो कोशिका-जैसी संरचनाएँ थीं और जीवन के अग्रदूत मानी जाती हैं।

Q16. आदिम पृथ्वी के वातावरण में मुक्त ऑक्सीजन (O₂) की अनुपस्थिति को जीवन की उत्पत्ति के लिए क्यों आवश्यक माना जाता है?

Advanced
A क्योंकि ऑक्सीजन कार्बनिक अणुओं का ऑक्सीकरण कर उन्हें नष्ट कर देती
B क्योंकि ऑक्सीजन विद्युत निर्वहन को अवशोषित कर लेती है
C क्योंकि ऑक्सीजन अमीनो अम्ल के निर्माण को रोकती है
D क्योंकि ऑक्सीजन जल वाष्प के साथ अभिक्रिया करती है
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A · क्योंकि ऑक्सीजन कार्बनिक अणुओं का ऑक्सीकरण कर उन्हें नष्ट कर देती

मुक्त ऑक्सीजन एक मजबूत ऑक्सीकारक है। यह नवनिर्मित सरल कार्बनिक अणुओं का ऑक्सीकरण कर उन्हें तोड़ सकती थी, जिससे जीवन के निर्माण खंडों का संचय संभव नहीं हो पाता। इसलिए, अपचायक वातावरण आवश्यक था।

Q17. मिलर-यूरे प्रयोग में प्रयुक्त उपकरण में 'जल का उबालना' (boiling water) किसका अनुकरण करता था?

Advanced
A जल में खनिजों का घुलना
B आदिम महासागरों से जल वाष्प का वायुमंडल में जाना
C जल का रासायनिक विघटन
D वायुमंडल में संघनन की प्रक्रिया
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B · आदिम महासागरों से जल वाष्प का वायुमंडल में जाना

प्रयोग में जल को उबालकर वाष्प बनाया गया, जो आदिम महासागरों से जल वाष्प के वायुमंडल में जाने का अनुकरण था। यह वाष्प फिर ठंडा होकर संघनित हुआ और वापस नीचे गिरा, जिससे एक चक्र बना।

Q18. मिलर-यूरे प्रयोग के बाद, कई वैज्ञानिकों ने इसी तरह के प्रयोग किए। उनमें से कुछ ने प्रयोग में पराबैंगनी (UV) विकिरण का उपयोग किया। इसका क्या महत्व था?

Advanced
A यह विद्युत निर्वहन से अधिक शक्तिशाली था
B यह आदिम पृथ्वी पर सूर्य से आने वाली ऊर्जा का एक यथार्थवादी स्रोत था
C यह केवल प्रयोगशाला में ही उपलब्ध था
D इससे केवल प्रोटीन का निर्माण होता था
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B · यह आदिम पृथ्वी पर सूर्य से आने वाली ऊर्जा का एक यथार्थवादी स्रोत था

आदिम पृथ्वी पर ओजोन परत नहीं थी, इसलिए सूर्य से पराबैंगनी विकिरण सीधे पृथ्वी की सतह तक पहुँचता था। इसलिए, UV विकिरण को ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग करना अधिक यथार्थवादी था, क्योंकि यह उस समय उपलब्ध एक प्रमुख ऊर्जा स्रोत था।

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