जीवन की उत्पत्ति: 18 MCQs with answers
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Warm-up · 5 questions
Q1. जीवन की जैवरासायनिक उत्पत्ति की आधुनिक अवधारणा के अनुसार, पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति सबसे पहले किस चरण में हुई?
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रासायनिक विकास (Chemical evolution)
जीवन की उत्पत्ति से पहले सरल अकार्बनिक अणुओं से कार्बनिक अणुओं (जैसे अमीनो अम्ल) का निर्माण हुआ, जिसे रासायनिक विकास कहते हैं। यह जैविक विकास से पहले का चरण है।
Q2. ओपेरिन और हाल्डेन की परिकल्पना के अनुसार, आदिम पृथ्वी का वातावरण कैसा था?
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अपचायक (Reducing)
ओपेरिन-हाल्डेन परिकल्पना के अनुसार, आदिम पृथ्वी का वातावरण अपचायक (reducing) था, जिसमें मुक्त ऑक्सीजन नहीं थी, बल्कि मीथेन, अमोनिया, हाइड्रोजन और जल वाष्प जैसी गैसें थीं।
Q3. मिलर-यूरे प्रयोग में, आदिम वातावरण में ऊर्जा का स्रोत क्या था?
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विद्युत निर्वहन (Electric discharge)
मिलर-यूरे प्रयोग में, उन्होंने आदिम पृथ्वी पर बिजली के कड़कने (lightning) का अनुकरण करने के लिए विद्युत निर्वहन (electric discharge) का उपयोग ऊर्जा स्रोत के रूप में किया।
Q4. आदिम पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिए सबसे पहले किस प्रकार के अणुओं का निर्माण होना आवश्यक था?
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सरल कार्बनिक अणु (जैसे अमीनो अम्ल)
जीवन के निर्माण के लिए सबसे पहले सरल कार्बनिक अणुओं (जैसे अमीनो अम्ल, नाइट्रोजन क्षारक) का निर्माण होना आवश्यक था, जो बाद में मिलकर जटिल अणु (प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल) बनाते हैं।
Q5. ओपेरिन और हाल्डेन दोनों ने स्वतंत्र रूप से यह सुझाव दिया कि आदिम पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति निर्जीव कार्बनिक पदार्थों से हुई।
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True
सोवियत वैज्ञानिक अलेक्जेंडर ओपेरिन (1923) और ब्रिटिश वैज्ञानिक जे.बी.एस. हाल्डेन (1929) ने स्वतंत्र रूप से यह परिकल्पना प्रस्तुत की कि आदिम पृथ्वी की अपचायक परिस्थितियों में निर्जीव पदार्थों से कार्बनिक अणु बने, जिससे जीवन की उत्पत्ति हुई।
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Q6. स्टेनली मिलर और हेरोल्ड यूरे ने 1953 में अपने प्रयोग में आदिम पृथ्वी के वातावरण का अनुकरण करने के लिए किस गैस मिश्रण का उपयोग किया?
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CH₄, NH₃, H₂ और H₂O
मिलर-यूरे प्रयोग में उन्होंने आदिम वातावरण का अनुकरण करने के लिए मीथेन (CH₄), अमोनिया (NH₃), हाइड्रोजन (H₂) और जल वाष्प (H₂O) के मिश्रण का उपयोग किया, जो अपचायक वातावरण का प्रतिनिधित्व करता था।
Q7. मिलर-यूरे प्रयोग के परिणामस्वरूप, उन्हें किस प्रकार के कार्बनिक यौगिकों का निर्माण हुआ?
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अमीनो अम्ल और अन्य सरल कार्बनिक अणु
मिलर-यूरे प्रयोग में, विद्युत निर्वहन के बाद, उन्होंने अमीनो अम्ल (जैसे ग्लाइसिन, ऐलेनिन) और अन्य सरल कार्बनिक अणुओं का निर्माण देखा, जो जीवन के निर्माण खंड हैं।
Q8. जीवन की उत्पत्ति के संदर्भ में, 'प्राइमोर्डियल सूप' (Primordial soup) शब्द का क्या अर्थ है?
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आदिम महासागरों में निर्मित कार्बनिक अणुओं का घोल
'प्राइमोर्डियल सूप' (आदिम शोरबा) वह सैद्धांतिक मिश्रण है जो आदिम महासागरों में सरल कार्बनिक अणुओं के संचय से बना था, जहाँ से जीवन का विकास हुआ।
Q9. मिलर-यूरे प्रयोग ने जीवन की उत्पत्ति के किस पहलू को प्रमाणित किया?
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अजैविक (abiotic) स्रोतों से कार्बनिक अणुओं का निर्माण
मिलर-यूरे प्रयोग ने यह सिद्ध किया कि सरल अकार्बनिक अणु, भौतिक ऊर्जा स्रोतों की उपस्थिति में, जैविक प्रक्रियाओं के बिना (अजैविक रूप से) कार्बनिक अणुओं (जैसे अमीनो अम्ल) में परिवर्तित हो सकते हैं।
Q10. जीवन की उत्पत्ति के संदर्भ में, 'अभिकल्पना' (hypothesis) और 'सिद्धांत' (theory) में क्या अंतर है?
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अभिकल्पना एक प्रस्तावित व्याख्या है, जबकि सिद्धांत व्यापक रूप से स्वीकृत और परीक्षित व्याख्या है
अभिकल्पना (hypothesis) एक अस्थायी, परीक्षण योग्य प्रस्ताव है। जब इसे बार-बार परीक्षण और साक्ष्यों द्वारा समर्थित किया जाता है और व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है, तो यह सिद्धांत (theory) बन जाती है।
Q11. जीवन की उत्पत्ति के जैवरासायनिक सिद्धांत के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा चरण सबसे पहले आता है?
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सरल कार्बनिक अणुओं का निर्माण
जैवरासायनिक उत्पत्ति का क्रम है: पहले सरल कार्बनिक अणु (जैसे अमीनो अम्ल) बने, फिर वे संयोजित होकर जटिल अणु (जैसे प्रोटीन) बने, फिर कोएसरवेट्स बने और अंततः प्रथम जीवाणु का निर्माण हुआ।
Q12. ओपेरिन-हाल्डेन परिकल्पना के अनुसार, आदिम पृथ्वी पर कार्बनिक अणुओं के निर्माण के लिए ऊर्जा के प्रमुख स्रोत कौन से थे?
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विद्युत निर्वहन, पराबैंगनी विकिरण और ज्वालामुखीय ऊष्मा
आदिम पृथ्वी पर ऊर्जा के कई स्रोत थे, जिनमें विद्युत निर्वहन (बिजली), पराबैंगनी विकिरण (सूर्य से), और ज्वालामुखीय ऊष्मा प्रमुख थे। इन्होंने सरल अणुओं को कार्बनिक अणुओं में बदलने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान की।
Q13. जीवन की जैवरासायनिक उत्पत्ति के सिद्धांत को कभी-कभी 'अजैविक अभिकल्पना' (Abiogenic hypothesis) भी कहा जाता है। इसका क्या आशय है?
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जीवन की उत्पत्ति निर्जीव पदार्थों से हुई
'अजैविक' (abiogenic) का अर्थ है 'जीवन के बिना' या 'निर्जीव से'। यह सिद्धांत कहता है कि जीवन की उत्पत्ति निर्जीव रासायनिक पदार्थों से, रासायनिक विकास की प्रक्रिया द्वारा हुई, न कि किसी पूर्व-मौजूद जीव से।
Q14. मिलर-यूरे प्रयोग ने साबित कर दिया कि आदिम पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति कैसे हुई।
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False
मिलर-यूरे प्रयोग ने केवल यह सिद्ध किया कि अजैविक परिस्थितियों में सरल कार्बनिक अणु (जैसे अमीनो अम्ल) बन सकते हैं। इसने जीवन की उत्पत्ति के पहले चरण (रासायनिक विकास) को प्रमाणित किया, लेकिन यह नहीं दिखाया कि उन अणुओं से जीवन (कोशिका) कैसे बना।
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Q15. जीवन की जैवरासायनिक उत्पत्ति के सिद्धांत के अनुसार, सबसे पहले किस प्रकार की संरचनाओं का निर्माण हुआ जो कोशिका-जैसी थीं?
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कोएसरवेट्स (Coacervates)
ओपेरिन के अनुसार, कार्बनिक अणुओं के एकत्रीकरण से कोएसरवेट्स (coacervates) नामक कोलॉइडल बूँदें बनीं, जो कोशिका-जैसी संरचनाएँ थीं और जीवन के अग्रदूत मानी जाती हैं।
Q16. आदिम पृथ्वी के वातावरण में मुक्त ऑक्सीजन (O₂) की अनुपस्थिति को जीवन की उत्पत्ति के लिए क्यों आवश्यक माना जाता है?
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क्योंकि ऑक्सीजन कार्बनिक अणुओं का ऑक्सीकरण कर उन्हें नष्ट कर देती
मुक्त ऑक्सीजन एक मजबूत ऑक्सीकारक है। यह नवनिर्मित सरल कार्बनिक अणुओं का ऑक्सीकरण कर उन्हें तोड़ सकती थी, जिससे जीवन के निर्माण खंडों का संचय संभव नहीं हो पाता। इसलिए, अपचायक वातावरण आवश्यक था।
Q17. मिलर-यूरे प्रयोग में प्रयुक्त उपकरण में 'जल का उबालना' (boiling water) किसका अनुकरण करता था?
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आदिम महासागरों से जल वाष्प का वायुमंडल में जाना
प्रयोग में जल को उबालकर वाष्प बनाया गया, जो आदिम महासागरों से जल वाष्प के वायुमंडल में जाने का अनुकरण था। यह वाष्प फिर ठंडा होकर संघनित हुआ और वापस नीचे गिरा, जिससे एक चक्र बना।
Q18. मिलर-यूरे प्रयोग के बाद, कई वैज्ञानिकों ने इसी तरह के प्रयोग किए। उनमें से कुछ ने प्रयोग में पराबैंगनी (UV) विकिरण का उपयोग किया। इसका क्या महत्व था?
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यह आदिम पृथ्वी पर सूर्य से आने वाली ऊर्जा का एक यथार्थवादी स्रोत था
आदिम पृथ्वी पर ओजोन परत नहीं थी, इसलिए सूर्य से पराबैंगनी विकिरण सीधे पृथ्वी की सतह तक पहुँचता था। इसलिए, UV विकिरण को ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग करना अधिक यथार्थवादी था, क्योंकि यह उस समय उपलब्ध एक प्रमुख ऊर्जा स्रोत था।
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