परमाणु संरचना: quick revision, 19 bites

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परमाणु की मूल संरचना

परमाणु का केंद्रक और इलेक्ट्रॉन बादल।

परमाणु पदार्थ की सबसे छोटी इकाई है जो किसी तत्व के रासायनिक गुणों को बनाए रखती है। यह दो मुख्य भागों से बना होता है: **नाभिक (nucleus)** और **इलेक्ट्रॉन बादल (electron cloud)**। नाभिक केंद्र में स्थित होता है और इसमें **प्रोटॉन** (धनात्मक आवेश) तथा **न्यूट्रॉन** (उदासीन) होते हैं।

Takeaway. परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित होता है, जबकि इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर घूमते हैं।

उप-परमाण्विक कणों के आवेश और द्रव्यमान

कणों के मूल गुण याद रखें।

Takeaway. प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का द्रव्यमान लगभग बराबर है, जबकि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत कम है।

परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्या

तत्व की पहचान के दो मापदंड।

**परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z)** किसी तत्व के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या है। यह तत्व की पहचान निर्धारित करता है। **द्रव्यमान संख्या (Mass Number, A)** नाभिक में प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या है।

Takeaway. परमाणु क्रमांक (Z) तत्व को परिभाषित करता है, द्रव्यमान संख्या (A) नाभिक का कुल द्रव्यमान बताती है।

उदाहरण: कार्बन-12 परमाणु

कार्बन के नाभिक की संरचना।

कार्बन-12 (¹²C) परमाणु में परमाणु क्रमांक Z = 6 होता है, अर्थात इसमें 6 प्रोटॉन होते हैं। द्रव्यमान संख्या A = 12 है।

Takeaway. उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है।

समस्थानिक, समभारिक और समन्यूट्रॉनिक

एक ही तत्व, अलग द्रव्यमान।

**समस्थानिक (Isotopes)** एक ही तत्व के परमाणु होते हैं जिनका Z समान होता है लेकिन A भिन्न होता है। **समभारिक (Isobars)** अलग-अलग तत्वों के परमाणु होते हैं जिनका A समान होता है। **समन्यूट्रॉनिक (Isotones)** में न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है।

Takeaway. Z की समानता समस्थानिक बनाती है, A की समानता समभारिक बनाती है।

रदरफोर्ड मॉडल: सौरमंडल सादृश्य

नाभिक सूर्य है, इलेक्ट्रॉन ग्रह।

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल सौरमंडल से मिलता-जुलता है। जैसे सूर्य केंद्र में है और ग्रह उसके चारों ओर घूमते हैं, वैसे ही परमाणु का **नाभिक** केंद्र में है और **इलेक्ट्रॉन** उसके चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं।

Takeaway. रदरफोर्ड मॉडल ने नाभिक की खोज की, लेकिन इलेक्ट्रॉन की स्थिरता की व्याख्या नहीं कर सका।

रदरफोर्ड का स्वर्ण-पन्नी प्रयोग

अल्फा कणों से नाभिक की खोज।

Takeaway. इस प्रयोग ने सिद्ध किया कि परमाणु का धनात्मक आवेश और द्रव्यमान अत्यंत छोटे नाभिक में केंद्रित है।

रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ

यह मॉडल क्यों असफल रहा?

रदरफोर्ड मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमता है। लेकिन शास्त्रीय विद्युत चुंबकत्व के अनुसार, त्वरित आवेशित कण ऊर्जा विकीर्ण करता है।

Takeaway. रदरफोर्ड मॉडल परमाणु की स्थिरता की व्याख्या नहीं कर सका, जिससे बोहर मॉडल का विकास हुआ।

बोहर का परमाणु मॉडल

क्वांटमीकृत कक्षाओं का सिद्धांत।

नील्स बोहर ने 1913 में प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित **स्थिर कक्षाओं (stationary orbits)** में घूम सकते हैं जिनमें कोणीय संवेग क्वांटमीकृत होता है। इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकीर्ण नहीं करता।

Takeaway. बोहर मॉडल ने क्वांटमीकरण की अवधारणा प्रस्तुत की — इलेक्ट्रॉन केवल विशिष्ट ऊर्जा स्तरों पर ही रह सकते हैं।

बोहर की कक्षा त्रिज्या और ऊर्जा सूत्र

हाइड्रोजन परमाणु के लिए गणितीय व्यंजक।

Takeaway. ऊर्जा स्तर n² के व्युत्क्रमानुपाती होता है; n जितना बड़ा, ऊर्जा उतनी ही कम ऋणात्मक (अधिक) होती है।

ऊर्जा स्तर संक्रमण और वर्णक्रम रेखाएँ

इलेक्ट्रॉन कूदता है, फोटॉन निकलता है।

जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर (n₂) से निम्न ऊर्जा स्तर (n₁) पर संक्रमण करता है, तो ऊर्जा अंतर के बराबर का **फोटॉन** उत्सर्जित होता है।

Takeaway. प्रत्येक वर्णक्रम श्रेणी एक विशिष्ट अंतिम ऊर्जा स्तर से मेल खाती है।

बोहर मॉडल की सीमाएँ

बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं में विफल।

बोहर मॉडल केवल **हाइड्रोजन** जैसे एक-इलेक्ट्रॉन प्रणालियों (H, He⁺, Li²⁺) के लिए सटीक कार्य करता है।

Takeaway. बोहर मॉडल एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन पूर्ण परमाणु संरचना के लिए क्वांटम यांत्रिक मॉडल आवश्यक है।

क्वांटम यांत्रिक मॉडल: तरंग-कण द्वैत

इलेक्ट्रॉन तरंग भी है, कण भी।

डी-ब्रॉगली ने प्रस्तावित किया कि गतिशील कणों से जुड़ी एक **तरंगदैर्ध्य** होती है। इलेक्ट्रॉन जैसे सूक्ष्म कण तरंग-कण द्वैत प्रदर्शित करते हैं।

Takeaway. इलेक्ट्रॉन की गति का सटीक वर्णन तरंग समीकरण द्वारा होता है, शास्त्रीय कक्षाओं से नहीं।

हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत

स्थिति और संवेग एक साथ नहीं।

हाइजेनबर्ग के अनुसार, किसी कण की स्थिति और संवेग को एक साथ पूर्ण शुद्धता से मापना असंभव है। स्थिति में अनिश्चितता (Δx) और संवेग में अनिश्चितता (Δp) का गुणनफल एक निश्चित सीमा से कम नहीं हो सकता।

Takeaway. इलेक्ट्रॉन के लिए सटीक कक्षा की अवधारणा अमान्य है — हम केवल प्रायिकता क्षेत्र की बात कर सकते हैं।

क्वांटम संख्याएँ: इलेक्ट्रॉन का पता

चार संख्याएँ, पूर्ण पहचान।

क्वांटम यांत्रिक मॉडल में प्रत्येक इलेक्ट्रॉन को चार **क्वांटम संख्याओं** द्वारा वर्णित किया जाता है। ये इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा, आकार, दिशा और स्पिन बताती हैं।

Takeaway. चार क्वांटम संख्याएँ मिलकर किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन की अद्वितीय अवस्था निर्धारित करती हैं।

क्वांटम संख्याओं का संबंध

n, l, mₗ के बीच संबंध।

Takeaway. किसी कोश में कक्षकों की कुल संख्या n² होती है।

पाउली का अपवर्जन सिद्धांत

दो इलेक्ट्रॉन समान नहीं हो सकते।

पाउली के **अपवर्जन सिद्धांत** के अनुसार, किसी परमाणु में दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ समान नहीं हो सकतीं। इसका अर्थ है कि एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं, और वे भी विपरीत स्पिन वाले।

Takeaway. प्रत्येक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन, विपरीत स्पिन के साथ।

हुंड का अधिकतम बहुलता नियम

पहले अयुग्मित, फिर युग्मित।

हुंड के नियम के अनुसार, किसी उपकोश के कक्षकों में इलेक्ट्रॉन भरते समय पहले प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन जाता है (सभी समान स्पिन के साथ), और उसके बाद ही युग्मन शुरू होता है।

Takeaway. यह नियम इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षण को न्यूनतम करता है।

आफबाऊ सिद्धांत: कक्षक भरने का क्रम

पहले निम्न ऊर्जा, फिर उच्च।

**आफबाऊ सिद्धांत** कहता है कि इलेक्ट्रॉन पहले निम्न ऊर्जा वाले कक्षकों में भरते हैं, फिर उच्च ऊर्जा वाले में। भरने का क्रम (n + l) नियम द्वारा निर्धारित होता है।

Takeaway. 4s (n+l=4) पहले भरता है 3d (n+l=5) से पहले, भले ही 3d का n कम है।

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