उपसहसंयोजक संकुल: संकरण, चुंबकीय गुण एवं स्थायित्व: quick revision, 15 bites
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संकुल के गुण तय करने वाले तीन स्तंभ
संकुल का पूरा व्यवहार इन तीनों से तय होता है।
किसी भी उपसहसंयोजक संकुल के संकरण, चुंबकीय गुण और स्थायित्व को समझने के लिए तीन बातें अनिवार्य हैं:
Takeaway. इन तीनों को पहचानते ही संकुल का संकरण, अयुग्मित इलेक्ट्रॉन और चुंबकीय व्यवहार स्वतः निकल आता है।
\(d^2sp^3\) संकरण क्या है?
अष्टफलकीय संकुलों की पहचान।
यह संकरण **प्रबल क्षेत्र लिगन्ड** वाले अष्टफलकीय संकुलों में दिखता है, जहाँ इलेक्ट्रॉन युग्मित होकर आंतरिक \(d\)-कक्षक खाली कर देते हैं।
Takeaway. \(d^2sp^3\) = अष्टफलकीय + आंतरिक \(d\)-कक्षक + प्रबल लिगन्ड।
कौन-सा संकुल \(d^2sp^3\) दर्शाता है?
चार विकल्प, एक सही संकरण।
अतः सही उत्तर **\([\text{Co(NH}_3)_6]^{3+}\)** है।
Takeaway. \(d^2sp^3\) केवल आंतरिक \(d\)-कक्षक वाले अष्टफलकीय संकुल में मिलता है, जैसे \([\text{Co(NH}_3)_6]^{3+}\)।
केवल-प्रचक्रण चुंबकीय आघूर्ण
एक सूत्र, पूरा चुंबकीय व्यवहार।
Takeaway. n ज्ञात हो तो चुंबकीय आघूर्ण तुरंत निकाला जा सकता है — और उलटा भी।
प्रबल बनाम दुर्बल क्षेत्र लिगन्ड
लिगन्ड बदला, गुण बदले।
Takeaway. लिगन्ड की प्रबलता ही तय करती है कि संकुल low-spin होगा या high-spin।
Fe³⁺ के दो संकुल, दो भिन्न चुंबकीय आघूर्ण
एक ही धातु, अलग-अलग परिणाम।
दोनों में Fe की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है, पर लिगन्ड की प्रबलता से इलेक्ट्रॉन विन्यास बदल जाता है।
Takeaway. ऑक्सीकरण अवस्था समान होने पर भी लिगन्ड बदलने से चुंबकीय आघूर्ण बदल जाता है।
ऑक्सीकरण अवस्था = चुंबकीय गुण नहीं
यह गलती अक्सर होती है।
Takeaway. चुंबकीय आघूर्ण लिगन्ड-निर्भर है, केवल ऑक्सीकरण अवस्था-निर्भर नहीं।
संकुल का विश्लेषण करने के चरण
हर संकुल इसी क्रम से हल करें।
Takeaway. यह क्रम अपनाने से संकरण, चुंबकीय गुण और स्थायित्व — तीनों एक साथ मिल जाते हैं।
Ni(CO)₄ बनाम NiCl₄²⁻
एक प्रतिचुंबकीय, एक अनुचुंबकीय।
Takeaway. Ni(CO)₄ प्रतिचुंबकीय है जबकि [NiCl₄]²⁻ अनुचुंबकीय — यही सही विकल्प है।
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का क्रम
पाँच संकुल, एक क्रम।
अतः सही क्रम: **E < A < D < C < B**।
Takeaway. प्रबल लिगन्ड (CN⁻) low-spin देते हैं, दुर्बल लिगन्ड (F⁻) high-spin।
अष्टफलकीय प्रतिचुंबकीय low-spin संकुल
केवल एक विकल्प सही है।
Takeaway. अष्टफलकीय + प्रतिचुंबकीय + low-spin = \([\text{Co(NH}_3)_6]^{3+}\)।
प्रबल लिगन्ड की याद रखने की ट्रिक
एक वाक्य में सारे प्रबल लिगन्ड।
**"CN⁻ और CO सबसे प्रबल, NO₂⁻ और en उनके बाद"** — प्रबल क्षेत्र लिगन्ड low-spin और प्रतिचुंबकीय संकुल बनाते हैं।
Takeaway. प्रबल लिगन्ड = युग्मन = प्रतिचुंबकीयता।
JEE में पूछे जाने वाले पैटर्न
इन पैटर्न को पहचानें।
Takeaway. पहले ऑक्सीकरण अवस्था → \(d\)-इलेक्ट्रॉन → लिगन्ड प्रबलता → विन्यास → μ; यही क्रम हर प्रश्न में काम आता है।
सूची-मिलान में जल्दबाजी
विन्यास गलत गिना तो उत्तर गलत।
Takeaway. सूची-मिलान में एक भी गलत विन्यास पूरा उत्तर बदल देता है।
स्थायित्व और लिगन्ड की भूमिका
प्रबल लिगन्ड = अधिक स्थायी संकुल।
प्रबल क्षेत्र लिगन्ड (जैसे CN⁻) बड़ा crystal field splitting देते हैं, जिससे low-spin वाले संकुल अधिक स्थायी और प्रतिचुंबकीय होते हैं — जैसे \(K_3[\text{Co(CN)}_6]\)।
Takeaway. प्रबल लिगन्ड वाले अष्टफलकीय low-spin संकुल सर्वाधिक स्थायी होते हैं।
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