पाठ कहाँ से आया
यह भाषण है, लिखा हुआ लेख नहीं।
यह पाठ सुभाषचंद्र बोस के एक भाषण का अंश है। तारीख़ थी 29 दिसंबर, 1929, और जगह थी मेदिनीपुर का जिला युवक-सम्मेलन। सुनने वाले देश के नौजवान थे, और हर वाक्य उन्हीं के लिए चुना गया है।
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Veda Bites are swipeable micro-lessons — each one teaches exactly one idea. Here's a taste from this kit; the app has the full deck.
यह भाषण है, लिखा हुआ लेख नहीं।
यह पाठ सुभाषचंद्र बोस के एक भाषण का अंश है। तारीख़ थी 29 दिसंबर, 1929, और जगह थी मेदिनीपुर का जिला युवक-सम्मेलन। सुनने वाले देश के नौजवान थे, और हर वाक्य उन्हीं के लिए चुना गया है।
सुनने वाला पीछे लौटकर नहीं पढ़ सकता।
लेख पढ़ा जाता है और भाषण सुना जाता है। इसी कारण बोलने वाला अपनी बात दोहराता है, वाक्य छोटे रखता है, और सुनने वालों को बीच-बीच में सीधे पुकारता है। इस अंश में ये तीनों बातें मिलती हैं।
वक्ता अपने सपने को पहला नहीं बताते।
अंश की शुरुआत में कहा जाता है कि सपने अनेक लोगों ने देखे हैं। वक्ता अपने सपने को अकेला या सबसे बड़ा नहीं कहते। वे उसे एक लंबी कतार में रख देते हैं, और सुनने वाला उसी कतार में अपने को भी पा लेता है।
सर्वांगीण शब्द अब खुलता है।
पिछले भाग में समाज को सर्वांगीण कहा गया था। अब वक्ता उसी शब्द को खोलते हैं, और छह बातें गिनाते हैं। छहों उस समाज के किसी एक हिस्से की हैं, इसलिए इन्हें गिनकर याद रखना चाहिए।
हर दृष्टि से मुक्ति, किसी एक से नहीं।
पहली बात व्यक्ति की है — वह हर दृष्टि से मुक्त हो। हर दृष्टि कहने का अर्थ है सोचने की, बोलने की, काम चुनने की और अपने ढंग से जीने की मुक्ति। किसी एक तरह की मुक्ति से काम नहीं चलेगा।
दबाव से भीतर कुछ मर जाता है।
वक्ता कहते हैं कि समाज के दबाव से कोई व्यक्ति मरे नहीं। बात शरीर की नहीं है। अर्थ यह है कि समाज किसी के भीतर की बात इतनी न दबाए कि वह जीते-जी निर्जीव जैसा हो जाए।
यह पाठ सुभाषचंद्र बोस के एक भाषण का अंश है, जो उन्होंने मेदिनीपुर के जिला युवक-सम्मेलन में नौजवानों के सामने कहा था। वे देशबंधु चित्तरंजन दास के सपने को याद करते हैं, अपने को उसका उत्तराधिकारी कहते हैं, और बताते हैं कि व…
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वक्ता सर्वांगीण शब्द को खोलकर उस समाज की छह बातें गिनाते हैं — व्यक्ति हर दृष्टि से मुक्त हो, जाति से ऊँच-नीच न हो, स्त्री को अधिकार के साथ भागीदारी भी मिले, आमदनी का अंतर अन्याय न बने, अवसर सबको मिले, और काम का पूरा आदर…
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भाषण का अंतिम भाग उस राष्ट्र की बात करता है — पराए प्रभाव से मुक्त, अपने ही समाज का यंत्र, और दुनिया के सामने एक नमूना। वक्ता अपने सपने को सत्य कहते हैं, उसके लिए प्राण तक देने की बात रखते हैं, और अंत में वही सपना नौजवान…
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यह भाग भाषण देने वाले व्यक्ति को सामने रखता है — कटक में जन्म, नेताजी नाम, आजाद हिंद फौज का नेतृत्व, और द इंडियन स्ट्रगल जैसी पुस्तक। अंत में मांडले जेल से लिखा उनका एक पत्र आता है, जिसमें घरेलू उद्योगों की बहुत ठोस बात…
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140 questions laddered from warm-up to topper-level, each with an explanation. A taste:
यह पाठ किस रूप में हमारे सामने आया है?
Beginnerएक भाषण के अंश के रूप में
सुनने वाले सामने बैठे थे, और हर वाक्य उन्हीं के लिए चुना गया है।
पाठ के आरंभ में लिखा है कि यह अंश एक सम्मेलन में बोला गया था और सुनने वाले नौजवान थे। वह सम्मेलन कौन-सा था?
Beginnerमेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में
सुनने वाले देश के नौजवान थे।
एक विद्यार्थी कहता है कि यह पाठ एक लेख है, क्योंकि यह पुस्तक में छपा हुआ मिलता है। उसकी बात में कमी कहाँ है?
Intermediateयह मूल रूप में सभा में बोला गया था, छपना बाद की बात है
छपना रूप बदलता है, विधा नहीं।
बोलने वाला अपनी बात दोहराता है और वाक्य छोटे रखता है। इसका कारण क्या है?
Intermediateसुनने वाला पीछे लौटकर कोई पंक्ति फिर नहीं पढ़ सकता
यही भाषण की भाषा को लेख से अलग करता है।
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